Meri mummy | incest indian sex story – New Episode
Update.
,, अपनी माँ कि झुकी हुइ नजरे देखकर,, रोहनकुछ समझने कि कोशिश करता हैं औऱ फिन उसके चेहरे कों ऊपर उठकर आंखों मे देखते हुए,,
Rohan --: कुछदेर अपनी मां कि आंखों मे देखते हुए,,, बड़े हि प्रेम सें सहमेहुए लफ्जों मे एक् बात पूछूं मां सच-सच बताओ,,,
सरोज: क्याँ???
R: आपको कैसी लगती हैं ये पहनी हुइ नथनी,,,
,,, सरोजकुछ देर खामोश होकर अपनी बेटी कि निगाहों,
सरोज, अच्छी लगती हैं अब तोँ जा यहां सें नहि तोँ तेरी नानीमा नानाजी देख लेंगे,,,
,,, रोहनकुछ देर अपनी मां कों देखते हुए,, सर नीचे झुकाकर दुःखी चेहरा बनाकर जाने लगता हैं,,, सरोज कों इसबात कां एहसास होता हैं कि उसका बेटा किसीबात पर्र दुःखी हैं,, उसे थोडा बुरा लगता हैं,, औऱ वो अपने बेटे कि मनोदशा समझकर कुछ सोचते हुए,, रोहन कों नां चाहते हुए भि आवाज़ देकर धीरे-धीरे सें,,
सरोज,, क्याँ हुआ चेहरा क्यूं बना लिया आपका दुःखी क्यूं????
रोहन अपनी मम्मी कों देखते हुए,, कुछ नहि बसऐसे हि,,,
,, ये कहकर रोहन वहां सें चला जाता हैं औऱ,, उसकेबाद कुछ नहि होता अगलेदिन। सुभह होते हि रोहन अपनी पैकिंग करने लगता हैं,, जिसे देखकर उसकी नानाजी नानीमा कहते हें,,
Nani -: अरे बेटा तूँ तोँ दो-तीन दिन रुकने वाला थां नाँ अभि ये कहेंगे कि तैयारी कररहा हैं?
Rohan :- कुछ नहि नईबसअब मन नहि हैं मोबाइल आया हैं कंपनी सें मुझे जानां हि होगा"""
Nana ji:- मगर बेटा तूने तौ दो-तीन दिन कि छुट्टी ली थि नां,,
Rohan :- हां नानाजी जी छुट्टी ली थि मगर मोबाइल आया हैं मुझे जानां हि होगा वहां पऱ बहोत कम हैं,,
,, येसभी बातें रोहन कि मां भि सुनरही थि,, अचानक हुए रोहन केँ बदलाव मे उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि उसके बेटे केँ मन मे अब क्याँ चलरहा हैं,, वो तोँ स्वयं हि मुझसे माफी मांगरहा थां अब हौ सकता हैं मुझेकुछ गलती हुई होँ,, मगर मे तौ ऐसाकुछ भि नहि कहाउसे औऱ नां हि उसको डाटाफिन क्यूं रोहन इतनी जल्दजा रहा हैं,,, उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वो अचानक क्यूं जारहा हैं,, रोहन अपनी नानाजी नानीमा केँ पास हि अपनेबैग मे कुछ सामान रखरहा थां जिसे सरोज बड़ेगौर सें देखरही थि,,,
,, परंतु रोहन कां अपनी माँ पऱ कोई ध्यान नहि थां वो सामान पैककर रहा थां तभी रोहन कि नानीमा नें सरोज सें कहा,,
नानीमा जी,, अरे सरोज बेटा क्याँ हुआ तूनेकुछ कहा हैं क्याँ इसको इतनी जल्दजा रहा हैं कुछबात भि नहि रहा,,
,,, सरोज,, नहि माँ मैंने कुछ नहि कहाअब क्याँ पता इसकेमन कि बातकम होगा इसलिये जारहा हैं,, वैसे भि ये ज़्यादा दिन नहि रुकता घऱ,,,
,, येसभी बातें चल हि रही थि कि देहात मे हंगामा सराव होने कि आवाज़ आती हैं कुछलोग चिल्ला चिल्ला कर गालियां देरहे थें,,
देहात कां शख्स :- पकड़ो मारोइस भोसड़ी वाले कों इसकी हिम्मत केसे हुइ येसभी करने कि सेल कों जिंदा नहि छोड़ना इसको,,,
देहात कि एक् स्त्री:- इतनीआग लगी हैं अपनी माँ बेहन कों जाकर पकड़ लेँ हरामजादे कुत्ते तूने मेरी बेटी कों हाथ केसे लगाया,,, तुझेही मे जिंदा नहि छोडूंगी
,, येसभी सुनकर सबघऱ सें बाहर् आते हें तोँ देखते हें कि एक् स्त्री हाथ मे डरतीलिए एक् लड़के कां गिरवान पड़कर उसे करने केँ लिए दौड़रही हैं,,, कुछ लोगों नें स्त्री कां हाथ पकड़ा हुआ थां नहि तोँ वो उसे लड़के पर्र वार करके उसकी गर्दन भि काट सकती थि,, औरतकुछ अधिक हि गुस्से मे दिखाई देरही थि,, औरत कि उम्र रोहन कि माँ सें अधिक हि होगी,, तभी एक् बुजुर्ग स्त्री आती हैं औऱ,,
बुजुर्ग स्त्री:- अरे क्याँ हुआ बेटी क्यूं माररही हैं ऐसाकुछ बताओगे भि याँ इसकोमार हि डालोगे,,
स्त्री:- देखो चाचा इसने मेरी बेटी केँ संग जबरदस्ती कि अभि इसकी उम्र हि क्याँ हैं इतनीआग लगी हैं इसको देहात मे येसभी करता हैं,, सारादिन आवाज़ गिरिडीह करता हैं दूसरे केँ बच्चों कों देख केसे बाहर् रहकरकाम कररहे हें,, अरे बेचारी इस रोहन कों देख कितनी उम्र आँ गई हैं विवाह भि नहि कि कोई चर्चा सुना हैं क्याँ इसका देहात मे,, कितना अच्छा हैं शहर मे काम करता हैं अपनाघऱ चलना हैं,,
