Erotica साहस रोमांच और उत्तेजना के वो दिन completee - desi kamuk – New Episode
जिसदिन कर्नल साहब कि औपचारिक रूपसे सुनील औऱ उसकी पत्नि सुनीता सें पहलीबार सुनील औऱ सुनीता केँ घऱ मे मुलाक़ात हुईँ औऱ कर्नल साहब कां पहले गर्म औऱ बादमें सुनीता कों देखकर नरम होनाहुआ, उसरात कों सुनील नें अपनी पत्नि सुनीता कों हलके फुल्के लहजे मे कहा, "लगता हैं, कर्नल साहब पऱ तुम्हारा चमत्कार चल गय़ा हैं। आज तौ तुम्हें वो बड़ेदेख ताड़कर देखरहे थें। तुम् भि तोँ कर्नल साहब कों देखकर चालु हौ गयीँ, थि! कहीं तुम् भि तौ?."
सुनीता हँसकर नकली गुस्से मे सुनील कि छाती पर्र हल्का सां घूँसा मारकर बोलीं, "धत्त! क्याँ पागलों जैसीबात कररहे हौ। ऐसीकोई बात नहि हैं। कर्नल साहब हमारे पडोसी हें। अगर मे इतनी लम्बी औऱ मोटी उनके सामने बैठूंगी याँ खड़ी रहूंगी, तोँ उनको मेरे अलावा कुछ दिखाई भि तौ नहि देगा। तब तोँ वो मुझे हि देखेंगे नाँ? तुम् नाँ हरबार कुछ नां कुछ उलटा पुल्टा सोचते रहते हौ। तुम्हें हमेशा कोई नां कोईनयी शरारत सूझती रहती हैं। वो बड़े चुस्त औऱ तंदुरस्त हें। रोज सुभह वो कैसी दौड़ लगाते हें? औऱ तुम्? देखो तुम्हारी ये तोंद कैसी निकली हुइ हैं? ज़रा कर्नल साहब सें कुछ सीखो। "
सुनील नें महसूस किया कि उसकी बीबी सुनीता भि कर्नल साहब केँ तेज तर्रार व्यक्तित्व औऱ कसरत केँ कारण सुगठित शरीर सें बहुत प्रभावित लगरही थि।
कुछदेर बाद सुनीता नें पूछ हि लिया, "कर्नल साहब क्याँ करते हें?"
सुनील नें कहा, "आर्मी मे कर्नल हें। बड़े हि सुसम्मानित अफसर हें। उनकोकई बड़े सम्मानों सें नवाजा गय़ा हैं। कहते हें कि लड़ाई मे वो अपनीजान पर्र खेल जाते हें। कईबार उन्होंने युद्ध मे अकेले हि बड़ी सें बड़ी चुनौतियों कां मुकाबला किया हैं। कई मैडल उन्होंने इतनीकम उम्र मे हि पालिए हें। जल्द हि हमेंअब उनकेघऱ जानां हि होगा। बाकीसभी अगलीबार उनसे मिलते हि याँ तौ तुम् उनसे सीधे हि पूछ लेना याँ फिन मे उनकोपूछ कर तुम्हें बता दूंगा। "
सुनीता अपने पति कि बात सुनकर थोड़ी सकपका गयीँ, औऱ बोलि, "ऐसीकोई बात नहि। मे तौ वैसे हि पूछरही थि। "
वैसे हि आते जातेजब भि कभी सुनील सें मुलाकात होती तौ कर्नल साहबउसे बड़े हि अंतरंग भाव सें अपनेघऱ आने कां न्योता देना नाँ चूकते। एक् रात कों सुनील नें सुनीता सें कहा, "आज कर्नल साहब मिले थें। पहले उन्होंने कईबार मुझे तुम्हारे संग उनकेघऱ आने केँ लिए आग्रह किया थां। पर्र आज तोँ वो अड़ हि गए। उन्होंने कहा कि अगर हम् उनकेघऱ नहि गए तौ वो नाराज होँ जाएंगे। "
सुनीता नें कहा, "हाँ, आज ज्योति जी भि मुझे मार्किट मे मिलीथीं। वो मुझे बड़ा आग्रह कररही थि कि हम् उनकेघऱ जाएँ। मुझे लगता हैं कि अब हमें उनकेघऱ जल्द हि जानां चाहिए। "
