Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
,, वो इसी उलझन मे थि कि क्याँ वो ये अपने बेटे केँ लिएकर पाएगी,, अबउसे औऱ भि ज़्यादा पसीना आनेलगा थां,, सांसऊपर नीचे होँ रही थि औऱ उसकी आंखों केँ सामने उसके बेटे कां विकराल लिंक दिखाई देरहा थां,,
डर केँ कारण उसकी धड़कनें औऱ बढ़ गई थि अपने बेटे केँ लैंड केँ बारे मे सोच केँ,, उसके मुंह सें कोई शब्द नहि निकलरहे थें इसलिये रोहनफिन सें एक् बार कहता हैं,,
रोहन :- कहो मां कर दोगी नां एक् बार अपने बेटे कि तकलीफ़ दूर,,
सरोज :- रोहन। मुझे। तेरी नानीमा बुलारही हैं मे मोबाइल रखती हूं.
,, इतना कहकर सरोज मोबाइल काट देती हैं,, रोहन कों उसकीबात कां जवाब नहि मिला थां मगरउसे पूरा विश्वास थां कि येकाम उसकी माँ कर सकती हैं उसके प्रेम केँ लिए,,, रोहनमन हि मनसोच रहा थां कि जौ भि होँ अबघऱ जाकर एक् बारइसे मुट्ठी जरूर मरवाऊंगा,, कितना सिंपल होगा वो जब मेरी माँ मेराल** पकड़कर रही आएगी,,, रोहनये सोचते हुए अपनेकाम मे लग जाता हैं औऱ बसउसे प्रतीक्षा तक घऱ जाने कां,, दूसरी तरफ सरोज अपनी धड़कनों पर्र ख्वाबों पानी कि कोशिश करती हैं औऱ किचन केँ काम मे लग जाती हैं,, मेहमान भि यहीसोच रही थि कि उसका बेटा आएगा औऱ इसकाम केँ लिएउसे जीत करेगा,, क्याँ वो अपने बेटे केँ मोटे लिंग कों पकड़ पाएगी क्याँ उसे खिलाकर एक् बार संतुष्ट कर पाएगी,, फिनमन मे विचार करती हैं कि नहि ये बहोत गलत हैं मे ऐसाकुछ नहि करूंगी,,,
,, इसीतरह पूरादिन भि जाता हैं,,, औऱ रोहन अपनेघऱ जाने कि तैयारी करता हैं,, चारों तरफ खुशी कां माहौल थां दीपावली कां दिन,,, सब खुशनजर आँ रहे थें सब नें अपने-अपने घरों कों अच्छे सें सजाया हुआ थां,, रोहन दीपावली केँ दिन अपनेघऱ पहुंचता हैं,,, सबसे पहले अपने नानाजी औऱ नानीमा जी केँ पांव छूकर आशीर्वाद लेता हैं उसकेबाद अपनी मम्मी केँ पेर छूकर आशीर्वाद लेता हैं,,, कुछ वक्त केँ लिए अपनी माँ केँ चेहरे कों देखकर मुस्कुराते हुए अंदरचला जाता हैं,,, वो जोँ तोहफा औऱ सामान लेकरआया थां अपनी मार्को दे देता हैं,,
,, सब बहोत खुश थें रोहन केँ आने सें वो ढेर सारी मिठाइयां लेकरआया थां दीपावली केँ दिन,, अच्छा अच्छा खानां बनाया थां उसकी मम्मी नें वो खानां खाने केँ लिएसब बैठ जाते हें,, रोहन सबसेअलग बैठा अपनी माँ कों किचन मे काम करतेहुए देखरहा थां,, सरोज भि कभी-कभी अपने बेटे कि ओरदेख रही थि,, तभी रोहन अपने लिंग कों सहलाते हुए,, अपनी मां कि ओर देखा हैं,, सरोजिया देखकर अपना गर्दन घुमा लेती हैं,,
सरोज:- बेशर्म ये भि नहि देखरहा हैं किसके नानाजी नानीमा बैठे हें,,
,, आरामसे वक़्त बीतता हैं साम होती हैं सब दीपावली केँ दीए जलते हें औऱ,, देहात मे कुछलोग पटाखे भि फोड़रहे थें,,
मगर रोहन कां ध्यान मात्र अपनी माँ पर्र हि थां,, तभी रोहन कि नई हीरोइन सें कहती हैं,,
नानीमा:- रोहन बेटा अब तोँ दो-तीन दिन कि छुट्टी पर्र आया होगा नाँ,,
रोहन:-हां नानीमा 3 दिन कि छुट्टी पर्र आया हूं,,
नाना :- बेटा कंपनी वालों नें दीपावली पर्र तौ तोहफा बर्थडे पार्टी होंगे,,
रोहन :- नाना उपहार नहि बाटे बोनस केँ रूप मे पैसेदिए हें औऱ कुछ मिठाइयां भेज भइया,,
,, यहीसभी बातें चलरही थि कि रोहन खानां खाकर सीधा किचन मे जाता हैं औऱ नजरेबचा कर अपनी माँ कों पीछे सें,,
रोहन :- क्याँ कररही होँ माँ मेरीतरफ ध्यान भि नहि देरही आप्??? डरलगरहा हैं क्याँ??
सरोज:- मुझे क्यूं डर लगेगा औऱ किसबात कां डर,,
रोहन: तौ फिन लिपस्टिक लगाकर दिखाओ नाँ मुझे आपके होंठलाल देखने,,
सरोज :- अभि नहि रात कों दिखा दूंगी तोँ जानां अपने दोस्तों केँ पास दीपावली मना,,
रोहन:-ठीक हैं माँ मे जाता हूं औऱ रात कों, मे भि आपकोकुछ दिखाना चाहता हूं,, देखोगी नाँ,,
सरोज:- क्याँ दिखाना चाहता हैं???
