𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) – New Episode
Chapter 14
अब वोँ फिन सें मालिश करनेलगा। लन्ड कां सुपाड़ा ऐसे हि मोटी गाँड केँ छेद मे हि टिकाहुआ थां। उसने थोडा सां औऱ तेल खुली हुई रसीली गाँड मे टपकाया औऱ लन्ड केँ सुपाड़े कों अंदर-बाहर् करनेलगा। अब उसका लन्ड औऱ मेरी मोटी गाँड, बहोत हि चिकने होँ चुके थें औऱ सुपाड़ा आसानी सें अंदर-बाहर् होँ रहा थां। एस-केँ अब मेरेऊपर फिन सें झुककर लगभगलेट गय़ा औऱ मेरे कंधों कों ऐसे पकड़ लिया कि उसके दोनों हाथ मेरी दोनों चूचियों केँ बीच मे थें, जिससे मुझे बहोत मजा आँ रहा थां। उसने आरामसे अपनी मोटी गाँड उठा-उठा कर लन्ड केँ सुपाड़े कों मेरी भारी गाँड केँ अंदर-बाहर् अंदर-बाहर् करना शुरुआत कर दिया। दोनों केँ बदन चिकने होने सें फिसलरहे थें। तकिया मेरी मोटी गाँड केँ नीचे होने सें रसीली गाँड ऊपरउठ गयीँ, थि औऱ लन्ड कों अंदरआने कि दावतदे रही थि। एस-केँ नें सुपाड़ा अंदर-बाहर् करते-करते एक् जम केँ झटका दिया तोँ लन्ड तकरीबन आधा भारी गाँड केँ अंदरघुस गय़ा औऱ मेरे मुँह सें एक् चींख निकल गयीँ, “अरे। मे मर गयीईईईईईई। निकाल लोइसे आआआआहहहह। “ वोँ थोड़ी देरऐसे हि आधा लन्ड अंदर घुसेड़ कर मेरेऊपर लेटारहा। मेरीगोल गाँड एस-केँ केँ लन्ड सें कुछ एडजस्ट हुई तौ फिन एस-केँ थोडा सां ऊपरउठ गय़ा औऱ फिन सें अपने लन्ड पे, जौ आधा मेरीगोल गाँड केँ अंदर घुसाहुआ थां, उसके डंडे पे तेल उढ़ेलने लगा औऱ लन्ड कों अंदर बाहर् करनेलगा। तेल उढ़ेलने सें लन्ड कां डंडा औऱ स्लिपरी हौ चुका थां औऱ भारी गाँड कां सुराख भि स्लिपरी हौ गय़ा थां।
एस-केँ नें कहा, “किरनअब तुम् थोडा सां ऊपरउठ कर अपने नीचे सें तकिया निकललो। अब उसकी ज़रूरत नहि हैं। ऐसे हि नीचे रहेगा तोँ तुम्हें औऱ दर्द होगा। “ मे थोडा सां उठी औऱ एस-केँ नें मेरे नीचे सें तकिया निकाल लिया। एस-केँ नें कहा, “किरनअब तुम् अपनी भारी गाँड कों थोडा सां ऊपरउठा लो” तोँ मैंने अपने चूतड़ों कों थोडा ऊपरउठा लिया। अब मे बेड पे उलटी लेटी थि औऱ मेरी भारी गाँड थोड़ी सि ऊपरउठी हुईँ थि औऱ एस-केँ कां मूसल लन्ड गोल गाँड मे आधा अंदर घुसाहुआ थां। एस-केँ नें फिन सें अपनेहाथ मेरे शरीर केँ नीचे सें डाल केँ कंधों कों पकड़ लिया औऱ उसकेहाथ मेरी चूचियों सें लगनेलगे। दोनों हाथ दोनों चूचियों केँ बीच मे थें। दोनों थोड़ी देर तक ऐसे हि चिपके हुए लेटेरहे। अब मेरीगोल गाँड उसके लन्ड सें पूरीतरह एडजस्ट होँ चुकी थि औऱ मेरीगोल गाँड अपने आप् हि थोड़ी सि उठ गयीँ, औऱ गोल गाँड केँ सुराख केँ मसल थोड़े रिलैक्स हुए तोँ एस-केँ नें समझ लिया कि अब मे अच्छी तरह सें रसीली गाँड मरवाने केँ लिये तैयार हूं। उसने अपने लन्ड कों आधा हि अंदर-बाहर् अंदर-बाहर् करके मेरी मोटी गाँड मारनी शुरुआत कर दि। अब मुझे भि अच्छा लगनेलगा औऱ मे मज़े लेनेलगी। लन्ड औऱ रसीली गाँड दोनों बहोत हि चिकने औऱ स्लिपरी होँ चुके थें। मेरी साँसें अबठीक सें चलनेलगी थि। एस-केँ ऐसे हि गोल गाँड केँ अंदरआधा लन्ड घुसा केँ धक्के मारता रहा औऱ फिन मेरे कंधों कों ज़ोर सें पकड़कर इतनी ज़ोर सें झटका मारा कि मे चिल्ला पड़ी, “ऊऊऊईईईई अल्लाहहह.आआआआ मर गई,.ईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ निकाल लो!!” पर्र अब उसका लन्ड पूराजड़ तक मेरी रसीली गाँड मे घुस चुका थां औऱ मुझे उसका लन्ड मोटी गाँड फाड़कर पेट मे सें घुसकर मुँह सें बाहर् तक निकलता हुआ महसूस होनेलगा। दर्द सें मेरी आँखें बाहर् निकल गयीँ, औऱ साँसें रुक गयीं औऱ मेरे सामने अंधेरा छानेलगा। शायद मे फिन सें बेहोश हौ गई, थि।
एस-केँ मेरी रसीली गाँड मे अपना रॉकेट जैसा लन्ड घुसेड़ कर थोड़ी देरऐसे हि मेरेऊपर लेटारहा। कुछ हि देर केँ बाद मेरी मोटी गाँड अब पूरीतरह सें तैयार हौ गयीँ, थि औऱ अब रसीली गाँड मे लन्ड अच्छा लगरहा थां तोँ एस-केँ नें पीछेबेड सें पेर टिकाकर उछल-उछल केँ मेरी मोटी गाँड मारनी शुरुआत कर दि। कभीआधा लन्ड बाहर् तक खींच लेता तौ कभी सुपाड़े तक बाहर् निकाल कर ज़ोर कां झटका मारता तोँ मेरीजान हि निकल जाती औऱ अंदर कि साँस अंदर औऱ बाहर् कि बाहर् रह जाती। थोड़ी देर तक तोँ तकलीफ होतीरही मगर थोड़ी हि देर मे मुझे रसीली गाँड मरवाने मे बहोत हि मजाआने लगा औऱ मे अपनी मोटी गाँड सें लन्ड कों पीछे सें धक्के मारने लगी। तेल लगा होने सें फच-फचक-फचक कि आवाज़ें आँ रही थि औऱ एस-केँ कां मूसल जैसा लन्ड मेरी रसीली गाँड मे घुसाहुआ थां। वोँ ज़ोर-ज़ोर सें खचाखच मेरी भारी गाँड माररहा थां औऱ मे मज़े सें मरवारही थि। मे अपनी भारी गाँड पीछे धकेलकर उसका मोटा लन्ड अपनीगोल गाँड मे लेँ रही थि। बहोत मजाआने लगा थां औऱ उसी टाइम मेराबदन काँपने लगा औऱ मेरी बुर मे सें जूस निकलने लगा। मेरा ऑर्गेज़म चलतारहा औऱ मे बे-दम हौ करबेड पे गिर गयीँ,। एस-केँ अपनी मोटी गाँड उठा-उठा कर लन्ड कों पूरा सुपाड़े तक बाहर् निकाल-निकाल केँ मेरी मोटी गाँड माररहा थां। उसकी स्पीड बढ़ गई, औऱ वोँ दीवानों कि तरह सें मेरी मोटी गाँड केँ अंदर अपना मूसल लन्ड घुसेड़ रहा थां औऱ तेज़ी सें मेरीगोल गाँड माररहा थां। फिन उसने एक् बहोत हि ज़ोरदार झटका मारा तौ मेरे मुँह सें फिन सें चींख निकल गई, “आंआंआंआंआं मर गई,.