Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 121 -
आखिरकार सब कों अपनीतरफ देखते हुए पाकरमि। प्रभू नें कहा
मि। प्रभू- मगर तुम्हारे इस एक्सपेरीमेंट कों पूरा करने केँ लिएये जरूरी हैं कि ऐजेंट जीरो औऱ बाकी लोगों कों सुरक्षित यहा बापिस लायाजाऐ।
मि। प्रभू कि बात सुनकर सबलोग करीब एक् संगबोल पडे
“हम् लाऐंगे ऐजेंट जीरो औऱ उनकीटीम कों सुरक्षित बापिस, आप् बस हमें इजाजत दीजिए सर”
मगर मि। प्रभू उनसब लोगों कि उम्मीदों पऱ पानी फेरते हुए बोले
मि। प्रभू- नहि मे तुम् सब कों एक् संगवहा जाने कि इजाजत नहि दे सकता, तुम् सब मेरे बच्चों कि तरह हौ, इसलिये ऐजेंट जीरो केँ बादअब मे किसी औऱ कि जान खतरे मे नहि डाल सकता, बैसे भि तुम् सब लोगों कों इस खतरे सें बचाने केँ लिए हि ऐजेंट जीरो स्वयं इस मिशन पर्र गई थि।
मि। प्रभू कि बात सुनकर अज्जू जल्दी बोला
अज्जू- ठीक हैं सर मे आपकीबात समझ गय़ा…। मगर आप् मुझे परमीशन दीजिए, मे अकेले हि ऐजेंट जीरो कि सहायता करने केँ लिए जानां चाहता हूं।
मि। प्रभू- नहि अजय, अब मे तुम्हें भि वहा पऱ जाने कि इजाजत नहि दे सकता हूं, जब मेरी अंतिम बार ऐजेंट जीरो सें बात हुइ थि, तौ उसनेकहा थां कि उसके मरने केँ बाद तुम्हें हि इस स्पेशल टीम कां हेड बनाया जाऐ। इसलिये तुम् हमारे लिए बहोत खास हौ, बैसे भि ऐजेंट जीरो केँ अधूरे कामों कों पूरा करने केँ लिएइस देश कों अब तुम्हारी जरूरत हैं।
अज्जू- आईएम सॉरीसर…। पऱ मे इस स्पेशल टीम कों लीड करने केँ बिल्कुल भि लायक नहि हूं, अब तक मैंने जितना ऐजेंट जीरो केँ बारे मे जानां हैं, उसके हिसाब सें तोँ ऐजेंट जीरो कि स्थान कोई भि नहि लेँ सकता हैं, पर्र मे इतना जरूर चाहता हूं कि आप् मुझे एक् मौकादें, ताकि मे ऐजेंट जीरो कों सुरक्षित बापिस ला सकूँ। ये सभी मेरीबजह सें हुआ हैं, इसलिये अब मुझे हि इसेठीक करने कां मौका मिलना चाहिए।
अज्जू कि बात सुनकर मि। प्रभू नें कहा
मि। प्रभू- येसभी इतना आसान भि नहि हैं अजय, जितना तुम् समझरहे होँ। उस स्थान पऱ हमारी उम्मीदों सें कहीं अधिक हमारे दुश्मन मौजूद हें। ऐजेंट जीरो कां इसतरह घायर होनाये साबित करता हैं कि वहा पर्र खतरा बहोत बडा हैं, बहोत हि अधिकबडा।
मि। प्रभू कि बात सुनकर मोहित जौ कि पहले इण्डियन आर्मी मे आर्मस् स्पेशलिस्ट रह चुता थां, अचानक सें बोला
मोहित- तोँ फिन आपको हम् सब कों वहा जाने कि परमीशन देनी होगीसर, ताकि हम् सबवहा पर्र ऐजेंट जीरो कि हेल्प करने केँ लिएजा सकें। सर हिन्द कि शेरनी नां मात्र रॉ कां गर्व हैं, बल्कि हमारे देश कि सबसेबडी ताकत भि हैं। इसलिये हम् सबलोग अपनेदेश कों यूँ हि कमजोर होतेहुए औऱ दुशमनों केँ सामने घुटने टेकते हुए नहि देख सकते हें।
मि। प्रभू- पऱ ऑपरेशन चक्रव्यू अब एक् खतरनाक रूप लें चुका हैं।
मोहित- सरयही तौ सबसे अच्छा वक़्त हैं रॉ कि ताकत सारी दुनिया कों दिखाने कां।
मोहित कि बात सुनकर मि। प्रभू कुछदेर तक खामोशी सें पूरी स्थिती केँ बारे मे सोचने लगे, असल वोँ भि कहीं नाँ कहीं मोहित कि बातों सें सहमत थें। इसलिये वोँ बोले
मि। प्रभू- अगर तुम् सब लोगों कि यही ख़्वाहिश हैं तौ फिनठीक हैं, हम् लोग ऐजेंट जीरो कों रेश्क्य करने केँ लिए "ऑपरेेशन हिन्द कि शेरनी" शूरू करेंगे, पऱ इसकेलिए एक् प्रॉपर प्लान कां होना जरूरी हैं।
मि। प्रभू कि इजाजत मिलते हि अज्जू खुश होतेहुए जल्दी बोला
अज्जू- येकाम आप् मुझपर छोड दीजिऐ सर….
मि। प्रभू- तोँ फिनठीक हैं अजय… जैसा कि ऐजेंट जीरो चाहती थि कि उसकेबाद तुम् इसटीम कों लीडकरो, इसलिये मे फिलहाल तुम्हें इस ऑपरेशन कां इंजार्ज बनाता हूं, अभि इसीसमय सें तुम् ऑपरेशन हिन्द कि शेरनी कों लीड करोगे, तुम् इनसब लोगों मे सें अपनीटीम चुन सकते हौ, पऱ एक् बातयाद रखना कि तुम्हारा काम सिर्फ ऐजेंट जीरो औऱ बाकी लोगों कों सुरक्षित बापिस लाना हैं, इसलिये ऑपरेशन केँ दौरान अगरअगर तुम् लोगों कहीँ भि ऐसालगे कि वहा पऱ खतरा बहोत ज़्यादा हैं, तौ तुम्हें अपने आप् कों मुशीवत मे डालने कि स्थान, ऑपरेशन कों वहीं पर्र अवॉर्ट करके बापिस आनां होगा। मुझे तुम् सबलोग यहा सुरक्षित बापिस चाहिए, क्योंकि मैंने ऐजेंट जीरो सें तुम् सब कि सुरक्षा कां वादा किया हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर अज्जू नें कहा
अज्जू- जीसर मे समझ गय़ा….
