Beti Bani Sahara – New Episode
Update 59 : ( हृदय छलनी)
एक् नया सुभह हौ चुका थां औऱ दादीमा आँख खुला, उन्हें रात कां सारा दृश्य याद थां। इतनासभी होने केँ बाद भि बापू नें अपने सफाई मे ज़्यादा कुछकहा नहि थां। खैर प्राची सुरक्षित थि। उसका बच्चा सुरक्षित थां। प्राची कां गर्भ मे अभि भि उसके बापू कां बीजपनप रहा थां। मगरअगर प्राची याँ पिताजी कां कदमआगे सें थोडा भि बहका, तोँ अंजाम अलग होँ सकता थां।
तोँ इसे रोकने केँ लिए दादीमा कों अपने परिवार औऱ बच्चों पे कमांड करना बहोत जरूरी थां। वोँ इतना जरूर जानती थि कि उनका बेटा उनकीबात कां अभेलना ऐसे हि नहि कर सकता। जरूर प्राची कां सह होगाइस बात केँ लिए। दादीमा अपने आप् कों भि कोशरही थि। काश वोँ पहले हि बापू कों प्राची सें अलग कमरे मे सुलाती, तोँ आजयहदिन नं देख्ना पड़ता। अगर पॉजिटिव औऱ नेगेटिव चार्ज कों एकसाथ रखेंगे तौ शॉर्ट सर्किट तोँ होगा हि। आग केँ पासघी रखेंगे तोँ आग तोँ लगेगा हि। बापू औऱ प्राची कों एक् संग छोड़ देना कां मतलब दोनों कों अपने पे कंट्रोल करना थोडा मुश्किल जरूर होगा। दादीमा इनसभी बातों कों सोचीजा रही थि। ऊपर सें कल संयम कां बांध भि तोड़ दियाइन लोगों नें। पिताजी नहि मेरे कहने सें यहलोग एक् वोँ दिन माने याँ नहि। याँ हरदिन चोदमपटी मचा हि रहे थें। दादीमा अपने बेटे सें नाखुश थि। प्राची तौ नं समझ हैं। वोँ तोँ २ बच्चों कां बाप पहले भि बना थां। उसे तोँ पता होना चाहिए। क्याँ पताबहु कों भि नाँ छोड़ा हौ, जब प्राची ओर प्रज्ञा उसकेपेट मे थें। दादीमा कों पिताजी पे क्रोध आँ रहा थां।
उधर प्रज्ञा अपनेरूम मे जग गई थि औऱ रात दिदी केँ संगहुए दृश्य कों यादकर रही थि। उसे भि अपने बापू पे क्रोध आँ रहा थां। वोँ सोचरही थि : हे ईश्वर, बापू कितने ठरकी इंसान हैं। दादीमा औऱ डॉक्टर केँ मना करने पऱ भि दिदी कों नहि छोड़रहे हैं। कितना गलत हैं यह, उनका बच्चा दिदी केँ कोख मे समयरहा हैं, क्याँ उसका भि खयाल पिताजी कों नहि आया।
कुल मिला केँ सबने दोषी पिताजी कों हि मान लिया थां। पिताजी बहोत शर्मिंदा थें। प्राची रात केँ दवा केँ असर केँ कारण अभि भि सोरही थि औऱ किसी नें भि उसे उठाने कि कोशिश नहि कि। बापू कों ऑफ़िस जानां थां इसलिये दादीमा नें उनकेलिए नाश्ता बनाने केँ लिए फ्रेश होके किचेन मे चली गई। बापू भि आजचाह रहे थें, कि जितनी जल्द होँ वोँ आजघऱ सें निकलजाए। क्योंकि यहबात तौ तय हैं कि घऱ कां माहौल सही नहि हैं अभि।
दादीमा नें पिताजी कां ब्रेकफास्ट जल्द हि लगा दिया। बापू भि फ्रेश हौ केँ चुपचाप बैठ केँ ब्रेकफास्ट करनेलगे।
दादीमा : बेटा, ब्रेकफास्ट कैसाबना हैं।
पिताजी: अच्छा हैं माँ।
दादीमा : ह्म्म्म.मुझे तुमसे रात केँ बारे मे कुछबात करनी हैं।
पिताजी: बोलिये मां।
दादीमा : तूने मेरा भरोसा क्यूं तोड़ दिया ? प्राची केँ संग संयम केसे नहि बनापाए ? प्राची तेरी बेटी हैं, पहलीबार पेट सें हुईँ हैं, उसे भोगते हुए तुम कोशरम नहि आई एक् बार भि, तबजब डॉक्टर ओर मैने, दोनों नें तुम्हे मन किया थां ? रात कों ऐसा क्याँ हुआ कि तुँ प्राची केँ संगइस तरह सें सेक्स किये कि उसकीयह हालत होँ गई ? डॉक्टर नें क्याँ बोला ? क्यूं हुआऐसा प्राची केँ संग ?
