Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 124 -
वहीं दूसरी तरफ गुफा केँ अंदर निशा कि चीख सुनकर दोनों इण्डियन साईंटिस्ट औऱ इक़राम जाग चुके थें। इक़राम नें उन दोनों साईंटिस्टों कों गुफा केँ अंदर हि रहने कां इशारा किया औऱ स्वयं गुफा केँ बाहर् आकर झाड़ियों केँ पीछे छिपकर सारा नज़ारा देखने लगा। इकराम खूँखार लाल आँखों सें दुश्मनों केँ लीडर कों वहां सें जाताहुआ देखरहा थां। उसका पूराबदन इससमय गुस्से सें काँपरहा थां औऱ उसका दाँया हाथ अपनी रिवॉल्वर कों पूरी ताकत सें पकड़े हुआ थां। लीडर केँ वहा सें जाते हि इकराम नें एक् नजरउस तरफ डाली जहाँ सें वोँ लोग निशा कों अपनेसंग लें जारहे थें।
अगले हि लम्हा इकराम बिनाकोई आवाज़ किएचुप चाप झाड़ियों केँ पीछे सें उन लोगों कि तरफबढ़ गय़ा। थोड़ी हि दूर जाने केँ बाद निशा कों अपनेसंग लेँ जारहे आदमियों मे सें एक् व्यक्ति चलते-चलते अचानक ज़मीन पऱ गिर गय़ा। उसकेसंग चलरहे दूसरे लोगों नें जब अपने मित्र कों नीचे गिरते देखा, तौ वोँ हैरान होँ गए। इससे पहले वोँ कुछसमझ पाते उनकेदो औऱ दोस्त अचानक ज़मीन पर्र लुड़क गए। अब वहांकुल 5 व्यक्ति हि बचे थें। जिनमें सें दो व्यक्ति उस बॉक्स कों उठाएहुए थें जिस्में निशा थि, औऱ तीन व्यक्ति अपने हाथों मे गनलिए खड़ेहुए थें।
जैसे हि उन लोगों नें अपने 3 साथियों कों अचानक ज़मीन पर्र गिरते हुए देखा, तोँ उनकेमन मे खतरे कां सायरन बजनेलगा। जिस कारण वोँ लोग जल्दी सेल्फ डिफेंस कि पोजिशन मे खडे हौ गए औऱ चारों तरफ देखने लगे, पऱ अब बहोत देर हौ चुकी थि। क्योंकि चारों तरफ नज़र डालने सें पहले हि वहां खड़े वोँ तीनों गनमैन नीचे ज़मीन पऱ पड़े अपनी आखरी सांसें गिनरहे थें। अब वहां मात्र दो व्यक्ति हि बचे थें, जौ निशा कों उठाएहुए थें। एक् मिनट सें भि कम वक़्त मे अपने 6 साथियों केँ यूँ अचानक मरने सें उन दोनों केँ पांवडर केँ कारण बुरीतरह काँपने लगे थें। उनकीऐसी हालत देखकर इकराम झाड़ियों सें बाहर् निकलआया। इससमय इकराम कों अपने सामने देखकर उन दोनों कों ऐसालग रहा थां जैसे उनके सामने साक्षात यमराज आँ गएहों। इकराम नें उन दोनों कों घूरते हुए बर्फ जैसे ठण्डे लहजे मे पूछा।
इकराम- क्याँ किया हैं तुम् लोगों नें हिंद कि शेरनी केँ संग??????
इकराम कि बात सुनकर उन दोनों मे सें एक् व्यक्ति हकलाते हुए बोला
पहला व्यक्ति- वोँ वोँ वोँ हमें नहि पता। हमें तोँ बसइसे हमारे अड्डे पऱ लेँ जाने कां ऑर्डर मिला हैं।
उस व्यक्ति कां इतना केहना थां कि अचानक सें इकराम कि उंगली नें हल्की सि हरकत कि औऱ वोँ व्यक्ति बिना किसी आवाज़ केँ नीचे जमीन पऱ लुड़क गय़ा। अपने दोस्त कि ऐसी हालत देखते हि, दूसरा व्यक्ति डर सें कांपउठा औऱ उसके मुंह सें निकला
दूसरा व्यक्ति- एएए एसिडबम.
दूसरे व्यक्ति केँ मुंह सें इतना सुनते हि इकराम केँ पूरेबदन मे करैंट दौड़ गय़ा। उसका पूरा जिस्म डर कि वजह सें पीलापड़ चुका थां। इकराम हमेशा निशा केँ संग हि रहता थां औऱ रॉ मे काम करने सें पहले वो एक् आर्मी अफसर भि रह चुका हैं। इसलिये वो अच्छी तरह सें जानता थां कि एसिडबम क्याँ हैं औऱ इसका क्याँ असर होता हैं। चूँकि अभि कुछदेर पहले हि निशा पऱ एसिड बाम्ब सें हमला किया गय़ा थां औऱ इकराम कों येबात भि अच्छी तरह सें पता थि कि एसिड बाम्ब केँ हमले सें आज तक कोई भि जिंदा नहि बचा हैं।
इसलिये उस दूसरे व्यक्ति कि बात सुनते हि इकराम कों लगा कि अब वोँ शायद अपनीशपथ कभी पूरी नहि कर पाएगा। क्योंकि निशाअब इस दुनिया मे नहि रही। ये ख्याल मन मे आते हि इकराम कां चेहरा पत्थर जैसा कठोर हौ गय़ा औऱ उसकी आंखों मे खूनउतर आया। पऱ इससे पहले वो गुस्से मे आकरउस दूसरे व्यक्ति कों भि जान सें मार ेदेता, वो दूसरा व्यक्ति अचानक सें बोल पड़ा।
दूसरा व्यक्ति- वव वोँ अभि ज़िंदा हैं। पप पर्र बसकुछ हि टाइम केँ लिए। झील मे गिरने केँ कारण उसकी बॉडी सें अधिकतर एसिडधुल गय़ा हैं औऱ झील केँ ठंडे पानी नें एसिड कां असर भि बहुत धीमाकर दिया हैं। मगर जल्द हि उसकी बॉडी पऱ जोँ थोडा बहोत एसिडरह गय़ा हैं, वोँ उसकी पूरी बॉडी कों गलाकर लिक्विड मे कंवर्ट कर देगा।
दूसरे व्यक्ति नें एक् हि सांस मे सारीबात इकराम कों बता दि। उसेलगा कि शायदसभी कुछसच सच बताने सें इकराम उसे ज़िंदा छोड़ देगा। वहीं दूसरी तरफउस व्यक्ति कि बात सुनकर पता नहि क्यूं इकराम कों उम्मीद कि एक् किरण नज़रआई। इसलिये इकराम नें उस व्यक्ति कों गुस्से सें घूरते हुए पूछा।
इकराम- एसिड कां असर उसके जिस्म पर्र नाँ होँ, उसकेलिए क्याँ करना पड़ेगा??? आखिर इसका इलाज क्याँ हैं???
इकराम कां प्रश्न सुनकर उस दूसरे व्यक्ति केँ दिल मे एक् बारफिन डर कि लहर दौड़ गई औऱ फिन वोँ हकलाते हुए बोला
दूसरा व्यक्ति- इसकाकोई इलाज नहि हैं
इकराम- मगर अभि अभि तोँ तुमने कहा हैं कि ठंडे पानी कि वजह सें एसिड कां असर धीमा होँ गय़ा हैं।
दूसरा व्यक्ति- हाँ पऱ ये सिर्फ मेरा अनुमान हैं। इसेअब तक कहीं पऱ टेस्ट नहि किया गय़ा हैं।
इकराम- तोँ क्याँ ये संभव हैं कि इसे ठंडे पानी मे रखने पऱ एसिड कां असर पूरीतरह सें ख़त्म कियाजा सके।
दूसरा व्यक्ति- नहि। ठंडा पानी बहुतहद तक एसिड केँ असर कों कम तोँ कर सकता हैं। पऱ एसिड बाम्ब बनाने केँ लिए दुनिया कां सबसे खतरनाक एसिड इस्तेमाल किया जाता हैं। ठंडे पानी सें इसकेअसर कों पूरीतरह सें समाप्त नहि कियाजा सकता हैं। मेरा अनुमान हैं कि ठंडा पानीउस एसिड केँ असर कों बस थोडा बहोत धीमाकर सकता हैं। बैसे तोँ पानी नें उसकी स्किन पऱ लगे ज्यातर एसिड कों धो दिया हैं। पर्र थोडा बहोत एसिड इसकी स्किन नें जरूरसोख लिया होगा। उसे किसी भि तरह सें समाप्त नहि कियाजा सकता हैं। वोँ कभी न् कभी अपनाअसर जरूर दिखाऐगा।
इकराम- यदि हम् इसे लगातार ठंडे पानी मे रखें तौ????
