Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 127 -
निशा केँ यूँ घूरने सें अज्जू कुछ अधिक हि अनकंफर्टेवल होँ गय़ा थां, तभी अचानक निशा मुस्कुराने कि नाकाम कोशिश करतेहुए बोलि
निशा- मिस्टर अजयअगर आपकोऐसा हि लगता हैं कि आपके हि कारण मे इस प्राब्लम मे पडी हूं, तौ मेरी हेल्प करके आपने हिसाब बराबर कर दिया हैं। रहीबात उसदिन मेरे आर्डर केँ डिसरिस्पेक्ट कि…। तौ वोँ सभी मेरे प्लान कां हि हिस्सा थां, सचबात तोँ ये हैं कि मे आपको याँ अपने किसी भि दूसरे ऐजेंट कों इस मिशन पर्र कभी भेजना हि नहि चाहती थि, पऱ चीफ नें मुझे आर्डर दिया थां कि मे इस मिशन पर्र नहि जा सकती हूं, मगर आपकेमना करने केँ बाद मुझेउस मिशन पर्र जाने कां एक् बहाने मिल गय़ा थां। इसलिये जौ हौ गय़ा सो हौ गय़ा…। अबउन बातों कों भूल जानां हि बेहतर हैं। क्योंकि मे आपको पहले हि माफकर चुकी हूं औऱ उम्मीद करती हूं कि मेरीबजह सें आपको जोँ प्राब्लम हुइ हैं, उसकेलिऐ आप् भि मुझेमाफ कर देंगे।
निशा कि बात सुनकर अज्जू खुश होतेहुए बोला
अज्जू- तौ इसका मतलब हैं कि अब हम् दोनों दोस्तों कि तरह एक् संग मिलकर कामकर सकते हें।
निशा- श्योर मिस्टर अजय…। पऱ मेरा मिजाज थोडा अलगतरह कां हैं… आईहोप फ्यूचर मे भि आप् मेरे स्ट्रिक्ट बिहेब कों लेकरकभी बुरा नहि मानेंगे।
अज्जू- बिल्कुल भि नहि एजेंट जीरो…। औऱ होँ सकता हैं कि कुछ दिनों बाद मुझे भि अपने दूसरे साथियों कि तरह आपकेइस अलग मिजाज कि आदत होँ जाऐ। बैसेअब जब हम् मित्र बन हि चुके हें तोँ क्याँ मे आपकानाम जान सकता हूं। इसतरह बारबार आपको ऐजेंट जीरो कहना मुझे थोडा ऑक्वर्ड लगरहा हैं।
निशा- मेरेकई सारेनाम औऱ कई पहचाने हें मिस्टर अजय….मगर आप् चाहें तौ मुझे जोया कहकर बुला सकते हें।
निशा कि बात सुनकर अज्जू मन हि मन सोचने लगा कि
“शालीमार दीप पऱ इकराम नें भि ऐजेंट जीरो कों कईबार जोया अप्पी कहकर बुलाया थां। जिसका मतलब हैं कि ऐजेंट जीरो कां असलीनाम जोया हैं औऱ शायद वोँ इकराम कि बडी बेहन भि हैं, तभी तोँ इकराम इन्हें बारबार अप्पी कहकर बुलाता हैं। मगर मुझेऐसा क्यूं लगरहा हैं कि मे एजेंट जीरो मतलबमिस जोया कों पहले सें हि जानता हूं, पता नहि क्यूं पऱ मुझेमिस जोया सें एक् लग हि तरह कां कनेक्शन फील हौ रहा हैं। ”
जहाँ एक् तरफ अज्जू इस टाइम निशा कि असली पहचान केँ बारेसोच रहा थां, वहीं दूसरी तरफ मोनिका अज्जू औऱ निशा केँ बीचचल रही बातों कां आनंद लेँ रही थि, पर्र फिनउसे यादआया कि वोँ वहाकिस लिएआई थि, इसलिये वोँ निशा औऱ अज्जू कि बातों केँ बीच मे आतेहुए बोलि
मोनिका- तोँ मिस्टर अजयअब जब आप् जाग हि गए हें तौ क्याँ आप् कुछदेर केँ लिएइस रूम सें बाहर् जाऐंगे, एक्चुअली मुझे ऐजेंट जीरो कि बेंडेज औऱ कपडे चेंज करने हें।
मोनिका कि बात सुनकर अज्जू कों अपनी गलती कां एहसास हुआ औऱ वोँ जल्दी बोला
अज्जू- ओहआईएम सॉरी…
इतना बोलकर अज्जू जैसे हि उस कमरे सें बाहर् कि तरफ जानेलगा, ठीकतभी निशा कि आँखों केँ सामने इकराम कां चेहरा आँ गय़ा। इकराम केँ बारे मे यादआते हि निशा नें मोनिका सें सबाल किया।
निशा- भइया मेरा मतलब इकराम दिखाई नहि देरहा… कहां हैं वोँ….
