My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
UPDATE 93
वोँ नज़रें झुकाए बैठीरही मे उसकीओर देखता रहाफिन पहल करतेहुए मैनेकहा- तुम्हारे शौहरइस वक़्त कहां हें.?
मेरीबात सुनकर उसने झटके सें मेरीतरफ देखा, औऱ बोलीं - स्यालकोट कि जैल मे हें.!
मे – कभी मिलने नहीं जाती हौ उनसे.?
वोँ - गये थें एक् दोबार, मगर वोँ मर्दुद मिलने हि नहीं देते.!
मे - तुम्हें अपने शौहर कि याद तोँ आती होगी.!
मेरीबात सुनकर उसकी आँखें भरआई, औऱ नाँ चाहते हुए उसकी रुलाई फुट पड़ी औऱ रोतेहुए बोलि –
बहोत आती हैं, वोँ बहोत अच्छे औऱ नेक इंसान थें, मुझे बहोत प्रेम करते थें.
मैनेउसे चुप कराते हुएउसे अपने कंधे सें सटा लिया औऱ उसकीपीठ पर्र प्रेम सें सहलाते हुएकहा- क्याँ अब भि तुम् उनका प्रतीक्षा कररही हौ.?
वोँ - साँस हें तब तक आस तोँ रहेगी। मगरअब लगता हैं कि हम् कभी नहींमिल पाएँगे, औऱ सूबकती हुइ मेरे सीने सें लगकर रोनेलगी।
उसकी बाहें मेरे इर्द-गिर्द कसनेलगी थि.
मे - चुप हौ जाओ रेहाना ! खुदा नें चाहा तौ तुम् दोनो अवश्य एक् होगे, औऱ मे उसकीपीठ कों सहलाते हुए उसकीकमर तक हाथ लें आया.
वोँ मेरेसंग औऱ चिपक गयीँ, औऱ मेरे चेहरे कि ओरदेख कर बोलीं – खुदाअगर यही चाहता होता तोँ ऐसा होता हि क्यूं.?
अपनीजान बचाना कोई गुनाह तौ नहीं थां, तौ क्यूं हुकूमत नें उन्हें जैल मे डाला.
खुदाहर सच्चे इंसान कां इम्तेहान लेता हैं, मैनेउसे अपने सें औऱ सटाते हुएकहा -
अब उसकी कड़क, मगर रसीले चुचियाँ मेरे सीने मे दबनेलगी थि,
मेरा एक् हाथ उसकीकमर केँ निचले हिस्से कों सहलारहा थां औऱ दूसरा उसकी जांघों पर्र.
फिन मैने उसकीचिन कों अपनेहाथ सें उपरउठा कर उसकीझील सि नीली आँखों मे झाँकते हुएकहा- अगर मे यह कहूँ कि तुम् दोनो अवश्य एक् होगे तौ.?
वोँ - क्याँ यह मुमकिन हौ सकता हैं.?
मे - तुम्हें यकीन हैं मुझ पर्र…?
पता नहीं उसको क्याँ हुआ.कि उसने मेरे होठों कों चूम लिया औऱ बोलीं- सच कहूँ तौ कल कि घटना केँ बाद सें हि नाँ जाने क्यूं ऐसा लगनेलगा हैं, कि खुदा नें हमारी कुरबत दूर करने केँ लिए हि इस फरिस्ते कों हमारे पास भेजा हैं।
मे – नहीं ! मे कोई फरिस्ता-वरिस्ता नहीं हूं, औऱ नाँ हि मैनेकभी इन बातों पऱ यकीन किया हैं,
मगरहां यह हौ सकता हैं कि शायद खुदा कि यही मेर्जी रही होँ कि मे तुम्हारी जैसीनेक औऱ हसीन महिला केँ कुछकाम आँ सकूँ.
वोँ मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोलीं- क्याँ मे सुंदर हूं.?
मे - बहोत.! यह कहकर मैने उसके पतले मुलायम होठों कों चूम लिया।
वोँ भि यही चाहती थि, सो मेरासंग चुंबन सें देनेलगी।
कुछ हि देर मे चुंबन चुसाई मे बदल गय़ा, मेरा एक् हाथ उसकी एक् चुचि पर्र चला गय़ा औऱ उसे सहलाने लगा।
अभि औऱ कुछआगे हौ पता कि तभी उसकी अम्मी नें आवाज़ दि, खानां रेडी हैं खालो.
