My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 88
दूसरे दिन प्रताप अपनी पत्नि औऱ बेटे केँ संग बैठाहॉल मे ब्रेकफास्ट कररहा थां, कि एक् नौकर बाहर् सें आया औऱ उसको बोला, साब बाहर् आपसेकोई मिलने कों आया हैं.
प्रताप - क्याँ नाम बताया उसने अपना.?
नौकर - साबकुछ कुट्टी—कुट्टी बतारहा थां.!
प्रताप फ़ौरन समझ गय़ा औऱ उसने नौकर कों बोला-उसे पीछे केँ गेट सें हमारे मीटिंग हॉल मे लेकरआओ,
फिन स्वयं नें भि जल्द सें ब्रेकफास्ट ख़तम किया औऱ मीटिंग हॉल कि तरफबढ़ गय़ा जौ कि उसके बंगले कि पीछे कि साइड मे थां.
रॉकी केँ दिमाग़ मे नीरा कां छोड़ा हुआ कीड़ा उसके बाप केँ जाते हि कुलबुलाने लगा, वोँ सोचने लगा कि उसके बापू नें इस व्यक्ति कों पीछे केँ गेट सें आने कों क्यूं कहा ?
अब वोँ उनकी मीटिंग कि बातों कों सुनने केँ बारे मे सोचने लगा, उसने भि अपना ब्रेकफास्ट ख़तम किया औऱ अपने कमरे कि ओरबढ़ गय़ा.
अब वोँ किसीतरह अपने बाप कि बातों कों सुनना चाहता थां,
रॉकी अपनी मां कि नज़रों सें बचते बचाते हुए, किसीतरह बंगले केँ पीछे पहुंचा औऱ मीटिंग हाल कि एक् खिड़की सें कानलगा कर उनकी बातें सुनने कि कोशिश करनेलगा.
उसकेसर केँ धक्के सें वोँ खिड़की हल्की सि खुल गई,, अब वोँ उन दोनो कों सुन हि नहींदेख भि सकता थां,
उसने अपने पिता केँ संग एक् जंगली काले भैंसे जैसे व्यक्ति कों बैठे देखा, जिसकी नाक सें लेकर उसके बाँये गाल तक एक् बड़ा सां कट कां निशान थि,
बड़ी-2घनी मुन्छे औऱ छोटीघनी दाढ़ी, मानो हफ्ते-10 दिन सें शेव नाँ हुईँ होँ, वोँ शक्ल सूरत सें हि कोई ख़तरनाक अपराधी दिखरहा थां.
जब उसनेउन दोनो कि बातें सुनी तौ वोँ सुन्न रह गय़ा, नीरा द्वारा कहेगये शब्दउसे शत-प्रतिशत सहीलगे… उसका बाप सही मे एक् देशद्रोही हैं।
पहले तोँ रॉकी नें सोचा कि जाकर अपने बाप सें सीधे-सीधे बातकरे, मगरफिन उसने अपनीसोच कों अपने दिमाग़ सें झटक दिया क्योंकि जौ व्यक्ति ता उम्रजिस काम कों करता आँ रहा हैं, वोँ उसको अब्बल तोँ मानेगा हि नहीं,
औऱ अगरमान भि गय़ा तोँ वोँ अपने बेटे कों भि अपनी महत्वाकांक्षाओं केँ आड़े नहींआने देगा.
अब वोँ इसकीतह तक जानां चाहता थां, मगर केसे.?
अकेला वोँ कुछ भि नहींकर सकता थां, उसे फ़ौरन नीरा कां ध्यान आया जौ अब नाँ जाने कहां चली गयीँ, थि.
आजउसे नीरा कि अच्छाइयाँ याद आँ रहींथीं, उसकी बातें याद करके उसकी पलकें भीग गई, …
क्याँ ग़लतकहा थां उसने ? वोँ तोँ मुझ जैसे एक् बिगड़े हुए व्यक्ति कों सही रास्ते पर्र लाना चाहती थि।
मैने एक् हि झटके मे एक् सच्ची औऱ मन कि पवित्र लड़की कों खो दिया।
मगर“अब पछ्ताये होत क्याँ जब चिड़ियाँ चुग गई, खेत”
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उधर मे अपने लॅपटॉप पऱ प्रताप औऱ कुट्टी कि मीटिंग कों देखसुन रहा थां, नीरा मेरे बाजू मे बैठी थि,
यहउसी कि चपलता औऱ सूझभुज कां नतीज़ा थां कि मे उसेदेख पारहा थां, क्योंकि उसने उसके मीटिंग हाल मे एक् बहोत हि छोटामगर पॉवेरफ़ुल्ल ट्रांसमीटर कॅमरा स्लिम कर दिया थां.
उनकी मीटिंग ख़तम होते हि मैने नीरा कों शुक्रिया किया कि उसकीवजह सें हम् यहसभी देखसुन पारहे थें.
नीरा अपने चेहरे पऱ एक् अर्थपूर्ण मुस्कान लातेहुए बोलीं- भैया जी रूखा-2 हि शुक्रिया सें काम नहीं चलेगा, कुछ तोँ गीला-2 होना चाहिए,
उसकी मंशासमझ कर मैने उसके पतले मुलायम होठों पर्र एक् गर्म-2 चुंबन जड़ दिया तोँ वोँ खुश हौ गयीँ,.
नीरा नें कलआते हि मुझे उसके औऱ रॉकी केँ बीच हुई घटनाबता दि थि, औऱ वोँ वहा सें हमेशा केँ लिए छोड़कर चलीआई थि,
मगर मे नहीं चाहता थां कि नीरा अभि उसकाघऱ छोड़े सो मैनेउसे फिन सें उसकेयहा जाने केँ लिएकहा.
जब उसने अपनाडर बताया कि कहीं रॉकी नें अपने घरवालों कों बता दिया होँ, औऱ वोँ लोग कहीं उसका कत्ल हि नाँ करवादें तौ…
मैनेउसे समझाते हुएकहा - अब्बल तोँ वोँ ऐसा करेगा नहीं, क्योंकि अपनी कमज़ोरी वोँ दूसरों कों नहींबता सकता।
आख़िर उसने एक् लड़की सें मारखाई हैं, किसी गुंडे याँ मवाली सें नहीं.
औऱ अगरबता भि देता हैं, तौ जिसतरह सें तुमने उसे बदला हैं, उसकी मां कां भरोसा तुम् पर्र जम चुका हैं,
अब वोँ रॉकी कि बातों कों हि ग़लत मानेगी, औऱ तुम्हारा बचाव करेगी, औऱ वैसे भि मेरी नज़रहर टाइमउस घऱ पऱ हि रहेगी।
तोँ तुम् इसबात कि बिल्कुल फिकरमत करो कि मे तुम्हें कुछ भि होने दूँगा।
मे चाहता हूं तुम् कुछदिन औऱ वहारहो.
नीराअब मेरेसंग थोडा खुल चुकी थि, सो अपनी मुस्कुराती हुइ नज़रों कों मेरे चेहरे पऱ गढ़ाकर बोलीं - एक् शर्त पऱ जाउन्गी.! जाने सें पहले एक् बार मे…आप्.केँ…सां.थ.
मे - ओह क्यूं नहीं ! अभि लो। औऱ फिन मैने उसकी पूरीतन मन सें अच्छे सें सेवा कि जब वोँ पूरीतरह संतुष्ट होँ गई, तौ अपने मिसन पर्र वापसचली गयीँ,.!
मैने विक्रम कों पहले हि कुट्टी केँ पीछेलगा दिया थां,
वोँ जबसे प्रताप केँ पास सें गय़ा थां तभी सें वोँ उसके पीछे थां।
वैसे भि वोँ पहले सें हि अंगद बिसला केँ रोल मे थां, सो उसको जंगल केँ बारे मे अब बहोत कुछ मालूम थां.
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आज रॉकी कॉलेज नहीं गय़ा थां, जैसे हि नीरावहा पहुँची, रॉकी कि खुशी कां ठिकाना नहींरहा।
उसने तोँ कभी सपने मे भि नहीं सोचा थां कि वोँ अब वापस भि आँ सकती हैं.
नीरा सीधी उसकी मां सें मिली औऱ अपनेकाम मे लग गई,। उसने रॉकी कि तरफकोई ध्यान हि नहीं दिया, जैसेकल उन्दोनो केँ बीचकुछ हुआ हि नाँ होँ.
