My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 126
इसीतरह कि कुछ-2 चर्चा उन बीएसएफ केँ जवानों केँ बीचचल रही थि जिन्होने अपनेदेश कि आन-बान कि खातिर उन्हें मार तौ दिया थां मगर उनकीमौत पऱ उन्हें अफ़सोस भि थां।
ऐसा हि कुछदिल हैं हम् हिंदुस्तानियों कां.
अहिंसा केँ पुजारी हें हम् लोगमगर देश केँ लिएजान देना भि जानते हें तौ जान लेना भि जानते हें। “ज़य जननी”.
उन सब कों ढेर करके फ़ौरन एक् सर्च टुकड़ी जौ कुछ दूरी पर्र हि घात लगाए रेडी थि, ताकिअगर उनमें सें किसी केँ बच निकलने कि कोई सूरत बनती हैं तोँ फ़ौरन उनको दबोच लियाजाए।
हेलिकॉप्टर अपनाकाम करके निकलगये, औऱ वोँ टुकड़ी वहा सर्च कों पहुँची तब तक कुछ उजाला भि होनेलगा थां, सभीचेक करके कि अबकोई वहा जिंदा नहींबचा।
वोँ फ़ौरन अपने दूसरे काम मे जुटगये औऱ 8 बजते बजतेउन जवानों नें उस सुरंग कों अपनीतरफ सें बंद भि कर दिया जिससे भविष्य मे कोई घुशपेठ वहा सें नां होनेपाए.
उधर पाकिस्तानी फौज केँ हौसले सुभह होते-2 पस्त होँ गयेउपर सें उन्हें यह भि खबरमिल गयीँ, कि उनका सारा प्लान चौपट हौ गय़ा हैं, तोँ रहीसही हिम्मत भि जबाबदे गई, औऱ बचे-खुचे जवान मैदान छोड़कर भागलिए.
इतना बड़ा मिसन सक्सेस्फुल रहा, मीडीया नें हाथों हाथ बॉर्डर सेक्यूरिटी फोर्सस औऱ सरकार हौ हीरोबना दिया….!
पाकिस्तान कि ख़ुफ़िया एजेन्सी केँ हेड क्वॉर्टर कां वोँ मीटिंग हॉलआज देश केँ सब बड़े-2 ओहदेदारों सें भरा हुया थां,
हुकूमत केँ नुमाइंदे, फौज केँ जनरल समेतसब आला अफ़सर, सीक्रेट एजेन्सीस केँ संग-2कई मुख्य आतंकी संगठनों केँ सरगना भि वहा मौजूद थें.
वैसे तौ यह मीटिंग गुप्त रूप सें हि हौ रही थि, मीटिंग हॉल केँ बाहर् किसी कों भि यहपता नहीं थां कि अंदर हौ क्याँ रहा हैं, मगर एक् व्यक्ति ऐसा थां जोँ यहा कां आँखों देखाहाल अपने कंप्यूटर स्क्रीन पऱ साफ-2देख औऱ सुनपा रहा थां.
वहा बैठेसब लोगों केँ चेहरों पर्र हताशा साफ नज़र आँ रही थि, ऐसा लगता थां जैसे वोँ अभि अपने-2बाल नोंच डालेंगे।
एक्स आर्मी जनरल जोँ आजइसदेश कि हुकूमत पर्र क़ाबिज़ थां दहाड़ रहा थां - क्यूं जनाब मौलाना साब, कहां गये आपके वादे इरादे,
बड़ी-2 डींगे हांकरहे थें, कि किसीतरह हमें हिन्दुस्तान केँ अंदर पहुंचा दोफिन देख्ना केसे हम् हिन्दुस्तानी हुकूमत कों कश्मीर केँ मुद्दे पर्र झुकाते हें.
अरे झुकाना तौ दूर आपकेलोग घुसने केँ बादसभी केँ सभी अल्लाह मियाँ कों प्यारे होँ गये, हमारी फौज कों इतना बड़ा नुक्शान झेलना पड़ासो अलग.