रोहन:-वही जौ मुझे परेशान करता हैं,,
सरोज:- रोहन बेटा येगलत हैं तौ समझता क्यूं नहि,,
रोहन:- मुझे नहि पता मां बस एक् बार मेरी मुट्ठी मार देना
सरोज:- मेरेलाल इसबात कि जितना कर मे देख लूंगी बसमगर ये नहि करूंगी,,
रोहन: तोँ चलो निकालो इसे बाहर् औऱ देखलो एक् बार,, कितना बेचैन हैं,,
सरोज:- अभि नहि रोहन अभि तौ कररात कों देख लूंगी तेरे नानाजी नानीमा हैं यहां पऱ,,,
रोहन:-ठीक हैं माँ मे जाता हूं दोस्तों केँ पासमगर जब तक मे हूं आप् लिपस्टिक लगाकर मुझे रेडी मिलना,,
,, रोहिणी हैं बोलकर चला जाता हैं मगर सरोज कि नजरे लज्जा सें बड़ी झुकी हुईँ थि उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वो क्याँ करें,,
,, पूरे देहात मे दीपावली कां माहौल थां रोहन जाकर अपने दोस्तों सें मिलता हैं औऱ दीपावली केँ आतिशबाजी मे उनकेसंग आतिशबाजी करने लगता हैं,, चारों तरफ पटाखे कि गूंज औऱ रोशनी सें कौन जगमगरहा थां
,, आरामसे वक्तबीत रहा थां बहुतरात होँ चुकी थि रोहन कों ध्यान नहि रहा कि उसेघऱ भि जानां हैं,, तभी रोहन केँ मोबाइल पऱ उसकी माँ कि फोनआती हैं,,
रोहन:-हां कहो माँ क्याँ बात हैं??
,, मगर दूसरी तरफ सें ईश्वर कि नानीमा जी कि आवाज़ आती हैं औऱ वो कहती हैं,,
नानीमा:- रोहन कहां हैं बेटा बहोत रात होँ गई हैं अबघऱ वापस आँ जा,,,
रोहन:-जी नानीमा आँ रहा हूं थोड़ी देर मे,,,
,,, रोहनघऱ वापसआता हैं तोँ देखा हैं कि उसके नानाजी नानीमा बाहर् सोरहे हें पऱ अंडे मे औऱ कमरे मे उसकी माँ अंदर हैं,,, रोहन दरवाजा खोलकर अंदर जाता हैं,, उसे सामने हैं उसकी माँ नजरआती हैं जिसमें लालरंग केँ अपने होठों पर्र लिपस्टिक लगाई हुई थि,, जिसकी नजरे झुकी हुई थि औऱ नाक मे बनाई हुइ रोहन कि नथनीदमक रही थि,,
,, अपनी माँ कों इसतरह देखकर रोहन अपने आप् पर्र काबू नहि पता औऱ उसके लिंग मे अकड़न शुरुआत हौ जाती हैं,, उसे विश्वास नहि होँ रहा थां कि लिए लिपस्टिक लगाकर उसकी मम्मी इतनी खूबसूरत लगती हैं,, चौहान कां मन तौ कररहा थां कि एक् बार उसके फोटो कों पीलो,, इन होटों कां रस निको निकले केँ निकाल दो,, मगर वो अपने आप् पर्र पागलकब उठाकर अपनी मां केँ पास जाता हैं,, औऱ उसके गर्दन कों ऊपर उठकर बड़े प्रेम सें उसकी आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,
रोहन:- अपनी आंखें तोँ खोलो माँ,,
सरोज :- रोहन मे तेरे नानाजी जी केँ पास जाकरसो जाती हूं बैठा थां वहीं पर्र दूसरी चारपाई डालकर,, अब तोँ मे तेरेमन कि ख़्वाहिश पूरीकर दि तूनेकहा थां लिपस्टिक लगाने केँ लिए मैंने लगाली,,
रोहन:- मां बाकी आप् बहोत खूबसूरत लगरही हौ,, आप् अपने बेटे कि एक् ख़्वाहिश औऱ पूरीकर दो,,
,, रोहन हल्का सां अपनी माँ केँ बालों कों पकड़कर पीछे कों खींचता हैं जिसकी वजह सें उसका चेहरा उभरकर सामने आता हैं,, औऱ उसकी आंखें खुल जाती हैं वो भि अपने बेटे कि नजरों मे देखते हुए,,
सरोज:- बेटा येगलत हैं एक् माँ अपने बेटे केँ संगऐसा कभी नहि करती मेरे बच्चे,, ये तोँ तेरी पूजा केँ फूल हैं जौ तेरी पत्नि कों चढ़ाए जाएंगे ऐसे क्यूं बर्बाद करना चाहता हैं मेरेलाल,,
,, ये सुनकर रोहन कों सोचने लगता हैं उसेसमझ मे नहि आता माँ फूल कि क्याँ बातकर रही हैं कौन सि पूजा केँ फूल किसको चढ़ाई जाएंगे,, पूजा केँ कौन सें फूल पत्नि कों चढ़ाए जाते हें हमेंसमझ नहि पता,,,
कौन सें पूजा केँ फुल
रोहन:-कौन सि पूजा केँ फूल माँ जोँ मे पत्नि कों चढ़ाऊंगा क्याँ कहरही होँ आप् मेरीसमझ मे नहि आया,,
,, रोहन कि बात सुनकर सरोजों सें प्रेम सें बुलाती हैं,
सरोज : यही मेरेलाल जोँ तुम् मुझसे करवाना चाहता हैं ये तेरी पत्नि कां काम हैं,, औऱ उसेकाम केँ लिए पहले तेरी पत्नि कां हि बनता हैं,,
रोहन:-ठीक हैं माँ आप् हि नहि पऱ सोजाओ मे बाहर् जाकरसो जाता हूं,, इतनाकह कररो हम् बाहर् चला जाता हैं,,
,, सरोज कों कुछसमझ नहि आता कि उसका बेटा इतनी आसानी सें केसे मांगे,, कहीं मे फिन सें नाराज तौ नहि होँ गय़ा,, नहि मेरे बेटे नें वादा किया थां क्याँ मुझसे नाराज नहि होगा,,, सुमन बाहर् जाकरसो जाता हैं सरोज भि लेट जाती हैं,, उसेसमझ नहि आता,, किसका बेटा उससे नाराज हुआ हैं याँ वो अपनेमन सें बाहर् गय़ा हैं,, फिन वो मन हि मम्मी अपने आप् सें प्रश्न करती हैं कि जोँ उसका बेटा चाहता हैं क्याँ वो उसेकर देना चाहिए,, मगर मे आज तक नहि सुना कि कोई मम्मी अपने बेटे कि मुट्ठी भि मार सकती हैं याँ उसके लिंग कों हाथ मे पड़ सकती हैं,, ये तौ पाप हैं ऐसा तोँ कभी नहि होँ सकता,, मगर अगर बेटा जीतकर तौ फिनमन कों क्याँ करना चाहिए,, औऱ जिसका एक् हि बेटा होँ वहीजान सें प्रेम जौ उसकाघऱ चलना हैं उसके जिंदगी कों सर्वत्र हैं,, बेहन क्याँ करे थें उसका बेटा तकलीफ मे हैं,, औऱ ऊपर सें उसकाकोई साथी भि नहि,, दोस्तों मेरा हैं कि मे उसकी विवाह नहि करपारही इसलिये मेरालाल इतना बेचैन रहता हैं,, मगरफिन भि कोईगलत काम नहि करता मेहनत सें काम करते हें दो रोटी खिला हैं,,, औऱ आज तोँ कितनी सारा सामान भि लेकरआया दीपावली पऱ खुशियां लेकरआया मेरालाल,,
