Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा नें प्रवींद्र कों ससुरजी सें प्रेग्नेन्सी केँ बारे मे बताया
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नेहा नें बात शुरुआत किया, उसनेकहा- “मे प्रेग्नेंट हूं."
प्रवींद्र कि समझ मे नहि आया कि वोँ क्याँ कहे? वोँ निशब्द नेहा केँ चेहरे मे देखने लगा। एक् गहरी साँस लेने केँ बाद उसने थोडा हकलाते हुए पूछा- “तुम् प्र.प्रेग्नेंट होँ? सीसी। केसे?कब सें?"
उसकी वोँ हालत देखकर नेहा नें पूछा- “क्यूं तुमको फिकर हौ रही हैं? कोई भि प्राब्लम नहि हैं, ये तौ नार्मल बात हैं। मैंने पंडितजी कों बता दिया औऱ उसनेकहा कि फिकर कि कोईबात नहि हैं सभीठीक होँ जाएगा। क्योंकी वोँ समझता हैं कि यह मेरे पति कां बच्चा हैं औऱ दुनियां वालों कों भि यही लगना चाहिए अब, तौ फिकर कि क्याँ बात हैं?"
तब प्रवींद्र कों कुछ आराम महसूस हुआ औऱ पूछा- “तोँ तुम् क्याँ चाहती हौ? बच्चे कों रखना हैं याँ गर्भपात करोगी."
नेहा नें गंभीरता सें प्रवींद्र केँ चेहरे मे देखते हुएकहा- “क्याँ तुम् चाहते हौ कि मे गर्भपात करूँ."
प्रवींद्र नें कहा- “नहि, अगर तुम् मम्मी बनना चाहती हौ तौ मुझेकोई प्राब्लम नहि हैं मगर बाप कौन हैं? मे याँ.”
फिन नेहा नें मुश्कुराते हुएकहा- “जानते हौ शुरुआत सें जब तुम्हारे बड़े भइयाकुछ नहि करपारहे थें तौ पापा बहोत हि चिंतित हुआ करते थें औऱ मुझसे कहा करते थें कि उनको अपनेवंश कों आगे बढ़ाना हैं उनको अपने चौथे बच्चों कों देख्ना हैं, अपनेखून कों औऱ बढ़ते हुए देख्ना हैं, वोँ हमेशा कहा करता थें कि अपनी जायदाद केँ लिए उनको बहोत सारे पोते पोतियां चाहिए। वारिस चाहिए उससे। मगर उनको स्वयं नहि पता थां कि उन्होंने मेरेपेट केँ अंदर अपनेबीज कों बो दिया थां."
ये सुनकर प्रवींद्र कों झटकालगा याँ खुशी हुइ? वोँ उठ खड़ाहुआ ये कहते- “क्याँ, पापा नें तुमको प्रेग्नेंट किया? मारने सें पहले एक् औलाद औऱ छोड़ गय़ा, मेरा छोटा भइया। बड़ामर गय़ा तौ छोटा आँ गय़ा। अरेवाउ
आईआम वेरी हैपी। मुझको एक् छोटा भइया याँ बेहन मिलेगा."
नेहा नें कहा- “हेलो मिस्टर, तुम् उसके भइया औऱ बाप भि बनागे। दुनियां केँ लिए वोँ तुम्हारा भतीजा होगा, असलियत मे तुम्हारा भइया औऱ मुझसे विवाह करने केँ बाद वोँ तुम्हारा बेटा होगा."
ये सुनकर प्रवींद्र हँस पड़ा औऱ कहा- “एक् संग इतने सारे रिश्ते एक् बच्चे केँ संग। कमाल हैं मे बाप, चाचा
औऱ भइया एक् संग बनूंगा कितनी अजीब औऱ कमाल कि बात हैं नाँ?"
प्रवींद्र खुश थां कि वोँ उसके बाप कि औलाद थां जौ नेहा केँ पेट मे समयरहा थां। औऱ वोँ सब जिम्मेदारी उठाने
केँ लिए सजधजकर थां उस बच्चे कि। फिन भि उसने नेहा सें पूछा-“ये सभीकब हुआ?कब उसने कन्सीव किया?
