Beti Bani Sahara – New Episode
भइया, इस शानदार एपसोड केँ लिए शुक्रिया। प्लीज़ प्रज्ञा औऱ बापू केँ सीक्रेट अफ़ेयर केँ बारे मे लिखें—कि केसे पिताजी प्रज्ञा कों अपनी गर्लफ्रेंड बनाते हें, वेमजा करते हें औऱ दादीमा व प्राची सें छिपकर सेक्स करते हें।
भइया आपने तोँ टेंशन दे दिया.भाग केँ लिए शुक्रिया.अगले एपसोड कां प्रतीक्षा हैं.ज़्यादा दिनों टेंशन मत देना
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 57 ( प्राची कां दर्द)
अब दोनों पति पत्नि नें तयकर लिया थां कि जमाना जौ भि कहे, परिस्थिति कोई भि होँ, वोँ सेक्स सें वंचित नहि रहना चाहते थें। प्राची औऱ पिताजी कां आजरात कां मिलन इसकी गवाही थि कि उन्होंने दादीमा औऱ डॉक्टर दोनों कि बातों कों ताख पे रख, अपनेलिए, अपने सुविधा केँ अनुसार, कामाग्नि शांत करने कां तय किया थां। दोनों नें अपनेबदन कि भूख कों मिटाना अधिक आवश्यक माना थां।
खैर एक् बात तोँ हैं, आपको जौ नहि करने कों कहाजाए, औऱ अगर आप् वोँ हि काम करते हैं, तोँ उसकी खुशी हि दूसरी होती हैं। नियम मे रहनाकभी कभी आपकी आजादी छिन लेने जैसे होता हैं।
आज कि चुदाई उन दोनों कों एक् अलग हि तृप्ति प्रदान कर चुका थां। चरमसुख केँ चरम पऱ पहुंच केँ उन्हें बहोत खुशीआया औऱ अब निढाल होके दोनों सोगए थें। मगर एक् बातयह हैं कि नियम तोड़ने मे मज़ा तोँ आता हैं, मगर पकड़े जाने पे सजा भि वैसी हि मिलती हैं। बापू औऱ प्राची कि यह गलती उनके जिंदगी मे एक् नया तूफान लाने वाला थां। अबउसघऱ मे सभी कां जिंदगी बदलने वाला थां।
उसरात केँ बात बापू औऱ प्राची केँ बीचहर रात हि यौन संबंध बननेलगे थें। पिताजी यह जरूर ध्यान रखते हि प्राची कों पेट पे कोईबल नां परे याँ कोई नुकसान नाँ हौ। वोँ सारी पाबंदियों कों बसयहबोल कर तोड़दे रहे थें, कि डॉक्टर सुषमा नें उन्हें कहा थां, २ महीने वोँ लोग आराम आहिस्ता सेक्स कां मज़ा लें सकते हैं। बसइसबात कों बापू नें अपनाढाल बना केँ प्राची कों हररात लगातार भोगने लगे। उधर प्राची केँ चुत मे अगर पिताजी कां लौड़ा नहि जाता थां किसी वोँ दिन तोँ वोँ बेकाबू सि होँ जाती थि। उसके योनि मे तेज़ खुजली सि होने लगती थि। शायद प्राची पिताजी कि आदि होँ चुकी थि, वोँ भि सिर्फ विवाह केँ ३-४ महीने मे हि।
उधर दादीमा कों इसबात कि कोई इल्म हि नहि थां कि उसकी पोती कों उसका बेटा हररोज़, रात कों, चुदाई कर हि रहा हैं, उनकेमना करने केँ बाबजूद।
