Sagar (Full Storyd) – New Episode
आज बहोत सारी घटनाएं हुइ थि। इंस्पेक्टर कोठारी सें एक् सार्थक मुलाकात। श्वेता दि औऱ जीजू कां यहां शिफ्ट होना। अनुपमा भाभी केँ संग जबर्दस्त एनकाऊंटर। औऱ.औऱ भि कुछ थां।। और कुछ thaa matlab shak
aapne bi amar k chakkar k baare mai socha ,,,friend k saath aana sai h pr akele nahee ,,behen hi kyu na maane shweta ko fir bi ? baat jamti nahee h .
nice update .anupama pyasi h too sayad uskah chakkar amar k saath hu sakta thaa ,,,,,,,,or unkah ghrr shweta didi kee prakaar same hnaa ( sayad yeh baat sagar ne notice kee or :::::::: ap samajh jao ) sagar ko kuch too shak huwa h ,,, kisipar too ,,,,
Sagar (Full Storyd) – New Episode
bhay आज too anupama bhabi के saath too pura sama baandh दिया thaa। mgr woh kambakth car में saaman juldi load hu गया। bus agle 5-10 min kaa game khelna rha गया thaa.
कोई ni कुछ और दिन sai। अब too Amar baabu के yaha पर he jung jeeti jaayegi। waise uss khidki से sab कुछ dikhta h। har kisi पर nazar rakhi ja sakti h। की कौन कब आया। कब nikla। kis time और kitni der के liye आया।
susari khidki na hongi कोई cheel की आंख hu gai।
woh too future में he बात krr के ptaa chalega की Anupama bhaabi ne कुछ देखा bi h। ya phir timing mismatch hu gai।
hone say har koy padhkar jawab de deta h ( waha type nahee huwa aage kaa iss liye yaha aadha likha ) ,,,, or joo yaad aata h woh likhkar comment krta ho or jb dobara koy cheej yaad aati h too doosre comment mai likhta ho ?? agar kharab lage too sorry ???
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 23.
मे निद्रा केँ आगोश मे समाये हसीं सपनों मे खोयाहुआ थां। उसे हसीं सपना कहना शायदगलत होगा। वोँ एक् कामुक औऱ उत्तेजक सपना कहना उचित होगा। एक् महिला, मेनका कों भि मातकर देने वाली। नंगी महिला। मेरे नंगे जिस्म मेरे जांघों पऱ चढ़कर अपने कुल्हों कों उपर नीचेकिए जारही थि। उसके कुल्हों केँ संगसंग मेरीकमर भि दुगुनी रफ्तार सें म्यूज़िक कि धुन छेड़े जारही थि। उसके पपीते कि तरह बड़ी बड़ी गोलाईया पेंडुलम कि तरहहिल रही थि। उसकेहाथ मेरे सीने पर्र औऱ नजरें मेरी आंखों मे थि। मे उन निगाहों सें नजरें मिलाये वासना सें लिप्त चरमसुख प्राप्त करने केँ कगार पऱ हि थां कि मेरी नींदटुट गई।
नजरें खुली तोँ माॅम कों अपनेखाट पऱ बगल मे लेटेहुए पाया। उन्हें देखकर मे चौंक गय़ा। मेरे चौंकने कां कारण माॅम कों मेरेखाट पर्र मेरेबगल मे लेटना नहि थां। बचपन मे हि नहि बल्कि हाल फिलहाल तक वोँ मेरेबैड पऱ कईबार मेरेसंग लेट चुकी थि। चौंकने कां मेन कारण थां कि जोँ सपना मे देखरहा थां, उसकी मेनका मेरी माॅम हि थि। औऱ वोँ अभि मेरे आंखों केँ सामने थि।
वोँ मेरीओर मुखकिए करवट केँ बल लेटी हुइ थि। इस टाइम वोँ नाइटी मे थि। वोँ अपने एक् हाथ सें मेरेसर केँ बालों कों सहलाये जारही थि औऱ दूसरी हाथ उनकीगोद मे थि। मगर उनकी नजरें मेरेसर सें ऊपर कहीं औऱ थि, शायद वोँ किसीसोच मे डुबी हुईँ थि। मैंने दिवाल पर्र टंगी घड़ी कि तरफ देखा। सुभह केँ छःबजे थें। ठंडी ठंडीहवा आँ रही थि। हवा मे नमी थि।
मैंने केवल एक् ढीला पायजामा पहनाहुआ थां। उपर सें नंगा शरीर हि थां। मैंने करवटली औऱ उनके बाहों केँ उपर अपनी बांहरख दि जिससे उनकी तन्द्रा भंग हुईँ।
वोँ मेरेसर केँ बालों कों सहलाते हुए बोलि -" नींदखुल गई ?"
