Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
प्रवींद्र नेहा केँ लगभग गय़ा औऱ एक् जोर कां थप्पड़ मारा उसको।
नेहा कों शाकलगा औऱ प्रवींद्र कों हैरानी सें देखा तोँ उसने एक् औऱ जोर कां तमाचा मारा नेहा कों। वोँ बैठकर रोनेलगी। फिन प्रवींद्र नें उसको उठाया औऱ एक् तीसरा तमाचा जोर सें मारा उसकेगाल पर्र, जौ बिल्कुल लाल हौ गये थें। फिनजोर सें प्रवींद्र नें कहा-“सती सावित्री बनने कां नाटकबंद करो भाभी। मैंने दो रातों कों लगातार तुमको मेरे पिता सें चुदवाते हुए देखा हैं। रंडी साली। तुम् तौ पक्का रंडी निकली। अपने ससुरजी सें चुदवाती होँ। साली कुत्ती कामिनी। औऱ मुझसे साफ सुथरी वालीबात करनेचली, कुत्ती कहीं कि। मैंने तुमसे प्रेम किया थां साली समझी तुँ। आई लव्डयू, डमइट। आई रियली लव्डयू। अगर मेरा भइया तुमको खुश नहि कर सकता तौ मैंने सोचा थां कि, मे तुमसे विवाह करूँगा। मे तुम्हारे संग जीने कां सोचरहा थां। मगर तुम् तौ साली रंडी निकली। मे बच गय़ा रे.बच गय़ा मे तोँ। तोँ बताअब क्याँ कहना हैं तुम्हें? हैं कुछ कहने कों बाकी?अब क्याँ
बहाने बनाएगी तुँ? बोल?"
नेहा नीचे फर्श पर्र बैठी एक् बच्ची कि तरहरो रही थि। उसकीसमझ मे नहि आँ रहा थां कि क्याँ कहेबस रोतीजा रही थि।
गुस्से सें चिल्लाते हुए प्रवींद्र नें कहा- “नहि बोलोगी। कुछ कहना भि हैं कि नहि? चुप रहना हैं। ओकेठीक हैं मे अभि इसीसमय इसघऱ कों छोड़कर जारहा हूं, कभीइस घऱ मे वापस नहि आऊँगा। अगर मेरेडैड नें पछा कि मे कहां हूं तोँ बता देना कि मुझको तुम् दोनों केँ बारे मे सभीपता चल गय़ा। मुझे रवींद्र भइया केँ लिए बहोत अफसोस हौ रहा हैं मगर मे तुम्हारे संग नहि रह सकताइस घऱ मे अब."
प्रवींद्र केँ कदमघऱ केँ बाहर् केँ ओरबढ़ हि रहे थें कि नेहा नें जल्द सें उसको पीछे सें थामा औऱ रोतेहए कहा"रुक जाओ, रुक जाओ प्लीज, ईश्वर केँ लिएमत जाओ, कहींमत जाओ, अब मुझे जोँ कहना हैं वोँ सुनलो, तब डिसाइड करना कि क्याँ करना हैं तुम्हें? मे तुमको समझाती हूं कि क्यूं औऱ केसेये सभीहुआ? इन सबके पीछे एक् लंबी दास्तान हैं जिसको सुनकर तुम् स्वयं दंगरह जाओगे। सभी जानने केँ बाद बताना कि मेरा सपोर्ट करोगे याँ छोड़कर चले जाओगे। औऱ क्याँ कहा तुमने कि मुझसे प्रेम करते हौ। वाउ। कैसा प्रेम हैं कि छोड़कर जारहे जब मे मजधार मे हूं। हाँ.अब सुनलो कि मे भि तुमको शुरुआत सें हि चाहती हूं, मगर अपने आप् पर्र कितना काबू रखती हूं ये मे हि जानती हूं। प्रेम करती हूं सच मे तुमसे, मगर हालात कुछऐसे हौ गये कि मुझको तुमसे नफरत करवानी पड़ी मुझे। कुछ ऐसे हालात पैदाहुए कि मेरे कंट्रोल सें सभी बाहर् होता गय़ा, मे संभल नहि पाई। सभी बेकाबू होता गय़ा."
