♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 52 》
अब तक,,,,,,,,
मेरीबात सुनकर नीलमकुछ बोल न् सकी, बस एकटक मेरीतरफ देखती रही। मे समझ सकता थां कि वोँ इनसभी बातों केँ चलते अपने दिलो दिमाग़ कों विचारों भॅवर मे डुबारही हैं। कुछ औऱ हमारे बीचऐसी हि बातें होती रहीं। उसकेबाद मैनेउसे सो जाने कां कह दिया। हलाॅकि मे जानता थां कि अबउसे सारीरात नींद नहि आने वाली थि। वोँ रातभर इन्हीं बातों कों सोचती रहेगी कि आख़िर ऐसीकौन सि सच्चाई हैं जिसकी मे बातकर रहाहूॅ औऱ जिस सच्चाई कों जानकर उसकी अपनी दिदी अपने हि माॅमडैड केँ खिलाफ़ होँ गई हैं?
नीलम कों ऊपर केँ बर्थ पर्र लिटाने केँ बाद मे भि अपने नीचे वाले बर्थ पर्र लेट गय़ा औऱ नीलम केँ संग हुईँ बातों केँ बारे मे सोचने लगा। आख़िर क्याँ करेगी नीलमजब उसे अपनेमाॅ बाप औऱ भइया कि असलियत कां पता चलेगा? वोँ कैसा रिऐक्ट करेगी जबउसे पता चलेगा कि उसकेमाॅ बाप नें किसतरह इस हॅसते खेलते परिवार कों बरबाद किया थां? सभीकुछ जानने केँ बाद क्याँ नीलम भि अपनी बड़ी बेहन कि तरह अपनेमाॅ बाप केँ खिलाफ़ होँ जाएगी? मे इन्ही सभी बातों केँ बारे मे सोचरहा थां। तभी सहसा मुझेअजय सिंह कां ख़याल आया। मैने परसों आने सें पहले हि जगदीश अंकल कों मोबाइल करकेअजय सिंह केँ संग एक् धाॅसू खेल खेलने कां कह दिया थां। यहउसी कां परिणाम थां कि इससमय अजय सिंह सीबीआई कि गिरफ्त मे थां। मगरअब जबकि मे कल दोपहर तक हल्दीपुर रितू दिदी केँ फार्महाउस पहुॅच जाऊॅगा तोँ अजय सिंह कों भि सीबीआई कि गिरफ्त सें आज़ाद कर देने कां वक़्त आँ जाएगा।
अजय सिंहजब सीबीआई कि गिरफ्त सें निकलकर अपनी हवेली पहुॅचेगा तब वोँ प्रतिमा कों जौ कुछ बताएगा उसेसुन कर सबके पैरों केँ नीचे सें ज़मीन गायब हौ जाएगी। अजय सिंह कां दिमाग़ उस सबके बारे मे सोचते सोचते फटने कों आँ जाएगा मगरउसे कुछसमझ नहि आएगा। वोँ इसतरह किंकर्तब्यविमूढ़ सि स्थित मे बैठारह जाएगा जैसेकोई मौत केँ मुह सें अचानक बचने केँ बाद शून्य मे खोयाहुआ सां रह जाता हैं।
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अबआगे,,,,,,,,,
उधर रितू मंत्री दिवाकर चौधरी सें मोबाइल पऱ बातें करने केँ बाद अपने फार्महाउस पहुॅची। उसने जिप्सी कों तेज़ रफ्तार सें दौड़ाया थां औऱ पाॅच मिनट मे हि फार्महाउस पहुॅच गई थि। उसे मंत्री कि बातों पर्र ज़रा सां भि ऐतबार नहि थां। हलाॅकि उसने धमकी केँ रूप मे मंत्री कों तगड़ी डोज दि थि। मगर इसके बावजूद वोँ इसबात सें संतुष्ट नहि होँ पाई थि कि मंत्री कि वजह सें विधी केँ माॅ बाप अब सुरक्षित हें। उसेपता थां कि मौजूदा समय मे भले हि मंत्री नें उससे वादाकर लिया थां कि विधी केँ माॅ बाप कों कुछ नहि कहेगा मगर वोँ अपनेइस वादे पर्र ज़्यादा देर तक कायम नहि रह सकता थां। क्योंकि वोँ मंत्री थां, वोँ यह बरदास्त नहि कर पाएगा कि कोईऐरा ग़ैरा उसे किसी चीज़ केँ लिए बिवशकरे।
फार्महाउस पऱ पहुॅच कर रितू तेज़ क़दमों सें चलती हुइ अपने कमरे मे पहुॅची। कमरे मे पहुॅच कर सबसे पहले उसने अपनी पाॅकेट सें उसफोन कि निकाल कर आलमारी मे रखाजिस नयेफोन सें उसने मंत्री सें बात कि थि। उसकेबाद उसने अपने आईफोन कों स्विच ऑन किया। मोबाइल केँ स्विच ऑन होते हि उसने पुलिस कमिश्नर कों काल लगाया औऱ फोनकान सें सटा लिया।
"यस ऑफिसर। " उधर सें कमिश्नर कां प्रभावशाली स्वर उभरा___"क्याँ प्रोग्रेस चलरही हैं तुम्हारे ऑपरेशन कि?"
"ऑपरेशन तोँ अभि सफलता पूर्वक चल हि रहा हैं सर। " रितू नें सहसा गंभीर भाव सें कहा___"मगर इसबीच एक् प्रोब्लेम आँ गई हैं। "
"व्हाट??" उधर सें कमिश्नर कां चौंकता हुआ स्वर उभरा___"कैसी प्रोब्लेम आँ गई हैं? इवरीथिंग ओके नं?"
"यससर। " रितू नें कहा___"बट प्रोब्लेम यह हैं कि मंत्री दिवाकर चौधरी केँ संग जोँ कुछ मौजूदा वक़्त मे होँ रहा हैं उसकेवजह कां उसने अपने तरीके सें पता लगाया हैं। मेरा मतलब हैं कि वोँ यह समझता हैं कि उसकीइस बरबादी केँ पीछे विधी केँ घरवालों कां हाॅथ हैं। उसे लगता हैं कि उसके बच्चों कों विधी केँ बाप नें किडनैप किया हैं। "
"ऐसा तौ उसे लगेगा हि ऑफीसर। " कमिश्नर कां स्वर उभरा___" मऐसे मामले मे कोई भि ब्यक्ति सर्व प्रथम विधी केँ घऱ वालों पऱ हि शक करेगा, क्योंकि मंत्री केँ संगयह सभी करने कि वजह मात्र विधी केँ घऱ वालो केँ पास हि हैं। इसलिए अगर मंत्री सारी बातों पर्र विचार करकेयह नतीजा निकाला हैं कि यहसभी उसरेप पीड़िता लड़की केँ घऱ वाले हि कर रहें हें तौ उसका सोचना ग़लत नहि हैं। ख़ैर, तुम् बताओ कि अब तुम् क्याँ चाहती हौ?"
"ज़ाहिर सि बात हैं सर। " रितू नें कहा___"कि मंत्री केँ इस नतीजे केँ बादअब विधी केँ माॅ बाप पर्र मंत्री कां खतरा हौ गय़ा हैं। आप् जानते हें कि इस मामले मे उन बेचारों कां दूरदूर तक कोई हाॅथ नहि हैं। वोँ तौ बेकार मे हि इसमौत रूपी खतरे मे फॅस पड़े हें। इसलिए मे चाहती हूॅसर कि विधी केँ माॅ बाप कों जल्द सें जल्द सुरक्षा मुहय्या कराएॅ आप्। "
"ऐसा करनासही नहि होगा ऑफिसर। " कमिश्नर नें समझाने वालेभाव सें कहा___"क्योंकि अगर हम् विधी केँ माॅ बाप कों पुलिस प्रोटेक्शन देंगे तोँ मंत्री केँ सामने सारी बातें ओपेन होँ जाएॅगी। उस सूरत मे उनकेऊपर ख़तरा औऱ भि बढ़ जाएगा। यह ऑपरेशन चूॅकि सीक्रेट हैं इसलिए इसकी सारी चीज़ें सीक्रेट हि रहें तौ बेहतर होगा। "
"मगर सर। " रितू नें कहा___"विधी केँ घऱ वालों कों सुरक्षित तौ ईरना हि होगा हमें। वरना उनकेऊपर मंत्री कां क़हरकभी भि टूट पड़ेगा। "
"एक् कामकरो तुम्। " कमिश्नर नें कहा___"विधी केँ माॅ बाप कों भि अपनेपास हि रखो। "
"मगर सर। " रितू नें कहा___"उन्हें मे अपनेपास लेकर केसे आऊॅगी? संभव हैं कि मंत्री नें अपने व्यक्ति उनकेआस पास निगरानी मे लगा दियेहों। उस सूरत मे जब वोँ देखेंगे कि मिस्टर एण्ड मिसेस चौहान किसी केँ दरवाज़ा लेँ जाएजा रहे हें तोँ वोँ अवश्य उसबात कि सूचना मंत्री कों दे देंगे औऱ हमारा पीछा भि कर सकते हें। "
"रिस्क तोँ लेना हि पड़ेगा ऑफिसर। " कमिश्नर कां गंभीर स्वर___"तुम् चौहान कों मोबाइल करके बोलो कि वोँ तुम्हें किसी ख़ास स्थान पर्र आकर मिलें उसकेबाद उसखास स्थान पर्र हमारे पुलिस केँ व्यक्ति सादे कपड़ों मे उन्हें वहाॅ सें रिसीव कर लेंगे। पुलिस केँ वोँ व्यक्ति चौहान औऱ उनकी पत्नि कों किसीखास स्थान पऱ हि लेकर आँ जाएॅगे जहाॅ सें तुम् उन्हें रिसीव कर अपनेसंग लेँ जानां। "
"दैट्स एगुड आइडिया सर। " रितू नें कहा___"हलाॅकि रिस्की तोँ यह भि हैं लेकिन जैसा कि आपनेकहा रिस्क तौ लेना हि पड़ेगा। इसलिए ऐसा हि करते हें सर। "
"ठीक हैं। " कमिश्नर नें कहा___"तुम् ऐसा हि करो। मगर होशियारी औऱ सतर्कता सें। "
"यससर। " रितू नें कहा।
इसकेसंग हि कालकट गई। रितू केँ चेहरे पर्र इसके पहले जहाॅ चिंता व तकलीफ़ केँ भाव थें वहींअब राहत केँ भाव झलकने लगे थें। यद्यपि उसेपता थां कि ऐसा करना भि रिस्की हि थां। क्योंकि मंत्री नें अगर अपने आदमियों कों विधी केँ माॅ बाप कि निगरानी मे लगा दिया होगा तोँ यकीनन वोँ लोगजान जाएॅगे औऱ पीछा करेंगे। मगरयह भि सच थां कि विधी केँ माॅ बाप कों सुरक्षित करना ज़रूरी थां। अतः रितू नें फोन मे विधी केँ पिताजी कां नंबरखोज करकाल लगा दिया।
"हैलो अंकल मे रितूबोल रहीहूॅ। " उधर सें काल रिसीव किये जाते हि रितू नें कहा थां।
"ओहहाॅ रितू बेटा। " उधर सें मिस्टर चौहान कां तनिक चौंका हुआ स्वर उभरा___"कैसी हौ तुम्? उसदिन केँ बाद सें फिनआई नहि तुम्। क्याँ विधी केँ जाने सें सारे रिश्ते समाप्त होँ गए? मेरा दामाद तोँ अपनी मरहूम पत्नि कि अस्थियाॅ तक लेने नहि आया। ऐसी उम्मीद तौ न् थि मुझे उससे। "
"राज कि स्थान उसकेनाम सें अस्थियाॅ लेने मे हि तौ आई थि अंकल। " रितू नें कहा___"आप् सें बताया तोँ थां हालातों केँ बारे मे। "
"ओहहाॅ हाॅ बताया थां तुमने बेटा। " उधर सें चौहान कां स्वर उभरा___"क्याँ करूॅ बेटी कुछयाद हि नहि रहता। जब सें बेटी हमें छोंड़ कर गई हैं तब सें एकदम अकेले होँ गए हें हम् दोनो। सच कहें तौ कुछ भि अच्छा नहि लगता। यह ज़िंदगी तौ बसबोझ सि लगनेलगी हैं। "
"ऐसामत कहिए अंकल। " रितू नें दुखीभाव सें कहा___"विधी केँ चले सें आप् दुखीमत होइये। मे भि तौ आपकी बेटी हि हूॅ। आप् मुझे अपनी विधी हि समझिये अंकल। मैने तौ उसीदिन आप् सबसे नाताबना लिया थां जिसदिन विधी कों मैने अपनी छोटी बेहन बनाया थां। उसके जाने कां हम् सबको बेहददुख हैं मगरयह भि सच हैं कि इसदुख कों लेकर बैठा तोँ नहि रहाजा सकता नं। आप् बिलकुल भि दुखीमत होइये औऱ नां हि यह समझिए कि आप् अब अकेले हौ गए हें। हम् सभी आपके हि तोँ हें। आपका हम् पर्र वैसा हि हक़ हैं जैसा कि विधी पर्र थां आपका। "
"ओह धन्यवाद बेटी। " चौहान कां लरज़ता हुआ स्वर उभरा___"तुमने यहकहकर सच मे मुझे अकेलेपन केँ एहसास सें मुक्त करवा दिया। मेरेदिल मे जीने कि चाहजाग उठी हैं। ख़ैर, यह बताओ बेटी कि अब केसे हालात हें वहाॅ पऱ?"
"हालात तौ अभि काबू मे हि हें अंकल। " रितू नें कहा___"मगर एक् गंभीर समस्या पैदा हौ गई हैं। "
"क कैसी समस्या बेटा?" चौहान केँ स्वर मे एकाएक चिंता केँ भाव आँ गए थें___"सभी ठीक तौ हैं न्?"
रितू नें संक्षेप मे चौहान कों मंत्री सें संबंधित सारी बातें बता दि। चौहान यहजान कर चकित थां हौ गय़ा थां कि उसकी बेटी केँ संग कुकर्म करने वालों कों रितू स्वयं सज़ादे रही हैं। इसबात सें चौहान कों बड़ी खुशी भि हुईँ। लेकिन रितू नें मौजूदा हालातों केँ बारे मे जोँ कुछ भि उसे बताया उससे वोँ चिंतित भि होँ उठा थां।
"इसलिए अंकल। " सारी बातें बताने केँ बादफिन रितू नें कहा___"मे चाहती हूॅ कि आप् औऱ ऑटी जितना जल्द होँ सके तौ घऱ सें निकलकर मेरेपास आने कि कोशिश कीजिए। "
"मगर बेटा। " उधर सें चौहान नें कहा___"उस मंत्री नें हमारे आसपास निगरानी केँ लिए अपने आदमियों कों लगाया होगा तोँ उस सुरत मे हम् भला केसे निकल पाएॅगे यहाॅ सें?"