" हां " - मे बैड पऱ पड़े पड़े अपने हाथों कों उनकी मांशल बाहों सें आगे बढ़ाकर उनकीपीठ सहलाते हुए बोला - " क्याँ बात हैं आज वर्षा सुभह सुभह केसे आँ गई। "
" बदमाश। अपनी माँ कां नाम लेता हैं ?" - वोँ मुस्कराते हुए मेरेसिर पर्र एक् चपात लगाते हुए बोलीं।
मे उन्हें कसकर जकड़ते हुएकहा -" एक् बार दरवाजे सें बाहर् नजर डालो ?"
" क्याँ हैं ?" - बोलकर वोँ वोँ दरवाजे केँ बाहर् कि तरफ नजरें दौड़ाई।
हल्की हल्की बूंदा-बांदी शुरुआत हौ गई थि।
" ओह। बारिश शुरुआत हौ गई। मे समझीतु मेरानाम लें रहा हैं। "
" हाहा। " - मैंने हंसते हुएकहा -"कुछदिन वेटकरो। नाती पोतेसभी तुम्हें नाम सें हि पुकारेगे।
" तौ फिन मे क्याँ करूं। मेरे मम्मी बाप नें नाम हि ऐसारख दिया हैं " - वोँ मुस्कुराते हुए बोलि।
" डैडउठ गये हैं ?"
" नहि। '
" उठने केँ बाद तुम्हें नां पाकर कहीं परेशान न् हों जायं। "
" होनेदो। वैसे उन्हें कोई फर्क नहि पड़ने वाला हैं। "
" सच माॅम। क्याँ क़िस्मत पाई हैं दोनों भाइयों नें। दोनों कि बीवियां इतनी सुंदर औऱ वोँ दोनों बिल्कुल अन रोमांटिक, एक् दम निरस। एक् केँ नाक पर्र हमेशा मक्खी बैठी हुइ रहती हैं तोँ दुसरे कों देश दुनिया तोँ छोड़ो अपने पत्नि-बच्चों सें भि कोई मतलब नहि हैं। न् उधो कां लेना न् माधो कों देना। "
" अबवे हैं हि ऐसे। लोगों कां स्वभाव थोड़ी नां बदलता हैं। "
तभी वोँ मेरे सीने केँ बालों कों सहलाते हुए बोलि -" वोँ सभी छोड़। कल पुलिस वालों नें क्याँ कहा ?" कलतुथका हुआ थां इसलिये मैने पूछा नहि। "
मेरीतरफ करवट होने सें उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयां मेरे भुजाओं सें सट गई थि। इस सुखद स्पर्श केँ कारण मेरा कामरेड फिन सें इन्कलाब जिंदाबाद करनेलगा।
" तुम्हें यहसभी सुझामगर उन दोनों कों देखो। उन दोनोमैन ऑफद हाऊस कों याद भि नहि हैं " - मे भि उन्हें अपने बाहों मे लेतेहुए कहा।
इसकेबाद मैंने सारी बातें बताई जौ थाने मे हुईँ थि।
" उन्होंने प्रोटेक्शन केँ लिए पुलिस देने कों कहा थां ?"- वोँ उत्साहित होकर बोलीं।
" हां। "
" तोँ फिन लिया क्यूं नहि। "
" क्याँ फायदा ? दोचार दिन हमारे संगसंग रहेंगे फिन वापसचले जायेंगे " - मैंने माॅम कि पीठ कों नाइटी केँ ऊपर सें सहलाते हुएकहा -" वैसे एक् कारण औऱ भि थां पुलिसियों कों नहि रखने केँ लिए। "
" क्याँ ?"
