Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
रात शुरुआत हई औऱ रवींद्र, नेहा केँ पति नें एक्-दो बात किया अपने ससुरजी केँ संगफिन सोनेचला गय़ा अपने कमरे मे। लाउंज मे नेहा, प्रवींद्र औऱ नेहा केँ पिताजी रहगये थें। रात लगभग 10:00 बजे प्रवींद्र नेहा केँ बापू कों बहोत गौर सें देखरहा थां। औऱ प्रवींद्र बहोत उत्तेजित हौ रहा थां जब देखता थां कि नेहा कां पिताजी नेहा कों बारबार छूरहा थां उससे बातें करते टाइम। प्रवींद्र ऐसा व्वहार कररहा थां कि उन दोनों पर्र उसकीकोई अटेन्शन नहि थि, ताकी उनकोकोई बाधा नहि हौ। मगर नेहा कों सभीपता थां कि प्रवींद्र क्याँ खेलखेल रहा हैं औऱ वोँ भि उसमें भाग लेँ रही थि, उसकोखुश करने केँ लिए, किचेन मे बात होँ चुकी थि उसकी प्रवींद्र केँ संग।
एक् बारऐसा हुआ कि नेहा केँ पिताजी टायलेट गये मूतने केँ लिए, तौ प्रवींद्र नें नेहा सें फुसफुसाते हुएकहा- “मे अब सोने कां बहाने करके जाऊँगा, तुम् जाओ चेंज करके उसको गेस्टरूम मे जाकर जाय्न करना भाभीओके." उसको औऱ कुछ बोलने कां मौका नहि मिला औऱ नेहा केँ बापू वापस आँ गय़ा।
नेहा बिल्कुल पहले कि तरह एक् टूपीस मे थि जिसमें उसकी क्लीवेज नजर आँ रही थि औऱ स्कर्ट घुटनों केँ ऊपर थि जिसमें सें जांघे भि दिखरही थीं सोफे पऱ बैठने सें। उसके पिताजी सोफे पऱ उसकेपास हि बैठे थें औऱ उसकाहाथ बार-बार नेहा केँ घुटनों पऱ जारहा थां बात करते टाइम। पिताजी कां हाथऊपर जारहा थां औऱ हरबार नेहा अपने पिताजी कां हाथ अपनेहाथ मे थाम लेती थि उसको रोकते हुए, प्रवींद्र केँ चेहरे मे देखते हुए।
प्रवींद्र यहीसभी चोरी-चोरी देखरहा थां बहुतदेर सें। येसभी देखकर उसका बिल्कुल खड़ा होँ गय़ा थां। नेहा कों पता थां कि प्रवींद्र कों उसके जिश्म पर्र येसभी होतेहुए देख्ना बहोत मनपसंद हैं। औऱ वोँ सभी देखते हुए प्रवींद्र उत्तेजना सें मराजा रहा थां, उसके अंदरगजब कि इक्षायें उभररही थीं नेहा केँ पिता कों उसके जिश्म कों छूतेहुए देखकर। उसकेमन केँ अंदर लस्ट औऱ इक्षायों नें घऱकर लिया औऱ वोँ उठ खड़ाहुआ औऱ उन लोगों सें कहा कि अब वोँ सोने कों चला औऱ गुडनाइट विश किया दोनों कों। वोँ जल्द सें अपने कमरे मे गय़ा ये उम्मीद करतेहए कि वो लोग जल्द सें गेस्टरूम मे जाए। बहुतदेर तक वोँ अपने कमरे मे इंतेजार करतारहा पर्र कोई आवाज़ नहि सुनाई दि उसे।
