Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - Desi sex story - Episode 1
मुहं बोलि बेहन कि चुदाई
हैल्लो दोस्तों। मेरानाम संजय हैं। मे भोपाल कां रहने वाला हूं। मेरी हाईट 5.11 इंच उम्र 23 साल अच्छा खासा जिस्म हैं। मे दिल्ली मे एक् रूम किराए पऱ लेकर रहता हूं। दोस्तों येकथा आज सें 3 साल पहले कि हैं। जब मे दिल्ली आयातब मे एक् दफ़्तर मे काम करता थां। तभी मुझेकुछ काम केँ सिलसिले मे अपनेघऱ पर्र जानां पड़ा। भोपाल जहाँ पऱ मेरे माँ, पिताजी रहते हें।
दोस्तों जब मे वहा सें लौटने लगा तौ तभी मेरे पड़ोस वाली आंटीआई औऱ मुझसे कहनेलगी कि बेटा मेरी लड़की भि दिल्ली मे रहती हैं उसकी तबीयत बहोत खराब हैं प्लीज़ उसेये कुछ पैसेदे देना औऱ होँ सके तौ उसकाकुछ दिन ख्याल रख लेना। तौ मैंने कहा कि ठीक हैं औऱ मुझसे जौ बन सकेगा मे कर दूँगा। फिनजब मे दिल्ली आया। तोँ मैंने रश्मि कों मोबाइल किया औऱ कहा कि आंटी नें कुछ पैसे भिजवाए हैं तुम् कहां पर्र रहती होँ मुझे बताओ मुझे तुमसे मिलना हैं।
रश्मि : मे कालकाजी रहती हूं भैया।
मे : ठीक हैं तुम् ऐसाकरो मे तुमको कल 6 बजे मिलता हूं साम कों ऑफीस केँ बाद।
रश्मि : ठीक हैं भैया जब आप् यहा पऱ पहुंच जाओ तोँ मुझे मोबाइल कर देना मे आपको अच्छे सें पताबता दूंगी।
मे : ठीक हैं। फिन दूसरे दिनसाम कों जब मे ऑफीस सें फ्रीहुआ तौ मे कालकाजी बस स्टॅंड केँ पासआया औऱ मैंने रश्मि कों मोबाइल किया।
मे : हैल्लो रश्मि। मे बस स्टॅंड पर्र खड़ा हूं सफेद शर्ट औऱ कालेकलर कि शाइनिंग पेंट मे।
रश्मि : भैया आप् वहीं पऱ रूको मे अभि थोड़ी देर केँ बादआती हूं।
फिन मैंने देखा कि एक् लड़कीइधर उधर देखती हुई आँ रही हैं औऱ मैंने सोचा कि होँ सकता हैं यही रश्मि हौ। तौ मे बाईक सें उतरा औऱ उसकेपास गय़ा औऱ उससे पूछा।
मे : क्याँ तुम् रश्मि हौ ?
लड़की : नहि मेरानाम रश्मि नहि हैं। ये स्टाईल बहोत पुरानां हौ गय़ा हैं लड़की कों पटाने कां।
तोँ मैंने उसे सॉरी बोला औऱ पीछे मुड़कर आनेलगा। तभीउस लड़की नें कुछफुस फुसाते हुएकहा।
लड़की : पता नहि कहां कहां सें आँ जाते हैं?
फिनये बात सुनकर मेरे जिस्म मे आगलग गई।
मे : हैल्लो मेडम। मे आपको पटाने कि कोशिश नहि कररहा हूं। मे तोँ किसी कां इंतजार कररहा हूं औऱ आप् इधरउधर देखती हुइ आँ रही थि तोँ मैंने सोचा कि आप् वही हौ।
लड़की : वैसे भि तुम् मुझेपटा भि नहि सकते औऱ तुम्हे पता नहि मे कौन हूं?
मे : होगीकोई बड़े बाप कि बिगड़ी औलाद।
तभी मैंने देखा कि एक् पुलिस वेन हमारे सामने आँ कर रुकी औऱ उसमें सें 4-5 पुलिस वाले उतरे औऱ उस लड़की केँ आगे पीछे खड़े हौ गये।
लड़की : चाहू तौ मे एक् मिनट मे अभि तुम्हे अंदर करवादूँ।
मे : मैंने सोचा कि बेटा भलाईइसी मे हैं कि बेहन कि लौड़ी कों जानेदे औऱ जोँ काम करनेआया हैं वोँ जल्द सें करकेलौट जा। तभी उस लड़की नें कहा।
लड़की : तुम् जैसे लड़को कों मे अच्छी तरह सें जानती हूं। हरामी कहीं केँ।
तौ मेरे तनबदन मे फिन सें आगलग गई।
मे : बेहन कि लौड़ी तेरा बाप ऑफिसर होगा अपने एरिए मे। मे भि मीडीया मे हूं औऱ अगर मे अपनी पऱ उतर आऊंगा तौ अच्छा नहि होगा.चुप चापचली जाअबयहा सें।
पुलिस : साले हरामी।
मे : ओए तेरे बाप कि जागीर नहि हूं औऱ नाँ मैंने कुछ ग़लत किया हैं नां तुम् लोगो सें डरता हूं औऱ मुझे अच्छी तरहपता हैं तुम् लोगो कां काम। अब चुपचाप चलेजाओ नहि तौ। फिनउस मे सें एक् समझदार पुलिस वाला थां वोँ मेरेपास आया जौ कि उम्र मे 50 केँ लगभग थां औऱ मुझसे बोला कि क्याँ हुआ बेटा?
मे : अरे अंकल देखो। मे किसी कां इंतजार कररहा थां औऱ मुझेइन मेडम कों देखकर लगा कि येवही हैं। तौ मैंने इनसेपूछ लिया तोँ येपता नहि क्यूं भड़क गई? कोईबात नहि बेटा हौ जाता हैं। अभि बिटिया नादान हैं तुम् जाओ अपनाकाम करो। ठीक हैं अंकल। वैसे आपकानाम क्याँ हैं? तोँ अंकल बोलीं कि नदीम। फिन मैंने कहा कि ठीक हैं अंकल बहोत बहोत शुक्रिया मे चलता हूं औऱ आप् जैसे हि समझदार पुलिस वालो केँ दम पऱ हि सभीकुछ चलरहा हैं। नहि तौ अभि कां हाल तोँ आपसे छुपा नहि हैं। तौ वोँ बोले कि क्याँ करे बेटा? चलोकोई बात नहि। तौ मैंने कहा कि ठीक हैं। बाय अंकल।
फिन मे जैसे हि पीछे मुड़ा देखा कि एक् लड़की मुझे देखकर मुस्कुरा रही हैं। गोरी चिट्टी, हाइट 5.6 इंच अच्छे फिगर। क्याँ आप् संजय भैया हौ? औऱ तुम् रश्मि? हाहहहाहा मुझे बहोत देर हौ गई औऱ मेरीवजह सें येसभी।
मे : अरे नहि ऐसीकोई बात नहि। जबकुछ बुरा करोगे नहि तौ डरनाकिस बात कां?
रश्मि : फिन भि पुलिस वालो कों देखकर तोँ अच्छे अच्छो कि हालत खराब हौ जाती हैं।
मे : मगर वोँ हैवान थोड़े हि नाँ होते हैं। वोँ भि हमारी हि तरह एक् इंसान होते हैं अब 5 उंगलियां बराबर तोँ नहि। उनमेकुछ अच्छे तोँ कुछ बुरे भि होते हैं ठीककहा नां मैंने।
मे : अच्छा चलो पहलेये बताओ कि तुम्हारा रूम कहां हैं?
