Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
,,, रोहन अपनी मां कि आंखों मे देखते हुए,,, उसे अपनी बाहों मे उठाकर बाहर् बने मिट्टी केँ पेशाब घऱ कि ओर लें जारहा थां,,, बाहर् उसके नानाजी नानीमा भि सोरहे थें मगर किसी कों कुछपता नहि चलता वो गहरी नींद मे थें,, सरोज धीरे-धीरे सें शरमाते हुए अपने हाथों सें दरवाजा खोलती हैं,, औऱ रोहन दीपावली केँ उजाले मे उसकी आंखों मे देखते हें उसे पेशाब घऱ कि ओर लें जाने लगता हैं,,
,, सरोज कों भि अपने बेटे कि ताकत कां अंदाजा होँ गय़ा थां,, वो सोचरही थि कि इतने भारी बजनी स्त्री कों उसके बेटे नें केसेफूल कि तरह अपनी बाहों मे उठाया हुआ हैं,,, वो अपने बेटे कि ताकत पर्र बहोत गरम महसूस कररही थि औऱ उसे लज्जा भि आँ रही थि,,, रोहन लगातार उसे अपनी माँ केँ फोटो औऱ अपनी पहनी हुईँ नाथ कों बड़े ध्यान सें देखरहा थां,,, जब रोहन अपनीनजर नहि हटता तोँ सरोजउसे शरमाते हुए पूछता हैं
,,, ऐसे क्याँ देखरहे हौ???
,, देखरहा हूं तुम् कितनी हसीनलग रही होँ,, जब पूरीतरह दुल्हन सुहाग कि सेज पऱ बैठोगे तोँ कितना अच्छा लगा,, कितनी प्यारी गोगी मुझे विश्वास नहि हौ रहा कि आज तुम् मेरी बाहों मे हौ,,, मे सिर्फ ख्वाबों मे हि सोचता थां कि काशऐसा हौ जाए कि तुम् मेरे हौ जाओ,, ईश्वर सें प्रार्थना करता थां कि काशऐसा होँ जाएमगर आज मे ईश्वर कों मानने लगा,, जौ उसने मेरी इतनी बड़ी ख़्वाहिश पूरीकर दि,,,
,,,, इतना प्रेम करते थें मुझे,,, पहलेकभी बताया क्यूं नहि??
,, ये कहकर सरोज शर्मा जाती हैं,,
,, रोहन अपनी माँ कि उभरी हुईँ छाती कों देखते हुए,,
,, अगर पहलेबता देता तौ क्याँ तुम् ये 20 साल सें तड़पती हुई जवान मेरे,, कों दे देती हैं, ???
,,, सरोजकुछ जवाब नहि देती वो अपने बेटे कि बातों सें बहोत शर्मिंदा होँ रही थि,,, 20 साल तक उसने अपने यौवन कों संभाल केँ रखाहुआ थां,, 20 साल सें उसकेबदन कों किसी नें छुआ भि नहि थां,, पूरे जिस्म मे जवानी कां रसटपक रहा थां,, इन बातों सें उसके सीने मे औऱ अकड़न पैदा होती हैं औऱ वो,,
,, चलो मुझे नीचे उतरो,, बहोत जोर कि लगी हैं,
,, रोहन अपनी मम्मी कों देखते हुए धीरे धीरे नीचे उतरता हैं औऱ उसके हाथों कि चुभन सें सरोज केँ,, नितंब पऱ निशान बनगए थें,,, जैसे हीरो हम् उसे नीचे उतरता हैं अगर जल्दी हि पेशाब घऱ मे घुस जाती हैं औऱ औऱ कपड़े कां पर्दा गिरा देती हैं,,,
,,, हेलो हम् जल्दी हि उसकाहाथ पकड़कर कहता हैं,,
,,, मे भि अंदर आँ जाऊं,,
,, सरोज अपनाहाथ छुड़ाकर नहि कोई जरूरत नहि हैं मुझे बहोत लज्जा आँ रही हैं वैसे भि,,,
,,, रोहन अपनी मां कां हाथ छोड़ देता हैं औऱ वो जल्दी हि अपने,, पेटिकोट कों ऊपर करके पेशाब करने केँ लिएबैठ जाते हें,,, सर्विस कों इतनीजोर कि पेशाब लगी थि बैठते हि एक् तेजधार पेशाब कि घाट नीचे गिरती हैं,,
,,, जैसे हि पेशाब कि तेजधार उसकी योनि सें निकलती हैं एक् सिटी जैसी आवाज़ रोहन केँ कानों मे घुसती हैं,,, जिसे सुनकर रोहन अपना हाउस कों बैठता हैं औऱ उसके लिंग मे फिन सें तनाव आनां शुरुआत होता हैं,,, बहुतदेर तक ये आवाज़ होती रहती हैं जब तक कि वो पेशाब करनी हि लेती सरोज कों भि बहोत लज्जा आँ रही थि उसे मालूम थां कि उसका बेटा बाहर् खड़ाहुआ इस आवाज़ कों सुनरहा होगा,, मे यहीसोच रही थि कि इस आवाज़ कों सुनकर उसका बेटा क्याँ सोचरहा हैं,, कुछ वक्त तक सरोज पेशाब करती रहती हैं उसे बहोत चैन मिलता हैं पेशाब करने केँ बाद
,, सरोज कि योनि पर्र हल्के हल्के बाल थें,, वो अपनी सफाई कां पूरा ध्यान रखती थि मगरआज उसकी योनि नं जाने क्यूं बहोत ज़्यादा खुली हुई नजर आँ रही थि,, लंबे हाइट कि मोती गाडरी हुईँ स्त्री कि योनि,, कोई भि लड़का एक् बुड्ढा व्यक्ति देख लें तोँ वो अपनाहोश खो देगा,, सरोजसोच रही थि अगर उसका बेटा इसहाल मे उसकी योनि कों देख लेगा तुम्हें जाने क्याँ कर बैठेगी,, इसलिये उसेडर तक कहीं रोहन पर्दा हटाकर अंदर नाँ झांक लें वो जल्द-जल्द पेशाब करकर खड़ी होती हैं औऱ अपने कपड़े सही करने लगती हैं,,, जैसी वो बाहर् आती हैं,, उसकीनजर रोहन सें मिलती हैं वो शर्मा कर अपनी नज़रें नीचेकर लेती हैं,, मगर रोहन लगातार अपनी मम्मी कों हि देखेजा रहा थां,,
,,, माँ एक् बात बोलूं,
,,, जोँ भि केहना हैं अंदर चलकरबोल देना,, जल्द सें पेशाब करो औऱ चलो,,,
,,, सोहन अपनी मम्मी केँ लगभगआता हैं औऱ उसके चेहरे कों अपने हाथों मे लेकर उसकी आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,
,, जौ बात मे बोलने जारहा हूं वो अंदर बोलने मे आनंद नहि आएगा,,,
,, सरोज कि सांसे तेज होनेलगी थि,, बहोत धीरे-धीरे सें शर्मा कर कहते हें,,
,, तोँ फिनकहो क्याँ बोल्ना चाहते होँ,,, ???
,,,, इसकी आवाज़ बहोत हसीन हैं एक् बार दिखा दोगी????
