My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
UPDATE 96
मे अंदर गय़ा औऱ अपनेबॅग सें निकाल करउन दोनो कों एक्-एक् सुकून अपने हाथों सें पहनादि.
अमीना बी कि आँखों मे खुशी केँ आँसू आँ गये।
मैनेकहा - क्यूं बीबी, देखा अपनी बेटियों कों.! अबयहआम लड़कियाँ नहीं रहीं, शेरनिया हौ गयीँ, हें,
अबइन दोनो कों 10 सें भि ज्यादा लोग आँ जायें तोँ भि यहहार मानने वाली नहीं हें.
अमीना बी नें मुझे अपनी बेटियों कि परवाह नां करतेहुए अपने मोटे-2 चुचों सें चिप्टा लिया औऱ मेरा माथाचूम कर बोलि-
तुम् सच मे कोई फरिस्ता हि होँ बेटा, जोँ हम् जैसे कुरबत मे जीरहे इंसानो मे जान फूँकने आँ गये.
अरे बीबी, मे अगर फरिस्ता होता तौ यह दोनो बिल्लियाँ मुझेहरा पाती क्याँ.? इसबात पऱ हम् सभी हँसने लगे।
रेहाना नें आँखों-2 मे हि मुझे थॅंक्स कहा, मैने भि अपनी पलकें झपकाकर उसे समझा दिया.
जब उनकी अम्मी अंदर जाकेकाम मे लग गयीँ, तब मैनेउन दोनो कों कहा- देखोयह प्रॅक्टीस बंद नहीं होनी चाहिए,
अब मे इसकेसंग-2 तुम् दोनो कों कुछ शहरी लड़कियों कि तहज़ीब औऱ नाज़ नखरे सिखाउन्गा, जिससे ज़रूरत पड़ने पऱ तुम् शहरियों केँ बहकाबे मे नां आँ सको.
उन दोनो नें सहमति मे गर्दन हिला दि, फिनजब शाकीना भि अंदरचली गई, तौ मेरेगाल कों चूमकर रेहाना बोलि- आप् जानबूझकर हारे थें हैं नां.?
मे - हां ! ताकि तुम् लोग औऱ हिम्मत सें आगे बढ़ो.
रहना – नहीं वोँ बात नहीं हैं ! आपको हमेंयह सुकून जौ देनी थि ! मे अबकुछ-2 आपको समझने लगी हूं.
मे - अच्छा ! यह तोँ औऱ भि अच्छी बात हैं। तौ बताओअब मे आगे क्याँ करने वाला हूं.?
रहना – मे क्याँ जानू.?
मे - क्यूं अभि तोँ तुम् कहरही थि, तुम् मुझे समझने लगी हौ, तौ बताओअब मे क्याँ करने वाला हूं.?
वोँ कुछदेर सोचती रही, फिन नां मे गर्दन हिला दि, मैने उसका चेहरा आपने हाथों मे लिया औऱ उसकेहोठ चूमलिए औऱ बोला-
इतनी सि बात नहींसमझ पाई औऱ दावाकर रही थि कि मुझे समझने लगी होँ.
वोँ खिल-खिलाकर हंस पड़ी औऱ बोलि- मे तौ सच मे कुछ औऱ हि सोचने लगी थि.!
मे - क्याँ.?
वोँ- खाट वाली फाइट…!यह कहकर वोँ हसनेलगी.
मे - तुम्हारी ख़्वाहिश हैं.? उसनेसर झुकाकर हामीभरी, तोँ मैनेउसे बाहों मे भर केँ फिन सें उसेचूम लिया औऱ कहा-ओके फिनठीक हैं आजरात कों होँ हि जाए…! वोँ हां बोलकर अंदरचली गई,.
शाकीना यह नज़ारा अंदर सें आड़ लेकरदेख रही थि, यह हम् दोनो कों हि पता नहीं थां.
उसरात अमीना बी केँ सोते हि, रेहाना मुझे अपने कमरे मे लेँ गई,, मैने रेहाना कों 2-3 बार जमकर चोदा,
हमने ड्रीम्स मे भि नहीं सोचा थां, कि हमारी इसकाम क्रीड़ा कां लुफ्त हमारे अलावा भि कोईउठा रहा हैं…
शाकीना नें शुरुआत सें लेकर लास्ट हमारे सोने तक कां चुदाई प्रोग्राम देखा, औऱ अपनेहाथ सें अपनी बुर सहला-सहला करउसे शांत करने कि कोशिश करतीरही…….!