,, सहीगलत औऱ पाप पुण्य कि लड़ाई मे सरोज अपने आप् सें बहुतदेर तक लड़ती रहती हैं,, दो-तीन घंटे बीतने केँ बाद भि सरोज कों नींद नहि आती,, मगर उसे अपने बेटे केँ लिए बहोत दुख हौ रहा थां आखिरकार वो फैसला करती हैं कि जौ होगा देखा जाएगा,, वो अपने बेटे कों एक् बार शांतकर दे,, मे जरूर अपने बेटे कों एक् बार संतुष्टि दिलाऊंगा कि हाथ सें हि सही,,
,, कुछदेर सोचने केँ बाद सर्वर चुपके सें बाहर् जाती हैं,, तुम्हें देखती हैं कि उसके माँ बापू गहरी नींद मे सोएहुए हें औऱ उधर रोहन भि अपनेखाट पऱ लेटाहुआ सोरहा हैं,, अपने बेटे केँ पास चुपके सें जाकर खड़ी होँ जाती हैं,, मगरउसे उठाने कि उसकी हिम्मत नहि हौ रही थि इसलिये मे प्रेम सें धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलती हैं,,
सरोज :- रोहन। रोहन.सो गय़ा क्याँ बेटा.
,, उसकी सांसों कि गति औऱ आवाज़ सें रोहन कि आंखखुल जाती हैं तोँ वो देखता हैं कि उसकी मां उसकेपास मे बैठी हैं। रोहन अपनी माँ केँ चेहरे कों गौर सें देखते हुए
रोहन :- क्याँ हुआ माँ क्याँ बात हैं??
सरोज :- जालंधर चलो अंदर चलकरसो जानां,,
रोहन :- क्यूं क्याँ हुआअब क्याँ बात हैं???
सरोज:-कुछ नहि मुझे अकेले कों डरलगरहा हैं अंदरचल मेरे बच्चे अंदर चलकरसो जानां,,,
,, रोहनमन मे विचार करतेहुए,, लगता हैं माँ नें मतबना लिया हैं मेरी मुट्ठी मार देगी,, इसीलिए आई हैं रात मे उठाने,,,
रोहन:- धीरे-धीरे सें पहले आप् वादाकरो कि एक् बार मेरी मुट्ठी मरोगी,,
सरोज :- ठीक हैं तौ अंदरचलो,,,
रोहन :- क्याँ ठीक हैं मुंह सें कहो नाँ,,
सरोज:-हां मेरेलाल तुँ अंदर चलनाहाथ सें एक् बारकर दूंगी,,
रोहन : क्याँ कर दोगी माँ एक् बारकहो नाँ,,
,, सरोज थोड़ी ड्राइवर सें हमें लब्ज मे शर्मा कर कहती हैं
सरोज:-चल मुट्ठी मार देता हूं तेरी,,
,,, रोहन बहोत खुश होता हैं औऱ मे अपनी मां केँ चेहरे कों देखते हें उठकरबैड सें अंदर जाने लगता हैं,, सरोज भि आरामसे उसके पीछे जाती हैं औऱ वहां अंदर जाकर अपनी माँ कों हाथ पकड़कर अंदरआता हैं औऱ दरवाजा बंदकर देता हैं,,, अब्रोहण बेड पऱ बैठ जाता हैं औऱ अपनी माँ कां प्रतीक्षा करता हैं कि कब वो पहल करेगी,,,
,, ऐसे क्याँ देखरहा हैं,,
,, चलो माँ करदो एक् बार,,
,,, कपड़े तौ निकाल ऐसे बाहर् निकाल तभी तौ करूंगी,,
,, नहि आप् स्वयं हि इसको बाहर् निकालो,,
,, रोहन कि बात सुनकर वो शरमाते हुए कांपते हुएहाथ तौ उसे उसका लोगो नीचे करने लगती हैं,, धीरे धीरे बजने कों नीचे करती हैं तोँ जैसे हि मोबाइल कां लिंग बाहर् आता हैं सरोजउसे देखकर डर जाती हैं,,
,, क्याँ देखरही होँ माँ बहोत परेशान करता हैं,, एक् बारइसे पकड़लो नां,, हौ सकता हैं आपके प्रेम भरे हाथों सें मानजाए मुझे परेशान नां करें,, आज इसके एकड़ निकाल दो मां बहोत पकड़ता हैं,, बहोत परेशान करता हैं,,
,, ये कहकर रोहन कि आंखों मे आंसू आँ जाते हें नं जाने क्यूं उसकी आंखों मे इस दर्द केँ आंसू थें,,, रोहन कि आंखों मे आंसूदेख कर सरोज जल्दी हि उसके लिंग कों पकड़ लेती हैं,, औऱ आरामसे हाथ चलने लगती हैं,,
,,,, सर्विस लज्जा हैं याँ केँ कारण अपनी बेशर्मी छुपाए रखते हें,, उसे बहोत हि लज्जा आँ रही थि मगर मे चाहते हुए भि वो अपने बेटे केँ लिंग कों पकड़ लेती हैं,, औऱ प्रेम सें अपने बेटे सें कहती हैं,,
,,, रोमत मेरेलाल मे कर दूंगी आज शांत चाहे जौ भि दुनिया कहेमगर येबात किसी कों बताना नहि मेरे बच्चे,, व्यक्ति सें शांतकर दूंगी,, चाहे जौ हौ जाए मे अपने बेटे कों आज शांत करके हि रहूंगी,,
,,,, ओ मां कितना अच्छा लगरहा हैं आपके हाथों सें,,
Lajawab update halanki bete kee pahli pichkari mummy k mang mai girti fir mummy k chehre ko bhar deta or woh mummy k mote mulayam dudh mai girtte hue uske locket ko bi bhigo deta
Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