पर्र अब रॉकी उससेबात करने कों उतावला होँ रहा थां, वोँ अपने बाप कि करतूत उसकेसंग शेयर करकेकोई समाधान निकालने कि सोचरहा थां.
भले हि उसका बाप कैसा भि हौ औऱ वोँ अपने मम्मी-बाप केँ लाड प्रेम औऱ छूट कि वजह सें बिगड़ गय़ा थां,
मगर उसकी मां एक् अच्छी महिला थि, शायद उसीके संस्कारों कि बदौलत वोँ अपने बाप केँ इन कुकृत्यों कों उचित नहीं ठहरापा रहा थां।
उसने तौ कभी ड्रीम्स मे भि नहीं सोचा थां कि उसका बाप पैसे केँ लालच मे देशद्रोह जैसा संगीन जुर्म भि कर सकता हैं, वोँ तौ उसे एक् सीधा-साधा राजनेता हि समझता थां.
मौका निकाल कर उसने नीरा सें बात करने कि कोशिश कि, पहले तोँ नीरा नें उसकोकोई तबज्जो नहीं दि, मगरजब वोँ उसके सामने हाथ बाँधे खड़ा होँ गय़ा औऱ बोला- नीरा प्लीज़ सिर्फ़ एक् बार मेरीबात सुनलो.
नीरा – अबबात करने कों रह हि क्याँ गय़ा हैं रॉकी बाबू, मुझ दोटके कि नौकरानी सें क्याँ बात करेंगे आप्.?
रॉकी – अब मुझे रीयलाइज़ हुआ हैं कि मे कितना ग़लत थां ? मुझे तुम् जैसीनेक लड़की केँ संगऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए थां। प्लीज़ एक् बार मुझे क्षमा करदो.!
तुमने जौ उसदिन मेरे पिता जी केँ बारे मे कहा थां, वोँ बिल्कुल सही निकला.! सच मे वोँ देशद्रोह मे लिप्त हें.
नीरा – क्याँ ? आपको केसे औऱ कबपता लगा अपने पिता केँ बारे मे.?
फिन रॉकीउसे पूरीबात बताता चला गय़ा, जौ उसको पहले सें हि पता थि, मगर उसने उसकोयह जाहिर नहीं होने दिया कि उसेयह सभीपता हैं।
नीरा – तौ अब क्याँ सोचा हैं आपने.?
रॉकी – उसी केँ बारे मे मे तुम्हारी राय जानना चाहता थां, कि मे उन्हें यहसभी नाँ करने केँ लिए केसे रोकू।
मे जानता हूं, तुम् बहोत सुलझी हुईँ लड़की होँ, अवश्य कोई नाँ कोई मार्ग निकल लोगि.
नीरा - मे भला इसमें क्याँ कर सकती हूं.? आप् चाहो तौ अपने पिता सें बातकरो इस बारे मे.
रॉकी - इस विषय पऱ भि मे सोच चुका हूं, पर्र शायदयह संभव नहीं होगा, क्योंकि वोँ इस दलदल मे बहोत अंदर तक जा चुके हें,
शायदअब वापस आनां उनकेलिए भि मुश्किल हैं। हौ सकता हैं वोँ मेरे खिलाफ भि हौ जाएँ.
नीरा - तोँ पोलीस कों बतादो…!
रॉकी- पोलीस कुच्छ साबित नहींकर पाएगी। ! उल्टा इतने बड़े नेता केँ खिलाफ बोलने सें वोँ हमें हि ग़लत नाँ ठहरादे…
औऱ फिन मेरेपास अभि उनके खिलाफ कोई सबूत भि तोँ नहीं हैं.
नीरा - तोँ अब हम् सिर्फ़ वक्त कां प्रतीक्षा हि कर सकते हें, औऱ उनपर नज़ररख कर सबूत इकट्ठा करने कि कोशिश करते हें….!
रॉकी – हां शायदअब तोँ यही एक् मार्ग हैं….!
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मैने चारों ओर सें सारी इन्फर्मेशन कलेक्ट करके पूरी रिपोर्ट होम मिनिस्ट्री कों भेज दि, प्रताप आंड कंपनी कुट्टी केँ द्वारा बहोत बड़ेनर संहार कों अंजाम देने कि तैयारी मे थें.
दुसरे केँ दिन रायगढ़ केँ मैदान मे होने वाले उत्सव मे वोँ कोई बड़ा हमला करने वाले हें, जिसमें सैकड़ों जानें जाने कि पूरी संभावना थि.
मेरी रिपोर्ट केँ आधार पऱ होम मिनिस्ट्री सें कर्प्फ़ केँ एरिया कमॅंडर कों विशेष सूचना मिली कि वोँ हमारे ग्रूप सें मिलकर कोईठोस योजना बनाकर इस ख़तरे सें निपटने कां प्रयास करें।
सूचना बहोत हि गोपनिया रखीजाए.
कमॅंडर कां फोनआने केँ बाद हमने मीटिंग कां टाइम औऱ स्थान निर्धारित करली, औऱ वक़्त पऱ एक् गोपनीय जगह पऱ हम् लोग मिले.
हम् दो हि जाने थें, रणवीर तोँ अपनी ड्राइवर कि ड्यूटी पर्र तैनात थां औऱ चौधरी केँ लम्हा-2 केँ मूव्मेंट कि जानकारी देरहा थां.
हमारी खबर केँ मुताविक कम-सें-कम 100 सें ज्यादा नक्सली ऑटोमॅटिक हथियारों सें लेश उत्सव मे आई भीड़ पऱ हमला करने वाले हें,
यह भि संभव थां, कि वोँ लोग बॉम्ब वग़ैरह कां भि स्तेमाल कर सकते हें।
अगरयह हमलाहुआ तौ भारीजान माल केँ नुकसान सें कोई नहींबचा सकता.
हमें किसी भि सूरत मे हमले सें पहले हि उन नकशालियों कों घेरकर ख़तम करना होगा.
उनका संभावित ठिकाना भि हमनेखोज लिया थां, जहाँ वोँ हमले सें पहले इकट्ठा होने वाले थें,
फिनतय हुआ कि कम सें कम 200 केँ लगभग हमारे जवानरात केँ अंधेरे मे उस इलाक़े कों शांति पूर्वक घेर लेंगे औऱ उचित टाइम पर्र एक् संग अटॅक करके उन्हें ख़तमकर देंगे।
चूँकि विक्रम कों वोँ स्थान पता थि, औऱ उसके आस-पास किसतरह सें घेरा बनाना थां, वोँ भि हमने खाका सजधजकर कर लिया थां.
तयहुआ कि हम् दोनो जवानों कि टुकड़ी केँ संग जाएँगे।
मीटिंग ख़तम करके कमॅंडर अपने कॅंप कों लौटगये औऱ अपनी गुप्त तरीक़ा सें तैयारियों मे जुटगये…!
कल दशहरा हैं, हिंदू मान्यता केँ हिसाब सें कल केँ दिन हिंदुओं केँ ईष्ट मर्यादा पुरुषोत्तम ईश्वर राम नें बुराई केँ प्रतीक रावण पर्र विजय प्राप्त कि थि.
आज भि बहोत सारे रावण हमारे समाज मे मौजूद हें औऱ अपनी झूठी महत्वाकांक्षाओं कि पूर्ति केँ लिएजन साधारण कों भेड़ बकरियों सें अधिक महत्व नहीं देते हें,
लोगों कि जान सें खेलना तौ जैसे इन्होने अपना पेशा औऱ शौकबना लिया हैं.
आज कि राजनीति भि इससे अछुति नहीं हैं, नेताओं केँ दबाब मे आकर प्रशासन भि असमर्थ होँ जाता हैं, जबकुछ नहींकर पता तौ वोँ भि स्वार्थवस उनकेसंग मिल जाते हें.
ऐसे हि कुछ रावण, कल केँ उत्सव मे होने वाली बर्बरता केँ सूत्रधार हें, जिन्हें उनके अंजाम तक पहुँचाने कि ज़िम्मेदारी कुछ देशभक्तों केँ कंधों पर्र थि, जिसे वोँ अपनीजान कि परवाह नाँ करतेहुए भि निभाने मे जुटेहुए थें.
हमारे दिशा निर्देशन मे सीआरपीएफ केँ 200 शसस्त्र जवानइस धुंधली चाँदनी रात मे घने जंगलों केँ बीचदम साधे, इशारों केँ मध्यम सें बढ़ेचले जारहे थें.