,, औरत कि बात सुनकर सरोज अपने आप् पर्र औऱ अपने बेटे पर्र गर्भ महसूस करती हैं,,, उसेआज अपने बेटे कि तारीफ पहलीबार सुनी थि लोगदिल मे भले हि नफरत करते होँ मगरकाम केँ प्रति रोहन बहोत वफादार थां औऱ उसनेआज तक कोई हरकतऐसी नहि कि थि कि उसकी मम्मी कि औऱ उसकेघऱ कि बदनामी होँ,, आप् भले हि शराबी थां आरसी करता थां मगर बेटा इस मामले मे नंबरवन थां वो अपनी माँ कि इज्जत केँ लिए औऱ अपनेघऱ कि इज्जत केँ लिए किसी पर्र गंदीनजर नहि रखता थां,,, स्त्री कों सब पकड़कर समझते हें औऱ उसे हिदायत देते हें कि इसकोसजा पंचायत देगीइस पंचायत मे लेकरचलो,, औरत कां क्रोध थोडा शांत होता हैं लड़के कों लेकर पंचायत मे जाते हें उसके मम्मी-बाप भि उसकेसंग थें जोँ बहुत गुस्से मे दिखाई देरहे थें,, पंचायत मे जाकर देहात केँ सरपंच इसबात कां फैसला करते हें औऱ उसे लड़के कों लड़की केँ पैरों मे पड़कर हाथ जोड़कर माफी मांगने केँ लिए कहते हें,,, तभी वो लड़की गुस्से मे आकरउसे दो चप्पल मरती हैं औऱ उसको गंदी-गंदी गाली देकर उसके मुंह पर्र थूककर मित्र चप्पल औऱ मरती हैं औऱ,, अपनी मम्मी केँ पासचली जाती हैं,,,
,,, पंचायत मे उसे लड़के केँ मम्मी-बाप कों औऱ उसको सख्त हिदायत दि थि कि यदि आइंदा इसनेऐसा किया तोँ तुम् लोगों कों देहात सें बाहर् निकाल दिया जाएगा,, याँ तोँ इसे कहीं बाहर् काम करने केँ लिएभेज दो याँ अपने लड़के कों समझकर रखोइस तरह कि हरकत देहात मे बर्दाश्त नहि होगी,,, लड़के केँ मम्मी-बाप पंचायत सें हाथ जोड़कर माफी मांगते हें औऱ अपने बेटे कों पीटते हुएघऱ लेँ जाते हें,, लड़की कि माँ कों थोडा चैन मिलता हैं औऱ उसका क्रोध शांत होता हैं,, सब अपने-अपने घऱचले जाते हें,, रोहन जोँ शहर जाने कि तैयारी कररहा थां वो इस हादसे केँ बाद,, शहंशाह जाता हैं कि ये क्याँ हौ रहा हैं देहात मे,, कुछसोच रहा थां कि तभीउसे लड़की कि माँ उनकेघऱ सें गुजरती हैं जिसेदेख सरोज आवाज़ देती हैं,,
सरोज:- दिदी दिदी,,,
,, सरोज कि बात सुनकर वो औरत उसको देखकर अपनी बेटी सें कहती हैं तुम् घऱचलो नाँ आते होँ,,,
औरत:-हां सरोजबोल क्याँ हुआ,,,
सरोज:- क्याँ हुआ दिदी इस लड़के नें आपकी बेटी कों छेड़ा क्याँ,,
स्त्री:- हां तूने सुना नहि इसने मेरी बेटी कों अकेले जातेहुए हाथ पकड़ा औऱ गंदी-गंदी बातें कररहा थां उससे,,, वो तोँ अच्छा हूं मेरी बेटी नें चिल्ला दिया नहि तोँ क****पता नहि क्याँ कर देता,,, मुझे तौ समझ नहि आता सरोज आजकल केँ चूहा सें बच्चों कों होँ क्याँ गय़ा हैं,, औऱ एक् तेरा बेटा हैं बेचारा कितनी उम्र आँ गई हैं आज तक कोईबात सुनी हैं,, तुँ तौ बहोत क़िस्मत वाली हैं तुम्हारी तरफ इतना अच्छा बेटा मिल पातीभले हि तेरा शराबी थां मगर बेटा हीरा हैं हीरा,,
सरोज:- दिदी देहात मे रहते हें तौ ऐसा हि माहौल बनाकर रखते हें येलोग इसलिये तोँ लड़कियों कां बाहर् निकलना दुश्वार हैं,, आप् चिंता मत कीजिए दिदी अबये आइंदा दोबारा ऐसी हरकत नहि करेगा,,,
औरत:-अरे हां मैंने सुना हैं तेरे बेटे कों देखने वालेआए थें क्याँ हुआबात पक्की हुइ क्याँ,,
,, ये सुनते हि सरोज कां दिल सें जाता हैं उसे अपने बेटे क्यूं लेकरफिन सें चिंता होने लगती हैं,, औऱ वो दुःखी मन सें स्त्री सें कहती हैं,,
सरोज:- नहि दिदी नाँ जानेकब मेरे बेटे कि क़िस्मत सवेरे कि,, आपनेसही कहा मेरा बेटा तौ हीरा हैं बहोत मेहनत करता हैं हम् लोगों केँ लिए,,, अभि कल हि आया थां औऱ आजजारहा हैं कंपनी मे,, लड़की वालों नें मनाकर दिया हैं,,
औरत सरोज कों दुखी होते देखा,, अरे कोई नहि चिंता मतकर होँ जाएगी तेरे बेटे कि विवाह अब इतने अच्छे लड़के कों कोई नां कोई लड़की तौ मिल हि जाएगी,,, मगर मे तौ डांट देता हूं तेरे बेटे कि,, कि अपनी जवानी कों केसे संभाल केँ रखना हैं बेचारा केसे बर्दाश्त करता होगाइस उम्र तक औऱ आजकल केँ लिए चूहे सें लड़के देखा क्याँ हालकर रहे हें,,, तेरे लड़के केँ जैसा ताकतवर तुँ देहात मे कोई भि नहि हैं,, बस बेचारा थोडा समल हैं तोँ क्याँ हुआ,, तुझ पऱ हि गय़ा हैं,,
सरोज:-हां दिदी अबऊपर वाले नें ऐसारंग दिया हैं तोँ क्याँ कर सकते हें,, अगर आपकीनजर मे कोई लड़की होँ तोँ बताना दिदी,,
औरत:-ठीक हैं सरोज मे बात करती हूं इसके पिताजी सें,, अगरकोई अच्छी लड़की होगी तौ मे जरूर बताऊंगी,,, अच्छा मे चलती हूं,,
,, औरत केँ मुंह सें अपने बेटे कि तारीफ सुनकर,, सरोज उसकी बातों पर्र ध्यान देती हैं कि केसे अपनी जवानी कों संभाल रहा होगाये बात उसकेमन मे घूमरही थि,, औऱ वो स्वयं भि सोचरही थि कि इतनेदिन तक उसका बेटा अपनी गर्मी केसे बर्दाश्त कररहा होगा,, कितना अच्छा हैं उसका बेटा कि किसी सें कुछ कहता भि नहि औऱ नाँ हि उसनेआज तक कोईऐसी हरकत कि कि उसकी माँ कि बदनामी होँ,,, उसे अपने बेटे पर्र ये सोचते हुए बहोत प्रेम आता हैं फिन उसकेमन मे आता हैं कि वो किसबात कों लेकर नाराज हैं जोँ इतनी जल्दजा रहा हैं,,, फिनकुछ सोचते हुए वो अपने बेटे कों देखते हें जोँ उसे दिखाई नहि देता उसके मां पिताजी बाहर् हि बैठे थें,, सरोजसमझ गई कि उसका बेटा अंदर कमरे मे हैं,, सरोज जल्दी हि कमरे मे जाती हैं तौ देखी हैं उसका बेटा बेड पर्र बैठाहुआ कुछसोच रहा हैं,,
