बेटे नें माँ कों रगड़ रगड़ केँ चोदा - Episode 1
बात२ महिना पुरानी उससे पहले मैंने कई सारे चुदाई कि कहानियां पढ़े थें जिसमे सें कई सारे कहानियां बेहन-भइया कि चुदाई कि थि तोँ कई सारे मम्मी-बेटे कि चुदाई कि औऱ कई सारे तोँ बाप-बेटी कि भि थि। इन कहानियो कों पढ़-पढ़कर मेरा भि रौड कि तरहतन करखड़ा हौ जाता थां। पऱ बूर नं मिलने कि वजह सें मुझेमुठ मरकर हि काम चलाना पड़ता थां। इन कहानियो कों पढ़कर मेरा भि मनअब अपनी मां कों छोड़ने कां करता थां। पर्र मे उसे चोदता केसे? वोँ मेरी मम्मी थि कह भि नहि सकता थां, कभी-कभी मन करता सीधारेप कर देना चाहिए! लज्जा केँ मारे किसी कों बोलेगी भि नहि। पर्र मुझे उन्हें राजी करके चोदना थां ताकिकभी भि बूर कि जरूरत पड़े तोँ आसानी सें मुझेमिल जाए। पऱ केसे होतायह सभी.? केसे मे मां कों राजी करता.?कुछ समझ मे नहि आँ रहा थां। इधर मेरामुठ मार-मार कर बूराहाल थां। कितने मिन्नते किये भगवान् सें कितनी पूजा कि। आख़िरकार भगवन नें मेरीसुन ली। मेराघऱ कच्छा हैं मिटटी कां घऱ हैं। एक् मे ईंट कां पाया (खम्भा) हैं। उसकेछत पे खपरा हैं। औऱ एक् घऱ मे बाम्बू कां खम्भा हैं, उसकेछत पे खर-पतवार हैं। उसी मे मे रहता हूं। मम्मी दुसरे घऱ मे रहती हैं.
कुछ औऱ लिखू इससे पहले थोडा मम्मी केँ बारे मे बतादूं। ३८साल कि उम्र गोरी चिट्टी काया, जूसी लिप्स, फिगर तोँ कभी मापा नहि पऱ अंदाजन ३४ मम्मों, २८कमर, ३४ हिप्स। अभि भि १८साल कि लड़की कों पानी पिलादे अपनी खुबसूरत सेक्सी जिस्म सें। मेरा तोँ देखदेख कर बूराहाल हौ जाता थां पहले। पऱ उसरात नें सभीकुछ बदल दिया। उसकेबाद तोँ मानो हम् दोनों मां-बेटे कि चंडी हि हौ गई,। मुझे तोँ अभि भि यकीन नहि होता कि मे ऐसा करता हूं.
चलिए मे आपको औऱ नां पकाते हूवे सीधा मुद्दे पे आते हैं! हम् लोग वैसे९ बजे तक सो जाते हें। गावं मे बिजली हैं नहि हर स्थान अँधेरा हि अँधेरा रहता हैं। ९:३० हौ रहा होगा मे भि सोरहा थां मां भि सोरही थि। गावं केँ लोग भि सोरहे होंगे। तभी अचानक मुझेलगा जैसे मे भीगरहा हूं! जब मे टौर्च देखा तोँ पानीचाट सें आँ रता थां। अरेयह क्याँ बाहर् बारिस हौ रही हैं आंधी-तूफ़ान केँ संग। मैंने खाट हटाये औऱ मम्मी कों बोला "मम्मी यहघऱ पानी सें भर गय़ा हैं। दरवाजा खोलो"२-३ आवाज़ लगाने केँ बाद मम्मी नें दरवाजा खोला, मे देखता हि रह गय़ा। मे मां कों आज पहलीबार पेटीकोट औऱ ब्रा मे देखरहा थां। तभी मां बोल पारी "बारिस तौ बहुततेज होँ रही हैं." फिन मे अपने-आप् पे काबू किया। औऱ बोला "मेरा सारा पलंगभीग गय़ा अब मे कहां सोऊंगा? अभि तोँ ९:४५ हि हूवा हैं." तौ मम्मी बोलि "लगता हैं अब उसकोफिन सें रिपेयर करवाना परेगा। रुपया भि नहि हैं केसे होगायह सभी?" तौ मे बोला "मां वोँ सभीबाद मे सोचेंगे। अभि मे कहां सोंऊ?"चलो मेरे पलंग पे हि सोजाओ " मे यह सुनते हि मन-हि-मन इतनाखुश हूवा कि मे क्याँ बताऊँ.?