मुहम्मद। हफ़ीज़ – जनाब जनरलसाब ! हमेंदोष देने सें पहले ज़रागौर फरमाएँगे, कि इतने बड़े हमले कां हिन्दुस्तान कि बीएसएफ नें माकूल जबाब हि नहीं दिया, अलबत्ता उसे बुरीतरह नाकाम कर दिया, मानो उन्हें यहसभी पहले सें हि पता होँ.
हमें तौ लगता हैं कि आपका ख़ुफ़िया तन्त्र इस मामले मे पूरीतरह फैलहुआ हैं, जिसका ख़ामियाजा हमें झेलना पड़ा।
अब इतना बड़ा नुक्शान हम् केसे पूरा करेंगे। हमारे कम-आज-कम 150 सें ज्यादा लोग औऱ इतना सारा असलह ख़तम होँ गय़ा.
खालिद – हमें आप् किस बिना पर्र दोषदे रहे हें मौलाना साब, क्याँ हमारे ख़ुफ़िया तन्त्र नें जोँ योजना बनाई थि उसमें कोई खामी थि ?
सभीकुछ तौ प्लान केँ मुतविक सहीसही हुआ, फिन इसमें हमारा फेल्यूर कहां सें हुआ.?
मे तोँ समझता हूं कहीं नां कहीं आपके लोगों मे सें हि किसी नें हमेंडबल क्रॉस किया हैं.
खालिद कि बात पऱ हफ़ीज़ चिड गय़ा औऱ खीजते हुए बोला – आप् कहना क्याँ चाहते हें खालिद साब कि हमारे संघटन मे सें किसी नें रुपया खाकरयह प्लान लीक किया होगा.?
मे आपकोबता दूं, हमारे किसी भि व्यक्ति कों मिसन पऱ जाने सें पहलेयह तक पता नहीं होता हैं कि उसे भेजा कहां जारहा हैं, प्लान कि बात तोँ दूर कि हैं.
यह अवश्य याँ तौ आपके ख़ुफ़िया विभाग सें लीकहुआ हैं याँ फिनफौज कि तरफ सें.
इस पर्र फौज कां बचाव स्वयं जनरल नें किया औऱ बात कों दूसरी दिशा मे मोडते हुए बोला –
अब जौ हौ गय़ा उसे नां तौ आप् बदल सकते हें औऱ नाँ हम्।
आपस मे सर फुटवाने कि वजायअब आगे कां सोचो क्याँ औऱ केसे करना चाहिए।
अभि तौ आने वालेसमय मे इंटरनॅशनल पॉलिटिक्स कों भि हमें जबाब देना हैं इस मामले मे.
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Update 127
हमेंडर इसबात कां सतारहा हैं, कि अगर किसीतरह अंतराष्ट्रीय मीडीया कों यहभनक लग गई, कि हमारी फौज नें पहल कि थि तौ बहोत किरकिरी होगी.उन मे जबाब देना भारीपड़ जाएगा हमें.
मुहम्मद हफ़ीज़ – इससभी कां आप् सोचो, अब हमें तौ लंबे टाइम तक इस सबसे उबरने मे काफ़ी वक्तलग जाएगा, तोँ आइन्दा ऐसाकुछ करना चाहते हें तौ फिलहाल किसी औऱ संघठन सें करा सकते हें.
जनरल – अगर आपके नुकसान कि भरपाई होँ जाए तोँ…!
मुहम्मद हफ़ीज़ – तोँ भि अब इतने सारे दूसरे लोगों कों खड़ा करने मे समय तोँ लगेगा हि, औऱ अभि कुछदिन तौ नयेलोग आने कों हि सजधजकर नहीं होंगे.
जनरल – चलोठीक हैं, वैसे भि हाल-फिलहाल हम् भि ऐसी किसी स्थिति कां सामना करने कि हालत मे नहीं हैं, इस बारे मे फिनकभी बैठते हें.