मि। प्रभू- तोँ फिनठीक हैं हैं… येतयरहा कि तुम् लोगआज हि ऑपरेशन पऱ जारहे होँ, अजय तुम् अपना पूरा प्लान सजधजकर करके एक् घंटे केँ अंदर मुझे रिपोर्ट करो.तब तक मे ऑपरेशन हिन्द कि शेरनी केँ लिए हमरे एन.एस.ए। केँ संग मिलकर महामहिम राष्ट्रपति जी सें इजाजत लेकरआता हूं। अबरॉ कि इज्जत तुम् लोगों केँ हाथों मे हैं मेरे बच्चों।
इतना बोलकर मि। प्रभू वहां सें चलेगए, जबकि मोनू बाकी लोगों कां परिचय अज्जू सें करवाने मे बिजी हौ गय़ा। करीब एक् घंटेबाद अज्जू औऱ मोनूमि। प्रभू केँ दफ़्तर मे बैठेहुए थें।
अज्जू- सर मेरेसंग मनोज, हिना, योगेन्द्र, करतार सिंह औऱ मोहित फील्ड पर्र होंगे, जौ ऐजेंट जीरो औऱ बाकी लोगों कों उस इलाके मे सर्च करने मे मेरी सहायता करेंगे, जबकि रोहित कां काम हमेंउस इलाके मे हैलीकॉप्टर सें ड्रॉप करना औऱ रेश्क्यू करना होगा। हाँलाकि मोनिका भि रोहित केँ संग उसकी हेल्क करने केँ लिए रहेगी, मगर उसका असलीकाम ऑपरेशन पूरा होने केँ बाद शुरुआत होगा, क्योंकि ऑपरेशन केँ बाद ऐजेंट जीरो औऱ बाकी लोगों कों जल्दी मेडिशिन कि जरूरत पडेगी, जोँ कि मोनिका आसानी सें हैंडिल कर लेगी। जबकि डॉली कां काम लोकल सिटी याँ फिनआस पास केँ इलाके सें हमारे लिए जरूरी सामान औऱ जानकारी इकट्ठा करना होगा, याँ फिन सिचुऐशन केँ हिसाब सें हमारी किसी भि तरह कि हेल्प करना होगा। इसलिये डॉली कों मे पहले हि पैसेंजर प्लेन सें वहाभेज चुका हूं, हमारे वहा पहुँचने सें पहले हि वोँ अपनाकाम शुरुआत कर देगी।
इतना बोलकर अज्जू कुछदेर रुककर मि। प्रभू कां रिऐक्शन देखने लगा, जब उसेमि। प्रभू केँ चेहरे पऱ कोई भि रिऐक्शन दिखाई नहि दिया तोँ उसने दोबारा केहना शुरुआत किया।
अज्जू- सरइन सबके अलावा गगन औऱ प्रिया कां काम सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेंट हैं, जब रोहित हमेंवहा ड्राप करेगा औऱ रेस्क्यू करेगा, तौ उस दौरान गगन औऱ प्रिया वहा कि ऑथोरिटी औऱ आर्मी केँ सिग्नल कों हैक करेंगें, ताकि किसी कों भि हमारे वहा पहुँचने केँ बारे मे पता नां चले, हम् नहि चाहते हें कि हमें दुशमनों केँ संगसंग वहा कि लोकल ऑथोरिटी कां भि सामना करनापडे, इसके अलावा हमें कपिल केँ बनाऐकुछ गैजेट्स कि भि जरूरत पडेगी, खासकर इलेक्ट्रो मैग्नेटिक जनरेटर कि, जिसकी हेल्प सें हम् दुशमनों केँ सिग्नलस् कों पूरीतरह सें जैमकर देंगे, ताकि हमारे दुशमन एक् दूसरे सें किसी भि तरह कां कॉन्टेक्ट नां कर पाऐं, जबकि सोनल क्वीन हि हेल्प सें लगातार हमसे कम्युनिकेट करती रहेगी औऱ हमें जरूरी इंफार्मेशन देती रहेगी। अब सें ठीक एक् घंटेबाद हम् लोगयहा सें रवाना होंगे, वहा पहँचते हि हम् दो टीमों मे अलगअलग दिशा सें दुशमन केँ इलाके मे दाखिल होंगे, चूँकि इकराम केँ सिग्नल हमें रेगुलर मिलरहे हें, इसलिये क्वीन हमें इकराम कि एग्जेक्ट लोकेशन पह पहुँचने मे हेल्प करेगी।
अपनी पूरीबात ख़त्म करने केँ बाद अज्जू नें एक् बारफिन मि। प्रभू कि तरफ देखा, मगर इसवार मि। प्रभू केँ चेहरे पऱ मुश्कान थि, अज्जू केँ चुप होते हि वोँ बोले।
मि। प्रभू- बैलडन अजय…। तुमने सब लोगों कों एक् संग खतरे मे डाले बगैर हि, पूरीटीम कों इस ऑपरेशन मे सामिल कर लिया, ताकि किसी कों भि ऐसा नां लगे कि वोँ इस इंपोर्टेंट मिशन कां हिस्सा नहि हैं। मगर तुमने अपनेइस प्लान मे मुझे तौ सामिल किया हि नहि।
अज्जू- सर आप् भि मेरेइस प्लान कां हिस्सा हें…। असल मे आपकाकाम हमारे लिए जरूरी हथियार औऱ मेडिशन केँ अलावा एक् हाई स्पीड हैलीकॉप्टर कां इंतजाम करना हैं। आईहोप इनसब कां इंतजाम करने केँ लिए एक् घंटा बहुत होगा।
अज्जू कि बात सुनकर मि। प्रभू मुस्कुराते हुए बोले
मि। प्रभू- डोंटवरी अजय…इन सब कां इंतजाम मे पहले हि कर चुका हूं। आईहोप तुम् इस ऑपरेशन मे सफलरहो।
अज्जू- थैंक्स सर….अब आप् हमें इजाजत दीजिए, हमें भि ऑपरेशन पऱ जाने कि तैयारी करनी हैं।
इतना बोलकर जैसे हि अज्जू औऱ मोनूवहा सें जानेलगे तोँ मि। प्रभू नें उन्हें रोकते हुएकहा
मि। प्रभू- अजय बैसे तौ मुझेये बात तुम्हें नहि बतानी चाहिए, पर्र फिन भि आज कि परिस्थिती केँ आगे मजबूर होकर मुझेये बताना पडरहा हैं कि ऐजेंट जीरो कां सुरक्षित बापिस आनां नाँ सिर्फ रॉ औऱ हमारे देश केँ लिए जरूरी हैं, बल्कि तुम्हारे लिए भि ऐजेंट जीरो कां जिंदा बापिस आनां जरूरी हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर अज्जू औऱ मोनू बुरीतरह सें चौंकते हुए अपनी स्थान पर्र जमगए औऱ हैरानी सें मि। प्रभू कों देखने लगे, कुछ देर कि खामोशी केँ बाद आखिरकार मोनू नें मि। प्रभू सें प्रश्न किया
मोनू-ये आप् क्याँ कहरहे हें सर…….
मि। प्रभू- मे सहीकह रहा हूं मनोज….अगर तुम् लोग ऐजेंट जीरो कों बचाने मे नाकामयाब रहे, तोँ याद रखना कि तुम् लोग निशा कों भि हमेशा हमेशा केँ लिएखो दोगे औऱ वो बात भि कभी नहि जान पाओगे, जौ निशाअजय कों बताना चाहती थि।
मि। प्रभू कि बात सुनकर उन दोनों केँ होश पूरीतरह सें उड चुके थें, उन्हें मि। प्रभू कि बात कां असली मतलब समझने मे कुछ ज़्यादा हि मेहनत करनीपड रही थि, आखिरकार मोनू नें सबसे पहले अपने आपको संभालते हुएकहा
मोनू- हम् आपकीबात कां मतलब नहि समझेसर…। ऐजेंट जीरो कां निशा दि सें क्याँ लेना देना हैं….
मोनू कां सबाल सुनकर अचानक सें मि। प्रभू कों ये एहसास हुआ कि निशा कि फिक्र करतेहुए अनजाने मे हि उन्होंने निशा कां राजउन दोनों केँ सामने खोल दिया हैं, पऱ जल्द हि मि। प्रभू नें अपने आपको संभाल लिया औऱ अपनी गलती सुधारते हुए बोले
मि। प्रभू- मेरा मतलब थां कि इस दुनिया मे सिर्फ ऐजेंट जीरो हि एक् केवलऐसी इंशान हैं, जौ निशा केँ बारे मे सभीकुछ जानती हैं। उसके बिनाकोई भि निशा तक नहि पहुँच सकता हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर अज्जू नें कहा
अज्जू- मे आपकीबात समझ गय़ा सर… पर्र हम् ये जानना चाहते हें कि ऐजेंट जीरो कां निशा सें क्याँ कनेक्शन हैं….
मि। प्रभू- शायद वोँ दोनों बेस्ट फ्रेंडस् हें….
अज्जू- ये "शायद" क्यूं???
मि। प्रभू- क्योंकि मे श्योर नहि हूं….
अज्जू- आप् श्योर नहि हौ…। याँ आप् बताना नहि चाहते हौ….
