Hindi Kamuk story दोस्त की बिटिया की जिज्ञासा - Hindi Kamuk Story - Complete Kahani All Parts
Hindi Kamuk kahani यार कि बिटिया कि जिज्ञासा
मे हूं राज, उम्र४३ साल, सेक्स कां आनंद लेने मे खुब उस्ताद। मेरीइस कथा मे जौ लड़की हैं उसकानाम हैं – काजल। वोँ मेरे एक् मित्र प्रोफ़ेसर प्रकाश सिंह कि बेटी हैं। काजल केँ पिता औऱ मे दोनों कौलेज केँ दिनों सें मित्र हें। उनकी विवाह एम०ए० करते वक़्त हीं हौ गई। खैर मे तोँ काजल केँ बारे मे कहने वाला हूं उसके मम्मी-बाप मे तौ शायदहीं आप्-लोगों कों रुचि हौ। काजल१८ साल कि बी०कौम० फ़र्स्ट ईयर कि छात्रा हैं। बहोत सुन्दर चेहरे कि मालकिन हैं। एक् दम गोरी, ५’५” लम्बी, पतली छरहरी काया, लहराती-मटकती जब वोँ सामने सें चलती तोँ मेरेदिल मे एक् हूक सि उठती। मेरे जैसे चूतखोर मर्द केँ लिए उसका जिस्म एक् पहेली थां, कैसी लगेगी बिना कपड़ों केँ काजल?तब मे भूल जाता कि वोँ मेरेगोद मे खेली हैं, उसके शरीर कों जवान होते मैने देखा हैं। उसकी चुची नींबू सें छोटेसेव, संतरा, अनार होते देखा हैं, महसूस किया हैं। सोच-सोच कर मैंने पचासों बार अपना लन्ड झाड़ा होगा। पर्र उसका मुझे चाचा कहना, मुझेरोक देता थां कुछ भि करने सें। उसकेदिल कि बात मुझेपता नहि थि नं। वैसे काजल कां चक्कर दो-तीन लड़कों सें चला थां, घऱ पऱ उसेखुब डाँट भि पड़ी थि, पऱ उन लोगों नें हदपार कि थि याँ नहि मुझेपता नं चल पाया, औऱ जब भि मेरे मित्र औऱ भाभीजी नें इसबात कि चर्चा कि, तब उनके भाषा सें मुझेकुछ समझ नहि आया। औऱ एक् बार…ईश्वर कि दया सें कुछऐसा हुआ कि…
हुआयह कि काजल केँ नानाजी कि तबियत खराब होने कि खबरआई, औऱ काजल केँ मां-बापू कों उसके ननिहाल मेरठ जानां पड़ा, औऱ काजल कि क्लास चलते रहने कि वजह सें वोँ उसको नहि लेँ जासके। उनकेघऱ मे नीचे केँ हिस्से मे जोँ किरायेदार थें वोँ भि अपने गाँवगए हुए थें, सो काजल कों अकेला वहा नं छोड़, उन लोगों नें उसको एक् सप्ताह मेरेसंग रहने कों कहा। असल मे यह प्रस्ताव मैंने हि उन लोगों कों परेशान देखकर दिया थां। वोँ जल्दी मानगए। मेरेयार नें तबकहा भि कि दोस्त मे भि यहीसोच रहा थां पऱ तुम् अकेले रहते हौ, लगा कहीं तुम्हें कोई तकलीफ़ नां होँ। बात-चीत करतेहुए प्रकाश नें हल्की आवाज़ मे बताया कि एक् बार पहले भि वोँ काजल कों अकेले तीनदिन केँ लिए छोड़े थें तोँ आने पर्र किरायेदार सें पताचला कि दोदिन लगातार काजल केँ संगकोई लड़कारहा थां, जौ उसकेसंग विद्यालय मे पढ़ता थां, अब कहीं इंजीनियरिंग पढ़रहा हैं। वोँ अपनी तकलीफ़ मुझेबता रहा थां औऱ मे सोचरहा थां कि जब काजल अपनेघऱ पऱ एक् लड़के कों मां-बाप केँ नहि रहने पर्र रख सकती हैं, तोँ घऱ केँ बाहर् तौ वोँ जरूर हि चुदवायी होगी। खैर…, अगलेदिन सुभहकोई ७बजे वोँ लोग काजल कों मेरे अपार्ट्मेंट पऱ छोड़े, गरमचाय पिया औऱ मेरठचले गये। काजलतब अपने स्लीपिंग ड्रेस मे हि थि – एक् ढ़ीला सां कैप्री औऱ कालागोल गले कां टी-शर्ट। उसको कों ९बजे कौलेज जानां थां, दो घंटे केँ लिए।
मेरी नौकरानी नास्ता बनारही थि, जब काजल किचेन मे जाकर उससे पूछी कि कोई साबुन हैं याँ नहि। असल मे अकेले रहने केँ कारण मेरेरूम केँ बाथरूम मे तौ सभी थां पर्र दुसरे रूम, जिसमें काजल कां सामान रखा गय़ा थां, वो बाथरूम कपड़े धोने केँ लिए हि इस्तेमाल होता थां। मे हि तब कहा-“काजल, तुम् मेरेरूम कां बाथरूम युजकर लो, मुझे अभि वक़्त हैं”। औऱ काजल अपना कपड़ा लें कर मुस्कुराते हुएचली गई। मे बाहर् वालेरूम मे अखबार पढ़रहा थां, जब काजल सजधजकर होँ, नास्ता करकेआई औऱ बोलीं-“चाचा, मे लगभग१२ बजे लौटूँगी, तब तोँ घऱबंद रहेगा। ” मैंने उसको भींगे बालों सें घिरे सुन्दर सें चेहरे कों देखते हुएकहा- “कोई परेशान होने कि बात नहि हैं, तुम् एक् चाभीरख लो”, औऱ मैने नौकरानी सें चाभी लेँ कर उसकोदे दि, (मैंने एक् चाभी उसको इसलिये दि थि कि वोँ साम कों आँ करकाम करजाए औऱ मेरा खानां पकाजाए) संगहीं नौकरानी कों साम कि छुट्टी कर दि कि साम कों हम् लोग होटल मे खानां खा लेंगे। थोड़ी देर मे नकरानी भि काम निपटा करचली गई, औऱ मे सजधजकर होने बाथरूम मे आया। औऱ.