ईईईई” औऱ फिन जल्दी हि उसके लन्ड सें मलाई कि पिचकारियाँ मेरीफटी हुईँ भारी गाँड मे निकलकर गिरने लगी। पहली पिचकारी केँ संग हि मेरी बुर सें जूस निकलने लगा औऱ मे भि झड़ने लगी। एस-केँ केँ लन्ड मे सें मलाई निकलती गई, औऱ मुझे लगनेलगा जैसे उसकी मलाई सें मेरी मोटी गाँड औऱ मेरापेट दोनों भर जायेंगे। अभि उसका लन्ड मेरी भारी गाँड केँ अंदर हि घुसाहुआ थां औऱ वोँ मेरे शरीर पे गिर गय़ा। हम् दोनों गहरी गहरी साँसें लेँ रहे थें। थोड़ी हि देर केँ बादजब हमारी साँसें ठीक हुई तोँ एस-केँ मेरेऊपर सें मेरी साईड मे लुढ़क गय़ा औऱ उसका लन्ड मेरी भारी गाँड मे सें निकलते हि मेरी मोटी गाँड मे सें उसकीमनि बाहर् निकलने लगी औऱ मेरी बुर कि दरार मे सें होता हुईँ नीचेबेड शीट पर्र गिरने लगी।
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Chapter 15
मे भि अब सीधी हौ करलेट गई, औऱ करवट लेकर एस-केँ कों प्रेम करनेलगी। दोनों करवट सें लेटे थें, एक् दूसरे कि तरफ़ मुँह करके। फिन हम् दोनों एक् दूसरे सें लिपट केँ गहरी नींदसो गये। सुभहउठी थो बुर औऱ भारी गाँड मे मीठा-मीठा दर्द होँ रहा थां। हम् दोनों नें संग हि शॉवर लिया औऱ दोनों एक् दूसरे कों साबुन लगाकर नहलाने लगे। एस-केँ नें मेरी बुर औऱ भारी गाँड मे साबुन लगाया औऱ मैंने एस-केँ केँ लन्ड पे साबुन लगायी औऱ धोनेलगी। एस-केँ केँ लन्ड पे हाथ लगते हि उसका लन्ड एक् बारफिन सें खड़ा हौ गय़ा औऱ मेरे नंगे शरीर कों औऱ मेरी चिकनी मक्खन जैसी बुर कों सेलयूट करनेलगा जैसे हाथी अपनी सूँड सें सेलयूट करता हैं। मैंने हँसकर कहा, “वॉव एस-केँ। यह तोँ फिन सें अकड़ने लगा.” तोँ उसनेकहा, “किरन तुम्हारी मक्खन जैसी चिकनी औऱ प्यारी बुर शायद मेरे लन्ड कों पसन्द आँ गयीँ, हैं औऱ फिन सें यहउस मे घुसना चाहता हैं। “ मे हँसने लगी औऱ बोलीं कि “एस-केँ, मे तुम्हारे लिये औऱ तुम्हारे इतने शानदार लन्ड केँ लिये हमेशा हि तैयार हूं। “ फिन शॉवर केँ अंदर हि एस-केँ नें मुझे अपनी गोदी मे उठा लिया औऱ दीवार सें टिकाकर मेरी बुर मे लन्ड एक् हि झटके मे पेल दिया औऱ चोदने लगा। मेरीबैक, दीवार सें टिकी हुइ थि औऱ पांव एस-केँ कि बैक पे लिपटे हुए थें औऱ मे अपनेहाथ एस-केँ कि गर्दन मे डालकर उसके शरीर सें झूलरही थि औऱ उसका लन्ड मेरी बुर मे तूफान मचारहा थां। वोँ गचागच चोदरहा थां औऱ उसका लन्ड बुर केँ अंदरऐसे जारहा थां जैसे