My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 99
मैने हंसते हुएहाथ लंबा करकेउसे उठाकर उसे पकड़ा दिया, गोद मे उठाए हि उसकोबीच पानी मे लेँ आया.
मेरा लन्ड उसकी रसीले गोल-गोल गान्ड केँ नीचे हाहाकार मचाएहुए थां, वोँ अब इतना कड़क हौ गय़ा थां कि अगर मे शाकीना कों छोड़ भि देता तोँ वोँ उसकेउपर धीरे-धीरे रेस्ट कर सकती थि.
बीच पानी मे आकर एक् दूसरे सें चिपके हुए हि हमने एक्-दो गोते लगाए औऱ फिन किनारे पर्र आकर बाहर् निकले.
बिच्छावन केँ पासआकर मैनेउसे उस पर्र लिटा दिया औऱ उसकी एक् टाँग कों अपनी टाँगों केँ बीच लेकरउसे पुछा-आगे बढ़ना चाहोगी शाकीना.?
हमम्म। उसनेबस इतना हि जबाब दिया जौ मेरेलिए किसी वकालत नामे सें कम नहीं थां.
मैने अपना अंडरवेर निकाल दिया औऱ उससेकहा, मेरा लन्ड चुसोगी.?
उसने नां मे सर हिलाया, तौ मैनेकहा- तुम् तौ कहरही थि कि तुमने रात मुझे औऱ रेहाना कों यहसभी करतेहुए देखा थां, तौ वोँ नहीं देखा कि केसे तुम्हारी आपा इसकी सेवाकर रही थि.
हमम्म। देखा तोँ थां। पर्र मुझे लज्जा आती हैं यहसभी करने मे- उसनेकहा, तौ मे बोला-अब कैसी लज्जा,
देखो मैने तुम्हारी मुनिया कों मुँह सें प्रेम किया नां, अबचलो तुम् भि मेरे पप्पू कों प्रेम करो.तभी तौ वोँ तुम्हारी मुनिया कि अच्छे सें सेवा करेगा.
यह कहकर मैने अपना लन्ड उसके मुँह केँ सामने लहरा दिया।
उसने डरते-2उसे हाथ मे पकड़ा मानो किसीनाग कों पकड़रही होँ कि कहींडॅस नाँ लें.
कुछदेर वोँ उसेहाथ मे लेकर उलट-पलट कर देखती रही, फिन उसको मुट्ठी मे भरकर सहलाने लगी।
जब उसने उसका सुपाडा खोला तौ उस पर्र एक् प्री-कम कि बूँदचमक रही थि, वोँ उस बूँद कों गौर सें देखरही थि.
टेस्ट करोइसे शाकीना, लड़कियों केँ लिएयह अमृत हैं, चाट केँ देखो, अच्छा लगेगा तुम्हें.
धीरे धीरे करके वोँ अपना मुँह मेरे लन्ड कि तरफलाई, औऱ डरतेहुए उसने अपनीजीभ कि नोक सें उसेउठा लिया।
मेरी आँखें बंद हौ गई, औऱ लन्ड नें उसकेहाथ मे हि एक् ठुमका सां लगाया.
कैसालगा। जब मैने उससे पुछा तोँ वोँ बोलि- ठीक हि हैं, औऱ फिन धीरे-धीरे सें उसने मेरे लाल-लाल सुपाडे कों अपने पतले-2 होठों मे क़ैदकर लिया.
होठों मे लिए-2 हि जब उसने अपनीजीभ मेरे लन्ड केँ छेद पऱ रखकर घुमाई तोँ मेरी सिसकी निकल पड़ी…
सस्सिईईई…आअहह….शाकीना मेरी जानणन्न्…। चूसूऊ। ईससीए…आईसीए…हिी…शाबाश….आहह-आहह…औऱ अंदरलूऊ।
शाकीना मेराआधा लन्ड मुँह मे लेँ चुकी औऱ लोलीपोप कि तरह चूसने लगी, मेरा लन्ड उत्तेजना मे फटने जैसी स्थिति मे आँ चुका थां,
स्टील कि रोड कि तरह कड़क होँ गय़ा थां वोँ, जोँ अब किसी भि छोटी सें छोटी बुर कों भि फाड़ने केँ लिए रेडी थां.
