maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 41
अभि रात केँ 9 हि बजे थें, सदररोड पर्र लोगों कि चहलपहल बढ़ती जारही थि। इतनी भीड़ भाड़ केँ बावज़ूद भि एक् कालेरंग कि वाहन जिसके शीशे भि काले थें अंदरकौन हैं, क्याँ कररहा हैं बाहर् सें किसी कों कुछ दिखाई नहि देरहा थां। कालेरंग कि वाहन निरंतर हॉर्न बजाती हुइ लोगों कों मार्ग देने पऱ मजबूर कररही थि। जोँ हटने पऱ ज़रा हि झिझका याँ देर करता, वोँ उसकी चपेट मे आँ जाता। उसकेकोई 300 मीटर कि दूरी पर्र एक् पुलिस जीप उसके जस्ट पीछे एसपी सिटी कि वाहन, लगातार सायरन बजाती हुईँ चली आँ रही थि। देखने सें हि पताचल रहा थां कि पुलिस उस काली गाड़ी कां पीछाकर रही हैं। दोनों केँ बीच कि दूरी निरंतर घटती हि जारही थि। कारण थां, काली गाड़ी कों भीड़ कां सामना अधिक करनापड़ रहा थां, वहीं पुलिस कि गाड़ियों कों भीड़ पहले सें हि हटी हुइ मिलरही थि। एका-एक् वोँ काली वाहनरोड केँ डिवाइडर केँ बीच मे बनेकट सें उसी रफ़्तार मे टर्न लेती हैं। मगर स्पीड अधिक होने कि वजह सें वोँ यू टर्न लेने केँ कारण सामने वाले फुटपाथ पऱ चढ़ गई,। नां जाने कितने लोग उसकी चपेट मे आए, चारों तरफ चीखो पुकार मच गई,.
फुटपाथ पर्र लोगों कों रौंदती हुइ, वोँ काली गाड़ी जैसे हि फिन सें रोड पऱ आई, कि पलट गयीँ,। औऱ कुछदूर तक घिसती चली गई,। वाहन केँ ऊपर वालेडोर सें जैसे-तैसे करके 3 लोग बाहर् निकले। उनके हाथों मे रिवाल्वर थें औऱ मुँह कपड़े सें ढके थें। जब तक पुलिस कि गाड़ियाँ अगले चौराहे सें टर्न लेकरउस गाड़ी तक पहुँचती, तब तक वोँ तीनों वाहन सें निकलकर एक् गली मे घुसगये। आनन फानन मे पुलिस कि गाड़ियाँ वाहन केँ पासआकर रुकी औऱ उनमें सें पुलिस वाले निकलकर उसगली कि तरफ भागे, जिधर वोँ तीन नक़ाबपोश गये थें। पुलिस नें हवाई फायर करके लोगों कों एक् तरफ हटने कों कहा। जिससे वोँ उन लोगों पऱ निशाना साध सकें, जौ लोगों कि उपस्थिति केँ कारण संभव नहि होँ पारहा थां। वोँ तीनों भीड़ कां सहारा लिए भागेजा रहे थें, अभि वोँ अगले मोड़ सें थोडा दूर हि थें कि पुलिस कि तरफ सें एक् गोलीआई औऱ उनमें सें सबसे पीछे वाले कि पीठ मे घुस गयीँ,। वोँ चीख मारते हुएकुछ देर तौ उनके संग-संग भागा.मगर कुछदूर चलकर हि लहराकर गिर पड़ा.उन दोनों नें ठिठककर अपने मित्र कों देखा, तब तक उनमें सें एक् नें दूसरे कां बाजू पकड़कर उसे खींचते हुए भागने लगा.जब तक पुलिस उन पर्र अगला निशाना लगाती, वोँ मोड़मूड चुके थें.
यह बाज़ार केँ पीछे वालारोड थां, जहाँ लोगों कि भीड़ भाड़कम हि हुआ करती थि। वोँ दोनों बेतहाशा भागेजा रहे थें, पुलिस शिकारी कुत्तों कि तरह उनका पीछाकर रही थि। जैसे हि पुलिस वालेउस मोड़ पऱ पहुँचे, उनकेबीच कि दूरीबढ़ गयीँ, थि। मगरऐसा भि नहि थां, कि वोँ उनकीहद सें बाहर् निकल चुके थें। अगर सामने सें पुलिस दल आँ धमका तोँ वोँ घिर सकते थें, मगर उन्होंने भागते रहने मे हि अपनी भलाई समझी। पीछे सें पुलिस उनपर लगातार फायर भि किएजा रहे थें.
अकस्मात दूसरी गली सें कुछ पुलिस वाले निकल पड़े.तब तक वोँ उसगली कों क्रॉस कर चुके थें, मगरअब वोँ दूसरी गली सें आने वाले पुलिस वाले उनके बेहद लगभग थें। दूसरी गली सें आने वाले पुलिस कि टुकड़ी मे सें सबसेआगे वाले पुलिस वेल नें गोलीचला दि, जौ उनमें सें एक् नकाबपोश कि पिंडली चीरती हुई निकल गयीँ,। अभि वोँ लड़खड़ा कर गिरने हि वाला थां कि तभी चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर… केँ संग ब्रेक लगने कि आवाज़ वातावरण मे गूँजउठी.
एक् सिल्वर कलर कि मारुति वैनआकर रुकी औऱ रुकते हि उसका पिछला गेट बड़ी तेज़ी सें खुला। एक् हाथ बाहर् निकला औऱ उस घायल नकाबपोश कों कार केँ अंदर खींच लिया। इतने मे वोँ दूसरा भि वापस मुड़ा औऱ व्हीकल मे समा गय़ा। देखते–2 वोँ मारुति वैन अपनीफुल स्पीड मे वहा सें भागी औऱ कुछ हि पलों मे पुलिस कि आँखों सें ओझल होँ गयीँ,। यहसभी इतनी जल्द मे हुआ कि पुलिस वाले सिवाय उसवैन कों जातेहुए हि देखते रहगये। एक् दो फायर भि किए उसके टायर कों निशाना बनाकर। मगरवैन कां ड्राइवर यह जनता थां, इसलिये वोँ उसे झूलते हुएचला रहा थां। मज़े कि बातयह थि, कि उस पऱ कोई नंबर प्लेट भि नहि थि.
उधर एसपी कृष्णा केँ संगकुछ पुलिस वालेउस उल्टी पड़ी वाहन केँ पास हि थें, जिसमें दो इंसानी बदन अभि भि फँसे पड़े थें। चूँकि गाड़ी, ड्राइवर साइड कों पलटी थि तोँ ड्राइवर वहींसीट औऱ स्टीयरिंग केँ बीच हि फँसा पड़ा थां। रोड सें घिसटने केँ कारण उसकागेट उखाड़ चुका थां। वोँ दोनों बुरीतरह सें घायल होँ चुके थें। ड्राइवर कों जैसे तैसे करके व्हीकल सीधी करके हि निकाला जासका। अभि वोँ इसीकाम मे जुटे थें, कि हताशटीम भि वापस आँ गई। उनकेसंग एक् मृत नकाबपोश भि थां। आनन फानन मे एम्बुलेंस बुलाई गई,। ड्राइवर कि हालत ज्यादा गंभीर थि, तौ उसने एम्बुलेंस मे चढ़ते हि दम तोड़ दिया। दूसरे घायल कों सिटी हॉस्पिटल लेँ जाया गय़ा, जहाँउसे इमरजेंसी ट्रीटमेंट देकरबचा लिया गय़ा.
गाड़ी केँ बारे मे पता किया गय़ा, तोँ पताचला कि वोँ दूसरे पास केँ शहर केँ किसी बिज़नेसमैन कि थि, जोँ दोदिन पहले चोरी हौ गई, थि औऱ उसकी संबंधित थाने मे रिपोर्ट भि लिखाई जा चुकी थि.
ड्राइवर औऱ दूसरे मरेहुए नकाबपोश कि बॉडी क्लेम करनेकोई नहि आया थां। घायल कों होश मे आने कां प्रतीक्षा केँ अलावा अब पुलिस केँ पास औऱ कोई चारा नहि थां। काली वाहन सें भारी मात्रा मे ड्रग्स बरामद हुए थें। जाहिर थां, पुलिस कों यहखबर मिली थि कि फलाँरंग कि वाहन सें शहर केँ अंदर ड्रग डीलिंग होनेजा रही हैं औऱ खबर मिलते हि पुलिस उनके पीछेलग गयीँ,, उन्हें कुछहद तक इसमें सफलता भि मिली.मगर कोईऐसा सबूत अभि तक हाथ नहि लगसका थां, जिससे उस माफ़िया तक पहुंचा जा सकता होँ, जोँ इस सबके पीछे थां.
उधर आँधी तूफान कि तरह मार्ग कां सीना चीरती हुईँ वोँ सिल्वर कलर कि वैनशहर छोड़ चुकी थि औऱ घने जंगलों कि तरफ दौड़रही थि। शहर सें कोई 15 किमीदूर जाकर वोँ मार्ग कों छोड़कर जंगलों मे घुस गई,, कुछ अंदर जाते हि वोँ एक् खंडहर हौ चुके चरागाह केँ सामने जाकर खड़ी होँ गई,। वैन केँ अंदर कि लाइटऑन कि गई, तबपता चला कि अंदर कौन-कौन थें। उन नकाबपोश कों बचाने वाले ड्राइवर केँ अलावा, एक् गोरा चिट्टा 6’ 2” लंबा, हट्टा-कट्टा एक् 25-26 वर्षीय नौजवान थां, जिसकी हल्की सि फ्रेंच कट दाढ़ी थि। नीली आँखों वालायह हैंडसम नौजवान किसी भि एंगल सें किसी ग़लतकाम करने वाले गिरोह याँ संघटन सें जुड़ा नहि लगरहा थां। वोँ तौ किसी फिल्मी हीरो जैसा, जिसे देखते हि कोई भि लड़की याँ स्त्री अपनी बुर खोलकर चुदने केँ लिए बेकरार होँ उठे.
अरे यह क्याँ??? ड्राइवर कि स्थान कोई पेशेवर ड्राइवर नहि… यह तोँ कोई बेहद हसीन कमसिन सि लड़की थि, जोँ शायद 18-19 साल कि हि होगी.मगर जिसतरह सें वोँ कार ड्राइव करकेलाई थि, लगता हि नहि थां, कि उसेकोई लड़कीचला रही हैं.
