Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा केँ पशीने छूट पड़े, चेहरा लाल होँ गय़ा, उसने एक् औऱ लंबी साँस लिया औऱ बोलने हि जारही थि कि पंडित नें कहा- “फिकरमत करो बिटिया, अगर अभि नहि तोँ फिन किसी औऱ दिनबता देना जोँ बताना हैं."
नेहा नें जवाब दिया- “नहि, मे अभि आज हि कहूँगी, आप् पूजाखतम कर लीजिए फिन बताती हूं."
दस मिनटबाद पंडित नें पूजाखतम किया, औऱ कुछदेर बाद नेहा सें कहा-“हाँ अबकहो बिटिया, क्याँ बात परेशान कररही हैं तुम्हें? बताओ। मे तुन्महरी सहायता करने कि पूरी कोशिश करूँगा."
नेहा कां गलासूख गय़ा बात करने सें पहले। उसका पल्लू जौ गिररहा थां नेहा नें उसेसर पर्र ओढ़ा औऱ छाती कों भि टॅका, क्योंकी उसकी सफेद ब्लाउज़ उसके अंदर पहनी हुइ ब्लैक ब्रा कों छुपा नहि सकती थि। ब्लैक ब्रा
औऱ उसके स्ट्रैप्स सभी सफेद ब्लाउज़ मे दिखरहे थें औऱ उसका गोरा जिश्म भि सफेद ब्लाउज़ मे उस ब्लैक ब्रा सें कंट्रास्ट करतेहये उसके जिश्म कों औऱ भि खबसरत दिखारहा थां। पंडितजी वोँ सभीदेख रहे थें औऱ उसकी गोरीकमर, जोँ डकी नहि थि, वोँ तौ साफनजर आँ रही थि। वोँ नेहा केँ बात प्रतीक्षा कररहा थां उसके चेहरे मे देखते हुए। नेहा अपनेथूक निगलरही थि जिससे उसकीगले कि मसल्स हिली तोँ पंडित समझ गय़ा कि कोई बहोत हि गंभीर बात हैं जौ नेहा कों कहनी हैं। पंडित नें फिन सें नेहा कों बेफिकर होकरबात बताने कों कहा।
मगर नेहा कि नजरें फिन सें पंडित कि धोती पऱ गईं औऱ उसके खड़े लण्ड कों देखाफिन भि उसने सोचा कि बात तोँ करनी हि हैं उससे। वोँ फिन हिचकिचाई मगरबात करना शुरुआत किया नेहा नें।
नेहा- “पंडितजी मे प्रेग्नेंट हूं.'
पंडित- “तोँ इसमें कौन सि प्राब्लम हैं बिटिया, बधाई होँ."
नेहा-“मगर पंडितजी, होने वाला बच्चा मेरे पति कां नहि हैं."
पंडित- “ओहह। तोँ फिन किसका हैं बच्चा?"
नेहा-“यही बात बताने मे मुझे लज्जा औऱ हिचकिचाहट होँ रही हैं पंडितजी केसे कहूँ?"
पंडित- “फिकरमत करो तुम्, बात मेरे औऱ तुम्हारे बीच रहेगी, मे कभी भि किसी कों नहि बताऊँगा। दुनियां कों यहीपता चलेगा कि तुम् अपने पति केँ बच्चे सें प्रेग्नेंट हौ, मात्र तुमको पता हैं कि ये उसकी औलाद नहि, इसमें कोई आपत्ति कि बात नहि हैं। कितने महीनों सें गर्भवती होँ बेटी? वैसे बिल्कुल नहि दिखरहा हैं कि प्रेग्नेंट होँ, तुम्हारा पेट तोँ बिल्कुल चिपका हुआ हैं, देखू तोँ, क्याँ शुरुवात हैं अभि?"
नेहा-“दो महीने होँ गये हें पंडितजी."
पंडित- “दो महीने, इसीलिए कुछनजर नहि आँ रहा, अच्छा, बताओ पिता कौन हैं?" पंडित कां लण्ड औऱ भि जमके खड़ा होँ गय़ा ये सोचकर कि उसने किसी औऱ केँ संग सेक्स किया हैं औऱ किसी औऱ केँ लिए प्रेग्नेंट हैं। उसने सोचा क्याँ उसको भि नेहामिल सकती हैं क्याँ? उसका लण्ड जैसे धोती सें बाहर् निकलने कों मचलरहा थां उससमय।
नेहा भि रह-रहकर उसकी धोती केँ ऊपरठीक वहींदेख रही थि। फिन नेहा सोचने लगी कि जब पंडित कों वोँ बता देगी कि किसने उसको प्रेग्नेंट किया हैं तोँ पंडित भि अपना हिस्सा चाहेगा नेहा सें।
पंडित नें नेहा कों दिलाशा दिलाते हुएकहा- “इसमें कोई बड़ीबात नहि हैं, बसअब बाताओ कि किसने उसको प्रेग्नेंट किया?"
