My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 81
उसकीबात सुनकर, कुछदेर तोँ मे सन्नाटे कि स्थिति मे चली गई,, मगरजब उसनेफिन कहा – देखो दिदी, आप् प्रॉमिस कर चुकी होँ, प्लीज़ बस एक् रात केँ लिए, फिन कभी नहीं कहूँगी…
मे चाहती हूं, मेरी फर्स्ट नाइट जीजू जैसे शेरदिल मर्द केँ संग मे होँ…
मे – तोँ फिन तुमने क्याँ कहा …?
ट्रिशा – मे क्याँ कहती, मैने उससेकह दिया कि उनकी वोँ जानें, मे इस बारे मे कुछ नहींकह सकती…
बस तभी सें वोँ मायूस हौ गई,, औऱ गुम-सूम सि रहनेलगी। मैनेउसे काफ़ी समझाने कि कोशिश भि कि, कि देखयह बात तेरे जीजूकतई नहीं मानेंगे, मगर उसनेफिन कोई जबाब नहीं दिया।
बातों बातों मे मैने उसके गाउन कों उसकी टाँगों सें भि हटा दिया थां, गुलाबी रंग कि पेंटी केँ उपर सें उसकी मुनिया कों सहलाते हुए मे बोला - तोँ तुमने फाइनली उसको क्याँ जबाब दिया.?
ट्रिशा भि मेरे अंडरवेर केँ उपर सें मेरे लन्ड कों सहलाते हुए बोलि - आपके बारे मे मे उसको केसेहां कर देती.? आप् इसकेलिए सजधजकर नहींहुए तौ.?
मे - तोँ क्याँ तुम् अपने पति कों, अपनी बहन केँ प्रेम केँ लिए बाँट सकती हौ.?
ट्रिशा - मे कॉन होती हूं आपके बारे मे कुछ भि डिसाइड करने वाली.?
अब मेरे प्रयासों सें उसकी पेंटी कमरस सें गीली होनेलगी थि, तोँ मैनेउसे एक् साइड मे किया औऱ उसकी गीली पुसी मे एक् उंगली डालकर कहा –
अगर मे यह कहूँ कि तुम्हारी खुशी केँ लिए मे अपना प्रेम उसे देने कों रेडी हूं तोँ.?
ट्रिशा सिसकी भरतेहुए बोलि – सस्सिईईईई….आअहह…सस्साच ! सच मे आप् उसको अपना प्रेम दे सकते हें.?
मे - तुम्हें कोई एतराज नहीं होगा इसमें.?
ट्रिशा अपनीकमर हिलाते हुए बोलीं - मुझेभला क्यूं एतराज होगा.? ससिईई…।
अगर आप् अपनी खुशी सें उसको प्रेम देरहे हें तौ, मेरी खुशी तौ आप् दोनो कि खुशी मे हि हैं।
वोँ फिन अपनी गान्ड उचकते हुए बोलि - वैसेअगर वोँ खुश रहेगी तोँ मुझे अच्छा लगेगाआ….आआईयईई….सस्सिईइ…
मेरी भि एक्सिटमेंट बढ़ती जारही थि, सो मैने अपनीदो उंगली उसकीरस सें लबरेज़ पुसी मे जड़ तक पेल दि। औऱ अंदर बाहर् करकेउसे हाथ सें हि चोदने लगा…
कुछ हि देर मे ट्रिशा कि कमरहवा मे लहराउठी, औऱ उसने अपना कामरस छोड़ दिया…
जब वोँ नॉर्मल हुई, तोँ उसने मेरे लबों कों चूम लिया.
मे उसकीओर देखता हि रह गय़ा। कितना त्याग भरा हैं इस लड़की मे, अपनी बहन कि खुशी केँ लिए.,
जहाँ एक् तरफ समाज मे नां जानेऐसे कितने केसस हें, कि पति-पत्नि केँ संबंधों मे केवलशक़ केँ आधार पऱ हि खटास आँ जाती हैं, यहा तक कि नौबत तलाक़ तक पहुँच जाती हैं.
वहींयह लड़की, अपनी बहन कि खुशी केँ लिए, अपने पति कों बाँटने तक कों खुशी खुशी सजधजकर हौ गई, …
जब मे कुछदेर उसकीओर ताज्जुब सें देखता रहा तोँ वोँ बोलीं- ऐसे क्याँ देखरहे हें जी.?
मे - देखरहा हूं कि इतना त्याग भि कोईकर सकता हैं.! मगरजान ! उसकी तौ कुछ महीनो बाद विवाह हैं, फिन वोँ अपने पति कों केसे…??
मैने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया थां.
ट्रिशा - वोँ उसकी प्राब्लम हैं, मुझे लगता हैं वोँ इस रिस्ते सें ज्यादा खुश नहीं हैं, बस भइया कि खुशी औऱ बात रखने केँ लिए राज़ी हुईँ हैं.
मे - ठीक हैं, अगर तुम् खुश हौ तौ मे तुम्हारी खुशी केँ लिएकुछ भि कर सकता हूं.
ट्रिशा - ओह जानू ! आप् कितने अच्छे हें। ? आइलवयू ! तौ मे उसेभेज दूं आपकेपास.?
मे - अभि.?
ट्रिशा - हां.!फिन उसको औऱ ज्यादा क्यूं सताया जाए.?
मैने उसकेहोठ चूमते हुएकहा – मगरइस वक़्त तुम् तौ अपने हिस्से कां प्रेम लें लो पहले…
वोँ मेरेगाल कों किस करके बोलीं – वोँ तौ मे कभी भि लेँ लूँगी, पहले आप् उसको देदो…
मैने उसको अपने सीने सें सटाकर कहा - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.!
यह सुनते हि वोँ लपककर पालग सें उतरी औऱ खुशी मे डूबी हुईँ निशा केँ रूम कि ओरचली गई,, मेरे चेहरे पऱ एक् रहश्यमयि मुस्कान तैर गई,.
कुछदेर बाद हि दोनो बहनें मेरेपास आई, औऱ पलग पर्र बैठ गई,,
निशा कि आँखें लज्जा सें नीचे झुकी हुई थि। उसे बिठाकर ट्रिशा वहा सें जानेलगी, तोँ मैने उसकाहाथ पकड़कर रोकते हुएकहा-
अरे तुम् कहां चली जानेमन.?