,,,, रोहन अपनी मां कि रसीले हाथों कां स्पर्श अपने लिंग पऱ महसूस करमजा केँ सागर मे चला गय़ा थां,,, उसेआज ऐसा महसूस होँ रहा थां जैसे भि आसमान मे उड़रहा हैं,,, धीरे धीरे उसकी माँ उसके लिंग कों सहलारही थि,, जैसे-जैसे सरोज केँ हाथ उसके लिंग पऱ स्पर्श कररहे थें उसके लिंग मे औऱ अधिक तनावआने लगता हैं नशे फूलने लगती हैं,, सरोज अपने बेटे कि ओरदेख रही थि वो लज्जा कि वजह सें उसके लिंग कों मात्र हाथों सें सहलारही थि मगर,, उसनेउसे पऱ अभि तक नजरे नहि डाली थि,, मगरजब उसके लिंग कां आकार बदलने लगा तौ वो अचंभित होकर एक् बार अपनी बेटी केँ लिंग कि ओर देखती हैं,,
,, सरोज अपनेमन मे हि विचार करती हैं,,
सरोज:मन मे विचार करते हें,,, हे ईश्वर इतना बड़ा औऱ इतना मोटा मेरे तोँ हाथ मे भि नहि आँ रहा,,
रोहन :- हां माँ कुछकरो नां दर्द होँ रहा हैं अब इसमें,,
,,, रोहन कि कर रहने कि आवाज़ सुनकर सरोज उसके लिंग कों छोड़ देती हैं,, औऱ उसे अपनीगले लगाकर प्रेम सें कहती हैं,,
,, कर तोँ रही हूं मेरे बच्चे इतना परेशान क्यूं होँ रहा हैं,,
,, माँ दर्द होँ रहा हैं इसमें,,,
,, तुम्हें अच्छा नहि लगरहा,,,
,,, अच्छा तौ लगरहा हैं मां मगर दर्द होँ रहा हैं,,,
,,, मेरेलाल तूनेकभी हाथ सें किया नहि नां इसलिये दर्द हौ रहा हैं अभि थोड़ी देर मे सही होँ जाएगा,,,
,, मां सब करते हें क्याँ हाथ सें,,
,,, मुझे नहि पता मे कररही हूं नां तौ शांत लेटर हैं मेरे कों करनेदे तुम को भि शांति मिल जाएगी मेरे बच्चे,,,
,, ठीक हैं मां करोमगर आप् कब तक करती रहोगी हाथ दर्द करने लगेंगे आपके,,,
,, सरोज रोहन केँ मुंह पऱ हाथ रखकर उसके लिंग कों फिन सें धीरे धीरे सहलाने लगती हैं,,
,, सुशांत लेटर हैं मेरेलाल मे कर दूंगी चाहे पूरीरात हि मुझे क्यूं नं करना पड़े,, आज मे तुम्हे शांति दिलकर हि रहूंगी मेरेलाल जब तक इसका पानी निकलेगा नहि तुम्हें सुकून नहि मिलेगा मेरे बच्चे,,, मुझे भि तेरीये प्यास अच्छी नहि जाती इसलिये मे मजबूर होँ गई हूं एक् माँ होतेहुए भि,, येसभी कररही हूं जौ मुझे नहि करना चाहिए,,,
,, मां ऐसे दर्दकर रहा हैं आप् रगड़रही होँ तौ,,,
,,, सरोजकुछ देर सोतेहुए अपने बेटे सें कहती हैं,,
,, तुरुक मे भि आई,,,
,,, औऱ धीरे-धीरे सें रूठकर जाने लगती हैं,, वो बाहर् जाती हैं किचन मे सें एक् तेल कि बोतल लाती हैं,, रोहन अपनी माँ केँ हाथों मे तेल देखकर पूछता हैं,,
,,, माँ तेलकिस लिएलाई हौ अब इसका क्याँ करोगी,,,
,,, तेल लगाकर कर देती होँ मेरेलाल ताकि तुम्हे दर्द नाँ हौ,,,
,,, ठीक हैं माँ जैसेगरम चायकर दोमगर आज हि सें शांतकर दो,, तेल सें हि सही इसकी अच्छे सें मालिश करदो माँ बहोत परेशान करता हैं ये मुझे,,,
,,, रोहन कि बात सुनकर उसकी मां कों बहोत लज्जा आती हैं औऱ वो शरमाते हुए अपनी नजरिया नीचेकर लेती हैं,,
,, अधिक आवाज़ मतकर मेरेलाल नहि तोँ तेरे नानाजी नानीमा सुन लेंगे,,, मे सोचेंगे कि क्याँ बातकर रहे हें इतनीरात कों ये,,,,
,,, सरोज एक् नजरफिन सें अपने बेटे कि लिंग पर्र डालती हैं तौ उसकी आंखें बड़ी होने लगती हैं,, उसे अपने सीने पऱ बरसा दिखाई देता हैं जैसे कि उसके मम्मों कहरहे हौ कि इनकी भि कोई मालिश करते बहोत अकड़रहे हें उसके मम्मों,,,, मगर सरोज अपने आप् पर्र कब औऱ करकर धीरे-धीरे सें सीसी खोलती हैं औऱ अपने बेटे केँ लिंग कों नहलाती हैं तेल सें,,,
,, हां मां ऐसे हि बहोत अच्छा लगरहा हैं बसऐसे हि मल्टी रहो,,,
,,, रोहन कों बहोत मजा आँ रहा थां अपनी माँ कि रसीले हाथों कां स्पर्श पाकर औऱ वो उसके चेहरे कि ओर हि देखरहा थां,,, उसे विश्वास नहि हौ रहा थां कि आज उसकी माँ अपने फोटो कों रंगकर औऱ नाक मे पहनी हुइ उसी केँ हाथ कि नाथ कों,, पहनकर उसके हि बेटे कि मुट्ठी माररही हैं,,, साथियों सें अपनी मां केँ चेहरे केँ बदलते हुएरंग कभी एहसास हौ रहा थां,,, जैसे कि वो किसी तकलीफ मे होँ,, औऱ उसे तकलीफ सें जल्द सें जल्द पीछा छुड़ाना चाहती हैं,,, आप् सरोज केँ हाथ धीरे धीरे उसके लिंग पर्र दोनों हाथों सें मालिश करने लगते हें,,
,,, रोहन अपनी माँ कि ओर देखा हैं,, जोँ कि उसकी होलीदेख रही थि फिन वो हि सारे मे,,
,, अब कैसालग रहा हैं मेरेलाल,,, अब तोँ दर्द नहि हौ रहा मेरे बच्चे कों,,,
,,, नहि माँ अब दर्द नहि होँ रहाअब अच्छा लगरहा हैं,,, बस आप् ऐसे हि करतेरहो मुझे बहोत चैनमिल रहा हैं माँ,,,
,,, हमारे लाल मे करती हूं,, जब तक तुम्हारी तरफ पूराचैन नहि मिलता मे ऐसे हि करती रहूंगी मेरे बच्चे,,,
,,, मां जवाब बापू कि मुट्ठी मरती थि तोँ कितनी देर मे उनकाचैन मिल जाता थां,,, ???
