Sagar (Full Storyd) – New Episode
drugs के itne nam police ko bi नहीं ptaa h ? police kaa mukhbir bi faraar h matlab usko kisine paise diye hu samachar dene के liye ?,, abi tak कोई bi shak के daayre mai fit नहीं aa raha h,, na shweta, anushka और na hi dono के pati.abi bi qatl kaa maksad bi ptaa नहीं kisiko।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
lekhak ji। itne khoobsurat padosiyo से अब milwa rahe hu। जब yeh लोग yaha से ja rahe h। mgr in 36 साल की bhabi kaa dekhte h की yeh aage chl krr कुछ rang dikhati h ya phir baato - baato में he ghumayengi.
well 4 naye kirdaar story में judd chuke h। waise Amar Sheveta की building पर kyon aata thaa। jiska jikrr Sagar ne किया। jabki Amar kaa na too कोई rishtedaar h और na he Sheveta से itna close rishte। ha अगर woh Sheveta ko apni behen maanta hu। alag बात h। mgr phir bi specially milne आना बात hazam नहीं hoyi। Sagar के saath आना jaana hu too maana jaa sakta h। khair iske piche dekhte h lekhak ji क्या tark pesh karte h.
i am considering all the above facts। keeping in mind the real life probablities। not just another fuck-fiesta kahani conditions.
पर एक बात gaur karne waali h की। इस floor पर rehne wale sabhi married couples single h। na कोई bacche। na कोई family members।
baharhaal अब story में thodi tezi aayegi। yeh लोग dili shift hone ja rahe h। और Amar के घर में Sagar kaa inki vajah से आना-jaana bi badh jaayega.
पर kambakht yeh movers too aaye jabhi too yaha से inkaah saaman uthe.
itne pados wali adhed aunti ji के yaha pet pooja bi krr li jaaye। dekhte h unki क्या story h।
achaa update thaa update likhne kee kaalaa achhi h thoda frequency thik hu jaye too mazaa aa jaye. roj k update kee me baat nahee krr raha regular kee krr rha ho. thaki aesa avishvas naa rahe kee kahani bich me chhut gai.
Thank you brother ? yeh ap na jid krr krr k mujh say hafte mai ekadh baar likhwa hi lete hu.? jb kee filhal kee halat mai aesa sambhav nahee h. Kaam bi too krna h na.
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 22 continue.
जीजू नें श्वेता दि कों आवाज़ लगाई तोँ वोँ कमरे सें बाहर् निकल गई। मैंने अनामिका जी कों देखा, वोँ मुझे हि देखरही थि।
" श्वेता बोलरही थि कि तुम् लड़कियों कों मार्शल आर्ट्स कि ट्रेनिंग देरहे होँ। तोँ थोडा बहोत हमें भि सीखादो "- वोँ बोलि।
" आप् क्याँ करोगी मार्शल आर्ट्स सीखकर ?"
" क्यूं भइया। बाकी लड़कियों कि तरह हमें भि सेल्फ डिफेंस केँ बारे मे जानना चाहिेए। हैं न्। "
" अरे भाभी आप् तौ स्वयं दो बड़े बड़ेबम लिए घुमती रहती हैं.किस बेचारे कि शामतआई हैं जोँ आप् कों छेड़ेगा। "
" बम ? कौन सां बम ?"- वोँ कन्फ्यूज हौ कर बोलि ।
" जरा ध्यान सें देखें समझ मे आँ जायेगा " - मैंने उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों कों घुरते हुएकहा।
उन्होंने मेरी नज़रों कों अपने छाती केँ उपर घुरता पाया तौ वोँ समझ गई। उनसे पहले भि हल्की फुल्की मजाक होती रहती थि मगर एक् लिमिट मे हि रहती थि।
" देवरु जीइन बमों कों देखकर लफंगे भागते नहि बल्कि औऱ पीछेपड़ जाते हें " - वोँ मुस्करा कर बोलीं।
" पीछेपड़ कर भि क्याँ झां.साॅरी बाल उखाड़ लेंगे, जहां बमों कां साक्षात दर्शन हुआ कि नहि कि वे पालतू कुत्ते कि तरह आप् केँ आगे पीछेदूम हिलाते हुएनजर आने लगेंगे। "
" कहीं तुम्हारी हालत भि तौ पालतू कुत्ते कि तरह नहि हौ गई हैं " - वोँ शरारती अंदाज मे बोलि।
" अभि मैंने बमों कां दर्शन हि कहां किया हैं। हांअगर आप्."
