maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 1 - TEASER
आईईईईईईईईई……। भाबीईईईईईईई……….मररररर…। गय्ाआ….रीईईईईईईईईईईईईईईईईईई……उफ़फ्फ़…उफ़फ्फ़….रुकूओ…प्लीज़… क्याँ हुआ मेरे शेर….कों…, मेरे लेडल देवेर कों…! पुच….!! मेरा राजा बेटा.!! क्याँ हुआ.? बताओ मुझे….? मोहिनी भाभी अपने लाड़ले देवर जी अंकुश केँ गाल कों प्रेम सें सहलाते हुए बोलीं.
अंकुश – अरे…उठो। जल्द…मेरा फटाजा रहा हैं…! आईईई….माआ…!
मोहिनी – अरे क्याँ फटाजा रहा हैं.…। ?
अंकुश – अरे भाभी ! समझाकरो… प्लीज़ उठो मेरेउपर सें। मेरा लन्ड फट गय़ा… अह्ह्ह्ह…
मोहिनी अपनी एक् मम्मों कों उसकेमूह मे ठूँसती हुईँ बोलीं- कुछ नहींफटा, लो इसको चूसो.सभी ठीक होँ जाएगा…!
कितना नाटक करता हैं यह लड़का। उफ़फ्फ़… सांड होँ रहा हैं, अभि भि कहता हैं फटाजा रहा, अरे तुम्हारी उमर केँ लड़के कोरी बुर कों भोसड़ा बना देते हें, औऱ यहलाट साब… उफ़फ्फ़… हांऐसे हि चूसो… इस्से… खा.जाओ… शाबाश… यह हुई नां मर्दों वाली बात.आहह-आहह…। फिन धीरे-धीरे सें औऱ थोडा सां दबाबडाल दिया अपनी 36” कि सेक्सी गान्ड कां उसके लन्ड केँ उपर औऱ आधे लन्ड कों अपनी बुर केँ अंदरकर लिया…! एक् बच्चे कि मम्मी मोहिनी कि बुर भि आधे लन्ड मे हि पानी बहाने लगी, क्योंकि उसके लाड़ले देवर जी कां लन्ड थां हि इतना मोटा औऱ तगड़ा। मोहिनी भाभी केँ दबाब डालते हि अंकुश नें उसकी बूब्ज़ कों मुँह सें बाहर् निकाल कर एक् बारफिन सें चीख उठा…भाभी… आईईई…मान जाओ नां…। दर्द हौ रहा हैं…प्लीज़…! अभि भि दर्द होँ रहा हैं… लोइसे चूसो, औऱ उसने दूसरे मम्मों कों उसके मुँह मे भर दिया… औऱ उसके माथे कों चूमते हुए उसके बालों कों मसाज देती हुइ, आँखबंद करके पूरी गान्ड उसकी जांघों पऱ रख दि…। एक् संग दोनो कि हि चीख निकल गयीँ,, औऱ अब वोँ लंबी-लंबी साँसें लें रहे थें। मोहिनी अब शांति सें उसकी जांघों पऱ अपनी गान्ड कों लन्ड पऱ रखकर बैठी थि, फिन उसके चेहरे केँ उपरझुक कर उसके होंठो कों चूम लिया औऱ शरारती स्माइल अपने होठों पर्र लाकर बोलि – सच मे बड़ा कमाल कां लन्ड हें मेरे प्यारे देवर जी कां। एक् बच्चे कि मम्मी कि भि ऐसी कि तैसीकर दि इसने तौ…एकदम खम्भे जैसा धंसापड़ा हैं…। हम्म्म…!
अंकुश – यह आपका हि सभी कियाधरा हैं… 5 साल सें मालिश कररही हौ आप् तोँ होगा हि नां.!
मोहिनी – हम्म्म … वोँ तोँ हैं। वैसेअब दर्द तोँ नहीं हौ रहा न् मेरे प्यारे देवर जी कों…!
अंकुश – अभि थोडा सां फील होता हैं। कभी-कभी, पऱ अधिक नहीं हैं.
मोहिनी – तोँ फिन शुरुआत करेंअब। औऱ उसने अपनी गान्ड कों धीरे-धीरे सें उपर उठाया, औऱ उसकेआठ इंच केँ लंबे लन्ड केँ सुपाड़े तक अपनी बुर केँ मूह तक लें आई, औऱ फिन धीरे-धीरे सें बैठ गयीँ, …!
दोनो केँ अंगों मे इतनी जोरदार सुर सुराहट हुइ कि एक् संग दोनो कि सिसकी एक् संग निकल गयीँ, औऱ उनकी आँखें उन्माद मे मुंद गई… ईईीीइसस्स्स्स्स्शह……आअहह….सस्स्सुउउऊहह…। मेरे बूब्स कों मस्लो देवर जीजी… बहोत मजा आँ रहा हैं…। हाँ.ऐसे हि बस करतेरहो। आँ… औऱ जोर सें ईईई….आहह-आहह… अब आहिस्ता उसके उठने बैठने कि गति बढ़ती जारही थि…। अंकुश जिसकी आज जिंदगी कि पहली चुदाई थि… वोँ तोँ पता नहींकौन सें लोक मे थां आज… उसकी प्यारी भाभी नें आज अपना वायदा जौ पूरा किया थां… कुछदेर मे हि मोहिनी कि बुर नें पानी बहाते हुए हथियार डालदिए औऱ वोँ अपने लाड़ले देवर जी केँ उपरपसर गयीँ,। अंकुश कों लगा कि पता नहीं भाभी कों क्याँ हुआ, घबराकर उसने उसके कंधे पकड़कर हिलाया, भाभी.भाभी… क्याँ हुआ आपको… ?
वोँ मस्ती मे कुन्मुनाई, औऱ धीरे-धीरे सें अपनी बोझिल आँखों सें उसकीओर देखा औऱ मुस्कुराकर बोलि… मुझे तौ कुछ नहींहुआ, बसइस कोरे करारे मूसल कि मार मेरी मुनिया अधिकदेर झेल नहींपाई इसलिये थोडा सुस्ता रही थि.
अंकुश – मगर मे क्याँ करूँ, मेरा लंड तोँ फटाजा रहा हैं, अब इसका क्याँ होगा.?
