Sagar (Full Storyd) – New Episode
waise इस update में muzhe 2-3 bindu ayese nazar aaye the jinpar मेरा dhyan गया। और एक बात पर muzhe aapatti thi.
chalo yeh अच्छा हुआ की eternity ji ne saakshat darshan diye और lekhak mahoday kaa maarg darshan किया.
Anushka के shauhar और Sanjay ji kaa kahin बाहर hnaa क्या sirf एक ainiyamit waqia h। ya.
Amar की family में sirf उसकी mummy he h। baaki rishtedaar कहा h। pihar की tarf से ya phir sasural की tarf waale। कभी कोई saath नहीं dikha.
Shveta और Rajeev Amar के घर में shift hu rahe h। क्या इस बात से Amar की mummy ko ajib नहीं lagega। की jinke घर में unke putr की hatya hoyi ya phir shav baramad हुआ। woh लोग unke घर में rahenge। ayese kese woh inko apne घर में rakhne के liye taiyaar hu gai.
Anushka और Rajeev के sambandho के vishay में unke better-half's ko ptaa h। ve phir bi इस पर कुछ action नहीं le rahe। (action से मेरा matlab illegal activity से नहीं h)। i mean कुछ too react karo। गुस्सा dikhao। ladayi karo। family ko involve karo। mgr yaha too कुछ bi नहीं.
********
और yeh bawasir wali बात ko कुछ jyaada he keech दिया। itne jyaada vishleshan karne की jaroorat नहीं thi.
एक ptaa नहीं yeh कुछ logo की क्या facination rehti h। bowel movement और urine से related। lekhak ji please yar yeh इस prakaar की baate na likha karo। sala padhte he mood off hu jata h.
the moment shveta के saath apne james bond की bowel moment ko लेकर baate shuru hoyi। mein इस update ko skip maarne wala thaa। lekin aage isi liye padha की sayad कुछ iss-से alag padhne ko mil jaaye.
********
और अब saavdhan rehna। aapne Dr। saab Chutiyadr ko yaha introduce too krr दिया h। mgr jhelna bi aapko he padega।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 21.
सुभह कि किरणें रोशनदानों सें होती हुईँ मेरे चेहरे पर्र पड़ी तोँ मेरी आंखें खुलगईं। फोन पऱ नजर डाली, पांचबज रहे थें। बैड छोड़कर नित्य कर्म सें निवृत्त हुआ। थोड़ी बहोत एक्सरसाइज कि। आज सन्डे थां तोँ डैड कि छुट्टी थि। रीतु कों भि कालेज नहि जानां थां। मे नीचेहाल मे पहुँचा तब वहां पर्र अभि कोई भि नहि थां। शायद छुट्टी केँ कारण अभि किसी नें पलंग नहि छोड़ा थां। मे वापस अपने कमरे मे चला गय़ा औऱ बैड पऱ लेट गय़ा। लेटे लेटे झपकीलग गई।
माॅम कि आवाज़ सुनकर निंद टुटी।
" क्याँ बात हैं ? इतनेदेर तक सोयेहुए होँ। गाजियाबाद नहि जानां हैं क्याँ ?" - माॅमखाट पऱ बैठते हुए बोलि।
" जानां हैं माॅम." - मैंने घड़ी केँ उपर निगाह उठाई, आठबज चुके थें।
" तबीयत तौ ठीक हैं नाँ ?"
" हां। ठीक हैं। मे तौ बहोत पहले हि उठ गय़ा थां, फ्रेश होकर दुबारा सो गय़ा थां। "
मैंने देखा माॅम नें मेरीलाई हुई नाइटी जोँ पुरे शरीर कों ढकने वाली थि, पहनी हुईँ थि। वोँ नहाधो कर बहुत फ्रेश औऱ ताजगी सें भरी हुईँ लगरही थि।
" हाॅल मे हि चल। ब्रेकफास्ट लगाती हूं " कहतेहुए वो उठ खड़ी हुईँ।
" माॅम, वोँ जौ मैंने आपको मैसेज किया थां."