मि। प्रभू- अगर बताना नहि चाहता तौ ऐजेंट जीरो औऱ निशा कि दोस्ती केँ बारे मे भि तुम् लोगों कों नहि बताता अजय
अज्जू- आखिर आपके कहने कां क्याँ मतलब हैं सर…
मि। प्रभू- बस इतनासमझ लो कि मुझेइस बारे मे ज़्यादा कुछ नहि पता हैं, जितना जानता थां वोँ मे तुम्हें पहले हि बता चुका हूं।
मि। प्रभू कि पहेलियों बाली बातों कों सुनकर मोनू नें कहा
मोनू-ये आप् कैसीबात कररहे हें सर…ऐसा केसे होँ सकता हैं कि आपकोइस बारे मे पता नाँ होँ…। जब आपकोये पता हैं कि ऐजेंट जीरो निशा केँ बारे मे सभीकुछ जानती हैं, तोँ फिन आप् बाकी बातें भि जरूर जानते होगे।
मि। प्रभू- ऐजेंट जीरो केँ काम करने कां यही तरीका हैं मनोज, पिछले बहुत वक़्त सें कईलोग ऐजेंट जीरो कि असली पहचान जानने कि कोशिश कररहे हें, पर्र जब उसके अपनेटीम मेंबर्स आज तक उसका असलीनाम तक नहि जानपाऐ, तोँ भला ऐजेंट जीरो केँ बाकी सीक्रेट्स कोई केसेजान सकता हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर मोनू कों अपनी गलती कां एहसास हुआ, असल मे वोँ स्वयं भि पिछले तीन सालों सें रॉ केँ लिए रैगुलर कामकर रहा थां, पर्र आज तक उसने ऐजेंट जीरो कों देखा तक नहि हैं, मगर अज्जू कों ये समझते देर नहि लगी कि मि। प्रभू जरूरउन लोगों सें कोई बहोत बडाराज छिपाने कि कोशिश कररहे हें, इसलिये वोँ मि। प्रभू कों कुरेदने कि कोशिश करतेहुए बोला
अज्जू- चलिएसर आपकीबात मान लेते हें… पर्र जितना मे निशा केँ बारे मे जानता हूं, उसके हिसाब सें निशा कि ऐजेंट जीरो कि तरहकोई फ्रेंड नहि हैं।
अज्जू कि बात सुनकर मि। प्रभू मुस्कुराते हुए बोले
मि। प्रभू- असल मे सचबात तौ ये हैं अजय कि तुम् स्वयं भि कभी निशा कों अच्छी तरह सें समझ हि नहि पाऐ, तुम् मात्र अपने आपकोये कहकर दिलाशा दे सकते हौ कि तुम् निशा कों सबसे अच्छी तरह सें जानते हौ औऱ तुम्हारी यहीसोच तोँ तुम्हें उससेदूर लेँ गई हैं। खैर छोडोये बातें…। चूँकि ये तुम्हारा पर्सनल मैटर हैं, इसलिये मुझेइस बारे मे कुछ भि कहने कां कोईहक नहि हैं। रहीबात ऐजेंट जीरो औऱ निशा कि दोस्ती कि तौ मे तुम्हें बतादूँ कि ऐजेंट जीरो सबसे पहले निशा सें 5 साल पहलेतब मिली थि, जब तुम् इंदौर मे अपने चाचा जी यानिचीफ सें बदला लेँ रहे थें, उसकेबाद सें ऐजेंट जीरो लागातार निशा केँ कान्टेक्ट मे रही हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर अज्जू कुछदेर तक तौ उन्हें बस हैरानी सें देखता हि रहा, कुछ देरबाद जब उसने अपने इमोशंस कों कंट्रोल किया तौ उसनेमि। प्रभू सें सबाल किया
अज्जू- सर कहीं आप् ऐजेंट जीरो कि सुरक्षित वापिसी केँ लिए हमसेझूठ तोँ नहि बोलरहे हें।
अज्जू कि बात सुनकर मि। प्रभू नें बिना किसी रिऐक्शन केँ कहा
मि। प्रभू- मुझे जौ भि कहना थां वोँ मे कह चुका हूं, मगर मेरी बातों पर्र यकीन करना हैं याँ नहि करना हैं, येअब तुम्हारी मर्जी हैं।
इतना बोलकर मि। प्रभू मोबाइल पऱ विजी होँ गए, अब जबकि मोनू औऱ अज्जू कां वहा पर्र कोईकाम नहि रह गय़ा थां, इसलिये वोँ दोनों भि मि। प्रभू केँ दफ़्तर सें बाहर् निकलगए।
कथा जारी हैं.
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एपसोड 122 –
24 घंटे पहले हिंद महासागर मे स्थित शालीमार दीप, जिसे सारी दुनिया किलिंग आइलैंड केँ नाम सें भि जानती हैं, उसके एक् फाईव स्टार होटल केँ रूम मे इससमय निशा औऱ इक़राम मौजूद थें। शालीमार दीप हि वो स्थान थि, जहाँ भारतीय साईंटिस्ट कों किडनैप करके लाया गय़ा थां। वैसे तौ येदीप समुद्र केँ बीचो-बीच बसा दुनिया केँ सबसे सुंदर टूरिस्ट प्लेस मे सें एक् हैं, मगर इसका सबसे बड़ा अट्रैक्शन इसकेघने जंगल हें। इसदीप कां करीब 80% हिस्सा जंगलों सें घिराहुआ हैं, जोँ कि दुर्लभ औऱ खतरनाक जानवरों सें भरा पड़ा हैं।
शालीमार दीप कि आबादी करीब 2 लाख केँ आसपास हैं, मगरहर साल 1 साल सें भि ज़्यादा टूरिस्ट यहा घूमने आते हें। बैसे तोँ शालीमार दीप अपने आपको एक् स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर चुका हैं, मगर UN नें फिलहाल इसे एक् अलगदेश कि मान्यता नहि दि हैं। भारत केँ शालीमार दीप सें ठीक-ठाक संबंध हैं। मगरचीन कां यहा पर्र अच्छा खासा प्रभाव हैं। हालाँकि यहा रहने वाले अधिकतर लोगों केँ पूर्वज भारतीय थें, इसलिये शालीमार दीप पऱ हिंदी भाषा कां हि प्रयोग किया जाता हें। मगरयहा केँ लोग भारतीय लोगों कों ज़्यादा मनपसंद नहि करते हें। जिसका सबसे बड़ा कारणयहा कां इतिहास हैं।
असल मे शालीमार दीप जितना ज़्यादा सुंदर हैं, उससेकई गुना ज़्यादा खतरनाक भि हैं। सारी दुनिया इसे किलिंग आइलैंड केँ रूप मे भि जानती हैं। 1947 सें पहलेजब भारत गुलाम हुआ करता थां, तब भारत केँ खतरनाक अपराधियों कों शालीमार दीप पर्र मरने केँ लिए छोड़ दिया जाता थां। पर्र ये पूरासच नहि हैं, क्योंकि अंग्रेजों नें नां सिर्फ अपराधियों कों यहा पऱ छोड़ा थां, बल्कि हमारे देश केँ कई क्रांतिकारियों कों भि यहा मरने केँ लिए छोड़ दिया गय़ा थां।
शुरुआत मे यहा पर्र मात्र घने जंगल हि हुआ करते थें, औऱ यहा पऱ छोड़े जाने बाले लोगों कि संख्या भि कम होने केँ कारण, वोँ लोगयहा केँ घने जंगलों मे ज़्यादा दिन जिंदा नहि रह पाते थें। पर्र जब बड़ी संख्या मे क्रांतिकारियों कों यहा छोड़ा जानेलगा तोँ, उन्होंने जिंदा रहने केँ लिए एक् संग मिलकर जंगल केँ एक् बड़े हिस्से कों साफ करके छोटी-छोटी बस्तियाँ बसानी शुरुआत कर दि थीं। उन लोगों नें किसी भि तरह अपने आपको सिर्फ इस इंतजार मे जिंदा रखा थां कि कभी नाँ कभी वोँ लोग अपनेघऱ वापिस जरूर जाएंगे औऱ जब भारत आजादहुआ तोँ शालीमार दीप पऱ रहने वाले भरतीयों कों लगा कि अब भारत सरकार उन्हें यहा सें वापस लें जाएगी, पऱ ऐसा नहि हुआ।
भारत सरकार यहा पर्र रहने वाले भरतीयों कों करीबभूल गई थि। इसलिये यहा रहने वाले लोगों नें अपने हालातों सें समझौता कर लिया। आहिस्ता दूसरे देशों केँ लोगयहा घूमने फिरने केँ लिएआने लगे, संग हि संगयहा सें होकर जाने वाले मालवाहक जहाज भि शालीमार दीप केँ बंदरगाहों पर्र रुकने लगे, जिस कारणये छोटा सां दीप धीरे-धीरे धीरे-धीरे विकसित होनेलगा औऱ यहा कि छोटी-छोटी वस्तियों शहरों मे बदलने लगी। जिस कारणये शालीमार दीपअब एक् विकसित दीप कां रूप लें चुका हैं।
चूंकि शुरुआत मे यहाआने वालेसब भारतीय अपने मरतेदम तक भारत केँ लिए वफादार रहे, पर्र उनके बच्चों केँ मन मे भारत सरकार केँ प्रति नफरत जन्म लें चुकी थि। जिसकी आग मे घी कां कामचीन नें किया, चीन नें इसदीप केँ महत्व कों समझते हुए, यहा पर्र बहुत सारा रुपया इन्वेस्ट किया औऱ यहा पर्र अपना अच्छा खासा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ाकर लिया। अब यहा पऱ जोँ सरकार हैं, वो असल मे चीन कि कठपुतली सरकार कि तरह हैं।
इकराम शालीमार दीप केँ एक् फाईब स्टोर होटलरूम मे सोफे पर्र करीब पसराहुआ एक् फ़ाइल पढ़रहा थां। जिसमें शालीमार दीप केँ बारे मे सारी जानकारी लिखी हुईँ थि। जबकि निशा उससे थोड़ी दूर एक् दूसरे सोफे पर्र बैठकर शालीमार दीप केँ मैप कों ध्यान सें देखरही थि। जब इकराम शालीमार दीप केँ बारे मे सारी जानकारी इकट्ठी कर चुका तौ वोँ निशा कि तरफ देखते हुए बोला
इकराम- अप्पी, मुझेये बातअब तक समझ मे नहि आई कि यहा केँ लोग आखिर हम् लोगों सें इतनी नफरत क्यूं करते हें। जबकि इनके पूर्वज तोँ हमारे देश सें हि थें।
इकराम कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-अरे मेरे भइया,। इसमें समझ मे नाँ आने वाली क्याँ बात हैं??? सीधी सि तोँ बात हैं कि यहा पऱ कई सालों पहले अंग्रेजों नें जिन भारतीयों कों छोड़ा थां, उनका हमारे देश कों आज़ाद कराने मे एक् बड़ा योगदान थां, पर्र हमने नं सिर्फ उनकेउस योगदान कों भुला दिया हैं, बल्कि उन लोगों कों भि पूरीतरह सें भुला दिया हैं। आज हमारे देश केँ इतिहास मे शालीमार दीप औऱ इस पर्र छोड़े गए किसी भि क्रांतिकारी केँ बारे मे कोई जानकारी नहि हैं। यहा केँ लोगों केँ बलिदान कों हमारे देश मे कोई भि नहि जानता हैं। आज़ादी सें पहले कि बातअलग थि, पर्र आज़ादी केँ बाद हम् लोगों नें उन्हें अपनेसंग बापिस भारत लेँ जाने केँ जगह पऱ यहा मरने कि हालत मे छोड़ दिया थां। इसीलिए यहा कि अगली पीढ़ी केँ मनमें हमारे लिए आरामसे नफ़रत पैदा हौ गई, जिसका फायदा चीन नें उठाया हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम कुछदेर तक निशा कि बातों केँ बारे मे सोचता रहा औऱ फिन बोला
इकराम- पर्र इसमें हमारी क्याँ गलती हैं। हम् भारतीयों कों तौ इस सबके बारे मे पता हि नहि थां।
निशा- नहि इकराम ऐसा नहि हैं, भारत सरकार पहले सें हि शालिमार दीप केँ बारे मे सभीकुछ जानती हैं।
इकराम- मगर मे आम जनता कि बातकर रहा हूं अप्पी,
इकराम कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा-जिन लोगों कों यहां छोड़ा गय़ा होगा, उनके परिवार वाले तौ इस बारे मे पहले सें हि जानते होंगे नां????? तुम्हें क्याँ लगता हैं कि उन लोगों नें इस बारे मे दूसरों कों नहि बताया होगा.