दूसरे दिन एक् ज़रूरी काम कां बोलकर मे निकल गय़ा,
अपने ठिकाने सें बाइकली औऱ चल दिया स्यालकोट कि तरफ, आख़िर रेहाना सें कियाहुआ वादा जौ निभाना थां.
पाकिस्तान केँ रोड। ! खुदा बचाएऐसे रास्तों सें, जैसे तैसे करके पहुँच हि गय़ा जैल तक.
मेनगेट पऱ दो संतरी पहरे पर्र थें, उनकोकुछ लेँ-दे कर पटाया औऱ पता किया कि कोई रहमतअली नाम कां क़ैदी इसजैल मे हैं क्याँ.?
तौ उन्होने बताया कि उसको तोँ 6 महीने पहले हि मुज़फ़्फ़राबाद कि लोकलजैल मे शिफ्ट कर दिया हैं, उसकाकोई संगीन जुर्म साबित नहींहुआ थां तोँ यहा कि सेंट्रल जैल सें निकाल कर लोकलजैल मे शिफ्ट कर दिया हैं.
मे - यह लोकलजैल मे क्याँ होता हैं.?
संतरी - अरे भइया ! लोकलजैल कां मतलब वोँ क़ैदी जिन पऱ कोर्ट मे कोई अपराध सिद्ध नां होँ, औऱ हुकूमत उन्हें जैल मे हि सडाना चाहती होँ तौ उन्हें ऐसी जेलों मे रखा जाता हैं, जहाँ उनसे फ्री मे लेबर कां काम करवाया जासके.
मैनेमन हि मनकहा- कि सालायह कैसा मुल्क हैं, जहाँ व्यक्ति कि कोई कीमत हि नहीं हैं। फिन प्रत्यक्ष मे उसको धन्यवाद बोलकर वहा सें चल पड़ा.
लौटते-2 साम हौ चुकी थि, बाइक अपनी स्थान रखी औऱ साइकल लेकेघऱ पहुंचा तब तक अंधेरा छानेलगा थां.
मैने रेहाना कों अपनेपास बिठाकर उसको सारीबात बताई, तौ वोँ तोँ झटका हि खा गयीँ,।
फिन मैने उसको समझाया, कि देखोयह तोँ शायद हमारे लिए अच्छा हि हुआ हैं, लोकलजैल मे इतनी सुरक्षा भि नहीं होगी, मे जल्द हि तहकीकात करता हूं, तुम् चिंता मतकरो अब शायद तुम् जल्द हि अपने शौहर सें मिल पाओगि.
मेरी बातें सुनकर उसकी आँखें छलकआई औऱ बोलीं - हमारा आपकाकोई रिस्ता नहीं हैं, फिन भि आप् हमारे लिए कितना कुछकर रहे हैं.!
मे - क्याँ कहाकोई रिस्ता नहीं हैं.? कुछ दिनो पहले तक मे एक् आवारा कुत्ते कि तरह तन्हा यूँही जंगल-2 भटकता रहता थां,
आज मेरेपास एक् परिवार हैं जौ मेरी अपनों सें भि अधिक परवाह करता हैं। आइन्दा ऐसामत केहना.!
फिनआगे मुद्दे पऱ आतेहुए बोला - मानलो अगरजैल सें हम् लोग उसको निकाल भि लाए तौ तुम् दोनो रहोगे कहां.?
क्योंकि हुकूमत उसकी तलाशहर स्थान करेगी, खासतौर सें उसके औऱ तुम्हारे घऱ पऱ तौ अवश्य हि.
वोँ सोच मे पड़ गई,, जब काफ़ी देर तक उसकोकुछ नहीं सूझा तौ मैने उसको बोला- तुम् फिकरमत करो, इंशा अल्लाह कोई नाँ कोई मार्ग अवश्य निकल आएगा।
अभि हम् यह बातें कर हि रहे थें उसकी अम्मी भि वहा आँ गई.
अमीना - क्याँ बातें हौ रही हें उस्ताद औऱ शागिर्द केँ बीच.?
मे - बीबी ! हम् रेहाना केँ शौहर केँ बारे मे बातकर रहे थें.