औऱ उसकोकब पताचला कि वोँ प्रेग्नेंट हैं?"
नेहा नें उसको बताया- "ठीकजब उसकी मम्मी बीमार थि औऱ वोँ अपने गाँवजा रही थि तभी वोँ एक् महीने लेट थि अपनी मासिक केँ लिए। औऱ अंतिम मर्द जिसने उसके अंदर वीर्य छोड़ा थां, वोँ थां प्रवींद्र कां पिता, औऱ एक् महीने सें पहलेकई बार उसने अंदर वीर्य छोड़ा थां, तभी सें उसको मासिक नहि हई थि, तोँ वोँ अपने पिता केँ यहा गई थि तौ आलरेडी प्रेग्नेंट थि." नेहा नें बताया कि उन दिनों स्वयं प्रवींद्र औऱ उसके चाचा भि उससे सेक्स कररहे थें इसलिये नेहा अपनी पीरियड्स कों बहोत सावधानी सें फालोकर रही थि औऱ उसके चाचा औऱ उसने तोँ वीर्य बिल्कुल अंदर नहि छोड़ा थां, मात्र उसके पिता नें छोड़ा थां तोँ उसके पिता केँ इलावा औऱ किसी नें उसको प्रेग्नेंट नहि किया हैं।
प्रवींद्र नें कहा-“हाँ बिल्कुल सही हैं, उन दिनों तुम् मुझको बिल्कुल अंदर नहि झड़ने देती थि, मतलब तुम् छुपी रुस्तम निकली, तुमको पता थां कि तुम् क्याँ कररही थि हम्म्म."
नेहा नें कहा-“हाँ मुझेपता थां कि पापा नें अंदर छोड़ा हैं तोँ मे देख्ना चाहती थि कि रहेगा याँ नहि इसीलिए उसके इलावा किसी कों अंदर नहि डालने देती थि, जब तक मेरी पीरियड लेट नहि हुई थि, औऱ दोदिन अपने गाँव जाने सें पहले मुझको पाताचल गय़ा थां कि मे प्रेग्नेंट थि.”
प्रवींद्र नें कहा- “मेरीकोई बेहन नहि हैं। मुझे खुशी होगीअगर ये एक् लड़की हुईँ तौ?"
नेहा बोलीं- “औऱ अफीसियली वोँ तुम्हारी बेटी होगी हीहीही."
प्रवींद्र मुश्कुराया औऱ प्रवींद्र कि खुशी देखकर नेहा भि खुश हुईँ औऱ उसकी तकलीफ़ दूर हुइ औऱ एक् बोझउतर गय़ा उसके सीने सें। क्योंकी नेहा नें सोचा थां कि प्रवींद्र येसभी जानकार चिंतित होगा औऱ उसको गर्भपात करने कों कहेगा। मगर वोँ बहोत खुश थि कि प्रवींद्र भि खुश थां ये जानकर कि उसके पिता नें एक् औलाददे दिया थां उनके जाने सें पहले।
फिन दोनों नें अपनी विवाह केँ बारे मे बातें कि। प्रवींद्र नें कहा- “उसके पिता केँ 40वेंदिन वाली पूजा केँ रोजसब परिवार, यार, जान पहचान वालों कों औऱ पड़ोस केँ गाँव केँ सब लोगों कों इन्वाइट करना पड़ेगा फ्यूनरल सेरेमनी केँ रोज। तौ क्यूं नां उसीरोज सब लोगों कि प्रेजेन्स मे हि दोनों विवाह भि कर लें."
