Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
ये सुनते हि रोहन केँ दिल कि धड़कन बढ़ जाती हैं,,, यही वो चाहता थां उसकेमन कि सारी इच्छाएं पूरी होँ रही थि,, रोहनसोच रहा थां उसकी माँ तौ मुट्ठी मारने केँ बारे मे जानती हि होगी,,, इसलिये आज उसकाकाम हौ जाएगा उसेआज अपने लिंग मे कुछ अधिक हि उत्तेजना हौ रही थि,,, ऐसा आनंद जोँ उसनेकभी महसूस नहि किया थां इस लम्हा जोँ महसूस कररहा थां,, इतनाकह कर सरोजचुप होँ जाती हैं औऱ रोहन,,
रोहन :- माँ अंडरवियर भि निकाल दो क्याँ,,
सरोज :: शायद उसके बेटे कों नां मालूम हौ कि लड़के हाथ सें भि कर लेते हें अपनी संतुष्टि केँ लिए,, जब उसके महीना चलता थां तोँ उसके पिताजी सें येकाम करवाते थें सरोज नें अपने पति कि मुट्ठी कईबार मेरी थि तोँ वो जानती थि कि हाथ सें भि मुट्ठी मारकर संतुष्ट कियाजा सकता हैं लड़कों कों,, लड़के अपनेहाथ सें भि मुट्ठी मारते हें मगर वो ये नहि जानती थि कि उसका बेटा येकाम नहि करता,, औऱ उसे अपने बेटे कां बदन देखकर अंदाजा लग गय़ा थां कि शायद उसका बेटा याँ काम नहि करता होगातभी तौ इतना बेचैन हैं औऱ इतना तगड़ा लिस्ट पुरुष हैं,, इसलिये उसे अपने बेटे कों बहोत तरस आँ रहा थां,, कुछसोच विचार करतेहुए वो मन मे ठान लेती हैं कि अपने बेटे कों आज वो बता देगी कि हाथ सें मुट्ठी मारकर संतुष्टि पाईजा सकती हैं,,
सरोज:- कपड़े नहि निकलना बेटा बसउसे निकालना दोनों चीज सें बाहर् हवा लगेगी तोँ ठीक हौ जाएगा,,,
रोहन :- जोश मे आकरठीक हैं मां मोबाइल नहि काटना,, मोबाइल तौ नहि काटोगी नां,, ???
:- सरोज:- नहि कटूंगी,,, निकाल लिया,,,
,, कुछ उलझन मे सोतेहुए सरोज अपने बेटे सें पूछता हैं,,
रोहन :- हां माँ निकाल लिया बड़ा अच्छा लगरहा हैं,,, मां आप् बहोत अच्छी हौ???
,, अब दर्दकाम हुआ मेरेलाल मुस्कुराते हुए,,
,, हां मां पहले सें थोडा सां काम हैं,, आप् क्याँ करूंये तौ बहोत टाइट हौ रहा हैं,,
,, सरोजकुछ सोचते हुए अपने,, बेटे सें कहती हैं
,, आहिस्ता उसकोसला ल दर्दकम हौ जाएगा,,
,, रोहन जल्दी हि अपने लिंग कों सहलाने लगता हैं औऱ आहे भरतेहुए कहता हैं,,,
रोहन:- होँ मां कितना अच्छा लगरहा हैं आप् कितनी अच्छी उम्र मे पहले क्यूं नहि बताइए चीज.?????