सुनील औऱ सुनीता नें कर्नल साहब कों फ़ोनकर अगले शुक्रवार कि साम उनकेवहा पहुँच नें कां प्रोग्राम बनाया। उनके पहुँचते हि कर्नल साहब नें व्हिस्की, रम, जिन, बियर इत्यादि पेयपेश किये, जबकि उनकी पत्नि ज्योति नें संगसंग कुछ हलके फुल्के नमकीन आदि पहले सें हि सजा केँ रखेहुए थें। कर्नल साहब औऱ अपने पति सुनील केँ आग्रह केँ बावजूद, सुनीता नें कोई भि कड़कपेय लेने सें साफ़मना कर दिया। फिर भी वो कभीकभी बियरपी लेती थि। सुनील नें देखा कि कर्नल साहब कों ये अच्छा नहि लगा पर्र वो चुपरहे। कर्नल साहब कि पत्नि ज्योति नें सभी कां मन रखने केँ लिए एक् ग्लास मे बियर डाला। कर्नल साहब औऱ सुनील नें व्हिस्की केँ गिलास भरे।
जब प्राथमिक औपचारिक बातें हौ गयींतब सुनीता केँ बारबार पूछने पर्र कर्नल साहब नें बताया कि वो आतंकी सुरक्षाबल मे कमांडो ग्रुप मे कर्नल थें। उन्होंने कईबार युद्ध मे शौर्य प्रदर्शन किया थां जिसके कारण उन्हें कई मेडल्स मिले थें। सुनील कि पत्नि सुनीता केँ पापा भि आर्मी मे थें औऱ आर्मी वालों कों सुनीता बड़े सम्मान सें देखती थि। सुनीता कि ये शिकायत हमेशा रही कि वो आर्मी मे भर्ती होना चाहती थि पऱ उन दिनों आर्मी मे महिलाओं कि भर्ती नहि होती थि। उसेदेश सेवा कि बड़ीलगन थि औऱ वो एन.सि.सि। मे कडेटरह चुकी थि। जाहिर हैं उसे आर्मी केँ बारे मे बहुत अधिक उत्सुकता औऱ जिज्ञाषा रहती थि।
जब सुनीता बड़ी उत्सुकता सें कर्नल साहब कों उनके मेडल्स केँ बारेमें पूछने लगी तोँ कर्नल साहब नें खड़े होकर बड़े गर्व केँ संग एक् केँ बाद एक् उन्हें कौनसा मैडलकब मिला थां औऱ कौनसे जंग मे वो केसे लड़े थें औऱ उन्हें कहां कहां घावलगे थें, उसकी कहानियां जब सुनाई तौ सुनीता कि आँखों मे सें आंसूझलक उठे। कर्नल साहब भि युद्ध केँ उनके अनुभव केँ बारेमें सुनीता कों विस्तार सें बताने लगे। आधुनिक युद्ध केसे लड़ा जाता हैं औऱ पुराने जमाने केँ मुकाबले नयी तकनीक औऱ उपकरण केसे इस्तेमाल होते हें वो कर्नल साहब नें सुनील कि पत्नि सुनीता कों भली भाँती समझाया।
सुनीता केँ मन मे कई सवाल थें जोँ एक् केँ बाद एक् वो कर्नल साहब कों पूछने लगी। कर्नल साहब भि सारे प्रश्नों कां बड़े धैर्य, गंभीरता औऱ ध्यान सें जवाबदे रहे थें। उससाम सुनील नें महसूस किया कि उसकी पत्नि सुनीता कर्नल साहब केँ शौर्य औऱ वीरता कि कायल हौ गई, थि।
बहुतदेर तक कर्नल साहब कि पत्नि ज्योति औऱ सुनील चुपचाप सुनीता औऱ कर्नल साहब कि बातें सुनते रहे। कुछ देरबाद सुनील जबबोर होनेलगा तोँ उसने कर्नल साहब कि पत्नि ज्योति सें पूछा, "ज्योति जी, आप् क्याँ करती हें?"
