Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
रश्मी तोँ उसके सामने खुल हि चुकी थि.बस थोड़ी बहोत झिझक दूसरो केँ सामने कपड़े उतारने कि थि.औऱ वैसे भि यहआज कि रात तोँ होना हि थां। इसलिये उसने एक् गहरी साँसली औऱ आँखेबंद करके एक् हि झटके मे अपनेसूट कि कमीज़ कों पकड़ा औऱ उसेसिर सें घुमाकर उतार दिया। औऱ अब रश्मी थि सबके सामने.उपर सें नंगी। राजू औऱ रिशू नें तोँ सोचा भि नहीं थां कि उसने अंदर ब्रा भि नहीं पहनी हुई.रश्मी नें अपने बालों सें उन्हें छुपाने कि कोशिश कि आर उसके बालों कि चादर केँ पीछे उसके मुम्मे उभरकर औऱ भि सेक्सी लगरहे थें
उसके मोटे औऱ लचीले मुम्मे देखकर उन दोनो कि तौ आँखे हि फटीरह गयीँ,.जिन्हे देखकर उन्होने नाँ जाने कितनी बारमूठ मारी थि.औऱ राजू नें तौ अपनी बीबी कि बुर भि कितनी बारयह सोचकर मारी थि कि उसके सामने रश्मी नंगी लेटी हैं.वही रश्मी आज अपने मुम्मों कि नुमाइश लगाकर उनके सामने बैठी थि। उसकेतने हुए बूब्स देखकर उन दोनो केँ मुँह मे पानी औऱ लन्ड केँ सिरे पर्र पानी कि बूँदउभर आई। जोँ जल्द हि एक् लावे कां रूप लेकर उसपर बरसने वाली थि.
अभि तोँ खेल शुरुआत हि हुआ थां। एक् गेम मे हि एक् टॉपलेस होकर औऱ दूसरी सिर्फ़ ब्रा मे उनके सामने थि। अगली 2-3 बाजियों मे तोँ पूरी नंगी करने कां प्लान थां उनको.उन सबचुप देखकर रश्मी सें रहा नहि गय़ा
रश्मी : "अरे, तुम् तौ ऐसेदेख रहे हौ जैसेकभी किसी केँ बूब्स देखे नहीं हैं.''
वोँ शायद थोडा मज़े लेने केँ मूड मे आँ चुकी थि.जब इतनाकुछ खुलकर होँ हि रहा थां तौ ऐसेचुप होकर क्यो बैठे.वैसे भि रश्मी नें तौ सोचा थां कि उसे औऱ रुची कों ऐसे देखकर वोँ अवश्य अपनेदिल कि ठरक निकाल कर बाहर् रख देंगे.पर्र वोँ तौ गूंगे कुत्तों कि तरह अपनीजीभ निकाले उन्हे आँखे फाड़कर देखने मे लगे थें.
रिशू संभलता हुआ बोला : "जितने भि बूब्स देखे हैं रश्मी, तुम् जैसे नहीं थें वोँ.यह जौ तुम्हारे बूब्स हैं नाँ, इन्हे हम् सब नें अपनी आँखो केँ सामने बड़े होतेहुए देखा हैं.पहले नींबू जैसे थें, छोटे-2.औऱ शुरुआत मे तौ तुम् उनपर ब्रा भि नहीं पहनती थि.इसलिये यह तुम्हारे लाल निप्पल दूर सें हि दिखाई देते थें.फिन यह औऱ बड़े हुए.मौसम्मी जितने.पर्र ब्रा पहनने केँ बाद भि तुम्हारे यह नुकीले निप्पल हमेंदूर सें हि दिख जाते थें.औऱ पता हैं, हम् सब चौराहे पऱ खड़े होकर हमेशा यहीबात करते थें कि तुम् होँ तोँ चुपचाप रहने वाली पर्र अंदर सें तुम् बड़ीगरम होगी, क्योंकि यह खड़ेहुए निप्पल निशानी होती हैं अंदर कि आग कि.औऱदेख लो, हमारी बातें सच साबित हुई, आजजिस तरह सें तुम् हमारे सामने बैठी होँ, वोँ यही साबित करता हैं कि तुम् शुरुआत सें हि काफ़ी घुन्नी किस्म कि लड़की थि, जौ अबउभर कर सामने आई हैं.''
