My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 114
मे बाइकचला रहा थां, शाकीना मेरीगोद मे बैठ गयीँ, जिसकी वजह सें मुझेआगे कों झुककर हॅंडल पकड़ना पड़रहा थां, आईशा मेरे पीछे एक् दम चिपककर बैठी थि।
बाइक कि स्पीड बहोत हि कम थि.
वाकी दोनो बाइक हमसे काफ़ी आगे थि, डिसाइड हुआ थां कि आगे जोँ भि छोटा बड़ाशहर याँ टाउन आएगा, हम् सभी वहीं रुकेंगे आज.
शाकीना नें अपनी गान्ड उठाके मेरेएन लन्ड केँ उपररख दि थि औऱ अपनीकमर मटका-2कर अपनी रसीले गान्ड सें उसे मसाजदे रही थि।
उधर पीछे आईशा अपने कबूतरों कि चोंच मेरीपीठ सें रगड़रही थि, भीगने कि वजह सें कपड़ों कां होना नाँ होना एक् जैसा हि थां.
एक् तोँ बारिश इतनीतेज, उपर सें यह दोनो हसीनाएँ मेरीहवा निकाल रही थि, मुझेडर थां कि कही पहाड़ी रास्ते पऱ ज़रा भि बाइकइधर उधर हौ गई, तोँ सेकड़ों फीट नीचे, जिस्म केँ टुकड़े-2 छितरे नज़र आएँगे.
मैने एक् पहाड़ी कि साइड मे अपने बाइक खड़ी करदी, औऱ उन दोनो कों एक् संग बाहों मे कस केँ चूमने लगा, बहोत देर तक कॉन किसके होठों कों चूम-चाट-काट रहा हैं पता नहीं.फिन मैने उनकोअलग किया औऱ बोला-
थोडा सबरकरो मेरी शेरनियो, किसी होटेल मे चलकर तुम् दोनो कि गर्मी निकाल दूँगा। अभि आहिस्ता बाइक चलाने दो वरना किसी घाटी मे पड़े जन्नत कि सैर करते नज़र आएँगे।
वोँ दोनो थोड़ी झेंप गयीँ, औऱ हामी मे सर हिलाकर चुप-चाप मेरे पीछेबैठ गई, …
लगभगआधे घंटे केँ बाद हम् एक् छोटे सें शहर मे थें, वाकी केँ मित्र बाहर् हि खड़े हमारा प्रतीक्षा कररहे थें.
हमने पुछ-ताछ करके एक् छोटे सें होटेल जौ उसशहर कां सबसे अच्छा होटेल थां उसमें 4 कमरे किराए पऱ लिए औऱ अपने-2रूम मे चलेगये…!
हमारे कपड़े सभी गीले हौ चुके थें, जोँ बॅग मे थें वोँ भि,
तौ सबसे पहले कपड़ों कों सूखने कां इंतेज़ाम करना थां, इस लिहाज़ सें एक् कमरे मे तीनो लड़कियों कों भेज दिया,
अकरम औऱ परवेज़ दूसरे मे, रहमत औऱ रेहाना तौ मियाँ-बीबी थें हि तोँ वोँ एक् मे चलेगये, औऱ मैने एक् सेपरेट रूम अपनेलिए रखा.
मैने अपने कपड़े उतारकर उन्हें पानी मे निकाल कर सूखने केँ लिएफुल स्पीड मे फॅनचला दिया, जहाँ स्थान मिलीवहा फैला दिया, औऱ बाथरूम मे फ्रेश होनेघुस गय़ा कि तभीडोर बेल बजनेलगी….
मे तौलिया लपेटकर गेट खोलने गय़ा, देखा तोँ सामने वोँ दोनो हिरनिया खड़ी थि उन्ही गीले कपड़ों मे.
मैनेकहा - अरे दोस्त यह कपड़े तोँ उतारकर फ़रारे कर लेती, तोँ उन्होने मुझे धकेलते हुए कमरे मे ढेस दिया औऱ गातेलॉक करके शाकीना बोलि- बॅग केँ कपड़े तोँ सुखाने डालदिए हें, इनकोयहा सूखा लेंगे.
मे - अरे दोस्त ! तुम् लोग भि कमाल करती होँ, किसी कों पताचल गय़ा कि तुम् लोग मेरेरूम मे होँ तोँ पता नहीं वोँ लोग क्याँ समझेंगे.?
