My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 83
ट्रिशा कों बेड पऱ लिटाकर मैने अपने सारे कपड़े निकाल दिए औऱ बेड पर्र छलान्ग लगा दि…
ट्रिशा अभि भि वाइटकलर कि ब्रा औऱ पेंटी मे थि, मैनेउसे अपनेउपर लेलिया…
वैसे भि शुरुआत सें हि उसे मेरी सवारी करने मे अधिकमजा आता थां, ट्रिशा केँ एक्सप्रेशन बतारहे थें, कि वोँ सेक्स केँ लिए कितनी उतावली होँ रही थि…
इधर मे भि तौ कई महीनों सें रुका पड़ा थां…
मैनेउसे खुलीछूट दे दि, जोँ उसकेजी मे आए वैसेकरे…
तोँ कुछदेर तक वोँ अपनी मुनिया कों पेंटी केँ उपर सें हि मेरे लन्ड पऱ रगड़ती रही,
मैने पीछेहाथ लें जाकर उसकी ब्रा कों खोल दिया, औऱ उसकेकसे हुए अनारों कों अपनी मुट्ठी मे कसकरमसल दिया…
आअहह………ससिईईईईईईईईईईईई….जानुउऊउउ….औऱ ज़ॉर्सीईए…मसालूओ…इन्हीन्णन्न्.बहोत तंग करते हें… आपकीयाद मे…
उसनेझुक कर मेरे होठों कों चूसना शुरुआत कर दिया… मे उसकी पेंटी मे हाथ डालकर उसके मस्तकसे हुए नितंबों कों मसल्ने लगा…
ट्रिशा कि पेंटी अब गीली होनेलगी थि, सो उसनेउसे निकाल फेंका, औऱ अपनीकसी हुईँ मुनिया केँ होठों कों फैलाकर मेरे लन्ड पऱ बैठती चली गयीँ, …
ट्रिशा नें अपने होठों कों कसकरबंद कर लिया, वोँ मीठे-2 दर्द कों पीतेहुए धीरे-धीरे-2 करके मेरे पूरे साडे 8 इंच केँ सोट कों निगल गई, …
कुछदेर वोँ उसे अपनी बच्चे दानी केँ मुँह तक फील करके बैठीरही, फिन मैने उसके कुल्हों पऱ थपकी दि, तोँ मानो वोँ नींद सें जागी होँ,
औऱ मुस्करा कर अपनीकमर कों जुम्बिश देतेहुए बोलीं – आअहह… जानू, बहोत बड़ा हैं आपका, मेरे अंदर तक पहुँच रहा हैं…
सस्सिईईई…। मेरेबलम मुझे जल्द सें मां बना दो…औऱ सिसकते हुए वोँ अपनी गान्ड कों उपर नीचे करनेलगी…
मेरा लन्ड उसकी बुर मे एकदमफूल चुका थां, जौ ट्रिशा कि कसी हुई मुनिया कों जबदस्ती चौड़ा किएहुए थां…
मेरी उत्तेजना बढ़ती जारही थि, अब मेरे लन्ड कां काम ट्रिशा केँ हल्के-फुल्के धक्कों सें चलने वाला नहीं थां,
सो उसकीकमर मे अपने हाथों कां सहारा देकर नीचे लिया, औऱ उसकी टाँगों कों पेट सें सटाकर जबरदस्त धक्कों सें उसकी चुदाई करनेलगा…
ट्रिशा जल्द हि पानी छोड़ गई,, मगर मेरा अभि आधा सफ़र हि तयहुआ थां…
कुछदेर उसे मेरे धक्कों सें तकलीफ़ हुई, मगर जल्द हि वोँ फिन सें लय मे आँ गई…
औऱ अंत मे मैने एक् हेलिकॉप्टर शॉट लगाकर अपनी पिचकारी उसकी बच्चेदानी मे छोड़ दि, जिसकी गर्मी पाकर वोँ फिन सें एक् बार भल्भलाकर झड़ने लगी…
कितनी हि देर तक मे उसके अंदर फाइरिंग करतारहा फिन उसकेबगल मे आकरउसे सीधे करवट लिटा दिया…
एक् घंटे तक वोँ यौंही पड़ीरही, थकान सें चूर…
कुछदेर बाद फ्रेश होकर एक् बारफिन एक् दूसरे मे खोगये…!
सामढले तक हम् दोनो हि अपने मनमाने ढंग सें अपनी प्यास बुझाते रहे, ट्रिशा इसखेल मे जल्द पस्त होँ जाती थि…
दिनढले हम् फ्रेश होकर बाहर् हॉल मे आँ गये, वोँ किचेन मे गरमचाय बनाने चली गयीँ,, मैने टेलीविज़न ऑनकर लिया…
हम् दोनो अभि टेलीविज़न देखते हुएगरम चाय कि चुस्कियाँ लें हि रहे थें, कि तभीडोर बेल बजनेलगी.
ट्रिशा नें उठकरगेट खोला, औऱ जैसे हि उसकी नज़र आनेवाले पर्र पड़ी… तुउुउउ………चीखते हुए वोँ उसकेगले सें लिपट गयीँ, ….
सामने दरवाजे पर्र निशा अपने पति केँ संग खड़ी थि, राहुल उसका पति, जोँ ऋषभ केँ संग हि नौकरी करता थां, औऱ उसी नें यह नाता करवाया थां…
राहुल एक् मध्यम हाइट काठी कां आदमी थां, चालढाल सें हि थोडा दब्बु किस्म कां लगता थां…
ट्रिशा दोनो कों लेकर अंदरआई, राहुल केँ संग मे पहलीबार मिलरहा थां, उसनेहाथ जोड़कर मुझसे नमस्कार किया, जबाब मे मैनेउसे अपनेगले सें लगा लिया…
निशा मुझसे लिपटने केँ लिए लपकी, मगर मैने इशारे सें उसेरोक दिया…
एक् दूसरे केँ हालचाल जाने, फिन उन दोनों कों एक् अलग कमरे मे पहुंचा कर ट्रिश मेरेपास आकरबैठ गयीँ, …
मैने ट्रिशा कों ऐसे हि बोल दिया – मुझे लगता हैं, राहुल कुछ दब्बु टाइप कां लड़का हैं… निशाइसे अपनी उंगलियों पर्र नचाती होगी.
वोँ मेरीतरफ गौर सें देखते हुए बोलीं – आपको केसेलगा कि वोँ उसे नचाती होगी…
मे – बस उसकी बॉडी लॅंग्वेज सें लगा मुझे, विश्वास नाँ हौ तोँ निशा कों पुच्छ केँ देख लेना… वैसे तुम् किसतरह कि पोलीस ऑफीसर होँ, व्यक्ति कों देखकर उसका नेचर नहींजान सकती.
ट्रिशा – सच कहूँ तोँ मुझे भि ऐसालगा, मगर मैनेइस बात पर्र ज्यादा विचार नहीं किया…
अभि हम् यहसभी बातें कर हि रहे थें, कि वोँ दोनो चेंज करकेहॉल मे आँ गये,
मे राहुल सें उसकेकाम धंधे केँ बारे मे पुच्छने लगा, उधर वोँ दोनो बहनें आपस मे बातें करतीरही,
रात कां खानां हमने बाहर् किसी अच्छे सें होटेल मे खाया….!
उस रात हम् दोनो पति पत्नि, एक् राउंड गरमा गर्म चुदाई करके एक् दूसरे कि बाहों मे लिपटे पड़े थें,
अभि कोई 12 बजे कां वक्तहुआ होगा, कि हमारे रूम केँ गेट पऱ हल्की सि दस्तक हुई…
हम् दोनो कि नज़रें आपस मे टकराई, फिन मैने अपना अंडरवेर पहना, औऱ गाउन डालकर उसकी डोरी बाँधते हुएडोर कि तरफबढ़ गय़ा…
ट्रिशा नें अपने नंगे शरीर पऱ बेडशीट डालली…
मैने जैसे हि अपने बेडरूम कां गेट खोला… सामने कां नज़ारा देखकर हम् दोनो कां हि मुँह भाड़ सां खुलारहा गय़ा…!
