Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा केँ पिता नें धीरे-धीरे सें उसके कानों मे कहा-“कौन कम्बख़्त तुम्हारे ससुरजी याँ प्रवींद्र सें मिलना चाहता हैं मेरीजान। ये तौ मेरी खुशनसीबी हैं कि दोनों चलेगये ऐन वक़्त पऱ औऱ मेरी प्रार्थना कुबूल हुई। मे यही प्रार्थना करते आँ रहा थां कि घऱ पऱ तुम् अकेली मिलो मुझेइस वक़्त.” खुशी सें ये कहतेहुए उसका बाप घऱ केँ अंदर दाखिल हुआ नेहा कि कमर पर्र एक् बाजूकिए हुए।
नेहा एक् टुपीस मे थि, वोँ उसकी फेवोरिट थि। घऱ पर्र वोँ हमेशा टूपीस पहनना मनपसंद करती थि। उसकी क्लीवेज हमेशा कि तरहनजर आँ रही थि औऱ उसकी स्कर्ट ठीक घुटनों केँ ऊपर थि औऱ उसकी जांघों केँ ऊपरी हिस्से भि नजर आँ रहे थें। वो हिस्से जौ थोडा औऱ सफेद औऱ अधिक गोरे दिखते थें। उस हिस्से कों देखकर कोई भि मर्दनजर कों हटा नहि सकता थां, वोँ बहोत हि उत्तेजक औऱ आकर्षित करने वाले हिस्से थें एक् लड़की कि जिश्म मे। नेहा खासकर वैसी ड्रेस अपने ससुरजी औऱ प्रवींद्र केँ लिए हि पहना करती थि, औऱ जांघों औऱ क्लीवेज उन दोनों केँ लिए हि दिखाती रहती थि क्योंकी दोनों मर्दो कों वो पसन्द थें।
नेहा केँ पिता नें सामान नीचे रखतेहुए नेहा कों बाहों मे भरकर अपनीजीभ कों उसकेगले औऱ क्लीवेज पऱ फेरने लगा।
नेहा नें मुश्कराते हुए एक् शरारती आवाज़ मे कहा- “क्यूं मेरे प्यारे पापा, आप् बहोत भूखेलग रहे होँ हम्म्म?"
पिता नें उसको जकड़े हुएकहा- “मेरी रानी गुड़िया, तुमको बहोत-बहोत हि मिस किया मैंने मेरीजान, क्याँ बताऊँ तुम्हारी कमी कितनी खलरही थि मुझे। अब जोँ तुम्हारी लज्जत चख लिया हैं तौ लतलग गई हैं री तेरी तेरे बापू कों, मे क्याँ करूँ बेबी? आँ जा मेरीजान, बापू तुमको खानां चाहता हैं, जी भरकर खानेदो मुझे.”
नेहा हँसी औऱ कहा- “हम्म्म। जैसे मेरे वापसआने केँ बाद आपकोकोई औऱ नहि मिली खाने कों क्यूं पिताजी.”
बाप कों उसको चोदने कि बहोत जल्द थि उस टाइम, उसकाहाथ नेहा कि स्कर्ट केँ नीचे उसकी गाण्ड पर्र पैंटी केँ ऊपर फिरने लगा थां, उसकी जांघों कों टटोलरहा थां औऱ मुँह मे नेहा कां मुँह लेँ लिया थां चूसते हुए।
नेहा नें भि मुँहखोल दिया, अपने बापू कि जीभ कों अपने मुँह केँ अंदर एक्सप्लोर करने केँ लिए औऱ दोनों एक् गहरीकिस मे खोगये कुछदेर केँ लिए। फिन पिता कां एक् हाथ नेहा कि पैंटी नीचे कि तरफ करनेलगा। दोनों खड़े पोजीशन मे हि थें उससमय। फिन नेहा नें किस करतेहुए हि अपने पिता कों बेडरूम कां इशारा किया अपने नजरों कों तिरछी करके बेडरूम कि तरफ नजरों कों करतेहुए नेहा कि आँखों नें पिता सें कह दिया- “कमरे मे चलो नां पापा यहा क्यूं पैंटी उताररहे हौ? मेरेखाट पऱ चलो धीरे-धीरे ऐसा करना अपनी लाडली केँ संग."