प्रवींद्र पिघलने लगा औऱ नीचे सें नेहा कों बाहों मे भरके सोफे तक लेजाकर बैठाया औऱ कहा- “बताओ भाभी, कहो ऐसी क्याँ बात हुइ? बताओ मुझे, मे बहोत बेचैन हूं सभी जानने केँ लिए। मुझे यकीन थां कि कुछ नां कुछ जरूरहुआ होगा? शुरुआत सें बताओ मुझे कि येसभी कब सें शुरुआत हुआ भाभी। मेरा मतलब हैं तुम्हारे इसघऱ मे आने केँ कितने दिनों बादसभी शुरुआत हुआ पापा केँ संग? शुरुआत सें बताओ मुझे औऱ मेरा वादा हैं कि अगर मुझे इसमें तुम् निर्दोष लगी तोँ तुमको छोड़कर कभी नहि जाऊँगा.”
तोँ नेहा नें अपने आँसू पोंछे औऱ प्रवींद्र कों अपनेपास बैठने कों कहा औऱ उसने बोल्ना शुरुआत किया- “मे बहोत बेचैन रहती थि कि तेरा भइया मुझसे संभोग नहि कररहा थां। पापा नें कईबार मुझसे पूछा कि हमने सेक्सुअल इंटरकोर्स किया याँ नहि?"
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Update 4 Pravindra peeps in his daddy's kamara
too friends, जब Pravindra ko yakeen hu गय़ा केँ अब woh rath ko apne pita केँ kamre केँ andar dekh sakayga too ussko araam मिला औऱ woh hush हुआ औऱ besabri सें intezaar किया केँ rath uss केँ घऱ ko visit karen.
Paathakon ko samajhne केँ liye केँ एक् doosre केँ kamre kahan kahan the औऱ kidhar सें Pravindra kamre केँ andar jhankega, mein ne एक् sketch banaya h jiss सें ap sab ko acchi prakaar सें samajh मे aaye। ye raha sketch:
rath hoyi औऱ sab TV dekhne केँ बाद apne apne kamre मे chale gaye। Ravindra (Neha kaa shauhar) TV bohot kum dekhta thaa। woh har rath ko thik 9 baje sone chala jaata thaa, एक् too khet केँ काम kaa thakaan औऱ usski aadat thi juldi sone कि bachpan सें hi.
Pravindra apne kamre मे गय़ा औऱ intezaar krta raha rath ko औऱ gehri hone कि। Apne kamre केँ andar सें hi woh sunne कि koshish krta raha केँ ussko kissi darwaze कि khulne ya bandh hone कि awaaz aaye ussko। woh pray krta raha केँ ussko कुछ dikh jaye इस rath ko। pr ussko abi tak yakeen hi naheen thaa केँ ye sab usska vehem thaa ya sacch मे usske pita औऱ Neha केँ beech कुछ thaa bi केँ naheen.
Ek ghante केँ बाद woh 2 baar baahar गय़ा dekhne केँ liye mgr कुछ naheen dikha usse। Niraash wapis aya apne kamre मे। “kiya weh donon naheen milengue आज rath ko…। कुछ naheen hone wala kiya??” Eisa khud सें poocha pravindra ne, औऱ ye khayaalaat ussko bohot परेशान krr rahe the……। Paathakon ko dikhega sketch मे mein ne एक् red (laal) spot banaya h joo घऱ केँ baahar h। Pravindra ussi स्थान सें एक् kursi पर्र chadh krr apne pita केँ kamara मे dekhta h। Baaki घऱ केँ andar kisska kamraa kidhar h sab saaf banaya h mein ne इस सें ap sabhon केँ samajh मे ajaega केँ कौन kidhar sota h rath ko vaghaira। ghrr kaa naksha bilkool weisa hi h joo mein ne banaya h.