मोहिनी – अरे! तोँ मे हूं नाँ, यह तौ बस शुरुआत थि, इसके उद्घाटन कां.असली खेल तोँ अब शुरुआत होगा…मगर प्यारे, अब तुम्हें मेहनत करनी होगी.ठीक हैं? औऱ वोँ उसकेउपर सें साइड मे लुढ़क गयीँ, औऱ अपनी टाँगें चौड़ी फैलाकर लेट गई,। लो आँ जाओ, औऱ बुझालो अपने लंड कि प्यास मेरी नाजुक बुर चोदकर, मगर प्रेम सें। समझे, तुम्हारा मूसल ज्यादा कुटाई नाँ करदे मेरी ओखली कि… अंकुश कां बुराहाल होँ रहा थां, अब उसको जितनी जल्द हौ अपने लन्ड कों शांत करना थां, वरना दर्द सें फटने कां ख़तरा बढ़ने लगा थां। उसने भाभी कि टाँगों केँ बीच घुटने मोड़कर बैठते हि आव नाँ देखाताव अनाड़ी कि तरह… लिसलीसी बुर केँ उपर अपना सोता सां लन्ड अड़ा दिया औऱ लगा धक्का देने…। वोँ तोँ अच्छा हुआ कि दोनो हथेलिया भाभी केँ दोनो साइड होकर बिस्तर पऱ टिक गयीँ, औऱ वोँ चोदु गिरने सें बच गय़ा, वरनाआज भाभी कां मुँह कां सूजना तय थां उसकेसर कि चोट सें। हुआयूँ कि, पट्ठे कों चुदाई कां कोई आइडिया तोँ थां नहीं, उसने सोचा लंड बुर केँ उपर तोँ रख हि दिया हैं, चला हि जाएगा अंदर जैसे कि बुर मूह खोले उसके लंड कां हि इंतेज़ार कररही होँ। जैसे हि आवेश मे आकर धक्का लगाया, चिकनी होँ रही बुर, सर्ररर… सें फिसलता हुआ लंड भाभी कि नाभि केँ छेद मे जालगा…
ईीीइसस्स्शह…। क्याँ करते होँ मेरे अनाड़ी देवरु…? हटो ज़रा….!! वोँ थोडा उपरहुआ तोँ भाभी नें अपनी पतली उंगलियों सें अपनी बुर केँ होठों कों खोला औऱ बोलीं – लोअबकुछ दिखरहा हैं…?
अंकुश – आहह-आहह… भाभी अंदर सें क्याँ मस्त लाल-लाल दिखरही आपकी बुर… अहहजी कररहा हैं, इसेखा जाउ…!
मोहिनी – अह्ह्ह्ह… तौ रोका किसने हैं… खाजाओ नां.!
अंकुश नें झट सें उसकीलाल अंदरूनी दीवारों कों अपनी खुरदूरी जीभ सें खूब ज़ोरलगा कर रगड़ दिया…। आअहह…….हाइईईईईई….माँ…। उफफफ्फ़…यह कर डाला….अब चूसो ईसीई…खा जाओ…मेरे प्यरीए…हाँ। ऐसी। हि…चूसो…अपनी जीभ घुसा दो…औऱ अंदर….सस्सिईईईईई….आईई…अंम्म्म………मर गई। अंकुश नें मज़े-मज़े मे अपनी प्यारी भाभी कि बुर केँ पटों कों अपनेमूह मे भर लिया औऱ उसको ज़ोर सें दाँत गढ़ादिए… नहि ई…इतनी ज़ोर सें मत काटो…
अब मोहिनी भाभी सें कंट्रोल करना मुश्किल हौ रहा थां, अंकुश तोँ बावलों कि तरहलगा थां, उसकोकुछ ठीक सें सूझ हि नहींरहा थां, जहाँ नज़र जाती, भाभीउसे जन्नत हि लगने लगती औऱ उसी मे डूबने लग जाता। मोहुनी नें उसके बाजू पकड़कर अपनेउपर खींच लिया औऱ उसके होठों कों चूमकर बोलीं – आहह-आहह… अबदेर मतकरो… लो डालो इसमें औऱ अपनी बुर कि फांकों कों खोल दिया…अब अंकुश कों समझआया कि असल मे बुर कां छेदकौन सां हैं, तौ उसने अपने लन्ड कां सुपाडा उसकेमूह पर्र रखा, उसका लन्ड इतना गर्म होँ चुका थां मानो, किसी भट्टी सें निकाल केँ लाया हौ। अब आहिस्ता आरामसे इसको अंदर डालो… देवरु जी…। हाआँ … ऐसे हि… आहिस्ता… हां। डालते जाओ…हां बस… रूको ज़रा…आअहह… कितना गय़ा… ईसस्शह… फिन उसने स्वयं हि अपनी उंगलियों सें टटोलकर चेक किया। अभि तीन-चौथाई लन्ड हि अंदर गय़ा थां, औऱ मोहिनी कि चुदी-चुदाई बुर ऐसी ठसाठस भर गयीँ, थि, मानोअब उसकी ख़्वाहिश हि नां होँ औऱ लेने कि.
मोहिनी – हांअब धीरे-धीरे- धीरे-धीरे पहले इतने सें हि अंदर-बाहर् करोइसे.
अंकुश नें उतना हि लन्ड अंदर-बाहर् करना शुरुआत कर दिया, कुछ देर मे हि भाभी कों मजाआने लगा औऱ उसने नीचे सें अपनीकमर उचकाना शुरुआत कर दि… अंकुश औऱ भाभी चुदाई मे ऐसेखो गये कि उन्हें पता हि नहींचला कि कब पूरा लन्ड उसकी बुर मे चला गय़ा, अब उसको उसका सुपाडा अपनी बच्चेदानी केँ मुंहाने पऱ फील होनेलगा थां। अंकुश कों अब अपनेउपर कोई अंकुश नहींरहा, औऱ अपनी हथेलियों कों पलग पऱ जमाकर पूरी ताक़त सें तेज-तेज धक्के लगाने लगा, मज़े नें उसेअब सभी सिखा दिया.आज कि चुदाई केँ आगे मोहिनी भाभी कों अपनी जीवन कि अब तक कि करी सारी चुदाई फीकी लगनेलगी थि। वोँ एक् बार औऱ झड चुकी थि, मगर अपने प्यारे देवार कों उसने नहि रोका। चाहे जोँ होँ जाएआज वोँ उसको खुशी देकर हि रहेगी। उसने थोडा उसके सीने पर्र हाथ रखके रुकने कां इशारा किया, औऱ अपनेउपर सें हटाकर वोँ उल्टी हौ गई, औऱ अपनी सेक्सी गान्ड कों अंकुश केँ लंड केँ आगे करके डॉगी पोजीशन मे पेट केँ बललेट गई। अंकुश कों अब औऱ कुछ सोचने औऱ समझने कि ज़रूरत नहीं थि, उसे तोँ बसअब सिर्फ़ बुर कां छेद हि दिखाई देरहा थां। झट सें पीछेआया, औऱ सट सें एक् हि झटके मे पूरा लन्ड पेल दिया भाभी कि रसीली बुर मे। भाभी केँ मूह सें फिरसे एक् मादक कराह निकली, मगरउसे रोका नहीं.इस पोज़ मे अंकुश कों औऱ अधिकमजा आँ रहा थां, उसके धक्कों कि स्पीड इतनीतेज थि, कि अगरकोई गिनना चाहे तोँ डेफनेट्ली नाकाम होँ जाएगा। आख़िरकार उसको अपनी मंज़िल नज़रआने हि लगी, उसकोलगा जैसेकोई बहोत बड़ा झंझावात सां उसके पैरों सें उठरहा हैं, जौ झटके मारता हुआ, लन्ड केँ रास्ते भाभी कि बुर मे देदनादन पिचकारियाँ छोड़ने लगा।
बाप रे ! इतनामाल, लन्ड अंदर होतेहुए भि बुर सें बाहर् घी जैसा उसकामाल रिसने लगा औऱ भाभी कि जांघों सें पिंडलियों तक बहनेलगा। उसकी पिचकारी कि धार सें भाभी भि मस्त होकरफिन एक् बार झड़ने लगी औऱ इतनी झड़ी कि उसकी पूरी टंकी खाली होँ गई, औऱ वोँ औंधेमूह पलंग पर्र पसर गई,। अंकुश भि भाभी कि चौड़ी पीठ पर्र हि लद गय़ा, औऱ हाँफने लगा.कुछ देरऐसे हि बेसुधि मे दोनो पड़ेरहे, फिन वोँ भाभी कि बगल कों पलट गय़ा, तब उसका लन्ड पच… कि आवाज़ केँ संग बुर सें बाहर् आया। अपनेआधे खड़े लन्ड कों भाभी कि कमर सें सटाये, उसकीपीठ पर्र अपना एक् हाथ औऱ जांघों पऱ अपनी एक् टाँग चढ़ाकर वोँ भाभी कि बगल मे पड़ा-पड़ा सो गय़ा….!!
