Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
ये 35 दिनों केँ व्रत कि वजह सें थां। नेहा कों लगता थां कि उसका जिश्म फिन सें एक् कुँवारी केँ जिश्म मे तब्दील होँ गय़ा हैं उससमय। एक् केँ बाद एक् औऱ जोरदार तड़पती आवाज़ देतीजा रही थि जोरों सें नेहा।
आवाजें आँ रही थि बहुतजोर सें- “ओहह। आआहह। आहह-आहह। आहह-आहह। उफफ्फ़। हाँ, बढ़ते चलो पंडितजी, आप् बहोत अच्छा कररहे हौ। हाँहाँ हाँ। करतेरहो, करतेरहो। मुझे बहोत अच्छा लगरहा हैं। मुझेयह चाहिये। मुझे इसकी बहोत सख्त जरूरत हैं। पंडितजी औऱ करो औऱ करो, मुझको खुशकरो। मेरी गहराई मे घुस केँ समाजाओ पंडितजी। उफफ्फ़। उइइ मम्मी। इस्स्श.”
फिन नेहा स्वयं हि अपनी साड़ी उतारने लगी औऱ जल्द सें अपनी ब्लाउज़ औऱ ब्रा भि निकाल फेंका नेहा नें, औऱ
अपने आपको बिल्कुल नंगीकर दिया पंडितजी केँ लिए। तब नेहा नें पंडित कां सर अपनेहाथ मे थामा औऱ उसको अपनी प्यासे चूचियों केँ पास किया। उसके मुँह कों अपनी चूचियां पर्र दबाया नेहा नें।
नेहा कि मजबूत भारी-भारी चूचियों कों देखकर पंडित कों अपने पूरे वीर्य कों छोड़ देने कां मन किया। चूचियों कों मन भरकर मसला पंडित नें औऱ चूसना शुरुआत किया, जिससे नेहा कि प्यास औऱ सिसक बढ़ती गई औऱ वोँ बेहाल होती गई अपने छाती कों पूरीतरह सें पंडित केँ हवाले करतेहुए, अपनी जिश्म कों ऐंठती गई खाट कों बुरीतरह सें रगड़ते हुए। अपनी फूलीहुए निपल्स पऱ पंडित कि जीभ कों महसूस करतेहुए नेहा बेकाबू होतीजा रही थि। फिनकुछ देरबाद बिनाकुछ बोले नेहा नें स्वयं पंडित कि अंडरवेर कों निकाला औऱ उसकेतने हुए लण्ड कों अपने मुँह मे लें लिया।
पंडित नें एक् अजीब सि आवाज़ निकाली अपने लण्ड कों नेहा केँ गर्म मुँह मे महसूस करतेहुए औऱ गुर्राते हुएकहा- “जीवन मे किसी नें उसकोकभी भि नहि चूसा हैं आज तक.” वोँ तड़पता गय़ा, उसकाबदन काँपने लगाजब तक नेहा नें उसके लण्ड कों खूब चूसा।
इतने दिनों बाद नेहा नें एक् लण्ड कों बेहद एंजाय किया अपनी नाजुक उंगलियों मे लेकर, उसको बहोत प्रेम सें सहलाया, अपनी उंगलियों कों फेरा, इस तरह सें उसको प्रेम किया जैसे किसी मूर्ति कि पूजा करते हें, इसकदर प्रेम औऱ भक्ति सें नेहा नें उस लण्ड कों पूजा, तब चाटना औऱ चूसना शुरुआत किया। अपनीजीभ कों उसकी पूरी लंबाई तक फेरा। नेहा नें पंडित केँ नीचे केँ बाल्स कों भि चाटा औऱ चूसा, फिन लण्ड चूसते टाइम अपनेहाथ सें लगरहा थां कि नेहा लण्ड कों खा जाएगी। चबा जाएगी। लगता थां बरसों सें भूखी थि एक् लण्ड केँ लिएइस कदरउसे चूसेजा रही थि।
औऱ बहोत जल्द हि पंडित चिल्लाया- “रुको, रुको बिटिया, वरना तुम्हारे मुँह मे अभि झड़ जाऊँगा मे."