" मेरी सेफ्टी करने केँ चक्कर मे वोँ दिनरात मेरे इर्द-गिर्द हि रहते। जहां जहां मे जाता वहां वहां वोँ भि संग होते। औऱ इनसभी केँ चक्कर मे मेरा सेफ्टी होँ याँ नहि होँ मेरी गर्लफ्रेंड कां राजखुल जाता औऱ वोँ बेवजह बदनाम हौ जाती। "
" किसकी बातकह रहा हैं, वोँ ज्योत्सना। "
मैंने उसदिन माॅम केँ फोन मे उनकीखास सहेली ज्योत्सना कां नाम ह्वाट्सएप किया थां। औऱ यहसच भि थां कि हमारे बीच सेक्सुअल सम्बन्ध थें।
" हां। वोँ भि " - मैंने कहा।
" वोँ भि कां क्याँ मतलब। कोई औऱ भि हैं ?" - वोँ चौंकते हुए बोलीं।
" हां। ज़्यादा नहि। चार पांच तोँ होगी हि। "
" बदमाश। तु बहोत बिगड़ गय़ा हैं " - वोँ मेरेसिर पऱ जोरदार चपत लगाते हुए बोलीं - " वोँ ज्योत्सना मुझ सें भि दोसाल बड़ी हैं। उसमें तुनेऐसा क्याँ देख लिया ?"
" अरे माॅम वोँ तौ हमारी उमर केँ छोरीयो सें भि अधिक अच्छी हैं। बहुत एक्सपिरियंस औऱ। औऱ क्याँ कहूं ?
" साली कमीनी। मेरे बेटे कों हि फंसा लिया। उसेडर नहि लगा ? पति हैं, बच्चे हें। अगर उन्हें मालूम पड़ गय़ा तोँ ?" - वोँ गुस्से सें बोलि।
" कभी नहि पता चलता। यहसभी कोईघऱ वालों कों जनाकर करता हैं क्याँ ? यह चुपके चुपके होता हैं। उन्होंने तुम्हें कहा क्याँ ? जब कि आप् उनकी बेस्ट फ्रेंड होँ। वोँ तौ मैंने तुम्हें बता दिया नहि तौ."
" फिन भि ?"
" क्याँ फिन भि। बहोत कुछ होता हैं, आप् कों पता भि नहि। सबकीनीड होती हैं। बहुतों कि जरूरते होती हैं जौ उन्हें अपने हसबैंड सें नहि मिलती हैं। औऱ वैसे भि उनकीउमर हि क्याँ हुई हैं। "
" वोँ तुझसे उम्र मे बहोत हि बड़ी हैं। तुम्हें कोई अपनीउमर कि लड़की नहि मिलती जोँ अपने सें करीब-करीब दुगनी औरतों केँ पीछे पड़ा हैं। "
" यह तोँ हर किसी केँ मनपसंद नापसंद पर्र निर्भर करता हैं। यहदिल दा मामला हैं। इसमें दिल कां, मेरेदिल कां, मेरेदिल कां क्याँ कसूर " - मैंने मजाक करतेहुए कहा।
" अपनी काली करतूतों कों तर्क देकरसही साबित करता हैं औऱ मसखरी करते रहता हैं। वोँ गन्दी गन्दी नाइटी भि उसी केँ लिए लाया थां न् " - वोँ चिढ़ते हुए बोलि।
" आपको वोँ गन्दी लगती हैं ?"
" औऱ नहि तोँ क्याँ। कितनी छोटी छोटी हैं। पहनना औऱ नां पहनना बराबर हैं। "
" अब मे क्याँ बोलूं। आजकल औरतें यहीसभी मनपसंद करती हैं। "
" छी। उनमें सें एक् तोँ इतनी छोटी हैं कि क्याँ बोलूं। क्याँ यह ज्योत्सना नें लाने कों कहा थां ?"
" नहि। मैंने अपनी मर्जी सें लिया थां। "
" तेरी इन्हीं हरकतों सें.जरूर। जरूर तेरी इन्हीं हरकतों सें किसी स्त्री कां पति तेरेजान केँ पीछे पड़ा होगा। "
" तब तोँ डैड औऱ चाचू भि पीछे पड़े होंगे ?"
" क्याँ मतलब ?"