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UPDATE 2
शंकर, गाँव केँ अति-प्रतिष्ठित शख्स थें, एक् बार कों अपनाकाम भले हि बिगड़ता रहे, मगर अगरकोई सहायता माँगने इनके दरवाज़ा पर्र आँ गय़ा, तौ खालीहाथ तोँ कम-सें-कम जाएगा नहि। यथासंभव उसेयहा सें सहायता अवश्य मिलेगी। उनकीइसी नेक-नीयत केँ चर्चे आस-पास केँ सब गाँवों मे थें। अपने जमाने केँ इस गाँव केँ वोँ सबसे ज्यादा शिक्षित आदमी थें औऱ गाँव केँ हि विद्यालय मे शिक्षक केँ तौर पर्र कार्यरत थें। अपने पिता केँ चारों बेटों मे सबसे बड़े शंकर, शिक्षा कां महत्व जानते थें, इसी कारण अपने छोटे भाइयों कों भि पढ़ने केँ लिए प्रोत्साहित किया करते थें, मगर वोँ पढ़ नहींपाए। दो बहनें भि थि जौ तीन भाइयों सें छोटी थि, लड़कियों कों उस जमाने मे ज्यादा पढ़ाया लिखाया नहीं जाता थां, फिन भि उनके कहने पऱ गाँव कि आठवी क्लास तक कि शिक्षा उन्हें दिलवाई हि दि। पिता केँ देहांत केँ बाद सारे परिवार कि ज़िम्मेदारी उनको हि उठानी पड़ी, हालाँकि सब भइया बहनों कि शादियाँ तोँ पिता केँ सामने हि हौ गयींथीं.
शंकर कि पत्नि विमला नें अपनीतरफ सें पूरी कोशिश कि परिवार कों एक् सुत्र मे बाँधने कि, मगर छोटे भाइयों केँ विचार नाँ मिलने केँ कारणसब परिवार अलग-अलग रहनेलगे। पिता लंबी-चौड़ी जायदाद छोड़कर गये थें, सो बराबर-बराबर हिस्सों मे बाँट दि गयीँ,। चूँकि शंकर टीचर भि थें तोँ दूसरों सें कुछ अधिकअमन सुकून सें थें, उपर सें उनके बच्चे भि अब बड़े हौ चुके थें.
शंकर केँ तीन बेटे औऱ एक् बेटी थि, बेटी दो बेटों केँ बाद पैदा हुइ थि औऱ उसकेबाद फिन एक् औऱ बेटा। सबसे छोटा बेटा जिसका नाम अंकुश हैं, जब आठवीं क्लास मे पढ़ता थां, तब उसके सबसे बड़े भइयाराम कि विवाह हुइ, विवाह केँ वक्तराम शहर मे रहकर ग्रॅजुयेशन कररहा थां.
दूसरे भइया कृष्णा क्लास 12 मे पढ़रहा थां, बेहनरमा अपने भइया कृष्णा केँ संग हि साइकल पऱ बैठकर उसी केँ विद्यालय मे पढ़ती थि, जोँ इस वक़्त क्लास 10 मे थि। शंकर अपनेसब बच्चों कां समानरूप सें ध्यान रखते थें, औऱ उनकीहर जायज़ माँगों कों पूरा करने कि कोशिश करते जिससे उनके बच्चों कों अपना भविष्य बनाने मे कोई अड़चन नाँ आए। गाँव मे उस दौरान शादियाँ छोटीउमर मे हि कर दि जाती थि.
विवाह केँ टाइमराम कि पत्नि मोहिनी क्लास 12 मे पढ़रही थि, नईबहू केँ घऱआने केँ तीसरे दिन हि उनके मायके विदाकरा लेँ गये औऱ ससुराल आने कां मुहूर्त करीब-करीब दोसाल बाद कां निकला। विवाह केँ वक्त मोहिनी एकदम पतली दुबली कमजोर सि लड़की, लगता थां मानो किसी लकड़ी केँ फ्रेम पर्र बनारसी साड़ी टाँग दि होँ, औऱ वैसे भि कुछ अधिक वक्त अपनी ससुराल मे गुज़ार भि नहींपाई, यह भि हौ सकता हैं कि राम अपनी पत्नि कि शक्ल भि देख पाया थां कि नहि। अब गाँव केँ रस्म-रिवाज तौ निभाने हि थें.
बेचारा राम! विवाह हुईँ नाँ हुई एक् बराबर। खैरघऱ परिवार केँ लिए तौ खुशी कि बात थि, उनके भरे-पूरे परिवार मे वोँ सबसे पहली विवाह जौ थि, तौ स्वाभाविक थां कि खूब धूम-धाम सें खुशियाँ मनाई गयीँ,। सब चाचा भतीजों नें खूब बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विवाह केँ एक् साल केँ अंदर हि राम कां ग्रॅजुयेशन पूरा होँ गय़ा औऱ अब वोँ बी.एड। कि पढ़ाई मे जुट गय़ा, पिता कां प्लान उसको किसी कालेज मे लेक्चरर बनाने कां थां.
अब कृष्णा भि बड़े भइया केँ पासशहर पहुँच गये थें अपने ग्रॅजुयेशन करने केँ लिए, सभी कुछसही चलरहा थां, कि नाँ जाने विमला कों किसी बीमारी नें घेर लिया, उन्होंने खाट हि पकड़ लिया, बहोत इलाज कराया मगरकोई फ़ायदा नहींहुआ। मोहिनी केँ ससुराल आने कि तिथि मे अभि 6 महीने बाकी थें मगर मां कि हालत दिनोदिन गिरती देख पापा नें बेटे कां गौना अति-तुरंत करने केँ लिए अपने समधी सें बात कि। वोँ भि भलेलोग समस्या कों समझ, राज़ी हौ गये औऱ आनन-फानन मे बेटे कां गौनाकरा लिया, बहू केँ आते हि मम्मी विमला परलोक सिधार गयीँ,.
