Incest बदलते रिश्ते - जवानी का जादू - Complete Kahani All Parts
Incest बदलते रिश्ते
lekhak-Ritudare
बेला तेरी कितनी बार कहीं हूं कि साराकाम छोड़कर सबसे पहले तूँ गायों कों चारा खिला दियाकर देख नहि रही केसेभूख सें बिलख बिलख करचिल्ला रही हैं.( सुगंधा कि तेज आवाज़ सुनकर बेला हड़बड़ाती हुईँ सारेकाम छोड़कर करीब-करीब दौड़ती हुइ सुगंधा केँ पास पहुंची औऱ बोलि.)
मालकिन आज मुझसे देरी होँ गई हैं क्याँ करूंघऱ केँ सारेकाम निपटा करआने मै वक़्त लग जाता हैं। औऱ आप् तोँ अच्छी तरह सें जानती हैं कि मेरा व्यक्ति एक् नंबर कां शराबी औऱ जुआरी हैं। सुभह उठते हि मुझसे झगड़ा करने लगता हैं औऱ इसी मे यहांआने मे मुझे देरी हौ जाती हैं।
बसबस रहनेदे मुझेरोज कि अपनी स्टोरी सुनाने कों जल्द सें जाकर जोँ कहींउसे पूराकर।
जी मालकिन.( इतना कहकर बेला जाने कों हुइ कि तभी)
औऱ हां गायों कों चारा देकर जल्द सें ब्रेकफास्ट सजधजकर करदेआज खेतों कि तरफ जानां हैं वहां पर्र जाकर देखें कि खेतों मे कितना कामहुआ हैं.( इतना कहतेहुए सुगंधा नहाने केँ लिएघऱ मे बने बाथरूम कि तरफ जानेलगी। सुगंधा कि उम्र करीब-करीब 40 याँ बेतालीस केँ लगभग थि। औऱ इस उम्र मे भि
वो बहोत सुंदर थि। अभि भि उसके गदराए जिस्म मे सेजवानी कि मांदक सुगंधकिसी केँ भि तन शरीर कों उत्तेजित कर देती थि। सुगंधा विवाह करकेइस घऱ मे आई थि तोँ फूलों सि कोमल औरअपनी चंचलता पूरेघऱ मे बिखेर कर देखते हि देखते वो घऱ केँ सब सदस्य कि चहेती बन गई सुगंधा कि सांस सुगंधा कों बहोत प्रेम औऱ दुलार देती थि। इसका भि एक् कारण थां सुगंधा कि सासू माँ अच्छी तरह सें जानती थि कि उनका बेटा उनकी जमीदारी कों नहि संभाल पाएगा औऱ वो घऱ कि सारी जिम्मेदारी औऱ जमीदारी सभालने कां हुनर अपनीबहु सुगंधा मे देखती आँ रही थि.
Incest बदलते रिश्ते - जवानी का जादू – New Episode
सुगंधा केँ संग अच्छी तरह सें जानती थि कि उनका बेटा गलत संगत मे आँ चुका हैं औऱ वो भि हमेशा शराब औऱ जुआ मे अपनी जीवन औऱ पैसे दोनों उड़ारहा थां लाख समझाने केँ बावजूद भि उसने किसी भि प्रकार कां सुधार नहि आया औऱ देखते हि देखते हें सुगंधा केँ संग गुजर गई मगर मरने सें पहले हि उन्होंने सुगंधाको अपनेघऱ कि सारी जिम्मेदारी औऱ जमीदारी कां कार्य सौंप दि थि औऱ बोलि थि कि अब सें इसघऱ कि सारी जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर हैं औऱ उन्हें अपने बेटे पऱ बिल्कुल भि भरोसा नहि हैं सुगंधा भि अपनेसंग कि बात मानते हुए उनको यकीन दिलाई थि कि वो घऱ कि सारी जिम्मेदारी कों अपना उत्तरदायित्व समझकर बखूबी निभाएंगी। औऱ तब सें लेकरआज तक सुगंधा अपना फर्ज अच्छे तरीके सें निभारही थि।