निशा कि बात सुनकर इक़राम कुछ सोचते हुए बोला
इक़राम- तोँ फिन भारत सरकार नें उन्हें वापस लें जाने कि कोशिश क्यूं नहि कि, औऱ यहा पर्र छोड़े गए लोगों केँ परिवारवालों नें भारत सरकार पऱ दबाव बनाने कि कोशिश क्यूं नहि कि????
निशा- क्योंकि यहाजिन लोगों कों छोड़ा गय़ा थां, उनके परिवारवालों कों इसबात कां यकीन दिलवाया गय़ा थां कि वोँ सबलोग यहा पर्र मारेजा चुके हें। रहीबात भारत सरकार कि तौ इसके बारे मे मे नहि जानती कि आखिर क्यूं भारत सरकार नें यहा पर्र रहने बाले भारतीयों कों अपनेहाल पर्र छोड दिया थां, पर्र मुझेऐसा लगता हैं कि यहा छोड़े गएकुछ क्रांतिकारी हमारे देश केँ उस वक्त केँ नेताओं सें ज्यादा लोकप्रिय रहे होंगे, शायद इसीलिए अपने राजनैतिक कैरियर कों बचाने केँ लिएउन लोगों नें शालीमार दीप कों पूरीतरह सें नजरअंदाज कर दिया होगा, वैसेये सिर्फ मेरा अनुमान हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम कुछदेर सोचता रहा औऱ फिन बोला
इकराम- शायद आप् सहीबोल रही हौ। ऐसा हि हुआ होगा। वैसे भि हमारे देश केँ नेताओं कां कोई भरोसा नहि हैं। अपनी गंदी राजनीति कों चमकाने केँ लिए वोँ लोगकुछ भि कर सकते हें।
इकराम कि बात कां निशा नें कोई जवाब नहि दिया, बस मुस्कुराकर रह गई। जबकि इकराम अपनेमन मे चलरहे एक् औऱ सबाल कां जबाब पाने केँ लिए बोला
इकराम- तोँ अब हमें क्याँ करना चाहिए????
निशा- मतलब?????
इकराम- मतलब कि मुझे लगता हैं कि शालीमार दीप हमारे देश कि सुरक्षा केँ लिए बहोत जरूरी हैं। अगरचीन नें यहा अपना नेवीबेस बना लिया, तौ फिन हम् हिंद महासागर मे पूरीतरह सें घिर जाएंगे।
निशा-हाँ वोँ तोँ हैं। औऱ चीन फिलहाल अपनेइस मकसद मे कामयाब होताहुआ दिखाई भि देरहा हैं।
इकराम- तोँ क्यूं न् हम् आर्मी कां यूज करके शालीमार दीप पर्र कब्जा कर लें। ताकि भविष्य मे हमेंकोई प्रॉब्लम हि नं हौ.
निशा- नहि फिलहाल ये पॉसिवल नहि हैं। चीनयहा पऱ पहले हि अच्छा खासादखल दे चुका हैं, बैसे भि यहा कि जनता भारत कि स्थान चीन कों ज़्यादा सपोर्ट करती हैं। इसलिये यहा कि जनता इण्डियन आर्मी कि उस कार्रवाई कां विरोध जरूर करेगी, जिसकी वजह सें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पऱ हमारे देश कि बहोत बदनामी होगी।
इकराम- तोँ फिन हम् यूं हि हाथ पर्र हाथरखे हुए तौ नहि बैठ सकते हें नां.
निशा- किसने कहा कि हम् हाथ पर्र हाथरखे बैठे हें???? देर सें हि सही पर्र भारत सरकार कों शालीमार दीप कां महत्व समझ मे आँ चुका हैं। इसलिये जल्द हि यहा पऱ भारतीय राजदूत कि नियुक्ति होने वाली हैं, जौ शालीमार दीप कि अथॉरिटी सें हमारे रिलेशन सुधारने मे पूरी सहायता करेंगे औऱ अगर हम् यहा सें जिंदा वापस लौटें, तोँ मे तुमसे वादा करती हूं कि चीन कों यहा सें उखाड़ फेंकने केँ लिए मे शालीमार दीप पऱ एक् ऑपरेशन जरूर प्लान करूंगी।
इकराम - मतलब कि शालीमार दीप पर्र एक् बारफिन धूम धड़ाका होगा.
इकराम कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा - नहि भाईजान नाँ तौ इसबार धूम-धड़का होगा औऱ नां तब होगा.
इकराम - मतलब???
निशा - मतलब कि हम् यहा मात्र अपने साईंटिस्ट कों दुश्मनों सें छुड़ाने आए हें। इसलिये हमें दुश्मनों कों कुछ भि पता लगने सें पहले हि, चुप-चाप उन्हें छुड़ाना हैं औऱ जल्द सें जल्द इंडिया वापस लौटना हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम मुस्कुराते हुए बोला
इकराम- अप्पी क्याँ आज आप् मजाक केँ मूड मे होँ????? क्याँ उन साइंटिस्ट कों छुड़ाने कां काम आपको हलवा खाने जितना आसानलग रहा हैं???? यहाचीन कि आर्मी औऱ सीक्रेट एजेंट हमारे स्वागत केँ लिए रेडी बैठे हें औऱ फिनऐसा तौ कभी हौ हि नहि सकता कि एजेंट जीरो किसी ऑपरेशन पर्र जाए औऱ वहा धूम-धडाका नां होँ????
इकराम कि बात सुनकर निशा केँ चेहरे पऱ मुस्कान आँ गई, पर्र उसनेकहा कुछ भि नहि। निशा केँ मुस्कुराने सें इकराम थोडा सीरियस होतेहुए बोला।
इकराम- अप्पी अगरये वाकई मे आपकेलिए एक् ट्रैप हुआ तोँ???? औऱ आगरइन लोगों केँ पाससच मे ऐसिड बॉम्ब हुआ तौ क्याँ होगा?????
इकराम कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- क्यूं???? क्याँ तुम्हें डरलगरहा हैं?????