मोहिनी अभि स्वयं भि एक् बच्ची हि थि, जौ अभि 19 वेसाल मे चल हि रही थि, उसको अपने छोटी ननदी औऱ देवर जी कों अपने बच्चों कि तरह संभालना थां.
केसे?यह उसकीसमझ मे नहि आँ रहा थां। पति शहर मे रहकर शिक्षा लें रहे थें, ससुरजी सें घूँघट करना पड़ता थां। ससुरजी बहू केँ बीच कां कम्यूनिकेशन ज्यादा तर छोटे बेटे अंकुश केँ याँ ननदीरमा केँ माध्यम सें हि होता थां। वैसे ननदी- भौजाई मे 3-4 साल कां हि एज डिफरेन्स थां, रमा नें समझदारी दिखाते हुए, अपनी भाभी कों अपनी साथी कि तरह बर्ताव करना शुरुआत कर दिया, जिसके चलते मोहिनी कां दिलइस घऱ मे लगनेलगा, औऱ जल्द हि वोँ परिस्थितियों केँ हिसाब सें ढलनेलगी। कुछ हि दिनों मे अंकुश कां अपनी भाभी केँ प्रति एक् मां बेटे जैसा लगाव होँ गय़ा, अब वोँ उसकीहर ख्वाइश कां ध्यान रखती, अंकुश भि हर छोटी बड़ी ज़रूरतों केँ लिए अपनी भाभी कों हि बोलता.
देवर जी भाभी कां लगाव इतनाबढ़ गय़ा कि अब उसको अपनी भाभी केँ दुलार केँ बग़ैर नींद नहींआती थि, कभी-2 तौ वोँ उसकीगोद मे हि सररखकर सो जाता थां। फिन वोँ बेचारी सोतेहुए कों जैसे-तैसे उठाकर उसके पलंग तक पहुँचाती याँ फिन वोँ स्वयं भि उसकेबगल मे हि सो जाती। मोहिनी अब विवाह केँ टाइम वाली दुबली पतली लड़की नहि रही थि, बीते डेढ़ सालों मे उसकेबदन मे काफ़ी बदलाव आँ गय़ा थां, वोँ अब एक् खूबसूरत नयन नक्श कि गोरी-चिट्टी मध्यम हाइट काठी 5’5” कि कद 32-26-32 केँ फिगर वाली सुन्दर युवती होँ गयीँ, थि।
पतले-पतले गुलाबी होठ, गोल चेहरा, हल्के भरेहुए गुलाबी गाल जिनमें दोनों साइड हँसने पर्र डिंपल पड़ते थें, सुराहीदार लंबी गर्दन, कमर तक लंबेघने काले स्याह बाल, कुल मिलाकर एक् बहोत हि ख़ूबसूरत लड़की थि। ससुराल आने केँ बाद अंकुश नें जब अपनी भाभी कों बिना घूँघट केँ देखा तौ वोँ उसे किसी देवी केँ तरह, औऱ वहीछवि उसने अपने मन-मस्तिष्क मे उसकी बिठाली.
पति-पत्नि कां मिलन उनकेआने केँ भि काफ़ी दिनों केँ बाद हि हुआ थां, क्योंकि सासू केँ देहांत केँ बादकुछ महीनों तक तोँ सबशोक संतप्त हि थें। रामजब भि घऱआते थें, तोँ जैसे-तैसे सकुच-संकोच करके टाइम निकाल पाते, उपर सें दुलारा देवर जी, जौ हर वक़्त अपनी प्यारी भाभी केँ दामन सें हि चिपका रहता थां। मम्मी कां दुलारा, सबसे छोटा बेटा हि होता हैं, उनकीमौत केँ बाद भाभी उसको संभालने मे कोईकसर नहि रखना चाहती थि, बेचारे राम मोहन संकोच वशकुछ कह भि नहि पाते थें, बिन मम्मी कां बच्चा वोँ भि छोटा भइया, कहें भि तोँ क्याँ?
बहू केँ घऱ मे रहते, पिता घऱ मे कम हि आते थें… उनका ज्यादा तर टाइम तोँ विद्यालय मे बच्चों केँ बीच, उसकेबाद खेती-बाड़ी कि देखभाल मे हि चला जाता थां। घऱ वोँ बस खाने केँ लिए हि आते थें। ससुराल आने केँ तीन महीने तक भि उनकी सुहागरात कां कोई अता-पता नहीं थां, फिन एक् दिनरमा जोँ अबऐसी परिस्थितियों कों समझने लगी थि, उसने इशारों-इशारों मे अपने छोटू (अंकुश कों प्रेम सें सब छोटू हि बुलाते थें) कों समझाने कि कोशिश कि.
अगर आप् लोगों कि इजाजत हौ तोँ यहा सें यह किस्सा अंकुश (छोटू) कि ज़ुबानी शुरुआत करता हूं। इजाजत हैं नाँ? ओके?
हम् राम भैया कों बड़े भैया औऱ कृष्णा भैया कों छोटे भैया कहकर बुलाते हें। बड़े भैया हर शनिवार कि सामघऱ आते थें, औऱ मंडे अर्ली मॉर्निंग निकल जाते थें। एक् दिन शनिवार देरसाम कों भैया घऱआने वाले थें, मे औऱ भाभीआपस मे बातें करतेहुए, मस्ती मज़ाक भि कररहे थें। भाभीजब हँसती हें तोँ उनके दोनों गालों मे गड्ढे (डिम्पल) पड़ते हें, मे उनमें अपनी उंगली घुसाकर हल्के- हल्के सहला देता थां, तोँ भाभी औऱ अधिक मस्ती करने लगती। तोँ उसदिन भैया आने वाले थें, रमा दिदी नें मुझे इशारे सें अपनेपास बुलाया औऱ बोलि – छोटू! भैया मेरी एक् बात मानेगा.?
मे – हां ! दिदी कहो क्याँ बात हैं…?
रमा दिदी – बड़े भैया जबआते हें नां तब तुँ नाँ ! थोडा भाभी सें अलगरहा कर.!
मे भोलेपन सें बोला – क्यूं दिदी? ऐसा क्यूं बोलरही हौ? उन्होंने तौ मुझेकभी ऐसा बोला नहि!
रमा दिदी – भाभी लज्जा कि वजह सें कुछ नहि बोलती, तूँ नाँ! उतने वक्त मेरेपास आकरपढ़ लियाकर.
मे – नहि दिदी ! मुझे तोँ भाभी केँ पासबैठ कर पढ़ना अधिक अच्छा लगता हैं.
रमा दिदी – ओफफफू…तूँ समझाकर पागल.देख भैया उनके पति हें नाँ.
