Sagar (Full Storyd) – New Episode
Priya bandhu,
Aapka story likhne kaa dhang, aapka shabdon kaa chunav, murder wala plot और usme story ko kese move krna h और उसके बाद kese tehkikat karni h, ye sab padh के mein iss nishkarsh pe pahucha hoon के ap एक behatrin lekhak haen। secondly ap kahani hindi font में likh rahe hu, mene kuchh stories hindi font में likhi haen और muze ptaa h ismein kitni prayaas lagti h। aapka sab kuchh auron से alag h joo aapko एक अच्छा writer pesh krta h।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 23 Continue.
" क्याँ टाईमहुआ हैं ?"
चाची केँ पहलू मे लेटाकुछ देर पहले हुई अभिसार सुखों केँ कल्पनाओं मे खोयाहुआ थां कि चाची केँ आवाज़ नें मुझे चेतना मे ला दिया। मैंने लेटे लेटे हि टाईम देखने केँ लिए अपनीफोन ढुंढने केँ लिएहाथ अगलबगल दौड़ाया। तभी मुझेयाद आया कि फोन तोँ मेरे पैंट मे हें। मे हड़बड़ा कर पलंग सें उठा।
" क्याँ हुआ ?" - चाची मुझेइस तरह हड़बड़ा कर उठतेहुए देखकर बोलीं।
" मेराफोन तोँ पैंट मे हें। कहीं पानी मे भीगने सें खराब नं होँ गय़ा होँ "- मे नंगे शरीर हि उठा औऱ पैंट सें फोन निकालते हुएकहा।
मैंने वहींबगल मे पड़ेहुए एक् सुखे कपड़े सें फोन पोंछा। शुक्र थां कि फोन खराब नहि हुआ थां। मगर उसमें माॅम केँ पांच, रीतु केँ दो औऱ रमणीक लाल केँ दोमिस काॅल थें। इतनेमिस काॅल देखकर मे चौंका। मे फोन लेकर वापसखाट पर्र आकरबैठ गय़ा।
" फोनठीक हैं नाँ ?"- चाची उठकर मेरेबगल मे बैठते हुए बोलि।
हम् दोनों केँ बदन पऱ अभि भि कपड़े कां नामोनिशान तक नहि थां।
" हां। फोन तोँ ठीक हैं मगर माॅम, रीतु केँ कईमिस काॅल हैं। "
" क्याँ बात हैं ?"- वोँ मेरे लिंग कों अपने हाथों सें पकड़कर सहलाते हुए बोलीं।
" पता नहि। मोबाइल करता हूं " - मैंने भि उनकी बड़ी बड़ी चूचियों कों दबाते हुएकहा।
मैंने माॅम कों मोबाइल लगाया।
" अरे कहां पऱ हैं ? कब सें मोबाइल कररही हूं, मोबाइल क्यूं नहि उठाता ?" - रिंग होते हि माॅम गुस्से सें बोलीं।
" केसे मोबाइल उठाऊं ? देख नहि रही हौ कितनी जोर सें बारिश हौ रही हैं। "
" तोँ बारिश होने सें मोबाइल उठाने याँ नहि उठाने कां क्याँ मतलब हैं ?"
" बारिश सें मोबाइल भींगकर खराब नहि होँ जायेगी ?"
" वाउ ! क्याँ सुन्दर जबावदे रहा हैं। यदि बारिश होँ तौ मोबाइल कां इस्तेमाल हि नहि करना चाहिए। कहींउस कमीनी ज्योत्सना केँ संग तौ नहि हैं ?"
अब उन्हें क्याँ बताऊं कि मे ज्योत्सना केँ संग नहि बल्कि चाची केँ संगनंग धडंग बैठा उनसे बातें कररहा हूं।
" अरे नहि माॅम मे ज्योत्सना केँ संग नहि हूं। मे कहीं औऱ हि स्थान पर्र हूं। एक्चुअल मे मेरी बाइक भि तोँ खराब हौ गई हैं। "
" क्याँ ? बाइक खराब होँ गई हैं ?" - अब वोँ पहले केँ अपेक्षाकृत नरम स्वर मे बोलि।
" हां। पहलेयह बताओ नां कि मोबाइल किसलिए किया थां ?"
