Sagar (Full Storyd) – New Episode
पहली अध्याय लिखने केँ बाद मुझेऐसा प्रतीत होता हैं कि Hinglish मे लिखने केँ कारण मे अपने भावों कों सही तरीके सें प्रदर्शित नहि करपारहा हूं, अतःअब सें इस स्टोरी कों हिंदी मे हि लिखूंगा। इस स्टोरी मे incest तौ हैं हि इसके अलावा यह एक् murder mystery suspense किस्सा भि हैं। इसकथा कां ताना-बाना पहले सें हि बुन लिया हैं औऱ यह एक् लम्बी किस्सा होने वाली हैं। कथा जरूर पुरी होगी बशर्ते कहीं कुदरत कां कोई जादू नं हौ जाय। कृपया अपना support मुझे देते रहिएगा।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 3.
अलार्म कि आवाज़ सुनकर मे उठा। उस टाइम 7 बजरहे थें। मे अपने कमरे सें बाहर् निकल बाथरूम मे चला गय़ा।
Fresh होँ कर औऱ थोड़ी बहोत exercise करने केँ बादजब मे नीचेहाल मे पहुँचा तब तक 9 बज चुके थें। डैड टीबी मे khabar देखरहे थें। माॅम औऱ रीतु रसोई मे थि। मे जाकरडैड केँ बगल मे बैठ गय़ा।
" डैड, आज आप् मेरी बाईक सें आफिसचले जाइए, आप् कि गाड़ी चाहिए श्वेता दि कां कुछ सामान लेने जानां हैं। "
" ठीक हैं। वैसे कराटे वाली क्लबकब join करनी हैं। "
" कलसाम सें। 6 सें 8 तक हि training देनी हैं। "
" अच्छा। " कहकर वापस टीबी कि तरफ ध्यान करलिए।
फिनवही रोज वाली दिनचर्या। माॅम नें ब्रेकफास्ट लाया। सब एक् संग ब्रेकफास्ट किये। डैड 9.30 बजे आफिसचले गए। औऱ मे अपने कमरे मे जाकर गाजियाबाद जाने कि तैयारी करनेलगा। हमारा घऱ रोहिणी मे थां औऱ गाजियाबाद जाने मे गाड़ी सें लगभग एक् सवा घंटालग हि जाता हैं। मैंने सोचा एक् बार राजीव जीजु कों मोबाइल करदूं। मैंने जैसे हि फोन मे उनका नम्बर लगाया तभीफोन पऱ मैसेज आनेलगा कि आपका recharge balance शेष हौ गय़ा हैं।
मैंने कपड़े पहनते हुए सोचा रास्ते सें recharge करवा लेंगे। रेडी होँ कर फ्लेट कि चाबी लिया। श्वेता दि कलसाम जबघऱआयो थि उसी वक़्त उन्होंने अपने फ्लैट कि चाबीदे दि थि। सजधजकर हौ कररुम सें बाहर् निकला तोँ देखा कि अचानक आकाश मे काले बादल मंडराने लगे हें।
" लगता हैं जोर सें बारिश आने वाली हैं। " मे सोचता हुआ नीचेहाल मे पहुँचा औऱ माॅम कों आवाज़ लगाई।
" माॅम मे निकलरहा हूं। " माॅम औऱ रीतु दोनों कों देखते हुएकहा।
" कब तक वापस आँ जाओगे। " माॅम नें कहा।
" अभि 10 बजे हें। इसका मतलब डेढ़दो बजे तक। "
ओके। सम्भल कर जानां। "
" ठीक हैं माॅम। " कहकर मैंने माॅम औऱ रीतु कों हग किया औऱ निकलते निकलते माॅम सें बचाकर रीतु केँ पिछवाड़े मे हल्का सां चांटा जड़ दिया औऱ जल्द सें निकल गय़ा। दरवाजे केँ पास पहुंच कर पिछे देखा तोँ रीतु कों अपनीतरफ आंखें तरेरते हुए पाया। मे उसेदेख कर मुस्कुराया औऱ बाहर् निकल गय़ा।