दादीमा नें एक् संग इतने प्रश्न केँ दिए कि बापू जवाब देते देतेथक जाते।
पिताजी: मां, मै आपकी गुस्से कों अच्छे सें समझरहा हु। मुझ सें गलती हुइ हैं औऱ मे जायदा सफाई नहि देना चाहता अभि। प्राची सें मे बहोत प्रेम करताहु औऱ कभी भि उसकोचोट पहुंचने कां इरादा नहि थां मेरा। मैने संयम रखने केँ पूरी कोशिश कि थि मगर हालत औऱ परिस्थिति इंशान कि कमजोर बना देते हैं। यहसभी क्यूं हुआ, केसेहुआ औऱ कब शुरुआत हुआ, इसका जवाब अभि मै आपको नहि देना चाहता। डॉक्टर नें बस प्राची कां ध्यान रखने कों बोला हैं। प्राची औऱ बच्चा बिल्कुल ठीक हैं औऱ आप् लोगों कों टेंशन लेने कि कोई जरूरत नहि हैं, प्राची कां बस ख्याल रखिए अच्छे सें, औऱ मै वोँ वादा करताहु कि आज सें प्राची केँ संग हमबिस्तरी नहि करूंगा। बस इससे ज़्यादा मै आपकोकुछ नहि कह सकता मम्मी।
दादीमा बापू सें जवाब चाहती थि औऱ पिताजी नें सारे बातो कों गोलमोल कर जवाब दिया जौ दादीमा कों पसन्द नहि आया। पास बैठी प्रज्ञा भि यह सारी बातें सुनरही थि।
दादीमा : अब क्याँ, अब क्याँ बोलरहा कि हमबिस्तरी भि करेगा। अब तोँ प्राची केँ संग जोँ होना थां वोँ तौ तूनेकर दिया। क्याँ इसदिन केँ लिए मैने तेरी विवाह प्राची सें कराई थि ? माना वोँ तेरी पत्नि हैं, मगर इसका मतलबजब जाहे उसकेसंग संभोग करलो ? ऐसा थोड़ी होता हैं ? क्याँ औरत मात्र संभोग करने केँ लिए होती हैं औऱ मर्दबस अपनाहवस मिटाने केँ लिए ? कितना हवस थां तेरे अंदर कि अपनी प्रेग्नेंट पत्नि जोँ तेरी बेटी हैं उसे भि नहि छोड़रहे ? इतनाअगर तेरे अंदरहवस हैं तब तौ तूँ मुझे औऱ प्रज्ञा कों भि दबोच केँ अपनीहवस कां प्यास मिटा लेगा ? हैं नाँ?