वोँ साला एक् हि साँस मे सभी कहताचला गय़ा.जोँ सही भि थां। रश्मी उसकीबात सुनकर मुस्कुराती रही.उसकी उंगलियाँ अपने आप् अपने निप्पल्स कों दबाकर उन्हे सुलाने कि असफल कोशिश कररही थि, पऱ हमेशा कि तरहआज भि वोँ नाकाम थि। यह तौ उसकी प्राब्लम थि, जब सें उसके नींबू उगने शुरुआत हुए थें, उसने भि अपने अंदर आँ रहे बदलाव महसूस किए थें, औऱ उन माँस सें भरे लचीले हिस्से कों वोँ अकेले मे बैठकर दबाती रहती थि, औऱ रुची केँ संपर्क मे आने केँ बादजब उसेपता चला फिंगरिंग केँ बारे मे तौ नीचे सें बुर कों औऱ उपर सें अपने नींबुओं कों मसलने मे जोँ असीम खुशीउसे प्राप्त होता थां, उसे तौ वोँ आज भि शब्दों मे बयान नहींकर सकती थि.रोजाना नहाते हुए, शावर केँ नीचे नंगी खड़े होकर, गरमागरम पानी कों अपने जिस्म पर्र महसूस करतेहुए वोँ जबउपर औऱ नीचे कि ताल मिलाती थि तौ वोँ एक् आग कां शोलाबन जाती थि.औऱ भरभराकर झड़ती थि उसगरम पानी केँ नीचे.
औऱ उन्ही ख़यालों मे डूबकर वोँ विद्यालय जाती, औऱ शायदतभी सें इन ठरकियों कि नज़र उसपर थि, क्योंकि विद्यालय याँ कहीं भि जातेहुए उसके निप्पल्स हमेशा खड़े हि रहते थें। औऱ फिनउन नींबुओं कों दबा-दबाकर उसने मौसम्मी बना दिया.औऱ रसीला भि.औऱआज भि उसकी वोँ आदत बरकरार हैं, सोतेहुए औऱ नहाते हुए वोँ आज भि उन्हे दबाना औऱ मसलना नहीं भूलती। पऱ अब उसकीइस तकलीफ़ सें उसे छुटकारा मिल चुका थां.पहले तोँ मोनू केँ द्वारा औऱ अब शायद इनके हाथों कां कमाल चलने वाला थां उसके बूब्स पऱ.क्योंकि जिसतरह कां खेलचल रहा थां, उसके हिसाब सें तोँ जल्द हि उन सबकेहाथ रेंगने वाले थें उसपर.खैर, अगलीगेम शुरुआत हुइ औऱ पत्ते बाँटे गये.
लाला कि बारी थि पहले, उसकेपास इक्का हि आया थां बस, उसने फ़ौरन पेककर दिया.औऱ संग हि अपनी पेंट भि उतार दि, जुर्माने केँ तौर पर्र.
अब वोँ सिर्फ़ टी शर्ट औऱ अंडरवीयर मे बैठा थां.औऱ अंडरवीयर मे उसका खड़ाहुआ लन्ड दूर सें हि चमकरहा थां, जिसे देखकर रुची औऱ रश्मी केँ मुँह मे पानी आँ गय़ा.