निशाइस वक्त एक् बहोत हि झीना सां शॉर्ट गाउन डालेहुए दरवाजे पर्र खड़ी थि, जिसमे सें उसके शरीर कि छटा साफ-साफ दिखाई देरही थि,
उसके दशहरी आम, उनके सिरे पऱ लगे किस्मिष केँ दाने जैसे उसके निपल, एक् दमसाफ दृष्टिगोचर हौ रहे थें,
नीचे वोँ एक् बहोत सेक्सी सि लिंगरी पहनेहुए थि,
सामने निशा कों इसरूप मे देखकर ट्रिशा भि बेडशीट कों अपनेउपर खींचते हुए बैठने पऱ मजबूर होँ गई, …!
निशा केँ इसजान मारुरूप कों देखकर मेरे लन्ड नें एक् जबरदस्त ठोकर अंडरवेर केँ अंदर मारी…!
निशा मेरी आँखों मे झाँकते हुए मंद-मंद मुस्करा रही थि…
मेरे सीने पऱ एक् हाथरख कर उसने मुझे अंदर कों धकेला औऱ दूसरा हाथ पीछे लें जाकररूम कां गेट भेड़ दिया…
ट्रिशा सें रहा नहीं गय़ा, औऱ थोडा नागवारी भरे लहजे मे उसने निशा कों लताड़ते हुएकहा –
यह क्याँ हिमाकत हैं निशा, तुँ इसतरह सें हमारे कमरे मे चलीआई, बड़ी बहन औऱ जीजू कां कोई लज्जा लिहाज नहीं हैं तुम्हारी तरफ…
औऱ अगर तेरे पति कों पताचला तौ वोँ क्याँ सोचेगा… थोडा सां तौ परदारख.
ट्रिशा कि बात कां उसकेउपर जैसेकोई असर हि नहींहुआ… औऱ वोँ मुझे अपनी बाहों मे लपेटे, करीब घसीटते हुए बिस्तर तक लेँ आई…
फिन अपने घुटनों पऱ बेड केँ उपर बैठती हुइ बोलि – ओहकमऑन दिद… मानती हूं, आप् जीजू कि पूरी घरवाली हौ, तोँ आपको पूराहक़ हैं उनकेसंग केसे भि रहने कां…
मगर साली भि तौ आधी घरवाली होती हैं, तोँ थोडा सां हक़ तोँ मेरा भि बनता हैं नाँ…
औऱ रहीबात राहुल कों पता लगने कि, तोँ उसे तौ मैनेदूध केँ संग इतना बड़ाडोज दे दिया हैं, कि अब वोँ सुभह 8 बजे सें पहले उठने वाला नहीं हैं…!
दोनो बहनों केँ बीच केँ वार्तालाप मे मे सिर्फ एक् तमाशबीन कि तरह हि थां, कि तभी ट्रिशा बोलि –
आप् इसेकुछ कहते क्यूं नहीं होँ, इतना बेशर्म होना अच्छी बात नहीं हैं.
मैनेकहा – भइयायह तुम् दोनो बहनों केँ बीच कि बात हैं, मे कॉन होता हूं बीच मे बोलने वाला,
औऱ वैसे भि… तुम् एक् बार उसकोयह मौकादे हि चुकी होँ तोँ अब वोँ क्यूं शरमाने लगी…!
इतने मे निशा नें मेराहाथ पकड़कर बेड पर्र खींच लिया, औऱ लपककर मेरीगोद मे आँ बैठी,
अंडरवेर मे फुदकते मेरे लन्ड कों जब नंगी गान्ड कि गर्मी लगी तोँ वोँ औऱ ज्यादा कड़ा होँ गय़ा…
मैने पारदर्शी गाउन सें चमकते निशा केँ आमों कों अपनी मुट्ठी मे कस लिया…,
वोँ मेरे होठों कों चूसने मे लगी हुईँ थि…
ट्रिशा बगल मे बैठी किसी उल्लू कि तरह आँखें झपकाकर हम् दोनो कि रासलीला कों देखरही थि, कि तभी मैनेउसे भि अपनेपास खींच लिया…
निशा नें मौका लगते हि अपना एक् केवल गाउन भि निकाल दिया, औऱ मेरे अंडरवेर कों उतारने केँ लिए मुझेबेड पर्र धक्का दे दिया…
अब ट्रिशा भि सारी झिझक छोड़कर खेल मे शामिल होँ गई, …
निशा अपनी मदमस्त गान्ड लेकर मेरी जाँघो पऱ बैठकर हिचकोले खानेलगी, मेरा लॉडाआगे कि तरफफन निकाले उसकी गीली बुर केँ होठों केँ बीचफँस कर उसके कामरस सें तर होँ रहा थां…
मैने ट्रिश कों कहा – डार्लिंग, मेरे पप्पू कों सुरंग कां मार्ग तौ दिखाओ…
उसने मुस्कराते हुए, मेरे लन्ड कों अपनेहाथ मे लिया, औऱ उसका सुपाडा, निशा कि बुर केँ छेद पऱ टिका दिया…
निशा नें जैसे हि अपनीकमर कों मूव्मेंट दिया, सरसराता हुआ वोँ उसकीरस सें लबालब बुर मे सरक गय़ा…
आआअहह………जिजुउुउ….सस्सिईईई….क्याँ मस्त लन्ड हैं आपका… हाईए…माआ…मजा आँ गायाअ…….
कुछदेर वोँ मेरेउपर कूद-कूद कर लन्ड कों लेतीरही, फिन मैनेउसे नीचे पलटा दिया, औऱ उसकी टाँगों कों चौड़ा करके सुपर फास्ट ट्रेन कि तरह धक्के लगाने लगा…
निशा मस्ती मे बड़बड़ाते हुए नीचे सें अपनीकमर उचका-2कर ज्यादा सें अधिक मेरे लन्ड कों अंदर लेने कि कोशिश कररही थि…
हाईए…जिजुउू.चोदो मुझे औऱ ज़ोर्से… फाड़दो मेरी बुर मेरे राजाजी…
मुझे अपने बच्चे कि मां बनादो….
अंत मे मैने उसकी बच्चेदानी कों अपने वीर्य रस सें भरकरउसे अपने सीने सें चिपका लिया… वोँ मेरे सीने सें लगकर सुबकने लगी…
लन्ड अंदर डालेहुए हि, मैनेउसे अपनीगोद मे लेकर उसकीपीठ सहलाते हुएकहा –
क्याँ हुआ निशा… ? रो क्यूं रही हौ… मैनेकुछ ज्यादा ज़ोर्से कर दिया क्याँ.?
निशा नें मेरेगले कों चूमते हुएकहा – मेरी ख़्वाहिश थि कि मे आपके बच्चे कि मां बनूँ, सच कहूँ तोँ मे इसलिये हि यहाआई हूं.
आज आपने मेरीयह इक्षा पूरी करके मुझेबिन मोल खरीद लिया जीजू… मेरे प्यारे जीजू…आइ लवयू…
उसकीयह बात सुनकर हम् दोनो हि शॉक्ड रहगये… फिन ट्रिशा नें उसकी गान्ड पऱ थप्पड़ जड़ते हुएकहा…
यह तुँ केसेकह सकती हैं, कि आज तुँ मां बन हि जाएगी.?
निशा मादक सिसकी भरतेहुए बोलीं – ओह्ह्ह…दिदी, देखो, अभि भि जीजू कि पिचकारी सीधी मेरी बच्चेदानी मे जारही हें। थोड़ी बहोत कसररह गयीँ, होगी, तौ अब पूरी हौ जाएगी.
इतनाकह कर वोँ औऱ ज़ोर्से मेरे जिस्म सें चिपक गयीँ, ….!
कुछदेर बाद हम् फिन सें थ्रीसम करने मे लगगये, इसबार मैने अपना आधा-आधा माल दोनो कि चुतो कों पिलाया…
इसतरह सें हमारी रासलीला, सुभह तक बदस्तूर जारीरही…
चारदिन रहकर निशा खुशी-खुशी अपने पति केँ संग वापस पूनालौट गयीँ, ….!
8-10 दिन औऱ ट्रिशा केँ संगफुल मस्ती मे निकले, क्योंकि विवाह कों काफ़ी वक्त हौ चुका थां, तोँ अबघऱ मे औऱ मेंबर भि तोँ आने चाहिए, ऐसी हम् दोनो कि हि अब ख़्वाहिश थि.
इसबार यह ट्रिशा कों भि लगरहा थां कि इसबार प्रेग्नेन्सी केँ पूरे-2 चान्स हें।
11वेदिन मे फिन अपने फील्ड वर्क कों निकल पड़ा। विक्रम औऱ रणवीर कों मोबाइल किया तोँ वोँ अगलेदिन निकलने वाले थें.
