My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 102
यहा सें कोई 25 किमीदूर जंगली इलाक़े मे जौ सरहद केँ लगभग हि हैं वहाकई कॅंप चालूकिए हें, यहसभी क़ैदी वहीं जंगल कि सफाई, तारों कि बाढ़ लगाना इन्ही सभी कामों मे लगाए जाते हें.
मे - औऱ जैल केँ रेकॉर्ड मे यहसभी दर्ज होता हैं.?
मेरीबात सुनकर वोँ हंस पड़ा औऱ बोला - कैसा रेकॉर्ड.? किसका रेकॉर्ड.?
अरे मेरे भइया, जब उन क़ैदियों कां हि कोई रेकॉर्ड नहीं हैं, तोँ काम कां क्याँ रेकॉर्ड होगा…?
मे अचंभित रह गय़ा, औऱ सोचने लगा, यह कैसा मुल्क हैं, जहाँ क़ैदियों कां भि जैल मे रेकॉर्ड नहीं हैं,
फिन प्रत्यक्ष मे बोला- तौ क्याँ यह क़ैदी सज़ायाफ्ता नहीं हें.?
वोँ – अरे नहीं भइया, जिन क़ैदियों केँ जुर्म कोर्ट मे साबित हि नहींहुए वोँ केसे सज़ायाफ्ता.?
उसकीबात सुनकर मे मुँह फाडेउसे देखता हि रह गय़ा….!
चाइ आँ चुकी थि, उसे ख़तम करके मैने अंदर बैठी रहना कों इशारा किया, वोँ उठकर टाय्लेट कि ओर जानेलगी, मैने उसको बोला-
देखो वोँ टाय्लेट कि तरफजा रही हैं, जाओ जाकर उससे सारी बातें तय कर्लो, बोल देना तुम्हारे मित्र सें बात होँ गई, हैं.
उसने अपने पीछेमूड कर देखा तोँ रेहाना अपने टाइटसूट मे कुछ ज्यादा हि गान्ड मटकाती हुई टाय्लेट कि तरफ जाती दिखीउसे। वोँ उठकर उसके पीछे-2चल दिया.
मैनेचाइ केँ पैसेदिए औऱ उठकर बाहर् कि ओरचल दिया, अपनी बाइक केँ पास खड़ा होकर रेहाना कां प्रतीक्षा करनेलगा।
10 मिनट भि नहींहुए थें कि वोँ तेज-तेज कदमों सें चलती हुई बाहर् आई औऱ बाइक पऱ मेरे पीछे बैठते हुए बोलीं- चलो.
मैने बाइकआगे बढ़ाते हुए पुछा - क्याँ बात हैं, तुमने तौ उसे 5 मिनट मे हि ठंडाकर दिया, क्याँ हुआसभी ठीक तोँ हुआ नाँ.
पता नहीं वहीं पड़ा हैं, मरेगा नहीं तौ किसी लायक भि नहीं रहेगा, बच भि गय़ा तौ जीवनभर गर्दन टेडी करके फ़िरेगा.
मैने हसतेहुए कहा – ऐसा किया क्याँ तुमने उसकेसंग ?
मेरीपीठ सें अपनी चुचियों कों सटाते हुए बोलीं – जब मे टाय्लेट मे थि, उसनेआते हि गेटबंद किया औऱ मुझे पीछे सें पकड़ने कि कोशिश कि,
मे सावधान तौ थि हि, सो उसका बाजू पकड़कर कमोड सें दे मारा, औऱ उसकी गर्दन मरोड़ दि, शायदगले कि हड्डी टूट गई, होगी उसकी, औऱ वोँ वहीं खमोद पर्र बेहोश पड़ा हैं.
वहा सें हम् मार्केट गये, कुछ ज़रूरत कां समान लिया औऱ अपनी बाइक हमने सरहद कि ओर जाने वाले रास्ते पऱ दौड़ा दि,
शहर सें कोई 15 किमी बाहर् आकर हमने मार्ग केँ किनारे घनी झाड़ियों मे अपनी बाइक छिपा दि औऱ प्लॅनिंग केँ मुतविक पूरा इंतेज़ाम कर दिया.