हथोड़े सें दीवार मे सुराख कररहा हौ। मुझेलग रहा थां कि मेरी बुर औऱ गोल गाँड फाड़कर उसका लन्ड दीवार मे घुस जायेगा। उसके एक्-एक् झटके सें मेरी चूचियाँ डाँस करनेलगी। एस-केँ केँ हाथ मेरे चूतड़ों पे थें औऱ मेरीबैक दीवार सें टिकी थि। वोँ इसीतरह चोदता रहा औऱ मे दोबार झड़ चुकी थि। अब मुझेलगा कि एस-केँ भि झड़ने वाला हैं तोँ मैंने उसकोकस कर पकड़ लिया। एस-केँ केँ झटके बहोत हि तेज़ होँ गये औऱ मेरी ज़बरदस्त चुदाई होनेलगी औऱ फिन उसने एक् इतनी ज़ोर सें झटका मारा कि मेरी चींख निकल गयीँ,, “ऊऊऊऊईईईईईई ईईईईईईई”, औऱ मेरा मुँह खुला कां खुलारह गय़ा औऱ मैंने महसूस किया कि एस-केँ कां लन्ड मेरी बुर मे फूलरहा हैं औऱ उसके लन्ड सें गर्म-गर्म मलाई कि पिचकारियाँ निकलरही हें औऱ मे फिन सें झड़ने लगी। चुदाई होने केँ बाद उसने मुझे नीचे उतारा औऱ हम् नें फिन सें शॉवर लिया।
बाथरूम सें बाहर् निकलकर मैंने फिन सें हाई-हील केँ सैंडल पहने औऱ फिनजब कपड़े पहनने लगी तौ एस-केँ नें कहा, “नहि किरन। मे औऱ तुम् जितनी देरघऱ मे अकेले रहेंगे, तुम् औऱ मे कोई कपड़ा नहि पहनेंगे औऱ हम् दोनों नंगे हि रहेंगे। तुम् मात्र यह सैक्सी सैंडल पहनेरहो.” तौ मैंने मुस्कुराते हुएकहा, “ओक एस-केँ। मे तोँ तुम्हारी गुलाम होँ गई, हूं। तुम् जैसा कहोगे, मे वैसा हि करुँगी। “ फिन मैंने केवल सैंडल पहने, नंगी हि रसोई मे गयीँ, औऱ नाश्ता बनाया औऱ हम् दोनों नें नंगे हि डायनिंग टेबल पे बिठकर खाया। वोँ शनिवार कां दिन थां तौ एस-केँ नें दफ़्तर मोबाइल कर दिया कि वोँ किसी औऱ स्थान काम सें जारहा हैं औऱ दफ़्तर नहि अयेगा औऱ फिन अपनी सेक्रेटरी कों कुछ इंस्ट्रक्शन दे दिये औऱ साराकाम समझा दिया। शनिवार औऱ इतवार कों मेरीजम कर चुदाई हुईँ। अब मे अशफाक कों भूल चुकी थि औऱ मुझे अशफाक कि याद भि नहि आँ रही थि। मे तौ यहसोच रही थि कि एस-केँ हि मेरा शौहर हैं औऱ मे उसकी पत्नि।
मंडे कों एस-केँ कों दफ़्तर जानां थां तौ मैंने फिन उससे लिपटकर कहा कि “मे केसे रहुँगी तुम्हारे बिना” तौ एस-केँ मुझे सें लिपट गय़ा औऱ किस करनेलगा औऱ कहा कि “मे कहीं नहि जारहा हूं। साम कों फिन आँ जाऊँगा औऱ मैंने तुम् सें प्रामिस भि तोँ कियाहुआ हैं कि मे अशफाक केँ आने तक तुम्हारे संग हि रहुँगा औऱ फिनआज अपनी वाइफ कों एक् वीक केँ लिये उसके मायके जाने केँ लियेकह दुँगा औऱ बता दुँगा कि मे किसीकाम सें मुंबई जारहा हूं औऱ एक् वीक केँ बाद आऊँगा। “ एस-केँ नें कहा, “किरन। कहीं अशफाक कों हमारे रिलेसन केँ बारे मे पताचल गय़ा तौ मुश्किल होँ जायेगी। “ मैंने कहा, “एस-केँ तुम् अशफाक कि फिक्र नां करो.