बाथरूम मे काजल कि कैप्री औऱ टी-शर्ट खूँटी सें टंगी थि, औऱ नीचे गीली जमीन पऱ काजल कि ब्रा-पैन्टी पड़ी थि। ऐसालग रहा थां कि उसने उन्हें धोया तोँ हैं, पऱ सुखने केँ लिए डालना भूल गई। मेरे लंड मे सुरमाथुर जगनेलगी थि। मैंने उसके अन्तर्वस्त्र उठालिए औऱ उनका मुआयना शुरुकर दिया। सफ़ेद ब्रा कां टैग देखा-लवेबल ३२बी०। सोचिए, ५’५” कि काजल कितनी दुबली-पतली हैं। मैंने अब उसकी पैन्टी कों सीधा फ़ैला दिया। वोँ एक् पुरानी पन्टी थि-रुपा सौफ़्ट्लाईन ३२ साईज। इतनी पुरानी थि कि उसके किनारे पऱ लगेलेस उघड़ने लगे थें औऱ वोँ बीच सें हल्का-हल्का घिसकर फ़टना शुरुकर चुकी थि। मैंने उसे सूँघा, पऱ उसमें सें साबुन कि हीं खुश्बू आई। फ़िर भि मैंने ऐसे तोँ कईबार उसकेनाम कि मुठ मारी थि, पर्र आज उसकी पैन्टी सें लंड रगड़-रगड़ करमूठ मरा औऱ अपनामाल उसके पैन्टी केँ घीसेहुए हिस्से पऱ निकला औऱ फ़िर बिना धोये हि पैन्टी-ब्रा कों सुखने केँ लिएडाल दिया। मेरेमन मे अब ख्याल आनेलगा कि एक् बार कोशिश कर केँ देखलूँ, शायद काजलपट जाए। पऱ मुझेअब देर होँ रही थि सो मे जल्द-जल्द सजधजकर होँ कर निकल गय़ा।
साम कों लगभग७ बजे मे घऱआया, काजलबैठ कर टेलीविज़न देखरही थि। उसने हि मुझेगरम चायबना कर दि। हम् दोनों संगगरम चायपी रहे थें, जब मैंने कहा-“रेडी हौ जाओ, आज बाहर् हीं खानां हैं। ” खुशी उसके चेहरे पे झलक गई, औऱ मे उसकेउस सलोने सें चेहरे सें नजरहटा नं पाया। हम् लोग इधर-उधर कि बातकर रहे थें, तभीउसे ख्याल आया, बोलीं-“सौरी चाचा, आज आपके बाथरूम मे गलती सें मेरा कपड़ा रह गय़ा। असल मे मेरे जाने केँ बाद मां जब सारेघऱ कों ठीक करती हैं, तोँ वोँ यहसभी भि कर देती हैं। कल सें ऐसा नहि होगा। ” उसके चेहरे पे सारी दुनिया कि मासुमियत थि। मैंने भि प्रेम सें कहा-“अरे, कोईबात नहि बेटा, मुझेकोई तकलीफ़ नहि हुइ। तुम् तोँ धोकर गई हि थि, मैंने तौ सिर्फ़ सुखने केँ लिएतार पर्र डाल दिया। ” फ़िर थोड़ी शरारत मन मे आई तौ कह दिया-“वैसे भि तुम् तौ स्वयं १० किलो कि हौ, तौ तुम्हारी ब्रा-पैन्टी तौ १० ग्राम सें अधिक नहि होनी चाहिए नं। उसको सुखने डालने मे कोई मेहनत तौ करना नहि पड़ा मुझे। ” उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखो कों गोल-गोल नचाया-“पुरे ४१ किलो हूं मे”। मैंने तड़ सें जड़ दिया-“ठीक हैं फ़िर तौ मे सुधार कर देता हूं, फ़िर४१ ग्राम होगी ब्रा-पैन्टी। ” वोँ मुस्कुरा कर बोलि-“मेरा मजाकबना रहें हें, मे सजधजकर होनेजा रहीं हूं। ” औऱ वोँ अपनेरूम मे चली गई, मे अपनेरूम मे।
कोईआधे घन्टे बाद हम् घऱ सें निकले। काजल नें एक् गहरेहरे रंग कि कैप्री औऱ गुलाबी टौप पहनी थि। बालों कों थोडा उपरउठा पोनीटेल बनाया थां, पेर मे बिना मोजा रीबौक केँ जूते। मे उसकी खुबसुरती पऱ मुग्ध थां। हम् लोग पैदलहीं एक् घंटा घुमे औऱ फ़िर लगभग९ बजे एक् चाईनीज रेस्ट्रां मेम खानां खाकर१० बजे तक घऱ आँ गए। थोड़ी देर टेलीविज़न देखने केँ बाद अरीब११ बजे काजल अपनेरूम मे औऱ मे अपनेरूम मे सोनेचले गए। काजल केँ बारे मे सोचते सोचते बड़ीदेर बाद मुझे नींदआई। अगलेदिन लगभग६ बजे काजल नें मुझे जगाया, वोँ सामने गरमचाय लें कर खड़ी थि। मेरे दिमाग़ मे पहला ख्याल आया कि आज कां दिन अच्छा होँ गय़ा, उसकी सलोनी सूरतदेख। हमनेसंग गरमचाय पी। वोँ तब मेरेबैड पे बैठी थि। उसने एक् नाईटी पहनी हुइ थि जोँ उसके घुटने सें थोडा नीचे तक थि। रेडीमेड होने केँ कारण थोडा लूज थि, औऱ उसके ब्रा केँ स्टैप्स दिखरहे थें। आजउसे ८.३०बजे निकलना थां, सो वोँ बोलि-“आप् बाथरूम सें हौ लीजिए तब मे भि नहा लूँगी, आज थोडा पहले जानां हैं”। मे जब बाथरूम सें बाहर् आया तौ देखा कि उसने मेरा पलंगठीक कर दिया हैं, औऱ अपने कपड़े केँ संग मेरेबेड पे बैठी हैं। जब वोँ बाथरूम कि तरफ़ जानेलगी तब मैंने छेड़ते हुएकहा, आज भि अपना४१ ग्राम छोड़ देना। वोँ येसुन जोर सें बोलि-छीः, औऱ हल्के सें हँसते हुए बाथरूम कां दरवाजा लौखकर लिया। मे बाहर् बैठ पेपरपढ़ रहा थां, जब वोँ बोलि-“मे जारही हूं चाचु, लगभग१ बजे लौटूँगी, मेरा दोपहर का खाना बनवा दीजिएगा, नस्ता मै कैंटीन मे कर लूँगी। ” मे उसको पीले टाईट सलवार कुर्ते मे जाते देखता रहा, जब तक वोँ दिखती रही। उसकी सुन्दर सि गांड हल्के हल्के मट्करही थि।
थोड़ी देर मे मेरी नौकरानी अनिता आँ गई, औऱ अपनाकाम करनेलगी, मे भि रेडी होने बाथरूम मे आँ गाया। मुझे थोडा शक थां कि आज शायद मुझे ब्रा-पैन्टी नाँ दिखे, पऱ मेरी खुशी कां ठिकाना नं रहाजब मैने देखा कि आज फ़िर उसने अपनी ब्रा-पैन्टी धोकरकल कि तरह हि जमीन पऱ छोड़ दि हैं। कल शायद उससे गल्ती सें छूट गय़ा थां, पऱ आज केँ लिए मे पक्का थां कि उसने जान-बूझ कर छोड़ा हैं। मुझे लगनेलगा कि यह सालीपट सकती हैं। मैंने आज फ़िर उसकी पैन्टी लन्ड पे लपेटमूठ मारी औऱ माल उसके पैन्टी मे डाल दिया। यह वाली पैन्टी कल वाली सें भि पुरानी थि, औऱ उसमें भि दो-एक् छोटेछेद थें। पर्र मुझे मज़ाआया। मैंने अपनेमाल सें लिपसे पैन्टी कों ब्रा केँ संग सुखने कों डाल दिया। साम कों मुझेआने मे थोड़ी देर हौ गई, अनिता हम् दोनों कां खानां बनाकर जा चुकी थि। मे जबआया तौ काजलगरम चाय बनाई औऱ हम् दोनों गपसप करतेहुए गरमचाय पीनेलगे। काजल नें हि बात छेड़ दि-“आज फ़िर आपको मज़ाआया मेरी सेवा करके?” मे समझ न् सका तौ उसनेकहा, “वही४१ ग्राम, सुभह” औऱ मुस्कुराई। मैंने भि कहा-“हाँ, मज़ा तौ खुबआया, पर्र काजल, इतने पुराने कपड़े पहनो, फ़टे कपड़े पहनना शुभ नहि माना जाता”। वोँ समझ गई, बोलीं- “ठीक चाचु, आगे सें ख्याल रखूँगी। ” मैंने देखा कि बातसही दिशा मे हैं तोँ आगे कहा-“अच्छा काजल, थोडा अपने पर्सनल लाईफ़ केँ बारे मे बताओ। प्रकाश कहरहा थां कि तुम्हारा किसी लड़के केँ संग चक्कर थां। अगर न् बताना चाहो तोँ मनाकर