विक्रम द्वारा बताएगये अनुमानित स्थान सें हम् अभि भि 2 किमीदूर थें।
हमने सबको रुकने कां इशारा किया, फिन दो-2 केँ हिसाब चारों दिशाओं कां निरीक्षण करने केँ लिए एक् दम चुस्त, चालाक औऱ दुर्दांत जवानों कों चुना.
दो-दो कों चारों दिशाओं मे जाने कां सिग्नल देकर 4-4 लोगों कों उनके पीछे बॅक-अप केँ लिए भेजा, जोँ जल्दी लौटकर अपनी-2 दिशाओं कि वास्तु-स्थिति सें भि अवगत करते.
इस काम मे हमेंदो घंटे गुजरगये, रास्ते मे एक् दो स्थान नक्सली भि फैलेहुए थें, जिन्हें बड़ी सावधानी सें बिना आवाज़ किए ठिकाने लगा दिया गय़ा.
लगभग 120-125 नक्सली, घने जंगलों केँ बीच स्थित एक् मैदान मे जमा थें, जौ सुभह होते हि वहा सें निकलते औऱ दोपहर बाद तक वोँ अपने टारगेट तक पहुँच जाने थें.
चूँकि मैदान केँ चारों ओरघना जंगल होने सें वोँ अपने आप् कों सुरक्षित मानरहे थें, औऱ सावधानी केँ लिए उन्होने अपने व्यक्ति भि फैलारखे थें, जौ हमने उनके सोचने समझने सें पहले हि ठिकाने लगादिए.
आगे वालेदो-2 जवान अभि भि अपनी पोज़िशन पऱ सतर्क थें, इधर हमनेफिन जल्द सें आगे बढ़ना शुरुआत किया औऱ जल्द हि चार टुकड़ियों बाँटकर चारों ओर सें मैदान कों घेर लिया औऱ घने जंगलों केँ बीच पोज़िशन लेँ ली.
हमनेउस मैदान कों एक् तरहलॉक कर दिया थां, अबअगर कोई नक्सली बचकर निकलना भि चाहे तौ वोँ निकल नहीं सकता थां.
रात कां आखिरी पहर थां, ज़्यादातर नक्सली गहरी नींद मे डूबेहुए थें,
कुछ हि थें जौ स्थान-2 पहरे पर्र तैनात थें, मगर आख़िरी पहर होने केँ कारण वोँ भि उन्घरहे थें.
मे, विक्रम औऱ कमॅंडर तीनो एक् स्थान मजूद थें, वोँ सभी हमारे निर्देश केँ प्रतीक्षा मे थें, मुझे सिचुयेशन कुछ आसान सि दिखी, बेमतलब कि अधिक गोलीबारी सें बचाजा सकता थां.
मैने कमॅंडर कों कहा- क्यूं नाँ हम् किसीतरह इनके चारों ओर बॉम्ब स्लिम करदें, औऱ एक् संग धमाका करदेने सें यहलोग यूँही ख़तम हौ जाएँगे। हमें ज्यादा गोलीबारी नहीं करनी पड़ेगी.
एक् हि बार मे यहआधे सें ज्यादा मारेजा चुके होंगे, जोँ बचेंगे उन्हें आसानी सें काबूकर लियाजा सकेगा.
मेरीबात उनकोजमी, औऱ तयहुआ कि अब हम् धमाका हि करेंगे।
गस्त पर्र तैनात नक्सली अधिकतर ऊंघ हि रहे थें, सो हमारे कुछ जवान चारों टुकड़ियों सें रेंगते हुए उनकेबीच तक पहुँच गये, औऱ बड़ी आसानी सें उन्होने बॉम्ब प्लांट करलौट लिए.
चाँद आसमान मे अपनी चाँदनी समेटकर विदा लेँ चुका थां, पूरव मे आसमान कां रंग कुच्छ लालिमा लिएहुए सूरज केँ स्वागत कि मानो तैयारिया शुरुआत कररहा थां।
हमने अपने जवानों कों थोडा औऱ पीछे जंगल मे सेफ दूरी पर्र रहकर पोज़िशन पऱ लगाया औऱ एक् संग चारों बॉम्ब कों रिमोट सें उड़ा दिया.
धमाके इतनेतेज हुए कि 600-700 मीटरदूर होने केँ बावजूद भि हमारे पास तक कि ज़मीन भूकंप कि तरह काँपउठी.
नक्सलियों केँ कॅंप मे चीखो-पुकार मच गई,, मानवअंग हवा मे उड़ने लगे,
धमाके सें आधे सें ज़यादा नक्सली मारेगये, बचे-खुचे घायल थें, कुछ 10-5 नें भाग निकलने कि कोशिश तोँ उन्हें गोली सें भून दिया गय़ा.
मिसन शत-प्रतिशत कामयाब रहा थां, हम् दोनोयार कमॅंडर कों फाइनल एक्सेक्यूशन कां बोलकर अपने ठिकाने कि ओरलौट लिए,
क्योंकि अब जोँ असली रावणबचे थें उनको भि अंजाम तक पहुँचना वाकी थां.
हमने अपनी कामयाबी कि खबर रणवीर तक पहुंचा दि थि। सुभह 10 बजे तक हम् अपने ठिकाने पऱ लौटआए…।
रणवीर नें उन लोगों केँ प्लान केँ बारे मे सभीपता लगा लिया थां…
उसकीखबर केँ मुतविक चौधरी आंड कंपनी प्रताप केँ घऱ पऱ हि मेले कां प्रशारण टेलीविज़न पऱ देखते हुए जश्न मनाने कि तैयारी मे थें…
वोँ इस सबसेदूर बैठकर तमाशा देख्ना चाहते थें, उन्हें ड्रीम्स मे भि यह गुमान नहीं थां, कि कोई तौ हें जोँ उनकेइस प्लान कि धाज़ियाँ उड़ा चुके हें,
औऱ अब वोँ यमदूत बनकर उनके सरों पर्र पहुँचने वाले हें… थें….!
आज दशहरा हैं, रायगढ़ कां विशाल मैदान लोगों केँ हुज़ूम सें भराहुआ हैं, जहाँ तक नज़र जाती हैं, लोगों केँ सर हि सर नज़रआते हें,
चारों ओर चहल-पहल दिखाई देरही थि, लोगआज कां सारादिन मेले कां खुशी उठाने पहुँचे हें.
मैदान केँ एक् सिरे पर्र एक् विशाल स्टेज सजाया गय़ा थां, जहाँ रामलीला केँ दृश्य दिखाए जाने थें औऱ साम ढलते-2 रावण, मेघनाथ, कुम्भकरण आदि केँ पुतलों कों जलाया जानां थां.
उधरदिन केँ 12 बजते-बजते प्रताप केँ घऱ पर्र खूबसूरत चौधरी, एंपी औऱ उनका चौथा पार्ट्नर राइचंद भि आँ चुके थें।
चौधरी केँ संग उसका विश्वसनीय ड्राइवर सज्जाक उसकेसंग थां, जोँ फिलहाल बाहर् गेट पर्र हि रह गय़ा थां.
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Update 89
शराब कां दौर शुरुआत हौ चुका थां, टेलीविज़न ऑन करकेरखा थां, लोकल न्यूज़ चनेललगा केँ रखा थां, आजदेश भर कि खास न्यूज़ दशहरा सें संबंधित थि, देश केँ अलग-अलग हिस्सों सें दशहरा मनने कि खबरें आँ रही थि.
चौधरी नशे कि पिन्नक मे हि बोला- मनालो खुशियाँ सालोकुछ देर औऱ ! फिन तौ यह खुशियाँ मातम मे बदलने वाली हें। हाहहाहा….!
उसके संग-संग वाकी भि अट्टहास करने लगते हें… !
अभि उनकी हँसीथमी नहीं थि कि टेलीविज़न पऱ एक् न्यूज़ फ्लश होनेलगी.
न्यूज़:- देखिए किसतरह सें हमारे देश केँ जवाजों नें एक् बहोत बड़ी नक्सली घटना होने सें बचाई हैं,
अब आपके सामने सीआरपीएफ कि विशेष टुकड़ी केँ कमॅंडर बीएस बत्रा आपको बताएँगे कि किसतरह सें उन्होने एक् बड़ी वारदात होने सें बचाई जिसमें सैकड़ों लोगों कि जानजा सकती थि औऱ नाँ जाने कितने करोड़ कां नुकसान होँ सकता थां.