अमीना - उसको तौ उन मर्दुदो नें स्यालकोट कि जैल मे डालरखा हैं सड़ने कों, किसी सें मिलने भि नहीं देते.
मे - बीबी ! वोँ अबवहा नहीं हैं, मे आज हि पता लगाके आया हूं, उसको मुज़फ़्फ़राबाद कि लोकलजैल मे रखा हैं आजकल.!
अमीना - क्याँ.? मगर क्यूं.?
मे - वोँ बाद मे बताउन्गा, पहले दिक्कत यह हैं, कि अगर हम् उसको किसीतरह निकल लाते हें तोँ यह दोनो रहेंगे कहां ?
अमीना - वोँ सभीबाद कि बात हैं, पहलेयह बताओ कि बाहर् निकालोगे केसे.?
मे - वोँ मे वहा जाकेपता लगाकर हि बता सकता हूं, कि वोँ किस हालत मे हैं.?
अमीना - स्थान तौ हैं, असलम सें बात करनी पड़ेगी, शहर मे कहीं भि छिपकर रह सकते हें।
इस्लामाबाद बड़ाशहर हैं, खाने कमाने कां भि साधन हौ सकता हैं, औऱ कहीं भि गुमनामी कि जीवनबसर कर सकते हें.
इस्लामाबाद कां नाम सुनते हि मेरे दिमाग़ मे एक् बड़ा प्लान पनपने लगा औऱ मैने रेहाना कों कहा, अब तुम् सारी चिंता-फिकर मेरेउपर छोड़दो.
वोँ – आप् पऱ भि यकीन नहीं करूँगी तौ औऱ हैं हि कॉन हमारा अब.!
कुछ देरबाद, रहना साइकल लेके ज़रूरत केँ कुछ समान लेने कबीले केँ पास वाले छोटे सें बाज़ार कों चली गई,,
उसकी अम्मी घऱ केँ कामों मे लगी थि, मे बाहर् पेड़ केँ नीचे चारपाई डालकर लेटाहुआ थां.
चारपाई पऱ लेटाहुआ अपनी आँखों पर्र बाजूरखे मे अपनी सोचों मे डूबाहुआ थां,
मेरे दिमाग़ मे आगे कि प्लॅनिंग चलरही थि, कि तभी मुझेलगा कि कोई औऱ भि हैं मेरे आस-पास.
मैने आखें खोली तौ देखा शाकीना मेरेबगल मे खड़ी थि.
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UPDATE 97
मैने चारपाई पर्र साइड कों खिसककर स्थान बनाई औऱ बोला-अरे छोटी शेरनी कबआई ? आओ बैठो.
वोँ मेरेपास नीचे कों पेर लटकाकर बैठ गई,, मैनेकहा- औऱ सूनाओ आज मेरेपास केसेआई। कोईकाम थां.?
वोँ - काम तौ आप् आपा केँ हि करते होँ, मेरी तौ यहाकोई परवाह हि नहीं करता, छोटी हूं नां इसलिये.!
मे उठकर सिरहाने कि ओरबैठ गय़ा औऱ बोला - अरे ! यह क्याँ कहरही होँ तुम्.?
आजइसघऱ मे, मे हूं हि तुम्हारी वजह सें, औऱ तुम् कहरही होँ कि मे तुम्हारी कोई परवाह नहीं करता…!
कहो क्याँ करूँ मे तुम्हारे लिए.?
वोँ नज़र झुकाए हि बोलीं - आप् आपा सें कितना प्रेम करते हें, औऱ मेरीओर नज़रउठा केँ भि नहीं देखते, क्याँ मे इतनी बुरी दिखती हूं.?
मे चोंक गय़ा औऱ बोला – आपा सें प्रेम करते हें मतलब.?फिन उसकी ठोडी केँ नीचेहाथ लगाकर अपनीओर उसका चेहरा करके बोला –
तुमसे यह किसने कहा कि तुम् बदसूरत होँ, सच कहूँ तौ तुमसे ज्यादा कमसिन औऱ हसीन लड़की मैनेआज तक नहीं देखी.
वोँ अभि भि नज़रें नहीं मिलारही थि, फिन भि झेन्प्ते हुए बोलि – मैनेआपा औऱ आप् दोनो कों प्रेम करतेहुए देखा हैं, कलसाम कों औऱ रात कों भि.