नेहा कों आइडिया अच्छा लगा औऱ उसनेकहा- “कल वोँ पंडितजी सें इस बारे मे बात करेगी.” औऱ पंडितजी कां नाम लेते हि नेहा कां जिश्म सिहर सां गय़ा। लम्हा भर केँ लिए नेहा नें पंडितजी सें किए सेक्सुअल एनकाउंटर्स कों याद किया औऱ उसके जिश्म मे एक् मस्ती पैदा होँ गई।
प्रवींद्र सें दिनभर मे ये चौथीबार थि कि नेहा नें सेक्स किया, सुभह सें पंडितजी सें करने केँ बाद। तोँ नेहा नें पंडितजी सें, सुभाष सें, ज्ञान सें औऱ प्रवींद्र सें सेक्स किया, कोई 12 घंटों केँ बीच। फिन भि अभि भि पंडितजी कों सोचकर उसको औऱ करने कां मन किया। तोँ सुभह कों अगर पंडितजी सें फिन सेक्स किया नेहा नें तोँ वोँ पाँचवी बार होगी 24 घंटों केँ बीच नेहा नें सोचा।
दोनों कों नींदआने लगी, तोँ एक् संगबेड पऱ लेटेरहे दोनों औऱ नेहा स्वयं कों एक् नशे कि हालत मे महसूस करनेलगी औऱ उसको चुदने कां फिन सें मन किया। मगर प्रवींद्र कों नींद आँ गई औऱ खर्राटे मारने लगा। पर्र नेहाशीक औऱ रूपचंद कों अचानक सोचने लगी। उस दिन उसने बहोत एंजाय किया थां, खासकर औऱ एंजाय किया थां जबशीक नें उसे दूसरी बार चोदा थां, जब प्रवींद्र बाहर् गय़ा थां रूपचंद केँ संग। तब नेहा नें उस होटेल केँ बारे मे सोचा जहाँ उसकेदो भइया उसको लेकरगये थें, उस अटेंडेंट कों सोचा नेहा नें जौ उसको अपने ग्राहकों केँ लिए चाहता थां।
कुछदेर बाद नेहा कां हाथ उसकी बुर तक गय़ा औऱ स्वयं कों उंगली करनेलगी वोँ सभी सोचते हुए। पहलेकभी भि नेहा नें उंगली सें काम नहि चलाई थि। वोँ उंगली कों अपनी बुर पऱ रगड़ते टाइम स्वयं कों बहत सारे मर्दो केँ बीच कल्पना कि। उसने अपने पिता, अपने भाइयों कों याद किया, शीक, रूपचंद, ज्ञान, सुभाष, पंडितजी औऱ अपनेससर कों भि सोचा नेहा नें अपनी गीली बुर मे अपनीदो उंगलियों कों घुसेड़ते हए। बहत गर्म हौ गई वोँ औऱ मुड़कर प्रवींद्र कि तरफ देखा पऱ वोँ खर्राटे जोरों सें माररहा थां। तौ नेहा नें अपनी टाँगों कों फैलाकर अपनी उंगलियों कों गोल-गोल घुमाया बुर केँ थोडा ऊपर औऱ फिन सें उंगलियों कों अंदर डाला। उसकोफिन सें एक् लण्ड कि जरूरत महसूस होनेलगी।
स्वयं कों संतुष्ट नहि करपाई अपनी उंगलियों सें तौ नेहा उठकर किचेन मे गई, वहाकुछ ढूँढने लगी जिससे स्वयं कों खुशकर सके। उसकीनजर एक् बैगन पर्र पड़ी, वोँ एक् लण्ड सें कुछ औऱ मोटालग रहा थां। नेहा नीचे जमीन पऱ बैठी, टाँगों कों फैलाया औऱ उस बैगन कों अपने अंदर डाला। गीली बुर केँ अंदर बैगन आसानी सें घुसा नेहा कि सिसकती आहह-आहह। केँ बीच। नेहा नें फिन बैगान कों बाहर् निकाला औऱ दोबारा अपनी बुर कि गहराई मे ठूसा। एकाधबार वैसा करने केँ बाद नेहा उसको तेजी सें अंदर-बाहर् करने कि कोशिश कि मगर उसकी नाजुक कलाई दुखने लगी।