नेहा रुकी औऱ कहा- “नहि प्लीज। अभि मत झड़ना, आपको अभि मेरे अंदर घुसना हैं, मुझे इसकी सख़्त जरूरत हैं मेरे अंदर अभि। आप् कंट्रोल कीजिए, अपने आपको संभालिए औऱ झड़ने मत दीजिए अभि."
पंडित नें स्वयं कों संभाला औऱ रुक गय़ा अपने आप् पऱ कंट्रोल करतेहुए, मगर बहुत मुश्किल सें। औऱ नेहा नें पंडित कों पीठ केँ बल लेटने कों कहा औऱ फिन उसकेऊपर चढ़ गई। नेहा नें अपने टाँगें फैलाई, पंडित केँ लण्ड कों अपनेहाथ मे लिया औऱ स्वयं अपनी बुर मे दाखिल करतेहुए उसपरबैठ गई, पंडित केँ लण्ड कि लंबाई कों अपने अंदर आहिस्ता घुसाते हुए, महसूस करतेहुए, एक् अजीब सिसकी औऱ तड़पती आवाज़ केँ संग। फिन नेहा घोड़े कि सवार करनेलगी पंडित केँ लण्ड पऱ बैठकर।
बिल्कुल लगरहा थां कि नेहा एक् घोड़े पर्र बैठी थि औऱ जिसकदर हिल औऱ उछलरही थि गाण्ड उछालते हुए, लग रहा थां कि घोड़े कि सवारी हि कररही थि। दोनों इतने प्यासे थें कि बिल्कुल देरी नहि हुइ, बहोत हि जल्दचंद लम्हों मे हि मात्र 10-12 धक्कों केँ बाद हि नेहा कों झड़ने कां एहसास होनेलगा, क्योंकी 35 दिनों तक नहि किया थां नाँ।
फिन बहोत जोरों कि आवाज़ मे नेहा तड़पी- “आआहह। हाँन्न्न मेरे प्यारे पंडितजी, कमाल केँ हौ आप् भि इस्स्स्स। आपने मुझेचोद हि दिया पंडितजी। पंडित होकर आपने एक् अबला नारी कों चोद हि दिया पंडितजी। क्याँ बात हैं वाहह, एक् विधवा कों चोद दिया आपने पंडितजी, क्याँ किश्मत पाया हैं आपने भि। पंडितजी बड़े ठर्की निकले आप्। पंडितजी, चुदक्कड़ निकले आप् तौ। आअहह। उफफ्फ़। उईई मेरी मां। मे तौ झड़ गई री."
फिन हाँफते हएजब पंडित झड़ने वाला थां तौ नेहा नें उससेकहा- “आप् बेफिकर होकर अपने वीर्य कों मेरीकोख केँ अंदर हि छोड़ सकते होँ, प्रेग्नेंट हूं नां तौ कोई फर्क नहि पड़ता। बेफिकर मेरे अंदर हि झड़जाओ पंडितजी."
फिन पंडितजी नें अपने लण्ड कों नेहा केँ अंदर धंसाते हुए अपने वीर्य कों उसकी बुर कि गहराई मे छोड़ा तड़पते, हाँफते औऱ काँपते हुए। उसने नेहा कि कमर कों जोर सें दबोचा हुआ थां औऱ उसकी दोनों टाँगें थरथराकर काँपने लगी थि झड़ते वक़्त। उसने अपनी गर्दन उठाकर नेहा केँ मुँह कों अपने मुँह मे लिया औऱ उसकीजीभ कों चूसने लगा। जबकि उसका लण्ड नेहा कि गहराई मे अपना पानी छोड़रहा थां।
पंडितजी बेहदखुश हुए। उसको एक् पछतावा ये थां कि पिछले 35 दिनों तक उसनेकुछ भि नहि किया थां। मगर उसने सोचा कि अब तौ दरवाजा खुल गय़ा हैं तौ अगले 5 दिनों केँ लिये औऱ उसकेबाद भि क्यूं नहि आकर आनंद लें सकेगा अब। तौ पंडित वहीं लेटारहा नेहा केँ बगल मे करने केँ बाद औऱ नेहाउठी औऱ स्वयं कों अपनी साड़ी मे लपेटा उसने, ब्रा औऱ ब्लाउज़ नहि पहना उसनेबस साड़ी मे स्वयं कों लिपटा तौ पंडित नें नेहा कि चूचियों कों उसकी साड़ी मे उसतरह सें लिपटे वासना भरी नजरों सें देखा औऱ सोचा कि उसका ससुरजी सही करता थां उसको चोदकर, क्योंकी नेहाचीज हि ऐसी थि कि कोई उसको चोदे बिना नहि छोड़ सकता थां। वोँ शायद बनाई हि गई थि मर्दो कों खुश करने केँ लिए, ऐसा पंडित नें सोचाउस टाइम नेहा कों निहारते हुए।
| तोँ नेहा बोलीं- "मैंने ब्लाउज़ नहि पहना क्योंकी अबजब नेहा नें पंडित कों उसकोउस नजर सें दे नहाने जानां हैं नां.”