आइशा - कोईकुछ नहीं समझेगा.! वैसे भि जाहिरा औऱ परवेज़ कों स्पेस चाहिए थां सो हम् यहा आँ गये। औऱ फिन रास्ते मे आपने प्रॉमिस भि किया थां वोँ पूरा नहीं करेंगे ?
शाकीना - औऱ अब बचना चाहते हें… क्यूं.? आज हम् लोग आपको नहीं छोड़ने वाले, यह कहकरउन दोनो नें अपने-2 गीले कपड़े उतारदिए औऱ केवल ब्रा पेंटी मे आँ गयीँ,.
मैनेकहा यह भि तौ गीले हें, इनको नहीं सुखाना हैं ? तौ वोँ दोनो खिल-खिला कर हँसती हुईँ गीले कपड़े उठाकर बाथरूम मे घुस गई,,
कपड़े पानी मे निकाल कर बाहर् आँ गयीं एकदम नंगी, औऱ मेरे कपड़ों केँ पास हि अपने कपड़े सूखने केँ लिएडाल दिए.
आइशा नें आगे बढ़कर मेरी टावल खींच दि, फिन बड़े प्रेम सें मेरे सीने पऱ हाथ टिकाकर मुझे सोफे पर्र धकेल दिया औऱ मेरेबगल मे आकरबैठ गयीँ,, मेरे बालों सें भरे सीने पर्र हाथ फेरते हुए मेरेहोठ चूसने लगी.
उधर शाकीना मेरी टाँगों केँ बीचआकर अपने पसंद खिलोने केँ संग खेलने लगी, आईशा कि बड़ी-2 रसीले गोल-2 चुचियाँ मेरे बाजू सें रगड़रही थि।
मैने भि अपनाहाथ सरकाकर उसकी बुर पर्र पहुंचा दिया औऱ उसको मुट्ठी मे कस लिया.
वोँ मेरेहोठ छोड़कर मदहोशी मे कराह उठी…आअहह…। नाहहिईिइ…उईईई….आमम्म्मि… क्याँ करतेहूऊ…
उफफफ्फ़…नहियिइ…। मत.कारूव.नां.प्लसस्स…हाईए…अल्लहह…मारीइ.
मेरा एक् हाथ उसकी चुचि कों मसल्ने मे व्यस्त थां। वोँ अब अपनी गान्ड उठा-2कर अपनीरस छोड़ती बुर कों मेरे जिस्म सें रगड़ने लगी.
शाकीना नें मेरे लन्ड कों अपनी चुचियों केँ बीच मे लेकरटिट फक्किंग देनेलगी, औऱ उपर मे आईशा केँ चुचे मुँह मे लेकरचूस रहा थां.
कुछदेर टिट फक्किंग करने केँ बाद उसने लन्ड मुँह लेँ लिया औऱ कुलफी तरह चूसने लगी,
मज़े मे मेरी आँखें बंद होनेलगी, लन्ड औऱ अधिक कड़क होकर स्टील कि रोड केँ माफिक सख़्त होँ गय़ा.
मैने फ़ौरन शाकीना केँ मुँह कों अपने लन्ड सें दूर किया औऱ आइशा कों सोफे पर्र डालकर उसकी बुर कों चाटने लगा, वोँ अपनीकमर कों उचका-2कर मेरे मुँह पर्र घिसने लगी.
उसकी टाँगें मैने अपनी गांघों पऱ रखी जिससे बुर औऱ उभरआई,
फिनदेर नां करतेहुए उसकीनयी कोरी बुर कि फाँकें खोली औऱ अपना अपना मूसल उसकेछेद पर्र रखकर थोडा सां दबा दिया, जिससे मेरा सुपाडा उसकी रसीली बुर मे गायब होँ गय़ा.
उसकेहलक सें एक् दर्दभरी कराहफुट पड़ी, शाकीना नें उसके होठों कों अपने मुँह मे भर लिया, वोँ दोनो एक् दूसरे कों किस करनेलगी औऱ मौकादेख कर मैने एक् करारा झटका अपनीकमर कों मार दिया.
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Update 115
मेरा तीन-चौथाई लन्ड उसकी बुर कि झिल्ली कों तोड़ता हुया अंदरघुस गय़ा, मुझे मेरे लन्ड पऱ गर्म-2 सां महसूस हुआ, जब देखा तोँ उसकी बुर सें खूनआकर मेरे लन्ड कों रंगरहा थां.