वोँ बोलीं - मे जीजा-साली केँ बीच कबाब मे हड्डी क्यूं बनू.?लो सम्भालो अपनी प्यारी साली कों औऱ खिल खिलाकर हस्ती हुईँ रूम सें बाहर् भाग गई,.
निशा अभि भि अपनी नज़रें नीचीकिए बेड केँ एक् सिरे पर्र बैठी थि, इस टाइम वोँ एक् वनपीस झीनी सि गाउन पहनेहुए थि जिसके आर-पार उसके अधोवस्त्र भि सॉफ-2 दिखाई देरहे थें।
उसके मादक अंगों कों गाउन केँ अंदर सें हि तौलकर मेरा पप्पू अंगड़ाई लेनेलगा.
मे - निशा ! अब भि नाराज़ होँ मुझसे.?
निशा - नहीं तौ ! भला मे आपसे केसे नाराज़ हौ सकती हूं.?
मे - तोँ फिन अभि तक इतनीदूर क्यूं बैठी होँ.? याँ फिन सिर्फ़ ऐसे हि बैठने केँ लिएआई होँ मेरेपास.?
निशा - ओह जीजू, आपने मुझेजिस तरह सें समझाया थां नाँ, तौ उसवजह सें मुझेअब आपसे लज्जा आँ रही हैं।
मे - ओह ! देखो निशा मे नहीं चाहता थां कि हम् दोनो कों लेकर हम् पति-पत्नि केँ बीचकोई ग़लत फेहमी पैदा हौ इसलिये मैने तुम्हें समझाया थां,
अबजब पत्नि हि अपनी बहन केँ प्रेम मे अपने पति कों शेयर करने कों सजधजकर हैं तोँ मे तोँ कब्से तुम्हें लपेटने केँ चक्कर मे थां.
निशा - सच.! आप् सचकहरहे हें जीजू.!
मे - बिल्कुल सच.! तुम्हारी जैसीहॉट औऱ सेक्सी लड़की कों कॉन नहीं भोगना चाहेगा.?
निशा - ओह जीजू.! थॅंकयू वेरीमच ! आइलवयू ! औऱ सारे शर्मो हया बंधन तोड़-घूर केँ वोँ मेरेउपर चढ़, मेरीगोद मे आँ बैठी.
उसके उभार मेरे सीने मे दबेहुए थें, औऱ वोँ मेरी आँखों मे झाँकरही थि,
मैने प्रेम सें उसके मुलायम होठों पऱ अपना अंगूठा फिराया औऱ बोला - ऐसा क्याँ पसन्द आया तुम्हें मेरे अंदर जोँ इतनी बाबली होँ रही हौ.?
निशा - क्याँ नहीं हैं आपके अंदर जिसेदेख करकोई भि लड़की फिदा नां होँ.?
सबसे बड़ी आपकी ख़ासियत जौ मुझेभा गयीँ, हैं, वोँ हैं आपका मर्दाना अंदाज जोँ हर लड़की कों चाहिए, डेरिंग जौ किसी कि भि केयरकर सके.
मे - मगरयह सभी तोँ तुम्हारे लिए टेम्परेरी हि हैं नाँ ! तुम्हारा प्यार करने वालीगाइ तौ कोई दूसरा हि हैं यह जानते हुए भि तुम् मेरेदो समय केँ प्रेम केँ लिएमरी जारही हौ। यह पागलपन क्यूं निशा.?
निशा - जीजू प्लीज़ ! केसे-2 करके मैने दिदी कों पटाया हैं, औऱ आप् फिन सें मुझे बहलारहे हौ। ! मुझे प्रेम करो नाँ! प्लीज़ जीजू। मेरे प्यारे जीजू.
मैने उसका मुँहबंद करने कि गरज सें अपनेहोठ उसके होठों पर्र रखदिए औऱ उन्हें चूमने-चूसने लगा,
वोँ तोँ थि हि इसीताक मे बसफिन क्याँ थां ! जुटगये एक् लंबी स्मूच मे.
होतजब अपनेकाम मे लगेहों, तौ हाथ केसे पीछे रहते, कस लिए उसके अनारों कों, औऱ जौ मसल दिया, निशाकिस तोड़कर सीसीयाने लगी….
सस्स्सिईईई… आअहह…गंदीए… जिजुउुउ… धीरे-धीरे… जोरे सें नहीं प्लेआस्ीई… दर्द्द्द…नहियिइ। ह…उफ़फ्फ़…माआ…
अरे मेरीजान मेरी कबुतरि, तेरेयह अनार हें हि इतने मस्त कि बस मसल्ने कों हि जी करता हैं…! मे बोला.
तौ आहिस्ता करो नाँ.! दर्द क्यूं देते हौ…?
मे - अरे मेरी रानी, इस दर्द मे भि अपनाअलग हि मजा हैं…औऱ कपड़े केँ उपर सें हि उसके निपल्स कों मरोड़ दिया.
नहियिइ…। जीजू। आप् बहोत गंदे हें… बहोत सताते हौ…!
फिन मैने उसकी गान्ड कों सहलते हुए उसके गाउन कों खोल दिया।
अब उसके गोरे- 2 गोल-मटोल इलाहाबादी अमरूद ब्रा मे कसेहुए मेरी आँखों केँ सामने थें.
उनकीशेप औऱ सुंदरता देखकर मेरी आँखों कि चुमकबढ़ गई, औऱ मैने उसकी घाटी केँ दाएँबाए अपने दाँत गढ़ादिए.
ओह जीजू काटोमत., निशान बन जाएँगे। वोँ बोलीं तौ मैनेकहा- बननेदे नाँ, इनको हि तौ लव बाइट्स कहते हें मेरीजान,
जब भि तुम् इन निशानों कों देखोगी तोँ मेरीयाद आएगी.
वोँ बोलीं - आपको तौ मे वैसे भि कभी भूलने वाली नहीं हूं.
पेंटी औऱ ब्रा मे कसा उसका सुडौल सफ़ेद जिस्म जोँ ट्रिशा सें अधिकभरा हुआ थां। उसके चुचे तोँ शपथ सें मेरीजान हि निकाले देरहे थें,
मैने ब्रा केँ उपर सें हि उन्हें अपने मुँह मे भर लिया औऱ बुरीतरह चबचबा डाला.
आआईयईई…। नहियीई…जिजुउू… ज़ोर्से नहीं… प्लीज़…!
मेरेहाथ उसकी गदराई गान्ड कां नाप लें रहे थें, औऱ मे उन्हें ज़ोर-2 मसलेजा रहा थां.