,, तूँ ऐसी बातें नां कर मेरेलाल,,, मे कररही हूं नां जोँ तूँ चाहता थां,,,
,,, बताओ नां माँ औऱ बापू आपसेकिस तरह कि बातें करते थें जब आप् उनकी मुट्ठी मारते थें,,,
,,, तुँ अपने बापू कि बात छोड़ मुझे बहोत लज्जा आती हैं जोँ तूँ चाहता थां वो मे कररही हूं नां,, अब मुझे लज्जा केँ मारे हि मार डालेगा क्याँ मेरे बच्चे,,,
,,, ठीक हैं माँ मगर आप् मुझे पिताजी कि तरफ पुकारो नां जैसे उनका पुकारती थि मुझे अधिक अच्छा लगेगा,,,
,,, उससे क्याँ होगा,, जल्द हौ जाएगा,,,
,,, मुझेये तोँ नहि पता जल्द होगा कि नहि मगर मे चाहता हूं कि आप् मुझे एक् पति कि तरह पुकारे जैसे अपने पति कों पुकारती थि,, औऱ मे आपको आपकेनाम सें पुकारू तोँ आपको बुरा नहि लगेगा,,
,,, थोड़ी देर शांत लेटर हैं मेरेलाल मुझेकर देते हें मे तुम्हें शांति दिला दूंगी मेरे बच्चे,,
,, केसे शांति दिलाओगे मां,,,,
,,, हास्य करके निकाल दूंगी तेरा पानी,,,
,,,,, रोहणी हैं सुनकर अपनी मां केँ बालों कों पकड़ता हैं औऱ उसको थोडा सां पीछे घसीटकर चेहरे कि ओर देखा हैं,, उसकी आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,
,,, केसे निकलेगी मेरा अपनी एक् बारबोल,,,
,, सरोज अपनी बेटी कि आंखों मे देखते हुए,, सोचने लगती हैं शायद जोँ वो चाहता हैं उसेबोल देना चाहिए,,, अब इतना बड़ाकाम कररही हैं तोँ ये बोलने मे क्याँ हि हर्ष हैं,,,, इसलिये वो भि रोहन कि आंखों मे देखते हुए कहती हैं,,,
,,, मुट्ठी मारकर निकाल दूंगी। जी। आपका पानी। मुट्ठी मारकर छोड़ दूंगी.जी.आपको। ये तोँ बड़ा मोटा हैं.
,,,, अपनी माँ कि बात सुनकर रोहन कों औऱ जोशआता हैं औऱ वो आहे भरतेहुए उसके चेहरे कों चूम लेता हैं,,, औऱ एक् दर्दभरे स्वर मे कहता हैं,,,
,,, ओ मेरी सरोजआई लवयू सरोज,,,.बस ऐसे हि मालिश करतीरहे कितना अच्छा लगरहा हैं तेरेहाथ मे मेरा लैंड हैं.
,,,
,,, सरोज लज्जा सें कारजा रही थि,, मगर न् चाहते हुए भि वो दोनों हाथों सें अपने बेटे केँ लिंग कों पकड़कर हिलारही थि,, रोहन कां लिंग कि माप उसके हाथों मे भि नहि आँ रही थि,, उसे विश्वास नहि हौ रहा थां कि उसके बेटे कां लिंग इतना बड़ा हैं,,, बहुत वक़्त बीत चुका थां सरोज केँ हाथ भि अब दर्द करने लगते हें इसलिये वो आहे भरतेहुए कहती हैं,,,
,,, हे ईश्वर। कितनी देर मे झाड़ोगे जी आप्.
,,, सरोज एक् बात पूछूं,,,
,,, उसकी मां कोई जवाब नहि देती वो बस अपने हाथों कों हिलाया जारही थि,,, रोहनफिन सें कहता हैं,,
,, सरोजसुन नहि रही क्याँ,,,
,, जी बोलिए। क्या बात है मे मर गई कितना वक्त लगेगा आपको.
,,, एक् बार तेरे होठों कां रसपीलो.
,,, नहि जौ आप् बोलोगे मे वो कररही हूं नां ऐसे हि झाड़ दूंगी ऐसामत करना,,, आपको मेरीशपथ हैं मे मुट्ठी मारकर निकाल दूंगी इसका,,,
,,, जल्द सें निकलना अब तौ दर्द भि नहि होगा आनंद आँ रहा हैं,,,
,,, कर तोँ रही हूं पता नहि कितना वक्त लगेगा आपको,,, आपके बापू तोँ जल्दझड़ जाते थें जी। कितना लंबा हैं ये ईश्वर इतना लंबा तौ मैंने कभी भि नहि सोचा थां.