" रीतु केँ लिए। "
" रीतु केँ लिए ?" - मे घबड़ाते हुए बोला - " क्याँ हुआ रीतु कों ?"
" अरेकुछ नहि हुआ हैं। वोँ कल काजल केँ संग उसकेशहर जाने केँ लिएबोल रही हैं। काजल कि कजन सिस्टर कि विवाह हैं तोँ वोँ रीतु कों संग लें जाने केँ लिएबोल रही हैं। "
" क्याँ ?" - मे आश्चर्यचकित हुआ।
मगर काजल नें तौ मुझेकहा थां कि केवल उसके माँ बाप जाने वाले हें औऱ वोँ यही रहेगी। औऱ उसके मम्मी बाप केँ जाने केँ बादकल पुरादिन औऱ पुरीरात मेरेसंग बिस्तर कबड्डी खेलेंगी।
मैंने माॅम सें कहा -" औऱ रीतु क्याँ बोलरही हैं ? क्याँ वोँ जानां चाहती हैं ?"
" हां। उसकी भि ख़्वाहिश हैं जाने केँ लिए। "
" वोँ घऱ पऱ हि हैं ?
" नहि, काजल केँ घऱ गई हैं। "
" ठीक हैं। मे रीतु सें बात करता हूं। "
" मगरतु हैं कहां अभि ? औऱ कब तक आयेगा ?"
" मैने बताया नं मे कहीं औऱ स्थान पऱ फंसाहुआ हूं। मे आधे घंटे मे आँ रहा हूं। "
" औऱ मुझेलगा तुउस कलमूही केँ संग होगा। "
" यही तोँ गलतीकर दिया जोँ उसकेपास नहि गय़ा। अभि मे घऱआता हूं फिन वहां सें उस कलमूही केँ घऱ जाता हूं। "
चाची मुझे हैरत सें देखरही थि। उन्हें विश्वास नहि हौ रहा थां कि मैंने उनकी सहेली ज्योत्सना कों भि पटारखा हैं।
" उससे पहले मे तेरीपैर तोड़ दुंगी " - माॅम गुस्से सें बोलि।
मैंने हंसते हुए मोबाइल काट दिया।
चाची मेरे लंड कों दबाते हुए बोलि -" यह ज्योत्सना वाला क्याँ चक्कर हैं ?"
" जैसा तुम्हारे संग वाला चक्कर हैं " - कहतेहुए मैंने उनकी बुर मे अपनी उंगली पेल दि।
" तुम् सच मे बहोत नालायक होँ। बड़ी बड़ीउमर कि औरतों केँ पीछेपड़ रहते होँ। यहसभी तुम्हारी गन्दी गन्दी किताबें पढ़ने कां नतीजा हैं " - वोँ मेरे लंड कों पकड़कर मूठ मारते हुए बोलि।
मे चौंका।
इसका मतलब मेरी अलमारी सें जौ किताबें गायब हौ रही थि, वोँ चाची कररही थि।
" मैंने उनकी मम्मों कि बड़ी निप्पल कों उंगलियों सें मसलते हुएकहा - " आपको केसेपता कि मे गन्दी गन्दी किताबें पढ़ता हूं। "
" अपने आलमारी मे जौ किताबें छुपाकर रखा हैं क्याँ वोँ तेरे बाप कां हैं ?"
" हैं तोँ मेरा हि मगर आप् कों केसेपता ?"
" बसपता हैं। "
" कहीं वोँ आप् हि नहि तोँ जौ मेरे आलमारी सें किताबें गायब करती थि ?"
" तुझेही मालूम थां कि वहां सें कोईकोई पुस्तक गायब होँ जाती थि ?"
" क्यूं नहि पता होगा ? आखिर मेरा पुस्तक थां तौ कोई पुस्तक न् होने सें मालूम पड़ हि जायेगा। अब आप् बताओ वोँ किताबें आप् हि निकालती थि न् ?"
" मे नहि, तेरी माँ निकालती थि। "
" क्याँ ?"