रश्मि : यहीं पऱ पास मे हैं।
मे : तोँ फिनचलो।
रश्मि : हाँ क्यूं नहि। चलिए नां।
जब मे रश्मि केँ रूम पऱ गय़ा तोँ देखा कि छोटे छोटेतीन बेडरूम थें रसोई बाथरूम औऱ एक् हॉल
मे : तुम्हारे संग औऱ कौन रहता हैं?
रश्मि : दो सहेलियां उनकी नाईट शिफ्ट होती हैं दोनों अपने अपनेकाम मे व्यस्त रहती हैं।
मे : अच्छा अच्छा औऱ तुम्?
रश्मि : मे तोँ अभि एक् कॉलेज सें पढ़ाई कररही हूं औऱ मेरा आखरीसाल हैं।
मे : ठीक हैं। अच्छा येलो पैसे औऱ बताओ कि मे तुम्हारी क्याँ सेवाकर सकता हूं? आंटी नें तौ हुक्म दिया हैं तुम्हारा ख्याल रखने कां।
रश्मि : बसबस बहोत हैं।
मे : चलोठीक हैं तोँ अब मे चलता हूं ज़रूरत होँ तोँ मेरे नंबर पऱ फोनकर देना।
रश्मि : ठीक हैं भैया।
फिन मे वहा सें चला गय़ा शनिवार औऱ रविवार मेरे दफ़्तर कि छुट्टी होती हैं। तौ शनिवार कों मे दिनभर घऱ पर्र बैठा बैठाबोर होँ गय़ा। तोँ मैंने सोचा कि चलोआज फिल्म देखने चलते हैं। मुझेतभी रश्मि कां ख्याल आया औऱ मैंने सोचा कि मे उसको भि अपनेसंग मे लेँ लेता हूं। होँ सकता हैं कि थोडा उसका भि मनबहल जाएगा।
मे : हैल्लो रश्मि। क्याँ तुम् फिल्म देखने चलोगी?
रश्मि : कौन सि?
मे : अरे एक् हॉलीवुड फिल्म लगी हैं? एक्शन थ्रिलर हैं कहो चलना हैं? मे बोर हौ रहा थां तोँ सोचा कि फिल्म देखने चलता हूं तभी तुम्हारा ख्याल आँ गय़ा तौ मैंने तुमसे पूछ लिया।
रश्मि : हाँ तोँ इसमे इतनी सफाई देने वालीकौन सि बात हैं? ठीक हैं। चलो चलते हें।
मे : तोँ ठीक हैं। तुम् एक् कामकरो तुम् जल्द सें सजधजकर हौ जाओ मे अभि कुछदेर मे आता हूं औऱ अगर ट्रैफिक ज़्यादा नहि हुआ तौ मे तुम्हारे घऱ पऱ 15 मिनट मे पहुंच जाऊंगा।
रश्मि : ठीक हैं तोँ भैया अब जल्द सें आँ जाओ।
फिन मे 20 मिनटबाद उसकेघऱ पर्र बाईक सें पहुंच गय़ा औऱ मैंने दरवाजा नॉक किया तौ रश्मि नें दरवाजा खोला। फिन मैंने जबउसे देखा तौ देखता हि रह गय़ा। इस पऱ वोँ थोडा शरमा गई औऱ बोलि
रश्मि : ऐसे क्याँ देखरहे हौ?
मे : कुछ नहि तुम् तोँ आज कमाल कि खूबसूरत लगरही हौ।
रश्मि : बहोत बहोत शुक्रिया।
मे : अच्छा अबचलो वरना हम् लेट होँ जाएगें।
फिन हम् दोनों हॉल पहुंचे औऱ टिकिट लियाकुछ पॉप कॉर्न लिए औऱ फिन अंदरगये। तोँ वहा पर्र पहले सें हि लाईटबुझ चुकी थि। हॉल पूराभरा हुआ थां औऱ हमे सबसे लास्ट मे कॉर्नर केँ पास वालीसीट मिली थि। फिन फिल्म शुरुआत हुई तोँ पहले हि उसमे एक् हॉटसीन थां। तौ रश्मि नें शरम सें अपनासर नीचेकर लिया। तोँ मैंने कहा कि इतना क्यूं शरमारही हौ। जैसे मुझेकुछ पता हि नहि हैं। फिन तुम् देखो फिल्म आहिस्ता औऱ मुझे अपना एक् अच्छा यार समझो.इस पऱ वोँ हंस दि।
रश्मि : भैया आप् भि नां कमाल करते होँ। कुछ भि बोल देते होँ।
मे : अच्छा मेरी मां मुझसे ग़लती हौ गई। अब तुम् फिल्म देखो।
फिन वोँ सीन 2 मिनट केँ बाद समाप्त हुआ औऱ इतने मे कॉर्नर पर्र जोँ दो जोड़े बैठे थें वोँ एक् दूसरे कों किस करनेलगे। तोँ मैंने साईड सें देखा कि वोँ लड़काउस लड़की केँ कंधे केँ ऊपर सें उसकी शमीज़ मे हाथ डालकर उसके बूब्स दबारहा थां। रश्मि भि येसभी साईड सें देखरही थि। फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे उस लड़के नें उस लड़की कि सलवार मे हाथडाल दिया औऱ उसकी बुर मे उंगली डालकर हिलारहा थां। लड़की केँ मुहं सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे आहह-आहह कि आवाज़ आँ रही थि औऱ इधर उनकी हरकते देखकर मे भि गर्म होँ गय़ा थां औऱ मेरा लन्ड फूलकर फटने हि वाला थां। तभी अचानक सें मैंने देखा कि रश्मि मेरेऊपर नीचे हिलाते हुए लन्ड कों बड़े ध्यान सें देखरही थि। तौ जैसे हि मैंने उसकी चोरी पकड़ली। तभी उसने मुझे देखा हम् दोनों कि आँखे टकराई औऱ हम् धीरे-धीरे सें हंसदिए।
मे : मुझे क्षमा करना दोस्त। मैंने नहि सोचा थां कि यहा पऱ कुछऐसा भि होगा।
रश्मि : कोईबात नहि मे समझ गई। मगरयहा पऱ सभीकुछ होता हैं।
खैर फिल्म समाप्त हुईँ रात केँ 11:30 बज चुके थें औऱ वोँ ठंड कां टाइम थां। फिन मैंने बाईक निकाली औऱ रश्मि बैठ गई। मैंने अपना जॅकेट नहि पहना थां औऱ जब हम् बाईक सें जानेलगे तोँ हमेठंड लगनेलगी।
रश्मि : ठंडलग रही हैं क्याँ भैया?