मे – क्याँ.? क्याँ देखा हैं तुमने.?
वोँ - सभीकुछ.! औऱ वोँ सभी देखते हुए, नाँ जाने क्यूं मुझे अपनी बड़ी बहन सें जलन सि हौ रही थि.
मैने उसके चेहरे कों अपने दोनो हाथों मे लें लिया औऱ उसकी आँखों मे झाँकते हुए पुछा- तोँ अब तुम् क्याँ चाहती होँ.? जोँ तुम् कहोगी मे वही करूँगा.
वोँ ज़मीन पर्र नज़रें गढ़ाए, झेंपती हुइ बोलि - मुझे भि मेरे हिस्से कां प्रेम चाहिए,
मैने उसके चेहरे कों उपर करतेहुए कहा – हिस्सा ऐसे माँगा जाता हैं.? नज़रें झुकाकर…
मुझ पऱ तुम्हारा पहलाहक़ हैं, औऱ हक़ आँखों मे आँखे डालकर लिया जाता हैं, नां कि झुकाकर…
औऱ रहीबात तुम्हारे हिस्से कि, तौ बिल्कुल मिलेगा क्यूं नहीं मिलेगा मेरी गुड़िया कों उसके हिस्से कां प्रेम,
मे तौ इसलिये पहल नहींकर रहा थां कि कहीं तुम् ग़लत नां समझो मेरे प्रेम कों, वरना तुम् तोँ मुझे पहलेदिन सें हि भा गयीँ, थि.
यह कहकर मैनेउसे खींचकर अपने सीने सें लगा लिया, उसके कठोर 32 केँ उभार मेरे सीने मे गढ़ने लगे.
उसने अपना चेहरा मेरे चौड़े कंधे मे छुपाकर कहा-सच.!
मैने उसके अन्छुए पतले-2 सुर्ख जूसीलवो कों चूम लिया औऱ कहा-मुच।
शाकीना ! मेरीजान, तुम् तौ मेरेदिल कां वोँ नगीना होँ, जिससे हर किसी कों नहीं दिखाया जाता, छुपाकर रखना होता हैं.
मेरीबात सुनकर वोँ मेरे सीने सें लिपट गयीँ,, अपनी मरमरी बाहों कां घेरा मेरीपीठ पऱ कस लिया.
कुछ देर मैनेउसे ऐसे हि लिपटे रहने दिया, फिन उसके कंधे पकड़कर अलग किया औऱ उसकी आँखों मे देखते हुएकहा-
मगर पहलीबार प्रेम मे कुछ कुर्बनिया देनी होती हैं, उसकेलिए रेडी हौ.
वोँ - हां ! मुझेपता हैं, पहलीबार तोँ सबको हि देनी पड़ती हें, तौ मे क्यूं नहीं, फिन आप् जैसा समझदार इंसान जब प्रेम करे तौ मुझे डरने कि क्याँ ज़रूरत.!
उसकी सहमति जान मैनेउसे खींचकर अपनीगोद मे बिठा लिया औऱ उसकेगाल पऱ अपनी खुरदूरी दाढ़ी रगड़ते हुए उसके कश्मीरी सेबों कों सहलाकर कहा-
तोँ फिनआज चलो जानवरों कों लेकर वहीं झरने केँ पास, हम् वहीं प्रेम करेंगे.
मेरीबात सें वोँ इतनीखुश होँ गयीँ,, कि मेरे चेहरे पऱ उसने अनगिनत चुंबन जड़ डाले…,
फिन मेरीगोद सें उठकर किसी चंचल हिरनी कि तरह कुलाँचे भरती हुईँ घऱ केँ अंदरचली गई, अपनीआमी कों बोलने कि वोँ जानवरों कों चराने जारही हैं…
वोँ जल्द सें जल्दउस स्वर्गीय मजा कों पाने कि खुशी मे, जिसकी झलक उसने अपनी बहन कों लेतेहुए देखी थि,
औऱ जिसकी झलक सिर्फ सें हि अपनी मुनिया भिगोली थि, उसने जानवरों कों बाडे सें निकाला औऱ हांक दिया झरने वाले मैदान कि तरफ…!
यह एक् हरा-भरा घस्स कां मैदान थां, जिसके एक् तरफ उँचे-2घने पेड़ थें, फिन थोडा ढलानलिए हुए वोँ मैदान जिसके दूसरी ओर एक् दमसाफ नीले पानी कि झील जैसी थि, जिसका पानी एक् झरने सें निकलकर जमा होँ रहा थां.