दो। ” वोँ थोड़ी देरचुप रही फ़िर उसने दीपक केँ बारे मे कहा, जोँ उसकेसंग विद्यालय मे ५साल पढ़ा थां। दोनो अच्छे यार थें। पर्र ऐसाकुछ नहि किया कि उसको इतना डाँटा जाए, दीपक तौ फ़िरउस डाँट केँ बादकभी मिला भि नहि। अब तौ वोँ उसको अपना पहला क्रशमान ली थि। मे तब साफ़पूछ लिया-“क्यूं, क्याँ सेक्स-वेक्स नहि किया उसकेसंग?” वोँ अपने गोल-गोल आँख घुमाकर बोलीं-“छीः, क्याँ मे आपको इतनी गन्दी लड़की लगती हूं, दीपक मेरा पहला प्रेम थां, अबकुछ नहि हैं?” मैंने मूड कों हलका करने केँ लिए कहा-“अरे नहि बेटी तुम् औऱ गन्दी, कभी नहि, हाँ थोड़ी शरारती जरूर होँ, बदमाश जौ अपनी ब्रा-पैन्टी अपने चाचु सें साफ़ करवाती होँ। ” वोँ बोलि-“गलत चाचु, साफ़ तौ स्वयं करती हूं, आप् तौ सिर्फ़ सुखने कों डालते हौ। ” हम् दोनों हँसने लगे। फ़िर खानां खाकर टहलने निकलगए। बातों बातों मे वोँ अपने कौलेज केँ बारे मे तरहतरह कि बातबता रही थि, औऱ मे उसकेसंग कां मज़ा लें रहा थां।
तीसरे दिन भि सुभह काजल केँ चेहरे पऱ नजरडाल कर हि शुरु हुइ। उसदिन अनिता थोडा सवेरे आँ गई, थि, काजल कां नास्ता बनारही थि। मे भि अपने औफ़िस केँ काम मे थोडा बीजी थां, कि काजल सजधजकर हौ करआई। मैंन घड़ी देखे-८.३०। काजल बोलीं- “चाचुआज भि रख दिया हैं मैंने आपकेलिए ४१ ग्राम…। औऱ आजधोई भि नहि हूं”, औऱ वोँ चली गई,। मैंने भि अब जल्द सें फ़ाईल समेटी औऱ रेडी होनेचला गय़ा। आज बाथरूम मे थोड़ी सेक्सी किस्म कि ब्रा-पन्टी थि औऱ उससे बड़ीबात कि आज काजल नें उसपर पानी भि नहि डाला थां। दोनो एक् सेट कि थि, गुलाबी लेस कि। इतनी रसीले कि दोनों मेरी एक् मुठी मे बन्द होँ जाए। मैंने पैन्टी फ़ैलाई-स्ट्रिन्ग बिकनी स्टाईल कि थि। उसके सामने कां भाग थोडा कम चौड़ा थां, लगभग४ इंच औऱ नीचे कि तरफ़ पतला होते होतेचुत केँ उपर२इंच कां होँ गय़ा थां, फ़िर पीछे कि तरफ़ थोडा चौड़ा हुआ पऱ ५इंच कां होते होतेकमर केँ इलास्टिक बैंड मे जा मिला। साईड कि तरफ़ सें पुरा खुलाहुआ, बसआधा इंच सें भि कम कि इलस्टिक। मैंने प्रेम सें उस गन्दी पैन्टी कां मुआयना किया। चुत केँ पास हल्का सां एक् दाग थां, जौ बड़ेगौर सें देखने पऱ पता चलता, मैनेउस धब्बे कों सुंघा। हल्की सि खट्टेपने कि बू मिली औऱ मेरा लंड कों सुरुर आनेलगा। मैने प्रेम सें उसी धब्बे पऱ अपना लंड भिड़ा, पैन्टी कों लंड पे लपेटमजे सें मूठ मारने लगा, औऱ सारामाल उसी धब्बे पर्र निकाला, फ़िरउस पैन्टी-औऱ ब्रा कों सिर्फ़ पानी सें धोकर सुखने डाल दिया।
साम ७.३०बजे घऱआया, संगगरम चाय पीने बैठे तोँ मैंने बात छेड़ दि-“आज तौ काजल बेटी, तुमने कमालकर दिया। ” वोँ कुछ नहि बोलीं तौ मैंने कह दिया-“बिना धोयी हुई ब्रा-पैन्टी सें तुम्हारी खुश्बू आँ रही थि। ” वोँ शर्माने लगी, तौ मैने कहा-“सच्ची बोलरहा हूं, मैंने सुँघकर देखा थां। तुम्हारे बाप कि उम्र कां हूं, पऱ आज वाली४१ ग्राम कि खुश्बू नें मेरेदिल मे अरमान जगा दिये। ” वोँ थोडा अनईजी दिखी, तौ मैंने बात थोडा बदला, “पर्र मैंने भि दिल पे काबूकर लिया, तुम् परेशान नं होँ। ” वोँ मुस्कुराई, तब मैंने कहा-“पर्र आज वाली तौ बहोत सेक्सी थि, अबकल क्याँ दिखाओगी मुझे?” वोँ मुस्कुराई-“कल ३० ग्राम मिलेगा”। मै-“क्यूं?” वोँ बोलि-“क्योंकि आज मैंने नीचे पहनी हि नहि हैं। वोँ दोनो पुरानी वाली पहननी नहि थि, औऱ यह वाली तोँ आज धुली हैं, कल पहनुँगी। ” मैंने कहा-“ऐसे बात हैं, चलआज हि खरीदकर लाते हें। मैंने आज तक कभी लेडीज पैन्टी नहि खरीदी, आजयह भि कर लेते हें। ” वोँ थोडा सकुचाई, तोँ मैंने उसकोहाथ पकड़कर उठा दिया, बोला जल्द रेडी हौ जाओ। मे तब जींस औऱ टीशर्ट मे थां, औऱ वोँ अपने नाईटी मे। वोँ दो मिनट मे चेंज करके आँ गई-नीले स्कर्ट औऱ पीलेटौप मे वोँ जान-मारू दिखरही थि। उसनेआते हुए कहा-“स्कर्ट मे सुविधा होगी, एक् तौ वहींपहन लूँगी, औऱ एक् औऱ लेँ लूंगी। ” बहोत मस्त लौन्डिया थि वोँ। मेरे जैसे मर्द कों खुबटीज करना जानती थि। जब भि मे यह सोचता कि साली नंगीचुत लेँ कर बाजार मे हैं, मेरेदिल सें एक् हूक निकल जाती। हम् एक् लेडीज अंडरगार्मेंट्स स्टोर मे गए। मेरेलिए यह पहला अनुभव थां। दो-तीन औऱ लेडीज ग्राहक थीं। हमारे पास एक् लगभग २८-३०साल कि एक् सेल्सगर्ल आई, तोँ मैने, उसे एक् ब्र-पैन्टी सेट दिखाने कों कहा। क्याँ साईज, औऱ कोईखास स्टाईल, कहतेहुए उसने एक् कैटेलग हमेंथमा दिया। एक् सें एक् मस्तमाल कि फ़ोटो थि, तरहतरह कि ब्रा-पन्टी मे। मे फ़ोटो देखने मे बीजी थां, कि काजल बोलीं-“सिर्फ़ पैन्टी लेते हें नाँ”। मैंने नजर कैटेलग पे हि रखतेहुए कहा-“एक् इसमें सें लें लो, फ़िर दो-तीन पैन्टी लें लेना। ” सेल्सगर्ल नें पूछा-“दिदी केँ लिए लेना हैं याँ मैडम केँ लिए?”, मैंने काजल कि तरफ़ इशारा किया। वोँ मुस्कुराते हुए बोलि-“किस टाईप कां दूँ, थोड़ी सेक्सी, हौट याँ सोबर?” मैंने जबउसे थोडा सेक्सी टाईप दिखाने कों बोला तोँ वोँ मुस्कुराई। वोँ समझरही थि कि मे उसहूर केँ संग लंपटगिरी कररहा हूं।
उसनेकुछ बहोत हि मस्तसेट निकलदिए। एक् तौ बस सिर्फ़ पैन्टी केँ नाम पर्र २”x१” कां सफ़ेद पारदर्शी जाली थि ब्रा भि ऐसा कि जितना छुपाती नहि उतना दिखाती। मुझ वोँ हि खरीदने कां मनहुआ, पऱ काजल नें एक् दुसरा मनपसंद किया। जब मैनेकहा कि एक् वो सेक्सी टाईप लेँ कर देखे, तोँ वोँ बोलि, नहीं पऱ अगर आपकामन हैं, तोँ सिर्फ़ पैन्टी मे ऐसाकुछ देख लेंगे, रुपया भि कम लगेगा। काजल कि पसन्द कि पैन्टी उसकी सेक्सी पैन्टी सें थोड़ी औऱ छोटी थि। चुतड़ तोँ करीब-करीब ९०% बाहर् हि रहता, पऱ चुतठीक ठाक सें कवर हौ जाती। उसने उसकाचटख लालरंग पसन्द किया। फ़िर उसने हेन्स कि स्ट्रींग बिकनी पैन्टी माँगी, तोँ सेल्सगर्ल नें एक् ३ कां सेट दिया। अब मैंने उस सेक्सी पैन्टी केँ बारे मे कहा औऱ जोरदे कर एक् सफ़ेद औऱ एक् काली पैन्टी खरीदली। काजल नें हेन्स कि एक् पैन्टी पैक सें निकाली औऱ ट्रायल रूम मे चली गई औऱ पहनली। सामान पैक करते टाइम सेल्सगर्ल नें काजल सें उसकी पुरानी पैन्टी केँ बारे मे पूछा तौ काजल नें कहा-“इट्स ओके, आई हैडन्ट बीन वीयरिन्ग एनी(सभी ठीक हैं, मैने नहि पहनाहुआ थां)। सेल्सगर्ल नें भि चुटकी ली-“आजकल केँ बच्चे भि नाँ…, इसतरह बिना चड्ढ़ी बाजार मे निकल लेते हें। ” दुकान पर्र मौजूद तीनों सेल्सगर्ल औऱ मैंने भि हँस दिया, औऱ काजल झेंप गई।