सरोज:-बस बेटा धीरे धीरेऐसे हि करतारे तुम्हे आराममिल जाएग
,,, दोस्तों बड़े एपसोड दिए हें 11 औऱ 12 सवाल पऱ पढ़ो औऱ इंजॉय करो औऱ कमेंट करके बताना कि कथा कैसी हैं
Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
सरोज बेटा हैं इसकेलिए तौ येकर नहि सकतीसच मे डूबी हुईँ क्याँ करें अपने बेटे केँ लिएअगर पति होता तोँ उसकी मुट्ठी मारकर उसे शांतकर देती,, कितना नादान हैं मेरा बेटा ये भि नहि जानता कि मुट्ठी मारकर हि लड़के अपने आप् कों शांतकर लेते हें,, ये भि मुझे हि बताना होगा क्याँ,, येसभी मुझे करवाइए अपने मित्र कि बात क्यूं नहि मान लेता जोँ उसे बताता हैं बार-बार,,,
Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
,, रोहन आहिस्ता अपनेल** कों सहलारहा थां,,, अपनी माँ सें बात करकेउसे बहोत मज़ा आँ रहा थां,, उसनेकभी ड्रीम्स मे भि नहि सोचा थां कि उसेइस तरह कां मज़ा उसकी माँ हि देगी,,,
रोहन:- मां बहोत अच्छा लगरहा हैं,,, काश आप् मुझे पहले हि येबता देती,,,
सरोज:- बेटा येसभी बातें मां,,, सें नहि पूछते,,
रोहन :- मुझे मालूम हैं माँ मगर मे किस मालूम करूं मेरा तोँ कोई हैं भि नहि अपना,,,
सरोज:- अपने दोस्तों सें मालूम कियाकर वो बताएंगे तुझेही,,, औऱ उसेदिन तेरायार बता तोँ रहा थां तेरी,,,
रोहन:- मां उसेदिन कि बातें अपने मोबाइल पर्र सुनली थि नां,,,
सरोज:-हां बहोत हि गंदी बातें करता हैं तेरा मित्र,, मगर जोँ वो बतारहा थां ऐसे हि कर लियाकर बेटा तुम्हे शांति मिल जाएगी,,,
,,, ये सुनकर रोहन अपने लिंग कों औऱ तेज-टेक हिलने लगता हैं,, उसे मालूम थां कि उसकी मां मुट्ठी मारने केँ बारे मे कहरही हैं,, कि तुम् मुट्ठी मार केँ निकाल दियाकर तेरी शांति मिल जाएगी,,, औऱ दूसरी तरफ सरोजसोच रही थि कि,, हे ईश्वर तूने मुझे किसी मोड़ पऱ लाकर खड़ाकर दिया हैं,, अपने हि बेटे कों उसकी ताकतकम करने केँ लिएबोल रही हूं,, मगरकर भि क्याँ सकती हूं जब उसकी ताकत हि उसकीजान कि दुश्मन बनी हुई हैं,,,
रोहन:- औऱ तेजतेज अपने लिंग कों सहलाने लगता हैं,, केसे शांति मिलेगी माँ, क्याँ कर लियाकरो मां आप् बताओ नां वो तौ बहोत गंदा साथी हैं मे उससेबात नहि करना चाहता हमेशा झूठ बोलता हैं,,, आप् बताओगे तौ मे कर लिया करूंगा माँ प्लीज बताओ नाँ,,
,, सरोज कों बहोत शर्माने लगी थि वो कुछ टेंशन मे थि,, अबये बोलते हुए उसकी माँ कों बहोत लज्जा आँ रही थि कि तूँ अपनेहाथ सें हि मुट्ठी मार लियाकर,, औऱ अपना पानी निकाल कर अपने आप् कों शांतकर लियाकर,,,
,, सरोज अपनेसर पऱ हाथ रखकर सोने लगते हें कि अब अपने बेटे कों केसे बताएं,, मगर नं जाने क्यूं उसके अंदरअब इतनी हिम्मत आँ गई थि कि वो अपने बेटे कां दुखदूर करना चाहती थि रात कां माहौल देखकर उसकी लज्जा भि थोड़ी कम होतीजा रही थि,, उसे तौ अबये भि एहसास समाप्त होँ गय़ा थां कि योनि केँ अंदर लिंग जाता तोँ हैं तौ कैसा महसूस होता हैं,, बहुतसाल गुजरगए थें उसनेअब इसबात कां सोचना भि बंदकर दिया थां कि उसेकभी इसतरह कां एहसास होगा,, उसनेकभी ख्वाब मे भि नहि सोचा थां कि अपने बेटे केँ लिए वो इसतरह कि सहायता कर पाएगी,,, सरोजकुछ बोल नहि पारही थि कि तभी रोहन कि करआई हुई आवाज़ आती हैं,,
रोहन:- रोतेहुए कहता हैं,, बताओ नां माँ प्लीज बताओ नाँ क्याँ करूं बहोत दर्द होँ रहा हैं अब इसमें,,, आप् चुप क्यूं होँ मां बोल नां???