मे : हाँ दोस्त स्वेटर घऱ पर्र हि भूल गय़ा।
तौ रश्मि मुझसे औऱ चिपककर बैठ गई औऱ अपनीशॉल मेरेहाथ केँ नीचे सें निकाल कर मुझे ओढ़ा दिया। उसका एक् हाथ मेरेपेट सें सीने औऱ दोनों साईड कि शॉल पकड़े हुए थां औऱ दूसरा हाथ मेरे लन्ड केँ सामने सीट पऱ थां। खैरजब बाईक हिचकोले खारही थि तब उसकी चूचियाँ मेरीपीठ सें रगड़खा रही थि औऱ इसलिये मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा। तोँ मुझे बड़ा अच्छा लगरहा थां औऱ इसलिये मे बारबार ब्रेक लगा लगाकर बाईकचला रहा थां। शायद रश्मि कों येबात पताचल गई औऱ इसलिये वोँ थोडा पीछे हटकरबैठ गई। मगर जैसे हि वोँ पीछेहटी अचानक सें एक् गड्डा आँ गय़ा औऱ हम् दोनों उछल पड़े। फिन अंजाने मे रश्मि नें मुझसे चिपककर अपना बैलेन्स बनाया औऱ एक् हाथ सें मेरी छाती पकड़ी औऱ दूसरा हाथ उसका मेरे लन्ड कों पकड़े हुए थां। जब हम् संभाले तोँ तब भि मेरा लन्ड उसकेहाथ मे थां औऱ वोँ ऊपर नीचेउछल रहा थां। तभी उसनेझट सें मेरे लन्ड कों छोड़ दिया। खैर जैसे तैसे हम् घऱ पहुंचे।
रश्मि : भैया चलो आप् थोड़ी देर बैठो मे आपकेलिए गरमचाय बना देती हूं। आपकोघऱ पर्र जाते वक्तठंड नहि लगेगी।
मे : अरे नहि ठीक हैं। तुम् बिनावजह परेशान मत हौ।
रश्मि : अरेचलो नां तकलीफ़ किसबात कि।
फिन मैंने सोचा कि ठीक हैं दोस्त चल कितना टाईम लगेगा औऱ फिन मुझेठंड भि तोँ लगरही थि औऱ जैसे हि हम् रूम मे घुसे लाईटचली गई। रश्मि मोमबत्ती ढूँढने चली गई औऱ मे अंधेरे मे सोफे कि तरफबढ़ गय़ा। तभी अचानक रश्मि जोर सें चिल्लाई औऱ मे देखने भागा क्याँ हुआ? औऱ मैंने पूछा क्याँ हुआ?
रश्मि : मेरे पांव पर्र कुछ चलकर गय़ा।
मे : अरे तुम् लड़कियाँ भि नां चूहे औऱ कॉकरोच सें डर जाती हौ।
फिन मे दीवार कों टटोलते हुएआगे बढ़ा.कुछ दिख तौ रहा नहि थां। कि अचानक ग़लती सें अँधेरे मे मैंने दीवार कि स्थान रश्मि कि मम्मों हाथ मे पकड़ली। दोस्तो क्याँ रसीले थि। एकदमरुई कि तरह औऱ मन तौ किया कि रगड़दूं उउउफफफ्फ़। मगर मैंने हाथ नहि उठाया। जानेऐसी कौन सि शक्ति थि जौ मुझेउस लम्हे केँ लिए बाँध गई। इधर मैंने गौर किया कि रश्मि भि कुछ नहि बोलरही थि बस उसकी बॉडी कि कंपन मुझे महसूस हुईँ। पता नहि मुझेउस समय क्याँ होँ गय़ा? औऱ मैंने उसकी चूचियाँ पकड़कर ज़ोर सें मसल दि औऱ उसके होंठो पर्र अपने होंठरख दिए। फिन मैंने महसूस किया कि वोँ अब भि कांपरही थि। मगर वोँ मूर्ति कि तरह खड़ी थि। तौ मैंने उसको अपने शरीर सें सटाया औऱ उसके होंठ कों चूसने लगा उूउउफ़फ्फ़ क्याँ मजा आँ रहा थां? फिन मैंने धीरे-धीरे सें उसकी जिन्स मे अपना एक् हाथडाल दिया औऱ झट सें उसकी बुर पऱ हाथ घुमाने लगा.मगर अफ़सोस मेराहाथ सिर्फ़ जींस केँ अंदर गय़ा पेंटी केँ नहि औऱ तभी लाईट आँ गई औऱ रश्मि नें अपने कांपते शरीर सें मुझे धकेला औऱ मुझे एक् ज़ोर कां थप्पड़ मार दिया।
रश्मि : निकलजा यहा सें नहि तोँ मे अभि पुलिस कों बुला दूँगी।
फिन मे चुपचाप वहा सें चला गय़ा औऱ दूसरे दिन मुझे मेरी ग़लती कां एहसास हुआ तौ मैंने उसको बहोत मोबाइल किए.मगर उसने मोबाइल नहि उठाया औऱ ऐसे हि तीनचार दिन निकलगये। फिन मैंने उसको एक् मैसेज किया डियर रश्मि, प्लीज़ मुझे क्षमा करदो.पता नहि कि मुझेउस वक्त क्याँ हौ गय़ा थां? औऱ मे येसभी कर बैठा औऱ मे जानता हूं कि येसभी बहोत ग़लत हैं। प्लीज हौ सके तौ मुझे क्षमा कर देना। मेरा तुम्हारे दिल कों ठेस पहुँचाने कां कोई इरादा नहि थां।
तोँ उसका बहोत दिनों तक कोई भि जवाब नहि आया। खैर दिन बीतते गये औऱ लगभग एक् महीना होँ गय़ा। फिन एक् दिन मैंने अपने दोस्तों कि ज़िद कि वजह सें एक् छोटी सि जश्नदे दि औऱ सब नें खुलकर दारू उड़ाई। मैंने भि बहोत दारूपी ली औऱ फिन मुझे छोड़कर रात कों सभी अपने अपनेघऱ पर्र चलेगए। सुभह लगभग 4 बजे मेरी हालत बिगड़ गई। क्योंकि मैंने दोस्तों कि ज़िद पऱ थोड़ी सि कच्ची शराब भि पीली थि। तोँ मेरे मित्र नें मुझे हॉस्पिटल मे भर्ती किया.वहा पर्र लगभग 12 बजे तक मेरी हालत सुधरी तौ मुझे डॉक्टर नें डिसचार्ज किया।
तोँ मेरायार मुझे स्ट्रेचर पऱ डालकर व्हीकल तक लारहा थां कि तभी अचानक मैंने देखा कि रश्मि उधर सें हि गुज़र रही थि औऱ हमारी नज़रे टकराई तौ मैंने शर्मिंदगी सें मुहं दूसरी तरफ घुमा लिया। खैर मे घऱ पऱ पहुँचा मोबाईल साइलेंट पऱ किया औऱ सो गय़ा। फिनजब सोकरउठा तौ देखा कि रश्मि केँ 22 मिसकॉल आई थें। तभी दरवाजे पर्र नॉकहुआ औऱ मैंने सोचा कि बाद मे फोन करता हूं पहले देखूं कौन हैं? तौ द्वार (दरवाज़ा) खोला तौ आँखो पर्र भरोसा नहि हुआ। मेरे सामने रश्मि खड़ी थि। मेराबदन अभि भि काम नहि कररहा थां औऱ पूराबदन कांपरहा थां। तौ उसने मुझे पकड़ा औऱ दरवाजा बंद किया। मुझे रश्मि नें ऐसे पकड़रखा थां कि उसकी चूचियाँ मेरी छाती सें सटी हुई थि औऱ मुझे रश्मि बेड तक लेँ गई औऱ लेटा दिया?
रश्मि : एक् तौ स्वयं ग़लती करते हौ औऱ ऊपर सें मोबाइल भि नहि उठाते?
मे : ऐसीबात नहि हैं मे सोयाहुआ थां। ये मैंने सर नीचे करतेहुए बोला।
रश्मि : सोएहुए थें आप् तोँ दरवाजा इतनी जल्द केसेखुल गय़ा?
मे : मे अभि जस्टउठा हूं। मोबाइल साइलेंट पऱ थां येलो तुम् चाहो तौ देखलो।
रश्मि : पता हैं। पता हैं। नाराज़ होँ अभि तक मुझसे। क्योंकि मैंने उसदिन आपको थप्पड़ मार दिया थां।
मे : नहि तुमने जोँ किया बिलकुल सही किया। ग़लती तोँ मेरी हि थि।
रश्मि : अच्छा छोड़ो जानेदो भूलजाओ औऱ ये बताओ कि येसभी केसेहुआ?
मे : कुछ नहि कलरात थोड़ी सि कच्ची शराबपी ली थि इसलिये थोड़ी हालत बिगड़ गई।
रश्मि : अब कैसी हैं तबीयत?