हम् दोनोअलग हुए वासना कि खुमारी उसकी आँखों मे उतरआई थि, अनमने मन सें हम् उठकर खानां खाने केँ लिए अंदरचले गये….!
आधी रात कों मुझेलगा कि कोई मेरेपास बैठा हैं, मैने आँखें खोलकर देखा तोँ रेहाना मेरेगाल पर्र हाथरख कर सहलारही रही थि,
मुझे जागते देख उसने मुझेचुप रहने कां इशारा किया औऱ मेराहाथ पकड़कर उठने कां इशारा किया.
वोँ मुझे अपने कमरे मे लेँ आई, औऱ गेटबंद करके मुझेपलग पऱ बिठा दिया औऱ स्वयं मेरीगोद मे बैठ गयीँ,,
मेराहाथ अपनेहाथ मे लेकर बोलि- अशफ़ाक़ साब ! आप् किसतरह मेरे शौहर कों जैल सें निकालेंगे.?
मैने अपने दूसरे हाथ कों उसकीकमर मे लपेटते हुएकहा - अभि मे इस बाबतकुछ नहींबता सकता, मुझेउस जैल कां मुआयना करना होगातभी कुछकह पाउन्गा।
वैसे तुम्हारे शौहर कां नाम क्याँ हैं.?
रहमतअली। उसने बताया, फिन मैने उसकेमाल पुआ जैसेगाल पऱ किस करतेहुए पुछा- उनकीकोई तस्वीर हैं तुम्हारे पास.?
हां हैं तोँ सही, हमारे निकाह कि एक् तस्वीर हैं मेरेपास उसनेकहा.
मे - वोँ मुझेदे देना, पऱ मे कोईयह वादा नहींकर सकता कि यहकाम कब तक होगा.!मगर होगा अवश्य यह मेरा वादा हैं तुमसे, चाहे इसकेलिए मेरीजान हि क्यूं नां चलीजाए…!
उसने जल्दी मेरे मुँह पऱ अपनाहाथ रख दिया। औऱ दबदबाई आँखों केँ संग बोलि – इस कीमत पर्र कतई नहीं.!
चाहे हम् दुबारा नां मिलें मगर खुदा केँ लिएऐसा मत करना, आपको खुदा कां वास्ता.
मैने उसके होठों कों अपने मुँह मे लेकरचूस लिए औऱ उसकी कठोर चुचियों कों मसल्ते हुएकहा- यह नौबत नहीं आएगी रेहाना तुम् बेफ़िक्रा रहो।
उसकी आहह-आहह। निकल गयीँ, औऱ सिसकते हुए बोलि - सीईइ। आहह-आहह… वादाकरो मुझसे… कि आप् ऐसाकोई कदम नहीं उठाएँगे जिसमें आपकीजान जोखिम कां ख़तरा हौ।
मैने उसके कुर्ता कों उतारकर एक् ओरडाल दिया औऱ उसके बिना ब्रा केँ गुलाबी रंगतलिए अनारों कों चूमते हुएकहा- वादा मेरीजान ! आहह-आहह… सच मे तुम् कितनी हसीन होँ, मगर तुम्हें भि मेरासंग देना होगा.!
आहह-आहह। सीयी…हहूउकुम्म्म। करो मेरे दिलवर.! आपकाहर हुकुम सर आँखों पर्र.!
उसकी गर्दन कों चूमते हुए मैनेकहा… तौ फिन तुम्हें अपने आपकोहर ख़तरे कां मुकाबला करने केँ लिए अपने आपको रेडी करना होगा.
आहह-आहह… उफ़फ्फ़। यह केसे होगा.??
मे रेडी करूँगा तुम्हें, औऱ उसको अपनी बाहों मे लिटाकर उसकेपेट कों चूम लिया.!
तुम्हारा यह नाज़ुक शरीर एक् महीने मे हि ऐसा होँ जाएगा कि तुम् किसी भि मर्द कां सामना बड़ी आसानी सें कर सकोगी.
ससिईइ…उउउहह… आअहह… क्याँ सच मे ऐसा हौ सकता हैं.?
अब मैने उसको पलंग पर्र लिटा दिया औऱ उसकी नाभि केँ चारों ओर अपनी उंगली कों घुमाते हुएकहा- बिल्कुल ऐसा हि होगा.!