,, अपने बेटे कि रोती हुइ आवाज़ सुनकर सरोज कां दिलफंस हि जाता हैं वो किसी भि तरह अपने बेटे कि सहायता करना चाहती थि इसलिये अभि मत करके कहती हैं,,,
सरोज :- रोमत बेटा परेशान मत हौ,, देख तूँ मेरा बहादुर बेटा हैं नाँ मे तुझेही अपनीजान सें भि अधिक चाहती हूं,, तुम्हारी तरफइस तरह दर्द मे तड़पता देखकर मुझे भि दर्द होता हैं मेरेलाल,,, मगर तुँ समझदार हैं एक् माँ अपने बेटे केँ लिएइस काम मे कोई हेल्प नहि कर सकती,,, वो तुझेही तेरे मित्र नें बताया थां नां हास्य कर लियाकर,, वहीकर लें हाथ सें,,
रोहन:- इसलिये तौ मालूम कररहा हूं मां क्याँ करलूं हाथ सें ये तोँ बात हि सकती होँ आप् कौन सां मेरेपास होँ जौ मेरी हेल्प कररही होँ मोबाइल पऱ तोँ बात हि सकती होँ मां फिनकभी नहि पूछूंगा,,,,
,, रोहन रोतेहुए कहता हैं नाँ जाने क्यूं उसके आंसू निकलआए थें वो अब अपनेबदन कि गर्मी कों संभाल नहि पारहा थां,, दर्द सें करतेहुए देखा सरोज कों औऱ भि तकलीफ होती हैं फिन वो हिम्मत करके अपने बेटे सें कहती हैं,,,
सरोज:- बेटा वो। तुँ हाथ सें मुट्ठी मार लिया करना मेरेलाल.
,, एक् मम्मी अपने बेटे कों ये शब्दकभी नहि बोल सकतीमगर सरोज नें हिम्मत करके अपने बेटे कि तकलीफ कम करने केँ लिएबोल दिया थां,, अपनेदिल पर्र हाथ रखकर सरोज कों बहोत हि लज्जा आँ रही थि इसलिये वो मन हि मन ईश्वर सें माफी भि मांगरही थि,, शायद तुझेही वो बहोत बड़ा अनर्थ कररही हैं मगर नं जाने क्यूं उसे अपने बेटे कि तकलीफ देखी नहि जारही थि,,,
,, रोहन अपनी मम्मी केँ मुंह सें ये शब्द सुनकर,, लंबी सिसकी भरते हें औऱ भि तेजतेज अपने लिंग कों हिलाने लगता हैं,,
रोहन:- मां मुझे नहि मालूम माँ मुट्ठी केसे मारी जाती हैं,, मे तोँ बसइसशहर आँ रहा हूं मां शपथ सें मुझे नहि मालूम मां मुट्ठी केसे मारी जाती हैं,,,
,, ये कहकर रोहनफिन सें एक् बार रोने लगता हैं औऱ कर रहती हुइ आवाज़ मे अपनी माँ सें कहता हैं,, जिसे सुनकर सरोज कां दिलफिन सें हिल जाता हैं औऱ अब उसकी आंखों सें आंसू बहने लगते हें,,, अपने बेटे कां दर्द वो सुन भि नहि पारही थि औऱ उसकी आंखें नम होनेलगी,,
,,, आंखें नम होतेहुए वो कुछसोच रही थि,, कितना नादान हैं उसका बेटा उसेये भि नहि मालूम,, नहि तोँ आजकल केँ बच्चे सभी जानते हें,,, शायद मे खुशनसीब हूं जौ मुझे मेराऐसा बेटा मिला,, जौ भि होँ मे अपने बेटे कों तकलीफ मे नहि देख सकती ईश्वर बस जल्द सें मेरे बेटे कि विवाह करदे,,, जिससे उसकीये तकलीफ दूर होँ जाए औऱ मे खुशी-खुशी जीवन बिता सकूं,,,, क्याँ करूं ईश्वर अपने बेटे कों मजबूर होकरये सभी बताना पड़रहा हैं,, नहि तोँ वो डॉक्टर कि दि हुई दवाई खाएगा जिससे उसे कमजोरी औऱ नपुंसकता हौ सकती हैं,, अगरउसे येसभी होँ गय़ा तौ मेरावंश आगे केसे चलेगा उसकी विवाह होगी तोँ बच्चे केसे होंगे केसे मे बेटे केँ पुत्र कां मुंहदेख पाऊंगी,,, फिन वो सहजसत्ता सें अपने बेटे सें,,
