My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 86
खूबसूरत चौधरी, रायगढ़ शहर कां जानां मानानाम बहोत सारे सामाजिक संस्थाओं कां संचालक, ट्राइबल एरिया मे लोगउसे अपना मशिहा मानते हें। कितने हि मंदिर, मस्जिद औऱ चर्च इसकेदान सें चलते हें.
42 वर्षीय मध्यम मगर मजबूत हाइट काठी कां चौधरी शहर कि जानी मानी हस्तियों मे शुमार किया जाता हैं, जिसके बड़े-2 राजनीतिक- गैर राजनीतिक, ओद्योगिक घरानों सें घनिष्ठता हैं.
दुनिया कि नज़रों मे चौधरी एक् प्रॉपर्टी डीलर हैं, एक् कन्स्ट्रक्षन कंपनी कां मालिक हैं। शहर कि ज़्यादातर अच्छी-2 बिल्डिंग उसी कि कंपनी नें खड़ी कि हें.
सामकोई 8 बजे हसीन चौधरी अपनी एक् कन्स्ट्रक्षन साइट जोँ शहर केँ बाहरी इलाक़े मे चलरही थि, अपनी एक् शानदार वाहन सें लौटरहा थां,
साइट सें अभि उसकी वाहन एक् फरलॉंग हि पहुँची होगी कि रास्ते केँ दोनोतरफ खड़ी झाड़ियों सें गोलियों कि बाद नें उसकी वाहन कों रुकने पर्र मजबूर कर दिया.
एक् गोली विंड्स्क्रीन कों तोड़ती हुइ उसके ड्राइवर केँ दाएँ कंधे कों चीरती हुई निकल गयीँ,। जिसकी वजह सें कार झाड़ियों मे घुसती चली गयीँ, औऱ रोकते-2 भि एक् पेड़जा टकराई।
टक्कर तौ अधिक घातक नहीं थि, मगर घायल ड्राइवर अपनी चेतना खो चुका थां.
चौधरी केँ हाथ पाँवफूल गये, अभि वोँ कुछ सोचने समझने कि स्थिति मे आता कि दो नकाबपोश उसके दोनो साइड केँ दरवाजे पऱ खड़े थें.
उन्होने उसको बाहर् आने कां इशारा किया, मरता क्याँ नां करता, उसे बाहर् आनां हि पड़ा.
अभि उसने अपने बाएँतरफ कां गेटखोल कर अपनापेर बाहर् निकाला हि थां कि एक् शरीरहवा मे तैरता हुआआया औऱ दूसरी तरफ खड़े नकाबपोश कि पीठ पर्र उसके दोनो पैरों कि जबरदस्त ठोकर पड़ी.
वोँ नकाबपोश पहले धडाम सें वाहन सें टकराया औऱ फिन पीछे कों उलट गय़ा, उसकीगन उसकेहाथ सें छिटक गई,.
अभि वोँ चौधरी केँ साइड वाला नकाबपोश कुछ स्थिति कों समझ पाता कि वोँ आदमीफिन सें उच्छल करउठा औऱ गाड़ी कि छत पऱ हाथ टिकाकर दोनो पैरों कि किकउस दूसरे नकाबपोश केँ कंधे पऱ पड़ी.
किक बहोत ज़ोर सें लगी, परिणाम स्वरूप वोँ नकाबपोश भि धूलचाट रहा थां, मगर उसने अपनीगन नहीं च्छुटने दि.
वोँ नकाबपोश उठकर खड़ाहुआ, औऱ अपनीगन उसने गाड़ी कि ओर घमाई हि थि कि उस व्यक्ति नें उसकीगन वाली कलाईथाम ली औऱ उसेउपर कि ओरकर दिया, तभी एक् धमाका हुआ औऱ गोलीहवा मे जाके बेकार होँ गई,.
यह दोनो एक् दूसरे सें गुत्थम गुत्था थें, कि तभी दूसरा नकाबपोश भि उधर आँ गय़ा, औऱ उसनेउस आदमी कों पीछे सें पकड़ लिया.
तभी चौधरी हिम्मत करके बाहर् आया औऱ उसनेपास पड़ी एक् मोटी सि लकड़ी कों पीछे सें उस नकाबपोश केँ सर पऱ दे मारी जोँ उस आदमी कों पीछे सें पकड़े हुए थां.
वोँ नकाबपोश अपनासर थामकर बैठता चला गय़ा, मगरतब तक उसगन वाले नकाबपोश कों छूटने कां मौकामिल गय़ा औऱ उसनेउस व्यक्ति पर्र फाइयर कर दिया.
हड़बड़ी मे चलाई गयीँ, गोली उसके कंधे कों रगड़ती हुई निकल गई,.
दर्द सें कराहते हुए वोँ व्यक्ति अपने कंधे कों थामकर लड़खड़ा गय़ा औऱ ज़मीन पर्र बैठ गय़ा, फिन चौधरी उस नकाबपोश कि ओर लपकामगर वोँ झाड़ियों कि ओरभाग लिया।
मौका पाकर वोँ दोनो नकाबपोश वहा सें भाग खड़ेहुए।
चौधरी नें उस आदमी कों अपनीकार कि पिच्छली सीट पऱ बिठाया, औऱ अपने बेहोश ड्राइवर कों साइड वालीसीट पर्र डालकर स्वयं वाहन ड्राइव करकेशहर कि ओर दौड़ा दि.
हसीन चौधरी व्हीकल कों आँधी-तूफान कि तरह भगाता हुआ एक् बड़े सें प्राइवेट हॉस्पिटल मे दाखिल होता हैं,
उसकीकार देखते हि वहा उसको स्पेशल अटेन्षन मिलनी शुरुआत होँ जाती हैं,
उसके ड्राइवर औऱ उस आदमी कों आनन फानन मे भरती करके विशेष सुविधाओं केँ तहत ट्रीटमेंट शुरुआत हौ जाता हैं.
वोँ व्यक्ति तौ ज्यादा सीरीयस नहीं थां, तोँ उसको स्पेशल वॉर्ड मे लेँ जाकरकुछ पेन किल्लर देकर उसकी ड्रेसिंग कर दि जाती हैं, मगर उसके ड्राइवर कों आइसीयू मे भरतीकर दिया जाता हैं.
जबउस शक्श कि ड्रेसिंग औऱ ज़रूरी इल्लाज़ होँ जाता हैं तौ वोँ चौधरी सें जाने कि इज़ाज़त लेता हैं.
व्यक्ति - अच्छा सरअब मे चलता हूं, आपका बहोत-2 धन्यवाद जौ आपने मेराइस बेहतरीन हॉस्पिटल मे इलाज़ कराया.
चौधरी- अरे भइया धन्यवाद तौ हमें तुम्हारा करना चाहिए, जौ एन मौके पर्र आकर तुमने हमारी जान बचाई.!
सख्स - सर ! वोँ तोँ मैने इंशानियत केँ नाते किया थां, जब आपको मुशिबत मे पाया तौ जोँ मुझे उचितलगा वोँ मैने किया.
चौधरी - नहीं ! यह साधारण बात नहीं हैं भइया, आज केँ जमाने मे कॉन किसी केँ लिए अपनीजान जोखिम मे डालता हैं,
तुमने किसी फरिस्ते कि तरहआकर हमारी सहायता कि.
वैसे अपना परिचय तौ दो…कॉन होँ? क्याँ नाम हैं ? क्याँ करते होँ.?
सख्स – मेरानाम सज्जाक हैं सर, पास केँ हि गाँव मे रहता हूं, बेरोज़गार हूं, ऐसे हि कभी किसी कि ड्राइविंग वग़ैरह कर लेता हूं,
आजकलकोई काम नहीं हैं, तोँ ऐसे हि किसीकाम कि तलाश मे भटकरहा थां कि आपकेसंग वोँ घटना होते दिखी.
चौधरी - तौ समझोआज सें तुम्हारी तलाश ख़तम हुइ, आज सें तुम् मेरे पर्सनल ड्राइवर हौ,
अच्छी पगार दूँगा, रहना, खानां, कपड़े सभी कां इंतेज़ाम हमारी ओर सें रहेगा। कहो करोगे मेरेलिए काम.?
सज्जाक - मुझे तौ सरकाम चाहिए, आपकेयहा भि कर लूँगा.
