❤️❤️ बेटे केँ बच्चे कि माँ बनी❤️❤️ – New Episode
Wow क्या jabaradast kahani h ismein mummi son gym jaa rahe h workout karne aur son ne mummi ko valentine pe gf banya propose.किया esa कुछ aur dilchasp add Karo ma bete ko payar hotha h wow yar juldi Lao next update sab wait krr rahe h bahut slow update dete hu
friend ghrr mai kisi member mai medical issues k karn 4 din out off station rahuga. Update 8 tarik ko rat 9 maje mil jaaega . Sorry friends update let hone k lea . Ummid krta ho kee ap samjenge .
❤️❤️ बेटे केँ बच्चे कि माँ बनी❤️❤️ – New Episode
Update 04
मुझेजिस बात कां डर थां वहीहुआ। सुभाष नें सबके सामने वोँ बातबोल दि जिसके बारे मे मुझेसोच कर अजीबलग रह थां। मे अपने बेटे कि बच्चे कि मम्मी बनूंगी सोचकर हि मेरे जिस्म मे पता नहि मगरकुछ होने लगता थां।
अभय - पिताजी आप् कों पता भि हैं आप् क्याँ बोलरहे हैं।
रेखा - हा पिताजी जीऐसे केसे होँ सकता हैं सासू मम्मी, मा हैं इनकी।
सुभाष - मुझेपता हैं मै क्याँ बोलरहा हुओर किस्से बोलरहा हु देखो मेरे बच्चों मानेयह फैसला बहोत सोचसमझ कर लिया हैं इस परिवार कि भलाई केँ लिए लिया हैं।
अभय - मगर पिताजी वोँ मा हैं मेरीओर मै केसे उनकेसंग वोँ सभी करने कि सोच सकताहु।
सुभाष- करने कि सोच नहि सकतेमगर अब करना पड़ेगा इस परिवार केँ लिए तुम्हारे अंश कों इस दुनिया मे लाने केँ लिए करना होगा तुम्हे।
अभयकुछ नहि बोलओर उठकर अपने कमरे मे चला गय़ा।
मे - आप् क्याँ बोलरहे हैं आप् कों कुछपता भि हैं मैमाहु अभय कि। इतनाबोल कर मे भि अपने कमरे मे चली गई। मगरपता नहि क्यूं अंदर सें मुझे सुभाष कि बाते अच्छी लगलगरही थि मगर क्यूं।
इधर सुभाष ओर रेखा
सुभाष - देखोबहु मैने जोँ फैसला लिया हैं वोँ बिल्कुल सही हैं हमेजिस तरह कि स्त्री कि तलाश थि वोँ सीमा हि हैं अभय केँ बच्चे कां ख्याल सीमा सें ज्यादा ओरकोई नहि रख सकता।
रेखाकुछ देर सोचती रहीफिन
रेखा - पिताजी जी मुझे सोचने केँ लिएकुछ वक्त चाहिए।
सुभाष - कोईबात नहि बहु तुम्हे जितना वक्त चाहिए लोमगर मेरीबात पर्र गौर करना
रेखा - जी पिताजी जी।
सुभाष कमरे मे आँ गएओर रेखा अपने कमरे मे चली गई।
मे - यह बाहर् क्याँ बोलरहे थें आप् मे अभय केँ बच्चे कों जन्म केसेदे सकतीहु।
सुभाष - क्यूं नहि सें सकतीजब अभय कों जन्मदे सकती हौ तौ अभय केँ बच्चे कों क्यूं नहि।
मे - आप् मेरीबात क्यूं नहि समझरहे मैमाहु अभय कि मम्मी बेटे केँ बारे मे ऐसा सोचना भि पाप होता हैं। ओर अपनेसोच हैं कि अगर मे अभय केँ बच्चे कि मम्मी बन गई तोँ वोँ आप् केँ क्याँ लगेगा ओरअभय केँ क्याँ ओर मेरे क्याँ।
सुभाष - इसमें कौन सि बड़ीबात हैं तुम् उस बच्चे कि मम्मी ओरअभय बाप ओर मे दादाजी।
मे - वोँ आप् तब होतेजब मे अभय कि पत्नि होती नां कि आप् कि।
सुभाष केँ पास मेरीबात कां जवाब नहि थां देते भि क्याँ जब जवाब हौ तोँ दे नाँ। लेखक एक् बात मैनेगौर कि थि कि जब भि मे अभय कि आँखें मे देखती मुझेकुछ खालीपन सां नजरआता ऐसा लगता जैसे वोँ रेखा केँ संगखुश नहि हैं मगरजब रेखापेट सें हुई तोँ मुझेलगा कि मेरावहम हैं मगर मे जब भि अभय कों देखती कोईबात हैं जोँ उसेखाए जारही हैं। मगर क्याँ