मे आश्चर्य सें मूंह फाड़े उनको देखता रहा।
वोँ मुझे आश्चर्यचकित होते देखकर मुस्कराई औऱ मुझे अपनेऊपर खींचली। औऱ मेरे लंड कों पकड़कर अपने बुर केँ छिद्र पर्र रखकर नीचे सें धक्का दि जिससे मेरा लंड कां सुपाड़ा उनके बुर मे घुस गय़ा।
" चाची, सचसच बताओ ? क्याँ माॅम वहां सें किताबें निकालती थि ?" मे अभि भि श्योर नहि थां।
" हां। तेरी माॅम हि तेरेरूम केँ आलमारी सें किताबें गायब करती थि औऱ हम् दोनों बारी बारी सें उसे पढ़ती थि। क्याँ करें ! आखिर हम् भि तौ हाड़ मांस कि हि बनी हैं। हमारी भि ख़्वाहिश होती हैं कि कोई हमें भि रगड़कर प्रेम करे। तेरेडैड नें तेरी माँ केँ संग औऱ तेरे चाचा नें मेरेसंग लगभगआठ दस सालों सें सेक्स करना हि छोड़ दिया हैं। उनका खड़ा हि नहि होता। हम् दोनों बरसों सें प्यासी हैं। एक् दिन तेरी माॅम तेरी कमरे कि सफाईकर रही थि। सफाई करतेहुए तेरीखाट केँ नीचे सें उन्हें आलमारी कि चाबी मिली। उन्होंने सोचा क्यूं नं आलमारी भि साफ करके उसके अंदर कि सामान सजादूं, तभी उन्हें तेरीयह गन्दी गन्दी किताबें दिखाई पड़ी। पहले तोँ वोँ बहोत क्रोध हुई। तुम्हें उसी टाइम डांटना चाहती थि। औऱ संयोग सें उसदिन मे भि वहां पहुंच गई। उन्होंने मुझे दिखाया। मुझे भि खराबलगा। मगर संयोगवश उसीदिन तुम् अपने दोस्तों केँ संग बंगलूरू घुमने चलेगए। तुम् पुरेछः दिनबाद आए थें तब तक यहां कि स्टोरी कुछ औऱ हि होँ गई थि। इनछः दिनों मे हमने सारी किताबें पढ़ली औऱ वोँ भि एक् बार नहि बल्कि कईबार औऱ फिनअब तुम्हें क्याँ फटकारें हम् दोनों खूद हि उन गन्दी कहानियों केँ दिवाने बन चुके थें। हमारी दबी हुईँ लालशा फिन परवान चढ़ने लगी। हमारी सेक्स कि भुख पहले सें भि अधिकबढ़ गई। मगर परिवार केँ मान सम्मान हमारी मजबूरी, संस्कृति हमारी पैर मे बेड़ियां डाले पहले हि कि तरह जकड़ी रही।
मेरा तौ आश्चर्य केँ मारे बूराहाल थां। माॅम किताबें मेरेरूम सें गायब करती थि औऱ उसे पहले स्वयं पढ़ती थि फिन चाची कों पढ़ाती थि औऱ जबफिन पढ़ने केँ बाद मेरे आलमारी मे रख देती थि।
वोँ सारी गन्दी गन्दी किताबें जिसमें मम्मी बेटे, बाप बेटी, भइया बेहन, चाची भतीजा, देवर जी भाभी कि चुदाई कि कहानियां भरी पड़ी थि। यह सोचकर मेरा लंड खुशी केँ मारे उछलने लगा जिसे चाची अपने बुर मे साफ महसूस कररही थि।
मे पुरीतरह सें उत्तेजित हौ गय़ा औऱ चाची कों हुमच हुमचकर चोदने लगा। वोँ भि मेरा भरपूर संग देनेलगी।
थोड़ी देरबाद वोँ अपने कपड़े पहनने लगी। मेरा पैंट शर्ट गंजी जांघिया अभि भि भींगा हुआ हि थां। फिन भि मैंने सारे भींगे हुए कपड़े दुबारा पहन लिये।
कपड़े पहनने केँ बाद मैने रीतु कों मोबाइल किया।
उसके हैलो कहते हि मैंने कहा - " किसलिए मोबाइल कररही थि ?"