दादीमा नें गुस्से नें इतनीगलत बात बापू केँ संगकर दि थि। उधरपास हि बैठी प्रज्ञा कों भि दादीमा कां क्रोध, कुछ जायदा हौ गय़ा, ऐसालग रहा थां। प्रज्ञा कों दादीमा कां यू पिताजी कों डांटना अच्छा नहि लगा। ऊपर सें दादीमा नें पिताजी कों यह केहना कि पिताजी मौका मिला तोँ बापू प्रज्ञा कों भि दबोच लेंगे, प्रज्ञा कां दिल धड़का गय़ा।
दादीमा केँ यह कटाक्ष सुन केँ बापू केँ आंखों सें हल्का आंसू सां निकल गय़ा। दादीमा नें पिताजी केँ आंशूदेख केँ अपनी गलती कां एहसास हुआ कि उन्होंने कुछ अधिक हि बोल दिया। मगरअब तोँ जोँ कहना थां वोँ तौ कह चुकी। तीर कमान सें निकल चुका थां औऱ एक् बार जोँ तीर सीने पे चल गई तोँ वोँ वापस नहि आती। पिताजी नें दुःखी हौ केँ अपनी थाली सरका दिया औऱ खानां छोड़ केँ उठगए। उनकादिल दादीमा कि बातों नें छलनीकर दिया थां।
प्रज्ञा पिताजी कों दोषी तौ मानरही थि मगर, दादीमा कां इसतरह कां, बापू केँ संग व्यवहार, कि उम्मीद उसे नहि थि।
बापूचुप चापहाथ धोया, अपने कमरे मे गए औऱ अपनाबैग लेकेघऱ सें बाहर् निकलगए। उन्होंने व्हीकल चालू किया औऱ ऑफ़िस केँ लिए निकलगए।
Beti Bani Sahara – New Episode
यही वो क्षण होगाजब प्रज्ञा पहलीबार अपने पिता केँ दर्द कों अपना दर्द समझकर उसकेबोझ मे शामिल होगी औऱ फिन आहिस्ता वो एक् ऐसे अनैतिक औऱ कामुक रिश्ते कि दलदल मे धंसती चली जाएगी, जिसके बारे मे न् उसकी दादीमा कों कोई आभास होगा औऱ न् हि उसकी बड़ी बेहन कों। ये भयावह सचतब तक पर्दे केँ पीछे छिपा रहेगा, जब तक उसका उभरता हुआपेट खुदइस छिपे अपराध कि गवाही देना न् करदे!
मेरे विचार सें किस्सा केँ दृष्टिकोण सें यही ज़्यादा प्रभावी होगा कि छोटी औऱ बापू केँ बीच कां नाता सबसे छिपारहे!
बहोत सहीढंग सें स्टोरी आगेबढ़ रही हैं।कुछ सुझाव भेजे थें tgm पे गौर करियेगा
Beti Bani Sahara – New Episode
Update: 60 (क्रोध थूकदो )
दादीमा केँ बात कां आघात गहरालगा थां पिताजी केँ दिल पे। उनका ऑफ़िस मे भि मन नहि लगरहा थां। यह कैसी विडंबना हैं कि अपने पत्नि केँ संग भि मिलन करने केँ बाद, अब उनकोऐसे समझरहा थां, जैसे वोँ कोई रेपिस्ट दरिंदा हौ। पिताजी सोचरहे थें : मम्मी नें कितने कड़वी बात कियामुझ सें ? क्याँ अपनी पत्नि केँ संग हमबिस्तर करना इसलिये बापू हौ गय़ा क्योकि वोँ गर्भवती हैं ? प्रज्ञा क्याँ सोचरही होगी मेरे बारे मे ? मम्मी नें कैसी बातेकर दि कि मे घऱ कि सारे महिला कों दबोच केँ सेक्स कर लूंगा ? उन्हें शरम भि नहि आई कि उन्होंने अपना औऱ प्रज्ञा कां नाम लिया?मै ऐसाकभी नहि कर सकता, मां केँ लिये तौ मैऐसा सोच भि नहि सकता, ओर प्राची केँ संग भि मैनेतभी यहसभी कियाजब वोँ मेरी पत्नि बनी, प्रज्ञा केँ बारे नें भि मां नें ऐसा बोला ? प्रज्ञा तौ मेरी बेटी हैं। प्राची पे तोँ मेरे अधिकार हैं, मगर प्रज्ञा केँ संगमै ऐसाकुछ करूंगा तौ मेरे हि मर्यादा केँ खिलाफ होगा।