अगली बारी रिशू कि थि.औऱ लगातार दूसरी बार भि उसकेपास बेकार पत्ते हि आए.उसने तोँ सोचा थां कि शायदइस बार अच्छे पत्ते आँ जाए औऱ जीतजाए ताकि हारने वाली रश्मी याँ रुची सें अपनी मर्ज़ी कां कोई भि कपड़ा उतरवा सके याँ कुछ औऱ करवासके.
उसने पत्ते फेंकदिए औऱ अपनी पेंट उतार दि.अब वोँ जोक्की औऱ बनियान मे हि थां बस.
रुची नें पत्ते देखे, उसकेपास 2 कां पेयर थां.अब इतना तोँ वोँ समझ हि चुकी थि कि एक् जैसेदो पत्ते आने पर्र वोँ चाल चलने लायक होते हें, इसलिये उसने फ़ौरन हज़ार कां नोट लिया औऱ चालचल दि.अपनी ब्रा सें ढके मुम्मों सें रगड़कर.
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राजू नें पत्ते देखे, उसकेपास भि कुछखास नहीं थां.सिर्फ़ इक्का, बादशाह औऱ 7 नंबर थें.खेलने कों वोँ इनपर भि खेल सकता थां, पर्र जल्द नंगा होकर शायद वोँ अपने लन्ड कों उन सुंदरियों केँ सामने रखना चाहता थां, इसलिये उसने भि पेककर दिया औऱ नीचे सें पेंट उतार दि.बनियान तोँ उसने पहनी नहीं थि, इसलिये वोँ अब टॉपलेस होकर सिर्फ़ अपने अंडरवीयर मे थां.उसके कसरती बदन कों देखकर रश्मी औऱ रुची केँ शरीर सें गर्मी निकलरही थि.शायद यह सोचकर कि उसके मसल्स कों वोँ अपने नाज़ुक हाथों सें रगडेंगी.
अब बारी थि रश्मी कि, सारे लड़के तौ पेक हौ चुके थें औऱ सिर्फ़ रुची कि चालआई थि.अब उसकेसंग भला वोँ क्याँ मुकाबला करती, इसलिये उसने ब्लाइंड चलने केँ बदले पत्ते उठाना सही समझा.औऱ पत्ते उठाते हि उसकी आँखेचमक उठी.उसके पासकलर आया थां, ईंट यानी डायमंड कां, नंबर थें 3, 8 औऱ बादशाह.
इतने बाड़िया पत्तों सें तोँ वोँ अच्छे ख़ासे पैसेजीत सकती थि.पर्र अपनी हि सहेली सें भला क्याँ खेले वोँ.फिन भि उसने एक् चालचल हि दि.2 हज़ार बीच मे फेंककर। अब अपने छोटे सें पत्तों केँ उपर दूसरी चालआते देखकर रुचीसमझ चुकी थि कि रश्मी केँ पास भि बढ़िया पत्ते आए हें.वैसे भि चाल चलने लायक पत्तों मे सबसे छोटे पत्ते 2 कां पेयर हि होते हें.इसलिये उसने सरेंडर करना हि बेहतर समझा औऱ 2 हज़ार फेंकते हुए अपने पत्ते नीचेकर दिए औऱ शो माँग लिया.
औऱ दूसरी तरफ रश्मी कों पता थां कि रुची जैसी कच्ची खिलाड़ी उसके सामने टिक नहीं पाएगी.औऱ उसके मुक़ाबले केँ पत्ते रुची केँ पास आनां तौ नामुमकिन हि थां.इसलिये उसकीजीत तौ सुनिश्चित थि.औऱ हारने केँ बाद वोँ अगर रुची कि जीन्स उतरवाती तोँ उसमे वोँ मजा नहींआता जोँ वोँ काम करवाने सें आने वाला थां जौ वोँ सोचरही थि.
रुची केँ पत्ते देखकर वोँ मुस्कुरा दि औऱ अपने पत्ते सामने रख दिए.उसके पत्तों कि सबने तारीफ कि औऱ रुची कि तरफआस भारी नज़रों सें देखने लगे.शायद उसकी सुडोल जांघे औऱ नंगी टांगे देखने कां समय आँ गय़ा थां.