अभय रेखारूम -
अभयबेड पऱ सोरहा थां रेखा आँ कर
रेखा - सोगर क्याँ।
अभय - नहि बापू कि। कहीबात केँ बारे मे सोचरहा हु वोँ ऐसीबात केसेकर सकते हैं।
रेखा - क्याँ गलतकहा उन्होंने। अभय हैरानी सें रेखा कों देखने लगता हैं।
अभय - यह तुम् क्याँ बोलरही होँ।
रेखा केँ आंखों मे आंसू आँ जाते हैं।
रेखा - हा बापूजी नें जौ बातकही वोँ सही हैं मां जी सें अच्छी माहमे कही नहि मिल सकती।
अभय -हैरान भरी नजरों सें रेखा कों कों देखने लगता हैं तुम् इस कों मान कि सकती कों रेखा।
रेखा- (रोतेहुए ) आप् कों बस अपना नातादिख रहा हैं मेरा दर्द नहि अगर आप् मेरे दर्द कों समझे होते तोँ आप् मान जाते।
अभय - मे समझता हु रेखामगर मे केसेमा हैं मेरी वोँ।
रेखा - नहि आप् नहि समझरहे हैं देहात मे मेरे मायके मे जिनकी विवाह हमसेबाद मे हुईँ थि उनकी गोदी मे आज बच्चे खेलरहे हैं मेरे मायके कि सारी सहेलिया माबन चुकी हैं मुझे छोड़कर अगरआज हमारे भि बच्चे होते तौ मुझे मम्मी माकर बुलाते मगर मेरी तोँ भाग्य हीं खराब हैं।
अभय क्याँ बोलता रेखा नें जौ बोला वोँ बातसही थि। आजघऱ मे दो लोगों कों नींद नहि आँ रही थि औऱ वोँ थें अभयओर मे नींद केसेआती बात हि कुछऐसी थि।
सुभह होती हैं मे नहाकर किचन मे आँ जातीहु अभयओर सुभाष अभि उठे नहि थें। कुछदेर बाद रेखा भि किचन मे आँ जाती हैं। मे उससेनजर नहि मिलपा रही थि मिलाती भि केसे।
कुछ टाइम तक नां रेखा बोलि ओर नाँ मे।
रेखा - मां जी क्याँ सोचा आपने।
मे - यह तुँ क्याँ बोलरही हैं बहु तुम कोपता हैं मे केसे।
रेखा - रोतेहुए मेरे पैरों मे गिर जाती हैं माँ जी प्लीज मुझे मेरा बच्चा देदो उसकेबाद अगर आप् मुझे अपनी नौकरानी भि बनाकर रखे तोँ भि मुझे मज़ूर हैं।
मे - यह तुँ क्याँ बोलरही हैं बहु मैने तुम्हें क्याँ अपनी बेटी सें कभीकम माना हैं क्याँ।
रेखा -( रोतेहुए) तौ एक् बेटी अपनी माँ सें कहरही हैं मुझे मेरा बच्चा चाहिए मा। ओर आप् तोँ एक् महिला हैं नां माँ जी आप् तौ जानती हैं एक् लड़की केँ लिएमा बनना क्याँ होता हैं।
रेखा रोनेलगी उसने जौ कहा वोँ सही थां किसी भि स्त्री केँ लिएमा बनना बहोत चैनओर सुख कि बात होती हैं। मगर रेखाउस सुख सें रह गई थि औऱ वोँ चाहती थि कि उसे वोँ सुखमै दुअभय केँ बच्चे कों जन्मदे कर।
आज केँ लिए इतना हि। इमरजेंसी केँ कारणभाग थोडा लेट हौ सकता हैं। अबसमय मिल तोँ दे दिया। आप् भरोसा रखे किस्सा अधूरी नहि रहेगी।
❤️❤️ बेटे केँ बच्चे कि माँ बनी❤️❤️ – New Episode
Update 06
मे पूरेशोक मे थि कि सुभाष क्याँ बोलगए मे पूरी अंदर सें हिल गई थि मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ बोलूं। मगरजब सुभाष नें यहबात बोलि तौ मेरादिल कुछओर बोलरहा थां ओर दिमाग़ कुछओर। दिलओर मन कि इस उलझन मे मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि क्याँ सच हैं।
मे (शोक मे) - सुभाष तुम् यह क्याँ बोलरहे होँ ओर तुम् जानते भि होँ क्याँ बोलरहे हौ।
सुभाष - मुझेपता हैं सीमा कि मै क्याँ बोलरहा हुओर जौ तुमने अभि सुना वोँ सच हैं।
मे - सच कैसासच कही तुम्हे यह तोँ नहि लगता कि मे अभय केँ संग बच्चा करने केँ लिएमान गई तोँ तुम्हे लगा कि मे अभय सें वोँ वाला प्रेम करतीहु।