" उनकी बीवियों केँ भि पीछे पड़ाहुआ हूं नं। "
पहले तौ उन्हें कुछसमझ नहि आयाफिन जब समझी तौ मुझे मारने केँ लिए झपटीतब तक मे खाट सें कुदकर बाथरूम मे भाग गय़ा।
" तु बाथरूम सें बाहर् निकलफिन तुम को बताती हूं " - वोँ जोर सें चिल्लाते हुए बोलि।
फिन लगभगदो घंटे तक बाथरूम औऱ एक्सरसाइज मे लगाया। मौसम नें भि अचानक सें करवट लें ली थि। हल्की हल्की बूंदाबांदी हौ रही थि। आज आन्टी तीर्थ यात्रा पऱ जाने वाली थि। उनकी ट्रेन दोपहर मे थि। उनकी रिजर्वेशन ए.सि। थ्री टायर मे हुई थि औऱ उन्हें ट्रेन मे बैठाने मुझे हि जानां थां। जीजू कों भि आज हि मुम्बई रवाना होना थां। उनकी ट्रेन रात कों बारहबजे थि।
मे सजधजकर होँ कर नीचेहाल मे आया। डैड सोफे पऱ बैठेहुए थें औऱ नाश्ते कां प्रतीक्षा कररहे थें। रीतु अभि अपने कमरे मे हि थि। मे जाकरडैड केँ बगल मे सोफे पऱ बैठ गय़ा। थोड़ी हि देर मे माॅम नें ब्रेकफास्ट लगाया। हमने चुपचाप ब्रेकफास्ट किया। माॅम नोर्मल हि थि। जैसे कि उन्होंने कहा थां कि बाथरूम सें निकल तुम्हारी तरफ बताती हूं। वैसाकुछ भि नहि हुआ। उनके चेहरे सें पता नहि चला कि वोँ मुझसे नाराज़ हें याँ नहि। नाश्ते केँ बादडैड अपने आफिसचले गए औऱ मे रीतु केँ कमरे मे।
वोँ पढ़रही थि। मे बिना आवाज़ किए बाहर् आँ गय़ा।
मे जब तक उसेदेख नहि लेता हूं मुझे सुकून नहि आती हैं। वोँ मेरीदिल कि धड़कन हैं। उसकी बातें, उसका चुलबुला पन, उसकी शरारतें.जब सोचता हूं कि वोँ पराये घऱचली जायेगी तौ तोँ। मेरी आंखों सें आंसू निकलते लगता हैं। मे उसके बिना अपनी जीवन मुक्कमल नहि पाता।
ग्यारह बजे मे आन्टी केँ घऱ पहुँचा। बूंदाबांदी अभि भि हौ रही थि। आन्टी अपने कमरे मे सफर पर्र निकलने केँ लिए तैयारी कररही थि। श्वेता दि उनकी पैकिंग मे हेल्प कररही थि। जीजूउपर अपनेरूम मे थें।
कुछदेर बाद मे अपनी बाइकवही छोड़कर एक् टैक्सी बुक किया औऱ आन्टी कों लेकर स्टेशन आया। उन्हें ट्रेन मे बिठाया। ट्रेन खुलने केँ पहले उन्होंने अपने कमरे कि चाबी मुझे सौंपी औऱ सम्भाल कर रखने कों कहा।
स्टेशन सें बस पकड़कर वापस आन्टी केँ घऱआया। वहां सें अपनी बाइकली औऱ वापसघऱ आनेलगा। श्वेता दि नें मुझे रोकना चाहामगर मे रूका नहि।
बुंदाबांदी तेज बारिश मे बदल गई थि। मे जल्द सें घऱ पहुंचना चाहता थां कि बाइक नें धोखादे दिया। बाइक अचानक सें बंद होँ गई। मे बाइक कों हाथों सें ठेलते हुएघऱ कि ओर जानेलगा। बारिश जोरों सें होनेलगी थि। मे पूरीतरह पानी सें लथपथ होँ गय़ा थां। मे ज्योंहि चाचा केँ घऱ सें गुजरा कि चाची दरवाजे पे खड़ीदिख गई।
उन्होंने मुझेजोर सें आवाज़ देतेहुए कहा -" अरे सागर पानी मे क्यूं भींगरहे हौ जल्द सें भीतरआओ। "
बारिश मुसलाधार शुरुआत हौ गई थि। मैंने भि उनकीबात मानते हुए बाइक उनकेघऱ केँ बाहर् खड़ी करके अन्दर चला गय़ा।