लड़कीजब एक्-2 करके अपने शरीर केँ कपड़े उतारती हैं तोँ उसे देखकर क्याँ मजा मिलता हैं वोँ एक् लड़का हि समझ सकता हैं.औऱ यहीमजा लेने केँ लिएइस समयसब हरामी अपनी आँखे फाड़े बैठे थें वहा.वरना जिसतरह कि बेशर्मी शुरुआत होँ चुकी थि, उसकेबाद तोँ वहाकब कां ग्रूप सेक्स शुरुआत हौ चुका होता.उन सब कों पता थां कि आख़िर मे होनावही हैं, कोई रोकने वाला भि नहीं हैं, लड़कियाँ भि सजधजकर हि हें.तौ क्यूं नां पहले मज़े लें-लेकर उनके शरीर सें परतदर परत कपड़े उतरने कां मजा लें औऱ बाद मे पूरे मज़े.
पऱ रश्मी केँ दिमाग़ मे जोँ शैतानी आँ चुकी थि, उसके बारे मे तौ शायद उन्होने सोचा भि नहीं थां रुची जैसे हि शरमाती हुई उठी औऱ अपनी जीन्स केँ बटन खोलने लगी, रश्मी नें उसेरोक दिया औऱ बोलि : "नहीं रुची, यह नहीं.मुझे तुमसे कुछ औऱ करवाना हैं.'' यह सुनकर रुची केँ संग-2सब चोंकगये.
रुची नें कांपती आवाज़ मे पूछा : "क। क्याँ करना होगा मुझे.''
वोँ सोचरही थि कि शायद वोँ मेरी जीन्स केँ बदले पहले ब्रा उतारने कों कहेगी.ताकि वोँ भि उसकीतरह टॉपलेस होँ जाए औऱ देखने वालों कों मजाआए.
पऱ ऐसाकोई विचार नहीं थां रश्मी केँ मन मे.
रश्मी बोलि : "तुम्हे मेरी स्लेव बनना पड़ेगा.''
रुची : "स्लेव ???? यानी तुम्हारी गुलाम.??''
उसकीबात सुनकर सब हैरत सें एक् दूसरे कि तरफ देखने लगे.आख़िर रश्मी कहना क्याँ चाहरही थि.अच्छा भला, सीधा साधा सां खेलचल रहा थां.स्ट्रीप पोकर मे एक् दूसरे कों नंगा करने कां.फिन यह स्लेव बनाने सें क्याँ होगा.इससे अच्छा तौ नंगा हि करदो उसको.
पर्र जीती वोँ थि इसलिये मर्ज़ी भि उसकी हि चलनी थि, लाला नें सब कों चुप रहकरआगे कां तमाशा देखने कां इशारा किया.क्योंकि वोँ शायदसमझ चुका थां कि रश्मी कां दिमाग़ किसतरफ जारहा हैं.औऱ अगर वोँ सही हैं तोँ, रश्मी जोँ भि कररही हैं, उसमे बहोत मजाआने वाला थां.
रश्मी नें रुची कों अपनेसंग उपर चलने केँ लिए कहा.वोँ बेचारी अपनी आँखों मे हज़ारों प्रश्न लेकर उसके पीछे -2 उपर वाले कमरे कि तरफचल दि। औऱ उनके जाते हि सब एक् दूसरे सें ख़ुसर फुसर करने लगे.औऱ उनके नीचेआने कां प्रतीक्षा भि औऱ लगभग 10 मिनट केँ बाद उनके नीचेआने कि आवाज़ सुनाई दि। सब टकटकी लगाकर सीढ़ियों कि तरफ देखने लगे। औऱ उन्हे देखकर सब अपने खड़ेहुए लन्ड केँ संग - 2 स्वयं भि अपनीसीट सें उठ खड़ेहुए। नज़ारा हि कुछऐसा थां उनके सामने.