उस संतरी केँ मुतविक वोँ लोग क़ैदियों कों लेकर 5 बजे तक जैल लौटते थें। अभि 4:45 होँ रहे थें.
कोई 5 मिनट औऱ प्रतीक्षा किया होगा कि एक् ट्रक केँ आने कि आवाज़ सुनाई दि,
यह एक् फ़ौजी ट्रक थां, मध्यम गति सें आताहुआ ट्रक जैसे हि हमारे सामने सें गुजरा, भड़ाक-2, कि आवाज़ केँ संगउस ट्रक केँ टाइयर फटगये.
अचानक हुए ब्रस्ट सें ड्राइवर कंट्रोल खो बैठा औऱ किसी शराबी कि तरह लहराता हुआ ट्रकआगे एक् पुलिया सें जा टकराया, औऱ नीचे सुखी पड़ी एक् बरसाती नदी केँ पत्थरीले रास्ते मे जा गिरा.
ट्रक मे कोई 8-10 पोलीस वाले थें औऱ 20-25 क़ैदी,
ट्रक केँ उलटने सें आगे बैठे 4 पोलीस वाले ड्राइवर समेत बुरीतरह ज़ख्मी हौ गये, कुछ लोग ट्रक केँ उछल्ने सें दूरजा गिरेकुछ ट्रक केँ नीचे फँसेरह गये.
हमने अपनी बाइक निकाली, स्टार्ट कि औऱ इसतरह सें वहा पहुँचे जैसे राहगीर कहीं सें आरहेहों, औऱ हादसे कों देखकर खड़े हौ गयेहों.
सबको अपनी-2जान बचाने कि पड़ी थि, कोई बुरीतरह ज़ख्मी थां, तोँ कोई दर्द सें कराहरहा थां…
मे एक् घायल पोलीस वाले केँ पास पहुंचा औऱ रेहाना कों इशारा किया कि वोँ कुछदूर छिटकगये लोगों मे अपने शौहर कों तलाशकरे.
मैने पोलीस वाले कों ट्रक केँ नीचे सें बाहर् खींचा औऱ बोला-यह सभी केसे होँ गय़ा.?
दर्द सें कराहते हुए वोँ बोला - पता नहीं, आकस्मात टाइयर ब्रस्ट हुए औऱ पुलिया सें टकराकर उलट गय़ा।
आप् औऱ लोगों कों निकालने कि कोशिश करो.
मे एक् क़ैदी कों निकाल कर बाहर् कर हि रहा थां कि रेहाना नें शीटी मारी, मैनेउसे बाइक कि तरफ चलने कां इशारा किया, उसको उसका शौहरमिल गय़ा थां.
मैनेउस पोलीस वाले सें कहा- देखो संतरी साब मे अकेला कुछ नहींकर सकता, जाकेशहर सें सहायता लेकरआता हूं, इतना कहकर मे निकल लिया.
रेहाना अपने शौहर कों कंधे पर्र डाले थोडा आगे जाकर खड़ी थि जिससे किसी औऱ कि नज़र मे नां आँ सके।
रेहाना कां शौहर ज्यादा घायल तौ नहीं थां, झटके सें दूर छिटकने कि वजह सें हल्की सि पत्थरों सें घिसटने कि चोटें थि.
मगर कमज़ोरी औऱ पूरेदिन केँ कमर तोड़ मेहनत कि वजह सें आधी बेहोसी कि हालत मे थां। उसकोबीच मे बिठाकर हम् वहा सें निकललिए.
हमेंपता नहीं औऱ कितने लोग भागने मे सफलहुए होंगे।
हमने बाइक अपनी मज़िल कि ओर दौड़ा दि औऱ 8 बजते-2घऱ पहुँच गये.
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Update 103
हमें देखते हि अमीना बी औऱ शाकीना कों डबल झटकेलगे, एक् तोँ हमें बाइक पऱ देखकर, दूसरा रहना केँ शौहर कों हमारे संगदेख कर.