बेटे नें माँ कों रगड़ रगड़ केँ चोदा – New Episode
मेरा लण्ड तोँ फुफकार माररहा थां पऱ मे सब्रकर रहा थां। वैसे भि किसी नें कहा हैं सब्र कां फल मीठा होता हैं। फिन मे मम्मी केँ कमरे मे घुसा मां भि दरवाजा बंद करके अन्दर आँ गई,। मैंने मां कों बोला "मां तुम् दिवार केँ साइड मे होँ जाओ"। मेरा प्लान तोँ कुछ औऱ हि थां। मुझेइस मौके कों किसी भि हाल मे गवाना नहि थां चाहे इसकेलिए कुछ भि करनापड़े। मम्मी दीवाल साइडचली गई,। मे भि बनियान औऱ अंडर बीयर पहना थां वैसे हि बैड पऱ लेट गय़ा। ओढने केँ लिए एक् हि कम्बल थां। इसलिये हम् दोनों नें एक् कम्बल मे हि ढकगए.फिन मे बोला "बारिस बहुततेज होँ रही हैं, कहीं वोँ घऱगिर नां जाए!" तोँ मां बोलि "उसको जितना जल्द होँ सके रिपेयर करवाना होगा। पर्र पैसे कहां सें आयेंगे? लगता हैं फिन सें कर्ज लेना होगा" तोँ मे बोला "छोरो नां मां.!!! इतनी चिंता क्यूं कररही होँ? जोँ होगा देखा जायेगा"। ऐसे हि बहुतदेर तक बात करतारहा। करीब-करीब ११:०० बजने वाले थें। मे बात करते-करते मम्मी कि तरफ खिसकता चलाजा रहा थां। मां दीवाल सें बिलकुल चिपक चुकी थि.
अब मे अपना मकसद पूरा करना चाहता थां। इसीलिए मैंने टॉपिक चेंज किया। औऱ बोला "मम्मी तुमपे यह ब्रा बहुत अच्छा लगता हें" मम्मी कों अपनी तारीफ सुनने मे बहुत अच्छा लगता थां। २-४ तारीफ़ कि पूल बाँध देने सें मम्मी उसके प्रति भाऊक होँ जाती थि। इसीलिए मैंने यहीसही समझा। तोँ मम्मी बोलीं "ऐसी बातेमत करो तुम्." तोँ मे मां कों बांहों मे लेतेहूए बोला "मम्मी मे झूठ थोरे नाँ बोलरहा हूं। पिताजी नें कभी बताया नहि क्याँ कि आप् कितनी हसीन हें.?" "यह क्याँ कररहे होँ तुम्? मुझे छोरो बेटा.!!" कहते हुवे मुझसे छूटने कि कोशिश करनेलगी। तौ मे भि छोरते हूवेकहा "मम्मी मुझेठंढ लगरही हैं इसलिये सोचा आपके जिस्म कि गर्मि सें.!" मां बात कों काटते हूवे बोलीं " क्याँ मे कोईआग हूं जोँ मुझसे तुम्हारे ठंढदूर होँ जाएगा.?" तौ मे बोला "आप् आग तोँ नहि हैं पऱ उससेकम भि तोँ नहि हें."
औऱ मे उनसे एकदम चिपक गय़ा। दर भि रहा थां औऱ यह मौका भि नहि गवाना चाहता थां। हम् दोनों करोट सोयेहुए थें, मां कां दयाहाथ निचे थां औऱ मेरा बायाँ हाथ निचे थां। मे अपने पांव सें उनकेपेर कों भि रगररहा थां। तभी मां बोलीं "आज तेरी क्याँ हूवा हैं? ऐसा क्यूं कररहा हैं? मुझेयह सभी अच्छा नहि लगता." शायद मां कों समझ आँ रहा थां कि मै क्याँ चाहता थां? इससे मेरा भि हौसला बढ़ गय़ा। तौ मे उनके जिस्म पे अपनाहाथ फेरते हुवेकहा "मे तौ बस आपको प्रेम करना चाहता हूं। मे अच्छी तरह जनता हूं कि आप् बापू कि कमी हमेशा महसूस करते हें" तोँ मां एक् लम्बा सांस लेकर बोलीं "वोँ तौ मे हमेशा महसूस करती हूं पऱ कर भि क्याँ सकती हूं। अगर वोँ बहार नहि जायेंगे तोँ रुपया कहां सें आएगा?"तभी मे बात काटते हुवे बोला"इसी लिए तोँ मे बोलरहा हूं आप् मुझे प्रेम करने कां मौका दिजिये, मे आपको हमेशा खुश रखूंगा। मे आपकोइस तरह तडपते हूवे नहि देख सकता"