शाकीना नें उसकेहोठ पूरीतरह जकडरखे थें, तोँ दर्द कि वजह सें वोँ मुँह हि मुँह मे गॉंगो सि आवाज़ें हि आँ पारही थि, उसकी आँखों केँ कोरे सें पानी बहनेलगा.
मे थोडा रुक-कर उसके कड़क हौ चुके निपल कों मुँह मे लेकर चूसने लगा, औऱ दूसरे कों अंगूठे सें दबाकर रगड़ दिया.
कुछ देरबाद उसकीकमर मे हलचल हुइ, तौ मैने हल्के-2 धक्के लगाना शुरुआत कर दिया.
अब मैने शाकीना कों अपने मुँह केँ सामने खड़ाकर लिया औऱ जीब सें उसकी बुर चाटने लगा औऱ संग-2 धक्के भि लगाता जारहा थां, शा नीचे सें अपने मुँह सें अनप शनाप बकतीजा रही थि औऱ अपनीकमर कों भि चलारही थि.
फिन मैने एक् फाइनल शॉटमार कर पूरा लन्ड उसकी कोरी करारी बुर मे ठूंस दिया.
आह्ह्ह्ह…अम्मिईिइ…हाईए…अममाआ…रीइ…मररर। गाइिईई…
मगरकुछ हि धक्कों मे वोँ फिन सें कमर उचका-2कर चुदाई कां मजा लेनेलगी, इधर मेरे सामने खड़ी शाकीना अपनी बुर कों मेरे मुँह पऱ रगड़रही थि, मज़े मे हम् तीनों हि सराबोर थें.
10 मिनट कि चुदाई केँ बाद आईशा कि बुर पानी छोड़ने लगी औऱ वोँ हाए-2 करती हुई झड गयीँ,.
अब हम् सोफे सें उठकरबेड पर्र आँ गये, शाकीना कों मैने बिस्तर पर्र घोड़ी बना दिया, औऱ उसकी गान्ड पऱ थपकीलगा कर पीछे सें उसकी रसीली बुर मे अपने लन्ड डाल दिया…
एक् बार झड़ी हुइ उसकी बुर धीरे धीरे करके पूरा लन्ड निगल गयीँ,।
आइशा कों अपने बाजू मे घुटनो पऱ खड़ा करके उसके होठों कों चूस्ते हुए…मैने अपने धक्के शाकीना कि बुर मे लगाने शुरुआत करदिए.
वोँ हाईए…अल्लहह….करती हुई चुदने लगी, कुछ हि धक्कों मे वोँ अपनी गान्ड कों मेरे लन्ड पर्र पटक-पटक कर चुदाई कां लुफ्त लेनेलगी.
शाकीना कि गान्ड जब मेरी जांघों पर्र पड़ती तौ थप-2 करके उसकी गोल-गोल उभरी हुईँ गान्ड सें टकरारही थि। ऐसा लगता थां मानो टेबल पर्र थापपड़ रही होँ.
इधर आईशा केँ होठ चूस्ते हुए मैने अपनीदो उंगलियाँ उसकी बुर मे पेल दि…
वोँ अपनी गान्ड मटकाते हुए, मेरी उंगलियों सें अपनी बुर कों चुदवाने लगी…।
हम् तीनों कों हि बहोत मजा आरहा थां…चोदते-2 मैने एक् तूफ़ानी धक्का लगा दिया जिससे शाकीना बॅलेन्स नहींबना सकी औऱ वोँ औंधे मुँह बिस्तर पर्र गिर पड़ी…
मैनेउसी पोज़िशन मे अपना लन्ड उसकी बुर मे डालेहुए अपना गाढ़ा-गाढ़ा पानी उसकी बुर मे भर दिया…
उधर शाकीना भि मेरे वीर्य कि गर्मी अपनी बुर कि गहराइयों मे पाकर भल्भलाकर झड़ने लगी…।
धुआँधार चुदाई केँ दौर केँ बाद मे, शाकीना केँ बगल मे लेटकर अपनी साँसों कों संयत करनेलगा…
अभि दो मिनट भि नहींहुए थें, कि आईशा मेरा लॉडाफिन सें चूसने लगी… ढीला पड़ाहुआ मेराशेर उसके मुँह कि लज़ीज़, लज़्ज़त भरी गर्मी सें फिन सें सर उठाने लगा…
औऱ कुछ हि मिनटों मे वोँ फिन सें अपनी पुरानी अदाएँ बिखेरने लगा…
आइशा कों बिस्तर पऱ पटककर मैने अपना मूसल एक् झटके सें आईशा कि ताजी चुदि बुर मे पेल दिया, इतने पवरफुल स्ट्रोक केँ बाद भि वोँ पूरा उसकी बुर मे नहींघुस पाया.