"उसका भि इंतजाम कर दिया हैं मैने। " रितू नें कहा___"आप् बस वोँ करते जाइये जौ मे कहूॅ। "
"ठीक हैं बेटा। " चौहान नें कहा___"बताओ क्याँ करना हैं हमें?"
"आप् अपना ज़रूरी सामान लेकरइसी समय रेडी हौ जाइये। " रितू नें कहा___"थोड़ी हि देर मे मेरे पुलिस डिपार्टमेन्ट केँ व्यक्ति सादे कपड़ों मे आपको लेने आएॅगे। आप् उनकेसंग चले आइयेगा। उसकेबाद कां काम मेरे पुलिस केँ वोँ व्यक्ति औऱ मे सम्हाल लेंगे। "
"ठीक हैं बेटा। " उधर सें चौहान नें कहा___"जैसा तुम् बोलो। "
"ओके फिन आप् जल्द सें तैयारी कर लीजिए। " रितू नें कहा___"मे अपने आदमियों कों भेजती हूॅ आपकेपास। "
इसकेसंग हि रितू नें कालकट कर दि। कुछसमय रुकने केँ बाद उसनेफिन सें किसी कों मोबाइल लगाया औऱ थोड़ी देर तक किसी सें कुछ बातें कि। उसकेबाद कालकट करकेबेड पऱ धीरे-धीरे लेट गई। अभि वो लेटी हि थि कि उसका मोबाइल बजउठा। उसनेफोन मोबाइल उठाकर स्क्रीन पर्र फ्लैश कररहे नाम कों देखा तोँ सहसा उसके चेहरे पर्र सोचो केँ भाव उभरे।
"बोलो प्रकाश क्याँ ख़बर हैं?" रितू नें सोचने वालेभाव सें काल रिसीव करते हि पूछा।
".। उधर सें कुछकहा गय़ा।
"ओह तोँ यहबात हैं। " रितू नें कुछ सोचते हुए कहा__"वैसे कितने व्यक्ति होंगे वोँ लोग?"
".। " उधर सें प्रकाश नाम केँ व्यक्ति नें फिनकुछ कहा।
"चलो अच्छी बात हैं। " रितू नें कहा___"औऱ कुछ?"
".। उधर सें फिनकुछ कहा गय़ा।
"क्याँ???" रितू चौंकी___"डाक्टर भलाकिस लिएआया थां वहाॅ?"
".। " उधर सें पुनःकुछ कहा गय़ा।
"ओहआई सि। " रितू नें कहा___"मगर माॅम कों चक्कर केसे आँ गय़ा थां? क्याँ तुमने पता नहि किया?"
".। " उधर सें प्रकाश नें कुछ बताया।
"ओह तौ यहबात हैं। " रितू चौंकने केँ संग मुस्कुराई भि___"चलो ठीक हैं प्रकाश। बहोत अच्छी ख़बर दि हैं तुमने। ऐसी हि अंदर कि ख़बर देते रहना औऱ हाॅ ज़रा होशियार औऱ सतर्क रहना। "
यह कहकर रितू नें मोबाइल काट दिया। उसके चेहरे पऱ इससमय कईतरह केँ भावों कां आवागमन चालू होँ गय़ा थां। ख़ैर उसकेबाद रितू अपने डिपार्टमेन्ट केँ पुलिस वालों केँ मोबाइल काल कां इन्तज़ार करनेलगी। करीबबीस मिनटबाद रितू कां आईफोन बजा। रितू नें जल्दी काल कों रिसीव किया। काल पुलिस केँ आदमियों कां हि थां। उन्होंने बताया कि वोँ लोग मिस्टर एण्ड मिसेस चौहान कों लेकरचल दिये हें औऱ बताई हुईँ स्थान पऱ आँ रहे हें। उन्होंने यह भि बताया कि आसपास ऐसाकोई व्यक्ति नहि दिखाजिस पर्र किसीतरह कां ज़रा सां भि संदेह कियाजा सके।
पुलिस केँ उस व्यक्ति सें बात करने केँ बाद रितू भि बेड सें उठी औऱ जिप्सी कि चाभी लेकर कमरे सें बाहर् कि तरफ निकल पड़ी। सीढ़ियों सें उतरकर जब वोँ नीचेआई तौ ड्राइंगरूम मे रखे सोफों पऱ नैना औऱ कुरुणा कां भइया बैठा दिखाउसे। रितू नीचेआते देख नैना नें उससे कहा___"रितू बेटा, तुम्हारे यह मामाजी जीकहरहे हें कि इन्हें अब अपनेघऱ वापस जानां हैं। कहरहे हें बहोत काम बाॅकी हैं घऱ मे। "
"क्यूं मामाजी जी इतना जल्द?" रितू नें कहा___"अभि तौ हमने आपसेठीक सें बातें भि नहि कि हैं औऱ आप् जाने कि बात करनेलगे। "
"बातें तौ हौ हि गई हें रितू बेटा। " हेमराज नें कहा__"अब मुझे जानेदो। बहोत काम हैं। तुम्हें तौ पता हैं दूसरे कि जॉब मे अपनी मनमर्ज़ी तोँ नहि चलती नं। "
"ठीक हैं मामाजी जी। " रितू नें कहा___"जैसा आपको अच्छा लगे। तोँ कबजारहे हें आप्?"
"मे तौ सजधजकर हि बैठाहूॅ बेटा। " हेमराज नें कहा___"बस तुम्हारे आने कां हि इन्तज़ार कररहा थां। "
"ओह। " रितू नें कहा___"चलिए फिन। मे भि उधर हि जारही हूॅ। सो आपको भि छोंड़ दूॅगी। "
रितू केँ कहने पर्र हेमराज सोफे सें उठा औऱ बगल सें हि रखे एक् छोटे सें बैग कों पीठ पर्र लादकर बाहर् कि तरफचल दिया। उसके पीछे रितू भि चल दि। थोड़ी हि देर मे वोँ दोनो जिप्सी मे सवार मार्ग पऱ चलरहे थें। दोनो केँ बीच थोड़ी बहोत बातचीत होतीरही औऱ फिन वोँ नहर वाली स्थान केँ पासबने पुल केँ इसीतरफ रुकगए।
करीबबीस मिनटबाद सामने सें एक् टोयटा आती दिखी। रितू कों पहचानने मे ज़रा भि देरी न् हुइ कि उसकार मे उसके पुलिस केँ हि व्यक्ति हें। कुछ हि देर मे वोँ वाहन रितू केँ पासआकर रुकी। कार केँ आगे पीछे केँ दरवाजे खुले। अगले दरवाजे सें पुलिस कां एक् व्यक्ति उतरा जबकि पीछे केँ दरवाजे सें विधी केँ माॅ बाप उतरे।
रितू उनकेपास जाकर उन्हें नमस्कार किया औऱ उन्हें अपनेसंग लाकर अपनी जिप्सी कि पिछली शीट पर्र बैठने कां इशारा किया। उन दोनो केँ बैठने केँ बाद रितू नें पुलिस वालों सें कहा कि वोँ हेमराज कों हरीपुर छोंड़ आएॅ जौ यहाॅ सें करीब-करीब तीस किलो मीटर कि दूरी पर्र थां। रितू केँ कहने पर्र वोँ पुलिस वाले हेमराज कि अपनी व्हीकल मे बैठाकर वहाॅ सें चलेगए। उनके जाने केँ बाद रितू भि अपनी जिप्सी कों स्टार्ट कर वापस फार्महाउस कि तरफचल दि।
विधी केँ माता पिता कि सुरक्षित करके रितूअब बेफिक्र हौ चुकी थि। अब वोँ बेफिक्री सें कोई भि कामकर सकती थि। रास्ते मे रितू नें विधी केँ माॅ बाप कों विराज केँ बारे मे भि बता दिया कि वोँ कल दोपहर तक मुम्बई सें वापस आँ जाएगा। ऐसे हि बातें करतेहुए यहलोग कुछ हि वक़्त मे फार्महाउस पहुॅच गए। जिप्सी सें उतरकर रितू विधी केँ माता पिता कों अंदर लेँ गई। जहाॅ पऱ नैना फूफी बैठी थि। रितू नें नैना कों विधी केँ माॅ बाप कां परिचय दिया औऱ कहा कि इनके रहने केँ लिए एक् रूमसाफ सुथरा करवादें। थोड़ी देर ड्राइंग रूम मे उन सबसे बातचीत करने केँ बाद रितू अपने कमरे मे चली गई।
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अजीब संयोग थां।
जैसा कि रितू कों पहले सें हि अंदेशा थां कि मंत्री अपनी हरकतों सें बाज नहि आएगा। कहने कां मतलबयह कि जैसे हि मिस्टर एण्ड मिसेस चौहान रितू केँ फार्महाउस पहुॅचे थें वैसे हि मंत्री नें अपने आदमियों कों गुप्त तरीके सें विधी केँ घऱ केँ आसपास निगरानी केँ लिएलगा दिया थां। लेकिन मुश्किल सें आधे घंटेबाद हि मंत्री केँ व्यक्ति नें मंत्री कों मोबाइल करके बताया कि जिस ब्यक्ति कि निगरानी मे हम् लोग यहाॅआए थें उसकेघऱ मे तोँ तालालगा हुआ हैं। कुछ लोगों नें बताया कि एक् सफेदरंग कि गाॅड़ी आई थि जिसमे चौहान अपनी पत्नि कों लिएबैठ गय़ा थां। उसके हाॅथ मे एक् बड़ा सां बैग भि थां। उन दोनों केँ बैठते हि वोँ सफेदरंग कि वाहनचली गई थि।
मोबाइल पऱ अपने व्यक्ति कि यह ख़बरसुन कर मंत्री भौचक्का सां रह गय़ा थां। वोँ समझ गय़ा कि भले हि उसने अपने बच्चों केँ किडनैपर सें वादा किया थां इसकेबाद भि किडनैपर कों उसके वादे पर्र ऐतबार न् हुआ थां। शायदयही वजह थि कि किडनैपर नें टाइम रहते अपनी सुरक्षा केँ मद्दे नज़र अपनेघऱ मे तालालगा कर कहींऐसी स्थान नया ठिकाना बना लिया थां जिस स्थान केँ बारे मंत्री कों पता तक न् चलसके। मोबाइल पऱ अपने व्यक्ति कि ख़बर सुनने केँ बादइस समय मंत्री अपने उन्हीं तीनों साथियों केँ संग ड्राइंगरूम मे गंभीर मुद्रा मे बैठाहुआ थां।
"शिकार हमारे हाॅथ सें बहोत हि आसानी सें निकल गय़ा चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"उसे आपके वादे केँ बावजूद पता थां कि आप् ऐसाकोई क़दम उठाएॅगे। इसीलिए तोँ उसने जल्दी हि अपनी सुरक्षा कां इंतजाम कर लिया। सबसे बड़ीबात यह कि आपकोऐसे वक़्त मे ऐसाकोई क़दम उठाना हि नहि चाहिए थां। क्योंकि संभव हैं कि इससे हमें भारी खामियाजा भुगतना पड़जाए। दूसरी बातजब आपकोपता चल हि गय़ा थां तोँ उसबात कों मोबाइल पर्र उस किडनैपर कों बताना हि नहि चाहिए थां बल्कि आपको जौ करना थां वोँ उस किडनैपर कि जानकारी मे आए बग़ैर हि करना चाहिए थां। "
"ग़लती तोँ हमसे यकीनन होँ गई हैं अवधेश। " दिवाकर चौधरी नें अफसोस भरेभाव सें कहा___"हमें लगा कि जब हम् उसे बताएॅगे कि उसकी असलियत हम् जानगए हें तोँ उसकेहोश उड़ जाएॅगे औऱ अपने बुरे अंजाम कां सोचकर वोँ सभीकुछ हमारे हवाले कर देगा जिसके बलबूते पर्र वोँ इतनाउछल रहा हैं। इतना हि नहि वोँ हमारे बच्चों कों भि सही सलामत हमारे पासभेज देगा। इसकेबाद वोँ हमसे अपनेउस अपराध कि माफ़ी माॅगेगा। मगरऐसा हुआ नहि बल्कि वोँ तोँ हम् पर्र औऱ भि अधिक हावी हौ गय़ा थां। "
"अब जौ होना थां वोँ तौ हौ हि गय़ा चौधरी साहब। " सहसा अशोक मेहरा नें कहा___"औऱ इस पर्र अबबहस करने कां कोई फायदा नहि हैं। इसलिए हमेंअब यह सोचना चाहिए कि अबआगे हमें क्याँ करना हैं? वैसेउस चौहान केँ अचानक अपनेघऱ सें गायब होँ जाने सें एक् बात तोँ साफ हौ गई हैं कि वोँ अकेला इसकाम मे नहि हैं। बल्कि कोई औऱ भि हैं जौ उसकी सहायता कररहा हैं। "
"यह तुम् केसेकह सकते हौ?" दिवाकर चौधरी केँ माथे पर्र बल पड़ा___"औऱ भलाकौन ऐसे मामले मे उसकी सहायता कर सकता हैं? जबकि सभी जानते हें कि यह मामला हमसे संबंधित हैं। भला हमसे दुश्मनी मोल लेने कां दुस्साहस दूसरा कौंनकर सकता हैं?"
"कोई तौ होगा हि चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें सोचने वाले अंदाज़ सें कहा___"मैने भि अपने तरीके सें उस लड़की केँ बारे मे पता लगाया हैं। "
"क्याँ मतलब?" चौधरी केँ संगसंग सुनीता व अवधेश भि चौंके थें, जबकि अवधेश नें हि पूछा___"क्याँ पता लगाया हैं उस लड़की केँ बारे मे?"