मेरेऐसा करने सें उसका पतला सां पेट थरथराने लगा…,
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UPDATE 94
उसकी नसीली आँखों मे एक् अजीब सि चाहततैर रही थि, मानोकह रही हौ कि आँ जाओ औऱ समाजाओ मुझमें अब औऱ सब्र नहीं होता.
उसकीझील सि आँखों केँ पलकों पऱ चुंबन लेकर मे बोला- तुम्हारा अंग-2 कितना हसीन हैं रेहाना, क्याँ इसे अपनी खुशी सें मुझे सौंपना चाहोगी.?
आहह-आहह… मेरे दिलवर… यह तोँ कब्से आप् मे सामने कों बेकरार हैं, अब औऱ नाँ तरसाओ, समेटलो इसे अपनी बाहों मे.!
फिन मैनेदेर नहीं कि औऱ उसके हसीन शरीर कों उपर सें नीचे तक चूमता चला गय़ा,
जब मैने उसकी बुर कों उसकी सलवार केँ उपर सें चूमा तौ वोँ बैठकर दोहरी होँ गयीँ, औऱ मुझे खींचकर मेरे होठों पऱ टूट पड़ी.
होठ चूसने केँ संग-2 मैने उसकी सलवार भि उतार दि, बिना पेंटी कि उसकी छोटे-2 बालों वाली गुलाबी बुर देखकर मेरा लन्ड ठुमके लगाने लगा.
मैने अपने कपड़े भि उतारदिए औऱ केवल अंडरवेर मे उसके दोनो टॅंगो केँ बीचआकर जम गय़ा.
वोँ मेरी चौड़ी छातीदेख कर एक् बारफिन उठकरबैठ गई, औऱ कसकर मेरे सीने सें लिपट गई,। उसका उतावला पनदेख कर मेरे चेहरे पऱ स्माइल आँ गई,.
उसकी रसीली बुर कों हाथ सें सहलाकर उसकी जांघों केँ नीचेहाथ लेँ जाकर उसकीकमर कों उपर उठाया औऱ अपनीजीभ कों जैसे हि उसकी बुर केँ उपर फिराया, उसकी सिसकी फुट पड़ी, नां चाहते हुए उसके मुँह सें एक् आहह-आहह। निकल गयीँ, …!
आअहह…आशफ़ाक़…। ससिईइ…उफफफफ्फ़…प्लस्सस्स…उऊहह…हाईए…चतूऊ.ईससीई…
उसकी पवरोटी जैसी बुर कों अपनी मुट्ठी मे लेकर भींच दिया… उसकीकमर हवा मे लहराउठी औऱ उसने पानी छोड़ दिया.
हाँफती हुईँ वोँ मेरे सीने सें एक् बारफिन लिपट गयीँ, औऱ मेरे लन्ड कों मुट्ठी मे लेकर ज़ोर सें मसल दिया…!
आअहह… क्याँ करती हौ… नाराज़ हौ जाएगा ईए…!
होनेदो मना लूँगी उस्सीए…!
मे - केसे…, तोँ उसने फ़ौरन मेरा अंडरवेर उतार फेंका औऱ मेरे लन्ड कों मुँह मे भरके चूसने लगी, औऱ मेरी आँखों मे देखकर इशारा किया मानोकह रही हौ ऐसे…!
कुछ देर लन्ड चूसने सें वोँ इतना कड़क होँ गय़ा मानोकोई स्टील कि रोड होँ, अब वोँ किसी कठोर सें कठोर चीज़ मे भि पार होँ सकता थां.
मैने रेहाना कों लिटा दिया औऱ उसकी बुर पर्र थूकलगा कर अपने मूसल कों एक् बारहाथ सें सहलाया औऱ उसकी बुर केँ छेद पऱ रखकर हल्का सां पुश किया.
रस सें लबरेज़ बुर मेरे लन्ड केँ सुपाडे कों गडप्प सें निगल गई,। रेहाना कि आँखें मज़े सें बंद होँ गयीँ,, मैनेकस कर एक् धक्का लगाया.
उसके मुँह सें एक् कराह निकल पड़ी, मेरातीन चौथाई लन्ड उसकी डेढ़साल सें भूखी बुर मे समा गय़ा। उसको दर्द होनेलगा औऱ कराहकर बोलीं-
प्लीज़ अशफ़ाक़ ! धीरीए… आअहह… दर्द होँ रहा हैं। थोडा आरामसीई….