एक् भीनी सि मादकता सें भरी उसके शरीर कि गंध मेरे नथुनो मे समाती जारही थि, जोँ मुझे औऱ ज़यादा उत्तेजित कररही थि.
मैने मदहोशी केँ आलम मे उसे अपने सीने सें चिपका लिया औऱ उसे बेतहाशा चूमने लगा.
निशा केँ हाथ भि हरकत मे आए औऱ उसने मेरे अंडरवेर कों निकाल बाहर् किया। औऱ फिन वोँ मेरे घुटनों केँ बीचबैठ कर मेरे पप्पू कों हाथ मे लेकर सहलाने लगी, एक् बारचूम कर उसनेउसे अपने मुँह मे लेँ लिया.
जोँ काम ट्रिशा इतने समझाने बुझाने केँ बाद भि ठीक सें नहींकर पाई थि वोँ यह लन्ड कि दीवानी लौंडिया बिनाकुछ कहेकर रही थि, इसी सें साबित होता थां कि वोँ मेरे लन्ड केँ लिएकिस कदर ब्याकुल हैं.
जल्द हि मेरा लन्ड स्टील केँ रोड कि तरह शख्त होँ गय़ा., लगता थां कि अब वोँ किसी दीवार मे भि छेद कर्दे…!
मैने निशा कों पकड़ केँ बेड पऱ लिटा दिया, औऱ उसकी ब्रा औऱ पेंटी कों भि उसके शरीर सें अलगकर दिया.!अब वोँ मेरे सामने अजंता कि कोई मूरत पड़ी हौ ऐसालग रहा थां.
निशा नें अपनी दोनो टाँगों कों विपरीत दिशाओं मे फैला लिया औऱ अपनी अन्चुदि परी कों मेरे सामने खोलकर रख दिया.
मैने बड़ी प्यारी नज़रों सें उसके मदमस्त शरीर कों बैड पऱ मचलते हुए देखा औऱ अपने मूसल जैसे लन्ड पऱ थूकलगा कर उसकेउपर झुक गय़ा.
मैने लन्ड कों उसकी मुनिया कि फांकों केँ बीचरख कर उसकी आँखों मे झाँकते हुएकहा- आरयू तैयार डियर.?
निशा नें जबाब मे अपनी टाँगों कों मेरी गान्ड केँ उपररखा औऱ अपनीओर खींचने लगी, औऱ फिन बड़े हि शोख अंदाज मे बोलि- यसमाइ डियर जीजू…आइ आम तैयार फॉर युवर हार्डशिप्स.
उसके अपनीओर खींचने औऱ मेरी गान्ड केँ दबाब सें लन्ड उसकी चिकनी चूमेली केँ अंदर सरकता चला गय़ा…
एक् समय केँ लिए तोँ वोँ साँस लेना हि भूल गयीँ, मानो…उसे लगा जैसेकोई गर्मरोड उसकी बुर मे डाल दि होँ…
उसे दर्द तोँ ज्यादा नहींहुआ क्योंकि बुर सिल्परी हौ रही थि., मगरउसे ऐसाकुछ लगा मानोकोई गर्म चीज़ उसकी बुर मे डालकर, अंदर रेंगती हुई चींतियो कों भूनरही हौ।
पहले जौ सुरसूराहट हौ रही थि उसकीपरी केँ अंदरअब वोँ हल्के सें दर्द मे बदल चुकी थि.
अबउसे यहसमझ नहीं आँ रहा थां कि बुर चुदने मे जब इतना दर्द होता हैं, तोँ हर लड़कीइस दर्द केँ लिएमरी क्यूं जाती हैं.
इसका जबाब उसको जल्द हि मिल जाने वाला थां…
अगले हि दो तगड़े धक्कों मे मैने अपना पूरा मूसल जैसा लन्ड उसकी सन्करि गली मे उतार दिया…
उसकीगली हरबार ककड़ी कि तरह चीरती जारही थि औऱ अपने अतिथि केँ लिए मार्ग देतीजा रही थि…
अबउसे दर्द कि अधिकता महसूस हुई। औऱ वोँ चीख पड़ी…
आअहह…। जीजू…। मरररर…गायईयीई…आयईयीई… दर्द होँ रहा हाीइ…उफ़फ्फ़। जीजू निकालो अपने मूसल कों…
मैने धीरे-धीरे-2 लन्ड कों बाहर् खींचा, हम् दोनो कि नज़रउसी पर्र थि, जब लन्ड पूरा बाहर् निकला तौ उसके टोपे पऱ खूनलगा हुआ थां.
मैने उसको मुस्करा कर देखा औऱ बोला- कंग्रॅजुलेशन्स डार्लिंग अब तुम् लड़की सें महिला बन गयीँ,.!
निशा केँ मुँह सें बस एक् दर्द युक्त मुस्कान निकली…
अभि वोँ ठीक सें मुस्करा भि नहींपाई थि कि फिनचीख पड़ी…क्योंकि एक् बारफिन मेराशेर उसकी गुफा मे घुस गय़ा.
आआआहह….गंदे जीजू……। उफफफ्फ़… निर्दयी कहीं केँ… मार डाला., आई…अब ज़यादा मत हिलाओ… प्लीज़….रूको थोडा…!
पऱ मैने उसकीतरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया…बस 10 सेकेंड केँ बादफिन अपनीकमर कों जुम्बिश दि औऱ बाहर् खींचा। औऱ फिनपेल दिया.
2-4 धक्कों केँ बाद निशा कां दर्दकुछ कमहुआ औऱ उसकी स्थान उसकी बुर मे सुरसूराहट होनेलगी…,
अब उसकेपेर एक् बारफिन मेरी गान्ड केँ उपरकस गये औऱ अपनीओर करनेलगे.
मैने अपने धक्कों कों स्पीड देना शुरुआत कर दिया…
कुछ देर मे हि निशा कों मजाआने लगा, जौ कुछदेर पहलेयह सोचरही थि कि दर्द केँ बबजूद लड़कियाँ क्यूं चुदने कों मरी जाती हें, अब जाके उसकीसमझ मे आया वोँ राज, औऱ उसके मुँह सें मादक सिसकिया फूटने लगी.
कुछ देरबाद मैने निशा कों अपनेउपर लेँ लिया, वोँ अपनी गदराई हुइ, गोल गान्ड लेके मेरे लन्ड पऱ बैठ गयीँ,, औऱ अपने घुटने मोड़कर बेड पर्र रख लिए…उसके बूब मेरे सीने कों रगड़दे रहे थें…….