सरोज :- कुछदेर सोते हें,, क्याँ हुआ नाराज हैं अपनी माँ सें,,
रोहन:- मे क्यूं नाराज होनेलगा आपसे,,
सरोज:- तौ फिनये जल्दबाजी मे जानां,, तुँ तोँ तीनदिन कि छुट्टी पर्र आया थां नां,,
रोहन:- नहि कंपनी सें मोबाइल आया हैं मुझे जानां होगा,,
सरोज:- अपने बेटे कां हाथ पकड़कर उसकेपास आतेहुए,, सच-सचबता क्याँ बात हैं,, अपनी विवाह कों लेकर नाराज हैं,, देख मैंने बातकर ली हैं कहीं नाँ कहीं लड़की पसन्द आँ जाएगी,, औऱ मे तेरी विवाह बहोत खुशी सें करूंगी,,
रोहन:- नहि मन आपको परेशान होने कि जरूरत नहि हैं,, जब क़िस्मत मे होगा होँ जाएगा आप् मुझे ब्रेकफास्ट दो मे चलता हूं,,
सरोज:-मगर अभि ब्रेकफास्ट तौ बना नहि हैं इस लड़ाई झगड़े मे मे तौ भूल हि गई ब्रेकफास्ट बनाना,,,
रोहन:-कोई बात नहि ठीक हैं मे चलता हूं रास्ते मे ब्रेकफास्ट कर लूंगा,,,
,, ये क्याँ कर रोहन अपनी नानाजी नानीमा जी केँ पांव छूता हैं औऱ अपनी मां केँ भि पेर छूकर जाने लगता हैं,, जैसे हि घऱ सें बाहर् निकलता हैं सरोजतेज कदमों सें चलती हुई आती हैं औऱ एक् बार अपने बेटे कां हाथ पकड़कर अपनी माँ पिताजी सें नजरेबचा कर,,
सरोज:- बेटा तुम को मेरीशपथ बताना क्याँ बात हैं ऐसा क्यूं दुःखी होकरजा रहा हैं,,,
,, अपनी माँ कि शपथ कों सोतेहुए रोहनकुछ देरउसे देखकर,, सोचने लगता हैं फिन वो कुछदेर सोचने केँ बाद अपनी माँ कि आंखों मे देखते हुए कहता हैं,,,
रोहन:- आपने मुझेकल वादा किया थां कि आप् मुझे अकेले मे जैसे पिताजी जी कों बुलाती थि वैसे पुकार होगी,,
,, रोहन केँ मुंह सें येबात सुनकर सरोजकुछ सोचने लगती हैं औऱ उसेयाद आता हैं कि उसनेउसे टाइमये बोल दिया थां,, क्योंकि वो रोहन सें जल्द हि पीछा छुड़ाना चाहती थि,, उसे अपनी गलती कां एहसास होता हैं कि उसने जोँ बोला थां उसका बेटा उसे अपनेदिल मे रखेहुए हें,,, रोहन कि बात कां उसकेपास कोई जवाब नहि होता वो बस सोचते रहती हैं औऱ रोशन कों देखती रहती हैं,, रोहन इससेआगे कुछ नहि कहता औऱ अपनाबैग उठाकर निकल जाता हैं,, रोहनघऱ सें निकल चुका थां मगर सरोज कों अभि भि समझ नहि आँ रहा थां वो क्याँ करें,,, कुछ देर सोचने केँ बाद रोहन कि नानीमा जी कि आवाज़ आती हैं औऱ आवाज़ सुनकर सरोज जैसेहोश मे आती हैं तोँ वो देखी हैं उसका बेटा घऱ सें जा चुका हैं वो उसे दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहि देता,,, ये देखकर सरोज कां भि मन दुःखी हौ जाता हैं औऱ उसकी आंखों मे आंसू आँ जाते हें,,
,, सरोज कों बहोत बुरा लगता हैं पहचान कर भि उसको अपने बेटे कि खुशी नहि देपारही थि आखिर एक् माँ होने केँ नाते वो इससे ज़्यादा कर भि क्याँ सकती थि,, येसभी वो सोचरही थि जौ उसका बेटा चाहता हैं एक् माँ वो अपने बेटे कों नहि दे सकती,, आखिर केसे वो अपने बेटे कि तकलीफ दूर करें उसके बेटे केँ लिए विवाह करना एक् जरूरत बन गई हैं औऱ हर आदमी कि इच्छाएं होती हैं,, वो तोँ सोचरही थि कि उसका बेटा बहोत हि समझदार औऱ सहनशीलता रखने वाला लड़का हैं,, उसे अपने बेटे पऱ गर्व भि महसूस होता हैं औऱ दुख भि,, कि आखिर वो अपने बेटे केँ लिए क्याँ करें,, फिन वो मन हि मन सोचती हैं जोँ भि होँ मे अपने बेटे कि विवाह जल्द सें जल्द करवाऊंगी,, रोहनअब जा चुका थां सरोज भि घऱ केँ काम मे लग जाती हैं मगर उसकेमन मे उसके बेटे कि चिंता हि दौड़रही थि,,, साम होती हैं मगर रोहन कां कोई मोबाइल नहि आता सरोजजी अपने बेटे कों मोबाइल करती हैं,, परंतु रोहन मोबाइल नहि उठाता,,, बहुतरात तक सरोज अपने बेटे कों कईबार फोनकर लेती हैं मगर रोहन मोबाइल नहि उठाता,,, सरोज कों चिंता होने लगती हैं मगरइस चिंता केँ आगोश मे वो नींद मे कबचली जाती हैं पता नहि चलता,,, अगली सुभह होती हैं सुभह होते हि सरोजफिन सें अपने बेटे कों मोबाइल लगाती हैं मगर रोहनफिन भि मोबाइल नहि उठाता,,, सरोज एक् बारफिन सें ट्राई करती हैं इसबार रोहन मोबाइल उठा लेता हैं,,
रोहन:-हां कहो क्याँ हुआ,,,
सरोज:- बेटा मोबाइल क्यूं नहि उठारहा,, तुझेही पता हैं मे कितनी परेशान हूं,, एक् बारबात तोँ सकता थां कि सही सलामत पहुंच गय़ा हैं,,
रोहन:- मे ठीक हूं माँ कंपनी जारहा हूं रखता हूं मोबाइल,,,