उनको उसके मिलने कि खुशी भि थि, तौ वहीं उसकी हालतदेख करगम भि हुआ.जैल केँ जुल्मों सितम नें उसको तोड़कर रख दिया थां.
अमीना बी सारेकाम धाम छोड़कर अपनी बेटी केँ खाविंद कि तीमारदारी मे जुट गयीँ, …!
रेहाना औऱ उसकी अम्मी, रहमत कि देखभाल मे लगी थि, मे फ्रेश होकर बाहर् चारपाई पर्र आकरबैठ गय़ा,
कुछदेर बाद शाकीना मेरेलिए खानां लेकर आँ गई,, मे खानां खानेलगा, वोँ मेरेपास हि बैठकर मुझे खातेहुए देखरही थि.
मे उसकेमन कि बात अच्छे सें समझरहा थां, फिन भि मैने अपनीओर सें कोईपहल नहीं कि औऱ खाने मे लगारहा.
कुछदेर औऱ उससेजब नहींरहा गय़ा तौ वोँ बोल पड़ी- अशफ़ाक़ साब आप् मुझे क्यूं नहीं लेँ गये अपनेसंग.? औऱ यह बाइक किसकी हैं.?
मे - यह अपनी हि हैं, एक् स्थान छुपाकर रखी थि, वैसे हमेंयह अंदाज़ा नहीं थां कि यहकाम आज हि होँ जाएगा, हम् बसऐसे हि जानकारी निकालने हि गर्ज सें गये थें।
वैसे तुम् हमारे संगचल कर क्याँ करती.?
वोँ - मे भि आपकेकुछ काम आँ जाती। आख़िर वोँ मेरे भि तौ कोई लगते हें.
मे - अरे क्यूं नहीं.! तुम्हारे तोँ वोँ जीजासाब हें, औऱ साली तोँ आधी घरवाली होती हैं.!
वोँ - घरवाली तोँ मे पूरी कि पूरी आपकी हूं.! इतनाकह कर वोँ शरमा गयीँ,.!
मैने अपनेमन मे कहा…यह क्याँ बोलरही हैं यह…? मरवाएगी क्याँ.? फिन प्रत्यक्ष मे बात कों मोड़ते हुए बोला-
चलो अच्छा हुआ, रेहाना अबकम सें कम अपने शौहर केँ संगखुश रहेगी.!
वोँ – हां ! औऱ मे आपकेसंग ! हैं नां !
मे - अब तक नहीं थां मे तुम्हारे संग.?
वोँ – नहीं मेरा मतलबउस तरह सें, जैसेआपा औऱ जीजासाब रहते हें.!
मेराअब उसको समझाना ज़रूरी हौ गय़ा थां, वरनायह लड़कीपता नहीं औऱ क्याँ-2 मंसूबे बाँधले सो बोला-
देखो शाकीना, अभि तुम् यहसभी सोचने लायक नहीं होँ, तुम्हारी अम्मी नें भि तौ तुम्हारे बारे मे कुछ सोचा हि होगा.
वोँ - तौ आप् अम्मी सें बातकरो नाँ.! याँ मे करूँ…?
अरे दोस्त ! यह लड़की तोँ नहा-धो कर पीछे हि पड़ गयीँ,, अब केसे समझाऊ इसको कि मे क्यूं इससे विवाह नहींकर सकता.?फिन प्रत्यक्ष मे उसको बोला…
देखो शाकीना, तुम् मुझे लेकरकोई झूठीआस मत पालो, मे तुम्हारे संग निकाह नहींकर सकता,
क्यूंकी जिस मक़सद कों लेकर मे निकला हूं, वोँ मुश्किलों भरा हैं, उसमें तुम् मेरासंग नहींदे पाओगि.
वोँ – मे अब भि इतनी कमजोर दिखाई देती हूं आपको कि मुश्किलों कां सामना नाँ करपाउ.?
मुझेअब एक् सख़्त फ़ैसला लेना हि पड़ा औऱ शख्त लहजे मे बोला – कुछ भि हौ मे तुमसे निकाह नहींकर सकता तोँ नहींकर सकताअब इस मामले कों औऱ आगेमत बढ़ाना समझी.!