,,, ये सुनकर सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं वो अपना चेहरा लज्जा केँ मारे अपने हाथों सें छुपानी लगती हैं,,
,,,, तभीकुछ रुकी हि बंदे जोँ उसकी योनि पर्र थि उनकी खुजली उसकी होती हैं औऱ नाँ चाहते भि उसकाहाथ साड़ी केँ ऊपर सें हि अपनी योनि पर्र चला जाता हैं वो खो जाती हैं हल्का सां,, पेशाब कि बूंदे साफ करने केँ लिए,
,, जिसे देखकर रोहनउसे कंधों सें पकड़कर उसकेकान मे फिन सें कहता हैं,,
,,, बोल दिखा देगी एक् बार जिसके आवाज़ सें इतनी हसीन हैं,, मे उसे देख्ना चाहता हूं कि वो कितनी हसीन होगी,, इतने सालों सें तुम् मुझसे छुपाकर रखी हौ,,,
,,, सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं मगर उसकी हिम्मत नहि होँ रही थि बदन मे कंपन हौ रही थि पसीना हल्का माथे सें आँ गय़ा थां फिन भि वो हौसला बढ़ाते हुए अपने बेटे सें कहती हैं,,,
,, अगर इतनी हि बेचैनी होँ रही हैं तौ करलो अपनी नानीमा नानाजी सें बात,,,
,,, ये कहकर सां रोशन सें नजर झुका लेती हैं,,, औऱ रोहन केँ जवाब कां प्रतीक्षा करती हैं मगर रोहन उसके मासूमियत कों देखते हुए,, कुछ सोचता हैं औऱ फिन प्रेम सें उसके माथे पऱ किसकर देता हैं,,
,,, फिन थोडा पीछे हटकर अपनी माँ कों गोद सें ध्यान सें देखने लगता हैं उसके उतार चढ़ाव औऱ पिछले हिस्से कों देखते हुए उसकी निगाह उसकी छाती पऱ जाती हैं वो प्यासी नजरों सें उसे देखा हैं औऱ कुछदेर देखने केँ बाद अपनी माँ,, कि पिछले हिस्से कों सहलाकर धीरे-धीरे सें कहता हैं,,
,,, ठीक हैं मे पहले नानाजी नानीमा सें बात करता हूं उसकेबाद सभीकुछ जोँ तेरा हैं वो मेरा हैं औऱ मैसेज जीभर केँ अपनी मर्जी सें लूट लूंगा,,, औऱ अपनी मम्मी केँ पिछले हिस्से कों दबाते हुएउसे सारे सें कहता हैं,, उसकेबाद तोँ सभीकुछ मुझे मुझे चाहिए तेराये बहोत पसन्द हैं मुझे तेरी,,,
,,, सरोज अपने बेटे कां इशारा समझ जाती हैं कि वो उसकी गांड कि बातकर रहा हैं,,, उसकेबदन मे एक् सीरम सि दौड़ जाती हैं वो उसकीबात कां कोई जवाब नहि देताउसे बहोत लज्जा आती हैं औऱ वो जल्दी हि कमरे केँ अंदरचली,,, दौड़ते हुए,,
,,, रोहनसमझ जाता हैं कि उसकी मां शर्मा गई हैं उसकेदिल मे डर हैं कि कहींकुछ गड़बड़ नाँ हौ जाए,,, नं जाने रोहन केँ मन मे आज कितनी तरंगे उठरही थि उसे विश्वास नहि हौ रहा थां कि जोँ खजाना उसकी मम्मी नें 20 साल सें बचा केँ रखा हैं सभी उसका होने वाला हैं मगर क्याँ नानाजी नानीमा मम्मी जाएंगे इस रिश्ते केँ लिए,, अब उससे औऱ समझ नहि होता वो जल्द सें पेशाब करता हैं औऱ घऱ केँ अंदर जाता हैं, घऱ केँ बरामदे मे हि उसके नानाजी नानीमा बड़ेचैन सें गहरी नींद मे सोएहुए थें,, सरोज कमरे केँ अंदर चारपाई पर्र लेटी हुईँ थि मगर उसकी आंखें बंद कि वो सोई नहि थि अपने बेटे केँ आने कां प्रतीक्षा कररही थि औऱ सोचरही थि कि कहीं उसका बेटा उसकेसंग कोई हरकतआज हि नाँ करते दरवाजा उसमें बंद नहि किया थां
,,, रोहन एक् निगाह अपनी मां कि ओर डालता हैं,, औऱ उसकी छाती पर्र देखकर उसके मुंह मे पानी आँ भि लगता हैं वो सोचता हैं कि आज हि सभीकुछ मिलजाए मुझे जौ भि उसकेपास हैं,, कितना भराहुआ शरीर हैं ऐसामाल तौ मुझे जीवन मे नहि मिलेगा जोँ 20 साल सें संभाल कर मेरी माँ नें रखाहुआ,, इसे तौ रगड़ रगड़ केँ छोड़ने मे कितना आनंद आएगीहर चीज दावा दावाकर लूंगा,,, अब उससे औऱ बर्दाश्त नहि होता औऱ वो अपनी नानाजी नानीमा कि ओर देखकर उन्हें आवाज़ लगता हैं,,
,, नानीमा नानाजी जी उठिए नां मुझे आपसेकुछ जरूरी बात करनी हैं,,,
,,, जैसे हि ये आवाज़ रोहन कि मां सरोज सुनती हैं जल्दी आंखें खोलकर रोहन कि ओर देखकर इशारा करती हैं कि अभि कोईबात नहि करना सुभह मे कर लेना,,, मगर रोहन नाँ मे गार्डन हिलता हैं औऱ अपनी मां कों इशारा करता हैं कि अब औऱ बर्दाश्त नहि होता मुझेआज हि बातकर लेनेदो,,,, सरोज केँ दिल कि धड़कन तेज होँ जाती हैं कि उसका बेटा इसबात कों केसे उजागर करेगा कि वो मुझसे विवाह करना चाहता हैं औऱ अपनी दुल्हन बनना चाहता हैं,, उसे बहोत डर भि लगरहा थां औऱ लज्जा भि आँ रही थि कि उसके माँ पिताजी क्याँ सोचेंगे उसके बारे मे अगर वो मेरे सें पूछेंगे तौ मुझे क्याँ करें,, मे क्याँ कहेंगी अपने माँ बापू सें कि हां मुझे भि ये नाता मंजूर हैं,,, एक् मम्मी होतेहुए भि मे अपने बेटे कि दुल्हन बनना चाहती हूं उसकीहर ख़्वाहिश पूरी करना चाहती हूं उसकी पत्नि बनाकर उसे पति बनना चाहते हें,,, उसकेनाम कां सिंदूर अपनी मांग मे भरना चाहती हैं,,,
,, रोहन अपने नानाजी नानीमा कों हाथ सें जगाता हैं औऱ जैसे हि उन दोनों कि आंखें खुलती हैं वो रोहन कों देखकर थोडा सां घबरा जाते हें औऱ प्रेम सें पूछते हें,,
,, नाना,, अरे रोहन बेटा इतनीरात मे क्याँ हुआसभी ठीक तौ हैं नाँ, ????
,,, नानाजी जी आप् घबराइए मतसभी ठीक हैं मगर मुझे आपसे बहोत जरूरी बात करनी हैं,,,
,, नाना हांकहो बेटा क्याँ बात हैं??