सरोज:-रो मत मेरेलाल बस आहिस्ता ऐसे हि करतारहे,, इसी कों हास्य करने केँ लिए कहते हें बेटा तुम को शांति मिल जाएगी कुछदेर मे,,,,
,,, देखते हि देखे बहुत वक़्त बीत गय़ा थां औऱ सुभह केँ 6:00 बजने वाले थें उन दोनों कों अंदाजा भि नहि थां कि वो रात केँ 12:00 सें बातकर रहे हें औऱ सुभह केँ 6:00 बजने वाले हें,, देहात मे सब जल्दउठ जाते हें उजाला होते हि रोहन कि नई औऱ नानाजी कि आंखखुल जाती हैं,,, मगर एक् मम्मी अपने बेटे कि तकलीफ कम करने केँ लिएइस बात कां ध्यान नहि देती कि वो आज पूरीरात नहि सोई हैं,, लगातार अपने लिंग कों रगड़ते हुए रोहन कों बहुत वक्त होँ गय़ा थां अबउसे उसकी नसों मे दर्द महसूस होनेलगा थां मगर अभि भि उसका वीर्य नहि निकला थां,, क्योंकि वो एक् ताकतवर पुरुष थां नां जाने क्यूं उसेऊपर वाले नें इतनी शक्ति दि थि कि इतनीदेर बात करने कि औऱ सहलाने केँ बाद भि उसके लिंग सें वीर्य नहि निकला थां,,, फिन वो रोटी औऱ कर रहतेहुए अपनी माँ सें कहता हैं,,,
रोहन:-कुछ नहि हौ रहा माँ बहोत दर्द होँ रहा हैं मे क्याँ करूंकुछ नहि होँ रहा,,,,
सरोज :- कुछदेर औऱ मेरेलाल हौ जाएगा कुछदेर औऱ बस सावरकर हौ जाएगा,,,,
रोहन:- उदास होकर अपनी माँ सें कहता हैं,,, ठीक हैं मां आप् मोबाइल रखदो मे रखता हूं मोबाइल,, अब औऱ दर्द बर्दाश्त नहि होता,,, मुझेये सभी करना नहि आता,, मे तोँ जवाब केँ बारे मे सोचता हूं आपका चेहरा यादआता हैं तौ इतनी,, ख़्वाहिश होती हैं कि ये बहोत टाइट होने लगता हैं,,, अब इसमें बहोत दर्द हौ रहा हैं माँ बहोत लाल होँ गय़ा हैं मे ये दर्द बर्दाश्त नहि करपारहा,, अब मुझे औऱ हाथ सें नहि हौ रहा,,
,, सरोजअब मन मे सोचने लगी थि कि अब वो अपने बेटे केँ लिए क्याँ करें,, मे सोचरही थि कि शायद उसका बेटा तेज तेजी सें अपने लिंग कों रगड़रहा हैं जिसकी वजह सें दर्द होनेलगा हैं,, रोहन नें मोबाइल काट दिया थां,,, उजाला हौ चुका थां मगरजब रोहन कि नानीमा नें सरोज कों आवाज़ दि तबउसे होशआया कि दिन निकल गय़ा हैं,,,
नानीमा:- सरोज बेटा दिन निकल गय़ा हैं उठजा,,,
सरोज:-हां मां आँ रही होँ,,,,
,, सरोजमन मे सोचरही थि,, कितनी तकलीफ मे हैं मेरा बेटा फिन भि मोबाइल काट दियामगर,, उसका वीर्य निकल क्यूं नहि इतनीदेर तक तौ इसके बापू तोँ 5 मिनट भि नहि रुकते थें हाथ सें मे झाड़ देती थि,, कईबार मैंने उनकी मुट्ठी मारी हैं वो तोँ एकदमझड़ जाते थें,, इतनेसमय तक नहि निकला कहीं मेरे बेटे केँ अंदरकुछ कमी तोँ नहि हैं,,, येसभी सोकर उसकी आंखों सें आंसू औऱ निकल जाते हें,,