Subha 1 baje tak 4 baar Pravindra baahar jaakar kamre केँ andar jhank aya mgr कुछ naheen dikha usse। bohot hi bchain thaa woh औऱ so naheen paa raha thaa। Karwatein badalta गय़ा apne bistar पर्र ussi bechaini मे ussko 2.30 baje corridor मे एक् darwaze kaa बंद hnaa sunaayi दिया। (nakshe मे dekhiyega ap लोग) … Ravindra kaa karma thik usske kamre केँ uss tarf h औऱ darwaaza bi दूर naheen h Pravindra केँ darwaze सें…। (nakshe मे mein ne darwaze ko एक् chota sa open space chorra h)…। too awaaz sunkar jhappatte hue woh kamre सें nikla। Apne kamara केँ darwaze ko bohot hi dhire सें khola bina koyi shor kiye hue, औऱ bina kissi light ko switch kiye hue woh kitchen केँ darwaze सें baahar nikla औऱ kursi jisse ussne pahle सें wahin rakkha हुआ thaa uss पर्र chadh krr AC केँ pas dekhne गय़ा apne pita केँ kamre मे.
Usske enkhen khule केँ khule rha gaye joo nazara usske enkhon ne देखा andar!! Neha, usski bhabi bilkool nangi thi usske pita केँ pas usske bistar पर्र। Usski nighty almari पर्र Latki hoyi thi औऱ Neha apne sasur kaa loda chuss rahi thi jabke sasur peeth पर्र leyta हुआ thaa, औऱ woh bi nanga thaa। Neha apne हाथ मे sasur केँ mote loda ko thaame jamke chuss rahi thi औऱ ekaat baar apne jeeb सें chaat rahi thi firr chussti ja rahi thi…। Budha apne kamar ko ऊपर नीचे kartey hue haule haule jeise push in and out krr raha thaa Neha केँ munh मे….
Pravindra ko garam औऱ thand donon laga एक् saath woh drisht dekh krr। woh sochne laga केँ itne dinon सें woh Neha ko paane कि koshish krr raha h औऱ Neha sati savirtri ban rahi thi औऱ यहा apne sasur केँ saath ye sab krr rahi h!! ‘ye sab kabse chl raha h’ Pravindra ne socha। Pehli baar कबहुआ thaa? Usske pita ko keise Neha mil gai? or Ravindra? kiya ussko ptaa bi h? Agar woh achanak uth गय़ा too kiya hoga? Bhabi ne keise itna बड़ा risk le लिया? Itni himat keise hoyi use? ye sab sochte hue Pravindra kaa sar chakraane laga.
phir andar देखा too Neha apni peeth पर्र leyti hoyi thi औऱ usske pita Neha कि chut ko chuss raha thaa…। Neha apne sasur केँ sar ko hathon मे dabae hue bistar पर्र apne jism ko rawnd rahi thi…। usski khubsurat jawan nangi jism uss time sasur केँ kabze मे thaa…। or jald hi sasur ऊपर गय़ा औऱ apne mazboot haathon मे Neha केँ jawan chuchiyon ko massalte hue usske erect nipples पर्र अपना jeeb ferrney laga…। 18 साल कि jawaan bahu केँ nipples!!!
Pravindra ko bohot bohot ghussa aya, ussko man किया केँ turant jaakar apne pita केँ kamre केँ darwaze पऱ zor सें laat maarke andar ghusse औऱ tamasha khada karein…। uss time usska dimaagh ne काम krna बंद krr दिया, सोच raha thaa केँ woh wohi kare joo सोच raha h ya weisa krna ghalat hoga…। Usska dimaagh jeise blank hu गय़ा कुछ der केँ liye…। Pravindra ne achaanak apne jism मे thand औऱ एक् kampan ehsaas किया, usska gala sukh गय़ा thook bi naheen nigal paa raha thaa, औऱ firr ussko garmi ehsaas hoyi jeise केँ ussko bukhaar हुआ hu….