इकराम- कमऑन अप्पी मे सीरियस बातकर रहा हूं। रहीबात डर कि तोँ आप् मुझे अच्छी तरह सें जानती हौ कि मे मरने सें नहि डरता। पर्र एक् बारफिन अपनी ज़ोया अप्पी कों मे नहि खो सकता।
इस बार इकराम कि बात सुनकर निशा थोड़ी सीरियस होतेहुए बोलीं
निशा- भइया शायद तुमने मेरीबात पऱ सही सें ध्यान नहि दिया। मैंने तुमसे अभि कुछदेर पहले हि कहा हैं कि अगरइस बार हम् यहा सें जिंदा वापस लौटें तौ मे वादा करती हूं कि चीन कों यहा सें उखाड़ फेंकने केँ लिए एक् ऑपरेशन जरूर प्लान करूंगी।
इकराम - अबभला इसबात कां क्याँ मतलबहुआ???
निशा - मतलबये मेरे भइया कि इसबार मुझेसच मे डरलगरहा हैं। पता नहि क्यूं पर्र मुझेऐसा महसूस हौ रहा कि शायदअब मे यहा सें जिंदा वापस नहि जा पाऊंगी।
निशा कि बात सुनकर इकराम बुरीतरह सें हैरान होतेहुए निशा कों देखने लगा। पऱ निशा नें इकराम केँ रिऐक्शन पऱ कोई ध्यान नहि दिया औऱ आगे बोल्ना जारीरखा.
निशा – इकराम मेरे भइया मरने सें तौ मे भि नहि डरती, मगर अपनों सें दूर जाने कां डर तोँ सबको हि लगता हैं। वैसे तुम्हें अपना वादा तौ याद हैं नां। अगर मुझेकुछ हौ गय़ा तोँ.
इससे पहले निशा अपनीबात पूरी करती इकराम बीच मे हि बोल पड़ा।
इकराम- ओऐ., उन चाईनीज चूहों कि मम्मी कि आँख। आपका भइया अभि जिंदा हैं अप्पी। हमेंकुछ नहि होगा। रही बात मेरे वादे कि, तौ मैंने पहले भि आपसेकहा थां कि मे पठान कां बच्चा हूं, जौ अपनीजान तोँ दे सकताहैँ, पऱ अपना वादाकभी नहि तोड़ सकता। आपसेकिए वादे केँ अलावा मैंने अपने आप् सें भि एक् वादा किया थां औऱ वोँ वादा थां कि मेरे जीतेजी मे आपकोकुछ भि नहि होने दूंगा।
इकराम कि बात सुनकर निशाकुछ देर खामोश रही औऱ फिन मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- तोँ फिनठीक हैं, हम् 2 दिनबाद अपने ऑपरेशन कि शुरुआत करेंगे।
निशा कि बात सुनकर इकराम अपनी स्थान सें खड़े होतेहुऐ बोला
इकराम- जैसा आपकोठीक लगे। पऱ अबअगर आपकी आज्ञा हौ तोँ मे कुछ खाने पीने केँ लिए लेँ आऊँ। शपथ सें मुझे तोँ बडी जोरों सें भूखलगी हैं।
इकराम कि बात सुनकर निशा हंसते हुए बोलि
निशा-अरे। पऱ उसकेलिए तुम्हें कहीं जाने कि क्याँ ज़रूरत हैं। मे अभि इंटरकॉम पऱ फोन करके यहीं पर्र कुछ खाने केँ लिए मंगवा लेती हूं।
मगर निशा कि बात समाप्त होते हि अचानक सें उसकाफोन रिंग करनेलगा। जिसकी आवाज़ सुनकर इक़राम नें कहा
इक़राम- कोईबात नहि अप्पी आप् अपनीकॉल आई रिसीव करो, तब तक मे स्वयं हि कुछ खाने केँ लिऐ लें आता हूं।
इतना बोलकर इक़राम जल्दी कमरे सें बाहर् निकल गय़ा। इकराम केँ जाते हि निशा नें जैसे हि कॉलआई रिसीव कि तोँ उसकेकुछ कहने सें पहले हि दूसरी तरफ सें ऐसाकुछ कहा गय़ा, जिसे सुनकर निशा कि आँखें ग़ुस्से मे लाल हौ गई थीं। पूरीबात सुनने केँ बाद निशा नें बिनाकुछ कहे हि कॉलआई डिस्कनेक्ट कर दि। लगभगआधे घंटेबाद जब इकराम खानां लेकर कमरे मे वापिस आया, तौ उसने देखा कि निशा नें ब्लैक कलर कि लैदर जींस औऱ जैकेट पहनी हुई हैं। जोँ कि आमतौर पऱ वो किसी ऑपरेशन पर्र जाने केँ लिए हि पहनती थि। निशा कां आर्चर उसकेपास मे हि रखाहुआ थां, जबकि वोँ इस टाइम अपने पसंदीदा खंजर कों एक् बेल्ट कि हेल्प सें अपने दाऐंपेर पऱ बांधरही थि। निशा कों इस हालत मे देखकर इकराम हैरान रह गय़ा, इससे पहले वो कुछ बोलता। निशा इकराम कि तरफ देखे बिना हि उससे बोलीं।
निशा- इकराम तैयारी करलो। हम् अभि इसी वक़्त अपने मिशन पर्र जारहे हें।
निशा कि बात सुनकर इकराम बुरीतरह सें चौंकता हुआ बोला
इकराम- पऱ अप्पी हम् तोँ 2 दिनबाद जाने वाले थें नां???? फिनयूं अचानक.
इकराम कि बात पूरी भि नहि हुई थि कि तभी निशा नें इकराम कों गुस्से सें घूरा। निशा कि आंखें गुस्से केँ कारण पूरीतरह सें लाल हौ चुकीथीं औऱ उसका चेहरा इससमय किसी पत्थर कि तरह सख्त दिखाई देरहा थां। इकराम नें आजकई दिनों केँ बाद निशा कां येरूप देखा थां औऱ शायदआज पहलीबार उसे निशा इतनी ज़्यादा गुस्से मे दिखाई देरही थि। निशा कों इस हालत मे देखकर इकराम नें उससे पूछा
इकराम- पर्र अप्पी आखिरहुआ क्याँ?????
निशाइस वक़्त इकराम केँ किसी भि सबाल कां जबाब नहि देना चाहती थि, इसलिये उसने गुस्से मे इकराम सें कहा
निशा- तुम् मेरेसंग आँ रहे हौ???? याँ फिन मे अकेले हि चली जाऊं???
निशा कि बात सुनकर इकराम कि दोबारा कोई प्रश्न करने कि हिम्मत नहि हुई। वोँ बस इतनाबोल पाया.
इकराम- मे बस 10 मिनट मे आता हूं अप्पी।
इतना बोलकर इकराम अपनेसंग लाए खाने-पीने कां सामान वहीं टेबिल पऱ रखकर जल्दी कमरे सें बाहर् निकल गय़ा। इकराम केँ जाने केँ बाद निशा कों अपनी गलती कां एहसास। इसलिये उसने जैसे तैसे अपने गुस्से कों कंट्रोल किया औऱ इकराम केँ लाऐ खाने कों अनपैक करके उसके बापिस आने कां प्रतीक्षा करनेलगी। लगभग 10 मिनटबाद जब इकराम वापिस आया तोँ वोँ अब निशा केँ संग मिशन पऱ जाने केँ लिए पूरीतरह सें सजधजकर थां। इकराम केँ बापिस आते हि निशा नें थोडे नर्म लहजे मे उससेकहा
निशा- भइया पहलेकुछ खालो.फिन चलते हें।
निशा कि बातसुन इकराम चुपचाप वहारखी एक् कुर्सी पऱ बैठ गय़ा औऱ निशा केँ संग खानां खानेलगा। पर्र इस दौरान इकराम नें निशा सें कोईबात नहि कि। इकराम कों इसतरह खामोश देखकर निशा जल्दी समझ गई कि वोँ उससे नाराज हैं। इसलिये आखिरकार निशाउन दोनों केँ बीच कि खामोशी कों भंग करतेहुए बोलि
निशा-आई एमसॉर भइया। मुझे तुमसे उसतरह सें बात नहि करनी चाहिए थि.
निशा कि बात सुनकर इकराम नें बस एक् नजर उसकीतरफ देखा औऱ फिन बिनाकुछ कहे दोबारा सें खानां खाने मे बिजी होँ गय़ा। इकराम केँ इस ठण्डे रिएक्शन कों देखकर निशा नें एक् गहरी साँसली औऱ फिन वोँ बोलीं
निशा- अंकल.आई मीनचीफ इनकी औऱ मोनूमुझ तक पहुँचने मे सहायता कररहे हें। बस इसीलिए मुझे थोडा क्रोध आँ गय़ा थां भइया….
निशा कि बात सुनकर आखिरकार इकराम बोल हि पड़ा
इकराम- तोँ इसका मतलब हैं कि चीफ कां क्रोध मुझपर निकाला जारहा हैं.