नेहा नें कहा- “पंडितजी, आप् नाराज नहि होंगे जौ मे कहनेजा रही हूं अगर वोँ एक् पापहआ तौ."
पंडितजी बोला-“अरे नहि, पाप केसे होँ सकता हैं भला। ईश्वर एक् नया जिंदगी देरहा हैं तुम्हारी कोख मे तोँ पाप केसे होगा?ऊपर वाला जिंदगी देने वाला हैं, उसका क्याँ हैं तौ वोँ जबऊपर बैठा एक् नया जिंदगी देरहा हैं तुम्हारे अंदर तोँ क्याँ ऊपर वालाकोई पाप करता हैं भला। बिल्कल पाप नहि हैं
नेहा बोलि- “वोँ इस बच्चे केँ पिता मेरे ससुरजी हें.” फिन नेहा नें बताया कि केवलदो महीने कि प्रेग्नेन्सी हैं, उसकापेट बिल्कुल नार्मल दिखरहा थां, सपाट थां अब भि। नेहा बिल्कुल नार्मल दिखरही थि, बिल्कुल कोई नहि कहता कि वोँ पेट सें हैं।
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
पंडितजी बोला-“अरे नहि, पाप केसे होँ सकता हैं भला। ईश्वर एक् नया जिंदगी देरहा हैं तुम्हारी कोख मे तोँ पाप केसे होगा?ऊपर वाला जिंदगी देने वाला हैं, उसका क्याँ हैं तौ वोँ जबऊपर बैठा एक् नया जिंदगी देरहा हैं तुम्हारे अंदर तौ क्याँ ऊपर वालाकोई पाप करता हैं भला। बिल्कल पाप नहि हैं
नेहा बोलि- “वोँ इस बच्चे केँ पिता मेरे ससुरजी हें.” फिन नेहा नें बताया कि मात्र दो महीने कि प्रेग्नेन्सी हैं, उसकापेट बिल्कुल नार्मल दिखरहा थां, सपाट थां अब भि। नेहा बिल्कुल नार्मल दिखरही थि, बिल्कुल कोई नहि कहता कि वोँ पेट सें हैं।
पंडित कों पहले सें शक थां कि घऱ मे हि किसी नें उसकेसंग शारीरिक संबंध रखे होंगे मगर ससुरजी कों नहि
सोचा थां उसने। अंदर-अंदर पंडित थोडा बहोत खुश हौ रहा थां कि अगर अपने बूढ़े ससुरजी केँ संग नेहा नें संभोग किया हैं तोँ उसको भि चान्स मिल सकता हैं शायद। पंडित सोचने लगा कि उसकोये सभी पहले क्यूं पता नहि चला? केवल 5 दिनरह गये उसकोइस घऱ मे आने केँ लिएतब येसभी पताचल रहा हैं। इतने दिनों पहले सें पताचला होता तोँ उसको औऱ भि बहोत सें मौके मिलते नेहा केँ संग वक़्त बिताने कों, इस हसीन 19 साल कि बहू केँ संग। उसने मुश्कुराते हुए नेहा केँ हाथ कों अपनेहाथ मे लेकर थपथपाते हुएकहा- “तुम् बिल्कुल फिकरमत करो बिटिया मे इसबात कों किसी कों भि नहि बताऊँगा कभी, अब चलो मुझे बताओये सभी केसेहुआ भला?" पंडित नेहा केँ औऱ अधिक लगभगबैठ गय़ा।
उस टाइम दोनों नीचे जमीन पर्र एक् चटाई पर्र बैठेहुए थें बात करतेहुए। औऱ नेहा सें बात करतेसमय पंडित केँ घटने नेहा कि टाँग सें टकरारहे थें औऱ पंडित कां जमके खड़ा होँ गय़ा तबतब तक।
नेहा नें पंडित कों समझाया कि उसकापती कुछ नहि कर पाता थां इसलिये ससुरजी नें वोँ सभी किया जोँ बेटे कों