" भइया, मे काजल केँ संग उसकीकजन कि विवाह मे जानां चाहती हूं। क्याँ जाऊं ?"- उधर सें रीतु बहोत हि मीठे स्वर मे बोलि।
" अरे, तु क्याँ करेगी विवाह मे जाकर ? उनलोगो कां अपना समाज होगा, अपना माहौल होगा। तु वहां जाकर परेशान हि होगी। "
" कोई तकलीफ़ नहि होगी। विवाह जयपुर मे हैं। वहां उन्होंने होटलबूक कियाहुआ हैं। विवाह केँ बहाने जयपुर भि घुम लुंगी। "
" कितने दिन कां ट्रिप हैं ?"
" चार दिनों कां। "
" मगर मैंने तोँ सुना थां कि केवल काजल केँ माँ बापू हि जारहे हें। काजल केँ जाने कां प्लान नहि थां। "
" पहले काजल केँ जाने कां प्लान नहि थां मगर उसकीकजन उसके नं आने कि खबर सुनकर बहोत नाराज़ हूई। उस नें जोर देकरउसे आने कों कहा। औऱ फिन काजल केँ माँ डैडी नें भि फोर्स किया तौ फिन रेडी होँ गई। "
" ओह ?"
" वैसे आपको केसेपता कि काजल नहि जाने वाली थि। मैंने तोँ आपकोकभी कहा नहि " - वोँ मजाक करतेहुए बोलीं।
मे हड़बड़ाया।
" अरे वोँ। वोँ। वोँ काजल एक् दिन रास्ते मे मिल गई थि, तभीकहा थां उसने। "
" कहींकुछ छुपा तौ नहि रहे हौ मुझसे ? कोई चक्कर वक्कर तों नहि हैं ?" - वोँ शरारती अंदाज मे बोलि।
" अरे बकवास मतकर। ऐसाकुछ नहि हैं। "
" तोँ फिन बताओ मे क्याँ करूं ? विवाह मे जाऊं याँ नहि ?"
" तु श्योर जानां चाहती हैं ?"
" हम्म। "
" तौ एक् कामकर, राहुल कों भि अपनेसंग लेँ जा। तेरेसंग एक् मर्द रहेगा तोँ अच्छा होगा। "
" क्याँ ?"
" हां। अबतु काजल औऱ उसके माँ डैडी सें पुछ लेँ। अगर तुम को जानां हैं तौ राहुल भि तेरेसंग जायेगा। "
" ओके। राहुल हमारे संग जायेगा। "
" अरे, पहलेपुछ तौ लेँ। "
" काजलबगल मे हि हैं। मैंने उससेपुछ लिया हैं। वोँ राजी हैं। "
" ठीक हैं फिन। वैसेकल निकलना केसे हें ?
" सुभहसात बजे केँ बस सें निकलना हैं। अंकलजा रहे हें टिकटबूक करने। "
" बस सें ?"
" अरे भइया, शानदार बस हैं। उसका भाड़ा ए सि ट्रेन सें भि अधिक हैं। "
" ठीक हैं फिन। तुसाम कों कब तक घऱ आयेगी ?
" छःबजे आँ जाऊंगी। तैयारी भि तोँ करनी हैं। "
" जल्द आनां। यदिकोई सामान वगैरह लाना होगा तोँ खरिदने केँ लिए टाइम चाहिए नं। "
" मे पक्का छःबजे तक आँ जाऊंगी। "
मैंने मोबाइल काट दिया। चाची कों सारी बातें बताया। औऱ राहुल कों जयपुर जाने केँ लिए औऱ उसके कपड़े वगैरह भि सजधजकर रखने कों कहा।
फिन वहां सें अपनेघऱ चलाआया।
जबघऱआया तोँ दरवाजा खुलाहुआ पाया। मैंने सोचा कहींडैड तोँ नहि आँ गए हें। मे घऱ मे प्रवेश कर केँ मेन दरवाजा बंद किया औऱ माॅम कों आवाज़ लगाई।
माॅम चिल्ला कर बोलीं कि वोँ रसोई मे हैं तौ मे यह कहतेहुए अपने कमरे कि तरफचला गय़ा कि मे नहाकर, फ्रेश होकर नीचेआता हूं।
मे अपने कमरे मे गय़ा। सारे भींगे हुए कपड़े उतारकर बाथरूम मे घुस गय़ा। नहाधो करजब मे अपनी गंजी औऱ जांघिया पहनने केँ लिए ढुढने लगा तौ देखा कि वोँ भि पुरीतरह सें भीगी हुई हैं। सुभह सें बरसात होने केँ कारण वोँ सुख नहि पाई थि।