"यही कि वोँ लड़की हमारे बच्चों केँ हि कालेज मे पढ़ती थि। " अशोक मेहरा कहरहा थां___"औऱ हमारे बच्चों कि फ्रैण्ड हि थि। लेकिन उसके बारे मे एक् बातयह भि पताचली कि वोँ लड़की किसी दूसरे लड़के कों चाहती थि औऱ फिन एक् दिन अविश्वसनीय तरीके सें उस लड़के सें प्यार संबंध तोड़ लिया थां। उस लड़के सें अलग होने केँ बाद हि वोँ सूरज केँ क़रीब आई थि। सूरज केँ हि एक् दूसरे साथी नें इस बारे मे बताया कि विधीनाम कि वोँ लड़कीउस लड़के सें संबंध अवश्य तोड़ लिया थां कि लेकिन अकेले मे अक्सर वोँ उस लड़के कि याद मे हि रोती रहती थि। "
"मगरइस मैटर सें उसबात कां कहाॅ संबंध हैं अशोक भइया जिसकी बात तुम् कररहे हौ कि चौहान कि सहायता कोई दूसरा भि कररहा हैं?" अवधेश नें कहा थां।
"संबंध क्यूं नहि हौ सकता भइया?" अशोक मेहरा नें कहा___"स्वयं सोचो कि जोँ लड़की अपने प्रेमी सें अलग होकर उसकीयाद मे इसतरह रोती थि तौ क्याँ ऐसा नहि होँ सकता कि वोँ फिन सें अपने प्रेमी सें मिलने कि चाहकर बैठे औऱ मिल हि जाए? दूसरी ग़ौर करने वालीबात यह भि हैं कि इश्क़ मुश्क कभी दुनियाॅ सें नहि छुपता। संभव हैं कि विधी औऱ उसके प्रेमी केँ उन प्यार संबंधों कि ख़बर दोनो केँ घऱ वालों कों भि रही होँ। मगर किसी कारणवश मिल न् पाएॅहों वोँ दोनो याँ फिन मिलने वालेरहे हों। मगर तभी लड़की केँ संगरेप सीन होँ गय़ा। लड़की केँ संगहुए हादसे कां पता विधी केँ प्रेमी कों लगा होगा औऱ उसने अपनी प्रेमिका केँ संगहुए इस जघन्य अपराध कां बदला लेने केँ लिए उतारू हौ गय़ा होँ। जिसका नतीजा आजइसरूप मे हमारे सामने हैं। "
"तम्हारी बातों मे वजन तौ हैं अशोक। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"मगर यहमहज तुम्हारी संभावनाएॅ हें जोँ कि ग़लत भि होँ सकती हें। फिन भि अगर तुम्हारी बातों कों मान भि लियाजाए तोँ इसका मतलबयह हुआ कि हमारे बच्चों कों किडनैप करने वाला चौहान नहि बल्कि उस लड़की कां प्रेमी हैं। "
"बिलकुल। " अशोक नें कहा___"एक् लम्हा केँ लिएयह सोचाजा सकता हैं कि लड़की केँ बाप नें अपनी बेटी केँ संगहुए उस कुकर्म कां बदलायह सोचकर नं लिया कि बदला लेने सें वोँ सभी तौ वापस मिलने सें रहा जौ इज्ज़त केँ रूप मे लुट चुका हैं। याँ फिनयह भि सोच लिया होगा कि कानूनन भि वोँ हमारा कुछ नहि कर पाएगा। मगर लड़की कां प्रेमी बदला लेने केँ सिवाकुछ औऱ सोचेगा हि नहि औऱ वही वोँ कररहा हैं। "
अशोक मेहरा कि इसबात सें ड्राइंग रूम मे कुछदेर केँ लिए ब्लेड कि धार कि मानिंद सन्नाटा छा गय़ा। सब केँ चेहरों पर्र गहन सोचों केँ भाव नुमायाॅ होँ उठे थें।
"मुझे लगता हैं कि अशोक भइया साहब कां यह सोचना एकदमसही हैं। " सहसाइस बीच पहवीबार सुनीता नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"क्योंकि जिस प्रकार सें उसने इतनेकम वक्त मे हमारे बच्चों कों औऱ हमारी रचना बेटी कों किडनैप किया हैं उसतरह सें वोँ चौहान तौ कम सें कमकर हि नहि सकता। वोँ लड़का जवान हैं औऱ गर्मखून हैं। रेपकेस होने केँ दूसरे दिन हि जिसतरह सें उसने हमारे बच्चों कों हमारे हि फार्महाउस सें किडनैप किया औऱ इतना हि नहि बल्कि हमारे खिलाफ़ ऐसा खतरनाक सबूत वहाॅ सें प्राप्त किया वोँ चौहान केँ बस कां तोँ हर्गिज़ नहि थां। आजजबउसे चौधरी साहब सें यहपता चला कि मंत्री महोदय उसकीयह असलियत जानगए हें कि वोँ दरअसल चौहान हि हैं तोँ उसे चौहान कि फिक्र हुई इसीलिए उसनेसमय रहते चौहान कों सुरक्षित कर दिया औऱ हमारी पहुॅच सें शायददूर भि कर दिया हैं। "
"अरेवाउ। " दिवाकर चौधरी नें हैरत सें ऑखें फैलाते हुए कहा___"क्याँ खूब दिमाग़ लगाया हैं मेरी राॅड नें। असलियत भले हि कुछ औऱ हि हौ मगरजिस तरह सें अशोक औऱ सुनीता नें अपनी बातें रखीं उससेयही लगता हैं कि यहसभी लड़की केँ उस प्रेमी कां हि कियाधरा हैं। ख़ैर, अब प्रश्न यह हैं कि लड़की कां वो प्रेमी कौन हैं जिसके पिछवाड़े मे इतनी अधिक मिर्ची लग गई कि वोँ अपनी जाने बहार केँ संगहुए उस काण्ड कां बदला लेनेलगा हैं। आख़िर पता तौ चले कि वोँ किसखेत कि पैदाईश हैं जिसने हम् पऱ हाॅथ डालने कां दुस्साहस किया हैं। "
"मैनेउस लड़के कां पता भि करवाया हैं चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें कहा___"वोँ लड़का हल्दीपुर कां हैं। बड़ेघऱ परिवार सें ताल्लुक रखता हैं लेकिन। "
"लेकिन क्याँ अशोक?" चौधरी केँ माथे पऱ शिकन पैदा हुइ।
"पताचला हैं कि लड़के केँ ताऊ नें उसे औऱ उसकीमाॅ बेहन कों हर चीज़ सें बेदखल कररखा हैं। " अशोक मेहरा नें कहा___"लड़के केँ ताऊ कां नाम ठाकुर अजय सिंह हैं। हल्दीपुर मे बड़ी भारी लेकिन शानदार हवेली हैं तथा अच्छी खासी ज़मीन जायदाद भि हैं। स्वयं अजय सिंह एक् बड़ा कारोबारी इंसान हैं। परिवार कि आपसीकलह कि वजह सें उसने अपने मॅझले लेकिन स्वर्गवाशी भइया विजय सिंह केँ उस लड़के कों औऱ लड़के कि माॅ बेहन कों हवेली सें बेदखल कर दिया हैं। "
"ओह बड़ी अजीबबात हैं यह तोँ। " चौधरी नें सोचने वालेभाव सें कहा___"फिन तौ वोँ लड़कादर दर कां भिखारी हि हैं। ऐसी हालत मे वोँ यहसभी हमारे संग केसेरहा पारहा हैं? यह तोँ हैरत कि बात हैं। "
"हैरत वैरत कि कोईबात नहि हैं चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें कहा___"ताऊ केँ द्वारा हवेली सें बेदखल होने केँ बाद वोँ लड़का आजकल मुम्बई मे रहता हैं अपनी विधवा माॅ औऱ बेहन केँ संग। "
"अच्छा। " चौधरी नें कहा___"तोँ क्याँ वोँ मुम्बई मे रहतेहुए यहसभी कररहा हैं?"
"इस बारे मे पक्के तौर पर्र कुछ नहि कहाजा सकतामगर। " अशोक मेहरा नें कहा___"मगर संभव हैं कि उसे अपनी प्रेमिका केँ संगहुए काण्ड कां पताचला हौ औऱ वोँ मुम्बई सें यहाॅआया हौ। उसकेबाद उसनेयह सभी शुरुआत किया होँ। "
"ओह। " चौधरी कों जैसेबात समझ आँ गई___"संभव हैं ऐसा हि होँ। ख़ैरउस लड़के केँ परिवार मे औऱ कौनकौन लोग हें?"
"लड़के कां बाप तीन भइया थें। " अशोक नें कहा___"सबसे बड़ाअजय सिंह, फिन लड़के कां बाप विजय सिंह औऱ उसकेबाद अभय सिंह। अजय सिंह केँ दो बेटियाॅ औऱ एक् लड़का हैं। उसकी बड़ी बेटी हल्दीपुर थाने मे थानेदार हैं। "
"क क्याँ????" चौधरी हि नहि बल्कि सब बुरीतरह चौंके थें, फिन चौधरी नें हि कहा___"उस ठाकुर कि बेटी थानेदार हैं। मतलब कि पुलिस वाली हैं वोँ?"
"हाॅमगर आप् यह हर्गिज़ भि नं सोचें कि। " अशोक मेहरा नें कहा____"कि उसकाइस मामले मे कोईहाथ हैं। "
"अरे, क्यूं नहि होँ सकताऐसा?" चौधरी सें पहले अवधेश बोल पड़ा थां___"वोँ अपने चचेरे भइया कि सहायता तौ यकीनन कर सकती हैं भइया। "
"ऐसा नहि हैं अवधेश भइया। " अशोक नें कहा___"क्योंकि अजय सिंह हि नहि बल्कि उसकी औलादें भि उस लड़के औऱ उसकीमाॅ बेहन सें नफ़रत करती हें। "
"एक् मिनट अशोक भइया। " सहसा अवधेश श्रीवास्तव नें कुछ सोचते हुए कहा___"एक् मिनट। हमारे बच्चों नें उस लड़की केँ संगरेप सीन कों अंजाम दिया उसकेबाद वोँ चिमनी मे बने अपने फार्महाउस पऱ चलेगए। जहाॅ सें उन्हें किडनैप कर लिया गय़ा। चिमनी हल्दीपुर केँ बाद हि पड़ता हैं। ख़ैररेप कि वारदात हल्दीपुर केँ आसपास केँ हि क्षेत्र मे हुईँ याँ फिनऐसा होगा कि हमारे बच्चों नें अपने फार्महाउस पर्र हि उस लड़की सें सामूहिक रेप किया औऱ उसकेबाद उसे हल्दीपुर कि सीमा केँ अंदर लें जाकर छोंड़ आए होंगे। यहसभी मे इसलिए कहरहा हूॅ कि वोँ रेपसीन उस वक्त बहुतफैल गय़ा थां उस क्षेत्र मे। ख़ैरअब सोचने वालीबात यह हैं कि अगररेप पीड़िता लड़की हल्दीपुर कि सीमा मे पाई गई तोँ क्याँ हल्दीपुर केँ थाने मे मौजूद वोँ थानेदारनी चुप बैठीरही होगी? उसने शुरुआती ऐक्शन तोँ लिया हि होगा। "
"तुम् आख़िर कहना क्याँ चाहते होँ?" अशोक मेहरा नें पूछा___"इस मामले मे अचानक तुम् इस एंगिल सें क्यूं सोचने लगे?"
"दरअसल मे भि तुम्हारी तरह संभावनाएॅ हि ब्यक्त कररहा हूॅ भइया। " अवधेश नें कहा___"मामला बहुत पेचीदा हैं। मगर मे इधरउधर कि कड़ियाॅ समेटने कि कोशिश कररहा हूॅ। "
"साफ साफकहो क्याँ कहना चाहते होँ तुम्?" सहसा चौधरी कर उठा___"यूॅ बातों कों घुमाने कां क्याँ मतलब हैं?"
"जैसा कि अशोक भइया नें कहा। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"कि थानेदारनी अपने भइया कि सहायता नहि कर सकती क्योंकि वोँ भि अपनेमाॅ बाप कि तरह हि उससे नफ़रत करती हैं। मगर प्रश्न यह हैं कि थानेदारनी केँ क्षेत्र मे रिप पीड़िता पाई गई तोँ क्याँ थानेदारनी नें इस पर्र कोई ऐक्शन नहि लिया होगा?"
"अगर उसनेकोई ऐक्शन लिया होता तोँ उसकापता हमें अवश्य चलता। " दिवाकर चौधरी नें कहा___"यह तोँ सच हैं कि वोँ रेप स्कैण्डल एक् पुलिस केस हि थां मगरउस स्कैण्डल कां कोई पुलिस केस नहि बना। इस बात खुलासा कमिश्नर स्वयं कर चुका हैं। "
"याँ फिनऐसा हुआ होगा कि उस थानेदारनी नें केस बनाने कि कोशिश कि होगी। " अशोक नें कहा___"मगर कमिश्नर नें उसेकेस बनाने याँ उस वारदात पऱ कोई ऐक्शन लेने सें मनाकर दिया होगा। थानेदारनी भला अपनेआला अफसर केँ खिलाफ़ केसेकोई क़दम उठाती? "
"हाॅऐसा भि होँ सकता हैं। " चौधरी नें कहा___"औऱ आम जनता नें इस पऱ होँ हल्ला इसलिए नहि किया क्योंकि उसे भि पता हैं कि मामला सीधा मंत्री केँ बेटे औऱ उसके बेटे केँ दोस्तों कां थां। यानी कि हमारे डर कि वजह सें जनता ख़ामोश रह गई। "
"तौ इन बातों कां निष्कर्स यह निकला। " सहसा सुनीता नें गहरी साॅस लेने केँ बाद कहा___"कि वोँ लड़का जिसे कि उसके ताऊ नें उसकीमाॅ बेहन केँ संगघऱ सें दरबदर कियावही इस सबके पीछे हैं। यानी वोँ अपनी प्रेमिका केँ संगहुए उसरेप कां बदला लें रहा हैं। "
"बिलकुल। " अशोक नें पुरज़ोर लहजे मे कहा__"विधी केँ माॅ बाप केँ अलावा वही एक् ऐसा हैं जौ यहसभी कर सकता हैं। यानीयह सभी करने कि वजह उसकेपास भि हैं। "
"अगरयह वाकईसच हैं। " अवधेश नें कहा___"तोँ अब हमेंउस लड़के कां पता लगाना होगा। मगर इसबार पहले जैसी ग़लती हर्गिज़ भि नहि होनी चाहिए। वरनाइस बार इसका खामियाजा हमें भारी कीमत पऱ चुकाना पड़ सकता हैं। "
"बड़ी हैरत कि बात हैं। " दिवाकर चौधरी केँ लहजे मे कठोरता थि, बोला___"एक् पिद्दी सें इंसान नें हमेंइस तरह अपने शिकंजे मे कसाहुआ हैं कि हम् आज़ाद होतेहुए भि आज़ाद व बेफिक्र नहि हें। वोँ जब चाहे हम् सबकोबीच चौराहे पर्र नंगा दौड़ा सकता हैं औऱ हम् कुछकर नहि सकते। सारे प्रदेश मे हमारी एकछत्र हुकूमत हैं। हमारी इजाज़त केँ बिनाइस प्रदेश मे कहीं कां कोई पत्ता भि नहि हिल सकता। मगर कमाल देखो कि हम् सभी जोँ स्वयं कों सबसे बड़ा सूरमा समझरहे हें आजउस हरामज़ादे कि मुट्ठी मे कैद हौ कररहगए हें। लानत हैं हम् पऱ औऱ हमारे सूरमा होने पर्र। "
"आप् चिंता मत कीजिए चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें कहा___"बकरे कि अम्मा कब तक ख़ैर मनाएगी? आजभले हि उस कमीने कां पलड़ा हम् पर्र भारी हैं मगर किसीदिन तौ उससे भि कोईचूक होगी जिसके तहत वोँ हमारे हत्थे चढ़ेगा। उसकेबाद हम् बताएॅगे कि हमारे संग इतना बड़ा दुस्साहस करने कां कितना हसीन अंजाम होता हैं। "
"बकवास मतकरो अशोक। " चौधरी नें बिफरे हुए सें लहजे मे करीब-करीब चीखते हुए कहा___"तुम्हारा यह डायलाग हम् इसके पहले भि जाने कितनी बारसुन चुके हें मगरअब तक ऐसाकोई समय नहि आया जिससे हमेंलगे कि हाॅअब हालात हमारे हक़ मे हें। मादरचोद नें अपाहिज बना केँ रख दिया हैं हमे। किसी सें ठीक सें मिल नहि सकते। किसी समारोह मे नहि जा सकते। सालाहर लम्हा डरलगा रहता हैं कि ऐसी किसी स्थान पऱ वोँ हरामज़ादा कोईऐसी वैसी हरकत नं करदे कि सबके सामने हमारी इज्ज़त कां कचरा होँ जाए। "
"बुरामत मानिएगा चौधरी साहब। " अशोक नें कहा___"मगर हमें इतना बेबसबना देने मे सबसे बड़ा हाॅथ आपके बेटे सूरज कां हैं। "
"क्याँ मतलब हैं तुम्हारा?" चौधरी एक् झटके सें अशोक कि तरफ घूमते हुएकहा थां।
"आप् स्वयं सोचिए। " अशोक नें कहा___"हमारे सब बच्चों कां लीडरकौन हैं___आपका बेटा हि न्?"