तेज कदमों सें चलती हुइ सुगंधा जल्द सें बाथरूम मे प्रवेश कर गई उसेइस बात कि जल्दबाजी थि कि आज खेतों मे काम देखने जानां थां औऱ वो पहले सें हि लेट होँ चुकी थि, औऱ अधिकलेट नहि होना चाहती थि। इसलिये बाथरूम मे घुसते हि वो अपने शरीर सें पीलेरंग कि साड़ी कों उतारने लगी,,,, सुगंधा कां गोरा जिस्म पीलेरंग कि साड़ी मे खिलरहा थां,,, बला कि हसीन सुगंधा आहिस्ता करके अपने जिस्म पऱ सें अपनी साड़ी कों दूरकर रही थि,,,, अगले हि समय उसने अपने शरीर पर्र सें अपनी वाहन कों उतारकर नीचे फर्श पऱ गिरा दि उसके शरीर पर्र अब सिर्फ पीलेरंग कां ब्लाउज औऱ पेटीकोट थां औऱ इन वस्त्रों मे सुंदर सुगंधा कामदेवी लगरही थि वो कुछ लम्हा केँ लिए अपनीनजर कों अपने पैरों सें होतेहुए अपनी ब्लाउज केँ बीच सें झांकरही चूचियों केँ बीच कि गहरी दरार कों देखने लगी,,, नां जाने क्याँ सोचकर उसके होठों पर्र मुस्कुराहट फैल गई औऱ वहां अपने दोनों हाथों कों ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों सें अपने ब्लाउज केँ बटन खोलने लगी,,,, ये नजारा बेहद कामुक औऱ मादक थां। फिरभी इस बेहद कामोत्तेजक नजारे कों देखने वाला इसमें कोई भि नहि थां परंतु एक् स्त्री केँ द्वारा अपने हाथों सें अपने कपड़े उतारने कि कल्पना हि मर्दों कि उत्तेजना मे बढ़ोतरी कर देती हैं। औऱ जबबात सुगंधा कि होँ तौ सुगंधा तौ स्वर्ग सें उतरी हुई किसी अप्सरा कि तरह हि बेहद सुंदर थि, उसके शरीर कि बनावट उसकाभरा हुआ शरीर औऱ स्थान स्थान पऱ शरीर पऱ बने कामुक कटाव मर्दों कों पूरीतरह सें चुदवासा बना देते थें।,,,,
आहिस्ता करके सुगंधा आपने ब्लाउज केँ सारेबटन खोल दि ब्लाउज केँ बटन खोलते हें लालरंग कि ब्रानजर आनेलगी औऱ संग हि सुगंधा कि जवानी केँ दोनों कटोरे जौ कि मधुररस ं सें भरेहुए थें। औऱ ऐसा प्रतीत हौ रहा थां कि किसी भि टाइम वो छलक जाएंगे क्योंकि सुगंधा कि दोनों चूचियां कुछ ज़्यादा हि बड़ी औऱ गोल थि,,, औऱ वो दोनों जवानी कि केंद्रीय बिंदु सुगंधा कि लालरंग कि ब्रा मे समा नहि पारहे थें।,,, अगले हि लम्हा सुगंधा अपने शरीर पऱ सें ब्लाउज भि उतार फेंकी,, बाथरूम मे सुगंधा आरामसे अपने हि हाथों सें अपने आप् कों वस्त्र विहीन करतीजा रही थि इस टाइम ऊसके जिस्म पऱ केवल पेटीकोट औऱ लालरंग कि ब्रा हि थि।