,, नानाजी जी आप् मुझे हमेशा खुश देख्ना चाहते हौ नां मेरी विवाह केँ लिए आप् बहोत चिंतित रहते हौ,,, आप् चाहते होँ नां मे भि घऱबसा हूं औऱ खुशी-खुशी रहो,,
,,, हां बेटा हम् चाहते हें तुँ भि अपनाघऱ बसा हैं तेरा भि एक् खुशहाल जिंदगी होँ पत्नि हौ बच्चे हौ यही तौ हमारी अंतिम ख़्वाहिश हैं,,,,
,, तोँ नानाजी जी आप् वादाकरो कि मे जिससे बोलूंगा आप् उससे मेरी विवाह कर दोगे,,,
,,, नानाजी जीकुछ देर रोहन कों देखकर सोचते हें,,, मगर बेटा तुम् जिस बोलोगे हम् तुम्हारी विवाह कर देंगे क्याँ तुम् उसको भि पसन्द आओगेतभी तौ विवाह करवा सकती हैं मेरेलाल,,,
,, रोहन एक् नजर अपनी मां कि ओर डालता हैं जौ उसे हि देखरही थि औऱ उसकी आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,
,, मे उसे बहोत मनपसंद हूं वो भि मन सें अधिक,,, दिल सें मुझे चाहती हैं अपना पति बनाना,,, मगरबस आपकी राजा मंडी केँ बिनाकुछ नहि हौ सकताअगर आप् आगे दोगे तौ मे उसे अपनी पत्नि बना लूंगा,, दुनिया मे एक् वही हैं जोँ मुझे पत्नि कां सुखदे सकती हैं औऱ फिनबाद मे बच्चों कां भि,,,,
,,, बच्चों कि बात सुनकर सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं उसकेबदन मे चीटियां रहने लगती हैं,, योनि मे हल्की सि खुजली होने लगती हैं जिसे वो अपनी जांघों सें रगड़कर मिटाती हैं औऱ लज्जा केँ मारे अपनी नज़रें झुका लेती हैं दिलतेज सें धड़कने लगता हैं कि अब रोहन क्याँ बोलने वाला हैं,,,,
,, नाना हमारी रजामंदी केँ बिनाकुछ नहि होँ सकता बेटा मगर हम् तोँ इसकेलिए हमेशा सें सजधजकर हैं तुम् बताओकौन हैं वो खुशनसीब जोँ तुमसे विवाह करना चाहती हैं औऱ मेरे,,, नाई कि दुल्हन बनना चाहती हैं,,,
,,, नानाजी जी उससे पहले कि मे उसकानाम आपको बताऊंगा मे आपसे बताना चाहता हूं कि अगर वो मेरी जीवन मे नहि मिला आपनेये विवाह मेरी नहि कराई तोँ मे आज हि अपनी जिंदगी लीला ख़त्म कर लूंगा मे जहर खाकर आत्महत्या कर लूंगा नाना,,,
,,, रोहन कि बात सुनकर उसके नानाजी नानीमा बहोत घबरा जाते हें तभी उसकी नानीमा रोहन कां हाथ पकड़कर कहती हैं,,,
,, नानीमा जी रोहन बेटा ऐसी बातें नां कियाकर मेरेलाल तेरे अलावा हमारी बेटी कां हैं हि कौन तूँ बताकिस विवाह करना चाहता हैं हम् रेडी हें,,,
,,, रोहनकुछ देर सोतेहुए अपनी नानाजी नानीमा केँ चेहरे कों देखा हैं औऱ फिनदिल पर्र हाथ रखकर अपनेमन सें बोलता हैं,,,
,, नानीमा जी मे माँ सें विवाह करना चाहता हूं,,, उसे अपनी पत्नि बनना चाहता हूं,,,
,,, जैसे हीरोइन कि बात सरोज केँ कानों मे घूमती हैं उसकादिल तेजी सें धड़कने लगता हैं औऱ वो,, रजाई कों उठाकर जल्दी हि रजाई मे घुस जाती हैं औऱ अपना मुंह छुपा लेती हैं मगर कानों पर्र ध्यान देतेहुए बाहर् कि आवाज़ सुनरही थि,,, उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अबआगे क्याँ होने वाला हैं मगर रोहन कि बात कां असर उसके नानाजी नानीमा पऱ ऐसाहुआ कि वो कुछकह नहि पाए वो रोहन कों देखते रहते हें,,, आज तक समझ मे कोई इतनी हिम्मत नहि कर पाया थां कि अपनी माँ सें हि विवाह करने कि बात करेंमगर उन्हें अचानक सें धक्का लगता हैं औऱ वो सच मे पड़ जाते हें कि ये क्याँ बोलरहा हैं,,,
,,, नाना,, रोहन बेटा तुँ ये क्याँ बोलरहा हैं मेरेलाल ऐसा केसे हौ सकता हैं समाज क्याँ रहेगा ये तौ बहोत गलत हैं पाप हैं मेरे बच्चे औऱ तेरी माँ इसबात केँ लिए केसेमान सकती हैं,,,
,, नानाजी जी मैंने पहले हि आपसे बोला थां अगरये नहि हुआ तोँ मे अपनीजान दे दूंगा रही माँ कि बात तोँ आप् माँ सें हि पूछलो वो इसबात केँ लिए सजधजकर हैं,,,,
,,, रोहन केँ नानाजी नानीमा एक् दूसरे कों देखते हुए कहते हें,, क्याँ तुम्हारी माँ इसबात केँ लिए रजिया तुमने बात भि कर लिया अपनी माँ सें,,,
,, हां नानाजी जी वो इसबात केँ लिए रेडी हैं अगर आपको यकीन नाँ हौ तोँ आप् मां सें हि पूछ सकते होँ,, अगर उसनेमना कर दिया तौ मे कभी भि फिन आपसेइस बात कि जीत नहि करूंगा,,,,
,,, सरोज केँ दिल कि धड़कन औऱ बढ़ गई थि वो सोचरही थि केसे अपनी माँ बापू सें इसबात कों बोल पाएगी उसके अंदर हिम्मत नहि थि कि इस उम्र मे अपने जवान बेटे सें वो ब्याह करने केँ लिएकह रही हैं,,, उसकादिल जोरो सें धड़करहा थां कि कब उसके मां पिताजी उसकी आवाज़ लगाकर बुलाएंगे औऱ,, सरोज कों आवाज़ लगाकर बुलाया,,
,,, नानीमा जी, सरोज औऱ सरोजइधर आँ बेटा ये तेरा बेटा क्याँ बोलरहा हैं देख,,,
,, मगर सरोज कि हिम्मत नहि होँ रही थि रजाई सें बाहर् आने कि फिन उसकी मां रजाई केँ पास जाती औऱ कमरे मे जाकर सरोज कों कंधे सें पकड़कर उठती हैं औऱ कहती हैं
,,, सरोजये रोहन क्याँ बोलरहा हैं बेटा ये केसे होँ सकता हैं क्याँ तूँ इसबात केँ लिए रेडी हैं,,,
,, क्याँ हुआ माँ क्याँ बोलरहा हैं मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा,,,
,,, रोहनबोल रहा हैं कि वो तेरी विवाह करना चाहता हैं औऱ तुँ भि इसबात केँ लिए सजधजकर हैं,,, क्याँ सच मे तूँ ये करना चाहती हैं,,
,,,, सरोज अपनी नज़रें झुका लेती हैं उसकाहाल ऐसा थां कि वो जवाब भि नहि देपारही थि मगरफिन सें जबतेज आवाज़ मे उसकी मां पूछती हैं तोँ सरोज धीमी आवाज़ मे रहती,,,
,,, मां मे अपने बेटे कों खोना नहि चाहती,,, मे उसकी खुशी केँ लिएसभी कुछ करने कों सजधजकर,,, हूं,,
,,, ये तौ क्याँ बोलरही हैं बेटा समाज इसकेलिए केसे मानेगा औऱ तुँ अपनी उम्र तौ देख क्यूं अपने बेटे कों बर्बाद करना चाहती हैं,,,
,, माँ मे अपने बेटे कों बर्बाद करना नहि चाहती हैं उसे बचाना चाहती हूं औऱ उसकी जीवनभर संग दोगे माँ,,,
,, मगर बेटा ये केसे हौ पाएगा ये मुमकिन नहि हैं ये केसे होगालोग क्याँ कहेंगे,,,
,,, सर्वस्व बर्दाश्त नहि होता औऱ वो रोती हुइ अपनी मां केँ पैरों मे गिर जाती हैं औऱ रोतेहुए कहती हैं,,,
,, मम्मी जब मे अपने बेटे केँ लिए एक् मम्मी होकर इतना बड़ाकाम कर सकती होँ आप् तौ फिन भि मेरी खुशी केँ लिए इतना नहि कर सकती,, मान जाओ नाँ मां पिताजी कों केसे भि करकेमन होना मे अपने बेटे कां जीवनभर ख्याल रखेगी औऱ येसभी उसे पर्र छोड़दो वो स्वयं कर,, लगा हमारी विवाह बाहर् होँ जाएगी हम् बाहर् रह लेंगे मां मानजाओ नाँ मे आपकेहाथ पेर पड़ती हूं माँ,,,
,,, बहुतसमय तक ऐसे हि चलता रहता हैं मगर सरोज अपने आप् केँ सामने हिम्मत नहि जुड़ पाती वो रो-रोकर भि लगाकर अपनी माँ सें गुहार लगारही थि बहुत टाइमबीत चुका थां अब उजाला होने वाला थां इसबात कों लेकर आखिरकार हारकर सरोज कि माँ हि हर मानती हैं औऱ रोतेहुए अपनी बेटी कों गलेलगा कर कहती हैं,,,
,, ठीक हैं मेरी बच्ची जैसी तेरी मर्जी अब हम् कर भि क्याँ सकते हें तेरे पिताजी तौ मेरीबात डालेंगे नहि मे उन्हें मना लूंगी मगर तुम् विवाह कब करना चाहते होँ औऱ केसे करोगे,,,
,, ये सुनकर सरोज कि खुशी कां भि ठिकाना नहि रहता उसकेमन मे भि तरंगे दौड़ने लगती हैं उसेऐसा लगता हैं जैसे वो कोई जवान लड़की हौ औऱ उसे उसका प्रेमी मिल गय़ा होँ,,, वो अपनी माँ कों हंसते हुएगले लगाकर कहती हैं,,,
,, मां मे आपकाये आभार जीवनबन नहि भूलूंगी मे आपकोबात नहि सकती आप् छापने कितनी बड़ी खुशी दि हैं,, विवाह कब औऱ केसे करनी हैं ये रोहन बताया उसी सें पूछ लेना माँ,,,
,, तभी सरोज कि मम्मी कि नजर सरोज कि हथेली पड़ जाती हैं औऱ वो उसकी हथेलियां कों ध्यान सें देखते हें पूछता हैं
,,, ये तेरे हाथों कों क्याँ हुआ इतनेलाल क्यूं हैं,,, ??