जहाँ पानीजमा हौ रहा थां उसकी गहराई कुछ ज्यादा नहीं थि सीधे खड़े होने पर्र मेरे सीने तक आता,
अतिरिक्त पानी, एक् पतली सि पत्थरीली नहर सें अंदर जंगल मे सें होताहुआ नीचे केँ इलाक़ों मे जारहा थां.
हमने जानवरों कों उस मैदान मे छोड़ दियाघास खाने, औऱ एक् पेड़ केँ नीचे एक् बिछवन डालकर उसकेउपर बैठगये.
मेराउस झील औऱ झरने केँ अंदर पानी मे घुसकर मजा लेने कां मन थां, सो मैने शाकीना सें कहा –
मेरा नहाने कां मन हैं, क्याँ तुम् मेरेसंग नहाना चाहोगी ?
वोँ – मे तौ अपने कपड़े भि नहींलाई, तौ केसेनहा सकती हूं ?
मे – अरे दोस्त ! कपड़े पहनकर कॉन नहाता हैं.? ब्रा-पेंटी तौ पहनी हि होगी नाँ.! वहीपहन करनहा लो, अंदर पानी मे कॉन देखता हैं.!
वोँ – नहीं मुझेहया आएगी.!
मे – मेरे अलावा यहा औऱ कॉन हैं जिससे हया आएगी.?
वोँ फिन भि नहीं मानी, मैने अपने कपड़े निकाले औऱ सिर्फ अंडरवेर मे मैने पानी मे छलान्ग लगा दि, औऱ तैरने लगा.
शाकीना मुझे नहाते हुएदेख रही थि, झील केँ ठंडे-2 पानी मे मुझे बड़ामजा आँ रहा थां, मैने उसको इशारा किया पानी मे आने केँ लिए.
जब वोँ नहींआई तोँ मैने झरने कां रुख़ किया औऱ तैरते-2 झरने केँ पास पहुँच गय़ा, जहाँ पत्थरों सें पानी टकराकर सफेदरूई केँ माफिक लगरहा थां.
जब मैने पीछेमूड कर शाकीना क़ीओर देखा तोँ वोँ मुझेउस बिछवन केँ पास नहीं दिखी।
कुछदेर वहीं एक् पत्थर पर्र बैठ मे उसका प्रतीक्षा करतारहा, वोँ फिन भि नहीं दिखी, तोँ मेरेमन मे शंका केँ बादल उठनेलगे.
मैने वहीं बैठे-2 उसको आवाज़ दि, मगरकोई जबाब नाँ पाकर मे लौटने लगा.
अभि मे बीच मे हि पहुंचा थां कि मेरेपास हि पानी केँ अंदर वोँ दिखाई दि, किसी सुनहरी जलपरी सि, एक् छोटी सि ब्रा औऱ पेंटी मे।
पानीसाफ होने केँ कारण वोँ मुझेसाफ-2 दिखरही थि
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Update 98
मेरेमन मे शरारत सूझी, औऱ मैने भि पानी केँ अंदर डुबकी लगा दि औऱ उसे अंदर हि पकड़ लिया, वोँ मेरी बाहों मे छटपटाई औऱ छूटकर पानी केँ उपर आँ गई.
मे- तुमने तोँ मुझेडरा हि दिया, इतनीदेर पानी मे केसेरह ली.?
वोँ- अरे ! यह तौ हमारे लिए रोज़ कि बात हैं.
फिन मैनेउसे पानी केँ अंदर अपनी बाहों मे भर लिया औऱ उसके होंठचूम करकहा- जब मैनेकहा तबमना क्यूं किया.?
वोँ- आपके सामने कपड़े निकालने मे लज्जा आँ रही थि.
मे- अब भि तौ पानी मे सभीदिख रहा हैं मुझे…! तौ उसने लज्जा सें मेरे सीने मे अपना मुँह छिपा लिया.
मैने उसके चुतड़ों पर्र अपनी हथेलिया कस दि औऱ उसे अपनीगोद मे उठा लिया, वोँ भि मेरीकमर मे अपनी टाँगें लपेटकर मुझसे चिपक गयीँ,.