मे – तोँ उसमें क्याँ? मे थोड़ी नां उनको भाभी सें बात करने केँ लिए नां बोलता हूं!
रमा दिदी – तूँ बिल्कुल पागल हि हैं… अरे बुद्धू पति-पत्नि अकेले मे हि ज्यादा अच्छे सें बातकर पाते हें। अबबोल मानेगा नां मेरीबात.
मे – ठीक हैं दिदी, मे भाभी सें बोलकर आपकेपास आँ जाऊंगा। मगर भाभी कि तरह आपको मेरेसंग मस्ती करनी पड़ेगी जबबोर होँ जाऊंगा तौ.
रमा दिदी – ठीक हैं! मेरा प्यारा छोटू कितना समझदार हैं। चलअब तूँ खेलने जा औऱ आज हम् दोनों रात कों एक् संगबैठ कर पढ़ेंगे। ओके?
मे उनकोओके बोलकर बाहर् खेलने चला गय़ा। वैसे मे बहोत कम हि संग केँ मोहल्ले केँ बच्चों केँ संग खेलता थां, क्योंकि वोँ सभी आवारा किस्म केँ थें, पढ़ने लिखने सें उनकोकोई मतलब नहि थां। उनके परिवार मे भि कोई पढ़ने लिखने वाला नहि थां, जोँ उनको रोके। इसलिये पापा ज्यादा खेलने भि नहि देतेऐसे बच्चों केँ संग.
उस दिनदेर साम भैया घऱआए, हम् सभी नें मिलकर खानां खाया, पापा नें भैया सें दोनों भाइयों कि पढ़ाई लिखाई केँ बारे मे बात-चीत कि फिनकुछ देर खाने केँ बाद भि बैठेसंग मे। भाभी औऱ दिदी नें मिलकर घऱ कां काम निपटाया, फिनजब बाबूजी, बाहर् चलेगये तोँ दिदी नें मुझे अपनेपास पढ़ने केँ बहाने सें बुला लिया। हम् दोनों पढ़ाई मे लगगये। जब हम् सभीवहा सें चलेगये, भाभी रसोई मे बर्तन साफकर रही थि, भैया नें चुपके सें उनको पीछे सें जकड़ लिया औऱ उनकेगले पर्र किसकर लिया। अचानक बिना किसी उम्मीद केँ भाभी कों एक् झटका सां लगा औऱ वोँ हड़बड़ा करपलट गई,, हड़बड़ाहट मे उनकासर भैया कि नाक मे लगा, भैया हाथों सें नाक दबाए खड़ेरह गये, दर्द सें उनकी आँखों मे पानी आँ गय़ा। भाभीझट सें उनके पैरो मे गिर गई, औऱ गिडगिडाते हुए बोलीं - सॉरीजी! माफकर दो! मुझे नहि पता थां कि आप् इसतरह सें! मे डर गई, थि कि पता नहि कौन…आँ गय़ा…?
dosto I'm going too start a new kahani by the title: maira Pyara Devar - niyantran Please read and do send your response whether you like it aur not.
maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 3
भैया अपना दर्दभूल गये औऱ उन्होंने बड़े प्रेम सें उनके कंधे पकड़कर उठाया औऱ उनके माथे पर्र एक् किस करतेहुए बोले – कोईबात नहि मोहिनी ! गलती मेरी हि थि, मुझे तुम्हें आवाज़ देनी चाहिए थि। सभीचले गये थें तोँ मैंने सोचा कि आज तौ कुछबात हौ जाए तुमसे.
भाभी – छोटू भैया कहां हें.?
भैया – वोँ रमा केँ संगपढ़ रहा हैं… शायद हमारी बेहनअब समझदार हौ गई, हैं, उसने हि उसे बुला लिया थां। अबयहकाम बंदकरो, चलकर बातें करते हें। विवाह कों दोसाल सें ज़्यादा हौ गये अभि तक हम् मिले भि नहि हें, टाइम नष्ट नां करो प्रिय। चलोअब.
भाभी – आप् चलिएजी ! मे बस अभि यह बर्तन खतम करकेआती हूं.
भैया नें जाने सें पहले उनके हसीन सें मुखड़े कों जिस पर्र पानी कि कुछ बूँदें पद छिटककर आँ गई, थि, अपने हाथों मे लिया औऱ बड़े प्रेम सें एक् छोटा सां किस उनके होंठों पर्र कर दिया। आह्ह्ह्ह… जिंदगी कां पहलाकिस कैसा होता हैं? मोहिनी कों आजपता चला थां, वोँ सिहर गई, औऱ अपने आप् हि उसकी आँखें बंद हौ गयीँ,। भैया वहा सें चलेगये, मगर वोँ अभि भि वैसे हि खड़ीरही, जबकुछ देरकोई हलचल नहि हुईँ तब उसने अपनीसीप जैसी आँखें खोली, पति कों सामने नां पाकर वोँ स्वयं सें हि शरमा गई,, उसके चेहरे पर्र लज्जा कि लालीसाफ दिखाई देरही थि। कामखतम करके एक् बार मोहिनी नें रमा केँ कमरे मे झाँककर देखा, दोनों पढ़ने मे व्यस्त थें, खासकर मे, दिदी नें तिरछी नज़र सें भाभी कों देखा औऱ फिन पढ़ाई मे लग गई,। फ्रेश होकर भाभी नें आज थोडा श्रृंगार किया, अपने कों थोडा सजाया-सँवारा, आज आपने प्रियतम कि होने जोँ जारही थि। संग हि परमेश्वर सें मन हि मन मन्नत माँगी, कि आज उनके मिलन मे कोई बाधा नां आए.
भैया अपने कमरे मे अपनी प्रियतमा केँ प्रतीक्षा मे इधर सें उधरटहल रहे थें, एक् बेचैनी सि उनके चेहरे पर्र साफझलक रही थि। कोई आधे-पोने घंटेबाद मोहिनी कमरे मे आई, आहट पाकर भैया नें जैसे हि अपनी पत्नि कि तरफ देखा, वोँ जड़वत वहीं खड़ेरह गये। अपनी पत्नि कि सुंदरता कों आज वोँ इतने ध्यान सें देखपा रहे थें। भैया अपनी पालक झपकाना हि भूलगये!! पति कों यूँ अपनीओर निहारते पाकर, मोहिनी तोँ जैसे लज्जा सें गढ़ी हि जारही थि, वोँ वहींजड़ होकर कमरे केँ फर्श कों निहारने लगी। भैया हल्के कदमों सें चलतेहुए मोहिनी केँ पास पहुँचे औऱ अपनी हथेलियों मे उसके सुन्दर सें मुखड़े कों लेकरउपर किया औऱ उसके माथे कों चूमकर बोले- थोडा मेरीतरफ देखो मोहिनी… प्लीज़.