चौधरी - तौ फिनठीक हैं, जल्द सें ठीक होकर मेरे ऑफीस आँ जानां, यह कहकर उसने अपना विज़िटिंग कार्ड उसे पकड़ा दिया औऱ अपनेघऱ कि ओरचला गय़ा.
खूबसूरत चौधरी सज्जाक कों अपना ड्राइवर रखकर संतुष्ट थां, अब उसको जैसा दिलेर व्यक्ति चाहिए थां वोँ मिल गय़ा थां, जोँ समयआने पऱ उसकी हिफ़ाज़त भि कर सकता थां औऱ साए कि तरह उसकेसंग रहने वाला थां.
वैसे तौ वोँ भि कोईसॉफ सुथरा व्यक्ति नहीं थां औऱ आउटऑफ बिज़्नेस बॉक्स औऱ नाँ जाने किन-किन लोगों केँ संग केसे-2 धंधे करता थां, तौ जाहिर सि बात हैं व्यक्ति भि वैसे हि रखे होंगे.
उस घटना केँ ठीकचार दिनबाद खूबसूरत चौधरी अपनीकार मे बैठकर शहर सें बाहर् कहींजा रहा थां।
सज्जाक उसकी व्हीकल कों चलारहा थां औऱ वोँ अपने मोबाइल पऱ किसी सें बातकर रहा थां, चूँकि वोँ ड्राइवर नया थां, सोबीच-2 मे वोँ उसको दिशा निर्देश भि देताजा रहा थां.
शहर सें कोई 25-30 किमी निकलकर, अब उसकी वाहनरोड सें उतारकर घने जंगलों केँ बीचबने एक् कच्चे पथरीले रास्ते पर्र दौड़ने लगी,
कोई 1 किमी अंदर जाकरघने पेड़ों केँ बीचबने एक् फार्म हाउस केँ सामने खड़ी हौ जाती हैं.
9-10 फीट उँची चारदीवारी सें घिरेउस फार्म हाउस केँ गेट पर्र एक् चौकीदार खड़ाहुआ थां, उसनेगेट खोला औऱ व्हीकल अंदरचली गयीँ,.
गेट सें लगभग 100-150 मीटर औऱ अंदरजा कर एक् अच्छी ख़ासी बिल्डिंग थि, जौ सामने सें किसी बंगले जैसी दिखती थि.
उस बंगले केँ गेट पऱ जैसे हि व्हीकल खड़ी हुईँ, एक् औऱ दरबान जैसा व्यक्ति दौड़कर वाहन कि ओरआया, उसनेलपक कर वाहन कां गेट खोला औऱ अदब सें सर झुकाकर खड़ा हौ गय़ा।
चौधरी वाहन सें उतारकर अंदरचला गय़ा, उस दरबान नें ड्राइवर कों इशारा किया औऱ व्हीकल बंगले केँ साइड मे बने पार्किंग कि ओरचली गयीँ,.
यहा 3-4 गाड़ियाँ पहले सें खड़ी हुइ थि, इसका मतलबयहा औऱ भि लोग थें।
सज्जाक नें वाहन खड़ी कि औऱ बाहर् आकर बंगले कां निरीक्षण करनेलगा.
दो मंज़िला बंगला काफ़ी बड़ा थां, अब अंदर कां क्याँ जियोग्रॅफिया थां, वोँ तोँ अंदरजा कर हि पता चलेगा, मगर पहले बाहर् सें देख लेना चाहिए.
ऐसा सोचता हुआ सज्जाक पार्किंग सें हि बंगले केँ पिछले हिस्से कि ओरचल दिया, बंगले केँ पीछे एक् बहोत बड़ा स्विम्मिंग पूल भि थां, जिसके लिए बंगले केँ पिछले गेट सें भि आयाजा सकता थां.
सज्जाक स्विम्मिंग पूल सें होताहुआ, दूसरी साइड सें चक्कर लगाकर बंगले केँ गेट पऱ पहुँच गय़ा, वोँ अंदर जानां चाहता थां मगरउस पहलवान जैसे दरवान नें उसेरोक दिया, तौ वोँ उससे बात-चीत करने मे लग गय़ा.
सज्जाक- यह फार्म हाउस चौधरी साब कां हें.?
दरबान - हां ! तुम्हें क्याँ लगा कि वोँ किसी दूसरे केँ फार्म हाउस पर्र आए हें.?
सज्जाक - नहींऐसी बात नहीं हैं, मगर वोँ औऱ भि गाड़ियाँ खड़ी दिखी इसलिये पुछा, मे अभि नया हि आया हूं तौ पता नहीं हैं नां.!
दरबान - वोँ कुछलोग उनसे मिलने आए हें यहा औऱ वोँ सभीकल सुभह तक यहीं रहेंगे.
सज्जाक - तोँ कल सुभह तक मे कहां रहूँगा.?
सज्जाक केँ पुच्छने पऱ उसने पार्किंग साइड सें बने एक् लाइन मे कुछ क्वॉर्टर्स कि ओर इशारा किया,
औऱ उससे बोला - वहा जाकर आहिस्ता बैठो, वक़्त पऱ सभीकुछ पहुँच जाएगा तुम्हारे पास.
सज्जाक उन क्वॉर्टर्स कि तरफबढ़ गय़ा, जिनमें सें कुछ मे पहले सें हि कुछलोग मौजूद थें जोँ शायद दूसरों केँ ड्राइवर वग़ैरह होंगे.
वोँ भि उन लोगों केँ पास पहुंचा औऱ अपना परिचय दिया, अब वोँ सभीलोग आपस मे बात-चीत करनेलगे.
बातों-2 मे पताचला कि एक् नेता बस्तर सें आया हैं जिसका नाम प्रताप खांडेकर हैं, दो रायगढ़ केँ हि हें, उनमें सें एक् नेता औऱ दूसरा प्रशासनिक अधिकारी हैं,
चौथी एक् स्त्री विकास मंडल कि प्रमुख अपनीदो सहायकाओ केँ संगआई हुई हैं.
अब अंदर क्याँ चलरहा थां, यह इनमें सें कोई नहीं जानता थां.
लगभग 9:30 एक् व्यक्ति अंदर सें हि इन लोगों कों खानां दे गय़ा, जोँ सबने मिलकर खाया, औऱ अपने-2 क्वॅटरो मे सोनेचले गये.
सज्जाक नें भि एक् कोने कां क्वॉर्टर पकड़ा औऱ उसमें पड़ी एक् चारपाई केँ बिस्तेर पर्र लेट गय़ा.
कोई 11 बजे केँ आस-पास बंगले केँ अंदर कि लाइटऑफ हौ गयीँ,, दो-चार रूम कों छोड़कर, बाहर् कि बौंड्री वॉल पऱ कुच्छ बल्बलगे थें जौ टीम-टीमा कर अपनी पीली सि रोशनी फार्म हाउस मे डालरहे थें.
अंदर कि लाइटऑफ हुएकोई आधा –पोना घंटा हि गुज़रा होगा कि एक् साया बंगले केँ पीछे प्रगट हुआ, जौ अंधेरे कां लाभ उठाते हुए एक् पाइप केँ सहारे उपर कि ओर चढ़ने लगा औऱ फर्स्ट फ्लोर कि छत पऱ पहुँच गय़ा.
छत सें वोँ सीडीयों केँ ज़रिए दबेपाव नीचे कि ओरआया औऱ सबरूम कों चेक करताहुआ एक् बड़े सें हॉल जैसे कमरे केँ पास पहुंचा जिसकी सारी खिड़कियों पर्र पर्दे पड़ेहुए थें.
वोँ अभि इधरउधर कि आहट लेने कि कोशिश कररहा थां, कि उसके कानों मे हॉल सें आती हुइ कुछ सम्मिलित आवाज़ें सुनाई दि.
उसने दरवाजे केँ कीहोल सें अंदर देखने कि कोशिश कि, मगरउस पऱ भि अंदर सें परदा होने केँ कारणकुछ दिखाई नहीं दिया.
फिन उसने अपनीजेब सें कुछ स्क्रू-ड्राइवर जैसा निकाला औऱ एक् विंडो केँ लॉक कों खोलने लगा, जैसे हि लॉक केँ स्क्रू लूसहुए उसनेलॉक कों 90 डिग्री टर्न किया औऱ विंडो अनलॉक हौ गई,.