दादीमा कि साफसाफ हिदायत यही थि कि, प्राची कि किसी भि प्रकार कां चुदाई नहि होना चाहिए, अगले 9 महीने तक। उन्हें लगता थां कि, अबजब प्राची केँ गर्भ मे उनके परिवार कां आने वालाबीज लम्हा रहा हैं, तोँ उसे उनका बेटा प्राची कि योनिचोद कर, प्राची कि योनि कों गंदा नाँ करदे। इसबात कि हक़ीकत सें दूरदूर तक कोई भि वास्ता नहि थां। बहोत सि प्रेग्नेंट स्त्री, बच्चे कों गर्भ मे धारण करने केँ बाद भि अपने पति सें चुदाई जरूर करवाती हैं। सेक्स तोँ एक् बदन कि आवश्यक मांग हैं। मगर दादीमा पुराने ख्यालों कि थि। जौ पिताजी आर प्राची पे भारी पऱ गय़ा थां। मगर दादीमा कि बात कों नाँ मानते हुए बापू नें प्राची कि चुदाई करना शुरुआत कर हि दिया थां। दादीमा, प्राची कों भि वक्त वक़्त पे, संयम बरतने कि पेशकश करती हैं। मगर उन्हें क्याँ पता थां कि प्राची तोँ हररात उनके बेटे कां लिंग अपने योनि मे लिए बिना सोती हि नहि हैं।
खैर मामला ऐसे हि चल पड़ा। प्राची बहोत खुश थि। कहते हैं, जब स्त्री प्रेगनेंट हौ तोँ उसे बिल्कुल हि खुश रहना चाहिए तौ होने वाले बच्चे पे अच्छा असर करता हैं। औऱ प्राची कि खुशी तोँ अब पिताजी केँ नीचे नंगी लेटने मे हौ थि।
इसबात कों अब 16 दिन होने कों आया थां, यानी प्राची कां गर्भ धारणकिए अब डेढ़ महीना होँ चुका थां। एक् रात बापू प्रज्ञा केँ संग सहवास मे आँ गए थें औऱ उनकेबीच सेक्स कि शुरुआत हुइ। रात मे बापू नें प्राची कों हररात कि तरह, आज भि आराम आहिस्ता चोदरहे थें। पिताजी प्राची केँ चुत पे, डॉगी स्टाइल मे, हल्की हल्की ठापमरे जारहे थें, औऱ दोनों अपने अपनेचरम सुख केँ ओर अग्रसर थें।
प्राची केँ बाल खुले थें औऱ पिताजी साथजम केँ मज़े लेँ रही थि। पिताजी कां भि जोस बढ़ताजा रहा थां। वोँ मज़े सें अपनी पत्नि कों भोगरहे थें। माहौल मे जबरदस्त गर्मी आँ गई थि।
मगरइस चुदाई केँ दौरान पिताजी सें एक् गलती होँ गई। उन्होंने जोश मे भरकरहोश खो बैठा, औऱ प्राची केँ चुत पे सख्ती सें ठाप लगनेलगे। वोँ शायदभूल गए कि प्राची एक् प्रेगनेंट लड़की हैं, जिसे वोँ अब अपने बेरहम धक्कों सें भोगने लगे थें।
बापू नें जोश मे आके प्राची कां एक् टांग कों अपने हाथों केँ सहारा दे केँ उठा दिया औऱ डीपडीप, योनि कां गहराई तक समाने लगे। टांग उठाते हि प्राची कां चुत पूरीतरह सें खुल गय़ा औऱ बापू केँ लिंग कां दस्तक सीधा प्राची केँ बच्चेदानी दरवाज़ा पे होनेलगा, जहाँ उनका बच्चा अब पलना शुरुआत हुआ थां। पिताजी करीब-करीब झरने हि वाले थें कि, इनकेतेज़ धक्का लगने कि वजह सें प्राची केँ योनि मे, अचानक सें, बहोत तेज़ कां दर्द होनेलगा, वोँ एकदम सें चिहुकी औऱ दर्द केँ मारेरो परी। वोँ आगे कि ओर, झटके सें होँ गई, जिससे बापू कां लंड पक्क। कि आवाज़ सें बाहर् निकल गई औऱ प्राची सीधाबेड पे गिर केँ छटपटाने लगी। उसकी हालतठीक नहि दिखरही थि औऱ उसके आँखों सें अब आँसू गिरने लगे। वोँ दर्द सें कराहउठी। बापू कों अचानक सें हुएइस घटना केँ बादयाद आया कि उन्होंने क्याँ गलतीकर दि हैं?