ज्योति नें बताया कि वो भि आर्मी अफसर कि बेटी हें औऱ अब वो आर्मी पब्लिक विद्यालय मे सामाजिक विज्ञान (पोलिटिकल साइंस) पढ़ाती हें। बात करते करते सुनील कों पताचला कि कर्नल साहब कि बीबी ज्योति नें राजकीय विज्ञान मे मास्टर्स कि डिग्री प्राप्त कि हैं औऱ वो राजकीय मसलों पऱ बहुतकुछ पढ़ती रहती हें। ज्योति बोलने मे कुछ शर्मिलि थीं। सुनील कि बीबी सुनीता कि तरह वो अधिक नहि बोलती थि। पर्र दिमाग़ कि वो बड़ी कुशाग्र थि। उनकी राजकीय समझ बड़ीतेज थि। सुनील कि पत्नि सुनीता औऱ कर्नल साहब आर्मी कि बातों मे व्यस्त हौ गए तोँ सुनील औऱ ज्योति अपनी बातों मे जुटगए।
ज्योति केँ शरीर कि सुकोमल औऱ चिकनी त्वचा देखने मे बड़ी आकर्षक थि। उसका शरीर औऱ खासकर चेहरा जैसी शीशे कां बना होँ ऐसे पारदर्शक सां लगता थां। उसका चेहरा एक् बालक केँ सामान थां। वो अक्सर ब्यूटी पार्लर जाती थि जिसके कारण उसकी आँखों कि भौंहें तेज कटार केँ सामान नुकीली थीं। उसके जिस्म कां हरअंग नां तौ पतला थां औऱ नाँ हि मोटा। हर कोने सें वो पूरीतरह सुआकार थि। उसके मम्मों बड़े औऱ फुलेहुए थें। उसकी गाँड़ कि गोलाई औऱ घुमाव सुंदर थि।
सुनील कों उसके होँठ बड़े हि मुलायम लगे। सुनील कों ऐसालगा जैसेउन मे सें हरदमरस बहता रहता हौ। उससे भि कहीं अधिक कटीली थि ज्योति कि नशीली आँखें। उन्हें देखते हि ऐसा लगता थां जैसे वो आमंत्रण देरही हों। सुनील औऱ कर्नल साहब कि पत्नि ज्योति नें जब राजकीय बातें शुरुआत कि तोँ सुनील कों पताचला कि वो राजकीय हालात सें भली भाँती वाकिफ थीं।
बात करतेहुए ज्योति नें कहा कि वो बहुत टाइम सें सुनील सें मिलने केँ लिए बड़ी उत्सुक थि। उसने सुनील कि पत्नि सुनीता सें सुनील केँ बारे मे सुना थां। ज्योति नें सुनील केँ कईलेख पढ़े थें औऱ वो सुनील कि लिखनी सें बहुत प्रभावित थि।
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जब सुनील नें ज्योति सें बात शुरुआत कि तबउसे पताचला कि बाहर् सें एकदम गंभीर, संकोचशील औऱ अमिलनसार दिखने वाली ज्योति वाकई मे बहुतबोल लेती थि औऱ कभीकभी मजाक भि कर लेती थि। जब उन्होंने पोलिटिकल विज्ञान औऱ इतिहास कि बातें शुरुआत कि तौ ज्योति अचानक वाचाल सि हौ गई,। सुनील कों ऐसा भि लगा कि शायद अपने पति कर्नल साहब केँ प्रति उनकेमन मे कुछ रंजिश सि भि हैं। सुनील नें मन हि मनतय किया कि वो जल्द हि पता करेगा कि उन दोनों मे रंजिश कां क्याँ कारण होँ सकता थां।
टाइम बीतता हि गय़ा पर्र कर्नल साहब औऱ सुनील कि पत्नि सुनीता कों जैसे टाइम कां कोईपता हि नहि थां। कर्नल साहब कि बातें ख़तम होने कां नाम नहि लेँ रहीथीं औऱ सुनीता एक् केँ बाद एक् बड़ी हि उत्सुकता सें सवालपूछ कर उनकोगजब कां प्रोत्साहन देरही थि। इधर सुनील औऱ ज्योति कि बातें जल्द हि समाप्त हौ गयीं। सुनील अपनीघडी कों औऱ देखने लगातब ज्योति नें एक् बातकही जिससे शायद ज्योति कि रंजिश केँ बारेमें सुनील कों कुछ अंदाज हुआ।
कर्नल साहब कि पत्नि ज्योति नें कहा, "इनका (कर्नल साहब कां) व्यक्तित्व हि कुछऐसा अनोखा हैं कि कोई भि सुन्दर औरत सें येजबबात करने लगते हें तब उनकी बातें ख़तम हि नहि होतीं। औऱ जबकोई सुन्दर औरत उनसेबात करने लगती हैं तोँ वो औरत भि उनसे प्रश्न पूछते थकती नहि हैं। इनकी बातें हि इतनी रसीली औऱ नशीली होती हें कि बस। "
सुनील कर्नल साहब कि बीबी ज्योति कि बात सुनकर समझ नहि पाया कि ज्योति अपने पति कि तारीफ़ कररही थि याँ शिकायत। जाहिर हैं कि पत्नि कितनी हि समझदार क्यूं नां होँ, कहीं नां कहींजब किसी औऱ महिला केँ संग अपने पति केँ जुड़ने कि बातआती हैं तोँ वो थोडा नकारात्मक तोँ हौ हि जाती हैं।
उनकीबात सुनकर सुनील हँस पड़ा औऱ बोला, "देखिये नाँ ज्योति जी, हम् दोनों भि तोँ बहुत वक़्त सें बातचीत मे इतने तल्लीन थें कि टाइम कां कोई ध्यान हि नहि रहा। मे भि आपके पति जैसा हि हूं। बस एक् फर्क हैं। आप् जैसी हसीन औऱ सेक्सी स्त्री कों देखकर मे भि बोलता हि जारहा हूं। पऱ क्याँ इसमें मेरा कसूर हैं? कौनभला आपकी औऱ आकर्षित नहि होगा? मे भि तोँ अपने आप् पर्र नियत्रण नहि रखपारहा हूं। " फिन थोडा रुककर सुनील नें कहा, "ज्योति जी मेरीबात कां कहीं आप् बुरा तौ नहि मानेंगे नाँ?"
