Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा नें अपनी पूरी ताकत लगाते हुए उसको दोनों हाथों सें खाट पर्र सें खींचा। प्रवींद्र आउटआफ बेड होँ गय़ा तोँ नेहा नें अपना मुँह उसकेकान केँ पास लाकर उसको छेड़ते हुएकहा- “रात कों प्रेम करेंगे, अबदिन मे किस
औऱ हग करनाआज सें बंद। पिछले कई महीनों सें तुम् ऐसाकर रहे थें अबबंद तुम्हारा दिन मे आनंद करना हेहेहे.”
मगर प्रवींद्र नें जल्दी पूछा-“मगर भाभीरात कों केसे?रात कों तोँ डैड आपकी लेगा, मे केसे करूँगा?"
नेहा नें माथे पर्र हाथ पीटते हुएकहा- “उफ़्फ़। तुम् उसकी फिकरमत करो मुझे मालूम हैं केसे क्याँ करना हैं? तुम्हारे पिताजी कों अब मेरा नाइट शिफ्ट केँ वक्त टेबल कों रेस्पेक्ट करना होगा हीहीही." औऱ नेहाजोर सें हँसी। थोड़ी देरबाद सब मर्दघऱ सें चल पड़े। नेहा नें बाकी केँ सब मर्दो केँ सामने अपने पिताजी कों गले लगाया
प्रवींद्र नेहा केँ बापू कि सब हरकतों कों देखरहा थां उससमय। ससुरजी भि गौर सें गले लगतेहए देखरहा थां। नेहा नें अपने पिताजी केँ दोनों गाल पर्र किस किया औऱ बाप नें भि नेहा केँ दोनों गाल पर्र किस किया औऱ दूसरी किस केँ दौरान उसके होंठ नेहा केँ होंठ सें छुए।
ससुरजी नें वोँ अच्छी तरह सें देखा औऱ ये भि नोट किया कि नेहा केँ बाप कां हाथ उसकीकमर पऱ थां किस करतेसमय। ससुरजी नें अपना खड़ा होतेहुए महसूस कियाउन बाप बेटी कां प्रेम औऱ लगाओ देखकर। औऱ ससुरजी कों भि थोडा सां शकहुआ औऱ स्वयं सें प्रश्न किया- “क्याँ ये बाप अपनी बेटी कों हि नहि चोदता हैं? लग तोँ कुछऐसा रहा हैं मुझे इतना अपनापन। खैर, पता नहि अगरकुछ हैं तोँ कुसूर बाप कां नहि हैं। नेहा हैं हि ऐसीचीज.”
आखिरकार, सभीचले गये औऱ पहलीबार नेहा नें अपने आपकोघऱ मे अकेली पाया। जिस दिन सें विवाह होकरआई हैं इसघऱ मे यानी पिछले 7-8 महीनों मे ये पहलीबार थां कि वोँ बिल्कुल अकेली थि। नेहा नें घऱ केँ कामों मे स्वयं कों बिजीकर लियातब।
प्रवींद्र जहाँकाम कररहा थां उसके चारों तरफ बड़े-बड़े मोटर, एंजिन कां हंगामा शराबा थां, ट्रैक्टर्स, कांक्रीट मिक्सर्स, ड्रिलर, सब हंगामा करने वाली मशीनें उसके चारों तरफ, औऱ कोई 200 लोगकाम कररहे थें उस साइट पर्र। उस वक़्त प्रवींद्र सर्वेयर कों असिस्ट कररहा थां नाप लेने मे जमीन कि। उसको बहोत बेचैनी हौ रही थि
औऱ वहा सें भाग जानां चाहता थां। अपनी प्यारी भाभी कि बाहों मे जाकर अपने आपको समेटना चाहता थां। वोँ सिर्फ़ नेहा कों हि सोचरहा थां।
उसने सोचा कि अबकभी भि वोँ रूपचंद कि बेहन औऱ उसकी बेटी सें नहि मिल पाएगा। उसको घुटन सि महसूस होनेलगी। वोँ काम नहि कर पाएगा उसने सोचा। उसकामन गर्म होँ रहा थां, सुकून नहि थां बिल्कुल उसको, बेताब थां, एक् किश्म कि पीड़ा थि उसकेमन मे औऱ समझ मेंनहीं आँ रहा थां उसे कि वोँ करेमगर उसकोपता थां कि कोई मार्ग नहि थां उसकेपास, वोँ सभी केसे भि करके झेलना हि थां।
दिन गुजरते गये।
आहिस्ता प्रवींद्र कों अपनेनये काम मे आदत होँ गई। उसको एक् ग्रुप कां लीडर बनाया गय़ा थां वोँ उन लोगों केँ काम कों कंडक्ट कररहा थां उस साइट पे, वो लोग उसको रिपोर्ट करते थें काम करने केँ बाद। मिसटर शर्मा जौ इंजीनियर कांट्रैक्टर थां वहा कां प्रवींद्र केँ संगघुल मिल गय़ा। दोनों कि दोस्ती हौ गई। शर्माजी शहर मे रहते थें
औऱ बहोत लंबासफर तय करकेहर रोज गाँव मे आता थां काम पऱ। तोँ प्रवींद्र उसका असिस्टेंट केँ जैसा हि थां औऱ सभी वर्कर्स प्रवींद्र कों रिपोर्ट करते थें औऱ जब शर्माजी आतेतब प्रवींद्र उसकोसभी समझाता कि क्याँ हुआ औऱ क्याँ नहि?