सुभाष - नहि तुम् अभय कों उसके जन्म सें हि चाहती हौ। यहबात तुम्हे भि पता हि कि तुम् अभय केँ लिए पागल हौ। तुम् अभय केँ संग किसीओर महिला कों नहि देख सकती।
मे - यह तुम् क्याँ बोलरहे होँ हा मे मानती हु कि मेराअभय केँ संग लगावकुछ ज़्यादा हैं जौ एक् नॉर्मल मा बेटे मे नहि होताओर रही दूसरी महिला कि बात तौ अभय कि सादी हुईँ हैं नां।
सुभाष - हा हुई हैं अभय कि सादीमगर यहबात तुम् भि जानती हौ कि अभय कि सादी सें तुम् खुश नहि हौ।
मे - मे खुश नहि हुयह तुमसे किसने कहाजब बेटे कि सादी होती हैं तौ हरमाखुश होती हैं। ओर तुम् यहबात केसेकह सकते हौ कि मे अभय कि सादी सें खुश नहि हूं।
सुभाष - बात किसी केँ कहने याँ नां कहने कि नहि हैं मे तुम् दोनों कों देखता आँ रहाहु आज तक हा वोँ बातअलग हैं कि तुम् उस प्रेम कों समझ नहि पाईअब तक।
मे - क्याँ नहि समझपाई मे आज तक ओर क्याँ देखा तुमने।
मे सुभाष सें प्रश्न पर्र प्रश्न पूछरही थि मगर हैरानी कि बात तौ यह हैं मुझे अभि तक क्रोध नहि आया थां जबकि नॉर्मल मा बेटे केँ रिश्ते मे अगरइसी बात होँ तौ मा कों क्रोध आनां लाजमी हैं
सुभाष - देखो सीमा मे तुमसे बहस नहि करना चाहता ओरयहबात अगर मे तुम्हे समझा नें नें कोशिश भि करूं तोँ नहि समझा पाऊंगा। यहबात तुम्हे अपनेदिल सें पूछनी होगी तुम्हे तुम्हारा जवाबमिल जाएगा। ओररही बात देखने कि तोँ अभय केँ बचपन सें लेँ करआज तक तुमने किसी भि स्त्री कों अभय केँ पास नहि आने दिया विद्यालय मे ओरयाह तक कि कॉलेज मे भि जबअभय पढ़ने बाहर् गय़ा थां तौ तुम् उसेदिन रातऐसे बात करती थि जैसे कि तुम् उसकी पत्नि हौ ओरजबअभय कि सादी हुई तब तुम्हे बातबात पर्र क्रोध आनेलगा थां अभय पऱ ओरयाह तक कि जब रेखापेट सें हुइ थि तब भि तुम्हे खुशी नहि हुइ थि। मगरआज तक तुम् अपनेओर अभय केँ बीचइस रिश्ते कों समझ नहि पाईओर नाँ हि अभयसमझ पाया। तुम् दोनों केँ दिल एक् दूसरे सें मिले हैं सीमा। तुम् दोनों एक् दूसरे केँ बिना नहि रह सकते
मे - क्याँ तुम् सचबोल रहे होँ।
सुभाष - मे बिल्कुल सचबोल रहाहु सीमा तुम् अभय सें प्रेम करती हौ ओर वोँ तुमसे अगर मेरीबात पर्र तुम्हे भरोसा नहि हैं तौ अपनेदिल सें पूछो। ओर मुझे तोँ खुशी हैं कि तुम्हे तुम्हारा प्रेम मिल गय़ा। अबओर ज़्यादा इस बारे मे मत सोचोओर जल्द सें खुश खबरी सुनाओ।
स सुभाष नें जबखुश खबरी वालीबात कही तोँ पता नहि क्यूं मगर मे शर्मा गई
सुभाष इतनाकह करचले गए अपने कमरे मे। मगर मे खड़ी खड़ी सोचती रही कि क्याँ मे सच मे अभय सें प्रेम करतीहु।
हाअब मुझेसमझ आया कि क्यूं मुझे रेखा सें जलन थि हमेशा सें क्यूं मुझेअभय कां रेखा कां संग रहना अच्छा नहि लगता थां क्यूं मुझेअभय कों बाहों मे लेने कां मन करता थां।
मे अपने ख्याले मे खोई थि कि पीछे सें रेखाओर अभय कि आवाज़ आई।
रेखा - मां जी इसमें बैग मे अभय कां सामान हैं।
मेंने अभय कां सामान लियाओर एक् तरफरख दिया।
मे( सीरियस )- रेखा एक् बात पूछूं। सचसच बताना।
मेरीबात सुनकर अभयओर रेखा मुझे देखने लगे।
रेखा-हा माँ जी पूछिए नाँ।
मे - क्याँ तुम्हे बुरा नहि लगरहा कि अभय मेरेसंग.