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Hindi Kamuk story दोस्त की बिटिया की जिज्ञासा - Hindi Kamuk Story – New Episode
अगलेदिन सुभहगरम चाय पीतेहुए मैंने कहा-“काजल बेटा, अबआज कां दिन मेरा केसे अच्छा बीतेगा, आज तौ ३० ग्राम हि मुझे मिलेगा। ” वोँ मुस्कुराई औऱ बोई-“सभी ठीक हौ जायेगा, फ़िक्र नैट। ”जब वोँ जानेलगी तौ मुझे बोलीं-“चाचु, जरा अपनेरुम मे चलिए, एक् बात हैं। ” मुझेलगा कि वोह शायदकुछ कहेगी। पऱ वोँ रुम मे मुझेलाई औऱ मुझेबेड पे बिठा दिया, फ़िर एक् झटके मे अपने जीन्स केँ बटनखोल करउसे घुटने तक नीचेकर दिया, बोलीं-“देख करआजदिन ठीककर लीजिए। ” उसके शरीर पर्र वही सेक्सी वाली सफ़ेद पैन्टी थि। उसके त्रिभुजाकार सफ़ेद पट्टी सें उसकीबूर एक्दम सें ढ़्की हुई थि, पर्र सिर्फ़ बूरहीं। बाकीउस पैन्टी मे कुछ थां हि नहि सिवाय डोरी केँ। उसकी जाँघ, चुतड़ सभी बिल्कुल खुलाहुआ थां। एकदम साफ़ गोरा दमकता हुआ। झाँट कि झलक तक नहि थि। मेरागला सुखरहा थां। वोँ २०-२५ सेकेन्ड वैसेरही फ़िर अपना जीन्स उपरकर ली, औऱ मुस्कुराते हुएबाय कह बाहर् निकल गई। मैंने वहींखाट पऱ बैठे-बैठे मुठ मारी, ये भि भूल गय़ा कि अनिता घऱ मे हैं। उसदिन बाथरुम मे मुझेपता चला कि आज मेरेहीं रेजर सें काजल झाँट साफ़ कि थि, औऱ अपने झाँट कों वाश बेसिन पे हि रख छोड़ा हैं। २-२” कि उसकी झाँट केँ कईबाल मुझेमिल गये, जिन्हें मैंने कागज मे समेटकर रख लिया। मैनें फ़िरमुठ मारी।
साम कि गरमचाय पीतेहुए मैनेबात शुरु किया-“बेटा आज मेरेलिए पैन्टी नहि थां तौ तुमने मेरेलिए रेजर साफ़ करने कां काम छोड़ दिया। ” मेरे चेहरे पर्र हल्की हँसी थि। वोँ शर्मा गई। तब मैंने कहा-“किस स्टाईल कां शेव कि होँ?” उसके चेहरे केँ भाव बदले, बोलीं-“मतलब?” मैंने आगे कहा-“मतलब किस स्टाईल मे अपनेबाल साफ़ कि हौ?” उसेसमझ नहि आया तोँ बोलीं-“अब इसमें स्टाईल कि क्याँ बात हैं, बस साफ़कर दि। ” मैंने अबआँख मारी-“पुरा साफ़कर दि?” वोँ अब थोडा बोल्ड बनकर बोलि-“औऱ नहि तौ क्याँ, आधा करती? कैसा गन्दा लगता। ” मैंने सभीसमझ गय़ा, कहा-“अरे नहि बाबा, तुम् समझ नहि रही हौ, लड़कियाँ अपनेइन बालों कों कई तरीके सें सजाकर साफ़ करती हें। ” उसकेलिए ये एक् नईबात थि, पुछी-“केसे?”तब मैंने उसको बताया कि झाँटों कों केसेअलग अलग स्टाईल मे बनाया जाता हैं, जैसे लैंडिन्ग स्ट्रीप, ट्रायन्गल, हिटलर मुश्टैश, बाल्ड, थ्रेड, हार्ट… आदि। उसकेलिए यहसभी बात अजुबा थां-“बोलि, मुझे नहि पतायह सभी”। मे तौ हमेशा ऐसे हि पुरा साफ़ करतीरही हूं, जब भि कि हूं। अभि, दो महिने बाद कि हूं, तभी इतनी बड़ी-बड़ी हौ गयीँ, थि। माँ कों पताचल जाए तौ मुझे बहोत डाँटेंगी, वोँ तौ जबर्दस्ती बचपन मे मेरा १५-१७दिन पर्र साफ़कर देती थि। वोँ तोँ स्वयं सप्ताह मे दोदिन साफ़ करती हें अभि भि। ” मैंने भि हाँ मे हाँ मिलाई-“हाँ, सच बहोत बड़ी थि, २” तौ मे अपना नहि होने देता, जबकि मे मर्द हूं। ”
मे महिने मे दो-एक् बार कौल-गर्ल घऱ लाता थां। इसकेलिए मे एक् दलाल राजेन्दर माथुर कि सहायता लेता। उसकेसंग मेरा५-६ साल पुरानां नाता थां। वोँ हमेशा मुझे मेरे मनपसंद कि लड़कीभेज देता। अब तोँ वोँ भि मेरी मनपसंद जान गय़ा थां, औऱ जब भि कोईनई लड़की मेरे टेस्ट कि उसे मिलती, वोँ मुझेबता देता। ऐसे हि उसदिन साम कों हुआ। माथुर कां फ़ोनआया लगभग८ बजे, तब मे औऱ काजल खानां खारहे थें। माथुर बताया कि एक् मालआई हैं नई उसकेपास, १७-१८साल कि। अधिक नहि गई हैं, घरेलू टाईप हैं। आज उसकी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट सहीआने केँ बाद वोँ सुभह मुझे बतायेगा, अगर मे कहूँ तौ वोँ कल उसकी पहली बूकिंग मेरेसंग कर देगा। काजल कों हमारी बातठीक सें समझ मे नहि आई, औऱ जब उसने पुछा तौ मैंने सोचा कि अबइस लौन्डिया सें सभीकह देने सें शायद मेरा मार्ग खुले, सो मैंने उसकोसभी कह दिया कि मे कभी-कभी दलाल केँ मार्फ़त कौल-गर्ल लाता हूं घऱ पऱ, आजउसी दलाल कां फ़ोनआया थां, एक् नई लड़की केँ बारे मे। उसका चेहरा लाल हौ गय़ा। वोँ चुप-चाप खाई, फ़िर हम् टेलीविज़न देखने लगे, वोँ एक् फ़िल्म लगाकर बैठ गई। मुझेलगा कि शायद कौल-गर्ल वालीबात उसे अच्छी नहि लगी। पऱ मैंने उसेअब नहि छेड़ा, सोचा देखें अब वोँ स्वयं केसे मुझे मौका देती हैं।
अगली सुभह फ़िर माथुर कां फ़ोनआया। मुझेलगा कि यह शायद अधिक होँ रहा हैं, सो मैंने माथुर कों मनाकर दिया। काजल फ़ोन पऱ मेरी जोँ बात हौ रही थि, वोँ सुनरही थि। मेरे फ़ोन काटने पर्र उसनेसभी कुछठीक सें जानना चाहा। एक् बार फ़िर उस्की ख़्वाहिश देख मुझेलगा कि बात फ़िर पटरी पर्र आनेलगी हैं। मे चाहता थां कि केसे भि अबआगे कां मार्ग खुले जिससे मे काजल मे मक्खन जिस्म कां आनंदलूँ। पाँचदिन बीत गय़ा थां, औऱ दो-तीन दिन मे उसके मां-बापू आँ जाने वाले थें। मैने गंभीर बनने कि ऐक्टींग करतेहुए कहा-“बुरा मत मानना काजल बेटा पर्र तुम्हें पता हैं कि मे अकेला हूं, इसलिये अपनेबदन कि जरूरत केँ लिए एक् दलालसेट कियाहुआ हैं, वोँ हर महिने ५ औऱ २५ तारिख कों मुझे फ़ोन पऱ कौन्टैक्ट करता हैं। मेरा जैसामूड हौ मे उसकोबता देता हूं, वोँ लड़कीभेज देता हैं। अक्सर जैसी फ़र्माईश कि जाती हैं, वोँ अरेन्ज कर देता हैं। ” वोँ बोलीं-“प्लीज चाचुआज बुला लीजिए नाँ। मैंने कभी कौल्गर्ल नहि देखी। ” मैंने कहा-“पर्र मे तौ तुम्हारे बारे मे सोचकर नं कहरहा थां, तुम् क्याँ समझोगी मुझेअगर मैघऱ पे लड़की बुलालूँ तब, नं यहठीक नहि होगा, तुम्हारे रहते”। पर्र अबजिद कर बैठी। शनिवार कां दिन थां, बोलि आज वोँ कौलेज नहि जायेगी, अगर मैंने हाँ नहि कहा। लगभग एक् घन्टें बाद मैनेकह दिया, “ठीक हैं, पर्र…”। वोँ तुरन्त मेरा फ़ोन लायी, कौल-बैक किया औऱ स्पीकर औनकर केँ सामने बैठ गई।