मे अपने कमरे मे आलमारी सें एक् तौलिया निकाल कर लपेट लिया। औऱ उपर एक् शर्टपहन लिया। औऱ फिन नीचे हाॅल मे आँ गय़ा। माॅम शायद अभि भि रसोई मे हि थि।
मे रसोई मे गय़ा। औऱ माॅम कों देखकर बुरीतरह सें चौंक गय़ा।
नेक्स्ट कलरात तक।
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माॅम कि पीठ मेरीतरफ थि। वोँ रसोई स्लैब केँ सामने खड़ी खानां बनारही थि। मे उनके वस्त्र कों देखकर बुरीतरह चौंक गय़ा। उन्होंने वोँ नाइटी पहनरखी थि जोँ मैंने श्वेता दि केँ लिए लाया थां। वोँ नाइटी उनकेभरे जिस्म पर्र घुटने सें थोड़ी हि उपर थि। पीछे सें उनकीपीठ कां साठ प्रतिशत हिस्सा खुलाहुआ थां। मे उनकी गोरी अधनंगी पीठ औऱ घुटने सें नीचे नंगी पिंडलियों कों देखकर भौंचक्का रह गय़ा। इसरूप मे मैंने उन्हें पहलेकभी देखा नहि थां। लगता थां कि जैसेकोई सेक्स कि देवी खड़ी होँ कर अपने जलवे बिखेर रही हौ।
वोँ पलटी औऱ मुझे देखकर मुस्कराई। सामने कां सीन देखकर तौ मेरा कलेजा हलक तक आँ आया। मेरे मुंह केँ संगसंग लिंग मे भि पानी आँ गय़ा।
उनके दोनों कन्धों पर्र एक् बारिकी सां स्ट्रिप थां जोँ उनके दोनों बड़े बड़े सीना ताने वक्ष कों बड़ी मुश्किल सें सम्हाले हुएरखा थां। सीने कां करीब पचास प्रतिशत उपरी हिस्सा नंगा थां। मेरी आंखें जड़ हौ गई। मेरी नजरें उनकी छाती सें चुम्बक कि तरह चिपक गई। औऱ मेरा लंड खड़ा हौ गय़ा जबकि मे चाची कों तीनतीन बारचोद करआया थां। मैंने अपनी जीवन मे इतनी हसीन औऱ सेक्सी गोलाईयां नहि देखी थि।
मे मंत्र मुग्ध हौ कर उनकी सेक्सी काया कों निहारते जारहा थां।
" खानां निकालूं ?"
उनकी आवाज़ सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुईँ।
मे उनकी आंखों मे देखते हुएकहा -" वाओ ! क्याँ लगरही होँ माॅम। '
उन्होंने शरमाते हुएकहा -" खराबलग रही हूं नाँ ?"
" अरे नहि माॅम बहोत बहोत अच्छी लगरही होँ। एकदम हाॅट। क्याँ बोलूं, निशब्द। "
" मजाकमत कर। एक् दम गन्दी लगरही हूं, मुझेपता हैं। "
" मजाक नहि कररहा हूं। सचबोल रहा हूं। अगरइस रूप मे आपको मूवी वालेदेख लें तोँ हिरोइन कां आफरकर दें। डैड तोँ पागल होँ जायेंगे। "
" बकवास बंदकर। मे खानां निकालती हूं। चल, बाहर् हाॅल मे बैठ। मे खानां लेकर आँ रही हूं। "
" हाॅल मे छोड़ो। यहीं नीचेबैठ करखा लेता हूं। "
मे दरवाजे सें अन्दर गय़ा। हमारा रसोई बहुत बड़ा थां। नीचे जमीन पऱ दो लकड़ी केँ छोटे छोटे तख्त थें। उनमें सें एक् लेकर दरवाजे केँ दाहिने तरफ दिवाल सें सटकरबैठ गय़ा।
माॅम नें खानां निकाल कर मेरेआगे रख दिया औऱ स्वयं भि मेरे अपोजिट एक् तख्त लेकर अपना खानां लेकर नीचेबैठ गई। मेरा चेहरा रसोई केँ अन्दर कि तरफ थां जबकि माॅम कां चेहरा मेरी औऱ रसोई केँ दरवाजे कि तरफ थां। वोँ पालथी मारे बैठी थि जबकि मे अपने दोनों घुटने खोले बैठा थां।