मे बीच मे हि रुक गई। मगर रेखा कों बातसमझ आँ गई।
रेखा - नहि मां जी मुझे बिल्कुल भि बुरा नहि लगरहा क्यूं कि आप् कोईगैर तोँ नहि हौ ओर सबसे जरूरी बात आप् अभय कि मम्मी हैं। एक् मा कां अपने बेटे पर्र सबसे ज़्यादा हक होता हैं पत्नि सें भि अधिक।
ओर माँ जी एक् बात बताऊं आप् कों
अभयबीच मे हि - वोँ रेखा तुमने मेरा सामान रख दिया नां तोँ तुम् जाओ नां अब तुम्हे नींद आँ रही होगी।
रेखा - नहि मुझे नहि आँ रही हैं एक् मिनट रुको आप् तोँ मां जी.ऐसे पहले कि रेखाकुछ बोलती अभयफिन बोल पड़ा।
मुझे इतना तौ समझ आँ गय़ा थां कि कुछ हैं जौ अभय नहि चाहता कि मुझेपता चले।
अभय - तोँ मुझे नींद आँ रही हैं तुम् जाओ अपने कमरे मे।
मे - एक् मिनिट अभयबहु क्याँ कहना चाहती हैं सुन तौ लेँ कहोबहु।
रेखा - मां जीअभय नाँ आपसे बहोत प्रेम करते हैं (ओर धीरे-धीरे सें मेरेकान मे ) मर्द लुगाई वाला प्रेम।
इतनासुन कर मैने कामुक नजरों सें अभय कों देखा
मगरअभय अपनी नजरे चुरारहा थां। अभय केँ नजरे चुराने सें मुझेपता चल गय़ा कि अभय भि मुझ सें प्रेम करता हि। यहबात सोचकर हि मेरे जिस्म मे झनझनाहट होनेलगी थि ओर बहोत खुशी भि। मगर मैने अपनी खुशी कों छुपाया।
रेखा - माँ जी मुझे जोँ कहना थां वोँ मैनेकह दिया ( रेखा सीरियस होँ कर ) मे जानती हूं कि आपकेलिए यह फैसला लेना इतना आसान नहि थां मगरअभय कि खातिर मुझे बच्चा देदो माँ जी।
रेखा कि आंखों आंसू आँ गए। मगर उसने स्वयं कों संभाला औऱ आंखों सें आंसू पोछने लगी।
ओर मुझेदेख कर - मां जीदिल सें कोशिश कीजिए गा। ओर अपने कमरे मे चली गई।
मे समझ गई कि रेखा बच्चे केँ लिएकह कर गई हैं।
अब कमरे मे माहौल यह थां कि मे अभय कि तरफ देखने लगीओर वोँ मेरीतरफ हम् दोनों मे सें कोईकुछ नहि बोलरहा थां हम् दोनों एक् दूसरे कि आंखों मे खो सें गए थें
ओर अचानक मुझेपता नहि क्याँ हुआ मे खड़ी हौ करअभय केँ लगभग जानेलगी। मेरीदिल कि धड़कने तेज होँ गई ओर मे अभय केँ लगभगजा कर खड़ी होँ गईं।
नां अभयकुछ बोलरहा थां नाँ मे हम् दोनों एक् दूसरे मे खोगए थें। अभय कि गरम सांसे मेरे चेहरे पर्र लगरही थि जिसके कारण मे मदहोश होनेलगी।
ओरअभय कों अपनेगले लगा लिया
अभयकुछ नहि बोला। मेरी आँखें अपने आप् बंद होँ गई मे अभय कों अपने आप् मे समा लेना चाहती थि। मे इतनी मदहोश होँ गई थि कि मेरे मुंह सें अपने आप्.
मे - I Love you Abhay
aj के leye etna hi milte h agle update mai
❤️❤️ बेटे केँ बच्चे कि माँ बनी❤️❤️ - Kahani ab aur interesting hogi
Fantastic update Sima hadd say jada out of limit jakar kuchh na kre Sima sanskari or simple mahila k roop mai abhay ko apna banaye or uski bachche k mummy bane
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