मैने शाकीना कों रोक दिया औऱ उसे बिछावन पर्र लिटाकर उसकी जांघों केँ बीच आगया, उसकी पुसी कों एक् बार सहलाकर उसे चूमा औऱ दो-तीन बारजीभ सें चाटकर गीला किया.
अपनेहाथ पर्र ढेर साराथूक लेकर अपने मूसल पऱ चिपडा औऱ उसे उसके छोटे सें छेद पर्र रखकर हल्के सें दबा दिया.
गीली हौ चुकी बुर औऱ थूक सें सना लन्ड गॅप सें उसकी सन्करि गली मे स्लिम हौ गय़ा, मगर शाकीना कि एक् कराह अवश्य निकल गयीँ,.
मैने उसके चुचों कों सहलाया औऱ उसके होठों कों एक् बारचूम कर उसकी आँखों मे देखकर उसको इशारा किया औऱ एक् झटकामार दिया अपनीकमर मे.
फुच्च कि आवाज़ केँ संग उसकी झिल्ली फट गयीँ,, औऱ शाकीना कि एक् दर्दनाक चीख पूरे जंगल मे गूँज गयीँ,।
वोँ हान्फती हुइ सि बोलीं- प्लीज़ अशफ़ाक निकालो इसे। हाईए…आमम्मि…मारीी…आहह-आहह, … लगता हैं मेरीजान हि निकल जाएगी.
मैने उसकी चुचियाँ सहलाकर उसे शांत किया औऱ बोला-अरे मेरी बहादुर शेरनी आधे सें हि घबरा गई,।
बसअबसभी ठीक हैं, जौ होना थां सो होँ गय़ा, अब दर्द नहीं होगा।, कहकर उसके होठों कों चूसने लगा औऱ अपने हाथों सें उसकी चुचियों कों सहलाने लगा, मसल्ने लगा.
दो मिनट मे उसका दर्दकम पड़ गय़ा, वोँ अपनीकमर कों हिलाने लगी, मैनेआधे लन्ड कों हि धीरे-धीरे सें अंदर बाहर् किया, कुछ पलों मे उसका दर्द एक् दम छुमन्तर होँ गय़ा औऱ वोँ मादक कराह लेतेहुए नीचे सें कमर मटकाने लगी.
सही मौकादेख कर मैने एक् धक्का औऱ कसकरलगा दिया औऱ मेरा पूरा लन्ड उसकी बुर मे समा गय़ा।
एक् बारफिन वोँ चीख पड़ी, मगर यह ज्यादा लंबी नहीं थि.
मेरा 8” लंबा लन्ड जड़ तक उसकी बुर मे कस गय़ा थां, उसकी बच्चेदानी कां मुँह मेरे लन्ड केँ सुपाडे पऱ फील हौ रहा थां.
मेरे लन्ड कों उसकी बुर नें इसकदर पकड़रखा थां मानो वोँ उसे कहीं जाने हि नहीं देना चाहती होँ.
थोड़ी देररुक कर मैने अपने मूसल कों बाहर् खींचा, उसकी बुर कि अन्द्रुनि दीवार भि मानो खिचकर बाहर् आनां चाहती हौ उसकेसंग।
पूरा सुपाडे तक बाहर् लेकर मैनेफिन सें धीरे-धीरे-2 उसको अंदर किया तोँ वोँ धीरे-धीरे सें कराही.
आअहह…ससुउउ…उफफफ्फ़…धीरीए…
5-6 बार मैने बड़े इतमीनान सें लन्ड कों अंदर बाहर् किया, तोँ उसकी बुर नें थोड़ी सि दया दिखाकर मेरे लन्ड कों चलने लायक मार्ग बनाकर दिया.
अब वोँ थोडा आसानी सें अंदर बाहर् हौ रहा थां।
शाकीना कों भि अब दर्द कि वजायमजा आनां शुरुआत हौ रहा थां, औऱ वोँ भि नीचे सें अपनीकमर कों उचकाने लगी थि।
धीरे-धीरे-2 मैने धक्कों कि स्पीड बढ़ा दि, औऱ उसकी जांघों कों अपनी जांघों पर्र चढ़ा लिया जिससे उसकी गान्ड अधर हौ गई, औऱ मेरा लन्ड औऱ अंदर तक खुदाई करनेलगा.