इकराम कि नाम सुनते हि मोनिका कां चेहरा अचानक सें सफेदपड गय़ा, कुछदेर पहले निशा केँ होश मे आने सें उसके चेहरे पऱ जौ मुक्कुराहट आई थि, वोँ अब गायब होँ चुकी थि औऱ उसकी स्थान पर्र अब तकलीफ़ साफसाफ दिखाई देरही थि, वहीँ दूसरी तरफ अज्जू जोँ कमरे सें बाहर् जाने केँ लिए पहले हि दरवाजा खोल चुका थां, वोँ भि इकराम कां नाम सुनकर अपनी स्थान पर्र पूरीतरह सें फ्रिज गय़ा। हाँलाकि अज्जू औऱ मोनिका कों इसबात कां अंदाजा पहले सें हि थां कि निशा केँ होश मे आते हि उन्हें इस सबाल कां सामना करना हि पडेगा, पर्र अब तक उनकेपास इस सबाल कां कोई जबाब नहि थां। मोनिका औऱ अज्जू केँ इस रिऐक्शन कों देखकर निशा कों समझते देर नहि लगी कि जरूर इकराम केँ संगकुछ गलतहुआ हैं। इसलिये निशा नें एक् बारफिन जोर देतेहुए अपना सबाल दोहराया
निशा- मोनिका मे तुमसे कुछपूछ रही हूं…। आखिर इकराम कहां हैं…। वोँ ठीक तौ हैं नां…
निशा केँ इसतरह अचानक क्रोध करने सें मोनिका थोडीडर गई थि, जिस कारणसच बोलने कि उसकी हिम्मत हि नहि होँ रही थि, वहीं दूसरी तरफ अज्जू मोनिका कि कंडीशन अच्छी तरह सें समझरहा थां, इसलिये वोँ निशा कों टालते हुए बोला
अज्जू- मिस जोया पहले आप् अपनी ड्रेसिंग चेंज करवाकर अपना ट्रीटमेंट लें लीजिए, उसकेबाद हम् तसल्ली सें इस बारे मे बात करेंगे।
अज्जू केँ इस गोलमाल जबाब कों सुनकर निशा कों दिल हि दिल मे कुछगलत होने कां साफसाफ एहसास होँ रहा थां, हाँलाकि वोँ अपनी सुपर पॉवर कां यूज करके मोनिका याँ फिन अज्जू कां मन पढकरसच जान सकती थि, मगरइस टाइम वोँ स्वयं भि गंभीर रूप सें घायल थि, जिस कारण उसकी अधिकतर सुपर पॉवर उसकी बॉडी कों रिपेयर करने मे खर्च होँ रही थि, इसलिये वोँ इस टाइम किसी कां मन पढने कि कंडीशन मे नहि थि, संग हि संगइस कंडीशन मे अगर उसने अपनी सुपर पावर कां यूज करने कि कोशिश कि तोँ अज्जू केँ सामने उसकाराज खुलने कां भि डर थां। पऱ तभीउसे यादआया कि उसकी बनाईचिप कि हेल्प सें क्वीन हमेशा पूरे ऑपरेशन कों बॉच करती रहती हैं औऱ पूरे ऑपरेशन कां बीडियो डाटा अपनेपास सेव करके भि रखती हैं, जिसे मात्र वोँ स्वयं याँ फिनरॉ चीफ हि एक्सेस कर सकते हें। येयाद आते हि निशाजोर सें चीखी
निशा- क्वीन….
चूँकि अज्जू कमरे सें बाहर् जाने केँ लिए पहले हि दरवाजा खोल चुका थां, जिस कारण निशा कि आवाज़ उस कमरे सें बाहर् मौजूद दूसरे लोगों नें भि सुनली थि, जिसे सुनकर सब लोगों कों पताचल गय़ा कि निशा कों होश आँ चुका हैं। इसलिये हैडक्वाटर मे मौजूद निशा कि टीम केँ करीब-करीब सब मेंबर जल्दी भागते हुएउस कमरे केँ अंदर आँ गए, जिनमें मोनू औऱ रॉचीफ भि सामिल थें। वहीं दूसरी तरफ निशा कि कमांड सुनते हि क्वीन कि एक् 3D इमेजउस कमरे मे दिखाई देनेलगी। क्वीन कों वहां देखकर उस कमरे मे मौजूद सब लोगों कां दिलजोर जोर सें धडकने लगा, क्योंकि उन्हें जिसबात कां डर थां, वोँ अबसच होने बाली थि, वहीं दूसरी तरफ क्वीन निशा कों देखते हुए बोलि
क्वीन- बैल्कम ऐजेंट जीरो…। आपकोफिन सें होश मे आयाहुआ देखकर मुझे बहोत खुशी हुई… कहिए मे आपकीकिस तरह सहायता कर सकती हूं।
क्वीन कि बात सुनकर निशा नें उसे जल्दी आर्डर दिया
निशा- शालिमार दीप पऱ एसिड बॉम्ब ब्लास्ट केँ बाद क्याँ क्याँ हुआ थां, मुझेसभी कुछ जानना हैं…। अभि औऱ इसी टाइम
निशा कां ऑर्डर मिलते हि क्वीन नें कहा
क्वीन- ओक ऐजेंट जीरो