,, ये कहकर रोहन मोबाइल रख देता हैं औऱ उसकेबाद सरोज एक् बारफिन ट्राई करती हैं मगर रोहनइस बार मोबाइल नहि उठाता,, सरोज दुःखी मन सें काम मे लग जाती हैं,,, वो मन हि मन सोचती हैं कि अगर वो रोहन सें उसके बापू कि तरहबात करेगी तोँ शायद वो मानजाए,, मगरये सभी इतना आसान नहि थां एक् मम्मी अपने बेटे कों पति कि तरह केसे पुकार सकती हैं,, 26 साल सें तौ उसके बेटे कों वो इसीतरह पुकारती थि,, मगरअब अचानक एक् पति कि तरह दर्जा देना बहोत हि मुश्किल थां,,, सरोज केँ लिएये आसान नहि थां,,, मन हि मन हैं अपने आप् सें लड़रही थि औऱ फिनकुछ सोचते हुए मुस्कुराती हैं,,
सरोजमन मे विचार करती,,, क्याँ होँ गय़ा अगर उसका बेटा इसबात सें खुश हैं तौ मे उसे अपने पति कि तरह हि पुकारूंगी उसकानाम लेकर नहि बोलूंगी,,, अभि भि गुस्से मे हैं मोबाइल नहि उठाएगी रात कों बात करती हूं,,,,
,, दोस्तों अभि केँ लिएयही एपसोड दिया हैं आज कोशिश करूंगा एक् औऱ भाग देने,, भइयासब सें माफी चाहता हूं मे मेडिकल लाइन कां व्यक्ति हूं इसलिये वक्त नहि मिलता मगर जल्द हि जल्द एपसोड दूंगा आज एक् औऱ एपसोड देने कि कोशिश करता हूं,, जिसमें आपको खुशी आएगा,,
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भइया लोगों कमेंट करके बताना कहानी कैसीलग रही हैं देर सें एपसोड देने केँ लिए माफी चाहता हूं,, मगरअगर किस्सा शांतमन सें लिखीजाए तौ अच्छी हौ सकती हैं,, जल्दबाजी मे लिखी हुई किस्सा मे आनंद नहि आता,,
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,, जैसे तैसे करकेदिन गुजरता हैं औऱ साम कां टाइम होता हैं,, रोहन ड्यूटी पऱ थां,, साम हौ रही थि,, सरोज बेचैन थि अपने बेटे सें बात करने केँ लिए वो किसी भि तरह अपने बेटे कों मनाना चाहती थि,,, औरत कि बात कां कहा हौ असरइस तरहहुआ थां,, कि सरोज केँ मन मे अपने बेटे केँ लिए औऱ भि,, इज्जत बढ़ गई थि वो अपने बेटे कों बहोत हि अच्छा मानरही थि,, औऱ उसे पऱ गर्व महसूस कररही थि इसलिये वो अपने बेटे कों पति जैसा पुकारने केँ लिए भि मन कों मनाली थि,,, अब उससे औऱ बर्दाश्त नहि होता वो साम केँ समय हि अपने बेटे कों कॉलआई करती हैं किचन मे जाकर,,,
,, मोबाइल लगाते हि रिंग कि आवाज़ होने लगती हैं,, औऱ इधर सरोज कां दिलतेज तेज धड़कने लगता हैं,, वो सोचरही थि कि उसका बेटा मोबाइल उठाएगी तौ वो पहला शब्द क्याँ होगा जौ वो अपने बेटे केँ लिए पुकारेगी,,, उसकादिल तेजी सें धड़करहा थां,, घबराने कि बात नहि थि मगर न् जाने क्यूं उसे घबराहट होँ रही थि,, तभीकुछ देर रिंग होने केँ बाद रोहन मोबाइल उठा लेता हैं,,
रोहन :- हम् आप् बोल क्यूं बार-बार मोबाइल करके परेशान कररही हौ,,, ???
,, जैसी हि सरोज अपने बेटे कि आवाज़ सुनती हैं उसकादिल औऱ तेजी सें धड़कने लगता हैं,, वो कुछदेर खामोश रहती हैं औऱ अपने बेटे कों गुस्से मे देखकर,, कांपते हुए होठों सें कहती हैं,,
सरोज:-ए। जी.आप् भि नाराज हौ क्याँ मुझसे????
,, ये शब्द सुनकर रोहन मोबाइल काटने वाला थां कि वो रुक जाता हैं,, मन मे अलग हि तरंग दौड़ने लगते हें खुशी केँ मारे वो मोबाइल कि स्क्रीन कों देखा हैं,,
,, उसे विश्वास नहि होता कि उसकी माँ आजउसे इसतरह बातकर रही हैं,, वो समझ जाता हैं कि उसकी नाराजगी कि वजह सें उसकी माँ उसे मनाना चाहती हैं,, तभीफिन सें सरोज,
सरोज:-- क्याँ हुआ आप् कुछकाम कररहे हौ क्याँ,,,,
रोहन:- कंपनी मे हूं बसजारहा हूं छुट्टी होने वाली हैं औऱ तुम् क्याँ कररही हौ,,
सरोज:- शरमाते हुएउसे बहोत लज्जा आँ रही थि,, आपके नानाजी नानीमा केँ लिए खानां बनारही हूं,,,
रोहन:- एक् बात बोलूं बुरा तौ नहि मानोगी,,,
,, रोहन कों ऐसालग रहा थां जैसे वो अपनी होने वाली पत्नि सें बातकर रहा हौ,,, इसतरह सें बातकर रहा थां,,, कुछदेर सोचने केँ बाद सां रोग अपने बेटे सें कहती हैं,,
सरोज:-कहो क्याँ केहना चाहते होँ,,, ???
रोहन:- बापू आपको केसे पुकारते थें,, ???
सरोज:- क्यूं पूछरहे होँ??? अब इसमें बापू कां क्याँ लेना देना,,
रोहन :- बताओ नाँ तभी बताऊंगा,, !!!
सरोज:- कभी-कभी नाम सें पुकारते थें नहि तौ तुँ उतावलापन सें हि बात करते थें,,,,,
रोहन:-अगर मे भि आपकोनाम सें पुकारू औऱ उसेतरह बात करूं तोँ बुरा तोँ नहि लगेगा????
,,,, अबये क्याँ नहि वो हैं सरोजमन मे सोचने लगती हैं,,, फिन भि अपनेमन कों शांतकर कर वो कहती हैं,,
सरोज:-अगर कोई सुनेगा तोँ क्याँ कहेगा कि अपनी माँ कों केसे बोलता हैं,, मम्मी कां कोईनाम लेकर पुकारता हैं क्याँ,,,, ???
