शादी वाला घर और पूरे शबाब पर चुदाई - Suhagrat Ki Raat - Episode 1
विवाह वालाघऱ औऱ पूरे शबाब पर्र चुदाई
22 नवम्बर कि रात कों मैंने दिल्ली सें जालंधर जाने केँ लिएबस पकड़ी। रात कां सफर थोडा सुविधाजनक भि थां क्यूंकि लम्बा सफर थां। दिल्ली बस स्टैंड सें निकलने केँ बाद लगभगआधे घंटे मे बस करनाल बाईपास पऱ पहुँची तौ कुछ सवारियाँ बस मे चढ़ी। मैंने देखा कि उन सवारियों मे दो महिलायें थि। मेरेबगल मे एक् सीट खाली थि तोँ मन मे सोचा कि इन मे सें अगर एक् मेरेपास बैठजाए तोँ सफर कां आनन्द आँ जाए।
ईश्वर नें मेरी मुराद पूरी कि औऱ वोँ लगभग पच्चीस छब्बीस साल कि गदराए जिस्म कि मालकिन मेरेपास आकरबैठ गई। मे तौ उसको देखता हि रह गय़ा। क्याँ फुरसत सें घड़ा थां ऊपर वाले नें उसको। एक् एक् अंग जैसे सांचे मे ढालकर चिपकाया गय़ा थां। सबसे पहलेनजर चेहरे पर्र गई। एकदम सफ़ेद रंग, बड़ी बड़ीगोल गोल आँखें, सुतवाँ नाक औऱ गुलाब कि पंखुड़ियों जैसे गुलाबी गुलाबी होंठ जौ उसकी हुस्न कों चारचार चंदलगा रहे थें।
नजर जैसे हि थोडा औऱ नीचे गई तौ दिल धाड़-धाड़ बजनेलगा। दिल कि धड़कने तेज हौ गई जब मेरीनजर उस सुंदरता कि छाती कि शोभा बढ़ाती उसकी चूचियों पर्र गई। आप् तौ जानते हि हें कि मैंने पहले हि बहोत सि चू्तों औऱ चूतवालियों कों चखाहुआ हैं पऱ यकीनन येउन सबसेऊपर केँ दर्जे कि सुंदर क़यामत थि।
अभि मे उसकी हुस्न मे हि खोयाहुआ थां कि टिकट कंडेक्टर टिकट काटने आँ गय़ा। मेरे अंदरये लालसा जाग गई कि देखूँ ये क़यामत कब तक मेरे सानिध्य कों सुशोभित करेगी। औऱ जब उसने जालंधर केँ दो टिकेट माँगे तौ मे ऊपर वाले कि मेहरबानी पर्र नतमस्तक हौ गय़ा।
सफर शुरुआत हुआ, बस अपनीगति सें चलरही थि पर्र मेरेदिल कि धड़कन उस सें कहीं ज़्यादा तेजचल रही थि। मे तौ उस खूबसूरत औरत कि हुस्न मे खोयाहुआ थां, तभी वोँ मुझ सें मुखातिब होकर बोलीं– आप् कहां तक जारहे हें?
"मे जालंधर तक जारहा हूं !" मैंने जवाब दिया।
फिन तोँ जैसे बातचीत कां सिलसिला चल निकला। बातों हि बातों मे उसने बताया कि वोँ भि जालंधर एक् विवाह मे शामिल होनेजा रही हैं। बातों बातों मे कब पानीपत आँ गय़ा पता हि नहि चला। पानीपत सें बसचली तोँ रात केँ लगभग ग्यारह बज चुके थें। तभी उसने मुझसे मेराफोन माँगा क्यूंकि उसकेफोन कि बैटरी ख़त्म होँ गई थि। उसने एक् नम्बर मिलाकर बात कि औऱ बताया कि वोँ सुभहचार बजे तक पहुँच जाएगी।
उसने मुझे मेरा मोबाइल वापिस किया औऱ बोलि– आपकानाम राज हैं?
"हाँ। आपको केसेपता?"
"क्याँ आप् विक्रम कि विवाह मे जारहे हें?"
"हाँ। पऱ आपकोये सभी केसेपता?"