आह्ह्ह्ह… जीजू…उउम्म्म्म…उऊहह… मजा आरहाआ हाइईइ। बहोत… आहह-आहह… चोदो मुझे… औऱ जोरे सि…आयईयी…उउफ़फ्फ़। हाईए। अंदर जाकर तौ यह औऱ अधिकमजा देता हैं। चोदो … औऱ जोरे सें… चोदो… अपनी … राणििइ। कों…अपनी साली.आधी.घरवाली कों.,
अब वोँ खुलकर चुदरही थि, औऱ पूरामजा लेने कि कोशिश कररही थि…
मैनेझुक कर उसके निपल कों मुँह मे भर लिया औऱ चूसने लगा.
नयी टाइट बुर कां एक् नुकसान भि होता हैं, लन्ड ज्यादा देरझेल नहीं पाता औऱ जल्द पानी छोड़ देता हैं, यही मेरेसंग भि हुआ…
उसकी बुर कि दीवारों नें मेरे लन्ड कों इतना जोरे सें जकडरखा थां कि उसकी रगड़ सें झड़ने केँ लगभग पहुँच गय़ा…
मगरएन मौके पऱ मैने अपने लन्ड कों बाहर् खींच लिया.
मैने जैसे हि अपना लन्ड बाहर् निकाला, निशा कि नयीफटी बुर जौ अभि तक भरी-2 सि लगरही थि, एकदम एकदम खाली खाली सि होँ गयीँ,.…
निशा कों यह पसन्द नहींआया औऱ उसने गीले लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भरकेफिन सें अपनी बुर केँ मुँह पर्र रखा औऱ अपनी गान्ड कों उपर कि ओर उचका दिया.
मगर मैनेकमर उपर करके उसकेबार कों खाली जाने दिया औऱ उसके होठों कों चूसने लगा….
कुछ देर उसकेहोठ चूसने केँ बाद, निशा कि कमर पकड़कर अपनेउपर बिठा लिया औऱ स्वयं खाट पर्र लेट गय़ा.
वोँ अपने दोनो पैरों कों मेरेकमर केँ साइड मे करके अपने बुर कों मेरे लन्ड पऱ रखकर उसकेउपर बैठती चली गयीँ, …!
उम्म्म्म…कितना मजा हैं इसमें… अब तक मे इस मज़े सें अंजान क्यूं रही…?
अब मुझेरोज चुदना हैं जीजू आपसे… चोदोगे नाँ.! आहह-आहह… हाईए। कितना मजा हैं आपकेइस लन्ड मे…
प्लीज़ ज़ोर सें घुसाओ इसे। मेरी चुचि कों चूसो…जीजू… खाजाओ इन्हें आअहह.ऊहह.जीजू… मे गाइ….हहूओ…उउउहह… औऱ वोँ भरभरा कर पानी छोड़ने लगी.
इधर मेरा भि लन्ड मुंहाने पऱ हि थां। सो वोँ भि फुट पड़ा। औऱ अपनी सारी मलाई उसकी कुप्पी मे उडेल दि.
निशा कां यह लन्ड सें पहला एनकाउंटर थां, अब तक वोँ शायद अपनी बुर कों मसलमसल कर हि मजा लेतीरही हौ.
वोँ तृप्त हौ कर मेरे सीने पऱ पड़ गई औऱ लंबी-2 साँसें भरकर सीने सें चिपकी रही.
कुच्छ देर केँ बाद वोँ मेरेउपर सें उठी, तब जाकर लन्ड उसकी बुर सें बाहर् आया, संग हि ढेर सारा दोनो कां रस भि.
निशा नें तौलिया लेकर अपनी बुर औऱ मेरे लन्ड कों सॉफ किया औऱ फिन उसकोहाथ मे लेकरउसे चूम लिया औऱ बोलि- मेरा राजा बेटा…उूउउम्म्मचह….
फिन हम् दोनो नंगे एक् दूसरे सें लिपटे हि सोगये.
उधर उसकी त्यागमयी बहन अपने पति केँ होतेहुए, अपनी बुर कों हाथ सें मसलमसल कर अपना पानी निकाल करसो गयीँ,.…
मे जिसडर सें बचता आँ रहा थां वहीअब सामने थां,
निशा कों एक् बार लन्ड कां चस्का क्याँ लगा, अब तोँ वोँ मौके हि ढूदती रहती थि, मगर मैने उसको कंट्रोल मे रहने केँ लिए प्रेम सें समझा बुझा दिया थां,
जोँ कुछ-2 उसकीसमझ मे आँ गय़ा, मगरफिन भि नयी-2 चुदास, तोँ वक़्त निकाल करजबतब करनी पड़ती उसकी भि सर्विस.
ट्रिशा कि ड्यूटी शांति पूर्वक चलरही थि, वैसे भि गुजरात मे यूपी जैसी अशांति नहीं थि। तौ उसकोकोई प्राब्लम नहीं होनी थि.
कुछदिन बाद निशा अपने एग्ज़ॅम देनेचली गयीँ,, उसकेबाद हि उसकी विवाह भि हौ जानी थि.
इसी दौरान लोकसभा केँ एलेक्षन हुए, औऱ कोलिशन कि सरकार सेंटर मे बन गई,, किसी बर्थडे पार्टी कों क्लियर मॅनडेट नहीं मिला थां, तौ बहोत सारेदेश भर केँ दल मिलकर एक् सरकार बना दि गई,.
यह तोँ जग जाहिर हैं, कि नेतालोग अपनेमन मुतविक अधिकारियों कों नियुक्त करते हें, अब सरकार गई, तौ अधिकारियों केँ काम भि गये।
पर्फॉर्मेन्स नाम कि कोई चिड़िया भि होती हैं, नेताओं कों पता हि नहीं होता हैं, अजीब सि डेमॉक्रेसी हैं अपनेदेश कि.
जिनको अपनेघऱ संभालना नहींआता वोँ देश कों संभालते हें। खैर जौ होना होता हैं वही होके रहता हैं।
चौधरी साब कों भि एनएसए पद सें हटाकर किसी दूसरी बेकार सि स्थान डाल दिया गय़ा।
अब देख्ना होगा कि नये एनएसए महोदय केसे मॅनेज करते हें याँ डॅमेज करते हें.
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Update 82
अब देख्ना होगा कि नये एनएसए महोदय केसे मॅनेज करते हें याँ डॅमेज करते हें.