सुगंधा बाथरूम मे केवल ब्रा औऱ पेटीकोट मे खड़ी थि मगर उसकारूप लावण्य किसीकाम देवी कि तरह हि लगरहा थां जब वस्त्रों मे सुगंधा इतनी कामुक लगती होँ तौ संपूर्ण नग्ना अवस्था मे तौ कहर ढाती होगी,,,,। सुगंधा अपने दोनों हाथों कों नीचे कि तरफ लाकर पेटीकोट कि डोरी कों अपनी नाजुक उंगलियों कां सहारा देकर खोलने लगी,,,, औऱ देखते हि देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों मे जा गिरी,, इस वक्त कां ये दृश्य ऐसालग रहा थां मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति कों अपने अंदर समेटरहा हौ,,, सुगंधा केँ गोरे गोरे जिस्म पऱ लालरंग कि ब्रा औऱ लालरंग कि पैंटी उसके कामुक शरीर कों औऱ भि अधिक मादकबना रहे थें। 40 वर्ष कि आयु मे भि सुगंधा कां जिस्म औऱ हुस्न अल्हड़ जवानी कि गंध बिखेर रही थि। वैसे तौ ज्यादातर औरतें वस्त्र पहनकर हि स्नान करती हें मगरजब इसतरह कां एकांत बाथरूम मे मिलता हौ तौ वो भि अपने सारे कपड़े, उतारकर नंगी होकर नहाने कां लुत्फ उठाती हैं। औऱ सुगंधा तोँ पहले सें हि इसतरह केँ एकांत कि आदी होँ चुकी थि।
इसलिये सुगंधा आदत अनुसार अपनी ब्रा केँ ऊपर खोलने केँ लिए अपने दोनों हाथ कों पीछे कि तरफ लें जाकर अपनी ब्रा केँ हुक कों खोलने लगीइस तरह कि हरकत कि वजह सें उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने औऱ ज़्यादा ऊभरकर सामने आँ गई। औऱ जैसे हि ब्रा कां हुक खुला सुगंधा कि दोनों कि योजना आजाद परिंदे कि तरहहवा मे पंख फड़फड़ाने लगे,
अगर कोई अपनी आंखों सें सुगंधा कि नंगी चूचियां देख लें तोँ उसे यकीन हि नाँ हौ कि ये एक् 42 वर्षीय स्त्री कि चूचीया हैं।,, क्योंकि अक्सर औऱ अधिकतर इसउमर मे आकर औरतों कि चुचियों कां आकारभले हि बड़ा होँ वो झूल जाती हें,,, मगर सुगंधा केँ पक्ष मे ऐसा बिल्कुल भि नहि थां इस उम्र मे भि उसकी चूचियां जवा ताजा औऱ खरबूजे कि तरहगोल गोल औऱ बड़ी बड़ी थि औऱ औऱ देखने औऱ आश्चर्य करने वालीबात ये थि कि,,, बड़ी-बड़ी औऱ गोल होने केँ बावजूद भि उसमे लटकन बिल्कुल भि नहि थि कहीं सें भि ऐसा नहि लगता थां कि झूल गई हौ,,, चॉकलेटी रंगी कि निप्पल किसी कैडबरी कि चॉकलेट कि तरहलग रही थि जिसे किसी कां भि मन मुंह मे लेकर चूसने कों होँ जाए।
सुगंधा अपनी ब्रा कों भि अपनी बाहों सें निकाल कर नीचे जमीन पर्र फेंक दि थि एक् स्त्री होने केँ बावजूद भि सुगंधा अपनी चुचियों कों स्पर्स करने कां लालचरोक नहि पाई औऱ उत्सुकता बस वो अपने दोनों हाथों सें अपने दोनों खरबूजे कों पकड़कर हल्के सें दबाने लगी औऱ दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वो अपने पति केँ बारे मे हि सोचरही थि जोँ कि उसकी जवानी कों,
Incest बदलते रिश्ते - जवानी का जादू – New Episode