jb phir सें andar देखा too usske pita Neha ko chodne laga thaa। Neha केँ donon peyr feyle hue the औऱ apne sasur केँ loda ko bade maze सें apne andar le rahi thi Neha, औऱ saath saath sasur केँ gale पऱ dant kaat rahi thi औऱ chaat rahi thi, usske baahen sasur केँ jism ko lapete hue the usske bahon केँ नीचे सें औऱ Neha केँ hatheli sasur केँ kaandhon पऱ the ussko thaame hue, jakre hue…। Sasur केँ kamar zoron सें hill rahe the औऱ usske movements ne औऱ zor pakre औऱ woh apne loda ko Neha कि jawan chut केँ andar andar baahar krta गय़ा एक् केँ बाद एक् zabardast dhaka dete hue औऱ usske siskariyan chuthne lage saath मे Neha bi tarapne lagi dheemi dheemi awaaz मे…। sasur hanffne laga औऱ trapte awaaz मे ghurratey hue “aaaagghgghghghggghhhhh “ कि awaaz kiye ussne…। or bohot jald Neha apni awaaz ko sambhaaltey hue dhire सें chilaaayi “aaaaaaahhhhhh issssssssshhhhhh ufffffffff….aaaaaaaahhhhhhhhh” phir jhat सें sasur ne apne loda ko chut केँ baahar nikaala औऱ apne veerya ko Neha केँ peth केँ ऊपर chorra…। Usske mammay tak sasur kaa veerya गय़ा औऱ कुछ katre Neha केँ gale पर्र bi pade… Neha ne apne haatheli सें veerya ko apne jism पर्र massla sasur केँ chehre मे muskuratey hue dekh krr…। phir uth krr Neha ne sasur केँ loda ko apne muhn मे le लिया…। phir donon एक् doosre ko bahon मे लेकर kiss kiye औऱ donon araam सें leyt gaye bistar पऱ hanfftey hue….
too be continued………….
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कड़ी_06
फिन नेहा नें प्रवींद्र कों बताना शुरुआत किया कि केसे औऱ कब सें सभी शुरुआत हुआ? उसने बताया कि एक् दिन वोँ
4जे4 मे खेत गई थि ससुरजी केँ संग। नेहाउन दोनों केँ लिए खानां बनाकर इंतेजार कररही थि औऱ 11:00 बजे वोँ नेहा कों लेनेआया। उसदिन प्रवींद्र घऱ पर्र नहि थां। वोँ विवाह केँ 3 महीने बाद कि बात थि। ससुरजी नें उससे पहले 3 याँ 4 बार रवींद्र औऱ नेहा केँ संबंध केँ बारे मे नेहा सें बातकर चका थां। तोँ उसदिन कार मे जाते वक़्त भि ससुरजी नें फिन सें बात छेड़ी थि, औऱ कुछदूर जाकरकार कों एक् सुनसान स्थान पऱ खेतों केँ बीचरोक दिया।
औऱ बातें करने केँ लिए ससुरजी नें पूछा-“बहू, आखिरकब तक ऐसा चलेगा तुम्हारे औऱ रवींद्र केँ बीच? तुमने अभि तक उसकेसंग सेक्स नहि किया तौ ऐसा केसे चलेगा बहू? हमें अपना परिवार बढ़ाना हैं बहू औऱ मुझे अपने पोते पोतियों कां मुँह देख्ना हैं, वंश कों आगे बढ़ाना हैं। देखो कितने खेत हें, कितनी जमीन हैं इन सबकेलिए
नेहा नें ससुरजी कों जवाब दिया- “मे क्याँ कर सकती हूं पापा? रवींद्र इतना शर्मिला हैं कि मुझको बिल्कुल हाथ भि नहि लगाता। वोँ मुझसे पीठ घुमा केँ सोता हैं औऱ बिल्कुल हिम्मत नहि करता मेरेतरफ मुड़ने कि। कहता हैं मेरी इज्जत करता हैं औऱ मुझको नुकसान नहि पहुँचा सकता। मैंने उसके लगभग जाने कि बहोत कोशिश किया जैसे आपने बताया थां। मगरकोई फायदा नहि हआ पापा."
फिन ससुरजी जी कों एक् आइडिया आया, तौ उसनेकहा- “सुनो। तोँ फिन मुझे लगता हैं कि मुझको स्वयं रात कों तुम्हारे कमरे मे आनां होगा औऱ रवींद्र सें बात करना होगा कि क्यूं वोँ अपनी सुहागरात कों अंजाम नहि देरहा?
क्याँ खयाल हैं बहू?"
नेहा नें जवाब दिया- "जैसा आप् ठीक समझें पापा."