" बाद मे बात करेंगे " - माॅम नें मेरीबात पुरी होने सें पहले हि टोक दिया।
फिन हम् दोनों नीचेहाल मे गये। डैड औऱ रीतु सोफे पर्र बैठकर गरमचाय पीतेहुए टीबी मे न्यूज चैनलदेख रहे थें। मैंने डैड सें उनकी वाहन कि चाभी मांगी फिन ब्रेकफास्ट करकेउपर अपने कमरे मे चला गय़ा। कपड़े वगैरह पहने। फिन इंस्पेक्टर कोठारी कों मोबाइल लगाया औऱ आज उनसे मिलने कि ख़्वाहिश जताई। इंस्पेक्टर नें मुझेदस बजे केँ बादआने कों कहा।
घऱ सें साढ़े आठबजे मे निकल गय़ा। चाची केँ घऱ केँ सामने वाहन खड़ी कि औऱ वाहन सें उतरकर उनकेघऱ चला गय़ा। बेल बजाने पर्र राहुल नें दरवाजा खोला। मैंने उससे चाची केँ बारे मे पुछा तोँ उसने रसोई कि तरफ इशारा किया औऱ बाथरूम मे नहाने केँ लिएचला गय़ा। चाचा घऱ पऱ नहि थें। मे रसोई मे गय़ा। चाची साड़ी पहनी हुईँ थि। औऱ गर्मी केँ कारण साड़ी केँ पल्लू कों कमर मे लपेट लिया थां। उनके जिस्म पऱ पसीने कि बूंदें दिखरही थि। वोँ इस वक़्त चूल्हे केँ पास खड़े खड़े सब्जी बनारही थि।
मे रसोई मे दाखिल हुआ औऱ उनको पीछे सें अपने बाहों मे कसतेहुए बोला -" क्याँ कररही हौ चाची ?"
चाची चिहुंक उठी औऱ मुझे देखते हुए बोलीं -" नालायक, डरा हि दिया थां। "
" क्यूं ? मैंने ऐसा क्याँ किया कि डर गई " - कहतेहुए मे उनसे औऱ चिपक गय़ा। मगर मेराकमर सें निचले वाला हिस्सा उनसेदूर हि थां।
" ऐसे अचनके मे पकड़ेगा तोँ डर लगेगा नहि ?"- वोँ कुकर मे सब्जियों कों तलतेहुए बोलि।
" ठीक हैं, आगे सें आपकोपुछ कर पकडूंगा "- कहतेहुए मैंने एक् छोटी सि थैली उनको पकड़ा दि।
" क्याँ हैं यह ?"
" आप् कि फोन। "
वोँ सब्जी बनाना छोड़कर थैली सें फोन निकाली। मे उनसे पीछे वैसे हि चिपका रहा।
" बहोत अच्छी फोन हैं "- वोँ फोन देखते हुए बोलीं।
" आप् सें अच्छी नहि "- कहतेहुए मैंने अपनी दाहिना हाथआगे बढ़ाकर उनके नंगे चर्बी युक्त पेट पर्र रख दिया। नंगेपेट पऱ हाथ पड़ते हि वोँ सिहर सि गई।
" क्याँ कररहा हैं ? छोड़ नां। मेरी सब्जी जल जाएगी "- कहतेहुए फोन कों रसोई केँ स्लैब पऱ रखतेहुए बोलि।
" मैंने क्याँ आपको सब्जी बनाने सें रोकरखा हैं ?" - इसबार मैंने हिम्मत करतेहुए उनके गदराए हुएपेट कों मुठ्ठी सें हल्के सें दबा दिया जिससे वोँ ' उंह ' कर बैठी। पसीने सें उनकापेट भींगा हुआ थां।
" तु अभि श्वेता केँ यहांजा रहा हैं न् " - वोँ दुबारा सब्जियों पऱ ध्यान देतेहुए बोलीं।
" हां। वहां जाकर उनकी भि थोड़ी हेल्प करदूं। "
" तेरी वहां जाने कि क्याँ जरूरत हैं। राजीव तोँ हैं हि, वोँ सभी सम्भाल लेगा। "
" सम्भाल तोँ लेगामगर मेरा भि वहांकुछ पर्सनल काम हैं तोँ सोचा एक् पंथदो काज हौ जाय " - कहतेहुए मैंने अपनीबीच वाली उंगली सें उनके गहरी नाभि केँ अगलबगल सहलाने लगा।
वोँ बुरीतरह कांप गई।