रश्मी नें सच मे रुची कों अपनी स्लेव बना लिया थां.उन दोनो नें कुछ अजीब सें कपड़े भि पहनलिए थें.जिसमे रश्मी एक् मास्टर औऱ रुची उसकी स्लेव लगरही थि। रुची कों रश्मी नें एक् सुकून सें बाँधरखा थां.
.औऱ वोँ अपने घुटनो औऱ हाथों केँ बल किसी कुत्तिया कि तरहचल रही थि उसके पीछे.उन दोनो कों ऐसे सेक्सी कपड़ों मे ऐसे मास्टर-स्लेव केँ किरदार मे आताहुआ देखकर सब केँ लन्ड फटने वाली हालत मे आँ गये.
रश्मी नें काफ़ी इंग्लीश मूवीस देखी हुइ थि औऱ उसे बचपन सें हि साइट्स पऱ इंग्लिश स्टोरीस पड़ने कां भि शोंक थां, औऱ शायदयह आइडिया उसके दिमाग़ मे वहीं सें आया थां, जौ शायद वोँ कब सें करना चाहती थि.औऱआज तौ मौका भि थां औऱ दस्तूर भि। ऐसे मौके कां फायदा उठाकर वोँ खेल-2 मे सबका मनोरंजन भि कररही थि औऱ अपने -2 बदन कि नुमाइश भि। रश्मी नें हील वाले सेंडिल पहनेहुए थें औऱ उपर सें उसकी सेक्सी टांगे नंगी थि.औऱ उसने रुची कों एक् ब्लैक ब्रा पहनाई हुई थि.जिसमें उसकेलटक रहे मुम्मों पऱ चिपके निप्पल काफ़ी ख़तरनाक लगरहे थें। रश्मी अपनी स्लेव कों लेकर सोफे तक आँ
रश्मी : "दोस्तों.यह हैं मेरी स्लेव.रुची.''
रुची कि शर्ट केँ 2 बटन खुले होने कि वजह सें उसके गोरे-2 बूब्स सब कों साफ़ नज़र आँ रहे थें.लाला, रिशू औऱ राजू तौ पागल सें हौ चुके थें.
औऱ उससे भि बड़ी औऱ मज़े कि बातयह थि कि रुची कों भि उन सबमे बड़ामजा आँ रहा थां.
जबउपर जाकर रश्मी नें रुची कों बताया कि वोँ क्याँ करना चाहती हैं तौ रुची कों विश्वास हि नहींहुआ कि उसकी भोली सि दिखने वाली सहेली इतनी ख़तरनाक सोच रखती हैं.वोँ नीचे बैठे ठरकियों कों पूरीतरह सें तडपा-तड़पाकर मजे लेना चाहती थि.औऱसंग हि उनके पैसे भि.जिसका प्लान रश्मी नें उसे समझा दिया.
वैसे भि ऐसारोल प्ले करकेउन दोनो कों अंदर सें काफ़ी मजा आँ रहा थां.वोँ जब पक्की सहेलियाँ थि तोँ ऐसे हि रोल प्ले करके वोँ बंद कमरे मे काफ़ी मज़े लेती थि.कभी वोँ टीचर स्टूडेंट बन जाती थि औऱ कभी इंस्पेक्टर मुजरिम.औऱ आजउसी रोल प्ले वालीगेम कों सबके सामने पेश करके वोँ स्वयं तौ मज़े लें हि रही थि उनकी हालत भि खराबकर रहीं थि.
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क्योंकि जोँ चाल रश्मी केँ दिमाग़ मे थि, उसके हिसाब सें अगलीगेम अगर उसके हिसाब सें चली तौ सबके लन्ड केँ संग-2 वोँ उनके पैसे भि अंदर लें लेगी.