जब वो लोग लाउंज सें वापस लौटे हुये उसके कमरे केँ पास सें गुजरते तोँ उसको अंदर सुनाई देता। मगर उसकोकुछ भि नहि सुनाई देरहा थां बहुतदेर तक, खामोशी छाई हुई थि बिल्कुल। उधर लाउंज मे, नेहा अपने बापू कि बाहों मे थि औऱ वोँ उसेकिस किएजा रहा थां सहलाते हए। उसकी स्कर्ट ऊपरकमर तक उठ गई थि औऱ उसके बापू केँ हाथ उसकी जांघों पऱ फिनरहे थें औऱ उसके मुँह मे नेहा कि जीभ थि जिसे वोँ चूस-चूसकर उसकारस पीरहा थां।
प्रवींद्र भि वोही सोचने लगा कि कहीं वोँ लोग लाउंज मे हि तौ नहि एंजाय करनेलगे। प्रवींद्र धीरे-धीरे सें अपने कमरे सें निकलकर नंगे पाँव चलकर लाउंज मे झाँकने गय़ा तौ उन दोनों कों वोँ आक्सन करतेहुए पाया। उस समय नेहा केँ बापू कां एक् हाथ नेहा कि चूचियों कों मसलरहा थां किस करतेहुए उसे। मगर ठीकतभी प्रवींद्र कों खुशी हुई क्योंकी नेहा नें किस रोकते हुए अपने पिताजी सें कहा- “बापूअब यहा सें चलेंयहा सेफ नहि हैं रास्ते केँ लोगयहा आकर लाउंज मे भि झाँक सकते हें."
प्रवींद्र जल्द सें अपने कदमों कों वापस अपने कमरे केँ तरफ किया। फिन कमरे केँ अंदर सें प्रतीक्षा करनेलगा कान बाहर् कारिडोर पऱ किएहुए। फिन गेस्टरूम कां दरवाजा खुलते हुए सुनाई दिया उसको तौ पताचला कि वोँ लोग अंदर दाखिल होँ रहे हें। उसकेलिए वोँ लम्हा अनमोल थां तोँ जल्द सें एक् कुर्सी केँ ऊपर चढ़कर प्रवींद्र उस ड्रिल्ड होल सें गेस्टरूम केँ अंदर देखने लगा। मगर उसको आश्चर्य हुआये देखकर कि सिर्फ़ नेहा कां पिता थां
गेस्टरूम मे, नेहा नहि आई थि।
वोँ सोचने लगा कि नेहा अपनी नाइटी पहनने गई होगी तोँ वोँ इंतेजार करनेलगा औऱ थोडा। एक् घंटे तक उसने इंतेजार किया पऱ नेहा नहि आई, उसनेकई बार गेस्टरूम केँ अंदर झांका औऱ आखिर मे देखा कि नेहा कां बाप सो गय़ा तोँ प्रवींद्र बहत उदास होँ गय़ा। फिन उसने निश्चय किया कि वोँ नेहा कों देखने जाए उसके कमरे मे। पऱ फिन सोचने लगा कि क्याँ उसका पिता नेहा कों अपने कमरे मे लेँ गय़ा होगा? उसनेफिन सोचा कि ऐसा होँ हि नहि सकता क्योंकी उसका बाप तौ बिल्कुल लुढ़क गय़ा थां। इसलिये वोँ नेहा केँ कमरे कि तरफ बढ़ा।
उसके कमरे केँ अंदर दाखिल हआ तौ देखा कि नेहा वहीं थि मगरसो नहि रही थि। वोँ अपने पति केँ पास बैठी हुइ थि, रवींद्र खर्राटे माररहा थां औऱ नेहा उसकेपास चुपचाप बैठी थि। नेहा एक् फ्लिमसी पिंक नाइटी मे थि बिना ब्रा केँ। उसकी पैंटी दिखरही थि उस पतली सि नाइटी मे औऱ उसकी चूचियां भि औऱ बहोत सेक्सी औऱ गर्मदिख रही थि नेहा। प्रवींद्र कों उसीसमय नेहा कों चोदने कां मन कियामगर उससमय तोँ उसका सपनाकुछ औऱ हि थां।
प्रवींद्र नें नेहा सें बात करतेहए पूछा- "तुम् क्यूं गेस्टरूम मे नहि गई अभि तक?