फिन टेलीविज़न स्क्रीन पऱ कमॅंडर बत्रा दिखाई दिए औऱ उन्होने बोल्ना शुरुआत किया.
हमें इंटेलिजेन्स रिपोर्ट सें ग्यात हुआ कि कोई नक्सली ग्रूप एक् बहोत बड़ी वारदात कों अंजाम देने वाला हैं,
उनका प्लान दशहरे केँ मेले कों टारगेट करना थां। लगभग 125-150 नक्सली आधुनिक हथियारों सें लेश अटॅक करने केँ लिए सजधजकर थें.
हौ सकता थां, बॉम्ब वग़ैरह सें विस्फोट भि कर सकते थें वोँ लोग।
हमने उनकी लोकेशन कों ट्रेस किया औऱ अपने जवानों केँ दस्ते कों गुप्त रूप सें लेजाकर उन्हें घेर लिया औऱ समय रहतेहुए उनके मंसूबों कों ध्वस्त करके उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा दिया.
फिन स्क्रीन पर्र वोँ सभी मंज़र दिखाया गय़ा, जहाँ नक्सलियों कि छत-विच्छित लाशें हि लाशें पड़ी थि.
कमॅंडर नें आगे बोलते हुएकहा- हमेंयह भि पताचला हैं कि इस साजिश केँ पीछेकुछ सफेदपॉश देश द्रोहियों कां हाथ हैं,
जिनके नाम अभि तक हमेंपता नहीं हैं, मगर जल्द हि उनका भि यही अंजाम होनेवाला हैं….!
क्योंकि आज कां यह पावन पर्व बुराई पऱ अच्छाई कि जीत केँ लिए हि मनाया जाता हैं, तोँ अच्छाई अभि तक ख़तम नहीं हुइ हैं,
आज भि इसदेश मे सच्चे सपूत मौजूद हें जौ हर संभवउन रावनो कां वध करते रहेंगे जौ हमारे देश कों नुकसान पहुँचाना चाहते हें.
अब हम् आशा करेंगे कि हमारे देश केँ लोगइस पर्व कों धूम-धाम सें मनाएँ ताकिउन देश द्रोहियों केँ मंसूबे मिट्टी मे मिल जाएँ.“ज़य हिंद” “वन्दे मातरम”.
इतना सुनते हि इन चारों केँ चेहरों पऱ बारहबज गये, उत्तेजना औऱ आक्रोश कि अधिकता मे चौधरी नें अपनेहाथ मे पकड़ा हुआ ग्लास हि टेलीविज़न स्क्रीन पऱ दे मारा,
छ्हन्नक कि आवाज़ सें टेलीविज़न कां स्क्रीन टूट गय़ा औऱ उसमें भक्क सें आगलग गयीँ,.
यह नहीं होँ सकता…? चौधरी पूरी ताक़त सें चिल्लाया, हम् ऐसेमात नहींखा सकते.?
यह मिसनलीक केसेहुआ.? बोला एंपी.
प्रताप- इतना गोपनीया मिसन आख़िर लीक केसेहुआ.? अवश्य कोई ख़ुफ़िया एजेन्सी हमारे आस-पास सक्रिय हैं, अगरऐसा हैं तोँ अब उन्हें हम् तक पहुँचने मे अधिकसमय नहीं लगेगा.
सबके चेहरों पऱ भय कि परच्छाइयाँ साफ दिखाई देनेलगी, शराब कां नशा तौ नाँ जाने कहां गायब होँ गय़ा थां.
अभि वोँ इस समस्या केँ बारे मे बातकर हि रहे थें, कि उन्हें लगा कि कोई औऱ भि इसहॉल मे मौजूद हैं, जौ उनकीगति विधियों पऱ नज़ररखे हुए हैं.
वोँ चारों चोन्कन्ने होँ गये औऱ ध्यान देकरइधर उधर नज़रें दौड़ाई, तभी प्रताप कों लगा कि पर्दे केँ पीछेकोई हैं.
वोँ चुप-चाप उधर कों बढ़ा औऱ नज़दीक जाकर झटके सें परदाहटा दिया…
वहा नीरा कों खड़ेदेख कर प्रताप कां पारा सातवें आसमान पऱ चढ़ गय़ा, उसने उसकेबाल पकड़कर उसे खींचते हुए बाहर् लाया.
तौ तुँ हैं वोँ भेदी.! जोँ हमारी सारी खबरें लीक करती हैं।
बाल पकड़कर खींचने सें नीरा कां दर्द सें बुराहाल हौ रहा थां,
भय सें थर-2 काँपते हुए वोँ बोलीं- नहीं मुझेकुछ पता नहीं हैं, मैनेकुछ नहीं किया, मुझे छोड़दो.
प्रताप दाँत पीसते हुए गुर्राया- साली हरम्जादि ! झूठ बोलती हैं, तूनेकुछ नहीं किया हैं तौ यहाछुप कर हमारी बातें क्यूं सुनरही थि बोल.
नीरा रोते-2 बोलि- आप् लोग ज़ोर-ज़ोर सें हँसरहे थें इसलिये देखने आई थि, फिन वोँ न्यूज़ देखकर छुप गई,।
मे सचकहरही हूं मुझेकुछ पता नहीं.
तभी चौधरी गुर्राया- प्रताप क्यूं वक़्त बर्बाद कररहा हैं, इससे पहले कि यह सालीकुछ औऱ किसी कों कुछ बताए, उड़ादे साली कों.
प्रताप नें फ़ौरन अपनीगन निकाली औऱ नीरा पऱ तान दि, तभी दूसरी तरफ केँ पर्दे केँ पीछे सें रॉकी बाहर् आया औऱ प्रताप औऱ नीरा केँ बीचआकर खड़ा हौ गय़ा.
रॉकी-हां हम् लोग आपकी बातें सुनरहे थें, औऱ यह भि जानते हें कि आप् लोग हि इस सबके पीछे होँ, ऐसा क्यूं किया पिता जी आपने.कहो.
प्रताप अपने बेटे कों वहादेख कर सकपका गय़ा, मगर जल्दी अपनेउपर काबू करकेहुए बोला-
हटजा रॉकी मेरे सामने सें वरना मे तेरी भि मार दूँगा.
तभी आवाज़ें सुनकर उसकी पत्नि भि वहा आँ गई, जब उन्होने अपने पति कों अपने हि बेटे केँ उपरगन तानेहुए देखा तोँ हड़वाड़ा कर प्रताप कि ओर भागी औऱ जाकर उसकेगन वालाहाथ पकड़ते हुए बोलीं-
आप् पागल तौ नहीं हौ गये, अपने हि बेटे कों मारने कि बातकर रहे हें। होँ क्याँ गय़ा हैं आपको… औऱ वोँ उसकेहाथ सें गन छीनने कि कोशिश करनेलगी.
इसी हाथापाई मे ट्रिगर दब गय़ा औऱ …। ढाय…सें.एक् गोलीचली जौ सीधीराम दुलारी देवी केँ सीने कों चीरती हुई चली गयीँ, …
हेराम… बस इतना हि निकला उनके मुँह सें औऱ उनकामृत बदन वहीं फर्श पर्र गिर पड़ा.
प्रताप बौखलाया हुआकभी अपनी पत्नि कि लाश कों देखता तोँ कभी अपनीगन कों। उसकोकुछ भि समझ नहीं पड़ा कि आख़िर यहहुआ तोँ क्याँ हुआ.?
उधर जैसे हि रॉकी नें अपनी मां कों लाश मे तब्दील होतेहुए देखा, वोँ अपनाआपा खो बैठा औऱ अपने बाप केँ उपर झपटा-
हरम्जादे मे तेराखून पी जाउन्गा, तूने मेरी मम्मी कों हि मार डाला…आआ…आअहह…
इससे पहले कि वोँ अपने बाप तक पहुँचता कि एक् औऱ गोलीचली जौ सीधी रॉकी केँ भेजे मे लगी औऱ वोँ वहींढेर हौ गय़ा.
यह गोली चौधरी नें चलाई थि, अपने बेटे औऱ पत्नि कां हस्रदेख कर प्रताप बौखला गय़ा….
वोँ हिश्टीरियाइ ढंग सें हँसता हुआहुआ नीरा कि ओरगन लहराता हुआ झपटा, औऱ उसेगन पॉइंट पऱ लेतेहुए बोला-
यहसभी तेरीवजह सें हुआ हैं हरम्जदि कुतिया, मे तुम को जिंदा नहीं छोड़ूँगा.