मे हैरान थां कि तभी मैंने मोबाइल मे डायल कियाहुआ नम्बर देखा तौ उस खूबसूरत औरत नें विक्रम कां हि नम्बर डायल कियाहुआ थां। मुझे सारा माजरा समझ मे आँ गय़ा थां।
"आप् विक्रम कि क्याँ लगती हें?"
"विक्रम मेरे मामाजी जी कां बेटा हैं" उसने जवाब दिया।
"ओह। तोँ आप् विक्रम केँ फूफी कि बेटी गंध हें?"
"नहि। गंध मेरी छोटी बेहन कां नाम हैं। मे पायल हूं। गंध वोँ आगे बैठी हैं। " उसने अपना परिचय दिया।
फिन बहुतदेर तक हम् बातें करतेरहे औऱ लगभग साढ़े बारहबजे बस पिपली बस स्टैंड पर्र रुकी औऱ ड्राईवर गरमचाय पीनेचला गय़ा। पायलउठी औऱ मुझे बोलि- प्लीज, मेरेसंग चलो, मुझे टॉयलेट जानां हैं।
बाहर् अँधेरा थां तोँ मे उसकेसंग चल दिया। बाथरूम कि तरफगए तौ देखाउस पर्र ताला लटकाहुआ थां। मैंने उसेकहा कि वोँ उधर अँधेरे मे जाकर फ्रेश हौ लें।
पहले तोँ वोँ डर केँ मारेमना करतीरही पर्र फिन वोँ मुझ सें थोड़ी दूरी पऱ हि अपनी सलवार औऱ पेंटी नीचे करके पेशाब करनेलगी। हल्की हल्की लाइट मे उसके गोरे गोरे कूल्हे संगमरमर कि तरहचमक उठे थें जिन्हें मे देखता हि रह गय़ा।
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शादी वाला घर और पूरे शबाब पर चुदाई - Suhagrat Ki Raat – New Episode
पेशाब करने केँ बाद मैंने पानी कि बोतल सें उसकेहाथ धुलवाए। उसकी गोरी गोरी गांडदेख कर मेरे लण्ड मे भि तनाव आँ गय़ा थां औऱ मुझे भि पेशाब कां जोर होँ गय़ा थां सो मैंने उसेबस मे जाने कों कहा औऱ ठीकउसी स्थान पऱ जाकर लण्ड बाहर् निकाल कर पेशाब करनेलगा। जब पेशाब करके वापिस मुड़ा तौ देखा वोँ वहीं पर्र खड़ी थि।
"गई नहि अभि तक.?"
"नहि। बस तुम्हारा हि इंतजार कररही थि। "
"क्यूं.?"
"तुमने भि तौ मेरा इंतजार किया थां.!"
मैंने उसकी आँखों मे देखा तोँ वोँ हल्के सें मुस्कुराई। उसकी मुस्कुराहट देखकर मे भि मुस्कुराए बिना नाँ रहसका।
फिनसंग संग चलते चलते हम् दोनों गरमचाय केँ स्टाल पर्र गए औऱ तीनगरम चाय लेकरबस मे चढ़गए। बस मे भीड़ अभि भि कम नहि हुईँ थि। अक्सर देररात वाली बसों मे लम्बी दूरी कि सवारियाँ हि होती हें। लगभगबीस मिनट केँ बादबस एक् बारफिन चल पड़ी।
कुछ दूर चलने केँ बाद पायल नींद कि झपकी लेनेलगी औऱ बारबार आगे कि तरफगिर रही थि। मैंने थोडा साहस दिखाते हुए उसकासर पकड़कर अपने कंधे पर्र रख लिया। उसने एक् बारआँख खोलकर मेरीतरफ देखा औऱ फिन मुस्कुरा कर आँखें बंदकर ली। बस अपनीगति सें चलतीजा रही थि। बाहर् कां मौसम ठंडा होँ गय़ा थां पर्र पायल कां स्पर्श मेरे अंदर गर्मी भरताजा रहा थां। मैंने एक् बारगंध कि तरफ देखा। वोँ भि नींद केँ आगोश मे जा चुकी थि। करीब-करीब आधी सें अधिक सवारियाँ अब तक याँ तौ सो चुकी थि याँ फिन नींद कि झपकियाँ लेतेहुए झूलरही थि।