नेहा नें कहा- “उसकोडर लगरही हैं कि प्रवींद्र कां पिता कहींजाग गय़ा औऱ उधर आँ गय़ा याँ तोँ?"
प्रवींद्र नें उसको यकीन दिलाया कि ऐसा वैसाकुछ भि नहि होगा औऱ उसको अपने बापू केँ पास जाने कों कहा। प्रवींद्र केँ अंदर एक् भूख जैसी थि नेहा कों अपने बाप केँ संग चुदते हुए देखने कों। वोँ देख्ना चाहता थां कि केसे उसका पिता अपनी स्वयं कि बेटी कों सेक्षुयली एंजाय करता हैं? क्याँ वोँ खूब एंजाय करेगा? क्याँ नेहा उसको डमिनेट करेगी? याँ बाप बेटी कों डामिनेट करेगा? येसभी देख्ना चाहता थां प्रवींद्र। उसने नेहा कां हाथ पकड़कर बाहर् खींचा औऱ उसको गेस्टरूम केँ पास छोड़ा औऱ जल्द सें अपने कमरे मे घुस गय़ा। दीवार पऱ कि गयेछेद सें गेस्टरूम केँ अंदर झाँका तोँ देखा कि नेहा अपने पिता केँ बेड केँ पास खड़ी अपने पिताजी कों देखरही थि।
नेहा केँ चेहरे पर्र एक् हसीन मुश्कुराहट थि उस वक़्त अपने पिताजी कों देखते हुए। पिताजी नींद मे थां, नेहा उसकेपास बेड पर्र बैठी औऱ अपनेहाथ कों मुश्कराते हुए पिताजी केँ पैंट केँ ऊपररखा। पिताजी बिना कपड़ा बदले पलंग पऱ लेटा थां औऱ उसकीआँख लग गई थि।
मस्तभाग।waiting for next
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा केँ चेहरे पऱ एक् सुंदर मुश्कुराहट थि उस टाइम अपने पिताजी कों देखते हुए। पिताजी नींद मे थां, नेहा उसकेपास बेड पऱ बैठी औऱ अपनेहाथ कों मुश्कराते हुए बापू केँ पैंट केँ ऊपररखा। पिताजी बिना कपड़ा बदलेबैड पर्र लेटा थां औऱ उसकीआँख लग गई थि।
नेहा नें बड़े प्रेम सें अपने पिताजी कि पैंट कि बेल्ट अनहक कि फिन धीरे-धीरे सें उसकीजिप कों नीचे किया औऱ पैंट कों उतारने कि कोशिश करनेलगी, औऱ नेहा भुनभुनाती गई- “आपने कपड़े भि नहि बदले बापू, ऐसे सोते हें क्याँ? चलो निकालो, उसतरफ घूमो भि नां बापू."
बापू बिल्कुल नहि हिला औऱ नेहा उसकी पैंट उतारने केँ लिए स्ट्रगल करनेलगी। तोँ खड़े होकर नेहा पैंट कों पाँव केँ पास सें पकड़कर खींचने लगी, उस दौरान उसके पिताजी कां आधा जिश्म बेड सें खिसखे बाहर् आँ गय़ा। उसकाआधा जिश्म बेड केँ बाहर् लटकरहा थां, मगर पैंट निकल गय़ा। बाप अपने अंडरवेर औऱ शर्ट मे थां अब। तब नेहा कों उसके बापू केँ जिश्म केँ ऊपरझुक कर उसको उठाकर बेड पर्र वापसठीक करना पड़ा। उसकेबाद नेहा अपने बापू कि शर्ट केँ बटन एक्-एक् करके खोलने लगी। वैसा करते वक्त उसकी चूचियां बाप केँ छाती सें रगड़रही थि। फिन नेहा नें अपने पिताजी कि छाती कों हल्के सें चूमा, फिन गले पर्र चाटा पिताजी कों।