इतना बोलते हि क्वीन नें उस कमरे मे लगी एक् बडी सि एल.ई.डी। टी.बी कों अपने कंट्रोल मे लेँ लिया औऱ उसपर शालीमार दीप पऱ हुए एसिड बॉम्ब ब्लास्ट केँ बाद कां शीन दिखाने लगी, चूँकि उससमय तक निशा बेहोश होँ चुकी थि, औऱ शालीमार दीप पर्र निशा औऱ इकराम मात्र दो हि लोग मौजूद थें, जिनके दिमाग़ मे वोँ चिप इंसर्ट कि गई थि, जिससे क्वीन उनसे कनेक्ट रहती हैं। इसलिये क्वीन इससमय इकराम केँ द्वारा देखेगए विजुअल दिखारही थि, टी.वी। पऱ दिखाई दिया कि किसी लडकी केँ चीखने कि जोरदार आवाज़ सुनाई दि, जिसे सुनकर अचानक सें इकराम कि नींदखुल गई।
जागने केँ बाद इकराम नें चारों तरफ देखा तोँ उसे अपनेपास हि नीचे फर्स पर्र दो इण्डियन साईंटिस्ट दिखाई दिए, जौ स्वयं भि उसचीख कों सुनकर जाग चुके थें, पर्र इकराम कों वहा पऱ निशा कहीं भि दिखाई नहि देरही थि, इसलिये इकराम नें अपनेपास मे रखी पिस्टल उठाई औऱ तेजी सें गुफा केँ बाहर् जा पहुंचा, वोँ इस वक़्त झाडियों केँ पीछे छिपाहुआ, वाहर कां नजारा देखरहा थां, उसने देखा कि झील केँ पास गाडेहरे रंग कां धुँआ फैलाहुआ हैं, जिसके अंदर सें एक् लडकी केँ चीखने कि आवाज़ आँ रही हैं, अगले हि समय वोँ लडकीझील केँ अंदरकूद गई।
उसकेबाद जंगल मे किसी व्यक्ति केँ हंसने कि जोरदार आवाज़ सुनाई दि, उसने गालियाँ बकतेहुए अपने साथियों सें झील केँ अंदर गिरी लडकी कों बाहर् लाने कां आर्डर दिया। कुछ देरबाद हि इकराम नें देखा कि दो व्यक्ति जिन्होंने पी.पी.ई। किट पहनी हुईँ थि, वोँ उसझील केँ अंदरगए औऱ उसमें सें एक् लडकी कों किसीलाश कि तरह खींचले हुए बाहर् लेँ आऐ, उस लडकी कां बदन एसिड कि बजह सें करीब-करीब पूरीतरह सें जल चुका थां, मगर वोँ अब भि जिंदा दि, जिसे देखकर दुशमनों कां लीडर बिल्कुल भि खुश नहि थां, उसकेबाद उस व्यक्ति नें लडकी कि बॉडी अपने अड्डे पर्र लाने कां आर्डर दिया औऱ वहा सें अपने अधिकतर साथियों कों लेकर निकल गय़ा।
उस लीडर केँ जाने केँ बादवहा पर्र वस 8 व्यक्ति हि बचे थें, जिनमें सें 6 व्यक्ति सिक्योरिटी गार्ड कि तरह दिखाई देरहे थें, जिन्होंने इस वक़्त अपने हाथों मे रायफल पकडी हुइ थि, जबकी 2 व्यक्ति वही दोनों व्यक्ति थें, जिन्होंने इस वक़्त पी.पी.ई। किट पहनी हुइ थि औऱ जोँ निशा कों झील सें बाहर् लेकरआऐ थें, उन लोगों नें निशा कों ताबूत कि तरह दिखने बाले एक् लकडी केँ बॉक्स केँ अंदररखा औऱ फिन अपना मास्क उतारकर उस ताबूत कों लेकर पैदल हि अपने अड्डे कि तरफचल पडे, इकराम लगातार उन लोगों कां पीछाकर रहा थां, कुछदूर जाने केँ बाद इकराम नें उन लोगों कों एक् एक् करकेजान सें मार दिया औऱ निशा कों अपनेसंग बापिस उस गुफा केँ पास लें आया।
जहाँ वोँ निशा कों लेकर झऱने केँ नीचे जाकरखडा हौ गय़ा, ताकि उसकी बॉडी सें बचा कुचा एसिड भि धुलजाऐ, उसकेबाद वोँ निशा कों बापिस गुफा केँ अंदर लें गय़ा औऱ उसे लिटाने केँ बाद इसने निशा कों चादर सें अच्छी तरहढंक दिया, फिन इकराम नें उन दोनों साईँटिस्ट कि अच्छी तरह सें तलासी लेने केँ बाद उनसे पूछताछ कि, मगरजब उन लोगों सें इकराम कों कुछ भि पता नहि चला तौ वोँ गुफा केँ बाहर् चला गय़ा, जहाँ उसनेझील केँ पास सें निशा केँ कपडे उठाऐ। मगर बापिस आते वक़्त उसे झाडियों केँ पास एक् छोटा सां ट्रांशमीटर दिखाई दिया, जिसे इकराम नें एक् छोटे सें पत्थर कि हेल्प सें तोड दिया थां, जिसके बाद इकराम गुफा मे बापिस आँ गय़ा।
गुफा मे बापिस आकर इकराम नें निशा कां सारा सामान अपनेबैग मे सुरक्षित तरीके सें संभाल कररख लिया औऱ फिन वोँ जैसे हि उन साईंटिस्ट सें दोबारा पूछताछ करने बाला थां, ठीकतभी उसे निशा केँ कराहने कि हल्कि सि आवाज़ सुनाई दि, जिसके बाद वोँ निशा केँ पासचला गय़ा औऱ उससे बातें करनेलगा, जहाँ निशाउसे उन दोनों साईंटिस्ट कों अपनेसंग वहा सें बापिस इण्डिया लेँ जाने केँ लिएबोल रही थि औऱ दर्द सें तडपते हुए अपने आप् कों जान सें मारने कि रिक्वेस्ट कररही थि। वोँ सारासीन देखकर नाँ चाहते हुए भि उस कमरे मे मौजूद सब लोगों कि आँखों मे आंशू आँ चुके थें।