औऱ मे उनकेहोठ पे किस्स करनेलगा तोँ मां मुझे हटाते हुवे बोलि " तुम्हे लज्जा नहि आती अपनी मम्मी केँ संगऐसा करते हूवे.जब लोगो कों पता चलेगा तोँ क्याँ होगा? तुमने नें कभी सोचा हैं?" तोँ मे मां कों फिन सें जोर सें बांहों मे कसते हूवेकहा "लोगो कां क्याँ मम्मी? लोगो कों केसेपता चलेगा? जब हम् दोनों मेसेकोई किसी कों बोलेगा हि नहि तोँ लोगो कों क्याँ पता होगा मां? बस तुम् एक् बारहाँ करदो बंकिसभी मुझ पर्र छोड़दो." मे मां कों दोनों पैरो सें औऱ हाथो सें कास केँ पकड़रखा थां। मम्मी मुझसे छूटने कि कोशिश करते हूवे बोलि "यहगलत हैं यहपाप हैं। तुम् समझते क्यूं नहि मे तुम्हारी मां हूं तुम्हारी बीबी नहि बेटा" तौ मे बोला"हाँ मम्मी मे जानता हूं कि तुम् मेरी सेक्सी मां हौ औऱ मे तुम्हारा बेटा। पऱ तुम् यह मत्त सोचो तुम् यह सोंचो तुम् एक् स्त्री होँ जिसको मर्द कि जरूरत हैं, औऱ मे एक् मर्द हूं जिसे एक् महिला कि जरूरत हैं। इससे हम् दोनों एक् दुसरे कां प्यास बूझा सकते हें." तोँ फिन मम्मी बोलीं "पर्र यहसही नहि हैं बेटा, यहगलत हैं" तोँ फिन मे बोला"कुछ गलत नहि हैं मम्मी, इससेदो फाईदे हि हें." तोँ मां बोलीं "क्याँ क्याँ?" मुझेयह सुनकर लगा कि अब मम्मी पटतीजा रही हैं। फिन मे बोला"ऐसा करने सें तुम्हारी भि प्यास बूझ जाएगी औऱ मेरी भि। औऱ घऱ कि इज्ज़त घऱ मे"
तौ फिन मां बोलीं "पर्र बेटा अगर किसी कों पताचल गय़ा तौ क्याँ होगा। हम् किसी कों समाज मे मूह दिखने लायक नहि रहेंगे। हमारी नोनाक कट जाएगी." तोँ फिन मे उनकेऊपर आँ कर एक् जोरदार किस्स लिया औऱ कहा "मम्मी तुम्हे अपने बेटे पे भरोसा नहि हैं। यहबात किसी कों मालूम नहि होगी, यहा तक कि बापू कों भि नहि। जब पिताजी घऱ पऱ होंगे तोँ आप् बापू सें प्रेम करवाना। औऱ जबचले जाएंगे तोँ फिन मे आपको प्रेम करूंगा। इससे आपको बापू कि कमीकभी नहि महसूस होगी." औऱ फिन मे अपनी मम्मी लें होठो पऱ अपनाहोठ रखकर चूमने लगा! मां अबकुछ नहि बोलरही थि। शायदअब उनकोमुझ पर्र भरोशा हौ गय़ा। बहार बारिस बहुततेज हौ रही थि औऱ अंडर मेरी औऱ मां कि गर्मी बढ़रही थि। मां कों मे बेतहासा चूमरहा थां। अब मां भि मेरासंग देनेलगी! अब वोँ भि मेरे होठो कों चूमरही थि। मे मन-हि-मन इतनाखुश हुवा कि मे आपको शब्दों मे बता नहि सकता.
यह वहीसमझ सकता हैं जोँ अपनी मां कों चोदता हैं। अब मे मम्मी कि गाल कों चूमरहा थां एक्-दो बार दांत भि गारा दिया जिससे मम्मी केँ मूंह सें आह्ह्हह्ह!!! निकल जाता थां! अब मे उनके कंधो औऱ गर्दन कों चूमरहा थां औऱ मां मेरेबदन पऱ अपनाहाथ फेररही थि। मे इतनीजोश मे आँ चूका थां कि कह नहि सकताबस मे इस मौके कों भूनाना चाहता थां। इसलिए मां कों मे होश मे नहि आने देना चाहता थां। फिन मे मम्मी कि मम्मों कों ब्रा केँ ऊपर सें दवाते हूवेकहा "अहह.!! मां क्याँ मस्त मम्मों हैं तुम्हारे। जरा इसकी दर्शन करवाओ मां। अपनी ब्रा कों हटादो." तोँ मम्मी नें अपनी छाती कों ऊपर उठाया औऱ बोलि "निचे सें हूकखोल लें। मे हूक खोलने कि कोशिश कि पर्र खुल नहि रहा थां! इसके बारे मे मुझे मालूम भि नहि थां कि केसे खुलता हैं। मे इतना वक़्त बर्बाद नहि करना चाहता थां इसीलिए मे ब्रा केँ दोनों तरफ पाकर केँ खीचा जिससे ब्रा कि हूकटूट गई,। तौ मम्मी बोलपड़ी "मे कहीं भागी नहि जारही हूं तुम् इतनी जल्द मे क्यूं हौ। मालूम हैं नाँ जल्द कां काम सैतान कां" तौ मे बोला "मुझसे खुल नहि रहा थां मम्मी तौ मे क्याँ करता?" कहते हूवे ब्रा कों एक् तरफफेक दिया! मां कि चुचिया देखकर मेरी आँखे चौंधिया गय़ा थां। क्याँ मध्य प्रकार कि गोरी-गोरी मखमल सें भि रसीले कासी-कासी चुचिया थि। मे मम्मी कि मम्मों पऱ पर्र टूट पड़ा!कभी मसलता कों कभी चूसता! मम्मी केँ मूंह सें "सीईईई। सीईईईई.!!" कि आवाजे आनेलगी थि। चुचिया आरामसे शख्त होतेजा रहे थें। मां कों शायदअब जब मे चुचियों कों मसलता तोँ दर्द होनेलगा थां.