,,, तभी सरोज कों ध्यान आता हैं कि उसने अपनी बेटी कि जब लिंग कों हाथ सें चलाया थां कितनी देर तक उसनेउसे रगड़ा थां उसकी रागदान सें उसकी हथेली लाल हौ गई हैं,,, उसने तौ अपने हाथों पर्र ध्यान भि नहि दिया थां मगरअब वो सोचरही थि कि कितना ताकतवर हैं उसके बेटे कां लिंगहाथ कों भि लालकर दियाअगर वो उसकी योनि केँ अंदर मर्दन करेगा तोँ उसका क्याँ हाल करेगा जब हाथों कां ऐसाहाल हैं औऱ ये सोचते हौ उसका जिस्म कम जाता हैं वो अपनी मम्मी कि बात कां कुछ जवाब नं देकरसर झुकाकर शर्मा जाती हैं,,,,
,, बोल्ना तेरेहाथ इतनेलाल क्यूं हैं क्याँ हुआ औऱ शर्मा क्यूं रही हैं,,,
,, अरेकुछ नहि मां मे कुछभजन उठारही थि उसकीवजह सें होँ गय़ा हैं,,,
,, उसकेबाद सरोज कि मम्मी उससेकुछ नहि पूछता माहौल शांत हौ गय़ा थां सभी अपनी-अपनी सोच मे डूबे थें,,, रोहन कों बहोत खुशी मिलती हैं अबउसे मंजूरी मिल गई थि कि वो अपनी मम्मी सें विवाह कर सकता हैं अबआगे उसी कों सभीकुछ करना थां इसलिये वो,,, रातभर सोया नहि थां इसलिये सुभह-सुभह हि अंदर जाकर पलंग पऱ लेट जाता हैं औऱ सरोज किचन मे खानां बनाने लगती हैं सब केँ लिए ब्रेकफास्ट रेडीकर रही थि खुशी-खुशी औऱ अपने बेटे कि मर्दाना ताकत केँ बारे मे सोचसोच कर कहां पर्र रही थि,,,
,, मन हि मनसोच रही थि कि,, केसे उसका बेटा इस 20 साल कि बचाई हुई जवान कों रगड़ेगा,,, किसतरह उसकेबदन कां मर्दन करेगा औऱ उसका क्याँ हाल होगा क्याँ वो अपने बेटे कों इतनीदेर तक अपनेबदन पऱ झेल पाएगी,,,, येसोच सोचकर इसका बुराहाल थां मगरमन मे वो खुश होँ रही थि उसेआज ऐसालग रहा थां कि जैसे मे किसी कि, पत्नि बन गई होँ औऱ पत्नि कि तरह शर्मा रही थि अब वो अपने बेटे केँ पास जाने मे भि शर्मा रही थि वो धीरे-धीरे सोरहा थां ब्रेकफास्ट सजधजकर हौ चुका थां,,, सर्वोच्च चुपचाप पहले अपनी मां पिताजी कों नष्ट देती हैं औऱ मुस्कुराते हुए उनकीतरफ देखती हैं,, सरोज कि मां बापू भि उसकेलिए मुस्कुरा कर देखते हें औऱ उसका हौसला बढ़ाते हें कोईबात नहि ठीक हैं जैसा तुम्हें अच्छा लगेकर लो हम् तुम्हारे,, संग हें तुम्हें खोना नहि चाहते,,,,
,,, नानीमा जी,, जा बेटा अब रोहन कों भि उठादो औऱ उसको ब्रेकफास्ट देदोरात भर सोया नहि पाया हैं,,,
,,, अपनी मां कि बात सुनकर सरोज केँ जहां मे रोहनआता हैं,,, औऱ वो कमरे कि ओर देखती हैं दरवाजा थोडा सां लगाहुआ थां,,, अपनी माँ कों ब्रेकफास्ट देखकर औऱ बापूजी कों नष्ट देकर कमरे कि ओर बढ़ने लगती हैं मगर उसके पैरों मे आज कमरे कि ओर जातेहुए कंपन हौ रहा थां,, वो धीरे-धीरे सें दरवाजा खोलती हैं तोँ देखी हैं कि रोना भि भि गहरी नींद मे सोरहा हैं,,, अपने बेटे कों सोताहुआ देखकर, बेहन उसकेबदन कों ऊपर सें नीचे तक देखते हें जौ कि,,, लंबा चौड़ा औऱ तगड़ा पुरुष लगरहा थां,, जिसे देखकर सरोज कि योनि मे फिन सें सीरम दौड़ जाती हैं औऱ उसे उसके लिंग कां जाकर उसकी आंखों केँ सामने नजरआता हैं,,, फिन वो मन हि मन सोचती हैं कि जोँ भि होँ अब तौ ये मेरे पति होने वाले हें,,, सरोज अपनीसर पऱ साड़ी कां पल्लू करती हैं औऱ अपने चेहरे कों छुपाकर प्रेम सें झुककर रोहन केँ पैरों कों छू लेती हैं,,,,, एक् पतिव्रता नारी कि तरह
,,, पैरों कों स्पर्श पाकर सोने कि आंखें जल्दी खुल जाती हैं वो देखता हैं कि उसकी माँ उसके पर्र छोड़कर माथे सें चूमरही हैं,,,, ऐसा देखकर रोहन केँ दिल कि धड़कन बढ़ जाती हैं वो अपनी माँ केँ चेहरे कि ओर देखा हैं जोँ कि हल्का सां शर्मा रही थि औऱ उसे देखकर उसे बर्दाश्त नहि होता,,, वो दरवाजे कि ओर देखा हैं जोँ कि खुलाहुआ थां वो पऱ कि लाश सें दरवाजे कों बंद करता हैं औऱ अपनी मम्मी कों पकड़कर अपनी बाहों मे भर लेता हैं,,,
,,, ये क्याँ कररही हौ मेरे प्रेम कों छूरही होँ,,,
,,, रोहन कि बात सुनकर सरोज शर्मा जाती हैं औऱ अपनी नज़रें नीचेकर करके,,
,,, मे एक् पत्नि धर्म निभारही हूं,, जब आप् मुझे अपनी पत्नि मानते होँ तौ मे भि आपको अपना पति मानती हूं इसलिये मे अपना पत्नि धर्म निभारही हूं
देर सें एपसोड देने केँ लिए माफी चाहता हूं मगर मेरेसंग मे प्रॉब्लम चलरही हैं इसलिये जल्द एपसोड नहि देपारहा थां
Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
,,, रोहन अपनी मां कि आंखों मे देखते हुए,,, उसे अपनी बाहों मे उठाकर बाहर् बने मिट्टी केँ पेशाब घऱ कि ओर लेँ जारहा थां,,, बाहर् उसके नानाजी नानीमा भि सोरहे थें मगर किसी कों कुछपता नहि चलता वो गहरी नींद मे थें,, सरोज धीरे-धीरे सें शरमाते हुए अपने हाथों सें दरवाजा खोलती हैं,, औऱ रोहन दीपावली केँ उजाले मे उसकी आंखों मे देखते हें उसे पेशाब घऱ कि ओर लेँ जाने लगता हैं,,
,, सरोज कों भि अपने बेटे कि ताकत कां अंदाजा हौ गय़ा थां,, वो सोचरही थि कि इतने भारी बजनी महिला कों उसके बेटे नें केसेफूल कि तरह अपनी बाहों मे उठाया हुआ हैं,,, वो अपने बेटे कि ताकत पऱ बहोत गरम महसूस कररही थि औऱ उसे लज्जा भि आँ रही थि,,, रोहन लगातार उसे अपनी माँ केँ फोटो औऱ अपनी पहनी हुईँ नाथ कों बड़े ध्यान सें देखरहा थां,,, जब रोहन अपनीनजर नहि हटता तौ सरोजउसे शरमाते हुए पूछता हैं
,,, ऐसे क्याँ देखरहे हौ???