"हाॅ तोँ। " चौधरी चकराया।
"आप् यह बताइये कि फार्महाउस पऱ हमारे ऐसे संबंधों कि वीडियो क्लिप बनाने कि क्याँ ज़रूरत थि उसे?" अशोक नें कहा___"क्याँ उसे इतना भि एहसास नहि थां कि ऐसे वीडियो किसी डायनामाइट सें कम नहि होते। हम् जैसे लोगों केँ हज़ारो प्रतिद्वंदी होते हें जिन्हें हमारी ऐसी हि किसी कमज़ोरी कि तलाश रहती हैं। आज उन्हीं वीडियोज कि वजह सें हम् इतना बेबसव लाचार बने बैठे हें। अगर वोँ वीडियोज बने हि नं होते तौ आज किसी कि हिम्मत हि नं होती हमें इतना मजबूर करने कि। "
"हाॅ हम् जानते हें कि हमारे बेटे नें ऐसे वीडियोज बनाकर बहोत बड़ी ग़लती कि हैं। " चौधरी नें खेदभरे भाव सें कहा___"मगर अब जौ होँ गय़ा उसकाकोई कर भि क्याँ सकता हैं? हमें तौ सारे बच्चों कि फिक्र हैं। जाने उनकेसंग कैसा सुलूक कररहा होगा वोँ हरामज़ादा?"
"हम् स्वयं तौ कुछकर नहि सकते हें। " अवधेश नें कहा___"मगर किसी औऱ कों इसकाम मे अवश्य लगा सकते हें। "
"क्याँ मतलब??" अशोक केँ माथे पऱ शिकन उभरी।
"मुझे लगता हैं कि हमेंइस काम केँ लिए किसी क़ाबिल व बहादुर डिटेक्टिव कों हायर करना चाहिए। " अवधेश नें कहा___"जासूस लोग गुप्त तरीके सें काम करने मे बहुत माहिर होते हें। वोँ अपने औऱ अपनी गतिविधियों केँ बारे मे किसी कों तब तक पता नहि चलने देतेजब तक कि वोँ स्वयं न् चाहें। अगरयही काम हम् अपने आदमियों सें कराएॅगे तोँ हमारी किसी गतिविधी कां उस लड़के कों पता चलने मे देर नहि लगेगी। अब तक केँ उसके क्रिया कलाप सें यह ज़ाहिर होँ चुका हैं कि वोँ अपनेहर काम मे बेहद होशियारी औऱ सतर्कता रखता हैं औऱ हमारी समयसमय कि ख़बर रखता हैं। इसलिए हमें किसी डिटेक्टिव कों हायर करना चाहिए। "
"आइडिया बुरा नहि हैं। " अशोक नें कहा___"मे तुम्हारी इस सलाह सें सहमतहूॅ। यकीनन इसकाम मे एक् डिटेक्टिव हि कुछकर सकता हैं। वोँ उस लड़के कि सारी जन्मकुण्डली भि निकाल लेगा औऱ हमारे बच्चों कां पता भि लगा लेगा। "
"तोँ फिनदेर किसबात कि हैं?" चौधरी नें कहा___"अगर तुम् दोनों कों लगता हैं कि कोई डिटेक्टिव इसकाम कों बखूबी सफलतापूर्वक कर सकता हैं तौ फिनऐसे किसी डिटेक्टिव कों जल्दी हायरकरो। "
"मेरी जानकारी मे ऐसा एक् डिटेक्टिव हैं। " अवधेश नें कहा___"मे आज हि उससे मोबाइल पऱ बात करताहूॅ औऱ उसे जल्द सें जल्द यहाॅ बुलाता हूॅ। "
"अच्छी बात हैं। " चौधरी नें कहा___"उसे कहो जल्दी हमारे सामने हाज़िर हौ जाए। उसको उसकेकाम कि मुहमाॅगी फीस केँ रूप मे रकम मिलेगी। "
अवधेश नें चौधरी कि बात सुनकर अपनेकोट कि पाॅकेट सें फोन निकाला औऱ उसमें सें किसी कों मोबाइल लगाया। थोड़ी देरबात करने केँ बाद उसनेफोन वापस अपनी पाॅकेट मे डाल लिया।
"चौधरी साहब। "फिन उसने मंत्री कि तरफ देखते हुए कहा___"मैने डिटेक्टिव सें बातकर ली हैं। वोँ कल तक हमारे पास पहुॅच जाएगा। अब आप् किसीबात कि फिक्र मत करें। बहोत जल्द हमारा दुश्मन हमारे कब्जे मे होगा औऱ हमारे बच्चे हमारे पास होंगे। "
"अच्छी बात हैं अवधेश। " चौधरी नें कहा___"अब तोँ हमें तुम्हारे उस डिटेक्टिव पऱ हि भरोसा करना हैं। इसके सिवा दूसरा कोई चारा भि नहि हैं। "
"आप् निश्चिंत होँ जाइये चौधरी साहब। " अवधेश नें कहा___"डिटेक्टिव बहोत हि क़ाबिल ब्यक्ति हैं। मुझे यकीन हैं कि बिनाकोई नुकसान हुए हमारा हरकाम हौ जाएगा। "
"इससे अधिक हमें औऱ चाहिए भि क्याँ?" चौधरी नें कहने केँ संग हि सहसा सुनीता कि तरफ देखा___"इतने दिनों मे आज पहलीबार एक् नई उम्मीद पैदा हुईँ हैं। इसलिए हम् चाहते हें कि आज तबीयत खुशकर दो तुम्। "
"क्या बात है। " सुनीता नें दाॅतों तले अपने होंठदबा करअहह सि भरतेहुए कहा___"कितनी खूबसूरत बातकही हैं मेरेबलम नें। मे तौ कब सें इसकेलिए प्यास रहीहूॅ। अबजबमूड बन हि गय़ा हैं तोँ चलिए कमरे मे औऱ तबीयत हरीकर लीजिए। "
सुनीता कि इसबात सें चौधरी तोँ मुस्कुराया हि उसकेसंग अशोकव अवधेश भि मुस्कुरा पड़े। इसकेबाद चारो हि सोफों सें उठकर कमरे कि तरफबढ़ गए।
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सुभह हुईँ औऱ एक् नये जिंदगी केँ नयेसफ़ कि शुरुआत हुईँ। ट्रेन कि शीट पर्र सोतेहुए मुझेऐसा लगा जैसे मेरेऊपर कोई झुकाहुआ हैं। मुजे मेरे चेहरे पर्र गर्म गर्महवा लगती हुइ प्रतीत होँ रही थि संग हि किसी स्त्री केँ जिस्म पर्र लगे परफ्यूम कि खुशबू भीमेरे नथुनों मे समारही थि। मेरी नींद टूटने कि यहीवजह थि। मैनेपट सें अपनी ऑखेंखोल दि औऱ अगले हि लम्हा मे यहदेख कर बुरीतरह चौंका कि नीलम मेरे चेहरे केँ पास झुकी हुईँ थि।
उधरयही हाल नीलम कां भि हुआ थां। उसे कदाचित उम्मीद नहि थि कि मे इसतरह झटके सें ऑखेंखोल दूॅगा औऱ फिन जैसे हि मैनेपट सें अपनी ऑखें खोली तौ वोँ एकदम सें हड़बड़ा गई थि। मगर हैरत कि बातयह हुईँ कि उसनेपलक झपकते हि स्वयं कों सम्हाल भि लिया थां।
"गुड माॅर्निंग राज। "फिन उसने मुस्कुराते हुए बड़ी नज़ाक़त सें कहा___"सोते हुए कितने मासूम लगते हौ तुम्। मे बहुतदेर सें यहीदेख रही थि कि मेरा भइया सोते टाइम किसी छोटे सें बच्चे कि तरह मासमव क्यूट सां दिखता हैं। पहले मैने सोचा कि तुम्हें जगाऊॅ मगरफिन जब मैने देखा कि तुम् गहरीनीद मे होँ औऱ एकदम सें मासूम दिखरहे हौ तोँ मैने तुम्हें जगाना उचित नहि समझा। बल्कि एकटक तुम्हें देखने लगी थि। "
"अच्छा तोँ मे तुम्हें। " मैने उठतेहुए लेकिन शरारत सें कहा___"छोटा सां बच्चा नज़र आँ रहा थां सोते वक़्त?"
"हाॅ बिलकुल। " नीलम नें मुस्कुराई___"तभी तोँ उस छोटे सें बच्चे कि मासूमियत कों एकटक निहारे जारही थि मे। "
"पऱ मैनेजब तुम्हें देखारात मे। " मैने पुनः शरारत सें हि कहा___"तौ तुम् सोतेसमय ऐसीदिख रही थि जैसेकोई अस्सी साल कि बुढ़िया सोरही होँ। मे तोँ टोटली कन्फ्यूज हौ गय़ा थां उससमय। "
"क्याँ कहा???" नीलम एकदम सें खाने-पीने पानी लेकरचढ़ दौड़ी___"मे तुम्हें बुढ़िया नज़र आँ रही थि। रुको अभि बताती हूॅ तुम्हें?"
"अरे नहि दोस्त। " मैंने एकदम सें हड़बड़ाते हुए कहा__"मे तोँ मज़ाक कररहा थां। तुम् बुढ़िया तोँ किसी एंगिल सें नहि लगती होँ मगर.। "
"मगर क्याँ???" नीलम नें ऑखें दिखाई।
"मगर दादीमा माॅ अवश्य लगती हौ। " मैने हॅसते हुएकह दिया।
"क्याँ बोला???" नीलम एकदम सें मेरेऊपर चढ़कर मेरेपेट पऱ बैठ गई, औऱ फिन मेरे सीने मे मुक्के मारते हुए बोलीं___"मे दादीमा माॅ लगतीहूॅ। रुक बेटा बताती हूॅअब तुम्हारी तरफ मे। "
नीलम मेरे सीने मे मुक्के मारेजा रही थि। मे भि उससे बचने कां कोईखास प्रयास नहि कररहा थां। मैने तोँ उसे छेंड़ा हि इसलिए थां कि वोँ यहसभी करे। दरअसल इन्हीं सभी चीज़ों केँ लिए तौ मे तरसा थां। अब तक तोँ रितू औऱ नीलम नें कभी मुझे अपना भइया समझा हि नहि थां। भइया बेहन केँ बीच कैसी कैसी शरारतें होती हें उस सबका मैनेकभी स्वाद हि नहि चखा थां। मगरआज औऱ इस टाइमवही सभी मेरे औऱ नीलम केँ बीच होँ रहा थां। सच कहूॅ तौ मुझेइस सबसे बेहद खुशी हौ रही थि। दिल मे भड़कते हुए जज़्बात जाने क्यूं मुझे रुलाने पऱ उतारू हौ रहे थें। मेरादिल कररहा थां कि इस टाइम भावनाओं मे बहतेहुए मे नीलम सें लिपटकर खूब रोऊॅमगर मे ऐसा नहि करना चाहता थां। क्योंकि उससे माहौल दुखी सां होँ जाता जबकि मे इससमय कों जीभर केँ जीना चाहता थां।
उधर हम् दोनो बेहन भइया कि इसधमा चौकड़ी सें आसपास बैठे ट्रेन केँ सभीलोग आश्चर्य सें ऑखवमुह फाड़े एकटक देखेजा रहे थें। हम् दोनो कों भि जैसेउन सबसेकोई मतलब नहि थां औऱ नां हि कोई परवाह थि। नीलम ज़ोर ज़ोर सें जाने क्याँ क्याँ बोलेजा रही थि औऱ मेरेऊपर चढ़ी हुई मुझ पर्र मुक्कों कि बरसात कियेजा रही थि। उसकीइस आवाज़ औऱ मेरे तेज़ हॅसी कों सुनकर पीछे साइडऊपर नीचे बर्थ पर्र सोरहे सोनम औऱ आदित्य कों भि जगा दिया। वोँ दोनो जल्दी हि भागकर हमारे पास आँ गए औऱ इधर कां नज़ारा देखकर हैरान रहगए।
"यह तुम् दोनो क्याँ ऊधममचा रखे हौ?" सहसा सोनम नें करीब-करीब ऊॅची आवाज़ मे कहा___"तुम् दोनो कों कुछहोश भि हैं कि इस वक़्त कहाॅ हौ तुम् दोनो औऱ तुम् दोनो कि इस हरकत सें आसपास वाले कितना डिस्टर्ब होँ रहे हें। "
"दिदी इसने मुझे दादीमा माॅ बोला। " नीलम नें मुक्के मारना बंद करके शिकायत भरे लहजे मे कहा___"पहले कहरहा थां कि मे बुढ़िया लगतीहूॅ फिनबात बदलकर बोला कि मे दादीमा माॅ लगतीहूॅ। "
"हाॅ तौ क्याँ होँ गय़ा?" सोनम दिदी नें हाॅथ नचाते हुए कहा___"उसके ऐसा कहने सें क्याँ तुम् सच मे दादीमा माॅ लगनेलगी? देखो तौ अभि उसकेऊपर बैठी हुइ हैं बेशरम। चलउतर राज केँ ऊपर सें वरनादो चार लगाऊॅगी अभि। "
"नहि उतरूॅगी। " नीलम नें दोटूक भाव सें कहा___"इसने मुझे दादीमा माॅ क्यूं कहा? इससे पहले बोलिए कि यह मुझे बोले कि मे हूर कि परी लगतीहूॅ। वरना आप् भि देखिये कि केसे मे इसेमार मार केँ इसका भुर्ता बनाती हूॅ?"