"एक् लण्ड आखिर लण्ड होता हैं." नेहा नें स्वयं सें कहा। फिन भि इतना चुदने कि चाह थि उसे कि वोँ उस वेजिटेबल कों अपने अंदरलिए पेट केँ बललेट गई फर्श पर्र औऱ अपनीकमर कों चुदाई कि तरह हिलाने लगी बैगन कों बुर केँ अंदरलिए हए।
देखने सें लगरहा थां कि कोई मर्द नेहा केँ नीचे हैं औऱ वोँ एक् लण्ड पर्र बैठी हुइ हैं। औऱ समयभर मे नेहा कि तड़पती सिसकती आवाज़ निकली वैसेकमर हिलाते हुए। जमीन पऱ नेहा रेंगने लगी एक् साँप कि तरह औऱ वोँ झड़ने लगी। नेहा एक् स्थान सें दूसरी स्थान पहुँच गई फर्श पऱ स्वयं केँ जिश्म कों रेंगते हुए बुर मे बैगन कों लिए। आगजम हुइ औऱ हाँफते हुए नेहाउस ठंडी साथ-ए-मरमर कि फर्श पर्र पड़ीरही औऱ कुछ पशीने कि बूंदें गिरी साथ-ए-मरमर पऱ।
नेहा अपने होंठों कों दाँतों मे दबाते हुए स्वयं पऱ हँसी औऱ काहा- “एक् मर्द केँ बिना भि आज मे झड़ गई, वाउ."
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कड़ी_48 ज्ञान नें फिन पंडित नें चोदा
नेहा कों सुभह कों नेहा सवेरे उठी औऱ प्रवींद्र कां टिफिन सजधजकर किया औऱ एक् कैब उसको लेनेआई खेतों मे चोदने केँ लिए। जब सें उनकी4जे4 कि आक्सिडेंट हुइ हैं कैब हि हर सुभह प्रवींद्र कों लेनेआती हैं औऱ साम कों वापसघऱ चोदती हैं। प्रवींद्र अपनी स्वयं कि व्हीकल लेना चाहता थां मगर लीगल पेपर्स रेडी नहि हुए थें उसके पिता कि मौत केँ बाद। सब चीजअब भि उसके बाप केँ नाम पर्र हि थि, सभी कारवाई करना थां सभी अपनेनाम लेने केँ लिए औऱ अभि तक कुछ सजधजकर नहि हुआ थां। खेत, जमीन, जायडैड सभी उसके अकेले केँ होने वाले थें। वकीलसभी कुछ करने मे लगाहुआ थां औऱ उसके पिता कि आखिरी पूजा करवाने केँ बादसभी कारवाई कों अंजाम देना थां।
प्रवींद्र नें खयाल नहि कियामगर जब वोँ कैब मे बैठकर घऱ सें खेत केँ लिए निकलरहा थां तब गैरेज खुल चुका थां, औऱ ज्ञान उसके जाने कां प्रतीक्षा कररहा थां, उसकेघऱ मे नेहा सें मिलने केँ लिए।
जैसे हि कैब नजरों सें दूर हुईँ तोँ ज्ञान नें नेहा केँ घऱ कां दरवाजा खटखटाया। नेहा उसको एक्सपेक्ट नहि कररही थि फिन भि उसको अंदरआने दिया। ज्ञान जल्दी हि नेहा कों बाहों मे भरके उसकेगाल, मुँह, गला, होंठ चारों तरफ चूमने चाटने लगा। नेहाअब तक अपनी पतली गुलाबी रंग केँ नाइटी मे थि जिसके कंधे पर्र पतली-पतली स्ट्रैप्स थि औऱ नेहा बिना ब्रा केँ थि। फिन ज्ञान केँ मूव्मेंट्स सें नेहा कि एक् स्ट्रैप कंधे सें सरककर बाजू पऱ चली गई तौ नेहा कि चची देखकर ज्ञान नें जल्द सें उसचची कों मुँह मे लेकर एक् भखे प्यासे बेबी कि तरह उसकी निपल कों चूसने लगा जैसे उसमें सें दूधपी रहा हौ।
दोनों खड़े हि थें उससमय औऱ नेहा रेस्पांड कररही थि मगर उसनेकहा- “पंडित जी आँ सकते हें, तुमको जल्द करना होगा.”