वोँ कुछदेर सकते जैसी हालत मे मुझे देखती रही औऱ फिन अपने मुँह पऱ दुपट्टा रखकर अपनी रुलाई कों रोकने कि कोशिश करती हुइ अंदरभाग गयीँ, …!
उसकोइस तरह सें भागते देख बाहर् आती हुईँ रेहाना उसेदेख कर चोंक गयीँ,, औऱ क्याँ हुआयह जानने केँ लिए मेरेपास आकरबैठ गई,.
रहना - यह शाकीना ऐसे अचानक उठकरभाग क्यूं गई,, कुछहुआ हैं क्याँ.?
मैनेउसे पूरीबात बताई तौ वोँ बोलीं - आप् क्याँ चाहते हें.?
मैने उसको क्लियर कर दिया कि मे कतई किसी केँ संग निकाह जैसा संबंध नहींरख सकता, तौ उसनेकहा - आप् फिकर नां करो मे उसे समझा दूँगी.
फिन मैने उसके शौहर केँ हालचाल लिए, उसनेकहा पहले सें बेहतर हैं, कमजोर अधिक हौ गये हें, दो-चार दिन मे ठीक होँ जाएँगे.
यहीसभी बातें करके उसने मेरे खाने केँ बर्तन लिए औऱ वोँ भि अंदर खानां खानेचली गई,। औऱ मे उसी चारपाई पऱ खुले आसमान केँ नीचे लंबा हौ गय़ा….
सारेदिन कि भाग दौड़ कि थकान केँ कारण लेटते हि मुझे नींद नें घेर लिया,
मगरजब रात घहराई औऱ चंदा मामाजी सर केँ उपर पहुँचे औऱ अपनी शीतलता उडेलने लगे, तौ ठंड केँ मारे मेराबदन नींद मे हि उकुडू हौ गय़ा मगर नींद थि कि पीछा छोड़ने कां नाम हि नहीं लें रही थि.
मगर ज़िम्मेदारियाँ नींद कों भि खाने लगती हें, उसका जीता जागता उदाहरण अमीना बी, पूराघऱ नींद मे थां औऱ वोँ अभि तक जागरही थि.
उन्होने मुझे बाहर् खुले मे बिना किसी कपड़े केँ सोताहुआ देखा तोँ एक् कंबल लेकरआई औऱ मेरेउपर डाल दिया,
मुझेकुछ-2 अहसास तौ हुआ क्योंकि ठंडकुछ कम हुईँ थि, मगर नींद नहीं टूटी.
वोँ आजफिन पहलेदिन कि तरह मेरे बालों मे उंगलियाँ फेररही थि। फिनकुछ देर मेरे सिरहाने बैठने केँ बादजब उसकोलगा कि मे गहरी नींद मे हूं, तोँ एक् हि कंबल मे मेरे बाजू मे हि घुस गयीँ,.
उसकेहाथ मेरेबदन पऱ फिरने लगे, अब मेरे जिस्म कों ठंड कां अहसास ख़तम हौ गय़ा थां, औऱ मे सीधा होकरलेट गय़ा.
वोँ कुछदेर ठहरी औऱ फिनलगा कि मे अभि भि सो हि रहा हूं, तौ फिन सें उसकेहाथ मेरेबदन कों सहलाने मे लगगये।
भले हि आप् नींद मे हि क्यूं नाँ होँ, लन्ड कि उत्तेजना हमेशा ऑन रहती हैं, उसकाहाथ धीरे-धीरे-2 मेरेआधे सोए लन्ड कि ओर बढ़ने लगा। औऱ फिनहाथ नें मेरे लन्ड कों ढक लिया,
लन्ड पकड़कर वोँ कुछदेर शांत रहने केँ बाद वोँ उसको सहलाने लगी.