रश्मी नें रुची सें कहा : "चलो, जाकरसब कों विशकरो.''
रश्मी किसी मालकिन कि तरहउस स्लेव बनी रुची पर्र अपना हुक्म चलारही थि.
रुची अपने हाथों औऱ पैरों पर्र चलती हुई लाला कि तरफ बढ़ने लगी.उसकी
ब्रा सें झाँकरहे मुम्मे देखकर पहले सें हि लाला कि हालत खराब थि, उसेऐसे अपनीतरफ आता देखकर वोँ तौ
बुध खोकर उसकी गहरी आँखो मे देखता रह गय़ा.
वोँ धीरे-धीरे-2 चलती हुईँ उसकी टाँगो केँ बीच पहुँची.औऱ उसके खड़ेहुए लन्ड केँ ठीक सामने जाकर उसने अपने होंठों कि गरमहवा छोड़ी औऱ बोलीं : "हैल्लो मास्टर.केसे हैं आप्.''
जवाब मे सिर्फ़ उसके अंडरवीयर मे क़ैद लन्ड नें एक् जोरदार झटका मारा.
.जिसे रुची नें बड़े हि लगभग सें महसूस किया.उसका तौ मनकररहा थां कि उसके अंडरवीयर कों नीचे खिसकाए औऱ चूस लेँ उसे.पऱ अभि उसकी मास्टर यानी रश्मी कां यह हुक्म नहीं थां। इसलिये वोँ वापिस पीछेआई औऱ उसीतरह रिशू औऱ राजू कि टाँगों केँ बीच जाकर उन्हे भि विश किया.
रिशू नें तोँ उसकेसिर पऱ हाथ रखकरउसे अपने खड़ेहुए लन्ड पर्र झुकाने कि भि कोशिश कि पर्र तभी रश्मी नें अपनेहाथ मे पकड़ा हुआ एक् हंटर टाइप कां डंडा उसके हाथों पर्र मारा औऱ बोलीं : "जब तक मे नहीं कहूँगी, वोँ कुछ भि तुम्हारी मर्ज़ी कां नहीं करेगी.'' खेलसच मे काफ़ी रोचक होताजा रहा थां.
उनके मायूस चेहरों कों देखकर रश्मी कि हँसी निकल गयीँ, औऱ संग हि निकला उसकी योजना कां अगलाचरण.
वोँ बोलि : "अच्छा ठीक हैं.अगर तुम् सब इससे अपनी मर्ज़ी कां कुछ करवाना चाहते हौ तौ इसकेलिए तुम्हे रुपया खर्च करना पड़ेगा.'' सब कि आँखेचमक उठी.अपनी मर्ज़ी सें वोँ उसकेसंग कुछ भि कर सकते थें.
सब एक् संग चिल्ला पड़े.पहले मे.पहले मे.
रश्मी : "पर्र वोँ जोँ भि करेगी, दूर सें हि.तुम् इसकोहाथ नहींलगा पाओगे.''
सब एक् बारफिन सें मायूस हौ गये.पऱ फिन भि, जितना मिलरहा थां उसे भि वोँ खोना नहीं चाहते थें.रश्मी नें हर एक्ट कि कीमत भि उन्हे बता दि, दस हज़ार रूपए.जिसे देने मे उन्हे कोई तकलीफ़ नहीं थि। सबसे पहले लाला नें अपनेदिल कि बात बताई : "रुची कों कहो कि यह तुम्हे पालतू कुतिया कि तरह प्रेम करे.तुम्हे चाटकार.अपनी जीभ सें.''
शायदयह उसकी फेंटसी थि, उसने भि एक् मूवी मे ऐसे देखा थां, औऱ रश्मी औऱ रुची कों ऐसा करता देखकर उसकेमन मे वोँ बातफिन सें उभर आई.वैसे तौ वोँ अपने आप् कों चटवाना चाहता थां रुची सें.पऱ उसकेलिए रश्मी नें मनाकर दिया थां.इसलिये उसने रश्मी ऐसा करने कों कहा.