" छोड़ नाँ ! राहुल नाश्ते केँ लिएआता हि होगा " - वोँ कसमसाते हुए बोलि।
" राहुल अभि अभि बाथरूम मे गय़ा हैं "- कहतेहुए अपनी उंगली कों आहिस्ता उनके नाभी केँ आसपास सहलाते रहा।
वोँ चुपचाप वैसे हि खड़ीरही तोँ मैंने थोड़ी औऱ हिम्मत कि। अपनेकमर केँ निचले हिस्से कों भि उनके पिछवाड़े सें सटा दिया। औऱ उनसे करीब-करीब पूरीतरह चिपक गय़ा। उनके बड़े बड़े पिछवाड़े कां स्पर्श पाकर मेरा लिंग पुरीतरह तन गय़ा। मुझे अंदाजा तोँ थां कि वोँ मेरे लिंग कों जरूर महसूस कररही होंगी।
तभी उनके दरवाजे कि घंटीबजी। वोँ हड़बड़ा कर मुझसे अलग हुईँ। मैंने उनके चेहरे कों देखा। उनका चेहरा तमतमाया हुआ थां।
" कौन हैं ? - मैंने पूछा।
" शायद तेरे चाचा होंगे " - वोँ मुझसे नज़रें चुराती हुईँ बोलीं।
मे रसोई सें बाहर् निकल गय़ा। दरवाजा खोला। तात श्री हि थें।
" साम कों घऱ पऱ हि रहिएगा। कहीं दोस्तों केँ संग पिकनिक मनाने मत निकल जाइएगा। श्वेता दि आँ रही हैं, कोईकाम वामपड़ सकता हैं " - तात श्री कों बोलकर बिना उनका जबाव सुने मे बाहर् निकल गय़ा।
सवादस बजे मे गाजियाबाद केँ उस पुलिस स्टेशन मे आया जहां इंस्पेक्टर कोठारी कि पोस्टिंग थि। वोँ अपने केबिन मे बैठा लेंड लाईन मोबाइल पर्र किसी सें बातें कररहा थां। मुझे देखते हि सामने विजिटिंग चेयर पऱ बैठने कां इशारा किया। मे चुपचाप बिनाकुछ कहे चेयर पऱ बैठ गय़ा।
लगभगदस मिनट तक मोबाइल पऱ बिजीरहा फिन मोबाइल कों रखकर मेरे तरफ़ सवाल सूचक दृष्टि सें देखा।
" हूं " - कोठारी बोला -" अब बताओ, क्याँ कहना चाहते हौ ?"
मैंने आगरा मे हुए संजयजी केँ रिसेप्शन कां साराहाल कह सुनाया।
" तौ तुम् कहते होँ कि वहां किसी नें तुम्हें जान सें मारने कि कोशिश कि। "
" सर, मे अभि भि कन्फ्यूजन मे हूं। मैंने आपको बताया कि यह मेरी बेहन केँ संग हुइ बातों सें निकलकर हमने निष्कर्ष निकाला। मगर क्याँ आपकोअमर केस कां सम्बन्ध आगरा सें सम्बंधित लगता हैं। "
" मे बात करता हूं वहां केँ इंचार्ज सें। वैसे तुमने कोई गैरकानूनी हरकतें तौ नहि नं कर दि हैं। कोई ग़लतशलत काम। "
" सर मुझे तोँ याद नहि हैं कि मैंने ऐसाकोई ग़लतकाम किया हैं कि कोई मेरेजान कां प्यासा होँ जाए। "
" कुछ तौ बात जरूर हैं। कहीं न् कहीं तुम् नें याँ तुम् दोनों दोस्तों नें कुछऐसा घपला किया हैं याँ कुछऐसा देख लिया हैं जौ नहि देख्ना चाहिए थां शायद इसीलिए यहसभी हौ रहा हैं। यदिऐसा कोई भि बात हैं तोँ मुझे निसंकोच बताओ। "
" सर मे हरबार कहूंगा कि मैंने कुछ भि नहि किया हैं। जब किसी कि जान पऱ पड़जाय तौ कौनझुठ बोलेगा। "
" कालेज मे कहीं ड्रग्स वगैरह कां कोई चक्कर तौ नहि थां। "
" मैंने अपनी जीवन मे कभी भि ड्रग्स देखा हि नहि हैं तौ इसके बारे मे क्याँ बोलूं। "
" देखा नहि हैं सुना तौ जरूर होगा। "
" हांसर सुना हैं। "
" क्याँ सुना हैं ?"