तभी श्वेता दि आँ गई औऱ बोलीं कि लेबर आँ गए हें। सामान वगैरह नीचे रखवाना हैं। कार अभि आई नहि थि।
जीजू, मनीषजी केँ संग नीचेचले गए जहां सामान वगैरह लाकर लेबर कों रखना थां। रमाकांत जी अपने फ्लैट केँ अन्दर चलेगए। श्वेता दि, अनामिका जी औऱ मे लेबर केँ संग मिलकर घऱ केँ अन्दर काम संभालने लगे। मे इसीबीच पुरे फ्लैट कां जिसमें दोरूम, एक् बड़ा डाइनिंग हॉल, एक् छोटा स्टोर रूम, बालकनी, रसोई, बाथरूम सब कां बड़ी बारीकी सें मुआयना किया। खासकर बाथरूम कां। मगर मुझेकुछ भि संदिग्ध जैसी नं लगी।
पौने घंटे केँ अंदर सारा सामान नीचेचला गय़ा। तब तक कार भि आँ गई। मुझे बहोत जोर सें प्यास लगी थि। तोँ मैंने श्वेता दि कों कहा। श्वेता दि बोलि प्यास तोँ मुझे भि लगी हैं। अनुपमा जी हमें अपने फ्लैट मे लेँ गयीँ,। उन्होंने फ्रीज सें ठंडा पानी कां बोतल निकाला औऱ श्वेता दि कों दे दि। श्वेता दि नें पानीपी फिन मुझे अपने फ्लैट केँ मेन दरवाजे कां चाबी दिया औऱ कहा कि पानी पीने केँ बाद फ्लैट कों लाॅक करके नीचे आँ जानां।
उनके जाने केँ बाद अनुपमा जी केँ फ्लैट मे मात्र हम् दोनों हि थें। मैंने उनसे पानी कां बोतल लिया औऱ उनके फ्लैट मे चहलकदमी करतेहुए बोतलखोल कर पानी पीनेलगा। उनका फ्लैट भि सेम पैटर्न कां थां। मगर एक् अंतर थां वोँ कि उनके मास्टर रूम मे उनका बिस्तर खिड़की केँ लगभग थां। औऱ खिड़की सें इमारत कां इंट्रान्स औऱ पार्किंग स्थलनजर आता थां।
मैंने खिड़की सें नीचे देखा। जीजू औऱ मनीषजी खड़े थें। इमारत कां दरबान भि वहीं खड़ा खैनीमसल रहा थां। लेबर जमीन पऱ रखेहुए सामानों कों कार जोँ कि 407 भेन थि मे सम्भाल कररखरहे थें।
पानी पीने केँ बाद मैंने खाली बोतल अनुपमा जी कों पकड़ाई तौ उनकी उंगली सें मेरी उंगली टच हौ गई।
" माँ गॉड आपकी उंगली मे तौ 440 भोल्ट कां करेंट हैं। ऐसे किसी कों टचकरा देगी तोँ वोँ झुलस हि जायेगा। "
" कोई नहि झुलसने वाला हैं। झुलसाने वालीउमर निकल गई हैं। "
" आप् कों गलतफहमी हैं भाभी। झुलसाने कि बात छोड़िए, आप् तौ भस्मकर सकती हें। "
वोँ मुस्कुराई फिन बोलीं।
" बातें लड़कियों कों खुश करने वाली बोलते होँ। लड़कियां तौ कुर्बान हौ जाती होगी। "
" केवलखुश हि होती हैं। कुर्बान कोई नहि होती हैं। अब आप् अपने आप् कों देखिए। कुर्बान हुई ? "
" तुम् न् सच मे एक् नम्बर केँ फ्लर्टबाज होँ। तुमने तौ लगता हैं कि लड़कियों कों लाईन मारने मे पी। एच.डी। हासिल कररखी हैं। "
" क्याँ फायदा ऐसे पी.एच.डी। कां भाभीजब बेरोजगारी हि छाईं हुईँ हौ " - मैंने अहह भरतेहुए कहा।
वोँ होंठदबा कर हंसी। हंसी मतलब छोकरी फंसी।
" मेरे हसबैंड कों जानते हौ न्.बीसों धाराएं लगाकर हवालात मे पहुँचा देंगे " - वोँ आंख नचाते हुए बोलीं।
" एक् बात कहूं ?"
" क्याँ ?"