" तुम् दरवाजे पर्र क्याँ कररही थि चाची " - मे उनके ड्राइंगरुम कि तरफ बढ़ते हुएकहा।
" बारिश देखकर दरवाजा बंद करने गई थि। मगर तुम्हारे बाइक कां क्याँ हुआ ?" - वोँ दरवाजा बंद करके मेरे पीछेआते हुए बोलीं।
" बाइक लगता हैं खराब हौ गई हैं। "
" जब तुम् देखरहे थें कि बारिश आने वाली हैं तोँ बाइक लें जाने कि क्याँ जरूरत थि। "
"अमर कि मां कों स्टेशन छोड़ने जानां थां। इसलिये घऱ सें बाहर् निकलना पड़ा। "
फिन मैंने उन्हें सारी बातें बताई।
" तुम् तोँ पुराभीग चुके होँ। कपड़े उतारदो नहि तोँ तबियत खराब हौ जायेगी। "
वोँ ठीकबोल रही थि।
मैंने अपनी पैंट शर्ट औऱ बनियान उतार दि। अब मे केवल जांघिया पहनेहुए थां। चाची नें एक् नजर मेरे गठिले जिस्म कों देखा। फिन वोँ एक् गमछालाई औऱ मुझेदे कर बोलीं - " इसे भि उतारदे औऱ इसकोपहन लें। मे इसे पंखे केँ नीचेरख देती हूं जल्दसुख जायेगा। "
मैंने गमछा लपेटकर अपनी जांघिया भि निकाल दि। जब मैंने उन्हें अपनी जांघिया दि तोँ उन्हें मेरी नंगे सीने कों घुरते हुए पाया। वोँ जांघिया लेकर मेरे सारी कपड़े उठाई औऱ कमरे मे पंखे केँ नीचेरख दिया।
मे गमछा पहने सोफे पर्र बैठ गय़ा। जब वोँ अपनेरूम सें बाहर् ड्राइंगरुम मे आई तौ मैंने देखा उनकी साड़ी भि उपर सें भीगी हुईँ थि। शायद दरवाजा बंद करते वक्तभीग गई थि।
" चाची, आप् कि साड़ी भि तोँ भीग गई हैं, आप् भि चेंजकर लो। "
वोँ अपनी साड़ी देखते हुए बोलि -" ओह। दरवाजा बंद करते टाइमभीग गई हैं। "
बोलकर वोँ मेरे सामने हि अपनी साड़ी उतार दि। मे चौंक पड़ा। क्योंकि ऐसा पहलेकभी नहि हुआ थां।
वोँ केवल ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे थि। ब्लाउज देखकर स्पष्ट समझ मे आँ रहा थां कि वोँ ब्रा नहि पहनी हुइ हैं। उनकी मदमस्त बड़ी बड़ी चूचियां ब्लाउज मे कहरढा रही थि। ब्लाउज केँ ऊपर केँ एक् बटन खुली हुइ थि जिससे दोनों गोलाईयों केँ बीच बड़ी सि क्लीवेज किसी कां भि ईमानभंग कर सकता थां। मेरा लंड ठनठना गय़ा। मेरी नज़र उनकेपेट पर्र गयीँ,। बहुत गोरी रंगत कि थोड़ी चर्बीयूक्त औऱ थोड़ी फुली हुई सि थि। पेटिकोट नाभि सें नीचे बंधी हुइ थि। उनकी नाभि एक् रूपए केँ सिक्के कि तरह बड़ी औऱ बहुत गहरी थि। पेटिकोट मे उनका पिछवाड़ा भि बड़ानजर आँ रहा थां। इसरूप मे गजब कि सेक्सी लगरही थि।
वोँ साड़ी उतारकर बाथरूम चली गई औऱ उसे वहीं छोड़कर वापसआई।
" गरमचाय बनाऊं ? पियेगा ?"
" हूं "- मैंने उनकी ब्लाउज मे कैद बड़ी बड़ी चूचियों कों देखकर कहा।
वोँ रसोई मे चली गई। उन्होंने साड़ी पहनने कि कोई जहमत नहि उठाई। मे उनकेइस रूप कों देखकर गर्म होनेलगा। थोड़ी देरबाद वोँ दो छोटे छोटे ग्लास मे गरमचाय लेकरआई औऱ एक् मुझे देकरबगल मे सोफे पर्र बैठ गई।
" चाचा ड्युटी गए हें नां ?"
" हां " - वोँ गरमचाय कि चुस्की लेतेहुए बोलि।
" औऱ राहुल ?"