उन्होंने प्राची कों एक् नॉर्मल लड़की जैसे, ज़ोर ज़ोर सें धक्का लगा केँ चोदने लगे थें। उनकी चेहरे कि हवाइयां उतनेलगी। वोँ अनायाश हि, एक् अनहोनी कि आशंका सें, भीतर तक दहलगए। यह क्याँ कर दिया उन्होंने ? डॉक्टर साहिबा नें क्याँ कहा थां ? औऱ उन्होंने यह क्याँ कर दिया ?
बापू एकदम स्तब्ध रहगए। उनका लिंगडर केँ मारे तुरन्त हि सिकुड़ केँ छोटा हौ गय़ा। वही प्राची, नंगीबेड पे पड़ी, दर्द सें छटपटा रही थि। औऱ बेतहाशा रोयेजा रही थि। उसके रोने कि आवाज़ बाहर् तक जारही थि। वोँ तौ रात बहुत हौ चुकी तोँ दादीमा औऱ प्रज्ञा दोनों अपने अपने कमरे मे, गहरी नींद मे सोरहे थें।
पिताजी प्राची कों सांत्वाना देने कि कोशिश करतेहुए : अरे मेरी रानी कों क्याँ हौ गय़ा ? क्याँ हुआ बाबू ? बाबू? बताओ नां ? क्याँ हुआ ? मुझे बहोत घबराहट हौ रही हैं प्राची ? बता नाँ बेटी, तुँ ठीक तोँ हैं नाँ ?
प्राची ( बेतहाशा रोतेहुए ) : अआह्ह्ह.बापू, बहोत तेज़ दर्दउठ रहा हैं मेरे योनि मे, ऐसालग रहा हैं मैयहसह नहि पाऊंगी पिताजी। मेरे बच्चेदानी मे दर्द हौ रहा हैं। पिताजी.हाय.
पिताजी: क्या बात है राम, यह मेरी बेटी कों क्याँ हौ गय़ा ? बेटी गहरी सांसलो औऱ अपना ध्यान उस दर्द सें थोडा भटकाऊ, तुम्हे शायद थोडा सहीलगे।
प्राची अपना पऱ पकड़े बस रोयेजा रही थि। उधर दादीमा कों भि अब प्राची कि रोने कि आवाज़, कानों तक पहुंच चुकी थि। उनका नींदखुल गय़ा औऱ प्राची कि रोने कि आवाज़ सें उनकामन विचलित हौ गय़ा।
उधर बापू कों इस समस्या सें निपटने कां कोई उपाय नहि सूझरहा थां। उन्होंने प्राची केँ चुत केँ सामने अपना मुंह लें जाकर, योनि पे थोडा फूंकने लगे। शायद इससे प्राची कों कोई राहत मिले। मगरऐसा कुछ नहि हुआ। उसका दर्द बढ़ता हि जारहा थां। बापू नें चुत पे गौर किया तौ देखा कि प्राची केँ योनि सें हल्का हल्का खून कां रिसाव भि होँ रहा हैं। पिताजी समझगए, कि मामला आसानी सें संभलने वाला नहि लगरहा। वोँ झट सें अपना सारा कपड़ा पहनने लगे, औऱ उसकेबाद जल्द सें किचेन सें पानी कां बोतल लेँ केँ आए औऱ प्राची कों पीने कों बोला, वोँ उठीओर सुबकते हुए, पानी कां २घुटपी पाई औऱ फिनपेट पकड़ केँ बैठ गई। वोँ अभि भि पूरी नग्न अवस्था मे थि। बापूसमझ गए कि आज बुराफंस गए। इतना हंगामा सुन केँ तौ मां भि जग गई होगी।
इतने मे हि दादीमा, कमरे मे आँ पहुंची। दादीमा कों कमरे कां दृश्य देख केँ थोडा सदमा सां लगा। उन्होंने अपने पोती कों नंगी, पेट पकड़े, बेड पे तड़पता हुआ पाया। पास हि बापू पानी कां ग्लास लिए, चकित मुद्रा मे खड़े थें। दादीमा नें प्राची केँ योनि केँ तरफ देखा औऱ उन्हें योनि दरवाज़ा सें खूनलगा दिख गय़ा। वोँ अब सारा मामला समझ गई। वोँ जल्द सें बेड केँ पासआई औऱ सबसे पहले पिताजी केँ गाल पे एक् रसीद केँ चांटा जड़ दिया। बापू एकदमसर झुका केँ खरे होँ गए। आज दादीमा नें बापू पे, करीब-करीब वर्षों बादहाथ उठाया थां।
दादीमा : यह क्याँ किया तूने ? तेरे अंदरकोई सब्र हैं कि नहि ? बेटी हैं तेरी वोँ, कोई रांड़ नहि। हवसी दरिंदा कही कां। मैनेमना किया थां नाँ कि अपने पत्नि कां ख्याल रखना औऱ अभि संभोग मत करना, उसका पहला बच्चा हैं यह औऱ उमर भि कच्ची हैं। तूनेआज मुझे बहोत शर्मिंदा कर दिया हैं। तुँ मेरा बेटा केसे हैं, मुझेसमझ नहि आता। देख मेरी बच्ची केसे नंगी हि तड़परही हैं। हायरे राम, इसके योनि सें खून निकलरहा हैं। क्याँ किया तूनेयह ?