दूसरा व्यक्ति- कोई फायदा नहि। अधिकदेर पानी मे रहने कि वजह सें भि हमारी स्किन गलने लगती हैं। उस कंडीशन मे ये एसिड दोगुनी स्पीड सें काम करने लगेगा। पऱ शायदइसे कुछदेर औऱ ठंडे पानी मे रखकर एसिड केँ असर कों थोडा बहोत औऱ धीमा कियाजा सकता हैं। पर्र ये मात्र मेरा अनुमान हैं औऱ अगरये तरीककाम कर भि गय़ा तौ भि तुम् उसेबचा नहि पाओगे। बस उसकी तकलीफें हि बढ़ाओगे। उस कंडीशन मे ये औऱ भि अधिक उतावलापन-तड़प कर मरेगी।
उस व्यक्ति कि बात सुनकर इकराम कां बदन गुस्से केँ कारण बूरीतरह सें कांपने लगा थां। पऱ वोँ जानता थां कि इसमें वोँ कुछ भि नहि कर सकता हैं, मगर उसनेमन हि मनये फैसला कर लिया थां कि जब तक निशा कि सांसें चलरही हें, तब तक वोँ उसके जिंदा बचने कि उम्मीद नहि छो़डेगा। इकराम कों लगा कि अब वोँ व्यक्ति उसके किसीकाम कां नहि हैं, इसलिये उसकाहाथ अपनी रिवॉल्वर पऱ कस गय़ा। इससे पहले वोँ दूसरे लोगों कि तरहउस व्यक्ति कों भि यमलोक कि यात्रा पऱ भेज देता। अचानक सें इकराम केँ मन मे एक् प्रश्न आया।
इकराम- आखिर तुम् लोगों कों हमारी लोकेशन केँ बारे मे पता केसेचला???
इकराम कां प्रश्न सुनकर उस व्यक्ति नें अपनासिर झुका लिया औऱ खामोशी सें अपनी स्थान पर्र खड़ारहा। उस व्यक्ति कि इस हरकत सें इकराम गुस्से मे तिलमिलाते हुए बोला
इकराम- लगता हैं कि तुम् भि अपने साथियों कि तरह यमलोक कि यात्रा पऱ जानां चाहते होँ???
इतना बोलकर इकराम नें अपनी रिवॉल्वर सें फायरकर दिया। एक् हल्की सि पिट कि आवाज़ हुइ औऱ एक् बे आवाज़ गोलीउस व्यक्ति केँ दाएंकान कों छूती हुइ निकल गई। इकराम कि इस हरकत सें वोँ व्यक्ति डर केँ कारण बुरीतरह कांपने लगा औऱ हकलाते हुए बोला।
दूसरा व्यक्ति- वव वोँ हम् लोग तुम् दोनों केँ शालीमार दीप पर्र आते हि तुम् लोगों पर्र नजररख रहे थें। फिरभी बहोत कोशिश केँ बाद भि हमें तुम् लोगों केँ इस सीक्रेट बेस कि जानकारी नहि मिली थि। पर्र हम् जानते थें कि तुम् जल्द हि हमारे बेस पऱ आओगे। इसलिये हम् लोगों नें तुम्हारे लिए पहले सें हि एक् जाल बिछाकर रखाहुआ थां।
उस व्यक्ति कि बात सुनकर इकराम हैरान होतेहुए बोला
इकराम- कैसाजाल???
दूसरा व्यक्ति- तुम्हारे संग हमारा एक् एजेंट भि हैं।
इकराम- मतलब???
दूसरा व्यक्ति- उन दोनों साईंटिस्ट मे सें एक् साईंटिस्ट पहले सें हि हमसे मिलाहुआ हैं। उसकीवजह सें हि हम् उन दोनों साईंटिस्ट कों किडनैप करने मे कामयाब रहे थें। हमारे उस एजेंट केँ पास एक् मिनी ट्रांसमीटर हैं, जिसके सिग्नल ट्रैक करतेहुए हि हम् लोगयहा तक पहुंचे हें।
उस व्यक्ति कां जवाब सुनकर इकराम बुरीतरह सें चौंक गय़ा थां। पर्र जल्द हि उसने अपने आपको कंट्रोल किया औऱ फिनउस व्यक्ति सें सबाल पूछा
इकराम- कौन हैं वोँ???
दूसरा व्यक्ति- मुझे नहि पता????उन दोनों साईंटिस्ट मे सें हमारा एजेंट कौन हैं???? येबात मात्र हमारे लीडर कों हि पता हें।
उस व्यक्ति कि बात पूरी होते हि इकराम नें ट्रिगर दबा दिया औऱ फिन वोँ व्यक्ति भि अपने साथियों कि तरह यमलोक कि यात्रा पऱ निकल गय़ा। उस अंतिम बचे व्यक्ति कों ठिकाने लगाने केँ बाद इकराम नें एक् बार चारों तरफनजर डाली औऱ फिनउस बॉक्स कों खोलकर निशा कों अपने कंधे पऱ डालकर तेज़ी सें ब्लैक केव कि तरफबढ़ गय़ा। हाँलाकि ब्लैक केब कि लोकेशन अब दुशमनों कि नजर मे आँ चुकी थि, मगर ब्लैक केबअब भि दुशमनों कि नजरों सें छिपी हुई थि, इसके अलावा फिलहाल उन लोगों केँ पास उसके अलावा कोई दूसरा ठिकाना भि नहि थां। हाँलाकि ब्लैक केव केँ पासबनी उस छोटी सि झील कां पानी एसिड बाम्ब केँ कारण फिलहाल खराब होँ चुका थां। मगर झरने सें लगातार उसझील मे ताजा पानी आँ रहा थां औऱ तालाब कां गंदा पानी बहकर तालाब सें बाहर् भि निकलरहा थां।
पऱ फिन भि उसे पूरीतरह सें साफ होने मे अच्छा खासा टाइम लगने बाला थां। इसलिये इकराम निशा कों यूं हि अपने कंधे पर्र उठाए सीधे झरने केँ नीचेआकर खड़ा होँ गय़ा। ताकिउस एसिड केँ असर कों निशा कि बॉडी सें कम कियाजा सके। इस दौरान निशा कों अपने कंधें पर्र उठाने केँ कारण निशा कि बॉडी सें निकलने बाला एसिड इकराम कि बॉडी पर्र भि लग गय़ा थां, जिस कारण इकराम कों अपने जिस्म मे तेजजलन कां एहसास हौ रहा थां, पर्र इस वक़्त उसे अपनीकोई परवाह नहि थि। उसका पूरा ध्यान बस निशा कों बचाने पऱ थां। जबकुछ देरबाद इकराम कों लगा कि पानी कि वजह सें उसकी स्किन गलनेलगी हैं, तौ वो निशा कों लेकर ब्लैक केव केँ अंदरचला गय़ा।
उसने निशा कों बैड पऱ लेटाकर उसकेबदन कों एक् चादर सें ढंक दिया औऱ फिनगन पॉईंट पर्र उन दोनों साईंटिस्ट कों लेकर उनकी अच्छी तरह सें तलाशी लेनेलगा। पर्र उन दोनों केँ पास इकराम कों कोई भि ट्रांसमीटर नहि मिला। पऱ इकराम उस व्यक्ति कि बात कों नजरअंदाज भि नहि कर सकता थां। इसलिये इकराम नें उन दोनों कों हि अच्छी तरह सें बांधकर वहीं फर्श पर्र बैठा दिया औऱ उनसे पूछताछ करनेलगा। पर्र उन दोनों नें हि दुशमनों केँ संग मिले होने सें साफसाफ इंकार कर दिया। जब इकराम कों उनसेकोई जानकारी नहि मिली तोँ उसने गुस्से मे दोनों केँ सिर पर्र अपनी रिबॉल्वर केँ बट कां जोरदार बार किया, जिससे वोँ दोनों जल्दी बेहोश हौ गए।
उन दोनों साईंटिस्ट कों बेहोश करने केँ बाद इकराम गुस्से मे गुफा सें बाहर् निकल गय़ा। असल मे वोँ झील केँ पासरखे निशा केँ कपडे लेने गय़ा थां, मगरजब वोँ वहा सें बापिस गुफा कि तरफ आँ रहा थां, तोँ उसे रास्ते मे झाडियों केँ पास एक् छोटा सां ट्रांशमीटर दिखाई दिया। जिसमें बहोत छोटा एल.ई.डी। बल्ब ब्लिंक हौ रहा थां। उस ट्रांशमीटर कों देखकर इकराम कों इसबात पऱ पूरा यकीन होँ गय़ा कि उन दोनों साईंटिस्ट मे सें जरूरकोई एक् गद्दार हैं। जिसने यहाआते वक़्त ट्रांशमीटर यहा झाडियों मे डाल दिया होगा, ताकि दुशमन ट्रांशमीटर केँ सिग्नल कों ट्रैक कर सकें, पऱ वोँ गद्दार आखिरकौन हैं, फिलहाल येपता करने कां इकराम केँ पास नां तोँ कोई तरीका थां औऱ नां हि टाइम।
इसलिये इकराम नें एक् पत्थऱ कि हेल्प सें उस ट्रांशमीटर कों कई टुकडों मे तोड दिया, ताकि दुशमनों कों उनकी लोकेशन केँ सिग्नल मिलने बंद हौ जाऐं। उस ट्रांशमीटर कों तोडने केँ बाद इकराम बापिस गुफा केँ अंदरलौट आया। एसिड केँ कारण निशा कां पूराबदन बुरीतरह सें जल चुका थां, जिस कारण इकराम केँ अंदरअब इतनी हिम्मत नहि थि कि वोँ निशा कों उसके कपडे पहनासके, उसेडर थां कि कहीं कपडे पहनाते टाइम निशा कि स्किन डैमेज नां हौ जाऐ, इसलिये इकराम नें निशा कों ओढाई गई चादर कों हि निशा केँ बदन पर्र अच्छी तरह लपेट दिया।
इसकेबाद इकराम नें निशा केँ कपडों केँ संगसंग उसका आर्चर, खंजर औऱ दूसरा जरूरी सामान अपनेबैग मे संभालकर रख लिया। ताकिठीक होने केँ बाद निशा उनका उपयोग करसके, हालाँकि निशा केँ अब जिंदा बचने कि संभावना नाँ केँ बराबर थि, मगर इकराम इतनी जल्दहार नहि मानना चाहता थां, वोँ अपनी अंतिम सांस तक निशा कों बचाने कि कोशिश करना चाहता थां, तभी इकराम केँ कानों मे निशा कि हल्की सि कराहने कि आवाज़ सुनाई दि। जिसे सुनकर इकराम खुश होतेहुए जल्दी निशा केँ पासजा पहुंचा औऱ बोला
इकराम- अप्पी। जोया अप्पी आप् ठीक तोँ हें न्????? आपका भइया आपकोकुछ भि नहि होने देगा अप्पी.