औऱ फिनकुछ दिशा निर्देश केँ बाद मीइंग बर्खास्त हौ गई,, एक्-एक् करकेसब लोगचले गये औऱ धीरे-धीरे-2 मीटिंग हॉल खाली हौ गय़ा.
मीटिंग मे हुई बातों सें यह नतीजा निकला कि इसबार पाकिस्तान बुरीतरह पस्तहुआ हैं, जिसे वोँ आसानी सें पचा नहींपा रहा।
मीटिंग केँ बाद कि हताशा कों देखकर उस शख़्श केँ चेहरे पर्र एक् रहश्यमयि मुस्कान तैर गयीँ, औऱ उसने भि अपना लॅपटॉप ऑफकर दिया.
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रात लगभग 9 बजे शाकीना अपने ऑफीस सें सीधी मेरे फ्लॅट पऱ हि आँ गयीँ,, आज वोँ एक् टॉप औऱ लोंग स्कर्ट पहनेहुए थि बुर्क़े केँ नीचे।
आते हि उसने अपना बुर्क़ा निकाल दिया औऱ मेरेपास सोफे पऱ बैठ गयीँ,.
मैने उसकी जाँघ पऱ हाथ फेरते हुए पुछा- औऱ सूनाओ डार्लिंग.! क्याँ-2 कियाआज ऑफीस मे।
यह मेरी रोज़ कि हि आदत थि, जब भि वोँ ऑफीस सें मेरेपास आती थि, मे उसेइसी तरह पुच्छ लेता जिससे वोँ बिना औऱ कोई प्रश्न किए सारी बातें बता देती थि.
शाकीना – आज तोँ पता नहींसब बड़े-2 लोगों कि मीटिंग हुइ थि.
मे – कॉनकॉन थां मीटिंग मे… तोँ उसनेसब लोगों केँ नाम बताए, फिन जब मैनेआगे पुछा – कुछपता चला क्याँ हुआ थां मीटिंग मे.?
वोँ - नहींयह कुछपता नहींचला, क्योंकि मीटिंग केँ दौरान हॉल मे जानां अलाउ नहीं हैं किसी कों भि, फिन गहरी स्माइल देकर बोलीं- वैसे आपको तौ सभीपता चल हि गय़ा होगा.!
सुनने मे आया हैं कि सरहद पऱ कलरात जौ मिसनहुआ थां उसमें हमारी फौज बुरीतरह नाकाम हुईँ हैं, शायदइसी बाबतकुछ चर्चा हुईँ होगी.
मे - हौ सकता हैं, वैसे तुम्हें किसने बताया कि सरहद पर्र मिसनफैल हौ गय़ा हैं.?
वोँ- स्टाफ मे चर्चा होँ रही थि, औऱ यह भि चर्चा थि कि शायदइस प्लान कों किसी नें लीककर दिया हैं, जिससे हिन्दुस्तान कि बीएसएफ वक्त पर्र अलर्ट होँ गई, औऱ सबलोग मारेगये.
मे - खैर छोड़ो यहसभी, हमेंऐसी बड़ी-बड़ी बातों सें क्याँ लेना-देना, वैसेआगे क्याँ करने वाले हें इस बाबतकुछ हलचलपता लगी.
वोँ - सुनने मे आया हैं, कि सरहद पर्र तोँ अभि कुछ नहीं होने वाला, पऱ लगता हैं, इसकी झुंझलाहट लोगों पर्र निकलने वाली हैं।
हमें भि थोडा एहतियात सें रहना होगाकुछ टाइम तक.
मे - हां ! शायद तुम् सहीकह रही हौ, मगर लोगों पऱ बेवजह ज़ुल्म होँ वोँ भि तौ हम् देखते नहींरह सकते.