पिताजी केँ पासकोई जवाब नहि थां।
दादीमा गुस्से मे बोलि जारही थि : अरे निर्लज्ज, इतना भि नहि पता, कि तेरेकुछ देर केँ मज़े केँ चक्कर मे कही प्राची यह बच्चा नाँ खोदे। बच्चा गिर गय़ा तोँ, उतना भि ख्याल नहि आया तुम को ? क्याँ हालत केँ दिया हैं तूँ इसकी ? कैसी छटपटा रही हैं बेचारी। कहीकोई अनहोनी तौ नहि हौ गय़ा ? बच्चे कों तोँ कुछ नहि हौ गय़ा ?
दादीमा चिंता सें दहलउठी। उन्होंने तुरन्त हि अपनाहोश संभाला औऱ पिताजी सें बोला : अबखरा मुंह क्याँ देखरहा हैं, प्राची कों जल्द सें हॉस्पिटल लेँ जानां होगा। नहि तोँ बहोत देर होँ जाएगी। जल्दकर। जल्दचल हॉस्पिटल।
पिताजी कों दादीमा केँ बात मे एक् उम्मीद कि किरण दिखी औऱ वोँ झट सें अपने मोबाइल केँ तरफबढ़े। वही दादीमा नें झट सें प्राची कों कपड़े पहनने लगी। दादीमा कों अपने बेटे पे अभि बहोत ज़्यादा क्रोध आँ रहा थां। वोँ सोचरही थि कि, उनकेमना करने केँ बाद भि, उनका बेटा उनके पोती केँ संग सेक्स करना नहि छोड़ा। कैसा नालायक हैं ? कैसा बेदर्द हैं? यह छोटी हैं अभि यह तोँ उसे भि पता हें नाँ? फिन भि मेरे बातों कों नजरअंदाज कर केँ इसकेसंग संभोग केँ रहा थां। छीह.
बापू नें कॉलआई लगाया हॉस्पिटल मे औऱ इमरजेंसी केस होने हि खबर दि औऱ रेस्प्शनिस्ट कों बोला कि वोँ जल्द सें डॉक्टर सुषमा कों अस्पताल मे मौजूद होने हौ बोले, वोँ पेशेंट लेके जल्द हि अस्पताल पहुंच रहे हैं।
प्राची अभि भि सुबक सुबक केँ रोयेजा रही थि। उसे पेरु मे दर्द हौ रहा थां। दादीमा उसे साहस सें काम लेने केँ लिएबोल रही थि, इतने मे प्रज्ञा भि दौड़ते हुए कमरे मे आँ पहुंची। तब तक प्राची कों दादीमा नें कपड़ा पहना दिया थां।
प्रज्ञा : दादीमा, क्याँ हौ गय़ा ? दिदी इतनारो क्यूं रही हैं ?
दादीमा : कुछ नहि बेटी, दिदी कों अचानक सें दर्दउठा हैं पेट मे, हम् हॉस्पिटल जारहे हैं अभि।
प्रज्ञा घबरा गई : अरे दादीमा, यह केसेहुआ ? दिदी आप् ठीक तोँ होँ ? दादीमा दिदी ठीक तौ हौ जाएगी?