निशा कों अब तक थोडा बहोत होश आँ चुका थां, इसलिये इकराम कि बात सुनकर निशा नें मुस्कुराने कि नाकाम कोशिश करतेहुए अपनी आँखें खोलीं। एसीड केँ कारण निशा कां पूरा चेहरा बुरीतरह सें जल गय़ा थां। इसलिये उसेकुछ भि कहने मे बहोत ज़्यादा दर्द होँ रहा थां, मगरफिन भि अपने दर्द कों किसीतरह बरदास्त करतेहुए उसनेकहा
निशा- भइया तुम् इन दोनों कों लेकरयहा सें निकलजाओ। मे शायदअब जिंदा नहि बचूंगी। तुम्हें अपना वादा तौ याद हैं नां भइया.
निशा कि बात सुनते हि इकराम कि आँखों मे आँसू आँ गए, जिन्हें इकराम नें बड़ी मुश्किल सें अब तक रोकाहुआ थां। अबजब निशा अपनेहोश मे बापिस आँ चुकी थि, इसलिये इकराम नें उन्हें अपनी आँखों सें बहने दिया औऱ बोला
इकराम- स्स्स्स्स। चुप एकदमचुप। कुछ नहि होगा आपको। आप् हिन्द कि शेरनी होँ, औऱ हिन्द कि शेरनी इतनी जल्दहार नहि मान सकती। हम् सभीयहा सें एक् संग जाऐंगे। चाहे जिंदा याँ फिन मुर्दा.
निशा जानती थि कि इकराम कों इस टाइमकुछ भि समझाना नाँ मुमकिन हैं, मगरफिन भि वोँ इकराम कों समझाते हुए बोलीं
निशा- भइयाअब कोई फायदा नहि हैं। एसिड बाम्ब मे जिस एसिड कां यूज किया जाता हैं। उसकेअसर कों समाप्त करने बालीदवा आज तक नहि बनी हैं। इसलिये मुझे बचाने कि उम्मीद छोडदो। बैसे भि मेरी बॉडी नें जौ एसिडसोख लिया हैं, वोँ अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरी बॉडी कों गलाना शुरुआत कर चुका हैं। अबबसकुछ हि घंटों कि बात हैं औऱ मेरा पूरा जिस्म उस एसिड सें गलकर लिक्विड मे बदल जाऐगा मेरे भइया। इसलिये मे नहि चाहती कि तुम् मुझेउस हालत मे देखो औऱ बचाने केँ चक्कर मे इन दोनों साईंटिस्ट केँ संगसंग अपनीजान खतरे मे डालो। बैसे भि हमारा मिशनअब पूरा होँ चुका हैं। हम् दुशमनों सें अपने साईंटिस्ट कों छुडाने मे कामयाब रहे हें.
इकराम- नहि अप्पी नहि मे आपको छोडकर कहीं नहि जाने बाला.
निशा- प्लीज भइया अपनीजिद छोडदो। तुमने मेरा अधूरा काम पूरा करने कां वादा किया थां.
इकराम- हाँ किया थां औऱ मे उसका पहले हि पूरा इंतजाम कर चुका हूं.
इकराम केँ इतना कहते हि अचानक सें निशा कि एक् तेजचीख निकल गई.
निशा- आआआआआहहहहहहहहहहहहहहहहहहह इइइइकराममममम मेरे भाईईईईईईईईई ममममुझे बहोत तेज दर्द होँ रहा हैं। ममममम मे नहि चचचच चाहती कि तुम् मुझे इइइइइस हाल मे देखो। आआआआहहहहहहह प्प्प्प्लीज भभभभभाई मुझेअब इस दर्द सें छुटकारा दिलादो। आआआआहहहहहहह मममम मे एक् शेरनी कि मौत मरना चाहती हूं भइया.
इतना बोलकर निशा नें अपनी पूरी ताकत इकट्ठा करके इकराम केँ उसहाथ कों पकड लिया, जिसमें इकराम नें अपनी रिबॉल्बर थामी हुई थि, औऱ फिनउस हाथ कों अपनेसिर केँ पास लेजाते हुए बोलि
निशा- प्प्प्प्लीज भइयाअब मुझे आजादकर दो.अब मे ये दर्द औऱ बरदास्त नहि कर सकती। म्म्म्म्ममम इकराम मेरे भइया मे गर्व केँ संग मरना चाहती हूं.
निशा कि बात सुनकर इकराम नें जल्दी अपनाहाथ निशा केँ सिर सें दूर करतेहुए कहा
इकराम- नहि नहि नहि मे ऐसा नहि कर सकता अप्पी.
निशा- प्लीज मेरे भइया तुम्हें मेरीशपथ। मुझेअब इस दर्द सें आजादकर दो। मे अबये दर्द औऱ बरदास्त नहि कर सकती
इतना बोलकर निशा एक् बारफिन बेहोश हौ गई।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 125 -
निशा कि ऐसी हालत देखकर इकराम गुस्से औऱ हताशा मे जोर सें चीखने लगा
इकराम- ननननहीहीहीहीहीं अप्पी नहींहीहीहीहहीही। आआआआआआहहहहहहहहहह याँ खुदाआज तूने मुझेकिस उल्झन मे डाल दिया। तूँ मेरीजान लेले पर्र मेरी जोया अप्पी कि जान बख्सदे। मे तेरे सामने भीख माँगता हूं।
निशा औऱ इकराम केँ इसतरह चीखने सें वोँ दोनों साईंटिस्ट अपनेहोश मे बापिस आँ चुके थें, मगर वोँ दोनों हि इस टाइम बुरीतरह सें डरेहुए थें, जिस कारण उनकीकुछ भि बोलने कि हिम्मत नहि हौ रही थि। अपनी सारी भडास निकालने केँ बाद इकराम एकदम सीरियस हौ गय़ा, उसकीपकड अपनी रिवॉल्बर पर्र कस चुकी थि औऱ अब वोँ अपनी जोया अप्पी कि अंतिम ख़्वाहिश पूरी करने औऱ उन्हें दर्द सें आजाद करने केँ लिए अपनेदिल मे हिम्मत जुटारहा थां।
इकराम धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपना रिबॉल्वर बालाहाथ निशा केँ सिर केँ पास लेँ गय़ा औऱ अपनी रिवॉल्वर निशा केँ सिर केँ एक् दम बीचों बीचरख दि। इसकेबाद इकराम नें अपनी आँखें बंद कि औऱ अपनी पूरी ताकत इकट्ठा करके ट्रिगर दवा दिया। निशा कों गुफा मे बापिस लाते वक़्त इकराम कि रिवॉल्वर पऱ लगा साईलेंसर रास्ते मे कहींगिर गय़ा थां। जिस कारणउस बंद गुफा मे अचानक सें गोली चलने कि एक् जोरदार आवाज़ गूँजउठी।
धधधधांधांधांययययययययययययं
गोली चलने कि आवाज़ सुनकर इकराम नें अचानक सें अपनी आँखें खोललीं। उसने देखा कि गोली चलाने सें पहले हि वोँ अपनाहाथ निशा केँ सिर सें दूरकर चुका थां, जिस कारण इकराम कि रिवॉल्वर सें निकली गोली निशा केँ सिर केँ आरपार होने कि स्थान सामने बाली दीवाल मे जा धंसी थि। अगले हि समय इकराम नें अपनी रिवॉल्वर दूर फेंक दि औऱ वहीं जमीन पऱ घुटनों केँ बल बैठकर जोरजोर सें रोनेलगा। ये इकराम कि जीवन मे दूसरा मौका थां जब वोँ अपने आपको इतना कमजोर औऱ टूटाहुआ महसूस कररहा थां, कुछ सालों पहलेजब उसकी अपनीसगी बेहन उसकी जोया अप्पी कि मौत हुई थि। तब भि इकराम कुछइसी तरहटूट गय़ा थां औऱ आजफिन निशा कों इस हालत मे देखकर वोँ फिन सें उसी हालत मे पहुँच चुका हैं।
इकराम कों इस टाइम अपनी पूरी दुनिया बिखरती हुई महसूस होँ रही थि, उसकादिल कहरहा थां कि वोँ सारी दुनिया मे आगलगा दे, अगर उसकी जोया अप्पी जिंदा नहि तोँ इस दुनिया मे किसी कों भि जिंदा रहने कां कोईहक नहि हैं। इकराम इस वक़्त इमोशनल टार्चर सें गुजर हि रहा थां कि तभीउसे गुफा केँ बाहर् हलचल सुनाई दि, जिसे सुनकर इकराम केँ अंदर कां सिपाही अचानक सें जाग गय़ा, उसने किसीतरह अपने इमोशंन कों कंट्रोल किया औऱ पूरीतरह सें सतर्क होतेहुए जल्दी खड़ा होँ गय़ा। इसकेबाद उसनेपास हि रखी एक् रायफल उठाली औऱ जल्दी गुफा केँ बाहर् जा पहुंचा।