,, देखरहा हूं तुम् कितनी हसीनलग रही होँ,, जब पूरीतरह दुल्हन सुहाग कि सेज पर्र बैठोगे तौ कितना अच्छा लगा,, कितनी प्यारी गोगी मुझे विश्वास नहि होँ रहा कि आज तुम् मेरी बाहों मे होँ,,, मे मात्र ख्वाबों मे हि सोचता थां कि काशऐसा होँ जाए कि तुम् मेरे हौ जाओ,, ईश्वर सें प्रार्थना करता थां कि काशऐसा होँ जाएमगर आज मे ईश्वर कों मानने लगा,, जोँ उसने मेरी इतनी बड़ी ख़्वाहिश पूरीकर दि,,,
,,,, इतना प्रेम करते थें मुझे,,, पहलेकभी बताया क्यूं नहि??
,, ये कहकर सरोज शर्मा जाती हैं,,
,, रोहन अपनी मां कि उभरी हुई छाती कों देखते हुए,,
,, अगर पहलेबता देता तौ क्याँ तुम् ये 20 साल सें तड़पती हुई जवान मेरे,, कों दे देती हैं, ???
,,, सरोजकुछ जवाब नहि देती वो अपने बेटे कि बातों सें बहोत शर्मिंदा होँ रही थि,,, 20 साल तक उसने अपने यौवन कों संभाल केँ रखाहुआ थां,, 20 साल सें उसके जिस्म कों किसी नें छुआ भि नहि थां,, पूरे जिस्म मे जवानी कां रसटपक रहा थां,, इन बातों सें उसके सीने मे औऱ अकड़न पैदा होती हैं औऱ वो,,
,, चलो मुझे नीचे उतरो,, बहोत जोर कि लगी हैं,
,, रोहन अपनी मम्मी कों देखते हुए आहिस्ता नीचे उतरता हैं औऱ उसके हाथों कि चुभन सें सरोज केँ,, नितंब पऱ निशान बनगए थें,,, जैसे हीरो हम् उसे नीचे उतरता हैं अगर जल्दी हि पेशाब घऱ मे घुस जाती हैं औऱ औऱ कपड़े कां पर्दा गिरा देती हैं,,,
,,, हेलो हम् जल्दी हि उसकाहाथ पकड़कर कहता हैं,,
,,, मे भि अंदर आँ जाऊं,,
,, सरोज अपनाहाथ छुड़ाकर नहि कोई जरूरत नहि हैं मुझे बहोत लज्जा आँ रही हैं वैसे भि,,,
,,, रोहन अपनी मां कां हाथ छोड़ देता हैं औऱ वो जल्दी हि अपने,, पेटिकोट कों ऊपर करके पेशाब करने केँ लिएबैठ जाते हें,,, सर्विस कों इतनीजोर कि पेशाब लगी थि बैठते हि एक् तेजधार पेशाब कि घाट नीचे गिरती हैं,,
,,, जैसे हि पेशाब कि तेजधार उसकी योनि सें निकलती हैं एक् सिटी जैसी आवाज़ रोहन केँ कानों मे घुसती हैं,,, जिसे सुनकर रोहन अपना हाउस कों बैठता हैं औऱ उसके लिंग मे फिन सें तनाव आनां शुरुआत होता हैं,,, बहुतदेर तक ये आवाज़ होती रहती हैं जब तक कि वो पेशाब करनी हि लेती सरोज कों भि बहोत लज्जा आँ रही थि उसे मालूम थां कि उसका बेटा बाहर् खड़ाहुआ इस आवाज़ कों सुनरहा होगा,, मे यहीसोच रही थि कि इस आवाज़ कों सुनकर उसका बेटा क्याँ सोचरहा हैं,, कुछ टाइम तक सरोज पेशाब करती रहती हैं उसे बहोत चैन मिलता हैं पेशाब करने केँ बाद
,, सरोज कि योनि पर्र हल्के हल्के बाल थें,, वो अपनी सफाई कां पूरा ध्यान रखती थि मगरआज उसकी योनि नं जाने क्यूं बहोत ज़्यादा खुली हुई नजर आँ रही थि,, लंबे हाइट कि मोती गाडरी हुई स्त्री कि योनि,, कोई भि लड़का एक् बुड्ढा व्यक्ति देख लेँ तौ वो अपनाहोश खो देगा,, सरोजसोच रही थि अगर उसका बेटा इसहाल मे उसकी योनि कों देख लेगा तुम्हें जाने क्याँ कर बैठेगी,, इसलिये उसेडर तक कहीं रोहन पर्दा हटाकर अंदर नां झांक लेँ वो जल्द-जल्द पेशाब करकर खड़ी होती हैं औऱ अपने कपड़े सही करने लगती हैं,,, जैसी वो बाहर् आती हैं,, उसकीनजर रोहन सें मिलती हैं वो शर्मा कर अपनी नज़रें नीचेकर लेती हैं,, मगर रोहन लगातार अपनी माँ कों हि देखेजा रहा थां,,
,,, मां एक् बात बोलूं,
,,, जौ भि बोल्ना हैं अंदर चलकरबोल देना,, जल्द सें पेशाब करो औऱ चलो,,,
,,, सोहन अपनी मम्मी केँ लगभगआता हैं औऱ उसके चेहरे कों अपने हाथों मे लेकर उसकी आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,
,, जोँ बात मे बोलने जारहा हूं वो अंदर बोलने मे मज़ा नहि आएगा,,,
,, सरोज कि सांसे तेज होनेलगी थि,, बहोत धीरे-धीरे सें शर्मा कर कहते हें,,
,, तौ फिनकहो क्याँ बोल्ना चाहते होँ,,, ???
,,,, इसकी आवाज़ बहोत हसीन हैं एक् बार दिखा दोगी????