रात कों अक्सर प्रवींद्र नेहा केँ संग अपनी थकान कों दूर करता थां। नेहा उसकीतरफ औऱ भि अधिक अटेन्शन देनेलगी थि क्योंकी अब दूरी जोँ हौ गई थि दोनों केँ बीच। क्योंकी दिनभर नेहा भि उसकोमिस करती थि इसलिये रातों कों फूल वक्त देती थि प्रवींद्र कों। प्रवींद्र नेहा सें बहतखुश थां हालांकी अबदिन मे उससेदूर रहता थां। जबसाम कों काम सें प्रवींद्र वापसआता थां तोँ नेहा उसकीऐसी खिदमत करती थि जैसे वोही उसका पति हैं।
ससुरजी नें भि नोटिस किया कि नेहा प्रवींद्र कों बहोत प्रेम करती हैं, मगर वोँ उस प्रेम कों भइया-बेहन वाला प्रेम समझता थां। उसको लगता थां कि दोनों हम् उम्र हें इसलिये उनकी दोस्ती हैं औऱ दोनों एक् दूसरे कों समझते हें। मगर क्योंकी अबदिन मे प्रवींद्र घऱ पऱ नहि रहता थां तोँ उसकेदिल मे एक् डर रहता थां कि कहींकोई
औऱ नेहा कों सिड्यूस नां करे याँ कोई औऱ नेहा सें सिड्यूस नाँ हौ जाएदिन मे किसीतरह सें।
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अक्सर दिन मे प्रवींद्र, नेहा केँ बाप औऱ भाइयों केँ बारे मे भि सोचा करता थां। सोचता थां उन लोगों कों अबदिन मे बहत आजादी मिल गई हैं नेहा केँ संगसमय बिताने केँ लिए। जब प्रवींद्र येसभी सोचता थां तौ उसकामन काम मे नहि लगता थां औऱ दौड़कर घऱ वापस जानां चाहता थां। उसकोअब भि रूपचंद औऱ उसकी बेटी सें मिलने कि ख्वाहिश बाकी थां। इसलिये वोँ एक् दिन कां आफ लेना चाहता थां उस ख्वाहिश कों अंजाम देने केँ लिए।
एक् दिन शर्माजी प्रवींद्र सें लड़कियों औऱ औरतों केँ बारे मे बातकर रहा थां। तोँ प्रवींद्र नें नेहा केँ बारे मे सोचा
औऱ शर्माजी सें कहा कि उसकी एक् गर्लफ्रेंड हैं।
शर्माजी नें कहा कि हाँ उसकोपता हैं कि आजकलहर एक् नौजवान कि गर्लफ्रेंड होती हैं। मगर शर्माजी कुछ औऱ पूछरहे थें जौ प्रवींद्र नहि समझा। तौ शर्माजी नें प्रवींद्र सें कहा- “औऱ इस गाँव कि लड़कियों केँ बारे मे क्याँ ख्याल हैं? समयपास केँ लिएकोई नहि मिली तुमको?"
तब प्रवींद्र सोचने लगा कि शर्माजी क्याँ कहना चाहता थां। वोँ 40 साल केँ ऊपर कां थां, बड़ेशहर कां थां औऱ अपने सूट-बूट औऱ बड़ी गाड़ी वाले एक् बड़ेबास कां लुक रखता थां। ऊँचे स्टेटस कां दिखता थां, उसको देखकर कोई भि अंदाजा लगा लेता कि वोँ एक् बड़ाबास हैं। तोँ प्रवींद्र नें बिल्कुल नहि सोचा थां कि वोँ गाँव कि लड़कियों मे भि इंट्रेस्टेड होँ सकता हैं।
फिन प्रवींद्र नें पूछा- क्याँ वोँ गाँव कि लड़कियों मे इंट्रेस्टेड हैं?