पंडित नें कुछदेर औऱ नेहा सें बात किया। उसकी विवाह केँ बारे मे बात किया प्रवींद्र सें जौ होने वाली थि।
नेहा नें पंडित सें कहा कि उसने अभि तक प्रवींद्र सें अपनी प्रेग्नेन्सी केँ बारे मे कुछ नहि बताया हैं।
पंडित नें पूछा- क्याँ वोँ उसको बोलेगी कि बच्चा उसके बाप कां हैं?
नेहा नहि चाहती थि कि पंडित कों पताचले कि अपने देवर जी केँ संग भि उसका वैसा हि नाता हैं तोँ नेहा नें कहा कि नहि बताएगी प्रवींद्र कों।
पंडित नें कहा-“हाँ सही हैं, दुनियां कों यही लगना चाहिए कि तुम् अपने पति सें प्रेग्नेंट होँ, फिनसभी ठीक होँ जाएगा, औऱ फिन मे गवाही दूंगा कि मुझेपता थां कि तुम् अपने पति सें प्रेग्नेंट थि शुरुआत सें हि। मे कहूँगा कि तुम् औऱ तुम्हारे पति नें उसके देहांत सें पहले मुझे अपनी प्रेग्नेन्सी केँ बारे मे बताया थां, क्योंकी तुम् लोग किसी तावीज केँ लिएआए थें मेरेपास उससमय."
नेहा कों आइडिया अच्छा लगा औऱ पंडित कों बैंक्स किया। असल मे नेहा कों प्रवींद्र सें सभीकुछ सच-सच बताना थां, वोँ सही मौके कि इंतेजार मे थि उसकोइस बात कों बताने केँ लिए।
पंडित नें नेहा कों एक् बड़ी सि किस करके उससे विदा लिया औऱ कल केँ लिए सजधजकर रहने कों कहा। औऱ नेहा नहाने चली गई।
***** *****
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
सुभाष केँ संग धुलाई केँ पत्थर केँ पास
नेहा केँ घऱ केँ सामने गैरेज वाले उसके आंगन मे बार-बार ताकरहे थें कि काश नेहा कि एक् झलक देखने कों मिलजाए। ज्ञान नें स्वयं सें कहा कि वोँ बहोत बदनसीब थां कि मात्र एक् बार नेहा कों खाट पर्र लेटा पाया, क्योंकी दूसरे सुभह कों भि वोँ तौ नेहा केँ यहाआने वाला हि थां जबकि नेहा नें स्वयं उसकोआने केँ लिएकहा
थां औऱ उसी सुभह कों उसके ससुरजी कि व्हीकल जा टकराई थि। ज्ञान कों बड़ी बेसब्री थि नेहा केँ पलंग पर्र दोबारा चढ़ने कों औऱ उसको अपने नीचे लेने कों उसीदिन सें। वोँ इंतेजार मे थां औऱ बेसब्र भि थां पिछले 35 दिनों सें। तकरीबन हररोज मूठ मारता थां नेहा केँ गर्म जिश्म कों सोचकर औऱ उसदिन वाले नेहा केँ संगहर गुजारे हुए पलों कों सोचकर।
उसकी आँखों केँ सामने अब भि नेहा कां नंगी जिश्म, उसकी मुश्कुराहट, उसकी नटखट अदायें औऱ उसकी सुरीली आवाज़ गूंजती थि। वोँ आशिक हौ गय़ा थां उसके जिश्म कां, उसकी आवाज़ कां औऱ उसके शरीर कि खुशबू कां। आज भि उसको नेहा केँ जिश्म कि खुशबू महकती थि जब वोँ उसकोयाद करकेमूठ मारता थां, उसके कानों मे नेहा कि मीठी आवाज़ सुनाई देती थि, उसकी मुश्कुराहट दिखाई देती थि। इन सबको सोच-सोचकर ज्ञान दीवाना होताजा रहा थां बड़े मुश्किल सें स्वयं कों संभाल रहा थां औऱ अपने आपको काबू मे रखाहुआ थां पिछले 35 दिनों सें।