" छोड़िए। रहने दिजिए। "
" अरे नहि नहि। कहो। "
" आप् बुरामान जाओगी। "
" नहि मानूंगी। "
" नहि। आप् शर्तिया बुरामान जाओगी। "
" क्याँ लड़कियों जैसी बहाने बनाते हौ। बोल भि दो "- वोँ चिढ़ते हुए बोलीं।
" ओके। आप् अपनीकान इधरलाओ ?"
" क्यूं ?"
" अरेलाओ नाँ, कान मे बोलूंगा। "
वोँ इधरउधर देखी। रूम क्याँ पुरे फ्लेट मे कोई भि नहि थां। वोँ मेरीओर बढ़ी।
मे भि उनके बिल्कुल लगभग गय़ा। वोँ मेरी आंखों मे देखरही थि। मैंने भि उनकी आंखों मे देखा। फिन नजरें नीचे कि औऱ उनके बड़े-बड़े खरबुजो पर्र टीका दि। दसेक सेकेंड केँ बादफिन उसकी आंखों मे झांका। वोँ मेरी हरकतों कों वोँ बिना हिले डुलेदेख रही थि। मे स्पष्ट देखरहा थां कि उनके सांसों कि गतिबढ़ गई हैं। मे उनके पीछे गय़ा औऱ उनके पिछवाड़े सें सटतेहुए अपने लबों कों उनकेकान केँ पास लें गय़ा।
" बोलदूं " - मैंने उनकेकान मे धीरे-धीरे सें मुंह सें फूंक मारते हुएकहा।
" हम्म " - वोँ मंत्र मुग्ध सां बोलि।
" उससे पहले उसकी पत्नि नं चोद दुंगा ?" - मे उनकेकान मे बहोत धीमें सें फुसफुसाया।
वोँ सिहर सि गई। उसके शरीर नें एक् जोर कां झटका खाया। उसनेऐसा आशा नहि किया होगा। वोँ चुपचाप स्टैच्यू कि मुद्रा मे खड़ीरही।
कुछदेर तक मे भि वैसे हि उनके पीछे उसकेकान केँ पास अपने लबों कों रखेरखा कि शायद वोँ कुछ बोले।
दो मिनट तक वोँ कुछ नहि बोलि।
तभी वोँ फुसफुसाई -" किसकी पत्नि कों ?"
" मनीषजैन कि पत्नि कों " - मैंने भि फुसफुसाते हुए जबाव दिया।
हम् जहां खड़े थें वोँ स्थान खिड़की केँ लगभग थि। वोँ खिड़की कि ओर चेहरा किए खड़ी थि औऱ मे उनके पीछे उनकी जिस्म सें चिपककर खड़ा थां। हम् दोनों खिड़की सें नीचे जमीन पर्र पोर्च मे वाहन केँ पास जीजू औऱ उसके पति कों बातचीत करतेहुए देखरहे थें।
वोँ अपने पति कों देखते हुए फुसफुसाई -" ऐसा क्याँ हैं मनीष कि पत्नि मे ?"
" यह पुछो नं कि क्याँ नहि हैं " - मैंने उनकीकान केँ लौ कों होंठों सें पकड़ते हुएकहा।
" क्याँ हैं ?"
" कहदूं ?"
" हम्म !"
मे उनसे पीछे सें पुरीतरह चिपक गय़ा औऱ अपने दोनों हाथों कों आगे लें जाकर उनके साड़ी केँ अंदर ब्लाउज केँ ऊपर सें गोलाईयों केँ उपररख दिया। ओर उन्हें हथेलियों सें दबोचते हुएकहा -" मनीष केँ पत्नि कि बड़ी बड़ीदो दो किलो कि चूंचियां हें। पुरेठोस औऱ कड़े कड़े जोँ मुझेहर रात सपनों मे आते हें। "
वोँ उत्तेजित हौ कर पीछेघसक कर मुझसे पुरीतरह चिपक गई। अपने चुचियों कों मसलवाते हुए धीरे-धीरे सें बुदबुदाई -" औऱ ?"
मैंने उनकी ब्लाउज औऱ ब्रा कों खोलकर उसकी चूचियों कों मसलने लगा। फिन मैंने अपने लिंग कों उसके चूतड पर्र दबाते हुएकहा -" उसके पत्नि कि बड़ी बड़ी भारी भरकम गांड़। "
" ओह कितना गन्दा बोलते होँ। "
" आप् कों मेरी गन्दी बातें अच्छी नहि लगरही हैं "- मैंने उसके गालों पऱ अपनीजीभ रगड़ते हुएकहा।
" हम्म। "
" क्याँ हम्म ?"