तभीउस कमरे मे गोली चलने कि एक् आवाज़ सुनाई दि, जिसे सुनकर कमरे केँ अंदर मौजूद सबलोग बुरीतरह सें डरगए, पऱ अगले हि समयउन लोगों नें देखा कि इकराम नें दुख औऱ हताशा मे निशा कि स्थान सामने बाली दीवाल पर्र गोली चलाई थि, शायद इकराम अपने अंदर निशा केँ आर्डर कों पूरा करने कि हिम्मत जुटा हि नहि पाया थां। इकराम अभि अपने अंदरचल रहे इमोशंस सें जूझ हि रहा थां कि तभीउसे गुफा केँ बाहर् हलचल सुनाई दि, जिस कारण वोँ एकबार फिन गुफा केँ बाहर् निकल गय़ा, जहाँउसे अज्जू, मोनू औऱ बाकी केँ लोग दिखाई दिए, अपने साथियों कों वहां देखकर इकराम जौ अब तक किसी भि तरह सें अपने आपको संभाले हुए थां, वोँ पूरीतरह सें टूट गय़ा औऱ अज्जू केँ पैरों मे गिरकर निशा कों बचाने कि भीख माँगने लगा,
वोँ सारासीन बहुत ज़्यादा इमोशनल करने बाला थां, उस कमरे मे मौजूद अधिकतर लोग वोँ सभी पहले हि अपनी आँखों सें देख चुके थें, मगर टी.वी। पऱ एक् बारफिन वोँ सभी देखकर उन्हें सारी घटनाफिन याद आँ गई थि, आखिरकार इकराम नें अपने आपको संभाला औऱ फिन वोँ अपने साथियों कों गुफा केँ अंदर लेकरआया, जहाँ सारी सिचुऐशन देखने केँ बाद अज्जू नें रेसक्यू ऑपरेशन कि पूरी कमांड अपने हाथों मे लेँ ली औऱ अपनेकुछ साथियों कों हैलीकॉप्टर लैंड होने कि स्थान सर्च करने औऱ जल्दी हैलीकॉप्टर बुलाने केँ लिएभेज दिया। उन लोगों केँ जाते हि अचानक इकराम बेहोश होकर नीचे जमीन पऱ जा गिरा।
इकराम केँ बेहोश होने केँ बाद क्वीन हिना केँ द्वारा देखेगए विजुअल्स दिखाने लगी, क्योंकि हिना हि एक् सिर्फ वोँ इंशान थि, जौ आखिर तक इकराम केँ संगरही थि, इकराम केँ बेहोश होने केँ बाद मोनू औऱ हिना नें इकराम केँ कपडे उतारकर चैक किया तौ उन्हें पताचला कि इकराम कि बॉडी भि निशा कि तरह एसिड केँ कारण पूरीतरह सें जल चुकी हैं, जब इकराम कों होशआया तौ सबको इसका असली कारणपता चला। सारीबात जानने केँ बाद वोँ लोग वहां सें निकलने कि तैयारी करनेलगे, तभी कमरे मे ौमौजूद सब लोगों नें देखा कि अज्जू नें निशा कों अपनी बाहों मे उठाया हुआ हैं, ठीकउसी समयकुछ पलों केँ लिए निशा कों फिन सें होशआया थां औऱ उसने बुदबुदाकर कुछ कहने कि कोशिश भि कि थि।
मगर निशा नें क्याँ कहा थां, ये किसी कों पता नहि चला। निशा नें भि उस वक़्त राहत कि एक् लम्बी सांसली, क्योंकि उसकाराज सबके सामने बस खुलने हि बाला थां, मगर भाग्य सें उसके मूंह सें निकला वोँ शब्द इतना धीमा थां कि किसी कों वोँ सुनाई हि नहि दिया। निशा नें अपने दिमाग़ मे चलरही बातों कों झटका औऱ दोबारा सें टी.बी। स्क्रीन कों देखने लगी, उसने देखा कि गुफा केँ बाहर् आते हि उन लोगों पर्र दुशमनों नें एक् बारफिन हमलाकर दिया थां, जहाँ उसने देखा कि कुछ लोगों नें उसे औऱ अज्जू कों निशाना बनाकर गोलियाँ चलाईँ थीं, मगर ऐन टाइम पऱ इकराम उनके सामने आँ गय़ा औऱ सारी गोलियाँ अपने सीने पऱ लेँ लीं। ये सीन देखते हि उस कमरे मे निशा कि जोरदार चीख गूँजउठी
निशा- नहींहींहीहींहीं…………। नहि भइया नहि…… ऐ तुमने क्याँ किया………
निशा केँ यूँ चीखते हि सब लोगों कां ध्यान फिन सें निशा पर्र चला गय़ा, जिसकी आंखों मे इससमय आँशू थें, मगर वोँ चाहकर भि निशा कों दिलासा नहि दे सकते थें, क्योंकि जौ कुछ भि हुआ थां, उसकीबजह सें वोँ लोग स्वयं भि बहुत अधिक दुखी थें,
स्टोरी जारी हैं.