सभीकुछ बहोत जल्द-जल्द किया गय़ा। जल्द हि नेहाबेड पर्र बिल्कुल नंगी होँ गई औऱ ज्ञान नें भि जल्द सें अपनेसब कपड़े उतारे औऱ नेहा केँ ऊपरचढ़ गय़ा औऱ उसका मोटा काला लण्ड नेहा कि बुर मे आने जानेलगा तेजी केँ संग। ये सोचते हए कि कहीं पंडित आकरसभी आनंद किरकिरा नाँ करदे, ज्ञान जल्द सें एंजाय कर लेना चाहता थां।
नेहा हाँफते हुए उसके नीचे तड़पने लगी औऱ सिसकने भि लगी। जिस तेजी केँ संग ज्ञान धक्का देरहा थां नेहा कों अजीब सां मज़ाआने लगाउस रफ्तार सें लण्ड कों बुर केँ अंदर महसूस करतेहए। औऱ नेहासभी कुछ भूलकर फुल कान्सेंट्रेशन कियाउस तेज चुदाई मे, बससमझ लो कि एक् एक्सप्रेस ट्रेन जारही हैं औऱ उसका लुत्फ़ उठना हैं कुछऐसे हालात थें, बाहर् पंडित केँ आने कां डर थां औऱ जल्द सें ज्ञान कों झड़ना थां औऱ नेहा कों भि झड़ना थां।
नेहा तोँ पंडित सें भि आगंजम पा सकती थि मगरइस टाइमकुछ अजीब-ओ-गरिब तरीके सें चुदाई होँ रही थि उसकी, जोँ पहलेकभी नहि हुई थि। इसलिये वोँ एंजाय करनेलगी थि। नेहा केँ गाल कों चूसते हुए ज्ञान कमर हिलाते हुए तेजी सें धक्का देताजा रहा थां उसकी बुर मे। औऱ उसका मोटापेट जौ घर्षण देरहा थां नेहा केँ पेट पऱ, वोँ बहुत थां नेहा कि उतेजीना कों बढ़ाने केँ लिए।
फिन अचानक नेहा चिल्लाई- “उउफ्फ मे झड़ी। बाप रे, इतनी जल्दकभी नहि झड़ी मे। तुमने तोँ कमालकर दिया इतनी जल्द बाप रे."
ज्ञान भि अपने जिश्म कां वजन नेहा केँ ऊपर करतेहुए गुर्राया। जब नेहा नें उसको लण्ड बाहर् नहि निकालने कों कहा तोँ ज्ञान नें अपना वीर्य उसकी बुर केँ अंदर हि चोद दिया। फिन जल्द सें ज्ञान गैरेज वापसचला गय़ा क्योंकी नेहा नें उससेकहा कि किसी भि समय पंडित आँ सकता हैं। नेहा नें बैठकर सोचा कि पिछले 24 घंटों मे ये उसकी पाँचवीं चुदाई थि औऱ अबअगर पंडित भि चोदेगा तौ छठी होगी 24 घंटे केँ अंदर।
नेहा बाथरूम मे गई औऱ शावर लेँ रही थि जब पंडित घऱ मे दाखिल हुआ, क्योंकी नेहा नें दरवाजा खुलाचोद दिया थां। क्योंकी उससेपता थां कि वोँ आने हि वाला हैं।
पंडित नें नेहा कों नाम सें फुकरा।
नेहा नें बाथरूम केँ अंदर सें हि आवाज़ दिया-“नहा रही हूं बसआती हूं."
तब पंडित चलकर बाथरूम केँ दरवाजे तक गय़ा औऱ वहीं खड़े होकरकहा- "बिटिया खोलदो दरवाजे कों जरा देखने दो कैसी दिखती होँ नहाते वक़्त."
नेहा हँसी औऱ कहा-“मगर मैंने तकरीबन नहा लिया हैं, निकालने हि वाली हूं अब तोँ."