शायदइसी लिएजब भि मे मम्मी कि चुचियो कों मसलता तोँ वोँ मेरेहाथ कों हटाने कि कोशिश करती। पऱ मे नहि हटाता! आखिर वाहन मां सें रहा नहि गय़ा औऱ बोलीं " मम्मों पे हि लगा रहेगा क्याँ? निचे नहि जाएगा?" बस मे तोँ यही चाहता थां कि मां स्वयं बोले.तब मैंने २-४बार जोर सें मम्मों मसल दिया! मम्मी दर्द सें छटपटाते हूवे बोलि "आह्ह्ह्हह्ह.!!! मर्रर्रर्र गयीईईईई.!!!"
फिन मैंने उनके मम्मों कों छोड़कर अब उनके पेटीकोट खोलने लगा! पेटीकोट कां नाडा खोला औऱ पेटीकोट कों निचे कि ओर लें गय़ा मैंने देखा मां निचे पिंककलर कां चड्डी पहनरखी थि जोँ पूरीतरह सें भींग चूका थां! जब मैंने मम्मी कि चड्डी कों निकला तौ मेरे मूंह सें बरबस निकल गय़ा "वाहह.! क्याँ बूर हैं! बूर पूरीतरह सें बाल सें भरा हुवा थां औऱ पानी निकलरहा थां! मे अपना वक़्त ख़राब नाँ करते हूवे एक् तकिया लिया औऱ मां कि कमर केँ निचेरख दिया! जिससे मां कि बूर औऱ ऊपरउठ गय़ा। फिन क्याँ थां मैंने अपना मूंहउस बूर पऱ रख दिया! औऱ कुत्ते कीतरह चाटने गला! मेरा मूंह अपनेबूर पर्र पाते हि मां केँ मूह सें आह्ह्ह.!! निकल गयीँ,.
क्रमशः।
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मे उनकेउस बुर केँ रस केँ कों पिरहा थां पहले तोँ कुछ अजीब सां लगा। थोडा सां नमकीन, पऱ थोड़ीदेर बाद अच्छा लगनेलगा! मे खूब मस्ती मे चाटरहा थां। मम्मी कों भि मज़ा आँ रहा थां उनके मूंह सें लगातार सीईईईईई.!!! सीईईईईइ.!!!! कां आवाज़ आँ रहा थां। औऱ अपने जांघों केँ बिच मेरेसर कों दबारही थि। मे कुत्ते कि तरह मां केँ बुर कों चाटेजा रहा थां। अबसभी रस मे चाट चूका थां। फिन मैंने उनकेछुट मे अपनाजीभ डाल दिया। मम्मी तरपउठी "आह्ह्ह.!! क्याँ पेल दिया बेटा." मे कुछ नहि बोला औऱ अपनीजीभ कों अन्दर-बहार करनेलगा। क्याँ मज़ा आँ रहा थां। जब भि जीभ अंडर जाता मम्मी आह्ह्ह्ह!!! कर बैठती। मस्ती सें मां कि बूर कों अपनेजीभ सें चोदेजा रहा थां। मां भि मस्ती मे थि उसे भि मज़ा आँ रहा थां। लगभग१० मिनट केँ बाद मां बोलीं "बेटा अब मे नहि रोक सकती मेरा आँ रहा हैं" मम्मी केँ इतना कहते हि मुझे महसूस हुवा कि मम्मी केँ बुर सें कुछ गरमा-गर्म पानी जैसा लस्से दर द्रव निकलरहा थां। मम्मी अपनेबदन कों पूरीतरह टाईट कां रखी थि! मैंने अपने दोनों होठ सें मम्मी केँ बुर केँ छेद पर्र कब्ज़ा जमाया औऱ सारा द्रव पिता चला गय़ा। यह पीते हि जैसे मेरे लन्ड मे औऱ ताकत आँ गय़ा! लन्ड औऱ मोटा औऱ टाईट हौ गय़ा। मे तब-तक मां केँ बुर कों चाटता रहा जब-तक एक्-एक् कतरा नाँ पि गय़ा.
