❤️❤️ बेटे केँ बच्चे कि माँ बनी❤️❤️ – New Episode
Update 03
हम् सभी नें जेसी महिला हमे चाहिए थींसभी स्थान ढूंढा मगरहाथ कुछ नहि लगा। इसबात कों एक् महीना गुजर गय़ा।
रेखा मानसी ओर शारीरिक रूप सें कमजोर होँ गई थि। घऱ मे चारों तरफ निराशा थि। ऐसे हि एक् महीना ओर गुजर गय़ा। हम् सभी कों उम्मीद कि एक् किरण दिखी। रेखाफिन सें प्रेग्नेंट हुई। हम् सभी कों लगा कि शायदइस बार बच्चा नाँ गिरे। मगर भाग्य मे कुछओर लिखा थां। इसबार 12 दिनबाद हि रेखा कां बच्चा गिर गय़ा। अभय रेखा बिल्कुल टूट चुके थें। अभय कि आंखों मे आंसू आँ गएमगर हम् कुछ नहि कर सकते थें रेखा बिल्कुल टूट गई। जैसी स्त्री हम् सभी कों चाहिए थीं वोँ हमेकही नहि मिली। मे ओर सुभाष आंखों मे आंसू लाने केँ अलावा कुछ नहि कर सकते थें
ऐसे हि 10 दिन निकलगए सुभाष ओरअभय अपने अपनेकाम पऱ वापिस जानेलगे थें।
एक् दिन रेखा नें हमसेकहा कि वोँ अभय कि दूसरी विवाह करदे। मगर इसकेलिए अभय नहि माना उसनेकहा कि ऐसा करने सें कई जिंदगियां खराब होँ जाएगी। रेखा हमारी फैमिली कां अटूट हिस्सा बन गई थि इसकेलिए उसे परिवार सें अलग नहि कियाजा सकता थां।
शाम कों अभयओर सुभाष घऱआए खानां खाया औऱ अभय रेखा अपने कमरे मे चलेगए औऱ हम् अपने।
जब मे कमरे मे पानी लेकर गई तोँ सुभाष बेड पर्र लेटे गहरीसोच मे डूबे थें।
मे जाकर उनकेबगल मे लेट गई। कहनेओर करने कों कुछ नहि थां। मेरेओर सुभाष केँ शारीरिक संबंध तौ अभय केँ जन्म केँ बाद सें हि बंद थें। मैने अपने आप् कों बहोत मुश्किल सें संभाल लिया थां। मैने अपनी क़िस्मत समझकर इसे स्वीकार कर लिया कि अब तोँ जोँ हैं यही हें। मुझमें ओर रेखा मे कोई ज़्यादा अंतर नहि थां अगरकोई मुझेओर रेखा कों संग देखे तौ मुझे रेखा कि बड़ी बेहनकहे।
जबकईदेर तक सुभाष कुछ नहि बोले तोँ मे
मे - क्याँ सोचरहे होँ
सुभाष - सुभाष गहरी सांस लेकरअब हम् क्याँ करेंगे सीमा। मुझसे अबओर रेखाओर अभय कां दर्द नहि देखा जाता।
मे - हम् क्याँ कर सकते हैं जी हमारे हाथ मे कुछ नहि हैं।
सुभाष - अगर रेखा कि स्थान हमारी बेटी होतीतब भि तुम् यही कहती।
मे - हैरानी सें यह आप् क्याँ बोलरहे हैं रेखा कों मानेकभी अपनीसगी बेटी सें कम समझा हैं।
सुभाष - नहि तुम् गलतसमझ रही हौ मे यह कहना चाहता हु कि रेखाजिस दर्द सें गुजररही हैं अगरउसी दर्ददे हमारी बेटी बेटी गुजररही होतीतब भि हम् क्याँ यहीकर रहे होते जोँ आज हम् कररहे हैं।
मे - ओर हम् कर भि क्याँ सकते हैं। नाँ तोँ अब हमारे हाथ मे कुछ हैं औऱ नां तबजब रेखा कि स्थान हमारी बेटी होती। इसकेआगे सुभाष कुछ नहि बोले बोलने कों क्याँ हि थां
मैने सोने कि कोशिश करनेलगी मगरबार बार मेरे आंखों केँ आगेअभय कां चेहरा आँ जाता दुःखी आंखों मे आंसू। हमारा वोँ अभयकही खो सां गय़ा थां जौ हमेशा हंसता ओर हंसता थां मेरा भि दिलओर रोरहा थां मेरी आंखों सें आंसू आँ गएमगर मे कुछ नहि कर सकती थि सिवाए रोने केँ।