खानां खातेहुए हि हम् बातें भि करतेजा रहे थें। मैंने रीतु वालीबात बताई औऱ यह भि बताया कि उसकेसंग राहुल भि जयपुर जायेगा। वोँ यहखबर सुनकर खुश औऱ निश्चित होँ गई कि राहुल भि संग मे जारहा हैं।
खानां खाते टाइम मे उनके खुले अंगों कों चुपके चुपके निहार भि रहा थां। खाने केँ उपरांत जब मे हाथ धोने केँ लिए खड़ा होनेलगा तभी मेरीनजर अपने पहनेहुए तौलिए पर्र पड़ी। दोनों घुटने अलग करके बैठने केँ कारण तौलिया मे एक् छोटा सां गैप होँ गय़ा थां। जिससे तौलिया केँ अन्दर मेरा लंड ओपन हौ गय़ा थां।
मे हड़बड़ा करउठा औऱ तौलिया कों एडजस्ट करतेहुए वाश बेसिन भागा औऱ जल्द सें हाथ मूंह धोकर अपने कमरेचला गय़ा।
मेरादिल जोरजोर सें धड़करहा थां। माॅम नें तौलिया केँ अन्दर सें मेरे झांकते हुए लंड कों जरूर देखा होगा। भले हि मेरा लंड पुरीतरह सें खड़ा नहि हुआ होँ मगर माॅम केँ सेक्सी अवतार कों देखकर थोडा कठोर तौ हौ हि गय़ा थां।
उन्होंने शर्तिया मेरा लंड देखा थां। भले हि मैंने जानबूझ कर नहि देखाया होँ। मगर उन्होंने देख तोँ लिया हि, फिन भि उन्होंने मुझे टोका क्यूं नहि ? औऱ यदि टोकती भि तौ क्याँ टोकती ? कि मेरा लंड तौलिया केँ गैप सें दिखरहा हैं। ऐसा तोँ वो कह हि नहि सकती।
औऱ उन्होंने आजयह रिविलिंग नाइटी क्यूं पहनरखी हैं ? उन्होंने कहा थां कि मुझेयह वाहियात नाइटी पसंद हि नहि हैं। ऐसी नाइटी तोँ औरतें केवल अपने पति याँ ब्वायफ़्रेंड केँ समक्ष पहनती हें। फिन मेरे सामने क्यूं पहनी ?
आज जोँ बातें चाची नें बताई थि उससेयह बात तौ क्लियर हौ गई थि कि मेरी गन्दी किताबें माॅम हि गायब करती थि। औऱ गायब हि नहि बल्कि पढ़ती भि थि। औऱ पढ़ने केँ बादउसे चाची कों सौंप देती थि। चाची नें यह भि बताई थि कि उन्हीं कि तरह माॅम कां भि सेक्सुअल रिलेशनशिप दस सालों सें नहि हुआ हैं। डैड कि सेक्सुअल क्षमता समाप्त हौ चुकी थि। उन्होंने माॅम केँ संगदस सालों सें सेक्स नहि किया हैं।
औऱ जैसी किताबें वोँ पढ़ती थि उसमें तौ वोँ कामाग्नि केँ ज्वाला सें जलभुन जाती होंगी। अपनी सेक्सुअल भूख कों केसे शांत करती होंगी ? क्याँ हस्त मैथुन करती होंगी ? याँ गाजर, मूली, केलेआदि कां इस्तेमाल करती होंगी।
सुन्दर औऱ हसीं तोँ इतनी हैं कि उनके एक् इशारे पऱ लाखों मर्द उनको पाने केँ लिए पागल तक होँ जाएं।
दुसरी कोई स्त्री होती तौ मे कब कां ट्राई कर चुका होता। मगर वोँ मेरी माॅम हैं। माॅम कों भले हि मे लाख फैंटेसी करूंमगर हकीकत मे सेक्सुअल रिलेशन बनाना आसान थोड़ी न् थां। माॅम केँ संग सेक्स करना हवाई किले बनाने जैसा थां।
मगरआज जौ कुछ भि हुआ थां, उसमें मुझेआशा कि एक् किरण दिखाई देनेलगी थि।
फिन मैंने अपना दिमाग़ इनसभी बातों सें हटाकर रमणीक लाल कि तरफ लगाया। मैंने उसे फ़ोन किया। उसने मुझे अभि जल्दी मिलने केँ लिएकहा।