मे : पहले सें बेहतर हैं।
रश्मि मेरेसंग हि बेड पऱ सटकरबैठ गई।
रश्मि : उसदिन ऐसा क्यूं किया थां आपने मेरेसंग?
मे : मेराकोई ऐसा इरादा नहि थां। मे तौ अंधेरे मे दीवार पकड़कर चलरहा थां कि अचानक सें तुम्हारा वोँ हाथ मे आँ गय़ा। तोँ मुझे बहोत रसीले रसीले सां लगाफिन आगेसभी कुछ केसे होँ गय़ा मुझे स्वयं नहि पता।
रश्मि : चलो छोड़ो अब पुरानी बातें पहलेये बताओ कि अब तबियत कैसी हैं?
मे : अब तौ मे बिल्कुल ठीक महसूस कररहा हूं। औऱ तुम् बताओ तुम्हारी पढ़ाई कैसीचल रही हैं?
रश्मि : वोँ भि ठीकठाक चलरही हैं क्याँ अपनेकुछ खाया याँ नहि?
मे : हाँ थोडा बहोत खाया थां।
रश्मि : अगर आपकोकोई ऐतराज नां हौ तौ क्याँ मे गरमचाय बनादूँ?
मे : हाँ क्यूं नहि। अपना हि घऱ समझो।
फिन उसने मुझेउस दिनगरम चाय बनाकर पिलाई औऱ फिन हमारी दोस्ती फिन सें शुरुआत होँ गई औऱ हम् एक् दूसरे केँ घऱ पर्र आने जानेलगे। फिन एक् दिन मे जब उसकेघऱ पर्र आया तोँ वोँ नहाने चली गई औऱ जब नहाकर बाथरूम सें बाहर् निकली तौ उसने जिस्म पऱ केवल टावल लपेटा हुआ थां। तोँ मे दूर सें हि नजरे झुकाकर उसके बूब्स कों देखरहा थां। फिन वोँ कपड़े पहनकर मेरेपास आकरबैठ गई तोँ हम् बातें करने। तभी उसने मुझसे पूछा कि आपकी कितनी गर्लफ्रेंड हैं? तोँ मैंने कहा कि अभि तक एक् भि नहि। उसदिन सें उसके अंदर थोडा थोडा फर्कआने लगा वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुझसे खुलने लगी। तभी एक् दिन उसने मुझे मोबाइल किया औऱ कहा कि उसकेसंग रहने वाली लड़कीकुछ दिनों केँ लिए अपनेघऱ पर्र गई हैं औऱ उसे अकेले वहा पर्र डर लगता हैं। तौ मैंने सोचा कि ये एक् बहोत अच्छा मौका हैं औऱ मैंने उससेकहा कि कोईबात नहि। तुम् मेरेरूम पर्र चलीआओ।
तोँ दूसरे दिन वोँ मेरेरूम पऱ पांच दिनों केँ लिए आँ गई। फिन उसने मुझेगरम चाय बनाकर दि औऱ हमनेसंग बैठकर गरमचाय पी। फिन मे रेडी होकर अपने दफ़्तर चला गय़ा औऱ पूरेदिन रात होने कां प्रतीक्षा करनेलगा। तोँ साम कों मे दफ़्तर सें घऱ पर्र पहुँचा उसने खानां बनाकर रखा थां औऱ हमने खानां खाया औऱ टेलीविज़न देखने लगे.मगर मेरेरूम पर्र एक् हि बिस्तर होने कि वजह सें हम् एक् संगसो गए औऱ उसे भि कोई दिक्कत नहि थि। फिनरात कों लगभगतीन बजे मेरीआंख खुली औऱ मैंने देखा कि वोँ मेरेऊपर अपना एक् हाथ औऱ पांव रखकरसो रही हैं। तौ मैंने भि थोड़ी हिम्मत करके उसके बूब्स केँ ऊपरहाथ रखकरसो गय़ा। मे सुभहजब उठा तौ उसनेकुछ नहि कहा औऱ मे दफ़्तर चला गय़ा।
ऐसातीन दिन तक चला औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसे भि अहसास होनेलगा। एक् रात कों हम् दोनों नें सोने कां नाटक किया औऱ थोड़ी देरबाद मैंने अपना एक् हाथ उसके बूब्स पर्र रख दिया.मगर उसनेकुछ नहि कहा औऱ मैंने थोड़ी औऱ हिम्मत करके उसके बूब्स सहलाने शुरुआत किए औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे दबाने लगा। तौ वोँ भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे गर्म होनेलगी औऱ आहें भरनेलगी। वोँ अब सिसकियाँ लेँ रही थि औऱ मे समझ गय़ा कि वोँ अब पूरीतरह सें गर्म हौ चुकी हैं।
तौ मैंने मौका देखकर उसके बूब्स कपड़ो केँ अंदर सें एक् हाथ चलाकर सहलाना शुरुआत किया। वोँ फिन सें जोरजोर सें सिसकियाँ लेनेलगी मे औऱ जोर सें बूब्स दबाने लगा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसके कपड़े एक् एक् करके उतारने लगा वोँ भि अब मेरासंग देनेलगी औऱ मैंने उसे पूरा नंगाकर दिया औऱ फिन मे उसकी बुर पर्र आया औऱ बुर चाटने लगा। मैंने जैसे हि उसकी बुर पऱ अपनीजीभ रखी वोँ उछल पड़ी औऱ गांडऊपर करके बुर चटवाने लगी। फिन मैंने लगभगदस मिनट तक उसकी बुर चाटी औऱ फिन मे अपनी एक् ऊँगली उसकी बुर मे करनेलगा। तोँ वोँ मानो प्यास सि गई औऱ कहनेलगी कि प्लीज अब औऱ नहि। प्लीज डालो नाँ मुझसे अब औऱ नहि सहा जाता। डालो जल्द सें अंदर।
फिन मैंने भि देर नां करतेहुए लन्ड बुर केँ मुहं पऱ रखा औऱ एक् धक्का दिया मेरा लन्ड थोडा बुर मे गय़ा। मगर उसकी एक् जोर सें चीख जरुर निकली। तौ मैंने उसके मुहं पर्र हाथरखा औऱ थोडा रुकाफिन जब वोँ थोडा ठीक हुई तौ फिनलगा जोरजोर सें धक्के देने औऱ वोँ चुदाई केँ मजे लेनेलगी। फिन थोड़ी देरबाद मैंने उसके दोनों पांव पकड़कर अपने कंधों पर्र रखे औऱ लन्ड सेट किया औऱ धक्के देनेलगा। तौ इसबीच वोँ दोबार झड़ चुकी थि औऱ मे एक् बार मैंने फिन भि अपनी स्पीड कम नहि कि औऱ चोदता रहा औऱ लगभग 25 मिनट कि चुदाई केँ बाद हम् दोनों थककर लेटेरहे। मैंने उसीदिन उसकी एक् बार गांड भि मारी औऱ उसे अपनी पूरी रंडीबना लिया।
तौ दोस्तों ये थि मेरी पहली चुदाई। इसकेबाद हमारा हरदिन चुदाई कां होता थां।
Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - Desi sex story – New Episode
मां कि बड़े पिताजी केँ संग चुदाई
हैल्लो दोस्तों। मेरानाम दीपक हैं औऱ मे दिखने मे बहोत अच्छा हूं। दोस्तों मुझेइस साईट पर्र कहानियाँ पढ़ते हुए लगभगतीन साल होँ चुके हैं औऱ मुझेइस साईट पर्र सब सेक्सी कहानियाँ बहोत अच्छी लगती हैं। मगर दोस्तों मे आज जौ किस्सा आप् सब कों सुनाने जारहा हूं वोँ एकदम सच्ची किस्सा हैं। इसमें मेरी मम्मी मेरे बड़े बापू चुदी। मेरी उम्र अभि 23 साल औऱ येतब कि बात हैं जब मे 19 साल थां।
मे आपनी मम्मी औऱ पिताजी केँ संग पटना केँ एक् छोटे सें गावं मे रहता थां औऱ मेरे पिताजी वहा पऱ एक् ऑफिस मे काम करते थें। मेरी एक् छोटी बेहन भि थि जोँ कि उस वक़्त 3 साल कि थि। फिनकुछ दिनों केँ बाद मेरे बड़े पिताजी वहा पऱ आए। उन्हें देखकर हम् सभी बहोत खुशहुए हम् सभीरात कों एक् संग सोते थें। मगरउस दिन बड़े पिताजी केँ आने पर्र उन्होंने बोला कि मे औऱ बापू उनकेसंग सोयेगें। उन्हें कुछबात करनी हैं।