शायद मे हि अकेला ऐसा थां जिसकी आँखों सें नींद कोसों दूर थि।
मैंने पायल केँ नींद मे खोये मासूम सें चेहरे कों देखा तोँ मेरामन हुआ कि मे अभि एक् प्यारा सां चुम्बन देदूँ, पर्र जल्दबाजी ठीक नहि थि। फिन भि मैंने थोडा साहस औऱ किया औऱ अपनाहाथ पायल केँ कंधे पर्र रखकर उसको थोडा सां अपनीओर खींचा तोँ पायल भि मुझ सें लिपटती चली गई।
कुछदेर बादबस अम्बाला रुकी। पायल नें आँखें खोली औऱ बाहर् देखने लगी पर्र मैंने देखा कि उसने मेराहाथ नहि हटाया थां। बस दुबारा चली तोँ उसनेफिन सें अपनासर मेरे कंधे पऱ रख लिया औऱ आँखें बंदकर ली पऱ फिन अचानक उठी औऱ बोलि- राज, मुझे ठण्डलग रही हैं।
उसकेबैग मे शाल थि तोँ उसने वोँ निकाल कर अपनेऊपर ओढ़ली औऱ फिन सें मेरे कंधे पऱ सररखकर बैठ गई।
"राज। तुम्हें नींद नहि आँ रही हैं.?"
"आप् जैसी हसीन औऱ हसीन लड़कीअगर बगल मे हौ तोँ किस कमबख्त कों नींद आएगी। "
उसने एक् मुक्का मारा औऱ मेरेकान केँ पास फुसफुसाते हुए बोलि, "शैतान !"
मेरीबात सुनकर उसके होंठों पर्र जौ मुस्कान आई उसने मेरे हौंसले कों कई गुणा बढ़ा दिया। मामला करीब-करीब पट चुका थां औऱ अब तोँ मुझे जल्द सें जालंधर पहुँचने कां इंतजार थां। मेरे हाथों कां दबावअब पायल केँ कंधे पर्र थोडा औऱ अधिकबढ़ गय़ा थां औऱ कुछ हि देर मे मेराहाथ नीचे केँ तरफ सरकने लगा जिसे शायद पायल नें भि महसूस कर लिया थां।
"लगता हैं तुम्हे भि ठण्डलग रही हैं.!" वोँ मेरेकान मे फुसफुसाई औऱ बिना मुझसे पूछे हि उसने अपनीशाल मुझ पऱ भि ओढ़ा दि।
मैंने हाथ बढ़ाकर अपनाहाथ उसकेहाथ पऱ रखा तौ उसने भि मेराहाथ पकड़ लिया। अब कोई गुंजाइश नहि बची थि। मे कुछदेर उसकाहाथ सहलाता रहा औऱ फिन मेराहाथ आगे बढ़ने लगा औऱ उसकेगोल गोल मस्त रसीले ब्रा मे कसी हुईँ चूचियों पऱ पहुँच गय़ा।
वोँ कुछ नहि बोलीं।
मे भि ब्रा केँ ऊपर सें हि उसके पहाड़ों कि ऊचाईयाँ नापने लगा औऱ हल्के हल्के दबाने लगा। उसके जिस्म कि सरसराहट मुझे महसूस हौ रही थि। वोँ भि कसमसा करमुझ सें लिपटती जारही थि।
मैंने उसकाहाथ पकड़कर अपने लण्ड पर्र रख दिया तोँ पहले तौ उसनेहाथ ऐसे हि रखेरखा औऱ फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे लण्ड कों पैंट केँ ऊपर सें हि सहलाने लगी। मे उसकी चूचियाँ मसलरहा थां औऱ वोँ मेरे कंधे पर्र सर कों रखे मेरे लण्ड कों सहलाते हुएमजा लेँ रही थि।
मैंने बस मे चारों तरफ देखा, सभी सोरहे थें। मैंने मौके कां फायदा उठाया औऱ शॉल केँ अंदरसर करके पायल केँ होंठों पऱ अपने होंठरख दिए। पहले तोँ वोँ घबराई पऱ फिनजब मैंने बताया कि सभीसो रहे हैं तौ वोँ भि चुम्बन मे मेरासंग देनेलगी।