देररात मे बस्तर पहुँच गय़ा। घऱ मे घुसते हि सभीकुछ बदला-2 सां लगा, हर चीज़ अपनी स्थान पर्र व्यवस्थित दिखी,
सॉफ सफाई, किचेन कां सामान एक् दम स्लिम फट, अबलग रहा थां कि यह भि घऱ हैं, यहा भि लोग रहते हें.
नीरा अपने अच्छे सें कपड़ों मे बड़ी प्यारी सि लगरही थि, जब मे उसकीओर देखरहा थां तौ वोँ मुझेदेख करमंद-2 मुस्करा रही थि।
मैनेउसे घूमफिन कर देखा वोँ वाकई मे हसीन थि, साँवले रंग कि गाँव कि अल्हड़ कली जोँ उन शैतानों नें बेरहमी सें मसलकर उसेफूल बना डाला थां.
मगरअब वोँ कुछ सम्भल गयीँ, थि औऱ अच्छे व्यवस्थित कपड़ों मे वोँ फिन सें चहकने लगी थि।
कमसिन जवानी कां यही तोँ कसूर होता हैं, जब भि मौका मिले वोँ उभरकर सामने आँ हि जाती हैं, औऱ हवस केँ अंधे कामी कीड़े उसकारस निचोड़ने सें बाज़ नहींआते.
जब मे उसे काफ़ी देर तक देखता रहा, तोँ वोँ शर्मा गयीँ, औऱ नज़रें नीची करके बोलि- ऐसे क्याँ देखरहे हें बाबूजी.
मे- देखरहा हूं, यह हमारी वहीडरी सहमी सि नीरा हैं याँ कोई औऱ आँ गई हैं घऱ मे.
वोँ- आपकीवही नीरा हैं बाबूजी, कैसीलग रही हूं इननये कपड़ों मे.?
मे - बहोत प्यारी.! एक् दम चंचल हिरनी जैसी., बस हमेशा ऐसे हि चहकति रहना.
खैर, अच्छा यह बताओ कि अब तुम्हारी तबीयत कैसी हैं.?
वोँ - अब मे बिल्कुल ठीक हूं, सारे जख्मठीक हौ गये हें, बसकभी-2 पेडू मे दर्द कि लहर सि उठती हैं.
मे - कोईबात नहीं मे तुम्हारे लिए औऱ दवा लेँ आउन्गा वोँ भि चला जाएगा। वैसे औऱ कोई तकलीफ़ तौ नहीं हैं.?
वोँ - नहीं औऱ कोई तकलीफ़ नहीं हैं, वोँ दर्द भि कभी-2 होता हैं.
मे - अब तुम् ध्यान सें सुनो ! अब तुम्हें अच्छा-2 खानां ख़ाके अपनी शक्ति बढ़ानी हैं, कल सुभह सें हि तुम्हें कसरत शुरुआत करवानी हैं,
उसकेलिए आज हि मे तुम्हारे लिएकुछ कपड़े लें आउन्गा, तुम्हें अपनामाप तौ पता होगा ?
वोँ- कैसामाप.? केसे कपड़े ? यह कपड़े हें तौ मेरेपास.
मे - छोड़ो, मेरेसंग चलना, वहींमाप करके कपड़े लेँ लेंगे। यहकुछ अलगतरह केँ कपड़े होते हें जोँ कशरत करने केँ लिए हि होते हें.
साम कों उसे बाज़ार लें जाकर अच्छी सि दुकान सें उसकेलिए दो लेडी स्पोर्ट सूट खरीदे, डॉक्टर सें कन्सल्ट करकेदवा ली औऱ कुछघऱ कि ज़रूरत कां समान लेकरघऱ लौटआए.
घऱ आँ कर मैने नीरा कों उसके कपों कां पॅकेट देकरकहा, जाओयह पहनकर आओ, मुझे देख्ना हैं तुम्हारी फिटिंग,
फिन उसको ब्रा-पेंटी वाला पॅकेट देकरकहा- इन कपड़ों कों पहले पहनना हैं औऱ इनकेउपर यहसूट.
वोँ दूसरे कमरे मे चली गयीँ, औऱ मे दूसरे काम मे लग गय़ा, कुछदेर बादजब उसकेआने कि आहट सुनाई, मे उसकीतरफ पलटा, औऱ उसको देखता हि रह गय़ा.
टाइटटू पीस स्पोर्ट सूट मे वोँ ग़ज़ब लगरही थि, वैसे भि उसका शरीर गाँव कि मेहनत कस जीवन मे एक् दमकसा हुआ हि थां, मगरइस फिटिंग सूट मे तोँ उसके जिस्म कां हर कटावसाफ दिखरहा थां.
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Update 84
32 केँ उसकेकसे हुए सुडौल बूब, जिनका चौड़े गले केँ उपर मे सें क्लीवेज दिखरहा थां, एकदम पतलीकमर 20-22 कि, 30 केँ कूल्हे, जौ एक् दम टाइटकसे हुए, थोड़ी सि पीछे कों गोलाई लिए.
मेरे मुँह सें अनायास हि निकल पड़ा, ग़ज़ब ! नीरा तुम् तौ बहोत हसीनलग रही हौ इन कपड़ों मे.
वोँ - सच बाबूजी.!
मे - हां ! मैने उसकाहाथ पकड़ केँ ड्रेसिंग टेबल केँ सामने लाकर खड़ाकर दिया। वोँ आदमकद शीशे मे अपना हि अक्शदेख कर शरमा गई,, औऱ नज़ारें झुका केँ खड़ी होँ गई,.
अपने आप् कों देखो नीरा इसमें, तुम्हें स्वयं अपनी सुंदरता दिखाई देगी। किसी औऱ सें पुच्छने कि ज़रूरत हि नहीं हैं.
वोँ - मुझे लज्जा आरहि हैं बाबूजी.
मे - अपने सें क्याँ शरमाना पगली। औऱ उसकी थोड़ी कों उंगली केँ सहारे सें उपर किया, देख औऱ जी भरकेजी अपनी जीवनयह सोचके कि तुम् किसी सें कम नहीं हौ।
आज केँ बाद मुझे वोँ गाँव कि डरी सहमी सि नीरा नहीं दिखनी चाहिए इसघऱ मे।
अब एक् नयेरूप मे आनां हैं तुम्हें वोँ नीराबन कर जोँ इस भेड़ियों सें भरे समाज मे एक् शेरनी कि तरह निकले.
मेरी बातों कों वोँ टक-टॅकी लगाकर सुनती रही, मे उसका आत्म विश्वास बढ़ाना चाहता थां, जिससे वोँ भविष्य मे किसी कि मोहताज़ बनकर नां रहे.
नां चाहते हुए भि वोँ मेरी चौड़ी छाती मे समा गयीँ, औऱ सूबकते हुए बोलि- सब आप् जैसे क्यूं नहीं होते बाबूजी ?
मैने उसकेसर पऱ हाथ फेरा औऱ उसकोचुप कराकर कहा-सभी तेरे जैसे भि तौ नहीं हें.? कितनी मासूम, भोली, किसीपरी जैसी।
अबचल खानां रेडी करते हें, भूखलगी हैं.
फिन वोँ कपड़े चेंज करनेचली गई,, औऱ उसकेबाद खाने केँ इंतेज़ाम मे लग गई,, तब तक मे कुछनये एलेक्ट्रॉनिक आइटम्स जैसे माइक्रो कॅमरा, माइक्रो-मोबाइल लाया थां उन्हें लॅपटॉप सें कनेक्ट करके कॅलिब्रेट करनेलगा.
जब खानां सजधजकर होँ गय़ा तोँ हम् दोनो नें खानां खाया औऱ थोडा बहोत बाहर् टहलने निकलगये, औऱ फिनआकर सोगये.
सुभह मैने नीरा कों 4: 30 बजे हि जगा दिया, आज सें उसको योगा-प्राणायाम, फिन औऱ एक्सर्साइज़ सिखानी थि.
जब तक वोँ अपने नित्य कामों सें फारिग हुई तब तक मैने ध्यान मुद्रा लगाई औऱ फिन 5 बजे सें 7 बजे तक हम् दोनो नें मिलकर खूब पसीना बहाया।
वोँ थककरचूर हौ गई,, आधे घंटेबाद जब उसको एक् बड़ा ग्लास जूस पिलाया तौ उसमें फिन सें जान आँ गई औऱ घऱ केँ काम निपटाने चली गयीँ,.