मोहिनी नें अपनी पलकें उपर कि औऱ अपने पति कि ओर देखा, मगर वोँ ज्यादा देर तक उनसे नज़रें मिला नहि सकी, औऱ फिन झुकाली। लज्जा औऱ रोमांच सें उसके होंठ थरथरा रहे थें। 5’11” कद वाले भैया चौड़ा सीना, नियम सें कसरत करने केँ कारण उनका शरीर एकदम हृष्ट-पुष्ट थां, शालीनता कि मिसाल ऐसी कि शायद हि उन्होंने अब तक किसी लड़की याँ महिला कि तरफआँख उठाकर भि देखा हौ। लोग उनकी शराफत केँ चर्चे उनके पिता सें भि किया करते थें, जिसे सुनकर उनका सीना फक्र सें चौड़ा हौ जाता थां। मोहिनी कि सुंदरता मे लीन वोँ अपनी शराफत कों भूलते जारहे थें, औऱ उनकाहक़ भि थां यह। उन्होंने मोहिनी कों अपने कलेजे सें चिपका लिया। मोहिनी उनकी ठोडी तक हि आती थि, पहलेबार अपने पति केँ सीने सें लगकरउसे ऐसालगा मानो दुनिया केँ सारे दुख-दर्द, भयसभी दूरभाग गयेहों। पति कि मजबूत बाँहों मे उसे स्वर्ग कि अनुभूति होनेलगी औऱ स्वतः हि उसकी पतली-पतली कोमल बाहें उनकीपीठ पऱ कस गयीँ,, वोँ अमरबेल कि तरह उनसे लिपट गयीँ,। कितनी हि देर वोँ दोनों एक्-दूसरे केँ आलिंगन मे क़ैद वहींयूँ हि खड़ेरहे, मोहिनी कां तोँ मन हि नहि हौ रहा थां उनको छोड़ने कां। मोहिनी केँ रूई जैसे रसीले अनछुए उरोजजब राम कों अपने सीने केँ निचले हिस्से पर्र फीलहुए, तौ उनकेबदन मे एक् अनजानी सि उत्तेजना बढ़ने लगी, औऱ उनके पाजामे मे क़ैद उनका सोयाहुआ शेरसर उठाने लगा, जिसका आभास मोहिनी नें अपनी जांघों केँ बीच किया, वोँ उनसे औऱ ज़ोर सें चिपक गई,। राम भैया नें मोहिनी भाभी केँ कंधे पकड़कर अपने सें अलग किया औऱ उसके हल्की लालीलगे पतले-पतले होंठों कों चूम लिया औऱ बोले – मे कितना नसीब वाला हूं, जोँ मुझे तुम् जैसी सुन्देर पत्नि मिली। मेरेपास शब्द नहि हैं मोहिनी! जोँ तुम्हारी सुंदरता कां बखानकर सकें, सच मे तुम् बहोत सुन्दर होँ!!! मोहिनी भाभीचाह कर भि कुछबोल न् सकी, उसके होंठबस थरथरा कररहगये औऱ वोँ फिन सें राम भैया केँ सीने सें लग गई,। राम भैया कां हाथ मोहिनी भाभीपीठ पऱ चलरहा थां। फिन अनायास हि उसनेजब उसके सुडौल गोल-मटोल छोटे-छोटे नितंबों कों सहलाना शुरुआत कर दिया, मोहिनी बस अपनी आँखें बंदकिए, खुशी केँ उडनखटोले मे उड़ीचली जारही थि, फिन भैया केँ हाथों नें जैसे हि उसके नितंबों कों मसला.
आहह-आहह… ईीीइसस्स्स्शह…
नां चाहते हुए उसके मुंह सें सिसकी निकल पड़ी। क्याँ हुआजान? मैंने कुछ ग़लतकर दिया??
उउन्न्ह…
बस इतना हि निकला भाभी केँ मुंह सें औऱ वोँ ऐसे हि चिपकी खड़ीरही। भैया नें उसेअब अपनीगोद मे उठा लिया औऱ लाकर बिस्तर पऱ बड़े प्रेम सें लिटा दिया। भाभी लज्जा सें दोहरी हुइ जारही थि, औऱ करवट लेकर अपने घुटनों कों पेट सें लगाकर चेहरे कों अपने सीने मे छिपाने कि कोशिश करनेलगी। भैया अपना कुर्ता उतारकर बनियान औऱ पाजामे मे उसकेबगल मे बैठ गय़ा औऱ उसके कंधे पऱ हाथरख कर प्रेम सें सहलाते हुए उसको सीधा करने कि कोशिश कि। भाभी किसी कठपुतली कि तरह उसके इशारों पर्र चलरही थि। मोहिनी भाभी केँ सीधे लेटते हि भैया भाभी केँ चेहरे पर्र झुकता चला गय़ा औऱ उसके होठों पर्र किस करतेहुए उन्हें चूसने लगा। शुरुआत-शुरुआत मे मोहिनी कों कुछ अजीब सां फीलहुआ, मगरकुछ हि देर मे उसे इसमें मजाआने लगा औऱ वोँ भि अपने पति कां संग देनेलगी। होंठ चूसते हुएराम केँ हाथों नें एक् बार उसके वक्षों कों सहलाया, औऱ अब उसकी उंगलियाँ उसके ब्लाउज केँ बटनों सें खेलरही थि। मोहिनी नें सवालिया नज़रों सें अपने पति कि तरफ देखा, तौ उसके चेहरे पर्र शरारती मुस्कान देखकर लज्जा सें अपना चेहरा दूसरी ओरकर लिया.
राम नें एक् बारफिन उसके चेहरे कों अपनीतरफ घुमाकर उसके पलकों कों चूम लिया औऱ गालों कों सहलाते हुए वोँ उसकी आँखों मे झाँककर बोला-जान इसघऱ मे तुम् खुश तोँ होँ नां? उसने अपने पति कि बात कां जवाब मात्र हूंम्म… करके दिया औऱ अपनी पलकें झुकाली। रामअब उसके ब्लाउज कों खोल चुका थां, उसके दोनों पटों कों इधर-उधर करके उसने एक् बार उसके सपाट चिकने पेट पर्र हाथ सें सहलाया औऱ उसीहाथ कों उपर लातेहुए उसके उरोजो कों ब्रा केँ उपर सें हि सहलाने लगा। मोहिनी अपनी आँखें मूंदे हुए पड़ी मस्ती कि फ़ुआरों कां मजा लेँ रही थि, अचानक राम केँ बड़े-बड़े हाथों नें उसकी 32” कि चूचियों कों अपनी मुट्ठी मे कस लिया जौ पूरे केँ पूरे उसकेहाथ केँ नाप कि हि थि औऱ ज़ोर सें उन्हें मसल दिया। आहह-आहह……सीईईईई…। आरामम्म। सें प्राण नाथ…। उफफफ्फ़… नहियिइ… राम उसकेबगल मे बैठा थां, फिन उसने मोहिनी कों कंधों सें पकड़कर बिठा लिया औऱ उसके ब्लाउज औऱ ब्रा कों उसके शरीर सें अलगकर दिया। मक्खन जैसे रसीले गोल-गोल बूब्ज़ देखकर वोँ बौरा गय़ा औऱ उन पर्र किसी भूखे भेड़िए कि तरहटूट पड़ा। उसके छोटे-छोटे बूब्ज़ कों मुंह मे भरकर किसी वॅक्यूम पंप कि तरहसक करनेलगा। मोहिनी तौ मानो आसमानों मे उड़रही थि, उसेहोश तबआया जबराम नें उसके एक् अंगूर केँ दाने जैसे निपल कों अपनी उंगलियों सें पकड़कर उमेठ दिया… हइई…….माआआ….मररररर…गाइिईई…रीईईई…। औऱ उसने उसके मुंह कों अपनी छाती पर्र दबा दिया.