मे गाड़ी मे बैठा औऱ गाजियाबाद कि तरफ निकल पड़ा।
थोड़ी देरबाद बारिश भि शुरुआत होँ गई थि। रास्ते मे बहुतजाम थां। आगे कहींकोई पेड़गिर गय़ा थां। कहीं भि फोन रिचार्ज करने कां मौका नहि मिला। सफर पौनेदो घंटे कां हौ गय़ा थां। जब मे गाजियाबाद केँ सेक्टर नम्बर 7 फ्लेट नम्बर 131 मे जौ कि जीजू कां फ्लेट थां पहुँचा तब पौने बारहबज रहे थें।
फ्लेट केँ ताले कों खोलने केँ लिए चाबी निकाल हि रहा थां कि मेरी नज़र दरवाजे पऱ पड़ी। दरवाजा खुलाहुआ थां। लगता हैं जीजूघऱ पर्र हि हैं, सोचा।
तभी द्वार (दरवाज़ा) खुला। दरवाजे पऱ एक् कटे बालों वाली रूपवती युवती प्रगट हुई, मेरे पर्र निगाह पड़ते हि उसने बड़े आतंकित भाव सें मुझे देखा।
उसके खुबसूरत चेहरे सें मेरी निगाह फिसली तौ उसकी पोशाक पर्र पड़ी। वोँ एक् विदेशी जींस औऱ शर्ट पहनी थि। उसके पोशाक उसके अत्याधुनिक होने कि अपने आप् मे दस्तावेज थि।
" कौन हौ तुम् ! " उसने घबड़ाए हुएकहा।
" मे राजीव जी कां साला हूं पऱ आप् कौन हें। "
" म.म.मै राजीव कि कजन हूं। "
" कजन ? मगर उनके तौ कोई रिश्तेदार नहि हैं। " मे आश्चर्यचकित सां बोला।
" वोँ मे उनके मामाजी केँ तरफ सें हूं। "
" जीजा फ्लेट मे हैं क्याँ। "
" ह.ह.हां। " वो फंसे स्वर मे बोलि।
" ठीक हैं। मे देखता हूं। " कहकर मे उसकेबगल सें फ्लेट केँ अन्दर प्रवेश कर गय़ा। अन्दर विशाल ड्राइंगरुम थां। वहांकोई नहि थां। फिन बेडरूम मे गय़ा। बेडरूम मे बेतरतीबी कां बोलबाला थां। कपड़े बिखरे हुए, दराज खूले थें। वार्डरोब केँ दरवाजे भि खूले थें। फर्श पऱ कुछ कपड़े बिखरे हुए थें।
मे हैरान हुआ। फिन मेरी तवज्जो बाथरूम सें आती हुई पानी कि आवाज़ कि तरफ गई। मैंने बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) खोला।
भीतर निगाह पड़ते हि मे सन्नाटे मे आँ गय़ा। बाथरूम मे दीवार केँ संगलगे विशाल खाली बाथ-टब मे एक् व्यक्ति पड़ा थां। वो पैन्ट शर्ट पहने थां। मैंने थोडा आगेबढ़ करउसे देखा तोँ मे जैसे भौंचक्का सां जडवत हौ गय़ा।
वोँ अजय थां। मेरा अजीज, मेरा हमनिवाला, मेरा प्यारा मित्र। मेरी पलकें भीग गई। आंखों सें आंसू निकलने लगे। थोड़ी देरबाद मैंने अपने कों सम्हाला औऱ उसकेऊपर सरसरी तौर पऱ निगाह डाली।
उसकी आंखें पथराई हुईं थि। उसकी छाती मे गोली कां सुराख थां। अचानक सें मुझेकुछ यादआया औऱ मे बाहर् कि तरफ भागा।
लड़कीभाग चुकी थि।
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Update 3 A.