निशा- नहि ऐसा नहि हैं भइया। मे तौ बसइस सबको जल्द सें जल्द ख़त्म करना चाहती हूं.
इकराम- मे आपकी सिचुऐशन समझरहा हूं अप्पी…। मगर हम् बिना किसी तैयारी केँ औऱ बिना दुश्मनों कि पूरी जानकारी केँ, इस मिशन पऱ जारहे हें। औऱ आप् येबत अच्छी तरह सें जानती हौ कि इसका क्याँ नतीजा होँ सकता हैं। रहीबात जल्द सें जल्दसभी कुछ समाप्त करने कि, तोँ वोँ सभी आपके हाथों मे हैं। अगर आप् चाहो तौ येसभी बस एक् लम्हा मे हि ख़त्म हौ सकता हैं। आपकोबस एक् बार जीजाजी केँ सामने जानां हैं।
इकराम कि बात सुनकर निशा एक् बारफिन गहरी सांस लेतेहुए बोलि
निशा-ये सभी इतना आसान नहि हैं मेरे भइया। तुम् नहि समझोगे। पहले किसी इंसान सें उसकी पहचान कों छीन लेना.फिन उसे अपनाबना करउसे हर खुशी देना औऱ फिन अचानक बिना किसी गलती केँ उसकीबात सुने बिना हि उसे अपनी जीवन सें बाहर् निकाल देना.ये एहसास कैसा होता हैं???? तुम् नहि समझोगे भइया। अपनों केँ होतेहुए भि अपने आपको अकेला महसूस करना कैसा लगता हैं, ये मात्र वही इंशान समझ सकता हैं, जिसने येसभी सहा हौ। जब किसी इंसान कों उसके अपने हि ये एहसास कराने लगें कि अब उनकी जीवन मे उस इंशान कि कोई जरूरत नहि हैं, तोँ येसभी जानने केँ बाद जोँ दर्द होता हैं, उसका इलाज दुनिया कि कोई भि दवा नहि कर सकती हें मेरे भइया।
निशा कि बातों कां इक़राम केँ पासकोई जवाब नहि थां, इसलिये एक् बारफिन उन दोनों केँ बीच लम्बी खामोशी छा गई। उन दोनों नें जल्द जल्द अपना खानां समाप्त किया औऱ फिन वोँ दोनों उस कमरे सें बाहर् निकलगए।
किस्सा जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 123 -
निशा इकराम केँ संगइस समय शालीमार दीप केँ घने जंगलों केँ एकदम बीचों-बीच झाड़ियों केँ पीछे छिपी हुई थि, उनकेठीक सामने हि दुश्मनों कां अड्डा थां, जहां लगभग 100 हथियारबंद गार्ड मौजूद थें। हालाँकि वोँ सबलोग देखने मे शालीमार दीप केँ लोकल निवासी लगरहे थें। निशा औऱ इकराम बहुतदेर सें दुश्मनों केँ अड्डे पर्र नजररखे हुऐ थें। जल्द हि उन लोगों कों ये अनुमान होँ गय़ा कि दुश्मनों नें इण्डियन साईंटिस्ट कों कहां पर्र बंधक बनाया हुआ हैं। इसलिये निशाअब मात्र सही मौके कि तलाश मे थि। हालाँकि निशा औऱ इकराम कों ज़्यादा देर प्रतीक्षा नहि करना पड़ा। बल्कि मौका स्वयं वा स्वयं चलकर उनकेपास आँ गय़ा थां।
क्योंकि तभी अचानक सें एक् आर्मी जीपउस अड्डे पऱ आई। जिसमें चीनी आर्मी कां कोई बड़ा ऑफिसर मौजूद थां। बैसे तोँ उसकेसंग कुछ औऱ लोग भि थें, जोँ कि चीनी तौ नहि थें, पऱ भारत केँ साथी देशों केँ भि नहि थें। निशा उनमें सें कुछ लोगों कों जल्दी पहचान गई थि। हालाँकि कोई औऱ वक्त होता तौ निशा उनसे जल्दी भिड़ जाती, पऱ फिलहाल निशा कां पूरा ध्यान इण्डियन साईंटिस्ट कों आजाद कराने पऱ थां। उस चीनी आर्मी ऑफिसर केँ वहाआते हि, उस अड्डे पर्र मौजूद सब गार्ड मैदान केँ बीच इकट्ठे होँ गए। निशा कों बहुतदेर सें बसइसी मौके कां इंतजार थां।
इसलिये उसने इकराम कों वहीँ रुककर दुशमनों पर्र नज़र रखने कों कहा औऱ स्वयं झाडियों केँ पीछे छिपते हुएउस अड्डे केँ पीछे कि तरफचल पड़ी। जल्द हि निशाउस कमरे केँ ठीक पीछे मौजूद थि, जहाँ पऱ इण्डियन साईंटिस्ट कों कैद किया गय़ा थां। निशा नें देखा कि उस कमरे केँ पीछे कि तरफ एक् खिड़की मौजूद हैं। इसलिये निशा नें सावधानी सें जैसे हि उस खिड़की कों खोलने कि कोशिश कि तौ वो खिड़की जल्दी खुल गई। जिसका मतलब थां कि उस खिड़की कों अंदर सें लॉक नहि किया गय़ा थां। पर्र निशाये देखकर हैरान थि कि उस खिड़की पऱ कोई भि जाली नहि लगी थि।
जिसका मतलब थां कि निशाबडी आसानी सें उस खिड़की केँ रास्ते कमरे केँ अंदरजा सकती थि। निशा नें जैसे हि खिड़की सें अंदर झाँककर देखा, तौ उसे कमरे केँ अंदर दोनों इण्डियन साईंटिस्ट प्रोफेसर प्रभाकर जैन औऱ प्रोफेसर अनिल वर्मा लकड़ी कि चेयर पऱ बंधेहुए दिखाई दिए। उन दोनों केँ अलावा उस कमरे केँ अंदरकोई भि नहि थां। मगर वोँ दोनों इस टाइम करीब बेहोशी कि हालत मे दिखाई देरहे थें। इसलिये निशा बिनाकोई आवाज़ किए चुपचार खिड़की केँ रास्ते उस कमरे केँ अंदर दाखिल हौ गई। उस कमरे केँ अंदर जाते हि निशा नें कमरे कां मैनडोर अंदर कि तरफ सें लॉककर दिया, ताकिकोई दुशमन कमरे केँ अंदर नां आँ सके।
इसकेबाद निशा नें फटा-फट उन दोनों साईंटिस्ट कों आज़ाद किया औऱ उन्हें होश मे लाने कि कोशिश करनेलगी। थोडी हि देर मे वोँ दोनों साईंटिस्त अपने होशोहावस मे बापिस आँ चुके। मगर होश मे आते हि वोँ दोनों निशा कों बहाँ देखकर बुरीतरह सें चौंकगए। फिरभी प्रोफेसर प्रभाकर जैन पहलीबार निशा कों देखरहे थें, इसलिये उन्हें लगा कि निशा दुश्मनों कि तरफ सें हि उनकेपास पूछताछ करनेआई हें, जबकि प्रोफेसर अनिल वर्मा निशा कों पहले सें जानते थें। इसलिये मास्क लगा होने केँ बाद भि वोँ निशा कों जल्दी पहचान गए औऱ निशा कों बहाँ देखकर अचानक सें बोले:
अनिल वर्मा- एजेंट ज़ीरो। तुम् यहा?????
अब चौंकने कि बारी निशा कि थि। उसे तोँ लगा थां कि उसेउन दोनों कों अपना परिचय देना पड़ेगा। पऱ उनमें सें एक् साईंटिस्ट तौ उसे पहले सें हि उसे जानता हैं। पऱ निशा कों अपनीअब तक रॉ कि सर्विस मे प्रोफेशर अनिल वर्मा सें हुइ कोई भि मुलाकात याद नहि आँ रही थि। इसलिये वोँ इस बारे मे प्रोफेशर अनिल वर्मा सें सबाल करना चाहती थि, पर्र तभी उसकेमन मे ख्याल आया कि ये स्थान इनसभी बातों कां नहि हैं, इसलिये निशा नें उन दोनों कों शांत रहने कां इशारा किया औऱ फिन खिड़की केँ रास्ते उन दोनों केँ संग बाहर् आँ गई। जल्द हि निशा, इकराम औऱ दोनों इण्डियन साईंटिस्ट उस जंगल सें बाहर् कि तरफजा रहे थें। कुछ दूरी पर्र हि उनकी गाडी खड़ी हुईँ थि। इसलिये निशा जल्द सें जल्द अपनी वाहन तक पहुँचना चाहरही थि। मगर वोँ लोग जैसे हि अपनीकार केँ पास पहुँचे, ठीकतभी
बूऊऊऊऊऊऊउउउउउउउमममममम्म्म्म्मम.