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bhay apka boht boht aabhar apne yeh kahani dobara continue की mai biht bara fan hu iss kahani kaa thnaks aur bhay plz iss kahani ko hinglish mai likh lo aap की bari mehrbani hu gi kyn ke boht sare reader ko hindi nhe bahutt mjhe bhe nhe bahutt bohr मुश्किल hu rhe hain kahani parhne ne
Ik bar phr apka boht boht aabhar
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 128 -
अगले हि समयसब लोगों कां ध्यान फिन सें टी.वी। स्क्रीन पर्र चला गय़ा, जिसमें इस वक़्त इकराम अज्जू सें बहसकर रहा थां, कुछदेर चलीइस बहस केँ बादसब लोगों नें देखा कि अज्जू निशा कों लेकरवहा सें चला गय़ा औऱ उसकेसंग मोनू भि उन दोनों साईंटिस्ट कों अपनेसंग लेकरवहा सें चला गय़ा थां, जबकि हिना वहीँ इकराम केँ संग रूककर दुशमनों कों ठिकाने लगारही थि। सारे दुशमनों कों समाप्त करने केँ बाद वोँ लोग भि हैलीकॉप्टर केँ पास आँ गए जहाँ इकराम एक् बारफिन बेहोश होँ गय़ा थां। येसभी देखते हि निशा एक् बारफिन गुस्से मे चीखी
निशा-बस बहोत हुआ….अब मे येसभी औऱ नहि देख सकती
निशा कि बात सुनते हि क्वीन नें टी.बी.ऑफ कर दि, वहीं दूसरी तरफ निशाबैड सें उठने कि कोशिश करनेलगी, निशा कों यूँ उठतादेख मोनिका जल्दी उसकेपास आई औऱ उसे रोकते हुए बोलि
मोनिका- ऐ आप् क्याँ कर रहीं हें मैम…। आपकी कंडीशन अभि बिल्कुल भि ठीक नहि हैं
मोनिका कि बात सुनकर निशा गुस्से मे फुंफकारते हुए बोलीं
निशा- जहाँ एक् तरफ मेरा भइयामौत सें लडरहा हैं, वहा तुम् मुझसे आराम करने केँ लिए आखिर केसेकह सकती होँ… मे जारही हूं अपने भइया केँ पास….इस वक़्त उसे मेरी जरूरत हैं….
निशा कि बात सुनकर अज्जू एक् बारफिन उसकेपास आया औऱ उसे समझाते हुए बोला
अज्जू- मिस जोया…। अपने आपको संभालिए….
अज्जू कि बात सुनकर निशा गुस्से मे उसे डांटते हुए बोलि
निशा- केसे…। आखिर केसे संभालूं मे अपने आपको…। आखिरये सभी देखने केँ बादकोई बेहन अपने आपको केसे संभाल सकती हैं। मगर तुम्हें तौ सभीकुछ पता थां नां मिस्टर अजय….फिन तुमने पहले हि मुझेसभी कुछसच सच क्यूं नहि बताया। आखिर तुम् लोग मुझे बताते क्यूं नहि कि इकराम इस वक़्त कहां हैं…। वोँ जिंदा भि हैं याँ नहि…। आखिर तुम् लोग मुझसे सच क्यूं छिपारहे हौ….
निशा कि ऐसी हालत देखकर सबलोग बहुत ज़्यादा दुखी थें, उन्होंने पहलीबार अपनीबॉस यानि ऐजेंट जीरो कों इतना ज़्यादा इमोशनल होतेहुए देखा थां, पऱ सच्चाई तोँ ये थि कि वोँ लोग स्वयं भि उतना हि दुखी थें, मगरइस बात केँ लिए नहि कि इकराम ऐजेंट जीरो कों बचाने केँ लिएमौत केँ इतने लगभग पहुँच गय़ा हैं औऱ नां हि इसबात केँ लिए कि ऐजेंट जीरो इकराम कों अपने भइया कि तरह मानती हैं औऱ उसकी इतनी परवाह करती हें, बल्कि इसबात कों लेकर वोँ लोग दुखी थें कि इकराम कि तरह उन्हें भि ऐजेंट जीरो केँ लिएकुछ करने कां मौका आखिर क्यूं नहि मिला हैं। आखिरकार उस बिगडती सिचुऐशन कों संभालने केँ लिएरॉ चीफमि। प्रभू आगेआऐ औऱ निशा कों समझाते हुए बोले
मि। प्रभू- शांत होँ जाओ मेरी बच्ची, तुम्हारा इस हालत मे स्ट्रैश लेना बिल्कुल भि ठीक नहि हैं।
ऑपरेशन केँ दौरान इकराम केँ संग जौ कुछ भि हुआ थां, उसे देखकर निशाइस वक़्त भूल हि चुकी थि कि वोँ इससमय रॉ हैडक्वाटर मे अपनी पूरीटीम केँ संग मौजूद हैं, औऱ इससमय मि। प्रभू उसके अंकल नहि बल्कि रॉचीफ हें। इसलिये मि। प्रभू कि बात सुनकर निशा गुस्से मे बिफरते हुए बोलीं
निशा-ये आप् कैसीबात कर रहें हें अंकल…। मैंने देखा कि मेरे भइया कों गोलियाँ लगींथीं औऱ आप् बोलरहे हें कि मे स्ट्रैश नां लूँ… अंकल आप् हि बताईऐ भलाकोई बेहन अपने भइया कों इस हालत मे देखकर नॉर्मल केसेरह सकती हैं।
मि। प्रभू- बेटा मे तुम्हारी फीलिंग समझरहा हूं…। मे तोँ बस इतनाबोल रहा हूं कि तुम् एक् बार ठण्डे मन सें मेरीबात सुनो, इस तरह परेशान होने सें कोई फायदा नहि हैं, बैसे भि जौ होँ चुका हैं, उसेकोई भि नहि बदल सकता।
निशा- आखिर आपके कहने कां क्याँ मतलब हैं अंकल…। क्याँ इकराम भइया….