कुछदिन बाद हि एक् मैल आँ गय़ा कि एनएसएसआइ कों ख़तम करकेरॉ मे मर्ज कियाजा रहा हैं, जोँ अब सीधेहोम मिनिस्ट्री कों डाइरेक्ट रिपोर्ट करेगी।
रॉ डाइरेक्टर नें सब एजेंट्स कों लेकर एक् मीटिंग बुलाई औऱ सब केँ ग्रूप बनाकर उन्हें मिसनदे दिएगये.
गनीमत थि कि रॉ मे कोई चेंज नहीं किया गय़ा थां, तोँ कम-सें-कम एक् अनुभवी व्यक्ति केँ अंडरकाम करने कां मौका मिला.
हमारे ग्रूप मे 15 लोग थें जिनको देश केँ अंदरपनप रहे नक्सल बाद पर्र नज़ररख कर उनके मंसूबों कों विफल करने कां हर संभव प्रयास करना थां.
इसनये मिसन कि वजह सें मे निशा कि विवाह भि अटेंड नहींकर पाया थां, जिसका ट्रिशा केँ घरवालों कों जबाब देना भारीपड़ गय़ा।
हमें बोल्ना पड़ा कि कंपनी केँ काम सें मुझेआउट ऑफ कंट्री जानां पड़ा हैं.
मेरे पुराने मिसन कि सफलता केँ आधार पर्र मुझेइस टीम कां लीडरबना दिया गय़ा, सौभाग्य सें विक्रम औऱ रणवीर जोँ ज़फ़्फरुल्लाह वालेकेस मे मेरी स्पेशल डिमॅंड पऱ मेरासंग देनेआए थें वोँ भि हमारे ग्रूप मे हि थें.
सबसे पहले हमने कंट्री केँ मॅप मे उन हिस्सों कों हाइ लाइट किया जहाँ नकशलिस्म पनप चुका थां जिनमें एंपी कां कुछ हिस्सा (जौ आज छत्तीसगढ़ मे हैं), बिहार कां हिस्सा (जौ आज झारखंड मे हैं), वरषा, वेस्ट बंगाल, आंध्रा प्रदेश औऱ तमिलनाडु प्रमुख राज्य थें.
हमने 3-3 लोगों केँ 5 सभी ग्रूप बनाए औऱ हर ग्रूप कों एक् निर्धारित एरिया सौंपा गय़ा।
सभी ग्रूप (एस) कों नंबर सें डिफाइन किया जैसेएस1, एस2.लाइक तट.
एस1 कों वेस्ट बंगाल कां हिस्सा, स2 ओरिसा, स3 बिहार, स4 आंध्र+तमिल नाडुआंड स5 एंपी+ (एंपी+सम पार्ट ऑफ गुजरात+सम पार्ट ऑफ यूपी).
मेरा ग्रूप स5 थां, जिसमें मेरेसंग विक्रम औऱ रणवीर हम् तीनों यार थें। यह ग्रूप केँ डिविषन सर्व सम्मति सें हि बनाएगये थें.
हर एक् ग्रूप कों एक् ट्रांसमीटर दिया गय़ा, जोँ कोडेड थां, जिसका मतलब होता कि अगरउस पर्र कोई कनेक्ट होना थां, इसका मतलबकोई अर्जेन्सी हैं औऱ फ़ौरन कॉंटॅक्ट करना हैं, संग हि वोँ एक् दूसरे कि दिशा निर्देशन भि करेगा.
वीक वाइज़ हर ग्रूप कों प्रोग्रेस रिपोर्ट देनी थि, जोँ कंबाइन करकेरॉ ऑफीस कों भेजनी होती.
यह सभी डिसाइड करके हम् सभी एक् दूसरे सें अलगहुए। औऱ यथोचित रिज़ल्ट कि उम्मीद मे मिसन पर्र लगगये…
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बस्तेर सें दंतेवाड़ा केँ बीच कां घना जंगली इलाक़ा, अचानक किसी स्त्री कि दर्दनाक चीखों सें दहलउठा,
चीखें इतनी दर्दनाक थि, कि पत्थर दिल इंसान कां दिल भि उतावलापन उठे, मगर वोँ चारलोग जोँ उसकेसंग कुकृत्य कररहे थें, उनमें शायददिल नाम कां कोई ऑर्गन्स हि मौजूद नहीं थां.
वोँ चारों एक् विशेष तरह केँ डार्क ग्रीन मोटे सें कपड़े कि एक् जैसी उनफ़ॉर्म मे थें जौ शायद महीनों सें सॉफ हि नां कि होँ,
जिनके सर सें बँधाहुआ कपड़ा मुँह कों भि ढकने मे कामआता थां,
मगरइस टाइम उनके मुँहढके हुए नहीं थें पक्के रंग कि चमड़ी वालेयह दानव सरिके लोग, जिनके चेहरों पर्र बढ़ी हुई दाढ़ी, जोँ शायद महीनों सें शेव नहीं कि होँ.
अक-47 जैसी राइफल सें लेश, जौ इस वक़्त पास हि एक् पेड़ कि जड़ मे रखी हुइ थि एक् युवती कों चारों ओर सें घेरेहुए.
मध्यम हाइट कि वोँ युवती पेड़ों केँ सूखे पत्तों पर्र पड़ी बिलख-2कर उनसे छोड़ देने कि विनती कररही थि जिसका उन शैतानों पऱ कोईअसर नहींपड़ रहा थां।
वोँ ज़मीन पर्र पड़ी नग्न अवस्था मे निरीह घायल हिरनी कि तरह उनसेदया कि भीख माँगरही थि.
उनमें सें एक् शैतान उसकेसंग अपनीकाम पिपासा शांत करने मे जुटाहुआ थां औऱ वाकी केँ तीनों अपने-2 लन्ड पेंट सें बाहर् निकाले मसल्ते हुए अपनी बारी कां प्रतीक्षा कररहे औऱ संग-2 युवती केँ नाज़ुक अंगों कों नोचते जारहे थें।
वोँ बेचारी अबला नारी सिवाय चीखने औऱ बिल्खने केँ अलावा औऱ कुछ भि करने कि स्थिति मे नहीं थि।
जैसे हि पहला वाला आदमी अपनीकाम पिपासा शांत करकेहटा हि थां कि दूसरा लग गय़ा औऱ पूरी ताक़त केँ संग उसने अपना मूसल जैसा लन्ड उसकी छत-विच्छत पहले वाले केँ वीर्य सें सनी योनि मे पेल दिया.