सको अपनावंश आगे बढाना थां तोँ नेहा कि आदत होँ गई थि ससर केँ संगसभी कुछ करने कि। नेहा नें ये नहि बताया कि वोँ यहसभी पसन्द करती थि औऱ उसके देवरु औऱ दूसरे लोगों केँ संग भि वोँ सेक्स करती थि। नेहा नें कुछऐसे बयान किया कि ऐसालगे कि मजबूरन उसको वोँ सभी करना पड़ा थां ससुरजी केँ संग। नेहा नें ये भि बताया कि उसके ससुरजी कि अंतिम ख्वाहिश थि कि वोँ अब अपने देवरु केँ संग विवाह करे औऱ वंश कों आगे बढ़ाए।
बातचीत केँ दौरान पंडित कां मनकररहा थां नेहा कों वहींपटक कर चोदे। पऱ वोँ 60 साल कां बूढ़ा थां औऱ पीछले 11 साल सें उसकी पत्नि कि स्वर्गवास हौ गय़ा थां, औऱ पीछले 11 सालों मे उसने किसी स्त्री सें संभोग नहि किया थां, औऱ अब एक् 19 साल कि जवान महिला जिसने अपने बूढ़े ससुरजी सें चुदवाया हैं उसके सामने पड़ी हुईँ थि। इससे पंडित एक् अजीब दुविधा मे पड़ गय़ा कि आगे केसे बढ़े नेहा केँ संग?
इश्तेमाल करना थां पंडितजी कों औऱ होशियार तौ थां हि तौ केसेअब 60 साल कि उम्र क्याँ करता हैं चलो देखते हें।
आरामसे बात करते वक़्त पंडित नें नेहा कां हाथ थामेहुए अपनीगोद पऱ रख लिया थां, अपनी धोती पर्र, बल्की अपनी जाँघ पर्र नेहा केँ हाथ कों दबाया हुआ थां पंडित नें उस टाइम। औऱ वैसे हि बातें करतेहुए जैसे नेहा कों दिलाश देतेहुए वोँ हाथ कों अपने लण्ड केँ लगभग लें जारहा थां। बातों मे डूबी हुई नेहा नें कुछ खयाल नहि किया थां उससमय। जब नेहा नें बातकर लियातब उसने नोटिस किया कि उसकाहाथ पंडित केँ लण्ड केँ बहोत पास हैं। तोँ नेहा अपनेहाथ कों खींचना चाहरही थि।
मगर पंडितजी नें उसे अपनेहाथ मे जोर सें जकड़ा हुआ थां औऱ वोँ बोला- “तुम्हारे देवरु केँ संग विवाह वालीबात मे कोई आपत्ति नहि हैं, मे स्वयं उसकेसंग तुम्हारी विवाह करा दूंगा। परंतु मुझेकुछ औऱ विस्तार मे बताओ नाँ बेटी, क्याँ तुम् अपने ससुरजी केँ संग सोती थि हररात कों औऱ क्याँ तुम्हारे पति कों पता थां कि तुम् उसके पिता केँ खाट पर्र सोरही हौ उसकेसंग?"
नेहा-“जी पंडितजी, पति कों सभी मालूम थां, औऱ मे हररात कों अपने ससुरजी केँ कमरे मे जाती थि औऱ सुभह तक उसी केँ संग सोती थि.”
पंडित- “औऱ तुमको सभी बहोत अच्छा लगता थां याँ ससुरजी तुमसे जबरदस्ती करता थां बिटिया?"
नेहा- “शुरुआत मे मे हिचकिचा रही थि मगर धीरे धीरेआदत हौ गई औऱ मुझको अच्छा लगनेलगा। वोँ घऱ मे मेरे पति जैसे थें."
तब तक तौ पंडित नें नेहा केँ हाथ कों अपने कड़क लण्ड पऱ दबा लिया औऱ नेहा नें उसको अच्छी तरह सें महसूस किया। तौ जल्दी नेहा नें अपनाहाथ खींचते हुएकहा- "पंडितजी, ये आप् क्याँ कररहे होँ?"