ज्योति नें सुनील कि औऱ शर्माते हुए तिरछी नज़रों सें देखा औऱ मुस्कुरायी औऱ बोलि, "वाउरे सुनील साहब! आप् नें तोँ एक् हि वाक्य मे मुझे बहोत कुछकह दिया! पहले तोँ आप् नें बातों बातों मे हि अपनी तुलना मेरे पति केँ संगकर दि। फिन आपने मुझे सेक्सी भि कह डाला। औऱ आखिर मे आप् नें ये भि कह दिया कि आप् मेरी औऱ आकर्षित हें। ज़रा ध्यान रखिये। आप् कांटो कि राह पर्र मत चलिए, कहीं पाँव मे कांटें नं चुभ जाएँ। आप् कां मुझेपता नहि पर्र मेरे पति कों आप् नहि जानते। वो इतने रोमांटिक हें कि अच्छी सें अच्छी औरतें भि उनकी बातों मे आँ जाती हें। देखिये कहीं आपकी पत्नि उनके चक्कर मे नां फँसे। "
सुनील जोर सें हँस पड़ा। उसनेपट सें जवाब दिया, "मुझेकोई चिंता नहि हैं ज्योति जी। पहले तोँ मे मेरी पत्नि कों बहोत अच्छी तरह जानता हूं। वो ऐसे हि किसीकी बातों मे फँसने वाली नहि हैं। दूसरे अगरमान भि लियाजाए कि ऐसाकुछ होँ सकता हैं तौ आप् हें नां मेरा बीमा। अगर उन्होंने मेरी पत्नि कों फाँस दिया तोँ वो कहां बचेंगे?" इतनाकह कर सुनील चुप होँ गय़ा। ज्योति सुनील कि बात जरूरसमझ गई, होंगी, पर्र कुछ नं बोलि।
कर्नल साहब केँ घऱ पऱ हुईँ पहली मुलाकात केँ चंददिन बाद सुनील कि पत्नि सुनीता केँ पिता, जौ एक् रिटायर्ड आर्मी अफसर थें, कां हार्ट अटैक केँ कारण अचानक हि स्वर्गवास हौ गय़ा। सुनीता कां अपने पिता सें बहुत लगाव थां। पिता केँ देहांत केँ पहलेरोज सुनीता उनसेबात करती रहती थि। देहांत केँ एक् दिन पहले हि सुनीता कि पापा केँ संग बहुत लम्बी बातचीत हुइ थि। पापा केँ देहांत कां समाचार मिलते हि सुनीता बेहोश सि होँ गई, थि। सुनील बड़ी मुश्किल सें उसेहोश मे ला पाया थां।
सुनीता केँ लिएये बहोत बड़ा सदमा थां। सुनीता कि माताजी कां कुछ वक़्त पहले हि देहांत हुआ थां। पापा नें कभी सुनीता कों मम्मी कि कमी महसूस नहि होने दि। सुनील अपनी पत्नि सुनीता कों लेकर अपने ससुराल पहुँचा। वहा भि सुनीता केँ हालठीक नहि थें। वो नां खाती थि नाँ कुछ पीती थि। पापा केँ क्रिया कर्म होने केँ बादजब वो वापसआयी तोँ उसकामन ठीक नहि थां। सुनील नें सुनीता कां मन बहलाने कि बड़ी कोशिश कि पर्र फिन भि सुनीता कि मायूसी बरकरार थि। वो पिता जी कि यादआने पऱ बारबार रो पड़ती थि।
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सुनीता केँ लिएये बहोत बड़ा सदमा थां। सुनीता कि माताजी कां कुछ टाइम पहले हि देहांत हुआ थां। पापा नें कभी सुनीता कों मां कि कमी महसूस नहि होने दि। सुनील अपनी पत्नि सुनीता कों लेकर अपने ससुराल पहुँचा। वहा भि सुनीता केँ हालठीक नहि थें। वो नां खाती थि नाँ कुछ पीती थि। पापा केँ क्रिया कर्म होने केँ बादजब वो वापसआयी तोँ उसकामन ठीक नहि थां। सुनील नें सुनीता कां मन बहलाने कि बड़ी कोशिश कि पर्र फिन भि सुनीता कि मायूसी बरकरार थि। वो पिता जी कि यादआने पर्र बारबार रो पड़ती थि।