दिन मे पार्ट्नर भि आँ गये, औऱ वोँ भि नीरा कां काया कल्पदेख कर हैरान रहगये। इसी दिनचर्या मे 1 महीना बीत गय़ा,
अब नीरा वोँ नीरा नहींरही थि, जिसेकोई भि भेड़ बकरी कि तरहहाथ पकड़े औऱ जहाँ चाहे लेँ जाए.
आज कि नीरा वोँ नीराबन चुकी थि, जोँ हम् जैसे ट्रेंड कमॅंडोस सें भि दो-दोहाथ करने सें नहीं हिचकिचाती थि।
संग हि संग हमने उसको बात-चीत करने कां ढंग औऱ रहन-सहन कां तरीक़ा भि सिखा दिया थां,
अबकोई उसको गाँव कि अनपढ़ गँवार लड़की नहींकह सकता थां.
हमें लगनेलगा थां कि अब हमारे मिसन कां असली मोहरा अब रेडी हौ चुका हैं, औऱ अबउसे चलाने कां टाइम आँ गय़ा हैं.
इसीबीच एक् दिन ट्रिशा कां मोबाइल आया, उसने बताया कि वोँ मां बनने वाली हैं, संग हि निशा नें भि खुशख़बरी उसेबता दि थि.
एक् संग दोनो बहनों केँ मां बनने कि खबर सुनकर मेरी खुशी कां तोँ जैसे ठिकाना हि नहीं थां,
बस्तर सिटी कां नामी गिरामी होटेल जिसका डाइनिंग हॉलइस वक़्त नीली-पीली रंग बिरंगी मद्धिम रोशनी मे नहाया हुआ थां.
कस्टमर अपनी अपनी टेबल पर्र बैठे याँ तोँ लज़ीज़ खाने कां मजा लेँ रहे थें, याँ अपने खाने केँ आने कां प्रतीक्षा कररहे थें,
ऑर्केस्ट्रा कि मद्धिम मगर मधुरधुन हॉल केँ कोने-2 सें उठरही थि.
तभी, वहा रोकी, राकेश खांडेकर अपने 5-6 दोस्तों केँ संग प्रेवेश करता हैं, वोँ सभी शराब केँ नशे मे धुत्त इधर-उधर कों हिलते डुलते हुए दिखाई देरहे थें, मतलबनशा उन पऱ पूरीतरह हावी थां.
रोकी कां बाप शहर कां एक् मशहूर लीडर जौ कि एक् पॉल्टिकल बर्थडे पार्टी कां नेता थां नाम थां प्रताप खांडेकर,
उसकी जश्नदेश मे कभी सत्ता मे तौ नहींआई थि मगर मौजूदा कोलिशन सरकार मे भागेदारी ज़रूर थि, कुछ राज्यों मे भि उनकी सरकार थि.
रॉकी औऱ उसके दोस्तों नें पूरे डाइनिंग हॉल मे शोरमचा रखा थां, जिसकी वजह सें वहा मौजूद लोगों कों असुविधा होनेलगी.
होटेल मॅनेजर कि इतनी हिम्मत नहीं थि कि वोँ उनकोरोक सके.
आख़िर मे जब पानीसर गुजरने लगा, तोँ एक् टेबल केँ इर्द-गिर्द बैठेतीन व्यक्तियों मे सें एक् उठा औऱ उन लफंगों कों समझाने लगा.
वोँ शराब औऱ ताक़त केँ नशे मे चूर कहां समझने वाले थें, उल्टा उस व्यक्ति केँ संग हि हाथापाई करनेलगे,
जब उसके साथियों नें देखा कि वोँ लोग उसकेसंग कुछ ग़लत नां करदें तौ वोँ दोनो भि उठकर आँ गये औऱ उनमें सें एक् नें एक् गुंडे केँ कान केँ नीचेबजा दिया.
अब तोँ मामला अधिकतूल पकड़ने वाला हि थां कि होटेल कां मॅनेजर वहा आँ गय़ा औऱ उन तीनो सें माफी माँगते हुए मिन्नतें करनेलगा, कि आप् लोग समझदार हौ इनके मुँहमत लगो औऱ यहाचले जाओ जिससे मामला शांत होँ जाए, वरना
मेरे होटेल कां माहौल खराब होगा, हौ सकता हैं कुछ टूट-फुट भि होँ जाए.
वोँ तीनों वहा सें निकलने लगे, अभि वोँ डाइनिंग हॉल केँ मेनगेट सें निकलकर सामने बने पोर्च तक हि पहुँचे थें कि उन नशेडियों मे सें एक् नें उन तीनो मे सें एक् कां पीछे सें कॉलर पकड़ लिया,
उस बंदे नें उसकाहाथ पकड़के ज़ोर दबाया तोँ उसका कॉलरछूट गय़ा, उस बंदे नें पीछेमूड केँ उस नशेड़ी कों एक् ज़ोर कां धक्का दिया जिससे वोँ धडाम सें पीछे कों गिर गय़ा.
देखते-2 वहा घमासान छिड़ गय़ा, उनतीन बन्दो नें 10 मिनट तक उन गुण्डों कि जम केँ धुलाई कि अब वोँ सब अर्ध बेहोसी कि हालत मे ज़मीन पड़े-2 कराहरहे थें.
रोकी हक्का वाक्का खड़ा उन्हें देखरहा थां, उसकी टाँगें काँपरही थि, ठीक सें खड़ा भि नहींहुआ जारहा थां उससे.
फिन भि उसने अपनेडर कों काबू मे करके किसीतरह वोँ उनसे भिड़ा रहा, मगर जल्द हि पस्त होँ गय़ा, उन बन्दो मे सें एक् नें उसको फाइनल एक् घूँसा उसकी कनपटी पर्र मारा, प्रहार इतना पवरफुल थां कि रोकी केँ फारिस्ते कून्च करगये.
लाख कोशिशों केँ बाद भि वोँ अपनी टाँगों पर्र खड़ा नहींरह पाया औऱ वोँ भि गिरने हि वाला थां कि दो हाथों नें उसेथाम लिया.
रोकी नें अपनीबंद होती आँखों सें उस थामने वाले कि ओर देखा औऱ बस अपनेघऱ कां पता हि बोल पाया औऱ उसकी बाहों मे बेहोश होँ गय़ा.
उसका बेहोस बदन एक् लड़की कि बाहों मे झूल गय़ा, जिसे उसने किसीतरह सें एक् रिक्शे मे डाला औऱ उसके बताएपते कि ओर लेँ चली.
यह एक् हवेली नुमा बहोत हि बड़ा सां घर-मकान थां जोँ शहर केँ सबसे रहिषी इलाक़े मे थां। उसने रिक्शे वाले कों उस हवेली नुमा घर-मकान केँ सामने रोकने कों कहा, औऱ स्वयं बाहर् आकर दरबान सें गेट खोलने कों कहा.
दरवान नें रोकी कों पहचान करगेट खोला औऱ उस रिक्शे वाले कि सहायता सें उसे अंदर तक लें गयीँ,.
एक् बड़े सें हॉल मे एक् अधेड़ औरत जौ नाँ अधिक खूबसूरत थि, तोँ बदसूरत भि नहींकह सकते, थोड़ी भारी जिस्म कि हल्का साँवली रंगत कि एक् बड़े सें सोफे पर्र बैठकर टेलीविज़न देखरही थि.
रात केँ 10 बजे अपनेघऱ मे एक् अजनबी लड़की कों अपने बेटे केँ बेजान सें जिस्म कों सहारा दिए लातेदेख कर वोँ चोंक गयीँ, औऱ सोफे सें उठकर फ़ौरन उनकेपास पहुँची.
स्त्री - क्याँ हुआ मेरे बेटे कों, किसने कि इसकीयह हालत, रोकी केँ पिताजी ! जल्दयहा आओ, देखो तोँ इसको क्याँ हुआ.?
रॉकी कां बाप प्रताप खांडेकर भि एक् रूम सें बाहर् आया औऱ वोँ भि अपने नालयक बेटे कों देखकर हड़बड़ाया, मगर अपने गुस्से कों काबू मे रखकर अपने भावनाओ कों कंट्रोल मे रखकर पहले उसने नौकरों कों बोलकर अपने बेटे कों उसके बेडरूम तक भिजवाया, औऱ फिनउस लड़की कों बैठने कां इशारा करके स्वयं भि बैठ गय़ा.