मे कहरहा थां-“हाँ माथुर, भेज देनाआज ८बजे, कोई ठीक-ठाक, घरेलु टाईप भेजना, पऱ नई भेजना, रचना याँ पल्लवी नहि”। माथुर बोला-“नई वालीसही हैं सर, रेट थोडा ज़्यादा लेगी, पऱ मस्तमाल हैं। आप् उसकी लाइफ़ केँ पहले१० कस्टमर मे होंगे। मेरे सें पहलीबार बुक होँ रही हैं। इसीसाल +२ किया हैं, औऱ यहा पढ़ाई केँ लिएइस शहर मे आई तौ हौस्टल सें उसको रोजी मेरेपास लाई। दिखने मे तौप क्लास चीज हैं सर, एक् दम मस्तसर, मैंने कभीगलत सप्लाई आपको कियाआज तक। ३४-२३-३६ हैं सर, एक् दम टाईट। ” मैंने रेट पूछा, तोँ उसने ५५००कहा, फ़िर ५००० पर्र बात पक्की हुईँ। अचानक मुझे थोडा मस्ती कां मूडहुआ, मैने कहा-“माथुर, कहीं वोँ छुई-मुई तौ नहि, जरा उससेबात करवा सकोगे पहले?” वोँ बोला-“नहि सर घरेलु हैं, पर्र मस्त हैं, खुब मस्ती करती हैं, एक् बार मैने भि टेस्ट किया हैं उसको, तभी तौ आपकोकह रहा हूं। उसको मे आपका नम्बर दे देता हूं। ”
लगभग१० मिनटबाद मेरा फ़ोनबजा, तोँ मैने स्पीकर औनकर केँ हैल्लो किया। उधर सें वही लड़की बोलि-“जी, मेरानाम मोनिका हैं, माथुर साहब नें मुझे आपसेबात करने कों कहा हैं। ” मैंने गंभीर आवाज़ मे कहा-“हाँ मोनिका, आजरात तुम्हारी मेरेसंग हीं बूकिंग हैं। असल मे मै तुमसे एक् बात जानना चाहता हूं, तुम् तौ नई होँ। माथुर जौ पे करेगा तुम्को वोँ तौ ठीक हैं, पर्र क्याँ तुम्हें ऐतराज होगा, अगर मेरेसंग कोई औऱ भि होँ तौ। मे एक्स्ट्रा पे करूँगा। थोड़ी चुप्पी केँ बाद बोलीं-“दो केँ संगकभी किया नहि सर”। मेरेमन मे शैतान घुसा थां, कि आजजब काजल साली स्वयं मुझे रन्डी बुलाने कों कहरही हैं, तबआज उसको दिखाया जाए कि रन्डी चोदी केसे जाती हैं। मे प्लान बनारहा थां, कहा-“अरे नहि, वैसा नहि हैं, करना तुम्हें मेरेसंग हीं होगा। असल मे एक् लड़की मेरेसंग होगी, वोँ देखेगी सभी जोँ तुम् करोगी। ” मे यहसभी बोलते हुए काजल कि तरफ़देख रहा थां। उसके चेहरे पे शुकुन थां, जैसे मैंने उसकेमन कि बात कि हौ। मोनिका अब थोडा रीलैक्स होँ कर कहा-“कोई फ़ोटो-वोटो नहि होगा नाँ?” मैंने कह-“बिल्कुल नहि”। वोँ राजी हौ गई, फ़िर पूछी-“सर आपकोकोई खास ड्रेस पसन्द हौ तौ?” मैंने कहा-“नहि, जोँ तुम्हें सहीलगे। ”, औऱ कुछयाद करके पूछा-“मोनिका, बुरामत मानना, पऱ तुम्हारी बुर साफ़ हैं याँ बाल हैं?” वोँ बोलीं-“जी बाल हैं, लगभग महीने भर पहले साफ़ किया थां, फ़िर अभि तक कामचल रहा हैं। माथुर सर नें भि कहा कि जब तक कोई औबजेक्ट नं करे मे ऐसेहीं रहनेदूँ। आप् बोलेंगे तौ साफ़ करके आउँगी। ” मैंने खुश होँ कर कहा-“नहि-नहि, तुम् जैसी होँ वैसी आनां। जरुरत हुई तोँ यहा साफ़कर लेंगे। ” औऱ फ़ोनबंद कर दिया।
इसके जल्दी बाद प्रकाश कां फ़ोनआया कि उन्हें अभि वहा१० दिन औऱ रुकना होगा, जब तक औपरेशन नहि हौ जाता, काजल केँ नानाजी कां। मेरेलिए ये अच्छा शगुन थां। मेरेलिए मोनिका लकी साबित हुई थि। मे देखरहा थां कि काजल भि येसभी सुनखुश होँ रही हैं।
काजलसभी चुप-चाप सुनरही थि। मैने उसके जाँघ पे अपनाहाथ फ़ेरा औऱ कहा-“अब तौ खुश होँ काजल बेटी, तुम्हारे मन कि हि होँ गई। ” वोँ बिना बोलेबस मुस्कुरा रही थि। मैनेकहा, “आनेदो मोनिका कों, आज उसकी लैंडिग स्ट्रीप स्टाईल मे बना केँ बताउँगा। वोँ भि नई हैं, थोडा सीखेगी मेरे एक्स्पीरियेंस सें”। वोँ बोलीं-“अब खानां बना लेते हें, दो घन्टें मे तौ वोँ आँ जायेगी”। काजल किचेन मे गई, मे टेलीविज़न मे बीजी होँ गय़ा। लगभग७.३० तक हमने डिनरकर लिया, औऱ बैठकर मोनिका कां प्रतीक्षा करनेलगे। ८.१० पे कौल-बेल बजी, तोँ काजल जल्दी कुदकर दरवाजे तक पहूँच उसे खोला। मैंने देखा कि एक् छरहरे जिस्म कि थोड़ी सांवली करीब-करीब काजल कि लम्बाई कि हि लड़की सामने थि। काजल नें उसकानाम पूछा औऱ भीतर लें आई। मैंने मोनिका कों बैठने कों कहा तौ वोँ सामने सोफ़े पे बैठ गई। काजल अभि भि खड़े होँ कर उसकोघुर रही थि। मोनिका नें चटख पीलेरंग कां सूती सलवार सुट पहनाहुआ थां, जोँ उसके फ़िगर पे सही फ़िट थां। लौन्डिया १७-१८ कि थि, ३४-२६-३६। मेरी अनुभवी नजरों नें उसकामाप लें लिया। मे अपनी भाग्य पे स्वयं हैरान थां। मेरेपास दो-दो जवान लौन्डिया थि, औऱ दोनो२० बरस सें भि कम। मोनिका तौ काजल सें भि उमर मे छोटी थि, काजल नें दोसाल पहले इंटर किया थां जबकि मोनिका नें इसीसाल किया। हाँ, उसका जिस्म थोडा काजल सें अधिकभरा थां। पर्र फ़र्क सिर्फ़ उन्नीस-बीस कां हि थां।
मैंने मोनिका सें कहा-“यह काजल हैं, यहीसंग मे रहेगी रूम मे औऱ सभी देखेगी। ” मोनिका नें अब एक् पुरेनजर सें काजल कों घूराउपर सें नीचे तक। मैंने पूछा-“डिनर करकेआई होँ याँ करोगी?” उसनेकहा कि नहि वोँ जिसदिन बूकिंग कराती हैं, रात मे नहि खाती। मोनिका नें बताया कि वोँ सिर्फ़ शनिवार कों हि माथुर सें बूकिंग कराती हैं औऱ येसभी वोँ थोडा आनंद औऱ थोडा पैसे केँ लिए करती हैं। इजीमनी, यूनो। मैंने उसको ५०००दे दिये औऱ कहा कि यह जौ माथुर सें बात थि, अर फ़िर २००० उसकोदिए औऱ कहा कि यह उसका पर्सनल हें मेरे रीक्वेस्ट कों मानने केँ लिए। वोँ संतुष्ट थि, बोलीं, “एक् बारसर मे बाथरूम जानां चाहुँगी”। मैंने कहा-“ठीक हैं थोडा साफ़कर लेना साबून सें, आगे पीछेसभी” औऱ मैंने उसकोआँख मारी, ताकि पहलीबार कि झिझककम हौ। मुझे उसके चेहरे सें लगरहा थां कि वोँ सही मे नई थि। मैंने काजल कों उसे पानी पिलाने कों कहा, औऱ वोँ चली गयीँ,। पानीपी कर मोनिका नें अपना दुप्पटा सोफ़े पे डाला औऱ काजल सें पूछा-“बाथरूम”…।