,,, मेरा एक् बारआई लवयूबोल दे,,, कहदे कि तूँ भि मुझसे प्रेम करती हैं जिसतरह मे तेरेलिए पागल हूं,,,
,,, आईलवयू रोहनआई लवयूजी मे भि आपसे बहोत प्रेम करती हूं,,, बसअब झाड़दो नां बहोत दर्द होँ रहा हैं मेरे हाथों मे भि। हेराम जी कितना समय लगेगा आज हि आपको। क्यूं इतना प्यास रहे हौ निकाल दो नां इसका पानी। आपको भि चैनमिल जाएगा.
,,, औऱ तेरामन नहि करता क्याँ। सच-सच बताना तेरीच** मे खुजली नहि होती क्याँ सरोज.
,,, ऐसी बातें नाँ करो मुझे लज्जा आँ रही हैं.
,,, सच-सच बताना मां सच मे आपकी खुजली होती हैं उसमें मन नहि करता लैंड लेने कां। आपको मेरीशपथ बताओ नाँ.
,,, पहले नहि करता थां मगरअब जब सें इसको देखा हैं तब सें इसमें मीठी-मीठी खुजली होती हैं.
,, ये सुनकर रोहन अपनी मां केँ चेहरे कों पकड़ता हैं औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे कहता हैं,,,
,, तौ एक् बार देते मिटा लेँ अपनी खुजली हैं औऱ इसकी भि आंख ठंडी करते हें,,,,
,,, नहि मे हाथ सें मुट्ठी मारकर निकाल दूंगी ऐसा नहि करना मेरे बच्चे,,, मे मर जाऊंगी ये बहोत बड़ापाप हैं मेरेलाल सें हि मुट्ठी माररही होँ नां तेरी,,,,
,,, मगरये हाथ सें चढ़ता तोँ नहि हैं नां बहोत वक्तबाद भि नहि चढ़ता,,,
,,, मे छोड़ दूंगी थोड़ी देर सावरकर मे कररही हूं नाँ मे निकाल दूंगी सें,,, मुझ पर्र विश्वास कर मे निकाल दूंगी झाड़ दूंगी आपको,,,,
,,, ठीक हैं तोँ वादाकर जब जाएगा इसको मुंह मे लगी,,,,
,,,, अच्छी मुंह मे नहि लूंगी बहोत गंदा हैं,,,,
,,,
,,, तोँ फिनच**.दे दे। औऱ नाँ तड़पा बर्दाश्त नहि हौ रहा.
,,, नहि मैसेज झाड़ केँ निकाल दूंगी येकर सकती हैं ईश्वर। मे तेरेहाथ जोड़ती हूं मेरालाल ऐसामत कर.
,, रोहनजोश मे आकर अपनी मम्मी कों बाहों मे भर लेता हैं औऱ बेचैनी मे कहता हैं.
,,, एक् बारदे दे मां नहि बर्दाश्त होँ रहा मे तेरेहाथ जोड़ता हूं एक् बार देते,,,
,,, नहि रोहनदेख मे तेराहाथ जोड़ता हूं तुम को मेरीशपथ हैं मे ये नहि कर सकती मेरे बच्चे मुट्ठी मारकर छोड़ दूंगी तेरी,,,,
,,, मुट्ठी मारकर कहां पऱ झाड़ होगी,,
,, यही तोलिया मे कपड़े पऱ झाड़ दूंगी,,,
,, नहि मे तेरे खूबसूरत सें मुंह मे जानां चाहता हूं इसे पिलाना चाहता हूं एक् बारपी लें बस,,, अगर छूट नहि दे सकती तौ अपने मुंह मे झड़ने सें,,,
,,,
,,, सरोज मरती हैं क्याँ नाँ करती कि स्टोरी उसे पर्र साबित हौ रही थि,,, इसलिये वो गुस्से मे रहती हैं,,
,, ठीक हैं जल्दझड़ कों मुंह मे झाड़ लूंगी,,,
,,, तभी रोहन अपना एक् हाथ बढ़ाकर,, अपनी माँ केँ बूब्ज़ कों जोँ गोली मे उसकेहाथ मे भि नहि आँ रहे थें जोर सें मसल देता हैं,,, सरोज कों इसकी उम्मीद नहि थि इसलिये वो चीज पड़ती हैं,,
,,, ओहमर गई क्याँ कररहे हौ,,,, जल्द सें झाड़दो नां,,,
,,, कितनी भारी पड़ी हैं तुँ मगरफिन भि लैंड लेने कों सजधजकर नहि हैं कब तक संभाल केँ रखेगी इसको,,,
,,, जिद नाँ कर मेरेलाल जल्दझड़ दे,,, अब तुम्हें मुंह मे लेने केँ लिए भि सजधजकर हूं,, मुंह मे झाड़ देना मेरेमगर जल्दझड़ दे मेरे बच्चे,,,,
,,,, रोहन अपनी मां केँ चेहरे कों देखते हुए,,, तेरी पीना भि पड़ेगा बोलती हैं कि नाँ सारारा.
,,, हांपी लूंगी मेरेलाल झाड़ देनापी लूंगी,,,। कितनी देर होँ गई मुट्ठी मारते हुए अभि तक नहि चलरहा.