मेरा पप्पू भि हाथ कि गर्मी पाकरसर उठाने लगा औऱ पाजामे केँ अंदर हि तंबू केँ डंडे कि तरह खड़ा होँ गय़ा।
मुझेयह सभीऐसा फील होँ रहा थां मानो ड्रीम्स मे होँ रहा हौ.
जब मेरा लन्ड पूरीतरह अकड़कर खड़ा होँ गय़ा तोँ अमीना बी नें मेरे चेहरे कि ओर देखा, वहा अभि भि अपर शांति केँ हि भाव दिखे उसको,
आसवस्त होकर उसने मेरे पाजामे औऱ अंडरवेर कों नीचे खिसका दिया औऱ लन्ड कों हाथ मे लेकर मुठियाने लगी.
कुछ देर मुठियाने केँ बाद वोँ कंबल मे मुँह डालके नीचे कों सरक्ति चली गयीँ, औऱ अपनीजीभ सें मेरे पप्पू कों चाटने लगी।
चाटते-2 उसनेउसे मुँह मे भर लिया औऱ किसी बर्फ कि टिकिया कि तरहउसे चूसने लगी.
अब मेरे दिमाग़ नें कहा, बेहन्चोद यह सपना नहींकोई सच मे लन्ड चूसरहा हैं, औऱ झट सें मेरीआँख खुल गयीँ,,
मगर वोँ कंबल केँ अंदर थि, सोकोई आइडिया नहीं बैठा औऱ मेरे मुँह सें निकल गय़ा…!
रेहाना ! यह तुम् क्याँ कररही होँ, जाओ अपने शौहर केँ पास.?
उसनेझट सें कंबल सें मुँह निकाला औऱ जैसे हि मेरी नज़रउस पऱ पड़ी.
मैने झेन्प्ते हुएकहा - ओह्ह। बीबी आप्.!
वोँ कुछदेर मुझे घुरती रहीफिन बोलि – हुउंम्म… तोँ तुम् औऱ रेहाना भि यहसभी कर चुके हौ.!
मे - हां ! वोँ बस हौ गय़ा.! अपने आप् हि.! अब मे उसकोमना नहींकर पाया तौ…बस…
वोँ – औऱ शाकीना…? वोँ तोँ नहीं हैं नां…./
मे - वोँ भि ! उसको हम् दोनो कां पतालग गय़ा तोँ वोँ भि कहनेलगी… पऱ सच मे बीबी मेरी इसमें कोईखता नहीं हैं.!
वोँ – मे समझ सकती हूं, असल मे हम् सब एक् हि कस्ति मे सवार हें, तोँ कोई नाँ कोई तौ सहारा चाहिए थां, एक् दूसरे कां संग पाने केँ लिए…
खैर मुझे इसमें कोई एतराज भि नहीं हैं, बसकभी कभार मुझे भि अपनेइस हथियार सें मस्त करते रहना, औऱ हस्कर फिन सें उसनेउसे मुँह मे लें लिया औऱ अपने अधूरे काम कों पूरा करने मे जुट गई,.
कुछ हि देर मे हम् दोनो हि नंगे होँ गये औऱ फिन बिस्तर बेचारी हाए तौबा करनेलगी अपने अंजर-पंजर बचाने केँ लिए.
एक् बार बुर चोदने केँ बाद मैने अमीना बी कि गान्ड सहलाते हुएकहा- बीबीकभी इसमें लिया हैं.?
वोँ - लिया तौ नहीं पऱ मन तोँ हैं, सुना हैं कि इसमें भि अलग हि मजाआता हैं, क्यूं तुम् करना चाहते होँ.?
मे - मन तोँ मेरा भि हैं, अगर आप् बोलो तोँ…!
वोँ - चलोठीक हैं, कर्लो, मगर थोडा आहिस्ता करना.ज़यादा परेशानी नां होँ.
मे - थोड़ी तोँ होगी। पर्र मजा भि आएगा., यह कहकर मैनेउसे करवट सें लिटा दिया औऱ उसकी नीचे वाली टाँग कों आगे कि तरफ करवा दि, उपरवाली टाँग कों हवा मे उठा लिया.