पिताजी अपने आप् कों इन सवालों केँ जरिए तसल्ली देने कि कोशिश कररहे थें। मगर वोँ कहते हैं नां। जबहवस कि आग लगती हैं तोँ लोग सारे मर्यादा भूल जाते हैं। मर्यादा टूट जाते हैं औऱ कुछऐसा भि आप् कर बैठते हैं जोँ समाज याँ घऱ नें निषेध मनाजा सकता हैं।
उधर प्राची करीब-करीब आज, ११बजे तक सोतीरही, औऱ दावा कां असरकम होने केँ बादउसे उसके योनि मे दर्द कां हल्का हल्का अनुभव होनेलगा थां। वोँ दर्द सें थोडा कराह गई। क्याँ संयोग हौ गय़ा थां यह। एक् बेटी अपने बाप कां बच्चा अपनेकोख नें लम्हा रही थि औऱ हर दर्द कों सहने कों सजधजकर थि अपने पति औऱ बापू कों खुश रखने केँ लिए। प्राची नें बहोत त्याग किया थां।
प्रज्ञा कों प्राची कां ख्याल रखने कों बोला गय़ा थां सो उसने प्राची केँ फ्रेश होने केँ बातउसे ब्रेकफास्ट कराया औऱ फिन दवाइयां दि। दादीमा नें प्राची कों आराम करने कों बोला औऱ प्रज्ञा भि अपने दिदी केँ कमरे नें उनसेसंग बैठी, उसकी मालिश करनेलगी।
प्राची रात केँ बाद अपने आप् पे शर्मिंदा महसूस कररही थि। दादीमा नें उसे दर्द सें तड़पते तब देखा थां, जब वोँ नंगी बापू सें चुदाई करवारही थि। उसेलग रहा थां कि दादीमा उसकेऊपर इसबात कों लेके क्रोध होगी, क्यूं कि उसी नें पाप कों मजबूर किया थां कि बापू उसकी चुदाई करे। मगर दादीमा नें तोँ अपनी स्वयं कि धारणा बना केँ बापू कों दोषी करारदे दिया थां। प्राची उसबात सें अंजान थि कि बापू कों दादीमा नें दोषीमान केँ क्याँ क्याँ सुना दिया थां।
प्राची नें हिम्मत जुटा केँ प्रज्ञा सें पूछ लिया : छोटी, दादीमा मुझसे अधिक क्रोध तौ नहि ? उन्होंने मना किया थां कि बापू केँ संग वोँ करने सें, मगर मैनेकर लिया औऱ आज मेरीयह हालत हौ गई हैं। उसबात कों लेके तौ दादीमा मुझ सें बहोत क्रोध होगी नां?
प्रज्ञा : अरे आपसे क्यूं क्रोध होगी दादीमा, आपका तोँ हालत खराब होँ गय़ा थां। आप् कों शायदकल जल्द हॉस्पिट नहि लें जातेतब तौ बहोत मुश्किल होँ जाते नां। दादीमा तोँ बापू पे क्रोध हैं। उन्होंने आपके प्रेग्नेंट होने केँ बाद भि आपकेसंग ऐसा किया। इसबात सें दादीमा उनसे नाखुश हैं औऱ सबेरे सबेरे बापू कों बहोत सुनाई हैं।
प्राची कों इसबात सें बहोत अश्चर्य हुआ। उसे दादीमा केँ इसबात सें बहोत क्रोध आँ रहा थां। अरे दादीमा ऐसे केसे पिताजी कों दोषीमान लिया, जबपहल तोँ प्राची नें स्वयं हि किया थां। उसी नें तौ बापू सें चुदवाने कि भीख मांगी थि उसदिन।
प्रज्ञा : दिदी, क्याँ पिताजी सच मे आपकोइस तरह सें इस्तेमाल करते हैं ? क्याँ बापू आपकेमना करने केँ बाद वोँ आपको ?