अभि वोँ उस पर्र गोली चलाना हि चाहता थां, कि तभी….ढाय… धाय…दो गोली औऱ चली,
प्रताप औऱ चौधरी दोनो केँ जिस्म फर्श पर्र पड़े बेचैनी रहे थें.
तभीवहा तीन नकाबपोश नुमाया हुए, जिनमें सें दो कि गन कि नाल सें अभि भि धुआँ निकलरहा थां.
उन्हें देखकर एंपी औऱ राइचंद कां मूत निकल गय़ा औऱ वोँ थर-2 काँपने लगे.
उनमें सें एक् नकाबपोश गुर्राया- क्यूं एंपी। ग़लतकाम करतेकभी नहीं
काँपा, आज अपनीमौत कों सामने देखकर मूतने लगा.
वोँ दोनो मिमियाते हुए बोले…हहामें क्षमा करदो, यह सभीइन दोनो कुत्तों नें किया थां…
नकाबपोश - अच्छा तोँ क्याँ तुम् लोग अपना गुनाह कबूल करोगे…?
एंपी - हां ! आप् लोग जैसा कहोगे हम् वैसा हि करेंगे.!
नकाबपोश – अच्छा ! औऱ फिन कोर्ट केँ सामने मुकर जाओगे.! हैं नां ! याँ फिन उससे जुड़े हुए जड्ज याँ पोलीस कों हि खरीद लोगे। क्यूं.?
सुन एंपी, हम् लोगयहा क़ानून-2 कां खेल खेलने नहींआए… समझे, हमारा काम हैं ऑनदा स्पॉट फ़ैसला…
इसकेसंग हि फिन धाय.धाय… दो गोली औऱ चली, औऱ उन दोनो केँ बदन भि थोड़ी देर तडपे, फिन शांत होँ गये.
उन्होने वहाकुछ ऐसे सबूत छोड़े जौ यह साबित करते थें कि वे देश-द्रोही थें…
फिन वोँ तीनों नीरा कों संग लेकरवहा सें ऐसे गायब होँ गये जैसेगधे केँ सर सें सींग….
हमारा यह मिसन भि करीब-करीब सक्सेस्फुल रहा, ज़्यादातर हार्ड कोर नक्सली जोँ कुट्टी केँ संग थें वोँ मारेजा चुके थें,
कुछ नें सरेंडर कर दिया थां। जंगलों मे कुछ दिनों केँ लिए शांति हौ गयीँ, थि.
हम् लोगकुछ दिनो केँ लिए अपने-2 परिवार केँ पासलौट गये।
वाकी केँ ग्रूप भि बहोत हद तक सक्सेस रहे थें, अपने इलाक़ों मे उन्होने कुछहद तक कामयाबी हाशील कि थि…
कुछ अभि भि लगे थें अपने-2 मिसन पऱ, जिनकी समय तौ समय रिपोर्ट हम् हेड ऑफीस कों देते रहते थें.
ट्रिशा कि प्रेग्नेन्सी कां यह लास्ट वक्तचल रहा थां, उसकी मां हमारे संगआई हुई थि, औऱ अब नीरा भि मेरेसंग हि हमारे घऱ आँ गयीँ, थि.
मौकादेख कर वक़्त टाइम पर्र उसकी भि सेवा होँ जाती थि, वैसे भि मेरी पत्नि तोँ इस काबिल थि नहीं आजकल.
एक् दिन ट्रिशा नें एक् खूबसूरत सें बेटे कों जन्म दिया, घऱ भर मे काफ़ी टाइम केँ बाद खुशियों नें कदमरखा थां।
उधर निशा नें भि एक् बेटे कों जन्म दिया, दोनो बहनों केँ जिंदगी मे एक् संग खुशियों कि बहारआई थि,
ऋषभ औऱ उसकी पत्नि नें वहा कां सभी संभाल लिया थां.
मैने अपनी मम्मी कों भि बुलवा लिया थां, श्याम भइया उन्हें अपनेसंग लेँ आए थें…
पोते कों देखकर मेरी मां बहोत खुश थि, अपने सबसे छोटे बेटे, जिसके भविष्य कि उसेहर टाइम चिंता सताती रहती थि, वोँ आज अपने परिवार केँ संग सुखी थां.
हमने अपने बेटे कां नाम सुलभरखा। वोँ बिल्कुल अपनी मम्मी कि छवि थां। इतना प्यारा थां कि हरकोई उसे प्रेम करनेलग जाता।
रोना तौ जैसे उसकोआता हि नहीं थां। नीरा उसका विशेष ख्याल रखती थि.
कुछ वक्त औऱ व्यतीत हुआ, बीच बीच मे हम् तीनों साथी अपने मिसन कां रिव्यू लेनेचले जाते, औऱ जोँ भि उचित आक्षन होता वोँ करके वापस अपनेघऱ आँ जाते.
मैने ट्रिशा केँ संग सलाह मशविरा करके, उसी केँ स्टाफ केँ हि एक् कॉन्स्टेबल रमेश केँ संग नीरा कि विवाह करवा दि,
रमेश कां भि इस दुनिया मे कोई नहीं थां…वोँ दोनो एक् दूसरे कां संग पाकर बड़ेखुश थें.
अभि मेरा बेटा 10 महीने कां हि हुआ थां कि ट्रिशा फिन सें प्रेग्नेंट हौ गई,, लोगों नें काफ़ी सुझाव दिए कि अभि बड़ा बेटा छोटा हैं, तोँ दूसरे कि परवरिश केसे होगी,
इसलिये अबॉर्षन करा लेना चाहिए, जिससे कुछहद तक ट्रिशा भि सहमत होँ गयीँ,, मगर मैनेमना कर दिया.
पता नहीं परमेश्वर नें क्याँ सोचकर उस भ्रूण कों मेरी पत्नि केँ गर्भ मे डाला होगा, अब उसके अरमानों कां गला गर्भ मे हि घोंट देनायह मेरी नज़र मे महपाप होगा.सो हमनेउसे रखने कां फ़ैसला लिया.
ट्रिशा नें वक्त पर्र दूसरे बेटे कों जन्म दिया, हमने दुगने उत्साह सें नये मेहमान कां स्वागत किया औऱ उसकानाम कौशलरखा.
चूँकि नीरा भि ज़्यादातर हमारे संग हि रहती थि, तोँ दोनो बच्चों कि परवरिश मे कोईखास तकलीफ़ नहींआई.
My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 90
इधर अल्पमत कि केंद्र सरकार, ढाईसाल मे हि धराशाई हौ गयीँ,, दुबारा चुनाव हुए वोँ भि कोई एकमत नहींदे पाए।
देश केँ वरिष्ठतम औऱ सुलझे हुए राजनेता नें कुछ पार्टियों कों लेकर सरकार चलाने कि कोशिश कि.
इसीबीच हमारे दुश्मन मुल्क जोँ कि जग जाहिर हैं, नें अपनी सेना कों घुस्पेठ करने कि कोशिश कि, जिसका हमारी अल्पमत कि सरकार नें अपनीबिल पॉवर दिखाते हुए सेना कों उचित कार्यवाही करने कां आदेश दिया.
हमारे मुल्क मे जँवाज़ो कि तोँ कभी भि कमी नहींरही हैं, सोकुछ हि दिनो मे हमारी सेना केँ जँवाज़ो नें दुश्मन कों उसकी औकात दिखा दि, औऱ उन्हें मुँह कि खानी पड़ी.
इसका एक् फ़ायदा हुआ, अल्पमत कि सरकार तोँ गिर गयीँ, मगर दुबारा एलेक्षन मे उन्होने बहमत केँ संग स्थाई सरकार बनाली।
देश कों एक् अच्छा औऱ संवेदनशील नेतामिल गय़ा थां.
सरकार तोँ स्थाई बन गई, थि, संग हि संग दुश्मन भि स्थाई मिला, जौ हर संभव हमें नुकसान पहुँचाने कां प्रयास करता रहता।
हमारी ओर सें अनगिनत प्रयास हुए कि किसीतरह महाद्वीप मे शांति कि स्थापना हौ सके,
मगर शायद वोँ हमारे शांति मेसेज कों हमारी दुर्बलता हि समझता रहा, औऱ उसके अशांति फैलाने वाले प्रयास बदस्तूर जारीरहे, जौ हमें नाँ चाहते हुए भि वक़्त वक्त पर्र झेलने पड़रहे थें.