रश्मी भि मुस्कुरा दि.औऱ रुची कि तरफ देखकर उसे अपनीतरफ खींचा.
रुची कि बुर तोँ पहले सें हि पनिया गई, थि यह सुनकर.वोँ चलती हुइ उसकेपास आई औऱ सीधा अपनीजीभ उसकी मोटी जाँघ पर्र रख दि। पुर कमरे मे एक् नहींकई सिसकियाँ गूँजउठी। एक् तोँ रश्मी कि औऱ बाकीउन तीनों कि। रुची नें उसकी जाँघ कों अच्छी तरह सें चाटा.औऱ फिन धीरे-धीरे-2 वोँ नीचे कि तरफ जाने लगी.औऱ उसके मखमली घुटनों केँ बाद उसकी सॉलिड पिंडलियों पऱ भि उसने अपनीलार सें गीलापन छोड़ दिया। औऱ वोँ वहीं नहीं रुकी.उसने रश्मी केँ पैरों पऱ भि अपनीजीभ कि कलाकारी दिखाई.
यहसभी करतेहुए उसको स्वयं भि काफ़ी मजा आँ रहा थां। औऱ फिन उसने धीरे-धीरे-2 अपनीजीभ सें उसके लेदर केँ सेंडिलस कों भि चाटा.जैसा कि असली स्लेव करती हैं.वोँ तौ पूरी कैरेक्टर मे घुस चुकी थि.स्वयं भि मज़े लेँ रही थि औऱ देखने वालो कों भि मज़ेदे रही थि.
सब उसकीऐसी परफॉर्मेंस देखकर तालियाँ बजाने लगे.अब रिशू कि बारी थि। उसनेदस हज़ार रूपएदिए औऱ बोला : "मुझे तोँ उसको नंगा देख्ना हैं.''
वोँ तौ वैसे भि वोँ हौ हि जाती, शायद अगली 2-3 गेम्स मे.पर्र उसका उतावलापन अपनी स्थान सही भि थां। रुची केँ जवानबदन कों नंगा देखने कि चाहतउसे कब सें थि.आज वोँ पूरी होनेजा रही थि.
रश्मी नें उसे इशारा किया औऱ रुची अपने पैरों पऱ खड़ी होँ गयीँ,.
वोँ रिशू केँ सामने आकरबैठ गयीँ,.औऱ रुची सिर्फ़ ब्रा मे बैठी थि उसके सामने। रिशू तौ इतनीपास सें उसकी ब्रा मे क़ैद मुम्मों कों देखकर फिन सें बावला होँ गय़ा। औऱ फिन रुची नें हंसते हुए अपनी ब्रा केँ हुक खोले औऱ उसे एक् हि झटके मे उतारकर फेंक दिया। औऱ कमरे मे हर व्यक्ति नें पहलीबार उसे टॉपलेस देखा। एकदम कड़क थें उसके बूब्स.
.सामने कि तरफतने हुए.भरे हुए, दोनो हाथों मे मुश्किल हि आए.पऱ ज्यादा बड़े भि नहीं.इतने मुलायम औऱ बड़े रसगुल्लों कों अपने सामने देखकर सब केँ मुँह मे पानी आँ गय़ा। पर्र कोईकुछ कर तोँ नहीं सकता थां नां.
औऱ फिन रुची नें अपनी पेंटी कों पकड़ा औऱ उसे भि उतार दिया। औऱ एक् ताजी बुर कां झोंका रिशू केँ नथुनों सें आँ टकराया.ऐसा लगाउसे कि उसकी बुर सें गरमभाप छोड़ी गई, हैं ख़ास उसके लिए.जिसकी खुश्बू मे अपनीसुध बुध खोकर उसने अपनी आँखेबंद करली। रुची पूरी कि पूरी नंगी खड़ी थि सबके सामने.क्याँ तराशा हुआ शरीर थां उसका.उपर सें नीचे तक माल थि वोँ लड़की.