जबये हादसा हुआउस टाइम कर्नल साहब औऱ उनकी पत्नि ज्योति दोनों ज्योति केँ मायके गएहुए थें। ज्योति अपने पापा केँ वहा थोड़े दिन रुकने वाली थि। जिसदिन कर्नल साहब अपनी पत्नि ज्योति कों छोड़कर वापसआये उसके दूसरे दिन कर्नल साहब कि मुलाक़ात सुनील सें घऱ केँ निचे हि हुईँ। कर्नल साहब अपनी वाहन निकाल रहे थें। वो कहींजा रहे थें। सुनील कों देखकर कर्नल साहब नें गाड़ी रोकी औऱ सुनील सें समाचार पूछा तोँ सुनील नें अपनी पत्नि सुनीता केँ पापा केँ देहांत केँ बारे मे कर्नल साहब कों बताया। कर्नल साहब सुनकर बहुत दुखीहुए। उस वक़्त ज़्यादा बात नहि होँ पायी।
उसी दिन शामको कर्नल साहब सुनील औऱ सुनीता केँ घऱ पहुंचे। ज्योति कुछ दिनों केँ लिए अपने मायके गई, थि। सुनील नें दरवाजा खोलकर कर्नल साहब कां स्वागत किया। कर्नल साहबआये हैं ये सुनकर सुनीता बाहर् आयी तौ कर्नल साहब नें देखा कि सुनीता कि आँखें रोरोकर सूजी हुई थीं।
कर्नल साहब केँ लिए सुनीता किचनघऱ मे गरमचाय बनाने केँ लिए गयीँ, तोँ उसको वापसआने मे देरलगी। सुनील औऱ कर्नल साहब नें किचन मे हि सुनीता कि रोने कि आवाज़ सुनी तौ कर्नल साहब नें सुनील कि औऱ देखा। सुनील अपने कंधेउठा कर बोला, "पता नहि उसे क्याँ हौ गय़ा हैं। वो बारबार पापा कि यादआते हि रो पड़ती हैं। मे हमेशा उसे शांत करने कि कोशिश करता हूं पऱ कर नहि पाता हूं। चाहो तोँ आप् जाकरउसे शांत करने कि कोशिश कर सकते होँ। होँ सकता हैं वो आपकीबात मान लें। " सुनील नें किचन कि औऱ इशारा करतेहुए कर्नल साहब कों कहा। कर्नल साहबउठ खड़ेहुए औऱ किचन कि औऱ चल पड़े। सुनील खड़ा हौ करघऱ केँ बाहर् आँगन मे लॉन पऱ टहलने केँ लिएचल पड़ा।
कर्नल साहब नें किचन मे पहुँचते हि देखा कि सुनीता किचन केँ प्लेटफार्म केँ सामने खड़ी सिसकियाँ लें कररोरही थि। सुनीता कि पीठ कर्नल साहब कि औऱ थि।
कर्नल साहब नें पीछे सें धीरे-धीरे सें सुनीता केँ कंधे पर्र हाथरखा। सुनीता मूड़ी तौ उसने कर्नल साहब कों देखा। उन्हें देखकर सुनीता उनसे लिपट गयीँ, औऱ अचानक हि जैसे उसके दुखों कां गुब्बारा फट गय़ा। वो फफकफफक कर रोनेलगी। सुनीता केँ आँखों सें आंसूं फव्वारे केँ सामान बहनेलगे। कर्नल साहब नें सुनीता कों कसके अपनी बाँहों मे लिया औऱ अपनीजेब सें रुमाल निकाला औऱ सुनीता कि आँखों सें निकले औऱ गालों पऱ बहतेहुए आंसू पोंछने लगे।
उन्होंने धीरे-धीरे सें पीछे सें सुनीता कि पीठ कों सहलाते हुएकहा, "सुनीता, तुमने कभी किसी आर्मी अफसर कि लड़ाई मे मौत होतेहुए देखि हैं?"