लगभगदस मिनटबाद वोँ आयी औऱ कहा कि वोँ रेडी हैं, किसरूम मे चलें? हम् सभी मेरे बेडरूम मे आँ गए, तब मोनिका नें पूछा-“मे स्वयं कपड़े उतारूँ याँ आप् दोनों मे सें कोई?” मे काजल कि तरफ़देख रहा थां, कि उसका क्याँ मिजाज हैं। उसेलगा कि मे शायद उसकोकह रहा हूं कि वोँ कपड़े उतारे, इसलिये वोँ मोनिका कि तरफ़बढ़ गई। मोनिका नें उसकी तरफ़ अपनीपीठ कर दि। जब काजल उसके कुर्ते कि जीप नीचेकर रही थि, मोनिका नें काजल सें हल्के सें पूछा-“यह आपके बापू हैं?” काजल सिटपिटा गई। उसे तकलीफ़ सें बचाने केँ लिए मैंने कहा-“नहि काजल मेरे मित्र कि बेटी हैं, अभि मेरेसंग रहेगी। उसेहीं मन थां कि वोँ एक् बारयह सभी देखे। ” मोनिका केँ मुँह सें एक् हल्का सां सौरी निकला। काजल नें उसकी कुर्ते कों खोलने केँ बाद उसकी समीज (स्लीप) भि निकल दि। मोनिका कालेरंग कि एक् साटन ब्रा पहने थि। मोनिका कि सपाटपेट देख मे मस्त हौ रहा थां। चुचियाँ भि मस्त थि, एक् दम ठ्स्स। १८साल कि लड़की कि जैसी होनी चाहिए। मे उसकी गदराई जवानी कों घुररहा थां। काजल नें उसके सलवार कि डोरी खींची, औऱ उसको नीचेकर दिया। उसने कालेरंग कि जाली-दार लेस वाली पैन्टी पहनी हुईँ थि। पैन्टी मे सें भि उसकीचुत अपने फ़ुले होने कां आभासदे रही थि। सुन्दर सि लम्बी टाँगे, एक् दम हल्के हल्के रोएँ थें जाँघों पे। उसके जवान शरीर कों मस्त निगाह सें देखते हुए मैंने कहा-“अब रहनेदो काजल, तुम् आहिस्ता देखोबैठ कर, बाकि मे कर लूँगा। ”
फ़िर मैंने प्रेम सें मोनिका कों बाँहों मे उठाया औऱ बेड पे लिटा उसकेओठ चुमने शुरु किये। दो मिनट भि नहि लगा, औऱ मोनिका केँ रेस्पौंस मुझे मिलने लगे। काजल अपने कैप्री-टी-शर्ट मे पास हि चेयर पे बैठ गयीँ, थि। मैंने मोनिका कि ब्राखोल दि, औऱ उसके चुचियों सें खेलने लगा। उसकी ठस्स चुचियाँ आजाद होँ कर झुमने लगीं। एक् बड़े सें संतरे केँ आकार कि थि उसकी चुची, जिस पर्र भूरेरंग कां निप्पल मस्तलग रहा थां। मे उन्हें कभी चुमता, कभी चाटता, कभी निप्प्ल खींचता, कभी दबाता… मेरे दोनोहाथ भि कभीइधर तौ कभीउधर आनंद लें रहे थें। लगभगदस मिनट चुम्मा-चाटी केँ बाद मैंने मोनिका कि पैन्टी उसकेकमर सें खिसकाई, तौ उसकी झाँटो भरी चूत केँ दर्शन हुए। मैंने मोनिका कि झाँटों पे हाथ फ़ेरा। उसके झाँट लगभग आधा-पौन इंच केँ थें। उसकीचुत पऱ मैने अपनी ऊँगली घुमाई औऱ अंदाजा लगाया कि सही मे उसकी अभि चुदाई ऐसी नहि हुईँ हैं, जैसीआम रन्डी कि हौ जाती हैं। अभि भि वोँ घऱ कां माल हि थि, माथुर नें सहीकहा थां। उसकी चुतड़ों कां भि मैंने जायजा लिया, गोल-गोल, रसीले गद्देदार। उन चुतड़ों कों हल्के सें मैंने दबाया फ़िर उनपर एक् हल्की चपत लगाई। मैंने उसकेचुत कों सुँघा, सुभानल्लाह…, क्याँ जवानी कि खुश्बू मिली मुझे मेरे लंड नें एक् अँगराई ली। मेरे मुँह सें निकला-“बहोत मस्तचीज होँ मेरीजान”, उसेअब तक चुपदेख मैंने कहा-“थोडा बात-चीत करतेरहो स्वीटी, वर्ना मज़ा नहि आयेगा। ” उसने कहा-“ठीक हैं सर”। मेरेमन नें मुझे उकसाया तोँ मे बोला, “अब ऐसे सर-सर नाँ करो। मुझे तुम् डार्लिंग बोलो, राजा बोलो, जानू बोलो, ऐसा कुछ बोलो”, तोँ मोनिका बोलि-“अभि ऐसासभी बोलने कि आदत नहि हुई सर, सौरी डार्लिंग”, फ़िर बोलि-“मे डार्लिंग नहि बोल पाउँगी, आप् मेरे सें बहोत सीनियर हें। ” मुझे मौकामिल गय़ा, मे तोँ अब मोनिका मे काजल कों देखरहा थां, सो मैंने कहा-“ठीक हैं, तौ तुम् मुझे अंकल तोँ कह सकती होँ?” मोनिका मुस्कुराई-“ठीक हैं अंकल”।
Hindi Kamuk story दोस्त की बिटिया की जिज्ञासा - Hindi Kamuk Story – New Episode
अब मैंने कहा-“मोनिका, आज मुझे अपनी झाँट बनाने दो, इसके तुम्हें मै, ५०० रु० औऱ दुँगा। वोँ चुपरही तोँ मैंने काजल सें कहा कि वोँ शेविंग किट औऱ पानी लें आए। काजल तुंरंत उठकरचली गई। वोँ जब तक आई, मैंने मोनिका कों बेड पे टौवेल बिछाउस पऱ बिठा दिया थां। मैंने मोनिका कों पहलेपलट कर घोड़ी बनने कों कहा, फ़िर पीछे सें उसकी गाँड़ औऱ चुत केँ आस-पास केँ बाल पहले कैंची सें काटकर फ़िर रेजर सें शेवकर दिया। बड़े प्रेम सें मैने उसकी झाँट बनाई थि, औऱसोच रहा थां काश एक् दिनयह साली काजल कि झाँट बनाने क मौका मिले तौ आनंदआए। मैंने मोनिका कों अब सीधा लिटा दिया औऱ साईड सें उसकी झाँटो कों कैंची सें काटने लगा। चुत कि फ़ाँक केँ ठीकउपर औऱ चुत कि होठ पे निकले बाल रेजर सें साफ़कर दिए। अंत मे मैंने उसके झाँटों कों दोनोतरह सें छिलना शुरु किया। सीधा-उल्टा दोनो तरफ़ सें रेजरचला कर मैंने उसकी झाँट दोनो साईड सें छील दि, औऱ बीच मे जोँ जैसे थां छोड़ दिया। लगभगदस मिनटबाद मोनिका कि चूत एक् दम साफ़ होँ चमकउठी थि, उसके चूत केँ ठीकउपर सें जहाँ सें लड़कियों कि झाँट शुरु होती हैं वहा तक लगभगआध इंच चौड़ी एक् पट्टी केँ तरहअब झाँटबची हुई थि। नाप केँ हिसाब सें बोलूँ तौ लगभगतीन इंच लम्बी औऱ आधाइंच चौड़ी औऱ लगभग पौना-एक् इंच लम्बी झाँटों सें अब मोनिका कि चूत कि सुन्दरता बढ़ गई थि। मे अपने कलाकारी सें संतुष्ट हौ कर कहा-“देख लो काजल, यही हैं, लैंडिंग स्ट्रीप, दुनिया कि सबसे अधिक मशहूर झाँट कि स्टाईल”मोनिका कि भि नजरें मेरेकला कि दाददे रहीं थि। मैंने कहा-“मोनिका, जाओ एक् बार फ़िर सें चुतधो करआओ। ” वोँ टौवेल मे अपनेकटे हुए झाँटों कों लें कर बाथरूम मे चली गई,। काजल भि शेविंग किट रखनेचली गई,, तौ मैंने अपने कपड़े उतारदिए, औऱ पुरीतरह सें नंगा होँ कर अपना लंड सहलाने लगा। मे सोचरहा थां कि केसे काजल मेरा लंड देखेगी।