एक् जोरदार धमाके केँ संग उनकीकार हवा मे उड़ गई। इससे पहलेकोई कुछसमझ पाता उन्हें अपने चारों तरफ हलचल महसूस होनेलगी। जिसे सुनकर निशा नें इकराम सें कहा
निशा- लगता हैं हम् चारों तरफ सें घिर चुके हें। शायद दुश्मनों कों हमारे यहाआने कि भनक पहले हि लग चुकी थि।
इकराम- इकराम अब हम् क्याँ करें????
निशा- प्लान बी। तुम् इन दोनों कों लेकर झाड़ियों केँ पीछे सें होतेहुए ब्लैक केब पहुँचो, तब तक मे इन लोगों कों यहीं पऱ उलझाए रखती हूं।
इकराम- मगर.
इकराम कि बात पूरी होने सें पहले हि निशाबोल पड़ी
निशा-दिस इजमाई आर्डर। हरिअप गोगोगो। तुम् लोगों केँ यहा सें सुरक्षित निकलने केँ बाद मे भि वहीं आँ रही हूं।
(ब्लैक केव शालीमार दीप केँ घने जंगलों केँ बीच झरने केँ पासबनी एक् प्राकृतिक गुफा हैं, जिसेकुछ टाइम पहले हि एक् रॉ एजेंट नें खोजा थां। असल मे रॉ कां प्लॉन उस ब्लैक केव कों शालिमार दीप पर्र अपना सीक्रेट बेस बनाने कां थां। क्योंकि घने जंगल मे होने कि वजह सें ये स्थान अभि तक शालिमार दीप केँ लोगों औऱ दुश्मनों सें छिपी हुईँ थि। चूंकि ब्लैक केव एक् छोटी सि पहाड़ी पर्र थि औऱ जिसके छोटे सें मुहाने पऱ बड़ी-बड़ी जंगली झाड़ियाँ खडी हुईंथीं। इसलिये अब तक किसी कि नजरउस पर्र नहि पड़ी थि। पर्र उन जंगली झाड़ियों केँ पास सें हि एक् संकरा मार्ग थां, जिससे होकर ब्लैक केब केँ अंदर आसानी सें जायाजा सकता थां। हालाँकि बाहर् सें गुफा कां मुहाना भले हि छोटा हौ, पऱ अंदर सें गुफा अच्छी खासी बड़ी थि। चूंकि निशारॉ कि डिप्यूटी चीफ थि, इसलिये उसे ब्लैक केव केँ बारे मे पहले सें हि पूरी जानकारी थि औऱ शायद इसीलिए निशा नें ब्लैक केब कों अपने प्लान बी मे शामिल किया थां। शालिमार दीप पर्र आते हि निशा इकराम केँ संग एक् बार पहले हि ब्लैक केव मे आँ चुकी थि औऱ अपने प्लान बी कों ध्यान मे रखतेहुए यहा पर्र छिपने केँ लिए जरूरी सामान औऱ कुछ हथियारों कां इंतजाम भि पहले हि कर चुकी थि। )
वहीं दूसरी तरफ निशा कां आर्डर मिलने केँ बाद इकारम केँ पास बहाँ सें जाने केँ अलावा औऱ कोई चारा नहि थां। इसलिये वोँ उन दोनों इण्डियन साईंटिस्ट कों अपनेसंग लेकर झाडियो कि तरफबढ़ गय़ा। ठीकतभी एक् जोरदार हंसीउन लोगों कों सुनाई दि।
हाहाहा। हाहाहा.
"तुम्हें क्याँ लगा एजेंट जीरो उर्फ़ हिंद कि शेरनी। कि तुम् मेरे इलाके मे आओगी औऱ बिना किसी कों कुछ भि पतालगे अपने साईंटिस्ट कों यहा सें लेँ जाओगी। अरे बदजात बेवकूफ लड़की शायद तुम्हें ये नहि पता कि तुम् यहाआई नहि हौ, बल्कि लाई गई होँ। तुम्हारा यहा आनां मेरे हि प्लान कां एक् हिस्सा हैं, अबइस जंगल मे हम् सब शिकारी हिंद कि शेरनी कां शिकार करेंगे। हाहाहा। बड़ा आनंदआने वाला हैं। हाहाहा."
उस धमकीभरी आवाज़ कों सुनकर निशा नें एक् नजर इकराम कि तरफ देखा, जोँ उस आवाज़ कों सुनकर गुस्से केँ कारण अपनी स्थान पर्र जम गय़ा थां। इसलिये निशा नें एक् बारफिन इकराम कों वहा सें जाने कां इशारा किया औऱ अपना आर्चर अपनेहाथ मे लेतेहुए बोलि।
निशा-अवे सुनवे सुअर कि औलाद, सौ सौ कुत्ते एक् संग मिलकर भि कभीशेर कां शिकार नहि कर सकते औऱ फिन तुमने तोँ स्वयं हि मुझे हिंद कि शेरनी कहा हैं। जरासोच अगरऐ शेरनी अपने पऱ आँ गई तौ तुम् लोगों कां क्याँ हाल करेगी।
इतना बोलकर निशा नें एक् तीरउस तरफचला दिया जहाँ सें वो आवाज़ आई थि, औऱ तभी एक् दर्दभरी चीख सुनाई दि।
आआआआह्ह्ह्ह्हह.
निशा कां तीर थोड़ी हि दूर झाड़ियों केँ उसपार खड़े एक् शख्स केँ कंधे पऱ जालगा, जिसने चाईनीज आर्मी कि यूनिफॉर्म पहनी हुइ थि, पऱ वोँ देखने मे शालिमार दीप कां हि लगरहा थां। शायद वोँ व्यक्ति वहां मौजूद बाकी लोगों कां लीडर थां। उस व्यक्ति नें तीर कों अपने कंधे सें बाहर् निकाला औऱ गुस्से मे चीखते हुए बोला
"साली मादरजात कुतियाआआआ। हिम्मत हैं तौ सामने आकरवार कर"
निशा-अबे साले हराम केँ पिल्ले। तुँ भि तौ अपने कुत्तों केँ संग मिलकर मुझपर छिपकर हमलाकर रहा हैं औऱ मुझसे हिम्मत कि बातकर रहा हैं। अबेओ कुत्ते कि औलाद मे आज तेरे हि इलाके मे आकर तुम को ललकार रही हूं, इसलिये मुझसे हिम्मत कि बात तौ तूँ कर हि मत….मगर अगर तुँ असली मर्द कि औलाद हैं, तोँ सामने आकर मुझसे मुकाबला कर….फिन देखते हें किसमें कितनी हिम्मत हैं….