उसतरफ वोँ सभी देखते हुए प्रवींद्र बहोत उत्तेजित होँ रहा थां औऱ उसका जमके खड़ा हौ चुका थां। उसने अपनेहाथ कों लण्ड पर्र किया औऱ मूठ मारने कि अदा सें अपने लण्ड कों सहलाते हुए नेहा कों देख्ना जारीरखा।
उधर नेहा नें अपने पिता कि पैंट औऱ शर्ट उतार दि थि औऱ अब वोँ केवल अपने अंडरवेर मे बेड पर्र थें। नेहा उसकोचूम औऱ चाटरही थि, उसको जगाते हुए। बूढ़ा नहि उठरहा थां औऱ नेहा नें बचकानी आवाज़ मे कुछ शरारती अंदाज मे कहा- “हम्म्म। बापूउठो भि, उठो नां। आपनेदिन मे मुझको खुश नहि किया थां, अबकरो मुझे इसकी जरूरत हैं अब। हम्म्म। उठो नाँ बापू." एक् बेटी अपने बाप सें चुदवाने केँ लिए उसकोजगा रही थि। वाउ क्याँ सीन हैं।
बाप नें एक् अंगड़ाई लेतेहए आँख खोला औऱ शैतानी नजरों सें नेहा कों अपनी छाती केँ ऊपर पाकर उसको अपनी बाहों मे जकड़ लिया। नेहा अपने बापू कि ठुड्डी पर्र किस करतेहुए उसके मुँह तक पहुँची, फिन बाप केँ मुँह मे अपनेजीभ डाल दिया औऱ दोनोकिस करनेलगे एक् दूसरे कों। नेहा कि चूचियां उसके पिताजी केँ बालों वाली छाती पऱ रगड़रही थीं जिससे नेहा कों आनंद आँ रहा थां उन बालों सें। बाप नें नेहा कि नाइटी कों ऊपर उठाया औऱ उसकी गाण्ड पर्र अपनाहाथ फेरते हुए नेहा कि बुर मे उंगली करनेलगा, उसकोकिस करतेहुए।
जल्द हि नेहा अपने बापू कां पेटचाट रही थि औऱ नीचे कि तरफ बढ़ती गई औऱ उसके अंडरवेर कों निकाल फेंका नेहा नें। फिन बापू केँ मोटे लण्ड कों अपने रसीले हाथों मे लिया नेहा नें, उसपर अपनीजीभ फेरा औऱ हौले सें अपने मुँह केँ अंदर लें लिया अपने पिताजी केँ लण्ड कों।
बाप गुर्राता गय़ा, तड़पता गय़ा औऱ अपनीकमर उठाकर लण्ड कों नेहा केँ मुँह केँ औऱ अंदर ह्सता गय़ा हाँफते हए। नेहा कों लण्ड कों अपने मुँह मे संभालने अ तकलीफ होँ रही थि तोँ बार-बार वोँ उससे बाहर् निकाल रही थि साँस लेने केँ लिए।
प्रवींद्र कों बहोत हि मज़ा आँ रहा थां नेहा कों अपने बाप कों उसतरह सें चूसते हए देखकर। प्रवींद्र नें सोचा औऱ स्वयं सें कहा-“इस नेहा भाभी कों लण्ड बेहद हि मनपसंद हैं। हाँ, सच्ची इसको लण्ड बहोत हि मनपसंद हैं। देखो तौ अपने बाप केँ लण्ड कों कितनी खुशी सें चूसेजा रही हैं भला."