लन्ड कों अपनी बच्चेदानी पऱ फील करके शाकीना भाव बिभोर हौ गई, औऱ मजा केँ मारे उसकी आँखें छलक पड़ी।
आअहह… हयईए… अल्ल्लाअहह…यह कैसामजा हैं…अब तक कहां थें मेरी जानणन्न्… हयईए…मईए.कहीन्न.मर हि नाँ जाउ खुशी मे.
वोँ चुदति जारही थि औऱ नाँ जाने क्याँ-2 बड़बड़ाती जारही थि। सच मे शाकीना बहोत गरम लड़की थि.
चोदते-2 हम् दोनो केँ जिस्म पसीने सें भीगगये। कोई किसी सें हार मानने कों सजधजकर नहीं थां, इसबीच वोँ नाँ जाने कितनी बारबही, मगरअंत तौ हरकाम कां होता हैं.
आख़िरकार हम् दोनो कि हि मंज़िल आँ हि गयीँ, औऱ एक् जोरदार हुंकार केँ संग मे उसकी बुर मे झड़ने लगा.
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Update 100
उधर शाकीना नें भि अपने पैरों कों लपेटकर मेरीकमर मे ताला सां लगा दिया औऱ अपनीकमर हवा मे लहराकर झड़ने लगी.
जब हम् दोनो कां जोश शांतहुआ तौ 5 मिनट तक ऐसे हि पड़ेरहे। मे उसकेउपर हि पसर गय़ा, जिसका उसेभान हि नहींहुआ.
फिन मे उसकेउपर सें उठा तोँ उसने अपनी आँखें खोली औऱ मेरेगाल कों चूमकर बोलि - धन्यवाद अशफ़ाक़ साब !!
मैने भि उसके गोरे रसीले गाल कों चूमा औऱ बोला – यह धन्यवाद किस वास्ते.? इसमें तोँ हम् दोनो कि खुशी बराबर कि थि नां.!
फिन मैनेउसे गोद मे उठाया औऱ झील केँ किनारे लें जाकर दोनो फ्रेश हुए औऱ आकरफिन सें बिछावन पऱ बैठगये एक् दूसरे केँ आलिंगन मे.
अभि तक हम् दोनो मदरजात नंगे हि थें, मैनेफिन सें उसे खींचकर अपनीगोद मे लिया औऱ उसके चुचक सहलाकर पुछा- तुम् खुश तोँ होँ नां मेरीजान ?
वोँ - बेहद ! क्याँ इतना भि मजाइसी जीवन मे थां, मुझेआज पतालगा.
फिन हम् दोनो केँ हाथफिन सें शरारत पऱ उतरआए, औऱ जल्द हि फिन एक् बार वासना कां तूफान उठाने लगा, जब दोनो बेहद गर्म हौ गये तौ मैने शाकीना कों अपनेउपर बिठा लिया.
वोँ धीरे-धीरे-2 मेरे लन्ड केँ उपर अपनी बुर रखकर बैठने लगी,
शुरुआत-शुरुआत मे थोड़ी परेशानी हुइ उसको, मगर जल्द हि उसने पूरा लन्ड निगल हि लिया औऱ कुछ हि देर मे मज़े लेकर उच्छल-2 कर मेरेउपर कूदने लगी.
10 मिनटबाद मैने उसको निहुरा दिया औऱ उसके पीछे सें घोड़ी बनाकर उसकी सवारी करनेलगा.
शाकीना कों आज जन्नत कि सैर करते-2साम हौ गई,, तब तक वोँ नां जाने कितनी बार पानी निकलवा चुकी थि.
आज वोँ अपने जीवन केँ परमसुख कों प्राप्त करके बड़ीखुश लगरही थि, मगर उसकीचाल मे थोड़ी लंगड़ाहट थि, जौ स्वाभाविक थां.
अंधेरा होने सें पहले हम् घऱ पहुँच गये।
रहना उसकीचाल देखकर कुछ-2समझ गयीँ, थि, पर्र वोँ भि अपनी छोटी बहन कों लेकरखुश थि.