रोहन:- मे कौन सां सबके सामने बुक करूंगा अकेले मे तोँ बोल हि सकता हूं,, ??
सरोज:-ठीक हैं जी.जैसी आपकी ख़्वाहिश.
,,, ये कहकर सरोज शर्मा जाती हैं उसे बहोत लज्जा आती हैं,, मगर वो मुस्कुराते हुए लज्जा सें सर झुकाकर,,
,, सरोजमन मे ये मैंने क्याँ बोल दिया,, अब मेरा बेटा मुझेनाम सें पुकारेगा,,, रोहन कि नानीमा जी कि आवाज़ आती हैं,,
नानीमा:- अरे सरोज बेटा एक् गिलास पानी देनाजरा,,,
,, सरोज थोड़ी घबराकर जी लाइव माँ जी,,, अच्छा मे रखती हूं माँ बुलारही हैं,,
रोहन जल्द मे:- रुको रुको मेरीबात सुनो,, रात कों मोबाइल करेगी नाँ,, ??
सरोज:- मे तोँ करती हूं आप् उठाते नहि होँ मोबाइल,,,
रोहन:-अब उठाऊंगा प्रतीक्षा करूंगा तेरे मोबाइल कां करेगी नां????
,,, सरोज केँ दिल कि धड़कन औऱ बढ़ जाती हैं जब उसका बेटा उसे तुँ सें बोलता हैं कि तेरे मोबाइल कां प्रतीक्षा करूंगा ये सुनकर वो फिन,, हिम्मत करके,,
सरोज:- करूंगी.माँ बापू केँ सोने केँ बाद,,,,
,, इतना कहकर सरोज मोबाइल काट देती हैं औऱ घऱ केँ काम मे लग जाती हैं अपनी मां कों पानी देती हैं औऱ अपने बेटे सें अभि हुई बातों केँ बारे मे सोचने लगती हैं,,, अब वो सोचरही थि कि उसका बेटा इसतरह सें बात करेगा तौ कैसा महसूस होगा,, परंतु अपनी बेटी कि खुशी केँ लिए उसने अपनेमन कों बना लिया थां,,, वो साराकाम निपटाती हैं औऱ फिनरात होती हैं,,, रोहन अपनी मां केँ मोबाइल कां प्रतीक्षा कररहा थां रात केँ 10:00 जाते हें मगरकोई फोन नहि आती,,,, उधर सरोजभूल गई थि कि उसको उसके बेटे कों फोन करनी हैं,, सरोज केँ पास छोटाफोन थां वो अभि भि अपने माँ पिताजी सें बातकर रही थि,,
नानीमा:= सरोज देखा हमारा बेटा कितना समझदार हैं औऱ आजकल केँ बच्चे क्याँ कररहे हें देहात मे,,
सरोज:-हां माँ बसइसी केँ सहारे जीरही हूं मेरा बेटा बहोत समझदार हैं,, आज तोँ देहात कि औरतें भि उसकी तारीफ कररही थि,,,
नाना :- देख्ना बेटा मे जल्द अपने नाती कि विवाह कर पाऊंगा,,, औऱ इसघऱ मे बहोत सारी खुशी आएंगे,,
सरोज :- ये हैं मेरी ख़्वाहिश पूरी हौ जाए मेरे बेटे कि विवाह हौ जाए,, फिन मेरे बेटे कि बहूघऱ मे आएगी तोँ औऱ ज़्यादा खुशियां आएंगी,,
नानीमा जी:- हमारा नाती अच्छा हैं औऱ पैसे भि कमाता हैं हौ जाएगी बेटा उसकी विवाह,, औऱ तोँ देख्ना उसकेसंग बहोत खूबसूरत बहू आएगी,, उसकी क़िस्मत बहोत अच्छी हैं भले हि ईश्वर केँ घऱ मे देर हैं मगर अंधेर नहि,,, ऊपर वालाजब देता हैं तोँ चप्पल फाड़ केँ देता हैं बेटा,, औऱ एक् दिनऐसा आएगा तेरी जीवन केँ सारेदुख दूर होंगे हमारे बेटे कि विवाह भि होगी,,,
सरोज:-बस मां ईश्वर मेरीये प्रार्थना सुन लेँ तौ मे,, देवी माता केँ मंदिर जाकर प्रसाद चढ़ाऊंगी,,
,, यहीसभी घऱ कि बातें चलरही थि औऱ वक़्त 11:00 बज चुके थें रोहन अपनी माँ कां मोबाइल कां प्रतीक्षा कररहा थां,, वो चाहता तौ स्वयं भि कॉलआई कर सकता थां मगर वो यहीदेख रहा थां कि उसकी माँ उसकोकॉल आई करती हैं भि हैं याँ नहि,,, रोहन कों थोडा क्रोध भि आँ रहा थां कि उसकी मां नें कॉलआई नहि किया,,, बार-बार वो मोबाइल कों देखरहा थां कि अबकॉल आई आएगीअब फोन आएगीमगर सरोज तौ अपनी मां बापू सें बात करने मे लगी हुई थि उसे ध्यान हि नहि थां कि उसे रोहन कों मोबाइल भि करना हैं,, उसने वादा किया थां कि वो रात कों मोबाइल करेगी,,, बहुत टाइमबात करने केँ बाद रोहन केँ नानाजी जी कों नींद आँ जाती हैं,, तभी रोहन कि नई सरोज सें कहती हैं,,
नानीमा:- बेटा तेरे बापूसो गए हें अबजा तुँ भि आरामकर लें बहोत रात होँ चुकी हैं घऱ कां दरवाजा बंदकर दे,,,, कुछ काम हौ तोँ मुझेबता दे मे कर दूंगी,,
सरोज:- नहि माँ कुछकाम नहि हैं मे जारही हूं सोने,,
,, दरवाजा बंद करने केँ बाद,, सरोज अपने कमरे मे सोने केँ लिएचली जाती हैं कि तभी उसकी मां उसेफिन सें कहती हैं,,
नानीमा:- अरे बेटा रोहन सें बात हुई वो ठीक हैं,,
,, अपनी मम्मी कि बात सुनकर सरोज कों यादआता हैं कि उसे तौ रोहन कों फोन करनी थि औऱ रात केँ 11:30 गए हें,, शाहिद रोहनफिन सें क्रोध होँ गय़ा होगा याँ सो गय़ा होगा,, फिन वो जल्द-जल्द अपनी माँ सें कहती हैं,,
सरोज:-हां माँ बात हुइ थि वो ठीक हैं एक् बारफिन सें फोन करूंगी,,,
,, ये कहकर सरोज अंदर कमरे मे जाती हैं औऱ दरवाजा बंद करकेफोन उठाती हैं,,, थोड़ी घबराहट उसकेमन मे अभि भि थि रात केँ 11:30 बजे वो कभी भि किसी सें बात नहि करती थि,,, मगरआज वो अपने बेटे सें हि अपने पति कि तरफबात करना चाहती थि,,, इसलिये उसकादिल जोरो सें धड़करहा थां वो फोन कों देखते हें तौ 12 बच चुके हें,,, दूसरी तरफ रोहन कि आंखों मे अभि नींद नहि थि वो प्रतीक्षा कररहा थां अपनी माँ केँ मोबाइल कां,, घबराहट केँ संग मोबाइल लगाती हैं,,, मोबाइल कि रिंग बस्ती हैं औऱ रोहन मोबाइल उठा लेता हैं,,, मोबाइल देखकर उसे बहोत खुशी होती हैं,, मोबाइल उठाती हि वो अपनाहाथ अपनीपेट केँ लोअर केँ ऊपर सें हि लिंग पऱ रखता हैं,,,
रोहन:- बड़ीदेर कर दि मोबाइल करने मे क्याँ कररही थि,,
सरोज:- जी.आप् सोए नहि अभि तक मुझेलगा आप् सोगए होंगे""
रोहन:- पहले बताओ तुम् कहां पर्र हौ,,
सरोज:- मे अपने कमरे मे हूं,,,,
रोहन:- औऱ नानाजी नानीमा सोगए क्याँ??