ससुरजी नें औऱ कहा- “मेरे खयाल सें रवींद्र कों थोडा सां हौसले कि जरूरत हैं जौ शायद मे दे सकता हूं, मगरबहू उसकेलिए मुझे तुम्हारा संग भि चाहिए। क्याँ तुमको एतराज होगाअगर मुझे तुमको छूना पड़े रवींद्र कों हिम्मत दिलाने केँ लिए तोँ? वोँ बहोत जरूरी होगा, बहू समझने कि कोशिश करो."
नेहा नें जवाब दिया- “मे अपनी सुहागरात कों कामयाब करनेलिए कुछ भि करने कों रेडी हूं पापा, जोँ भि आप् कहोगे मे करूँगी, क्योंकी मुझे भि लगता हैं उसको हिम्मत औऱ हौसले कि जरूरत हैं, जौ मे नहि दे पाती हूं। मेरे खयाल सें आप् उसकी सहायता जरूरकर पाओगे, क्योंकी जोँ भि आप् उससे कहते हौ वोँ हमेशा करता हैं."
तौ उसरात कों जब नेहा अपने कमरे मे जारही थि तोँ ससुरजी नें उसको बुलाया। उससमय प्रवींद्र टेलीविज़न देखरहा थां। उस टाइम उसकोकुछ पता नहि चला थां। औऱ रवींद्र सो चुका थां तब तक। ससुरजी औऱ बहू दोनों नें किचेन मे आरामसे बात कि।
ससुरजी नें कहा- “तुम् अपनी सबसे सेक्सी नाइटी पहनलो उसको रिझाने केँ लिएबहु, मे अंदरआता हूं उससेबात करने केँ लिए, तुम् उसको जगाओतब तक, मे अभि आया."
नेहा नें ससुरजी कों जवाब दिया-“ठीक हैं पापा, मगर एक् बात हैं, क्याँ प्रवींद्र कों सुनाई नहि देगाअगर वोँ कारिडोर सें गुजरा तौ? वोँ अभि तक टेलीविज़न देखरहा हैं औऱ हमारे कमरे केँ पास सें गुजरेगा अपने कमरे मे जाने केँ लिए."
तौ ससुरजी नें कहा- “तोँ फिनठीक हैं मे प्रवींद्र कों अपने कमरे मे जाने कां इंतेजार करता हूं, जब वोँ सोनेचला जाएगा तब आऊँगा तेरेपास, ओके?"
नेहामान गई औऱ अपने कमरे मे चली गई कपड़े बदलने। नेहा नें अपने कपड़े उतारे जोँ पहनी हुइ थि औऱ नाइटी पहन लिया। वैसे तोँ हररात वोँ बिना ब्रा केँ नाइटी पहनती थि, मगरइस रात कों क्योंकी उसका ससुरजी आने वाला थां तोँ नेहा नें ब्रा नहि उतरा, ब्रा केँ ऊपर हि नाइटी पहन लिया। नाइटी पिंककलर कि थि औऱ पतली-पतली स्ट्रैप्स थि कंधे पऱ औऱ बहोत महीन थि। नेहा स्वयं कों आईने मे देखकर सोचने लगी कि उसका जिश्म साफदिख रहा हैं, उसको ससुरजी वैसे देखेगा। उसको लज्जा आनेलगी औऱ सोचने लगी कि आइडिया ड्राप करदे। मगर ससुरजी तौ आने वाला थां, वोँ अब केसे उसको जाकरकहे नहि आने कों? नेहा एक् 18 साल कि कुंवारी लड़की थि औऱ ससुरजी उसके कमरे मे आने वाला थां उसके पति कि सुहागरात मनाने केँ लिए, सहायता करने केँ लिए।
पति उसकेसंग संभोग करेगा ससुरजी कि हाजिरी मे। हे ईश्वर। ये सोचकर नेहा केँ पूरे जिश्म केँ रोंगटे खड़े होँ गये। मगर नेहा अपने पति सें संभोग करना चाहती थि, 3 महीने हौ गये थें औऱ उसनेकुछ नहि किया थां। नेहा चाहती थि कि कुछ भि होँ जाए एक् बार रवींद्र उससे संभोग कर लें तौ उसकोचैन आएगा। नेहा नें फिन सोचा कि ससुरजी नें उससेकहा थां एतराज नहि करने कों, अगर उसकोउसे छूना पड़ा तौ। तोँ नेहा सोचने लगी कि कहां छुएगा वोँ उसे? जिश्म कों छुएगा, कहां छुएगा?