फिन मैने खालिद कां रबैईया उसके प्रति कैसा हैं उसके बारे मे पुछा, तोँ वोँ कुछ गंभीर हौ गई, औऱ बोलीं- उस कमिने कि नज़रों मे मेरेलिए हवस हि दिखाई देती हैं, गाहे बगाहे वोँ मुझे छेड़ हि देता हैं.
कभी-2 बिना किसीकाम केँ हि मुझे अपनेपास बिठा लेता हैं, औऱ मुझे गर्म करने कि कोशिश करता हैं.
सच कहूँ अशफ़ाक़ ! कभी-2 तोँ मुझेडर सां लगने लगता हैं कि कहीं मे अपनाआपा हि नां खोदूं।
मे - किसहद तक चला गय़ा हैं वोँ अब तक.?
वोँ - कपड़ों केँ उतारने कि हि देर हैं बस…! जल्दकुछ करो वरना किसीदिन आपकी शाकीना लूटी-पिटी आपके सामने होगी.
मे - मगर तुमने तौ उससे वादा लिया हैं, कि वोँ कभी ज़ोर जबदस्ती नहीं करेगा तुम्हारे संग.!
वोँ – हां ! मगरकभी मे हि बहककर उसकी बाहों मे गिर पड़ी तौ.? आख़िर हूं तोँ हाड़ माँस कि इंसान हि नाँ.!
मे - तौ फिन क्याँ सोचा हैं तुमने.? अब क्याँ चाहती होँ तुम्.? अगरऐसा हैं तोँ छोड़दो उसे.! मे तुम्हें तकलीफ़ मे नहींदेख सकता.
वोँ - देखती हूं, औऱ कितना तक जा सकता हैं वोँ, कोशिश करूँगी कि अपना कंट्रोल नाँ खोऊ.
इसी तरह कि बातें कुछदेर हम् करतेरहे, फिन वोँ अपनी अम्मी केँ पासचली गयीँ,, औऱ मे खानां ख़ाके अपनी रिपोर्ट बनाने बैठ गय़ा….!
दूसरे दिन रूटीन केँ मुतविक सुवह जल्द उठकर फ्रेश हुआ योगा-प्राणायाम औऱ फिन कुच्छ देर मेडिटेशन किया,
इनसभी दिन चर्र्याओ सें फारिग होकर सुवह-2 हि मॉर्निंग वॉक केँ बहाने सोसाइटी मे राउंड पऱ निकल पड़ा औऱ नंबरबाइ नंबर अपने ज्यादातर लोगों सें मिला, उनसेसब तरफ कि फीडबॅक इकट्ठा कि.
चूँकि उनमें सें बहोत सें लोग अपना-2 छोटा मोटा बिज़्नेस चलाते थें, जहाँ पब्लिक ओपनीन अधिक मिलती हैं,
औऱ लोगों केँ दिल मे हुकूमत औऱ प्रशासन केँ प्रति क्याँ भाव हें यहसभी पता लगता रहता हैं.,
वोँ हुकूमत केँ कामों सें किसकदर इत्तेफ़ाक़ रखते हें यहसभी मालूमत आसानी सें मिल जाते हें.
कुछलोग तोँ ग्रूप मे हि मिलगये सोसाइटी केँ छोटे सें पार्क मे, तौ वहींघास पऱ बैठकर बात-चीत करतेरहे।
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Update 128
सुवह-2 मिलने कां मक़सद भि यही थां, कि बाद मे वोँ सभी अपने-2काम धंधे सें लगते थें.
उन सबसेमिल मिलकर मे घऱलौट आया, चाइ ब्रेकफास्ट लिया जोँ शाकीना अपनेघऱ सें लेकरआई थि। फिन वोँ दुःखी मन सें 9 बजे अपनी ड्यूटी पर्र चली गई,।
मे उसके दुःखी चेहरे कों लेकरसोच मे पड़ गय़ा, क्याँ उसेवहा सें हटा लियाजाए.?