" अच्छी लगरही हैं। "
" तोँ क्याँ कहती हैं आप् ?"
" किस बारे मे ?
" मनीषजी कि पत्नि कों चोददूं ?"
" हां " - वोँ झट सें पलटकर मेरे सीने मे समाते हुए मेरेकान मे फुसफुसाई -" चोददो मनीष कि पत्नि कों। "
मैंने उसके चेहरे कों अपने हाथों सें पकड़ा औऱ अपने चेहरे केँ सामने किया। उसकी आंखों मे लाललाल डोरेतैर रहे थें। चेहरा पुरीतरह तमतमाया हुआ थां। होंठ फड़करहे थें।
उसने मुझे अपनी नशीली आंखों सें देखाफिन अपने होंठों पऱ अपनीजीभ फिराई। औऱ बड़ी तीव्र गति सें हमारे होंठमिल गए। फिन.
हम् दोनों एक् दूसरे केँ होंठों कों बुरीतरह सें चुसरहे थें। चुमरहे थें। चाटरहे थें। हमारी जीभें एक् दूसरे केँ मुंह मे बिना किसी रोक-टोक केँ भ्रमण कररही थि। हम् दोनों केँ थुकमिल कर एक् होँ गए थें। मे उसकी भारी भरकम चूतड़ों कों साड़ी केँ ऊपर सें मसलरहा थां।
जब मुझसे बर्दाश्त नहि हुआ तोँ मैंने उसकी साड़ी कों दोनों हाथों सें पकड़कर उसकेकमर केँ ऊपरकर दिया औऱ उन्हें साड़ी कों पकड़ने कां इशारा किया। उसने अपनी साड़ी कों अपने हाथों सें पकड़ लिया। मैंने खड़े खड़े हि उसकी नंगी चूतड़ कों उसके पैन्टी केँ अन्दर हाथडाल कर दबोचने औऱ मसलने लगा जबकि हमारे होंठ पहले कि तरह एक् दूसरे केँ मुखरस कों चूसने चुसाने मे व्यस्त थें।
उसने अपने एक् हाथ सें मेरी पैंट खोलना शुरुआत किया जिसमें वोँ कामयाब नहीं होँ पारही थि। मैंने अपनाहाथ उनकी चूतड़ों सें हटाकर सामने लाया औऱ अपने पैंट कों उपर सें खोल दिया। पैंट केँ ढीला होते हि उसने अपनी दायीं हाथ कों मेरे जांघिया केँ अन्दर कर दिया औऱ मेरे बगावत पर्र उतारू सिपाही मेरे लंड कों अपने हथेलियों सें पकड़कर जोरजोर सें मसलने लगी। मैंने भि उसकी आंखों मे देखते हुए अपना एक् हाथ सामने लाया औऱ उसकी पैंटी केँ अन्दर प्रवेश करा दिया। हल्के हल्के झांटों सें भरी उसकीरस छोड़ती फुली हुइ चुत कों अपने हथेलियों मे भर लिया औऱ चुत केँ दरारों मे ऊंगली डालकर रगड़ने लगा। उनकीचुत रस सें सराबोर हौ गई थि। मेरी उंगली उनकेचुत केँ गाढ़े पानी सें लसलसकर रही थि। वोँ मेरेउपर पसर सि गई थि।
हमारी आंखें एक् दूसरे पऱ टिकी हुईँ थि। हमारे होंठ एक् दूसरे सें चिपके हुए थें। वोँ मेरे लंड कों अपने हथेलियों मे भरकरमुठ माररही थि। मे उसकेचुत मे ऊंगली डालकर अन्दर बाहर् कररहा थां। हम् दोनों बहुत उत्तेजित होँ गए थें।
" कैसा हैं ?" - मैंने अपने होंठ कों अलग करतेहुए कहा।
" क्याँ ?" - वोँ कामुक नज़रों सें मुझे देखते हुए बोलि।
" मनीष कि पत्नि केँ चुत कों चोदने वाला लंड। "
" मस्त। बहुत मोटा औऱ लम्बा " - वोँ मेरे लंड कों मुठियाते हुए फुसफुसाई।
" तोँ क्याँ ख्याल हैं मनीष कि पत्नि अपनेचुत मे मेरा लंड लेगी ?"
" तुम् स्वयं हि पुछलो नं ?"
" किससे ?"