एक् काँच केँ पारटिशन कों बिना आवाज़ उसने सरकाया औऱ बड़ी सावधानी सें खिड़की केँ पर्दे कों हल्का सां एक् साइड मे कर दिया।
अब वोँ हॉल मे होने वालीसब तरह कि गति विधियों कों साफ-2देख सकता थां,
जैसे हि उसनेहॉल मे हौ रहे कार्य क्रम कों देखा…! उसका मुँह खुला कां खुलारह गय़ा……….!!!!
हॉल मे इस वक्त चौधरी समेत 4 पुरुष औऱ 3 महिलाएँ मजूद थि,
पुरुषों केँ शरीर पऱ केवल अंडरवेर थें औऱ वोँ एक् बड़े सें सोफे पऱ बैठे थें जौ एक् एलशेप मे हॉल केँ बीचो-बीच पड़ा थां।
तीनों महिलाएँ केवल ब्रा औऱ पेंटी मे उनकीगोद मे बैठी हुइ थि, सबकेहाथ मे महगी शराब केँ जाम थें.
उनतीन औरतों मे एक् महिला अधेड़ उम्र कि जोँ थोडा सां भारी भि थि, 38 साइज़ कि चुचिया औऱ 42 कि गान्ड, कमर भि 36 कि होती.मगर वाकीदो युवतियाँ 25-26 कि एज कि औऱ स्लिम जिस्म वाली थि.
अधेड़ महिला प्रताप खांडेकर औऱ एक् दूसरे व्यक्ति जौ कि तकरीबन 55-56 साल कां तौ होगाउन दोनो केँ बीच मे बैठी थि.
वोँ उन औरतों केँ अंगों सें खेलते हुए शराब कि चुस्कियाँ लेँ रहे थें औऱ संग-2 मे बातें भि करतेजा रहे थें.
चौधरी अपनीगोद मे बैठी युवती केँ निपल कों सहलाते हुए बोला- खांडेकर साब, आपकेकिए हुए वादे कां क्याँ हुआ.?
एक् महीना होँ गय़ा अभि तक चंदन औऱ जानवरों कि खाल हमारे पास तक नहीं पहुँचे हें.
प्रताप - मुझेयाद हैं, मगर वोँ साला नाबूदिया गोमेस नाँ तोँ मिलने आता हैं, औऱ मोबाइल करो तोँ उल्टा जबाब देता हैं।
वैसे उसका कहना भि सही हैं, हमने अभि तक उसके हथियार जोँ उसने माँगे थें वोँ भि सप्लाइ नहींकिए हें.
वोँ बोलरहा थां, कि मेरे बहोत सें आदमियों केँ पास हथियार हि नहीं हैं। उधर जंगल मे सीआरपीएफ कि गस्त बढ़ती जारही हें.
फिन चौधरी उस प्रशासनिक अधिकारी सें मुखातिब हुआ जिसका नाम राइचंद थां बोला- क्यूं राइचंद जी, भइया क्याँ हुआ हथियार क्यूं नहीं पहुँचे अब तक, जबकि हम् उस डीलर कों 25% अड्वान्स भि दे चुके हें.
राइचंद – वोँ अगले हफ्ते तक पहुँचाने कि बातकर रहा हैं, मगर उन्हें लाने मे एंपीसाब कि सहायता चाहिए.
चौधरी - हां तोँ इसमें क्याँ हैं, सहायता मिल जाएगी। क्यूं एंपीसाब.?
एंपी - हां.हां। ! बिल्कुल, जब बोलो मे ट्रूक कि एंट्री करवा दूँगा.
चौधरी - देखिए भइया लोगो, हम् इसमें काफ़ी रुपया लगा चुके हें, अब जितना टाइम बर्बाद होगा हम् लोगों कां नुकसान भि उतना हि होगा। इसलिये जैसे हि हथियार मिलते हें, उन्हें गोमेस कों सौंपकर उससेमाल लें लो.
फिन वोँ सभीलोग उन औरतों केँ संग खेलने मे जुटगये, औऱ एक् सामूहिक चुदाई कां खेलरात भर चलतारहा,
इसबात सें बेख़बर कि एक् जोड़ी आँखें उनकीइस करतूत कों देख हि नहींरही थि अपितु यहसभी एक् कमरे मे क़ैद भि हौ चुका थां.
औऱ सुभह केँ 4 बजते-2 वोँ सभी एक्-एक् करके वहीं फार्स पर्र पड़ी कालीन पऱ लुढ़कते चलेगये.
दूसरे दिनसाम कों मे अपने लॅपटॉप पऱ रिपोर्ट टाइपकर रहा थां, कि मेरे ट्रांसमीटर पर्र कुछ सिग्नल आनेलगे।
मैनेहेड मोबाइल कान सें लगाए औऱ उसतरफ कि बातें सुनने लगा.
प्रताप खांडेकर अपने मोबाइल पऱ किसी नाबूदिया गोमेस नाम केँ व्यक्ति सें बातकर रहा थां.
प्रताप - गोमेस यह क्याँ कररहे होँ तुम् ? अभि तक हमारा माल क्यूं नहीं पहुंचा.? मेरे पार्ट्नर्स मेरीजान खाएजा रहे हें भइया.
गोमेस - अपुन कां असलाह भि तौ नहीं मिला हमको, तुम् तुम्हारा हि माल कां बात करता रहता हैं, हमारा व्यक्ति केसे-2 करकेमाल निकालता हैं तुमको क्याँ पता,
अब साला गवर्नमेंट कां सेक्यूरिटी फोर्सस इतनाबढ़ गय़ा हैं जंगल मे। खबर भि हैं तुमको कुछ.?
प्रताप – हां ! मे समझता हूं, फिन भि एक् खेप तौ अरेंज करोइस हफ्ते, तुम्हारे हथियार अगले हफ्ते मिल जाएँगे.
गोमेस - तोँ तभिचबात करने कां, अभि हमारे पासकुछ नहीं हैं। इधर तुम् हमको हथियार औऱ रुपया देगाउधर तुम्हारा माल तुमको मिल जाएगा.
प्रताप – अरे दोस्त इतना क्यूं भाव ख़ाता हैं, बोला नाँ तुम्हारा मालमिल जाएगा जल्द हि, तब तक कुछ तोँ करदो…
गोमेस – एक् बारबोल दियाबात फिनिश, एक् हाथ लेँ औऱ दूसरे हाथदे.
प्रताप - ठीक हैं अगले हफ्ते हि मिलते हें फिन, बस्तर नाके केँ पास.
गोमेस - ओके.अब मे मोबाइल रखता हैं। चलो.!
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Update 87
उधर जंगल मे गोमेस केँ 5 व्यक्ति एक् टाइगर कां पीछाकर रहे थें.
टाइगर जोँ कईबार उनकी गोलियों कां निशाना बनते-2बचा थां मगर उनकेहाथ नहीं आरहा थां, अचानक भागते-2 टाइगर कहीं झाड़ियों मे घुस गय़ा औऱ गायब हौ गय़ा.
वोँ लोग बंदूकें लिए उसको चारों ओर खोजने लगे, अचानक दो व्यक्ति जौ एक् दिशा मे बढ़गये थें, उन्हें अपने पीछेकुछ हलचल सि सुनाई दि.
इससे पहले कि वोँ पलट पाते, टाइगर नें उनकेउपर छलान्ग लगा दि औऱ देखते हि देखते उन दोनो कों उसनेचीर फाड़ डाला.
अब जोँ वोँ तीनलोग बचे थें, उन्हें उनकी चीखे सुनाई पड़ी, जब वोँ उधर उन्हें देखने आए औऱ औऱ जैसे हि अपने साथियों कि छत-विच्छित लाशें देखी,
उनकीरूह फ़ना होँ गयीँ,, डर केँ मारे उनकी टाँगें काँपने लगी.
अभि वोँ वहा सें निकलने कि सोच हि रहे थें कि नां जाने कहां सें टाइगर दहाड़ता हुआ निकला औऱ उन पर्र छलान्ग लगा दि.
उन तीनों कों अपनी बंदूक सीधी करने कां भि वक्त नहीं मिला कि टाइगर उनकेसर केँ उपर आँ पहुंचा…
मगर इससे पहले कि वोँ उन तक पहुँचता…एक् सनसनाता हुया भाला एक् तरफ सें आया औऱ टाइगर केँ पेट कों चीरता हुया निकल गय़ा.