" ड्रग्स केँ नाम जैसे गांजा, अफीम, हिरोइन, एलएसडी, हशीश, मार्फिन, मारेजूआना, कोकीन, ब्राउन सुगर, चरस, हेलीपेरीडोल, बारबीटुरेक्स २। "
" हेलीपेरीडोल, बारबीटूरेक्स २यह क्याँ हैं। "
" सर मैंने कहीं पढ़ा थां कि इसकेचार डोज हाथी कों भि चार घंटे केँ लिए बेहोश कर देते हें। "
" अच्छा ! औऱ क्याँ जानते होँ इसके बारे मे ?"
" यह रंगहीन होता हैं, टेस्ट हिन होता हैं, मैंने कहीं पढ़ा थां कि अक्सर ट्रैन मे यहीसभी गरमचाय सिगरेट पानआदि मे थोडा सां लगाकर लुटेरे यात्रियों कों लुट लेते हें। एक् हल्का सां इसकाअंश आदमियों कों सैकड़ों घंटे बेहोश कर सकता हैं। "
" तुम् तौ बहोत कुछ जानते होँ। "
" सरकुछ कुछ जानता तोँ हरचीज केँ बारे मे हूं मगर वोँ भि पुरासच हैं याँ नहि यह मुझे नहि पता। "
इंस्पेक्टर कोठारी खामोश रहा। वो कुछ क्षण खामोशी सें बैठा एक् हाथ सें कुर्सी कां हत्था ठकठकाता रहा औऱ फिन एकाएक बोला -
" अगर तुम्हें लगता हैं कि पुलिस प्रोटेक्शन चाहिए तौ मे इंतजाम किए देता हूं। "
" नहि सर। मुझे फिलहाल पुलिस प्रोटेक्शन नहि चाहिए मगर मे आपसेकुछ मेरी शंकाएं हैं जौ कि पुछना चाहता हूं। "
" पुछो। "
" सर, पहले तौ मे जानना चाहता हूं कि किसी केँ कत्ल कि जांच आप् लोगकिस तरह सें करते हें ?"
" नियमों केँ मुताबिक पुलिस कोई भि घटना होने केँ बाद जल्दी वैज्ञानिक सबूत एकत्रित करने केँ लिए फाॅरेंनसिक लैव कों सूचना देती हैं। इसके अन्तर्गत वाॅयोलोजिकल एक्सपर्ट, फिजिकल डिविजन, फाॅरेंसिक फोटोग्राफी कि टीम जांच करती हैं। औऱ यदि गोली चलाने जैसीकोई घटना होती हैं तोँ उसकी वैलेस्टिक जांच भि कि जाती हैं। पैराफिन टेस्ट भि होता हैं। इसके बारे मे उसदिन मैंने बताया भि थां। "
" थैंकयू सरयह बताने केँ लिए। औऱ एक् बात औऱ बतादें तौ बड़ी मेहरबानी होगी। "
" क्याँ ?"
" अमर केँ कत्ल केँ बाद आपकी जांच रिपोर्ट क्याँ कहती हैं ?"