मगरअगर इसतरह सें एक् संग उसने जानां बंदकर दिया तोँ शक़ पैदा होगा,
खालिद कोई छोटा-मोटा व्यक्ति नहीं हैं, वोँ अवश्य उसकी तहकीकात करवाएगा कि क्याँ वजह हुईँ.
औऱ फिनअगर वोँ पीछेपड़ गय़ा तोँ उसे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा शाकीना कि कुंडली निकालने मे, औऱ फिन एक् संग इतने सारेलोग मुसीबत मे पड़ जाएँगे.
फिन क्याँ कियाजाए इसी विषय पर्र काफ़ी देरसोच विचार करतारहा, अंत मे सभीकुछ वक़्त औऱ नियती पर्र छोड़, अपनेकाम मे लग गय़ा.
मे भि दिखावे केँ लिए रहीम चाचा केँ ऑफीस मे चला जाता थां, उनके असिस्टेंट कि हैशियत सें, ताकि लोगों कों मेरेउपर कोईशक़ सुबा नां हौ।
औऱ उनकेसंग कभी किसी कन्स्ट्रक्षन साइट पऱ निकल जाता, जिससे मेरा भि वक्तपास हौ जाता.
आख़िर मेरा भि एक् इंजिनियर कां दिमाग़ थां, तोँ उनको भि नये-2 आइडिया देता रहता जिससे उनकेकाम मे औऱ बरकत होनेलगी.
वैसेअब वोँ काफ़ी उम्र-दराज हौ चुके थें, ज़्यादातर ज़िम्मेदारियाँ उन्होने अपने बेटों पऱ हि डाल दि थि, फिन भि वोँ अभि अपने ऑफीस अवश्य जाते थें, औऱ हम् दोनोबैठ कर वक्तपास करते रहते.
इसी तरह कि दिन चर्या चलरही थि, औऱ दिन गुज़रते जारहे थें, मगर मुझे शाकीना कि तकलीफ़ बैचैन करती रहती थि.
ऐसे हि एक् दिन मे रहीम चाचा केँ संग उनकीकार मे बैठकर एक् साइट कि तरफ निकल गय़ा.
यहपास केँ हि एक् दूसरे शहर मे थि जोँ तकरीबन इस्लामाबाद सें 50 किमीदूर थां। यहा पऱ वोँ एक् छोटी सि हाउसिंग सोसाइटी बनारहे थें.
वहा कां काम देखते-2 हमेंसाम हौ गई,, नवेंबर कां महीना थां, सर्दी पड़ना शुरुआत होँ गय़ा थां।
वोँ बंदगले कि उनी कपड़े कि शेरवानी पहनेहुए थें।
रहीम चाचा हर टाइम एक् कालेरंग कि छड़ी अपनेसंग रखते थें, जौ कि दरअसल एक् गुप्ती थि.
मे भि एक् उनी लोंगकोट औऱ जीन्स मे थां, मेरेकोट कि अंडर पॉकेट मे एक् 11 राउंड माउजर थि.
हम् दोनो वाहन मे पीछे बैठेहुए थें ड्राइवर जोँ कि मेरेसंग आए लोगों मे सें हि एक् थां, वोँ कारचला रहा थां.
अंधेरा सां होनेलगा थां, कार कि हेड लाइटऑन होँ चुकी थि, अभि हम् साइट सें 10-15 किमी हि निकले होंगे, कि एक् संगकार केँ उपर सामने सें गोलियों कि बौछार शुरुआत होँ गयीँ,.
देखते हि देखते आगे कि विंड्स्क्रीन खील-खील होँ गई,, अनगिनत गोलिया ड्राइवर केँ बदन मे घुस गयीँ,, औऱ वोँ वाहन कि स्टेआरिंग केँ उपरगिर पड़ा.