वोँ टाइगर वहींढेर होँ गय़ा। वोँ लोग भोंचक्के सें उस टाइगर कों देख हि रहे थें कि तभी पेड़ों सें निकलकर आदिवासी भेषभूषा मे एक् आदमी उन्हें अपनीतरफ आता दिखाई दिया.
उसके कंधे पर्र एक् धनुष थां औऱ उसकीपीठ पर्र कुछतीर बँधे थें.
उन लोगों नें उसका धन्यवाद अदा किया औऱ उसे टाइगर केँ संग-2 अपने सरदार गोमेस केँ पास लेँ गये.
जब गोमेस नें सुना कि किसतरह सें उसने उनकीजान बचाई थि औऱ टाइगर कों मारा थां, वोँ उससे बहोत प्रभावित हुआ औऱ उसे अपनेसंग काम करने केँ लिए पुछा।
पहले तोँ वोँ मना करतारहा, मगर ज्यादा कहने पऱ वोँ मान गय़ा.
जब गोमेस नें उससे उसकानाम पुछा तोँ उसने अपनानाम अंगद बिसला बताया.
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इधर प्रताप केँ घऱ नीरा नें अपने स्वाभाव औऱ कामों सें अपनी मालकिन कों बहोत प्रभावित किया थां, वोँ अबउस पऱ आँखबंद करके विश्वास करनेलगी थि.
जैसा कि पहले भि लिखाजा चुका हैं कि नीरा एक् सामान्य हाइट औऱ रंगरूप कि एक् हसीन सि लड़की थि,
उसकी सादगी औऱ बर्ताव सें रॉकी भि प्रभावित हुए बिना नहींरह सका, एक् दो मुलाक़ातों सें हि वोँ उसकीओर खिंचने लगा.
अब वोँ जानबूझ करऐसे मौके ढूंढता रहता जिससे नीरा उसके लगभग आँ सके।
मगर नीरा उसकी मंशाजान चुकी थि औऱ उससेदूर रहने कि कोशिश करती रहती थि.
ऐसे हि एक् दिन नीरा किचेन मे कुछकाम कररही थि, उसकी मालकिन नें उसको आवाज़ देकर अपने कमरे मे बुलाया तौ वोँ दौड़ी हुइ उनकेपास जारही थि,
इधर रॉकीउपर सें धड़ाधड़ाता सीढ़ियाँ उतरता हुआ जैसे हि हॉल मे पहुंचा कि नीरा सें टकरा गय़ा.
दोनो कों हि ज़ोरदार झटकालगा औऱ दोनो हि एक् दूसरे कों बचाने केँ चक्कर मे गुथम गुत्था हुए ज़मीन पर्र पलटियाँ खातेचले गये.
जब वोँ रुके तोँ रॉकी नीचे थां औऱ नीरा उसके सीने पऱ पड़ी थि, दोनो हि एक् दूसरे कों जकड़े हुए थें.
कुछदेर तक यौंही एक् दूसरे कि आँखों मे देखते हुए पड़ेरहे, जब नीरा कों होशआया तोँ वोँ हड़बड़ा कर उठने कों हुईँ, मगर रॉकी उसको जकड़े रहा.
आग फूंस एक् संग हौ तौ आग भड़कना लाजिमी हैं, नीरा केँ मादक जिस्म केँ स्पर्श सें रॉकी कां पप्पू अकड़ने लगा।
उसके अकडेहुए पप्पू कों जैसे हि नीरा नें अपनी मुनिया केँ उपरफील किया, वोँ लज्जा केँ मारे पानी-पानी हौ गई, औऱ अपना मुँह एक् तरफ कों करके फुसफुसाई…
रॉकी बाबू छोड़िए मुझे.!
रॉकी नें उसे हड़बड़ा कर छोड़ दिया औऱ वोँ दोनो एक् दूसरे कि ओर मुस्कराते हुए अपने-2 रास्ते चलेगये.
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Update 87
बस्तर शहर कां चेक नाका जोँ शहर सें कांकेर जाने वालेरोड पऱ शहर सें 1 किमी बाहर् थां, वहा एक् सभी इंस्पेक्टरर औऱ 4 कोन्स्टेबल ड्यूटी पर्र मौजूद थें,
नाके सें दक्षिण कि तरफ एक् कच्चा पथरीला मार्ग जंगल कि ओर जाता हैं…
इसी रास्ते पऱ नाके सें 1.5 किमी अंदर जंगल मे इस वक़्त 2 ट्रक खड़ेहुए हें जिनमें एक् मे चंदन कि लकड़ी भरी हुई थि, जौ तिरपाल सें चारों ओर सें पॅक थां.
दूसरे ट्रक मे जानवरों कि खाल औऱ दूसरी जंगल कि दुर्लभ चीज़े जैसे हाथी दाँत, बारहसिंघा हिरण केँ सींग (हॉर्न) जोँ आमतौर पऱ अमीर लोगों केँ घरों कि शोभायें बढ़ाती हें.
दोनो ट्रको मे 4-4 हथियार बंद व्यक्ति बैठेहुए थें। स्वयं गोमेस इस डेलिवरी कों देने केँ लिएसंग आया थां.
यह उनकी अबतक कि सबसे बड़ीडील थि…
कुच्छ देर मे हि वहा प्रताप खांडेकर कि वाहनआकर रुकती हैं,
उसके पीछे -2 एक् मिनी ट्रक भि थां, जिसमें आधुनिक राइफले औऱ कयि ट्रंक (बक्से) कारतूसों सें भरेहुए थें.
खांडेकर एक् सूटकेस लेकर अपनी वाहन सें नीचे उतारता हैं औऱ उधर एक् ट्रक मे सें गोमेस नीचेआता हैं औऱ वोँ प्रताप कि वाहन केँ पास पहुँचता हैं.
प्रताप गोमेस कों वोँ सूटकेस पकड़ा देता हैं, औऱ मिनी ट्रक कि ओर इशारा करके बोलता हैं- लो गोमेस सौदे केँ मुताबिक अपना रुपया लो औऱ यह ट्रक मे तुमने जितना असलह माँगा थां वोँ सभी हैं.
गोमेस - तुम् भि अपना समानचेक कर लियो। जोँ माँगा थां वोँ सभी लेकेआया मे.
कुछदेर औऱ इधर-उधर कि बात करके गोमेस अपने आदमियों कों ट्रक हॅंडओवर करने कों बोल देता हैं औऱ वोँ प्रताप केँ आदमियों कों ट्रक कि चाबी पकड़ा करसभी लोग मिनी ट्रक मे आकरबैठ जाते हें.
गोमेस मिनी ट्रक लेकर अपने आदमियों केँ संग जंगल कि ओरबढ़ जाता हैं,
उधर प्रताप अपने आदमियों कों ट्रक लेकर नाके कि ओर बढ़ने कां इशारा करके स्वयं व्हीकल लेकर नाके पर्र पहुँच जाता हैं.
अभि उसके वोँ ट्रकवहा नहीं पहुँचे थें कि तभीवहा रायगढ़ केँ एंपीसाब पहुँचते हें,
दोनो अपनी-2 गाड़ियों सें उतरकर हाथ मिलाते हें औऱ आपस मे बात-चीत करने लगते हें.
तभी वोँ ट्रक भि वहा पहुँच जाते हें औऱ नाके कों क्रॉस करने लगते हें, मगर ड्यूटी पऱ तैनात पोलीस वाले उनको रोकते हें.
तभी वोँ एंपी महोदय अपनाहाथ उठाकर उससभी इंस्पेक्टरर कों इशारा करतेहुए कहते हें - जानेदो अपने हि ट्रक हें।
पोलीस वाले बिनाकोई चेकिंग किए हि उनको जाने देते हें.
हथियारो सें लदा वोँ मिनी ट्रक अभि वहा सें कोई 2 किमी हि जंगल मे गय़ा होगा कि उसमें बैठाहुआ अंगद बिसला उसे रोकने कां इशारा करता हैं।
ट्रकरोक कर गोमेस उससे पुछ्ता हैं, कि ट्रक क्यूं रुकवाया तौ बिसला बोलता हैं.
यहींपास केँ जंगल मे मेरेकू कुछकाम हैं, वोँ निपटा केँ मे साम तक तुम्हारे पास पहुँचता हैं.