आइशा कि एक् तेज चीक्ख निकल गई,, मगरअब मैनेरहम नहीं किया औऱ एक् औऱ धक्का मारकर पूरा लन्ड उसकी बुर मे डाल दिया औऱ धक्का-पेल चुदाई शुरुआत कर दि.
मेरी ताबड-तोड़ चुदाई सें आईशा बिल-बिलाने लगी, मगर थोड़ी सि हि देर मे उसे भि मजाआने लगा, औऱ वोँ भि गान्ड उच्छाल-उच्छालकर चुदने लगी.
20-25 मिनट कि चुदाई सें वोँ दोबार झड गई,, फिनअंत मे मैने भि उसकी सुखी खेती कि अपनीतेज पिचकारी सें सिंचाई कर दि….
उसकीपेर कि एडीया मेरी गान्ड केँ इर्द-गिर्द कस गयीँ, औऱ मुझे उसनेउपर कि ओरठेल दिया.
मे दो-दो चुतो कि गर्मी निकालते-2 पस्त होँ गय़ा थां, सो आईशा केँ उपर हि पड़ारह गय़ा अपने लन्ड कों उसकी बुर मे डाले हि.
जब 5 मिनट केँ बाद मैने अपना लन्ड बाहर् निकाला तोँ ढेर सारारॉ मेटीरियल भलल-2 करके उसकी बुर नें फेंक दिया, औऱ रसते-2 उसकी गान्ड सें होतेहुए बिस्तर कि चादर कों गीला करनेलगा.
हम् तीनो हि बहोत देर तक एक् दूसरे लें लिपटे पड़ेरहे। आधे घंटे केँ बादउठे, फिनसंग मे हि बाथरूम मे जाकर नहाए एक् दूसरे कों साफकर कर केँ.
तब तक हमारे कपड़े कुछ पहनने लायक होँ चुके थें, सो कपड़े पहने औऱ दूसरे टीम मेंबर कों मोबाइल लगाया.
नीचे जाकर एक् संगबैठ कर खानां खाया, अकरम कों छोड़कर वाकीसब खुशदिख रहे थें, मैने आईशा केँ कान मे बोला, कि अब तोँ तुम् उसकोघास डाल सकती होँ, देखो वोँ अकेला हि बेचारा दुखी सां बैठादिख रहा हैं।
कुछदेर तोँ वोँ आनां-कानी करतीरही मगरकुछ सोचकर उसने हामीभर दि.
खानां खाने केँ बाद मैने अकरम औऱ आईशा कों एक् रूम मे भेज दिया औऱ
शाकीना मेरेसंग आँ गयीँ,। सोने सें पहले एक् बार औऱ मैने शाकीना कि चुदाई कि औऱ फिनसो गये….!
दूसरी सुभहरूम सर्विस चाइ केँ संग अख़बार दे गय़ा थां, मैने अख़बार शाकीना कि ओर बढ़ा दिया वोँ उसे पढ़ने लगी, आज कि हेडलाइन हि फ़ौजियों कि किल्लिंग सें थि, जिसमें फोटो केँ संग-संग बड़ी सि न्यूज़ दि गयीँ, थि.
दूसरे कॉलम मे उसका पोस्टमार्टम किया थां कि यहकॉन औऱ क्यूं करना चाहता हैं ?
न्यूज़ केँ हिसाब सें फौज कि कारगुजारियाँ दहशतगर्दों केँ संग मिलकर जोँ पीओके मे चलरही हें, उससे अवाम मे नाराज़गी बढ़ती जारही हैं.