प्रताप - यह केसे ? कहां औऱ किसने किया.?
लड़की - जी मुझे ज़यादा तोँ नहींपता कि होटेल केँ अंदर क्याँ हुआ ? मगर बाहर् जौ मैने देखा वोँ कुछइस तरह सें थां औऱ उसने सारी घटना प्रताप केँ सामने बयानकर दि.
प्रताप - मे जानता हूं कि मेरा बेटा ग़लत लोगों कि संगत मे बिगड़ गय़ा हैं, फिन भि हम् तुम्हारे शुक्रगुज़ार हें बेटी जौ तुम् उस नालयक कों यहा तक सहारा देकरलाई हौ.
लड़की - इसमें धन्यवाद कहने कि आवश्यकता नहीं हैं सर, यह तोँ मैने अपना फ़र्ज़ समझा कि इस हालत मे इनको इनकेघऱ पहुँचाना चाहिए सो लेँ आई.
प्रताप - यह तुमने हमारे उपर अहसान किया हैं, खैर अपने बारे मे कुछ बताओ, क्याँ नाम हैं ? माँ-बाप क्याँ करते हैं.?
लड़की - जी ! मेरानाम नीरा हैं, मम्मी-बाप नहीं हैं मेरे, मे अकेली हि हूं इस दुनिया मे.
प्रताप - ओह ! दुखहुआ जानकर ! वैसे क्याँ काम करती होँ.?
नीरा - जी ! अधिककुछ नहीं, बस ऐसे हि इधर-उधर घरों मे काम करके अपना गुज़ारा कर लेती हूं.
अभि वोँ बातकर हि रहे थें कि तब तक रॉकी कि मम्मी राम दुलारी देवी भि रॉकी कों उसके कमरे तक छुड़वा कर आँ गयीँ,.
प्रताप - रोकी कि मां, देखोयह बच्ची कितनी अच्छी हैं, बिनाजान पहचान केँ रॉकी कों इस हालत मे घऱ तक छोड़ने आई हैं.
रोकी कि मम्मी - सहीकह रहे हौ ! आज केँ जमाने मे कॉन किसके कामआता हैं, फिनजब उसे वोँ बातें पताचली जौ उसने प्रताप कों बताई थि तोँ उसने उससे पुछा-
हमारे घऱकाम करना चाहोगी बेटी। हम् तुम्हारी सारी ज़रूरतों कां ख्याल रखेंगे, तुम्हें भि इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा, औऱ हमें भि तुम्हारे जैसी अच्छी नेककाम करने वालीमिल जाएगी.
नीराकुछ देरचुप रही, फिन कुछदेर बाद बोलि - ठीक हैं माजीअगर आप् कहती हें तौ मे आपकेयहा काम करने कों रेडी हूं.
रोकी कि मम्मी - ठीक हैं तौ फिनकल सें काम पऱ आँ जानां, फिनकुछ सोचकर बोलीं - अभि कहां जाओगी.?
ऐसाकरो यहींरुक जाओ, सुभह जाकर अपना समान लेँ आनां क्यूं ठीक हैं नाँ जी.
प्रताप - हांसही कहरही हौ, बेचारी अकेली लड़की इतनीरात गये कहां जाएगी, यहीं नौकरों केँ रूम मे सें एक् बतादो सो जाएगी, कुछ कपड़े वग़ैरह देदो सोने केँ लिएइसे.
नीरा - नहीं मालिक मे चली जाउन्गि कोईडर वालीबात नहीं हैं, सुभह जल्द हि आँ जाउन्गि.
प्रताप - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी…! औऱ इतनाकह कर वोँ अपने कमरे मे चलेगये औऱ नीरा अपनेघऱ लौटआई.
नीरा केँ घऱ लौटते हि मैनेउसे पुछा - कुछबात बनी नीरा.? उसकेघऱ मे घुसने कां मार्ग मिला कि नहीं.
नीरा - आप् कोई योजना बनाओ औऱ वोँ फैल हौ जाए.?ऐसा कभी होँ सकता हैं भला.
मे - तोँ मतलब तुम्हें वहाकाम मिल गय़ा…!
नीरा - अरे वोँ तोँ मुझे अभि भि नहींआने देरहे थें, कहनेलगे ! रात बहोत होँ गयीँ, हैं, कहां जाओगी, सुभह जाकर अपना समान लेँ आनां।
जैसे-तैसे एक्सक्यूज़ करकेआई हूं.
मे - गुड ! अब तुम् अपना समानपॅक करलो, औऱ यह चीज़ें संभाल कर रखना, फिन उसे एक्-एक् चीज़ कों समझाते हुए मैनेकहा।
यह देखोयह ट्रांसमीटर हैं इसकोऐसे दवा केँ किसीसतह पर्र छोड़ दोगि तोँ यहउसी चिपक जाएगा, ऐसे !
इसको तुम् प्रताप केँ टेलिफोन केँ नीचे चिपका देना, ध्यान रहेउस मोबाइल पऱ जिस पर्र उस केँ ज़्यादातर पर्सनल मोबाइल आतेहों.
औऱ यह हैं एक् मिनी कॅमरा इसकोऐसी स्थान छिपा केँ रखना जहाँ वोँ बाहर् केँ लोगों सें मिलता होँ.
ध्यान रहे, यह काम करतेहुए तुम्हें कोईदेख नां लेँ, वरना तुम् मुशिबत मे पड़ सकती होँ.
हां एक् औऱ बात ! उसके हरामी लौन्डे सें दूर हि रहना। कहीं तुम्हारे संगकुछ ग़लत नां कर्दे… समझ गयीँ,.
उसनेहां मे गर्दन हिलाकर हामीभर दि, औऱ फिनरुक कर बोलीं- वोँ आपने अभि रॉकी सें दूर रहने कों क्यूं कहा.? एक् घऱ मे रहकर उसकाकाम भि तोँ करनापड़ सकता हैं.
मे - उसकाकोई काम नाँ करने केँ लिए नहींबोल रहा हूं, वोँ रहीस बाप कि बिगड़ी औलाद हैं, तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़कियाँ उसकी कमज़ोरी हें.
वोँ - बाबूजी ! तौ क्याँ मे इतनी हसीन हूं कि किसी कि कमज़ोरी बनजाउ.?
मे – नीरा ! पहले तोँ यह बाबूजी कहनाबंद करो !
वोँ – तौ क्याँ कहके बुलाऊ आपको.?
मे – नाम लेँ सकती हौ, भैया कह सकती होँ.!
वोँ – आपकानाम तौ नहीं लेना चाहूँगी मे, भैया जी कैसा रहेगा,, ?
मे – जौ तुम्हें ठीकलगे, औऱ रहीबात तुम्हारी सुंदरता कि तौ उसदिन तुम्हे शीशे केँ सामने खड़ा करके क्याँ दिखाया थां मैने ?
वोँ - तोँ अभि तक आपकी कमज़ोरी क्यूं नहींबन पाई मे.? कहकर वोँ शरमा गई, औऱ अपनी नज़रें नीची करके अपने निचले होठ कों काटने लगी.
मैने उसका मतलब समझते हुएकहा - हर व्यक्ति कां अलग-2 स्वाभाव होता हैं, मेरी नज़र मे किसी कि मजबूरी कां फ़ायदा उठाना ग़लत हैं, गुनाह हैं, जिसे मे कतई पसन्द नहीं करता.
वोँ - औऱ कोई सामने सें आपको पसन्द करती हौ तोँ.? नज़रें झुकाए हुए हि कहा उसने,
मे उसकीबात सुनकर उसकीओर देखता हि रह गय़ा, औऱ उसके शब्दों कां मतलब समझने कि कोशिश करतेहुए बोला.
फिन भि मे उसकी इक्षा केँ बिना छुना भि पाप समझता हूं.
वोँ- औऱ अगरकोई अपनी इक्षा सें हि आपकेपास आनां चाहे तोँ.?
मे - तुम् कहना क्याँ चाहती होँ नीरा.?