किसीतरह फोन कि टॉर्च कि रोशनी कि सहायता सें उन्होंने आग कां इंतजाम किया औऱ एक् चाकू कि सहायता सें उस नक़ाबपोश कि गोली निकालने मे सफलता हासिल कि। अब समस्या थि कि उसकेघाव कां खून केसेबंद हौ.
तोँ वोँ नौजवान बोला – रूबी डार्लिंग, ज़रा अपना चेहरा दूसरी तरफ रखना…
औऱ फिन उसने वोँ किया जिसकी किसी नें कल्पना भि नहि कि थि। नौजवान नें अपने पैंट कि जिप खोली औऱ लन्ड बाहर् निकलकर पेशाब कि मोटी सि धार उसकेघाव पऱ मारने लगा। वोँ दोनों उसकोदेख कर भौंचक्के रहगये। जब पेशाब उसकेघाव पऱ पड़ा तौ उसे बेहदजलन सि हुइ। मगर चमत्कारिक रूप सें इससे पहले कि उसका पेशाब करनाबंद होता, उससे पहले हि घाव सें खून निकलना ऐसेबंद हौ गय़ा जैसे कि वोँ किसी गोली कां घाव नां होकर, मामूली सि खरोंच हौ.
उसकेबाद फोन कि टॉर्च सें वोँ ज़मीन पर्र कुछ ढूँढने लगा औऱ एक् छोटे-2 फूलों वालीघास तोड़कर उसे अपने हाथों सें उसकारस निचोड़ कर उसकेघाव पर्र टपकाया। उसकेघाव मे उसे तीव्र जलन कां एहसास हुआ औऱ उसकीचीख निकल गयीँ,.
नौजवान - हौसला रखो साथी, यह तुम्हारे घाव कों एकदमसही कर देगी…
यह कहकर उसने अपनी हथेलियों सें हि उसघास कि चटनी जैसी बनाकर उसकेघाव पर्र रख दि औऱ एक् रुमाल उसकेघाव पर्र बाँध दिया। इतनासभी करने केँ बादजब वोँ फारिग हुआ औऱ अपने दोनों हाथों कों आपस मे रगड़कर साफकर रहा थां तबउस घायल केँ मित्र नें अपना मुँह खोला औऱ उस नौजवान सें बोला.
घायल कां दोस्त - थैंकयू मित्र… हम् लोगों कों तुमने बचाकर बहोत बड़ा एहसान किया हैं। वैसे अपना परिचय नहि दोगे??
नौजवान – मेरानाम जोसेफ हैं औऱ यह मेरीयार रूबी। हम् दोनों कल हि इसशहर मे आए हें, आजइधर घूमने चलेआए थें। वक्तपास करने केँ लिए वहींपास वाली पुलिया पऱ बैठे बातें कररहे थें कि तुम् लोगों कों भागते देखा औऱ उसकेबाद तुम्हारे पीछे पुलिस कों। अब पुलिस सें तोँ हमारा पहले सें हि 36 कां आँकड़ा रहा हैं। हमने सोचा कि यह तोँ कोई हमारी लाइन केँ लोग लगते हें औऱ मुसीबत मे हें। तोँ पास हि खड़ीयह वैन हमें दिखी। इसका ड्राइवर वहींपास मे खड़े होकरमूत रहा थां। लक अच्छा थां तुम् लोगों कां कि चाबीकार मे हि लगी थि। बसफिन क्याँ थां, दौड़ा दि। औऱ देखो हमारे इस प्रयास सें तुम् जिंदा हमारे सामने हौ वरनाअब तक तौ गॉड कों प्यारे होँ चुके होते मित्र…
उस बंदे नें, जौ कोई औऱ नहि उस्मान कां बेटा असलम थां, उसका दूसरा मित्र, जोँ घायल थां, वोँ उसका साथी थां, बोला - सचकहा मित्र तुमने, आजअगर तुम् लोग टाइम पर्र हमें नहि बचाते तौ हम् दोनों हि अल्लाह मियाँ कों प्यारे हौ गये होते। वैसे तुम् लोग करते क्याँ होँ??
जोसेफ – अभिषेक बच्चन औऱ रानी मुखर्जी कि बंटी औऱ बबली फिल्म देखी हैं। हम् वही हें.
असलम – क्याँ मतलब?
जोसेफ – बसइधर कां मालउधर करके जीवन केँ मज़े लें रहे हें। कभीयह शहर तोँ कभी वोँ शहर.अब तौ हमेंयाद भि नहि कि असल मे हम् पैदा कहां हुए थें। किसीदिन पुलिस केँ हत्थे चढ़गये। तौ खुदा जाने क्याँ होगा.तब तक जी लेते हें जैसे जीना चाहते हें अपनी जीवन.
असलम नें अपनाहाथ आगे करतेहुए कहा – तोँ मिलाओ हाथ जोसेफ। लगता हैं, अल्लाह कि कोई नेमत होगी। जौ तुम् लोग हमेंमिल गये.
फिन असलम नें अपने बारे मे सभीकुछ बताया। उसकेबाद असलम नें अपने बाप कों मोबाइल किया, औऱ सारी बातें डीटेल मे बताई.
उस्मान – तुम् लोग वहींरहो, अबउसवैन सें शहर कि तरफमत आनां, मे दूसरी व्हीकल भेजता हूं.
लगभग एक् घंटेबाद हि वहा एक् स्कॉर्पियो खड़ी थि, जब असलम नें जोसेफ औऱ रूबी दोनों सें चलने कों कहा तौ उन्होंने उनकेसंग आने सें मनाकर दिया.फिन असलम नें जोसेफ कों अपने दफ़्तर कां अड्रेस लिखकर दे दिया.कल आकर मिलने कां वादा लेकर वोँ दोनों वहा सें निकलगये.
उन दोनों केँ जाने केँ 15 मिनिट बाद हि वोँ वैनशहर कि ओरजारही थि, अबउस पर्र बाक़ायदा नंबर प्लेट थि। कुछदेर बाद वोँ दोनों बंटी-बबली एक् 3 स्टार होटल केँ रूम मे थें औऱ एक् हि बिस्तर पऱ एक् दूसरे कि तरफपीठ कर केँ सोरहे थें। सुभहजब जोसेफ कि आँख खुली तौ उसने देखा कि पाससोई उसकी मित्र लड़की रूबी कि एक् टाँग उसकेऊपर पड़ी थि औऱ एक् हाथ उसकेपेट पऱ थां। येदेख कर उसके चेहरे पऱ एक् मीठी सि मुस्कान आँ गई, औऱ जोसेफ नें धीरे-धीरे सें रूबी कां हाथ औऱ पांव अपनेऊपर सें हटाए औऱ फ्रेश होने बाथरूम मे घुस गय़ा। बाहर् आकर उसनेदो गरमचाय ऑर्डर कि, जबगरम चाय आँ गई। तब जोसेफ नें अपना एक् हाथ रूबी केँ कंधे पर्र रखकरउसे सीधा किया औऱ रूबी केँ माथे पर्र एक् चुंबन लेकरउसे जगाया.
जोसेफ - रूबीउठो… सुभह होँ गयीँ, … गरमचाय पीलो…
रूबी नींद मे हि कुनमुनाई औऱ जोसेफ कां हाथ पकड़कर अपने सीने मे भींच लिया। जोसेफ नें फिन सें आवाज़ दि औऱ अपनाहाथ खींचने लगा.
रूबी जोसेफ केँ हाथ कों औऱ कसकर पकड़ती हुई नींद मे बड़बड़ाई - उउन्न…। सोनेदो नां… भइया…
जोसेफ – उठो रूबी… देखो कितना दिन निकलआया हैं… 9 बजगये… हमें असलम केँ यहा भि जानां हैं.
कुछदेर कि कोशिश केँ बाद रूबीउठ करबैठ गयीँ, औऱ उसनेकहा – गुड मॉर्निंग भैया.
औऱ आगेउचक कर रूबी नें जोसेफ केँ गाल पऱ किसकर लिया.
गरम चाय पीतेहुए रूबी बोलि – आप् अकेले चले जानां… मे उस हरामज़ादे कि शक्ल भि नहि देख्ना चाहती। अब तोँ मे सीधेउस कुत्ते केँ मुँह पर्र थूकने हि जाऊंगी.
ये कहते-2 रूबी कां खूबसूरत सां चेहरा लाल होँ गय़ा थां, जिसेदेख कर जोसेफ नें फिनउसे औऱ कुछ नहि कहा.
उसकेबाद जोसेफ औऱ रूबी दोनों रेडीहुए औऱ होटल सें बाहर् आँ गये.अब जोसेफ, वोँ रात वाला जोसेफ नहि थां। उसका हुलिया एक् दम बदलाहुआ थां। बाहर् आकर वोँ दोनों अलग – अलग दिशाओं मे निकल पड़े.
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मे अपने दफ़्तर मे बैठाआज कां न्यूजपेपर देखरहा थां जिसमें रात वाली घटना पूरे विस्तार केँ संगछपी थि। यहा तक कि केसेदो गुण्डों कों एक् बिना नंबर कि मारुति वैनबचा कर लें गई,, उसवैन कों तलाश करने कि कोशिश जारी हैं। खबरपढ़ कर मेरे चेहरे पऱ स्माइल आँ गई औऱ न्यूज़पेपर सोफे पऱ फेंककर अपनेकाम मे लग गय़ा.
साम तक मे कोर्ट केँ कामों मे उलझारहा, इसबीच घऱ सें निशा कां मोबाइल भि आया, मोहिनी भाभी सें भि बात हुई। उन्होंने कई दिनों सें घऱ नाँ आने कां कारण पूछा तौ मैंने काम कि व्यस्तता बताकर उन्हें समझा दिया.
घऱ पऱ बातें करके मैंने अभि मोबाइल रखा हि थां कि वोँ फिन सें बजनेलगा, देखा तौ गुप्ता जी कां लैंडलाइन नंबर थां। फोन रिसीव करते हि कानों मे खुशी कि आवाज़ सुनाई दि.
मैंने उसकी आवाज़ सुनते हि कहा – हां खुशी, कहो केसे मोबाइल किया??
खुशी – भैया, आप् अभि क्याँ कररहे होँ?
मे – क्यूं कोईकाम थां?? मे अपने दफ़्तर मे हि हूं… बसकाम खतम करके निकलने कि तैयारी मे हि थां, कि तुम्हारा मोबाइल आँ गय़ा.