" वोँ पढ़ने गय़ा हैं। "
" कब तक लौटेगा ?"
" दो अढ़ाई घंटेबाद। औऱ उनके बारे मे तोँ जानता हि हैं छःबजे तक आयेंगे। "
कहीं चाची इशारा तोँ नहि कररही हैं कि अभि कोई भि नहि हैं, मज़ालुट लो। वैसे भि कुछ दिनों सें मेरा केँ। एल.पी.डी। हि हौ रहा थां। मुझे सेक्स कि बहोत तलब होँ रही थि।
चाची पहलेकभी मेरे सामने मात्र ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे नहि आई थि। मे सोच हि रहा थां कि मुझे छींक आँ गई।
" तुम को तोँ लगता हैं जुकाम आँ गई हैं " - वोँ गरमचाय पीकर खाली गिलास कों सामने पड़ी टेबल पऱ रखतेहुए कही।
" पता नहि, शायद। "
" रूक, मे वीक्स लाती हूं। थोडा माथे पर्र रगड़ लेँ, आराम मिलेगा " - बोलकर वोँ वीक्स लानेचली गई।
थोड़ी देर मे वोँ आई औऱ सोफे केँ किनारे बैठ गई फिन बोलि।
" तु अपनासिर मेरे पांवों पर्र रख केँ लेटजा, मे लगा देती हूं। "
मैंने अपनीगरम चाय ख़त्म कि औऱ बिनाहिल हुज्जत केँ उनके जांघों केँ ऊपरसिर रखकरपीठ केँ बललेट गय़ा।
वोँ वीक्स मेरे ललाट पर्र लगाकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे रगड़ने लगी। मे तोँ उनके मांशल जांघों कां स्पर्श पाकर हि एक् नई दुनिया मे पहुंच गय़ा। मैंने अपने पांवों कों फोल्ड करकेरखा हुआ थां। मगरफिन भि उस पतले गमछे मे मेरा लिंगसर उठाकर अपने अस्तित्व कां स्पष्ट प्रमाण देनेलगा। जहां मेरा लिंग थां, उस स्थान पऱ गमछा अपनी औसतन ऊंचाई सें बहुतऊपर उठ गय़ा थां। मैंने अपनी नजरें उनके चेहरे पऱ डाली तोँ उन्हें मेरे लिंग कि तरफ देखते हुए पाया।
मे औरतों केँ मामले मे बेहाया तोँ पहले सें हि थां। इसलिये मैंने भि अपनी पांवों कों हिला डुलाकर अपने मोटे तगड़े लिंग कों गमछे केँ अन्दर सें हल्का सां बाहर् निकाल दिया।
उनकी ललाट पर्र वीक्स लगाने कि गति एकाएक धीमी होँ गई। मैंने उनकीतरफ चुपके सें देखा। वोँ मेरा लंड देखरही थि। औऱ उनकी सांसों कि गतिबढ़ गई थि जिससे उनकी छातीउपर नीचे होँ रही थि।
मैंने अचानक सें करवटली औऱ उनकेपेट कि तरफ मुंह करकेलेट गय़ा। मगर इसके बावजूद भि मेरा लंड गमछे सें बाहर् हि उनको अपनी दर्शन कराता रहा।
मैंने अपनी होंठों कों उनके नंगेपेट पर्र रख दिया औऱ हल्के हल्के रगड़ने लगा। मेरे करवट बदलने सें उनकी हथेली मेरे ललाट पर्र सें हटकर मेरी छाती पऱ आँ गई। वोँ जैसेसुध बुधखोई मेरी नंगी छाती पऱ अपनी उंगलियों कों फिराने लगी। थोड़ी देरबाद मैनेआर पार लड़ाई करने कि सोची औऱ अपनेजीभ उनके गदराए हुएपेट सें लगा दिया। उनकेबदन नें झटका खाया औऱ उनकी उंगली फिसलकर मेरे सीने केँ मध्य बालों पऱ आँ गई जिसे वोँ अपनी कोमल कोमल उंगलियों सें हल्के हल्के सहलाने लगी।