ट्रकउसे उतरकर आगेबढ़ जाता हैं, अभि वोँ एक् फरलॉंग हि पहुँच पाया होगा, कि एक् जबरदस्त धमाके सें जंगलदहल उठा, वोँ ट्रक हथियारों समेत उसमें मौजूद सब लोगों कि समाधि बन गय़ा.
अंगद बिसला केँ चेहरे पऱ एक् विषाक्त सि हसीतैर जाती हैं, औऱ वोँ अपनीधुन मे हि घने जंगल मे विलुप्त होँ जाता हैं.,
कुछ हि दूरचला होगा कि उसे उसका दोस्त दिखाई दिया, जिसके कंधे पऱ एक् बॅग लटकाहुआ थां…
नज़दीक जाकर उसने उससेबॅग लेकरकुछ कपड़े निकाले औऱ उन्हें पहनकर वोँ दोनो बहोत हि तेज़ी सें रायगढ़ कि तरफ जाने वालेरोड कि तरफ लपके………
उधर नाके कों पारकर वोँ दोनो ट्रक कांकेर होतेहुए रायगढ़ कि तरफबढ़ चले, अभि वोँ 4-5 किमी हि पहुँचे होंगे कि रोड बड़े-2 पत्थरों सें ब्लॉक हुआ मिला.
दोनो ट्रक खड़े हौ गये औऱ उनमें सें एक्-2 व्यक्ति उतरकर उन पत्थरों कों हटाने केँ लिए जैसे हि वहा पहुँचे औऱ झुककर पत्थर उठाने लगे,
कि तभीदो नकाबपॉश जिन्न कि तरहवहा प्रगट हुए औऱ उनकी खोपड़ी पर्र किसी बजनी चीज़ कां प्रहार हुआ,
वोँ दोनो बेहोश होकर वहींढेर हौ गये
जब उन ट्रक ड्राइवरों कों जैसे हि ख़तरे कां आभासहुआ वोँ ट्रक छोड़कर सर पर्र पांवरख करभाग खड़ेहुए.
उन नकाब पोषों मे सें एक् नें अपनीजेब सें सेल मोबाइल निकाला औऱ किसी कों मोबाइल करनेलगा.
आधे घंटे मे हि वहा सिटी एसपी अपनेदल बल केँ संगआया औऱ दोनो ट्रकों कों अपने कब्ज़े मे लेकर कोतवाली कि तरफ हकवादिए.
आनन फानन मे यहखबर खूबसूरत चौधरी कों मिल गई,, जब उसने सुना कि उसकेमाल केँ दोनो ट्रक पोलीस कि हिरासत मे हें, तोँ वोँ बौखला उठा। सारा रुपया तौ उसी कां लगाहुआ थां इससभी मे.
नेता औऱ अधिकारी तोँ सिर्फ़ अपना हिस्सा बाँटने आँ जाते थें।
इस वक़्त वोँ मोबाइल पऱ खांडेकर कों बुरीतरह लताड़ रहा थां.
प्रताप खांडेकर पर्र अपना क्रोध निकालने केँ बाद उसने एंपी कों फोन कि औऱ उसको किसी भि तरह अपनेमाल कों पोलीस केँ चंगुल सें निकाल कर लाने कों बोला.
एंपी नें उसको आश्वासन दिया कि वोँ कुछ करता हैं.
अब एंपी कां काफिला कोतवाली कि तरफबढ़ रहा थां.
इधर एसपी ऑफीस मे नाके कि ड्यूटी पर्र तैनात उससभी इंस्पेक्टरर औऱ कॉन्स्टेबल्स सें पुछताछ चलरही थि.
जब उन्होने बताया कि हम् लोग जैसे हि उन ट्रको कों चेक करने वाले थें, कि एंपीसाब वहा आँ गये औऱ हमें बिना चेकिंग केँ जाने देने केँ लिए बोला.
मामला एसपी कि कुछ-2समझ मे आताजा रहा थां, औऱ वोँ सोच हि रहा थां कि अभि तक कोई सिफारिशी मोबाइल क्यूं नहींआया, कि तभी उसके मोबाइल कि घंटी बजनेलगी.
एसपी नें लपककर मोबाइल उठाया, औऱ हेलो बोलकर अपना परिचय दिया,
कॉलर – हेलो एसपीसाब ! अभि कुछदेर पहले जौ आपने ट्रक जप्तकिए हें उन्हें छुड़वाने कि कार्यवाही तेज हौ चुकी हें।
ध्यान रहेयह मामला किसी भि सूरत मे दबाना नहीं चाहिए.
एसपी- आप् कॉनबोल रहे होँ.?
कॉलर – मे वही हूं जिसने यह ट्रक पकड़वाए हें, औऱ अब मे नहीं चाहूँगा कि हमारी मेहनत बेकार होँ।
एंपी पहुँचने वाला हि होगा आपकेपास.
एसपी – मगरअगर उपर सें अधिक प्रेशर आया तोँ मे कुछ नहींकर पाउन्गा.
कॉलर – यहसमझ लो एसपी!यह स्मगलिंग नकशालियों द्वारा हुईँ हैं, अबअगर जोँ भि कोई इसमें इन्वॉल्व हैं, उस पर्र सीधा देशद्रोह कां केस डालाजा सकता हैं।
हमारे पासइस सभी केँ पुख़्ता सबूत हें। इस मामले कों हम् दबाने नहीं देंगे, औऱ इतना बोलकर फोनकट हौ गई,.
अभि एसपी मोबाइल रखकर चुका हि थां कि धड़ धड़ाते हुए एंपी महोदय उसके ऑफीस मे घुसे.
एंपी - सुनो एसपीसाब ! इन ट्रको मे ऐसाकुछ ग़लत नहीं हैं, जब हमने इन्हें पास करवा दिया थां तौ फिन आपने क्यूं पकड़ा.?
एसपी नें उसे समझाते हुएकहा- एंपीसाब मे आपकी रिस्पेक्ट करता हूं, इसलिये एक् सलाह अवश्य दूँगा, आप् इस मामले सें अपनाहाथ खींच लीजिए वरना…!
एंपी भड़ककर बोला - वरना क्याँ एसपी.?
एसपी - वरना ! जिसने भि हमेंखबर दि थि उसकेपास इसबात केँ पुख़्ता सबूत हें कि यह ट्रक नकशालियों केँ हें,
अबअगर आपने इन्हें छुड़वाने कि कोशिश कि तौ आपकेउपर भि देशद्रोह कां केसलग सकता हैं, अब आप् स्वयं सोच लीजिए कि क्याँ करना चाहेंगे.?
एंपी - कॉन हैं वोँ.? किसने खबर दि आपको.?
एसपी - उसने अपनानाम नहीं बताया.! पर्र उसकी बातों सें लगरहा थां कि वोँ कोई छोटा-मोटा व्यक्ति नहीं हैं, यह भि हौ सकता हैं कि कोई ख़ुफ़िया विभाग कां व्यक्ति होँ.
देशद्रोह कां नाम सुनते हि एंपी कि गान्ड फटकार हाथ मे आँ गई,। औऱ वोँ वहा सें उल्टे पाँवलौट गय़ा.
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नीरा औऱ रॉकी कि प्यार किस्सा धीरे-धीरे-2 आगेबढ़ रही थि, रॉकी कों नीरा दुनिया कि सबसे हसीन लड़की लगनेलगी थि।
अब वोँ हर संभवइस प्रयास मे हि रहता थां, कि किसीतरह नीरा उसके नज़दीक हि रहे।
मगर जैसे-2 वोँ उसके नज़दीक आने कि कोशिश करता, नीरा उससेदूर चली जाती, उसे पता थां कि रॉकी केसे स्वभाव कां लड़का हैं,
औऱ वैसे भि अगर किसी कों पताचला तोँ सभीउसे हि दोष देंगे। ग़रीब कि आज केँ जमाने मे कॉन सुनता हैं.
ऐसे हि एक् दिनजब सुभह वोँ उसकोचाइ देने उसकेरूम मे गयीँ,, छाईरख कर वोँ जाने केँ लिए पलटी हि थि कि रॉकी नें उसकाहाथ पकड़ लिया.
उसनेपलट कर रॉकी कि तरफ देखा औऱ उसकेहाथ कि कलाई कों पकड़कर अपनाहाथ छुड़ाते हुए बोलि- रॉकी बाबू मेराहाथ छोड़िए.