खुशी – आप् दफ़्तर सें सीधे यहीं आँ जाओ। मे यहा अकेली हूं मां भैया केँ संग किसी फंक्शन मे गई, हें। पिताजी कां आने-जाने कां कोई ठिकाना नहि हैं.
मे – अरे तौ तुम् भि अपनी किसी फ्रेंड केँ पासचली जाओ.
खुशी – अब अधिक बहाने मत बनाओ औऱ जल्दआओ, वरना मे वहा आँ जाऊंगी.
मैंने हँसते हुएकहा – ठीक हैं आता हूं, मेरे खाने कां इंतजाम करके रखना.
साम कों 7 बजे मैंने अपनाबैग उठाया, दफ़्तर बंद करवाया औऱ गुप्ता जी केँ बंगले कि तरफचल दिया। गुप्ता जी केँ बंगले पर्र पहुँचते हि, खुशी मुझेहॉल मे हि मिल गयीँ,। मुझे देखते हि उसने मेराहाथ पकड़ा औऱ अपने कमरे मे खींचकर लेँ गई,। जाते हि उसनेगेट लॉक किया औऱ मुझसे लिपट गई,.
मैंने खुशी केँ कंधे पकड़कर अलग किया औऱ कहा – अरे मेरी बेबीडॉल सब्र तौ कर.
खुशी मुझसे अलग होतेहुए बोलि – आपने जौ वादा किया थां, उस हिसाब सें अब हमारे पास वक्त भि हैं औऱ मौका भि। अब आपकाकोई एक्सक्यूज़ नहि चलेगा.
मे बेड पर्र बैठकर खुशी कों अपनीगोद मे बिठा लिया औऱ हँसते हुएकहा – हां.हां… ठीक हैं। मे कौन सां मनाकर रहा हूं, पर्र मुझे एक् बात कां जवाब दोगी.
खुशी – क्याँ???
मे – तुम् एक् कमसिन नवयौवना, जवानी कि दहलीज़ पऱ अभि-अभि कदमरखी हौ… चाहोगी तौ हज़ारों लड़के मिल सकते हें। फिन तुम् मेरे जैसे शादीशुदा इंसान केँ संग हि यहसभी क्यूं करना चाहती होँ??
खुशी – क्योंकि मुझे आपसे ज्यादा कोई हैंडसम औऱ केयरिंग मर्द नहि मिला अभि तक। अब मे आपको एक् औऱ बात बताना चाहती हूं.
मैंने खुशी कि मोटी-मोटी मखमल जैसी चिकनी जांघें जौ उसके छोटे सें शॉर्ट केँ बाहर् नंगी थि, उन्हें सहलाते हुए पूछा – क्याँ?
खुशी केँ रसीले, थोड़े भारी गुदगुदे नितंबों केँ नीचेदबे मेरे लौड़े नें अपनासर उठा लिया थां। पैंट केँ अंदर सें हि उसने खुशी कि गान्ड केँ नीचे हलचलमचा रखी थि। मेरे लौड़े कों अपनी गांड पर्र फील करते हि, खुशी मदहोश होनेलगी औऱ उसने मेरा एक् हाथ अपनी जाँघ सें उठाकर अपनीगदर ठोस सुडौल चुचि पऱ रखकर दबाते हुएकहा – उसदिन मैंने माँ सें सारेदिन कोईबात नहि कि। जब भि वोँ मेरे सामने पड़ती, मे मुँह फेरकर निकल जाती। माँ मुझसे बात करना चाहती थि। रात कों जब मे अपने कमरे मे पढ़रही थि, तब वोँ मेरे कमरे मे आई। मैंने उन्हें अनदेखा कर दिया औऱ अपनी पढ़ाई मे लगीरही.
माँ मेरेठीक सामने आकर अपने घुटने टेककर बेड पऱ बैठ गयीँ, औऱ अपने दोनों हाथ सें कानों कों पकड़कर बोलीं – खुशी बेटा एक् बार मेरीतरफ देख तौ सही.
उनकी आवाज़ मे एक् ममतामयी करुणा थि, जिसे मैंने पहलीबार सुना थां, तोँ जल्दी मैंने उनकीतरफ देखा। मां कि आँखों मे आँसू थें, उन्हीं आँसुओं भरी आँखों सें वोँ अपनेकान पकड़े हुए बोलीं – खुशी, मेरी गुड़िया मुझे क्षमा करदे। तेरी मां बहोत बुरी हैं। अपने बच्चों सें किसतरह व्यवहार करती हैं, पर्र तूनेकभी यह सोचा कि मे ऐसी क्यूं हूं?
मुझेआज अपनी माँ मे मम्मी कि ममता नज़रआई जोँ अपनी बेटी केँ नाराज़ होने पऱ उतावलापन उठी थि। मैंने फ़ौरन उनकेहाथ पकड़कर उनके कानों सें हटाए औऱ उनके कलेजे सें लगकरफफक पड़ी। हम् दोनों मां-बेटी बहोत देर तक रोतेरहे.
फिन मैंने उन्हें शांत करतेहुए कहा - मे आपसे नाराज़ नहि हूं माँ, हां थोड़ी दुखी अवश्य थि, कि मेरी मां नें बिनाकुछ सोचे समझे अपनी बेटी कों इतना गिराहुआ समझ लिया.
माँ सुबकते हुए बोलीं – नहि मेरी बच्ची, मैंने तुम्हे गिराहुआ नहि समझा, बल्कि वोँ सभी मेरे कम्बख़्त स्वभाव बस मेरे मुँह सें निकल गय़ा। तूँ तोँ जानती हैं, घऱ कि ज़िम्मेदारियाँ संभालते-2 कब मेरा स्वभाव चिड़चिड़ा हौ गय़ा, मुझे स्वयं पता नहि चला, कोई समझाने वाला थां नहि, तेरे पिताजी नें घऱ कि तरफकभी ध्यान नहि दिया। तुम् दोनों बच्चे पढ़ाई मे लगगये, मे अपने दुख-सुख किसके संग बाँटती? इन नौकरों केँ बीच रहकर अपनीमन मर्ज़ी चलतीरही, औऱ वही मेरीआदत बनतीचली गई,। मगरआज जब तुम् सभीलोग मुझे अकेला छोड़कर चलेगये, तब मैंने अंकुश सें माफी माँगी औऱ उसकी बातों नें मुझे रियलाइज़ कराया। मे उसके कंधे सें लगकरखूब रोई, मेरा सारा क्रोध, कुंठा, औऱ घमंड मेरे आँसुओं केँ द्वारा बह गय़ा, तब मुझे रियलाइज़ हुआ कि मे क्याँ सें क्याँ बनतीजा रही हूं.
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UPDATE 42
तभी मैंने मनबना लिया थां, कि मे अपनी गुड़िया सें माफी माँगूंगी, शायद वोँ मुझे क्षमा करदे, मगर सारेदिन तूने मेरीतरफ देखा तक नहि तौ मे दर्द सें बेचैनी उठी। मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मे तेरेपास चलीआई। अब तौ मुझे क्षमा करदे मेरी गुड़िया। मां कि बातें सुनकर मेरी रुलाई फुट पड़ी औऱ मे एक् बारफिन मां केँ सीने सें लगकररो पड़ी.
फिन माँ नें मुझेअलग करके प्रेम सें मेरेगाल कों सहलाते हुएकहा – मगर बेटा यह ग़लतफ़हमी पैदा हि नहि होती, अगर हम् मम्मी-बेटी अपनी बातें एक् दूसरे सें कहसुन पाते.अब मे चाहती हूं, कि जोँ भि तेरेमन मे होँ वोँ मुझे खुलकर बता दियाकर, जिससे मे तेरी ग़लत औऱ सही कां फ़र्क बता सकूँ। वैसे तूने अंकुश कों अपना भइया मानकर अच्छा किया हैं। अंकुश सही मायने मे एक् भइया कि तरह तेरी रक्षा कर सकता हैं। यह जमाना बहोत जालिम हैं बेटा, कदम-कदम पर्र झूठ औऱ फरेब सें यह दुनिया भरी पड़ी हैं। वैसे मुझे अपनी बेटी पऱ पूरा भरोसा हैं, मगरफिन भि, तुँ किसीऐसे वैसे लड़के केँ चक्कर मे मत पड़ना, जौ झूठे प्रेम केँ वादे करके लड़कियों कों बहला फुसलाकर उन्हें इस्तेमाल करते हें, ब्लैकमेल करके उन्हें चूसते रहते हें। बेटा मे तुझेही इसलिये यहसभी बतारही हूं, कि इसउमर मे इंसान केँ कदमबहक हि जाते हें। जिसे हम् प्रेम समझते हें, वोँ छनिक सिर्फ जिस्म कि ज़रूरत होती हैं। मे यह नहि कहती कि यह ज़रूरत पूरी नां होँ, इसउमर मे सब करते हें मगर किसीऐसे हाथों मे नां पड़ना कि वोँ इसका ग़लत फ़ायदा उठाए। अंकुश एक् ऐसा लड़का हैं, जोँ हज़ारों मे तोँ क्याँ लाखों मे एक् हैं। भरोसेमंद हैं, ऐसा व्यक्ति ढूँढने सें भि नहि मिलता हैं। जोँ हमें नसीब सें मिला हैं। तेरीऐसी कोई ज़रूरत हौ तोँ तूँ खुलकर उसेबता देना। तुँ समझरही हैं नां बेटी मे क्याँ कहना चाहती हूं??
मे मुँह फाड़े माँ कि बातें सुनरही थि, मे मां कि बातों कां मतलबसमझ रही थि, सच कहूँ तौ जोँ इसउमर केँ हिसाब सें इंसान कि चाहत होती हैं, वोँ उन्होंने बयानकर दि थि। शायद वोँ उनके अपने अनुभव रहे होंगे याँ क्याँ पता उन्होंने यहसभी भोगा हौ। मगर जौ भि हौ, यह एक् ऐसी सच्चाई थि जिससे दो-चार होते-होते मे भि बची थि। मे भि एक् लड़के सें अट्रैक्ट हुईँ थि। मगर वक़्त रहते उसकी सच्चाई मेरे सामने आँ गई, औऱ मैंने उससे अपने संबंध खतमकर लिए। मां कि बातों कां मेरेऊपर बहोत गहराअसर हुआ औऱ मन केँ किसी कोने मे आपकी केयरिंग छवि, एक् मर्द कि छवि मे बदलने लगी। जोँ एक् लड़की कों उसके लड़की होने केँ एहसास सें अवगतकरा सकता हैं.