वोँ - देखिए भैया जी ! आप् मुझे ग़लतमत समझना पऱ जबसेउन ज़ालिमों नें मेरेसंग वोँ ग़लतकाम किया थां, उसकेबाद सें मेरे जिस्म केँ जख्म तोँ भरगये,
मगरअब मेरेइस कम्बख़्त जिस्म मे कुछऐसी हलचल होने लगती हैं कि मे…., कहते-2 वोँ रुक गई,, औऱ अपनेहोठ काटने लगी…!
मे – तुम्हारी तकलीफ़ समझ सकता हूं मे नीरा ! मगर मे इसमें तुम्हारी क्याँ सहायता कर सकता हूं.?
वोँ – इस जालिम समाज सें मुझे घृणा सि हौ गयीँ, हैं, हर इंसान मे भेड़िए कां रूप नज़रआता हैं मुझे, इसलिये मे किसी औऱ केँ संग संबंध बनाना नहीं चाहती… इसलिये मेरामन आपकीओर झुकने लगा हैं.
मे - नीरा ! तुम् एक् बहोत अच्छी लड़की होँ, मगर मे एक् विवाह-सुदा हूं। तोँ मे केसे तुम्हारी यह इक्षा पूरीकर सकता हूं ? औऱ वैसे भि घऱ मे औऱ दो मर्द भि तोँ हें…
वोँ - मैने आपसे विवाह करने केँ लिए तोँ नहींकहा.? बस एक् विश्वास केँ नाते आपसे गुज़ारिश कि हैं.!
औऱ रहीबात उन दोनो कि, तोँ उनकेलिए कभीऐसे विचार मेरेमन मे आए हि नहीं.
My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 85
मेरेमन मे जोँ थां, वोँ मैने आपकोबोल दिया, मानना नाँ मानना आपकेहाथ मे हैं…
मे उसकीबात सुनकर सोच मे पड़ गय़ा, वोँ जोँ कहरही थि वोँ व्यवहारिक बातें थि, जोँ हमनेकभी सोची हि नहीं।
अबजब तक कोई योग्य दोस्त इसकोमिल नहीं जाता, इसकेबदन कि ज़रूरतों कां पूरा होना भि ज़रूरी हैं।
कहींऐसा नां हौ कि अपने जिस्म कि इक्षाओं केँ बशिभूत इसकेकदम बहक जाएँ औऱ हम् अपने मिसन मे हि फैल हौ जायें।
एक् निर्णय करके मे उसके लगभगआया औऱ उसके हाथों कों अपने हाथों मे लेकर उसकी कजरारी आँखों मे झाँकते हुएकहा - मे तुम्हारे विश्वास कों टूटने नहीं दूँगा नीरा, यह कहकर मैने उसके माथे कों चूम लिया.
उसने अपने दोनो बाजू मेरे इर्द-गिर्द लपेटदिए औऱ मेरे चौड़े सीने मे समा गई,.
मे भि उसकीपीठ पऱ हाथ फिराने लगा, जब मेरेहाथ उसके नितंबों पऱ कसे तोँ उसने अपना कसाव औऱ बढ़ा दिया मानो वोँ मुझमें समा जानां चाहती हौ.
उसके जिस्म कां स्पर्श पाकर मेराहेर भि अंगड़ाई लेनेलगा औऱ उसकी नाभि केँ उपर ठोकर मारने लगा।
जब नीरा कों इसका आभासहुआ तोँ वोँ सिसक पड़ी औऱ बोलीं- भैया जी ! मेरा जिस्म जलरहा हैं, ईश्वर केँ लिए इसकीआग भुझादो नां.!
मैने उसके कंधे पकड़कर अलग किया औऱ उसके होठों कों चूमते हुएकहा – एक् शर्त पर्र.!
वोँ - इसकेबाद मुझे आपकीहर शर्त मंजूर होगी.!
मे - मुझेकोई लड़का तुम्हारे योग्य मिल गय़ा तोँ तुम्हें उसकेसंग विवाह करनी पड़ेगी… कहो मंजूर हैं.
वोँ - मुझे आप् पर्र पूरा विश्वास हैं, आप् मेराभला हि चाहेंगे, मुझे आपकीयह शर्त मंजूर हैं.
विक्रम औऱ रणवीर दूसरे कमरे मे सोरहे थें, मे नीरा कों लेकर उसके कमरे मे आँ गय़ा औऱ उसको अपनीगोद मे लेकरबैठ गय़ा।
वोँ किसी छोटी बच्ची कि तरह मेरीगोद मे बैठी थि.
नीराइस वक्त चोली घाघरा मे थि, उसकी चुनरी उतारकर बिस्तर पऱ एक् तरफ फेंक दि, औऱ उसके 32” कि गोल-गोल चुचियों कों सहलाने लगा.
मेरा लन्ड उसकीकसी हुइ गान्ड मे ठोकरलगा रहा थां, नीरा कि आँखें बंद कों चुकी थि औऱ वोँ मेरेगाल सें अपनागाल रगड़रही थि.
आज उसका सांवला रूप मुझे अत्यंत हि कामुक लगरहा थां, पिछले कुछ महीनो सें हमारे संग रहकर उसकारूप निखर गय़ा थां.
कसरत करने सें उसकेबदन केँ अंगों मे एक् परफेक्ट कटावबन गये थें, जहाँ भि हाथ लगाओबस वहीं सें मादकता छलक्ने लगती थि.
मेरेहाथ उसकेबदन कां नाप निकाल रहे थें औऱ नीरा उसके सुखद अहसास मे खो चुकी थि.
अब मैने उसकी चोलीखोल कर एक् ओर फेंक दि, बिना ब्रा केँ उसकेगोल-2 सुडौल बूब, एक् दम इलाहाबादी अमरूद जैसेलग रहे थें,
मैने उन्हें सहलाकर नीरा कों अपने सामने खड़ा किया औऱ फिन उसका घाघरा भि खींच दिया.
अपना कुर्ता औऱ शॉर्ट निकाल कर मे सिर्फ़ अंडरवेर मे आँ गय़ा।
नीरा भि अब सिर्फ पेंटी मे हि थि। बिस्तर पर्र बैठकर मैनेउसे अपनीगोद मे अपनीतरफ मुँह करके बिठा लिया औऱ उसके होठों कों चूसने लगा।
वोँ भि मेरा भरपूर सहयोग देरही थि, होंठ चूस्ते हुए, मे उसकी कठोरमगर मक्खन जैसी रसीले चुचियों कों मसलता जारहा थां.
उत्तेजना मे वोँ मेरे लन्ड पऱ अपनीकमर हिला-हिला कर बुर कों रगड़ने लगी।
उसकी पेंटी बुर रस सें गीली होँ चुकी थि, जोँ अब मेरे अंडरवेर कों भि गीला करनेलगी.
मैने उसके होंठों कों छोड़कर उसकी चुचियों कों चूसने लगा औऱ एक् हाथ सें मसलता भि जारहा थां, मटर केँ दाने केँ बराबर केँ उसके निपल कड़क होकर कंचे जैसे हौ गये, जिनको अपने दाँतों मे लेकर हल्के सें काट लिया.
आआईयईई…। बाबू…काटो.नहिी… आअहह… चूसो…औऱ जॉरीए सीईए.
उसकीकमर कों साइड मे पकड़कर मैनेउसे उपर कों उठाया औऱ उसकेपेट कों चाटने लगा,
फिन उसकी नाभि मे अपनीजीभ डालकर जैसे हि घुमाई… वोँ पीछे कों बेंड होतीचली गई, औऱ मेरे हाथों कि पकड़ मे झूल गयीँ, …
नाभि केँ चारों तरहजीभ कि छुअन सें उसका जिस्म थर थराने लगा… औऱ वोँ मेरे हाथों कि गिरफ़्त मे किसी नागिन कि तरह लहराने लगी…
फिन मैने उसको नीचे उतार दिया औऱ अपना अंडरवेर निकाल करअलग किया,
अपने सख़्त कड़क लन्ड जौ अब एक् स्टील रोड कि तरह एक् दम सीधा खड़ा थां, मसल्ते हुए मैने उसके मुँह केँ सामने लहरा दिया.
उसने मेरे चेहरे कि तरफ सवालिया नज़रों सें देखा…
इसको अपने मुँह मे लेकरचूस नीरा, जब तुँ इसे प्रेम देगी, तोँ यह भि तेरी मुनिया कि अच्छे सें सेवा करेगा नाँ… !