सरोज:-हां वो सोगए हें,,, कहो क्याँ केहना चाहते थें रात कों मोबाइल करने केँ लिए बोला थां,,,
रोहन:- दरवाजा बंद हैं??
सरोज:हां दरवाजा बंद हैं मगर क्यूं??? इतनी परेशान क्यूं हौ रहे होँ क्याँ बात हैं क्याँ कहना चाहते होँ,,, अब तोँ मे आपको,,
,, सरोजये कहकररुक जाती हैं उसकोआगे शब्द नहि मिलरहे थें,, कि वो क्याँ कहें,, मगर रोहनसमझ जाता हैं कि वो क्याँ कहना चाहती हैं वो,, रोहन अपनेमन मे हि सोतेहुए,,
,, आजइसे हि पूछकर देखता हूं मोबाइल पऱ मुट्ठी केसे मारते हें देखता हूं क्याँ बताएगी कहीं क्रोध तोँ नहि करेगी,, नहि मुझे नहि लगता आप् क्रोध होगी,,,
रोहन:- मे तौ बसये कहना चाहता थां कि तुम् मेरी विवाह कों लेकर परेशान मत होना मेरेलिए इतना हि बहुत हैं बस तुम् मुझेइस तरह सें पुकार रही हौ,, मे इन बातों केँ सहारे हि जीवनकाट सकता हूं औऱ तुम्हें खुश रखूंगा हमेशा मां,,,
सरोज :- पलंग पर्र लेटेहुए रजाई केँ अंदर जाकर,, मगर विवाह तोँ करनी हि होगीघऱ केसे चलेगा,, जिंदगी मे एक् दोस्त कि जरूरत होती हैं मे तौ जीवनभर संग नहि रहूंगी आपकी,,,
रोहन:-अगर किसी कां सहारा मिलजाए तौ जीवन काटीजा सकती हैं औऱ मुझे लगता हैं कि तेरी। बातों सें हि जीवनकाट लूंगा.
सरोज थोडा शरमाते हुए,, अच्छा ऐसा क्याँ हैं मेरी बातों मे,,
,, मैंने पहलेकभी ध्यान नहि दियामगर तेरी मीठी आवाज़ मुझे बहोत अच्छी लगती हैं,, औऱ जब तुम्हारे चेहरे कों देखता हूं तौ मुझे एहसास होता हैं कि तुम् कितनी खूबसूरत होँ,,
,, इसतरह कि तारीफ वाली बातें सुनकर सरोज कों बहोत लज्जा आती हैं मगरउसे अच्छा भि लगरहा थां,,
सरोज :- इतनी भि खूबसूरत नहि हूं मे,,, औऱ मात्र बातों सें जीवन नहि करतीबदन कि कुछ औऱ भि इच्छाएं होती हैं,,,
रोहन:- तुँ कितनी खूबसूरत हैं ये मेरेदिल सें पूछकर देख,, पहलेकभी ध्यान नहि दिया,, मगर अब लगता हैं कि मे तेरे बिनारह नहि सकता,, औऱ मे जानता हूं कि मम्मी बेटे केँ बीच वो सभी नहि होँ सकता इसका भि मैंने एक् उपायपूछ लिया हैं डॉक्टर सें,,,
,, ये सुनकर सरोज थोड़ी घबरा जाती हैं कि उसके बेटे नें इसका क्याँ उपाय पूछा होगा डॉक्टर सें औऱ वो घबराहट सें कहती हैं,,
सरोज:- डॉक्टर सें क्याँ पूछा हैं तुमने डॉक्टर सें,, ??
रोहन :- तुमने फिन सें वही शब्द,,,
सरोज :- माफ करना क्याँ पूछा हैं आपने डॉक्टर सें क्याँ बताया उसने,,,
रोहन:- उसने मुझे एक् मेडिसिन दि हैं कि जब भि तुम्हारे बदन मे इसतरह कि ख़्वाहिश हौ इस गोली कों खा लेना तुम्हारा जिस्म शांत हौ जाएगा,,,,
,, ये सुनकर सरोज बहोत घबरा जाती हैं उसे विश्वास नहि हौ रहा थां कि उसका बेटा अपनीबदन कि ख़्वाहिश कों पूरी करने केँ लिए कहींगलत स्थान नहि गय़ा औऱ डॉक्टर केँ पास गय़ा मगर डॉक्टर कि दवाई सें,, उसे शारीरिक कमजोरी हौ सकती हैं वो नपुंसक भि हौ सकता हैं,, इतना तोँ वो जानती थि कि बदन कि इस ख़्वाहिश कों करने केँ लिएकोई दवाई नहि खाई जाती औऱ अगरकोई ऐसी दवाई खाता तोँ उसे नुकसान हौ सकता हैं,, इसलिये वो घबरा गई थि औऱ अपने बेटे सें,,,
सरोज:- नहि उसे डॉक्टर कि दवाईमत खानां वो नुकसान देगी आपको,,
रोहन:- मे जानता हूं आप् मेरेलिए चिंता कररही हौ मां,, मगर आप् एक् मम्मी कि तरह हि मुझे समझाओ कि मे क्याँ करूं,,
सरोज:- रोहन मेरेलाल मे एक् माँ कि तरह हि तुम्हें बोलरही हूं,, तेरी खुशी केँ लिए मे तुम्हे आपसेबोल रही थि मगर मेरे बेटे मे तेरी मम्मी हूं तुम्हें अच्छे केँ लिएबोल रहा हूं वो दवाईमत खानां वो नुकसान देगी तुम्हारी तरफ,,,
रोहन:- मां अगर मे आपको अपनी हालत बताऊंगा तोँ आप् बुरामान जाओगी इसलिये मे आपसे कहता भि नहि,,, औऱ आप् इसमें मेरीकोई सहायता भि नहि कर सकती इसीलिए यही एक् समाधान हैं क्योंकि आप् मुझसे बर्दाश्त नहि होता माँ,,,
सरोज :- मे समझ सकती हूं बेटा मगर इसकाये हाल नहि हैं तेरी विवाह होगीसभी ठीक होँ जाएगा बसकुछ दिन औऱ,,,
रोहन :- मां मे आपकोबात नहि सकता मुझसे बर्दाश्त नहि होता,,, आप् हि बताओ मे क्याँ करूं,,,
सरोज :- जब तेरी विवाह होगीसभी ठीक होँ जाएगा बेटा इतनेदिन बर्दाश्त किया हैं नाँ कुछदिन औऱ सही,, देख इसीबात कों लेकर देहात मे सभी तेरी तारीफ कररहे थें,,,
रोहन:- माँ आपसे एक् बात बोलूं बुरा तोँ नहि मानोगी,,
सरोज:-हां बोल बुरा नहि मानूंगी,,,
रोहन:-जब मे आपको दिखाया औऱ आपकाहाथ भि उसे पर्र रखा,, तौ आपको कैसालगा क्याँ उसमें कोईकमी हैं???