रॉकी - तुम् मुझसे दूर क्यूं दौड़ना चाहती होँ.? जबकि मे तुम्हारे नज़दीक आनां चाहता हूं.
नीरा - मगर क्यूं.? क्यूं आप् मेरे नज़दीक आनां चाहते हें., ? आपकोपता हैं कि मे एक् ग़रीब बेसहारा लड़की आपकी नौकर हूं फिन भि.?
रॉकी – क्योंकि तुम् मुझे अच्छी लगती होँ.!
नीरा - अच्छी लगती हूं, तोँ क्याँ आप् मेरेसंग कुछ भि कर सकते हें.? मे कोई वस्तु तौ नहीं कि आपको अच्छी लग गई, औऱ आपकी हौ गयीँ,.?
रॉकी नें फ़ौरन उसकाहाथ छोड़ दिया औऱ बोला- मेरा कहने कां मतलब थां कि मे तुम्हें पसन्द करनेलगा हूं, याँ शायद प्रेम भि.!
तुम्हारी सादगी पर्र दिल आँ गय़ा हैं मेरा।
नीरा - शायदकल रात कों अधिक चढ़ाली होगी आपने.! अभि तक उतरी नहीं हैं वरनाइस तरह कि बहकी-बहकी बातें नां करते.
रॉकी - तुम्हें मेरी बातों पऱ विश्वास नहीं हैं.? कहो तुम् क्याँ चाहती होँ जिससे तुम्हें विश्वास हौ.?
नीरा - देखिए ! मे एक् ग़रीब, लाचार, बेसहारा लड़की हूं, यहकभी भि संभव नहीं होँ पाएगा। औऱ कॉन मानेगा इन बातों कों.?
रॉकी - मे तुम्हें सहारा हि तोँ देना चाहता हूं, औऱ रहीबात किसी केँ मानने नाँ मानने कि तौ मे किसी कि परवाह नहीं करता.
नीरा - क्याँ अपने माँ-बाप सें बग़ावत करेंगे.?
रॉकी - मेरे मां पिताजी मेरीकोई बात नहीं टालते, मुझेपता हैं, यहबात भि माननी हि पड़ेगी उनको।
तुम् सिर्फ़ हां बोलो ! क्याँ तुम्हें मेरा प्रेम मंजूर हैं.?
नीरा - मेरेलिए आप् क्याँ कर सकते हें.?
रॉकी - तुम् जोँ भि कहो—
नीरा - यह शराब पीना औऱ आवारागर्दि करनाबंद कर दीजिए। फिन मे आपको जबाब दूँगी, औऱ इतनाबोल कर वोँ उसके कमरे सें चली गयीँ,.
रॉकीबस उसे जाताहुआ देखता रहा….
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इधर प्रताप & कंपनी इतनी बड़ीचपत लगने सें तिलमिला उठे थें, यही नहीं उन्हें जैसे-तैसे करके अपने आप् कों बचाना भि भारीपड़ गय़ा थां.
मगर कहते हें नां कि शेर कों अगर इंसानी खून कां चस्का लगजाए तोँ वोँ नरभक्षी हौ जाता हैं, ऐसा हि कुछहाल इन लोगों कां हौ चुका थां।
अबहर संभव वोँ इस प्रयास मे थें कि फिन सें अपनेइस कारोबार कों केसे खड़ा कियाजाए.
गोमेस जैसा मोहरा ख़तम होँ चुका थां, इसीधुन कि कड़ी मे आज प्रताप एक् छोटे सें कस्बे मे स्थित एक् चर्च कि सीढ़ियाँ चढ़रहा थां.
यहा कां पादरी नकशालियों कों हर संभव सहायता करता थां। कई विदेशी एनजीओ, स इनको आर्थिक सहायता करते थें, संग हि संग ट्राइबल वेलफेर केँ नाम पर्र इनका पक्ष भि मजबूती सें रखते थें.
चर्च मे पहुँच कर प्रताप नें पादरी सें मुलाकात कि, अब वोँ दोनो आमने सामने बैठकर बातें कररहे थें.
प्रताप - फादर आपका वोँ मोहरा गोमेस तौ पिट गय़ा, अब क्याँ करें अपना तौ साला धंधा हि चौपट होताजा रहा हैं.
पादरी - कोईबात नहीं मिस्टर। प्रताप, मोहरे तोँ होते हि पिटने केँ लिए हें। हम् आपको औऱ भि अच्छा व्यक्ति देगा, तुम् उससेकुछ भि काम लेँ सकता हैं।
प्रताप – इसलिये तोँ मे आपकेपास आया हूं फादर, अब आप् जल्द सें उसको मिलवाए.
पाद्री – वोँ थोडा टेडा व्यक्ति हैं, आंड्रा केँ जंगलों सें भागकर इधरआया हैं कुछदिन पहले हि, नेटवर्क बहोत अच्छा हैं उसका,
ख़तरनाक सें ख़तरनाक काम कों अंजाम दे सकता हैं, ऐसा व्यक्ति हैं वोँ.
प्रताप - हम् भि इसबार कुछ बड़ी दहशत पैदा करना चाहते हें इलाक़े मे जिससे कोई हमारे सामने खड़ा होने कि जुर्रत हि नां करसके.
पादरी - मे उसको तुम्हारे पास भेजेगा, उसकानाम रघुनाथ कुट्टी हैं, वोँ तुमसे तुम्हारे घऱआके मिल लेगा, अभि वोँ यहा नहीं आँ पाएगा। ओके अभि तुम् बेफकर होकरजाओ.
प्रताप वहा सें खुशी-2लौट आया, औऱ रास्ते मे हि उसने चौधरी कों खुशख़बरी भि दे डाली………………।
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कुछ दिनो सें रॉकी केँ बर्ताव औऱ रहन-सहन मे काफ़ी तब्दीली आँ चुकी थि, उसके मां-बाप भि अपने बेटे मे आए परिवर्तन सें काफ़ी खुश थें।
अब वोँ वक्त पर्र घऱआता जाता, रेग्युलर कॉलेज जानां, कभीसाम कों लेट भि हुआ तोँ बड़े अच्छे मूड मे होता.
आज एक् महीने सें उसने शराब कों हाथ भि नहीं लगाया थां।
उसमें आए परिवर्तन सें नीरा बहोत प्रभावित हुईँ, उसेअब लगनेलगा थां कि रॉकी वाकई मे उससे सच्चा प्रेम करता हैं जोँ उसके कहने पऱ अपनी सारी ग़लत आदतें छोड़रहा हैं.
उसी केँ चलतेआज उसने रॉकी केँ लिए स्पेशल डिशस बनाई औऱ रॉकी केँ कॉलेज जाने सें पहले हि उसकेरूम मे लेकर पहुँची.
नाश्ते कि खुश्बू सें हि रॉकी कां मूडबन गय़ा थां। ब्रेकफास्ट टेबल पर्र रखकर नीरा नें रॉकी सें कहा-
लीजिए रॉकी बाबू ब्रेकफास्ट कर लीजिए.
रॉकी - आज तौ बड़ी अच्छी सुगन्ध आँ रही हैं नाश्ते सें, कोईखास बात हैं आज.? लगता हैं कुछ स्पेशल बनाया हैं तुमने.?
नीरा - हां ! आज मे बहोत खुश हूं, औऱ उसी केँ चलतेआज मैने आपकेलिए स्पेशल ब्रेकफास्ट बनाया हैं.
रॉकी - क्याँ हुआ.आज इतनीखुश क्यूं होँ.?
नीरा - आप् तोँ मुझे प्रेम करते हें नां ! तोँ पतालगा लीजिए मेरी खुशी कां राज.
रॉकी - कुछदेर सोच मे पड़ गय़ा, फिन जैसे हि उसके दिमाग़ मे क्लिक हुआ, झट सें उसने नीरा केँ हाथों कों अपनेहाथ मे लिया औऱ बोला-
सच नीरा तुमने मेरे प्रेम कों स्वीकार कर लिया.कहो यहीबात हैं नाँ.!
नीरा नें अपनी नज़रें झुकाकर सिर्फ़ हां मे अपनी गर्दन हिला दि.