मुश्कुराते हुए पंडितजी बोले-“अरे बिटिया, मे भि तौ तुम्हारे ससुरजी केँ जैसा हि हूं। मे भि तौ इंसान हूं औऱ मेरी भि तौ फीलिंग्स हें नाँ बेटा, जिसदिन सें पहलीबार इसघऱ मे आनां शुरुआत किया हूं तभी सें तुमको बहोत हि। हसीन औऱ सेक्सी देखा मैंने, औऱ अब जबकि तुमने इतनाकुछ बता हि दिया मुझे तौ अरमान औऱ भि मचलउठे हें, मुझेसाफ लगता हैं कि तुम्ही वोँ होँ जोँ मेरी 11 साल कि प्यास कों बुझा सकती हौ। देखो बेटा, मे 11 साल सें अपनी पत्नि खो चुका हूं औऱ पिछले 11 सालों मे मैंने आज तक किसी भि स्त्री केँ तरफ नहि देखा, न् हि आज तक संभोग किया, तोँ आज मालिक नें मुझे याँ तुम्हें मेरेपास दे दिया तौ केसे मे ऐसे सुनहरे मौके कों हाथ सें जानेदूं? तुम्हीं बताओभला, मेरी रानी बिटिया."
नेहा अपनेहाथ कों उसकेहाथ सें खींचते हए खड़ी होँ गई। पंडित तेज कदमों सें नेहा केँ पीछे गय़ा जब नेहा अपने कमरे केँ तरफ जानेलगी वहा सें उठकर। पंडित नें नेहा कों पीछे सें पकड़ा औऱ इसबार उसका लण्ड सीधे नेहा कि गाण्ड पऱ रगड़ने लगे। औऱ वैसे हि खड़े पोजीशन मे पंडित नें अपनीकमर हिलाते हुए लण्ड कों नेहा कि गाण्ड पर्र रगड़ता गय़ा जैसे उसकोचोद हि रहा थां।
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नेहा कि समझ मे नहि आँ रहा थां कि अब वोँ क्याँ करे? पिछले 35 दिनों सें नेहा नें भि सेक्स नहि किया थां
औऱ वोँ भि गर्म होनेलगी थि। मगर पंडितजी कि इज्जत, धर्म कर्म, औऱ रीति रिवाज औऱ परंपरा इन सबको सोचते हुए नेहा दुविधा मे पड़ गई थि, धार्मिक मामलों कों भि सोचरही थि औऱ इनसभी चीज़ों कों सोचते हुए उसकेमन मे कुछ नहि सूझरहा थां। नेहाबहत कन्फ्यू ज्ड थि मगर संग-संग उसके जिश्म कि गर्मी भि बढ़ी हुई थि, वोँ प्यासी भि थां सेक्स केँ लिए, एक् मर्द कि छुवन थि औऱ खासकर उम्र वाला एक् मर्द थां वहा औऱ उसका लण्ड रगड़रहा थां उसके जिश्म पऱ। नेहा उसकोपश नहि कररही थि मगरआदर औऱ इज्जत सें बात करने कि कोशिश कररही थां।
नेहा नें कहा- “पंडितजी, आप् एक् पंडित हौ औऱ ये आपको शोभा नहि देता। आपको अपनी इज्जत औऱ स्टेटस कां खयाल करना चाहिए.”
मगरतब तक पंडित नें नेहा केँ आँचल कों खींच दिया थां। नेहा कि ब्लाउज़ उसकी कड़क चूचियों सें उभरी हुई थि, उसके निपल्स जैसे एक् खड़ेहए लण्ड कि तरह ब्रा केँ बाहर् निकलना चाहते थें। पंडित नेहा केँ पीछे, उसके कंधों केँ ऊपर सें उसकी क्लीवेज कों देखते हुए अपने लण्ड कों औऱ जोर सें दबाते हुए उसके चूतरों पऱ रगड़ते
जारहा थां। औऱ कहा- “नेहा बिटिया, इस टाइमभूल जाओ कि मे कोई पंडित हूं, इस टाइम मे एक् भूखा इंसान हूं औऱ तुम्हारे पास वोँ खाने वालीचीज हैं जोँ तुम् मुझे खिला सकती होँ, बाकीसभी कुछ बिल्कुल भूलजाओ तुम्। मुझे पूरा यकीन हैं कि तुम्हारे पूरेबदन मे भि वोहीभूख हैं, क्योंकी पिछले 35 दिनों सें तुम् व्रतरख रही होँ नां इसकेलिए। क्यूं अपने जिस्म पर्र अत्याचार कररही हौ बिटिया?"