चाहे वोँ अक्षर धाम पर्र हमला हौ, फिन चाहे मुंबई रेल धमाके। चाहे गोधरा कांड होँ याँ फिन सीमा पऱ हमला।
नां जाने कितने हि जानमाल कां नुकसान हर वर्षझेल रहा थां हमारा देश.
टाइम आँ गय़ा थां, कि अब हमें भि उसी कि भाषा मे जबाब देना चाहिए.
वोँ अगर हमारे देश मे आतंकवादियों कि घुस्पेठ करा सकते हें, तौ क्याँ हम् उनकेघऱ सें निकलने पऱ पाबंदी नहींलगा सकते…? उनकी मनमानियों पर्र नकेल नहींकस सकते.?
उसी कड़ी केँ तहत एक् दिन मुझे अपने एनएसएसआइ ऑफीस, जोँ नयी सरकार केँ बनते हि पुनः गठित हौ गयीँ, थि सें फोनआई,
मुझेघऱ कि ज़िम्मेदारियाँ ट्रिशा केँ कंधों पऱ डालकर अर्जेंट देल्ही निकलना पड़ा.
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मुज़फ़्फ़राबाद केँ उत्तर कां पहाड़ी औऱ जंगली इल्लाका, जहाँ कि ज्यादातर अवादी छोटे-2 कबीले टाइप टुकड़ों मे बस्ती हैं,
परिवारों केँ ज़्यादातर मर्दकाम कि तलाश मे याँ तोँ दूर दराजशहर कि ओरचले जाते हें,
याँ फिन कहींरोड साइडकोई छोटा-मोटा धंधारख कर अपनी रोज़ी-रोटी कमाने कि कोशिश मे लगे रहते हें.
औरतें घऱ परिवार, बच्चों कि परवरिश केँ संग-2 जंगली पहाड़ों मे जाकर आमदनी कां कोई ज़रिया याँ फिन रेहड़ औऱ दूसरे जानवरों कों पालकर काम चलाती हें।
ऐसे हि एक् कबीले सें हटकर पहाड़ी केँ आँचल मे बने एक् इकलौते घऱ मे, एक् विधवा स्त्री अपनीदो जवान बेटियों केँ संग रहती हैं,
उसका इकलौता बेटा असलमशहर मे रहकरचार पैसे कमाता हैं किसी रेस्टौरेंट मे वेटर कां काम करके.
अधेड़ उम्र अमीना बेगम औऱ उसकी 24 साल कि बड़ी बेटी रेहाना जौ शुदा सुदा होने केँ बावजूद विधवाओं जैसा जिंदगी जीने पऱ मजबूर हैं, औऱ अपनी अम्मी केँ संग हि रहती हैं.
उसका शौहर पाकिस्तानी फौज मे थां, मगर कारगिल वॉर केँ बादजान बचाकर भागने केँ जुर्म मे पाकिस्तानी हुकूमत नें उसे गद्दार घोषित करकेजैल मे सड़ने केँ लिएडाल दिया थां.
उससेदो साल छोटा असलम, जोँ शहरचला गय़ा, अमीना कि तीसरी औलाद उसकी छोटी बेटी शाकीना जौ इस वक़्त 19 साल कि कमसिन कली निहायत हि सुंदर किसी खिलती कली जैसी.
अमीना कां शौहर पीओके मे आएदिन होनेवली दहशत गर्दि कां शिकार होँ चुका थां।
कुल मिलाकर यह परिवार, पाकिस्तानी हुकूमत औऱ उसके पालेहुए दहशत गर्दो कां शिकार थां.
ऐसा नहीं थां कि यह इकलौता परिवार हि इन जुल्मों कां शिकार हुआ होँ, ऐसे नां जाने कितने हि परिवार इसतरह केँ हादसों केँ शिकार होकर ग़रीबी औऱ कुरबत कि जीवनबसर करने पर्र मजबूर थें.
इन लोगों मे हुकूमत औऱ दहशत गर्दि केँ खिलाफ रोष तोँ थां, मगर मजबूर थें, क्योंकि खिलाफत करने कां मतलब थां मौत।
ज़्यादातर बेसहारा परिवार अपने सिसकते जिंदगी कों जीने पऱ मजबूर थें, कहींकोई गोली चलने कि आवाज़ हि इनकीरूह कों कंपा देती थि.
हर संभवयही कोशिश करते, कि कभी किसी सरकारी नुमाइंदे याँ फ़ौजी याँ फिन किसी दहशत गर्द कि नज़रइन पऱ नाँ पड़े.
ऐसे हि एक् दिन शाकीना अपनेघऱ सें थोडा दूर अपने रेहड़ औऱ पालतू जानवरों कों पास केँ हि एक् मैदान मे चरारही थि,
पास सें हि एक् पतली सि ख़स्ता हाल मार्ग गुजरती थि, जिस पऱ बमुश्किल कभीकोई वहा गुज़रता थां.
साम होने कों थि, धूप अपने आखिरी पड़ाव पर्र थि कि तभीउस मार्ग सें होकर एक् पोलीस कि जीप गुज़री, उसमें 4 पोलीस केँ सिपाही दारोगा केँ संग गस्त पऱ निकले होंगे शायद.
उनकी मनहूस नज़र शाकीना पऱ पड़ी औऱ उन्होने जीपरोक ली।
पोलीस जीप कों रुकता हुआ देखकर उसके जिस्म मे डर कि लहर दौड़ गयीँ,,
उसनेउन पोलीस वालों कों अनदेखा करके अपने जानवरों कों घऱ कि ओर लें जाने केँ लिए हांकना शुरुआत कर दिया.
जीप मे बैठे दारोगा नें उसको आवाज़ देकर अपनेपास आने कां इशारा किया, वोँ बेचारी उसकीबात टाल भि तौ नहीं सकती थि।
सो नज़रें झुकाए काँपते कदमों सें वोँ उन लोगों केँ पास पहुँची।
उन पोलीस वालों कि हवसभरी नज़रें उसके जिस्म कां एक्स्रे कररही थि, औऱ वोँ बेचारी दूर खड़ीथर-2 काँपरही थि.
दारोगा – आए लड़की ! कहां रहती हैं तूँ, औऱ क्याँ नाम हैं तेरा ?
उसने उंगली सें अपनेघऱ कि तरफ इशारा किया, औऱ धीरे-धीरे सें अपनानाम बताया.
अब वोँ दारोगा औऱ दो सिपाही जीप सें उतरगये औऱ उससे बोला-दूर क्यूं खड़ी हैं यहापास आकरबोल, सुनाई नहींदे रहा.
वोँ बेचारी काँपते कदमों सें औऱ थोडा नज़दीक आई औऱ बोलीं- जी मेरानाम शाकीना हैं,
अभि वोँ अपनानाम ठीक सें बता भि नहींसकी थि कि उस दारोगा नें एक् सिपाही कों इशारा किया औऱ उसने उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोला-
चल हमारे संगजीप मे बैठ, तेरी थाने लेँ जानां हैं, बिना इज़ाज़त कहीं भि जानवरों कों चराते हौ तुम् लोग.
वोँ बेचारी अपनी नाज़ुक कलाई कों छुड़ाने कि जद्दोजहद करनेलगी, मगर कहां वोँ नाज़ुक कलाई औऱ कहां उस पोलीस वाले कां शख्त कठोरहाथ।
उसकी आँखों सें जार-2 आँसू बहनेलगे, वोँ उनसे स्वयं कों छोड़ देने कि गुहार कररही थि मगरउन ज़ालिमों पर्र उसके बेबस आँसुओं कां कोईअसर नहींहुआ.
वोँ नर-पिशाच भेड़िया उस लाचार मजबूर नाज़ुक सि कली कों हाथ पकड़कर घसीटते हुएजीप कि तरफ लें जानेलगा…
वोँ बेचारी सिवाय रोने बिल्खने केँ औऱ कुच्छ भि कर पाने मे असमर्थ थि…जबकोई चारा नहींबचा तोँ वोँ वहीं ज़मीन पर्र बैठ गई, …
उस सिपाही नें उसकी कलाई छोड़ दि, औऱ उसके पीछे जाकरउसे अपनी गिरफ़्त मे लें लिया।
पहले तौ वोँ उसके नाज़ुक रसीले अधखिले वक्षों सें खेलता रहा, औऱ फिन उसने ज़बरदस्ती उसे अपनीगोद मे उठा लिया.