,,, ये सुनकर सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं वो अपना चेहरा लज्जा केँ मारे अपने हाथों सें छुपानी लगती हैं,,
,,,, तभीकुछ रुकी हि बंदे जौ उसकी योनि पऱ थि उनकी खुजली उसकी होती हैं औऱ नाँ चाहते भि उसकाहाथ साड़ी केँ ऊपर सें हि अपनी योनि पर्र चला जाता हैं वो खो जाती हैं हल्का सां,, पेशाब कि बूंदे साफ करने केँ लिए,
,, जिसे देखकर रोहनउसे कंधों सें पकड़कर उसकेकान मे फिन सें कहता हैं,,
,,, बोल दिखा देगी एक् बार जिसके आवाज़ सें इतनी हसीन हैं,, मे उसे देख्ना चाहता हूं कि वो कितनी खूबसूरत होगी,, इतने सालों सें तुम् मुझसे छुपाकर रखी हौ,,,
,,, सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं मगर उसकी हिम्मत नहि होँ रही थि जिस्म मे कंपन हौ रही थि पसीना हल्का माथे सें आँ गय़ा थां फिन भि वो हौसला बढ़ाते हुए अपने बेटे सें कहती हैं,,,
,, अगर इतनी हि बेचैनी होँ रही हैं तौ करलो अपनी नानीमा नानाजी सें बात,,,
,,, ये कहकर सां रोशन सें नजर झुका लेती हैं,,, औऱ रोहन केँ जवाब कां प्रतीक्षा करती हैं मगर रोहन उसके मासूमियत कों देखते हुए,, कुछ सोचता हैं औऱ फिन प्रेम सें उसके माथे पर्र किसकर देता हैं,,
,,, फिन थोडा पीछे हटकर अपनी मां कों गोद सें ध्यान सें देखने लगता हैं उसके उतार चढ़ाव औऱ पिछले हिस्से कों देखते हुए उसकी निगाह उसकी छाती पर्र जाती हैं वो प्यासी नजरों सें उसे देखा हैं औऱ कुछदेर देखने केँ बाद अपनी मम्मी,, कि पिछले हिस्से कों सहलाकर धीरे-धीरे सें कहता हैं,,
,,, ठीक हैं मे पहले नानाजी नानीमा सें बात करता हूं उसकेबाद सभीकुछ जोँ तेरा हैं वो मेरा हैं औऱ मैसेज जीभर केँ अपनी मर्जी सें लूट लूंगा,,, औऱ अपनी माँ केँ पिछले हिस्से कों दबाते हुएउसे सारे सें कहता हैं,, उसकेबाद तोँ सभीकुछ मुझे मुझे चाहिए तेराये बहोत मनपसंद हैं मुझे तेरी,,,
,,, सरोज अपने बेटे कां इशारा समझ जाती हैं कि वो उसकी गांड कि बातकर रहा हैं,,, उसकेबदन मे एक् सीरम सि दौड़ जाती हैं वो उसकीबात कां कोई जवाब नहि देताउसे बहोत लज्जा आती हैं औऱ वो जल्दी हि कमरे केँ अंदरचली,,, दौड़ते हुए,,
,,, रोहनसमझ जाता हैं कि उसकी माँ शर्मा गई हैं उसकेदिल मे डर हैं कि कहींकुछ गड़बड़ नाँ होँ जाए,,, नं जाने रोहन केँ मन मे आज कितनी तरंगे उठरही थि उसे विश्वास नहि होँ रहा थां कि जोँ खजाना उसकी माँ नें 20 साल सें बचा केँ रखा हैं सभी उसका होने वाला हैं मगर क्याँ नानाजी नानीमा माँ जाएंगे इस रिश्ते केँ लिए,, अब उससे औऱ समझ नहि होता वो जल्द सें पेशाब करता हैं औऱ घऱ केँ अंदर जाता हैं, घऱ केँ बरामदे मे हि उसके नानाजी नानीमा बड़ेचैन सें गहरी नींद मे सोएहुए थें,, सरोज कमरे केँ अंदर चारपाई पऱ लेटी हुईँ थि मगर उसकी आंखें बंद कि वो सोई नहि थि अपने बेटे केँ आने कां प्रतीक्षा कररही थि औऱ सोचरही थि कि कहीं उसका बेटा उसकेसंग कोई हरकतआज हि नाँ करते दरवाजा उसमें बंद नहि किया थां
,,, रोहन एक् निगाह अपनी माँ कि ओर डालता हैं,, औऱ उसकी छाती पर्र देखकर उसके मुंह मे पानी आँ भि लगता हैं वो सोचता हैं कि आज हि सभीकुछ मिलजाए मुझे जोँ भि उसकेपास हैं,, कितना भराहुआ जिस्म हैं ऐसामाल तौ मुझे जीवन मे नहि मिलेगा जोँ 20 साल सें संभाल कर मेरी मां नें रखाहुआ,, इसे तौ रगड़ रगड़ केँ छोड़ने मे कितना मज़ा आएगीहर चीज दावा दावाकर लूंगा,,, अब उससे औऱ बर्दाश्त नहि होता औऱ वो अपनी नानाजी नानीमा कि ओर देखकर उन्हें आवाज़ लगता हैं,,
,, नानीमा नानाजी जी उठिए नाँ मुझे आपसेकुछ जरूरी बात करनी हैं,,,
,,, जैसे हि ये आवाज़ रोहन कि माँ सरोज सुनती हैं जल्दी आंखें खोलकर रोहन कि ओर देखकर इशारा करती हैं कि अभि कोईबात नहि करना सुभह मे कर लेना,,, मगर रोहन नाँ मे गार्डन हिलता हैं औऱ अपनी माँ कों इशारा करता हैं कि अब औऱ बर्दाश्त नहि होता मुझेआज हि बातकर लेनेदो,,,, सरोज केँ दिल कि धड़कन तेज होँ जाती हैं कि उसका बेटा इसबात कों केसे उजागर करेगा कि वो मुझसे विवाह करना चाहता हैं औऱ अपनी दुल्हन बनना चाहता हैं,, उसे बहोत डर भि लगरहा थां औऱ लज्जा भि आँ रही थि कि उसके माँ बापू क्याँ सोचेंगे उसके बारे मे अगर वो मेरे सें पूछेंगे तौ मुझे क्याँ करें,, मे क्याँ कहेंगी अपने माँ बापू सें कि हां मुझे भि ये नाता मंजूर हैं,,, एक् माँ होतेहुए भि मे अपने बेटे कि दुल्हन बनना चाहती हूं उसकीहर ख़्वाहिश पूरी करना चाहती हूं उसकी पत्नि बनाकर उसे पति बनना चाहते हें,,, उसकेनाम कां सिंदूर अपनी मांग मे भरना चाहती हैं,,,
,, रोहन अपने नानाजी नानीमा कों हाथ सें जगाता हैं औऱ जैसे हि उन दोनों कि आंखें खुलती हैं वो रोहन कों देखकर थोडा सां घबरा जाते हें औऱ प्रेम सें पूछते हें,,
,, नाना,, अरे रोहन बेटा इतनीरात मे क्याँ हुआसभी ठीक तौ हैं नाँ, ????
,,, नानाजी जी आप् घबराइए मतसभी ठीक हैं मगर मुझे आपसे बहोत जरूरी बात करनी हैं,,,
,, नाना हांकहो बेटा क्याँ बात हैं??