रॉकी नें झट सें उसकेहाथ चूमलिए, लज्जा सें नीरा कां चेहरा दूसरी ओरघूम गय़ा औऱ वोँ मंद-2 मुस्कराने लगी.
ओह्ह्ह्ह… नीरा मे बता नहीं सकता कि, आज कितना खुश हूं मे। सच मे कब सें इसबात कां इंतेज़ार कररहा थां कि तुम् कब मेरे प्रेम कों आक्सेप्ट करोगी।
आइलवयू नीरा !
आइलवयू टू रॉकी ब.बा.बुऊउ। !
रॉकी बाबू नहींजान… सिर्फ़ रॉकी.! सिर्फ़ तुम्हारा रॉकी, औऱ उसनेउसे अपनेअंक मे भर लिया, वोँ भि किसी छोटी बच्ची कि तरह उसके सीने मे समा गई,।
कितनी हि देर वोँ ऐसे एक् दूसरे सें चिपके खड़ेरहे… जब रॉकी कि मां नें आवाज़ दि तब जाके उनकी तंद्रा टूटी.
हड़बड़ा कर नीरा नीचे कि ओर भागी औऱ रॉकी नाश्ते मे जुट गय़ा… आज वोँ बहोत खुश थां, औऱ इसी खुशी मे गाता गुनगुनाता कॉलेज चला गय़ा.
आज कॉलेज सें लौटते टाइम वोँ एक् ज्वेल्लरी शॉप सें नीरा केँ लिए एक् तोहफा लेना नहीं भुला औऱ घऱ मे घुसते हि उसकी आँखें उसे तलाश करनेलगी.
नीराउस वक्त उसकी मां केँ पास बैठी थि, उसकी मम्मी रॉकी मे आए बदलाव केँ बारे मे हि चर्चा कररही थि.
नीरासभी चुप-चाप सुनती जारही थि, औऱ मन हि मनसोच रही थि, केसे उसके मां बाप बेटे केँ सुधरने सें खुश हें, वोँ भि अब रॉकी सें दूर रहना नहीं चाहती थि.
रॉकीजब नीरा कों ढूंढता हुआ अपनी मम्मी केँ कमरे मे पहुंचा तौ वहा उसने नीरा कों अपनी मम्मी सें बातें करतेहुए देखा, उसने दरवाजे सें हि अपनी मम्मी कों पुकारा तोँ उन्होने उसे अंदर बुला लिया-
आजा बेटा थोडा अपनी मां केँ पास भि बैठ लियाकर, तौ रॉकीआकर अपनी मम्मी केँ पासबैठ गय़ा, मां नें प्रेम सें अपने बेटे केँ माथे कों चूमा औऱ नीरा कों संबोधित करके बोलि-
नीरा तूनेगौर किया हैं, आजकल रॉकी कितना बदल गय़ा हैं, मैने जोँ सपना अपने बेटे कों लेकर देखा थां, अब वोँ पूरा होता नज़र आँ रहा हैं.
नीरा - हां मालकिन ! आप् सहीकह रही हें, रॉकी बाबू वाकई मे बदलरहे हें, औऱ तिर्छि नज़र उसने रॉकी पर्र डाली जोँ अपनी मां सें नज़रबचा करउसी कों देखरहा थां.
कुछदेर अपनी मम्मी केँ संगबैठ कर वोँ बोला- मम्मी अब मे चलता हूं, चेंज करके मुझे अपना कोर्स रिविषन करना हैं, नीरा तुम् मेरा खानां मेरेरूम मे हि लें आनां.
मां - ठीक हैं, तुँ जातब तक चेंजकर, नीरा तुँ भि जा औऱ रॉकी कों खानां खिलादे.
दोनोवहा सें उठकर बाहर् आँ गये….!
रॉकी अभि चेंज करके अपनाबॅग अनपॅक कर हि रहा थां कि नीरा उसका खानां लेकर उसकेरूम मे आँ गयीँ,, औऱ उसने उसका खानां टेबल पर्र रख दिया। रॉकी नें तब तक गेटबंद कर दिया.
नीरा – अरे ! आपनेगेट क्यूं बंद किया.?
रॉकी - ताकि अपनी डार्लिंग कों जी भरकेदेख सकूँ, यह मन बाबला कितने दिनों सें तरसरहा थां तुम्हारे समीपआने कों।
फिन वोँ नीरा कों घुमाकर उसके पीछे खड़ा हौ गय़ा औऱ अपनीजेब सें एक् सोने कि सुकून निकाल कर उसने नीरा केँ गले मे पहना दि.
नीरा - यह क्याँ हैं.? औऱ उसकोहाथ मे लेकर देखने लगी.
रॉकी - यह हमारे प्रेम कि निशानी हैं, इसे स्वीकार करके मेरे प्रेम कों अपनालो नीरा.
नीरा - यह मे केसे लें सकती हूं आपसे ? किसी कि नज़रपड़ गई, औऱ किसी नें पुछा तौ क्याँ जबाब दूँगी.?
रॉकी - कोई भि एक्सक्यूज़ बना देना.! छोड़ो वोँ सभी चिंता। यह बताओ तुम्हें मनपसंद आया याँ नहीं.
नीरा - हैं तौ बहोत अच्छा पर्र……
अभि वोँ कुछ औऱ बोलती उससे पहले रॉकी नें उसके पतले-2 शुर्ख होठों पर्र अपने प्यासे होठरख दिए औऱ बड़े प्रेम सें उन्हें चूसने लगा.
नीरा नें कुछदेर तौ कोई रिस्पोन्स नहीं किया, पऱ थि तोँ वोँ भि नव यौवना, कहां तक सबरकर पाती, वासना नें उसको भि अपने लपेटे मे लेँ लिया औऱ वोँ भि रॉकी कां संग देनेलगी.
किस तोड़ते हुए नीरा नें कहा-अरे आपका खानां ठंडा हौ रहा हैं, पहले इसको ख़तम करिए…
रॉकी नें उसकीकमर कों अपने बाहों मे लपेटकर उसको अपने सें चिपकाते हुएकहा –
जब सामने ऐसे लजीज पकवान हें तोँ उनको छोड़कर कॉन सालाउस सदेले सें खाने कों खानां चाहेगा… मेरीजान। औऱ उसनेफिन सें उसके होठों कों अपने मुँह मे क़ैदकर लिया.
उसके दोनोहाथ उसकीगोल-2 गान्ड कों मसलरहे थें, रॉकी कां लन्ड अकड़कर नीरा कि नाभि मे घुसाजा रहा थां.
अब उसने नीरा कों पलटा दिया औऱ उसकीपीठ सें चिपककर अपने लन्ड कों थोडा झुककर उसकी रसीले गान्ड कि दरार मे सेटकर दिया औऱ उसकेगोल-2 कच्चे अमरूदो कों मसल्ने लगा.
नीरा भि आँखें बंद करके उसकी हरकतों कां मजा लें रही थि।
रॉकीकभी उसकी गर्दन कों चूमता, तोँ कभी उसकेकान कि लौ कों मुँह मे लेकर चाटने लगता जिससे नीरा अपनी सुध-बुध खोतीजा रही थि.
अब रॉकी केँ सब्र कां पैमाना छलकने लगा थां, उसकोअब हरहाल मे उसको चोदना थां सो उसने उसकी चोली केँ बटनों पर्र हाथरख कर जैसे हि खोलना शुरुआत किया…
नीरा नें उसकेहाथ पकड़लिए औऱ बोलि- नहीं रॉकी इसकेआगे नहीं.
रॉकी उसके प्रतिरोध कों महज़ एक् लड़की कां दिखावा समझरहा थां, सो उसने उसके हाथों कों अलग करकेफिन खोलना शुरुआत किया.
अभि वोँ उपर कां एक् बटन हि खोल पाया थां कि, नीराझट सें पलट गयीँ, औऱ रॉकी केँ दोनो हाथों कों पकड़कर रोक दिया.
रॉकी अवाक सां खड़ा नीरा केँ चेहरे कि ओरदेख रहा थां, फिनकुछ देरबाद बोला-मगर क्यूं नीरा.?
तुम्हें अभि भि मेरे प्रेम पर्र भरोसा नहीं हैं.? तुम्हारे कहने सें मैने अपने आप् कों बदल लिया, इससे बड़ा औऱ कोई सबूत चाहिए तुम्हें मेरे प्रेम कां.