तोँ इसदिन कों मुदतबाद सब गैरेज वालों नें नेहा कों एक् टी-शर्ट औऱ स्कर्ट मे कपड़े धोने वाले पत्थर केँ पास जाते देखा, हाथ मे कपड़े कि बाल्टी लिएहुए। उसकेबाल भीगेहुए थें औऱ पानी कि बूंदें टपकरही थीं उसकीपीठ पर्र टी-शर्ट कों भिगोते हुए, क्योंकी वोँ अभि-अभि नहाकर निकली हुई थि पंडित केँ जाने केँ बाद।
सुभाष नें उसको सबसे पहले देखा औऱ बहोत खुश होतेहुए ज्ञान सें कहा- “नेहाआज टी-शर्ट औऱ स्कर्ट मे बाहर् आई हैं, 40 दिन हौ गये क्याँ?"
ज्ञान जल्द सें खड़ाहआ नेहा कों देखने केँ लिए औऱ नेहा नें गैरेज कि तरफ देखते हुए सबको एक् बहोत हसीन प्यारी सि स्माइल किया।
जल्दी बाद सुभाष गय़ा नेहा सें मिलने, पानी भरने केँ बहाने। नेहा उम्मीद कररही थि कि वोँ आएगा। नल केँ पास पहँचा सुभाष। आजफिन सें नेहा वैसे हि झुककर कपड़े धोरही थि औऱ उसकी क्लीवेज पूरीतरह सें दिखरही थि। सुभाष सें रहा नां गय़ा, औऱ उसने नेहा केँ पिछवाड़े पर्र अपना पूराहाथ फेराआज। नेहा नें कुछ नहि कहाबस मुश्कुराती रही, औऱ सुभाष कों झूठी गुस्से भरीनजर सें देखा। पिछली बारजब सुभाष नें नेहा केँ संगऐसे लम्हे बिताए थें, तभी वोँ नेहा कों पा सकता थां ज्ञान सें पहले हि। मगर ज्ञान नें होशियारी किया थां उस सुभह कों सुभाष सें पहले सवेरे गैरेज आकर।
अभि नेहा नें नहाया थां, उसकेबल भीगेहुए थें, पीठ पर्र टी-शर्ट भीगी हुइ थि, उसके जिश्म सें बहोत अच्छी खुशबू आँ रही थि औऱ सुभाष उसकेपास खड़ा थां उसको सूंघते हुए। नेहा केँ जिश्म सें आती खुशबू नें सुभाष केँ लण्ड कों कड़क खड़ाकर दियासमय भर मे हि। सुभाष नें अपने होंठों कों नेहा कि गर्दन केँ पीछे वाले हिस्से पऱ फेरा तोँ जल्दी नेहा नें गैरेज कि तरफ देखा कि कहीं ज्ञान नें सुभाष कों वैसा करते तौ नहि देखा।
फिन सुभाष नें कहा- “भाभी, पिछली बारजब मे यहा सें गय़ा थां तोँ आपके बारे मे सोचता रहा, आपकोऐसे कपड़े धोतेहुए देख्ना बहोत हि पसन्द हैं मुझे। आपको हमेशा ऐसे देखते रहने कों मन करता हैं मेरा, औऱ जब आप् झुककर बाल्टी मे सें कपड़े लेती होँ तब भि आपको देख्ना बेहद मनपसंद करता हूं, आप् बहोत हि उत्तेजक लगती होँ भाभी.'