प्राची नें प्रज्ञा केँ नज़र मे पिताजी कि यहछबि देख केँ उसे बहोत बुरालगा, यहसभी दादीमा केँ वजह सें थां।
प्राची : यह तुझसे किसने कहा? बापू मुझे जबदस्ती करते हैं ? तेरा दिमाग़ तोँ ठीक हैं ? पिताजी तोँ मुझे इतना प्रेम करते हैं कि शायद हि किसी पत्नि कों कोई इतना प्रेम करे। उनकेसंग हररात एक् नया अनुभव, एक् नया एहसास होता हैं मुझे। दादीमा पिताजी कों दोषी केसेमान सकती हैं ? पिताजी नें तौ दादीमा केँ कहने केँ बाद हि मेरेसंग संयम बरतने लगे थें। वोँ तोँ मै थि, जोँ गर्भ नें उनका बच्चा पलने केँ बाद भि उनसे जुदा नहि रहपाई।
प्रज्ञा : यह आप् क्याँ कहरही हौ दिदी ? बापू नें आपको अपनीहवस मिटाने कि लिए जबदस्ती नहि किया ?
प्राची : नहि बाबा, वोँ तौ मै थि जोँ पिताजी केँ प्रेम केँ लिए १५-१६ दिनों सें तरपरही थि। मेरा कंट्रोल तौ मेरे वासना सें 5 दिन मे हि ख़त्म होँ गय़ा थां। बापू कों मैने करीब-करीब 10 दिनों तक रिझाया तबजा केँ इनका संयमतोड़ पाई। तुँ तौ जानती हि हैं नं मेराहाल क्याँ हौ गय़ा थां ?
प्रज्ञा : अच्छा दिदी, तभी आप् उसदिन मेरे मालिश करने सें हि बह गई थि ? आप् उसदिन हवस कां शिकार बन गई थि नाँ?
प्रज्ञा : बदमाश तुम कोयहसभी किसने बता दिया, कि मे उसदिन बह गई थि ? हाँउस दिन तूने देखा हि होगामै कितनी प्यासी थि ? तेरे बापू केँ बिना मेरा क्याँ हाल थां ? उन्होंने तौ अपने आप् पे काबूरखा हुआ थां। वोँ तौ मै थि जिसके अंदरआग लगी हुइ थि। फिन दादीमा बापू पे इतनेगलत आरोप केसेलगा दि? मुझे दादीमा कि इसबात पे बहोत क्रोध आँ थां हैं। बापू कों दोषीमान लिया उन्होंने।
प्राची कां क्रोध, जोँ उसे बापू पे आँ रहा थां, वोँ उतर गय़ा, औऱ अबउसे दादीमा पे क्रोध आनेलगा। दादीमा नें बिना जाने, बिना पूछे हि, बापू पे इतना घिनौना आरोपलगा दिया कि प्रज्ञा कों भि, एक् समय केँ लिए बापू सें नफ़रत सि हौ गई थि। मगर बापूऐसे नहि थें। यह तौ दिदी थि, जिसके हवस कों बापू मिटारहे थें।
प्रज्ञा : तेरे पिताजी??? अच्छा जी, कल तक तौ आपके भि पिताजी वही थें नां दिदी। आज वोँ "तेरे पिताजी" होँ गए ? वोँ तौ आपके भि बापू हि हैं नां ?