मम्मी अब बिलकुल ढीली पर्र चुकी थि। तब मैंने मां सें पूछा " कैसालगा मां? मेरी मेहनत कामआया याँ नहि। अब कैसालग रहा हैं तुमको? मज़ाआया." तोँ मां बोलीं "मे तोँ जन्नत कि सैर करकेचली आई बेटा। ऐसालग रहा थां जैसे मे जन्नत मे हूं। आज१साल औऱ ४ महीने बाद मे झड़ी हूं। दिलखुश कर दिया तुने मेरेलाल." अब मुझसे भि रहा नहि जारहा थां। मेरा भि लन्ड मां कि बूर मे हलचल मचने केँ लिए सजधजकर थां। मैंने बिस्तर परसे सारे एक्स्ट्रा कपडेहटा दिए मम्मी कि पेटीकोट औऱ चड्डी भि निकाल कर एक् तरफफेक दिया जोँ अभि तक मम्मी कि पैसे मे थां। रजाई तोशक भि हटादिए। अब सिर्फ मे थां मेरी पूरीतरह नंगी मम्मी थि। क्याँ लगरही थि गजब कि फिगर गोरी-गोरी बदाग शरीर मखमल सें भि रसीले स्किन, त्वचा। जूसीहोठ.
मुझसे रहा नहि गय़ा मे फिन सें मम्मी कों बांहों मे लेकर चूमने लगा। मम्मी भि संग देनेलगी। लगभग५ मिनट तक एक्-दुसरे कों चूमने-चाटने केँ बाद मे बोला " मम्मी अब मुझसे नहि रहा जायेगा बसअबपीठ केँ बलसो जावो." तोँ मां बोलीं "सोती हूं बेटा, पर्र तूं अपना चड्डी तौ खोलजरा मे भि तौ देखू कि मेरे बेटेला लन्ड कितना बड़ा हैं.? जौ आज अपनी मां कों हि छोड़ने जारहा हैं। जराखोल तोँ इसे." तौ फिन मे कों कहा "मम्मी तुम् स्वयं हि खोलकर देखलो नाँ। मे तौ रोज खोलता हूं। आज तुम् खोलदो." तौ फिन मम्मी बोलि "कोईबात नहि लाओ मे हि खोलदूँ." तोँ मे बिस्तर पऱ खड़ा होँ गय़ा मां बैठे हूवे हि मेरे चड्डी कों निचे कि ओर खिंच दि। ज्यूँ हि लन्ड चड्डी केँ कैद सें आजाद हुवानाग कि भांति मम्मी कों ललकारने लगा। मम्मी मेरा९ इंच लम्बा औऱ ४इंच मोटा लन्ड देखते हि डर गयीँ,। "यह तोँ तुम्हारे बाप केँ लन्ड सें बहुत बड़ा हैं। मेरीबूर तोँ फट जाएगी इससे." मम्मी बोलीं! तोँ मे उनको हौसला देते हूवेकहा "अरे मां! ऐसाकुछ नहि होता.बूर बने हें लन्ड केँ लिए, औऱ लन्ड बने हें बूर केँ लिए! तौ फिनबूर केसेफट जायेगा। तुम् चिंता मत्तकरो तुम्हे कुछ नहि होगा." मे यह कहते हूवे अपने लन्ड कों मम्मी केँ मूंह पे सता दियाऔ कहा "मां जरा चुसोइसे." तौ मां बोलीं "छिं मे लन्ड कों अपने मूंह सें केसे चुसू.यह अछिबात नहि हैं। मुझे घृणा होती हैं." तौ मे बोला "मम्मी मे जैसा कहता हूं वैसाकरो बहुतमज़ा आएगा.बस जैसा-जैसा कहती हूं वैसा-वैसा करतीजाओ." पहले तौ नहि मानरही थि पर्र कितना कहने केँ बाद चूसने केँ लिए राजी होँ गई,.