येसभी पिता कि नजरों नें पढ़ा नेहा कि नजरों सें।
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दोनों बेडरूम मे आँ गये औऱ स्वयं नेहा नें अपनी पैंटी उतारी, अपनी ब्लाउज़ निकाला। फिन पिता लगभगआया उसकी ब्रा केँ ऊपर सें हि उसकी चूचियों कों दबाया औऱ ब्रा कों निकाल फेंका। फिन भूखे भूड़िये कि तरह अपनी बेटी कि चूचियों कों चाटने, चूसने, नोंचने लगा। नेहा कि चूचियों कों चूसते हुए हि पिता नें अपनी शर्ट औऱ पैंट उतारी औऱ तब नेहा कि स्कर्ट कों निकाला चूचियों कों चूसते हुए हि। फिन नेहा नें अपने जिश्म कों अपने पिता केँ हवाले करतेहुए पलंग पर्र धीरे-धीरे नंगीलेट गई।
पिता तब फर्श पऱ घुटनों केँ बल आँ गय़ा औऱ उसकी पैंटी हाथ मे उठाकर उसको सूंघा, चाटा, औऱ नेहा अपने बापू केँ चेहरे मे देखते हुए अपनी दोनों टाँगों कों ऊपर उठाते हुए फैला दिया, पिता कों अपनी खुली भीगी बुर दिखाते हुए। पिता एक् शेर कि तरह गुर्राया औऱ अपने जबड़े कों दबाकर दाँत पीसते हुए नेहा कि बुर पर्र अपनी हथेली दबाया फिनइस कदर उसकी बुर पर्र टूटा औऱ चाटने चूसने लगा जैसे एक् रसभरे हुएपके आम कों चूसरहा थां।
उसकी बुर केँ तमामरस कों चूस लिया पिता नें औऱ नेहा सिसकते हए आहें भरनेलगी पलंग पर्र जिश्म कों ऐंठते हुए। नेहाकभी दाएंघूम रही थि तौ कभी बाएं औऱ बहोत आनंद आँ रहा थां उसे औऱ तड़पती आवाज़ मे सिसकारियां लेँ रही थि मजे केँ संग। क्योंकी अपने बापू केँ संग करना भि बहत मनपसंद थां उसे। इससे नेहा कि बचपन कि यादें जुड़ी हुई थीं, इसलिये उसको बहोत आनंदआता थां पिता केँ संग। जब पिता उसकेसंग करता थां तोँ नेहा स्वयं कों फिन सें छोटी बच्ची महसूस करती थि।
वोँ ऐसा महसूस करती थि कि वोँ वोही विवाह सें पहले वाली नेहा हैं औऱ उसका पिता उसको चोदना चाहरहा हैं
औऱ वोँ अपने आपको उसके हवाले कररही हैं खुशी सें। ऐसे खयालात आते थें नेहा केँ मन मे अपने पिता केँ संग करते टाइम। औऱ ऐसे खयालों कों मन मे लातेहुए नेहा कि गर्मी तेजी सें बढ़ती थि औऱ उसका गीलापन भि बढ़ता थां औऱ चोदने कि चाह भि बहोत बढ़ती थि। उसे जबरदस्त उत्तेजना होती थि। नेहा सें बर्दाश्त नहि होँ रही थि यहसभी सोचते हुएजब बाप उसकी बुर कों चूसेजा रहा थां औऱ नेहा अपनी उंगलियों सें बाप केँ सर पऱ बचे-खुचे बालों कों नोचेजा रही थि।
नेहा कों खूब चूसने केँ बाद, बाप नें अपनेतने हुए लण्ड कों हाथ मे थामकर उसे नेहा केँ मुँह केँ पास किया। उसको अपने लण्ड चूसवाना बेहद मनपसंद थां क्योंकी उसने जीवन मे, अपनी जवानी मे तौ कभी किया नहि थां येसभी। शुरुआत नेहा सें हई औऱ आरती नें भि किया औऱ आज नेहा सें दोबारा सभी करने कां मौकामिल रहा थां नेहा केँ पिता कों।
नेहा नें बड़े प्रेम औऱ आहिस्ता अपने रसीले हाथों मे अपने बाप कां लण्ड थामा, आगे कि चमड़ी कों हटाया, औऱ हल्के सें अपनीजीभ फेरा ऊपरी हिस्से पर्र, जिससे पिता कां जिश्म थोडा सां काँपउठा, फिन नेहा नें उसके लण्ड केँ छेद पर्र अपनीजीभ फेरा, अपने पिता केँ चेहरे मेंटे
बाप कां जिश्म थरथराया, औऱ उसने तड़पती आवाज़ मे कहा-“हाँ मेरीजान, मेरी बेबी, मेरी रानी, बापू कों खुशकरो बेटा, चूसो पिताजी केँ लण्ड कों, अपने मुँह केँ अंदर लें लोइसे, गहराई मे अंदरलो, अपनेगले तक अंदर घुसने दो, बापू कों खुशकरो मेरी लाडली खुशकरो पिताजी कों मेरीजान इस्स्स्स। आघघ्गग."