शर्माजी नें कहा- “वोही तौ वोँ पूछना चाहता थां उससे.” उसने पूछा- “क्याँ वोँ किसीऐसी लड़की कों जानता हैं जौ समयपास केँ लिए मिलेगी उधर गाँव मे.” फिरशर्मा नें कहा- “उसने सुना हैं कि गाँव मे मस्त लड़कियां होती हें समयपास केँ लिए भि."
प्रवींद्र सोचने लगा कि ऐसी खबरें गाँव केँ बारे मे उस तक केसे पहँची? उल्टा गाँव वालों कों येपता थां कि शहर कि लड़कियां टाइमपास केँ लिए सजधजकर रहती हें औऱ शर्माजी कों खबर मिली केँ गाँव कि लड़कियां वैसी हें। ऐसी खबरें किसने फैलाइ ऊपर वाला जाने, प्रवींद्र नें सोचा।
प्रवींद्र नें शर्माजी सें पूछा- “क्याँ आप् एक् लड़की चाहते हें गाँव सें, जिसके संग आप् वक्तपास कर सकें?"
जवाबहाँ मे मिला।
प्रवींद्र नें कहा कि वोँ उसको वैसी एक् लड़की तक पहुंचा देगाजब वोँ रेडी होगा। प्रवींद्र नें सोचा उसको वोँ नेहा सें मिलाने लें जाएगा। ये प्रवींद्र केँ लिएअब जुनून सां बन गय़ा थां, नेहा कों किसी औऱ केँ संग करतेहए देखने कों, खासकर जब मर्द उम्र वाला हौ। मगरफिन प्रवींद्र नें रूपचंद कि बेहन औऱ बेटी कों सोचा। प्रवींद्र नें सोचाउसी बहाने उसको शायद रूपचंद कि भतीजी भि मिल जाएगी। तोँ उसने अपनेबास कों दूसरे गाँव चलने कों कहा।
बड़ीहाई क्लास वालीकार रूपचंद केँ घऱ केँ सामने रुकी, औऱ प्रवींद्र अंदर गय़ा तौ रूपचंद कि बेहन औऱ बेटी कों अकेले घऱ पर्र पाया। शर्माजी वाहन मे इंतेजार कररहा थां जब तक प्रवींद्र अंदरडील फाइनलाइस कररहा थां। प्रवींद्र नें उन लोगों सें कहा कि शर्माजी बहत अमीर व्यक्ति हें औऱ उनसेउन लोगों कां बहोत फायदा हौ सकता हैं, तौ उनको इज्जत सें रिसीव करें। उसने रूपचंद कि बेहन सें कहा केँ उसके हिस्से कां पेमेंट भि उसकाबास करेगा (वोँ उसकी बेटी कों पाना चाहता थां औऱ बेहन कों शर्माजी केँ हवाले करना थां)। तौ उसनेउस लड़की कों घऱ केँ किसी दूसरे कमरे केँ अंदर रहने कों कहाजब शर्माजी अंदरआएं, ताकी वोँ केवल उसकी मम्मी कों देखसके।
बाहर् जाकर उसने अपनेबास कों बुलाया अंदरआने केँ लिए। रूपचंद कि बेहन जिसका नाम थां संगीता, एक् बहोत हि गर्म विधवा थि जिसको देखकर कोई भि कह सकता थां कि वोँ माल मात्र चोदने केँ लिए हि बनाई गई हैं। उसकी जवानी उसकी उम्र कों ढकती थि, वोँ अपनी उम्र कां आधा लगती थि। थि तौ 37-38 साल कि मगर दिखती थि 25 साल सें कम उम्र कि। शर्माजी कों वोँ पसन्द आँ गई औऱ उसकेसंग वोँ कमरे केँ अंदरचला गय़ा। तोँ प्रवींद्र बहोत खुशहुआ केँ उसको बेटी मिल गई चोदने कों।
बहोत हसीन लम्हा गुजारे उसघऱ मे एक् घंटे तक दोनों नें।
संगीता कि बेटी पूजा नें प्रवींद्र सें उसकी गर्लफ्रेंड केँ बारे मे पूछा जिसका जिक्र रूपचंद नें किया थां पिछली बारजब प्रवींद्र वहा गय़ा थां उन लोगों सें मिलने। तोँ पूजा नें कहा कि वोँ उसकी गर्लफ्रेंड सें मिलना चाहती हैं उसको देख्ना चाहती हैं, औऱ सबकेसंग मिलकर मस्त जश्न करना चाहती हैं। तौ प्रवींद्र नें उससेकहा केँ बहोत हि जल्द वोँ सभी इंतेजाम करेगा।
अब, जहाँ प्रवींद्र रहता थां वहा उसकेघऱ केँ सामने, रास्ते केँ उसपार एक् दुकान थि जोँ सालों सें बंद थि। उसकेबगल मे एक् वेस्टलैंड थां जौ उसतरफ पड़ता थां जिसतरफ नेहा कपड़े धोती हैं पत्थर पर्र। एक् हफ्ते पहले सें एक् गैरेज वाले नें उस दुकान औऱ उस वेस्टलैंड कों भाड़े पऱ लिया हैं, अपने मेकैनिकल काम करने केँ लिए।