मे अवाक सां होँ कर ख़ुशी कि बातें सुनरहा थां, जब वोँ रुकी तोँ मैंने पूछा – तुम्हारे उस लड़के सें संबंध कहां तक पहुँचे थें?
ख़ुशी – बस मिलने मिलाने तक, मगर वोँ मुझे पाने केँ लिएहर संभव प्रयास मे थां। मे भि चाहती थि, कि हम् शारीरिक तौर पर्र एक् हौ जायें, बस एक् उचित मौके कि तलाश मे थें। मगरतभी मेरी एक् सहेली नें उसकी सच्चाई बता दि, कि इसकेकई औऱ लड़कियों सें भि संबंध हें औऱ यह उन्हें ब्लैकमेल कररहा हैं। उसकेबाद मैंने उससे मिलना छोड़ दिया, चिढ़कर उसनेउन गुण्डों कां सहारा लिया जिनको आपनेसबक सिखाया थां.
मे – क्याँ वोँ लड़का तुम्हारे कालेज मे हि पढ़ता हैं??
ख़ुशी – नहि, 12थ तक मेरेसंग थां, मगरअब वोँ किसी दूसरे कालेज सें इंजीनियरिंग कररहा हैं, मगरउन लड़कों नें हि यहबात मुझे बताई, औऱ यह भि कहा कि अब वोँ तुम्हारे सामने कभी नहि पड़ेगा.
मैंने ख़ुशी केँ बूब्स कों सहलाकर कहा – तौ तुम् अभि तक वर्जिन हि होँ?
ख़ुशी अपने चेहरे पऱ एक् कामुक सि हँसी लाकर बोलीं – तौ आपको क्याँ लगा कि मे ऐसे हि किसी कों भि अपनायह खजाना यूँ हि लुटादूँ.
इससे पहले कि ख़ुशी अपना वाक्य पूरा करती, मैंने अपने होंठ, उसके होंठों पऱ चिपका दिए। मैंने ख़ुशी कों स्मूच करतेहुए एक् हाथ उसकी चुचि पर्र लें जाकरउसे मसल दिया औऱ दूसरे हाथ सें उसकी बुर कों शॉर्ट केँ ऊपर सें सहलाया। ख़ुशी कि आँखों मे गुलाबी डोरे तैरने लगे। उसने घूमकर मेरीतरफ मुँहकर लिया औऱ अपने बूब्स कों मेरे सीने सें रगड़ने लगी। ख़ुशी मेरीगोद मे मेरे दोनों तरफ कों टाँगें फैलाकर बैठी थि.
मैंने ख़ुशी केँ चेहरे कों दोनों हथेलियों मे लेँ कर पूछा – तौ अपनी वर्जिनिटी खोने केँ लिए तैयार हौ ख़ुशी??
ख़ुशी – हां! क्योंकि मुझे आपसे अधिक केयरिंग पार्टनर औऱ नहि मिल सकता…
मैंने ख़ुशी केँ मोटे-मोटे कूल्हों कों मसलते हुएकहा – सोचलो ख़ुशी, परेशानी होगी तुम्हें…
ख़ुशी अपने होंठों पऱ कामुक सि मुस्कान लाकर बोलीं – झेल लूँगी अंकुश जी…मगर उसकेबाद जोँ ख़ुशी मिलेगी, वोँ अधिक मायने रखती हैं मेरेलिए…
मे – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी ख़ुशी…
इतना कहकर मैंने ख़ुशी केँ टॉप कों निकाल दिया। बिना ब्रा केँ ख़ुशी कां मदमाता यौवन छलछलाकर बाहर् आँ गय़ा। ख़ुशी केँ 34 केँ बूब्स, एकदम सीधेतने हुए, लेशमात्र भि लटकन नहि। जिनके शिखर पर्र एक्-एक् किशमिश केँ दाने जैसे निप्पल। आअहह। क्याँ मस्त थें वोँ। देखकर मेराजी मचलउठा औऱ मैंने ख़ुशी केँ निप्पल कों अपनीजीभ सें चाट लिया.
ख़ुशी – आआहह… सस्स्सिईई… ऊऊऊओहहह… औऱ चाटो इन्हें। बहोत अच्छा लगता हैं मुझे.
ख़ुशी नें मादकता भरी आवाज़ मे कहा.
मे - आअहह… ख़ुशी, तुम्हारी यह बूब्स वाकई ग़ज़ब कि हें.
यह कहकर मैंने एक् कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ दूसरी कों हाथ मे लेकरतेज़ मसल दिया। ख़ुशी – आअहह… अंकुश भैया… धीरे-धीरे सें म्मस्सलो…
कहकर ख़ुशी अपनी गान्ड कों मेरे लन्ड केँ उभार पऱ रगड़ने लगी। ख़ुशी नें मेरी शर्ट केँ बटन खोलकर उसे मेरे शरीर सें अलगकर दिया औऱ मेरे सीने केँ बालों कों सहलाकर मेरे निप्पल कों जीभ सें चाट लिया। मेरे मुँह सें आहहह… निकल गई,.
ख़ुशी मेरे कसरती जिस्म पर्र हाथ फेरकर बोलि – क्याँ बॉडी बनाई हैं आपने अंकुश भैया… साले गुण्डों कि क्याँ बिसात जोँ टक्कर लें पाते….
मैंने ख़ुशी केँ चुचियों कों मसलते हुएकहा – तुँ अब अपनीखैर मना…
ख़ुशी मेरी जीन्स खोलकर उसे नीचे सरकाते हुए बोलीं – मुझेकौन सि आपसे फाइट करनी हैं जौ अपनीखैर मनाऊं.
मे - अच्छा देखते हें।
यह कहकर मैंने ख़ुशी कों बेड पऱ धकेल दिया औऱ उसका शॉर्ट निकालते हुए बोला – अब जोँ फाइट होने वाली हैं वोँ उन गुण्डों सें ज्यादा ख़तरनाक होगी.
ख़ुशी कि छोटी सि पैंटी, उसकी मोटी-मोटी, मक्खन जैसी चिकनी जांघों केँ बीचठीक सें चमक भि नहि रही थि। मैंने उसकी जांघों कों सहलाते हुए उन्हें एक् दूसरे सें जुदा किया। उसकी पैंटी थोड़ी सि गीलीलग रही थि। मैंने उसकी पैंटी केँ गीलेभाग कों जीभलगा करचाट लिया। ख़ुशी किसीजल बीन मछली कि तरह उतावलापन उठी औऱ उसने मेरेसर केँ बालों कों अपनी मुट्ठी मे जकड़ लिया.
मैंने उसकीतरफ देखकर कहा – ख़ुशी तुम्हारी पुसी कां जूस तोँ बड़ा टेस्टी हैं…
मेरीबात सें वोँ बुरीतरह शर्मा गई, औऱ अपनासर दूसरी ओर घुमाकर मुस्करा उठी.फिन मैंने उसकी इकलौती छोटी सि पैंटी कों भि निकाल बाहर् किया.अरे वाह! क्याँ बुर थि उसकी, सफाचट, बिना बालों केँ एकदम चिकनी, लगता हैं जैसेकुछ वक़्त पहले हि चिकनी कि होगी। मांसल गुदगुदी सि। थोड़े सें उसके होंठ फूलेहुए… मगर दोनों आपस मे जुड़े हुए…दो इंच लंबीबीच कि दरार…सच कहूँ दोस्तों, इतनी खूबसूरत पुसी मैंने आज तक नहि देखी थि… देखकर मेरे मुँह औऱ लन्ड दोनों सें लार टपकने लगी। मैंने ख़ुशी कि दोनों टाँगों कों चौड़ा करके एकदूसरे सें जुदा किया, तब जाकर बमुश्किल उसकी फाँकें एक् दूसरे सें जुदा हुइ औऱ उसकी पुसी केँ निचले भाग पऱ एक् छोटा सें छेद दिखाई दिया.
मैंने अपनीजीभ कि नोक बनाकर उसछेद कों कुरेदा.
ख़ुशी – सस्स्स्सिईईई… आआहह… मम्मईईईई। आईईईई…
ख़ुशी सिसक पड़ी। उन्माद मे आकर उसने अपनी मोटी-मोटी जांघों कों भींचना चाहा, मगर बीच मे मेरासर थां, तोँ उसने अपने दोनों केले केँ तने मेरे कंधों पऱ रखकर गान्ड ऊपर कों उचका दि। मैंने अपने दोनों हाथऊपर लें जाकर उसके दोनों बूब्स कों हाथों मे कस लिया औऱ थोडा सख़्त हाथों सें उन्हें मीँजने लगा। चुचियों केँ मसलने केँ संग-संग उसकी बुर कि चटाई सें ख़ुशी कि हालत ख़स्ता होनेलगी.
ख़ुशी अपनी गान्ड कों ज़ोर-ज़ोर सें थिरका कर अपनेसर केँ बालों कों खींचने लगी। उसकी कोरी करारी बुर बेहद गीली हौ चुकी थि। फिन जैसे हि मैंने ख़ुशी केँ पुसी कि क्लिट, जौ अब थोड़ी बाहर् उभरआई थि, कों अपने दाँतों केँ बीचदबा लिया औऱ एक् हाथ कों नीचे लाकर अपनी उंगली कि नोक कों ख़ुशी केँ पुसी केँ छेद मे थोडा अंदर तक डालकर रगड़ने लगा। ख़ुशी उत्तेजना मे आकर अपनेसर कों इधर सें उधर पटकने लगी.अब उसे अपने आप् पऱ काबूरख पाना बहोत मुश्किल हौ रहा थां। अंत मे ख़ुशी नें मेरेसर कों अपनी मोटी-मोटी जाँघों केँ बीचकस लिया औऱ अपनी गान्ड कों हवा मे उठाकर झड़ने लगी। एक् मिनिट तक वोँ बदस्तूर रस छोड़ती रही औऱ मे उसके मीठेरस कों चपर-चपर चाटने लगा.जब ख़ुशी कां स्खलन खत्म हौ गय़ा तोँ वोँ अपनी गान्ड कों बैड पर्र लैंड करके हाँफने लगी.
मैंने अपने होंठों पर्र जीभ फेरते हुए उसकीतरफ देखकर कहा - ऊओउउंम्म पेटभर गय़ा, तुम्हारी बुर मे कितना मालभर रखा हैं ख़ुशी?