,, आज सरोज पूरीरात सो भि नहि पाई थि वो किचन मे जाती हैं औऱ ब्रेकफास्ट बनाने लगती हैं,, मगर उसकेमन मे उसके बेटे कि हरआहा गूंजरही थि कितने दर्द मे हैं उसका बेटा यहीसोच रही थि वो हैं,,
,, मनकाम मे नहि थां मगरहाथ पऱ मात्र कामकर रहे थें मैन मात्र अपने बेटे केँ पास हि थां,, फिन वो सोचती हैं कि क्यूं नाँ इस बारे मे किसी सें बातकर लीजाए,, होँ सकता हैं उसके बेटे कों कोई दिक्कत हौ वो समझादे,,, याँ कोई उपायबता दे इसलिये वो घऱ कां साराकाम करती हैं औऱ,, पास मे हि बढ़ेहुए, पशुओं कों भि चार डालकर,, जिसकी लड़की कों एक् लड़के नें छेड़ा थां,, देहात कि इस स्त्री केँ घऱ जाती हैं,,, उसके दिमाग़ मे सिर्फ उसके बेटे कि समस्या हि चलरही थि इसलिये वो उसे स्त्री सें मिलती हैं औऱ,,
देहात कि स्त्री:- अरे सरोज तुम् आओ बैठो,,
सरोज:- दिदी मे ये पूछने आई थि कि आजकल केँ लड़के तौ हाथ सें भि कर लेते हें,,, फिन अपनीआग बुझाने केँ लिए हैं ये गंदी निगाह क्यूं रखते हें,,
देहात कि औरत:-आज तौ कैसी बातें कररही हैं पहले तौ कभी नहि करती थि ये बातें,, औऱ मे कुछ बोलती थि तब चीड़ जाती थि,,
नहि दिदी मे तौ येसोच रही थि कि आपकी लड़की कों उसे लड़के नें छेड़ा,,
देहात कि औरत:-उसे कमीन कि यादमत दिला उसका तौ सर काटने कां मनकररहा हैं मेरा,,
सरोज:- अच्छा बताओ नाँ दिदी आप् भि हाथ सें कर देती हौ क्याँ अपने पति कां,,,
देहात कि औरत सरोज केँ चेहरे कों गौर सें देखते हुए,,
देहात कि स्त्री:- हांजब मेरा महीना चलता हैं तब करवाते हें तोँ कर देती हौ,,, मगर तूँ येसभी क्यूं पूछरही हैं तूनेकभी अपने पति कि मुट्ठी नहि मारी थि क्याँ,,
सरोज :- हां मुझे भि करवाते थें जब मेरा महीना चलता थां,,,
देहात कि औरत:- तौ फिन मुझसे क्यूं पूछरही हैं जबसभी जानती हैं,,
,, सरोजकुछ शर्मा जाती हैं उसे लज्जा भि आँ रही थि येसभी बातें करतेहुए क्योंकि उसने पहलेकभी इसतरह कि बातें देहात मे नहि कि थि किसी भि औरत केँ संग,,,
सरोज:- नहि दिदी बस मे तोँ ऐसे हि मालूम कररही थि,, अच्छा आपके पति कितनी देर मे झड़ जाते हें मुट्ठी मारने सें,,
देहात कि स्त्री सरोज केँ चेहरे कों फिन ध्यान सें देखते हुए मुस्कुरा कर कहती हैं,,
देहात कि स्त्री:- अरेअब तौ उम्र आँ गई हैं जल्द हि झड़ जाते हें,, मगरजब पहले जवान थें नई-नई विवाह हुईँ थि तौ बहुतसमय लगता थां उनको झाड़ने मे,,
सरोज:- दो-तीन घंटे याँ 5 घंटे???