मैने उसकेहोठ चूमते हुए एक् औऱ धक्का दे दिया औऱ मेरा पूरा 8” लंबा लन्ड उसकी सन्करि बुर मे स्लिम होँ गय़ा,
मज़े औऱ दर्द केँ मिले जुलेभाव उसके चेहरे पर्र साफ-साफ दिखाई देरहे थें.
मैने उसकी चुचियों कों मसलना शुरुआत कर दिया, उसकी मादक सिसकियाँ कमरे मे गूंजने लगीमगर धीमे सें, ताकि बाजू वालेरूम मे सोई हुईँ उसकी अम्मी औऱ छोटी बहन नां सुनपाए…
जैसे-2 मेरे धक्के स्पीड पकड़ते जारहे थें, उसकी सिसकियों कि मात्रा भि बढ़ती जारही थि,
अब वोँ भि नीचे सें अपनीकमर उचका-2कर पूरे मज़े लेकरचुद रही थि।
थोड़ी देर मे हि उसकी रसभरी गागरछलक गई,, दो मिनट उसकी बुर मे लन्ड डाले रहने केँ बाद मैने उसको अपनेउपर बिठा लिया,
उसके गोल-मटोल चुचियाँ मेरी नज़रों केँ सामने थि उनको अपने दोनो हाथों मे जोँ एक् दममाप कि थि लेकर मीजने लगा.
उसकीकमर उपर-नीचे होँ रही थि, वोँ पूरी लंबाई केँ शॉट लें रही थि, पूरे लन्ड कों सुपाडे तक बाहर् लाती, फिन पूरा लें जाती…
कुछ देर तक यहचला, मगर उसकीयह कोशिश मेरे लौडूराम कों रास नहींआई, उसे तौ कुछ बिस्फोटक चाहिए थां,
सो उसको घोड़ी बनाकर मैने लगाम अपनेहाथ मे लेँ ली औऱ जौ एक् बार सरपट दौड़ाया,
वोँ घोड़ी कि तरह हिन-हिनाने लगी, औऱ अपनी गान्ड कों मेरे मूसल पऱ पटक-2कर चुदने लगी.
मेरी जांघे थप्प-2 उसकेगोल सुडौल गान्ड पऱ थपकी देतेहुए मधुरताल देरही थि.
आधे घंटे कि धुआँधार चुदाई केँ बाद हम् दोनो हि भरभरा कर जौ बरसे, मानो बाढ़ हि आँ गई थि,
उसकी जांघों सें बहताहुआ रस बूँद-बूँद करकेबैड कों गीला करनेलगा, पूरेदो मिनट तक झड़ने केँ बाद वोँ पेट केँ बलबैड पऱ पसर गयीँ,, औऱ मे उसकेउपर हि पड़ गय़ा.
10 मिनट केँ बाद मैने अपना मूसल उसकी बुर सें बाहर् खींचा, एक् पुच कि आवाज़ आई औऱ मे उसकीबगल मे लेट गय़ा,
उसकीगोल-2 खूबसूरत सि गान्ड कों सहलाते हुए मैनेउसे पुछा- रहना ! मजाआया…?
वोँ - बहोत.! इतनामजा तोँ मेरे शौहर केँ संग भि कभी नहींआया थां, सच मे। आप् पता नहीं क्याँ होँ.?
फिन उसने मुझे पुछा – आपको कैसालगा मेरेसंग…?
मैने उसकी चुचि सहलाकर कहा – तुम् वाकाई मे एक् शानदार औऱ हसीन महिला हौ, तुम्हारे संग चुदाई मे मुझे बहोत मजाआया…
कुछदेर ऐसी हि बातें करतेरहे औऱ एक् दूसरे कों गर्म करतेरहे,
आहिस्ता एक् बारफिन वासना कि खुमारी चढ़ने लगी, रहनाइस लम्हे कों खुलके जी लेना चाहती थि,
सो अपने बीते दिनों केँ गमों कों पलंग केँ नीचे दबाकर मेरेसंग एक् बारफिन खुलकर चुदाई कां मजा लूटने लगी….
उसकोदो बार पूरीतरह संतुष्ट करने केँ बाद मे अपने बिस्तेर पर्र आकरसो गय़ा…!
अगलीदिन मैने अमीना बी सें कहा – बीबी मे चाहता हूं, आपकी दोनो बेटियों कों इस काबिल बनाया जाए कि वोँ अपनी हिफ़ाज़त स्वयं कर सकें.