सबने बड़ी हि मुश्किल सें अपने आप् कों रोकाहुआ थां.भले हि वोँ कुछ नहींकर पारहे थें, पर्र इसखेल मे उन्हे मजा बहोत आँ रहा थां। अब राजू कि बारी थि। उसनेदस हज़ार रश्मी कों सौंपदिए औऱ अपनेदिल कि ख़्वाहिश बताई.
राजू : "रश्मी, तुमने जौ हंटर पकड़ा हुआ हैं अपनेहाथ मे, उससे तुम् इसकी गांड कि पिटाई करके इसकोलाल करदो.''
यह सुनकर सब चोंकगये.
रुची : "ऐसा क्योकर रहे होँ तुम्.मेरे सें ऐसी क्याँ दुश्मनी हैं जौ मेरीलाल करने पऱ तुले हौ.''
वोँ हंस भि रही थि, कि ऐसा क्योबोल रहा हैं वोँ.
राजू : "अबयह तोँ मुझे नहीं मालूम, पर्र यहाजब सब अपनी - 2 ख़्वाहिश बतारहे हें तोँ मैने भि बोल दि, वैसेयह काम मे अपनी बीबी केँ संगकब सें करना चाहता हू.उसे नंगा करके अपनीगोद मे लेकर उसकीभरी हुई गांड पर्र चपेटें लगाकर उसेलाल करना चाहता हू.औऱफिन उसे चूमना चाहता हू.पर्र वोँ मेरीइस बात कों आज तक नहींमान सकी.बोलती हैं कि मे पागल हू.ऐसा कौन करता हैं भला.अब वोँ मनाकर देती हैं तोँ उसकी मर्ज़ी, यह तोँ मना नहीं करेगी नां, इसको तोँ पैसेदे रहाहू मे.''
यानी अपने पैसे केँ बल पर्र वोँ अपनेदिल कि ख़्वाहिश कों पूरा करवाना चाहरहा थां.लाला औऱ रिशू कि तोँ जायज़ सि डिमांड थि, पऱ यह थोड़ी ख़तरनाक सि थि। पर्र अपनी गांड पर्र हंटर पड़ने कि बात सुनकर रुची काफ़ी गरम हौ चुकी थि.मोनू भि अक्सर उसे घोड़ी बनाकर जब चोदता थां तोँ उसकी गांड पऱ बेतहाशा थप्पड़ मारकर उसेलाल कर देता थां.उसे काफ़ी मजाआता थां उसके हाथों कि मार अपनी गांड पऱ खाकर.इसलिये उसनेझट सें वोँ पैसेलिए औऱ अपनी गांड कों रश्मी कि तरफ करके खड़ी होँ गई,.
जब उसको हि कोई प्राब्लम नहीं थि तोँ भला किसी औऱ कों क्याँ हौ सकती थि.रश्मी नें उसेउसी सोफे केँ हत्थे पऱ उल्टा लिटाया, जिसपर बैठकर वोँ पहलेखेल देखरही थि औऱ हल्के हाथों सें उसकी गोरी गांड पर्र हंटर बरसाने शुरुआत करदिए। हल्की डोरियाँ लगी थि हंटर केँ आगे.जोँ एक् रेशमी सां एहसास छोड़रही थि रुची कि मखमली गांड पऱ.औऱ वोँ हर प्रहार सें कराह उठती.दर्द सें नहीं, मज़े सें.
.क्योंकि उसे उसमें काफ़ी मजामिल रहा थां। औऱ धीरे-धीरे-2 उसकी गोरी गांडलाल सुर्ख हौ गई,.जिसे चूमकर रश्मी नें उसकी गर्मी कों शांत किया.
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