नेहा केँ पिताजी नें आखिर मे नेहा कों अपनीगोद मे लेँ लिया औऱ उसकी नाइटी निकाला जिसको निकालने केँ लिए नेहा नें अपनी बाहें ऊपर कि जल्द सें, क्योंकी ब्रा नहि पहनी थि नेहा नें तौ बाप उसकी चूचियों कों मजे सें चूसने लगारस निकालते हुए। नेहा नें अपनी गर्दन कों पीछे किया औऱ उसके लंबे खुले कालेबाल उसके पिता कि टाँगों पर्र गिरे। फिन नेहा अपनी गाण्ड रगड़ने लगी अपने पिता केँ जांघों पर्र। कुछ लम्हा बाद दोनों खाट पर्र पाएगये।
बाप अपनीपीठ पर्र लेटाहुआ थां औऱ नेहा उसकेऊपर थि, उसकी टाँगें फैली हुइ, बाप कां लण्ड उसकी बुर केँ अंदर औऱ नेहा स्वयं हिलरही थि लण्ड कों अपनी बुर केँ अंदर-बाहर् करतेहुए, अपनी आगजम तक पहुँचने केँ लिए अपने पिता केँ लण्ड सें। औऱ आखिर मे नेहाइस बार अपने पिता सें पहलेखुश हौ गई क्योंकी दिन मे बाप झड़ चुका थां औऱ नेहा नहि।
मगर बाप अपने लण्ड कों ठुसते हए कराहने लगा औऱ जल्द हि वोँ भि झड़ने कों आया औऱ नेहा नें उसकोफिन सें दिन कि तरह अपने लण्ड कों उसके मुंह मे देने कों कहा। पिता नें जल्द सें लण्ड उसकी बुर सें घसीटकर हाथ मे थामे नेहा केँ मुंह तक लाया जिसको नेहा नें जल्द सें अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ बाप केँ वीर्य कों अपनेगलर मे उतारी नेहा नें।
प्रवींद्र नें अपने कमरे मे उसछेद सें सभीकुछ देखा औऱ कड़क खड़ा हौ गय़ा थां उसका। फिन जब उसने नेहा कों अपने बापू कों गुडनाइट किस करते देखा तोँ जल्द सें बाहर् कारिडोर मे निकलकर नेहा कां इंतेजार करनेलगा। नेहा केँ कमरे कां दरवाजा, प्रवींद्र केँ कमरे सें बिल्कुल दूर नहि थां। जैसा कि आप् सभी स्केच मे देख सकते हें।
तोँ जैसा कि आप् सभीफिन सें देख सकते हें कि किसका रूम किधर हैं इस स्केच मे, गेस्टरूम भि साफनजर आँ रहा हैं तौ आप् सबको क्लियर समझ मे आँ गय़ा होगासभी कुछ।
बहोत हि उम्दा. बहोत हि उत्तेजना सें भरपूर स्टोरी हैं... शानदार लेखन हैं
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
अब प्रवींद्र कारिडोर मे नेहा केँ कमरे केँ पास उसका इंतेजार करनेलगा औऱ जैसे हि नेहावहा पहुँची प्रवींद्र नें नेहा कों बाहों मे जकड़कर किस करनेलगा अंधेरे मे हि। फिन उसने नेहा कों उठाया औऱ अपने कमरे मे लेँ गय़ा। जिस टाइम अचानक उसने नेहा कों अंधेरे मे कारिडोर मे जकड़ा नेहा कि चीख निकल गई क्योंकी उसने बिल्कुल नहि सोचा थां कि अंधेरे मे कोई उसको अचानक वैसे जकड़ लेगा अपनी बाहों मे। एक् समय केँ लिए तोँ वोँ डर हि गई थि, मगर जल्दी प्रवींद्र कि बाहों कां एहसास हआ तोँ वोँ चुप हौ गई।
उससमय नेहा नें उससेकहा- “ओफ्फो छोड़ो मुझेकोई सुन लेगा, मेरे पिताजी भि सुन सकते हें छोड़ो नां प्लीज."