उस वेस्टलैंड मे गैरेज वाला बिगड़ी हई गाड़ियों कों रखता थां औऱ गैरेज मे रिपेयर करता थां। गैरेज वालाकोई 40 साल कां अधेड़ व्यक्ति थां, मोटा थां औऱ उसका मोटापेट थां। 3 लोग उसकेसंग काम करते थें। गैरेज सुभह 9:00 बजे खुलता थां औऱ साम 4:00 बजेबंद होता थां। तोँ नाँ प्रवींद्र, नाँ उसका बाप नाँ भइयाकभी उन लोगों कों मिला नाँ देखा, क्योंकी जिस वक़्त येलोग घऱ सें निकलते हें औऱ जिससमय वापसआते हें तौ गैरेज वालेलोग उस वक़्त कभी नहि होते गैरेज मे।
बहोत जबरदस्त कहानी हैं मस्तराम भइया आनंदआया अगले एपसोड कि प्रतिक्षा रहेगी
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अब क्योंकी कई सालों सें वोँ एक् बंद दुकान थि तौ वहा नाँ पानी, नाँ हि बिजली थि। तोँ पहलेदिन जब वोँ गैरेज वालाआया थां उसदिन वोँ नेहा कां दरवाजा खटखटाया औऱ बोला कि कुछ दिनों केँ लिए उसको अपनेनल सें पानी लेनेदें, जब तक उसकोनया कनेक्सन नहि मिल जाता।
नेहा नें इनकार नहि किया औऱ उन लोगों सें कहा कि जब भि पानी कि जरूरत पड़ेआकर भर लें जाए किसी भि टाइम।
जब भि नेहा बाहर् कपड़े धोती थि तौ वोँ व्यक्ति लगातार नेहा कों देखा करता थां। नेहाकभी कभारउस तरफ देखती थि मगरकभी उस व्यक्ति पर्र तवज्जो नहि कि। अब एक् दिनऐसा हुआ कि उन 3 लोगों मे सें एक् लड़का बोतल मे पानी भरने कों आयाजब नेहा कपड़े टांगरही थि सुखाने केँ लिएतार पऱ अंगने मे। औऱ नलठीक उसी स्थान पर्र थां।
एक् 25 कां जवान लड़काआया थां पानी लेने औऱ उसने नेहा सें सर झुकाते हए इशारे सें ग्रीट किया औऱ पानी भरने गय़ा नल केँ पास। हर बारजब नेहाझुक रही थि बमैल्टी सें एक् कपड़ा लेने केँ लिएतार पऱ टाँगने केँ लिए, तोँ वोँ व्यक्ति नल केँ पास खड़ा नेहा कि क्लीवेज चोरी-चोरी झाँकरहा थां। औऱ नेहा कों महसूस हुआ कि
वोँ उसको झाँकरहा हैं, मगर नेहा नें ऐसा व्वहार किया कि उसकोकुछ नहि पता। कपड़े धोतेसमय नेहा कि ड्रेस पार्ट्ली भीग गई थि औऱ उसकी जिश्म पर्र सटी हुईँ थें। खासकर जांघों केँ बीच-ओ-बीच, जिससे उसकी टाँगें औऱ जांघों केँ साइजदिख रहा थां। उसकी गाण्ड कां शेप भि नजर आँ रहा थां।
वोँ लड़का पानी भरने केँ बाद नेहा कां धन्यवाद अदा किया, तोँ नेहा नें मुश्कुराते हुए उससेसर सें ओके मे इशारा किया औऱ वोँ लड़का हँसते हुए नेहा कि क्लीवेज कों देखते हुएवहा सें गैरेज वापसचला गय़ा। जातेसमय कईबार मुड़कर वोँ नेहा कों देखता रहा। जितनी बार भि वोँ मुड़कर नेहा कों देखा, हर बार नेहा नें भि उसको देखा मुश्कुराते हुए।
लड़का गैरेज मे वापस जाकर अपने दोस्तों सें नेहा केँ बारे मे बात किया। तब नेहा नें देखा कि वहा सें चारों मर्द उसकीतरफ देखरहे हें। ऐसाकई दिनों तक चलतारहा। वो लोग नेहा कों कपड़े धोने केँ लिए बाहर् आने कां इंतेजार करते, जब वोँ आतीतभी पानी भरने जाते थें जानबूझ कर उसका जिश्म औऱ क्लीवेज कों देखने केँ लिए। वापस गैरेज मे आपस मे सभीयही बात करते थें- “क्याँ मस्त भाभी हैं दोस्त? क्याँ क्लीवेज हैं? क्याँ मस्त गाण्ड हैं दोस्त देखने सें जी नहि भरता दोस्त। औऱ कितनी मीठी भि हैं, बिल्कुल हँसती रहती हैं, नाराज बिल्कुल नहि होती, बहोत अच्छी भि हैं दोस्त। औऱ हुस्न तौ हेरोइनों जैसी हैं दोस्त। एक् बारअगर मिलजाए तोँ क्याँ बात होगी दोस्त। क्याँ मिल सकती हैं दोस्त?"