इकराम गुफा केँ मुहाने पर्र खडा होकर चारों तरफ ध्यान सें देखरहा थां, तभीउसे लगभग 6 नकाबपोश व्यक्ति झाडियों कि ओट मे छिपते हुए गुफा कि तरफआते हुए दिखाई दिऐ, उन सब लोगों केँ पासइस वक़्त ऑटोमैटिक रायफल मौजूद थीं, जौ चांदनी रात मे इकराम कों साफसाफ दिखाई दे रहींथीं। इकराम गुफा केँ मुहाने पऱ खडी झाडियों कि ओट मे छिपकर उन लोगों केँ एकदमपास आने कां प्रतीक्षा कररहा थां, ताकि वोँ एक् संगउन लोगों कों ठिकाने लगासके, जैसे हि वोँ सबलोग गुफा केँ एकदमपास पहुँचे इकराम झाडियों केँ पीछे सें बाहर् निकलआया औऱ उनकीतरफ अपनी रायफल तानकर खडा होँ गय़ा। इससे पहले इकराम उन लोगों पर्र गोलियाँ चला पाता, एक् नकाबपोस नें अपने चेहरे सें मास्क हटाते हुएकहा
“थैंक्स गॉड तुम् जिंदा होँ ऐजेंट 10”
वोँ कोई औऱ नहि बल्कि एजेंट 3 यानि हिना थि, हिना केँ इतना बोलते हि बाकी लोगों नें भि अपने चेहरे सें मास्क हटालिए। अब इकराम कों अपने सामने अज्जू, मोनू, हिना, योगेन्द्र, करतार सिंह औऱ मोहित खडेहुए दिखाई देरहे थें। उन लोगों कों अपने सामने देखते हि इकराम नें जल्दी अपनीगन नीचेकर ली औऱ अगले हि समय वोँ अज्जू केँ ठीक सामने अपने घुटनों केँ बल बैठकर रोनेलगा, इकराम कि इस हरकत पर्र सबलोग बुरीतरह सें हैरान रहगए थें, उन्हें समझ हि नहि आँ रहा थां कि आखिर इकराम कों हुआ क्याँ हैं। इससे पहलेकोई कुछपूछ पाता इकराम बोला
इकराम- मिस्टर अजय मे अच्छी तरह सें जानता हूं कि तुम् एक् बॉयोलॉजिकल साईंटिस्ट होँ… दुनिया मे ऐसीकोई बीमारी नहि हैं जिसका इलाज तुम् नाँ करसको…। प्लीज एजेंट जीरो कों बचालो…। मे वादा करता हूं कि सारी जीवन तुम्हारी गुलामी करता रहूँगा…… प्लीज मिस्टर अजय प्लीज मेरी जोया अप्पी कों बचालो…। उन कमीनों नें मेरी जोया अप्पी पऱ एसिड बाम्ब सें हमला किया हैं… जिस कारण उनकी हालत बहोत खराब हैं…। प्लीज किसी भि तरह उनकीजान बचालो…… तुम्हें खुदा कां वास्ता…….
इकराम कि बात सुनकर उन लोगों कि रीढ कि हड्डी मे सिहरन दौड गई, अज्जू भले हि इकराम सें दूसरी बारमिल रहा थां, पऱ बाकी लोगों कां इकराम सें सैकडों बार आमना सामना हुआ थां, उन लोगों नें हमेशा हि इकराम कों एक् सख्त औऱ अनुशासित इंशान केँ रूप मे देखा हैं, आज पहलीबार वोँ लोग इकराम कों इतना कमजोर औऱ टूटाहुआ देखरहे थें। उससमय अज्जू केँ मन मे बस एक् हि बातचल रही थि कि इकराम जैसे इंशान कि वफादारी हासिल करने बाली ऐजेंट जीरोकोई मामूली लडकी नहि होँ सकती। आखिरकार अज्जू अपने इमोशन कों कंट्रोल करतेहुए बोला
अज्जू- एजेंट 10 मे वादा तौ नहि कर सकता पर्र मे ऐजेंट जीरो कों बचाने केँ पूरी कोशिश करूँगा। हमारे पास एसिड बाम्ब कां असर समाप्त करने कां एक् तरीका हैं, मगर वो काम करेगा याँ नहि इसके बारे मे अभि कुछ भि कहना जल्दवाजी होगी।
अज्जू कि बात सुनकर इकराम कों उम्मीद कि एक् किरणनजर आई, वोँ अपने आँशुओं कों पौंछते हुए जल्दी उठकरखडा हौ गय़ा औऱ मुस्कुराने कि नाकाम कोशिश करतेहुए बोला
इकराम- क्याँ तुम् सचबोल रहे होँ मिस्टर अजय….अगर तुमने ऐजेंट जीरो कों बचा लिया तोँ मे तुम्हारा ये एहसान कभी नहि भूलूँगा….
अज्जू- इसमें एहसान बालीकोई बात नहि हैं एजेंट 10…। ये तौ हम् सब कां फर्ज हैं…। बैसे भि ऐजेंट जीरो कि इस हालत कां मे भि कहीं नाँ कहीं जिम्मेदार हूं…। अगर मे पहले हि इस मिशन पऱ आने केँ लिए रेडी हौ जाता, तौ शायद ऐजेंट जीरो कि ऐसी हालत नहि होती। खैर ये वक्त अभि इनसभी बातों कां नहि हैं…। तुम् हमें जल्द सें जल्द ऐजेंट जीरो केँ पास लें चलो, ताकि हम् लोग उन्हें अपनेसंग बापिस लें जाकर उनका इलाजकर सकें।
अज्जू कि बात सुनकर इकराम उन लोगों कों जल्दी गुफा केँ अंदर लेँ गय़ा, जबउन लोंगों नें निशा कों देखा तोँ उनके जिस्म मे डर केँ कारण कंपकपी दौड गई, निशा कि पूरी बॉडी एसिड केँ कारण बुरीतरह सें जल चुकी थि, जिस कारण अज्जू औऱ मोनूउसे पहचान हि नहि पारहे थें, पर्र निशा कों इस हालत मे देखकर पता नहि क्यूं अज्जू वोँ समययाद आँ गय़ा जब निशा केँ संग विवाह करने केँ बाद वोँ दोनों दिल्ली बापिस लौटरहे थें औऱ रास्ते मे उनकी वाहन मे बॉम्ब बिस्फोट होने केँ बाद निशा कि कुछऐसी हि हालत हुईँ थि, मगर अज्जू नें अपने बनाऐगए सीरम कि बदौलत किसीतरह निशा कों बचा लिया थां,
मगर अगले हि लम्हा अज्जू एक् औऱ घटनायाद आँ गई, जब असके चाचा प्रकाश शर्मा नें अपनेघऱ कों बॉम्ब सें उडा दिया थां, तब भि उस विस्फोट केँ बाद निशा कि कुछऐसी हि हालत हुईँ थि, मगर अपनी सुपर पावर कि बदौलत निशा किसीतरह उस हादशे सें भि जिंदा बच निकली थि। पर्र इस टाइम अज्जू केँ सामने एक् दूसरी लडकी यानि ऐजेंट जीरो थि, जोँ उसे निशा कि बारबार याद दिलारही थि, अज्जू ऐजेंट जीरो कों किसी भि तरह सें बचाना तोँ चाहता थां, पऱ केसेये बातउसे समझ नहि आँ रही थि। अज्जू अभि इन्हीं सोचों मे उल्झा हुआ थां कि तभी मोनू कि नजर दोनों इण्डियन साईंटिस्ट पर्र पडी, जिन्हें इकराम नें मजबूत रस्सी सें बांधा हुआ थां। उन दोनों कों इस हालत मे देखकर मोनू नें सबाल किया
मोनू-इन दोनों कों इसतरह बांधकर क्यूं रखा हैं
इकराम- इन दोनों मे सें कोई एक् गद्दार हैं…। मैंने औऱ ऐेजेंट जीरो नें उन दोनों कों दुशमनों केँ चुंगुल सें छुडा लिया थां औऱ सुरक्षित अपने ठिकाने पर्र भि आँ गए थें। मगरइन दोनों साईंटिस्ट मे सें कोई एक् दुशमनों केँ संग मिलाहुआ थां, वोँ अपनेसंग एक् ट्रांशमीटर लेकरआया थां, जिसकी हेल्प सें दुशमन हमारे ठिकाने तक पहुँच गए औऱ उन्होंने धोखे सें ऐजेंट जीरो पर्र ऐसिड बाम्ब सें हमलाकर दिया। हाँलाकि मैंने उस ट्रांशमीटर कों नष्टकर दिया हैं, पर्र उन दोनों मे सें वो गद्दार कौन हैं, ये मे पता नहि कर पाया हूं। इसीलिए मैंने इन दोनों कों हि वांध दिया थां, ताकि इनसे पूछताछ करकेउस गद्दार कां पतालगा सकूँ औऱ उसे अपने हाथों सें कुत्ते कि मौतमार सकूँ।
इकराम कि बात सुनकर वोँ दोनों साईँटिस्ट डर केँ कारण बुरीतरह काँपने लगे। तभी अज्जू नें कहा।
अज्जू- फिलहाल हमारे पासइन दोनों सें पूछताछ करने कां वक्त नहि हैं। हमें जल्द सें जल्दयहा सें निकलना होगा, क्योंकि ऐजेंट जीरो कि बॉडी एसिड केँ कारण लगातार डैमेज हौ रही हैं। इन दोनों सें पूछताछ तौ हम् अपने हैडक्वाटर पर्र पहुँचकर भि कर सकते हें।
मोनू- तुम् सहीकह रहे होँ…। तौ फिनअब आगे क्याँ करना हैं….