पंडितजी नें अपने धोती पर्र हाथ फेरा लण्ड केँ ऊपर जोँ खड़ा हौ गय़ा थां, औऱ उसको नेहा कों उस हालत मे नहाते हुए देखने कां बड़ामन किया। तोँ उसने विनती किया- "बिटिया, कुछमत पहनो अभि, मुझे पहले तुम्हे उस हालत मे भीगेहुए देख लेनेदो नां। तब कपड़े पहनना तुम्। मेरेलिए इतना तोँ कर सकती हौ.”
फिन नेहा नें दरवाजा खोल दिया। वोँ बिल्कुल सर सें पांव तक भीगी हुईँ थि, पानी उसके पूरे नंगेबदन पर्र बहरहा थां, कहीं बूंदें तोँ कहीं बहता पानी। उसके लंबे भीगे कालेबाल उसकीपीठ पऱ चिपके हुए थें, भीगकर औऱ
औऱ भि ज़्यादा सटगये थें उसके जिश्म पर्र, थोडा पीठ पर्र, थोडा उसकी चूचियों पर्र, आंशिक रूप सें उनकोढके हुए।
पंडित जी सें रहा नाँ गय़ा, अंदर एक् कदमरखा तौ नेहा अपनी बहोत सुंदर मुश्कान सें उसको बुलाकर रही
थि वासने भरी नजरों सें।
नेहा नें पूछा- “अंदरआने केँ बाद आपने सामने कां दरवाजा लाक किया थां नाँ?"
पंडित नें कहा- “नहि."
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तब नेहा नें उसको वापस जाकर दरवाजा लाक करके वापसआने कों कहा। पंडित गय़ा, लाउंज मे मेनडोर कों लाक किया औऱ वापसआया। इसबार अपने सारे कपड़े उतारकर तब बाथरूम मे घुसा नेहा केँ पास। बाथरूम कां दरवाजा खुला हि चोद दिया गय़ा औऱ नेहा नें स्वयं पंडित जी कों अपनी बाहों मे भरा औऱ उनकेगले कों चूमने चाटने लगी खड़े पोजीशन मे हि। औऱ पंडित अपने बूढ़े मोटे लण्ड कों नेहा कि जांघों पर्र दबाने लगा थोडा सां घुटनों कों टेढ़ा करके।
नेहाफिन सें चुदासी हौ गई, उसकी आँखें नशीले हौ गईं, औऱ नेहा नें अपने एक् हाथ कों पंडित जी केँ लण्ड पर्र रखाजब उसका मुँह पंडित केँ मुँह कों चाटरहा थां। मतलब पंडित कों किस करतेहुए नेहा उसके लण्ड पर्र। अपनाहाथ चलाती जारही थि जैसेमूठ मारते हें उसीतरह औऱ दोनों किसकिए जारहे थें एक् दूसरे कों खड़ेहुए बाथरूम मे।
नेहा केँ शैम्पू कि खुशबू उसके जिश्म सें आँ रही थि, जौ पंडित कों औऱ भि आकर्षित किएजा रही थि, ऊपर सें उसके भीगे बालों सें उत्तेजित होना लाजमी थां। अपनी उंगलियों सें पंडित बार-बार नेहा केँ भीगे बालों कों कभीइधर तौ कभीउधर हटारहा थां, उसके जिश्म केँ हरअंग कों चूमते चाटते हए। क्याँ अजीब आनंदआता हैं एक् भीगीहुए नंगी स्त्री कों बाहों मे लेकर.उसी कों पता होगा जिसने कभी नहाते समय, नदी मे याँ समुंदर मे तन्हाई मे ऐसे किसी लड़की केँ भीगी जिश्म कां मजा लिया हौ, केवल वोहीसमझ सकता हैं। ये एक् अजीब