,, अब सरोज कां दिल जोरो सें धड़कने लगा थां उधर रोहन अपने लिंग कों लोअर केँ ऊपर सें हि सहलारहा थां,, डॉक्टर सें दवाई औऱ सलाह लेना तौ उसका एक् नाटक थां ऐसा उसनेकुछ भि नहि किया थां वो तौ अपनी मां कों फसाने केँ लिएये सभीबोल रहा थां,,, सरोजसोच रही थि कि इसबात कां क्याँ जवाबदें अपने बेटे केँ लिंग कि तारीफ अपने मुंह सें केसे एक् माँ कर सकती हैं,,, उसेकुछ समझ नहि आताकुछ देर खामोशी छाई रहती हैं तोँ रोहनफिन सें पूछता हैं,,
रोहन:- मुझेपता थां आप् बुरामान जाओगे इसलिये मे आपसेकुछ कहना नहि चाहता थां अब मे किसको बताऊं अपनी दिक्कत,,
सरोज :- नहि बेटा ऐसीबात नहि हैं मगर अपनी माँ सें येसभी थोड़ी नां पूछते हें,,,,
रोहन:- मुझे मालूम हैं मां मगरअब आपनेदेख लिया हैं तौ ये तोँ बता सकती हौ कि क्याँ मेरे अंदरकोई कमी हैं,,
सरोज: शरमाते हुए नहि मेरेलाल तेरे अंदरकोई कमी नहि हैं सभीठीक हैं,,
रोहन:- तौ फिन बताओ आपको पसन्द आया मेरा वो,,,
,, एक् बारफिन सें सरोज कां दिल जोरो सें धड़कने लगा औऱ वो खामोश हौ गई,, कुछदेर खामोशी छाईरही सरोज केँ दिल कि धड़कन तेजतेज धड़करही थि औऱ उसकी सांसे भि तेज चलनेलगी थि सर्दी मे भि उसे गर्मी कां एहसास हौ रहा थां,,, मगर न् जाने क्यूं आज उसकी योनि मे चीटियां रंगरही थि मीठी-मीठी खुजली हौ रही थि उसे,, उसका बेटा हि उसके मुंह सें अपने लिंग कि तारीफ सुनना चाहता थां,, वो जानना चाहता थां कि उसकी माँ कों उसका लिंग मनपसंद आया कि नहि,, अब एक् मम्मी ये अपने बेटे सें केसेकह सकती हैं,, सरोज तौ सोचरही थि कि केसे बताऊं कि उसके लिंग मे उसकेमन पर्र क्याँ छाप छोड़ी हैं येयाद करते हें उसकी नजरों मे फिन सें उसके बेटे कां लिंगआने लगा,,,
,, सरोजसोच रही थि कि रोहन कि बातों कां क्याँ जवाबदे,,
रोहन:- बताओ नां मां प्लीज आपको मेरीशपथ,,,
सरोज:-अब मे क्याँ बताऊं अच्छा हैं,,,
रोहन:- सबकाऐसा हि होता हैं पिताजी कां भि ऐसा हि थां कि मां???
,, सरोज कों औऱ घबराहट हुई औऱ उसकी सांसे तेज चलनेलगी जोँ रोहनसुन रहा थां उसेसमझ आँ गय़ा थां कि उसकी माँ कि सांसकिस तरहचल रही हैं,, औऱ वो अपनेमन मे अपनी माँ कि तस्वीर कों इमेजिन करनेलगा कि वो सांस लेतेहुए उसकी पहनी हुईँ नाथ केसे हिलती हैं,, सरोजकुछ बोल नहि रही थि कि रोहन नें फिन सें कहा,,
रोहन:- अच्छा ये बताओ जोँ मैंने नाथ पहनी थि वो अभि भि पहनी हैं याँ उतार दि,,
सरोज : पहनरखी हैं,, उतरूंगी क्यूं ऐसे क्यूं बोलरहा हैं,,
रोहन माहौल कों बदलते हुए,, उसकी बहोत याद आँ रही हैं उसे देखने कां मनकररहा हैं,,
,, सरोज भि माहौल कों बदलते हुएबात बदलने कि कोशिश करतेहुए कहती हैं,,
सरोज:- इतनी अच्छी लगती हैं,, याँ फिन मे मेरीनाक,,,
रोहन:- आपकीनाक मे पहनी हुइ बहोत अच्छी लगती हैं इसलिये उसे बार-बार देखने कां मन करता हैं आप् इतनी खूबसूरत हौ कि आपकीनाक कों बार-बार देखने कां मन करता हैं,,, एक् बार अपने लिपस्टिक लगाकर नहि दिखाई,,
सरोज:- मेरेपास लिपस्टिक नहि हैं मैंने मना नहि किया थां मगर गुस्से मे चला गय़ा तौ मे क्याँ करती हैं,,,
रोहन:- मां अब मे दीपावली पर्र आऊंगा आप् एक् बार मुझेलगा कर दिखाना औऱ ये नथनी अभि उतरना नहि जब तक मे नाँ कहूं,,,
सरोज: नहि उतरूंगी,,, ठीक हैं अब मोबाइल रखदो,,, ???