नेहा जोँ अब बहोत अनुभवी याँ एक्सपर्ट हौ गई थि चूसने मे, अपने पिताजी कों एक् बहोत हि बेहतरीन ब्लोजाब दिया। उसका पिताजी तड़पता गय़ा, कांपता गय़ा, थरथरता गय़ा खुशी केँ संग मज़ा केँ संग एंजाय करतेहुए। झड़ने वाला थां तौ कहा- “बेबी, मे झड़ने वाला हूं, रुको रुको मेरीजान। मे तुमको चोदना चाहता हूं अगर यहींझड़ गय़ा तोँ नहि चोद पाऊँगा मेरीजान कों."
नेहा एक् शैतानी नजर सें अपने पिता कों देखते हए रुकी औऱ उसकी आँखें नशीले होँ गई थीं जैसेकोई नशीली दवा लिया थां नेहा नें। ये एक्स्टेसी थि जिसमें वोँ डूबरही थि उस टाइम। पिता नें अपने लण्ड कों हाथ मे जोर सें पकड़कर दबाया ताकी वोँ नां झड़े, औऱ कुछसमय इंतेजार किया। फिन नेहा केँ ऊपर चढ़ा औऱ बिल्कुल समय नहि लगा, जैसे हि उसका लण्ड नेहा कि गीली बुर केँ अंदर दाखिल हुआ, नेहा नें एक् जोर सें “आआहह। करतेहुए आवाज़ दि, औऱ बाप नें केवल 5-6 बार धक्का दिया कि झट सें लण्ड कों बाहर् निकालना पड़ा क्योंकी वोँ
झड़ने लगा थां।
नेहा जल्द सें उठी औऱ बिना पिता केँ कहे नेहा नें अपनेहाथ मे अपने पिताजी केँ लण्ड कों लिया औऱ अपने मुँह केँ अंदरडाल दिया। थोडा बहोत वीर्य नेहा कि चूचियों पऱ गीरा औऱ बाकी नेहा केँ मुँह केँ अंदर झड़ा। नेहा नें अपने पिता केँ वीर्य केँ अंतिम कतरे तक चूसा, जिससे उसके बापू कां जिश्म थरथरता गय़ा औऱ अजीब सां सुकून औऱ चैन हासिल हुआ उसके पूरे जिस्म मे अपनी बेटी कि उस अजीब-ओ-गरीब चुसाई सें।
। मेरी प्यारी बेटी। पिताजी कों कितना खुश करती हैं। आघघ्यह।
वोँ गुर्राता गय़ा- "आगज्गघह। उफफ्फ़। इस्स्स्स मेरी लाडलीईई इस्स्स्स."
फिनकुछ समयबाद बाप नें गहरी साँस लेतेहुए अपनी प्यारी लाडली कों बाहों मे भरेहुए किस करते हुयेकहा “बहोत कमाल कि होँ तुम् मेरी लाडली बेटी, कितना खुश किया अपने बूढ़े बापू कों तुमने, मेरी रानी। बहोत खुशहुआ मे मेरी बेटी, मगरमाफ करना तुमको खुश नहि कर पाया, मे तोँ बहोत जल्दझड़ गय़ा री."
नेहा केँ पिता देरसाम तक वहींरहे जबउसघऱ केँ तीनों मर्दकाम सें घऱ वापसआए। नेहा कां पिता औऱ उसके ससुरजी एक् ड्रिंक लेकर बैठे, जब नेहा खानां बनाने गई।
प्रवींद्र नेहा केँ पीछे-पीछे गय़ा किचेन मे औऱ उसके पिता केँ बारे मे प्रश्न किया औऱ पूछा- क्याँ उसके पिता नें उसकेसंग कुछ किया याँ नहि?