येसभी सोचते हए नेहा केँ जिश्म मे एक् कंपनहई औऱ उसकी रगों मे एक् लहर दौड़ी। वोँ स्वयं केँ जिश्म कों आईने मे देखरही थि औऱ अपने ससुरजी कों सोचरही थि कि अभि थोड़ी देर मे क्याँ होने वाला हैं? फिन वोँ रवींद्र कों जगाने लगी। रात केँ बारहबज
बारहबजे थें। जबससर नें नेहा केँ बेडरूम कों खोला। नेहा रवींद्र केँ बगल मे लेटीहई थि औऱ रवींद्र गहरी नींद मे थां, नेहा कि नाइटी ऊपरउठी हुईँ थि औऱ उसकी हसीनदूध कि जैसी जांचें दिखरही थीं।
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
ससुरजी केँ अंदरआते हि नेहाझट सें उठकरबैठ गई। चेहरे पर्र लाली केँ संग उसने अपने ससुरजी केँ चेहरे मे देखा। कमरे मे मद्धिम बेडलैंप जलरहे थें औऱ ससुरजी अपनी आँखों कों नेहा केँ हसीन जिश्म सें नहि हटापा रहा थां। नेहा कि नंगी बाहें, उसकी काँख, कंधे पर्र पतली-पतली स्ट्रैप्स, औऱ ब्रा भि नजर आँ रहे थें, औऱ वोँ सभी देखकर ससुरजी केँ मन मे कुछहुआ।
नेहा कों अजीबलगा जिसतरह सें ससुरजी उसकोदेख रहा थां तौ उस भारी तनहाई कों तोड़ने केँ लिए नेहा नें बात कि- “वोँ नहि उठरहा हैं पापा, मैंने बहोत कोशिश कि." नेहा नें फुसफुसाते हुएकहा।
बूढे कों बहोत अच्छा लगाजिस तरह सें फुसफुसाहट मे नेहा नें उससेबात कि, जैसे कि वोँ उसकासंग देरही थि, शुरुआत सें हि। तब उसने अपने बेटे कों जगाने कि कोशिश कि। बाप नें रवींद्र कों बहोत जोर सें झंझोड़कर हिलाते हुए जगाया औऱ वोँ मुश्किल सें आँखों कों खोलते हुए देखा औऱ अपने पिता कों अपने बेडरूम मे देखकर चिहुँक गय़ा।
रवींद्र आँखों कों मसलते हुएबेड पऱ बैठा औऱ पूछा- “क्याँ बात हैं?"
तौ बाप नें कहा- “बेटा आखिरकब तक ऐसा चलेगा? तुमने आज तक बहू कों छुआ हि नहि। क्यूं, प्राब्लम क्याँ हैं तेरा?"