,, नानाजी जी आप् मुझे हमेशा खुश देख्ना चाहते हौ नां मेरी विवाह केँ लिए आप् बहोत चिंतित रहते हौ,,, आप् चाहते हौ नां मे भि घऱबसा हूं औऱ खुशी-खुशी रहो,,
,,, हां बेटा हम् चाहते हें तुँ भि अपनाघऱ बसा हैं तेरा भि एक् खुशहाल जिंदगी होँ पत्नि होँ बच्चे हौ यही तोँ हमारी अंतिम ख़्वाहिश हैं,,,,
,, तौ नानाजी जी आप् वादाकरो कि मे जिससे बोलूंगा आप् उससे मेरी विवाह कर दोगे,,,
,,, नानाजी जीकुछ देर रोहन कों देखकर सोचते हें,,, मगर बेटा तुम् जिस बोलोगे हम् तुम्हारी विवाह कर देंगे क्याँ तुम् उसको भि पसन्द आओगेतभी तौ विवाह करवा सकती हैं मेरेलाल,,,
,, रोहन एक् नजर अपनी मां कि ओर डालता हैं जौ उसे हि देखरही थि औऱ उसकी आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,
,, मे उसे बहोत पसन्द हूं वो भि मन सें अधिक,,, दिल सें मुझे चाहती हैं अपना पति बनाना,,, मगरबस आपकी राजा मंडी केँ बिनाकुछ नहि हौ सकताअगर आप् आगे दोगे तोँ मे उसे अपनी पत्नि बना लूंगा,, दुनिया मे एक् वही हैं जोँ मुझे पत्नि कां सुखदे सकती हैं औऱ फिनबाद मे बच्चों कां भि,,,,
,,, बच्चों कि बात सुनकर सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं उसकेबदन मे चीटियां रहने लगती हैं,, योनि मे हल्की सि खुजली होने लगती हैं जिसे वो अपनी जांघों सें रगड़कर मिटाती हैं औऱ लज्जा केँ मारे अपनी नज़रें झुका लेती हैं दिलतेज सें धड़कने लगता हैं कि अब रोहन क्याँ बोलने वाला हैं,,,,
,, नाना हमारी रजामंदी केँ बिनाकुछ नहि हौ सकता बेटा मगर हम् तौ इसकेलिए हमेशा सें सजधजकर हैं तुम् बताओकौन हैं वो खुशनसीब जौ तुमसे विवाह करना चाहती हैं औऱ मेरे,,, नाई कि दुल्हन बनना चाहती हैं,,,
,,, नानाजी जी उससे पहले कि मे उसकानाम आपको बताऊंगा मे आपसे बताना चाहता हूं कि अगर वो मेरी जीवन मे नहि मिला आपनेये विवाह मेरी नहि कराई तौ मे आज हि अपनी जिंदगी लीला ख़त्म कर लूंगा मे जहर खाकर आत्महत्या कर लूंगा नाना,,,
,,, रोहन कि बात सुनकर उसके नानाजी नानीमा बहोत घबरा जाते हें तभी उसकी नानीमा रोहन कां हाथ पकड़कर कहती हैं,,,
,, नानीमा जी रोहन बेटा ऐसी बातें नाँ कियाकर मेरेलाल तेरे अलावा हमारी बेटी कां हैं हि कौन तुँ बताकिस विवाह करना चाहता हैं हम् रेडी हें,,,
,,, रोहनकुछ देर सोतेहुए अपनी नानाजी नानीमा केँ चेहरे कों देखा हैं औऱ फिनदिल पऱ हाथ रखकर अपनेमन सें बोलता हैं,,,
,, नानीमा जी मे मां सें विवाह करना चाहता हूं,,, उसे अपनी पत्नि बनना चाहता हूं,,,
,,, जैसे हीरोइन कि बात सरोज केँ कानों मे घूमती हैं उसकादिल तेजी सें धड़कने लगता हैं औऱ वो,, रजाई कों उठाकर जल्दी हि रजाई मे घुस जाती हैं औऱ अपना मुंह छुपा लेती हैं मगर कानों पर्र ध्यान देतेहुए बाहर् कि आवाज़ सुनरही थि,,, उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अबआगे क्याँ होने वाला हैं मगर रोहन कि बात कां असर उसके नानाजी नानीमा पऱ ऐसाहुआ कि वो कुछकह नहि पाए वो रोहन कों देखते रहते हें,,, आज तक समझ मे कोई इतनी हिम्मत नहि कर पाया थां कि अपनी मम्मी सें हि विवाह करने कि बात करेंमगर उन्हें अचानक सें धक्का लगता हैं औऱ वो सच मे पड़ जाते हें कि ये क्याँ बोलरहा हैं,,,
,,, नाना,, रोहन बेटा तुँ ये क्याँ बोलरहा हैं मेरेलाल ऐसा केसे हौ सकता हैं समाज क्याँ रहेगा ये तोँ बहोत गलत हैं पाप हैं मेरे बच्चे औऱ तेरी मम्मी इसबात केँ लिए केसेमान सकती हैं,,,
,, नानाजी जी मैंने पहले हि आपसे बोला थां अगरये नहि हुआ तौ मे अपनीजान दे दूंगा रही मां कि बात तौ आप् मां सें हि पूछलो वो इसबात केँ लिए रेडी हैं,,,,
,,, रोहन केँ नानाजी नानीमा एक् दूसरे कों देखते हुए कहते हें,, क्याँ तुम्हारी माँ इसबात केँ लिए रजिया तुमने बात भि कर लिया अपनी मां सें,,,
,, हां नानाजी जी वो इसबात केँ लिए रेडी हैं अगर आपको यकीन नां होँ तौ आप् माँ सें हि पूछ सकते हौ,, अगर उसनेमना कर दिया तौ मे कभी भि फिन आपसेइस बात कि जीत नहि करूंगा,,,,
,,, सरोज केँ दिल कि धड़कन औऱ बढ़ गई थि वो सोचरही थि केसे अपनी माँ बापू सें इसबात कों बोल पाएगी उसके अंदर हिम्मत नहि थि कि इस उम्र मे अपने जवान बेटे सें वो ब्याह करने केँ लिएकह रही हैं,,, उसकादिल जोरो सें धड़करहा थां कि कब उसके मां पिताजी उसकी आवाज़ लगाकर बुलाएंगे औऱ,, सरोज कों आवाज़ लगाकर बुलाया,,
,,, नानीमा जी, सरोज औऱ सरोजइधर आँ बेटा ये तेरा बेटा क्याँ बोलरहा हैं देख,,,
,, मगर सरोज कि हिम्मत नहि होँ रही थि रजाई सें बाहर् आने कि फिन उसकी मां रजाई केँ पास जाती औऱ कमरे मे जाकर सरोज कों कंधे सें पकड़कर उठती हैं औऱ कहती हैं
,,, सरोजये रोहन क्याँ बोलरहा हैं बेटा ये केसे होँ सकता हैं क्याँ तुँ इसबात केँ लिए सजधजकर हैं,,,
,, क्याँ हुआ माँ क्याँ बोलरहा हैं मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा,,,
,,, रोहनबोल रहा हैं कि वो तुम्हें विवाह करना चाहता हैं औऱ तूँ भि इसबात केँ लिए रेडी हैं,,, क्याँ सच मे तूँ ये करना चाहती हैं,,
,,,, सरोज अपनी नज़रें झुका लेती हैं उसकाहाल ऐसा थां कि वो जवाब भि नहि देपारही थि मगरफिन सें जबतेज आवाज़ मे उसकी माँ पूछती हैं तोँ सरोज धीमी आवाज़ मे रहती,,,
,,, मां मे अपने बेटे कों खोना नहि चाहती,,, मे उसकी खुशी केँ लिएसभी कुछ करने कों सजधजकर,,, हूं,,
,,, ये तौ क्याँ बोलरही हैं बेटा समाज इसकेलिए केसे मानेगा औऱ तुँ अपनी उम्र तोँ देख क्यूं अपने बेटे कों बर्बाद करना चाहती हैं,,,
,, मां मे अपने बेटे कों बर्बाद करना नहि चाहती हैं उसे बचाना चाहती हूं औऱ उसकी जीवनभर संग दोगे माँ,,,
,, मगर बेटा ये केसे होँ पाएगा ये मुमकिन नहि हैं ये केसे होगालोग क्याँ कहेंगे,,,
,,, सर्वस्व बर्दाश्त नहि होता औऱ वो रोती हुईँ अपनी माँ केँ पैरों मे गिर जाती हैं औऱ रोतेहुए कहती हैं,,,
,, माँ जब मे अपने बेटे केँ लिए एक् मम्मी होकर इतना बड़ाकाम कर सकती हौ आप् तौ फिन भि मेरी खुशी केँ लिए इतना नहि कर सकती,, मान जाओ नां मां पिताजी कों केसे भि करकेमन होना मे अपने बेटे कां जीवनभर ख्याल रखेगी औऱ येसभी उसे पऱ छोड़दो वो स्वयं कर,, लगा हमारी विवाह बाहर् होँ जाएगी हम् बाहर् रह लेंगे माँ मानजाओ नां मे आपकेहाथ पेर पड़ती हूं मां,,,
,,, बहुतसमय तक ऐसे हि चलता रहता हैं मगर सरोज अपने आप् केँ सामने हिम्मत नहि जुड़ पाती वो रो-रोकर भि लगाकर अपनी मां सें गुहार लगारही थि बहुत वक़्त बीत चुका थां अब उजाला होने वाला थां इसबात कों लेकर आखिरकार हारकर सरोज कि मां हि हर मानती हैं औऱ रोतेहुए अपनी बेटी कों गलेलगा कर कहती हैं,,,
,, ठीक हैं मेरी बच्ची जैसी तेरी मर्जी अब हम् कर भि क्याँ सकते हें तेरे बापू तौ मेरीबात डालेंगे नहि मे उन्हें मना लूंगी मगर तुम् विवाह कब करना चाहते हौ औऱ केसे करोगे,,,
,, ये सुनकर सरोज कि खुशी कां भि ठिकाना नहि रहता उसकेमन मे भि तरंगे दौड़ने लगती हैं उसेऐसा लगता हैं जैसे वो कोई जवान लड़की होँ औऱ उसे उसका प्रेमी मिल गय़ा होँ,,, वो अपनी मां कों हंसते हुएगले लगाकर कहती हैं,,,
,, मां मे आपकाये आभार जीवनबन नहि भूलूंगी मे आपकोबात नहि सकती आप् छापने कितनी बड़ी खुशी दि हैं,, विवाह कब औऱ केसे करनी हैं ये रोहन बताया उसी सें पूछ लेना माँ,,,
,, तभी सरोज कि मम्मी कि नजर सरोज कि हथेली पड़ जाती हैं औऱ वो उसकी हथेलियां कों ध्यान सें देखते हें पूछता हैं
,,, ये तेरे हाथों कों क्याँ हुआ इतनेलाल क्यूं हैं,,, ??