ओ-गरिब स्पेशल मौका होता हैं औऱ बेहद उत्तेजक होता हैं।
नर औऱ मादा दोनों बहत हि उतेजित होँ जाते हें औऱ उन्हें सेक्स केँ अलावा औऱ कुछ नहि सूझता ऐसे मौकों पऱ। हाँ रोमांटिक भि होते हें ऐसे मौके, मगर उससे बहोत अधिक उत्तेजक होते हें ऐसे लम्हें।
तब पंडित जी कां हाथ नेहा कि गाण्ड पऱ गय़ा, औऱ अपने पंजे मे उसकी गाण्ड कि एक् फांक कों दबोचा औऱ दूसरे हाथ कि एक् उंगली कों नेहा कि गाण्ड केँ छेद मे डालने कि कोशिश किया पंडितजी नें। उसके वेसा करने सें नेहा अपनेपेर कि टोस पर्र खड़ी होँ गई औऱ अपनी बाहों मे पंडित कों ज़्यादा जोर सें जकड़ लिया, पंडित केँ कान कि 'लोब' अपने मुँह मे लेकर चूसते हुए। फिन पंडित नें अपने मुँह नेहा कि चूचियों पर्र किया औऱ उसपर बहते पानी कों पियाफिन उसकी चूचियों कों चूसा औऱ उसकी निपल कों एक् दूध पीते बच्चे कि तरह चूसने लगा।
उसके वैसा करने सें नेहा केँ जिश्म मे थरथराहट होँ उठी। फिन कुछ लम्हा बाद पंडित नें नेहा कि गर्दन थामे उसकेसर कों अपने लण्ड केँ तरफ किया, तौ नेहाबैठ गई नीचे औऱ पंडित कां लण्ड अपने मुँह मे लेँ लिया। पहले नेहा नें लण्ड केँ ऊपरी हिसे कों चाटाफिन नजरें ऊपर उठाकर पंडित केँ चेहरे मे उसके एक्सप्रेशन्स कों देखा, फिन मुश्कराई। तब लण्ड कि टिप कों मुँह मे लिया, जिससे पंडित कों अबकीबार अपनेटोस पर्र खड़ा होना पड़ा औऱ उसकी सिसकी निकल पड़ी।
नेहा नें फिन सें उसके चेहरे मे देखा, तब आधे लण्ड कों अपने मुँह केँ अंदर लिया, पंडित केँ चेहरे मे देखते हए। नेहा उसकी एक्सप्रेशन्स औऱ एंजायमेंट कां नशा देख्ना चाहती थि पंडित केँ चेहरे पर्र। पंडित गुर्राया औऱ “उऊहह.उहह। उहह। इस्स्स्स.” करनेलगा आनंद लेतेहुए, औऱ नेहा लण्ड कों अपने मुँह केँ अंदर-बाहर् करनेलगी चूसते हुए औऱ एक् हाथ सें लण्ड कों सहलाते हुए। पंडित कों उसतरह सें तड़पते देखकर नेहा कों आनंद आँ रहा थां।
पंडित केँ हाथउस वक़्त नेहा केँ कंधे पर्र थें औऱ नेहा घुटनों केँ बल थि बाथरूम केँ फर्श केँ संगमरमर पर्र, चूसेजा रही थि औऱ बार-बार सरऊपर उठाकर पंडित कों देखती जारही थि। फिन पंडित अपनीकमर हिलाकर लण्ड कों नेहा केँ मुँह मे अंदर-बाहर् करनेलगा जैसे उसके मुँह कों चोदरहा थां। ऐसाकुछ देर तक चला औऱ नेहा नें आखिर मे मुश्कुराते हुएकहा- “मेरा मुँह दुखने लगाअब पंडित जी."