नेहा नें अपने जिश्म कों पूरीतरह सें पंडितजी केँ सामने घुमा लिया औऱ अब पंडितजी कां लण्ड नेहा केँ पेट केँ नीचे बुर केँ बहोत लगभगछू रहा थां दबाते हुए। औऱ नेहाअब आमने सामने थि पंडितजी केँ औऱ नेहा केँ लबों पर्र एक् हल्की सि मुस्स्कान जैसी थि।
उस मुश्कान कों देखकर पंडितजी नें स्वयं केँ मन मे कहा-“हाँ। अबये मुझे करने देगी, अलबत्ता ये गर्म हौ गई लगता हैं। हैं तौ एक् बहोत हि गर्ममाल ये लड़की, मुझेबस औऱ ज़्यादा बातों मे उलझाना हैं इसेअब। रास्ते मे आँ रही हैं ये। इसको भि जरूरत हैं एक् लण्ड कि मुझे पक्का यकीन हैं."
पंडित नें अपने चेहरे कों नेहा कि छाती पऱ रगड़ते हुए भुनभुनाते हुयेकहा- “तुम् इस टाइम एक् बेहद सुंदर परी कि तरह होँ जिसको ऊपर वाले मालिक नें मेरी प्यास बुझाने केँ लिए हि भेजा हैं। मे पछतारहा हूं कि क्यूं शुरुआत मे हि मैंने तुमको अपनीतरफ नहि किया?कई बार हम् दोनों नें बहोत आनंदकर लिया होताअब तक."
ये सुनकर नेहा नें उसकी बाहों मे जकड़े हुए हि उससे पूछा- “क्याँ आप् शुरुआत सें हि मुझको उसनजर सें देखते थें? इससे पहले हि कि मैंने आपकोये सभीकुछ कहा."
पंडितजी नें नेहा कि कमर कों औऱ ज़्यादा अपने नीचे वाले हिस्से सें दबाते हुए जवाब दिया- “बेशक। मे तुमको निहारा करता थां, तुम् होँ हि इतनी गर्म, सेक्सी कि दुनियां कां कोई भि मर्द तुमको उसनजर सें देखेगा, अपनेखाट पऱ लेटना चाहेगा.”
तब तक नेहा नें तकरीबन अपने आपको पंडितजी कों समर्पण कर दिया थां औऱ वोँ स्वयं कों पंडितजी कि बातों मे रंगने देरही थि औऱ उसकी रगड़ सें लुत्फ़ उठाने लगी थि छोटी-छोटी सिसकारियों केँ संग।
उस मौके कां फायदा उठाते हुए पंडित अपने लण्ड कों नेहा कि बुर केँ ऊपरदबा रहा थां, नेहा केँ चेहरे मे देखते हए कि क्याँ वोँ कोई शिकायत करेगी उसके लण्ड कों अपनी बुर पऱ महसूस करके। साड़ी मे लिपटी पेटीकोट केँ अंदर हि सही पंडितजी अपने धोती केँ अंदर सें हि फिन भि नेहा कि बुर पऱ अपने लण्ड कों दबाएजा रहा थां हल्के-हल्के रगड़ते हुए। फिन धीरे-धीरे सें पंडित नें अपनी धोती कों हटाकर अपने लण्ड कों हाथ सें नेहा कां पेटीकोट उठाकर उसकी जांघों पऱ दबाया, नेहा केँ चेहरे मे देखते हुए।
नेहा नें कुछ नहि कहा औऱ पंडितजी केँ लण्ड कों महसूस करतेहुए अपनी आँखों कों बंदकर लिया।
पंडित समझ गय़ा कि अब नेहा बिल्कुल रेडी होँ गई हैं, तोँ पंडितजी नें नेहा कों बाहों मे उठाया औऱ उसकेखाट पऱ लेटा दिया औऱ नेहा चुपचाप लेट गई पंडितजी केँ सामने। अपने पलंग पऱ नेहा लेटी हुइ थि, अपने पाँव लटकाए हुए एक् अंगड़ाई लेँ रही थि। जबकी पंडित नें अपने वेस्ट निकाला औऱ जल्द सें धोती कों उतरा नेहा केँ जिश्म कों खाट पऱ अपनी आँखों केँ सामने उसतरह सें लेटे देखते हए। औऱ नेहा भि पंडितजी कों वासना भरी नजरों सें देखने लगी थि तब तक।