तोँ हम् सभी भि राज़ी हौ गये औऱ मम्मी भि अकेले सोने कि लिए राज़ी होँ गई। रात कों खाने केँ बाद हम् सब सोने केँ लएचले गये। मे बड़े बापू औऱ बापू एक् कमरे मे चलेगए औऱ मम्मी मेरी बेहन कों लेकरअलग कमरे मे चली गई, औऱ उनकारूम ठीक हमारे पास हि थां। फिनरात मे बड़े पिताजी नें पीने कों एक् शरबत दिया। पिताजी औऱ मैंने उनसे पूछा कि ये क्याँ हैं? तोँ उन्होंने बोला कि येशिव जी कां प्रसाद हैं इसलिये बापू नें उसे बड़ेमजे सें पी लिया.मगर मैंने नहि पीया क्योंकि मुझे उसमे सें कुछ बदबू आँ रही थि औऱ इसलिये बड़े बापू कों बुरा नां लगे मैंने बाथरूम मे जाकरउसे फ्लशकर दिया औऱ बड़े पिताजी समझे कि मैंने उसेपी लिया। फिन बड़े बापू नें हमसे हमारे हालचाल केँ बारे मे पूछा औऱ ऐसे हि बातें करते करते पिताजी सोगये औऱ मुझे भि नींद आँ गई। मगर मे अभि पूरीतरह सोया भि नहि थां कि अचानक मैंने देखा कि बड़े बापूवहा सें उठकरचले गये।
तौ मैंने सोचा कि वोँ बाथरूम रूमगये होंगे। मगर अधिक वक्त तक नाँ आने कि वजह सें मुझेकुछ शक सां हुआ औऱ इसलिये मे बाहर् गय़ा तोँ देखा कि मम्मी केँ कमरे सें कुछ बातें करने कि आवाज़ सुनाई देरही थि। फिन मैंने दरवाजे केँ पास जाकर सीड़ियों सें ऊपर केँ वेंटिलेटर केँ पास गय़ा। जहाँ सें मम्मी क्याँ कररही थि वोँ सभी पूरासाफ साफदिख रहा थां औऱ सभी बातें भि साफ सुनाई देरही थि। मे वहा पर्र गय़ा औऱ मैंने देखा कि बड़े पिताजी मां केँ पास मे बैठे थें तोँ मे हैरान थां। क्योंकि घऱ मे वोँ एक् दूसरे केँ मुहं तक नहि देखते थें। क्योंकि बड़े बापू मेरी मम्मी केँ जेठ जी हैं। फिन मैंने सुना कि बड़े बापू नें मेरी मम्मी कों बोला कि (रोज़ी मेरी मां कां नाम हैं) मे यहा केवल तुम्हारे लिए हि आया हूं। तब मम्मी नें बोला कि अभि ये नहि होँ सकतातब कि बात औऱ थि अभि सोनू (मेरानाम) बड़ा हौ गय़ा हैं तभी मुझेपता चल गय़ा कि येसभी मां कि विवाह केँ बाद सें शुरुआत होँ चुका थां। अब मे बड़े पिताजी औऱ मां केँ बीच क्याँ क्याँ हुआ। वोँ बताता हूं।
बड़े पिताजी : अब मुझसे औऱ रुका नहि जाता जल्द सें नंगी होँ जाओ। मुझे तुम्हारे इस नंगे शरीर सें मज़े लूटने
हैं।
मां : प्लीज ऐसेमत करो आपके छोटे भइया (मेरे पिताजी) औऱ सोनूपास केँ कमरे मे सोए हैं अगर उनकी नींदखुल गई, तोँ गजब हौ जाएगा।
येसभी बातें सुनकर मे तोँ गर्म हौ गय़ा औऱ मे अपने आप् पर्र विश्वासस नहि कर पाता.मगर अच्छा हुआ कि मैंने वोँ सभीबात चुपचाप सुनी। नहि तोँ वरनाआज मे येसभी कुछ नहि जान पाता औऱ फिन मैंने देखा कि मम्मी नें बैड सें उठकर दरवाजा बंदकर दिया। मेरी छोटी बेहन कों मम्मी नें उसके झूले मे सुला दिया औऱ फिन वोँ लाईटबंद करने केँ लिए गयीँ, तौ बड़े पिताजी नें रोक दिया औऱ बोला कि रोज़ी मे तुम्हारे नंगे जिस्म कों देखकर मज़े लेना चाहता हूं। प्लीज लाइटबंद मतकरो।
मां उनकीबात मानकर वहा सें बैड केँ पासचली आई। फिन बड़े पिताजी नें अपनेबेग सें एक् शराब कि बोतल औऱ सिगरेट निकाली औऱ मम्मी कों कपड़े उतारने कों बोला। तोँ मेरी मम्मी भि बिनाकुछ बोले कपड़े उतारने लगी। पहले साड़ी उसकेबाद ब्लाउज फिन ब्रा औऱ पेंटी। एक् एक् करकेसभी निकाल दिया औऱ पूरी नंगी खड़ी होँ गई, औऱ मे येसभी देखकर हैरान थां औऱ येसभी देखकर बड़े पिताजी केँ मुहं सें पानी निकलआया औऱ वोँ शराब कि बोतल कों पूरापी गये।
फिन उन्होंने मां केँ पासआकर मां कों कसकर पकड़ लिया औऱ मां कों अपनीगोद मे बैठा लिया औऱ मम्मी केँ होंठो कों ज़ोर ज़ोर सें चूमने लगे। फिन उसकेबाद बड़े बापू खड़े होँ गये औऱ अपना कुर्ता औऱ अंडरवियर निकाल कर नंगे हौ गये। उनका लन्ड बड़े डंडे कि तरह लम्बा औऱ भूरेकलर कां थां। तौ ये देखकर मम्मी नें बोला कि भइया साहबये क्याँ हैं ये तोँ पहलेऐसा नहि थां। फिन बड़े बापू नें बोला कि तब तेरी बुर भि छोटी थि। मगरअब वोँ भि तौ बड़ी हौ गई हैं।
मम्मी : इसको तौ आपने हि बड़ा किया हैं क्याँ आप् भूलगये कि केसेरोज रात कों आप् मेरे कमरे मे आकर मुझे चोदते थें।
उसकेबाद बड़े पिताजी नें मम्मी कों बैड पऱ लेटा दिया औऱ मम्मी केँ पूरे चूतड़ कों चूमने लगे।
बड़े पिताजी : क्याँ स्वाद हैं? इसको तोँ आज मे खा जाऊंगा।
मां : ज़रा धीरे-धीरे करिए भइया साहब। अभि तोँ पूरीरात पड़ी हैं आप् जितना चाहेकर लेना.मगर ज़रा धीरे-धीरे।
बड़े पिताजी : आज तोँ मे इस चूतड़ कों चबाचबा कर चटनीबना दूंगा। मगर तुँ ज़ोर ज़ोर सें चिल्लाएगी तभी छोड़ूँगा।
मां : अगर मे जोर सें चिल्लाउंगी तौ गुड्डी उठ जाएगी।
बड़े पिताजी : फिन तौ आज मे तेरी चूतड़ कों कुरेद कुरेद कर खोखला बना दूँगा।
फिनऐसा कहकर बड़े पिताजी नें अपने पूरे दाँत मां केँ चूतड़ पऱ दबादिए औऱ मां ज़ोर सें चिल्ला भि नहि सकती थि क्योंकि उनके चिल्लाने सें गुड्डी कि नींदखुल जाती। तौ मां रो पड़ी औऱ बड़े बापू सें बोलि कि मुझ पर्र दयाकरो भइया साहब मे आपकोहर दिन चोदने कां मौका दूँगी बस आप् काटना बंद कीजिए। तौ मां कि इस आवाज़ सें बड़े बापू जैसे पागल हौ गये औऱ मम्मी केँ चूतड़ कों औऱ ज़ोर सें काटने लगे औऱ बोले कि साली मुझे भइया बुलाया। ये बोलकर एक् ज़ोर सें चाटा मां केँ चूतड़ कों लगाया औऱ बोले कि मे तुम्हारा पति हूं औऱ तूँ मेरी रंडी हैं। चांटा पड़ने केँ बाद मां तोँ जैसे दर्द सें छटपटा उठी आँ एम्म्म उह्ह मां प्लीज़।
मम्मी : हाँ। आप् मेरे पति हैं औऱ मे आपकी रंडी हूं। फिनये बोलकर मम्मी अपने पेशाब कों रोक नहि पाई औऱ सारा पेशाब बड़े पिताजी केँ मुहं पर्र छोड़ दिया। बड़े पिताजी नें भि उसकोमजा सें चूस लिया। फिन जब उन्होंने मम्मी केँ चूतड़ सें मुहंहटा लियातब जाकर मम्मी नें राहत कि सांसली औऱ बोलि कि क्याँ आपको सन्तुष्टि मिली?