आई एम श्योर कि अगर उसको मालूम भि होँ गय़ा तौ वोँ कुछ नहि कहेगा क्योंकि उसको स्वयं हि पता हैं कि वोँ मुझे मुतमाइन नहि करपारहा हैं औऱ उसके लौड़े मे अबदम नहि हैं औऱ यह कि वोँ मुझेजब भि चोदने कि कोशिश करता हैं औऱ मुझे गर्म करके मेरी बुर केँ ऊपर हि अपनामाल गिरा देता हैं तोँ उसकी नज़रें स्वयं हि नीचे होँ जाती हें औऱ उसकोपता हैं कि मे उससे मुतमाइन नहि हूं। इसलिये तुम् उसकी बिल्कुल भि फिक्र नाँ करो औऱ वोँ तुम्हारा अच्छा मित्र भि हैं औऱ हमेशा तुम्हारी तारीफ हि किया करता हैं कि तुम् बहोत अच्छे इंसान हौ औऱ हमेशा दूसरों कि सहायता करते रहते होँ। “ एस-केँ हँसने लगा औऱ कहा कि, “हाँ मे तुम्हारी सहायता हि तौ कररहा हूं”, औऱ फिन हम् दोनों मिल केँ हँसने लगे।
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Chapter 16
इसीतरह सें पूरा एक् वीक, एस-केँ मेरेसंग हि रहा। हम् रात-दिन अलग-अलग स्टाईल मे चुदाई करतेरहे औऱ मस्ती मे टाईम गुजरता रहा। उस पूरेवीक मे मे मात्र हाई-हील केँ सैंडल हि पहने, बिल्कुल नंगीरही। एक् वीक केँ बाद अशफाक वापस आँ गये तौ उन्होंने पूछा कि मेराकाम केसेचल रहा हैं तौ मैंने कह कि, “हाँठीक हि चलरहा हैं। एस-केँ यहा हि आँ कर मुझेसभी कुछ सिखा देते हें। “ अशफाक नें आँखमार करकहा कि “कुछ हमें भि तोँ बताओ कि अब तक क्याँ क्याँ सिखा दिया हैं हमारी प्यारी सि किरनजान कों.” तोँ मेरे मुँह पे स्वयं-ब-स्वयं शरम आँ गयीँ, औऱ अशफाक मुझेगौर सें देखने लगा औऱ कहा कि, “किरन! एस-केँ मेरा सबसे प्यारा यार हैं। देख्ना कि उसकोकोई तकलीफ नां हौ औऱ जब वोँ घऱ पे हि आता हैं काम सिखाने केँ लिये तोँ उसका पूरा खयाल भि रखाकरो। “ मैंने मुस्कुरा करसर हिला दिया औऱ कहा कि “ठीक हैं, मे एस-केँ केँ पूरा खयाल रखुँगी, तुम् फिक्र नां करो। “ऐसी हि दो मतलब कि बातें हुई जिससे मुझे एक् आयडिया तौ होँ गय़ा कि अगर एस-केँ मुझेचोद भि दे तोँ अशफाक कोई फ़ील नहि करेगा औऱ मुझे ख़याल आया केँ शायद अशफाक चाहता भि यही हौ केँ एस-केँ मुझे चोदे औऱ मुझे मुतमाइन करे। खैर यह मेरा औऱ एस-केँ कि चुदाई कां सिलसिला चलतारहा। अब तोँ जैसे एस-केँ हि मेरा शौहर थां। वोँ हि मुझे चोदता थां औऱ मे उसके चोदने सें बिल्कुल मुतमाइन थि।