ख़ुशी बुरीतरह सें शरमा गयीँ,। उसने बड़ी बेदर्दी सें मेरे घुंघराले बालों कों पकड़कर अपनेऊपर खींच लिया औऱ मेरे चिपचिपे होंठों पर्र टूट पड़ी। मे पलटकर नीचे आँ गय़ा औऱ उसे अपनेऊपर लिटाकर बोला – क्यूं मेरी गुड़िया रानी, मजा आया??
ख़ुशी मेरे सीने मे मुँह छिपाकर बोलीं – ऊऊऊओहहह अंकुश भैया, यूआरसो केयरिंग गाइ… माँ नें सच हि कहा थां, आप् भाग्यवश हमारे जिंदगी मे आए हौ… यह मैंने अभि तक कहानियों मे पढ़ा याँ एक् दो ब्लूफिल्म मे हि देखा थां… आजसच मे अनुभव करकेपता चला कि ब्लोजॉब होता क्याँ हैं??
मैंने ख़ुशी केँ मोटे-मोटे चुतड़ों पर्र थपकी देकरकहा – आहहह… तोँ इसके बारे मे पहले सें हि पता हैं। हां??फिन तोँ यह भि पता होगा, कि अब ब्लोजॉब देने कि तुम्हारी बारी हैं…
ख़ुशी मेरे होंठ चूमकर बोलि – एक्सपीरियेन्स तौ नहि हैं… पर्र आप् गाइड करते जानां…
इतना कहकर ख़ुशी मेरे होंठों सें चूमना शुरुआत करतेहुए नीचे कि तरफ बढ़ने लगी.अब सिसकने कि मेरी बारी थि। ख़ुशीहर वोँ पैंतरा अपनारही थि जौ उसने पढ़ा औऱ देखा थां। चूमते चाटते हुए वोँ मेरीकमर तक पहुँच गयीँ,। मेरा लन्ड एक् छोटी सि फ्रेंची केँ अंदरउछल कूदकर रहा थां। हल्का सां गीलेपन कां धब्बा उसपरलग चुका थां। ख़ुशी नें एक् बार फ्रेंची केँ ऊपर सें हि मेरे लौड़े कों नीचे सें ऊपर कि तरफ अपनेहाथ सें सहलाया, फिन बड़ी कामुक अदा सें अपनी उंगलियों कों एलास्टिक मे फँसाकर धीरे धीरे वोँ उसे नीचे कि तरफ सरकाने लगी। जैसे हि उसकी एलास्टिक मेरे लन्ड कि सीमा सें नीचे हुइ, वोँ किसी स्प्रिंग लगे गुड्डे कि तरहउछल कर बाहर् आँ गय़ा। कुछदेर तक अपने मुँह पऱ हाथरखे ख़ुशी उसकेरूप जाल मे फँसीउसे एकटक निहारती रही.
फिन मेरे लौड़े कों अपनी मुट्ठी मे कसतेहुए बोलीं – क्याँ सबके लन्ड ऐसे हि होते हें अंकुश भैया???
मैंने शरारत सें ख़ुशी केँ बूब्ज़ कों मसलते हुएकहा – क्यूं तुम्हें पसन्द नहि आया??
ख़ुशी नें मेरे लौड़े कों अपनेगाल पऱ सटाकर उसकी गर्मी कों फील करतेहुए बोलि – मनपसंद तोँ बहोत आया, मगर क्याँ सबके लन्ड इतने हि बड़े औऱ मोटे होते हें?? इससे तौ मेरी पुसी बुरीतरह फट जाएगी। मुझे तौ इसे देखकर डर सां लगनेलगा हैं। इतना मोटा लौड़ा मेरी नन्ही सि बुर मे केसे जाएगा अंकुश भैया???? मेरी ऊँगली भि अभि मेरी पुसी केँ छेद मे ठीकतरह सें नहि जा पाती हैं…
मैंने उसके छोटे-छोटे नरम निप्पल कों अपनी उंगलियों केँ बीच लेकर सहलाते हुएकहा – पहले तोँ तुम् अपनी भाषा सुधारो ख़ुशी… हिन्दी मे इसे लन्ड कहते हें औऱ तुम्हारी इसको…
ख़ुशी - अंकुश जीपता हैं मुझे… आपको बताने कि ज़रूरत नहि हैं…
ख़ुशी नें मेरीबात कों बीच मे काटकर हँसते हुएकहा.
ख़ुशी - वोँ सभीबाद मे केहना सीख लूँगी, पहले आप् मेरीबात कां जवाबदो…
मैंने कहा – सबके एक् जैसे तोँ नहि होते, कुछ बड़े-छोटे भि होते हें.
ख़ुशी – तोँ क्याँ इससे भि बड़े होते हें???
मे झिड़कते हुए बोला – अरे दोस्त ख़ुशी तुम् प्रश्न बहोत करती होँ… होँ सकते हें… मगर मैंने किसी कां नहि देखा.चलो अब बातें बंद करकेइसे मुँहलो…
ख़ुशी नें झेंपकर मेरे लन्ड कों चूम लिया औऱ फिन उसके सुपाड़े कों पूरा खोलकर उसे चाटने लगी। उसपर हल्की सि प्री-कम चिपकी थि तौ ख़ुशी उसका स्वाद लेकर बोलि – आपके लौड़े कां जूस भि टेस्टी हैं…
यह कहकर उसनेउसे अपने मुँह मे गड़प्प कर लिया। ख़ुशी पूरे इंट्रेस्ट केँ संग मेरा लन्ड चूसरही थि। मेरा लौड़ा एक् दम स्टील रोड कि तरह सख्त हौ चुका थां जौ अब किसी भि बुर कि सील फाड़ने मे सक्षम थां। मैंने अपनाहाथ ख़ुशी केँ सर पर्र रखकर उसने रुकने कां इशारा किया। ख़ुशी लन्ड मुँहलिए हुए हि मेरीतरफ देखने लगी.
मैंने कहा – बसअब बहोत हौ गय़ा… इसकारस मुँह सें हि पीना हैं याँ फिन… अपनी पुसी.
अपनीबात अधूरी छोड़कर मे हँसने लगा। ख़ुशी मेरीबात समझकर रुक गई, तौ मैंने उसे अपनेबगल मे लिटा लिया औऱ उसके होंठों कों चूमकर उसके पूरे जिस्म पऱ हाथ फिराया। ख़ुशीमचल उठी.फिन मे ख़ुशी कि जांघों केँ बीचआकर अपने घुटने टेककर बैठ गय़ा। उसकी मखमली जांघों कों सहलाकर उन्हें चूमने, चाटने लगा। अपनेहाथ कों अपनेथूक सें गीला करके उसकी बुर केँ आस-पास सहलाया। ख़ुशी केँ अंदर बहोत चुदास भरी हुईँ थि। मेराहाथ लगते हि ख़ुशी कि बुर फिन सें बहनेलगी। मैंने एक् बार उसकेरस कों जीभ सें चाटा। ख़ुशी कि सिसकी निकल गई,.
अब वोँ वक्त आँ गय़ा थां, जिसके प्रतीक्षा मे ख़ुशी नाँ जाने कितने दिनों सें आस लगाएहुए थि। अपने लौड़े कों हाथ मे लेकर मैंने उसकीबूर केँ होंठों पर्र रखकरऊपर नीचे फिराया। गर्म लन्ड केँ एहसास कों अपनीबूर कि बंद फांकों केँ ऊपर महसूस करके, ख़ुशी कां बदन सिहरउठा। फिन मैंने ख़ुशी कि बुर केँ बंद होंठों कों फैलाकर अपने लन्ड केँ सुपाड़े लायक स्थान बनाई औऱ अपना टमाटर जैसा गर्म सुपाड़ा उस स्थान मे स्लिम कर दिया.
एक् बारफिन मैंने ख़ुशी केँ मांसल शरीर कों सहलाकर उसकी चुचियों कों मसलते हुएकहा – तैयार ख़ुशी बेबी?
ख़ुशी नें बंद आँखों सें हम्म… करके अपनी रजामंदी दि औऱ मैंने एक् हल्का सां धक्का ख़ुशी कि कोरी बुर मे लगा दिया। ख़ुशी नें अपने होंठ कसकरबंद कररखे थें, फिन भि उसके मुँह सें उउन्न… जैसी आवाज़ निकल हि गयीँ, औऱ मेरा सुपाड़ा ख़ुशी कि बुर कि पतली सि झिल्ली सें जा टकराया.
मैंने ख़ुशी केँ होंठ चूमकर उसकेकान मे फुसफुसा करकहा – यही वोँ दीवार हैं ख़ुशी जोँ अब धाराशाई होनी हैं… औऱ इसके उसपार तुम्हारे लिए असीममजा कां खजाना छुपा हैं। इसलिये थोडा सां सहन करना मेरी गुड़िया.
ख़ुशी नें बंद आँखों सें हि सर हिलाकर हामीभर दि। मैंने अपना लन्ड थोडा सां बाहर् कों किया औऱ दूसरे हि लम्हा एक् करारा सां धक्का ख़ुशी कि बुर मे मार दिया। पट्ट… कि आवाज़ केँ संग हि ख़ुशी कि सीलटूट गई, औऱ मेराआधे सें भि ज्यादा लन्ड उसकी कोरी कमसिन गीली चिकनी टाइट बुर मे दनदनाता हुआघुस गय़ा। ख़ुशी दर्द केँ मारे तड़पउठी, लाख कोशिश केँ बाद भि उसकीचीख निकल गयीँ,.
ख़ुशी – म्म्म्माआआआआअ…। मर गाइिईई… ईईईशशशशश…। आआआहहह… उफ्फ्फ्फ़…
दर्द सें उसकी आँखें छल-छला गयीँ,। मैंने ख़ुशी केँ बालों मे सहलाकर कहा – बस हौ गय़ा ख़ुशी…
यह कहकर मे उसके होंठों कों चूसने लगा। एक् हाथ सें उसके अनारों कों सहलाता रहा.कुछ देर मे उसका दर्दकम होँ गय़ा। मैंने फिन एक् फाइनल कोशिश कि औऱ अपने लन्ड कों जड़ तक ख़ुशी कि नई चुदी बुर मे डालकर करठहर गय़ा। ख़ुशी दर्द सें कराहरही थि, मैंने फिन सें उसके निपल्स कों चाटने मसलने सें उसके दर्द कों कम करने कि कोशिश कि। कुछदेर बाद ख़ुशी शांत हुईँ, तोँ मैंने आहिस्ता अपनी कोशिश शुरुआत कर दि औऱ हल्के-हल्के धक्के लगाकर उसे चोदने लगा। थोड़े सें धक्के तेज करते हि ख़ुशी दर्द सें दोहरी हौ गयीँ,, धनुष कि तरहपीठ मोड़कर उसने अपनासिर बैड सें टिका लिया। धक्कों केँ कारण उसका मुँहखुल गय़ा, वोँ बुरीतरह कराहने लगी.मगर मैंने अब अपनी स्पीड कम नहि कि, कुछदेर केँ बाद उसकी बुर रस छोड़ने लगी.