फिन एक् दिनजब गैरेज वाला मालिक सुभहआया तौ नेहा केँ घऱ केँ सामने खड़ा थां बहुतदेर तक। घऱ केँ अंदर सें नेहा नें उसको देखा। कुछ देर तक वहीं खड़ी नेहा उसको देखती रही कि वोँ क्याँ करना चाहता हैं औऱ क्यूं उसकेघऱ केँ सामने रास्ते पर्र खड़ा उसकेघऱ कि तरफदेख रहा हैं। उससमय नेहा अपनी नाइटी मे थि औऱ उसकी पतली-पतली स्ट्रैप्स थें कंधों पर्र औऱ उसकी चूचियां साफ दिखाई देरही थीं। अभि तक चेंज नहि किया थां नेहा नें। जबघऱ सें बाहर् कपड़े धोने जाती थि तब चेंज करती थि, क्योंकी अपनेघऱ केँ अंदर थि तौ तब तक वैसे हि थि।
नेहा कों लगा कि वोँ व्यक्ति घऱ केँ आँगन मे दाखिल होना चाहता थां मगर हिचकिचा रहा थां। नेहा कों लगा कि उसको किसीचीज कि जरूरत हैं याँ पानी लेने आनां चाहता हैं तोँ वोँ उसकी सहायता करना चाहती थि। तौ नेहा नें एक् खिड़की खोला जौ रास्ते पऱ खुलती थि औऱ उस व्यक्ति कि तरफ देखा, तौ व्यक्ति नें सर हिलाते हुए नेहा कों 'अरे' जैसे किया जिसका जवाब नेहा नें भि सर हिलाकर दिया, आदत केँ मुताबिक अपनी मुश्कुराहट केँ संग।
जिस टाइम नेहा नें खिड़की कों खोला तोँ उसको एक् हाथ सें खिड़की कों खोलना पड़ा तौ दूसरे हाथ सें सपोर्ट कररही थि स्वयं कों। वैसा करने सें उसका वोँ हाथ जिससे खिड़की कों खोली थि, उसहाथ केँ ऊपर उठने कि वजह सें उसकी बाजू केँ नीचे, कांख रास्ते पऱ सें दिखाई देरही थि औऱ कंधे पऱ नाइटी कि पतली स्ट्रैप्स भि।
औऱ कहने कि जरूरत नहि कि उसकी चूचियां भि नजरआईं, औऱ उसकी बाजू केँ नीचे केँ सफेद हिस्से, रसीले नर्म हिस्से औऱ चूचियों केँ साइड वालेआधे गोल हिस्से भि दिखेउस व्यक्ति कों जोँ नेहा कों देखते जारहा थां औऱ उसकोलगा कि नेहा उसको इन्वाइट कररही हैं अपनीतरफ वैसा आक्सन करके।
मगर खिड़की खोलने केँ बादजब नेहाघऱ केँ अंदर वापसचली गई तोँ वोँ व्यक्ति अपने गैरेज मे वापसचला गय़ा औऱ अपनेकाम मे मसरूफ हौ गय़ा। बाकी केँ तीन लड़के भि काम पर्र आँ गये थोड़ी देर मे, मालिक पहलेआया थां। औऱ वोँ तीन लड़के जब सें आए सिर्फ़ नेहा केँ आँगन मे नजरें गड़ाए हुए थें खासकर उस स्थान पऱ जहाँ नेहा कपड़े धोनेआती हैं, जहाँ पर्र नल हैं।
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