रात केँ करीबतीन बज चुके थें औऱ हम् लुधियाना पहुँच चुके थें। बस मे थोड़ी हलचल हुई तोँ हम् भि अलग होकरबैठ गए। अब करीब-करीब एक् घंटेभर कां सफर हि बाकी थां। बस मे इस सें अधिककुछ होँ भि नहि सकता थां। सोबसऐसे हि शाल मे लिपटे हुएसफर कां मजा लें रहे थें।
मन हि मन प्रोग्राम बनारहा थां कि जालंधर पहुँच कर केसे पायल कि बुर कों अपने लण्ड कि गर्मी सें मस्त पानी पानी करना हैं।
बस जालंधर पहुँच गई थि, बस स्टैंड पर्र उतरकर पायल नें मुझ सें मेराफोन माँगा। वोँ विक्रम कों मोबाइल करना चाहती थि। पऱ मे कुछदेर औऱ पायल केँ संग अकेला रहना चाहता थां क्यूंकि विवाह वालेघऱ मे तौ जाते हि पायल रिश्तेदारों कि भीड़ मे खो जाती।
मौसम मे सुभह सुभह कि ठंडक औऱ तरावट भरी हुईँ थि। बस स्टैंड पऱ हि एक् गरमचाय वाले कि दुकान खुली हि थि तौ हम् तीनों दुकान पर्र पहुँच गए औऱ गरमचाय आर्डर कर दि।
गंध फ्रेश होना चाहती थि तौ वोँ बस स्टैंड पऱ हि बने सुलभ शौचालय मे चली गई।
पायल औऱ मे एक् हि बेंच पऱ बैठे थें।
"पायल। तुमने तौ मुझे अपना दीवाना बना दिया हैं। आईलवयू पायल."
पायल मेरी आँखों मे देखते हुए मुस्कुराई औऱ फिन'लव युटूराज। पर्र !'
उसने अपनीबात अधूरी छोड़ी तोँ मैंने पूछा– पर्र क्याँ.?
"राज। मे शादीशुदा हूं। औऱ तुम् समझ सकते हौ कि एक् शादीशुदा कों किसी पराये मर्द सें प्रेम करने कां कोईहक नहि होता। "
"पऱ तुम् मेरेदिल मे बस गई हौ पायल औऱ अब तुम्हारे बिना रहना मेरेलिए मुश्किल होगा। औऱ फिन ईश्वर नें भि कुछसोच कर हि हम् दोनों कों मिलवाया होगा !"
"तुम् बहोत अच्छे हौ राज." वोँ कहकर मुस्कुराई औऱ फिन सें मेरे कंधे सें लग गई।
तभीगंध औऱ गरमचाय दोनों एक् संग आँ गई। पायल सीधे होकरबैठ गई।
पूरेसफर मे गंध अपने आप् मे हि मस्त थि। उसने केवल एक् बार पायल सें मेरे बारे मे पूछा थां औऱ उसकेबाद अब वोँ मेरे सामने थि। उसने भि शालओढ़ रखी थि। वोँ हमारे सामने बैठकर गरमचाय पीनेलगी।
मैंने तब पहलीबार गंध कों ध्यान सें देखा। वोँ मुँह-हाथ धोकरआई थि औऱ बाल भि ठीककर लिए थें तोँ एक् चमक सि थि चेहरे पर्र। मैंने गंध कों देखा तौ महसूस किया कि गंध पायल सें किसी भि मायने मे कम नहि थि। वोँ भि बहोत हसीन थि औऱ जवानी कि निशानियाँ उसकी भि गजब कि थि।
गरमचाय पीने केँ बाद मैंने विक्रम कों मोबाइल किया तौ दो-तीन बार मे उसने मोबाइल उठाया। जब मैंने उसे बताया कि हम् जालंधर बस-स्टैंड पर्र हैं तौ उसने वाहन भेजने कां बोलकर मोबाइल काट दिया।
शादी वाला घर और पूरे शबाब पर चुदाई - Suhagrat Ki Raat – New Episode
व्हीकल लगभगआधे घंटेबाद आई। तब तक पायल मेरे कंधे पर्र सररखे बैठीरही। गंध चुपचाप बैठी पायल कि तरफ देखती रही। मे थोडा हैरान थां कि पायल केसे अपनी बेहन केँ सामने हि एक् पराये मर्द केँ संग लिपटकर बैठी हुईँ थि।