आयययययीीईईईईईईईईईईई…। एक् दिल दहला देने वालीचीख उस नवयौवना केँ मुँह सें फिन एक् बारउबल पड़ी औऱ वोँ बुरीतरह छटपटाने लगी।
इसतरह सें वोँ तीनलोग उसकेसंग पाशविक तरीक़े सें अपनी वासना कि आग शांतकर चुके थें.
अब चौथा शख्स उसकेउपर आया जिसका लन्ड शायदउन तीनों सें भि लंबा औऱ तगड़ा लगरहा थां, वोँ युवती उसके लन्ड कों देखकर हि अपनी चेतना खो बैठी,
अभि वोँ अपने मूसल कों उस बेहोश हौ चुकी युवती कि घायल यौनी मे डालने हि वाला थां कि एक् गोली कि आवाज़ हुइ औऱ वोँ चौथा शख्स पीछे कि ओर गिरता चला गय़ा.
अपने मित्र कों इसतरह गिरता देख वोँ तीनों हक्के-बक्के सें अभि खड़े हि हुए थें कि धाय-धाय-ढायं…, औऱ वोँ तीनों कि भि प्राण लीला खत्म होँ गई,.
तभीवहा 3 नकाबपोश प्रकट हुए औऱ उस लड़की केँ पास पहुँचे।
वोँ पूरीतरह नग्न अवस्था मे थि जिसके सब नाज़ुक अंगों पऱ नोच खरोंच केँ निशान बनेहुए थें, जिनमें सें खून भि रिसने लगा थां.
उन नकाब पोषों नें उस बेहोश युवती कों उसके फतेहाल कपड़ों सें जैसे-तैसे करके उसकोढका,
एक् नें उसे अपने कंधे पऱ लादा, औऱ दूर खड़ी अपनीजीप मे डालकर बस्तेर कि ओर निकलगये….
यह एक् छोटा सां दोरूम कां घऱ हमने बस्तर शहर केँ बाहरी इलाक़े मे किराए पऱ लें रखा थां,
जिससे हम् आस-पास केँ जंगलों औऱ इलाक़े कि खाक-छान करजब लौटें तोँ एक् आराम करने केँ लिए सुरक्षित जगह हौ।
इसी मे हमनेउस लड़की केँ बेहोश जिस्म कों लाकररखा, औऱ उसका गुप्त रूप सें उपचार करनेलगे.
हमेंयहा रहतेहुए 3 महीने बीत चुके थें, औऱ वहा केँ नक्सलियों सें संबंध रखती हुई आस-पास कि बहोत सि जानकारिया भि हम् निकाल चुके थें,
इसी छान-बीन केँ चलतेयह लड़की वाला हादसा हमारी आँखों केँ सामने हुआ जिसे हमनेउन दरिंदों सें बचा तौ लिया…
मगर उसकेसंग हुए हादसे कों नहींटाल पाए, क्योंकि जब हम् सफ़ारी करतेहुए सर्चकर रहे थें, तब हमें उसकी चीखें सुनाई पड़ी.
जिन्हें सुनकर हम् वहा तक पहुँचे थें, मगर हमारे पहुँचने तक वोँ तीनलोग इसकेसंग बलात्कार कर चुके थें…
पूरे 24 घंटे बेहोश रहने केँ बादउस युवती कों होशआया तौ उसने अपने आप् कों एक् आरामदायक बिस्तेर पर्र पाया, अभि भि उसकी आँखें बंद हि थि,
जिन्हें वोँ उसकेमन मस्तिष्क पऱ छायेभय केँ कारण खोलने सें भि डररही थि.
उसकी चेतना अब वापसलौट आई थि मगर आँखें अभि भि बंदकिए हुए थि, वोँ अपनी वास्तुस्थिति सें परिचित होना चाहती थि।
उसे अपने पूरेबदन मे दर्द कि लहरें सि उठती महसूस होँ रही थि, ख़ासकर उसकी जांघों केँ जोड़े पर्र अत्यंत पीड़ा हौ रही थि, जिस कारण सें उसके चेहरे पर्र पीड़ा केँ भावसॉफ दिखाई देरहे थें.
आख़िरकार उसने अपनी आखें खोलकर देखा कि वोँ इस वक़्त कहां औऱ किन लोगों केँ बीच, किन हालातों मे हैं…
जैसे हि उसने अपनी आँखें खोली, तीन व्यक्ति उसकेबैड केँ पास खड़े दिखाई दिए, वोँ अपनी पूर्व-बात स्थिति समझकर फिन सें चीखने वाली थि कि उनमें सें एक् व्यक्ति (मे) नें उसका मुँहबंद कर दिया औऱ उसे समझाने लगा.
देखो ! डरो नहीं, हम् वोँ नहीं हें जौ तुम्हारे संगरेप कररहे थें, हम् तुम्हें बचाकर यहालाए हें। अब तुम्हें घबराने कि ज़रूरत नहीं हैं.
व.व.वू.फिन सें लेजाएँगे मुझे, रोतेहुए बोलि वोँ.
मे - नहींअब वोँ तुम्हें नहीं लें जा सकते, वोँ सभीमर चुके हें.
वोँ - क्याँ.? केसे.? वोँ तोँ बड़े ख़तरनाक लोग थें.! उन्हें किसने मारा.?
मे - हमनेउन चारों कों मार दिया हैं, औऱ तुम्हें वहा सें लें आए हें, अब तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाएगा.
वोँ - मगर आप् लोगकॉन हें.?
मे - हमें तुम् अपना साथी हि समझो, औऱ सारीबात बताओ कि क्याँ हुआ थां तुम्हारे संग.!
उसने उठने कि कोशिश कि मगर जिस्म केँ दर्द नें उसे उठाने नहीं दिया, तोँ मैनेउसे सहारा देकर बिठाया औऱ उसकीपीठ केँ पीछे तकिये कां सहारा लगाकर बेड सें टेकलगा कर बिठा दिया.
उसने अपनेबदन पर्र नज़र डाली, जोँ स्थान-2 सें नोच-खरोंच सें भराहुआ थां, जहाँअब मलमलगी हुईँ थि.
अपनी आँखों मे पानी लाकरउस युवती नें केहना शुरुआत किया-
मेरानाम नीरा हैं, अपने मां-पिताजी केँ संग गाँव मे रहती हूं।
गाँवशहर सें अधिकदूर होने केँ कारणपढ़ लिख भि नहीं पाते हें बच्चे, सो मे भि नहींपढ़ पाई, बस 5वी तक कि शिक्षा हि लें पाई.