दादीमा : तूँ फिक्र मत केँ, अब डॉक्टर सें दिखाएंगे, अबठीक होँ जाएगा।
प्रज्ञा केँ मन मे हजारों प्रश्न घूमरहे थें। कि यह क्याँ होँ गय़ा दिदी कों ? वोँ इतना क्यूं रोरही हैं ? क्याँ उन्हें बच्चे कि वजह सें कोई प्रोब्लम हुइ हैं ? पऱ प्रज्ञा कों जवाबकोई मिल नहि रहा थां।
तब तक बापू भि आए औऱ बोले : ओके, मां जल्द चलिए। औऱ पिताजी अपने गराज सें व्हीकल निकालने चलेगए।
दादीमा गुस्से मे उनकेतरफ बिना देखेहुए हि उनके पीछेचल दि।
प्रज्ञा भि संग जानेलगी। तौ दादीमा नें बोला : तूँ कहाजा रही, हम् लोग हॉस्पिटल जारहे दिदी कों दिखाने।
प्रज्ञा : नहि दादीमा, मै भि चलूंगी। नहि तोँ दिदी कोई क्याँ हुआसोच सोच केँ ये परेशान रहूंगी।
दादीमा नें प्रज्ञा कों मना नहि किया इसबार। दादीमा नें घऱ कां गेट ताला लगाकर बंद किया। वोँ दोनों प्राची कों कंधे केँ सहारे लेँ जा केँ, पिताजी केँ कार मे बैठगए। प्रज्ञा, बापू केँ संगआगे बैठ गई। वही प्राची कों दादीमा नें पीछे कि सीट मे लिया दिया औऱ उसकासर अपने हाथों मे लेके अपनेगोद मे रख लिया।
बापू नें जल्दीबाज़ी मे कार, डॉक्टर सुषमा केँ हॉस्पिटल कि तरफ, तेजी सें बढ़ा दि।
अगला एपसोड जल्द हि। शुक्रिया।
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Update 58 (सेक्स निषेध)
बापू व्हीकल तेज़भगा रहे थें। दादीमा प्राची कों ढाढ़स बांधा रही थि, कि हॉस्पिटल पहुंचते हि सभीठीक होँ जाएगा। वही प्रज्ञा, पिताजी केँ बगल मे बैठे अभि भि यह सोचने कां कोशिश कररही थि कि, आखिरयह हुआ क्याँ दिदी कों?
जल्द हि पिताजी कि व्हीकल हॉस्पिटल केँ पार्किंग मे पहुंच चुकी थि। यह मार्ग छोटा थां मगर थोडा कठिन बिता थां परिवार केँ लिए। हॉस्पिटल पहुंचते हि पिताजी नें रिसेप्शन पे पूछा : जीमै राजेश कुमार शर्मा हु, मैने आपको मोबाइल किया थां। क्याँ डॉक्टर सुषमा आँ गई हैं ?
रिसेप्शनिस्ट नें बोला : जीसर, अपनेजब बोला थां उसी वक़्त मैने डॉक्टर साहेब कों बोल दिया थां। वोँ आँ चुकी हैं औऱ अपने कैबिन मे आपका प्रतीक्षा कररही हैं।
पिताजी: जी शुक्रिया।
पिताजी औऱ प्रज्ञा प्राची कों पकड़ केँ डॉक्टर केँ केबिन मे लें गए, वोँ दर्द केँ कारणचल भि नहि पारही थि। दादीमा अभि भि बापू पे बहोत क्रोध थि। वोँ भि पीछे पीछे केबिन मे चलेगए।
डॉक्टर सुषमा : आइये शर्मा जी। इतनीरात कों क्याँ समस्या हुई ?
बापू औऱ प्राची डॉक्टर केँ सामने लगे कुर्सी पे बैठगए, दादीमा औऱ प्रज्ञा पीछेलगे सोफे पे बैठे। प्राची अभि भि हल्की रुआंसी चेहरे केँ संग हि बैठी थि।
बापू नें डॉक्टर कों अपनी समस्या बताई: डॉक्टर मैडम, हुआयह कि, प्राची कों अचानक सें उसके योनि मे दर्द होनेलगा थीरेदेर पहले, जोँ कि बहोत तेज़ होँ रहा हैं।
डॉक्टर: ओह, केसे शुरुआत हुआ दर्द, जरा डिटेल मे बताइए।
पिताजी थोडा शर्मिंदा होँ गए, क्योंकि पीछे उनकी मां औऱ छोटी बेटी बैठ उनकी बातेसुन रहे थें। पिताजी कि झिझक डॉक्टर नें समझ लिया औऱ फिन बापू सें बोला : यह दोनों कौन हैं ?