मोनू कि बात सुनकर अज्जू नें अपने साथियों कों देखते हुएकहा
अज्जू- ऐजेंट जीरो कों इस हालत मे हम् जंगल सें बाहर् नहि लें जा सकते हें, पैदल हि जंगल सें बाहर् जाने मे हमें बहुत टाइमलग जाऐगा, जिससे ऐजेंट जीरो कों बचने केँ चांस औऱ कम हौ जाऐंगे, इसलिये हमें यहीं पर्र हैलीकॉप्टर बुलाकर ऐजेंट जीरो कों एयर लिफ्ट करना होगा।
मोनू- तुम् सहीकह रहे हौ, बैसे भि ये गुफा पहाडी केँ बीचों बीच हैं, इसलिये मेरे ख्याल सें पहाडी केँ ऊपर कि तरफ अच्छी खासी खुली स्थान होनी चाहिए, जहाँ पर्र हमारा हैलीकॉप्टर लैंड होँ सके।
मोनू कि बात सुनकर अज्जू नें जल्दी कहा
अज्जू- मुझे भि यहीलग रहा हैं…। इसलिये योगेन्द्र, करतार सिंह औऱ मोहित तुम् तीनों इस पहाडी केँ ऊपर जाकर हैलीकॉप्टर केँ लैंड होने केँ लिए खुली स्थान तलाशकरो, तब तक हम् लोग ऐजेंट जीरो औऱ साईंटिस्ट कों अपनेसंग लेकरवहा आते हें।
अभि अज्जू कि बात समाप्त हि हुई थि कि तभी अचानक सें इकराम केँ पेर कांपने लगे औऱ वोँ बेहोश होकर नीचे जमीन पऱ जा गिरा। इकराम केँ यूँ अचानक बेहोश होने सें वोँ लोग बुरीतरह सें हैरान रहगए, क्योंकि इकराम केँ बदन पर्र कोई भि चोट बगैरह दिखाई नहि देरही थि, तभी हीना औऱ मोनू जल्दी इकराम केँ पास पहुँचे औऱ उसेचैक करनेलगे, मोनू नें जैसे हि इकराम कि शर्ट केँ बटन खोलकर उसकी बॉडी कों चैक किया तौ वोँ बुरीतरह सें हैरान रह गय़ा, इकराम कि बॉडी भि निशा कि तरह हि पूरीतरह सें जल चुकी थि, जिसका मतलब थां कि इकराम केँ ऊपर भि ऐसिड बाम्ब कां असरहुआ थां।
पर्र वोँ अब तक मात्र निशा कों सुरक्षित रखने केँ लिए अपनेबिल पावर कि दम पर्र अपने दर्द कों बरदास्त कररहा थां, मगरअब जबकि अज्जू औऱ उसके बाकी मित्र यहा पऱ आँ चुके थें, तोँ इकराम नें भि उस दर्द केँ सामने अपने घुटने टेकदिए थें। इकराम कि ऐसी हालत देखकर अज्जू औऱ बाकीलोग समझगए कि अगर ऐजेंट जीरो औऱ इकराम कों जल्द सें जल्दयहा सें बापिस अपने हैडक्वाटर नहि लेँ जाया गय़ा तोँ उन दोनों केँ जिंदा बचने कि उम्मीद नाँ केँ बराबर रह जाऐगी। इसलिये अज्जू योगेन्द्र कि तरफ देखते हुए बोला
अज्जू- हरिअप गाईज… हमारे पास अधिक टाइम नहि हैं… तुम् तीनों जल्द सें जल्ती हैलीकॉप्टर लैंड करने केँ लिए स्थान तलाशकरो औऱ सिग्नल फ्लेयर फायर करके रोहित कों यहा बुलाओ, तब तक हम् लोग ऐजेंट जीरो औऱ बाकी लोगों कों लेकरवहा आते हें।
अज्जू कि बात सुनते हि योगेन्द्र, करतार सिंह औऱ मोहित जल्दी गुफा सें बाहर् निकलगए। जबकि हिना इकराम कों होश मे लाने कि कोशिश करनेलगी। लगभग 5 मिनटबाद हि इकराम दोबारा होश मे आँ गय़ा, पर्र अब उसके चेहरे पऱ दर्दसाफ साफ दिखाई देरहा थां। इकराम केँ होश मे आते हि अज्जू नें उससे सबाल किया
अज्जू- तुम् ठीक तौ हौ नां ऐजेंट 10
इकराम- हाँ मे ठीक हूं…। बस मुझे अपनी बॉडी मे दर्द केँ संगसंग तेजजलन महसूस हौ रही हैं…। मगर मे उसे बरदास्त कर सकता हूं।
तभी हिना नें उससे सबाल किया
हिना- मुझे एक् बातसमझ मे नहि आँ रही कि आखिर एसिड तुम्हारे कपडों केँ अंदर पहुंचा केसे, आई मीन तुम्हारे चेहरे औऱ हाथ पैरों कों देखकर तौ ऐसा बिल्कुल भि नहि लगरहा हैं कि तुम् एसिड बॉम्ब केँ सीधे कांटेक्ट मे आऐ होगे, बर्ना तुम्हारी हालत भि ऐजेंट जीरो कि तरह होती।
हिना कां सबाल सुनकर इकराम खडे होने कि कोशिश करतेहुए बोला
इकराम- हाँ वोँ असल मे जब एसिड बॉम्ब विस्फोट हुआ, उस समय मे ऐजेंट जीरो सें बहुतदूर थां। भाग्य सें बॉम्ब बिस्फोट केँ जल्दी बाद हि एजेंट जीरो पानी मे कूद गई थि, जिस कारण उसकी बॉडी सें एसिड बहुतहद तक धुल गय़ा थां औऱ शायदइसी बजह सें वोँ अब तक जिंदा हैं, उसकेबाद मे दुशमनों कों ठिकाने लगाने केँ बाद ऐजेंट जीरो कों लेकर झऱने केँ नीचे जाकरखडा हौ गय़ा थां, ताकि उनकी बॉडी सें बचा कुचा एसिड भि धुलजाऐ, शायदउसी दौरान उनकी बॉडी सें निकला एसिड मेरी बॉडी पऱ लग गय़ा होगा।
इकराम कि बात सुनकर हिनाउसे डांटते हुए बोलि
हिना- तुम् बेबकूफ होँ क्याँ… याँ फिन तुम्हें इतना भि नहि पता कि एसिड बाम्ब सें निकला एसिड पानी मे घुलने केँ बाद भि अपनाअसर दिखा सकता हैं।
हिना कि बात सुनकर इकराम अपनी शर्ट केँ बटन लगाते हुए लापरवाही सें बोला
इकराम- पता थां, पऱ एजेंट जीरो कों बचाने केँ लिएउस समय मुझे जौ कुछ भि ठीकलगा, वोँ मैंने किया…। बैसे भि ऐजेंट जीरो कों बचाने केँ लिए मे हंसते हंसते अपनीजान भि दे सकता हूं। ये तोँ बस मामूली सें घाव हें….