मे गमगीन वहीं खड़ा हि थां कि एक् पुलिस कां दल धड़धड़ात हुआ फ्लेट मे प्रवेश किया।
" हमेंखबर मिली हैं यहां किसी कां कत्लहुआ हैं। " इंस्पेक्टर अपने कठोर आवाज़ मे कहा। "
इंस्पेक्टर केँ बैच सें मालुम हुआ कि उसकानाम विजय कोठारी हैं। वोँ एक् 6 फुट सें भि ऊपर निकलता हुआ हठठा कट्टा कडियल जवान थां।
" जी। बाथरूम मे। " मैंने धीरे-धीरे सें कहा।
पुलिस फ्लेट केँ चारों तरफफैल गई। मे वहीं ड्राइंगरुम मे बैठ गय़ा। लाश कां मुआयना करने केँ बाद इंस्पेक्टर बोला।
" क्याँ इस फ्लेट केँ मालिक तुम् होँ। "
" जी नहि। यह मेरे जीजा राजीव सोलंकी कां कां फ्लेट हैं। "
" मकतुल कां कत्ल तुमने किया हैं। "
" जी नहि। जब मे यहांआया तबयहमरा पड़ा थां। "
" तुम् यहांकब आये। औऱ घऱ कहां हैं तुम्हारा। "
" मे यहां पन्द्रह मिनट पहले हि आया थां। औऱ मेरा घर-मकान दिल्ली केँ रोहिणी मे हैं। " फिन मैंने इंस्पेक्टर कों अपने, अपने परिवार औऱ यहांआने कां कारण बताया।
" हुं। " फिन थोड़ी देरबाद कहा। " मकतुल कों जानते हौ। "
" हां। मेरा साथी थां। बहोत हि जिगरी। " मे अपने आंसुओं कों पोछते हुएकहा।
" मकतुल तुम्हरा यार थां। " इंस्पेक्टर हैरान होतेहुए बोला। " क्याँ करता थां वोँ। औऱ वोँ यहां क्याँ करनेआया थां। "
" इंस्पेक्टर साहब, यह तौ मे भि नहि समझपा रहा हूं कि वोँ यहां क्यूं औऱ कबआया। " मे भावुक हौ गय़ा थां। " मेरेसंग हि पढ़ता थां। अपने मम्मी कां एकलौता सहारा थां। "
तभी मेरे जीजा राजीव नें फ्लेट मे प्रवेश किया औऱ पुलिस औऱ मुझे देखकर अचंभित हुआ।
" क्याँ बात हैं ! सागर तुम् यहां औऱ पुलिस यहां केसे। पुलिसकर्मियों कों देखते हुए मुझसे पूछा।
" कत्लहुआ हैं यहां। औऱ तुम् कौन हौ। " इंस्पेक्टर नें कठोर आवाज़ मे कहा।
" क्याँ ! कत्ल ! " उन्होंने आंखें चौड़ी करतेहुए दहशतभरे स्वर सें कहा। " क। किसका ! किसका कत्लहुआ हैं। "
" मेरे मित्र अमर कां। " मैंने धीरे-धीरे सें कहा।
" तुम्हारे साथी कां। "
मुझे न् जाने क्यूं ऐसालगा जैसे मेरे जीजा नें सुकून कि सांसली हौ।
" मे राजीव सोलंकी। इस फ्लैट कां मालिक। " जीजा नें इंस्पेक्टर कि तरफ तवज्जो देतेहुए कहा। " कत्ल केसेहुआ इंस्पेक्टर साहब। किसने किया। क्याँ क़ातिल पकड़ा गय़ा। "
" अभि तक तौ नहि मगर जरुर पकड़ा जाएगा। आप् जरा धैर्य रखें औऱ मेरे सवालों कां जवाबदें। " इंस्पेक्टर नें कहा।
" जी। " कहकर जीजा मेरेबगल बैठ गय़ा।
" अभि आप् कहां सें आँ रहे हें औऱ करते क्याँ हें।
" मे दिल्ली केँ एक् MNC कम्पनी Hayat Infotech मे काम करता हूं जौ कनाटप्लेस मे हैं। मे अभि वहीं सें आँ रहा हूं। "
" आज आपकी आफिसबंद हैं जोँ इतनी जल्दघऱ आँ गए। "
" जी नहि। मेरी तबियत कुछठीक नहि थि इसलिये सीक लेकर जल्दचला आया। "
" कितने बजे आफिस निकलते हें। "
" सुभहनौ बजे। "