एक् टाईम हमने एस-केँ कों डिनर पे बुलाया। हम् तीनों नें खानां खाया। डिनर केँ बाद सोफ़े पे बैठे व्हिस्की पीरहे थें तोँ अशफाक नें एस-केँ सें कहा कि “एस-केँ! किरन तुम्हारी बहोत तारीफ करती हैं कि तुम् उसकोकाम अच्छी तरह सें समझारहे होँ औऱ उसकी पूरी सहायता कररहे हौ। “ मैंने देखा कि एस-केँ केँ चेहरे पे एक् रंग आँ केँ चला गय़ा। उसने समझा कि शायद अशफाक कों उसके औऱ मेरे रिश्ते कां किसीतरह सें पताचल गय़ा पऱ एस-केँ नें कुछकहा नहि तौ मैंने हि कहा कि “हाँ अशफाक! एस-केँ बहोत हि अच्छी तरह सें मुझेकाम समझारहे हें, तुम् फिक्र नाँ करो औऱ मे उनका पूरा खयाल भि रखरही हूं जैसा तुम् नें कहा थां। “ मैंने देखा कि अशफाक केँ चेहरे पे इतमिनान दिखने लगा औऱ फिन एस-केँ नें भि कहा कि “दोस्त अशफाक! किरन एक् बहोत हि अच्छी लड़की हैं उसनेकाम बहोत हि जल्दसीख लिया औऱ अच्छी तरह सें कर भि रही हैं औऱ हाँ वोँ मेरा अच्छी तरह सें खयाल भि रखती हैं। “ फिन अशफाक नें कहा, “देखो किरन! एस-केँ कि खिदमत मे किसी किस्म कि कमी नाँ रह जाये”, तौ फिन मैंने कहा कि “हाँ, तुम् फिक्र नाँ करो मे सभीदेख लूँगी। “ अशफाक कि बातों सें ऐसे अंदाज़ा होता थां कि हमारे बारे मे वोँ कुछसमझ गय़ा थां याँ हमेंआपस मे चुदाई कां सुझाव देरहा थां। हमारी कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां। खैर हमने सोचा कि अगरअब अशफाक कों पता भि चल जाये तोँ कोईबात नहि। जबऐसी कोईबात आयेगी तोँ देखा जायेगा।
व्हिस्की पीते-पीते हम् ऐसे हि बैठे बातें कररहे थें तौ एस-केँ नें कहा कि कुछ महीनों बाद उसकोदो हफतों केँ लिये न्यू-यॉर्क जानां पड़रहा हैं। एस-केँ नें मज़ाक मे कहा कि “दोस्त अशफाक! अगर तुम् इजाज़त दो तोँ मे किरन कों भि न्यू-यॉर्क कि सैरकरा लाऊँ” तोँ अशफाक नें कहा, “अरे इसमें पूछने कि क्याँ बात हैं। यह तौ बड़ी अच्छी बात हैं। लें जाओ। वोँ यहा अकेले मे बोर होती रहती हैं औऱ मेराकोई ठिकाना भि तोँ नहि हैं। कभी भि मुझे बिज़नेस केँ सिलसिले मे बिना प्रोग्राम केँ हि कहीं भि चले जानां पड़ता हैं” तौ एस-केँ नें कहा, “नहि दोस्त! मे तोँ मज़ाक कररहा थां तुम् तौ सीरियस हौ गये। “ अशफाक नें कहा, “अरे नहि दोस्त! मे सच मे संजीदा हूं। अगर तुम्हें कोई प्रॉबलम नां होँ। आईमीन कि कोई बिज़नेस कि प्रॉबलम.” तोँ एस-केँ नें कहा, “नहि दोस्त! मुझे किया प्रॉबलम होँ सकती हैं। “ अशफाक नें कहा, “तौ फिन क्याँ प्रॉबलम हैं लें जाओ किरन कों अपनेसंग दोस्त। मे कहरहा हूं नां। “ अशफाक औऱ एस-केँ ऐसे हि बातें कररहे थें औऱ मे कभी अशफाक कि सूरत देखती तोँ कभी एस-केँ कि औऱ समझने कि कोशिश कररही थि कि कहींयह दोनों वाकय संजीदा हें याँ दोनों हि मज़ाक कररहे हें।