जब उसने मुझसे पुछा तोँ मैने हामीभरी, औऱ उसको बोला- तुम्हें तोँ कोई ऐतराज नहीं हैं नां !
वोँ बोलि- नहीं वल्कि मे तौ खुश हूं कि मेरी प्यारी बहन भि अबइस सुखद एहसास सें रूबरू हौ गयीँ, हैं,
औऱ आजउसे एक् ऐसा हमसफ़र मिल गय़ा हैं, जोँ महिला कि कद्र करना जानता हैं…!
मेरी आपसे एक् इलतज़ा हैं अशफ़ाक़, मेरी मासूम बहन कां संगकभी मत छोड़ना, वरना वोँ बेचारी टूट जाएगी.
इस छोटी सि उमर मे इतने मुश्किलात कां सामना कर चुकी हैं वोँ कि अब शायद औऱ नां झेलसके…
रहना कि बातें मेरे जेहन मे किसी हथौड़े केँ वार कि तरहपड़ रही थि, मे सोचने लगा, कि अगरइन लोगों कों मेरी वास्तविकता पताचली तब क्याँ होगा…
मुझे अपनी सोचों केँ भंवर मे फँसेहुआ देखकर रहना नें मेरी चुटकी काटी औऱ हस्कर बोलीं… अबकिस सोच मे डूबे हें जनाब चलिए खानां रेडी हैं, खा लेते हें…
दूसरे दिन मे रहना कों संग लेकर उसके शौहर कि खोजखबर केँ लिए निकल पड़ा,
अब अपनेकुछ राजउन लोगों कों बताने मे कोई तकलीफ़ नहीं थि, सो अपने गुप्त अड्डे सें बाइकली औऱ चल पड़े मुज़फ़्फ़राबाद कि ओर.
रास्ते मे उसने पुछा- अशरफ ! आपने अपना समानयहा क्यूं छुपा केँ रखा हैं.?
तौ मैने उसको समझा दिया, कि यह तोँ तुम् लोगों केँ मिलने सें पहले कां हि एक् महफूज़ स्थान देखकर रख दिया थां। उसको भि मेरीबात सहीलगी.
यहशहर ज्यदा दूर नहीं थां, सो 2 घंटे मे हम् वहा पहुँच गये.
मैने रहना कों समझा दिया कि अगर ज़रूरत केँ हिसाब सें अपने हुश्न केँ जलवे दिखाने पड़े तौ हिचकना मत, वैसेकोई ज़रूरी नहीं कि वोँ सभी करना हि पड़े.
हम् जैल कां पतालगा करवहा तक पहुँच गये, यहा दूसरी जेलो जैसा कड़ा प्रबंध नहीं थां,
ड्यूटी पर्र तैनात दो संतरी गप्पें लगारहे थें, बौंडरी वॉल भि अधिक उँची नहीं थि.
यहीकोई 6 फीट उँची दीवार केँ उपर तारों कि बढ़ सें घिरायह जैल ज्यादा बड़ा भि नहीं थां.
मैने चारोओर कां निरीक्षण किया, पीछे कि साइड मे बहोत सारे पेड़ खड़े थें, औऱ थोडा सुनसान भि थां
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Update 101
ज़िन्दगी एक् सफ़र हैं बेगाना complete
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jay
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Re: ज़िन्दगी एक् सफ़र हैं बेगाना
Post 07 Apr 2018 17:50
एक् दूसरे कां हाथ पकड़े हम् टहलते हुएउधर कों निकल पड़े, किसी कां ध्यान भि अगर हमारी तरफजाए तौ यहीलगे कि कोई जोड़ा घूमरहा हैं.
पेड़ों केँ नीचे पहुँच कर मैने एक् घना औऱ बड़ा सां पेड़ चुना औऱ रहना कों आड़ मे खड़ा करके मे उस पेड़ पर्र चढ़ गय़ा.
उपर जाकर मैने अंदर कां जायज़ा लिया, अंदर लाइन सें बहोत सारे बेरक जैसेबने हुए थें, जोँ इस वक़्त ज़्यादातर खाली थें,
होँ सकता हैं इस वक्त कैदियों कों कहींकाम करने लेँ जाते होंगे औऱ साम तक लाते होंगे.