इंस्पेक्टर नें अपने एक् हवलदार कों बुलाया औऱ अमरकेस कि फाइल मंगवाया।
" मौत लगभगदस औऱ साढ़े ग्यारह केँ बीच मे हुइ हैं। औऱ गोली लगभगछः फुट कि दूरी सें चलाई गई हैं। " वोँ फाइल पढ़ते हुए बोला -" औऱ फ्लैट केँ अन्दर ऐसाकोई भि सुराग नहि मिला हैं जिससे हमें क़ातिल कों ढुंढ नें मे सहायता मिले। उसकेबदन पऱ किसी भि तरह केँ चोट केँ निशान नहि हैं। नां हि उसकेबदन मे कोईजहर पाया गय़ा हैं। "
" आप् लोगयह अंदाजा केसे करते हें कि मौतइन समयों केँ बीच मे हि हुआ हैं। "
" डेड बोडी केँ टेम्परेचर औऱ लास्ट वक्त पऱ किएगए भोजन केँ डाइजेस्ट केँ रिसर्च पर्र। इसके अलावा भि औऱ कईतरह कि जांच होती हैं। "
" औऱ सर गोलीछः फुट कि दूरी सें चलाई गई हैं तोँ क्याँ इसका भि कोई जानने कां प्रोसिजर हैं। "
":हां। इसका भि प्रोसिजर हैं। डिस्टेंस मे थोडा बहोत डिफरेन्स आँ सकता हैं। "
" मैंने सुना हैं कि कुछलोग कई गोली खाने केँ बाद भि मरते नहि हैं मगरऐसा क्याँ होँ गय़ा कि वोँ केवल एक् हि गोली सें मर गय़ा। "
" यह डिपेंड करता हैं कि गोलीबदन केँ किस हिस्से मे लगी हैं। अमर कों गोलीठीक उसके हार्ट पर्र लगी हैं तौ इसमें उसका बचना असम्भव थां। "
" इसका मतलब कि किसी तजुर्बेकार व्यक्ति नें गोली चलाई होगी ?"
" बिल्कुल औऱ जैसा कि तुमने बताया आगरा मे वहां भि किसी एक्सपर्ट नें हि गोली चलाई मालूम पड़ती हैं। "
" मतलब जिसने भि यह कत्ल किया हैं वोँ हथियार चलाने मे सक्षम हैं। "
" बिल्कुल। "
" एक् बात औऱ। यहां थाने मे मुखबिर नें अमर केँ कत्ल केँ बारे मे एग्जेक्ट क्याँ कहा थां ?"
" सेक्टर नं। ७ राजा पैलेस फ्लैट नं १३१ मे गोली चलने कि आवाज़ आई हैं। "
" सर, एक् बात बताओ वोँ छ मंजिला इमारत हैं जिसमें हर फ्लोर पऱ तीनतीन फ्लैट हैं। उसे एग्जैक्ट केसेपता कि उसछः मंजिला इमारत केँ उसी फ्लैट मे गोली चलने कि आवाज़ आई हैं। बगल मे दो फ्लैट हैं तोँ उनमें सें किसी नें गोली चलाने कि आवाज़ क्यूं नहि सुनी। आपने तोँ बगल केँ फ्लैट मे भि पता किया होगा। उन लोगो कां क्याँ कहना थां। "
" बगल हि नहि बल्कि पुरे बिल्डिंग मे किसी नें भि गोली कि आवाज़ नहि सुनी। हमनेसब सें इन्क्वायरी कि हैं। "
" जबबगल वाले फ्लैट मे किसी नें गोली कि आवाज़ नहि सुनी तोँ आपका वोँ मुखबिर भला केसे गोली कि आवाज़ सुन लिया। मान लीजिए क़ातिल नें साइलेंसर कां इस्तेमाल किया होगा शायद इसीलिए फ्लैट मे रहरहे लोगों नें गोली कि आवाज़ नहि सुनीमगर यदि साइलेंसर कां इस्तेमाल किया गय़ा हैं तौ उस मुखबिर नें केसेसुन ली। "
" बरखुदार। हमें हमारी ड्यूटी मत समझाओ। यह हम् भि जानते हें औऱ इसीलिए तुम् औऱ तुम्हारे जीजा कों हमने अरेस्ट नहि किया। वोँ मुखबिर हमारे टारगेट पऱ हैं। औऱ पुलिस उसकी तलाशकर रही हैं। "
" औऱ सर। वहां मिले फिंगरप्रिंट केँ बारे मे क्याँ कहना हैं ?