पिताजी: यह मेरी मम्मी हैं, औऱ यह मेरी बेटी, पहली पत्नि सें।
पिताजी डॉक्टर कों उम्मीद सें ऐसेदेख रहे थें कि कब वोँ वोँ उन दोनों कों बाहर् जाने कों बोले।
डॉक्टर सुषमा नें दादीमा सें बोला : आंटी नमस्कार, क्याँ आप् औऱ यह बच्ची दोनों थोड़े वक्त केँ लिए बाहर् जा सकते हैं। हमारी पॉलिसी हैं कि कपल कि समस्या कों हम् गुप्त रूप सें हि डील करते हैं। आप् यहा रहेगी तौ शायद आपके बेटे अपनी समस्या सही सें मुझे समझा नहि पाएंगे।
दादीमा : डॉक्टर मैडम, मै इसकी मम्मी हि, मुझ सें इसकाकोई बात छुपा नहि हैं। मुझसे क्याँ शर्माना।
डॉक्टर: फिन भि आँटी, यह बच्ची भि तौ हैं। इसके सामने इसके पापा इनसभी बातों कां जिक्र शायद नां करपाए।
दादीमा : ठीक हैं, कोईबात नहि हम् बाहर् इंतजार कर लेते हैं।
दादीमा औऱ प्रज्ञा बाहर् चलदिए। प्रज्ञा केँ मन मे एक् हि प्रश्न थां : दिदी केँ योनि मे दर्द केसेहुआ ?
डॅाक्टर सुषमा: जी शर्मा जी, अब बताइए, क्याँ हुआ प्राची जी कों ?
डॉक्टर प्राची सें नहि पूछरही थि क्यूं कि वोँ बताने कि स्तिथि मे लग नहि रही थि औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे रोयेजा रही थि।
पिताजी: डॉक्टर मैडम, मुझेमाफ कर दीजिए, अपनेहमे सेक्स मे परहेज करने बोला थां, हमने 16 दिनों तक सेक्स नहि किया। मगर हम् अपने आप् कों रोक नाँ पाये औऱ कुछ दिनों सें सेक्स कररहे थें। सभी नॉर्मल होँ जारहा थां। हरदिन कि दिक्कत नहि आँ रही थि। पर्र आज जैसे हि हम् सेक्स कररहे थें, प्राची केँ योनि मे बहोत तेज़ दर्द होनेलगा, तब सें रोरही हैं, औऱ हम् उसकेबाद इससे आपकेपास लाये हैं।
डॉक्टर नें कुछ भि कहा नहि औऱ पिताजी कों एक् बार गुस्से मे घुड़ केँ देखा। फिन बिनाकुछ कहे प्राची कों प्रेसिजन रूम मे लेकेचली गई। पिताजी वही परेशान सें बैठें हुए थें। उन्हें ऐसालग रहा थां जैसे वोँ किसी कां रेप केँ दिये होँ औऱ अब उनकोअब मुजरिम मानरहा हौ।
बाहर् प्रज्ञा नें दादीमा सें प्रश्न पे प्रश्न दाग़ दिये : दादीमा, यह क्याँ होँ रहा हैं ? दिदी कि ऐसी हालत केसे होँ गई हैं ? इतना दर्द क्यूं हौ रहा हैं उनको कि जल्दी उनको डॉक्टर केँ यहा लेके आनां पड़ा ?
दादीमा गुस्से मे तिलमिलाई हुइ थि। मुझ सें क्यूं पूछरही हौ ? अपने बापू सें पूछो, वही बताएगे।
प्रज्ञा दादीमा कां ऐसा क्रोध पहलीबार देखरही थि।
प्रज्ञा : पर्र दादीमा वोँ तौ अंदर हैं। बताओ नाँ। मै बच्ची थोड़े हि कि नहि समझूंगी। क्याँ दिदी कां बच्चा गिर गय़ा हैं ?