,,, ओ मां तुम् कितनी अच्छी हौ मुझे विश्वास नहि होता,, कि आज तुम् मेरी मुट्ठी माररही हौ थोडा तेजतेज चलाओ नाँ,,,,
,, हां मेरेलाल कररही हूं जल्द सें जानते हें लें लूंगी सें मुंह मे,,
,,, मुंह मे लेकरपी जानां माँ सारा निकालना नहि एक् बूंद भि हैं,,,
,,, मेरेलाल एक् बूंद भि तेरी बर्बाद नहि होने दूंगी तोँ छोड़ देना मे पी लूंगी आज सें,,,
,,,, उसकी मां मुंह खोलो मे जाने वाला हूं मुंह खोलो मुंह खोलो मां आँ रहा हूं मे,,,
,,, सरोज जल्दी हि अपना मुंहखोल देती हैं औऱ ल** कों सामने रखकर उसकी मुट्ठी मारती रहती हैं,,, तभी एक् जोरदार पिचकारी रोहन केँ लिंग सें निकलती हैं औऱ सीधा सरोज केँ गले मे जाकर टकराती हैं,,,
,,, 2 मिनट तक रोहन कां वीर्य निकलता रहता हैं औऱ सरोज उसका सारा वीर्य पीने लगते हें मगर न् चाहते हुए भि कुछ वीर्य बाहर् निकल जाता हैं,, सरोज कों ऐसा लगता हैं जैसे उसने एक् गिलास दहीपी ली होँ,,, उसे विश्वास नहि होँ रहा थां कि इतना सारा वीर्य एक् बार मे केसे निकल सकता हैं,,, रोहन राहत कि सांस लेता हैं औऱ बेड पर्र लेट जाता हैं,,,, तभी सरोज खड़ी होकरसर झुकाकर अपने बेटे कि ओर देखते हें औऱ प्रेम सें उसकेसर पर्र हाथफेर कर कहती हैं,,,
,,, मिल गय़ा चैन मेरेलाल,,, अब तोँ खुश हैं नाँ,,, अब तोँ कभी मरने कि बात नहि करेगा नां मुझसे नाराज नहि होगा नाँ मेरे बच्चे,,,
,,, मां मे बात नहि सकता कि आज मुझे कितना चैन मिला हैं,,, मे आपसे बहोत प्रेम करता हूं मां,,, क्याँ आप् भि मुझसे उतना हि प्रेम करती हौ,,,
,,, मे तौ तुम को हमेशा सें हि अपनीजान सें अधिक चाहती हूं मेरेलाल,,, प्रेम नहि करती तौ आज दीपावली केँ दिनये पाप नहि करती मेरे बच्चे,,,
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Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
,,, मां आप् मुझे क्याँ मनकर प्रेम करती हौ,,,
,,, क्याँ मनकर करूंगी अपना बेटा मनकर प्रेम करती हूं,,
,,, मगर मे तौ आपके प्रेम मे पागल हूं माँ मे मे तोँ कुछ औऱ हि मानता हूं आपको,,,
,,, सरोजकुछ देरसो मे पड़ जाती हैं औऱ अपने बेटे कि ओर ध्यान सें देखती हैं,,, मे अपने बेटे कों समझने कि कोशिश कररही थि फिनजब उसेकुछ समझ नहि आता तोँ अपने बेटे सें कहती हैं,,
,, तौ क्याँ मनकर प्रेम करता हैं मुझे,,, ???
,,,, दुख तौ ऐसीबात कां हैं कि आप् अभि तक मेरे प्रेम कों नहि समझे,,, आपके होठों कि लाली,, जोँ इस वक्त आपके होठों कि रौनक बढ़ारही हैं,, आपकीनाक मे पहने हि हुई हैं खूबसूरत सि नाथ जोँ मैंने अपने हाथों सें पहने हि हैं,, औऱ आपके चेहरे पऱ ये मेरे प्रेम कां पहलारस,, जोँ इसबात कि गवाही देरहा हैं कि मे आपको क्याँ मानता हूं,, मेरेसर पऱ हाथ रखकरशपथ खाओ क्याँ आपको अभि समझ नहि आया कि मे आपसे क्याँ नाता बनाना चाहता हूं,, क्यूं मे बार-बार आपको बोलता हूं कि मुझे बापू कि तरह बोलाकरो अपने पति कि तरह,,
,,, सरोज केँ दिल मे भि अबकुछ हद तक रोहन केँ लिए बदलाव आँ गय़ा थां आखिर वो भि अभि जवान थि उम्र हि बढ़ गई थि मगर जवानी तोँ उसके अंदर भि थि जोँ कभी-कभी इस परेशान करती थि,, उसका भि मन करता थां कि इसभरी जिस्म कों कोई अच्छे सें निचोड़ दे एक् बार,,, रोहन कि बातों सें बहससमझ गई थि कि वो क्याँ कहना चाहता हैं मगर वो अपने बेटे केँ मुंह सें कहलवाना चाहती थि इसलिये सर झुकाकर शर्मा जाती हैं औऱ धीरे-धीरे सें कहती हैं
,,, मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा रोहन कि तुम् क्याँ कहना चाहते हौ,, मे तौ बस तुम्हारी सारी ख़्वाहिश पूरीकर रही हूं ताकि तुम्हें तकलीफ नां हौ,,
,,, अगरकुछ समझ नहि आँ रहा तौ मुझेये बात कि जब मे तुम्हे बोलता हूं मुझे बापू कि तरहबोल कर अपने पति कि तरह,, तोँ किसी रिश्ते सें बोलता हैं,, औऱ ये जोँ तूने किया हैं कौन करती हैं एक् मर्द केँ संग,,
,,, मुझेकुछ नहि पता मे तौ बस अपने बेटे कों प्रेम करती हूं उसे दिक्कत मे देखा नहि सकती इसलिये कररही हैं,,,
,,, मां मे कोई बच्चा नहि हूं,, मे आपकेदिल कि हालात समझता हूं आप् मुंह सें बोल नहि सकतीमगर आप् भि यही चाहते होँ,,,
,,, तुम् क्याँ चाहते होँ,,, कि मे क्याँ मानूं तुम्हें,,
,,, सभीकुछ तौ होँ हि गय़ा हैं,, बस मांग मे सिंदूर भरना बाकी हैं,, अगर तुम् बोलो तोँ मे आज अपनेखून सें तुम्हारी मांगभर सकता हूं फिन तुम्हें,, दुल्हन केँ रूप मे देख्ना चाहता हूं अपनी पत्नि केँ रूप मे देख्ना चाहता हूं जोँ मे दिल सें तुम्हें अपनी पत्नि मान चुका हूं,,,
,,, ये सुनकर सरोज बहोत शर्मा जाती हैं उसे क्रोध बिल्कुल भि नहि आता अपने बेटे कि बातों पऱ क्योंकि वो भि अपनेदिल सें कुछ नाँ कुछयही चाहती थि,,, फिन भि अपने नां चाहते हुए मम्मी सें कहती हैं,,
,,, ये केसे हौ सकता हैं,, एक् मम्मी अपने बेटे सें केसे पत्नि कां नातारख सकती हैं समाज क्याँ रहेगा,, कभी सोचा हैं आपने आपने तौ बोल दिया,, क्याँ आपको बिल्कुल भि डर नहि लगताजी। सामाजिक रिश्ते कों कभी नहि मानेगा.