पंडित नें जल्द सें फिन नेहा कि टाँगों कों ऊपर उठाते हए उसकी साड़ी औऱ पेटिकोट कों उसके पैरों सें ऊपर उठाया उसकी गोरी टाँगों कों निहारते हुए उसकीलार टपक पड़ी, जब नेहा केँ घुटनों कों देखा औऱ आहिस्ता ऊपर औऱ ऊपर उसकी सफेद गदराई जांघों पर्र उसकीनजर पड़े। जब पंडित नेहा कि जांघे देखरहा थां तोँ नेहा पंडित केँ चेहरे मे उस खुशी कों देखरही थि औऱ समझरही थि कि वोँ कितनी खुशीइस समयउस पंडित कों देने वाली थि।
पंडित नेहा कि गोरी चमड़ी पऱ अपनी हथेली फेरता गय़ा बहोत प्रेम औऱ धीरे-धीरे निहारते हुए औऱ अपना पूरा वक्त लेतेहुए बिल्कुल संतुष्ट होकरसभी कुछकर रहा थां इस नायाब जिश्म कों अपनेहाथ मे लेकर जिसको ईश्वर नें उसके झोली मे अचानक डाल दिया थां। पंडित सोचरहा थां ईश्वर नें उसको एक् नायाब तोहफा दे दिया हैं इस उम्र मे। ये एक् बिन माँगी दुआ थि जोँ कुबूल होँ गई थि।
औऱ नेहा पंडित केँ चेहरे मे वोँ खुशी देखते हुएसोच रही थि कि कितनी सख्त जरूरत उस पंडित कों हैं आज उसके कामुक जिश्म सें प्रेम करने कि। फिन नेहा कों भि लगा कि ये कदरट कां खेल थां। किश्मत नें जानबूझ करआजउन दोनों कों एक् संग किया थां। दोनों तरफ सें बराबर कि आगलगी हुइ थि, दोनों प्यासे थें, दोनों केँ जिस्म कों सेक्स कि सख़्त जरूरत थि।
नेहासोच रही थि कि पंडित सें अधिक तौ शायद उसको जिश्म कि आग बुझाने कि जरूरत थि। औऱ नेहा नें ये भि सोचा कि शायद उसकी किश्मत मे हि ऐसा लिखा हैं कि वोँ उम्र वाले लोगों कि प्यास कों ज़्यादा बुझाए। वोँ सोचने लगी कि वोँ बूढ़े लोगों केँ संग इतना एंजाय करती थि हरबार कि इसको एक् सेक्स कां खेलसमझ लिया औऱ सोचा कि ये भि एक् खेल हि हैं।
फिन महीनों सें भूखे एक् भेड़िये कि तरह पंडित नेहा कि गदराई जांघों कों चाटने चूसने लगा। पंडित नेहा कि पैंटी तक पहुंचा औऱ पैंटी कों हि चूसने लगा जोँ बिल्कुल गीली होँ चुकी थि। पंडित नें सोचा-“पता नहि कब सें गीली होँ चुकी हैं उसके छुवन सें, मतलब चुदवाने कि ख़्वाहिश स्वयं थि नेहा कों पहले सें हि."
असल मे जब चटाई पर्र बैठे दोनों बातें कररहे थें औऱ पंडित नें नेहा केँ हाथ कों अपने लण्ड केँ पास किया थां धोती केँ ऊपर, तभी सें नेहा कां पानी निकलना शुरुआत हौ गय़ा थां। फिन उसकेबाद जब पंडित नें नेहा कों जकड़ा
औऱ अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड पऱ रगड़ना शुरुआत किया तोँ नेहा औऱ भि भीगती गई नीचे। पंडित नें पैंटी कों चाटा, चूसा, औऱ आखिर मे उसको निकाल फेंका।
फिन पंडित नें अपनीजीभ सें काम किया नेहा कि बुर पऱ पंखुड़ियों कों उंगलियों सें हटाते हुए औऱ अपनीजीभ
कों बुर केँ अंदर डाला। नेहाबेड कों रगड़ने लगी अपने जिश्म कों साँप कि तरह ऐंठते हुए जैसे कि उसको जीवन मे पहलीबार कोईचूस रहा थां, ऐसा महसूस होँ रहा थां उसे। जोरों सें सिसकारियां लेतेहुए तड़पती जारही थि। नेहा कों वोहीसभी फीलिंग्स होँ रही थि जोँ उसको पहलीबार हुई थि, जिसरात कों उसके ससुरजी नें उसको चोदा थां।
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story - Kahani ab aur interesting hogi
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