देहात कि औरत:--अरे नहि इतनी ताकत कहां हैं,, ऐसा पुरुष तौ भाग्यशाली होता हैं जिसे इतनीदेर टिकने कां समय मिले,,
सरोज:-ऐसे भि पुरुष होते हें जिनको इतना वक्त लगता हैं,,,
देहात कि औरत:-हां होते हें जिनको इतना भि समय लगता हैं वो बहोत हि ताकतवर होते हें अच्छा तौ येबता तेरा बेटा घऱ पऱ हि हैं याँ चला गय़ा,,
सरोज :- वो तोँ चला गय़ा दिदी अब दीपावली पऱ हि आएगाअगर कोई उसकेलिए नाता होँ तोँ मुझे बताना मे बहोत चिंतित हूं उसकी विवाह कों लेकर,,,
देहात कि स्त्री:- देख मे आज हि इसके पिताजी सें बात करती हूं अगरकोई लड़की होगी तौ बताएंगे,, अब तोँ तेरा बेटा दीपावली पर्र हि आएगा नां अगरकोई लड़की होगी तौ उसे बुला लेना मे बता दूंगी,,, मगरआज तोँ इसतरह कि बातें क्यूं पूछरही हैं,,
सरोज :- कुछ नहि दिदी बसऐसे हि मालूम कररही थि,, मैंने इसके पिताजी सें सुना थां कि,, लड़के मुट्ठी मारकर अपनीआंख शांतकर लेते हें तोँ फिन देहात कि लड़कियों कों पकड़ने कि क्याँ जरूरत हैं इसलिये येपूछ रही थि,,
देहात कि स्त्री:- चलठीक हैं रहनेदे उसे कमीन कि यादमत दिल नहि तोँ उसकासर काटने कां मन करता हैं मेरा,,, अच्छा तूँ गरमचाय लगी क्याँ??
सरोज:- नहि दिदी मे चलती हूं आप् घऱ कां कम कीजिए मुझे भि घऱ कां काम """
,, कुछ औऱ बातें करकर सरोजघऱ कों चली जाती हैं औऱ मन मे विचार करती हैं कि,, उसका बेटा बाकी सबसेअलग हैं कि ईश्वर नें उसे इतनी शक्ति दि हैं औऱ उसकेमन कि तकलीफ़ कम हौ गई थि,, जब उसनेऔरत सें सुना कि ऐसे भि पुरुष होते हें जिनको इतनासमय लगता हैं हौ सकता हैं उनमें सें हि उसका बेटा होँ,,, बहोत भाग्यशाली हैं जिसने येऐसे मर्द कों जन्म दिया,, वो मन हि मनखुश होती हैं फिन एक् बारसोच कर अपनेमन मे चिंता करने लगती हैं कि अगर उसके बेटे कि गर्मी शांत नहि हुई तोँ कहीं वो दवाई नाँ खानेलगे डॉक्टर कि दि हुई,, क्योंकि जोँ ऊपर वाले नें उसे शक्ति दि हैं अगर वो दवाई खाएगा तोँ उसकाम हौ जाएगी,,, इसलिये वो कुछदेर चिंता करने केँ बादघऱ कां काम निपटाती हैं औऱ फिन सें रोहन कों मोबाइल लगाती हैं,,,