मैंने कमरे सें बाहर् देखा। बारिश अभि भि हौ रही थि मगर उसकी रफ़्तार अब धिमी होँ गई थि। मैंने उससे मिलने कों सोचा। मगर मेरा जांघिया औऱ गंजी दोनों अभि तक भींगा हुआ थां।
मैंने बिना जांघिया औऱ गंजी केँ हि पैंट शर्टपहन लिया औऱ माॅम कों बोलकर घऱ सें बाहर् निकल गय़ा। बाइक तौ खराब पड़ी थि औऱ डैड अभि तक आये नहि थें। इसलिये मैंने बस पकड़ी औऱ रमणीक लाल सें मिलने चला गय़ा।
रमणीक लाल सें मिलने औऱ बातें करने मे बहुत वक़्त लग गय़ा। जब मे घऱ पहुँचा तबसाम केँ पांचबज गए थें। रीतु भि घऱ आँ गई थि। माॅम नें अपनी नाइटी चेंजकर ली थि। अब वोँ पहली वाली पुरेबदन कों ढकने वाली नाइटी पहनरखी थि।
बारिश बंद होँ गई थि। मे आज क्लब नहि जानां चाहता थां क्योंकि रीतु औऱ राहुल कों शोपिंग करवाना थां। मैंने क्लब मोबाइल करकेआज नहि आने कि सूचना दे दि।
छःबजे तक डैड आँ गए। डैड केँ आने केँ बाद मे रीतु औऱ राहुल कों लेकर गाड़ी सें मार्केट चला गय़ा।
मार्केट मे भि बहोत टाइमलग गय़ा। नौबजे हम् लोगघऱ पहुंचे। फिनसब नें खानां खाया पिया औऱ रीतु माॅम कों लेकर अपनी पैकिंग मे लग गई। डैड अपने कमरे मे चलेगए। मे भि ऊपर अपने कमरे मे चला गय़ा।
मैंने अपने कपड़े चेंजकिए।
एक् सिगरेट सुलगाया औऱ काजल कों मोबाइल लगाया। चार रिंग होने केँ बाद उसने मोबाइल उठाया।
" हैलो !" - काजल कि आवाज़ आई।
" हैलो। क्याँ कररही हैं ?"
" खासकुछ नहि। पैकिंग कररही थि। "
" हौ गई पैकिंग ?"
" हूं। "
" तुमने तौ अच्छा उल्लू बनाया मुझे ?"
" मे क्याँ करती भैया, मेरा जाने कां एक् परसेंट भि मन नहि थां मगर मेरी कजिन नें इतना प्रेशर किया कि क्याँ बोलूं। "
" कोईबात नहि। कजन कि विवाह मे तुम्हें जरूर जानां चाहिए थां। तुमने अच्छा डिसिजन लिया। "
" हम्म। मगर हमने इतने दिनों सें ' वोँ ' प्लानिंग किया थां, वोँ सभीगुण गोबर हौ गय़ा नं। "
" अच्छा ! हमने ' वोँ ' प्लानिंग किया थां। वैसे क्याँ ' वोँ ' प्लानिंग किया थां ?" - मैंने उसे छेड़ते हुएकहा।
" वही " - वोँ खिलखिलाती हुई बोलि।
" क्याँ वही ? बोल नं मेरी प्यारी चहेती बेहन ?"
" मेरी मुनिया सें तुम्हारे मुन्ने कि दोस्ती। "
" क्याँ बोलरही हैं ? ऐसेकोड भाषा मे मुझेसमझ नहि आएगा। "
वोँ फुसफुसा कर कामुक स्वर मे बोलि -" मेरी मुनिया मतलब तुम्हारी काजल कि बुर औऱ तुम्हारा मुन्ना मतलब तुम्हारा लंड। समझे मेरे चोदू भइया। "
" समझ गय़ा मेरी चुदक्कड़ बेहन। जयपुर सें लौटकर आँ फिन तेरी बुर फाड़ता हूं " - मैंने अपना लंड सहलाते हुएकहा।
" जरूर मेरे चोदू भइया। तुम्हारी बेहन कि बुर चोदू भइया केँ लंड कां प्रतीक्षा करेगी। "
" मे भि इन्तजार करूंगा। चलअब मोबाइल रख, कलबस स्टैंड पऱ मुलाकात होगी। "
" जानते होँ आज रीतु नें एक् जोक सुनाई थि। "
" कैसाजोक ?"