"हूर कि परी औऱ तुँ???" मैंने सहसा नीलम कि खिल्ली उड़ाने वाले अंदाज़ सें कहा___"कभी आईने मे अपनी शक्ल देखी हैं तूने? दादीमा माॅ तोँ मैनेऐसे हि कह दिया थां तुझेही, वरना तोँ तुँ बिलकुल बंदरिया लगती हैं। यकीन नं हौ तौ पूछ लेँ सोनम दिदी सें। "
मेरीइस बात सें जहाॅ सोनम दिदी नें अपनासिर पीट लिया वहीं नीलम कि त्यौरियाॅ चढ़गईं। वो एकदम सें तमतमाए हुए बोलि___"क्याँ कहा बंदरिया लगतीहूॅ? रुकअब तौ तुझेही सच मे नहि छोंड़ूॅगी। दिदी आप् हमारे बीच मे मत पड़ना। इसे तोँ मे आज छोंडूॅगी नहि। "
सोनम दिदी चिल्लाती रहगईं जबकि नीलम नें फिन सें मुझ पर्र मुक्कों कि बरसात कर दि। मे महसूस कररहा थां कि वोँ मुझेमार अवश्य रही थि मगरबस हल्के हल्के। कदाचित उसे भि इस सबमें मजा आँ रहा थां। लेकिन वोँ यही ज़ाहिर कररही थि कि वोँ मेरी बातों सें बेहद क्रोध होँ गई हैं।
"सोनम दिदी इससे कहिए कि अधिक झाॅसी कि रानी न् बने। " मैने हॅसते हुए कहा___"वरना अगर मे महाराणा प्रताप बन गय़ा तौ फिनयह रोने केँ सिवाकुछ नं कर पाएगी, बंदरिया कहीं कि। "
"ओये तुँ महाराणा प्रताप बन केँ तौ दिखा। " नीलम नें ऑखें निकाली___"मे भि झाॅसी कि रानी सें माॅ दुर्गा नं बन जाऊॅ तोँ कहना। बड़ाआया महाराणा प्रताप बनने, बंदर कहीं कां। "
"ओये बंदरकौन??" मैने सहसा उसके दोनो हाॅथ पकड़ते हुए कहा___"ठीक सें देखआई एम विराज दि ग्रेट। "
"विराज दि ग्रेट माईफुट। " नीलम नें मेरे हाॅथ सें अपनाहाथ छुड़ाने कि कोशिश करतेहुए कहा___"छोंड़ मेरेहाथ वरना नीलमपरी कों क्रोध आँ जाएगा औऱ फिन विराज दि ग्रेट कों मुर्गा बना देगी समझा?"
"मे क्यूं तेरेहाथ छोंड़ूॅ??" मैने कहा___"तूँ स्वयं हि छुड़ा लेँ न्। मे भि तोँ देखूॅ कि इस बंदरिया मे कितना दम हैं। "
"ओये तूँ न् दम कि बात नं कर। " नीलम नें कहा___"मे चाहूॅ तौ दो लम्हा मे अपनेहाथ छुड़ा लूॅ समझा। "
"अच्छा छुड़ा केँ तौ दिखा। " मैनेताव दियाउसे।
"रहनेदे रहनेदे। " नीलम नें कहा___"वरना बाद मे सभीतुझ पर्र हि हॅसेंगे कि स्वयं कों महाराणा प्रताप कहने वाला एक् मासूम सि लड़की सें हार गय़ा। "
"कोईबात नहि। " मैने कहा___"तुझसे हारना मंजूर हैं। आख़िर तूँ मेरी प्यारी सि बेहन हैं नं। "
"अबयह मस्का क्यूं लगारहा हैं?" नीलम नें चौंकते हुए कहा___"क्याँ नीलमपरी सें डर गय़ा हैं?"
"डरता तौ मे उस परवर दिगार सें भि नहि। " मैने नीलम कां हाथ छोंड़ कर अपनेहाथ कि उॅगली कों ऊपर कि तरफ करतेहुए कहा___"मगर मुझे लगता हैं कि अब बाॅकी सबको बक्श देना चाहिए जोँ बेचारे हमारी वजह सें शायद डिस्टर्ब होँ रहे हें। दूसरी बात सोनम दिदी नें डंडाउठा लिया तौ फिन हम् दोनो कि ख़ैर नहि रहेगी। कुछसमझ मे आया नीलमपरी जी?"
"अगर ऐसीबात हैं। " नीलम नें इसतरह कहा जैसे अहसान कररही हौ___"तौचल बक्श हि देतीहूॅ तुम्हें भि औऱ बाॅकी सबको भि। मगर आइंदा नीलमपरी सें टकराने कि सोचना भि मत वरना खांमाखां बेइज्जती होँ जाएगी तेरी। "
"ओये अब अधिकउड़ मत समझी। " मैने उसकाहाथ पकड़कर उसे अपनेऊपर सें उठाते हुए कहा___"चल अबउतर नीचे। "
मेरेऐसा कहने पऱ नीलम मुस्कुराते हुए मेरेऊपर सें उतर गई मगर अंदाज़ ऐसा थां उसका जैसे अभि भि जतारही होँ कि आइंदा याद रखना। मुझे उसकेइस अंदाज़ पर्र बड़ी ज़ोर कि हॅसीआई मगर मैने स्वयं कों रोंक लिया। उधर सोनम दिदी औऱ आदित्य भि यहसभी देखकर मुस्कुरा रहे थें। ख़ैरकुछ हि पलों मे मे औऱ नीलमशीट पर्र धीरे-धीरे बैठगए। आदित्य औऱ सोनम भि हमारी हि शीट पऱ बैठगए। आसपास बैठेसभी लोग अभि भि हमें हैरानी सें देखरहे थें। मैने देखा कि नीलम कां चेहरा अब एकदम सें खिला खिलालग रहा थां। उसके होठों पऱ बहोत हि हल्की सि मुस्कान थि। वोँ बारबार मेरीतरफ देखने लगती थि। पता नहि क्याँ चलरहा थां उसकेमन मे?
"चलो सुभह तौ होँ गई हैं। " सोनम दिदी नें मानो बातों कां सिलसिला शुरुआत किया___"इस वक़्त अगर गरमा गर्मगरम चाय याँ काॅफी मिल जाती तोँ कितना अच्छा होता। "
"हाॅ दिदी। " नीलम नें कहा___"मगर यहाॅ पऱ अभि यहसभी केसेमिल सकता हैं भला?"
"चिंता मतकरो। " मैने कहा___"अगले स्टाप पऱ जब ट्रेन रुकेगी तोँ गरमचाय याँ काॅफी कां बंदोबस्त करने कि कोशिश करूॅगा मे। "
"विराज भइया। " सहसा आदित्य नें कहा___"मे ज़रा फ्रेश होकरआता हूॅ। "
"ओके भइया तुम् जाओ। " मैने कहा___"उसके बाद मुजे भि फ्रेश होना हैं। "
"औऱ हम् भि तौ फ्रेश होंगे। " नीलमबोल पड़ी___"इस लिए इनकेबाद सबसे पहले मे जाऊॅगी। "
"हर्गिज़ नहि। " मैने कहा___"आदि केँ बाद मे हि जाऊॅगा। "
"तूँ जा केँ दिखाना भला। " नीलम नें मानो धमकी सि दि मुझे।
"ऐ अब तुम् दोनोफिन सें नं शुरुआत होँ जाओ। " सोनम दिदी नें कहा थां।
"पऱ दिदी सेकण्ड नंबर पऱ मे हि जाऊॅगी। " नीलम नें बुरा सां मुह बनाया___"इसे कह दीजिए कि यह मेरेबाद चला जाएगा। "
आदित्य हम् दोनो कि इसबात सें मुस्कुराता हुआउठ कर फ्रेश होनेचला गय़ा। जबकि मैने सोनम दिदी केँ कुछ बोलने सें पहले हि कहा___"हाॅ ठीक हैं तुम् हि चली जानां। वैसे भि मुझे इतनी जल्द नहि हैं तेरे जैसे। पहलेबता देती तोँ आदित्य कों रोंक देता। "
"ओये अब तूँ बकवास नं कर समझे। " नीलम नें ऑखे दिखाते हुए कहा___"मुझे भि इतनी जल्द नहि हैं। "
"म्म्म। " सोनम दिदी कह उठी___"तुम् दोनोफिन सें शुरुआत हौ गए। ओके फाइनअगर तुम् दोनो कों इतनी जल्द नहि हैं तौ मे चली जाऊॅगी एण्डदिस इज क्लियर। "
"यहसही कहा दिदी आपने। " मैने हॅसते हुए कहा___"अब आप् हि जानां फ्रेश होने। सबसे लास्ट मे यही जाएगी। "
"नहींऽऽ। " नीलम एकदम सें हड़बड़ा गई___"आदि भैया केँ बाद मे हि जाऊॅगी। "
"क्यूं अब क्याँ हुआ तुम्हे?" सोनम दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"अभि तोँ कहरही थि नं कि तुम्हे कोई जल्द नहि हैं तोँ अब क्याँ हुआ?"