अब उसकी गान्ड कां छेद एक् दमखुल गय़ा थां, औऱ चाँद कि चाँदनी मे साफ-2चमक रहा थां।
मैनेढेर साराथूक उसकी गान्ड केँ छेद मे भर दिया औऱ थोडा अपने मूसल पऱ चुपडकर सुपाडा उसके खुलेहुए गान्ड केँ छल्ले पर्र टीकाया औऱ हल्के सें अपनीकमर कों झटका दिया.
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Update 104
मेरा सुपाडा उसकी गान्ड मे स्लिम हौ गय़ा, उसके मुँह सें हल्की सि कराह निकल गई,, मैने एक् हाथ सें उसके मोटे-2 चुचेमसल दिए, औऱ एक् औऱ झटकादे दिया अपनीकमर मे.
मेराआधे सें अधिक लन्ड उसकी गान्ड मे समा गय़ा.
उसकी कराहकुछ ज़यादा बढ़ गई,, मगरकोई विरोध नहीं किया।
कुछदेर उतने हि लन्ड कों उसकी गान्ड मे अंदर बाहर् किया, संग-संग उसकी चुचियों कों भि मसलता रहा,
फिन मैने एक् बार पूरा लन्ड बाहर् खींच लिया औऱ फिन सें उस पऱ ढेर साराथूक लगाया औऱ फिन एक् सुलेमानी धक्का लगा दिया.
अब मेरा पूरा 8” लन्ड उसकी पहलीबार चुदरही एक् अधेड़ गान्ड मे स्लिम होँ गय़ा, उसकेगले सें एक् दबी-दबी सि चीख निकल गई,,
मैने वहींरुक कर उसकी बुर मे दो उंगलियाँ पेल दि औऱ उन्हें अंदर बाहर् करनेलगा, अब उसकी बुर रस छोड़ने लगी थि औऱ उसकी गान्ड भि हिलने लगी.
मैने धक्के देना शुरुआत कर दिया, वोँ हाए-2 करके गान्ड हिलाने लगी, कुछ देरबाद मैने उसको घोड़ी बना दिया,
औऱ उसकी सवारी करके उसके बालों कों जकडकर जोँ दौड़ाया वोँ हाए-तौबा करनेलगी औऱ गान्ड मटकाते हुएखूब मस्त होकर चुदने लगी.
15 मिनट कि गान्ड चुदाई केँ बाद मैने अपनामाल उसकी गान्ड मे भर दिया औऱ उसकेबगल मे लेटकर हाँफने लगा.
कुछ देरबाद उसने अपने कपड़े पहने औऱ थोडा टाँगें चौड़ाती हुईँ अंदरचली गई,.
दूसरे दिन सुभह, मैने रहमतअली केँ हाल-चाल पुछे, उसको रेहाना नें मेरे बारे मे सभीकुछ बता दिया थां,
जब मे उससे मिला तोँ उसकी आँखों मे मेरेलिए कृताग्यता केँ भाव थें। उसने मेराहाथ अपनेहाथ मे लेकरकहा-
धन्यवाद साथी, आपकायह क़र्ज़ मेरेउपर उधाररहा, जीवन मे कभी भि मेरी ज़रूरत हौ बस हुकुम कर देना। अपनीजान कि बाज़ी लगा दूँगा.
मैनेकहा - धन्यवाद मेरे भइया, आपने इतनाकह दिया मेरेलिए इतना हि बहोत हैं, अब आप् जल्द सें दुरुस्त हौ जाओ, औऱ एक् पुराने फ़ौजी कि तरह स्लिम लगो।
वैसे आपकी बेगम भि अब किसी सें कम नहीं हैं, चाहो तौ आजमाकर देख लेनाकभी टाइम निकाल कर.
मेरीबात सुनकर वोँ रेहाना कि ओर देखने लगा, तौ वोँ मुँहफेर कर मुस्कराने लगी।
मैनेकहा- अरे भइया मे मज़ाक नहींकर रहा हूं, अबयह दोनो बहनें भि किसी कमॅंडो सें कम नहीं हैं.