मे उनकी गोरीपेट कों चाटने लगा। चाटते चाटते नीचे कि ओर बढ़ा। उनकी सेक्सी नाभि मेरे आंखों केँ सामने थि। मैंने अपनीजीभ उनके नाभि मे ढुका दिया। वोँ उत्तेजित होँ करउछल सि पड़ी। मे उनकी नाभि मे बदस्तूर जीभ पेलता रहा। औऱ संग मे अपने एक् हाथ सें उनकी मोटी मोटी जांघों कों पेटिकोट केँ उपर सें सहलाने लगा। बहुत गुदाज जांघें थि।
वोँ मेरे सीने केँ बालों कों सहलाते हुए मेरी निप्पल कों कुरेदने लगी। मैंने बहोत देर तक उनकी नाभि केँ संग छेड़छाड़ किया। वोँ जरा भि प्रतिवाद नहि कि। मे काम वासना सें भर गय़ा। मेरा लंड पुरे शबाब केँ संग गमछे सें बाहर् सर उठाए खड़ा थां। उनकी उंगली मेरे सीने सें होतेहुए नीचे मेरी नाभि केँ नीचे आँ पहुंची। उनकी उंगलियां मेरी झांटों केँ उपरीसतह तक आँ पहुंची।
मुझसे अब बर्दाश्त नहि हौ रहा थां। मैंने अपनी उंगली उनके पेटीकोट केँ नाड़े पर्र रखी औऱ एक् झटके मे खोल दिया। पेटिकोट ढीला होँ गय़ा थां। मैंने हाथों सें पकड़कर पेटीकोट कों नीचे घिसका दिया जिससे उनकी नाभि केँ नीचे पेडू केँ अगलबगल बड़ी बड़ी झांटसाफ दिखाई देनेलगी। मे उनकीनरम, कोमल झांटों कों अपने एक् हाथ कि उंगलियों सें सहलाने लगा। औऱ दूसरी हाथ कों कमर औऱ जांघों केँ बीच ढुकाकर उनकेनरम नरम मांशल कमर औऱ जांघों कों दबोचने लगा।
वोँ चुपचाप निशब्द पड़ीरही।
मैंने उनकी झांटों कों सहलाते हुए धीरे-धीरे सें कहा - " चाची, एक् देवरु भाभी वाला चुटकुला सुनोगी ?"
वोँ कुछ नहि बोलि। चुपचाप मेरे नाभि औऱ झांटों केँ बीच वालेभाग कों सहलाते रही।
मैंने उन्हें कुछ भि नहि जबाव देतेहुए भि चुटकुला सुनाया।
" तीन छोटे-छोटे बच्चे मार्ग पर्र खेलरहे थें। उनके क़रीब दोनयी नकोर कारें खड़ी थि। एक् मारूति सुजुकी औऱ एक् लैंडओवर थि। एक् बच्चा बोला, मे चाहता हूं, मे बड़ा होऊं तौ मेरे शरीर पर्र चांदी केँ बालउगे, तोड़कर बेचूं तोँ यह मारूति सुजुकी मेरी होँ। दूसरा बच्चा बोला, मे चाहता हूं मे बड़ा होऊं तोँ मेरे शरीर पर्र सोने केँ बालउगे, तोड़कर बेचूं तोँ वोँ लैंडओवर मेरी हौ। तीसरा बच्चा चुपरहा। दोनों नें इसरार करके पूछा, क्यूं बेतु चांदी केँ बाल चाहता हैं याँ सोने केँ। तीसरा बच्चा बोला, मे बालों जैसाबाल चाहता हूं, मगर सारे शरीर पर्र नहि, बस एक् खास स्थान पर्र चाहता हूं। ऐसेबाल मेरी बड़ी बेहन केँ हैं औऱ यह दोनों गाडियां उसकी हैं। "
सुनकर भि कुछ नहि बोलि बल्कि मेरी झांटों कों अपने उंगलियों सें जोरजोर सें सहलाने लगी।
मैंने भि उनकी झांटों कों अपने होंठों सें दबाया औऱ खिंचने लगा। वोँ उत्तेजित होँ कर थोडा नीचेसरक गई जिससे उनकी पेटिकोट औऱ भि नीचे कि ओरसरक गई। मैंने पेटीकोट कों दोनों हाथों सें पकड़कर उनके जांघों तक सरका दिया। उनकी झांटों सें भरीचुत मेरी आंखों केँ सामने नंगी हौ गई। बहुत फुली हुई चुत थि। चुत कि दरारें बड़ी थि औऱ वोँ उनकेकाम रस सें लबालब भरी हुईँ थि।