तभी पुलिस कां डाक्टर औऱ फिंगर प्रिंट्स वाले आँ गए औऱ उन्होंने अपना अपना निरीक्षण शुरुआत कर दिया। इंस्पेक्टर भि उनकेसंग लग गय़ा।
" तुमने आने सें पहले मुझे मोबाइल क्यूं नहि कि। " जीजा मेरीतरफ झुककर धीरे-धीरे सें पुछा।
" आप् कों दिदी नें नहि बताया कि मे आज यहांआने वाला थां। "
" नहि। उसने तौ मुझेकुछ भि नहि बताया। मगर तुम् तोँ मुझे मोबाइल कर सकते थें। "
" सुभह मैंने आपको मोबाइल करने गय़ा तोँ पताचला मेरे मोबाइल मे रिचार्ज खतम हौ गय़ा हैं। आउटगोइंग औऱ इनकमिंग दोनों बन्द होँ गय़ा थां। " मैंने उदास होकर बोला।
" तुम्हारा साथी यहां क्याँ करनेआया थां। "
" यह तौ मे भि नहि समझपा रहा हूं। "
तभी इंस्पेक्टर आया तौ मैंने उन्हें कटे बालों वाली लड़की केँ बारे मे बताया।
इंस्पेक्टर हैरान हौ कर बोला। " इतनी महत्वपूर्ण बात तुम् अबबता रहे होँ। "
" मेरे साथी केँ मौत नें मुझे सदमे मे डाल दिया थां। मे सोचने समझने कि स्थिति मे नहि थां। " मे भर्राये हुए स्वर मे बोला।
* तुम् उसे पहचानते होँ। "
" नहि। मगरअगर दुबारा दिखी तोँ पहचान जाउंगा। "
तभी वहां डाक्टर आया।
" मेरा सरसरी तौर पऱ किया गय़ा मुआयना " डाक्टर बोला - " ये बताता हैं कि मौत 36 caliber कि रिवाल्वर सें निकली गोली सें कोई डेढ़ सें दो घंटे पहले हुईं हैं। "
" तुम्हारे पासऐसी कोई रिवाल्वर हैं। " इंस्पेक्टर मेरीतरफ देखते हुएकहा।
" नहि। " मैंने इनकार करतेहुए कहा।
" तुम्हारे पास ? " इंस्पेक्टर जीजा सें पूछा।
जीजा नें मुंडी हिलाई।
" जबान केँ गूंगे हौ। " इंस्पेक्टर नें कर्कश भरें स्वर मे कहा।
" ज.जी नहि। " जीजा हड़बड़ाया। - " मेरेपास कोई रिवाल्वर नहि हैं। "
" ड्यूटी केसे जाते हौ। "
" मेरेपास गाड़ी हैं। "
" अभि वाहन सें हि दिल्ली सें आँ रहेहों।
" जी। "
" कत्ल केँ समय कहां थें। "
" आप् मुझ पऱ शककररहे हें। " जीजा नें थोड़े कड़ स्वर हैं कहा।
" जी। हां। जब तक क़ातिल कां पता नं चलजाय तब तक मकतुल सें सम्बंधित हर शख्स सस्पेक्ट हैं। आप् भि औऱ आप् कां यह साला भि। "
" म। मे सवादस बजे आफिस सें निकला औऱ अभि आप् केँ सामने हि घऱआया। "
" आप् केँ आफिस सें यहांआने मे ढाई घंटे लगते हें। "
" नहि। लगभग एक् घंटा। मगर बरसात औऱ जाम होने केँ कारण वक्त ज़्यादा लग गय़ा। "
इंस्पेक्टर अपनी घड़ी देखते हुए " अभि साढ़े बारहबज रहे हें। औऱ डाक्टर कां मुआयना बताता हैं कि कत्ल डेढ़ सें दो घंटे पहले हुईं हैं। इस कां मतलब कत्लदस बजे सें लेकर ग्यारह बजे सें लेकर केँ बीचहुआ हैं। "
फिन एकाएक इंस्पेक्टर मेरीतरफ मुड़ा औऱ मुझ पऱ निगाह डालते हुएकहा " औऱ तुम् दोनों केँ बयान केँ अनुसार जब कत्लहुआ उससमय तुम् दोनों वाहन ड्राइव कररहे थें। क्याँ तुम् लोगों केँ संगकोई औऱ भि व्हीकल मे थां। "
" जी नहि। " हम् दोनों नें एक् संगकहा।