महसूस करने कां सुखडॉग नहि पाया थां औऱ नाँ हि सुगंधाको हि,,, अद्भुत सुख कां एहसास करा पाया थां,,,, सुगंधा कों इसबात कां दुखअब तक अखररहा थां कि नाँ तोँ वो कुछकर पाया औऱ नाँ हि उसेकुछ करने दियायही बात सोचते हुए वो अपने दोनों खरबूजो पऱ हथेली कां स्पर्श कराकर हटाली औऱ अपनामन भटकने नां देकर जल्दी अपनी पेंटी कों दोनों हाथों सें पकड़कर नीचे कि तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों सें होतेहुए नीचे कि तरफलाई हैं औऱ अगले हि लम्हा अपनी पेंटी कों भि ें उतार फेंकी,,,, अब सुगंधा बाथरूम मे संपूर्ण नग्नवस्था मे थि,,, इस वक्त सुगंधा स्वर्ग सें उतरी हुईँ कोई अप्सरा लगरही थि,,,। इससमय कां नजारा किसी केँ भि लन्ड सें पानी फेंक देने केँ लिए बहुत थां। गोरा गोरा जिस्म कामुकता सें भराहुआ, लंबे काले कालेघने बाल जोँ कि उसकीकमर केँ नीचे भरावदार उन्नत नितंबों कों स्पर्श करते थें, गोल चेहरा भराहुआ किसी फिल्मी हीरोइन सें कम नहि थां जवानी सें भरेहुए शरीर पऱ सुगंधा कि तनी हुई दोनों चूचियां कुदरत केँ द्वारा दि हुईँ संपूर्ण जवानी कों पुरस्कृत करतेहुए मैडल कि तरहलग रही थि।
पेट पऱ चर्बी कां नामोनिशान नहि थां फिरभी सुगंधा किसी भि प्रकार कां योग व्यायाम नहि करती थि मगरजिस तरह सें सारादिन हुआइधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती औऱ करवाती थि,,, इस कारण सें उसका शरीरइस उम्र मे भि पूरीतरह सें कसाहुआ थां। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले केँ तने केँ समाननजर आती थि,, जिसे हाथों सें सहैलाना औऱ चूमना हर मर्द कि ख्वाहिश थि।,,,
जिसतरह कि हुस्न सें भरी हुई सुगंधा थि उसीतरह सें बेहद सुंदर उसकी बेशकीमती चूत थि। जिसका आकार मात्र एक् हल्की सि दरार केँ रूप मे नजर आँ रही थि। हल्की सि उपसी हुईँ,,, याँ युं कहलो कि गर्म रोटी कि तरह फुली हुई थि जिस पऱ हल्के हल्के सुनहरी रंग कि झांटों कां झुरमुट बेहद हसीनलग रहा थां।,,,,। ये स्त्री केँ जिस्म कां वो बेशकीमती हिस्सा थां,,, जिसे पाने केँ लिए दुनिया कां हर मर्दकुछ भि कर जाने कों रेडी रहता हैं। औऱ ये तोँ सुगंधा कि चूत थि, जिसके बारे मे सोचकर हि नाँ जानेरोज कितने लोग अपना पानी निकाल देते थें।
सुगंधा कां कसाहुआ जिस्म औऱ उसकी पतली दरार रुपी चूत कों देखकर ये अंदाजा भि नहि लगाया जा सकता थां कि वो एक् बेटे कि माँ हैं।
टाइम धीरे-धीरे धीरे-धीरे बहुतबीत चुका थां इसलिये सुगंधा जल्द जल्द स्नान करके सजधजकर होँ गई,,,, हल्की गुलाबी रंग कि साड़ी मे सुगंधा बला कि सुंदर लगरही थि। बेला जल्द सें ब्रेकफास्ट सजधजकर कर दि थि औऱ सुगंधा केँ लिए ब्रेकफास्ट परोसकर बाकी केँ काम मे जुट गई थि।
सुगंधा ब्रेकफास्ट समाप्त करके खेतों कि तरफ जाने केँ लिए रेडी होँ गई थि औऱ घऱ सें बाहर् निकलते निकलते वो बेला कों,, आवाज़ लगाते हुए बोलीं।
बेलाऔ बेला कहां रह गई,,,,,,, ?