अमीना- यह क्याँ बात हुई भला.?यह केसे मुमकिन हैं कि कोई लड़की इतनी ताक़तवर होँ जाए कि वोँ मर्दों सें मुकाबला करसके.?
मे - रज़िया सुल्तान कां नाम सुना हैं आपने.?
अमीना - हां सुना तोँ हैं, पऱ वोँ तौ एक् सल्तनत कि मल्लिका थि.
मे - तौ क्याँ हुआ.? थि तौ लड़की हि नां.! फिन केसे उसने मर्दों पऱ हुकूमत कि ? औऱ भि बहोत सें नाम हें हिंदुओं केँ इतिहास मे जहाँ औरतों नें वोँ कामकिए, जिन्हें कोई मर्दकभी करने कि सोच भि नहीं पाया.
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Update 95
एक् बार पक्का इरादा होँ तोँ सभीकुछ मुमकिन हैं, वोँ सभी आप् मुझ पर्र छोड़दो, कि केसे क्याँ करना हैं, आप् सिर्फ़ हांकहो, फिन देखोयह आपकी दोनो बेटियाँ 10-10 पर्र भारी नाँ पड़ें तोँ कहना.!
शाकीना - सच अशफ़ाक़ साबयह मुमकिन हैं.?
मे - हां मेरी छुइ-मुई गुड़िया बिल्कुल मुमकिन हैं.! क्यूं बीबी क्याँ कहती हौ.?
अमीना - मे क्याँ बोलूं बेटा, इनसे हि पुछो क्याँ यह सजधजकर हें इसकेलिए.?
मे - क्यूं रहना, शाकीना क्याँ कहती हौ.?
रहना - क्याँ करना होगा हमें.?
मे - ज्यादा कुछ नहीं जैसे मे तालीम दूँगा, वैसे हि करना हैं तुम्हें, औऱ हांआज सें दूध औऱ घी कि मात्रा खाने मे बढ़ानी होगी.
अमीना – खुदा केँ फ़ज़ल सें इस चीज़ कि तौ अपनेयहा कोईकमी नहीं हैं, मगरयह मर्जानी खाती नहीं हें.!
मे - आज सें खायेंगी.! क्यूं खाओगी नाँ तुम् दोनो।
दोनो नें हां मे मुन्डी हिला दि.
तोँ फिनअब देखो मे तुम्हें क्याँ सें क्याँ बनाता हूं.?
अब फटाफट घऱ केँ काम मे बीबी कां हाथ बँटाओ, उन्हें ख़तम करके अपने जानवरों कों चराने किसीऐसी स्थान लें चलेंगे जहाँआम तौर पऱ कोईआता जाता नां हौ.
हम् क्याँ कररहे हें, किसी कों कानो-कान खबर नहीं होनी चाहिए ठीक हैं.
वोँ दोनोयह सभी करने केँ लिए एक्शिटेड लग रहीं थि, सो जल्द-2घऱ केँ काम निपटा कर खानां वाना ख़ाके जानवरों कों लेकर हम् चलदिए एक् पहाड़ी मैदान कि ओर, जिधरकोई कभी-कभार हि निकलता थां.
वहा पहुँच कर जानवरों कों छोड़ दियाघास खाने, मे कुछदेर इधर-उधर वहा केँ प्राकृतिक सौंदर्य कों देखता रहा.
यह एक् झरने केँ पास एक् छोटा सां हरा-भरा सां मैदान थां, ज्यादा समतल तोँ नहीं पऱ ठीक थां, जानवर अपनेघास खाने मे लगे थें.
कुछदेर मे धूप भि थोड़ी कम हौ गयीँ,, औऱ खानां खाएहुए भि काफ़ी वक्त होँ गय़ा तोँ मे उन दोनो कों लेकर एक्सर्साइज़ करने मे लग गय़ा.
दो घंटे मैने उनका पूरा जिस्म थका दिया, संग मे अपना भि।
पहला-2दिन शौक-2 मे वोँ मेरेसंग-2 जैसे मे करता गय़ा, करती गई,। साम कों घऱ लौटते-2 उनके जिस्म थककरचूर होँ गये थें.
घऱआकर जम केँ खानां खाया, फिन सोने सें पहले केँ एक्-एक् लीटर गरमा-गर्म दूधघी औऱ अंडा(एग) डालकर हम् तीनों नें पिया औऱ सोगये.