राम नें उसकी पतलीकमर कों दोनो हाथों केँ बीच लेकरउसे उठाया औऱ अपनीगोद मे बिठाकर उसकी साड़ी औऱ पेटिकोट निकालने लगा। मोहिनी नें लज्जावश अपने चेहरे कों अपने हाथों सें छिपा लिया.
राम- क्याँ हुआ जानन्न… चेहरा क्यूं छुपारही होँ… मे तोँ अब तुम्हारा हि हूं नां.
मोहिनी – हूंम्म… फिन भि लाजआती हैं.
अब वोँ केवल पेंटी मे थि औऱ अपनीइस अवस्था कों देखार लज्जा सें दोहरी हुईँ जारही थि। महिला कि यही अदाएँ जोँ उसका स्वभाव हैं, व्यक्ति केँ धैर्य केँ परखच्चे उड़ा देती हें। राम नें भि अपने सारे कपड़े निकाल फेंके औऱ अब वोँ भि सिर्फ एक् चड्ढी मे थां। उसने एक् जेंटल टच उसकी गीली पेंटी केँ उपर सें हि उसकी पूसी कों दिया। मोहिनी कां पूराबदन थर-थरा गय़ा। उसकेबदन केँ रोँये खड़े हौ गये.तब तौ औऱ हि गजब हौ गय़ा जबराम नें उसी गीली पेंटी केँ उपर सें हि उसकी बुर कों चूम लिया औऱ फिनजीभ फैलाकर चाट लिया.
हइई…। दैयाआआ…… यह क्याँ किया। अपने….छी छी। ! वहा भि कोईमूह लगाता हैं भला आँ…। आआ…। नहियीई… इसस्स्स्शह.मत करो नाँ प्लीज! एक् तरफ तौ वोँ उसेमना कररही थि, दूसरी तरफ उसकामन कररहा थां कि उसका पति उसकी बुर कों काटखाए। मगर नारी सुलभयह सभी वोँ कह नां सकी.अब राम कां लन्ड भि उसके चड्ढी कों फाड़ डालने कों उतावला होँ रहा थां, उसनेझट सें मोहिनी कि पेंटी उतार फेंकी, उसके उतावलेपन कि वजह सें वोँ फट हि गई,। च्चिईिइ…
यह क्याँ जान, यह क्याँ जंगल बढ़ारखा हैं तुमने, इसकोसाफ नहि करतीकभी? राम उसकी बढ़ी हुइ झांटो कों देखकर बोला, तोँ वोँ अपनासर उठाकर बोलीं- हमेंपता हि नहि कि इन्हें केसेसाफ किया जाता हैं?
राम – ठीक हैं अगलीबार मे तुम्हारे लिए हेयर रिमूवर लेँ आउन्गा। औऱ फिन सें अपनेकाम मे लग गय़ा। असल मे उसकामन उसकी कोरी बुर कों चूसने कां थां, मगर बालों कि वजह सें मन नहीं किया, तौ वोँ वक़्त बर्बाद नां करतेहुए, उसकी टाँगों केँ बीचआकर बैठ गय़ा, उसके घुटनों कों मोड़कर एमशेप मे किया। उसकेबाद वोँ उसकेउपर कि ओरआया औऱ मोहिनी केँ होठों कों चूमकर अपने 6” लंबे लन्ड कों सहलाया फिन उसकी बुर केँ होंठ जोँ अभि तक बंद थें, धीरे-धीरे सें खोला। उसकीकसी हुईँ बुर फैलने केँ बाद भि उसकालाल छेद थोडा सां हि खुल पाया। उसने मोहिनी कि आँखों मे देखकर कहा – जान फर्स्ट समय हैं, थोडा सहन करना पड़ेगा, औऱ अपना सुपाडा, उस छोटे सें मूह पर्र टिका दिया….
उसकीकसी हुइ बुर फैलाने केँ बाद भि उसकालाल छेद थोडा सां हि खुल पाया.
मोहिनी कि पूसी कमरस सें एक् दम गीली होँ रही थि, सो थोड़े सें दबाब सें हि लन्ड कां टोपा तौ स्लिम होँ गय़ा, मगर अंदर नहि गय़ा। उसने थोडा औऱ पुश किया तौ उसका 1” टोपा अंदरसमा गय़ा, मगर मोहिनी कि कराह निकल गई,। राम कां लन्ड बहोत अधिक मोटा तोँ नहि थां, मगर मोहिनी कि कोरी बुर, जिसने कभी उंगली भि नहीं देखी थि, अपनामूह खोल पाने मे असमर्थ दिखाई देरही थि। राम नें अपने कों अड्जस्ट किया औऱ अपनी भारी जांघों कां दबाब उसकी मक्खन जैसी जांघों केँ उपर बनाया औऱ लंबी साँस लेकर एक् जोरदार डक्का लगा हि दिया। आईईईईईईई ईईईईईईईईईईईईईईईई…….माआआआआआआआ…… मररर्र्र्र्र्र्र्ररर…। गाइिईईई ईईईईईईई…। हइईईई…निकालूऊऊऊ…। प्लीज … वोँ बिस्तर सें उठने कों हुईँ, पर्र राम कां चौड़ा सीना सामने आँ गय़ा। आधा लन्ड अंदरकिए राम वहींरुक गय़ा औऱ अपनी प्यारी नाज़ुक कली जैसी पत्नि केँ सर पर्र हाथ फिराकर सहलाने लगा, फिन उसके होठों कों चूमते हुए बोला-बस मेरीजान अब जौ होना थां सो होँ गय़ा। थोडा सां बस औऱ। फिन मज़े हि मज़े इतनाकह कर वोँ फिन सें उसके होंठ चूसने लगा औऱ संग-संग उसकी चुचियों कों सहलाता जारहा थां। मोहिनी कुछ शांत हुई तोँ उसने धीरे-धीरे सें अपना लन्ड बाहर् निकाला औऱ सुपाडे तक लाकर धीरे-धीरे सें फिन उतना हि अंदर किया। 5-6 बारऐसे हि आहिस्ता अंदर-बाहर् करने सें मोहिनी कि बुर फिन सें खुश दिखने लगी औऱ अपनीलार सें उसके लन्ड कों चिकनाने लगी.जब उसकोआधे लन्ड सें मजाआने लगा तौ वोँ भि नीचे सें अपनीकमर मटकाने लग गयीँ,। सही मौकादेख, राम नें एक् फाइनल स्ट्रोक लगा दिया औऱ पूरा 6” लन्ड उसकीसील पैक बुर मे स्लिम कर दिया। मोहिनी कि फिन एक् बार जोरदार चीख निकल गई,, मगरअब राम कों रुकना मुश्किल हौ रहा थां, तौ वोँ आरामसे धीरे-धीरे धक्के लगाता रहा। मोहिनी कि बुर अबसेट हौ चुकी थि, अब वोँ भि आहिस्ता अपनीलय मे आतीजा रही थि, औऱ अपने पति केँ धक्कों कां जवाब नीचे सें देनेलगी। कहते हें हर अंधेरी रात केँ बाद एक् रुपहला सबेरा अवश्य आता हैं, मोहिनी भि कुछसमय पहले कि पीड़ा भूलकर दुगने जोश सें चुदने लगी। आखिरकार दोनों पति पत्नि एक् संग अपनी मंज़िल पर्र पहुँच हि गये, औऱ दोनों हि एक् संग स्खलित होकर लंबी साँस लेतेहुए एक्-दूसरे सें चिपकगये.