मेरा एक् छोटा भइया भि थां, मे अपने गाँव कि सबसे हसीन लड़की थि।
यहलोग जंगलों मे रहकरवहा सें लकड़ी औऱ जंगली जानवरों कों मारकर उनका व्यापार करते हें, कभी-2घूम फिनकर हमारे गाँव भि आँ जाते थें.
हमारे घऱ वाले, जब यहलोग आते थें तौ अपने-2 बच्चों कों छिपा देते थें जिससे इन लोगों कि नज़र नां पड़े औऱ यहकुछ नुकसान नाँ पहुंचा सकें.
कल यहलोग आकस्मात हमारे गाँव मे आँ गये, इससे पहले कि मे औऱ मेरा भइया कहीं छिप्ते, इन्होने हमेंदेख लिया औऱ पकड़ लिया।
हम् दोनो कों ज़बरदस्ती जंगल कि ओर लें जानेलगे जब मेरे मां-पिताजी नें हमें छुड़ाने कि कोशिश कि तौ उन लोगों नें उन दोनो कों गोलीमार दि, औऱ फिन मेरे भइया कों भि मार दिया, औऱ मुझेउठा लेँ गये.
इतना कहते-2 वोँ फुट-2कर रोनेलगी.
मे - देखो नीरा ! तुम् रोओ नहीं, हमेंपता हैं तुम् एक् बहादुर लड़की हौ। वैसे तुम्हारी उम्र क्याँ हैं अभि.
वोँ- 19 साल…!
मे- तुम्हें उनके दूसरे साथियों कां पता हैं कि वोँ कहां रहते हें.?
वोँ- ऐसे लोगों कां कोई एक् ठिकाना तौ होता नहीं हैं बाबूजी, यहा तौ जंगल कां समंदर सां फैलाहुआ हैं, कही भि आते- जाते हें यहलोग.
मे - वैसे तुमने ज्यादा सें अधिक कितने लोगों कों देखा हैं ऐसे.!
वोँ - कभी-2 तौ यह 20-25 तक भि आते थें.
मे - अब तुम् कहां जानां चाहोगी.? आगे क्याँ करना हैं.?
वोँ - अब मेराकॉन बचा हैं जिसके पास जाउन्गी, वैसे भि यह मेरी जीवन तौ अबनरक बन चुकी हैं, जीने मे रखा हि क्याँ हैं ? अब तोँ मेरेमर जाने मे हि भलाई हैं.
मैनेउसे समझाते हुएकहा - देखो नीरा ! मरने सें आज तक किसी कां भला नहींहुआ हैं, ईश्वर नें यह जिंदगी दिया हैं जीने केँ लिए, इसे ऐसे हि ख़तम नहीं करना चाहिए।
तुम् एक् बहादुर लड़की होँ, हम् चाहते हें, कि तुम् इस जिंदगी कां मुक़ाबला पूरी बहादुरी सें लड़ते हुएकरो.
वोँ सुबक्ते हुए बोलीं - अब मे अकेली क्याँ मुक़ाबला करूँगी जीवन कां ? कहां जाउन्गि.? मेरेपास बचा हि क्याँ हैं जीने केँ लिए.?
मे - क्याँ तुम् यह नहीं चाहोगी कि तुम्हारी तरहकोई औऱ नीरा अनाथ नां हौ.?
वोँ - मेरे चाहने नां चाहने सें क्याँ होता हैं बाबूसाब.!
मे - अगर होता हौ तोँ….! देखो ! अगर तुम् चाहो तोँ बहोत कुछ होँ सकता हैं, हम् तुम्हें इस काबिल बनाएँगे कि तुम् जमाने कि मुश्किलों कां सामना डटकरकर सको।
औऱ अपने परिवार कि मौत कां बदला भि लेँ सको, ताकिफिन कोई मज़लूम इसतरह सें असहाय औऱ बेबस नां होँ.
वोँ – मगरयह होगा केसे.?
मे - वोँ सभी तुम् हम् पऱ छोड़दो, तुम् बसयह बताओ, कि तुम् इनके खिलाफ लड़ना चाहती हौ याँ नहीं, इसमें हम् तुम्हारा पूरासंग देंगे।
वैसे भि तोँ तुम् मरना हि चाहती होँ, अगर वोँ मौत किसी केँ काम आँ सके, किसी कां भला करतेहुए आए तोँ जिंदगी सफल होँ जाता हैं, हैं नां !
वोँ - हमम्म… ! ठीक हैं, आज सें आप् लोग जैसा कहेंगे मे वैसा हि करूँगी…, वैसे भि यह जीवन तौ आप् हि कि लौटाई हुई हैं.
मे - शाबास ! यह हुइ नाँ कुछबात…!
फिन मैनेउसे उसकी सारी दबाईयाँ देतेहुए समझाया - लोयहसभी तुम्हारी दबाइयाँ हें, इनको वक़्त सें खानां हैं, औऱ यह ट्यूब अपने ज़ख़्मों पऱ लगाना हैं दिन मे दोबार, उस स्थान पऱ भि। समझ गई,.
मेरीबात कां मतलब समझते हुए, थोडा शरमाते हुए उसनेसर हिलाकर हामीभरी.!
मैनेआगे कहा - घऱ मे खाने पीने कि सब चीज़ मौजूद हें, तौ स्वयं पकाना औऱ टाइम सें खानां, हम् लोगकुछ दिनो केँ लिए बाहर् जारहे हें तब तक तुम् अच्छी तरह सें अपनी देखभाल करना,
जब हम् लोगलौट केँ आयें तोँ हमें हमारी शेरनी पूरीतरह स्वस्थ मिलनी चाहिए.! ठीक हैं.!
औऱ हां ! बिनाकाम केँ अधिकदेर घऱ सें बाहर् मत जानां, किसी सें मेल-जोल बनाने कि भि ज़रूरत नहीं हैं, औऱ नां हि फालतू इधर-उधर जानां हैं, समझ गई,.
उसने मुस्करा कर हामीभरी, अब उसके चेहरे पऱ कुछ ध्रड निश्चय केँ भाव नज़र आरहे थें…
फिन हम् तीनों साथीउसे अकेला छोड़कर बाहर् निकलगये.!
हम् नीरा कों वहा छोड़कर औऱ उसका साराकुछ रहने खाने कां उसकेलिए 4-6 जोड़ी कपड़ों कां भि इंतज़ाम करके हम् तीनों अपने-2 घरों कों निकललिए.