,,, रोहनये सुनते हि अपनी माँ कों पकड़कर पलंग पर्र लेटा लेटा हैं औऱ उसकेऊपर जाकरउसे चूमने कि कोशिश करता हैं मगर सरोज अपनी गर्दन कों मार लेती हैं,,, फिन उसकी आंखों मे देखते हुए हीरोइन कहता हैं,,
,, तोँ समाज केँ दर सें डररही हैं तौ,, मगरदिल सें मेरी पत्नि बनना चाहती हैं,, बोल बनेगी मेरी लुगाई???
,,, ये सुनकर सरोज बहोत शर्मा जाती हैं औऱ मुस्कुराते हुए लज्जा सें आंखें बंद करते,,
,,, शर्मा रही हैं मेरीजान,,, बोल्ना पड़ेगी मेरी लुगाई तौ समाज कि फिक्र छोड़,, मे तेरीकभी कोईदुख नहि दूंगा बहोत प्रेम सें रखूंगा तुम्हारी तरफ,, दिन रात प्रेम करूंगा तुम को 20 साल कि तेरी जवानी,,, जोँ उतावलापन रही हैं,, उसे भि शांतकर दूंगा,, बोल बनेगी मेरी पत्नि बनेगी मेरी लुगाई,,,
,,, अपने नानाजी नानीमा कों क्याँ जवाब दोगे,,, ? वो क्याँ कहेंगे क्याँ वो मान जाएंगे हमारे इस रिश्ते केँ लिए,,,
,,, मे उन्हें मना लूंगा केसे भि,, तोँ अपनेदिल कि बात, बात बनेगी मेरी लुगाई बनना चाहती हैं,,,
,,, हां बनूंगी मे आपकी पत्नि एक् पत्नि केँ सारे धर्म निभाऊंगी,, फिन आपकोकभी तड़पना नहि पड़ेगा,, मे भि आपकी बेचैनी देख नहि सकती,,,
,,, तोँ फिन मे आज सें तुम्हे नाम सें पुकार सकता हूं,,
,,, आपके जैसे अच्छा लगे तौ कर सकते हौ,,,
,,, पत्नि केँ बनने केँ बाद तौ देगी नां मुझे,, मैंने तोँ आज तक देखी भि नहि हैं केसे होती हैं,, एक् बार दिखादे,,
,,
,, नहि मुझे लज्जा आती हैं,, पहले अपनी नानाजी नानीमा कों मानलो फिनसभी कुछकल आपका हि हैं,,,
,,, रोहन अपनी माँ केँ चेहरे कों प्रेम सें लेकर उसके होठों कि ओर देखते हुए,, उसकी आंखों मे आंखें डालकर कहता हैं
,,, ठीक हैं फिनदिन रात। ठोकूंगा तुम्हे,,,,
,,, ये सुनकर सरोज कों थोडा डर लगता हैं,,, मे सोचरही थि कि क्याँ वो अपने बेटे कां लिंग अपनी योनि मे लेँ पाएगी,,, इसके बाप कां तोँ,, छोटा सां हि थां उसी सें मेरीचिक निकल जाती थि,,,
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,,, ठीक हैं जौ मर्जी चाहेकर लेना अभि मुझे जानेदो,,
,, कहां जारही होँ,, इतनीरात कों,, आज तौ मेरेपास हि सोएगी,,,
,,, मुझे बहोत जोर कि लगी हैं रोहन जानेदे बेटा,,,
,,, अभि हैं नाता बनाना चाहती हैं तौ बेटा मतबोल,,, एक् पत्नि कि तरह बताओकर जैसे पति कों पुकारते हें,,
,, ठीक हैं जी आप् तोँ जानेदो,, मे भि आता हूं थोड़ी देर मे,,,
,, मे भि चलता हूं मुझे भि बहोत जोर कि लगी हैं,,,
,,, तोँ पहले आप् हि जाओ मे बाद मे चली जाऊंगी,,,
,,, क्यूं मेरेसंग जाने मे लज्जा आँ रही हैं याँ डरलगरहा हैं,,,
,,, नहि ऐसाकुछ नहि हैं अबजबसभी कुछ आपकोमान लिया हैं तौ,, मे तौ आपके नानाजी नानीमा कि वजह सें बोलरही थि अगर उन्होंने देख लिया तोँ क्याँ सोचेंगे,,,
,,, उनकोकुछ पता नहि चलेगा औऱ वैसे भि सुभह मे उनसेबात करने वाला हूं,,
,,, ये क्याँ करलो हम् अपने कपड़े सही करता हैं औऱ जल्दी हि अपनी माँ कि आंखों मे देखते हुएउसे अपनीगोद मे उठा लेता हैं,, सरोजकिस बात कि उम्मीद नहि थि वो जल्दी उसकेगले मे बाहर् डाल देती हैं औऱ उसकी आंखों मे देखते हुए कहती हैं,,
,, ये क्याँ कररहे होँ गिर जाऊंगी बहोत भजन हैं मुझ मे,,,
,, एक् बार मुट्ठी मारने केँ बाद भि तुम को मेरी ताकत कां अंदाजा नहि होगा,,, जीवनभर तुम्हे ऐसे हि संभाल केँ रख सकता हूं,, दरवाजा खोल मे लेकर जाऊंगा तुम को पेशाब करने,,,
,,, इतना प्रेम कब सें हुआ मुझसे,, मेरी उम्र तोँ देखो मे कोई लड़की नहि हूं,,, जौ आप् इतना प्रेम जातारहे होँ,,
,,, बहोत प्रेम करता हूं तुझसे मुझे उम्मीद नहि थि कि तोँ हांकर देगीइस बात केँ लिए,, आज मुझे जीवन कि सारी खुशीमिल गई हैं,, तुम्हें अपनी पत्नि बनाकर मे जीवन कि सारी खुशीतुझ पर्र लुटा दूंगा,,,
,,, मे भि आपसे बहोत प्रेम करती हूं,, बस मेरी इज्जत कि लाजरख लेना,, समाज कि नजरों सें बचा लेना मेरीलाज,, ऐसे लेँ जाओगे आपकी नानीमा नानाजी नें देख लिया तौ,,,
,,, दरवाजा खोल धीरे-धीरे सें,, उन्हें कुछपता नहि चलेगा,,,
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