ऐसे हि दोदिन निकलगए जब भि मैअभय कि तरफ देखती मुझे रीना आँ जाता थां। मेरे जिस्म कां रोमरोम अभय केँ लिएरो रहा थां
मगर मैने अपने आप् कों संभाला।
ऐसे हि एक् दिन सुभाष मुझे डॉक्टर केँ पास लेँ गए। डॉक्टर नें मेरा चेकअप कियाओर
डॉक्टर - आप् मम्मी बन सकती हैं मगर आप् नेचुरल तरीके सें मम्मी बन सकती हैं उसमें आपकोकई दिक्कत नहीं होगीओर बच्चा भि हेल्दी होगा। साइंटिफिक तरीके सें आप् माँ नहि बन सकती।
मुझेकुछ समझ नहि आया। जबघऱआई तोँ सुभाष नें बताया कि मे अभय केँ बच्चे कों जन्मदु। मे पूरी हैरान सि सुभाष कों देखरही थि।
मे- आप् पागल होँ गए हैं क्याँ मे अभय कि मम्मी हु मे केसेअभय केँ बच्चे कों जन्म सें सकतीहु मे मम्मी हु उसकी। उस वक्त तौ सुभाष कुछ नहि बोले मैने भि बात कों आई गई समझा।
मगरदो दिनबाद जब मे कमरे। मे सोने गई तब
सुभाष क्याँ सोचा तुमने।
मे - किस बारे मे।
सुभाष - वही बच्चे केँ बारे मे
मे - आप् कां मन तोँ ठीक हैं नाँ क्याँ बोलरहे हैं आप् अभय बेटा हैं मेरा मे केसे उसके बच्चे कों जन्म सें सकतीहु ओरमान भि लो मे सजधजकर हौ भि जाऊ तोँ तौ डॉक्टर नें क्याँ कहा थां कि मे सीधे संबंध बनाकर हि मम्मी बन सकतीहु। मे केसेअभय केँ संग वोँ सभीकर सकती हु। इसबात केँ लिए नाँ तोँ अभयओर न् रेखा राजी होंगे।
सुभाष - तौ क्याँ हमारा वंशआगे नहि बढ़ेगा। देखो सीमाअगर तुम् चाहो तोँ सभीसही होँ सकता हैं। ओरमै कौनसा तुम्हे दूसरे व्यक्ति केँ संग सोने केँ लिएकह रहाहु तुम्हारा स्वयं कां बेटा हैं।
मे - यही तोँ मे कहरही हु बेटा हैं मेरा।
इसकेबाद नं सुभाष कुछ बोलेओर नां मे। दोतीन दिन तक सुभाष मुझे मनाते रहेमगर मे नहि मानी
ऐसे हि एक् दिन रेखा - अभय मेझे मेरा बच्चा चाहिए चाहे जैसे भि होँ मगर मुझे मेरा बच्चा मेरीगोद मे चाहिए ओरयहबोल कर वोँ जोरजोर सें रोनेलगी। अभयकुछ नहि बोलाओर बोलता भि क्याँ बच्चा कोई खिलौना थोड़ी थां जौ मार्केट सें खरीदा ओरलाकर दे दिया।
सुभाष उम्मीद भरी नजरों सें मुझेदेख रहे थें। मगर मेरेपास कोई जवाब नहि थां। ऐसे हि दोतीन दिन निकलगए मैनेकोई जवाब नहि दिया सुभाष कों जब भि वोँ बातकरे मैबात कों। नज़रअंदाज़ कर देती
अगलेदिन रात कों जबसभी कां खानां हौ गए तौ सुभाष हम् सभी सें - मुझे तुम् सभी सें एक् जरूरी बात करनी हैं
अभय - क्याँ बापू।
रेखा बेटी तुम्हे बच्चा चाहिए नाँ फिन वोँ चाहे केसे भि हाल
रेखा आंखों मे आंसूलिए - जी बापूजी मुझेइस परिवार कां वंश चाहिए चाहे केसे भि होँ
सुभाष - तोँ ठीक हैं अभय केँ बच्चे कों जन्म उसकी माँ सीमा देगी।
जबयहबात सुभाष नें सबके सामने कही तोँ हम् सभी हैरान होकर सुभाष कि तरफ देखने लगे
मे -
रेखा -
हम् सभी मे सबसे अधिक हैरान तौ अभय थां
होँ भि क्यूं नं उसके बापू नें बात हि ऐसीकही थि। मेरे तोँ कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां सुभाष सबके सामने ऐसीबात केसेकर सकते हैं। मैने सोचा थां कि सुभाष इसबात कों भूलगए हैं