प्राची : अब तोँ वोँ मेरे पिताजी सें बढ़ केँ भि कुछओर भि हैं। वोँ तेरे जीजाजी औऱ मेरे पति हैं प्रज्ञा। अबजब मे उनकाबीज अपनेकोख नें पालरही हु तौ हमारा नाता बाप बेटी कां नहि, एक् पति पत्नि कां हैं। पता हैं तुम्हे प्रज्ञा, पिताजी बहोत प्रेम करते हैं मुझे। उनका प्रेम करने कां अंदाज सबसेअलग हि हैं।
प्रज्ञा : सच दिदी बापू इतना प्रेम करते हैं आपसे ? हांयह बात भि सही हैं कि अब तोँ वोँ आपके पति हैं तोँ पिताजी केवल मेरे हि हुए नां।
प्राची : हां प्रज्ञा, बापू मुझे बहोत प्रेम करते हैं। उनका वोँ मर्दाना अंदाज। वोँ प्रेम करने तरीका, वोँ मेरी छोटी छोटी बातों पे इतना ध्यान रखना, अरे।, मै तौ उनपे पूरी लट्टू हि होँ जातीहु।
प्रज्ञा प्राची कि बातेसुन केँ गर्म होनेलगी। उसे अपने पिताजी केँ बारे नें उसके दिदी सें सुन केँ बहोत अच्छा लगरहा थां। ओरपता नहि वोँ थोड़ी शर्मा भि रही थि। सबेरे जौ उसे बापू पे क्रोध चढ़ा थां, उसको प्राची नें पूरा हि बदल दिया थां। प्राची केँ बातों सें लगता थां कि पिताजी कि तोँ कोई गलती हौ नहि थि इससभी मे, औऱ बापू तोँ इतने स्वीट हसबैंड हैं कि प्राची उनसे प्रेम कि भीख मांगती हैं।
वोँ पिताजी केँ प्रेम करने केँ अंदाज जानने केँ लिए उत्सुक हौ उठी।
प्रज्ञा : दिदी, सच मे पिताजी, इतने अच्छे हैं ? क्याँ क्याँ करते हैं वोँ ओर आपकोखुश करने केँ लिए ?
प्राची अपने पति बने बापू कि बरई करतेथक नहि रही थि : हां मेरी छोटी, बापू कां प्रेम, मतलब, ओह, मजा हि खुशी। वोँ इतनी प्यारी बाते करते हैं नां मुझ सें कि मुझ लगता हैं मेरी उनसे विवाह नहि भि हुई रहती औऱ वोँ मेरे पिताजी हि होते। फिन भि मै इनसे प्रेम करती औऱ उनकेसंग रात बीतती। इतने अच्छे हैं वोँ। ओरपता हैं प्रज्ञा, जब वोँ बैड पे मेरेसंग होते हैं नाँ। तब तोँ मे अपना सारा शुद्ध बुद्ध खो जाती हूं। वोँ करते हि इतना मस्त हैं।
प्रज्ञा : क्याँ मस्त करते हैं दिदी? आपकी चुदाई ?
प्रज्ञा कां यूखुल केँ प्रश्न पूछने सें प्राची कों क्रोध नहि आया, वोँ एकदम सें शर्मा गई। औऱ नज़रे नीचीकर केँ, मुस्कुराते हुए बोलीं: हम्ममम.छोटी मै तुझेही बता भि नहि सकती कि कितना आनंदआया हैं। प्लीज तुँ यहसभी कही बोलेगी तौ नहि नाँ ?
प्रज्ञा : अरे दिदी मै किसको बोलूंगी, घऱ मे तोँ अब जानते हि हैं कि बापू केँ संगरात कों आप् क्याँ करते थें।
प्राची बस शर्मा केँ रह गई।
प्रज्ञा : दिदी, एक् बात पूछू?
प्राची : हांपूछ नाँ।
प्रज्ञा : दिदी, क्याँ इतना मज़ाआता हैं सेक्स करने मे। पिताजी क्याँ क्याँ करते हैं आपकेसंग ?
प्राची हँसती हुइ: हाहा.हां मेरी छोटी बहना, बहोत मजाआया हैं, औऱ पिताजी तौ बस पूछोमत क्याँ क्याँ करते हैं, यह पूछो कि क्याँ क्याँ नहि करते हैं। जब वोँ मेरे अंदर अपना मूसल डालते हैं नाँ तौ बहोत खुशी मिलता हैं। औऱ बापू कां स्पेशल बातयह हैं कि, वोँ कच्चे खिलाड़ी नहि हैं, कार बहोत देर तक दौड़ते हैं।
प्रज्ञा : मतलब दिदी, पिताजी आपको बहोत देर तक चोदते हैं ?
प्राची : क्या बात है शैतान, अपने मां सें ऐसेबात करती हैं।
प्रज्ञा : हाहा.यह मम्मी कभी मेरी दिदी हुआ करती करती थि। जोँ बापू केँ मूसल लेने केँ बाद मेरी मां बनी हैं, यहमत भूलिए।
प्राची : चुपकर शैतान।
प्रज्ञा : दिदी, सच मे बताओ नां, बापू कां बहोत मोटा हैं क्याँ कि कलरात आपकी वोँ हालत हौ गई ? मैनेआज तक किसी पुरूष कां देख भि नहि हैं कि वोँ होता कैसा हैं ?