सुरक्षा कि दृष्टि सें कुछ ज्यादा चौकसी नज़र नहींआई, हौ सकता हैं, सुरक्षा गार्ड कैदियों केँ संग हि गये होंगे.
मे नीचे आँ गय़ा औऱ रहना कों अंदर कां माहौल बता दिया, जोँ फिलहाल हमारे ज्यदा कामआने वाला नहीं थां.
फिन मैने उसको एक् योजना समझाई, औऱ उस पऱ हमनेअमल भि शुरुआत कर दिया.
रहनाइस टाइम कालेरंग केँ सूट मे ग़ज़ब लगरही थि, अपने गाँव केँ ट्रडीशन सें हटके मैनेउसे थोडा टाइटसूट पहनने कों कहा थां जिसमें सें उसकेअंग भि दिखें, उपर सें वोँ यहा तक बुर्क़ा डाल केँ आई थि.
मैने उसको बुर्क़ा निकाल देने कों कहा, जोँ उसने फटाफट निकाल दिया औऱ एक् दुपट्टा सर पर्र डाल लिया, अब हम् झाड़ियों हि झाड़ियों मे गेट सें दूरीबना कर सामने कों जैल कि तरफ लौटे.
जैल केँ गेट सें कोई 100 मीटरदूर पर्र एक् छोटा सां गरमचाय नाश्ते कां टपरा थां, मे उस ढाबे पर्र बैठ गय़ा औऱ एक् गरमचाय कां ऑर्डर दे दिया।
रहना अकेली जैल केँ गेट कि तरफबढ़ गई,.
मे यहायह क्लियर कर देना चाहता हूं, कि अबयह दोनो बहनें पहले वाली नहीं थि, जौ किसी कि नज़रों कां भि सामना नाँ कर पायें, अब इनमें बहोत डेरिंग आँ चुकी थि.
वोँ गेट केँ एन सामने जाकेऐसे खड़ी होँ गयीँ, मानो किसी कां प्रतीक्षा कररही होँ, दुपट्टा सर पर्र अवश्य थां पर्र सीने पर्र नहीं, सिर्फ़ गले मे लपेटा हुया थां, टाइटसूट मे उसके क्लीवेज साफ-2 दिखाई देरहा थां.
वोँ दोनो संतरी उसको गंदी नज़र सें देखने लगे, जब उसने उनकीतरफ धान नहीं दिया औऱ वहीं वैसे हि खड़ीरही मानो किसी कां प्रतीक्षा कररही हौ,
बीच-2 मे वोँ अपनी कलाई पऱ बँधी घड़ी मे वक्त देखने कां भि नाटककर रही थि.
जब 15-20 मिनट गुजरगये, तौ अब वोँ संतरी मुँह सें कुछ गंदे-2 कॉमेंट्स जैसे आमतौर पर्र आवारा लड़के लड़कियों कों छेड़ते हें, पास करनेलगे औऱ उसको अपनीओर देखने केँ लिए उकसाने लगे,
एक् दोबार उसने उनकीओर देखा भि तोँ वोँ उसे इशारे सें अपनीओर बुलाने लगे.
वोँ वहींजमी रही, जब कुछदेर वोँ उनकेपास नहीं गई,, तोँ उनमें सें एक् संतरी उठके उसकेपास आया औऱ बोला- ख़ातून किसी कां प्रतीक्षा हौ रहा हैं.
रहना नें उसेउपर सें नीचे तक ऐसे घूरा जैसेउसे उसकायह पुछ्ना नागवार गुज़रा होँ औऱ वोलि- आपसे मतलब.!
संतरी- यहा बिनाकाम केँ खड़े होनामना हैं.!
रहना-हां मे यहा अपनी मित्र कां प्रतीक्षा कररही हूं.
संतरी – साथी नहींआता हैं तब तक हमारे संग हि बैठलो, अल्लाह शपथ जन्नत कि सैर करवा देंगे.
रहना - शक्ल देखी हैं आईने मे कभी, जाओ जाकर अपनाकाम करो.
वोँ संतरी तैश मे आँ गय़ा औऱ उसने रहना कि कलाई पकड़ली, औऱ गेट कि ओर खींचते हुए बोला –
साली बड़े नखरे दिखारही हैं, सीधीतरह आजा वरना ज़ोर ज़बरदस्ती भि आती हैं हमें.