" सुनाऊं ?"
" सुना। "
" एक् लड़का आगरा रेलवे स्टेशन सें फरीदाबाद अपनेघऱ आने केँ लिए दिल्ली तक आने वाली ट्रेन मे बैठा। जब वो अपने रिजर्वेशन कोच मे आया तौ वहां उसने एक् बहोत हि सुन्दर लड़की कों खिड़की केँ पास बैठेहुए पाया। उसकासीट उस लड़की केँ ठीक अपोजिट थां। वोँ लड़की भि उसी कि तरह अकेले जर्नी कररही थि। वहांकुछ औऱ लोग भि बैठेहुए थें। लड़काउस खूबसूरत औरत कि खुबसूरती देखकर सोचने लगा कि काशयह लड़की मेरी गर्लफ्रेंड होती। वोँ उस लड़की सें बातें करना चाहता थां मगर वहां औऱ भि कईलोग थें इसलिये वोँ हिम्मत नहि जुटा पाता थां। जब ट्रेन मे बैठेहुए बहोत वक़्त हौ गय़ा तोँ उसने सोचा क्यूं नं थोडा रिस्क लें हि लूं। वोँ उस लड़की कां ध्यान अपनीओर आकर्षित करने केँ लिए बहोत सारी हरकतें करनेलगा मगरऐसे जैसे मात्र लड़की हि देखपाए। लड़की भि उस कि सारी हरकतें देखरही थि औऱ मन हि मन कुढ़रही थि। ऐसे करते करते फरीदाबाद स्टेशन आँ गय़ा। मगर बेचारा वोँ लड़की सें बात नहि हि कर पाया। उसेअब वहीं उतरना थां। मगर लड़की कों अभि आगे दिल्ली तक जानां थां। लड़कामन मसोसकर ट्रेन सें उतर गय़ा। वोँ प्लेटफार्म पर्र आँ गय़ा। उसने देखा वोँ लड़कीउसी कि तरफदेख रही हैं। लड़के नें एक् बार औऱ हिम्मत कि औऱ उस लड़की केँ पास जोँ खिड़की सें बाहर् देखरही थि, गय़ा। लड़की नें उसे खिड़की सें देखकर देखा। लड़का उसके खिड़की केँ पास गय़ा औऱ बोला - " मैडम, क्याँ मे आप् कां नामजान सकता हूं ?" लड़की नें गुस्से सें उस लड़के कों देखा औऱ बोलीं - " मेरानाम बेहनजी हैं। " लड़का बेचारा दुखी हौ गय़ा। तब तक ट्रेन भि खूल चुकी थि। लड़का ट्रेन केँ संगसंग चलतेहुए कहा -" मैडम, आपने मेरानाम तोँ पुछा हि नहि। " लड़की क्रोधित होकर बोलि -" क्याँ नाम हैं तुम्हारा ? तौ लड़के नें मुस्कुराते हुएकहा - " मेरानाम बहनचोद हैं। " लड़की गुस्से मे कुछ कहती इससे पहले हि ट्रेन कि गति बहुततेज हौ गई। "
मे सुनकर भौंचक्का रह गय़ा। रीतु नें ऐसाजोक काजल कों सुनाया थां। अभि मे उसेकुछ बोलता तभी ' माँ बुलारही हैं ' कहकर उसने मोबाइल काट दिया।
Sagar (Full Storyd) - Continue reading next part
nice update .mummi kya krr rahi h kitchen mai ? joo sagar chownk gyaa . lagta h mummi ko bi shant krna padega ,,kitabe padhke chachi kee prakaar mummi bi garam hoty hongi na ??
कामदेव भइया. आप् हि केँ शब्दों मे.मुड औऱ इन्फ्रास्ट्रक्चर बन नहि पारहा हैं ? भइया.कल , परसों तक पक्का कुछलिख लुंगा।
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