वोँ आश्चर्यचकित होकेर बोलीं – क्याँ इसको मुँह मे भि लिया जाता हैं.?
मैनेजब हां मे अपनासर हिलाया, तोँ वोँ अपने पंजों पऱ बैठ गई, औऱ मेरे हथियार कों हाथ मे लेकर सहलाने लगी,
उसकी स्किन कों आगे-पीछे करके सुपाडे कों खोलकर अजीब सि नज़रों सें देखने लगी.
लाल-लाल सेब जैसा चमकदार सुपाडा जब उसने अपनीजीभ कि नोक सें छुआ, तौ मेरी आँखें बंद होँ गई, औऱ नां चाहते हुए मेरे मुँह सें एक् आआहह… निकल गयीँ,,
आअहह…। नीरा… मेरी जाअंन्न…। चुसले ईसीए। औऱ फिन मैने उसकेसर कों
पकड़कर अपने लन्ड पऱ दबा दिया, वोँ सरसराता हुआ, उसकेगले मे जाकरफँस गय़ा.
उसके मुँह सें गूऊन…गूऊन कि आवाज़ें आनेलगी, जब उसकी आँखें उबलने लगी, तोँ मैने उसकेसर कों छोड़ दिया.
वोँ खों-खों करके खांसने लगी औऱ मेरीओर देखकर नाराज़गी वालेभाव सें बोलि- ऐसा क्यूं किया आपने.? मेरी तौ दम हि निकल गयीँ, होती.
मे - सॉरी बेबी.! ग़लती होँ गयीँ,, अब धीरे-धीरे चूसोइसे। शाबास.!
फिन वोँ उसेआधा अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी।
मेरे हिलते हुए टट्टों कों उसने अपने एक् हाथ सें सहलाया, तौ मेरी उत्तेजना औऱ ज्यादा बढ़ने लगी…
अब मुझे लगनेलगा कि अब औऱ कंट्रोल नहीं हौ पाएगा मुझसे, तौ फिन सें उसके मुँह कों दबा दिया अपने लन्ड पर्र औऱ उसके मुँह मे हि अपनी पिचकारी छोड़ दि।
उसने इससे पहलेकभी वीर्य कां स्वाद नहीं लिया थां, सो वोँ उसे बाहर् निकालने लगी, तौ मैने उसका मुँहदबा करकहा- पीजा नीरा रानीइसे, टॉनिक हैं तेरेलिए.
अब मैनेउसे बिस्तर पर्र लिटा दिया औऱ उसकी कच्छि भि उतारकर एक् ओर फेंक दि।
छोटे-2 बालों सें भरी उसकी साँवली बुर देखकर मेराहाल हि मे झडा लन्ड फिन सें अंगड़ाई लेनेलगा.
मैने अपनी एक् उंगली कों मुँह मे डालकर उसकोथूक सें गीला किया औऱ उसकीरस बहाती बुर मे डाल दि…
वोँ ससिईईईई….कारीई…भरने लगी। !
उसकी टाँगों कों चौड़ा करके मे उसकी बुर कों अपनीजीभ सें चाटने लगा, उसकी बुर रस कां नमकीन सां स्वाद मुझे अच्छा लगा।
अब मे उसकी बुर कों जीभ कि नोक सें कुरेदने लगा औऱ एक् उंगली उसकेछेद मे डालकर अंदर बाहर् करतारहा.
वोँ इस दोहरे हमले कों ज्यादा देरझेल नाँ सकी, औऱ जैसे हि मेरी उंगली नें उसकेजी पॉइंट कों मसला, वोँ अपनीकमर कों हवा मे झूलते हुए झड़ने लगी.
हम् दोनोफिन सें एक् दूसरे केँ होंठ चूसने लगे, औऱ अपनीजीभ एक् दूसरे सें भिड़ा दि, उसकी बुर केँ रस कां स्वाद औऱ मेरे लन्ड केँ रस कां स्वाद लार केँ माध्यम सें एक् दूसरे केँ मुँह मे घुलने लगा.
उसको भि इसखेल मे मजाआने लगा थां…हम् दोनो केँ जिस्म कामोत्तेजना सें दहकने लगे थें…
फिन मैने अपने सें अलग करके, उसे पलग पर्र लिटा दिया औऱ उसकी गान्ड केँ नीचे एक् तकिया रखकरउसे उँचा किया,
फिन अपना लन्ड उसकी बुर जोँ अब बिल्कुल स्वस्थ हौ चुकी थि औऱ लन्ड लेने केँ लिए प्यास रही थि, उसकेछेद पऱ रखा औऱ एक् करारा सां झटका अपनीकमर कों दिया…
आधे सें अधिक लन्ड उसकी बुर मे सरक गय़ा…
उसके मुँह सें एक् जोरदार कराह निकल पड़ी…
आआहह…। धीरे-धीरे…बबुऊुज्जिि। दर्द होता हैं… हआइई…माआ.
अब मैनेसंग संग उसकी चुचियों कों भि मसला, औऱ एक् औऱ धक्का लगा दिया, पूरा लन्ड उसकी बुर मे समा गय़ा…!
दर्द औऱ उत्तेजना मे उसकी आँखें बंद होँ गयीँ,., ट्रीटमेंट सें उसकी बुर एकदमफिन सें कोरी जैसी हौ गई, थि, जिससे मेरा लन्ड उसमें एकदमकस सां गय़ा थां…
मैने धीरे-धीरे-2 लन्ड कों अंदर – बाहर् करना शुरुआत कर दिया, कुछ देर मे हि उसकीकमर झोटे देनेलगी औऱ वोँ मेरे धक्कों कां संग अपनीकमर उचका-2कर देनेलगी.
ससिईइ…आआअहह…औऱ जॉरीए…सि…भैईयजीीीइ….उफ़फ्फ़…बहोत.अच्छाअ.लग। रहाआ। हाईईइ…हाहह… उऊहह…
मेरे धक्कों कि स्पीड तेज.औऱ.तेज। होतीजा रही थि… इसबीच वोँ एक् बारझड चुकी थि, मगर मुझे अभि वक़्त लगाना थां.
फिन मैने उसकोउठा केँ घुटनों केँ बल निहुरा दिया, अब वोँ मोरनी कि तरह मेरीओर गान्ड करके निहुर गई,.
मैने अपनेहाथ पऱ थूक लेके अपने लन्ड कों चुपडा, औऱ उसकी गीली बुर पऱ रखकर पीछे सें उसकेछेद मे डाल दिया.
आअहह….ससुउुउउ…हहिईीईई…। जॉरीए सि नहिी…
मगर अब मेरेउपर उसकी आहों कां कोईअसर नहीं होने वाला थां, अपनी उत्तेजना मे अपना लन्ड उसकी बुर मे पेलता हि गय़ा औऱ जड़ तक डालकर धक्के मारने लगा.
ढप्प-धप्प, फूच-फूच कां मधुर म्यूज़िक कमरे मे गूँजरहा थां, उसको भि फिन सें मजाआने लगा थां सो वोँ भि अपनीकमर हिला-हिला कर अपनी बुर कों मेरे लन्ड पर्र पटकने लगी.
मेरे धक्कों कि रफ़्तार इतनीतेज औऱ तीव्र होँ गयीँ,, कि नीरा जैसीकम उमरा औऱ सख़्त जान लड़की भि हाए-हाए करनेलगी, उसका जिस्म इतनी तेज़ी सें हिलरहा थां कि उसकोभान हि नहीं हौ रहा थां कि वोँ कबआगे कों गई, औऱ कब पीछे कों आई.
20-25 मिनट कि धुनाई केँ बाद मे भरभरा कर उसकी बुर मे झड गय़ा, औऱ उसकीपीठ पर्र लड़कर लेट गय़ा,
मेरे वीर्य कि गर्मी पाकर उसकी झड़ी हुईँ मुनिया फिन एक् बार पानी छोड़ने पर्र मजबूर होँ गई, …,
वोँ बहोत देर तक अपनासर हवा मे उठाकर झड़ती रही.
जब उससे मेराभार सहना मुश्किल हौ गय़ा तौ वोँ भि बैड पऱ पेट केँ बलपसर गई,।
कुछदेर ऐसे पड़े रहने केँ बाद मे उसके साइड मे पलट गय़ा, वोँ ऐसे हि पड़ीरही औऱ मे उसकीपीठ पऱ हाथ रखकरलेट गय़ा.