आज केँ लिए इतना हि मिलते हैं अगलेभाग मे।
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On Behalf of Admin Team
Regards - XForum Staff।
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Update 05
मैने रेखा सें कुछ नहि कहा कहती भि क्याँ मेरेकुछ समझ नहि आँ रहा थां। दिमाग़ मे कुछओर चलरहा थां ओरदिल मे कुछओर। मेरेलिए किसी एक् कों चुनना थां याँ तौ मा बेटे केँ रिश्ते कों चुनकर अभय रेखा कों अपनेहाल पऱ छोड़ दिती याँ फिन अपने बेटे केँ बच्चे कि मम्मी बन जाती।
अब फैसला मेरा थां। मुझे क्याँ करना हैं क्याँ नहि। मगर एक् बात थि जोँ मे इतने दिनों सें महसूस कररही थि मेराअभय केँ बिना जीना मुश्किल हौ रहा थां। जब भि अभय मेरेसंग होता मुझे बड़ा अच्छा लगता मेरेबदन कां रोमरोम नाचने लगता। जब भि अभयरात कों घऱआता मेरादिल करता कि मे अभय कों अपनेगले सें लगाकर बस पड़ीरहु बेड पऱ।
दिलकुछ ओर चाहने लगा थां मगर दिमाग़ कुछओर कहरहा थां।
मे किचन सें अपने कमरे मे आँ गई। इतने मे सुभाष ओरअभय भि उठ चुके थें। दोनो अपने अपनेकाम पर्र जाने केँ लिए रेडीहुए। मगरआज पता नहि क्यूं मनेअभय कि टाई लगाई। उसके कपड़े सहीकिए ओर जानेलगी। अभयबस मुझे देखेजा रहा थां।
मैने उसकी आंखों मे देखाओर शर्मा कर अपने कमरे मे आँ गई मेरीदिल कि धड़कने बढ़ गई थि मेरी सांसे तेज होँ हैं थि। मे शर्मा तौ ऐसेरही थि जैसेकल रात हि हमारी सुहागरात हुई हौ। मगर मे ऐसा क्यूं कररही थि मुझे भि समझ नहि आँ रहा थां। अभयओर सुभाष नाश्ते कि टेबल पर्र बैठे। ब्रेकफास्ट करतेसमय बसअभय कों हि देखेजा रही थि। रेखा नें हम् सभी कों ब्रेकफास्ट दियामगर जब उसनेअभय कों ब्रेकफास्ट दिया तोँ पता नहि क्यूं रेखा पऱ क्रोध आँ रहा थां मुझे रेखा सें जलन होनेलगी थि।
सुभाष - क्याँ सोचाबहु तुमने।
मैओरअभय रेखा कि तरफ देखने लगे।
रेखा - पिताजी जीमै सजधजकर हु मुझेकोई दिक्कत नहि बस माँ जीमान जाए।
सुभाष - ठीक हैं बहु। सीमा तुमने क्याँ सोचा हैं।
मे - मुझेकुछ वक्त चाहिए सोचने केँ लिए।
सुभाष - सीमा हमारे पाससमय हि तोँ नहि हैं मगरअगर तुम् कहती होँ तोँ आजरात तक कां समय हैं सोचकर बता देना। मे जानता हु कि तुम् दोनों केँ लिएयह फैसला लेना बहोत मुश्किल हैं मगरइस परिवार केँ लिए तुम्हे करना होगा।
मे अभय कों देखरही थि ओरअभय मुझे।
सुभाष ओरअभय अपने अपनेकाम पऱ चलेगए ओर मे सारादिन सोचती रही कि मुझे क्याँ करना हैं मेरे आंखों केँ सामने रेखा कां रोताहुआ चेहरा, अभय कि टूटी उम्मीदें सभीकुछ एक् संग मेरे आंखों केँ सामने आनेलगे। मैने बहोत सोचसमझ कर एक् फैसला लिया औऱ रात होने कां प्रतीक्षा करनेलगी। दिन मे मेरी रेखा सें भि कई बाते हुईँ।
रात कों अभयओर सुभाष अपने अपने वक्त सें घऱ आँ गए। ओरआज मेराअभय कों देखने कां नजरिया बदल गय़ा थां। खानां पीना होने केँ बाद सुभाष नें बात कों छेड़ा।
सुभाष - तोँ क्याँ सोचा तुमने सीमा।