मे उसे अपने सें चिपकाए हुए झरने कि ओरबढ़ गय़ा, कुछ कदमों मे हि हम् दोनो झरने केँ सफेद पानी कि धार कां मजा लेँ रहे थें.
मे एक् ऐसे पत्थर पऱ बैठ गय़ा जहाँ झरने कां पानी डाइरेक्ट तोँ नहींगिर रहा थां, मगर उसका पानी उच्छल-2 करवहा तक पहुँच रहा थां,
उसको अपनीगोद मे बिठाए मैने उसकी गर्दन पर्र किस किया.
उसके मुँह सें एक् मादक सिसकी निकल गयीँ, औऱ अपनी गर्दन दूसरी ओर मोड़कर मेरे गर्दन केँ पीछे सें निकाल कर मेरे बालों कों अपनी मुट्ठी मे कस लिया।
मेरे दोनोहाथ उसके छोटे -2 सेबों पर्र थें औऱ उनको ब्रा केँ उपर सें हि धीरे-धीरे-2 सहलारहा थां.
मज़े केँ आलम मे उसकी आँखें बंद थि, औऱ मुँह सें हल्की हल्की सिसकी निकलरही थि।
जब मैने उसके ब्रा केँ हुक खोलने चाहे तोँ उसने मेरेहाथ पकड़लिए औऱ नां मे गर्दन हिला दि.
मैने उसके हाथों कों चूम लिया औऱ जीभ सें उसकीपीठ चाटने लगा। उसने अपनेहाथ मेरे हाथों सें हटालिए, तोँ मैने उसकी ब्रा केँ हुकखोल दिए औऱ उसको अपनेगले मे लपेट लिया.
अब उसकी गोरी-चिटी छोटी-2गोल-2 चुचियाँ जौ कसरत करने कि वजह सें औऱ ज्यादा शेप मे आँ गई, थि, मेरे सामने नंगी थि,
कितनी हि देरउस मनमोहक चुचियों कों मे देखता हि रहा, फिन धीरे-धीरे सें जीभलगा कर उसके कंचे जैसे निपल कों चाट लिया.
मजा केँ मारे उसकी आअहह… निकल गई, औऱ सिसकने लगी…
आआहह….सस्सिईईई….उफफफ्फ़… आमम्मिईीई……मत करो…कुछ होता हैं….
मे- क्याँ होता हैं मेरी जानणन्न्…! कहो नाँ.!
वोँ - आअहह…पता नहीं… पर्र बहोत अच्छा लगरहा हैं…!
अब मैने उसके एक् निपल कों अपने अंगूठे औऱ उंगली केँ बीच पकड़कर हल्के सें मसल दिया।
उसकी सिसकी औऱ बढ़ गई, औऱ मज़े मे आकर वोँ अपनीगोल-2 गान्ड मेरे लन्ड पऱ पटकने लगी, जोँ अब एक् दम कड़क हौ गय़ा थां, औऱ अंडरवेर कों फाड़ डालने कि कोशिश कररहा थां.
मेरे लन्ड कां एहसास अपनी गान्ड पऱ फील करके वोँ उसे रगड़ने लगी.
मैनेअब उसको अपने बाएँ बाजू पर्र लिटा लिया, उसके होठों कों चूसने लगा औऱ एक् हाथ सें उसको चुचियों कों सहलाता, कभी -2 उत्तेजनावस मसल भि रहा थां.
उसका पूरा जिस्म कामोत्तेजना मे थिरकरहा थां, होठ चुसते-2 अब मेराहाथ उसके गोरे सें पेट सें होताहुआ जैसे हि उसकी बुर केँ उपर पहुंचा, उसने अपनी टांगे भींचली, औऱ मेरेहाथ कों वहींलॉक कर दिया.
मैनेदबे हाथ सें अपनी उंगली कों हरकत दि औऱ पेंटी केँ पतले सें कपड़े केँ उपर सें हि उंगली उसकी बुर केँ उपर घुमाई, उसकी टांगे खुल गयीँ, औऱ मैने उसकी छोटी सि बुर कों अपने पंजे मे भर लिया.
उसनेकिस तोड़ दिया औऱ लंबी-2 साँसें लेनेलगी, उसकी आँखें लाल हौ चुकी थि, आँखों मे वासना केँ लाल डोरेसाफ साफ दिखाई देनेलगे.