तूफान गुजर गय़ा थां, औऱ उसकेबाद कि पूर्ण शांति व्याप्त हौ गई, थि.
सुभहजब आँख खुली तौ हम् एक् दूसरे कि बाहों मे थें.
वोँ अभि तक सोरही थि, सोती हुईँ बड़ी मासूम सि परी सि मुझेलगी, जिसेदेख कर मेरे अंदर सें उसकेलिए प्यार उमड़ पड़ा औऱ मैने उसके होठों कों चूम लिया.
चुंबन केँ अहसास सें उसकी नींदटूट गयीँ,, औऱ मेरेगले सें लिपटकर सूबकने लगी.
मे - क्याँ हुआ नीरा, रो क्यूं रही हौ, कुछ ग़लत होँ गय़ा क्याँ हमसे.
वोँ - नहीं भैया जी खुशी मे मे अपने आपकोरोक नहींपाई औऱ रुलाई फुट पड़ी।
कलरात मैने जानां कि सच्चा सुख क्याँ होता हैं। आप् सच मे अपने मित्र कां बहोत ख्याल करते होँ.
अब मे आपसेकभी कुछ नहीं माँगूंगी, अगर आप् अपनी ख़्वाहिश सें मुझेयह सुखफिन सें देंगे तौ मे समझूंगी कि आप् मेरी इक्षाओं कां ध्यान रखते हें.
मैने उसकेसर पर्र हाथ फेरते हुएकहा - अरेयह क्याँ बात हुईँ.? जब तेरामन करे आँ जानां मेरेपास, हिच-किचाना नहीं.
इतनासुन कर वोँ खुश होँ गयीँ,, औऱ मेरेगाल पऱ किसकर लिया.
फिन हम् दोनोउठ गये औऱ नित्य करम मे जुटगये।
फ्रेश होकर उसने रसोई संभाला, औऱ हमारे लिए ब्रेकफास्ट सजधजकर करनेलगी…
हम् तीनों कों गरमचाय ब्रेकफास्ट करवाकर औऱ स्वयं करके नीरा अपने मिसन कि पर्र जाने केँ लिए रेडी होँ गयीँ, …
मैने उसके माथे कों चूमकर उसका हौसला अफजाई किया, औऱ कहा – तुँ फिकरमत करना, जब भि तुम कोकुछ लगे कि कोई प्राब्लम होँ सकती हैं, बस एक् मिस्कल्ल कर देना…
वैसे हम् तेरे आस-पास हि रहेंगे… उसने अपनी चमकती आँखों सें हामीभरी औऱ चल दि प्रताप केँ घऱ कि ओर…
उसकी आँखों कि चमक देखकर मे पूर्ण अस्वस्त होँ गय़ा थां, कि हमारा यह मिसन भि जल्द हि पूरा होगा…… !
प्रताप खांडेकर केँ घऱ मे औऱ भि कई नौकर, नौकरानिया थीं।
मगर नीरा केँ द्वारा निस्वार्थ भाव सें कि गई, रॉकी कि सहायता कि वजह सें उनकी पत्नि राम दुलारी देवी नें उसको अपनीखास नौकरानी बना लिया.
नीरा अपनीबगल मे एक् पोटली दबाए जैसे हि उनकेघऱ पहुँची, राम दुलारी लपककर उसकेपास आई औऱ बड़े अप्नत्व केँ संग बोलि- आँ गई, बेटी.!
नीरा – जी ! आपने इतने अधिकार सें बोला थां तोँ मुझे तोँ आनां हि थां.
रोकी कि मम्मी - अच्छा किया, अब आज सें तुम् मेरी औऱ रॉकी केँ पिताजी कि खास सेवा मे हि रहना, ठीक हैं, वाकी केँ कामों केँ लिए दूसरे नौकर हें.
नीरा-जी ! मालकिन जैसी आपकी आग्या.
रोकी कि मम्मी - अब तुम् जाओ औऱ एक् नौकरानी कों बुलाकर कहा, इसको अपनेबगल वाले कमरे मे पहुंचा दो, अपना समान उसमें रख लेना, आज सें वहीं रहना.
नीराउस नौकरानी केँ संग उसके पीछे-2चल दि.
रॉकी कां नशा 10 बजे जाके ठंडाहुआ, जब उसकीआँख खुली तोँ उसे अपने पूरे जिस्म मे दर्द कि एक् लहर सि उठी, औऱ उसके मुँह सें कराह निकल गयीँ,.
जैसे-तैसे वोँ अपने बिस्तर पर्र सें उठकरबैठ गय़ा, उसकासर दर्द सें फटाजा रहा थां। अपनेसर कों हाथों मे थामकर बैठ गय़ा।
जब उसकोरात हुईँ घटनायाद आई तोँ उसके दिमाग़ मे पूरीरील घाम गयीँ,.
याद करके उसकेबदन मे उत्तेजना औऱ लाचारी केँ मिले-जुले भाव पैदा होनेलगे जिसके कारण उसकेसर मे औऱ तेज दर्द होनेलगा औऱ नाँ चाहते हुए उसके मुँह सें एक् चीखउबल पड़ी…माआ…!
उसकीयह चीखहॉल मे बैठी उसकी मम्मी औऱ नीरा कों भि सुनाई दि, औऱ वोँ दोनो उसके कमरे कि ओर लपकी.
दरवाजे मे घुसते हि उसकी मां बोलि- क्याँ हुआ बेटा.?
रॉकी - मेरेसर मे बहोत तेज दर्द हौ रहा हैं, ऐसालग रहा हैं कि यह फटेगा क्याँ.
रोकी कि मां - नीरा सें बेटी जा जाकेबॉम तौ लेँ आँ.
नीरा दौड़ी-2 नीचे गई, औऱ 5 मिनटबाद बॉम केँ संग एक् ग्लास नीबू पानी कां लें आई.
नीरा - लीजिए पहले रॉकी बाबूयह नीबू पानीपी लीजिए फिनबॉम लगा देती हूं आपके.
वोँ पहलेउसे देखता रहा, फिन उसकेहाथ सें नीबू पानी कां ग्लास लेकर एक् हि साँस मे खालीकर दिया.
पानी पीते हि उसेकुछ राहत महसूस हुईँ, तौ उसने अपनी मम्मी सें नीरा केँ बारे मे पुछा,
जब उसने बताया कि केसे वोँ उसे अर्ध बेहोसी कि हालत मे घऱ लेकेआई तोँ उसकीनेक नीयती कों देखकर हमनेइसे काम पऱ रख लिया हैं.
नीरा उसकेसर पर्र बॉम सें मालिश कररही थि, नीबू पानी कां असर औऱ बॉम कि मालिश सें उसका दर्द गायब हौ गय़ा.
रॉकी - थॅंक्स नीरा ! तुम्हारे हाथों मे तोँ चमत्कार हैं, मेरा दर्द गायब हौ गय़ा.
नीरा - बाबूजी ! यह नीबू पानी कां चमत्कार हैं, अक्सर रात कों शराब अधिक पीने सें सर पऱ चढ़ जाती हैं, तौ इसको पीने सें अच्छा होता हैं।
वैसे आप् इतनी बुरी चीज़ कों पीते हि क्यूं हें.?
उसकेइस तरह सें पुछने सें रॉकी खामोश रह गय़ा, औऱ उसकी मम्मी नीरा कों प्रशन्शा भरी नज़रों सें देखते हुए बोलीं - बेटा यह बच्ची ठीक हि कहरही हैं, क्यूं तुँ ऐसी वैसी हरकतें करता रहता हैं.
पता हैं तेरीइन आदतों कि वजह सें तेरे बापू कितने दुखी होते हें.? छोड़ क्यूं नहीं देतायह सभी.?
रॉकी - वोँ.वोँ। मम्मी… मे कोशिश करूँगा.!
नीरा थोड़ी देर उसकेसर कि मालिश करतीरही औऱ फिनचली गयीँ,।
रॉकीअब नीरा केँ बारे मे सोचरहा थां, क्यूं इस लड़की नें उसकी सहायता कि औऱ अभि जौ उसने उसकी सेवा कि यहसभी बातें सोचते-2 उसकेमन मे नीरा केँ लिए एक् सॉफ्ट कॉर्नर सां बननेलगा.
फिन वोँ अपने विचारों कों झटककर उठा औऱ फ्रेश होनेचला गय़ा….!
My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) - Next part miss mat karna
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