निशा कि बात पूरी होने सें पहले हि मि। प्रभू उसेबीच मे टोकते हुए बोले….
मि। प्रभू- नहि मेरे बच्चे कुछ भि उल्टा सीधा सोचने कि जरूरत नहि हैं…। इकराम जिंदा हैं औऱ यहीं पऱ उसका ट्रीटमेंट भि चलरहा हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर निशा नें राहत कि सांसली औऱ कुछदेर रिलेक्स होने केँ बाद बोलि
निशा- थैंक्स गॉड मे तौ डर हि गई थि अंकल…। बैसेअब वोँ कैसा हैं… क्याँ मे उससेमिल सकती हूं।
निशा कि बात सुनकर एक् बारफिन सबके चेहरे लटकगऐ, क्योंकि निशाइस समय जौ पूछरही थि, उसीबात कों सबलोग फिलहाल निशा सें छिपाना चाहते थें, मगरअब सिचुऐशन ऐसीबन गई थि कि निशा सें कुछ भि छिपाना पॉसिवल नहि थां, अगर वोँ लोग निशा कों सच नाँ भि बताऐं तोँ वोँ क्वीन कि हेल्प सें इकराम केँ बारे मे सभीकुछ पताकर सकती थि, जिस कारणमि। प्रभू कों अब निशा सें कुछ भि छिपाना ठीक नहि लगरहा थां। इसलिये वोँ निशा कों समझाते हुऐ बोले
मि। प्रभू- देखो मेरी बच्ची इकराम कि कंडीशन बिल्कुल भि ठीक नहि हैं…। उसेइस टाइम लाईफ सेविंग मेडिकल ट्रीटमेंट दियाजा रहा हैं। असल मे तुम् भाग्य बाली हौ कि उस एसिड नें मात्र तुम्हारी स्किन कों हि नुकशान पहूँचाया थां, मगर इकराम इतनालकी नहि थां, तुम्हारी बॉडी सें एसिड कों धोते वक़्त वोँ एसिड इकराम कि बा़डी नें सोख लिया थां, जिस कारण उसकी बॉडी केँ कई आर्गन पूरीतरह सें गलगए हें, उपर सें उसेकई सारी गोलियाँ भि लगींथीं, जिन्होंने इकराम केँ नाजुक अंगों कों बहुत अधिक नुकशान पहुँचाया हैं। फिलहाल हम् उसे लाईफ सेविंग आर्टिफीशियल आर्गन कि सहायता सें किसीतरह जिंदा रखने मे कामयाब रहे हें। पर्र हम् ज़्यादा टाइम तक उसे मशीनों कि हेल्प सें जिंदा नहि रख सकते। उसकी बॉडी करीब पूरीतरह सें डैमेज होँ चुकी हैं, जिसे रिकरवर किया जानां पॉसिबल नहि हैं, मगरअगर किसीतरह जादू होँ भि गय़ा औऱ इकराम सरवाईब कर गय़ा, तोँ भि उसे सारी जीवन लाईफ सेविंग मशीनों केँ सहारे हि रहना होगा।
मि। प्रभू कि बात सुनकर निशा कों ऐसालगा जैसे किसी नें बेरहमी सें उसकेदिल कों मसल दिया होँ, उसेपता हि नहि चला कि कब उसकी आँखों सें आँशू बहनेलगे थें, हाँलाकि इससमय वोँ पूरीतरह सें शांत दिखाई देरही थि, पर्र उसकेदिल औऱ मन मे इससमय कई सारे इमोंशन कि बाढ सि आँ हुइ थि। कुछदेर बात अपने इमोशंन कों जैसे तैसे कंट्रोल करने केँ बाद निशा नें कहा
निशा-अगर ऐसा हैं तौ हम् उसे सारी जीवनऐसे हि मशीनों केँ सहारे जिंदा रखेंगे।
मि। प्रभू- बेटा इसतरह हम् बस उसकी तकलीफों कों औऱ ज़्यादा बढाने कां काम करेंगे, वोँ एक् सच्चा सिपाही हैं, उसे सम्मान कि मौत मरनेदो मेरी बच्ची, उसे लचारी भरी जीवन देना बिल्कुल भि ठीक नहि हैं। चूँकि हमें बहोत पहले हि उसेइस दर्द सें आजादकर देना चाहिए थां, मगर मे चाहता थां कि तुम् अंतिम बार अपने भइया कों अलविदा कहसको, बस इसीलिए हम् लोगअब तक उसे किसीतरह जिंदा रखेहुए हें। हाँलाकि तुम् उसके परिवार कि एकमात्र सदस्य हौ, इसलिये उसकेसंग आगे क्याँ करना हैं, इसका फैसला अब तुम्हें हि करना हैं।
मि। प्रभू कि बात सुनकर निशा नें थोडे कठोर स्वर मे जबाब दिया
निशा- मे अपना फैसला पहले हि आप् लोगों कों बता चुकी हूं…। मुझे चाहे जोँ करनापडे मगर मे इकराम कों ऐसे मरने नहि दे सकती…। मे इतनी जल्द गिवअप नहि करूँगी अंकल… मेरे भइया कों फिन सें पहले जैसा करने कां मे कोई नां कोई मार्ग खोज लूँगी… मुझेबस कुछ टाइम कि जरूरत हैं….