जोँ मेरा मकसद थां वोँ शुरुआत होँ चुका थां, अब देख्ना थां कि आनेवाले वक़्त मे अवाम कां रुख़ क्याँ होता हैं।
अख़बार नें तौ यहा तक लिख दिया थां, कि अगर हालात नहीं सुधरे तौ होँ सकता हैं कि अवाम मे बग़ावत केँ सुरतेज होने लगें.
मगर यह किसने किया हैं, ऐसाकोई सुराग अभि तक नहीं मिला हैं, फौज पागल कुत्तों कि तरहउन लोगों कों ढूँढरही हैं, उम्मीद जताई गयीँ, थि, कि वोँ जल्द हि गिरफ़्त मे होंगे.
मे न्यूज़ सुनकर मन हि मन मुस्करा उठा…!
हम् औऱ आगे बढ़ना चाहते थें, मगरयह वारदात होने केँ बाद पूरे इलाक़े मे फ़ौजी गतिविधिया तेज होने केँ चान्स बढ़गये थें, सोअब लौटने कां हि फ़ैसला लिया.
नाश्ता लें कर हम् लोगवहा सें निकल पड़े औऱ अपनेघऱ कि ओरलौट लिए.
मगर लौटते वक्त हमने पहले वाला मार्ग नहीं लिया औऱ थोडा घूमकर औऱ उत्तरी साइड कों निकले जौ हमें अपनेघऱ तक पहुँचने मे 50-60 केयेम ज्यादा लगने वाला थां.
आज मौसम खुलाहुआ थां, कहीं-2 बदली आँ जाती थि औऱ अपनी छाया बिखेर करचली जाती.
वातावरण मे हल्की उमस पैदा होँ गई, थि…
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Update 116
अभि हम् करीब-करीब 1 घंटे कां हि सफ़रतय करपाए थें, इस वक़्त एक् घनी आबादी वाली बस्ती केँ पास सें गुजररहे थें कि तभीकुछ गोलियों कि आवाज़ हमारे कानों मे पड़ी.
हमने अपनी बाइकरोक दि औऱ आवाज़ों कां अनुमान लगाने लगे।
फिन बहोत देर तक कोई आवाज़ सुनाई नहीं दि।
कुछदेर हम् लोग यूँही खड़ेरहे मगरफिन भि कुछ सुनाई नहीं दिया,
अभि हम् आगे बढ़ने कि सोच हि रहे थें कि कुछ लोगों कि चीख पुकार औऱ भागते कदमों कि आवाज़ें जौ अब हमारी तरफ हि बढ़ती चली आँ रही थि कानों मे पड़ी.
हमने फ़ौरन अपनी बाइक्स मेन रास्ते सें हटाकर घरों कि ओट मे खड़ीकर दि, औऱ अपने चेहरों कों कपड़ों सें ढक लिया, हथियारों पर्र पकड़ अपने आप् हि मजबूत हौ गई,, औऱ घरों कि आड़ लेकरआने वालों कां इंतेज़ार करनेलगे.
कुछ हि लम्हे बीते होंगे, कि 30-40 लोग हमारी ओर बेतहाशा भागते हुए आरहे थें, जिनमें ज्यादा तार युवतियाँ औऱ कुछ युवक औऱ बच्चे थें.
उनके पीछे एक् ओपन टेंपो ट्रॅक्स जीप जिसमें 8 लोगएके-47 लिए जिनका रुख़इस टाइम आसमान कि तरफ थां, जिस्म पर्र भारी कपड़े कां पठानी सूट औऱ मुँह कपड़ों सें ढकाहुआ थां,
वोँ जीप केँ पिछले हिस्से मे खड़े थें औऱ ड्राइवर समेत 3 लोग अगले हिस्से मे बैठे थें उसीतरह केँ लिबास मे.
ड्राइवर केँ अलावा उन दोनो केँ हाथ मे भि ऑटोमॅटिक गन थि।
जीप नें स्पीड बढ़ाकर लोगों कों रौंदने कि कोशिश कि मगर ज़्यादातर लोग अगल-बगल कों बचनेलगे, मगर एक्-दो बच्चों कों फिन भि उसने रौंद दिया.
साइड मे बचने वाली एक् युवती कों आगे बैठेहुए आतंकी नें अपनी बाजू कि गिरफ़्त मे लेँ लिया औऱ उसको चलतीजीप मे उठाकर अपनीगोद मे बिठा लिया।
वोँ बेचारी रहम कि भीख माँगरही थि जौ उन इंसानियत केँ दुश्मनों केँ पास देने कों नहीं थि.