बड़े पिताजी : अरे अभि तौ शुरुआत हुआ हूं? आगे तेरी रसीली गांड कों भि चोदना भि हैं। चल अभि उल्टा लेटजा। मम्मी धीरे-धीरे धीरे-धीरे सें लेटरही थि कि तभी बड़े बापू नें मम्मी कि गांड कों एक् ज़ोर सें थप्पड़ लगाया औऱ मां केँ मुहं सें आह्ह्ह मां मर गयीँ, प्लीज़। आवाज़ निकली।
बड़े बापू : तूने सुना नहि रंडी मैंने तुझेही क्याँ कहा?
मां : मुझे क्षमा करना ग़लती हौ गयीँ, जी। मम्मी डरकर बोलि कि आओ औऱ मेरी गांड कों फाड़दो।
फिन बड़े बापूये सुनकर तौ पागल हौ गये औऱ झट सें अपना लन्ड मम्मी कि गांड केँ बीच मे लगा दिया औऱ कुत्ते कि तरह चाटने लगे औऱ हाथ सें मां कि गांड कों थप्पड़ माररहे थें थप्पड़ कि वजह सें मम्मी कि गांड पूरीलाल पड़ गई थि।
मां : बस कीजिए अब मुझसे औऱ प्रतीक्षा नहि होता भइया साहब।
बड़े बापू : गुस्से सें। साली रंडी तूनेफिन मुझे भइया साहबकहा आज तौ तेरी ख़ैर नहि। ऐसा कहकर उन्होंने शराब कि बोतल उठाई औऱ मां कि गांड मे एक् झटके केँ मे हि आधी घुसाडी। मां तौ दर्द केँ मारे पागल होँ गई,।
मां : मुझे क्षमा कर दीजिए मेरे पति आज केँ बादये भूलकभी नहि होगी। आप् हि मेरे पति हैं औऱ आप् जितना चाहे मुझेचोद सकते हैं मे आपकी रंडी हूं।
फिनये सुनकर बड़े पिताजी बहोत खुशहुए औऱ उन्होंने बोतल कों बाहर् निकाल दिया औऱ बोले कि रंडीअब तुम्हें चोदने मे बहोत मजा आएगा.चल अब सीधीलेट जा। मे तेरी बुर कां मजा लूँगा। तौ मम्मी भि सीधी होकरलेट गई, औऱ अपनी बुर कों अपने दोनों हाथों सें फैला दिया औऱ बोलि कि आओ मेरे पतिदेव इसमे आप् जौ चाहोकर सकते हौ।
बड़े पिताजी : रंडीअब आई नां तुँ रास्ते पर्र। अबदेख मे केसे तेरी बुर कों कुत्ते कि तरह चोदता हूं औऱ येसभी सुनकर औऱ देखकर मेरी पेंट पूरी गीली होँ चुकी थि। फिन मैंने देखा कि बड़े पिताजी अपना लन्ड बुर मे घुसा चुके थें औऱ उन्होंने अपनाकाम शुरुआत कर दिया थां औऱ मम्मी भि उनकासंग देरही थि। फिन मां बड़े बापू कों खुश करने केँ लिएबोल रही थि कि मुझे चोदो पति देव आपकेलिए हि ये बुर मैंने सम्भाल कररखी हैं इसमे आपके छोटे भइया कां भि हक़ नहि हैं। तोँ येसभी सुनकर बड़े बापू केँ झटके औऱ तेज होतेजा रहे थें औऱ फिन बड़े पिताजी नें अपना सारारस मम्मी कि बुर मे हि छोड़ दिया औऱ बोला कि बता रंडीअब तेरे क्याँ होगा। बेटा याँ बेटी? मां वीर्य कां खुशी लें रही थि औऱ कुछ नहि बोलीं शराब केँ नशे कि वजह सें बड़े पिताजी मां केँ ऊपर हि सोगये औऱ मां भि सो गई,। मगर मे पूरीरात भरऊपर उन दोनों कों नंगे देखकर मुठ मारता रहा।
फिन सुभह 8 बजे गुड्डी केँ रोने कि आवाज़ सुनकर मम्मी कि नींदखुल गई, औऱ मां समझ गई, कि गुड्डी कों दूध पिलाने कां समय हौ गय़ा हैं इसलिये वोँ बड़े पिताजी कों छोड़कर गुड्डी केँ पास आँ गई औऱ अपने बूब्स सें दूध पिलाने लगी औऱ इसीबीच बड़े पिताजी कि नींदखुल गई औऱ वोँ मां कों देखकर फिन कामुक हौ गये औऱ फिन वोँ मम्मी केँ पासगये औऱ गुड्डी कों वापस झूले मे रखवा दिया.मगर गुड्डी रोरही थि इसीलिए मां नें कहा कि एक् बार गुड्डी कों दूध पिलादूँ फिन आप् जितना चाहेपी लेना। तौ ये सुनकर बड़े पिताजी कों बहोत क्रोध आया औऱ उन्होंने मां केँ दोनों बूब्स कों ज़ोर ज़ोर केँ थप्पड़ लगाए औऱ बोले साली रंडी मुझसे जबान लड़ाती हैं। मे जोँ बोलता हूं वहीकर। फिन बड़े बापू कां क्रोध देखकर मम्मी डर गई औऱ डर केँ मारे बोलि कि मुझसे भूल होँ गई, मेरे पति देवये दोनों बूब्स आपकेलिए हि तोँ हैं इसमे पहले आपका हि अधिकार हैं आओ मेरे बूब्स केँ नीचे औऱ मेरे निप्पल सें सारादूध निचोड़ करपी लीजिए।
फिनये बात सुनकर बड़े बापू नें मम्मी कों अपनीगोद मे उठा लिया औऱ दोनों हाथ सें बूब्स कों मसला औऱ अपने होंठो सें मां केँ बूब्स केँ निप्पल कों चूसा औऱ गुड्डी वहा पऱ भूख सें रोरही थि मां सभीदेख रही थि। मगरडर कि वजह सें कुछबोल नहि पारही थि औऱ बड़े बापू केँ गुस्से कों कम करने केँ लिए वोँ बोलरही थि कि मेरे बूब्स सें सारादूध निकाल दो.इसे चबा चबाकर चुइंगम बनादो। ये मात्र आपकेलिए हि बने हैं। फिनऐसे करते करते बड़े पिताजी नें अपनामन शांतकर लिया औऱ मम्मी कों गोद सें उतार दिया।
मां : आपको अच्छा लगाअगर औऱ चाहिए तोँ कहो।
बड़े बापू : नहि बसपेट भर गय़ा।
मम्मी : ठीक हैं.