रवींद्र कों लज्जा आई औऱ उसनेसर नीचे झुका लिया। बाप नें बात पऱ बात कियामगर रवींद्र जमीन पर्र नजरों कों गाड़े रखा, कोई भि जवाब नहि दिया।
पिता नें कहा- “देखोअगर तुमको लज्जा लगरही हैं औऱ समझ मे नहि आता कि केसे शुरुआत करोगे तोँ मे तुमको सिखाता हूं, मुझे देखो औऱ जोँ मे करूँ वैसाकरो." पिता नें नेहा कि बाहों पर्र अपनी हथेली कों फेराऊपर सें कलाई तक औऱ रवींद्र कों वैसा करने कों कहा।
जब ससुरजी नें नेहा केँ बाजू पर्र उसतरह सें हाथ फेरा तौ नेहा केँ जिश्म मे एक् आग जैसेलगी औऱ आवाज़ कों थामते हुए एक् हल्की सि सिसकी ली उसने। नेहा थोड़ी घबड़ाई हुईँ थि औऱ उसका पूरा जिश्म तनाहुआ थां उससमय। बहोत तनाव हौ रही थि उसे।
रवींद्र नें वैसा हि किया जैसे उसके पिता नें सिखाया, मगर उसकाहाथ थर-थर कांपता रहा, जब तक उसने नेहा केँ बाजू पऱ अपनी हथेली कों फेरा। उसके पशीने छूट पड़े औऱ चेहरा लाल हौ गय़ा।
तब ससुरजी नें नेहा कों बेड पर्र अपने बिल्कुल लगभग बुलाया। वोँ उसकेपास गई, बिल्कुल लगभग। तौ ससुरजी नें अपने होंठों कों नेहा केँ गले पर्र हल्के सें फेरा औऱ रवींद्र कों वैसा करने कों कहा। रवींद्र नें कियाबस थोडा सां, फिन काँपने लगा थां।
तब रवींद्र केँ पिता नें नेहा कों अपनी बाहों मे लेकर उसकेगाल पऱ किस किया, गले कों चूमा औऱ हल्के सें अपनीजीभ कों नेहा केँ कान केँ पीछे फेरा औऱ रवींद्र कों वैसा करने कों कहा।
नेहा कों उससमय अपने आपको ससुरजी कों समर्पित कर देने कों मनकररहा थां। मगर अपने आप् पर्र काबू रखतेहुए जिस टाइम ससुरजी अपनीजीभ कों उसकेकान केँ पीछेफेर रहा थां, नेहा नें कहा- “पापा, नहि."
तौ ससुरजी नें कहा- “सहयोग करो, प्लीज बहू। मे येसभी तुम्हारी भलाई केँ लिएकर रहा हूं। देख्ना वोँ सीख जाएगा औऱ तुमसे संभोग करेगा."
रवींद्र नें नेहा कों उसीतरह सें बाहों मे लियामगर बहोत हि काँपरहा थां औऱ पशीना-पशीना होँ गय़ा थां।
तब बाप नें पूछा- “कैसालग रहा हैं बेटा? अच्छा लगरहा हैं? तेरा खड़ाहुआ नाँ?"
रवींद्र नें कोई जवाब नहि दिया। पिता नें बेटे कि शार्ट पर्र देखा कि उसका खड़ाहुआ याँ नहि? मगरकुछ भि नहि थां सभी फ्लैट थां। तब पिता नें नेहा कि नाइटी कों ऊपर उठाया औऱ उसकी पूरी जांघे दिखने लगी, औऱ पिता नें नेहा कि जांघों कों रवींद्र कों दिखाते हुए पूछा- “देखो बेटा क्याँ ये सेक्सी नहि हैं? देखो इसकी कितनी सेक्सी जांघे हें बेटा, तेरी पत्नि बहोत हि सेक्सी हैं रवींद्र बेटा."
फिन स्वयं पिता कां लण्ड खड़ा होँ गय़ा नेहा कि सुंदर जांघों कों देखकर औऱ नेहा कों सभी दिखा। उसने देखा
कि उसके ससुरजी कां खड़ा होँ गय़ा उसके कपड़े केँ अंदर हि। ससुरजी कों आज पहलीबार नेहा कि जांघों केँ वोँ हिस्से नजरआए जोँ हमेशा छिपे रहते थें। इतने दिनों सें वोँ हिस्से कितने सुंदर औऱ सफेदरंग केँ थें, उसमें गलाबी रंग कां मिलावट भि थि, गदराई, गर्म, सेक्सी जांघे। ससर केँ मुँह मे पानी आँ गय़ा। उसने जांघों पऱ अपनाहाथ फेरा, आहिस्ता, हल्के-हल्के, ऊपर तक हाथ बढ़ाता गय़ा, नेहा कि नाइटी केँ नीचे भि।
नेहा नें अपने जिश्म कों सीधा करतेहुए ससुरजी केँ हाथ कों आगे बढ़ने सें रोका।
तोँ ससुरजी नें पूछा- “क्यूं, तुमने अपनी ब्रा नहि निकाली हैं नेहा? प्लीज उतारदो ब्रा कों उसको उत्तेजित करने केँ लिए, ये जरूरी हैं बेटी.”
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