हिना-अरे बेबकूफ इंशान येकोई मामूली घाव नहि हें… बल्कि तुम्हारी बॉडी मे जितना एसिड पहुँच गय़ा हैं, वोँ कुछ हि घंटों मे तुम्हारी पूरी बॉडी कों गलाकर लिक्विड मे कंवर्ट कर सकता हैं। कुल मिलाकर इससमय तुम्हारी हालत भि ऐजेंट जीरो सें ज़्यादा बेहतर नहि हैं।
इससे पहले इकराम हिना कि बात कां कोई जबाबदे पाता, अज्जू उन दोनों कों बीच मे हि टोकता हुआ बोला
अज्जू- बस बहोत हुआ…। तुम् दोनों येबहस बाद मे भि कर सकते होँ, सबसे पहले हमेंयहा सें बाहर् निकलना होगा… ताकि हम् एजेंट जीरो औऱ ऐजेंट 10 कां इलाजकर सकें।
इतना बोलकर अज्जू इकराम कि तरफ देखते हुए बोला
अज्जू- एजेंट 10 क्याँ तुम् स्वयं सें चल सकते होँ, याँ तुम्हें सहारे कि जरूरत हैं
अज्जू कि बात समाप्त होने सें पहले हि इकराम अपना बैगपैक अपनीपीठ पर्र टाँग चुका थां औऱ फिन अपनी रायफल अपनेहाथ मे थामते हुए बोला
इकराम- नहि मे ठीक हूं….
अज्जू- तौ फिनठीक हैं….
इतना बोलकर अज्जू नें निशा केँ पासजा पहुंचा औऱ उसे अपनी बाहों मे उठा लिया, अज्जू केँ ऐसा करते हि निशा केँ जिस्म मे हल्कि सि हलचल हुइ औऱ अगले हि समय उसने अपनी आँखें खोल दि। जब उसकीनजर अज्जू केँ चेहरे पर्र पडी तौ निशा केँ चेहरे पर्र एक् दर्दभरी मुस्कान आँ गई, इससमय निशा कों ऐसालग रहा थां, जैसे वोँ कोई सपनादेख रही हैं। उसने अपनी पूरी ताकत इकट्ठा कि औऱ बडी मुश्किल सें बोलीं
निशा- अअअज्ज्जू……
बस एक् शब्द बोलकर अगले हि लम्हा वोँ फिन सें बेहोश होँ गई। अज्जू कां ध्यान इस टाइम निशा पऱ नहि थां औऱ निशा केँ मूँह सें निकली आवाज़ भि बहुत धीमी थि, जिस कारणउसे पता हि नहि चला कि निशाकुछ पलों केँ लिएहोश मे आई थि औऱ वोँ उस इंशान कां नाम लेँ रही थि, जिसे वोँ सबसे ज़्यादा प्रेम करती हैं, औऱ जिसकी बाहों मे वोँ आज अपनी अंतिम सांसें लें रही हैं। इस सबसे बेखबर अज्जू मोनू कि तरफ देखते हुए बोला
अज्जू- मोनू तुम् इन दोनों साईंटिस्ट कों संभालो औऱ हिना तुम् हम् लोगों कों कवर दोगी।
इतना बोलकर अज्जू उस गुफा सें बाहर् कि तरफ निकल गय़ा, अज्जू केँ बाहर् जाते हि बाकीलोग भि एक् एक् करके गुफा सें बाहर् निकलगए।
किस्सा जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 126 -
वोँ लोग अभि ब्लैक केव सें बसकुछ हि दूरगए थें, कि तभी अचानक सें उनकेपास एक् तेज धमाका हुआ, शायद किसी नें हैण्ड ग्रेनेड उनकीतरफ उछालकर फेंका थां। पर्र भाग्य सें वोँ उनसे थोडीदूर जाकर गिरा थां, जिस कारण वोँ लोग पूरीतरह सें सुरक्षित थें। इससे पहलेकोई कुछसमझ पाताउस जंगल मे एक् संगकई सारी रायफल चलने कि आवाज़ गूँजउठी। ठीकउसी लम्हा इकराम चीते कि फुर्ती सें अज्जू केँ एकदम सामने आकरखडा हौ गय़ा, देखते हि देखते इकराम कां सीनाकई सारी गोलियाँ लगने सें छलनी हौ चुका थां, पर्र इकराम पऱ उनकाकोई असर नहि हुआ। उसने जल्दी अपनी रायफल दुशमनों कि तरफ तानी औऱ गुस्से मे चीखा
इकराम- अबे साले मादरजात……… असली मर्द हौ तोँ सामने सें आकर हमलाकरो… कायरों कि तरह छिपकर बार क्यूं कररहे हौ….
इतना बोलकर इकराम नें अपनी रायफल कां ट्रिगर दवा दिया औऱ दुशमनों पर्र अंधाधुंद गोलियाँ बरसानी शुरुआत करदीं। येसभी बसकुछ हि पलों मे हौ गय़ा थां, अज्जू अब भि अपनी स्थान पऱ पूरीतरह सें हक्का बक्का खडा थां, उसे यकीन हि नहि होँ रहा थां कि उसकीतरफ आतीमौत कों इकराम अपने सीने पऱ लें चुका हैं, वहीं दूसरी तरफ मोनू औऱ हिना दोनों इण्डियन साईंटिस्ट केँ संग एक् बडी सि चट्टान केँ पीछे पोजीशन लें चुके थें। तभी इकराम अज्जू कि तरफ देखते हुए बोला
इकराम- मिस्टर अजय आप् लोग जोया अप्पी कों लेकरयहा सें जल्दी निकलजाओ, तब तक मे दुशमनों कों संभालता हूं।
अज्जू- पर्र ऐजेंट 10 तुमने आखिर मेरीतरफ आती गोलियाँ अपने सीने पर्र क्यूं लीं
अज्जू कि बात सुनकर इकराम मुस्कुराते हुए बोला
इकराम- मैंने किसी सें वादा किया थां कि अपने जीतेजी आपको खरोंच भि नहि आने दूँगा औऱ मे पठान कां बच्चा हूं, मरतेदम तक अपना वादा निभाऊँगा। बैसे भि ऐजेंट जीरो भि तौ इससमय आपकेसंग हें, ऐ गोलियाँ उनको भि तोँ लग सकतीथीं…
इतना बोलकर इकराम एक् बारफिन दुशमनों पर्र गोलियाँ बरसाने लगा, तभी अज्जू एक् बारफिन बोला
अज्जू- मगर तुम् इससमय बहोत ज़्यादा घायल हौ….
इकराम- जब तक यहा एक् भि दुशमन जिंदा हैं, तब तक मेरी सांसें बंद नहि होंगी मिस्टर अजय….अब जल्द कीजिए हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहि हैं… जल्द हि दुशमनों केँ औऱ भि दोस्त यहाआते हि होंगे….