जब हम् विक्रम केँ घऱ पहुँचे तौ सुभह केँ करीब साढ़े पाँचबज चुके थें औऱ घऱ केँ बहोत सें लोगजाग चुके थें। विक्रम अभि सोरहा थां। वोँ काम केँ कारणरात कों देर सें सोया थां। मैंने उसको जाकर उठाया तौ वोँ खुश हौ गय़ा औऱ फिन मे भि वही उसकेबेड पऱ लेट गय़ा औऱ सारीरात कि नींद सें थकी आँखें कबबंद होँ गई पता हि नहि चला।
जब उठा तौ दोपहर कां लगभग एक् बजरहा थां। मुझे किसी नें पकड़कर हिलाया तोँ मेरी नींद खुली औऱ आँख खोलते हि सामने मेरीनई महबूबा पायल खड़ी थि।
"उठो मेरे राजाजी। विवाह मे आये होँ याँ नींद पूरी करने.?" कहकर वोँ हंस पड़ी।
मे हड़बड़ा करउठा तोँ देखा कि कमरे मे पायल औऱ मे हि थें। मे उठ खड़ाहुआ औऱ एक् हि झटके मे पायल कों अपनी बाहों मे लेकर उसके होंठों पऱ एक् जोरदार किसकर दिया।
पायलमुझ सें छुड़वा करअलग होँ गई- तुम् पागल होँ क्याँ.? ये विवाह वालाघऱ हैं मिस्टर.!
मैंने उसको एक् फ़्लाइंग किस किया औऱ फिन बाथरूम मे घुस गय़ा। बाथरूम कां दरवाजा बंद करतेहुए मैंने देखा पायल वहीं खड़ी मुस्कुरा रही थि।
उसकेबाद विवाह कि रस्में शुरुआत होँ गई औऱ फिन पायल औऱ मे अकेले नहि मिलपाए। पायल मेरे आसपास हि मंडरा रही थि औऱ जब वोँ आँखों सें ओझल होती तोँ मे भि उसको ढूंढने केँ लिए बेचैन होँ उठता। ऐसे हि सारादिन निकल गय़ा। हम् दोनों विवाह कि भीड़ मे भि एक् दूसरे मे खोयेहुए थें। मे तोँ मौके कि तलाश मे थां कि कब मुझे मौका मिले औऱ मे पायल केँ मस्त जिस्म कां मजा लेँ सकूँ। पायल कों चोदने केँ लिए मेरा लण्ड बेकरार थां।
रात कों बारात थि। प्रोग्राम विक्रम केँ घऱ सें कुछ हि दूरी पऱ एक् मैरिज-पैलेस मे थां। साम कों लगभगसात बजेसभी सजधजकर नाचते कूदते घऱ सें निकले। मे भि मस्ती मे थां। पंजाबी विवाह मे शराब-कवाब कि कोईकमी नहि होती। मैंने भि दो-तीन पैग चढ़ालिए थें औऱ मे भि पूरी मस्ती मे नाचरहा थां औऱ अपने साथी कि विवाह कों एन्जॉय कररहा थां।
पायल भि दूसरी औरतों केँ संगअलग नाचरही थि। भीड़ मे मेरीनजर पायल पर्र हि टिकी हुइ थि। बारात कुछआगे बढ़ी तौ व्यक्ति औऱ औरतें सभी एक् संग नाचने लगे। बस इसीबीच मुझे भि मौकामिल गय़ा अपनीनई महबूबा साथ नाचने कां। पायल औऱ मे दोनों एक् दूसरे कां हाथहाथ मे लेकर नाचने लगे।
"पायल.इस ड्रेस मे तौ क़यामत लगरही हौ। "
"तुम् भि बहोत हेंडसम लगरहे होँ। देखो तौ विवाह मे कितनी लड़कियों कि नजर केवल तुम् पर्र हि हैं। " कहकर वोँ खिलखिला करहंस पड़ी।
बारात अपने निर्धारित जगह पऱ पहुँच गई थि। फिनगेट पर्र रिबन कां प्रोग्राम हुआ औऱ सबनेखूब मस्ती कि। अंदर जाकर डी.जे। पर्र खूब मस्ती हुईँ। खूबदिल खोलकर नाचे औऱ पैसे लुटाए। थकहार करफिन खानां खानेलगे। विक्रम फेरे लेने केँ लिएचला गय़ा औऱ मे पायलसाथ खानां खानेचला गय़ा।
"पायल। तुम्हें चूमने कां बहोत दिलकर रहा हैं। प्लीज एक् किसदो नाँ.!"