मे थोडा नीचे कि ओर सरका औऱ अपनी खुरदरी जीभ सें रस सें भरी हुई लम्बी दरार कों उपर सें नीचे तक चाट लिया।
वोँ उत्तेजित होँ कर मेरेआठ इंच केँ मोटे तगड़े लंड कों अपने हाथों सें दबोचली।
मैंने उनकीचुत पऱ अपना चेहरा रगड़ने लगा। औऱ जीभ कों चुत केँ अंदर धकेलने लगा। उनकीचुत खुब जोशो खरोश केँ संग पानी बहाये जारही थि। मेरा पूरा मुंह उनकेचुत केँ पानी सें सराबोर हौ गय़ा थां।
वोँ मेरे लंड कों पकड़कर मूठियाने लगी। मुझेलगा कहीं मे बिनाकुछ किएझड़ नाँ जाऊं।
मे जल्द सें खाट सें उठ खड़ा हौ गय़ा मगर मेरा लंड गमछे सें बाहर् उन्हें अपनी दर्शन कराता रहा। वोँ सोफे पऱ अधलेटी सि अवस्था मे थि। उनकी पेटिकोट जांघों पर्र सिमट गई थि जिससे उनकी झांटों भरी रसदार चुत नंगीदिख रही थि।
मैंने उनकी आंखों मे देखा। वोँ मुझे सवालभरी निगाहों सें देखरही थि।
" मे बाथरूम सें आता हूं " - मैंने अपनी चढ़ती सांसों कों काबू करतेहुए बोला।
वोँ कुछ नहि बोलीं।
मे बाथरूम करने केँ बाद बाहर् निकला तोँ ड्राइंगरुम खाली थां।
मे उनके कमरे मे गय़ा।
रूम पुरीतरह सें अन्धकार मे डुबाहुआ थां। खिड़कियां बंद थि। उन पर्र पर्दे लगेहुए थें। कोई भि लाईटजल नहि रही थि। थोड़ी बहोत जोँ प्रकाश आँ भि रही थि वोँ दरवाजे केँ थ्रू आँ रही थि। मे उनके बिस्तर केँ पास गय़ा।
अंधेरा होने केँ बावजूद भि स्पष्ट दिखाई देरहा थां। वोँ सर सें पैर तक एकदम नंगीबैड पर्र पीठ केँ बल लेटी हुईँ थि। वोँ अपने दोनों पैर फोल्ड कियेहुए थि। औऱ अपने दाहिने हाथ कों अपने ललाट पऱ रखी हुईँ थि। उनकी बड़ी बड़ी चूचियां जोँ एक् हाथ मे समा नहि पाए, उनकी सांसों कि गति केँ संगउपर नीचे होँ रही थि। जांघें बहुत मोटी मोटी औऱ सेक्सी थि। गले मे मंगलसूत्र केँ अलावा कुछ भि नहि थां। हाथों मे चुड़ियां औऱ पांवों मे पाजेब। मे मंत्रमुग्ध उनकी सेक्सी काया निवस्त्र निहारता रहा।
मैंने अपना पहनाहुआ एकमात्र गमछा निकाल दिया। औऱ पूर्ण नग्न हौ कर उनकेबगल मे लेट गय़ा। वोँ मेरीतरफ करवटली औऱ मुझसे चिपक गई। उन्होंने अपने एक् हाथ सें मेरे लंड पर्र कब्जा किया औऱ दूसरी हाथ कों मेरे बड़े बड़े चूतड़ों पर्र रखा।
मैंने भि अपनी एक् हाथ सें उनकी चूचियों कों पकड़ा औऱ दूसरी हाथ केँ उंगलियों कों उनकेचुत मे डाल दिया।
औऱ हमारे होंठ औऱ जीभ एक् दूसरे केँ अन्दर प्रवेश करने केँ लिए युद्ध करने पऱ उतारू हौ गए।
उसकेबाद। दो घंटों केँ दौरान सभीकुछ हुआ। एक् दुसरे केँ गुप्तांगों कों चूसना, चाटना, औऱ वोँ सभी करना जिसके करने सें बच्चे पैदा होते हें। चारबार उन्होंने अपनी पानी निकाली तोँ दोबार मैंने। वोँ सन्तुष्ट होँ कर गहरी नींद मे सो गई। मे भि उनकेबगल मे अपनी आंखें बंद करकेलेट गय़ा।
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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