इंस्पेक्टर मुझे घुरते हुए बोला " औऱ यहकटे बालों वाली लड़की तुम्हारा कोई मनगढ़ंत किस्सा भि होँ सकता हैं। क्योंकि इसबात कां भि कोई सबूत तुम्हारे पास नहि हैं। "
" नहि ऐसीबात नहि हैं। मे सचकहरहा हूं। " मैंने बिरोध करतेहुए कहा।
" क्याँ तुम् ऐसी किसीकटे बालों वाली लड़की कों जानते होँ। " इंस्पेक्टर जीजा कि तरफ पलटते हुएकहा।
" नं। नहि। " जीजा हड़बड़ाया। " नहि मे किसीकटे बालों वाली लड़की कों नहि जानता हूं। "
इस दौरान छानबीन मे मर्डर वीपन बरामद नहि हुआ।
इंस्पेक्टर नें अपने एक् पुलिसकर्मी कों बुलाया औऱ हेडक्वार्टर सें पैराफिन टेस्ट करने वाले कों बुलाने कों कहा।
" उसका क्याँ होगा। " जीजा नें पूछा।
" तुम् दोनों केँ हाथों कां पैराफिन टेस्ट किया जायेगा। अगर तुम्हारे हाथ सें हि रिवाल्वर चली होगी तोँ उस टेस्ट सें तुम्हारे चमड़ी मे पैबस्त हौ गये बारूद केँ कण पैराफिन पर्र आँ जायेंगे। "
आधे घंटेबाद पैराफिन टेस्ट वालाआया तब तक इंस्पेक्टर नें मेरी औऱ जीजा कि सारी जन्मकुंडली हमसे निकलवा ली।
पैराफिन टेस्ट हुआ। मेरे औऱ जीजा दोनों मे किसी केँ भि चमड़े मे पैबस्त जले बारूद कण नहि मिले।
इसकेबाद इंस्पेक्टर नें मेरेघऱ औऱ जीजा केँ आफिस मे हमारे निकलने कि पड़ताल कि।
" तुम् दोनों अपने अपनेफोन नंबरदे जाओ। अभि केँ लिए तौ मे छोड़रहा हूं मगर दुबारा कभी भि मे तुम् दोनों कों तलबकर सकता हूं। " इंस्पेक्टर नें हमेंगौर सें देखते हुएकहा।
" औऱ तुम् अपने वोँ कटे बालों वाली कां कुछ सुराग उराग लगाओ। " उसने मेरी छाती पर्र ऊंगली टेकते हुएकहा।
मे हैरान हुआ। "मे केसेपता लगाउंगा। दिल्ली केँ सवा करोड़ आबादी मे तौ हजारों कटे बालों वाली लड़कियां होगी। यह तौ भुसे मे सें पिन ढुढने वालीबात हुई। "
" कल थानेआकर अपनी हाजिरी केँ संगसंग लड़की कां स्कैच भि बनवा देना। " इंस्पेक्टर मेरी बातों पऱ ध्यान नहि दिया औऱ जीजा कि तरफ मुड़ा। " औऱ आप् जनाबजब तक इस लड़के कां असली क़ातिल नहि पकड़ा जातातब तक आप् इसशहर सें कहीं नहि जायेंगे। "
फिन इंस्पेक्टर अपनेलाव लश्कर केँ संग दनदनाता हुआ निकल गय़ा। डेड बॉडी पोस्टमार्टम केँ लिए पहले हि भेज दि गई थि।
यह सारी कारवाई करते करते पांचबज गए थें। मैंने श्वेता दि कां सामान लिया औऱ जीजा सें बिदा लेँ दिल पऱ भारीबोझ लिए वहां सें बिदा होँ गय़ा।
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
Roman mai likhne mai mughe koe problem nahee h halanki woh shabd or bhav joo kisi bi story kee antratma hoty h woh nahee de paunga.
Thanks bro.lekin no bahna ?. brother please. Sage sambandhio mai najayaz rista etni asani say nahee banti h. bhut papad belne padte h. or mummy bete kaa hu tab too kahne kya. woh hoga halanki sai waqt pr.
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