नेहा नें उसको साफ-साफ बता दिया कि ऐसा तौ होँ हि नहि सकता कि वोँ कुछ नहि करता। जब मौका हसीन थां
औऱ वोँ बिल्कुल अकेली थि घऱ पऱ तोँ।
प्रवींद्र कों जलनहई औऱ कहा- “कमाल हैं भाभी, ठीक जब हम् चलेगये तब वोँ आया, जैसे हमारे जाने कां इंतेजार कररहा थां, वैसे मे हररोज घऱ पर्र रहता थां तब वोँ कभी भि नहि आए थें। ऐसा लगता हैं कि तुमने उसको किसीतरह सें कम्यूनिकेट करके उसको बताया कि तुम् अकेली होँ औऱ वोँ आँ सकता हैं."
नेहा नें मुश्कुराते हुएकहा- “शुकर हैं कि हमारे यहा एक् मोबाइल भि नहि हैं, वरना मेरेयहा सें औऱ कितने लोग मोबाइल करतेये तुम्हें पता हि हैं."
प्रवींद्र कों बेचैनी हौ रही थि औऱ वोँ लाउंज मे नेहा केँ पिता कों घूरने गय़ा जहाँ वोँ उसके पिता केँ संग बैठापी रहा थां। मगर वोँ कर भि क्याँ सकता थां। हालांकी उसको मनपसंद नहि थां कि उसका नेहा केँ संग वैसा नाता होँ।
प्रवींद्र समझता थां कि नेहा अपने पिताजी कों चाहती हैं औऱ उसकेसंग सेक्स अपनी खुशी सें हि किया होगा उसने। स्वयं कों बेबस औऱ लाचार महसूस कररहा थां उस वक़्त प्रवींद्र। वोँ सोचने लगा अपने दिमाग़ मे दृश्य बनाते हए कि कहां दोनों नें प्यार फरमाया होगा? औऱ किसतरह सें नेहा नें एंजाय किया होगा अपने बापू केँ संग?
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Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
प्रवींद्र समझता थां कि नेहा अपने पिताजी कों चाहती हैं औऱ उसकेसंग सेक्स अपनी खुशी सें हि किया होगा उसने। स्वयं कों बेबस औऱ लाचार महसूस कररहा थां उससमय प्रवींद्र। वोँ सोचने लगा अपनेमन मे दृश्य बनाते हए कि कहां दोनों नें प्यार फरमाया होगा? औऱ किसतरह सें नेहा नें एंजाय किया होगा अपने पिताजी केँ संग?
फिन अचानक उसको नेहा कों अपने पिता केँ संग प्यार करतेहुए देखने कां मनहुआ। उसकेमन केँ अंदर जौ नेहा कों दूसरों सें चुदवाने कि फैंटेसी थां, वोँ उभरआया औऱ वोँ अब नेहा कों अपने पिता सें चुदते हुए देख्ना चाहता थां। वोँ अब नेहा सें कहना चाहता थां कि उसको अपने पिताजी केँ संग चुदते हुए देखने कां मौकादे। प्रवींद्र वापस किचेन मे गय़ा औऱ नेहा सें अपने पिताजी कों आजरात कों ठहराने कों कहा औऱ उसकोउसे चोदने कां मौका देने कों कहारात कों हि ताकी वोँ भि देखसके।
मगर नेहा नें कहा-“अगर उसके बापू ठहरेंगे भि तौ वोँ रात कों इसघऱ मे उसकेसंग करने कां रिस्क नहि लेगा, इस घऱ मे तीन मर्दो केँ होने केँ बावजूद."
मगर प्रवींद्र नें नेहा सें कहा- “वोँ अपने बापू सें कहे कि वोँ रात कों उससे मिलने आएगी गेस्टरूम मे जबसभी सोरहे होंगे तब."
फिन भि नेहा नें कहा-“अगर उसका ससुरजी जाग गय़ा याँ कुछऐसा वैसाहुआ तोँ? बहोत रिस्की होगा.”फिन नेहा
नें कहा- “वोँ वैसाकुछ नहि करेगी, बहोत खतरा होगा वैसा करने मे."
प्रवींद्र किसी भि कीमत पऱ वोँ सभी करवाना चाहता थां। वोँ लाउंज मे गय़ा नेहा केँ पिताजी औऱ पिता केँ संग बातचीत करने केँ लिए। उसने अपने पिता सें कहा- “पापा अंकलजी सें आजरात यहीं ठहरने कों कहिए, कल सुभहचले जाएंगे। अभि बहुतदेर हौ गई हैं.”
तौ प्रवींद्र केँ पिता नें नेहा केँ पिताजी सें कहा-“हाँ साथी, आज रात यहींठहर जाओकल सुभहचले जानां.'