मम्मी कां कोमलहाथ जैसे हि मेरे लन्ड पऱ पड़ा लन्ड औऱ फूल गय़ा। मम्मी केँ कितनी दिक्कत सें मान कि मूंह मे गय़ा। मां कां मूंह मेरे लन्ड सें पूरीतरह भर चूका थां। वोँ चूसने लगीहाय रे! क्याँ मज़ाआने लगा। मुझेऐसी ख़ुशी कभी नहि मिली थि। औऱ उसमे मम्मी सें चुस्बाने कि तौ मज़ा हि कुछ औऱ थां। मे आनंदित होँ रहा थां। मैंने कई किताबो मे सुना थां। जब मर्द पहलीबार सेक्स करता हैं तौ वोँ जल्दझड जाता हैं। मां पिछले ५-७ मिनट सें चूसरही थि। तौ मे मां कों बोला " मां झड जाऊं तौ मेरा लन्ड फिन सें चाटना। चाट-चाट करइसे फिन सें खड़ा करना." मम्मी नें ओके! केँ इशारे मे सर हिलाया। तभी मुझे एक् इडिया आया क्यूं नां अभि मां कि मूंह कों छोड़ा जाए.फिन मे मां कों दीवार कि ओर लें गय़ा औऱ उनकेसर केँ पीछे तकिया रखा औऱ उनको दीवार मे सटाते हूवेकहा "मम्मी अब तुम् चुसना मत्त मे तुम्हे एक् दूसरा मज़ा देता हूं। बस मूंह खोले रखना। औऱ ढीला रखना."
वैसे लन्ड तौ उनके मूंह मे भरा हुवा पहले सें हि थां। फिन मैंने लन्ड कों थोडा बाहर् निकला। सुपाडा मूंह मे हि थां। फिन धीरे-धीरे सें लन्ड कों अंडर कि ओर धक्का दिया! अभि ३-४इंच लन्ड सें मम्मी केँ मूंह कों छोड़रहा थां। आहिस्ता अन्दर-बाहर् करनेलगा! करते-करते धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ता गय़ा। जब रफ़्तार तेजपकड़ लिया तोँ मैंने अचानक एक् बहुत हि जोरदार धक्का मां केँ मूंह मे मार दिया। करीब-करीब ७इंच लन्ड मां केँ मूंह मे घुस गय़ा! वोँ तड़पने लगी। मां सांस नहि लेँ पारही थि। मैंने ४०-४५ सेकेण्ड लन्ड कों मां कि मूंह मे रखाफिन बाहर् निकल दिया। मां जोरजोर सें सांस लेने औऱ छोड़ने लगी.जब नॉर्मल हुवा तोँ बोलीं " यह क्याँ किया थां तुमने मेरी सासेरुक गयीँ, थि."
फिन मैंने अपना लन्ड उनके मूंह मे डालते हूवेकहा "अबऐसा नहि करूंगा." औऱ फिन मे मां केँ मूंह कों छोड़ने लगाइस बार५-६ इंच लन्ड सें! लगभग८-१० मिनट तक कि मूंह चुदाई केँ बाद मुझेऐसा लगा जैसे मेरे लन्ड सें अब वीर्य निकलने वाला हैं तोँ मे मम्मी कों बोला "मम्मी मे अब झाड़ने वाला हूं अब तुम् चूसो। औऱ फिनखड़ा करो मेरे लन्ड कों." इतना कहते हि मैंने अपने लन्ड सें मम्मी केँ मूंह मे एक् पिचकारी छोड़ दि। मम्मी कां मूंह वीर्य सें लबा-लब भर गय़ा। पऱ मे लन्ड कों मां केँ मूंह सें नहि निकाल रहा थां क्यूंकि मे चाहता थां मां मेरा वीर्य पिजाए! आखिर गाड़ी उसे पीना पड़ा। मे क्याँ बताऊँ कि कितना आनंदआया। मजे कि कोई सीमा नहि थि। कुछदेर बाद मैंने अपना लन्ड कों मम्मी केँ मूंह सें बाहर् निकला। अभि भि कुछकम नहि लगरहा थां मेरा लन्ड। मम्मी मेरे लन्ड कि तरफदेख कर बोलि "यह तुम्हारा लन्ड हैं याँ किसी घोड़े कां.?" तौ मे बोला "तुमने अगर घोड़े कों जनम दिया हैं तौ घोड़े कां हि हैं" मम्मी हस्ते हूवेफिन सें मेरा लन्ड चाटने लगी.