नेहा उसको देखकर हँसरही थि फिनकहा- “देखो कहानियां मत सुनाओ मुझे औऱ बहाने मत बनाओ, मुझे अच्छी तरह सें पता हैं कि तुम् क्याँ देखते होँ औऱ तुम् मुझसे क्याँ चाहते हौ? सभीपता हैं मुझे."
सुभाष नें जल्दी नेहा केँ ठीक पीछे खड़े होतेहुए उसको पीछे सें हि जकड़ा, अपने हाथों कों उसकेपेट पर्र करतेहए औऱ अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड पऱ दबाया। फिन अपनीजीभ कों नेहा केँ पीछे गर्दन पऱ उसके भीगे बालों कों हटाकर फेरते हुएकहा- "नेहा भाभी, आप् कितनी अच्छी गंधरही होँ.”
नेहाअब भि बहोत गर्म थि 35 दिनों केँ व्रत केँ बाद। औऱ फिन सें रास्ते केँ उसपार गैरेज मे देखने केँ बाद नेहा बोलीं- “तुम्हारा बास ज्ञान, वहा सें हमकोदेख नहि पाएगा। क्याँ तुमको वहा सें मे दिखती हूं जबयहा होती
हूं तोँ."
सुभाष नें कहा- “नहि, यहा नहि दिखता, फिन भि थोडा उसतरफ चलते हें, उधर गैरेज मे सें बिल्कुल नहि दिखता."
नेहा सुभाष कां हाथ थामेचंद कदम औऱ बगल मे गई जिस स्थान पहलीबार प्रवींद्र नें उसको खड़े-खड़े चोदा थां, जब वोँ कपड़े धोने कों आई थि इस स्थान। दोनों कों सभीकुछ जल्द करना थां क्योंकी गैरेज सें औऱ कोई भि आँ सकता थां वहा।
औऱ देर नां करतेहुए सुभाष नें नेहा कों बाहों मे भर लिया औऱ उसकीजीभ नेहा केँ मुंह मे थि। दोनों एक् दूसरे केँ जीभ कों चूसरहे थें। सुभाष केँ हाथ नेहा कि नर्म स्कर्ट उठारहे थें उसकी गाण्ड पर्र सें, उसकी पैंटी कों अपनी हथेली पऱ महसूस करतेहुए। नेहा कों इसकी सख्त जरूरत थि, पंडित सें करने केँ बाद उसके जिश्म कि आग शांत नहि हुइ थि बल्की औऱ भड़कगाइ थि, तोँ उसको औऱ भि अधिक प्यास बुझानी थि। साफ शब्दों मे नेहा कों चुदाई कि औऱ सख़्त जरूरत थि। जब सुभाष कां हाथ उसकी पैंटी पर्र पहुंचा, उसकी बुर केँ पास तोँ नेहाफिन सें बिल्कुल गीली हौ गई।
अब क्योंकी दोनों बाहर् थें तौ सभीकुछ बहोत जल्द, तेजी सें करना थां। जल्द सें सुभाष नें नेहा कि बाहों कों ऊपर उठाकर उसकी टी-शर्ट कों बाहर् निकाला औऱ अपनेसर कों उसकी दोनों चूचियों केँ बीच मे घुसाया औऱ अपने चेहरे कों उसकी नर्म चूचियां पर्र महसूस करतेहुए सुभाष कों जैसे जन्नत कां सफर करने कों मिल गय़ा। नेहा नें उससे जल्द करने कों कहा, तोँ सुभाष बिना अप्रीशियेट किए जल्द सें उसकी चूचियों कों चूसने लगा अपने हाथों सें उन्हें मसलते हुए।
सुभाष भूखालग रहा थां, प्यासा लगरहा थां, कहा- "इनको पीने कां मनकररहा हैं भाभी, दूध हैं ये पिलादो नाँ भाभी."
नेहा नें मुश्कुराते हुएकहा- “7 महीने बाद अपनादूध पिला दूंगी तुमको.'