,, रोहनइस वक़्त कंपनी मे कामकर रहा थां वो मोबाइल नहि उठाता औऱ वो थोडा क्रोध भि थां,, रोहन नें मन मे सोच लिया थां कि अगर माँ कां कॉलआई उठाऊंगा तौ फिन सें वही ख़्वाहिश होगी इसलिये वो मोबाइल नहि उठाता,,, अब वो मन हि मन अपनी मां केँ मोबाइल कों देखकर विचार कररहा थां कि अब मे बात नहि करूंगा कभी भि,, बसजबघऱ जाऊंगा तभीबात किया करूंगा माँ सें नहि तौ कुछ नां कुछ मुझसे हि अनर्थ होँ जाएगा,, जोकिइस समाज केँ लिए बहोत हि गलत हैं अपनी माँ पऱ ऐसी निगाह रखना मेरेलिए सही नहि हैं,,, आहिस्ता वक्त बीतता रहता हैं औऱ सरोजहर रोज रोहन कों मोबाइल करती हैं मगर रोहन मोबाइल नहि उठाता,,, जब एक् हफ्ता बीत जाता हैं तोँ वो चिंता करने लगती हैं कि उसका बेटा मोबाइल क्यूं नहि उठारहा,,, एक् सप्ताह बीतने केँ बाद सरोज कंपनी केँ हि नंबर पर्र कॉलआई करती हैं औऱ,, रिसेप्शन पऱ कंपनी कि एक् लड़की मोबाइल उठाती हैं,,
कंपनी कि लड़की:- हेलोजी बोलिए कि सें बात करनी हैं आपको,,
सरोज:-जी मुझे अपने बेटे रोहन सें बात करनी हैं वो कंपनी मे हैं मुझे उससे बहोत जरूरी बात करनी हैं???
कंपनी कि लड़की:-जी नमस्ते आंटीजी मे अभि आपकीबात करती हूं रोहनसभी कंपनी मे हि हैं,,,
,, सरोज केँ दिल कों थोड़ी तसल्ली मिलती हैं औऱ वो खुश होकर लड़की कों कहती हैं
सरोज:-जी बहोत-बहोत शुक्रिया आपका मेरे बेटे सें बातकर दीजिए,,,
,, कुछ वक़्त बाद वो लड़की रोहन कों बुला देती हैं औऱ कंपनी केँ नंबर पऱ बात करने केँ लिए कहती हैं,,,
रोहन:- नमस्कार मां बोल क्याँ बात हैं???
सरोज: बेटा तोँ ठीक तौ हैं नाँ मोबाइल क्यूं नहि उठारहा हैं एक् हफ्ता हौ गय़ा मुझे कितनी चिंता होँ रही हैं तेरी,,
रोहन:- मे ठीक हूं मां चिंता नाँ करें आप् आपको चिंता करने कि जरूरत नहि हैं जौ भि समस्या होगी मे सुलझा लूंगा,,
सरोज: तुँ बार-बार ऐसी बातें क्यूं करता हैं मेरेलाल???
रोहन:- आप् मेरी माँ हौ आपसे तौ माँ कि तरह हि बात करूंगा,, ठीक हैं माँ मे रखता हूं
सरोज:- रुको बेटा मे तुम्हें रात कों फोन करूंगी एक् बार मोबाइल उठा लेना जरूर,,
रोहन:-फिन सें मुझे दर्द मे तड़पते हुए देख्ना चाहती हौ क्याँ???
सरोज:- नहि बेटा ऐसीबात नहि हैं मुझे तुझसे बात करनी हैं बस इसलिये मेरा बिलाल हैं नाँ तोँ तेरी चिंता तोँ होती हैं मेरे बच्चे,,,
रोहन :-- तोँ फिन एक् हि शर्त पऱ बात करूंगा,,, अगर आप् मेरीबात मानोगी तोँ,,
सरोज अपनेमन मे कुछदेर विचार करतेहुए,,
सरोज :- हांबोल मेरे बच्चे क्याँ बात हैं तेरी माँ तेरीबात मानेगी,,,
,, पास मे हि कंपनी कां स्टाफ खड़ा थां औऱ वो रिसेप्शन वाली लड़की भि खड़ी हुई थि इसलिये रोहन अपनी माँ कों कहता हैं,,
रोहन:-ठीक हैं आप् मेरे नंबर पर्र मोबाइल करो मे तब बताऊंगा,,,
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