दादीमा बच्चा गिरने कि बात सें थोडा दुःखी होँ गई : नहि नहि बेटी, ईश्वर न् करेऐसा कुछ हौ। वोँ बच्चा तोँ इसघऱ कां चिराग हैं। ऐसा नहि होगा। अब बांकी तोँ डॉक्टर साहिबा हि बताएगी।
प्रज्ञा : हां दादीमा। आप् टेंशन मत लीजिए अबठीक होगा। मगर दादीमा बताइए नं दिदी कों इतना दर्द अचानक सें केसेहुआ।
दादीमा थोडा घबरा केँ बोलि : बेटी, मैने पहलेदिन, जब प्रज्ञा मां बनी थि उसीदिन हि तेरे बापू कों दिदी केँ संग चुदाई करने सें मना किया थां। पर्र पता नहि तेरे बापू शायद नहि माने, औऱ आज चुदाई केँ दौरान हि प्राची कों योनि मे बहोत तेज़ दर्द शुरुआत हौ गय़ा।
प्रज्ञा एकदम स्तब्ध सि रह गई। वोँ भि आज तक यहीसोच रही थि कि दिदी अब सेक्स मे इंवॉल्व नहि हौ रही बापू केँ संग, जब सें वोँ प्रेग्नेंट हुइ हैं। मगर पिताजी नें उसे नहि छोड़ा। मगरऐसा क्यूं किया पिताजी नें दिदी केँ संग ?
प्रज्ञा चुपचाप वही शांति मैबैठ गई। उसे बापू सें ऐसी उम्मीद नहि थि। उसे भि अपने बापू पे क्रोध आँ रहा थां।
करीब-करीब १ घंटेबाद डॉक्टर नें, अपने नर्स कों बोल केँ, प्रेसिजन रूम मे हि, पिताजी कों बुलाया। बापूरूम मे पहुंच गए। उन्होंने देखे कि प्राची कां सलवार खुलाहुआ थां औऱ वोँ नीचे सें नंगी प्रेसिजन टेबल पे टंगे खोले लेती हुईँ थि। उसकी आँखेबंद थि। मगरअब छटपटा नहि रही थि।
डॉक्टर सुषमा पिताजी सें : मिस्टर शर्मा, मैने आपको सेक्स करने केँ नियमों कों लेके क्याँ कहा थां ? याद हैं ?
बापू:जी, याद हैं डॉक्टर मैडम, अपने बोलातन कि हम् दोनों कों सेक्स अभि अवॉइड करना चाहिए औऱ अगर कारण भि हैं तोँ आराम आहिस्ता शॉटलगा केँ सेक्स करना चाहिए।
डॉक्टर सुषमा : गुड, फिन अपने क्याँ किया ?
बापू नें शर्मिंदा हौ केँ कहा : मुझेमाफ कर दीजिए मैडम, मैजोश मे होशखो बैठा औऱ आज थीरेतेज़ तेज़ धक्का मारने लगा थां। मै बहोत शर्मिंदा हु डाॅक्टर मैडम।
डॉक्टर सुषमा : देखिये, इसमें कोई बुरीबात नहि हैं, औऱ शर्मिदा होने कि भि कोई जरूरत नहि। मगर शायद अपने मेराकहा होता तौ आज आपकोयह दिन नां देख्ना पड़ता।
पिताजी: डर केँ मारे : कैसादिन डॉक्टर, बच्चा ठीक तौ हें नां।
डॉक्टर सुषमा: हांउसी बारे नें आपसेबात करना चाहती हु।
बापू:जी बताइए नं डॉक्टर।
डॉक्टर सुषमा : देखिये अभि तोँ घबराने कि कोईबात नहि हैं। दरअसल आपके झटको सें प्राची कि बच्चेदानी नें चोटलग गई थि औऱ दवाब पड़ने केँ कारण, वोँ थोडा फट गई औऱ उस सें खून कां रिसाव होनेलगा। अगर थोडा भि आप् देर करते तौ बच्चे कों खतरा थां। मिस्टर शर्मा, आपकी वाइफ़ कां उमर अभि मम्मी बनाने केँ लिए थोडा कम हैं, औऱ छोटीउमर केँ कारण इनके योनि कि गहराई भि बहोत कम याँ अन्य