कभी मम्मी कि निचले होठ कों मुह मे लेकर चूसता तौ कभीऊपर केँ होठ कों, औऱ संग हि संगउने मम्मों कों भि मसलरहा थां! अभि मे लन्ड कों वहीरोक रखा थां, लगभग८-१० मिनट तक मे मम्मी कों ऐसे हि चूमता-चाटता रहा औऱ मम्मों कों मसलता रहा.तब जाके मां शांतहूई! तौ मैंने मां सें पूछा"अब कैसालग रहा हैं मां.? अब दर्दकम हुवा.?" तोँ मम्मी बोलीं "हाँअब जाकेकुछ दर्दकम हुवा हैं, पऱ तुम् अपना लन्ड मेरे बुर सें निकाल नहि तौ मे मर जाऊंगी" तोँ मैंने बारे प्रेम सें उनके होठो कों चूमा औऱ बोला "कैसी बाते करती होँ मां! यह लन्ड तेरे बेटे कां हैं यह बुर केँ लिए हि तोँ हैं, भला लन्ड सें कोई मरता हैं। औऱ मे भि तोँ इसी बुर सें निकला हूं। जब तुम्हे तबकुछ नहि हुवा तौ अब क्याँ होगा.?" तोँ फिन मम्मी बोलि "हाँ! पर्र उसदिन मुझे तुम्हे निकालते टाइम इतना दर्द नहि हुवा थां जितना आज होँ रहा हैं। ऐसालग रहा हैं जैसे मेरे दोनों टांगअलग कररहे हौ तुम् मेरी बुर कों चीरते हूवे!"
फिन मैंने सोचा मां ऐसे मानने वाली नहि हैं। तौ मैंने लन्ड कों वहीरोक कर मम्मी कों फिन सें चूमने-चाटने लगा। मे होठ कों चूमा औऱ बोला "मां तुम्हारी होठ कितनी रशिली हैं! पिताजी तौ तुमपे पागल हौ जाते होंगे!" औऱ फिन मे उनके गर्दन कों चूमने लगा। तौ फिन मम्मी बिली "तुम्हारे बापू तोँ मुझेकभी चुमते -चाटते नहि हैं बस बुर मे लन्ड डाल केँ १०-२० धक्के लगाते हैं औऱ बससो जाते हैं." मे मां कि ध्यान सें यह हटाना चाहता थां कि उसके बुर मे मेरा लन्ड हैं! मे मे कुत्ते कि तरह उनकेगाल, गर्दन, औऱ होठ कों चूमरहा थां। कभी-कभी मां मे कान केँ निचे मे अपना दांत गारा देता जिससे मां चींख उठती "आःह्ह। क्याँ कररहा हैं जालिम। अपनी मां कों इतना सताएगा." तोँ मे बोला "मे अपने प्यारी मां कों प्रेम कररहा हूं। आप् चुपरहो." मां भि इस क्रिया कां मजाउठा रही थि आखिरउसे इसतरह पिताजी नें कभी प्रेम किया नहि थां। मां अबभूल चुकी थि कि उनके बुर मे उनके बेटे यानी मेरा होतातगर लन्ड परा हुवा हैं, जौ अन्दर जाने केँ लिएतरप रहा हैं.!
मम्मी मेरेबाल सहलारही थि तौ कभी मेरेपीठ पे हाथफेर कर मेरा हौसला बाधारही थि। थोड़ीदेर तक ऐसे हि चलतारहा। फिन मे मम्मी कों चुमते हूवे हि, ताकि उन्हें पता नां चले, मे अपने दोनों हाथ सें उनको अपने गिरफ्त मे लेँ चूका थां! मुझे मालूम थां कि मम्मी बचने कि भरपूर कोशिश करेगी। इसलिए मैंने इसतरह पाकर कि कितना भि कोशिश कर लेँ मम्मी मुझसे बच नाँ सके! मे मां कों इसबात कां खबर नहि होने दिया.जब वोँ मेरी गिरफ्त मे पूरीतरह आँ गयीँ, तौ मैंने एक् औऱ जोरदार धक्का दिया। मम्मी चिल्लाने लगी "मे मर्र्र्रर्र्र्रर। गेईई। मुझेछोड़ दीईईए। आआहहह्ह्ह। मेरी बुर फत्त्त्त गेई." मम्मी रोनेलगी औऱ बोलरही थि "मे तुम्हारे हाथ जोरती हूं। मुझेछोड़ दे मे मार जाऊंगी." पर्र इसबार मे मां कि बातो पे ध्यान नहि देरहा थां। मे चोदेजा रहा थां.
मेरी तोँ बस एक् हि तमन्ना थि कि आजइसछुट कि धज्जिया उड़ादू जिससे मे बाहर् निकला। मां पसीने सें नहा चुकी थि। उनकेबाल गर्दन सभी पसीने सें तर हौ चूका थां, पसीने कि बदबू मुझे औऱ मदहोश कररहा थां। मे मां कों सरक कि रंडी कि तरह छोड़रहा थां फिरभी लन्ड अभि भि पूरा नहि घुसा थां अभि भि करीब-करीब १-२इंच अन्दर जानां थां। मम्मी मुझसे लगातार विनती कररही थि "बेटा मुझेछोड़ दे मे तुम्हारी मम्मी हूं। मे मार जाऊंगी। यह तेरा लन्ड मेरे जैसे छोटेछुट केँ लिए नहि हें। आअआआहहह्ह्ह। मार्र्र माँआरररररररररर्रर्र डाला रेईई.!" मे कुछ नहि सुनरहा थां लगातार चोदेजा रहा थां। एक् तरह सें मे मां कां रेप (बलात्कार) कररहा थां.