निशा कि बात सुनकर किसी केँ पास भि कहने केँ लिएकुछ नहि बचा थां। इसलिये सबलोग किसीबुत कि तरह शांतखडे रहे। आखिरकार निशाउस खामोशी कों भंग करतेहुए बोलीं
निशा- मुझे अभि औऱ इसी वक़्त अपने भइया सें मिलना हैं….
इतना बोलकर निशा नें एक् नजर मोनिका पऱ डाली औऱ उससे बोलि
निशा- मोनिका प्लीज मुझे इकराम केँ पास लेँ चलो….जब तक मे उसे अपनी आँखों सें नहि देख लूँगी तब तक मुझे शांति नहि मिलेगी।
निशा कि बात सुनकर मोनिका नें कहा
मोनिका- ठीक हैं मैम मे आपको इकराम केँ पास लें चलूँगी, पर्र आपका प्रापर ट्रीटमेंट करने औऱ आपकी ड्रेसिंग चेंज करने केँ बाद।
निशा- नहि वोँ सभी तुम् बाद मे करती रहना…। प्लीज पहले मुझे मेरे भइया केँ पास लेँ चलो… उसकेबाद तुम्हें मेरेसंग जोँ करना हैं करती रहना…। मे तुमसे कुछ भि नहि कहूँगी।
निशाकेे इसतरह रिक्वेस्सट करने पर्र आखिरकार मोनिका अपने हथियार डालते हुए बोलि
मोनिका- ठीक हैं मैम मे आपको इकराम केँ पास लेँ चलती हूं। पऱ आपको वादा करना होगा कि आप् अपने इमोशंस पऱ कंट्रोल रखेंगी, हम् सबको आपकी जरूरत हैं, रॉ कों औऱ इसदेश कों आपकी जरूरत हैं… अगर आप् हि इसतरह टूट जाऐंगी तोँ हमारा क्याँ होगामैम…। आपके बिना हमारी पूरीटीम बिखर जाऐगी…। बैसे भि अगर आप् सच मे इकराम कों बचाना चाहती हें तोँ आपका मैंटली स्ट्रांग होना बहोत जरूरी हैं।
निशाइस समयबात कों लम्बा खींचने केँ बिल्कुल भि मूढ मे नहि थि, इसलिये वोँ मोनिका कों टालते हुए बोलीं
निशा-हां हाँठीक हैं मोनिका मे तुम्हारी बातसमझ गई… मे वादा करती हूं कि मे अपने इमोशन कों पूरीतरह सें कंट्रोल करके रखूँगी…। क्याँ अब तुम् मुझे इकराम केँ पास लें जा सकती होँ।
मोनिका केँ पासअब औऱ कोई मार्ग नहि बचा थां, इसलिये उसने निशा कों खडे होने मे सहायता कि औऱ फिनउसे सहारा देकर इकराम केँ वार्ड कि तरफ लेँ जानेलगी, हाँलाकि निशा कि कंडीशन कों देखते हुए बाकी लोगों कि उसकेसंग जाने कि बिल्कुल भि हिम्मत नहि हौ रही थि, मगरमि। प्रभू, अज्जू औऱ मोनू अपने आपको निशा केँ संग इकराम केँ पास जाने सें नहि रोकपाऐ औऱ वोँ भि निशा केँ संगसंग इकराम केँ वार्ड कि तरफबड गए। असल मे उन्हें डर थां कि निशा कहीं इकराम कि कंडीशन देखकर आऊटऑफ कंट्रोल नां होँ जाऐ। ऐसी स्थिती मे मोनिका अकेली निशा कों संभाल नहि पाऐगी, इसलिये स्थिती कों संभालने केँ लिएकुछ लोगों कां उनकेसंग होना जरूरी थां।
निशा केँ बार्ड सें थोडीदूर हि इकराम कां वार्ड थां, जब निशाउस वार्ड केँ अंदर पहुँची तोँ उसने देखा कि इकराम इस वक़्त एक् बडे सें हाईटैक बैंटीलेटर पर्र लेटाहुआ हैं। मगर उसकी हालतइस वक़्त बुरीतरह सें खराब हैं। इकराम केँ सीने सें लेकरकमर तक कि स्किन कों काटकर उसकी बॉडी सें अलगकर दिया गय़ा थां, शायद वोँ एसिड केँ कारण पूरीतरह सें डैमेज हौ गई थि। इकराम केँ सीने औऱ पेट पर्र स्किन नां होने केँ कारण उसके इंटर्नल आर्गन साफसाफ दिकाई देरहे थें, जौ कि एसिड कि बजह सें गलने औऱ गोलियाँ लगने सें बुरीतरह सें डैमेज हौ गए थें, एक् तरह सें इकराम केँ करीबसब आर्गन फेल होँ चुके थें, यहा तक कि उसकादिल भि बुरीतरह सें डैमेज हौ गय़ा थां।
इसलिये इकराम कों किसीतरह जिंदा रखने केँ लिए उसकी बॉडी सें ढेर सारी प्लास्टिक कि नलियाँ जोडीं गईंथीं, जौ आर्टिफीसियल आर्गन कि सहायता सें उसके मस्तिस्क औऱ बाकी बॉडी पार्टस् तक ब्लडएवं दूसरे जरूरी लिक्विड पहुंचा रहे थें। इकराम कि इस हालत कों देखकर निशासमझ चुकी थि कि अबउसे बचाना करीब असंभव हैं। अगर एक् समय केँ लिए भि इकराम कि बॉडी सें जुडी मशीनों कों बंदकर दिया गय़ा तौ इकराम कि जल्दी मौत हौ जाऐगी। मगर निशाअब भि हार नहि मानना चाहती थि, क्योंकि जब वोँ इसिड बॉम्ब सें बुरीतरह घायल हौ गई थि औऱ उसे यकीन होँ गय़ा थां कि अब वोँ जिंदा नहि बचेगी। उस कंडीशन मे इकराम नें भि उसपर गिवअप नहि किया थां, तौ फिन वोँ इकराम केँ लिए गिवअप केसेकर सकती थि।