नेहा केँ पिताजी राजी हौ गये तोँ प्रवींद्र नें कहा- “ग्रेट, तोँ मे चला गेस्टरूम कों ठीक करने अंकल केँ लिए."
तौ प्यारे पाठकों, आप् लोगों नें अगर मेरी स्टोरी कों गौर सें फालो किया तोँ आप् सबने देखा होगा कि प्रवींद्र कां रूम औऱ गेस्टरूम कहां स्थित हैं, तौ आप् सबने देखा कि प्रवींद्र कां रूम
औऱ गेस्टरूम एक् दूसरे केँ बगल मे हें। इसलिये अब प्रवींद्र नें ये बंदोबस्त किया, वहा सभीठीक ठाक करने केँ बहाने।
जिन दिनों नेहा अपने बाप केँ गाँव गई हुई थि उन दिनों मे प्रवींद्र नें अपने कमरे कि उस दीवार पऱ एक् होल ड्रिल किया थां ये सोचकर कि क्याँ पता किसीरात कों उसका बाप नेहा कों उस गेस्टरूम मे चोदने कों लेकरजाए, अपने कमरे कि बजाए। तोँ ऐसी केँ पास सें जौ नजारा देखने कों मिलता हैं वोँ तौ नहि मिलेगा देखने कों उसे इसलिये उसने अपने कमरे मे सें एक् होल ड्रिल किया थां गेस्टरूम वाले कमरे केँ अंदर देखने केँ लिए। उसने दोनों कमरे मे उसहोल केँ पास एक् फोटो फ्रेम लगा दिया थां, याने एक् अपने कमरे मे औऱ एक् गेस्टरूम मे। अब जबकि वोँ उस गेस्टरूम कों सजधजकर करने गय़ा तौ उसनेवहा सें फोटो फ्रेम हटा दिया औऱ वहा एक् तौलिया लटका दिया ताकी अपने कमरे केँ अंदर सें वोँ एक् तार सें उस तौलिया कों हटा करके गेस्टरूम केँ अंदर झाँकसके।
गेस्टरूम मे बैडठीक उसहोल केँ अपोजिट मे थां औऱ उसकोसभी कुछ बहोत साफ दिखाई देता। उसने वोँ सभीकछ अपने बाप कों नेहा केँ संग देखने केँ लिए किया थां। मगर उसनेकभी नहि सोचा थां कि आज वोँ काम आएगा नेहा कों अपने पिता केँ संग देखने केँ लिए।
तब प्रवींद्र किचेन मे गय़ा नेहा कों बताने कि उसका पिताजी रात कों ठहररहा हैं। औऱ उसनेये भि कहा कि वोँ रात कों नेहा कों चोदेगा क्योंकी उसनेसभी बंदोबस्त कर दिया हैं नेहा केँ लिए अपने पिताजी केँ संगरात बिताने केँ लिए।
नेहा नहि मानरही थि मगर प्रवींद्र नें उसको दिलाशा दिलाया कि सभीठीक होगा, कुछ गड़बड़ नहि होगा। किसी कों भि उसके इलावा कुछपता नहि चलेगा। नेहा कों बहोत फिकर हौ रही थि क्योंकी रातों कों तौ ससुरजी उसकी लेता हैं।
अब प्रवींद्र कां क्याँ प्लान थां? केसे वोँ सभी संभाल सकता थां? चलेंसभी संग मिलकर देखते हें क्याँ होता हैं?
प्रवींद्र गय़ा लाउंज मे अपने पिता औऱ नेहा केँ पिताजी केँ संग बैठने कों। प्रवींद्र विस्की सर्व करता गय़ा दोनों बूढ़ों कों, औऱ अपने पिता केँ ग्लास मे अधिक डालता गय़ा औऱ नेहा केँ पिता केँ ग्लास मे कम धालता गय़ा। एक् घंटे केँ बाद उसने अपने पिता कों बिल्कुल नशे मे धुत्त कर दिया। बीच-बीच मे नेहाआकर उन लोगों कों खानां परोसरही थि। प्रवींद्र नें केवल एक् याँ दोसिप विस्की केँ लिए थें। नेहा केँ पिता कों भि ज़्यादा नशा नहि हआ थां। मगर प्रवींद्र केँ पिता कों उठाकर उसके बेडरूम तक लें जानां पड़ा प्रवींद्र कों। वोँ बिल्कुल धरासाइ हौ गय़ा थां, लुढ़क गय़ा थां बिल्कुल।
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story - Kahani ab aur interesting hogi
excellent update brother
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