प्राची : नहि, अब तुझेही मैयहसभी कुछ नहि बताने वाली, तुम्हे शरम नहि आती, बापू केँ बारे नें ऐसी बातें करती हैं। ओर विवाह होगी तेरी तौ स्वयं देख लेना कैसा होता हैं। मै नहि बतारही तुम को बापू कां साइज। लज्जा केँ वोँ तेरे बापू हैं।
प्रज्ञा: अच्छा दिदी, यहसभी बातों कि शुरुआत किसने कि थि ?
प्राची: वोँ तोँ तुमलोग बापू केँ नियत औऱ कैरेक्टर पे प्रश्न उठारहे थें, इसलिये मैनेयह सभी बताया, कि वोँ मुझ सें कितना प्रेम करते हैं। औऱ दादीमा नें कितना गलत किया उनकेसंग।
प्रज्ञा : हां दिदी, दादीमा नें तौ ऐसीबात बोलि बापू कों कि वोँ तौ खानां छोड़ केँ हि चल दिये ?
प्राची : अरे, ऐसा क्याँ कह दिया ?
प्रज्ञा : उन्होंने बापू कों बोला, कि वोँ आपकोऐसे रातरात भर भोगते रहते हैं, उनकाहवस इतना जायदा हैं कि वोँ तुम्हे क्याँ, मौकापा केँ दादीमा औऱ मुझे भि दबोच लेंगे।
प्राची यहबात सुनते हि आग बबूला हौ गई। यह क्याँ बोला दादीमा नें ? छी.पिताजी कों वोँ इतना घटिया समझरही हैं। प्राची कां क्रोध सें मुंहलाल हौ गय़ा। वोँ एकदम तमतमा गई। उसके पति पे किसी नें इतना गंदा आरोपलगा दिया थां।
प्रज्ञा : प्लीज दिदी, इतना क्रोध मत होँ, तुम्हारे सेहत केँ लिएठीक नहि।
प्राची : क्रोध नाँ होय, मेरे पति पे कोई इतना गंदा आरोपलगा देओरमुझ क्रोध नां आए। नहि प्रज्ञा, पिताजी ऐसाकभी नहि कर सकते, क्याँ दादीमा कों अपने बेटे पे बिस्वास नहि हैं। क्याँ दादीमा कों यह नहि पता कि मे उनको पत्नि हूं औऱ वोँ कही बाहर् किसी रण्डी कों नहि पेल केँ आँ रहे। दादीमा नें ऐसा बोला भि केसे।
प्रज्ञा प्राची कों शांत करनेचाह रही थि : प्लीज दिदी, इतना क्रोध तेरे हैल्थ केँ लिएठीक नहि, प्लीज क्रोध थूकदो, दिदी।
प्राची : नहि प्रज्ञा, दादीमा कों बताना बहोत जरूरी हैं, तुँ चल मेरेसंग, अभि मै दादीमा सें बात करतीहु। उन्होंने इतनी घिनौने बात केसे बोलीं बापू केँ लिए।
प्रज्ञा : अरे दिदी, आप् अभि आरामकरो, प्लीज।
प्राची: नहि प्रज्ञा, तूँ चल।
प्राची लहराते हुएहुए दादीमा केँ कमरे मे चल दि। पीछे पीछें प्रज्ञा भि दिदी कों सहारा देतेहुए संगचल दि।
अगलाभाग जल्द हि।
Beti Bani Sahara - Continue reading for full story
भइया, क्याँ शानदार अनुभव थां! नएभाग कां इंतजार हैं। प्रज्ञा बापू केँ लिएअब दीवानी होगी प्रेम मे
भइया, क्याँ शानदार अनुभव थां! नएभाग कां इंतजार हैं। प्रज्ञा पिताजी केँ लिएअब दीवानी होगी प्रेम मे
Relavant source : click here