नीरा - प्रेम मे ज़रूरी नहीं कि यहसभी हि हौ तभी प्रेम सच्चा मानाजाए…
प्रेम कों प्रेम हि रहनेदो रॉकी बाबू, वासना मे बहनेमत दो। आप् जोँ चाहते हें वोँ वासना हैं.
रॉकी - मगर नीरा ! अब हम् दोनो प्रेमी हें, औऱ प्रेमी अपने प्यार मे तन-मन न्योछावर कर देते हें एक् दूसरे पर्र.
नीरा - सच्चा प्यार मन कां होता हैं, तनजब एक् होँ जाते हें तब मिलते हें। इसलिये यहसभी अब हम् एक् होंगे तभी संभव होगा।
इतनाबोल कर वोँ उसकेरूम सें बाहर् चली गयीँ, औऱ रॉकी अपना खड़ा लन्ड पकड़े, चूतिया कि तरहगेट कि ओर देखता हि रह गय़ा.
रॉकी केँ दिमाग़ मे विचारों कां बवांडर सां चलरहा थां। वोँ समझ नहींपा रहा थां कि उसने नीरा कां कहामान कर अपने कों बदलने केँ लिए कितनी जद्दो जहद अपने दिमाग़ मे झेली थि.
क्योंकि शराब औऱ शबाब कि लत इतनी आसानी सें नहीं छूटती वोँ भि उसने छोड़ दि एक् लड़की कां प्रेम पाने केँ लिए, औऱ वोँ हि आजउसे खड़े लन्ड पऱ लातमार करचली गयीँ,।
वोँ अपने आप् कों मामू बनता महसूस कररहा थां.
वोँ मन हि मन नीरा कों सबक सिखाने केँ बारे मे सोचने लगा।
साली अपने आप् कों हेमा मालिनी समझती हैं भोसड़ी कि दोटके कि नौकरानी।
अभि वोँ रॉकी कों जानती नहीं हैं, साराशहर जिससे डरता हैं उस रॉकी कों यहदोटके कि लौंडिया चूतिया बना केँ चली गई,.
रॉकी चाहता तौ अपनी मां कों बोलकर नीरा कों अभि घऱ सें बाहर् फिकवा सकता थां, मगर उसनेऐसा नहीं किया, अब वोँ उसेइसी घऱ मे रखकर नौकर औऱ मालिक कां फ़र्क महसूस कराना चाहता थां.
उसने फ़ौरन आवाज़ देकर बहाने सें नीरा कों उपरआने कों कहा, जैसे हि वोँ उसकी आवाज़ सुनकर उपरआई,
रॉकी नें रूम कां गेटबंद कर दिया औऱ नीरा कि ओर बढ़ते हुए बोला-
सालीदो टके कि नौकर अपने आप् कों समझती क्याँ हैं तुँ, तेरी जैसी नां जाने कितनी इस लन्ड केँ नीचे सें निकल चुकी हें औऱ तुँ मुझे हि लैला मजनू कां पाठ पढ़ारही थि, अबदेख केसे मे तेरी बुर कि धज्जियाँ उड़ाता हूं.
उसनेझपट कर नीरा कां हाथ पकड़ लिया औऱ अपनीओर झटका देकरउसे अपनी बाहों मे कस लिया।
नीरा कों ऐसीकुछ संभावना नहीं थि कि रॉकी उसकेसंग ज़बरदस्ती भि कर सकता हैं, वोँ उससे छूटने कां भरसक प्रयास करनेलगी, मगर रॉकी केँ हाथों कि मजबूत पकड़ सें वोँ असफल होतीजा रही थि.
वोँ चाहती तौ चीखकर लोगों कों इकट्ठा भि कर सकती थि, मगरउस सूरत मे अगर रॉकी नें उल्टा उसी पऱ इल्ज़ाम लगा दिया तौ शायदकोई भि उसकीबात पर्र विश्वास नहीं करता औऱ उसे औऱ ज़िल्लत उठानी पड़ती.
अपनी ग़रीबी केँ कारणयह सबक उसने अच्छे सें सीखलिए थें.
अब उसके सामने रॉकी कों सबक सिखाने केँ अलावा औऱ कोई मार्ग नहींबचा थां, अब अरुण कि दि हुइ शिक्षा कों काम मे लाने कां वक्त आँ गय़ा थां.
नीरा नें अपनी दोनो हथेलियों कों रॉकी कि छाती सें सटाकर पूरी ताक़त सें उसके बंधन सें अपने कों मुक्त किया औऱ दोकदम पीछेहट केँ खड़ी होँ गई,.
रॉकी गुस्से सें भुन्भुनाता हुआ उसकोफिन सें पकड़ने केँ लिएआगे बढ़ा कि तभी उसकेगाल पऱ तडाक सें नीरा कां एक् भरपूर थप्पड़ पड़ा,
एक् बार कों तौ उसे अपनाकान सुन्न पड़ता लगा, उसकेकान मे सीटियाँ सि बजनेलगी.
गुस्से औऱ ज़िल्लत केँ कारण उसका चेहरा कनों तक लाल हौ गय़ा औऱ वोँ गुर्राते हुए नीरा कि ओर झपटा- साली मदर्चोद अपने आप् कों सती सावित्री समझती हैं, अब मे तेरे कों कैसासबक सिखाता हूं देख.
अभि वोँ नीरा तक पहुँच भि नहीं पाया थां, कि एक् औऱ जबरदस्त घूँसा उसकी कनपटी पऱ पड़ा,
उसकोदिन मे हि चाँद तारे नज़रआने लगे, फिन तौ नीरा नें बस नहीं कि औऱ लात घूँसों सें उसकी वोँ धुनाई कि, कि उसके फरिश्ते कून्च करगये.
जब रॉकी कि विरोधक शक्ति भि जबाबदे गयीँ, तोँ वोँ फुंफ़कार्ते हुए बोलीं- मुझेपता थां रॉकी, साँप कां संपोला हि हौ सकता हैं,
उसको कितना हि प्रेम सें दूध पिलाओ वोँ काटता हि हैं। राक्षस केँ घऱ प्रहलाद पैदाकभी-2 हि हौ सकते हें, देशद्रोही बाप कि नीच औलाद.
इतना बोलकर उसने रॉकी कि दि हुई सुकून कों उतारकर उसके मुँह पर्र मारकर वोँ कमरे कां गेटखोल कर बाहर् चली गयीँ,।
औऱ पीछे छोड़ गई, एक् गहन सन्नाटा जौ अब रॉकी केँ मनो मस्तिस्क मे व्याप्त होँ चुका थां.
वोँ अब उसके द्वारा कहेगये शब्दों केँ बारे मे सोचरहा थां। बार-2 उसके वोँ शब्द किसी हथौड़े कि तरह उसके दिमाग़ मे पड़रहे थें…
देशद्रोही….देशद्रोही…!!!
तौ क्याँ उसका बाप एक् देशद्रोही हैं.? नहीं.नहीं। यह नहीं हौ सकता…यह सालीझूठ बोलरही हैं…
अभि वोँ आगेकुछ औऱ सोच पाता, कि नीरा केँ शब्द किसी भाले कि नोक कि तरहफिन सें उसके दिमाग़ मे चुभने लगे…
एक् साँप केँ संपोले कों कितना हि दूध पिलाओ, वोँ काटता हि हैं, देशद्रोही बाप कि नीच औलाद…। देशद्रोही…देशद्रोही…
रॉकी अपनासर पकड़कर वहींबैठ गय़ा…उसके दिमाग़ मे साय…साय करके विचारों कि बवंडर सां चलनेलगा…
अब वोँ नीरा सें अपनीमार कों तोँ भूल गय़ा, औऱ उसकी बातों मे उलझ सां गय़ा, फिन उसने एक् निर्णय लिया कि अब वोँ इसबात कि सच्चाई जानकार हि रहेगा….
इधर नीरा रॉकी कों सबक सिखाकर धड़ धड़ाती हुई नीचेआई औऱ अपनी मालकिन सें बोलि- मालकिन एक् ज़रूरी काम आँ गय़ा हैं,
मे अपनेघऱ जारही हूं कल तक वापस आँ जाउन्गी, औऱ उसकी पेर्मिशन लेकर वोँ उसकेघऱ सें निकल गयीँ, ….
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My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) - Aage kya hua? Next part padhiye
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