काजल पहले लौटी। मुझे नंगादेख थोडा हिचकी, पर्र मे बेशर्म कि तरह उससे नजरे मिलाकर लंड सें खेलते हुए बोला-“बैठो आहिस्ता डेढ़-दो घन्टे तोँ पेलुँगा हि उसको। अगर तुम्हें बुरालगे तौ तुम् चली जानां सोने केँ लिए। मुझे तोँ अपना रुपया भि वसूल करना हैं। ” काजल थोडा लजाते हुए कुर्सी पे बैठ गई,। मोनिका अब टौवेल सें अपनेचुत कों पोछते हुएरूम मे आई औऱ टौवेल कों एक् साईड फ़ेंक दिया। मैंने उसको कहा-“आओ मोनिका, जरा लंड सें खेलो एक् बार पहले निकाल दो, फ़िर तुम्हारी चुतचुस कर तुमको भि मज़ा दुँगा। कोई झिझकमत रखो। अब थोड़ी देरभूल जाओ कि तुम् कौल गर्ल हौ औऱ पैसे लें कर चुदाने आई होँ। आहिस्ता सेक्स करो, जैसे प्रेमी-प्रेमिका करते हें। तुम्हे भि मज़ा आयेगा औऱ मुझे हि। ” वोँ मेरे सामने घुटनों पे बैठ गयीँ, औऱ प्रेम सें मेरे लंड कों जौ अभि तक करीब ढीला हि थां अपने कोमल हाथों मे पकड़ लिया। मेरा लंड अभि कोई५” कां थां ढ़ीला सां, काला। उसनेदो चारबार अपनेहाथ सें पुरे लंड कों हल्का-हल्का खींचा औऱ फ़िर मेरे लंड कि टोप सें चमड़े कों पीछे करनेलगी। पऱ चमड़ा तौ पीछे टिकता तबजब लंड कड़ा होता, सो वोँ बार-बार आगे आँ जारहा थां। मेरेहाथ उसके कंधों तक फ़ैले बालों केँ संगखेल रहे थें। मोनिका नें फ़िर मेरे लंड कों मुँह मे लेँ लिया औऱ चुसने लगी। धीरे धीरे मेरे लंड मे सुरुर आनेलगा, वोँ अब थोडा खड़ा होँ रहा थां। लगभगदो मिनट कि चुसाई केँ बाद मेरा लंड ठीक सें खड़ा हौ गय़ा। उसकी पुरी लम्बाई लगभग८” थि। मोनिका भि मस्ती सें लंड चुसरही थि, औऱ मेरे अंड्कोष तथा झाँटों सें खेलरही थि। लड़की धंधे मे नई जरुर थि, पऱ लंड चुसने मे उस्ताद थि। मुझेखुब मज़ादे रही थि। मे मोनिका कि तारीफ़ कि, “वाउ मोनिका मज़ा आँ गय़ा, तुम् तोँ बहोत उस्ताद होँ दोस्त, वाओ, मज़ा आँ रहा हैं”। मोनिका नें एक् नजर मेरे सें मिलायी औऱ फ़िर मेरे लंड कों दोगुने जोश सें चुसने लगी। कोई ७-८ मिनट मे मुझेलगा कि मे झड़ जाऊँगा। मे अभि ५-७ मिनट औऱ रुककर झड़ना चाहता थां इसलिये मोनिका कों कहा-“आअह, अब रुको बेटा। मुझेजोर कि सु-सुआई हैं। ” मोनिका नें लंड मुँह सें बाहर् कर दिया। मे तौ थोडा टाइम चाहता थां कि लंड एक् बार थोडा रेलैक्स होँ लेँ तोँ फ़िर चुसवाऊँ, सो मे बाथरुम कि ओर नंगे हि चल दिया।
बाथरुम मे मे सुनरहा थां कि मोनिका औऱ काजलबात कररही हें। मोनिका नें उससे पूछा कि वोँ कब ज्वाईन करेगी? तब काजल नें कहा कि वोँ सिर्फ़ देखेगी अभि सभी। मोनिका नें कहा-“क्यूं आँ जाईए दिदी, आपको भि आनंद आयेगा”। पऱ काजल नें छोटा सां जवाब दिया, “नहि ऐसे हि ठीक हैं। ” मे समझ गय़ा कि यह साली काजल आसानी सें नहि चुदेगी, “साली कुतिया”, मे बड़बड़ाया। अब तक पेशाब करने केँ बाद मे लंड कों पानी सें धोया औऱ वोँ अब तक आधा ढ़ीला होँ चुका थां, जैसा मे चाहता थां। मे रुम मे आँ गय़ा, बेड पर्र लेटकर कहा-“यहा आँ जाओ औऱ चुसो, एक् पानी निकाल दो मेरी। तुम् भि तौ नीचेबैठ करथक गई, होगी। ” मोनिका नें फ़िर सें मेरे लंड कों मुँह मे डाला औऱ शुरु होँ गयीँ,। मे अब काजल साली कों उसकेहाल पर्र छोड़ मोनिका सें मजे लेने कि मुड मे आनेलगा थां। मेरे मुँह सें अनायास निकलने लगा, “वाउ स्वीटी, बहोत खुब…., अच्छा चुसती हौ लंड, मज़ा आँ गय़ा…”। मोनिका भि लंड मुँह सें बाहर् करके कहा-“थैक्यु, अंकल”, औऱ फ़िर सें चुसने लगी। मे बोलरहा थां-“बहोत खुब बेटा, चुसो औऱ खेलो इसकेसंग… आज तुम्हें बहोत मज़ा दुँगा, तुम् बहोत अच्छी होँ। थोडा हाथ सें भि करो रानी…मे तुम्हें सिखाऊँगा कि केसे मर्द कों खुश किया जाता हैं, वेरीगुड… ऐसे हि करो”मोनिका नें हाथ सें लंड सहलाना शुरु किया औऱ अंड्कोश कों चाटने लगी, “अब ठीक हैं, अंकल?” मैंने जवाब दिया-“हाँ बेटी, बहोत अच्छा… सहीकर रही हौ.आआआह्ह्ह्ह आनंद आँ रहा हैं, चुसेअब औऱ निकलकर सारामाल खा जाओ.”रगिनी जोरजोर सें अब लंड चुसरही थि। मे झड़ने कि स्थिति आने पऱ बेड सें उठा औऱ फ़िर मोनिका कों कहा, “मुँह खोलो बेटा, सभीखा जाओ”, औऱ उसके मुँह मे झड़ गय़ा। मोनिका भि सहयोग करतेहुए सारा निगल गई,, चुसचाट कर लंड साफ़कर दिया। लंड अब हल्के-हल्के ढीला होनेलगा।
मेरा पुरा ध्यान अब मोनिका पऱ थां, काजल कों मैंने उसकेहाल पे छोड़ दिया थां। मैंने अब मोनिका कों कहा कि अब वोँ धीरे-धीरे लेटे, औऱ मे अपनी ऊँगलियाँ उसकी ताजा ताजा साफ़ हुइ चुत पर्र घुमाई। उसकीचुत एक् दम गीली हौ गई, थि, ऐसा लगरहा थां कि पसीजरही हौ। मैंने एक् नजर काजल पे डाली, वोँ एक् टकबेड पे देखरही थि, उसकीनजर भि मोनिका कि चुत पऱ थि। मे झुका औऱ एक् प्यारा सां चुम्मा उसकेचुत कि फ़ाँक कि उपर कि साईड पऱ चिपका दिया, ’आनंदआया मोनिका बेटा?” हल्के सें काँपती आवाज़ मे उसनेकहा, “हाँ अंकल बहोत, आप् बहोत अच्छे हें”। मे अब अपनीजीभ उसकेचुत कि फ़ाँक पर्र घुमारहा थां औऱ नमकिन पानीचाट रहा थां। फ़िर मैंने उसके पैरों कों फ़ैला कर उसकीचुत खोलली औऱ उसकेचुत तौ चाटने चुसने लगा। मोनिका कभीअहह भरती, कभी सिसकती, तौ कभी एक् हल्का सां उउउउउउम्म्म्म्म्म्म आअह्ह्ह…। उसे मज़ाआने लगा थां। लड़की चोदते हुए मुझे लगभग२५ साल हौ गए थें, औऱ मे अपने अनुभव सें किसी भि रन्डी कों मस्ती करा सकता थां। मोनिका तोँ अभि भि बछिया हि थि मेरेलिए, जब कि मे एक् साँढ़, जौ शायदतब सें बुर चोदरहा थां जब सें इनकी माँ चुदाना भि नहि शुरु कि थि। मे अब मोनिका कों सातों आसमान कि सैर एक् संगकरा रहा थां। थोड़ी देरबाद मैंने मोनिका कि चुत सें मुँह हटाया। वोँ बिल्कुल निढ़ाल दिखरही थि। मैंने उसको तकिये केँ सहारे बिठा दिया औऱ अपने दाहिने हाथ कि बीच वाली ऊँगली चुत मे घुसा दि। फ़िरउपर कि तरफ़ उँगली कों चलाते हुए मोनिका केँ जी-स्पौट कों खोजना शुरु किया, औऱ तभी मोनिका कां जिस्म हल्के सें काँपा। मुझे अपनेखोज मे सफ़लता मिल गई, थि। मैने अपने उँगली सें चुत केँ भीतरउस स्थान कुरेदना शुरु किया तौ मोनिका मचलने लगी-“आआआआआअह्ह्ह्ह्ह अंकल, उउईईईमाँ…। इइइस्सस….। अचानक वोँ छटपटाई, अर फ़िर एक् दम सें ढीली हौ गई,। मे समझ गय़ा कि साली कों पहला चरमसुख मिल गय़ा। मैने ऊँगली बाहर् निकाल ली। उसको पहलीबार जी-स्पौट कां मज़ा मिला।