" मनीष केँ पत्नि कि चुत सें " - बोलकर वोँ मुझे अपने पैरों कि तरफ ढकेलने लगी।
मे नीचे फर्श पऱ बैठ गय़ा औऱ उसे अपने साड़ी औऱ पेटीकोट कमर सें ऊपर रखने कां इशारा किया। उसनेऐसा हि किया। मैंने उसकी पेंटी कों नीचेकर दिया तोँ उसने अपनेपैर इधरउधर करके पैन्टी कों पुरीतरह सें बाहर् निकाल दिया। उसके लम्बे लम्बे गोरे चिकने पैर औऱ मोटी मोटी जांघें देखकर मे दिवाना सां होँ गय़ा। दोनों जांघों केँ मध्य कचोड़ी कि तरहचुत जौ उसकीकाम रस सें भीगी हुईँ थि, मुझे सम्मोहित सां कर दिया थां। मैंने अपनी होंठ कों उसकेचुत सें सटा दिया औऱ फिन गहरी खाइयों सें मधु निकालने कि कोशिश मे लग गय़ा। वोँ खिड़की कों अपने हाथों सें पकड़कर अपनी एक् पैर सामने बिस्तर पऱ रख दि जिससे उसकीचुत कि दरारें फैल गई। मैंने अपनीजीभ उसकेचुत मे घुसेड़ दि औऱ.
दो मिनट मे हि मैंने मधुपान कर लिया। मे खड़ाहुआ तौ उसने मुझे अपनी बांहों मे लेकरकस लिया औऱ मेरे होंठों पर्र अपने होंठरख कर चूसने लगी। उसकीनजर खिड़की सें बाहर् नीचे कि ओर गई।
" हटो " - वोँ मुझे धकेलकर अपनी पैंटी पहनते हुए बोलीं -" नीचे व्हीकल मे सामान रखा गय़ा हैं। मनीषउपर आँ रहा हैं। "
मैंने भि जल्द सें अपनी पैंट कों व्यवस्थित करतेहुए कहा -" मगरअसल काम तोँ हुआ नहि। "
" तुम् मुझे अपनाफोन नंबरदे दो। मे बाद मे मोबाइल करूंगी मगरभुल केँ भि तुम् मुझे मोबाइल मत करना " - वोँ अपनी हुलिया दुरूस्त करतेहुए बोलीं।
हम् दोनों नें अपना अपनाफोन नंबर एक्सचेंज किया। औऱ मे उसके होंठों पर्र एक् किसकर केँ श्वेता दि केँ फ्लेट मे चला गय़ा। फ्लेट तोँ पहले हि पुरा खाली हौ गय़ा थां। एक् बारफिन सें पुरे फ्लेट कां निरीक्षण किया औऱ फिन बाहर् निकल गय़ा। मैंने मेन दरवाजे कों लाॅक करके चाबी अपने पैंट मे डाल दिया औऱ उस इमारत सें बाहर् निकलआया।
407 भेन पुरीतरह सें सामानों सें लद चुका थां। जीजू केँ वाहन मे बहोत चीजें पीछे वालीसीट पर्र भरी हुइ थि। जीजू औऱ श्वेता दि नें वहां जोँ लोग अभि भि थें उनकोहाथ जोड़कर नमस्कार किया औऱ फिन अपने वाहन मे बैठगये। मे भि अपने गाड़ी मे बैठ गय़ा।
दोपहर कों तीनबजे हम् आन्टी ( अमर कि मां ) केँ घऱ पहुंचे। वहां जाने केँ बाद मैंने मजदूरों कों बुलाया औऱ फिन सारे सामान कों उनकेघऱ मे पहुंचाने कां इंतजाम करवाने लगा। सभीकुछ करते करतेसाम केँ छःबजगए। आन्टी भि हरसमय हम् सब केँ संग हि रही जौ मुझे बहोत अच्छा लगा।
वहां सें निपटकर मे अपनेघऱ चला गय़ा। बदनथका हुआ महसूस होँ रहा थां इसलिये जल्द हि खानां खाकर मे अपने कमरे मे चला गय़ा। कपड़े चेंजकिए औऱ पलंग पर्र लेट गय़ा।
आज बहोत सारी घटनाएं हुई थि। इंस्पेक्टर कोठारी सें एक् सार्थक मुलाकात। श्वेता दि औऱ जीजू कां यहां शिफ्ट होना। अनुपमा भाभी केँ संग जबर्दस्त एनकाऊंटर। औऱ.औऱ भि कुछ थां।
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