" वहां सें हमेंसात लोगों कां फिंगरप्रिंट औऱ फुटप्रिंट मिला हैं जिसमें तुम्हारा, तुम्हारे जीजा, तुम्हारी बेहन श्वेता, अनुष्का, औऱ तुम्हारा मरहूम साथीअमर कां मिलान होँ चुका हैं मगर बाकी केँ दोकौन हैं, यह अभि तक मालूम नहि हौ पाया हैं।
मेरी सिगरेट पीने कि ख़्वाहिश तलब करनेलगी तोँ मैंने इंस्पेक्टर सें इजाजत मांगी।
" यहां नहि " - कोठारी नें कहा -" बाहर् चलते हें। मे भि पियूंगा। "
हम् उसके केबिन सें बाहर् निकलआए औऱ थाने केँ कैम्पस मे हि एक् स्थान खड़े होँ गए। मैंने सिगरेट कां पैकेट निकाला औऱ उसमें सें एक् सिगरेट निकाल कर कोठारी कों दिया औऱ एक् अपनेलिए निकल लिया। मैंने पहले उसकी सिगरेट सुलगाई फिन अपनी।
" सर मेरेपास आपकेलिए एक् प्रपोजल हैं " - मैंने सिगरेट कां एक् गहराकश लेतेहुए कहा।
" क्याँ ?"- वोँ चौंकते हुए बोला।
" मरहूम अमर कि मां केँ तरफ सें यदि आप् याँ आपकी पुलिस अमर केँ क़ातिल कों गिरफ्तार करती हैं तोँ उनकेतरफ सें एक् छोटा सां नजराना बतौर उपहार पेशकश हैं। "
" मैंने यह वर्दी नजराना याँ ईनाम केँ लिए नहि पहनी हैं " - कोठारी गर्म होतेहुए बोला -" मैंने अपनी जीवन मे कभी भि घूस नहि लिया हैं औऱ नां हि कभी लुंगा। मे अपनीतरफ सें भरपूर कोशिश कररहा हूं कि उस बच्चे केँ क़ातिल कों कानून केँ शिकंजे मे जकड़कर अदालत केँ कटघरे मे खड़ा करूं। "
मैंने उसे सम्मान कि दृष्टि सें देखा। आज केँ जमाने मे ईमानदार पुलिसिया कहां मिलता हैं। सिगरेट पीने केँ बाद इंस्पेक्टर कोठारी कों नमस्ते करके मे श्वेता दि केँ फ्लेट चला गय़ा।
kamdev99008 bhiya yeh kahani padh lo . ab yeh mat kehna kee suspense or thriller bi incest kahani kee prakaar ghisi piti kahani line pr chalti h . nazar maar lo ispar ek baar .
nice update .yaha say sabko yaad rakh raha ho ,,yaha k do padosi h .dekhte h inme say too koy nahee? .baaki k aadhe update kaa intejar rahega .
Sagar (Full Storyd) – New Episode
बहुत he gazab। chachi bi। insp। Kothari bi। और maa की nighty bi (whaaat!!। नहीं woh too mein ayese he)। chalo Insp sahab too कम से कम imaandar h। abi tak। और poorn imaandaari और tatparta के saath इस gutthi ko suljhane की koshish में h। so the prime suspect iss the caller। without the doubt। lekin woh baaki के 2 fingerprints kiske h। joo abi tak match नहीं hue.
yeh बात abi ptaa lagi की Shevta 3 floor के flats में rehti h। muzhe too laga thaa की woh duplex type के घर में rha rahi h.
chaachi kaa mobile bi aa गया। kaunsa h। yeh नहीं bataya। (xingPing wala nikla too story kaa bahishkaar किया jaayega। और lekhak kaa putla bi fooka jaayega। haan haan).
Sagar की maa ne msg wali बात gol krr di। और chaachi kaa temperature high hu गया h Sagar के thermometer lagane के बाद.
waise anushka darling कहा h। क्या woh bi apne shauhar के saath बाहर gai hoyi h.
rochak addayatan thaa।
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
Relavant source : click here