वोँ किसी छोटी बच्ची कि तरह उसकीगोद मे तड़पति हुइ उसकी मजबूत गिरफ़्त सें निकलने कि नाकाम कोशिश करती रही.मगर निकल नां सकी.
वोँ सिपाही उसे उठाएहुए जीप कि तरफ बढ़ने लगा। वोँ चीख-2कर अपनी आममी औऱ अप्पा कों आवाज़ देनेलगी.
अभि वोँ सिपाही शाकीना कों लेकरजीप तक पहुंचा हि थां कि एक् बड़ा सां पत्थर भनभनाता हुआ उसकी कनपटी पऱ पड़ा।
अप्रत्याशित पत्थर कि चोट इतनी ज़ोर्से पड़ी, कि वोँ शाकीना कों वही छोड़कर दर्द सें बिलबिलाता हुआ अपनी कनपटी पऱ हाथरख कर ज़मीन पर्र बैठता चला गय़ा……!
जैसे हि वोँ सिपाही दर्द सें बिलबिलाता हुआ ज़मीन पर्र बैठा, झट सें दारोगा औऱ उसके वाकी साथियों कि नज़र, पत्थर मारने वाले कि तरफघूम गई, ….
उनसेकोई 50-60 मीटर कि दूरी पर्र एक् 6 फूटा युवक पठानी सूट मे, चेहरे पऱ घनीमगर छोटी सि दाढ़ी थि, उमरकोई 28 साल होती, अपनीकमर पऱ हाथरखे खड़ा थां।
फ़ौरन उन चारों कि गने उसकीओर तन गयीँ,.
दारोगा नें उसे अपनीओर आने कां इशारा किया,
वोँ जवान, अपने संतुलित कदमों सें उनकीतरफ बढ़ा…जब वोँ उनसेकोई 10 कदम पऱ आकररुक गय़ा तौ गुर्राते हुए दारोगा उससे बोला-आए ! कॉन हैं तुँ.? इसको पत्थर तूने मारा.?
जी जनाब ! मैने हि मारा हैं। मुझेलगा यह व्यक्ति इस लड़की केँ संग ज़ोर ज़बरदस्ती कररहा थां इसलिये.
दारोगा उसकी साफ़गोई सें औऱ भड़कउठा औऱ उसको गाली देतेहुए चिल्लाया- कफर कि औलाद जानता नहीं पोलीस केँ कामों मे दखलंदाजी करने कां अंजाम क्याँ होता हैं.? मे तुम्हें बताता हूं.
औऱ उसने एक् सिपाही कि ओर इशारा करके बोला-मार साले कों, इसकी हीरो गिरी निकाल।
वोँ सिपाही उस युवक कि ओर बढ़ा, औऱ उसके कंधे पऱ राइफ़ल केँ हत्थे सें एक् ज़ोरदार प्रहार किया। वोँ जवान अपने कंधे कों पकड़ केँ बिलबिला उठा.
बोल हरम्जादे.! हीरो बनेगा.? औऱ एक् औऱ प्रहार उसकेपेट पर्र कर दिया।
दर्द सें वोँ युवकपेट पकड़कर दोहरा हौ गय़ा औऱ गिडगिडाते हुए बोला- मुआफी माई-बाप, अब आइन्दा ऐसा नहीं करूँगा.
तब तक वोँ सिपाही उसके पीछे पहुँच गय़ा थां, औऱ राइफल केँ हत्थे कि एक् औऱ भरपूर चोट उसकीपीठ पर्र पड़ी।
चोट काफ़ी जोरदार थि, जिसकी वजह सें वोँ जवान 5-6 कदमआगे तक गिरता हुआबढ़ गय़ा, जैसे तैसे उसने अपने कों आगे कि तरफ गिरने सें बचाया…
अभि वोँ सीधा खड़ा भि नहीं होँ पाया थां कि एक् औऱ प्रहार उसकीपीठ कों झेलना पड़ा।
नतीजा वोँ अबउस दारोगा केँ उपर हि गिरने कों हुआ, तभी एक् संगतीन कामहुए.
उस युवक नें यह भाँप लिया थां कि दारोगा समेत उनकीगने उसकीओर तनी अवश्य थि, मगर वोँ अभि तक अनलॉक नहींकर पाए थें.
एक् जैसे हि वोँ युवकउस दारोगा केँ उपर गिरने कों हुआ, उसनेउस युवक कां गिरहवान थामकर उसे अपनेउपर गिरने सें रोका.
दूसरा युवक कां बाँया हाथ दारोगा केँ हाथ मे पकड़ी हुइ गन वाली कलाई पर्र गय़ा, औऱ तीसरा झुकने कां नाटक करतेहुए उसने नां जानेकब अपना खंजर अपनीकमर सें निकाला औऱ दारोगा केँ पेट मे मूठ तक घुसा दिया.
दारोगा दर्द सें अभि ठीक सें चीख भि नहीं पाया थां, कि उसकीगन उस युवक केँ हाथ मे आँ गई, खंजर कों एक् राउंड उसकेपेट मे घुमाकर उसने बाहर् खींचा.
भलभलाकार खून कि एक् तेजधार दारोगा केँ पेट सें उबल पड़ी, उसके छोड़ते हि, वोँ त्योराकर ज़मीन पर्र गिरकर तड़पने लगा…
जब तक वोँ पोलीस वाले अपने दारोगा कि हालतदेख कर बौखलाए सें खड़े अपनी-2गन कों अनलॉक करके चलाने कि स्थिति मे आते,
कि एक् संगचार फाइयर हुए औऱ वोँ चारों भि ज़मीन पर्र पड़े तड़प्ते नज़रआने लगे.
अभि यह वाकीया होँ हि रहा थां कि शाकीना कि चीखसुन कर उसकी अम्मी औऱ बड़ी बहन दौड़ती हुई वहा पर्र आँ पहुँची।
शाकीना नें यह मंज़र अपनी आँखों सें देखा थां, डर केँ मारे उसकी चीखें लगातार निकलरही थि, वोँ खड़ी-2 सूखे पत्ते कि तरह काँपरही थि.
जैसे हि उसकी अम्मी औऱ अप्पा वहा पहुँची, वोँ भागती हुई अपनी अम्मी केँ गले सें लगकर रोनेलगी.
वहा कां खूनी मंज़र देखकर उन तीनों कि हालत जुड़ी केँ मरीज़ जैसी होँ रही थि। जबउस युवक नें शाकीना सें पुछा- तुम् ठीक तोँ होँ.?
शाकीना नें अपनी गर्दन हां मे हिला दि, उसके मुँह सें कोईबोल नां निकलसका.
थोडा होश मे आकर उसकी अम्मी नें उस युवक सें कहा- तुम्हारा बहोत-2 धन्यवाद बेटा, जौ तुमने मेरी बेटी कों बचा लियाइन दरिंदों सें, वरना नाँ जानेयह इसका क्याँ हश्र करते.
युवक - इसमें धन्यवाद कि कोईबात नहीं हैं बीबी, यह तौ मैने इंसानियत केँ नाते किया हैं, जब मैने इनका विरोध किया तौ इन्होने मुझे हि मारना शुरुआत कर दिया,
तोँ अपनीजान बचाने केँ लिए मुझे मजबूरन इन हैवानो कों मारना हि पड़ा, वरनायह लोग मुझेमार डालते.
वोँ तीनों हि उसे किसी फरिस्ते कि तरहदेख रही थि, फिनकुछ देरबाद अमीना नें पुछा- बेटा तुम्हारा नाम क्याँ हैं औऱ कहां केँ रहने वाले हौ.
युवक- बीबी ! मेरानाम अशफ़ाक़ हैं, मेराघऱ यहा सें दूर गिलगित केँ पास एक् छोटे सें गाँव सांप्ला मे हैं, मेराभरा पूरा परिवार थां,
अम्मी, अब्बू, 3 भइया औऱ 2 बहनें, जिनमें मे सबसे बड़ा थां। सबखुश हाल जीवनजी रहे थें.
अबआगे कि स्टोरी अशफ़ाक़ कि ज़ुबानी……
मेरे अब्बू औऱ कुछ लोगों नें मिलकर हुकूमत कि नाइंसाफी औऱ दहशतगर्दी केँ खिलाफ आवाज़ उठाने कि कोशिश कि,
इसकेएवज मे हमेंआए दिन धमकियाँ मिलती रहती,
एक् दिन मे घऱ पर्र नहीं थां तौ कुछ फ़ौजी जवानों नें गाँव पऱ हमलाकर दिया औऱ मेरे पूरे खानदान कों हलाक़ करकेघऱ कों आग केँ हवाले कर दिया.