मे अभय कों देखने लगीओर अभय मुझे। अबअभय कों भि समझ आँ गय़ा थां कि उसे करना हि होगा। ओरकोई मार्ग नहि हैं।
मे - मे रेडीहु। मगर मेरीकुछ शर्ते हैं।
सुभाष - खुश होँ कर मुझे तुम्हारी हर शर्त मंजूर हैं। तुम् बस मुझे अपना वारिश देदो
रेखा - हा मां जी मुझे भि आप् कि सारी शर्ते मंजूर हैं।
मे - पहलेसुन तोँ लो।
सभी - हौ कहो।
मे - मे अभय केँ संगअलग कमरे मे रहूंगी। ओर सुभाष आप् घऱ केँ पीछे वाले कमरे मे रहेंगे। ओर दूसरी शर्तयह कि मे अबघऱ मे अपनीमन मर्जी सें रहूंगी। मे अपनीमन मर्जी सें कपड़े पहनूंगी सभीकुछ मेरी मर्जी सें होगा।
सभी हैरानी सें मुझेदेख रहे थें। कि मे क्याँ बोलरही हु।
सुभाष - मुझेकोई दिक्कत नहि हैं सीमा। तुम्हे जैसे रहना हैं रहो। मुझेबस अपना वारिश देदो।
मे - ठीक हैं। ओर रेखा तुम् आज सें अभय केँ संग नहि रहेगी। अभयजब तक तुम्हारे संग नहि सो सकताजब तक कि मे नां चाहूं। अगरयह सभी बाते मंजूर हैं तौ कहो।
रेखा - मुझेकोई प्रॉब्लम नहि हैं माँ जी। आप् बस मुझे मेरा बच्चा दे दीजिए।
मे - ठीक हैं। आप् अपना सामान पीछे वाले कमरे मे लें जाइए। ओर रेखाअभय केँ सारा सामान मेरे कमरे मे रखदे अभि।
रेखा - जी माँ जी अभि करतीहु।
रेखाओर सुभाष अपने अपनेकाम पर्र लगगए। मगर अभय हैरानी सें मुझेदेख रहा थां। उसकी आंखों मे कई सारे प्रश्न थें।
मे अभय कि हालतसमझ सकती थि केसेकोई बेटा अपनी माँ केँ संग वोँ सभीकरे जौ एक् पति पत्नि करते हैं।
मे - अभय मे जानती हु कि तुम्हारे मन मे कई सारे प्रश्न होंगे कई उलझने भि मगरआज रात सारी समस्याओं कां हल हौ जाएगा।
मे इतनाबोल कर अपने कमरे मे आँ गई जहां सुभाष अपने कपड़े बैग मे रखरहे थें
सुभाष - मे बहोत खुशहु सीमा कि तुमने यह फैसला लिया मुझेओर कुछ नहि चाहिए।
मे (सीरियस ) एक् बारओर सोचलो सुभाष अगर मे ओरअभय आगेबढ़ गए तौ पीछे हटने कां कोई मार्ग नहि हैं। बाद मे पछताने ओर रोने केँ अलावा हाथकुछ नहि लगेगा।
सुभाष( सीरियस )- मैनेयह फैसला तुम्हारे लिए लिया हैं सीमा।
मे (हैरानी सें) मेरेलिए तुम् कहना क्याँ चाहते हौ सुभाष खुलकर कहोअगर कोईबात छुपाई तोँ मेरामरा मुंह देखोगे।
सुभाष - तौ सुनो सीमाजब हमारी सादी हुईँ थि तब मे तुमसे नोसाल बड़ा थां मैने पापा सें कहा भि मगर उन्होंने मेरीबात नहि मानीओर हमारी सादीकर दि जिसके एक् सालबाद अभय कां जन्महुआ। अभय केँ जन्म केँ बात नाँ तौ मे तेरी शारीरिक ओर नां एक् पत्नि सुखदे पायाओर.
सुभाष बीच मे हि रुकगए मेरी आंखों सें आंसू आँ गए। जब सुभाष बीच मे हि रुकगए तोँ मे जोर सें
मे - ओर क्याँ सुभाष कहो
सुभाष - यही कि तुम् अभय सें प्रेम करती तौ। मे हैरानी सें सुभाष कों देखने लगी।
मे - इसमें कौन सि बड़ीबात हैं हरमा अपने बेटे सें प्रेम करती हैं।
सुभाष - मे मा बेटे वाले प्रेम कि नहि मर्दओर महिला वाले प्रेम कि बातकर रहा हूं।
मे पूरीशोक हुई कि सुभाष क्याँ बोलरहे हैं
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