अचानक एक् गोलीहवा मे चली औऱ एक् भयानक आवाज़ उनमें सें एक् दहशतगर्द केँ मुँह सें निकली.
सभीलोग रुकजाओ वरना सबकोभून दिया जाएगा, वोँ बेचारे सबलोग एक् संगडर केँ मारे एक् स्थान खड़े होँ गये.
वोँ 10 केँ 10 आतंकी जीप सें नीचेआए औऱ उनसब कों घेरकर खड़े होँ गये।
वही आवाज़ फिन गूँजी- बताओ तुम् मे सें किसी नें कलहुए फ़ौजिओं केँ क़त्ले आम कों देखा हैं.?
चारों तरफ सन्नाटा पसर गय़ा, कहीं सें कोई आवाज़ नहींआई.
जब किसी नें उसकीबात कां जबाब नहीं दिया तौ उसकी राइफल सें एक् गोली निकली औऱ भीड़ मे खड़े एक् व्यक्ति कां सीना चीरती हुइ निकल गई,.
उस व्यक्ति कि लाशदेख करसब केँ चेहरे पीलेपड़ गये, वोँ खड़े-2थर-2 काँपरहे थें.
उनमें सें हिम्मत जुटाकर एक् व्यक्ति बोला - मई-बाप हम् मे सें किसी नें यह वाकीया नहीं देखा। हमें मुआफ़ कीजिए.
वोँ आतंकी जोँ शायदइस दल कां लीडर थां, झुंझल कर बोला-ऐसा केसे होँ सकता हैं, कि कोई इतना बड़ा कांड करकेचला गय़ा औऱ आस-पास दूर-2 तक किसी कों कुछपता नहीं, सारा इलाक़ा कुछ भि बताने कों राज़ी नहीं हैं.
उस युवती कां हाथ अभि भि वोँ मजबूती सें पकड़े हुए थां, फिन अपने साथियों सें बोला-चलो कहीं दूसरी बस्ती मे पता करते हें औऱ इनमें सें एक्-2 अच्छे सें माल कों उठालो।
कुछ तौ यहाआने कां फ़ायदा होँ, कहीं जंगल मे लेँ जाकर मंगल करके छोड़ देंगे सालियों कों.
औऱ स्वयं उस युवती कों घसीटता हुआफिन सें जीप कि ओर लें जानेलगा.
उसके दोस्त तौ शायदइसी इंतेज़ार मे थें, सुनते हि पहले सें हसीन सि लड़कियों पऱ नज़रें गढ़ाए हुए थें, फ़ौरन उन्हें उठा लिया औऱ जीप मे भूसे कि तरहपटक दिया.
वोँ सब बेचारी रोती बिलखती रही, दुआ करतीरही कि कोईआके बचाए उन्हें। मगरऐसा कॉन थां उनकेबीच जोँ उन्हें बचापता इन दरिंदों सें.
उन 10 लड़कियों कों अपने पैरों केँ नीचे दबाए वोँ लोगजीप लेकरवहा सें निकलगये, औऱ छोड़गये गहन सन्नाटा जोँ वहा केँ बचे-खुचे लोगों केँ चेहरों पऱ व्याप्त थां.
हम् खुलेतौर पर्र अवाम कि नज़रों मे नहीं आनां चाहते थें, सो उन्हें जातेहुए देखते रहे औऱ जब वोँ कुछआगे निकलगये, हमने भि अपनी-2 बाइक निकली औऱ उनके पीछेलग लिए.
कुछ दूरचल कर वोँ टेंपो ट्रॅक्स मार्ग छोड़कर कच्चे रास्ते पर्र आँ गयीँ, औऱ घने जंगलों कि तरफ बढ़ने लगी.
जंगल मे थोडा चलकर हि उन्होने काररोक दि औऱ झाड़ियों केँ बीच एक् छोटे सें मैदान मे उन लड़कियों कों खींचकर लें गये.
वोँ लड़कियाँ बेजार आँखों सें पानी बहाएजा रही थि, मगरउन दरिंदों पऱ उनके आँसुओं कां कोईअसर नहीं थां,
वोँ सबकेसभी उनके कपड़ों कों नोंचने मे लगगये, अपनी-2गन उन्होने जीप मे हि छोड़ दि थि.