"तुम् पागल हौ। सभी लोगों केँ बीच मे किस.? मिस्टर होशकरो."
तभी मुझेयाद आया कि विक्रम कि वाहन कि चाबी मेरेपास हैं। मैंने पायल कों बाहर् गेट पर्र आने कों कहा औऱ स्वयं व्हीकल निकालने चल पड़ा।
जब पार्किंग सें कार निकलकर बाहर् आया तौ देखा पायलगेट पर्र हि खड़ी थि। मैंने उसकोकार मे बुलाया तोँ वोँ आकरबैठ गई औऱ मैंने भि कार मार्ग पर्र दौड़ा दि।
"राज.सभी लोग क्याँ सोचेंगे दोस्त। अगर किसी कों पतालग गय़ा तोँ कि मे तुम्हारे संगऐसे अकेली कार मे घूमरही हूं तौ.?"
"पायल, ये रातफिन नहि मिलेगी मेरीजान। बसअबकुछ नां बोलो !"
"पऱ हम् जा कहां रहे हें?"
"देखते हें कोई तौ स्थान मिल हि जायेगी दो दीवानों कों प्रेम करने केँ लिए !"
मे व्हीकल हाइवे पऱ लें आया औऱ सामने हि मुझे एक् गेस्ट हाउसनजर आया। रात केँ दोबजरहे थें। मैंने कार रोकी तौ चौकीदार दौड़कर आया। मैंने उसको पचास कां नोट दिया औऱ कमरे केँ बारे मे पूछा तोँ उसने अंदरआने कों कहा।
अंदर जाकर बोला-सर। रूम तोँ कोई खाली नहि हैं।
"तौ साले तूने बाहर् क्यूं नहि बताया.?"
"सर वोँ ऐसा हैं कि एक् रूम हैं तोँ पर्र वोँ गेस्ट हाउस केँ मालिक कां हैं। अगर आप् लोग सुभह पाँचबजे सें पहले खालीकर दो तौ वोँ रूम मे आप् लोगो केँ लिएखोल सकता हूं पर्र पाँचसौ रुपये लगेंगे। "
मैंने बिनादेर किये गाँधी छाप पाँचसौ कां नोट निकलकर उसकेहाथ पऱ रखा औऱ उसने बिनादेर कियेरूम खोल दिया। पायल चुपचाप येसभी देखरही थि पऱ बोलकुछ नहि रही थि।
रूम शानदार थां। आखिर गेस्ट हाउस केँ मालिक कां थां। बिल्कुल साफ़ सुथरा। एक् साइड मे सोफा औऱ मेजलगी थि औऱ दूसरी साइड मे एक् बड़े वाला सिंगल बेड थां। पर्र हमेंकौन सां यहा सोना थां।
चौकीदार केँ जाते हि मैंने दरवाजा अंदर सें बंद किया औऱ पकड़कर पायल कों अपनी बाहों मे भर लिया।
"बहोत बेताब होँ मुझे चोदने केँ लिए.?"
पायल केँ मुख सें ये 'चोदना' शब्दसुन एक् समय कों तौ मे हैरान रह गय़ा मगर.