सुभाष नें नेहा कि बातों पर्र ध्यान नहि दिया औऱ चूसता चाटता गय़ा उसकी दोनों चूचियों कों मजे लेतेहुए।
औऱ लगेहाथ सुभाष उसकी ब्रा कों अनहक करताजा रहा थां जब तक उसको बिल्कुल निकालकर जमीन पर्र गिरा नाँ दिया, औऱ नेहा बार-बार बाहर् झाँकरही थि।
फिन सुभाष नीचेबैठ गय़ा नेहा कि टाँगों केँ आगे, वोँ खड़ी थि दीवार सें पीठकिए हुए। सुभाष नें नेहा कि पैंटी कों नीचे खींचा औऱ उसकी शेवन चिकनी बुर पऱ उसका मुँह गय़ा। सुभाष नें ऊपर सें बुर कों चाटना शुरुआत किया औऱ आहिस्ता नीचे चाटता गय़ा जब तक कि उसकाजीभ नेहा केँ गीले हिस्से पऱ पहुंचा तौ सुभाष कों नमकीन लज्जत आईजीभ पऱ तोँ उसके जिश्म मे एक् कंपकंपी सि उठी, पऱ वोँ चाटता गय़ा औऱ जीभ कों बुर केँ छेद पऱ घुमाया सुभाष नें। नेहा आरामसे सीसकने लगी तड़पते हुए। फिन उसकी तड़प बढ़ने लगी औऱ उसका जिश्म ऐंठने लगा सुभाष केँ बालों कों अपनी मुट्ठी मे जकड़े।
फिन सुभाष खड़ाहुआ औऱ अपने पैंट कि जिप खोला औऱ अपने लण्ड कों नेहा केँ पेट पर्र दबाया फिन रगड़ा, मगरतब तक नेहा नीचेबैठ गई थि औऱ उसके लण्ड कों अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ चूसने लगी। सुभाष मुश्कुराया, फिन हँसा औऱ नेहा केँ मुँह मे लण्ड अंदर-बाहर् करनेलगा खड़े पोजीशन मे हि। नेहा केँ एक् हाथ नें सुभाष कां लण्ड पकड़ा हुआ थां औऱ दूसरा हाथ सुभाष कि कमर, बल्की उसकी गाण्ड पऱ थअ। उसके मुँह मे सुभाष केँ लण्ड कां आनां जानां थां।
क्योंकी सभी जल्द-जल्द कररहे थें, इसलिये नेहा कों फिन सें खड़ा होना पड़ा क्योंकी सुभाष इंतेजार कररहा थां उसके अंदर लण्ड घुसाने केँ लिए। सुभाष नें नेहा कि एक् टांग कों ऊपर उठाकर उसकी जाँघ पकड़े हुए थामा, औऱ अपना लण्ड नेहा कि बुर मे ठूसा जौ आसानी सें अंदरघुस गय़ा गीली होने केँ कारण। तब सुभाष नें नेहा कों जरा सां ऊपर उठाया उसकी गाण्ड पकड़कर, औऱ नेहा नें अपनी दोनों टाँगों कों सुभाष कि कमर पर्र क्रॉस कर दिया, उसकी बुर केँ अंदर उसके लण्ड केँ संग। फिन नेहा नें अपनी बाहों कों सुभाष केँ कंधे पऱ करके उसको जकड़ा।
अब नेहा कां मुँह सुभाष कां जीभखा रही थि औऱ नीचे उसकी बुर सुभाष कां लण्डखा रही थि। एक् केँ बाद एक् जबरदस्त धक्का दिएजा रहा थां सुभाष औऱ हॉफने लगा थां, उसको बेहद आनंद आँ रहा थां इतनी हसीन जवान भाभी कों चोदते हुए, संग-संग नेहा कि जीभ, गाल, गला, चूचियों कों चूस भि रहा थां, बुर मे धक्का देतेहुए। फिन बहोत हि जल्द सुभाष झड़ने कों आया औऱ गुर्राया कि वोँ झड़ने वाला हैं।
नेहा नें अपनी नर्म आवाज़ मे उसके कानों मे धीरे-धीरे सें तड़पती आवाज़ मे कहा- “मेरे अंदर हि झड़ सकते हौ फिकर कि कोईबात नहि कुछ नहि होगा, मेरी गहराई मे वीर्य छोड़ो सुभाष, ऊओहह। इस्स्स्स। आआह्ह."