खुदानखास्ता गिरते-2 उसका पांव एक्सिलेटर सें हटकर ब्रेक पर्र चला गय़ा औऱ कार लहरते हुएरोड केँ साइड मे खड़े पेड़ों सें टकराकर बंद हौ गयीँ,।
मैने फ़ौरन दूसरी साइड कां गेटखोल कर रहीम चाचा कों लिए दूसरी साइड कों लुढ़कता चला गय़ा, एक् तौ झटका तगड़ा लगने सें औऱ दूसरा एक् संगहुए हमले सें रहीम चाचा अपनेहोश गँवा बैठे।
मैने उनके बेहोश जिस्म कों अपनेसंग लिए घिसता हुआ, पास कि झाड़ियों मे रेंग गय़ा.
रेंगते हुए हि मेरीगन मेरेहाथ मे आँ चुकी थि। उनको झाड़ियों केँ पीछे छुपाया औऱ मे रेंगता हुआ थोडा रोड साइड कि तरफआया.
अंधेरा हमारी सहायता कररहा थां, वोँ 4 लोग थें जिनके हाथों मे एके47 राइफल थि चारों केँ चेहरे कपड़े सें ढकेहुए थें,
जैसे हि कार पेड़ सें टकराकर रुकी, वोँ भागते हुए व्हीकल केँ पास पहुँचे.
व्हीकल मे मात्र ड्राइवर कि लाशदेख कर वोँ सकते मे आँ गये क्योंकि उन्हें पक्का पता थां कि कार मे रहीम चाचा हें औऱ वोँ उन्हें किडनप करने केँ इरादे सें हि आए थें जिससे कि फिरौती कि मोटीरकम उनके घरवालों सें हासिल कर सकें.
उनमें सें एक् चिल्लाया, अरे इसमें तोँ खाली ड्राइवर हि हैं, वोँ बूढ़ा औऱ उसका मित्र कहां गायब होँ गये ?
मे मन हि मन बुद्बुदाया… मतलब इन्हें मेरा भि पता थां कि मे संग मे हूं.
तभी दूसरा बोला- ढुंढ़ो यहीं कहीं झाड़ियों मे गिरगये होंगे औऱ कहां जा सकते हें साले…
उनमें सें दो व्यक्ति उधर झाड़ियों कि तरफ हि जानेलगे जहाँ मैने रहीम चाचा कों छिपाया थां, अब मुझे जल्द हि कुछ करना थां,
इससे पहले कि उन दोनो कि नज़रउन पऱ पड़े मैने गोलीचला दि औऱ वोँ दोनो वहींढेर हौ गये.
गोली चलाते हि मैने एक् लंबी छलान्ग लगाड़ी, औऱ लुढ़कता हुआरोड कि दूसरी साइड मे खड़े पेड़ों कि आड़ मे पहुँच गय़ा.
जहाँ सें मैने गोली चलाई थि, अगर एक् सेकेंड भि मे वहा रुका रहता तोँ नां जाने कितनी गोलियाँ मेरे जिस्म केँ आर-पार हौ चुकी होती.
क्योंकि मेरीतरफ सें गोली चलते हि, उन वाकीबचे दोनो नें अपनी गनों कां रुख़उस तरफ किया औऱ गोलियों कि बाढ़ सि उस स्थान पर्र करदी.
थोड़ी देर शांति छाइरही, वोँ दोनो मेरीतरफ सें आहट लेने कि कोशिश करतेरहे, जबकुछ देर तक कोई आवाज़ मेरीतरफ सें नहीं हुई तोँ उनमें सें एक् बोला- लगता हैं साला काफरमर गय़ा औऱ वोँ देखने केँ लिएउस तरफबढ़ गय़ा.
वोँ उस स्थान पर्र पहूचकर चिल्लाया- अरेयहा तोँ कोई भि नहीं हैं, लगता हैं हरामी बहोत शातिर हैं…
इतनाबोल कर उसने अपने दोस्त कि तरफ छलान्ग लगाई, अभि उसकाबदन हवा मे हि थां कि मेरी एक् गोली उसकी पसलियों कों फाड़ती चली गयीँ,, वोँ बुरीतरह चीख मारता हुआवही ढेर हौ गय़ा.
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