"मे कुछ नहि जानती। " नीलम नें मानो फैंसला सुना दिया___"आदि भैया केँ बाद मे हि जाऊॅगी औऱ अगर आपने दोनो नें मुझे नहि जाने दिया तौ मे यहीं पर्र हड़ताल कर दूॅगी। "
"उसे हड़ताल नहि। " मैने हॅसते हुए कहा___"पोट्टी कर देना कहते हें पगली। "
"ओये चुपकर तूँ। " नीलम पहले तोँ सकपकाई फिन घुड़की सि दि मुझे___"ज़्यादा चपड़ चपड़मत कर वरना ट्रेन केँ नीचे फेंक दूॅगी तुम्हे। "
" वैसेबात तोँ राज नें सहीकही हैं। " सोनम दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"उसे हड़ताल करना थोड़ी न् कहते हें। "
सोनम दिदी कि इसबात सें मेरी हॅसीछूट गई औऱ मेरेसंग हि संग सोनम दिदी भि हॅसने लगी थि। हम् दोनो केँ हॅसने सें नीलम कां चेहरा देखने लायक हौ गय़ा। ऐसालगा जैसे वोँ अभि रो देगी। सामने कि शीट पऱ बैठेलोग भि मुस्कुरा उठे थें। मैनेजब देखा कि नीलम कहींसच मे हि नं रोदे तौ मैने अपनी हॅसी रोंककर झट सें उसे खींचकर स्वयं सें छुपका लिया।
"तुम् दोनो बहोत गंदे होँ। " नीलम मुझसे अलग होने कि कोशिश करतेहुए लेकिन रूठेहुए भाव सें बोलीं___"जाओ मुझे तुम् दोनो सें अबकोई बात नहि करनी। "
"अरे ऐसामत करना तूँ। " मैनेउसे मजबूती सें छुपकाए हुए कहा___"हड़ताल भले हि यहीं पऱ कर देना। "
मेरीइस बात सें इसबार सोनम दिदी कि भि ज़ोरदार हॅसीछूट गई। जबकि मे नहि हॅसा क्योंकि मुझेपता थां कि मेरेइस बार हॅसने सें नीलम कि हालत ख़राब होँ जाएगी। मे नहि चाहता थां कि उसकादिल दुखजाए। मुद्दतों बाद तोँ वोँ मुझेऐसे मिली थि। नीलम नें थोड़ी देर मुझसे नाराज़गीवश अलग होने कि कोशिश कि फिन वोँ स्वयं हि मुझसे छुपककर मुझेकस केँ पकड़ लिया। वोँ कुछबोल नहि रही थि बल्कि उसने अपनी ऑखेंबंद करली थि।
ऐसे हि हॅसी मज़ाक करतेहुए हम् चारो हि बारी बारी सें फ्रेश होँ गए। अगले स्टाप पऱ ट्रेन रुकी तौ मे औऱ आदित्य ट्रेन सें उतरकर उन दोनो केँ लिएगरम चाय लेँ आए। हम् चारों नें गरमचाय पी औऱ फिन सें बातों मे मशगूल होँ गए। ट्रेन अपनीगति सें चलतीरही। बातों बातों मे टाइम कां पता हि नहि चला औऱ सुभह सें दोपहर होने कों आँ गई।
हम् गुनगुन स्टेशन केँ पास पहुॅचने वाले थें। इसबीच नीलमफिन सें गंभीर हौ गई थि। मैनेउसे समझा दिया कि वोँ सोनम दिदी कों लेकर धीरे-धीरे गाॅवजाए। मैनेउसे खासकर यहकहा कि सारी बातों पता वोँ स्वयं हि लगाए तोँ बेहतर होगा। नीलम औऱ सोनम दिदी नें मुझे अपना अपनाफोन नंबर दिया औऱ मुझसे भि लिया।
गुनगुन स्टेशन पहुॅच कर ट्रेन रुकी तौ हम् सभी ट्रेन सें नीचे उतरने केँ लिएगेट कि तरफआए। मैनेआस पास कां मुआयना किया औऱ आदित्य केँ संग नीचेउतर आया। हम् दोनो केँ उतरने केँ बाद नीलम भि सोनम दिदी केँ संगउतर आई। मैने नीलम कों बता दिया थां कि यहाॅ सें अब हम् संग नहि रह सकते क्योंकि यहाॅ सें मेरेलिए ख़तरा शुरुआत थां। ख़ैर, उसकेबाद मे औऱ आदित्य बड़ी सावधानी व सतर्कता सें स्टेशन सें बाहर् कि तरफबढ़ चले। जबकि नीलमव सोनम दिदी हमारे बहुत पीछे पीछे आँ रही थि।
बाहर् आकर मैनेआस पास कां मुआयना किया तोँ मुझे एक् व्यक्ति हमारी तरफ हि आता दिखा। उसकी निगाह हमारी तरफ हि थि। मे उसे अपनीतरफ आतेदेख पहले तौ हड़बड़ा सां गय़ा, लेकिन जैसे हि वोँ कुछपास आया तोँ मे उसे पहचान गय़ा। वोँ रितू दिदी केँ पुलिस डिपार्टमेन्ट कां व्यक्ति थां। पासआते हि उसने मुझे अपने पीछेआने कां इशारा किया। मे औऱ आदित्य उसके पीछेचल दिये। मे आसपास भि नज़रें घुमारहा थां कि कहींकोई ऐसा व्यक्ति तौ यहाॅ मौजूद नहि हैं जोँ अजय सिंह सें संबंध रखता हौ। मगर मुझेऐसा कोई नज़र न् आया।
उस पुलिस वाले केँ पीछे चलतेहुए हम् एक् टीयटा वाहन केँ पास पहुॅचे। उस व्यक्ति नें हमें गाड़ी कि पिछली शीट पऱ बैठने कां इशारा किया। उसके इशारे पर्र हम् दोनो वाहन कां पिछला दरवाजा खोलकर अंदरबैठ गए। इसबीच वोँ पुलिस वाला भि ड्राइविंग शीट पर्र बैठ चुका थां। कुछ हि समय मे वाहन मंज़िल कि तरफबढ़ चली। गाड़ी केँ अंदरबैठ कर मैने एक् बार पीछे मुड़कर देखामगर नीलमव सोनम दिदी कहीं नज़र नं आईं मुझे। मे उन दोनों केँ लिए चिंतित भि थां कि वोँ गाॅव तक केसे जाएॅगी? हलाॅकि मुझेपता थां कि उन्हें लेनेकोई नं कोई बड़े बापू कां व्यक्ति आया हि होगा। मगर मे एक् बारपता कर लेना चाहता थां। इसलिए मैनेफोन निकाल कर नीलम कों मोबाइल लगाया। दूसरी रिंग पर्र हि नीलम नें मोबाइल उठा लिया। मैने उससे पूछा कि वोँ कहाॅ हैं अभि तौ उसने बताया कि उसकेडैड कां एक् व्यक्ति जीप लेकरआया हैं औऱ अब वोँ उसमें बैठकर गाॅव जाने वाली हैं। नीलम कि यहबात सुनकर मे बेफिक्र हौ गय़ा औऱ फिनकाल कटकर दि।
टोयटा गाड़ी तेज़ रफ्तार सें मंज़िल कि तरफ दौड़ी जारही थि। मैने रितू दिदी कों मोबाइल करके बताया कि मे उनके द्वारा भेजेगए व्यक्ति केँ संग आँ रहाहूॅ। रितू दिदी मेरीयह बातसुन करखुश हौ गईं औऱ कहनेलगी कि मे जल्द आँ जाऊॅ। मैने उन्हें नीलमव सोनम दिदी केँ बारे मे भि बताया औऱ ट्रेन मे हुईँ सारी बातों केँ बारे मे भि बताया। सारी बातें सुनकर वोँ पहले तोँ ख़ामोश रहींफिन बोलि चलो जौ हुआ अच्छा हि हुआ। रितू दिदी सें बात करने केँ बाद मैने जगदीश अंकल सें थोड़ी देरबात कि। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना वोँ कामकर दिया हैं जिसके लिए मैने उन्हें कहा थां। जगदीश अंकल सें बात करने केँ बाद मे धीरे-धीरे शीट कि पिछली पुश्त सें पीठ टिकाकर तथा ऑखेंबंद कर करीबलेट सां गय़ा। मेरे दिमाग़ मे आने वाले वक्त कि कई सारी बातें चलरही थीं।
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उससमय दोपहर केँ एक् याँ डेढ़बज रहे थें जबअजय सिंहकैब केँ द्वारा अपनी हवेली पहुॅचा थां। उसका दिलो दिमाग़ बुरीतरह भन्नाया हुआ थां। उसके अंदर इतना अधिक क्रोध भराहुआ थां कि अगर उसकाबस चले तौ सारी दुनियाॅ कों आगलगा देमगर अफसोस वो ऐसाकुछ भि नहि कर सकता थां। कुछकरे तौ तबजबउसे पता हौ कि करना किसके संग हैं? औऱ जिसके संग करना भि हैं तोँ वोँ हैं कहाॅ???
नीलम औऱ सोनम तोँ बारहबजे हि हवेली पहुॅच गई थीं। प्रतिमा अपनी बड़ी बेहन कि बेटी कों आज पहलीबार ऑखों केँ सामने देखकर बेहदखुश भि हुईँ थि औऱ थोडा दुखी भि। सोनम अपनी मौसी सें इसतरह मिली थि जैसे वो उससे पहलीबार नहि बल्कि पहले भि मिल चुकी होँ। शिवा तोँ अपनी मौसी कि बेटी सोनम कि हुस्न औऱ उसके साॅचे मे ढलेबदन कों देखकर आहें भरनेलगा थां। उसे अपनी मौसी कि लड़की पहली नज़र मे हि भा गई थि। उसकामन कररहा थां कि जाए औऱ उसे अपनी बाहों मे उठाकर सीधीबेड पऱ पटककर उसकेऊपर चढ़ बैठेमगर ऐसा संभव नहि थां। प्रतिमा अपने बेटे कि मनोदशा कों जल्दी हि घूर गई थि, इसलिए उसे अकेले मे लें जाकर समझाया थां कि वोँ ऐसीकोई भि हरकत नं करे जिससे उसकेसंग संग हम् सबकोबाद मे पछताना पड़े। प्रतिमा केँ समझाने पऱ शिवासमझ तौ गय़ा थां मगरयह तोँ वही जानता थां कि बहोत देर तक वोँ प्रतिमा केँ समझाने पऱ रह नहि पाएगा।
सफ़र कि थकान केँ कारण नीलमव सोनम नें नहाधो कर थोडा बहोत खानां खाया औऱ नीलम केँ कमरे मे दोनों एक् हि बेड पऱ सोगईं थि। उधरअजय सिंहकैब सें उतरकर कैब वाले कों उसका भाड़ा किराया दिया। यद्दपि उसकेपास पैसे केँ नाम पऱ चवन्नी भि नहि थि मगर जहाॅ सें उसे छोंड़ा गय़ा थां वहाॅ सें उसे इतना तौ पैसादे हि दिया गय़ा थां कि वोँ धीरे-धीरे अपनेघऱ पहुॅच जाए। उसकाफोन मोबाइल भि उसे वापस लौटा दिया गय़ा थां। यहअलग बात थि कि उसके मोबाइल सें सिम कार्ड निकाल लिया गय़ा थां औऱ मोबाइल केँ कैन्टैक्ट लिस्ट सें सारे मोबाइल नंबर्स डिलीट कर दियेगए थें। कहने कां मतलबयह कि उसकाफोन मोबाइल फिलहाल महज एक् डमीबन कररह गय़ा थां। नाँ तोँ वोँ किसी कों मोबाइल कर सकता थां औऱ नां हि उसकेपास किसी कां मोबाइल आँ सकता थां। यहीवजह थि कि अजय सिंह कां दिमाग़ बुरीतरह भन्नाया हुआ थां।
कैब सें जबअजय सिंह उतरा तोँ हवेली मे तैनात उसके व्यक्ति हैरान रहगए। भाग कर उसकेपास आए औऱ हाल अहवाल पूछने लगे। मगर भन्नाए हुएअजय सिंह नें सबको डाॅटडपट कर अपनेपास सें भगा दिया औऱ पांव पटकते हुए मुख्य दरवाजे केँ पहुॅचा। दरवाजे कों ज़ोर सें लात मारी उसने। दरवाजा कदाचित अंदर सें बंद नहि थां इसीलिए लात कां ज़ोरदार प्रहार पड़ते हि उसके दोनो पल्ले खुलते चलेगए। दरवाजे केँ खुलते हि अजय सिंह ज़मीन कों रौंदते हुए अंदर कि तरफबढ़ गय़ा।
उधर ड्राइंगरूम मे बैठी प्रतिमा बाहर् ज़ोर कि आवाज़ सुनकर चौंक पड़ी थि। अभि वो यह देखने केँ लिए सोफे सें उठने हि वाली थि सहसाउसे ठिठक जानां पड़ा। सामने सें आतेअजय सिंह पर्र नज़र पड़ते हि वो हैरत सें बुत सि बन गई। जबकि अजय सिंहआते हि सोफे पऱ धम्म सें करीबगिर सां पड़ा। धम्म कि आवाज़ सें हि प्रतिमा कि तंद्रा टूटी औऱ वो फिरकिनी कि मानिंद अपनी एड़ियों पर्र घूमी। सोफे पऱ पसरे अपने पति कों अस्त ब्यस्त हालत मे देखकर एक् बार वोँ पुनः हैरान हुइ फिन जैसे उसने स्वयं कों सम्हाला औऱ एकदम सें मानो बदहवाश सि होकरअजय सिंह कि तरफ तेज़ी सें बढ़ी।
"अ.अजय। "अजय सिंह केँ पास पहुॅचते हि वो लरजते हुए स्वर मे बोल पड़ी___"तु.तुम् अ आँ गए???"
प्रतिमा केँ इसतरह पूछने पर्र अजय सिंहकुछ न् बोला बल्कि अपनी ऑखेंबंद किये सोफे कि पिछली पुश्त सें पीठ टिकाए अधलेटा सां पसरारहा। उसकेकुछ न् बोलने पर्र प्रतिमा बुरीतरह घबरा गई। वोँ झट सें अजय सिंह केँ बगल सें बैठी औऱ अजय सिंह केँ कंधे पऱ अपना एक् हाॅथ रखतेहुए बोलीं___"तुम् कुछ बोलते क्यूं नहि अजय? तुम् ठीक तोँ हौ न्? औऱ.औऱइस तरह अचानक तुम् वहाॅ सें केसे आँ गए?"
प्रतिमा केँ दूबारा पूछने पऱ भि अजय सिंहकुछ न् बोला। उसकीयह ख़ामोशी प्रतिमा कि मानोजान लिएजा रही थि। उसकागला भरआया। आवाज़ भारी होँ गई तथा ऑखों मे ऑसू उमड़आए।
"अजऽऽऽय। " फिन उसने रुॅधे हुएगले सें लेकिन अजय सिंह कों झकझोरते हुए करीब-करीब चीख हि पड़ी___"क्याँ हौ गय़ा हैं तुम्हें? कुछ तौ कहो। तुम् इसतरह यहाॅ केसे आँ गए? तुम् तौ सीबीआई कि गिरफ्त मे थें न् फिन तुम् यहाॅ केसे? कहीं.कहीं तुम् उनकी गिरफ्त सें भागकर तोँ नहि आँ गए होँ? अगरऐसा हैं तौ यह तुमने ठीक नहि कियाअजय। कानून तुम्हें इसकेलिए मुआफ़ नहि करेगा। बल्कि इसतरह भागकर आने सें तुम्हें शख्त सें शख्त सज़ा देगा। "
"मे कहीं सें भागकर नहि आयाहूॅ प्रतिमा। " अजय सिंह नें सहसा खीझते हुए कहा___"बल्कि मुझेउन लोगों नें स्वयं हि छोंड़ दिया हैं। "
"क.क.क्याँ????" प्रतिमा बुरीतरह उछल पड़ी___"उन लोगों नें तुम्हें खद हि छोंड़ दिया?ऐसा केसे हौ सकता हैं? सीबीआई केँ वोँ लोग तुम्हें ऐसे केसे छोंड़ सकते हें? बातकुछ समझ मे नहि आईअजय। आख़िर यह क्याँ माज़रा हैं? क्याँ चक्कर हैं यह?"
"सचकहा प्रतिमा। " अजय सिंह अजीबभाव सें कह उठा___"यह चक्कर हि तौ हैं। "
"क्याँ मतलब??" प्रतिमा चौंकी।
"सच्चाई सुनोगी तोँ तुम्हारे पैरों तले सें यह ज़मीन गायब होँ जाएगी। " अजय सिंह नें कहा___"यह सीबीआई कां जौ मामला हुआ हैं न् यहसभी महज एक् चाल थि मुझे किसी मकसद केँ तहतइस सबसेदूर करकेकैद करने कि। "
"यह क्याँ कहरहे तुम् अजय?" प्रतिमा कि केँ चेहरे पऱ आश्चर्य मानो ताण्डव करनेलगा थां___"यह सभी एक् चाल थि? पता नहि क्याँ अनाप शनापबोल रहे हौ तुम्। "
"मे अनाप शनाप नहि बोलरहा प्रतिमा। " अजय सिंह नें सहसा आवेश मे आकर कहा___"यही सच हैं। जौ सीबीआई वाले मुझे गिरफ्तार करनेआए थें वोँ सभी नकली थें। उनका सीबीआई सें कोई ताल्लुक नहि थां। जबकि मे औऱ तुम् सभीयही समझे थें कि वोँ सभी सीबीआई केँ ऑफिसर थें। "
"हे ईश्वर। " प्रतिमा नें मुख सें बेशाख्ता निकल गय़ा___"इतना बड़ा धोखा। अगर वोँ सीबीआई केँ लोग नहि थें तौ फिनकौन थें वोँ? औऱ वोँ लोग तुम्हें यहाॅ सें पकड़कर क्यूं लें गए थें औऱ कहाॅ लेँ गए थें? आख़िर यहसभी करने केँ पीछे उनका क्याँ मकसद थां? कहींयह सभी हमारी बेटी रितू नें तोँ नहि करवाया?"
"नहि प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा___"यह काम रितू कां नहि हैं बल्कि यहसभी उस हरामज़ादे विराज कियाधरा थां। "
"यह क्याँ कहरहे हौ तुम्?" प्रतिमा बुरीतरह चौंकी थि, बोलि___"भला वोँ यहसभी केसेकर सकता हैं?"