अब उसे भि मजाआने लगा थां। ख़ुशीअब दर्द कों दरकिनार करके, मज़े सें मेरा लन्ड लेनेलगी, उसकी दर्दभरी कराहें सिसकियों मे बदल चुकी थि। एक् बार ख़ुशी कों ऊपर सें चोदने केँ बाद, मैंने उसे अपनेऊपर बिठा लिया.अब वोँ मेरे लन्ड केँ ऊपर बैठकर अपने मनमाने तरीक़े सें चुदने लगी.
मे ख़ुशी कों एक् घंटे तक चोदता रहा.इस बीच वोँ अनगिनत बार झड़ी। मे भि दोबार अपनामाल उसकी बुर मे भर चुका थां। आख़िर मे घोड़ी बनाकर उसकी मोटी-मोटी गान्ड कों दबाकर चोदने मे मुझे सबसे ज्यादा मजाआया औऱ इसी पोज़िशन केँ बाद हमने अपनी चुदाई खतम कि। ख़ुशी केँ चेहरे पऱ संपूर्ण तृप्ति केँ भाव थें, वोँ मेरे शरीर सें बहोत देर तक चिपकी रही.
मैंने ख़ुशी कि गान्ड मसलकर पूछा – अब तोँ खुश हौ तुम् ख़ुशी??कर ली अपनेमन कि?
ख़ुशी - थैंकयू भैया… आपने मेरी ख़्वाहिश पूरीकर दि…
यह कहकर ख़ुशी नें मेरे लन्ड कों चूम लिया। फ्रेश होकर ख़ुशी रसोई सें नौकरानी कि सहायता सें अपन दोनों केँ लिए खानां वहीं बेडरूम मे हि लें आई। मीठी-मीठी छेड़-छाड़ औऱ हँसी-ठिठोली केँ बीच हम् दोनों नें संग मिलकर खानां खाया.कुछ देररुक कर मे उसे एक् किस करके उसकेरूम सें बाहर् आँ गय़ा.
maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 43
मे अभि हॉलपार करके निकल हि रहा थां कि तभी ख़ुशी कि माँ शांति कि वाहन पोर्च मे आकर रुकी। संकेत भि संग मे हि थां। कार सें उतरकर उनका अंदर आनांहुआ औऱ मेरा बाहर् निकलना, मुझे देखते हि वोँ चहकते हुए बोलीं.
शांति – अरे अंकुश बेटा! चलदिए??
मे – हां आंटी… आप् आँ गई?? कैसीरही जश्न?
शांति कामुक अंदाज मे स्माइल करतेहुए बोलीं – हमारी जश्न तौ ठीक हि रही, तुम् बताओ, तुम्हारा काम पूराहुआ कि नहि??
मैंने चौंकते हुएकहा – मेराकाम?? मेराकौन सां काम थां जोँ पूरा करना थां??
शांति बात कों संभालते हुए बोलि – अरेवही अंकुश, जिसके लिए ख़ुशी नें तुम्हें बुलाया थां, कुछ गाइडेन्स चाहिए थां नां उसे, अपनी फर्दर स्टडी केँ लिए.
मे समझ गय़ा कि शायद ख़ुशी नें इनको बहाने बताकर मुझे बुलाने केँ लिएकहा होगा तोँ जल्दी बोला – हांजी, हांजी! होँ गय़ा.
शांति – खानां खाया याँ ऐसे हि जारहे होँ??
मे – हांजी, खानां भि होँ गय़ा। जी, अब मे चलता हूं, गुड नाईट.
शांति नशीले अंदाज मे बोलि – ओके अंकुश, गुड नाईट, टेक केयर, आते रहाकरो…
मेरेवहा सें निकलते हि संकेत अपनी मां शांति सें बोला – माँ आपको नहि लगता कि आप् औऱ ख़ुशी दोनों वकील भैया कों कुछ अधिक हि लिफ्ट देनेलगे हौ.
शांति नें चौंककर संकेत कि तरफ देखा औऱ बोलीं – तुम् कहना क्याँ चाहते होँ?
संकेत – मुझे लगता हैं, कि ख़ुशी इनकोकुछ ज्यादा हि तवज्जोह देनेलगी हैं औऱ आप् भि ख़ुशी कों एनकरेज करती होँ.
शांति – संकेत अंदरचलो, बैठकर बात करते हें.
फिन शांति संकेत कों हॉल मे लेँ आई औऱ सोफे पऱ बैठकर दोनों बातें करनेलगे.
शांति – संकेत, तुम् कहीं अपनी छोटी बेहन केँ बारे मे कुछ ग़लतसलत तोँ नहि सोचरहे?
संकेत नें अपनी नज़र झुकाली मगरकुछ कहा नहि। शांति समझ गई, कि जौ उन्होंने प्रश्न किया हैं, वही उसकेमन मे हैं.
शांति - देखो संकेत बेटा। तुम् भले हि उसकेसगे भइया हौ, मगरआज तक तुमने ऐसाकोई काम नहि किया जिससे ख़ुशी कों तुम्हारे ऊपर भरोसा हुआ होँ। वहीं अंकुश एक् नेकदिल होने कि वजह सें उसने ख़ुशी केँ संग वोँ किया जोँ शायद हि कोईकर पाए… अपनीजान जोखिम मे डालकर एक् पराई लड़की केँ मान सम्मान कि रक्षा कि जोँ किसी भि ग़ैरतमंद लड़की याँ महिला केँ लिए सबसेऊपर होता हैं। अबऐसे मे ख़ुशी कां अंकुश पऱ विश्वास करना क्याँ ग़लत हैं??? औऱ आज तोँ मैंने हि ख़ुशी कों उसेयहा बुलाने केँ लिएकहा थां, ताकि ख़ुशी अकेलापन महसूस नां करे। वैसे भि आजकल जमाना बहोत खराब हैं। नौकरों पर्र भरोसा करके एक् जवान लड़की कों अकेला नहि छोड़ा जा सकता थां.
संकेत – सॉरी माँ, मेरायह मतलब नहि थां। मैंने तौ बसऐसे हि बोल दिया। कि एक् बाहर् केँ व्यक्ति पर्र ज़रूरत सें ज्यादा भरोसा करनाठीक नहि.
शांति – कोईबात नहि, जेलस फीलिंग (ईर्ष्या) होती हैं इसउमर मे। कोईनई बात नहि हैं… वैसेउसी बाहर् केँ व्यक्ति यानी अंकुश केँ बहोत अहसान हें इसघऱ पऱ। अबजाओ जाकरसो जाओ। मे भि थक गयीँ, हूं.
जब संकेत वहा सें उठकरचला गय़ा, तौ शांति मन हि मन मुस्करा उठी। उन्हें अपनीचाल कामयाब होती नज़र आँ रही थि.
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शहर कां 5 सितारा होटल रिवेरो, रात केँ अंधेरे मे कुछ अधिक हि जगमगाने लगता हैं। इसके अंदर कि रंगीनियों कि तोँ बात हि अलग हैं। एक् सामान्य व्यक्ति केँ लिए तोँ इसके अंदर पहुँचना एक् ड्रीम्स देखने जैसा हि हैं। होटल रिवेरो कां बेसमेंट, जौ स्वयं किसी आलीशान महल सें कम नहि हैं, इसके विशाल हॉल मे इस वक़्त ऐसाजान पड़ता थां मानो किसी राजा महाराजा कां दरबार लगाने वाला होँ.
एक् विशालकाय मेज केँ पीछे एक् बड़ी सि सुसज्जित कुर्सी जोँ इस वक़्त खाली थि। उस विशाल मेज केँ तीनतरफ शानदार कुर्सियों पऱ शहर कि जानी मानी हस्तियाँ विराजमान थि। उनमें सें हि कुछ कुर्सियों पऱ उस्मान भइया, उसका बेटा असलम, बिल्डर योगराज, उसका बेटा गुंजन, कमिश्नर कां बेटा विकी औऱ एमएलए कां भतीजा सन्नी बैठेहुए थें। पुलिस औऱ नारकॉटिक डिपार्टमेंट केँ कुछ अफसरों केँ अलावा औऱ भि बहोत सें लोग थें। जिनका जिक्र करनायहा ज़रूरी नहि हैं.
तभीहॉल कां गेट खुला, औऱ उस स्पेशल हॉल कां दरबान एक् नौजवान केँ संग अंदर दाखिल हुआ.सब कि नज़रउधर कों मूड गयीँ,। वहा बैठे तमाम लोगों कि नज़रउस नौजवान पऱ टिक जाती हैं, जोँ एक् हट्टा-कट्टा, 6’2” केँ लगभग लंबा, चौड़ा सीना, गोरे-चिट्टे चेहरे पऱ फ्रेंच कट दाढ़ी, नाक थोड़ी सि फूली हुई। नीली आँखों वाले किसी हिन्दी फिल्म केँ हीरो जैसेइस युवक कां व्यक्तित्व देखकर वहा बैठेसब लोग जैसे उसमें खो सें गये.
तभी असलम अपनी स्थान सें उठ खड़ाहुआ औऱ तेज-2 कदमों सें चलताहुआ उस नौजवान केँ पास पहुंचा औऱ उसकेगले सें लगकर बोला.
असलम - वेलकम यार, तुम्हारा हमारे ग्रुप मे स्वागत हैं.
सभी मुँहबाए उन दोनों कि तरफ देखने लगे.
असलम नें वहा बैठेसभी लोगों कों संबोधित करकेकहा – यही हैं वोँ आदमी जिसने कल मौके पऱ आकर हमारी जान बचाई थि। नाम हैं जोसेफ.