इकराम कि बात सुनकर अज्जू निशा कों लेकर तेजी सें पहाडी केँ ऊपर कि तरफबड गय़ा, जबकि मोनूउन दोनों साईंटिस्ट कों कवर करतेहुए उन्हें भि सुरक्षित तरीके सें वहा सें लें लानेलगा, मगर हिनाअब भि वहीं रूकी हुईँ थि, हिना कों वहां देखकर इकराम नें उससे सबाल किया
इकराम- मिस हिना… तुम् यहा क्याँ कररही हौ
इकराम कि बात सुनकर हिना भि उसकेसंग दुशमनों पऱ गोलियाँ बरसाते हुए बोलि
हिना- हमारा मिशन ऐजेंट जीरो केँ संग तुम्हें भि यहा सें सुरक्षित लें जानां हैं… रॉ मे सबलोग जानते हें कि तुम् ऐजेंट जीरो केँ छोटे भइया होँ… अगर तुम्हें कुछ भि हुआ याँ फिन हम् तुम्हें यहा अकेले छोडकर चलेगए, तौ ऐजेंट जीरो हमें जिंदा नहि छोडेंगी, इसलिये मे तुम्हारे बिनायहा सें कहीं नहि जाऊंगी, हम् लोगयहा सें एक् संग बापिस जाऐंगे, वोँ भि जिंदा।
इकराम इस टाइम हिना सें बहस करने केँ बिल्कुल भि मूढ मे नहि थां। इसलिये वोँ उसकेसंग मिलकर दुशमनों कों ठिकाने लगाने लगा। तभी आसमान मे हैलीकॉप्टर कि आवाज़ गूंजने लगी, जिसे सुनकर उन दोनों केँ अंदर अचानक सें जोशबड गय़ा औऱ वोँ बिना रुके दुशमनों कां शिकार करनेलगे। इसी दौरान इकराम कि नजर हिना कि कमर पऱ बंधे हैण्डग्रेनेड कि बेल्ट पऱ पड चुकी थि। जिसे देखकर इकरान नें हिना सें कहा
इकराम- मिस हिना क्याँ अपनी हेण्डग्रेनेड बाली बेल्ट मुझे उधार देंगी। अगरआज मे जिंदा बच गय़ा तोँ वादा करता हूं आपको ब्याज सहीत बापिस कर दूँगा। बैसे भि मे हिसाब कां एकदम पक्का हूं।
इकराम कि बात सुनकर हिना चिढते हुए उससे बोलीं
मोनू-अबे ओ पागल इंशान…। मौत केँ मूँह मे खडे होकर भि तुम्हें मजाकसूझ रहा हैं
इतना बोलकर हिनानेे अपने हैण्ड ग्रेनेड बाली बेल्ट उतारकर इकराम कि तरफबडा दि। ढेर सासे हैण्डग्रेनेड हाथ मे आते हि इकराम कि आँखों मे चमक आँ गई। उसने अपनी रायफल कंधे पऱ टाँगी औऱ चुनचुन कर दुशमनों कि तरफ हैण्डग्रेनेड फेंकने लगा। जिनके धमाके सें वोँ जंगल थर्रा उठा थां। जब दूसरी तरफ सें गोलियाँ चलनी पूरीतरह सें बंद होँ गईँ तोँ हिना इकराम कों सहारा देकरउसे हैलीकॉप्टर केँ पास लें गई, जहाँ पर्र बाकीलोग उन लोगों केँ आने कां प्रतीक्षा कररहे थें। उन लोगों केँ वहा पहुँचते हि हैलीकॉप्टर वहा सें रवाना होँ गय़ा। हैलीकॉप्टर केँ अंदर पहुँचते हि इकराम बेहोश होँ चुका थां, इसलिये उसे भि निशा केँ संग बाली बेंटीलेटर चेयर पर्र लेटा दिया गय़ा थां, जहाँ मोनिका उन दोनों कों फर्सटएड देेने मे बिजी थि।
असल मे मिशन पऱ आने सें पहले हि मोनिका औऱ अज्जू नें एल्कलाईन यानि क्षारीए कैमिकल औऱ दूसरे एंटीबायोटिक कैमिकल कों मिलाकर एक् लोशन सजधजकर किया थां। जोँ एसिड बॉम्ब केँ कैमिलकल कां असर ख़त्म करसके। मोनिका इस टाइम निशा औऱ इकराम कि बॉडी पर्र वही लोशन लगाने मे बिजी थि। जैसे हि मोनिका नें वोँ लोशनउन दोनों कि बॉडी पर्र लगाया, तोँ उनके जिस्म पर्र मौजूद एसिडउस लोशन केँ संग रिऐक्ट करनेलगा, जिस कारण उनकेबदन सें धुँआ निकलने लगा, ऐसा लगरहा थां, जैसेउन दोनों केँ बदन केँ अंदरइस टाइमआग चलरही हौ, अज्जू औऱ मोनिका कों छोडकर उस हैलीकॉप्टर केँ अंदर मौजूद बाकीलोग इसे देखकर बुरीतरह सें डरगए थें। जबकि मोनिका औऱ अज्जू केँ चेहरे पऱ इस वक़्त मुस्कान थि। उन दोनों कों मुस्कुराता हुआ देखकर आखिरकार हिना उनसेपूछ बैठी।
हिना-ऐ आखिरइन दोनों कि बॉडी सें धुँआ क्यूं निकलरहा हैं औऱ तुम् दोनों इतनेखुश क्यूं नजर आँ रहे हौ
हिना कि बात सुनकर मोनिका मुस्कुराते हुए बोलि
मोनिका- इन दोनों कि बॉडी सें धुँआ निकलने कां मतलब हैं कि हमारा लोशन अपनाकाम सही तरीके सें कररहा हैं। कुछ हि देर मे हमारा लोशन इनकी बॉडी मे मौजूद सारे एसिड कों न्युट्रलाईज कर देगा। जिसके बाद हम् इनका दूसरा ट्रीटमेंट शुरुआत कर सकते हें।
मोनिका कि बात सुनकर हिनाखुश होतेहुए बोलि
हिना- मतलब कि अबऐ दोनों बच जाऐंगे
मोनिका- पता नहि… जब तक इनकी बॉडी मे मौजूद सारा एसिड न्यूट्रलाईज नहि होँ जाता, तब तक कुछ भि कहना मुश्किल हैं।
मोनिका कि बात सुनकर वहा एक् बारफिन खामोशी छा गई, सबलोग मन हि मन निशा औऱ इकराम केँ जिंदा बचने कि दुआकर रहे थें। कुछदेर बादजब उन दोनों कि बॉडी मे रिऐक्शन होनाबंद हौ गय़ा तौ मोनिका नें एक् बारफिन उन दोनों कि बॉडी मे वही लोशनफिन सें लगा दिया। ये प्रक्रिया मोनिका हर 10 मिनट मे तब तक करतीरही जब तक कि निशा औऱ इकराम कि बॉडी मे मौजूद सारा एसिड न्युट्रलाईज नहि हौ गय़ा। जबउन दोनों कि बॉडी मे मौजूद सारा एसिड न्यूट्रलाईज होँ गय़ा तोँ मोनिका नें इकराम कि बॉडी सें बुलेट निकालनी शुरुआत कर दि, हाँलाकि इसतरह हवा मे उडतेहुए हैलीकॉप्टर केँ अंदरये सभी करना बहोत मुश्किल काम हैं, मगर मोनिका अपनेकाम मे अच्छी खासी माहिर थि, उसने इण्डिया बापिस पहुँचने सें पहले हि इकराम कि बॉडी मे सें सारी बुलेट निकाल दींथीं।
रॉ हेडक्वाटर पहुँचते हि निशा औऱ इकराम कों स्पेशल मेडिकल वार्ड मे लेँ जाया गय़ा। जहाँ मोनिका उनकाआगे कां ट्रीटमेंट करने बाली थि। जबकि उन दोनों इण्डियन साईंटिस्ट कों रॉ कि एक् स्पेशल जेल मे कैदकर दिया गय़ा थां। ताकि उनसे पूछताछ करके गद्दार कां पता लगाया जासके। मगर फिलहाल सब लोगों कां पूरा ध्यान निशा औऱ इकराम पऱ थां। रॉ हैडक्वाटर पहुँचकर अज्जू मेडिकल रिसर्च लैब मे पहुँचकर निशा औऱ इकराम केँ लिए पवारफुल एंटी बायोटिक दवा बनाने मे बिजी होँ गय़ा, जोँ उन दोनों केँ जिस्म सें एसिड कां बचाकुछ असर पूरीतरह सें ख़त्म करसके औऱ वोँ दोनों जल्द सें जल्द रिकवर होँ सकें।
तीन दिनबाद जब निशा कों होशआया तौ उसने अपने आप् कों एक् बेड पर्र लेटाहुआ पाया। इस वक़्त उसकी आँखों औऱ मूँह कों छोडकर पूरे जिस्म पऱ पट्टियाँ बंधी हुईँ हें। वोँ इस वक़्त मिश्र केँ पिरामिड मे मिलने बाली किसी माँ कि तरह दिखाई देरही थि, जिसके ऊपर उसने नीलेरंग कां एक् मेडिकल गाऊन भि पहनाहुआ थां। अपनीइस हालत कों देखकर निशा कों यादआया कि वोँ इकराम केँ संग शालीमार दीप पर्र इण्डियन साईंटिस्ट कों छुडाने गई थि, जहाँ दुशमनों नें उसपर धोखे सें एसिड बाम्ब सें हमलाकर दिया थां। जिससे वोँ बुरीतरह सें घायल होँ गई थि, उससमय निशा कों बसयही लगरहा थां कि अब वोँ शालीमार दीप सें कभी जिंदा बापिस नहि जा पाऐगी। पर्र अपने आप् कों जिंदा देखकर उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि आखिर वोँ यहा केसे पहुँची।