फिनये बोलकर मां कपड़े पहनने लगी औऱ मे भि रूम मे आकर सोने कि एक्टिंग करनेलगा। फिन मां रूम मे आई औऱ हम् दोनों कों जगाया। दोस्तों ऐसा लगभग एक् महीने तक चलतारहा औऱ बड़े पिताजी रोजदाल, चावल केँ पानी मे भांग मिला देते औऱ रोजरात कों मां कों चोदते थें।
Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - Desi sex story – New Episode
रैगिंग केँ बहाने बेहनबनी रंडी
हैल्लो फ्रेंड्स। मेरानाम नितिन हैं औऱ मेरी उम्र 23 साल हैं। मे मुंबई कां रहने वाला हूं औऱ ये मेरी पहली किस्सा हैं औऱ मे उम्मीद करता हूं कि ये किस्सा आप् सब कों बहोत पसन्द आएगी।
ये कहानी मेरी बेहन कि चुदाई केँ बारे मे हैं जिसको रैगिंग केँ बहाने उसके कॉलेज केँ कुछ सीनियर स्टूडेंट नें अपनी रंडीबना लिया। दोस्तों पहले मे आप् सब कों अपनी बेहन केँ बारे मे बतादूँ। उसकानाम संजना हैं औऱ उसकी उम्र 23 साल हैं। उसका फिगर 36-30-38 हैं। ये किस्सा एक् साल पहले कि हैं। जब मेरी बेहन नें MBA कॉलेज मे नया एडमिशन लिया थां औऱ उसका कॉलेज कां वोँ पहलादिन थां। उसदिन उसने काली शर्ट सफेद स्कर्ट पहनी थि औऱ अंदर एक् लालकलर कि टी-शर्ट पहनी थि। सफेदकलर कि पेंटी औऱ लालकलर कि ब्रा पहनी थि। उसका स्कर्ट उसके घुटनों केँ थोडा सां ऊपर थां औऱ वोँ क्याँ गजब कि लगरही थि।
जैसा कि मैंने पहले बताया कि वोँ उसका कॉलेज कां पहलादिन थां औऱ वहा पऱ थोड़ी बहोत रैगिंग होती हैं औऱ फिनकुछ कॉलेज केँ सीनियर लड़के औऱ लड़कियों नें संजना औऱ उसकी फ्रेंड्स कों पकड़ लिया औऱ उनकानाम पूछा औऱ जाने कों कहा कॉलेज कां पहलादिन होने कि वजह सें उसदिन वहा पर्र एक् हि लेक्चर हुआ औऱ जब मेरी बेहन औऱ उसकी फ्रेंड जानेलगी तबदो सीनियर लड़कियाँ मेरी बेहन केँ पासआई औऱ उसको उनकेसंग चलने कों कहा। मेरी बेहन उनकेसंग चली गई,। फिन वोँ मेरी बेहन कों कॉलेज कि पीछे एक् पुरानी बिल्डिंग हैं वहा पऱ लेकरगये औऱ वहा पर्र जाने केँ बाद मेरी बेहन नें उनसे पूछा कि अपने मुझेयहा पर्र क्यूं बुलाया हैं? तौ उन्होने कहा कि तुम् नये स्टूडेंट होँ तोँ यहा पर्र सब कि रैगिंग होती हैं औऱ हम् आजयहा पर्र तुम्हारी रैगिंग करने वाले हैं। तभीवहा पऱ 4 लड़के आए औऱ वोँ वही कॉलेज केँ सीनियर लड़के थें जिन्होंने सुभह मेरी बेहन सें उसकानाम पूछा थां।
तोँ मेरी बेहन उनको देखकर डर गयीँ, औऱ कहनेलगी कि प्लीज़ मुझे जानेदो। तबउन लड़को नें कहा कि तुम् नई स्टूडेंट हौ तौ थोड़ी रैगिंग बनती हैं। तुम् बस हम् जोँ पूछेंगे उसका जवाबदो औऱ यहा सें चली जानां। तोँ मेरी बेहन नें थोडा सोचा औऱ कहा कि ठीक हैं आप् पूछो। फिन उन्होंने पहले तोँ कुछ नॉर्मल प्रश्न पूछे औऱ बाद मे एक् लड़के नें उसको पूछा कि तेरा फिगर क्याँ हैं? तौ मेरी बेहन बहोत चकित हुई औऱ उसने गुस्से सें पूछा क्याँ? तौ वोँ लड़का कहनेलगा कि बताओ नहि तौ तुम्हे यहा पऱ नंगा करके हम् हि नाप लेंगे। फिन मेरी बेहन नें उसका फिगर बताया कि तभी एक् लड़का बोला कि क्याँ मस्त फिगर हैं तेरा।
फिन दूसरे लड़के नें पूछा कि तूनेकौन सि कलर कि ब्रा औऱ पेंटी पहनी हैं? तोँ मेरी बेहन नें डरतेहुए कहा कि लालकलर कि ब्रा औऱ सफेदकलर कि पेंटी पहनी हुईँ हैं। तब तीसरा लड़का बोला कि झूठमत बोल। तौ मेरी बेहन बोलि कि मे सचकहरही हूं। फिन वोँ बोला कि मुझे तेरी बातों पऱ विश्वास नहि हैं औऱ तब एक् लड़की बोलि कि टी-शर्ट ऊपर करकेबता नां। क्यूं वक़्त खराबकर रही हैं? तोँ मेरी बेहन नें गुस्से सें उसको देखा। तभी वोँ दोनों लडकियाँ मेरी बेहन केँ पास गई, औऱ एक् लड़की नें मेरी बेहन केँ पीछे सें हाथ पकड़लिए औऱ दूसरी लड़की नें उसकी टीशर्ट ऊपरकर दि औऱ सभी लड़के मेरी बेहन केँ बूब्स कों देखते हि रहगये। क्याँ बड़े बूब्स हैं सबके मुहं सें लार टपकने लगी।
फिन एक् लड़का बोला कि अरे इसकी पेंटी कां कलर तौ दिखा। तभी उस लड़की नें मेरी बेहन कि स्कर्ट एक् झटके मे नीचेकर दि। मेरी बेहन कि स्कर्ट केँ संग उसकी पेंटी भि निकल गई, औऱ उसकी स्कर्ट औऱ पेंटी दोनों जमीन पर्र पैरों केँ पासगिर गयीँ, औऱ मेरी बेहन नें आज हि सुभह अपनी बुर कों शेव किया थां। मेरी बेहन कि चिकनी गुलाबी बुर मस्तलग रही थि औऱ वहा पऱ सब मौजूद लड़के मेरी बेहन कि बुर कों देखकर अपना लन्ड मसलने लगे।