सुनीता नें अपना मुंहऊपर उठाकर कर्नल साहब कि औऱ देखा। रोते रोते हि उसने अपनी मुंडी हिलाते हुए इशारा किया कि उसने नहि देखा। तब कर्नल साहब नें कहा, "मैंने एक् नहि, एक् संग मेरेदो भाइयों कों दुश्मन कि गोलीयों सें भरी जवानी मे शहीद होतेहुए देखा हैं। मैंने मेरीदो भाभियों कों बेवा होते देखा हैं। मे उनकेदो दो बच्चों कों अनाथ होतेहुए देखा हैं। औऱ जानती हौ उनके बच्चों नें क्याँ कहा थां?"
कर्नल साहब कि बात सुनकर सुनीता कां रोनाबंद होँ गय़ा औऱ वो अपनासर ऊपर उठाकर कर्नल साहब कि आँखों मे आँखें डालकर देखने लगी पर्र कुछ नाँ बोलीं। कर्नल साहब नें अपनीबात जारी रखतेहुए कहा, "मे जब बच्चों कों ढाढस देने केँ लिए गय़ा, तोँ दोनों बच्चे मुझसे लिपटकर कहनेलगे कि वो भि लड़ाई मे जानां चाहते हैं औऱ दुश्मनों कों मारकर उनके पिता कां बदलाजब लेंगे तब हि रोयेंगे। जोँ देश केँ लिए कुर्बानी देना चाहते हें वो वो रोकर अपनाजोश औऱ जस्बात आंसूं केँ रूप मे जाया नहि करते। "
कर्नल साहब कि बात सुनकर सुनीता कां रोना औऱ तेज होँ गय़ा। वो कर्नल साहब सें औऱ कस केँ लिपट गयीँ, बोलि, "मेरे पिता जी भि लड़ाई मे हि अपनीजान देना चाहते थें। उनको बड़ा अफ़सोस थां कि वो लड़ाई मे शहीद नहि हौ पाए। "
कर्नल साहब नें तब सुनीता कां सर चूमते हुएकहा, "सुनीता डार्लिंग, जोँ शूरवीर होते हें, उनकीमौत पर्र रोकर नहि, उनके असूलों कों अमल मे लाकर, इनके आदर्शों कि राह पऱ चलकर, जौ काम वो पूरा नां करपाए इन कामों कों पूराकर उनके जिंदगी औऱ उनके देहांत कां गौरव बढ़ाते हें। यही उनके चरणों मे हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके क्याँ उसूल थें? उन्होंने किसकाम मे अपना जिंदगी समर्पण किया थां ये तोँ बताओ मुझे, डिअर?
उनकीबात सुनकर सुनीता कुछदेर तक कर्नल साहब सें लिपटी हि रही। उसका रोना धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम हौ गय़ा। वो अपने कों सम्हालते हुए कर्नल साहब सें धीरे-धीरे सें अलग हुई औऱ उनकी औऱ देखकर उनकाहाथ अपनेहाथ मे लेँ कर बोलीं, "कर्नल साहब, आप् नें मुझेचंद शब्दों मे हि जिंदगी कां फलसफा समझा दिया। मे आपका धन्यवाद केसेअदा करूँ?"
कर्नल साहब नें सुनीता कि हथेली दबाते हुएकहा, "तुम् मुझे जस्सू, कहकर बुलाओगी तोँ मेरा अहसान चुकता होँ जाएगा। "
सुनीता नें कहा, "कर्नल साहब मेरेलिए आप् एक् गुरु सामान हें। मे आपको जस्सू कहकर केसे बुला सकती हूं?"
कर्नल साहब नें कहा, "चलो ठीक हैं। तोँ तुम् मुझे जस्सू जीकहकर तोँ बुला सकती हौ नाँ?"
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naik wrote: ↑11 jaan 2020 18:54superb kahani SATISH wrote: ↑11 jaan 2020 22:24 excellent kahani mind blowing hot & sexy please continue thanks friends
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