महिलाओं सें कम हैं। औऱ ऊपर सें शायद आपके लिंग कां साइज भि अन्य मर्दो सें अलग हैं। प्राची नें बताया थां। जिस कारण सें शायदयह हुआ। पर्र अब घबराने कि कोईबात नहि हैं। बच्चेदानी कां मुहाना थोडा सां स्टिच करना पड़ा एक् छोटे सें ऑप्रेशन कर केँ। आपकी वाइफ़ कों अभि फुलबेड रेस्ट चाहिए। अभि वोँ इंजेक्शन केँ कारण थोड़ी होश मे भि नहि हैं। पऱ ३-४ घंटे केँ नींद केँ बाद वोँ नॉर्मल होँ जाएगी।
पिताजी: डॉक्टर मैडम आपका बहोत बहोत शुक्रिया। मुझेमाफ कर दीजिए। मैआगे सें आपकी सारीबात मानूंगी।
डॉक्टर सुषमा: कोईबात नहि पर्र मेरीबात एकदम गांठ बांध लीजिए। आज केँ बाद प्राची जी केँ लिए सेक्स बिल्कुल हि निषेध हैं। आप् एकदमबहक कभीकुछ गलतीमत करियेगा। इसबार आपका बच्चा बच गय़ा। अगलीबार शायद मुश्किल होँ बचाना।
पिताजी थोडा दुःखी हौ गए औऱ डॉक्टर सुषमा सें वादा किया कि वोँ आज सें प्राची कां ख़्याल रखेंगे औऱ गलती सें भि सेक्स करने केँ बारे नें सोचेंगे भि नहि प्राची केँ संग।
डॉक्टर सुषमा नें बापू कि अच्छे सें क्लास लगाई औऱ फिन सारी हिदायत केँ बाद प्राची कों रिलीज केँ दिया। बापू प्राची कों लें केँ बाहर् आए औऱ दादीमा केँ बगल मे बिठा दिया। अभि भि वोँ आधी हि होश मे थि।
दादीमा नें बापू सें पूछा : डॉक्टर नें क्याँ बोला, बच्चा ठीक तौ हैं ?
बापू:जी मम्मी, घबराने कि कोईबात नहि हैं, अब सुरक्षित हैं। बच्चा बिल्कुल ठीक हैं।
यहसुन केँ दादीमा औऱ प्रज्ञा, दोनों केँ जान मे जानआई।
फिन नां दादीमा नें कोई प्रश्न किया औऱ नाँ हि प्रज्ञा नें।
करीब-करीब सारे प्रक्रिया पूराकर केँ, दवाई लेके, पिताजी प्राची कों, दादीमा औऱ प्रज्ञा केँ सहारे गाड़ी केँ पिछली सीट मे लेटा दिया औऱ वोँ सभी करीब-करीब रात केँ १बजेघऱ केँ लिए निकलगए। अभि वाहन मे पूरा सन्नाटा थां। कोई भि कुछबोल नहि रहा थां।
घऱ पहुंचते हि बहोत हि रात हौ चुकी थि। प्राची कों अपने कमरे मे लेटाया गय़ा। औऱ दादीमा नें पिताजी सें कहा : बेटा, आज तुँ मेरे कमरे मे सोजा। मै प्राची केँ संग रुकती हु।
बापू नें भि आगेकुछ कहना उचित नहि समझा औऱ चुपचाप, दादीमा केँ कमरे नें चलेगए। रात बहोत होँ गई थि तोँ किसी नें किसी सें बातचीत नहि कि औऱ सोगए।
बापू कों सबेरे कां आदेश थां कि घऱ नें जरूर उनको मम्मी केँ सामने माफ़ी मांगनी पड़ेगी। औऱ अपना पक्ष रखना पड़ेगा।
प्रज्ञा भि बापू सें नाखुश थि। उसे अपने पिताजी मे क्रोध आँ रहा थां।
मगरअब यह सारी बाते सबेरे हि होँ सकती थि। इसलिये सभीसो गए। ओरघऱ नें सन्नाटा छा गय़ा।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
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