रोहन:- मुझेपता थां आप् भि मेरासंग नहि दोगी,, इसीलिए मे आपसेबात नहि करना चाहता थां अब मे दिक्कत मे हूं तोँ आप् मोबाइल रखरही होँ,,
सरोजकुछ सोचते हुए,, नहि मेरेलाल ऐसीबात नहि हैं वैसे आप् क्याँ दिक्कत हैं बात तोँ कररही होँ,,,
रोहन:- मां आपसे केसे बताऊं ये बहोत परेशान कररहा हैं,, जबये टाइट होता हैं कपड़ों केँ अंदर मुझे बहोत दर्द होता हैं माँ अभि भि बहोत दर्द होँ रहा हैं,,,
,,, सरोज कों अब घबराहट होनेलगी औऱ उसकी योनि मे भि खुजली होनेलगी थि अनजाने मे हि उसकाहाथ उसकी योनि पर्र जाता हैं,, जिसे वो एक् बार सहलाने केँ बाद आंखें बंद करके अपनाहाथ वहां सें हटा लेती हैं,,
रोहन:- अपनी माँ केँ चेहरे कों इमेजिन करतेहुए,, बताओ नां मां कुछ तोँ उपाय होगा क्याँ करूं मे इसका याँ ये दवाईखा लूं जौ डॉक्टर नें दि हैं,,
,, सरोज अपने बेटे कि चिंता कों जाहिर करतेहुए,, एक् बारफिन सोच मे पड़ जाती हैं कि उसका बेटा कहींसच मे हि दवाई नाँ खानेलगे फिनउसे आदत होँ जाएगी औऱ वो किसी बीमारी कां याँ नपुंसक कां शिकार होँ सकता हैं,, इसलिये वो घबराते हुए कहती हैं,,
सरोज:- नहि मेरेलाल वो दवाईमत खानां देख मे तेरीबात मानी तूनेकहा थां कि मुझे पिताजी कि तरह पुकारा मे तेरेलिए वो भि किया,,, अब मे अपनी माँ होने केँ नाते रहती हूं ये दवाईमत खानां इससे तुम्हें नुकसान होँ जाएगा बेटा,,
रोहन:- अपने लिंग कों हाथ मे लेकर:: माँ आप् हि बताओ मे क्याँ करूं इसमें बहोत दर्द हौ रहा हैं जब लोअर केँ अंदर सोता हूं तौ बहोत दर्द होता हैं माँ,,, क्याँ करूंगा मे बताओ नां,,,
,, अब चिंता मे डूबी सरोज कों समझ नहि आँ रहा थां कि वो अपने बेटे कों क्याँ कहें,,, मन हि मन विचार कररही थि कि केसे अपने बेटे कों वो दवाई खाने सें रोके,, औऱ सोचरही थि कि ईश्वर मे कर भि क्याँ सकती हूं अपने बेटे केँ लिए,, अब ये दवाईअगर ये मेरा बेटा खाएगा तौ उसका बहोत गलतअसर होगा क्याँ करूं ईश्वर कुछसमझ नहि आँ रहा औऱ उसकेदिल कि धड़कन बहोत हि तेजी सें धड़करही थि सरोजकुछ देर केँ लिए सोचती रहती हैं,,
,, कुछदेर सोचने केँ बादजब सरोजकोई जवाब नहि दे तोँ रोहनफिन सें कहता हैं,,
रोहन:- आपको भि मेरी चिंता नहि हैं। मे समझ गय़ा आप् मेरी विवाह कों लेकर भि मेरे सामने हि चिंता जताती होँ,,, नहि तोँ अब तक मेरे दो-तीन बच्चे हौ गए होते,, कोई नहि माँ आप् सोजाओ मे ये दवाई खाकर केसे भि करके अपनी समस्या कों सुलझा लूंगा,,,
,, सरोज घबराहट केँ संग जल्दी बोलती हैं,,
सरोज, :- नहि मेरेलाल वो दवाईमत खानां बता तुझेही क्याँ होँ रहा हैं,,
,, रोहन :- मां मैंने बताया तौ इसमें बहोत दर्द होता हैं अकड़ जाता हैं ये बहोत दर्दकर रहा हैं लोअर केँ अंदर तोँ औऱ भि दर्द होता हैं,,,
सरोज :- बेटा जब पहले होता थां तब क्याँ करता थां तुँ,,,
रोहन आप् क्याँ जवाबदे येसोच रहा थां,, तभी उसके दिमाग़ मे आइडिया आया औऱ उसने जल्दी कहा,,
रोहन:- पहले इतना परेशान नहि करता थां माँ जब सें आपको देखा हैं आपकोये नाथ पहनाये तब सें बहोत ज़्यादा दिक्कत हौ रही हैं,, आज तौ बहोत दर्दकर रहा हैं माँ क्याँ करूं औऱ ईश्वर। इससे तौ अच्छा ईश्वर मेरीजान लेँ लें.
सरोज:-- नहि मेरेलाल ऐसे नहि कहते,, सभी ठीक होँ जाएगा ऐसीकोई हरकतमत करना मेरे बच्चे कि हम् कहीं केँ भि नां रहे,,,
रोहन:अब मे क्याँ करूं मां आपको हि मेरी चिंता नहि हैं तोँ मे किसके लिएजी हूं,,,
सरोज:ऐसी बात नहि हैं मेरेलाल तेरीवजह सें हि तौ हम् लोगों कां जिंदगी चलता हैं,, तुम्हे दर्द मे देखकर मुझे भि तकलीफ होती हैं,, मगर मे माँ हूं बेटा तेरेलिए ये नहि कर सकती,,
रोहन: मे आपसेकुछ करने केँ लिए थोड़ी नां बोलरहा हूं माँ इसकाकुछ तोँ समाधान होगा अभि बहोत दर्द हौ रहा हैं इसमें अकड़रहा हैं लोअर मे तौ बहोत टाइट होँ रहा हैं,, कुछ बताओ नाँ क्याँ करूं,,
,, सरोजकुछ देर सोतेहुए अपने बेटे कि दर्दभरी अहह सुनकर धीरे-धीरे सें कहती हैं,,
सरोज : तूने पजामे केँ अंदर नेकेड पहना हैं क्याँ???
रोहन:-हां मां पजामी केँ अंदर नेकेड तौ पहनते हि हैं,,
, सरोज :- एक् बात बोलूं,,। केसे बोलूं हैं ईश्वर.
रोहन:- माँ आपके मेरे अलावा कौनसुन रहा हैं बताओ नाँ,,,
सरोज:--कुछ देर सोतेहुए कांपते हुए होठों सें कहती हैं,, उसको पजामी सें बाहर् निकाल लेँ दर्द नहि होगा,,,
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