। ओऊव्वव।
औऱ सुभाष नें अपनीतरफ सें तड़पती आवाज़ मे आवाजें निकाली- “अरे वाहह.वाउ। हाँ। सस्स्स्स बहोत आनंद आँ रहा हैं भाभी.ओहह। माँ गोड, यू अरे ग्रेट नेहा भाभी.हाँ आहह-आहह। इस्स्स्स."
औऱ सभी हौ गय़ा बहोत जल्द, सभी तेजी केँ संगहुआ, जैसे अचानक थां सभीकुछ, बिना सोचे समझे, बिना प्लान किएबस सभी हौ गय़ा जल्द-जल्द। फिन बड़ी तेजी सें नेहा नें अपनी टी-शर्ट बिना ब्रा केँ पहना औऱ ब्रा औऱ पैंटी कों टब मे डाल दिया धोने केँ लिए, फिन जल्द सें बाहर् देखते हुए कि कोईदेख तौ नहि रहा, कपड़े धोने वाले पत्थर केँ पासचली गई।
पऱ हाँदो टीनेजर्स जोँ गैरेज मे अप्रैटिस थें वो दोनों नेहा कि तरफदेख रहे थें पत्थर केँ पासआते हुए।
फिन सुभाष नें लौटने सें पहले नेहा कों किस किया, नेहा नें उसकिस कों रेस्पांड किया औऱ उससेकहा- “अपनेबास सें कहना कि वोँ मुझसे मिलेआज। उसशाप वाले नें रेंटल केँ बारे मे कुछ बातें बताने कों कहा हैं उसको."
* * * * * * * * **
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
औऱ ज्ञान दुबारा अब सुभाष नें गैरेज वापस जाकर ज्ञान सें कहा कि नेहा उससे मिलना चाहती हैं किसी जरूरी काम केँ लिए। अब नेहा क्यूं ज्ञान सें मिलना चाहती थि ये तोँ जाहिर हैं। इन 35 दिनों केँ उपवास केँ बाद नेहा इतनी गर्म हौ गई थि कि उसकामन हि नहि भररहा थां, वोँ दिनभर चुदना चाहती थि अब।
कुछदेर बादजब नेहातार पऱ कपड़े सूखने केँ लिए टाँगने लगी तोँ ज्ञान वहा आंगन मे गय़ा उससेबात करने। ज्ञान बहोत खुश थां नेहा कों एक् टी-शर्ट औऱ स्कर्ट मे देखने कों नां कि उस सफेद साड़ी मे जिसमें उसका मातम दिखाई देता थां। इतने दिनों तक जब नेहा सफेद साड़ी पहना किया करती थि तब एक् किश्म कि इज्जत करते
थें सभी उसकी, मगर अबउस टी-शर्ट औऱ स्कर्ट मे वोँ बहोत गर्म औऱ सेक्सी दिखती थि, अबकोई इज्जत विज्जत कहां करताकोई, अब तोँ उसको वैसे देखकर कोई भि मात्र उसको चोदने केँ लिएमन मे सोचेगा।
ज्ञान नेहा कों सेन्युयली देखते हुए उसकेपास गय़ा। नेहा नें ज्ञान कों मुश्कुराते हुए देखा औऱ होंठों कों दाँत मे दबाए नेहा नें रास्ते केँ उसपार देखा कि अबवहा सें कोई उसकोदेख तौ नहि रहा। पर्र वो अप्रैटिस टीनेजर्स नेहा कों लगातार देखेजा रहे थें।
ज्ञान नें पूछा- “40 दिनखतम होँ गये?"
नेहा नें कहा- “नहि अभि बाकी हें."
ज्ञान नें पूछा- “तोँ फिन क्यूं औऱ केसे तुम् सफेद साड़ी मे नहि हौ आज इतने दिनों केँ बाद."
नेहा नें फिनकहा- “क्यूं। तुम् मुझको उस सफेद साड़ी मे हि देख्ना चाहते हौ?"