तभी मेरी बेहन रोनेलगी औऱ कहनेलगी कि प्लीज़ मुझे छोड़दो जानेदो मुझे। फिन जिसने मेरी बेहन कों पकड़कर रखा थां वोँ बोलि कि चुपरह जा नहि तोँ तेरी यहीं पऱ नंगा करके हम् तेरे कपड़े लेकरचले जाएँगे। तोँ चारों लड़को नें उस लड़की कों कहा कि इसे छोड़दे। फिन एक् लड़का मेरी बेहन केँ पासआया औऱ कहा कि देख जौ हम् कहेंगे वैसेकर वरनाऐसे हि नंगी तेरीरोड पर्र छोड़ जाएँगे। तौ मेरी बेहनचुप हौ गई, औऱ फिनउन लड़को नें मेरी बेहन कों कहा कि चलअब पूरी नंगी होँ जा। तौ मेरी बेहन नें चुपचाप अपनी टी-शर्ट औऱ ब्रा निकाल दिया औऱ पूरी नंगी हौ गयीँ, औऱ सभी लड़के मेरी बेहन केँ जवान जिस्म कों एक् भूखे कुत्ते कि तरहदेख रहे थें। फिन उन्होंने मेरी बेहन कों पैदल चलकर दिखने कों कहा। फिन मेरी बेहन कि हिलती हुए गांड कों देखकर उनसब लड़को केँ लन्ड एकदम खड़े हौ गये औऱ सभी लड़के मेरी बेहन केँ पासगये औऱ नजदीक सें मेरी बेहन कों देखने लगे औऱ सब लड़के अपनी अपनी अंडरवियर मे आँ गये औऱ मेरी बेहन कों चारोतरफ सें घेर लिया।
फिन उन्होंने मेरी बेहन कों कहा कि चल रंडीअब एक् एक् करके सबके लन्ड चूस। तोँ मेरी बेहन नें कहा कि प्लीज ऐसेमत करने कों बोलो मैंने येसभी कभी नहि किया हैं। तब वोँ दोनों लड़कीवहा पऱ आई औऱ मेरी बेहन कों घुटने केँ बल बैठाया औऱ मेरी बेहन केँ मुहं कों एक् लड़के केँ लन्ड केँ पास लेँ गयीँ, औऱ कहनेलगी कि चलचूस लें। फिन जैसे हि मेरी बेहन नें उस लड़के कां अंडरवियर अपने मुहं सें निकाला वैसे हि उसके लम्बा, काला लन्ड देखकर वोँ चकितरह गई, औऱ थोड़ी देर तक मेरी बेहन लन्ड कों देखती हि रह गई,। तौ सबलोग हंसने लगे औऱ बोले कि क्यूं मनपसंद आया क्याँ इसका लन्ड जौ इतने प्रेम सें देखरही रही?चल रंडीअब लन्ड चूस लन्ड।
मेरी बेहन उसके लन्ड कों पहले अपनीजीभ सें चाटने लगी औऱ बड़े प्रेम सें चूसने लगी। तभी वोँ दोनों लड़कियां बोलि कि देख तौ क्याँ मस्त लन्ड चूसरही हैं एकदम अनुभवी दिखरही हैं। तभी एक् लड़का बोला कि एकदम रंडी कि तरह लन्ड चूसरही हैं औऱ एक् करके मेरी बेहन नें सारे लड़को केँ लन्ड चूसलिए औऱ सब लड़को नें एक् एक् करके मेरी बेहन केँ मुहं मे अपना अपना पानी छोड़ दिया।
फिन उन्होंने मेरी बेहन कों लेटा दिया औऱ उन दोनों लड़कियों नें मेरी बेहन कों पकड़कर उसकी टाँगे फैला दि। फिन मेरी बेहन नें जिस लड़के कां लन्ड सबसे पहले चूसा थां। वोँ मेरी बेहन केँ पैरो केँ बीच मे लेट गय़ा औऱ उसने अपना लन्ड मेरी बेहन कि बुर केँ ऊपररख दिया औऱ ज़ोर सें एक् धक्का दिया औऱ उसकाआधा लन्ड मेरी बेहन कि बुर मे घुस गय़ा औऱ मेरी बेहन ज़ोर ज़ोर सें चिल्ला उठी औऱ वोँ लड़का उसकोजोर जोर सें चोदने लगा। मेरी बेहन आँ आहा आअहहआउच प्लीज़ धीरे-धीरे चोद मुझे आहह-आहह कररही थि। फिन जैसे जैसे वोँ ज़ोर ज़ोर सें अपना लन्ड मेरी बेहन कि बुर सें अंदर बाहर् कररहा थां। वैसे हि मेरी बेहन औऱ ज़ोर ज़ोर सें चिल्ला रही थि। वोँ लड़का मेरी बेहन कों 20 मिनट तक चोदरहा थां औऱ फिन उसने अपना वीर्य मेरी बेहन कि बुर मे छोड़ दिया। फिन दूसरे लड़के नें मेरी बेहन कों कुतिया कि तरह होने कों कहा।
फिन वोँ पीछे सें मेरी बेहन कि बुर कों चोदने लगा औऱ मेरी बेहन केँ बूब्स कों दबाने लगा वोँ भि बहोत ज़ोर ज़ोर सें चोदरहा थां औऱ उसकी निप्पल कों भि खींचरहा थां। उसने भि मेरी बेहन कों 15 मिनट तक चोदा। फिन एक् लड़का नीचेलेट गय़ा औऱ मेरी बेहन कों उसके लन्ड पऱ बैठाया औऱ दूसरा लड़का पीछे सें मेरी बेहन कि गांड मे अपना लन्ड डालने लगा। तभी मेरी बेहन बोलि कि गांड मे मत डालना मैंने कभीवहा पर्र नहि किया हैं। येबात सुनकर सबलोग हैरान रहेगये औऱ फिन एक् लड़की नें पूछा कि क्यूं री रांड तूने इससे पहले किससे चुदवाया हैं? तोँ मेरी बेहन बोलीं किसी सें नहि। तोँ सबलोग बोले कि सचबोल? फिन मेरी बेहन बोलि कि मे बिल्कुल सचबोल रही हूं। मैंने कभी किसी सें नहि चुदवाया हैं।
तभीउस लड़के नें मेरी बेहन कि गांड फैलाई औऱ अपना लन्ड ज़ोर सें मेरी बेहन कि गांड मे घुसा दिया। उसने इतने ज़ोर सें धक्का दिया कि मेरी बेहन कि गांड मे उसका पूरा कां पूरा लन्ड एक् बार मे हि घुस गय़ा। फिन मेरी बेहन ज़ोर सें चिल्ला उठी औऱ वोँ लड़का ज़ोर ज़ोर सें उसकी गांड मारने लगा। फिन बोला कि सचबोल किसके संग चुदवाया हैं? नहि तौ एक् औऱ लन्ड तेरी गांड मे घुसाने कों कहूँगा। तौ मेरी बेहन बोलि कि मुझे कॉंप्लेक्स केँ अंकल नें कईबार चोदा हैं। तौ येबात सुनकर सभी कहनेलगे कि ये तौ पक्की रंडी हैं औऱ सबलोग हंसने लगे।
वोँ दो लड़के मेरी बेहन कों 40 मिनट तक चोदते रहे औऱ मेरी बेहन कि चुदाई वोँ दो लड़कियाँ रिकॉर्ड कररही थि। फिन मेरी बेहन अपनी चुदाई मे इतनी मस्त होँ गई, थि कि उसकोपता भि नहि चला कि उसकी चुदाई कि रिकॉर्डिंग होँ रही हैं। फिन थोड़ी देर आराम करने केँ बाद चारो लड़के औऱ वोँ लड़कियां मेरी बेहन केँ जिस्म सें खेलने लगे उसकी बुर औऱ गांड कों चाटने लगे। मेरी बेहन नें भि उनदो लड़कियों कि बुर औऱ गांड चाटी औऱ फिन मेरी बेहन भि उन लड़कों सें बहोत बार मस्त होकर चुदी।
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