लगभग१५ मिनट केँ चुदाई केँ बाद वोँ नोर्मल हूई औऱ अपना चुतरऊपर उछलने लगी.तभी मैंने बारे प्रेम सें मम्मी कों चूमा औऱ पूछा "मज़ा आँ रहा हैं मम्मी.?" तौ मां बोलीं "तुम् तौ बरे जालिम होँ। मैन तोँ मार हि जातीआज। भला इतना मोटा तगरा लन्ड किसी कां होता हैं। यह व्यक्ति कां लन्ड हैं याँ घोड़े कां." तोँ मे बड़े प्रेम सें उसके forehead (सर, आँख केँ ऊपर कां हिस्सा, कपार) कों चूमा औऱ कहा "मां यह तेरे बेटे कां लन्ड हैं जौ इसी बुर सें निकला थां." तभी मां बोलि "औऱ आजइसी बुर कों फारने पे लगा हुवा हैं." औऱ हसनेलगी.! तभी मे बोला"हर मम्मी कों ऐसा बेटा नसीब थोड़े होता हैं जौ उसी कि बुर कि प्यास बुझाए" तौ मां बोलि "हम्म!यह भि सही हैं."
इसीतरह बात-चित जारी थि। तभी मम्मी बोलीं "अब मे झररही हूं जोर सें धक्के मार." मैंने भि जोर सें एक् धक्का मारा कि मम्मी फिन सें तिलमिला उठी.तभी उनके बुर सें ढेर सारा पानी बहनेलगा.! मेरा लन्ड मां कि बुर कि पानी मे नहा केँ औऱ फूल गय़ा। औऱ चिकना हौ गय़ा। (जौ १इंच केँ करीब बाकी थां मै वोँ भि घुसा चूका थां इसलिए मां तिलमिलाई थि.) अब लन्ड भि थोडा आसानी सें बाहर्-अन्दर हौ रहा थां। मैंने लन्ड कों मम्मी केँ बुर मे पूरा घुसाकर उनको बांहों मे भरा औऱ उठाकर बिस्तर सें निचे लें आया, तोँ मां बोलि "क्याँ कररहा हैं.? कहां लें जारहा हैं.?" मे बोला "कहीं नहि मां। बस तुम् देखती रहो."फिन मैंने मम्मी केँ कमर तक कां हिस्सा बिस्तर पर्र रखा, औऱ टांग कों मैंने हाथ सें पाकरलिए औऱ फिन छोड़ने लगा तोँ मम्मी बोलि "केसे-केसे छोड़रहा हैं। कहां सें सिखायह सभी.?" तौ मे बोला"कही सें नहि मम्मी बस चुदाई कि कुछ फोटो देखे हें इसतरह केँ." औऱ मे छोड़ने लगा.!! बाहर् कुछअलग हि तूफान बहरहा थां औऱ घऱ मे कुछअलग हि, मुझे तौ घऱ केँ अन्दर कि तूफ़ान मनपसंद थां.
इसीबीच मां फिन सें एक् बारजहर गई,.!! अबघऱ मे फच-फच कि आवाज़ गूंजने लगी.घऱ कां बातावरण एकदमबदल चूका थां। कभी-कभी मम्मी मेरीआँख मे देखकर हंस भि देती थि फच-फच कि आवाज़ सुनकर। एक् बारऐसे हि हसते हूवे बोलि "कितना कमीना हैं मेरा बेटा.!! अपनी मम्मी कों चोद दियाआज। तुँ अब माधरचोद हैं बेटा." मे हंस दिया औऱ चोदता रहा लगभग१ घंटे कि चुदाई केँ बाद मे अब झरने वाला थां तोँ मे बोला "मां मे अब झरने वाला हूं." तोँ मां बोलि "थोडा संभल अपने आप् कों मे भि झरनेवाली हूं.!" फिन मैंने धोरा संभाला अपनाप कों औऱ फिन १०-१२ जोरदार धक्के दिएफिन हम् दोनों झरगए। मे उनकेऊपर वैसे हि लेट गय़ा। मुझमे उतनी ताकत नहि थि कि मे ऊपरचढ़ सकू।
बेटे नें माँ कों रगड़ रगड़ केँ चोदा - Kahani ab aur interesting hogi
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