मोनिका एक् दम सें शांत होँ गई, थि। मैनें उसे पुकारा-“मोनिका बेटा, कैसालगा… कुछ बताओ भि। ” वोँ उठी औऱ मेरे सें लिपट गई, मुझे जवाबमिल गय़ा। हम् दोनों एक् एक् बारझड़ गए थें। मेरा लंड फ़िर सें मस्त हौ चुका थां। मैबेड सें उठा औऱ साईड टेबल पऱ रखेजग सें थोडा पानी पिया, औऱ मोनिका कि तरफ़ देखा तौ उसने इशारे सें पानी माँगा। एक् ग्लास पानी पीने केँ बाद उसके मुँह सें बोल निकले-“ओह अंकल, आज तक ऐसा नहि लगा थां। बहोत अच्छा लगा अंकल, थैंक्स। अभि तक तोँ मेरा एक्स्पीरियंस थां कि मर्दलोग धक्के लगालगा कर स्वयं आनंद लेते, पऱ मेरे मज़ाआने केँ पहले हि, शांत होँ जाते। आज पहलीबार पताचला असल सेक्स क्याँ हैं। ” मैंने काजल कि तरफ़ देखा। वोँ शांति सें सभीदेख रही थि, पर्र अब उसकी टाँगे थोड़ी आपस मे जोर सें सटी हुईँ लगी। उसकी भि चुत गीली हौ गयीँ, थि। मैंने उसी कों देखते हुए कहा-“अभि कहां तुम्हें पताचला हैं कि सेक्स क्याँ होता हैं। वोँ तोँ अबपता चलेगा जबइस लंड कों तुम्हारी चूत मे पेलकर तुम्हारी चुदाई करुँगा। जल्द सें तैयार होँ जाओ चुदवाने केँ लिए। ” मे अपने लंड कों सहला सहलाकर सांत्वना देरहा थां कि पप्पु जल्द नाँ कर, अभि लालमुनिया मिलेगी चोदने केँ लिए। दो मिनटबाद मोनिका बोलि-“आँ जाइए अंकल, मे सजधजकर हूं। ” वोँ तकिये पऱ सिररख कर सीधालेट गई,। मैंने उसके पैरों कों घुटने सें हल्का मोड़कर उपरउठा दिया जिससे उसके गीली गीली चूत एक् दम सें खुल गई। भीतर कां नन्हा सां गुलाबी फ़ूल सामने दिखरहा थां। मे उसकी खुली टाँगों केँ बीच आँ गय़ा औऱ अपने७२ किलो केँ शरीर केँ उसकेउपर लें आया। फ़िर अपने बाँएहाथ सें थुक निकाला औऱ अपने लंड कि फ़ुली हुइ सुपाड़ी पे लगाकर लंड मोनिका कि चूत पे सेटकर लिया, पूछा-“पेल दूँअब भीतर मोनिका?” उसकासिर हाँ मे हिला। “ठीक हैं फ़िर चुदो बेटा”, कहतेहुए मैंने लंड भीतर ठाँसने लगा। मोनिका हल्के सें कुनमुनाई। मैंने एक् जोर कां ध्क्का लगाया औऱ पुरा८” लंड भीतरपेल दिया। मोनिका कि आँख बन्द थि, “आआअह” मुँह सें निकली, औऱ उसनेआँख खोलकर भरपुर नजरों सें मुझे देखा। मैंने उसकेकान मे कहा-“जब मे चोदुँगा तोँ मुझेखुब गाली देना, मज़ा आएगा। ”
मैंने मोनिका सें पूछा-“कहो बच्ची, चोदूँ तुम्हें। ” औऱ काजल कि देख उससे पूछा-“दिखा साफ़-साफ़, नहि तौ एक् बार फ़िर बाहर् निकाल कर पेलूँ भीतर”। यह कहतेहुए मैंने लंड बाहर् खींचा औऱ दुबारा सें मोनिका कि चूत मे पेल दि। मोनिका केँ मुँह सें दुबारा आआआह निकली। काजलइस बार खड़ी होँ गई ताकिसभी साफ़देख सके। मोनिका नें काजल कों खड़ादेख बोला-“आईए नं दिदी आप् भि। अंकल बहोत अच्छे हें। ” आगेकुछ कहने सें पहलेहीं मैंने लंड कों चूत केँ बाहर् भीतर करके लौण्डिया कि चुदाई शुरुकर दि। काजल कां चेहरा चुदाई देख एक् दमलाल हौ गय़ा थां, पऱ वोँ सिर्फ़ खड़े-खड़े देखरही थि। मोनिका कों पहलीबार मेरे जैसे मर्द सें वास्ता पड़ा थां जौ लड़की कों खुबमजे लेँ कर चोदता हैं औऱ लड़की कों भि संग मे मजे देता हैं। मेरीआदत थि कि मे रन्डी भि चोदता तौ प्रेमिका बनाकर। जब भि किसी कों चोदा तोँ उसको अपनेलिए ईश्वर कां गिफ्ट माना औऱ उसके जिस्म कों पुरेमन सें भोगा। मैंने मोनिका सें कहा-“मज़ा आया मोनिका?”उसकी आँखबंद थि, होठ सें कांपती आवाज़ आई-“हाँ अंकल बहोत। आप् बहोत अच्छे हें। आअह अंकलअब थोडा जोर सें धक्का लगाकर चोदिए न्, जैसा धक्का लंड पेलते वक्तदिए थें। ” असल मे अभि ख्ब प्रेम सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर् करके उसकोचोद रहा थां। पुरा रुपया वसूल हौ इसकेलिए जरुरी थां कि उसकी चूत कम सें कमआध घंटा मेरे लंड सें चुदे। उसकेजोर कां धक्का लगाने कि फ़र्माईश पर्र मैंने ८-१० सौलिड धक्के लगाए औऱ धक्के पऱ मोनिका केँ मुँह सें अहह कि आवाज़ आई।
मैंने मोनिका सें कहा-“आँख खोल औऱ देख न् कौनचोद रहा हैं तुम्हे। मुझसे आँख मिला, कुछ बातकर नाँ। रन्डी हौ तौ थोडा रन्डीपना दिखा। ”उसे मेरीबात सें ठेस पहुँची शायद, पऱ वोँ आँखखोल कर बोलीं-“हाँ साले बेटीचोद, लुटो आनंद मेरे बुर कां साले। मेरे बाप कि उमर केँ होँ औऱ साले मुझेचोद रहे हौ। ” मुझे उसकी गालियों सें जोश आँ गय़ा-“चुप साली फाड़ दुँगा तेरी बुर आज। साली कुतिया। मुझे बेटी-चोद बोलती हैं। बाप सें चुदा-चुदा केँ जवान हुइ हौ साली औऱ मुझेबोल रही हैं बेटी चोद…लेँ सालीचुद, औऱ चुद, औऱ चुद, रन्डी साली। ’ औऱ मैंने कई जोरदार धक्के लगादिए। ८-१० मिनट चोदने केँ बाद मे थोडा थक गय़ा तोँ लंड बाहर् निकाल लिया औऱ बोला-“अब बेटा तुम् मेरेउपर बैठकर चोदो, मुझे थोडा आहिस्ता लेटने दो, फ़िर मे चोदुँगा”। उसने कहा-“ठीक हें अंकल” औऱ मेरेउपर चढ़कर बैठ गई। काजल बार-बार अपनेपेर सिकोड़ रही थि, उसकी बुर भि गीली थि, पऱ उसमें गजब कां धैर्य थां। खड़े-खड़े हि वोँ हुम दोनों कि चुदाई देखरही थि चुपचाप। मोनिका केँ मुँह सें हुम्म्म हुम्म्म कि अवाज निकलरही थि पर्र वोँ मेरे लंड पर्र उछलउछल कर स्वयं हि अपनी चूत चुदारही थि। मे ऐसी मस्त लौन्डिया कों पाकर धन्य होँ गय़ा। कुछदेर बाद मैंने कहा-“चल साली, अब घोड़ी बन। घुड़सवारी करने कां मन हैं। ” वोँ बोलि-“जरुर अंकल, आपकेलिए तोँ आप् जौ कहो करुँगी। आपने मुझे सच्ची मज़ा दिया हैं औऱ मुझे पहलीबार रन्डीपन कां मज़ामिल रहा हैं। ” औऱ वोँ बड़े प्रेम मेरेउपर सें उठी औऱ फिनबेड सें उतरकर जमीन पर्र हाथ-घुटनों केँ सहारे झुक गई। वोँ अब काजल केँ बिल्कुल पास झुकी हुइ थि। उसकी खुली हुईँ चूत अपने भीतर कि गुलाबी कली केँ दर्शन करारही थि।
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