फिन असलम नें वहा बैठेसभी लोगों सें जोसेफ कां परिचय करवाया औऱ उसे अपनेपास वाली चेयर पर्र बिठा लिया। जोसेफ उस चेयर, जौ कि सबसेअलग टेबल केँ पीछे किसीराज सिंहासन कि तरहसजी हुईँ थि, कों खालीदेख कर चौंका औऱ उसने असलम सें फुसफुसाकर उसके बारे मे पूछा। इससे पहले कि असलम जोसेफ कों कोई जवाब देता, कि उसी चेयर केँ ठीक पीछे वाली दीवार एक् हल्की सि गड़गड़ाहट केँ संग एक् तरफ कों सरकी औऱ उसमें सें एक् स्याह काले लबादे मे लिपटी हुइ, एक् मोहतरमा प्रगट हुईँ, जिसकी सिर्फ आँखें हि चमकरही थि। उसेदेख करसभी लोग एक् संग खड़े होँ गये। वोँ दोकदम आगे बढ़कर उस सिंहासन नुमा कुर्सी पर्र बैठ गयीँ,। स्याह लबादे केँ अंदर सें उस मैडम कि बसदो आँखें हि नुमाया हौ रहीथीं, जोँ वहा बैठेसब लोगों कां निरीक्षण करनेलगी। घूमते–2 जब मैडम कि नज़र जोसेफ नाम केँ उस युवक पर्र पड़ी, तोँ मैडमउसे देखती हि रह गई,। फिन मैडम नें अपनी खनकती आवाज़ मे पास हि बैठे असलम सें उसके बारे मे पूछा.जब असलम नें सभीकुछ बता दिया, तोँ मैडम बोलि.
मैडम – यह तुमने अच्छा किया असलम, हमारे संघटन कों ऐसे हि लोगों कि ज़रूरत हैं। इसे हमारे काम औऱ संघटन केँ उसूलों केँ बारे मे सभी समझा देना.
फिन वोँ सभीलोग कल हुइ घटना कां विश्लेषण करनेलगे कि ऐसाहुआ तोँ आख़िर केसे? इतनी पक्की खबर पुलिस केँ कानों तक केसे पहुँची??? यहासब इसीतरह कि चर्चा मे लगे थें, मगर जोसेफ कां ध्यान उनसभी कि बातों सें हटकर मैडम कि आँखों कां एक्स-रे करने औऱ उसके बोलने केँ तरीक़े कि तरफ हि थां। जोसेफ केँ दिमाग़ मे मैडम कि धुंधली सि छवि बनने बिगड़ने लगी औऱ एक् अंजाना सां शक़ पैदा होनेलगा। पता नहि क्यूं जोसेफ कों मैडम कि वोँ आँखें जानी पहचानी सि लगरही थीं। जौ शक़अब तक जोसेफ केँ दिमाग़ मे पनपरहा थां, वोँ सही साबित होता दिखाई देरहा थां। कुछदेर मे वोँ मीटिंग खतम होँ गई,, जिससे जोसेफ कों कोई लेना देना नहि थां। असलम कों दूसरे दिन मिलने कां वादा करके वोँ वहा विदाहुआ.
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अगले पूरेदिन मे अपने एक् केस मे उलझाहुआ थां, कि तभी मेराफोन बजनेलगा। स्क्रीन पऱ जोँ नंबर फ़्लैश होँ रहा थां, उसेदेख कर मेरे चेहरे पऱ मुस्कान आँ गई। मैंने फोन उठाई कि, दूसरी तरफ सें छाया (प्राची जिसका रेपहुआ थां कि छोटी बेहन) कि सुरीली आवाज़ सुनाई दि, मेरे हेलो बोलते हि.
छाया - आप् कहां होँ अभि?
मैंने उसे बताया - मे अपने दफ़्तर मे कामकर रहा हूं.
छाया – मुझे आपसे मिलना थां… आपके दफ़्तर आँ जाऊं??
मैंने छाया कों साम कों घऱआने कां बोलकर कॉलआई कटकर दि.
उसीसाम 4 बजे असलम अपनेनये यार जोसेफ कों लेकर अपनेमेन अड्डे पर्र पहुंचा, जहाँ उसके धंधे कां ज़्यादातर माल स्टोर होता थां औऱ यहीं सें सप्लाई होता थां। यहशहर केँ बाहर् इंडस्ट्रियल इलाक़े मे एक् बड़ा सां गोडाउन जैसा थां, जहाँ पऱ बहोत सारे व्यक्ति सख़्त पहरे पर्र थें। असलम नें बताया, कि यह हमारा मेन गोडाउन हैं, यही सें सभी स्थान ड्रग औऱ हथियार सप्लाई होते हें। बाहर् सें देखने पऱ यह एक् बड़ी फैक्टरी दिखाई देती हैं। मगर अंदरसभी दो नंबर कां मालभरा पड़ा थां। उसकेबाद असलम नें जोसेफ कों वोँ सारी स्थान दिखाई, जहाँ पर्र वोँ सभी ड्रग औऱ हथियार रखेहुए थें, जिन्हें इसशहर हि नहि देश विदेश केँ लिए भि सप्लाई किया जाता थां.
यह फैक्टरी किसीजगन सेठ केँ नाम सें रजिस्टर थि, जोँ मुंबई कां बहोत बड़ा कारोबारी थां। दिखावे केँ लिएयहा बिजली केँ केबल बनाए जाते थें। मगर सामने असल तोँ कुछ औऱ हि थि। वहा सें निकलकर असलम नें शहर मे एक् दो डीलर्स सें जोसेफ कों मुलाकात करवाई। अपने धंधे केँ कामों केँ बारे मे बातें बताता रहा.फिन एक् बीयरबार मे जाकर दोनों नें बीयरपी, बीयर पीतेहुए, असलम नें जोसेफ केँ अतीत केँ बारे मे पूछताछ भि कि.
असलम - रूबी क्यूं नहि आई??
जोसेफ - रूबी सिर्फ़ काम केँ समय हि मेरेसंग होती हैं, बाकी वक़्त वोँ होटल केँ कमरे सें बाहर् नहि आतीजब तक कोईकाम उसे नाँ करना होँ.
देररात जब मे अपने फ्लैट मे पहुंचा, घऱ खुलादेख कर हि मे समझ गय़ा कि छाया आँ चुकी हैं, क्योंकि चाबियों कां एक् सेट उसकेपास भि होता थां। जब मे घऱ केँ अंदर पहुंचा तोँ छाया सोफे पर्र बैठी टेलीविज़न देखते हुए मेरा प्रतीक्षा कररही थि.
छाया शिकायत करतेहुए बोलीं – कितनी देरकर दि?? कब सें मे यहाआई हूं, चलिएअब जल्द सें फ्रेश होँ जाइए, खानां ठंडा हौ रहा हैं.
मे – खानां? तुमने बनाया हैं?
छाया – हां। मे तौ यहा 7 बजे हि आँ गई थि.
फिन हम् दोनों नें संगबैठ कर खानां खाया, औऱ फिन सोफे पऱ बैठकर टेलीविज़न देखते हुए बातें करनेलगे.
मैंने छाया सें कहा - यह कैसाभूत सवार हैं तुम्हारे सिर पऱ? अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़कर, पिछले 6-7 महीनों सें फाइटिंग, ड्राइविंग, शूटिंग यहसभी सीखने मे लगी होँ। जिसउमर मे हाथों मे कलम औऱ कंप्यूटर होने चाहिए उन हाथों मे गन लेकर घूमती होँ.
छाया नें मेराहाथ अपनेहाथ मे लेतेहुए कहा – मैंने अपनी बेहन कि चिता पऱ शपथखाई थि, कि जब तक उन दरिंदों कां अंत होतेहुए अपनी आँखों सें नहि देख लूँगी, सुकून सें नहि बैठूँगी। कलम-कंप्यूटर तौ बाद मे भि आँ सकते हैं अंकुश भैया, मगर मेरी बेहनअब कभी वापसलौट कर नहि आएगी.यह कहतेहुए उसकी आँखें नम होँ गयीँ,.
मे – तुम्हारे घऱ वाले। उनका क्याँ रुख़ हैं तुम्हारे इस फ़ैसले पर्र?
छाया – माँ मेरेसंग हें, पिताजी सें हम् कोई भि वास्ता हि नहि रखते। औऱ नाँ हि अब उनसेकोई पैसे कि सहायता लें रहे हें, एक् तरह सें वोँ हमसे अलग-थलग हि समझो। उन्होंने लाख कोशिश कि हमें मनाने कि मगर हम् मे सें कोई उनकेसंग नहि हैं, यहा तक कि मेरा छोटा भइया भि नहि.
मे – मगर उन्हें पता तौ होगा तुम्हारे मंसूबों केँ बारे मे.
छाया – पता भि होँ तौ भि मुझेअब कोई फर्क नहि पड़ता…
मे – मगर मुझे फ़र्क पड़ता हैं छाया। तुम् मेरेसंग मिलकर अपनी बेहन केँ क़ातिलों सें रिवेंज लें रही हौ, यहबात अगर उन्हें पता हैं तोँ जाहिर सि बात हैं वोँ इसे कहीं औऱ भि लीककर सकते हें। जौ व्यक्ति पैसों केँ लिए अपनी बेटी कों मरतेहुए देख सकता हैं, उसकेलिए यह बातें हमारे दुश्मनों तक पहुँचाना क्याँ बड़ीबात हैं। फिनजिस आसानी सें हम् अपनेकाम कों अंजाम देना चाहते हें, उसमें अड़चनें पैदा हौ सकती हें। इसलिये पताकरो, कि उन्हें इन बातों कां पता तौ नहि हैं.
छाया – लगता तौ नहि कि उन्हें कुछ भि पता होँ, क्योंकि हम् मे सें उनसेकोई बात भि नहि करता.फिन भि मे पता करूँगी औऱ यह ख़याल रखूँगी कि यहराज किसी केँ भि सामने उजागर नां होँ.
मे – मगर मैंने तुमसे वादा किया हैं, कि मे उन हरामजादों कों उनके अंजाम तक पहुंचा कर हि रहूँगा। फिन तुम्हें अपनीजान जोखिम मे डालने कि क्याँ ज़रूरत हैं??