एस-केँ नें कहा, “देखो दोस्त मुझे लेँ जाने मे कोईऐसी प्रॉबलम तोँ नहि हैं पर्र तुम्हें तोँ पता हैं कि वहा कान्फ्रेंस मे जारहा हूं औऱ कान्फ्रेंस वालेजिस फाइव-स्तार होटल मे कान्फ्रेंस होती हैं उअसी होटल मेरं एक् रूम देते हें। एक् तौ उसी होटल मे दूसरा रूम मिलना मुश्किल होगा औऱ मिला भि तोँ एक् दिन कां किराया हि बीस-हज़ार रुअप्ये केँ हिसाब सें दो हफ्तों केँ डेढ़-लाख लग जायेंगे। वैसे भि डबलबेड केँ रूम मे एक् हि बेड होता हैं, रहनेदो। मे तौ ऐसे हि मज़ककर रहा थां। “ अशफाक नें कहा“अरे दोस्त। ऐसी भि क्याँ बात हैं। एक् हि रूम मे रह लेना” औऱ मेरी तरफ़ मुड़कर अशफाक नें पूछा कि “क्यूं किरन। तुम् रह सकती होँ नाँ एस-केँ केँ संग एक् हि रूम मे?? बेड केँ एक् तरफ़ तुम् सो जानां औऱ एक् तरफ़ एस-केँ सो जायेगा” तोँ मैंने शरम सें लाललाल हौ केँ कहा, “तुम् भि कैसी बातें करते होँ अशफाक। बिना सोचे समझे। तुम्हें कुछपता भि हैं कि तुम् क्याँ कहरहे होँ?” उसनेकहा, “अरे दोस्त किरन.जाओ थोडा घूमफिन करआओ। बाहर् कि दुनिया देखलो। इंडिया मे कहां-कहां फिरोगी। मे तौ तुम्हें नहि लें जा सकता। एस-केँ केँ संग जाने मे क्याँ प्रॉबलम हैं?” मैंने कहा, “क्याँ अशफाक। तुम् भि नाँ ऐसे-ऐसे प्रपोज़ल देरहे होँ जौ तुम् भि जानते होँ कि कभी नहि हौ सकता”, तौ अशफाक नें कहा, “क्यूं नहि होँ सकता???अरे बाबा मे तुम्हें परमिशन देरहा हूं नां औऱ एस-केँ मेरा बचपन कां साथी हैं औऱ हम् दोनों नें बहोत मस्तियाँ भि कि हें। मे एस-केँ कों अच्छी तरह सें जानता हूं। “ फिन अशफाक औऱ एस-केँ दोनों संग मे हँसने लगे औऱ एस-केँ नें कहा, “क्याँ दोस्त अशफाक। जानेदो नाँ। किरन केँ सामने क्याँ हमारी पुरानी बातें लगाये बैठे हौ तुम्। वोँ भि क्याँ सोचेगी हमारे बारे मे। “ मैंने हँस केँ कहा, “नहि मे कुछ नहि सोचने वाली। जवानी मे तौ हरकोई इंजॉय करता हि हैं। होँ सकता हैं आप् लोगों नें भि कुछऐसे हि इंजॉय किया होगा”, मैंने आँख मारते हुएकहा तोँ अशफाक नें कहा कि, “हाँ बाबा! तुम् भि तौ जवान होँ जाओ औऱ थोडा इंजॉय कर केँ आओ। कमरे कि फिक्र मतकरो। मे खर्चा उठाने कों रेडी हूं। “ एस-केँ नें बातखतम करतेहुए कहा कि “दोस्त। अभि तौ टाईम पड़ा हैं। तुम् दोनों मिल केँ सोर्ट ऑउटकर लो। मुझे तौ कोई प्रॉबलम नहि हैं। किरन मेरेसंग जा सकती हैं। ऐसीकोई बात नहि। जब तुम् लोग निर्णय करलो तौ बता देना। मे सारे इंतज़ाम कर लूँगा। “ फिन अशफाक सें हाथ मिलाकर औऱ मेरे कंधे पे हाथरख कर अपनी तरफ़ थोडा सां खींचा औऱ गूड-बॉय कहकर वोँ चला गय़ा।