ज्ञान नें कहा-“अरे नहि बिल्कुल नहि, ऐसे बहोत अच्छी दिखती होँ, ऐसे हि रहो हमेशा तुम्, तुमको बेहदसूट करते हें ऐसे लिबास."
तब नेहा पीछे कि तरफ चलती गई ताकी उसकोकोई नहि देखसके औऱ ज्ञान कों इशारे सें बुलाया। ज्ञान लगभग पहुंचा तोँ नेहा मुश्कुराते हुए बोलीं- “तुमको याद हैं अंतिम बार तुम् साम कों रहना चाहते थें मेरेयहा। तौ आज वोही करना, सभी वर्कर्स कों जाने देना औऱ तुम् लेट जानां, सभीचले जाएं तौ यहा आनांठीक हैं.”
ये सुनकर ज्ञान इतनाखुश हुआ कि जल्दी नेहा कों बाहों मे भरकर खुशी केँ मारेकिस कर लिया, उसका मोटापेट नेहा केँ पेट पऱ दबाते हुए।
नेहा नें चुलबुलाते हुए, हँसते हुएकहा- “तुम्हारा पेट बहोत फन्नी हैं आई लाइकइट."
ज्ञान नें कहा- “तुमको पता हैं कि मैंने तुमको कितना मिस कियाइन दिनों कों। तुमको सोच-सोचकर हररात कों मूठ मारता हूं मेरीजान। केसे तुमने अचानक निश्चय कर लिया मुझसे मिलने केँ लिए हम्म्म। ये मेरालकी डे हैं आज क्याँ?"
इतना कहकर ज्ञान नें नेहा कों हल्के सें धकेलकर दीवार सें सटाया औऱ झट सें अपनेहाथ कों उसकी स्कर्ट केँ नीचे डाला तोँ पतालगा कि नेहा नें पैंटी पहनी हि नहि हैं, (याद हैं सभाष सें चुदने केँ बाद नेहा नें पैंटी औऱ ब्रा कों टब मे डाल दिया थां धोने केँ लिए। )
जब ज्ञान नें देखा कि उसने पैंटी नहि पहनी हैं तौ चमकते चेहरे मे कहा-“वाउ तुम् तौ अभि सें हि सजधजकर हौ गई हौ.” ज्ञान कों इसबात कां इल्म नहि थां कि कुछदेर पहले उसको सुभाष नें चोदा थां। ज्ञान उसकोउसी लम्हा चोदना चाहता थां मगर नेहा इनकार कररही थि औऱ उसकोसाम कों आने कों कहा ताकीबेड पऱ बिल्कुल आहिस्ता करेंगे।
तब तक दोनों अप्रैटिस आँ रहे थें पानी भरने केँ लिए।
औऱ ज्ञान औऱ नेहा दीवार केँ पीछे थें बगल मे, नेहा कि स्कर्ट ऊपरउठी हए थें औऱ ज्ञान कां हाथ नेहा कि सेक्सी गदराए जांघों पर्र फिनरहे थें औऱ उसका मुँह नेहा कि चूचियों कों चूसरहा थां।
उन दोनों टीनेजर्स नें सभीकुछ देखा औऱ वहा सें भागकर गैरेज वापसगये बिना किसी कों कुछ बताए। वो दोनों छोटे लड़के थें उम्रकम थि दोनों केँ। दोनों केँ खड़े होँ गये थें नेहा कि चूचियों कों ज्ञान केँ मुँह मे देखकर, औऱ नेहा कि इतनी सुंदर सेक्सी इन्वाइटिंग जांघों कों देखकर दोनों टीनेजर्स पागलहुए जारहे थें। दोनों लड़के मूठ मारने गये नेहा केँ जिश्म कों सोचते हुए औऱ जोँ कुछ देखा वोँ सभी कल्पना करतेहुए। उसदिन सें वो दोनों भि नेहा केँ लिएमन मे तरह-तरह केँ खयाल पालने लगेइस दिन सें।
साम कों ज्ञान नें सब अपने वर्कर्स कों वापस जाने कां इंतेजार किया औऱ जबसभी चलेगये तोँ वोँ गय़ा नेहा कां दरवाजा खटखटाने।
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story - Continue reading next part
Relavant source : click here