इसीतरह कि बातें कुछदेर औऱ चलतीरही हमारे बीच, इस दौरान शाकीना हमारे बीच नहीं दिखाई दि।
जब मैने रेहाना सें इस बाबत पुछा तौ वोँ भि कुछ माकूल जबाब नहींदे पाई.
अमीना बी नें कहा कि पता नहीं वोँ जबसेउठी हैं, कुछ अन्मनि सि लगरही हैं,
मे समझ चुका थां, कि वोँ क्यूं रूठी हुई हैं, फिन सोचा एक् दोदिन मे उसकामूड ठीक होँ जाएगा वक़्त केँ संग,
कुछदेर बाद मे अपनेकाम कां बहाने करकेघऱ सें निकल गय़ा.
अपने गुप्त अड्डे पर्र आया औऱ शांति सें बैठकर ट्रांसमीटर सें पहले अपनेघऱ मोबाइल लगाया, बच्चों कि खैरखबर ली।
उसकेबाद बॉस कों कॉलआई लगा दि औऱ अब तक कां भाग उनकोदे दिया, फिन कुछआगे कि रण-नीति तय कि….!
ट्रांसमीटर ऑफ करके मैने वहीं च्छुपाया, औऱ अपनी बाइक लेकरचल दिया अपने मिसन कों मूव्मेंट देने…
मेरी बाइक जंगलो केँ बीच सें होती हुइ एक् पतली औऱ उबड़-खाबड़ सि नाम सिर्फ कि मार्ग पऱ दौड़ी चलीजा रही थि, चूँकि यह एक् स्पोर्ट बाइक थि तौ खराब रास्तों पऱ भि आसानी सें दौड़ सकती थि.
मेरा रुख़इस टाइम सरहद कि तरफचल रहे आतंकवादी कंपों कि तरफ थां, मे वहा कि पूरी जानकारी निकालने चल पड़ा थां,
सारी ज़रूरत कि चीज़ें मेरेबॅग मे मौजूद थि जौ इस वक़्त मेरेपीठ पऱ लटका हुया थां.
तकरीबन ढाई घंटे बाइक कुदाने केँ बाद मे उस इलाक़े मे पहुँच गय़ा, अबआगे मुझे बेहद सतर्क रहना थां,
अगर ग़लती सें भि किसी कि नज़र मे आँ गय़ा औऱ किसी कों शक़ होँ गय़ा कि मे इलाक़े कि रॅकीकर रहा हूं तोँ जान भि जा सकती थि.
मे एक् ऐसी स्थान खोजरहा थां जहाँ अपनी बाइक कों छुपाया जेयासके, औऱ वोँ स्थान मुझे जल्द हि मिल गयीँ,,
मार्ग सें हटकेघनी सि झाड़ियों केँ बीच मैनेउसे छुपा दिया.
मे पैदल हि जंगली रास्ते सें होताहुआ एक् कॅंप केँ नज़दीक तक पहुंचा औऱ उसके पिच्छले साइड सें एक् उँचे सें पेड़ पर्र चढ़ गय़ा।
पेड़ केँ पत्तों केँ बीच अपने कों छुपकर दूरबीन सें अंदर कां जायज़ा लिया.
ओ माइगॉड ! वहा पऱ खुले मैदान मे खुलेआम आतंकवादियों कि ट्रैनिंग होँ रही थि, ऐसालगा रहा थां कि कोई मिलिटरी ट्रेनिंग सेंटर हौ,
ज्यादा तर युवा, 18-24 साल केँ बीच, उनकोकुछ उम्र दराजलोग ट्रैनिंग करवारहे थें।
एक् दो पाकिस्तानी फौज कि यूनिफॉर्म मे भि खड़े उन्हें देखरहे थें, मतलब आइएसआई हि नहीं, पाकिस्तानी आर्मी भि इन केंपो कों सपोर्ट कररही थि.
इसीतरह दोदिन मे मैने 5-6 कंपों कां निरीक्षण किया, करीब-करीब सभी मे इसीतरह कि ट्रैनिंग चलरही थि,
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