अभि वोँ उनके कपड़े उतार हि रहे थें कि हवा मे सनसनाती हुईँ एक् गोली उनके लीडर कि कनपटी मे लगी औऱ उसकी खोपड़ी कों खोलती हुइ निकल गई,.
सेकेंड केँ सौवे हिस्से मे हि उसकी आत्मा उसकेबदन कों छोड़कर 72 हूरों केँ संग मटरगस्ति करनेचली गई,।
वाकीबचे 10 केँ 10 आतंकी सकते मे रहगये, औऱ भौंचक्के सें इधर-उधर कों देखने लगे, मगर उन्हें कोई नज़र नहींआया.
अभि वोँ सदमे सें निकलकर जीप कि ओर बढ़ने हि वाले थें अपनी गनों कों लेने केँ लिए, कि तभीदो गोलियाँ औऱ चली औऱ जोँ दोलोग सबसेआगे थें उन दोनो केँ सीने चीरती हुईँ निकल गई,.
वाकी केँ बचे दहशतगर्द वही केँ वहीजमे रहगये मानो उन्हें साँप सूंघ गय़ा हौ।
अपनेतीन साथियों केँ मुर्दा जिस्म देखकर उनकीरूह फ़ना हौ चुकी थि, वोँ मौत कों अपने सामने देखकर थर-2 काँपरहे थें.
लाचार लोगों मे मौत बाँटने वाले दरिंदों कि आज अपनीमौत कों सामने देखकर गान्ड फट केँ हाथ मे आँ गई.
हिम्मत करके उनमें तीन आतकियों नें जीप कि तरफजंप लगा दि, मगर उसमें सें गन नहींउठा सके,
जीप कि आड़लिए वोँ हमारी पोज़िशन कों भाँपने कि कोशिश कररहे थें, जोँ अब तक बदलकर तीन दिशाओ मे पहुँच चुके थें.
बदनसीबी सें उनमें सें दो मेरी औऱ मेरेसंग बैठी शाकीना कि ओर हि थें उनकीपीठ हमारे निशाने पऱ थि,
वोँ जीप केँ सहारे-2 आगेबढ़ करगन उठाने हि वाले थें कि हम् दोनो कि गानों सें एक्-एक् गोली निकली औऱ उन दोनो कि रीढ़ कों चीरती हुई निकल गयीँ,.
वोँ दोनोचीख मारते हुए वहींढेर होँ गये।
अपने साथियों कां हश्रदेख करउस तीसरे बंदे कि हिम्मत जबाबदे गई, जोँ कि रहमत केँ संग रेहाना औऱ आईशा कि तरफ थां.
उसनेसर उठाकर अपने दोनो साथियों कि स्थिति कां जायज़ा लेना चाहा कि तभी रेहाना कि गन नें एक् गोलीउगल दि जिसने उसकी खोपड़ी कों पूरीतरह खोल दिया.
अब वाकीबचे 5 आतंकी खड़े-2 अपने पाजामों कों गीला करने केँ अलावा औऱ कुछ नहींकर सके….!
मे औऱ शाकीना अपनी स्थान सें निकलकर बाहर् आँ गये, मुँह हमारे अभि भि कपड़ों सें ढकेहुए थें.
वोँ लड़कियाँ अब तक अपने-2 कपड़े दुरुस्त कर चुकी थि, कुछ केँ कपड़े थोड़े बहोत कहीं-2 सें फट भि गये थें.
मैनेउन पाँचों आतंकियों कों अपने-2 कपड़े उतारने कों कहा, पहले तौ वोँ नां-नुकर करतेरहे, मगर जैसे हि मैनेगन उनकीओर कि वोँ फटाफट अपने-2 कपड़े उतारने मे जुटगये.
अपने-अपने अंडरवेर कों छोड़ वोँ नंगे खड़े थें, मैने अपनीगन सें इशारा करतेहुए कहा – इन्हें कॉन उतारेगा.?
मेरीबात सुनकर उन आतंकियों केँ संग-संग मेरेसब दोस्त भि चोंककर मेरीओर देखने लगे…
मैने सर्द लहजे मे फिन सें कहा – उतारो इन्हें भि वरना वक्त सें पहले मारे जाओगे.
पाँचों नें जल्दी अपने अंडरवेर भि नीचे खिसका दिए…
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