दूसरे दिनउन दोनो कां उठने कां मन हि नहीं हौ रहा थां, पूरा जिस्म दर्द सें टूटरहा थां,
मैने ज़बरदस्ती उनको गुदगुदाके उठाया, शाकीना कुछ ज़यादा नखरेकर रही थि.
पेट केँ बाल उल्टी लेटी थि वोँ, उसकी 32 कि गोल-मटोल गान्ड उपर कों उठी हुइ बड़ी मनमोहक लगरही थि।
पहले मैने उसकी गान्ड कि चोटी पर्र हाथ कां दबाब देकर हिलाया, वोँ कुन्मुना कररह गयीँ,।
फिन मैने उसकेबगल मे ठीक उसकी चुचियों केँ पास अपनी उंगलियों सें गुदगूदाया.
तौ उसने अपने बाजुओं कों भींचकर मेरेहाथ कों दबा दिया, जब औऱ थोडा आगे बढ़ते हुएजब उसकी चुचियों कों साइड सें सहलाया तोँ वोँ झट सें सीधी होँ गई, औऱ मुस्करा करउठ बैठी.
फ्रेश होकर वोँ दोनोघऱ केँ कामों मे लग गई,.
दोपहर ढलते – ढलतेफिन जानवरों कों लेकर हम् वहीं पहुँचे, औऱ लगगये एक्सर्साइज़ करने, शुरुआत-2 मे तोँ वोँ आनाकानी कररही थि, मगर मैने अपने तरीक़े सें उनको शुरुआत करा दिया.
कुछ हि देर मे उनकाबदन खुल गय़ा औऱ वोँ मनलगा कर एक्सर्साइज़ करनेलगी.
इसीतरह मैने उनको 10 दिन लगातार जमकर एक्सर्साइज़ करवाई, जब उनकाबदन एक्सर्साइज़ केँ मुतविक ढल गय़ा तब मैने उनको योगा औऱ ध्यान केँ टिप्स दिए। जिससे अपने कों किसी भि पोज़िशन मे कोन्स्टरेट करने मे आसानी होँ सके.
संग-2 फाइटिंग भि करवाना भि शुरुआत कर दिया। 15 दिनों मे हि उन दोनो कों इसमें इंटेरेस्ट आनेलगा, औऱ वोँ अपने सें हि यहसभी करनेलगी,
अब तोँ घऱ मे भि दोनोआपस मे फाइट प्रॅक्टीस औऱ दूसरी एक्सर्साइज़ करनेलगी जब भि मौकालगे कि शुरुआत होँ जाती.
कोई एक् महीने कि मेहनत औऱ मशक्कत केँ बाद हि वोँ शेरनी बन गई,।
एक् दिन मैने अमीना बी सें कहा-
बीबी देख्ना चाहोगी आपकी बेटियाँ क्याँ गुल खिलाने लगी हें.?
वोँ शंकित स्वर मे बोलि- हाए बेटा यह क्याँ कहरहे हौ तुम्.?
मे - यकीन नहीं हैं तौ स्वयं देखलो…!
औऱ मे उन दोनो कों घऱ केँ सामने मैदान मे लें आया औऱ उन दोनो कों चॅलेंज दिया कि अगर तुम् दोनो नें मिलकर मुझेहरा दिया, तौ तुम् दोनो कों एक्-एक् सोने कि सुकून इनाम मे मिलेगी.
वोँ दोनो हि शेरनिया एक् संग बोलि- क्याँ ? सोने कि सुकून। ! फिन क्याँ हैं आँ जाओ मैदान मे देखें किस्में कितना दम हैं.
अमीना बी मुँह फाडेउन दोनो कि ओर देखने लगी.
हम् तीनों कि फाइट शुरुआत होँ गई,, ऐसी फाइट उनकी अम्मी नें कभी देखी हि नहीं थि, वोँ दोनो तौ सुकून केँ लालच मे अपनेबदन पर्र लगी मेरी करारी चोटों कि भि परवाह नहींकर रहीथीं.
लड़ते-2 एक् घंटा हौ गय़ा, वोँ दोनो हाँफने लगी, पसीने सें हम् तीनों केँ कपड़े सराबोर होँ गये, मे बीच-2 मे उन्हें चिढ़ाता जाता जिससे वोँ औऱ दुगने जोश सें फाइट करने लगती.
अंत मे मैने उन्हें जिता देना उचित समझा औऱ मे जानबुझ करहार गय़ा.
वोँ दोनो हि बड़ीखुश होँ गयीँ, औऱ याहू…2। करके उछल्ने लगी.
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