"क्यूं नहि कर सकता?"अजय सिंह उल्टा प्रतिमा पऱ हि हवाल लेकरचढ़ बैठा___"तुम्हीं तौ कहा करती थि नं कि इस सबके पीछेअगर कोई हौ सकता हैं तौ वोँ हैं विराज। वही हैं जोँ हमारा अहित करना चाहता हैं क्योंकि हमने उसकेसंग अत्याचार किया हैं?"
"हाॅमगर। " प्रतिमा गड़बड़ा सि गई___"यहसभी भि कर सकता हैं वोँ यह तौ नामुमकिन सि बात हैं अजय। "
"यह सभीउसी नें करवाया हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा___"क्योंकि जिस स्थान मुझेरखा गय़ा थां वोँ सभीउसी कां ज़िक्र कररहे थें। मे यहसोच सोचकर आश्चर्यचकित थां कि उस नामुराद केँ ऐसे लोगों सें संबंध केसे होँ सकते हें। आख़िर वोँ कमीना इतनेकम टाइम मे ऐसाकौन सां सूरमा बन गय़ा हैं जिसके इशारे पर्र उसकाहर काम हौ जाए?"
"तुम् क्याँ कहरहे होँ अजय मुझेकुछ भि समझ मे नहि आँ रहा। " प्रतिमा नें अपनेबाल नोंच लेने वाले अंदाज़ सें कहा थां।
"कमाल कि बात हैं। " अजय सिंह नें कहा___"अपने आपको दिमाग़ कि जादूगरनी समझने वाली कों आज मेरीयह बातें समझ मे हि नहि आँ रहीं। ख़ैर, बात यह हैं यह जोँ कुछ भि हुआ हैं उसमें केवल औऱ मात्र उस गौरी केँ पिल्ले कां हि हाॅथ हैं। मुझेयह नहि समझ मे आँ रहा कि उस कमीने नें आख़िर किस मकसद केँ तहत मुझेदो दिन केँ लिए सीबीआई केँ नकलीजाल मे फॅसाकर कैद मे रखा औऱ फिनआज छोंड़ भि दिया। "
"यह तौ सचमुच बड़े आश्चर्य कि बात हैं अजय। " प्रतिमा नें चकितभाव सें कहा___"सचमुच यह सोचने वालीबात हैं कि उसनेकिस वजह सें ऐसा किया होगा? हलाॅकि वोँ चाहता तोँ बड़ी आसानी अपना बदला तुम्हारी जान लेकर लेँ सकता थां औऱ तुम् यकीनन कुछ नहि कर सकते थें। मगर उसनेऐसा कुछ भि नहि किया बल्कि उल्टा तुम्हें बिनाकोई नुकसान पहुॅचाए छोंड़ भि दिया। यह ऐसीबात हैं अजय जोँ आसानी सें हजम नहि हौ सकती। हम् जिस चीज़ कों बेतुकी औऱ नां क़ाबिले ग़ौरबात समझरहे हें उसमें कुछ तोँ पेंच अवश्य हैं। बेवजह तोँ औसनेयह सभी नहि किया होगा। अवश्य यहसभी करके उसने अपनाकोई अहम कार्य सिद्ध किया होगा। कोई ऐसा कार्य जोँ फिलहाल हमारी सोच क्याँ कल्पना सें भि कोसों दूर हैं। "
"यकीनन तुम्हारी बात मे सच्चाई हैं। " अजय सिंह नें कहा___"इस सबसे एक् बातयह भि ज़ाहिर होती हैं कि वोँ अब भि यहीं हैं औऱ शायदइस समय रितू केँ संग हि हैं। "
"अच्छा यह बताओ। " प्रतिमा नें पहलू बदला___"कि जोँ सीबीआई केँ लोगबन करआए थें वोँ लोग तुम्हें लेकर कहाॅगए थें?"
"इस बारे मे मुझेकुछ भि नहि पताचल सका। "अजय सिंह नें हताशभाव सें कहा थां।
"क्याँ मतलब??" प्रतिमा पुनः बुरीतरह चौंकी थि।
"उन लोगों नें सभीकुछ पहले सें प्लान कियाहुआ थां प्रतिमा। " अजय सिंह नें गहरी साॅस ली___"जब वोँ लोग मुझे यहाॅ सें अपनी वाहन मे बैठाकर लेँ जारहे थें तभी किसी नें पीछे सें मुझे बेहोश कर दिया थां औऱ फिनजब मेरीऑख खुली तोँ मुझेकुछ भि समझ मे नहि आया कि मे किस स्थान आँ गय़ा हूॅ? वहाॅजिस स्थान पर्र मे थां वहाॅ एक् रूम थां जोँ कि किसी फाइव स्टार होटल केँ कमरे सें हर्गिज़ भि कम नं थां। कमरे मे दूसरा कोई नहि थां। ऐसा नहि थां कि मे वहाॅ पर्र कहीं आँ जा नहि सकता थां। बल्कि कहीं भि आँ जा सकता थां मगरउस स्थान सें बाहर् कि दुनियाॅ मे जाने कां जैसेकोई मार्ग हि नहि थां। कमरे सें बाहर् जहाॅ भि गय़ा हरतरफ ब्लैक कलर कि वर्दी मे नकाबपोश अपने हाथों मे गनलिए तैनात थें। वोँ किसी सें कोईबात नहि करते थें। जोँ सीबीआई केँ ऑफिसर बनकरआए थें उनका कहींपता हि नहि थां। मे उन गनधारी नकाबपोशों सें चीखचीख कर पूछता रहा कि मुझे यहाॅकिस लिए लाया गय़ा हैं मगरकोई कुछ बोलता हि नहि थां। उसदिन तौ सारादिन औऱ रात मे पागलों कि तरह हि उन सबके सामने चीखता चिल्लाता रहा। फिन जब मुझेलगा कि यहाॅ पऱ मेरे चीखने चिल्लाने कां कोईअसर नहि होने वाला तोँ मे ख़ामोश हौ गय़ा। इतना तौ मुझे भि पता थां कि वजहकोई भि हौ वोँ मेरे सामने अवश्य आएगी। इस लिएयह सोचकर मे वापस कमरे मे चला गय़ा औऱ अपने वहाॅ होने कि वजह जानने कां इन्तज़ार करनेलगा। वहाॅ पऱ जब भि मुझे किसी चीज़ कि ज़रूरत होती वोँ मुझेमिल जाती थि। मे आज़ाद तौ थां मगरफिन भि कैद हि थां वहाॅ। मेराफोन मोबाइल मेरेपास सें गायब थां। अतः मे किसी अपने सें कोई काॅटैक्ट भि नहि कर सकता थां। "
"ओह तौ फिनआज तुम्हें उन लोगों नें केसे छोंड़ दिया?" प्रतिमा नें पूछा___"क्याँ तुम्हें पताचला कि उन लोगों नें तुम्हें क्यूं पकड़ा थां? औऱ सबसे बड़ीबात यह कि तुम्हें यह केसेपता चला कि वोँ सभी विराज कां कियाधरा थां?"
"आज हि पताचला। " अजय सिंह नें कहा___"मे वहाॅ पर्र कमरे मे रखे अलीशान बेड पर्र लेटाहुआ थां कि तभी कमरे मे दो गनधारी नकाबपोश आए औऱ मैने पहलीबार उनकेमुख सें उनकी आवाज़ सुनी। उनमें सें एक् नें कहा कि मे बाहर् आऊ। मुझसे मिलने उनकेकुछ साहबलोग आए हें। मे उस गनधारी नकाबपोश कि यहबात सुनकर जल्द सें बेड पऱ उठ बैठा। अड़तालीस घंटे मे यह पहला अवसर थां जब मुझे किसी सें यह जानने कां अवसर मिलने वाला थां कि मुझे यहाॅ क्यूं लाया गय़ा हैं? अतः मे उन दोनो गनधारियों केँ संग कमरे सें बाहर् आँ गय़ा। बाहर् लंबे चौड़े हाल केँ बीचोबीच एक् मध्यम साइज़ कि टेबलरखी थि तथा उसके चारोतरफ कुर्सियाॅ रखी हुईँ थि। मैने टेबल औऱ कुर्सियाॅ उसहाल मे पहलीबार हि देखा थां। टेबल केँ एक् तरफ कि चारों कुर्सियों पऱ एक् एक् कोटधारी व्यक्ति बैठा थां। मे जब उनकेपास पहुॅचा तौ उनमें सें एक् नें मुझे अपने सामने बैठने कां इशारा किया। यह वहीलोग थें जौ मुझे यहाॅ सें सीबीआई ऑफिसर बनकर लें गए थें। सच कहूॅ तोँ उस वक़्त उन चाओं कों देखकर मुझे बेहद क्रोध आयामगर मैंने फिन स्वयं पऱ बड़ी मुश्किल सें काबू किया।
"बोलोअजय सिंह। "उन चार मे सें एक् नें बड़ी जानदार मुस्कान केँ संग मुझसे कहा___"यहाॅ किसी प्रकार कि कोई तकलीफ़ तौ नहि हुइ न् तुम्हें?"
"मेरी तकलीफ़ कि अगर इतनी हि फिक्र होती तुम् लोगों कों। " मैने आवेशयुक्त भाव सें कहा___"तोँ मुझेइस तरह धोखे सें पकड़कर नहि लाते यहाॅ। "
"ओह आई सि। " उसनेखेद प्रकट करतेहुए कहा__"क्षमा करनाअजय सिंह। हमें तुम्हारे संग धोखे केँ रूप मे वोँ वैसी ज्यादती करनी पड़ी। मगर इसमें भि हमारी कोई ग़लती नहि थि डियर। दरअसल हमारे विराज सर कां हि आदेश थां हम् तुम्हें इस प्रकार हवेली सें गिरफ्तार करके यहाॅ लेँ आएॅ। "
"वि.विराज.सर???" मे उसकीयह बातसुन कर एकदम सें भौचक्का सां रह गय़ा थां।
"अरे तुम् हमारे विराज सर कों नहि जानते क्याँ?" एक् अन्य नें मुस्कुराते हुए कहा___"कमाल हैं अजय सिंह। तुम् अपने भतीजे कों हि नहि जातने। यह तौ बड़ी हैरत कि बात हैं। जबकि हमारे विराज सर तुमसे इतना स्नेह व लगाव रखते हें कि वोँ तुम्हें यहाॅ पर्र किसी भि तरह कि तक़लीफ़ नहि देना चाहते थें। उनका शख्त आदेश थां कि तुम्हें यहाॅ पर्र किसी भि तरह कि कोई तकलीफ़ नं होनेपाए। तभी तोँ हमने उनके कहने पर्र तुम्हारे लिए यहाॅ फाइव स्टार होटल सें भि बेहतर सुविधाएॅ मुहैया कराई थि। "
"तोँ तुम्हारा मतलब हैं कि यहसभी तुमने विराज केँ आदेश पऱ किया हैं?" मे मन हि मन हैरान थां, लेकिन प्रत्यक्ष मे कठोरभाव सें पूछरहा थां___"मगर क्यूं?"
"तुम्हारे इस क्यूं कां जवाब तोँ हमारे पास हैं हि नहि अजय सिंह। "उस व्यक्ति नें कहा___"हमने तोँ बस उतना हि किया हैं जितना कि विराज सर नें हमें करने केँ लिएकहा थां। इसके पीछे उनकी क्याँ मंशा थि यह तोँ वहीं बेहतर तरीके सें बता सकते हें तुम्हें। "
"अच्छा। " मैने कहा___"तोँ फिन बुलाओ उसे। मे उससे पूछना चाहता हूॅ कि उसने क्याँ सोचकर यहसभी किया हैं?"