चौकीदार केँ जाते हि मैंने दरवाजा अंदर सें बंद किया औऱ पकड़कर पायल कों अपनी बाहों मे भर लिया।
"बहोत बेताब होँ मुझे चोदने केँ लिए.?"
पायल केँ मुख सें ये 'चोदना' शब्दसुन एक् समय कों तोँ मे हैरान रह गय़ा मगर मे बोला- मेरीजान कलरात सें तड़परहा हूं तुम्हें पाने केँ लिए.अब तौ बेताबी कि हद हौ गई हैं।
मैंने पायल कों अपनी बाहों मे उठाया औऱ बेड पर्र लेटा दिया। उसने मुझेदो मिनट रुकने केँ लिएकहा औऱ फिन अपनी सारी ज्वेलरी आदि उतारकर एक् तरफरख दि औऱ फिन स्वयं हि आकर मेरीगोद मे बैठ गई।
मे अब औऱ इंतजार नहि कर सकता थां। मैंने बिनादेर किये अपने होंठ पायल केँ होंठों पऱ रखदिए औऱ मेरेहाथ सीधा पायल कि मस्त चूचियों कों दबाने लगे थें। पायल भि जैसे प्रेम केँ लिए बेचैनी रही थि। वोँ भि पूरी मस्ती मे मेरेकिस कां जवाबदे रही थि।
लगभग पाँच मिनट तक किस करने केँ बाद मेरेहाथ पायल केँ शरीर सें कपड़े कम करने मे व्यस्त होँ गए। पायल नें लहंगा-चोली पहनाहुआ थां। मैंने पहले उसकी चोली कि डोर ढीली करकेउसे उसके शरीर सें अलग किया। ब्रा मे कसी उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ हिमालय कों भि नीचा दिखारही थि। मे पायल कि चूचियों पर्र टूट पड़ा औऱ मस्त होकर उसकी चूचियों कों उसकी ब्रा केँ ऊपर सें हि चूमने चाटने लगा।
पायल कि सिसकारियाँ कमरे मे गूँजने लगी थि। तभी मैंने पीछेहाथ लें जाकर ब्रा कां हुकखोल दिया तौ दोनों बड़े बड़े खरबूजों जैसे चूचियाँ उछलकर मेरे सामने लहराने लगी।
पायल कि चूचियाँ एकदम खड़ी खड़ी औऱ तनी हुई थि। चूचियों केँ चुचूक भूरेरंग केँ थें औऱ गोरी गोरी चूचियों पर्र इतने मस्तलग रहे थें कि मे अपने आप् कों रोक नहि पाया औऱ मैंने झट सें उसके बाएँ चुचूक कों अपने होंठों मे दबा लिया औऱ चूसने लगा। मे बेरहमी सें पायल कि चूचियाँ मसलरहा थां औऱ उसके चुचूक कों दांतों सें काटरहा थां।
"अहह.खा जाओराज। अहह। ओह्ह.पी जाओ मेरी चूचियों कों." पायल मस्ती मे बड़बड़ा रही थि।
मेरा लण्ड भि अब पैंट सें बाहर् निकलने केँ लिएउछल कूदमचा रहा थां। पायल नें जैसे उसकी तकलीफ़ कों समझ लिया थां तभी तोँ उसनेहाथ बड़ाकर पैंट केँ ऊपर सें हि सहलाना शुरुआत कर दिया थां। पऱ अब तोँ लण्ड पैंट सें बाहर् आकर अपना जलवा दिखाना चाहता थां।
मैंने झट सें अपनी पैंट खोली औऱ अंडरवियर सहित एकदम सें नीचेकर दि। लण्ड महाराज पैंट सें निकलकर तोप कि तरहतन कर खड़े होँ गए।
मैंने पायल कां हाथ पकड़ा औऱ लण्ड पर्र रख दिया। लण्डहाथ मे आते हि पायलउछल पड़ी औऱ वही शब्द ‘जौ मे पहले भि कई लड़कियों औऱ औरतों केँ मुँह सें सुन चूका थां’ पायल केँ मुँह सें निकले।
"अरेराज। तुम्हारा तौ बहोत मोटा हैं !"
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