ओवर नाइट कि जर्नी करके मे कोई सुभह केँ 4 बजे अपनेघऱ पहुंचा…
काफ़ी देर केँ बाद तौ साले बंगले पऱ तैनात संतरी नें मेन गाते खोला….
अब इसमें बेचारे संतरी कि भि क्याँ ग़लती थि… रातभर कि ड्यूटी केँ बाद, यह वक्तऐसा होता हि हैं, कि झपकीलग हि जाती हैं, औऱ वोँ भि ऐसी लगती हैं, कि कान पऱ नगाड़े बजते रहें व्यक्ति कि नीद नहीं खुलती…
खैर वोँ अलसाया हुआआया, मेरी वाहन मे झाँककर चेक किया औऱ फिन सल्यूट देकरगेट खोलते हुए बोला…
सॉरीसर, तोड़ा आँखलग गई,, प्लीज़ आप् मेडम कों मत बोल्ना, वरना मेरी क्लास लें लेंगी…
मैनेकहा – कोईबात नहीं मे समझ सकता हूं, इस वक्त कि नीद कैसी होती हैं, वोँ भि रातभर जागने केँ बाद…
खैर एक् किला फ़तहकर लिया थां, मगर असली अभि वाकी थां, तौ बंगले केँ पोर्च मे व्हीकल खड़ी करने केँ बाद मे व्हीकल सें नीचेआया औऱ डोरबेल बजाई।
एक् बार, दो बार… लगातार 10 मिनटबेल बजाने केँ बादतब कहीं जाकर अंदर सें एसीपी साहिबा कि अलसाई हुईँ आवाज़ सुनाई दि… कॉन हैं…?
मैने आवाज़ बदलकर कहा – मे साब दूधवाला…
ट्रिशा स्लीपर चटकाते हुए बड़बड़ाती हुइ गेट कि तरफ बढ़ी… दूधवाला.? आज क्याँ हुआ जौ इतने सबेरे – सबेरे दूध लेकर आँ गय़ा… लगता हैं, रात कों भांग अधिक चढ़ाली इसने, जोँ वक़्त कां पता हि नहींचला…
आती हूं रामू.यह कहती हुई वोँ डोर तक आई, औऱ जैसे हि गेट खोला …।
सामने मुझे खड़ादेख कर उसकी सारी नींद कि खुमारी भाग खड़ी हुइ.
मेरे सीने पऱ घूँसे बरसाते हुए बोलीं – आप् बहोत सताते होँ मुझे… सीधे – 2 बोल नहीं सकते थें…, इतना कहकर मेरे सीने सें लिपट गयीँ, …
आप् इतने सुभह-2 केसेआए, फिन पोर्च मे वाहन पर्र नज़र पड़ते हि बोलीं – हे ईश्वर, सारीरात ड्राइविंग करकेआए हौ…
मैने चुटकी लेतेहुए कहा – नहीं तोँ ! तुम्हें पता नहींयह कारहवा मे उड़ भि सकती हैं… अबचलो अंदर याँ यहीं सें धक्के देकर भगाने कां इरादा हैं…
वोँ – ओह सॉरी ! औऱ मेरीकमर मे बाहें लपेटकर हम् अंदर आँ गये.
मैनेकहा – गेट खोलने मे इतना टाइम क्यूं लगा तुम्हें, तुम् तौ सुभह जल्द उठने कि आदि होँ…
वोँ बोलीं – अरेकल गाँधीनगर जानां पड़ा, आते आतेरात कां 1 बज गय़ा। 2 बजे जाकर सोनाहुआ इसलिये…
मे – ओह ! सॉरी डार्लिंग, मैने तुम्हें डिस्टर्ब कर दिया…
वोँ – ओह ! जानू इसमें सॉरी कि क्याँ बात हैं, इट्सओके, आज मुझे कहीं नहीं जानां, आजबस अपने साजन कि बाहों मे हि सारादिन गुज़ारना हैं…
फिन ट्रिशा नें हम् दोनो केँ लिएगरम चाय बनाई, औऱ फिन फ्रेश होकर हम् एक् दूसरे कि बाहों मे लिपटे बिस्तर पर्र लेटकर बातें करतेरहे…
नां जानेकब हमें नींद नें आँ दबोचा… मेरी नींद 12 बजे जाकर खुली…
तबतक उसनेनहा धोकर नाश्ते कां इंतेज़ां करा लिया, मैड आकर साराकाम निपटा करजा चुकी थि…
मैने उठकर सीधा नाश्ते पऱ धाबाबोल दिया… औऱ एक् बारफिन हम् अपने बेडरूम मे आँ गये…
बेडरूम मे आते हि ट्रिशा मेरे शरीर सें लिपट गयीँ, … मैने उसके होठों कों चूमकर पुछा – क्याँ बात हैं मेरीजान बड़ी उतावली होँ रही होँ…
वोँ मेरी बालों सें भरी छाती कों अपनी हथेली सें सहलाते हुए – मुझेअब एक् नन्हा अरुण चाहिए जिसके संग मे खेल सकूँ…
आप् तोँ इतने-2 दिनों केँ लिएचले जाते हौ, मुझे भि तोँ कोई चाहिए अपनेसंग जोँ अपना होँ…
बात उसकी जायज़ थि, सो मैने उसके अनारों कों सहलाते हुए पुछा – यह वक्तसही हैं.?
वोँ मेरे लन्ड कों सहलाते हुए बोलि – एकदम परफेक्ट, कल हि पीरियड बंदहुए हें.
इतना सुनते हि, मैने उसके गाउन कि डोरी खींच दि, औऱ उसे अपनीगोद मे उठाकर बेड कि तरफ लें जातेहुए बोला – नेकी औऱ पुछ-पुछ, हम् अभि एक् बेबी कां इंतज़ाम करे देते हें अपनी बेगम साहिबा केँ लिए…
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bhay aap की kahani boht mast he majaa a gya parh kr bhay mra xf pe yeh pehla comment he aap की kahani pe aur last bhe kyn के mjhe hindi nhe bahutt aur translate kr के majaa nhe ata parhne mai iss lye mai aap की kahani continue read nhe kr skta han itna zror kaho ga के aap की kahani fabulous he maf karna bhay agr bora lge mri ksi bt kaa maine aaj tk xf pe read he किया he comment nhe किया lekn aap ne majbir kr dya krne ko once again sorry
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