रहना नें ज़ोर लगाकर उसकेहाथ कों झटककर अपनाहाथ छुड़ा लिया, औऱ एक् झन्नाटेदार थप्पड़ उसकेकान पर्र रसीदकर दिया औऱ वहा सें तेज-2 कदमों सें एक् ओर कों बढ़ गई,.
वोँ अपनागाल सहलाता हि रह गय़ा, औऱ देखते-हि देखते वोँ उसकी आँखों सें ओझल होँ गयीँ,.
मे तब तक अपनीगरम चाय ख़तमकर चुका थां, दुकान वाले कों गरमचाय केँ पैसे देकरउस संतरी कि ओरबढ़ गय़ा, जोँ अभि भि वहीं खड़ा अपनागाल सहलारहा थां।
पास जाकर मे उससे बोला- क्यूं संतरी साबमजा आया ? आग हैं वोँ ऐसे हि हाथडाल दिया तौ जल जाओगे.
वोँ संतरी तौ जला भूना बैठा हि थां, सो मेरेउपर भड़क गय़ा, जब मैने उसको इशारा किया, कि अगर चाहो तौ मे आपकाकाम बनवा सकता हूं,
तौ वोँ लपककर बोला- क्याँ सच मे तुम् उसे दिलवा सकते हौ, साली बड़ी नमकीन माल हैं.
मे - देखलो हरमाल कि कुछ कीमत होती हैं.!
वोँ – क्याँ कीमत हैं इसकी।
मे - पहले वादाकरो कीमत चुका पाओगे याँ नहीं.
वोँ – अरे भइया ! अपनी तनख़्वाह तोँ तुम् जानते हि हौ, ज्यादा पैसे नहीं हैं हमारे पास देने कों.
मे - पैसे कों माँगता हैं, बस एक् छोटा सां काम करना होगा हमारा.
वोँ – क्याँ करना होगा, उसके बदले मे तुम्हारा कोई भि काम करूँगा.
मे - सोचलो.!,
वोँ बोला-सोच लिया, तोँ मैनेकहा कि चलोफिन मेरेसंग,
वोँ बोला- कहां.?
मैनेकहा- उसी केँ पास.
उसने अपने मित्र केँ पास जाकरकुछ बातचीत कि औऱ फिनचल पड़ा वोँ मेरेसंग अपनी वासना कि आग बुझाने.
रास्ते मे मैने उसको पुछा- तुमने अपने मित्र कों क्याँ बताया.? उसने पुछा नहीं कहां जारहे होँ.?
वोँ - मैने उसकोबोल दिया हैं, पर्सनल काम सें जारहा हूं, 1 घंटे मे आता हूं.
बड़े चालू होँ तुम् तोँ। ऐसे हि बात करतेहुए मे उसे एक् अच्छे सें रेस्टोरेंट मे लें आया, उसनेकहा यहा क्यूं आए हें हम् लोग, वोँ कहां हैं.?
मे – इतमीनान रखो साथी ! वोँ भि मिल जाएगी, पहले मेराकाम तोँ करदो.! औऱ एक् वेटर कों बुलाकर दोचाइ केँ लिएबोल दिया.
वोँ - क्याँ काम हैं तुम्हारा.? जल्द बताओ.!
मैनेकहा - देखो मे सीधीबात पऱ आता हूं। इस महिला कां शौहर तुम्हारी इसजैल मे बंद हैं,
अबअगर तुम् इसको उससे मिलवा सको तौ वोँ तुम्हारे संगआने कों सजधजकर हौ सकती हैं.
वोँ - मगरइस वक्त तौ कोई क़ैदी यहा नहीं हें, उनसभी कों तोँ इस वक्तकाम पर्र लेकरगये हें.
मे - क़ैदियों कों बाहर् काम पऱ ? किसके.? औऱ कब लौटेंगे.?
वोँ – आजकलइसी दहशतगर्दो सें मिलकर दुश्मन मुल्क मे प्रॉक्सी वॉर छेड़ने कि तैयारी मे हैं, तौ उनकेलिए ट्रैनिंग कॅंप्स बनबाए जारहे हें, अबयह फ्रीफंड केँ क़ैदी काम मे लगादिए हें उन कंपों मे.
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