छाया अपनासर मेरे कंधे सें टिकाते हुए बोलीं – जब आप् बेगाने होकर मेरी बेहन कों न्याय दिलाना चाहते हौ, उसकी आत्मा कों शांति दिलाना चाहते होँ तौ क्याँ थोडा सां ख़तरा मे नहि लें सकती। एक् सें भलेदो, औऱ सच कहूँ तोँ हम् तीनों हि आपके बहोत आभारी हें। माँ तोँ मानती हें कि आप् आम इंसान नहि हौ, कोई फरिश्ता होँ। भलाकौन किसी दूसरे केँ लिए इतना सोचता हैं.
मैंने छाया कि पीठ पऱ हाथ सें सहलाते हुएकहा – मे कोई फरिश्ता नहि हूं, बस मेरे जमीर नें कहा कि प्राची केँ हत्यारों कों उनकेकिए कि सज़ा मिलनी हि चाहिए। क़ानून केँ तहत नहि दिला पाया, तौ गैर क़ानूनी हि सही.
छाया मेरे शरीर सें सटतेहुए बोलीं – यहसोच किसीआम इंसान कि तोँ नहि हौ सकती। आप् सच मे कोई फरिश्ता हि होँ.
यहकहकर उसने मेरेगाल पर्र किसकर दिया.
मैंने छाया कि तरफ देखा, तौ वोँ सर झुकाकर बोलि – सॉरी भैया.
मे – किसबात केँ लिए?
छाया – वोँ मे अपनी भावनाओं कों काबू मे नहि करपाई, औऱ आपकोकिस कर लिया। आपको बुरा तौ नहि लगा?
मे – तुमसे किसने कहा कि मुझे बुरालगा? मे तौ तुम्हारे मासूम चेहरे कों देखरहा थां। तुम् मेरे सें छोटी होँ, औऱ तुम्हें पूराहक़ हैं, अपना प्रेम जताने कां.
छाया मेरेगले सें लिपट गई,, औऱ सुबकते हुए बोलि – आप् सच मे बहोत अच्छे हौ.
मैंने भि छाया कि पीठ सहलाते हुए उसके माथे पर्र किसकर दिया औऱ बोला – अब तुम् घऱ जाओगी याँ यहींसो जाओगी??
छाया – अब तोँ बहोत रात हौ गई,, अब सुभह हि चली जाऊंगी अगर आपकोकोई प्राब्लम नाँ होँ तोँ.
मैंने छाया केँ गाल पऱ हल्की सि चपत लगाते हुएकहा – बहोत मारूँगा तुझेही इसतरह कि बात कि तौ, भला मुझे तुझसे क्याँ प्राब्लम होनेलगी। जहाँ तेरी मर्ज़ी होँ वहासो जाओ.
छाया – मे तोँ आपकेसंग हि सोऊंगी। सच मे उसदिन होटल मे बड़ी अच्छी नींदआई थि आपकेसंग.
मे छाया केँ चेहरे कि तरफ देखने लगा, जहाँ मुझे सिर्फ़ मासूमियत केँ सिवा औऱ कुछ नज़र नहि आया.रात कां नां जानेकौन सां पहर थां, किसी केँ रसीले हाथों कां स्पर्श अपने जिस्म पर्र पाकर मेरी नींदटूट गयीँ,। देखा तोँ मेरी टीशर्ट ऊपर कों थि। लोवर भि नीचे खिसका हुआ थां औऱ छाया अपने कोमल हाथों सें मेरे शरीर कों ऊपर सें नीचे तक सहलारही थि। मेरे शरीर मे झुरझुरी सि फैल गई, औऱ मेरे फ्रेंची मे तंबू सां बननेलगा। छाया मेरे कंधे पर्र अपनासर टिकाए नीचे कों मुँह करके मेरे जिस्म सें खेलरही थि। फ्रेंची मे बने तंबू कों देखकर छाया कां हाथ अनायास हि मेरे लन्ड पर्र पहुँच गय़ा औऱ वोँ उसे सहलाने लगी.
मैंने कुछदेर चुप रहना हि ठीक समझा। मे देख्ना चाहता थां, कि छाया केँ आख़िर मन मे क्याँ हैं। क्याँ वोँ मेरेसंग सेक्स करना चाहती हैं याँ बसऐसे हि पुरुष स्पर्श कों फील करना चाहती हैं?
जबकुछ देर छाया नें मेरे लन्ड कों सहलाया तोँ वोँ औऱ अधिक सख़्त होँ गय़ा, जिसे छाया नें अपनेहाथ मे लेकरफील किया। जिज्ञासा वश छाया नें मेरे फ्रेंची कों जैसे हि नीचे किया, मेरा लन्ड सीधा खड़ा होकर छाया कों घूरने लगा। मैंने साफ-2फील किया कि मेरेफुल खड़े लन्ड कों देखकर छाया नें अपने शरीर मे एक् झुरझुरी महसूस किया औऱ वोँ मेरे लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे कसकर दबाने लगी। छाया नें मेरे लन्ड केँ सुपाड़े कों खोलकर देखा.लाल टमाटर कि तरह चमकता सुपाड़ा देखकर वोँ मंत्रमुग्ध सि अपनासर नीचे कों लें जानेलगी। जैसे–2 छाया कां सर नीचे कों बढ़रहा थां, मेरी साँसें भि उसीगति सें बढ़ने लगी। छाया निरंतर मेरे लन्ड केँ सुपाड़े कों खोल-बंद कररही थि.
आख़िर छाया अपने मुँह कों मेरे लन्ड केँ सुपाड़े तक लें गयीँ,। अब उसकी गर्म–2 साँसें मेरे लन्ड कों छूनेलगी थि। छाया कि गर्म साँसों कों महसूस करते हि, मेरा लन्ड झटके खानेलगा। नां जाने क्याँ सोचकर छाया नें मेरे सुपाड़े पऱ अपने तपते होंठरख दिए औऱ उसेचूम लिया। नाँ चाहते हुए भि मेरे मुँह सें सस्सिईईईईईईईईईईई…। सिसकी निकल गई,.
छाया नें झट सें मेरा लन्ड छोड़ दिया औऱ मेरीतरफ पलटी.मगर मेरी आँखें अभि भि बंद थि। छाया कां दिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां, स्वयं उसे अपनेदिल कि धड़कनें साफ-साफ सुनाई दे रहीं थि। मेरी आँखें बंददेख कर छाया नें राहत कि साँसली औऱ कुछदेर अपनी साँसों कों नियंत्रित करतीरही। छाया नें कुछदेर औऱ प्रतीक्षा किया, मगर मेरीतरफ सें कोई हलचल नां देख उसनेफिन सें मेरे लन्ड केँ सुपाड़े कों मुट्ठी मे दबा लिया औऱ उलट-पलट कर देखने लगी.कुछ देरयूँ हि देखने केँ बाद छाया नें फिन सें उसे चूमा औऱ सुपाड़े पऱ अपनीजीभ सें चाट लिया.
मैंने इसबार कसकर अपने होंठ भींचलिए। अब छाया अपने होंठों कों गोल घेरे मे करतेहुए मेरे लन्ड केँ सुपाड़े कों अपने मुँह मे भरनेलगी। एक् दोबार धीरे-धीरे-2 सें अंदर बाहर् किया.मगर छाया कां भि अब कंट्रोल हटताजा रहा थां, तौ छाया मेरे लन्ड केँ सुपाड़े कों जल्द-2 अंदर-बाहर् करनेलगी। लाख कंट्रोल केँ बाद भि मेराहाथ स्वतः हि उसकेसर पर्र पहुँच गय़ा औऱ मे छाया केँ सर कों अपने लन्ड पऱ दबाने लगा। छाया मेरे लन्ड कों मुँह सें बाहर् निकालना चाहती थि, मगर मेरेहाथ केँ दबाव केँ कारण वोँ ऐसा नहि करसकी, तौ उसने तिरछी नज़र सें मेरीतरफ देखा। मे भि छाया कों हि देखरहा थां.
मे – अब तेरे जौ मन मे हैं वोँ कर छाया… शरमाने कां अबकोई फ़ायदा नहि हैं…
छाया केँ चेहरे पर्र मुस्कराहट खिल गयीँ, औऱ छाया मेरे लन्ड कों पूरेमन सें चूसने लगी। मे भि छाया केँ सर पर्र हाथरख कर उसको इशारे सें गति देनेलगा। जब चुसते–2 उसका मुँह दुखने लगा तोँ उसने मेरे लन्ड कों बाहर् निकाला औऱ अपनेहाथ सें मसलने लगी। मैंने उसके कंधे पकड़कर अपनेऊपर खींच लिया औऱ उसके पतले–2 मुलायम होंठों कों चूसने लगा.कुछ देर उसके होंठ चूसने केँ बाद मैंने उसको पूछा.
मे – क्याँ इरादा हैं छाया?
छाया मदहोशी भरी आवाज़ मे बोलीं – अबमत रुकिये अंकुश भैया… मे इसमजा कि सीमा कों पाना चाहती हूं…। प्लीज़ दे दीजिए मुझे वोँ सुख.
मैंने कहा – सोचलो छाया… बड़ी कठिनराह हैं, इससुख कि… झेल पाओगी??
छाया – मेरी चिंता मत करिए आप् अंकुश भैया… बस मे आज वोँ सुख पाना चाहती हूं.
मे - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, परेशानी तुम्हें झेलनी हैं… मेरा क्याँ??
मैंने छाया केँ सारे कपड़े निकाल दिए, उसकी कंचन सि कायादेख कर मे बौरा गय़ा। मैंने छाया कों बिस्तर पऱ लिटा दिया औऱ स्वयं केँ कपड़े निकाल कर बिस्तर केँ नीचे फेंकदिए। उसकेबगल मे बैठकर एक् बार उसके पूरे जिस्म पऱ हाथ फेरा। जैसे-जैसे मेराहाथ उसके जिस्म पऱ घूमरहा थां, उसका जिस्म किसीबिन पानी कि मछली कि तरह फड़फड़ाने लगता। उसकेपेट सें होतेहुए उसकी कठोर 32” कि गोल-गोल गेंद जैसी चुचियों कों सहलाता हुआ उसकी गर्दन औऱ फिन गालों सें होतेहुए उसके पतले होंठों पऱ अपनी एक् उंगली उल्टी करके फिराई। छाया अपनी आँखें मूंदे जिस्म मे हौ रहे सेन्सेशन मे डूबी हुई थि.
maira Pyara Devar - niyantran - Kahani ab aur interesting hogi
khusii k baad Shanti Devi kaa number lagega. Guptajise too kuch hotha jata nahee isi karan wo chidchidi hu gai h. iintazaar agle rasprad update kee
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