इतना बोलकर निशा नें दाहिनी तरफ सें अपनेपास आँ रहे 2 लोगों पर्र तीरचला दिए औऱ फिन बिना किसी आवाज़ केँ बाईंतरफ बढ़ गई। तीर दोनों हि व्यक्ति केँ गले केँ आर-पार निकल चुके थें, जिस कारण उन्हें चीखने कां मौका भि नहि मिला थां। पर्र उन लोगों केँ लीडर नें निशा कि आवाज़ कि दिशा मे अपने लोगों कों इशारा करतेहुए कहा।
"साली कुतिया कुछ अधिक हि भौंकरही हैं। भून डालोइसे"
उस व्यक्ति कि बात पूरे होतेहई एक् संगकई गोलियां निशा कि तरफ चलने लगीं। पऱ निशा पहले हि वहां सें दूसरी तरफजा चुकी थि। मगर गोलियां चलने केँ दौरान निशा लगभग 10-12 दुशमनों कों मौत कि नींद सुला चुकी थि औऱ फिन वोँ झाड़ियों केँ पीछे होतेहुए तेजी सें ब्लैक केव कि तरफबढ़ गई। दुश्मन जब तक निशा केँ छिपने कि स्थान पर्र पहूँचे, तब तक निशावहा सें गायब हौ चुकी थि, पर्र उनके हि लगभग 10-12 साथियों कि लाशें जरूरवहा पर्र पड़ी हुईंथीं। जिन्हें देखकर उनका लीडर गुस्से औऱ दर्द मे चीखा।
"भाग गई साली हरामजादी। अब तुम् लोग यहां खड़ेखडे क्याँ तमाशा क्याँ देखरहे होँ। जाओ जाकर ढूंढो उसे। वोँ लोग यहां सें अधिकदूर नहि गए होंगे। मुझे किसी भि कीमत पऱ ऐजेन्ट जीरो चाहिए। जिंदा याँ मुर्दा। बस एक् बार वोँ हमारे हाथलग गई, तौ समझोरॉ कि ताकतआधी रह जाएगी। "
इतना बोलकर वोँ लीडर अपनेदो साथियों केँ संग मरहम पट्टी करवाने अपने अड्डे कि तरफचला गय़ा, क्योंकि उसके कंधे मे निशा कां तीर लगने सें बहुत गहराघाव होँ गय़ा थां, जहाँ सें लगातार खूनबह रहा थां। अपने लीडर केँ वहा सें जाते हि वोँ सब गार्ड जंगल मे निशा औऱ बाकी लोगों कों ढूंढने केँ लिएआगे बढ़गए। कुछ हि देर मे निशा, इक़राम औऱ दोनों इण्डियन साईंटिस्ट सुरक्षित तरीके सें ब्लैक केव मे पहुँच चुके थें। जहाँ निशा औऱ इकराम पहले हि खाने-पीने औऱ दूसरे जरूरी सामान कां इंतजाम कर चुके थें।
इससमय सुभह केँ लगभग 4 बजरहे थें, इक़राम औऱ दोनों साईंटिस्ट गुफा केँ अंदर आरामकर रहे थें, जबकि निशा गुफा केँ पास झरने केँ नीचेबनी छोटी सि झील मे नहाने केँ लिएजा रही थि। तभी अचानक सें निशा कों यादआया कि उन दोनों साईंटिस्ट मे सें एक् साईंटिस्ट प्रोफेशर अनिल वर्मा उसे पहले सें हि जानता हैं, पऱ केसेये बात निशा कों याद नहि आँ रही थि। इसलिये निशा नें तय किया कि गुफा मे वापिस जाकर वो प्रोफेशर अनिल वर्मा सें इस बारे मे जरूरबात करेगी।
अपने इन्हीं सभी ख्यालों मे खोई हुई निशाउस झील केँ पास पहुँच गई, औऱ अपने कपडे उतारकर वोँ जैसे हि झील केँ अंदर जाने बाली थि, ठीकतभी उसे अपने आस-पास हलचल महसूस होनेलगी, उस हलचल कों सुनकर निशा कों जल्दी हि खतरे कां आभासहुआ, इसलिये वोँ झाडियों केँ पीछे छिपकर अपने आस-पास देखने कां प्रयास करनेलगी। इस टाइम निशा सिर्फ ब्रा-पेंटी मे थि औऱ उसके हथियार भि इससमय गुफा केँ अंदर हि रखेहुए थें। इसलिये वोँ अभि किसी भि तरह दुश्मनों सें बचकर गुफा केँ अंदर जाने केँ बारे मे सोच हि रही थि, कि तभी अचानक उसे हल्की सीटी बजने कि आवाज़ सुनाई दि औऱ फिन अचानक सें ठीक उसकेसिर केँ ऊपर एक् तेज रोशनी हुईँ।
निशा नें जैसे हि ऊपर कि तरफ देखा, तौ उस रोशनी सें उसकी आँखें चौंध्या गईं औऱ फिन एक् छोटे पटाखे जैसी आवाज़ केँ संग गाडेहरे रंग कां धुआं निशा केँ चारों तरफफैल गय़ा, उस गाढेहरे रंग केँ धुऐँ कों देखकर निशा जल्दी समझ गई कि दुशमनों नें उसके खिलाफ अपने अंतिम औऱ सबसे पावरफुल हथियार कां इश्तमाल किया हैं। येकुछ औऱ नहि बल्कि एसिड बॉम्ब थां, जिसका गाडाहरे रंग कां धुँआ निशा केँ चारों तरफफैल चुका थां औऱ जिससे बचने कां निशा केँ पासकोई उपाय नहि थां।
जैसे हि उस धुँए नें निशा केँ बदन कों स्पर्श किया, निशा कों ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी नें पिघला हुआ लावा उसकेऊपर डाल दिया होँ, जिस कारण निशा कों अपने पूरे जिस्म मे तेजजलन कां एहसास होँ रहा थां। निशा कों इस टाइमऐसा लगरहा थां जैसे उसका पूरा जिस्म किसी भट्टी कि तरहजल रहा होँ, जिस कारण नाँ चाहते हुए भि निशा कि एक् जोरदार चीखउस जंगल मे गूँजउठी।
आआआआआआआआआआहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह
अगले हि लम्हा निशा नें अपने आप् कों संभाला औऱ जल्दी ठण्डे पानी कि झील मे कूद गई। ताकि उसके जिस्म पऱ लगा एसिड पानी मे धुलजाऐ, वहीं दूसरी तरफ निशा कि उस दर्दभरी चीख कों सुनकर एक् जोरदार ठहाका उस जंगल मे गूंजा।
"हाहाहा। मर गई साली कुतिया, जाओ हरामखोरों जाकरउस कुतिया कि लाशझील सें बाहर् निकाल करलाओ। आज मे इस कुतिया कि सडीगली लाश अपने दोस्तों कों तोहफे मे देना चाहता हूं। "
अपने लीडर कां आर्डर मिलते हि दुशमनों केँ दो व्यक्ति जिन्होंने लैब मे काम करने वाले लोगों कि तरह पी.पी.ई। किट पहनी हुई थि, वोँ निशा कि तरफबढ़ गए औऱ फिन थोड़ी हि देरबाद वोँ दोनों निशा कों खींचते हुएउस झील सें बाहर् लेँ आए। इस टाइम निशा कां पूरा जिस्म एसिड केँ कारणजल चुका थां, पर्र पता नहि केसे उसकी सांसे अब भि चलरही थीं। मगर वोँ इससमय पूरीतरह सें बेहोशी कि हालत मे थि। निशा कों इस हालत मे देखकर उन लोगों कां लीडर हैरान होेते हुए बोला,
"ऐ साली मादरजात कुतिया अभि तक जिंदा केसे हैं। "
अपने लीडर कि बात सुनकर एक् व्यक्ति कहा
"बॉस शायद एसिड कां पूराअसर होने सें पहले हि ये लड़कीझील केँ ठण्डे पानी मे कूद गई थि, जिस कारण इसकी बॉडी पऱ लगा ज्यदातर एसिड पानी मे धुल गय़ा हैं। पऱ आप् चिंता मत कीजिए जिंदा तौ येअब भि नहि बचेगी। हालाँकि हमारा एसिड बहुतकम मात्रा मे इसकी बॉडी केँ अंदर गय़ा हैं औऱ ठण्डे पानी केँ कारण उसकाअसर भि थोडा धीमा होँ गय़ा हैं, पर्र जितना भि एसिड इसकी बॉडी मे गय़ा हैं, वोँ धीरे धीरे इसकी पूरी बॉडी कों गलाने केँ लिए बहुत हैं। मेरे ख्याल सें 2 सें 3 दिनों केँ अंदर हि इसकी पूरी बॉडी किसीमोम कि तरहगल कर लिक्विड मे कन्वर्ट हौ जाऐगी। "
उस व्यक्ति कि बात ख़त्म होते हि दूसरा व्यक्ति बोला
"बैसे भि बॉसये तोँ हमारे लिए अच्छा हि हुआ। अब हमारे पासइस लड़की कां ब्लड सेंपल लेने कां पर्याप्त वक्त हैं, ताकि हम् इसकी स्पेशल पॉवर कां राजजान सकें औऱ फिन एक् हि झटके मे इसेजान सें मारने सें कहीँ बेहतर हैं कि हम् इसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे दर्दनाक मौत मरतेहुए देंखें। "
उस दूसरे व्यक्ति कि बात सुनकर लीडर अपने कंधे पऱ बंधीं पट्टियाँ कों देखते हुए बोला
"हुम्म। सहीकहा तुमने। लें चलोइस हरामजादी कों अपने अड्डे पऱ। "
इतना बोलकर वोँ लीडर अपनेसंग आऐ अधिकतर आदमियों कों लेकर वहां सें अपने अड्डे कि तरफचला गय़ा। वहा सें थोडी हि दूरी पर्र हि उन लोगों कि स्पेशल बाइक खड़ीं हुईंथीं, जिन्हें आसानी सें जंगल मे चलाया जा सकता थां। जबकि लगभग 5-6 हथियार बंद व्यक्ति औऱ पी.पी.ई। किट पहने वोँ दो व्यक्ति अब भि वहीं खड़ेहुए थें। अपने लीडर केँ जाने केँ बादउन लोगों नें निशा कों एक् बड़े सें बॉक्स केँ अंदररखा औऱ उसे लेकर पैदल हि अपने अड्डे कि तरफचल पडे।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
Welcome Back बहोत हि शानदार भाग भइयामजा आँ गय़ा एक् दम जहां सें छोड़ा वहीं सें अपने आप् कनेक्ट होँ गएऐसे हि एपसोड देतेरहो
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