मगर प्रवींद्र नें उसको अपनेबेड पर्र छोड़ा। कारिडोर मे प्रवींद्र नंगा खड़ा थां, सिर्फ़ उसके कमरे केँ दरवाजे सें थोड़ी सि रोशनी आँ रही थि कारिडोर मे वरना बिल्कुल अंधेरा थां औऱ वैसे नंगे हालत मे हि वोँ नेहा कों अपनेबेड पर्र लाया उठाकर। प्रवींद्र कां लण्ड इतना कड़क खड़ा थां कि जैसे हि नेहाबेड पर्र बैठी जल्दी प्रवींद्र नें अपने लण्ड कों उसके मुँह केँ पासकर दिया। नेहा केँ पास औऱ कोई चारा नहि थां तोँ उसके लण्ड कों मुँह मे लेँ लिया उसनेमगर कुछ बड़बड़ाते हुए, औऱ प्रवींद्र केँ चेहरे मे एक् छोटे बच्चे कि तरह देखते हुए। औऱ वोँ सभीकुछ फिन सें हआ, प्रवींद्र नें उसकोफिन चोदा। उसकी बुर केँ ऊपर अपना वीर्य छोड़कर वोँ नेहा केँ बाडी पऱ हि सो गय़ा, औऱ उसकापेट नेहा केँ पेट सें उस वीर्य सें चिपक गय़ा।
बहुतदेर तक प्रवींद्र वैसे हि नेहा केँ जिश्म पर्र लेटारहा औऱ नेहा उससे फुसफूससाते हुए प्रेम सें बातें किएजा रही थि उसके कानों मे उसके बालों मे अपने उंगलियां फेरते हुए। औऱ आखिर मे नेहाये कहतेहुए उठी-“अब मुझे जानां चाहिए, सुभह तुमको भि जल्द उठना हैं, तुमको भि काम पऱ जानां हैं शर्माजी केँ पास."
ये सुनकर प्रवींद्र केँ सीने पर्र कुछ भारीवजन सां महसूस हुआ। औऱ उसने अपने जिश्म कों बेड पर्र पटक दियाकाम केँ बारे मे सोचकर। नेहा नें उसकोउस हालत मे देखा तौ हँसते हुए दरवाजे तक निकलते हुए प्रवींद्र कों एक् फ्लाइयिंग किस भेजा जौ उसनेकैच किया औऱ नेहाचली गई।
अगली सुभह कों नेहा जैसे कशमकश मे थि, इस कमरे सें उस कमरे मे दौड़रही थि, इसको जागते हए उसको जगाते हए, कभी किचेन मे नाश्ता सजधजकर कररही होती तौ कभी प्रवींद्र कों, तौ कभी अपने पिताजी कों जगाने जाती। आज पाँच लोगों केँ लिए नाश्ता बनाना थां औऱ 3 लोगों केँ लिएकाम पर्र लें जाने केँ लिए टिफिन रेडी करना थां। नार्मली तौ हररोज प्रवींद्र दिन केँ 10-11 बजे तक सोकर उठता थां तौ उसकेलिए तोँ कुछ नहि बनाना पड़ता थां नेहा कों। पऱ अब उसकेलिए भि सभीकुछ सजधजकर करना थां।
कुछ हि देरबाद 3 मर्द टेबल केँ पासबैठ गये प्रवींद्र केँ इलावा। नेहा केँ ससुरजी नें कहा- “जाकरउस निकम्मे कों जगाओ नेहा बेटा.”
चौथीबार नेहा गई प्रवींद्र कों हिलाकर जगाने औऱ उससेकहा कि उसका बाप क्रोध हौ रहा हैं।
प्रवींद्र नें नेहा कों बाहों मे भरकर दुःखी चेहरे सें कहा- “भाभी, आपकोबहत हि मिस करूँगा, दिनभर आपसे नहि मिल पाऊँगा, आपको नहि देख पाऊँगा, आपके लगभग नहि रहँगा। औऱ हाँ.अब हम् केसे प्रेम करेंगे भाभी? केसे औऱ कब?"
नेहा नें अपनी पूरी ताकत लगाते हुए उसको दोनों हाथों सें खाट पर्र सें खींचा। प्रवींद्र आउटआफ बेड होँ गय़ा तौ नेहा नें अपना मुँह उसकेकान केँ पास लाकर उसको छेड़ते हुएकहा- “रात कों प्रेम करेंगे, अबदिन मे किस
औऱ हग करनाआज सें बंद। पिछले कई महीनों सें तुम् ऐसाकर रहे थें अबबंद तुम्हारा दिन मे आनंद करना हेहेहे.”
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story - Continue reading next part
Relavant source : click here