तभी उसकी आँखों केँ सामने एक् धुंधला सां चेहरा नजरआया, उसेयाद आया कि जब वोँ अपनी अंतिम सांसे गिनरही थि, तब किसी नें उसे अपनी बाहों मे उठाया हुआ थां, जिसका चेहरा बिल्कुल अज्जू कि तरह थां, पऱ उसेये समझ नहि आँ रहा थां कि आखिर अज्जू वहा केसेजा सकता थां, वोँ तोँ उसे ढूँडने बांधवगढ जारहा थां, फिन वोँ शालीमार दीप केसे पहुँच गय़ा, औऱ अगर वोँ शालीमार दीप पर्र उसे रेसक्यू करने गय़ा थां, तौ क्याँ अज्जू नें उसे पहचान लिया होगा। इसी उधेडबुन मे निशा नें ध्यान सें चारों तरफ देखा तौ उसेइस बात कां एहसास हुआ कि वोँ इस वक़्त रॉ हेडक्वाटर केँ मेडिकल विंग मे मौजूद हैं।
जिसका एक् हि मतलब थां कि वोँ सच मे एसिड बाम्ब केँ हमले सें जिंदा बच गई हैं औऱ उसके दिमाग़ मे जौ अंतिम याद हैं वोँ भि सच हैं, यानि अज्जू हि उसे शालीमार दीप पऱ उसे रेसक्यू करने गय़ा थां। निशा अभि इस बारे मे सोच हि रही थि कि तभी उसकीनजर कमरे केँ एक् कोने मे रखे सोफे पऱ पडी, जहाँ पर्र कोई लडका गहरी नींद मे सोरहा थां, हाँलाकि उसका चेहरा दूसरी तरफ थां, मगर उसके बॉडी स्ट्रक्टर कों देखकर निशा जल्दी समझ गई कि वोँ कोई औऱ नहि बल्कि अज्जू हैं।
अज्जू कों वहा देखकर निशा बुरीतरह सें सॉक्ड थि, उसेये बातसमझ हि नहि आँ रही थि कि आखिर अज्जू वहा क्याँ कररहा हैं। क्याँ अज्जू बस उसकी देखभाल करने केँ लिएवहा आया थां औऱ थकान कि बजह सें वहीं सोफे पऱ सो गय़ा, याँ फिन अज्जू उसे पहले हि पहचान चुका हैं, जिसबजह सें वोँ यहा पर्र रुकाहुआ हैं। इस बारे मे सोचते हि निशा कों अब अपना सीक्रेट खुलने कां डर लगनेलगा थां। इससे पहले निशाकुछ औऱ सोच पाती अचानक सें उस कमरे कां दरवाजा खुला। निशा नें देखा कि कमरे केँ अंदरआने बाला सख्स औऱ कोई नहि बल्कि मोनिका हैं। जोँ शायद उसका ट्रीटमेंट करने याँ फिन पट्टियाँ चेंज करनेवहा आई थि। कमरे केँ अंदरआते हि मोनिका नें देखा कि निशाहोश मे आँ चुकी हैं, निशा कों होश मे आयादेख मोनिका अपने आप् कर कंट्रोल नहि रखपाई औऱ खुश होतेहुए जोर सें बोलि
मोनिका- थैंक्स गॉडमैम आखिरकार आपकोहोश आँ हि गय़ा, हम् लोग तोँ आपकोउस हालत मे देखकर बुरीतरह सें डर हि गए थें, आपकोपता हैं कि आप् पिछले तीन दिनों सें बेहोश हें।
निशा कों अब भि अपने पूरे जिस्म मे तेज दर्द औऱ जलन महसूस होँ रही थि, जिस कारण मोनिका कि बात सुनकर वोँ दर्दभरी आवाज़ मे वोली
निशा- थैंक्स मोनिका…। मुझे पूरा यकीन हैं कि तुम्हारे ट्रीटमेंट केँ कारण हि मे उस एसिड बॉम्ब केँ हमले सें सरवाईब करपाई हूं।
इतना बोलकर निशा नें अज्जू कि तरफ देखते हुएकहा
निशा- बैसे मिस्टर अजय आखिरयहा क्याँ कररहे हें
निशा कि बात सुनकर मोनिका हैरान रह गई, क्योंकि इससमय अज्जू कों चेहरा दूसरी तरफ थां, फिन भि अज्जू कां चेहरा देखे बिना हि निशा नें आखिरउसे केसे पहचान लिया। पऱ जब मोनिका कों कुछ भि समझ नहि आया तोँ अपनेमन मे चलरहे सबालों कों झटकते हुऐ वोँ बोलि
मोनिका- एक्चुअली मिस्टर अजय हि तौ आपको रेस्क्यू करने शालिमार दीपगए थें, नहि नहि मात्र मिस्टर अजय नहि बल्कि हमारी पूरीटीम आपको रेस्क्यू करनेवहा गई थि। मगर आपकेठीक होने मे मुझसे अधिक मिस्टर अजय कां हाथ हैं। इनके बनाऐ स्पेशल लोशन कि बदौलत हि मे आपकी बॉडी मे सें एसिड कों न्यूट्रलाईज करपाई हूं।
मोनिका कि बात सुनकर निशादिल हि दिल मे मुस्कुराई औऱ फिनखुश होने कि नाकाम कोशिश करतेहुए बोलीं
निशा- हुम्ममम मे जानती हूं… वोँ दुनिया कि हरतरह कि दवाबना सकता हैं….पर्र आखिर वोँ यहाकर क्याँ रहा हैं…। कहीँइसे मेरासच तोँ पता नहि चल गय़ा।
मोनिका- ऐसा लगता तोँ नहि हैं, मगर मिस्टर अजय पिछले तीन दिनों सें यहीँ आपकेपास हि हें, औऱ पिछले तीन दिनों सें लगातार आपकी कंडीशन कों बॉचकर रहे हें, यहा तक कि वोँ पिछली तीन रातों सें ठीक सें सोऐ भि नहि हें औऱ अगर आपकी बॉडी मे हल्की सि भि मूबमेंट होती थि, तौ वोँ जल्दी मुझे बुला लेते थें। पर्र लगता हैं कि अब उनपर थकान हावी होँ गई हैं, शायद इसीलिए वोँ यहीं पर्र सोगए हें। मे अभि उन्हें जगा देती हूं। बैसे भि मुझे आपकी बैंडेज चेंज करनी हें।
मोनिका कि बात सुनकर निशाउसे रोकते हुए बोलि
निशा- नहि अभि रहनेदो…। जब उसकी नींद पूरी हौ जाऐगी, तब तुम् मेरी बैंडेज चेंजकर देना। बैसे भि अब मे पहले सें बहुत बेहतर महसूस कररही हूं।
निशा नें अभि अपनीबात पूरी कि हि थि, तभी उसने देखा कि अज्जू केँ जिस्म मे हलचल होँ रही हैं, इसका मतलब थां कि उसकी औऱ मोनिका कि बातें सुनकर शायद अज्जू कि नींदखुल गई थि, हुआ भि यही थोडी सि हलचल केँ बाद अज्जू अचानक सें उठकरबैठ गय़ा औऱ जैसे हि उसकीनजर निशा पऱ पडी तोँ वोँ खुश होतेहुए बोला
अज्जू- थैंक्स गॉड ऐजेंट जीरो आपकोहोश आँ गय़ा। बैसेअब आप् कैसा महसूस कररही हें। आईमीन क्याँ अब भि आपको अपनी बॉडी मे दर्द औऱ जलन महसूस होँ रहा हैं।
अज्जू कि बात सुनकर निशा कों एहसास हुआ कि शायदउसे रेस्क्यू करते वक़्त एसिड कि बजह सें उसका चेहरा जल जाने सें अज्जू उसे पहचान नहि पाया हैं औऱ इस वक़्त तोँ उसके चेहरे पर्र पहले सें हि पट्टियाँ बंधीं हुईँ हें, तौ अबउसे पहचानने कां तौ सबाल हि नहि उठता हैं। मगर उसकी आवाज़ सुनकर जरूर अज्जू उसे पहचान सकता हैं। इसलिये निशा अपनी आवाज़ थोडा चेंज करतेहुए बोलि
निशा-हाँ पऱ पहले सें बहुतकम हैं…। थैंक्स मिस्टर अजय आपके औऱ मोनिका केँ कारण हि आज मे जिंदा हूं औऱ उसदिन मैंने आपकेसंग जोँ बिहेव किया उसकेलिए सॉरी।
निशा कि बात सुनकर अज्जू उसे रोकते हुए बोला
अज्जू- अरे नहि नहि आपको मुझसे सॉरी याँ थैंक्स बोलने कि कोई जरूरत नहि हैं। आप् तौ बसउससमय अपना ड्यूटी पूरीकर रहींथीं, वोँ तोँ मे थां जौ अपने फर्ज सें भागरहा थां। अपनेउस दिन केँ व्यवहार केँ लिए सॉरी तौ मुझे आपसे केहना चाहिए। अगर मे उसदिन इस ऑपरेशन पर्र जाने सें मना नहि करता तौ शायद आपकेसंग येसभी नहि होता। इसलिये मैंने तोँ बस अपनी गलतियों कों सुधारने कि एक् छोटी सि कोशिश कि हैं। इसलिये हौ सके तोँ प्लीज आप् मुझेमाफ कर दीजिए, मे वादा करता हूं कि फ्यूचर मे कभी भि मे अपने फर्ज सें पीछे नहि हटूँगा औऱ नां हि आपके किसी आर्डर कि डिसरिस्पेक्ट करूंगा।
अज्जू कि बात सुनकर निशा थोडे अजीब तरीके सें उसे घूरने लगी। जिस कारण अज्जू बहुत अनकंफर्टेवल महसूस करनेलगा थां।
किस्सा जारी हैं.
Meri Jung (Restart) - Continue reading next part
Relavant source : click here