कुछदेर बादजब दोनो कों थोडा राहत हुइ तोँ अपने सुख-दुख, घऱ परिवार, आने वाले भविष्य कि बातें करनेलगे, संगसंग अपने हाथों कों हरकत भि देतेजा रहे थें। मोहिनी कि अब झिझककम होँ गई, थि सो वोँ भि अपने हाथों कों अपने पति केँ अंगों पऱ फिरारही थि, उनकेसंग खेलरही थि। कुछ हि देर मे एक् बारफिन तूफान उठा औऱ वोँ दोनों फिन सें एक् दूसरे मे समाते चलेगये। पहलीरात कां भरपूर सुख उठाते हुए उन्हें सुभह केँ 4 बजगये, फिन एक् ऐसी नींद मे डूबगये, जोँ सीधी सुभह 7 बजे दरवाजा खट खटाने कि आवाज़ सुनकर हि खुली.
दूसरे दिन सनडे थां, विद्यालय बंद थां, तौ मे थोडा देर तक सो लेता थां। दिदी जबनहा धोकर फ्रेश होँ गई, तब उन्होंने मुझे जगाया। रोज़ तौ भाभी सोतेहुए झुककर मेरे माथे पर्र किस करती थि, औऱ बड़े प्रेम सें आवाज़ देकर मुझे उठाती थि, मे बिना आँखें खोले उनकेगले लग जाता थां। आजऐसा नहींहुआ, दिदी नें आते हि सीधा मुझे ज़ोर सें हिलाया औऱ ज़ोर सें आवाज़ देनेलगी, छोटू…छोटू… उठजा 8 बजगये, कब तक सोएगा?
मैंने सोचा भाभी हि होंगी, सो दोनों हाथ उनकेगले लगने केँ लिएउपर किए। भाभी होती तोँ झुककर उठती, दिदी बिस्तर केँ साइड मे बैठकर हिलारही थि, आँखें बंदकिए हि मैंने जैसे हि अपने दोनों हाथउपर किए तौ वोँ उनके बूब्स सें टकरागये। मुझेबंद आँखों सें कोई अंदाज़ा नहि लगा, सोचा भाभी कां गला औऱ थोडा उपर कों हैं, तौ ऐसे हि हाथों कों उनके शरीर सें रगड़ते हुएउपर लेँ जानेलगा। उनकेबूब मेरे हाथों सें एक् तरह सें मसलगये। हाथ लगते हि पहले तौ दिदी नें सोचा गलती सें लगगये होंगे। औऱ उन्हें अधिककुछ फील नहि हुआ, मगर जब मेरे हाथों सें उनकेरूई जैसे रसीले बूब्स मसलगये तोँ वोँ थोडा सॉक्ड होँ गई,। उसके कुंवारे मन कि भावनाओं कों करंट सां लगा, औऱ उन्होंने मेराहाथ पकड़कर जोर सें झटक दिया। मेराहाथ चारपाई कि पाटी सें जा टकराया, खटक सें मेरी आँखें खुल गयीँ, औऱ मे उठकर अपनाहाथ झटकने लगा। मेरेहाथ मे दर्द होनेलगा औऱ मे ज़ोर सें दिदी केँ उपर चिल्लाया.
क्याँ करती होँ, मेराहाथ तोड़ दिया…माआ…। आह्ह्ह्ह…
दिदी गुस्से सें चिल्लाती हुई बोलि – यह क्याँ कररहा थां तुँ? हां.!
मे औऱ जोर सें चिल्लाया – आप् यहा क्याँ कररही थि?
आवाज़ सुनकर भाभी दौड़ी हुई आई औऱ बोलि – अरे ! आप् दोनों क्यूं क्रोध हौ रहे हौ.? हुआ क्याँ हैं.?
मे – देखो नां भाभी, दिदी नें मेराहाथ तोड़ दिया, कितना दर्द हौ रहा हैं। औऱ उल्टा मुझ पर्र हि चिल्ला रही हैं। भाभी नें दिदी कि तरफ देखा। तोँ वोँ नज़र नीची करके बिनाकुछ बोलेवहा सें चली गयीँ,। भाभी नें मेरेपास बैठकर मेरेहाथ कों अपनेहाथ मे लेकर सहलाया औऱ फिन प्रेम सें मेरेगाल पर्र हाथरख कर बोलीं – कोईबात नहि मेरे प्यारे लल्ला चलोअब उठजाओ, मे आयोडेक्स लगा दूँगी ठीक होँ जाएगा। मे उठकर फ्रेश होनेचला गय़ा, दूसरी तरफ भाभी नें दिदी सें उस घटना केँ बारे मे पुछा तोँ उन्होंने सकुचाते हुएसभी बता दिया.
भाभी थोड़ी देरमन हि मन मुस्कराईं, फिन बोलीं – यहउस बेचारे नें जानबुझ कर तोँ नहि किया होगा, उसकोलगा होगा कि रोज़ कि तरह मे उसे उठाती हूं, तौ वोँ मेरेगले लग जाते हें, बसयही सोचकर गले लगनेजा रहे होंगे औऱ गलती सें हाथटच होँ गय़ा होगा, इतना माइंड मत कियाकरो। ठीक हैं?
रमा–मगर भाभी आप् भि उसे अधिकसर मत चढ़ाओ, अब वोँ भि बड़ा होँ रहा हैं.
मोहिनी – मेरेलिए तोँ तुम् दोनों बच्चे हि हौ, तुम् दोनों कों संभालने कि मेरी ज़िम्मेदारी हैं। तुम् छोटू केँ बारे मे चिंता नाँ करो औऱ मुझपे भरोसा रखो।
maira Pyara Devar - niyantran - Kahani ab aur interesting hogi
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