,,, तभी सरोज कों ध्यान आता हैं कि उसने अपनी बेटी कि जब लिंग कों हाथ सें चलाया थां कितनी देर तक उसनेउसे रगड़ा थां उसकी रागदान सें उसकी हथेली लाल होँ गई हैं,,, उसने तौ अपने हाथों पऱ ध्यान भि नहि दिया थां मगरअब वो सोचरही थि कि कितना ताकतवर हैं उसके बेटे कां लिंगहाथ कों भि लालकर दियाअगर वो उसकी योनि केँ अंदर मर्दन करेगा तौ उसका क्याँ हाल करेगा जब हाथों कां ऐसाहाल हैं औऱ ये सोचते हौ उसका जिस्म कम जाता हैं वो अपनी माँ कि बात कां कुछ जवाब नं देकरसर झुकाकर शर्मा जाती हैं,,,,
,, बोल्ना तेरेहाथ इतनेलाल क्यूं हैं क्याँ हुआ औऱ शर्मा क्यूं रही हैं,,,
,, अरेकुछ नहि मां मे कुछभजन उठारही थि उसकीवजह सें होँ गय़ा हैं,,,
,, उसकेबाद सरोज कि माँ उससेकुछ नहि पूछता माहौल शांत हौ गय़ा थां सभी अपनी-अपनी सोच मे डूबे थें,,, रोहन कों बहोत खुशी मिलती हैं अबउसे मंजूरी मिल गई थि कि वो अपनी मम्मी सें विवाह कर सकता हैं अबआगे उसी कों सभीकुछ करना थां इसलिये वो,,, रातभर सोया नहि थां इसलिये सुभह-सुभह हि अंदर जाकरबैड पर्र लेट जाता हैं औऱ सरोज किचन मे खानां बनाने लगती हैं सब केँ लिए ब्रेकफास्ट सजधजकर कररही थि खुशी-खुशी औऱ अपने बेटे कि मर्दाना ताकत केँ बारे मे सोचसोच कर कहां पऱ रही थि,,,
,, मन हि मनसोच रही थि कि,, केसे उसका बेटा इस 20 साल कि बचाई हुइ जवान कों रगड़ेगा,,, किसतरह उसके जिस्म कां मर्दन करेगा औऱ उसका क्याँ हाल होगा क्याँ वो अपने बेटे कों इतनीदेर तक अपनेबदन पऱ झेल पाएगी,,,, येसोच सोचकर इसका बुराहाल थां मगरमन मे वो खुश हौ रही थि उसेआज ऐसालग रहा थां कि जैसे मे किसी कि, पत्नि बन गई होँ औऱ पत्नि कि तरह शर्मा रही थि अब वो अपने बेटे केँ पास जाने मे भि शर्मा रही थि वो आहिस्ता सोरहा थां ब्रेकफास्ट सजधजकर होँ चुका थां,,, सर्वोच्च चुपचाप पहले अपनी मां पिताजी कों नष्ट देती हैं औऱ मुस्कुराते हुए उनकीतरफ देखती हैं,, सरोज कि मां पिताजी भि उसकेलिए मुस्कुरा कर देखते हें औऱ उसका हौसला बढ़ाते हें कोईबात नहि ठीक हैं जैसा तुम्हें अच्छा लगेकर लो हम् तुम्हारे,, संग हें तुम्हें खोना नहि चाहते,,,,
,,, नानीमा जी,, जा बेटा अब रोहन कों भि उठादो औऱ उसको ब्रेकफास्ट देदोरात भर सोया नहि पाया हैं,,,
,,, अपनी मां कि बात सुनकर सरोज केँ जहां मे रोहनआता हैं,,, औऱ वो कमरे कि ओर देखती हैं दरवाजा थोडा सां लगाहुआ थां,,, अपनी मां कों ब्रेकफास्ट देखकर औऱ बापूजी कों नष्ट देकर कमरे कि ओर बढ़ने लगती हैं मगर उसके पैरों मे आज कमरे कि ओर जातेहुए कंपन होँ रहा थां,, वो धीरे-धीरे सें दरवाजा खोलती हैं तोँ देखी हैं कि रोना भि भि गहरी नींद मे सोरहा हैं,,, अपने बेटे कों सोताहुआ देखकर, बेहन उसकेबदन कों ऊपर सें नीचे तक देखते हें जौ कि,,, लंबा चौड़ा औऱ तगड़ा पुरुष लगरहा थां,, जिसे देखकर सरोज कि योनि मे फिन सें सीरम दौड़ जाती हैं औऱ उसे उसके लिंग कां जाकर उसकी आंखों केँ सामने नजरआता हैं,,, फिन वो मन हि मन सोचती हैं कि जोँ भि हौ अब तौ ये मेरे पति होने वाले हें,,, सरोज अपनीसर पर्र साड़ी कां पल्लू करती हैं औऱ अपने चेहरे कों छुपाकर प्रेम सें झुककर रोहन केँ पैरों कों छू लेती हैं,,,,, एक् पतिव्रता नारी कि तरह
,,, पैरों कों स्पर्श पाकर सोने कि आंखें जल्दी खुल जाती हैं वो देखता हैं कि उसकी मम्मी उसके पऱ छोड़कर माथे सें चूमरही हैं,,,, ऐसा देखकर रोहन केँ दिल कि धड़कन बढ़ जाती हैं वो अपनी मम्मी केँ चेहरे कि ओर देखा हैं जोँ कि हल्का सां शर्मा रही थि औऱ उसे देखकर उसे बर्दाश्त नहि होता,,, वो दरवाजे कि ओर देखा हैं जौ कि खुलाहुआ थां वो पर्र कि लाश सें दरवाजे कों बंद करता हैं औऱ अपनी मम्मी कों पकड़कर अपनी बाहों मे भर लेता हैं,,,
,,, ये क्याँ कररही होँ मेरे प्रेम कों छूरही हौ,,,
,,, रोहन कि बात सुनकर सरोज शर्मा जाती हैं औऱ अपनी नज़रें नीचेकर करके,,
,,, मे एक् पत्नि धर्म निभारही हूं,, जब आप् मुझे अपनी पत्नि मानते होँ तोँ मे भि आपको अपना पति मानती हूं इसलिये मे अपना पत्नि धर्म निभारही हूं
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सब किस्सा पढ़ने वालों सें मेरा निवेदन हैं कि अपना कमेंट करके अपनीराय जरुरदे लाइक करने सें काम नहि चलेगा मुझे कमेंट भि पढ़ने अच्छे लगते हें आप् लोगों केँ औऱ हौसला बढ़ता हैं कथा लिखने केँ लिए
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