अब बारी थि पंडित कि नेहा कि इन्वाइटिंग बुर केँ सामने बैठने कि। उसने नेहा केँ घुटनों सें शुरुआत कियावहा सें चाटते हुएऊपर बढ़ता गय़ा, नेहा कि गडराइ जांघों सें गुजरते हुए औऱ उसकी मोटी बुर तक पहुंचा। अपनी उंगलियों सें बुर कि पंखुड़ियों कों खोला औऱ उसपर अपनीजीभ कों फेरा, नेहा कां पानी निकल चुका थां तौ पंडित नें उस नमकीन लज्जत कों आज भि चाटा उसको महसूस करतेहुए जैसे पानी मे नमक डाला गय़ा हौ। चूसते चाटते वक़्त पंडित नें काईबार अपनीजीभ कों उसकेछेद केँ अंदर डाला औऱ निकाला।
नेहा पंडित केँ सर पऱ हाथरखे उसको जोरों सें दबाते हुए स्वयं केँ जिश्म कों जैसे वाइब्रेट किया, नेहा थरथर कांपी, उसके पांव भि काँपउठे जिश्म केँ संग-संग। पंडित केँ उसतरह सें चूसने सें नेहा कों जोँ आनंद औऱ मजामिल रहा थां वोँ बयान करना नामुमकिन हैं, वोँ मात्र नेहा हि समझ सकती थि। नेहा अपने चूतड़ों कों कभी दायें तौ कभी बायीं तरफ लचकारही थि, जैसेनाच रही हौ। पंडित उसकी बुर कों नहि चोदरहा थां औऱ नेहा जैसे अंगराइयां लेतेहुए उस आनंद दियेजा रही थि।
फिनकुछ देरबाद पंडित खड़ाहुआ, अपने लण्ड कों नेहा कि बुर केँ ऊपर रगड़ा, नेहा केँ मुँह कों अपने मुँह मे लिया, औऱ दोनों कि जीभ एक् दूसरे केँ मुँह मे पिघलने लगी। पंडित कों अपने घुटनों कों टेढ़ा करना पड़ा अपने लण्ड कों नेहा कि बुर तक लाने मे, क्योंकी वोँ नेहा सें हाइट मे कूचा थां, फिन उसने अपने लण्ड कों नेहा कि बुर मे घुसाया जोँ फिसलते हुए अंदरचला गय़ा।
नेहा कि चीख निकल गई तड़पते हुए- “आआह्ह। इस्स्स्स
."
पंडित नें कमर हिलाना शुरुआत किया जिससे लण्ड अंदर-बाहर् होनेलगा मगर अधिकउमर होने केँ कारण पंडित थक गय़ा उस पोजीशन मे खड़े होकर चोदने सें। तौ उसने नेहा कों एक् बच्चे कि तरहगोद मे उठाकर उसके बेडरूम केँ तरफ बढ़ने लगा। दोनों बिल्कुल नंगे कारिडोर मे चलतेहए नेहा केँ बेड पऱ गये। नेहा कों खाट पऱ लेटाया पंडित नें औऱ जल्द सें नेहा नें अपनी टाँगों कों फैलाया। उसको जल्द थि वोँ स्वयं कों संभाल नहि पारही
हों कों पंडित केँ जिश्म पर्र किया औऱ उसका लण्डफिन सें नेहा केँ चत मे आने जानेलगा तेजी सें। उस दौरान दोनों एक् दूसरे कि जीभ कां रसपिए जारहे थें, जब उसकी बुर लण्डखा रही थि। फिन दोनों जल्द हि अंजाम तक आँ गए।
औऱ पंडित नें तड़पते आवाज़ मे कराहते हुएदबे गले कि आवाज़ मे कुछऐसी आवाज़ निकली- “उउहह। अगघघ.” वोँ नेहा कि बुर कि गहराई मे अपने वीर्य कि पिचकारी छोड़रहा थां औऱ नेहा उसके नीचे जैसेकोई नृत्य करनेलगी थि।
इसकदर वोँ पंडित केँ नीचेमचल रही थि झड़ते हुए, उसका जिश्म ऐंठरहा थां, जबकि बूढ़े कां लण्ड उसके अंदर उल्टी कररहा थां। फिन जल्दी नेहा नें अपने जिश्म कों अधमरा छोड़ा बेड पर्र हाँफते हए जैसे उसकादम घट गय़ा थां औऱ वोँ तेजी सें लंबी-लंबी साँसें लेँ रही थि। फिन नेहा पंडित केँ चेहरे मे देखकर हँसने लगी।
पंडित भि हँसा औऱ कहा-“अब मुझको स्नान करना होगा पूजा कि विधी शुरुआत करने सें पहले."
फिन नेहा नें स्वयं सें कहा- “24 घंटे मे 6 बार."
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