उस घटना केँ बाद सें हि अब मे भि इन नकारा हुकूमत केँ नुमाइन्दो सें औऱ फौज सें छिप्ता फिनरहा हूं, नाँ अबकोई मेराघऱ हैं, औऱ नां कोई ठिकाना.
जहाँरात होँ जाती हैं, सो जाता हूं, जबभूख लगती हैं, तोँ जौ भि मिलता हैं खाकरपेट कि आग कों शांतकर लेता हूं.
मगरअब समय कि बेरहम मार नें मुझेऐसा बना दिया हैं, कि जब भि कोई ज़ुल्म मेरी आँखों केँ सामने होता दिखता हैं, मेरे पूरे जिस्म मे आग सुलगने लगती हैं, औऱ मे उन दरिंदों कों उनके अंजाम तक पहुंचा कर हि दम लेता हूं.
होँ सकता हैं, किसीदिन कोई गोली मेरा भि ख़ात्मा करदे, मगर तब तक मे इन दरिंदों सें लड़ता हि रहूँगा.
वोँ तीनों उस युवक कि आप् बीती सुनकर इतनी भावुक हौ गई, कि उनकी आँखों सें आँसू निकल पड़े, औऱ वोँ अपनेगमो कों छोटा महसूस करनेलगी.
तभी अमीना कि बड़ी बेटी रेहाना बोलीं- मगरअब क्याँ होगा, जैसे हि हुकूमत कों पता चलेगा कि उनके पोलीस केँ जवानों कों किसी नें हलाक़ कर दिया हैं, तोँ वोँ इस सारे इलाक़े मे तबाही मचा देंगे.
मे - आप् लोग इनकी फिकर नां करो, मे इनसभी कों जीप मे डालकर यहा सें 3-4 किमीदूर एक् घाटी हैं, जिसकी पहाड़ी पऱ एक् मोड़ हैं, मे इन्हें जीप समेतउस पहाड़ी सें सेकड़ों फीट गहरी घाटी मे फेंक दूँगा,
पोलीस यही समझेगी, कि नशे औऱ अंधेरे केँ कारणजीप स्पीड मे कंट्रोल नहीं हुई औऱ मोड़ सें घाटी मे गिर गई,। आप् लोग आहिस्ता अपनेघऱ जाओ.
अमीना - नहीं बेटा ! अब तुम् भि हमारे संग हि रहोगे, कब तक अकेले यूँही भटकते रहोगे.?
मे - नहीं बीबी ! मेरीवजह सें खंखाँ आप् लोगों पर्र कोई मुशिबत आँ बनेयह मे नहीं चाहता.
रहना - वैसे भि हम् लोग क्याँ कम मुशिबत झेलते हें.! आएदिन ऐसे हादसे लोगों केँ संग होते हि रहते हें, आप् हमारे संग रहोगे तोँ मूषिबतों कां मिलजुल कर सामना कर लेनेगे.
मे - मगर मे आप् लोगों……!
अमीना - बस बेटा अब औऱ आगेकुछ नहीं सुनना, तुम्हें हमारे संग हि रहना हैं तोँ रहना हैं बस… !
मे - तौ ठीक हैं बीबी ! आप् लोगों कि यही ज़िद हैं तौ मे इन लोगों कों ठिकाने लगाकर लौटता हूं.
अमीना - मगर बेटा इतनीदूर सें लौटकर आओगे केसे, पैदल तौ बहोत वक्तलग जाएगा, फिनकुछ सोचकर बोलि-
रेहाना तूँ एक् कामकर, अपनी बाइसिकल लें आँ, इधर सें जीप मे डालकर लेँ जानां औऱ उधर सें तुम् दोनो उससेलौट आनां.
यह ठीक रहेगा अम्मी, कहकर रहना दौड़ गई, घऱ कि तरफ औऱ कुछ हि देर मे साइकल लेकर आँ गयीँ,,
तब तक मैनेउन पाँचों कों जीप मे डाला, औऱ हम् तीनों नें मिलकर खून केँ निशान मिटादिए.
अंधेरा हौ चुका थां, साइकल कों भि पीछे डालकर, रेहाना कों बगल कि सीट पऱ बिठाया औऱ मे चल दियाउन कुत्तों कों ठिकाने लगाने,
शाकीना औऱ उसकी अम्मी अपनेघऱ कि तरफबढ़ गई, ….!
रेहाना कों मैने मोड़ सें पहले हि उतार दिया, साइकल नीचेरख केँ वोँ वहीं खड़ी हौ गयीँ,, मैनेजीप स्टार्ट कि औऱ उसको स्पीड देकर मोड़ सें हल्का सां टर्न दिया औऱ सीधीखाई कि तरफ दौड़ा दि.
जैसे हि जीपखाई केँ पास पहुँची, मैनेजीप सें जंपलगा दि, औऱ उसकोखाई मे कुदा दिया,
किसी पत्थर सें टकराकर जीप मे आगलग गई, औऱ जलती हुई जीपउन हरामजादो कि लाशों केँ संग सेकड़ों फीट गहरीखाई मे जा गिरी.
अंधेरे केँ कारण मेराबदन एक् पत्थर सें जा टकराया, मेरा बाँया कंधा पत्थर कि रगड़ सें छिल गय़ा थां, मेरी कमीज़ भि उस स्थान सें फट गई, औऱ उसमें सें खून रिसने लगा।
चोट थोड़ी अधिकलगी थि, जिसकी वजह सें मे कुछदेर यूँही पड़ारह गय़ा, फिन थोडा हाथ सें सहारा लेकरउठा औऱ धीरे-धीरे-2 रेहाना केँ नज़दीक पहुंचा, वोँ साइकल कां हॅंडल पकड़े खड़ी मेरा प्रतीक्षा कररही थि.
मुझे कंधे पऱ हाथरखे औऱ धीमे कदमों सें आतेदेख उसने साइकल वहीं छोड़ी औऱ दौड़ते हुए मेरे नज़दीक आई,
मेरा बाजूथाम कर सहारा देतेहुए बोलि- आप् ठीक तोँ हें.? हाथ हटाइए ज़रा, औऱ फिनजब उसने मेरे कंधे सें खून रिस्ता देखा तोँ घबराकर बोलि-
अरे आपको तोँ चोटलगी हैं.! आप् बैठो मे कुछ बाँध देती हूं इस पर्र, वरनाखून बहता रहेगा, औऱ फिन उसने अपने दुपट्टे सें मेरे कंधे केँ जख्म कों बाँध दिया औऱ बोलीं-
आपको दर्द होँ रहा होगा, आप् साइकल पर्र बैठो मे चलाकर लेँ चलती हूं.
मे उसकी मासूमियत पऱ मुस्करा उठा औऱ बोला-अरे ऐसी चोटें तोँ आएदिन लगती हि रहती हें, इसकी मुझेआदत सि हौ गई, हैं तुम् चिंता मतकरो मे साइकल चला लूँगा,
फिन साइकल ज़मीन सें उठाकर उसकीसीट पर्र बैठ गय़ा औऱ उसको पीछे कॅरियर पऱ बैठने कों बोला.
जब वोँ बैठ गई, तोँ मैने साइकल पऱ पैदलमार करआगे बढ़ाया।
उसका कॅरियर कमजोर सां थां, रेहाना केँ वजन कि वजह सें वोँ इधर-उधर लचक्ने लगा, जिसकी वजह सें साइकल भि इधर-उधर लहराने लगी.
मुझे साइकल कों संभालने मे दिक्कत होँ रही थि, जिसकी वजह सें पैडल पर्र ज़ोर नहींदे पारहा थां.
मैने साइकल खड़ीकर दि, औऱ बोला-यह ऐसे तोँ नहींचल पाएगी, कॅरियर कमजोर हैं, तुम्हारे वजन सें हि कहींटूट नाँ जाए, औऱ साइकल भि लहरारही हैं, अब तौ पैदल हि चलना पड़ेगा।
औऱ मे एक् हाथ सें उसका हॅंडल पकड़कर चलनेलगा, रेहाना मेरेबगल मे चलरही थि.
My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) - Next part miss mat karna
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