एस-केँ केँ चले जाने केँ बाद हम् सोने केँ लिये अपने बेडरूम मे चलेगये। मुझे टोटल अंधेरे मे नंगी सोने कि आदत हैं, इसी लिये सोने केँ टाईम पे हम् नाइट लैंप नहि लगाते। औऱ यहसोच कर नंगी सोती हूं कि कभी अशफाक कि आँखखुल जाये औऱ उसकामूड आँ जाये तोँ होँ सकता हैं कि कभी मुझेसही तरीके सें चोददे, जब कि ऐसाकभी हुआ नहि। अंधेरे मे लेटे-लेटे अशफाक नें मेरी चूचियों कों दबाना औऱ मसलना शुरुआत किया तौ मैंने उसकाआधा उठाहुआ लन्ड अपनेहाथ मे पकड़ लिया औऱ दबाने लगी। अशफाक कां एक् हाथ मेरी बुर कां मसाजकर रहा थां औऱ मे गर्म होनेलगी औऱ बुर मे सें जूस निकलने लगा। अशफाक कों हमेशा हि चुदाई कि जल्द होती हैं, चाहे उसका लन्ड पूरीतरह सें खड़ाहुआ होँ याँ नहि। तौ आज भि यहीहाल थां उसका। लन्ड अभि पूरीतरह सें सख्त भि नहि हुआ थां औऱ वोँ मेरे शरीर पे चढ़आया औऱ टाँगों केँ बीचबैठ कर अपनेआधे खड़े लन्ड कों मेरी बुर मे रगड़ने लगा। उसके लन्ड सें थोडा प्री-कम निकलरहा थां, जिससे मेरी बुर स्लिपरी तोँ हौ गई, थि पर्र उसके लन्ड मे अभि भि सखती नहि आयी थि। वोँ मेरेऊपर झुकआया औऱ लन्ड कों बुर मे घुसाने कि कोशिश करनेलगा औऱ लन्ड कां सुपाड़ा तोँ अंदरघुस हि गय़ा किसीतरह सें। शायद बुर बहोत गीली हौ गई, थि उसके प्री-कम सें। खैर लन्ड कां सुपाड़ा तौ अंदर घुसा औऱ उसने एक् झटका मारा औऱ लन्ड अंदर घुसेड़ने कि कोशिश कि, पऱ उसी टाइम उसके लन्ड मे सें मलाई निकल गयीँ, औऱ थोड़ी बुर केँ अंदर औऱ थोड़ी बुर केँ बाहर् हि निकल गयीँ,। मेरे मुँह सें "ओहशिट" निकल गय़ा। अशफाक गहरी साँस लेताहुआ मेरेऊपर सें लुढ़क केँ मेरे बाजू मे लेट गय़ा।
मे पूरीतरह सें गर्म हौ चुकी थि औऱ संग हि खाने केँ बाद पियेहुए तीनपैग व्हिस्की कां नशा-सां भि छायाहुआ थां। मेरा मस्ती केँ मारे बुराहाल थां औऱ बुर मे आगलगी हुइ थि पर्र क्याँ करती। अशफाक अपनी मलाई मेरी बुर केँ बाहर् हि गिरा केँ बाथरूम चला गय़ा तौ मैंने अपनी उंगली बुर मे घुसेड़ केँ अंदर बाहर्-करना शुरुआत कर दिया औऱ एस-केँ कां लन्ड औऱ उसकी चुदाई कां सोचते-सोचते मे बहोत ज़ोर सें झड़ गई,। अशफाक नें बाथरूम सें बाहर् निकलते-निकलते मुझे अपनी उंगली बुर मे डालकर अंदर-बाहर् करतेदेख लिया पऱ कुछ बोला नहि। शायद स्वयं हि कुछसमझ गय़ा होगा कि मे ऐसा क्यूं कररही हूं, क्योंकि वोँ अच्छी तरह सें नहि चोदसका औऱ मे प्यासी रह गई, थि, इसी लिये अपने हि हाथों अपनी बुर कां मसाजकर रही हूं।
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