अब मैने उसकोउस पत्थर पर्र बिठा दिया औऱ स्वयं उसके नीचे उसके सामने बैठ गय़ा.
उसकेकमर केँ दोनो साइड सें उंगली फँसाकर उसकी पेंटी कों निकालना चाहा तोँ उसने मेरी हेल्प करतेहुए अपनी गान्ड कों हवा मे लहरा दिया।
मैने पेंटी उतारकर एक् ओररख दि, उसकी छोटे-2 बालों वाली बुर अब मेरे सामने थि.
पतले-2 होठों कों भींचे हुए उसकी पतली सि एक् दरार जैसी बुर कों देखकर मेरा लन्ड बाबला हुआजा रहा थां, मैनेउसे अपनेहाथ सें सहलाकर थोड़ी देर शांत बैठने कों कहा औऱ उसकी टाँगों कों सहलाकर उसकी थोड़ी-2 मांसल होतीजा रही जांघों कों चौड़ा किया.
मैनेझुक कर अपना मुँह उसकी बुर पऱ रखा औऱ एक् उद्घाटन चुंबन लिया।
वोँ अपनी हथेलियों कों पीछे कि ओर टिकाकर पीछे कि तरफ झुकी हुईँ थि, सर उसकाहवा मे थां, औऱ आँखें आने वाले मज़े केँ प्रतीक्षा मे बंद थि.
एक् बार मैने अपनीजीभ पूरी चौड़ाई मे उसकी छोटी सि बुर पऱ गान्ड केँ छेद केँ पास सें शुरुआत करकेउपर तक फिराई.
सस्सिईईई….आअहह……आअम्म्म्मिईीई…। ऐसी हि कुछ आवाज़ उसके मुँह सें निकली औऱ गान्ड पत्थर सें उपर उचका दि.
फिन उसकी पुट्टियों कों खोलकर जौ एक् दम एक् दूसरे सें जुड़ी हुईँ थि, अपनीजीभ कि नोक सें अंदर कि साइड कुरेदा,
उसकी गान्ड फिन सें हवा मे लहराई। जब अपना अंगूठा मुँह मे लेकर उसकी बुर केँ होठों पर्र रगड़ा, तौ उसकी आहह-आहह। सस्सिईईईईईईईईईईईईईईई……फुट पड़ी.
उसकी बुर केँ उपरीभाग पर्र उसका क्लोरिट मुँह सें चूमने लगा, जिसे मैनेजीभ सें कुरेद कर औऱ बाहर् कों किया औऱ फिन अपने होठों मे दबाकर चूसने लगा, संग हि संग उसके छोटे सें छेद कों अपने अंगूठे सें सहला दिया.
मज़े केँ मारे शाकीना कां बुराहाल होँ रहा थां, कभी वोँ अपनी गान्ड कों हिलाती तोँ कभी अपनी टाँगों कों मेरे कंधे पऱ पटकती.
5-7 मिनट मे हि उसकी बुर नें पानी छोड़ दिया औऱ यह शायद उसकी बुर कां पहला ओरगैस्म थां जौ किसी मर्द केँ द्वारा हुआ हौ.
बहोत ज़ोर सें झड़ी वोँ, औऱ झड़ते वक़्त दोहरी होकर मेरेसर सें लिपट गयीँ,.
जब वोँ शांत हुईँ तौ मैने उसके होठों पर्र एक् चुम्मन लिया औऱ उसको पुछा- कैसालगा शाकीना.?
वोँ लज्जा सें पानी पानी होँ गयीँ, औऱ मेरे कंधे मे सररखकर मुस्कराने लगी….!
मैनेउसे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ पानी केँ अंदरचल दिया, वोँ अपनेहाथ पांव फड़फड़ाकर चिल्लाई- अरे मेरी पेंटी रह गई, ….!
मैने शरारत सें कहा - छोड़ो उसको क्याँ करोगी उसका.?
वोँ – नहीं प्लीज़ लेनेदो नाँ, मेरेपास वैसे भि कोई एक्सट्रा नहीं हैं…
मैने उसकी गान्ड केँ छेद कों उंगली सें सहलाकर कहा – आज केँ बाद पेंटी पहनना बंदकर दो…
वोँ मेरीगोद मे किसी बच्चे कि तरहउपर नीचे झूलती हुईँ बोलीं – लेनेदो नाँ प्लीज़,
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