इकराम कों इस हालत मे देखकर निशा कि आँखों सें लगातार आँशूबह रहे थें, हाँलाकि वोँ जानती थि कि इससमय वोँ इकराम कि कोई सहायता नहि कर सकती हैं, क्योंकि अभि तक मेडिकल फील्ड मे ऐसीकोई तकनीक मौजूद नहि हैं जोँ इकराम कों पूरीतरह सें ठीककर सके, मगर उसे पूरा यकीन थां कि फ्यूचर मे इकराम कों बचाने कां जरूरकोई नाँ कोई मार्ग निकल आऐगा। तभी अचानक निशा कों उम्मीद कि एक् किरणनजर आई, वोँ अपने आँशुओं कों पोंछते हुए मोनिका सें बोलीं
निशा- मोनिका क्याँ हम् इकराम केँ आर्गन ट्रांशप्लांट करकेउसे फिन सें ठीक नहि कर सकते हें।
निशा कां सबाल सुनकर मोनिका थोडा हिचकिचाते हुए बोलीं
मोनिका- ये पॉसिवल नहि हैं मैम…असल मे इकराम केँ करीबसब आर्गन बेकार होँ चुके हें। इसलिये हमें एक् तरह सें इकराम कि फुल बॉ़डी ट्रांशप्लांट करनी पडेगी। बैसे भि इकराम कां ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव हैं। अब आप् तौ जानती हि हें कि ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप बहुत अधिक रेयर होता हैं। इसलिये इतनी जल्द इकराम केँ लिए सारे आर्गन कां इंतजाम करना करीब-करीब नामुमकिन हैं। बैसे भि किसी इंशान केँ करीब-करीब सब आर्गन रीप्लेश करना बहुत ज़्यादा रिस्की काम हैं, औऱ अगर हमने किसीतरह इकराम केँ सारे आर्गन ट्रांशप्लॉंट कर भि दिए, तोँ भि उसके जिंदा बचने कि संभावना करीब-करीब नां केँ बराबर हैं। क्योंकि कईबार किसी इंशान कि बॉडी दूसरे इंशान केँ आर्गन कों एक्सेप्ट नहि करती हैं। इसलिये अगर हमसेजरा सि भि चूक हौ गई, तौ हमारी सारी मेहनत बेकार चली जाऐगी।
मोनिका कि बात सुनकर निशा एक् बारफिन पूरीतरह सें उदास हौ चुकी थि, मगरअब भि उसकादिल उसेहार नाँ मानने केँ लिएकह रहा थां। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे लडखडाते कदमों केँ संग इकराम केँ एकदमपास जा पहुँची, जोँ इस टाइम कोमा मे थां, इकराम केँ पास पहुँचकर निशा नें उसके एक् हाथ कों अपने दोनों हाथों सें पकडकर बडे हि प्रेम औऱ मासूमियत केँ संग उससेकहा
निशा- भइया प्लीज हारमत मानना… मे वादा करती हूं कि तुम्हें पहले कि तरह बिल्कुल ठीक करने कां मे कोई नाँ कोई मार्ग जरूर ढूंड लूँगी…। तुम् बस मेरा प्रतीक्षा करना भइया…। तुम्हें याद हैं नाँ कि तुमने हमेशा मेरासंग देने कां औऱ मेरे अधूरे कामों कों पूरा करने कां वादा किया हैं, औऱ तुमने मुझसे ये भि तोँ कहा थां कि तुम् एक् सच्चे पठान होँ औऱ पठानकभी अपना वादा नहि तोडते, औऱ तुम्हें याद हैं नाँ जब मैंने तुमसे विवाह करने केँ लिएकहा थां, तब तुमने मुझसे कहा थां कि जब तक मेराघऱ नहि बस जाता, तब तक तुम् विवाह नहि करोगे, क्योंकि एक् लडकी केँ पास मात्र दो ठिकाने होते हें, एक् उसके पति कां घऱ औऱ दूसरा उसके भइया कां घऱ, देखो भइया मेराघऱ अभि नहि वासा हैं, तौ फिन तुम् मुझेइस तरह अकेला छोडकर केसेजा सकते हौ भइया……
निशा कि इन बातों कों सुनकर वहा मौजूद हर एक् इंशान कि आँखों मे इस वक़्त आँशू थें, उन्हें इसबात कां एसहास होँ चुका थां कि निशा औऱ इकराम सगे भइया बेहन सें बडकर हें औऱ उनका एक् दूसरे केँ लिए प्रेम बिल्कुल पवित्र हैं।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
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