जीआई मालकिन। ( बेला भि रसोईघर सें करीब भागते हुए सुगंधा केँ पासआई)
रोहनउठा कि नहि,,,,,
जी नहि मालकिन रोहन बाबू अभि तक सोरहे हें,,,
अरे तोँ जाओउसे जगाओकब तक सोता रहेगा,,,,
जी मालकिन अभि जारही हूं ( औऱ इतनाकह कर बेला रोहन कों जगाने केँ लिए जानेलगी औऱ सुगंधा खेतों कि तरफ निकल गई)
बेलाइसी तरह सें दिनभर अपनी मालकिन केँ हुक्म पर्र बिनाथके लगी रहती थि। इसीवजह सें सुगंधा भि बेला कों ज्यादा मानती थि सुगंधा खेतों कि तरफचली गई थि औऱ बेला रोहन कों जगाने केँ लिए उसके कमरे कि तरफजा रही थि, रोहन सुगंधा कां बेटा थां ज्योति हाई विद्यालय पासकर चुका थां मगर पढ़ाई मे उसका बिल्कुल भि मन नहि लगता थां देहात केँ आवारा छोकरो केँ संग थोड़ी बहोत उसकी संगत होँ चुकी थि। सुगंधा इसलिये उसकेसंग बेहद शख्ती सें काम करती थि उसेइस बात कां डर थां कि कहीं वो भि उसके बाप कि तरह निकम्मा नां हौ जाए,,,,
बेला रोहन केँ कमरे केँ लगभग पहुंची तोे देखी कि दरवाजा हल्का सां खुलाहुआ हैं,,,,,
ये रोहन बाबू भि नां,,, नां जानेकब समझेंगे,,,,, बिल्कुल भि समझ नहि हैं कि दरवाजा बंद करके रखें,,,,, ( बेलामन हि मन मे बड़बड़ाते हुए कमरे केँ अंदर प्रवेश कि,,, )
रोहन बाबूऔ रोहन बाबूये देखो (जमीन पर्र गिरी हुईँ तकिए कों उठाते हुए ) कौन सि चीज कहां गिरी पड़ी हैं इसका इन्हें भान हि नहि हैं,,,, (तकिए कों उठाकर बैड पर्र रखतेहुए)
अरेउठ जाइए रोहन बाबू वरना मालकिन क्रोध करेंगी,,,,
(
इतना कहतेहुए बिना कि नजर चादर केँ उठेहुए भाग पर्र पड़ी तौ वो एकदम सें दंगरह गई,,, औऱ बेला कां दंग हौ जानां लाजिमी थां क्योंकि वो चादर रोहन कि टांगों केँ बीचो-बीच उठाहुआ थां जैसे कि छोटा सां तंबू होँ,, औऱ खेलीखाई बेला कों समझते देर नहि लगी कि ये चादरकिस वजह सें उठी हुईँ हैं,,, वो एक् तक उसउठे हुएभाग कों देखरही थि वो रोहन कों जगाना भूल गई उसकेमन मे अजीब सें ख्याल आनेलगे,,,, बेलाये तोँ अच्छी तरह सें समझ गई थि कि चादर कां ये हिस्सा रोहन केँ लन्ड कि वजह सें हि उठाहुआ हैं,,, मगर बेला केँ लिए हैरान करने वालीबात ये थि कि रोहन कि उम्र केँ मुताबिक चादर कां उठाहुआ आकारकुछ ज़्यादा हि बड़ा औऱ तगड़ा लगरहा थां। एक् लम्हा केँ लिए तोँ लन्ड केँ आकार केँ बारे मे सोचकर हि बेला केँ तन शरीर मे झुनझुनी सि फैल गई,,,,, औऱ उसकी मांसल जांघों केँ बीच कसमसाहट भरीलहर दौड़ने लगी,,,,,,,
बेलाआई तौ थि रोहन कों जगाने मगर रोहन केँ लन्ड कि वजह सें बने तंबू कों देखकर रोहन कों जलाना भूल गई अब उसकेमन मे अजीब अजीब सें ख्याल घूमरहे थें,,, अब उसकेमन मे ऐसा आँ रहा थां, कि वोँ चादरहटा कर देखें रोहन कां हथियार कैसा हैं क्योंकि महिला कां मन होने केँ नाते उसकेमन मे रोहन केँ लन्ड कों देखने कि उत्सुकता कुछ अधिक हि बढ़ती जारही थि।
बेला अपनी उत्सुकता कों रोक नहि पारही थि उसकेहाथ स्वयं ब स्वयं आगे बढ़ते जारहे थें,,। वो चादर कों अपनेहाथ मे पकड़ली थि,,,,
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