"उन्हें यहाॅ बुलाने कि हिम्मत तौ हममें नहि हैं। " एक् अन्य नें कहा___"हाॅ मगर एक् आदेश औऱ आया हैं उनका हमारे लिए। वोँ यह कि तुम्हें बाइज्ज़त यहाॅ सें आज़ाद कर दियाजाए। इसलिए अब हम् वही करने वाले हें। यानी कि अब तुम्हें आज़ाद कर दिया जाएगा। मगर क्योंकि हम् अपनाहर काम सीक्रेट तरीके सें करते हें इसलिए तुम्हें पुनः बेहोश करना पड़ेगा हमें। "
मे उसकीयह बात सुनकर बुरीतरह हैरान रह गय़ा। तभी किसी नें पीछे सें मेरी नाॅक मे कुछलगा दिया। जैसे हि मैने नाॅक सें साॅसली उसकेकुछ हि पलोंबाद मे बेहोशी केँ समंदर मे डूबता चला गय़ा। जब मेरीऑख खुली तोँ मे अब किसी दूसरी स्थान पर्र स्वयं कों मौजूद पाया। मेरेआस पास बड़े बड़े पेड़ पौधेलगे हुए थें। मे यहदेख कर पहले तौ चौंका फिनउठ करआसपास कां जायजा लेनेलगा। मे यहदेख करउछल पड़ा कि मे किसी जंगल केँ हिस्से पऱ पड़ा थां। बाएॅतरफ करीब-करीब पचास याँ साठगज कि दूरी पऱ हि एक् मार्ग नज़र आँ रही थि।
अस्त ब्यस्त हालत मे मे कुछदेर वहीं पर्र बैठा अपनेसंग घटी पिछली सब बातों केँ बारे मे सोचता रहा। उसकेबाद मे किसीतरह उठा औऱ कुछ दूरी पऱ नज़र आँ रही मार्ग कि तरफचल दिया। मे यहसमझ चुका थां कि उन लोगों नें मुझे आज़ाद कर दिया थां। मुझे बेहोश इसलिए किया गय़ा थां ताकि मे उस स्थान केँ बारे मे कतई नं जान सकूॅ कि उन लोगों नें मुझे कहाॅ पर्र रखा थां। मे यह भि समझ चुका थां कि मे चाहकर भि अबउन लोगों तक नहि पहुॅच सकता जोँ लोग नकली सीबीआई केँ ऑफिसर बनकर हवेली सें मुझे गिरफ्तार करके लेँ गए थें।
मार्ग पर्र आकर मे किनारे पऱ हि खड़ा हौ गय़ा औऱ मार्ग केँ दोनोतरफ देखने लगा। मुझा अपनेफोन कां ख़याल आया तौ अनायास हि मेरे दोनोहाथ मेरी पैंट केँ दोनो पाॅकेट पऱ रेंगगए। मे यहजान कर चौंका तथा हैरान हुआ कि फोन मेरीबाई पाॅकेट मे मौजूद हैं। मैने जल्द सें उसे निकाला औऱ स्विच ऑन किया। मगर मे यहदेख कर भौचक्का रह गय़ा कि मोबाईल मे मौजूद दोनोसिम कार्ड गायब थें। उसमे नेटवर्क होने कां प्रश्न हि नहि थां। मैने मोबाइल मे काॅटैक्ट लिस्ट देखा तौ मेरेहोश उड़गए। क्योंकि उसमे सें सारे नंबर टिलीट कर दियेगए थें। कहने कां मतलबयह कि मे मौजूदा हालत मे किसी कों नाँ तोँ मोबाइल कर सकता थां औऱ नां हि मेरेफोन मोबाइल पऱ किसी कां मोबाइल आँ सकता थां। यहदेख कर मेराखून खौल गय़ा। उन लोगों पर्र मुझे भयानक क्रोध आँ गय़ा। ऊपर सें सालेऐसी स्थान मुझे फेंक दिया थां जहाॅ सें किसी गाड़ी कां आनां जानां भि करीब न् केँ बराबर थां।
मार्ग पऱ मे घंटों खड़ारहा किसीकार केँ इन्तज़ार मे मगरकोई भि कारआता जाता नज़र न् आया। प्रतिपल उस हालत मे मेरे अंदर क्रोध बढ़ता हि जारहा थां। आख़िर डेढ़ घंटे इन्तज़ार करने केँ बाद एक् कैबआती हुइ नज़रआई। उसेदेख कर मुझे थोड़ी राहत तौ हुइ मगर अगले हि लम्हा यहसोच कर मे मायूस हौ गय़ा कि इस वक़्त किसी गाड़ी मे जाने केँ लिए मेरेपास फूटी कौड़ी भि नहि हैं। इसके बावजूद मैने अपनीसब पाॅकेट पर्र हाॅथ फेरा औऱ अगले हि लम्हा मे चौंका। पैन्ट कि पिछली जेब मे मुझेकुछ महसूस हुआ। मैने जल्दी हि उस चीज़ कों निकाला तौ मुझे एक् पाॅचसौ कां नोट नज़रआया।
पाॅचसौ कां नोटउस टाइम मे इसतरह देखरहा थां जैसे मैनेकभी उसे देखा हि न् होँ औऱ सोचने लखा थां कि इस प्रकार कां यह काग़ज आख़िर हैं क्याँ चीज़? ख़ैर, वोँ कैबजब मेरे क़रीब पहुॅचने कों हुई तौ मैनेउसे रुकने केँ लिए हाॅथ सें इशारा किया। मेरे इशारे पर्र वोँ कैब मेरेपास पहुॅच कररुक गई। मैने देखा कि उसमें जोँ ड्राइवर थां वोँ कोई पैंतीस केँ आसपास कां काला सां व्यक्ति थां। कैब कों रुकते हि उसने विंडो सें अपनासिर बाहर् कि तरफ निकाल कर मुझसे पूछा कहाॅ जानां हैं? मैनेउसे पता बताया तौ उसने अंदर बैठने कां इशारा किया। मगर उससे पहलेयह बताना न् भूला थां कि भाड़ा पाॅचसौ रुपये लगेगा। मे उसके भाड़े कां सुनकर मन हि मन चौंका। मगर बोलायही कि ठीक हैं भइया लें लेनामगर मुझे बताएगए पते पर्र पहुॅचा दो। बसयह किस्सा थि। "
"बड़ी हैरतव बड़ी अजीब स्टोरी हैं। " प्रतिमा नें सोचने वालेभाव सें कहा___"इसका मतलबउन लोगों नें तुमें ऐसी स्थान छोंड़ा थां जहाॅ सें अगरकोई कार मिलता भि तोँ वोँ तुमसे भाड़े केँ रूप पाॅचसौ रुपये हि माॅगता औऱ इसीलिए उन लोगों नें तुम्हारी जेब मे पाॅचसौ रुपये डाल दिये थें ताकि तुम् धीरे-धीरे यहाॅ तक पहुॅच सको। यह तोँ कमाल हि होँ गय़ा अजय। "
"कमाल तोँ हौ हि गय़ा। " अजय सिंह नें सोचने वाले अंदाज़ मे कहा___"मगर मुझेऐसा लगता हैं जैसे वोँ कैब वाला भि साला उन्हीं कां व्यक्ति थां। क्योंकि जिस रास्ते पर्र वोँ मिला थां उस रास्ते पर्र डेढ़ घंटे इन्तज़ार करने केँ बाद हि उसकैब केँ रूप मे गाड़ी मिला थां। कैब पर्र कोई दूसरी सवारी नहि थि बल्कि ड्राइवर केँ अलावा सारीकैब खाली हि थि। "
"बिलकुल ऐसा हौ सकता हैं अजय। " प्रतिमा केँ मस्तिष्क मे जैसे झनाका सां हुआ थां, बोलीं___"यकीनन वोँ कैब औऱ वोँ कैब ड्राइवर उन लोगों कां हि व्यक्ति थां। अगरऐसा हैं तोँ इसका मतलबयह भि हुआ कि पाॅचसौ पैसा जहाॅ सें आया थां तुम्हारे पास वोँ वापस वहींलौट भि गय़ा। क्याँ कमाल कां गेम खेला हैं उन लोगों नें। "
"उन लोगों नें नहि प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा___"बल्कि उस हरामज़ादे विराज नें। मुझे तोँ अब तक यकीन नहि होँ रहा कि वोँ सभी विराज केँ व्यक्ति हें औऱ विराज केँ हि हुकुम पऱ उन लोगों नें यह संगीन कारनामा अंजाम दिया थां। तुम् हि बताओ प्रतिमा क्याँ तुम् सोच सकती होँ कि कल कां छोकरा कहीं पर्र बैठे बैठेऐसा कोई कारनामा कर सकता हैं?"
"बेशक नहि सोच सकतीअजय। " प्रतिमा नें गंभीरता सें कहा___"मगर शुरुआत सें लेकरअब तक कि उसकी सारी गतिविधियाॅ ऐसीरही हें कि अबअगर वोँ कुछ भि अविश्वसनीय करे तौ सोचाजा सकता हैं। इससे एक् बातयह भि साबित होती हैं कि वोँ कोई मामूली चीज़ नहि रह गय़ा हैं। याँ तोँ उसे किसी पहुॅचे हुए ब्यक्ति कां आशीर्वाद प्राप्त हैं याँ फिनसच मे वोँ इतना क़ाबिल होँ गय़ा हैं कि वोँ आज केँ टाइम मे हर चीज़ अफोर्ड कर सकता हैं। "
"यही तौ हजम नहि होँ रहा प्रतिमा। " अजय नें झुंझलाहट केँ मारे कहा___"इतने कम टाइम मे आख़िर उसनेऐसा क्याँ पा लिया हैं जिसके बलबूते पऱ वोँ कुछ भि कर सकने कि क्षमता रखता हैं? आज केँ वक़्त मे सच्चाई औऱ नेकीकक राह पऱ चलतेहुए इतनी बड़ी चीज़ अथवा कामयाबी नहि पाईजा सकती। अवश्य वोँ कोई ग़लतकाम कररहा हैं। हाॅ प्रतिमा, ग़लत कामों केँ द्वारा हि कम टाइम मे बड़ी बड़ी चीज़ें हाॅसिल होती हें, फिनभले हि चाहेउन बड़ी बड़ी चीज़ों कि ऊम्र छोटी हि क्यूं न् होँ। "
"यकीनन अजय। " प्रतिमा नें कहा___"ऐसा हि लगता हैं। मगर सबसे बड़े प्रश्न कां जवाब तौ अभि तक नहि मिला नं। "
"कौन सां प्रश्न?" अजय सिंह चौंका।
"यही कि उसने तुम्हारे संग। " प्रतिमा नें कहा___"मेरा मतलब हैं कि उसने तुम्हें नकली सीबीआई वालों केँ द्वारा गिरफ्तार करवा केँ दोदिन तक किसी गुप्त कैद मे रखा तौ इसमें उसका क्याँ मकसद छिपा थां? आख़िर उसने तुम्हें कैद करवा केँ अपनाकौन सां उल्लू सीधा किया होँ सकता हैं? हमारे लिएयह जानना बेहद ज़रूरी हैं अजय। आख़िर पता तोँ चलना हि चाहिए इस सबका। "
"पता चलना तोँ चाहिए। " अजय सिंह नें कहा___"मगर केसेपता चलेगा? हमारे पासऐसा कोई छोटा सें भि छोटा सबूत याँ क्लू नहि हैं जिसके आधार पर्र हम् कुछजान सकें। "
"एक् प्रश्न औऱ भि हैं अजय। " प्रतिमा नें कुछ सोचते हुए कहा___"जौ कि कुछ दिनों सें मेरे दिमाग़ मे चुभ सां रहा हैं। "
"ऐसाकौन सां प्रश्न हैं भला?"अजय सिंह केँ माथे पर्र शिकन उभरी।
"यही कि हमारी बेटी रितू। " प्रतिमा नें कहा___"जब सें हमसे खिलाफ़ हुई हैं तब सें वोँ घऱ वापस नहि आई। तोँ प्रश्न यह हैं कि वोँ रहती कहाॅ हैं? मुझे लगता हैं कोईऐसी स्थान अवश्य हैं जहाॅ पर्र वोँ नैना औऱ विराज केँ संगरह रही हैं। ऐसीकौन सि स्थान हौ सकती हैं?"
प्रतिमा कि इसबात सें अजय सिंहउसे इसतरह देखता रह गय़ा थां मानो प्रतिमा केँ सिर पऱ अचानक हि दिल्ली कां लाल किलाआकर खड़ा हौ गय़ा होँ। फिन जैसाउसे होशआया।
"प्रश्न तोँ यकीनन वजनदार हैं। " फिनअजय सिंह नें कहा___"मगर संभव हैं कि वोँ यहीं कहींआस पास हि किसी केँ घऱ मे रूम किराये पर्र लिया हौ औऱ हमारे पासरह कर हि वोँ हमारी हर गतिविधी पर्र बारीकी सें नज़ररख रही होँ। "
"हौ सकता हैं। " प्रतिमा नें कहा___"मगर हमारे इतने क़रीब रहने कि बेवकूफी वोँ हर्गिज़ भि नहि कर सकती जबकि उसे बखूबी अंदाज़ा होँ कि पकड़े जाने पऱ उसकेसंग संग नैना औऱ विराज कां क्याँ हस्र होँ सकता हैं। इसलिए इस गाॅव मे वोँ किसी केँ घऱ मे पनाह नहि लें सकती। "
"इस गाॅव मे नं सही। "अजय सिंह बोला___"किसी ऐसे गाॅव मे तोँ पनाह लें हि सकती हैं जोँ हमारे इस हल्दीपुर गाॅव केँ लगभग भि हौ औऱ वोँ बड़ी आसानी सें हमारी हर मूवमेन्ट कों कवरपकर सके। "
"हाॅ यह हौ सकता हैं। " प्रतिमा नें कहा___"किसी दूसरे गाॅव मे वोँ यकीनन रहरही हैं औऱ हम् पर्र बारीकी सें नज़ररखे हुए हैं। ख़ैर छोंड़ो यहसभी बातें, मे यहकहरही हूॅ कि आज तुम्हारे ससुरजी जी आँ रहे हें। "
"क क्याँ???" अजय सिंहउरी तरह चौंका___"स ससुरजी जी? मतलब कि तुम्हारे पिता जगमोहन सिंहजी??"
"हाॅ डियर। " प्रतिमा नें सहसाखुश होतेहुए कहा___"आज वर्षों बाद मे अपने पिता जी सें मिलूॅगी। मगरअजय मुझे अंदर सें ऐसालग रहा हैं जैसे मे उनके सामने जा हि नहि पाऊॅगी। तुम् तोँ जानते हौ कि मैने तुमसे विवाह उनकी मर्ज़ी केँ खिलाफ़ जाकरतथा उनसेहर नाता तोड़कर कि थि। इतने वर्षों केँ बीचकभी भि मैने उनसे न् मिलने कि कोशिश कि औऱ नां हि कभी उनसे मोबाइल पर्र बात करने कि। यह एक् अपराध बोझ हैं अजय जिसके चलते मुझमें हिम्मत नहि हैं कि मे अपने पिता कां सामना कर सकूॅ। "
"पऱ मे इसबात सें हैरान हूॅ। "अजय सिंह नें चकितभाव सें कहा___"कि इतने वर्षों बाद उन्हें अपनी बेटी कि याद केसेआई औऱ यहाॅआने कां विचार केसेआया उनकेमन मे?"
"यहसभी मेरीवजह सें हि हुआ हैं अजय। " प्रतिमा नें कहा___"दरअसल जब तुम्हें सीबीआई केँ वोँ लोग गिरफ्तार करके लेँ गए थें तब मे बहोत परेशान व घबरा गई थि। मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा थां कि केसे मे तुम्हें सीबीआई कि कैद सें आज़ाद कराऊॅ? तब पहलीबार मुझे अपने पिता कां ख़याल आया। हाॅ अजय, तुम् तौ जातने होँ कि मेरे पिता जी बहोत बड़े वकील हें। कैसा भि केस होँ उनके अंडर मे आने केँ बाद उनका मुवक्किल बाइज्ज़त बरी हि होता हैं। इसलिए मैने सोचा कि तुम्हें कानून कि उस गिरफ्त सें छुड़ाने केँ लिए मुझे अपने पिता सें हि सहायता लेनी चाहिए। मगर चूॅकि मैने उनसे अपने हारे संबंध वर्षों पहले हि तोड़ लियेइस लिए हिम्मत नहि हौ रही थि उनसेबात करने कि। "
"ओह। "अजय सिंह हैरत सें बोला___"फिन क्याँ हुआ?"
अजय सिंह केँ पूछने पऱ प्रतिमा नें सारा किस्सा बता दियाउसे। यह भि कि केसे उसके चक्कर खाकर गिरने पर्र शिवा नें रिऐक्ट किया जिसके तहत उसके पिता जी भि घबरागए औऱ फिन उन्होंने जल्दी यहाॅआने केँ लिएकहा। उनके पूछने पर्र हि शिवा नें उन्हें यहाॅ कां पता भि बताया थां। सारी बातें सुनकर अजय सिंह अजीब सि हालत मे सोफे पर्र बैठारह गय़ा।
"यह तुमने अच्छा नहि किया प्रतिमा। " फिनअजय सिंह मानो गंभीरता कि प्रतिमूर्ति बना बोला___"मे इसबात सें दुखी नहि हुआहूॅ कि मेरे सुसर औऱ तुम्हारे यहाॅ आँ रहे हें बल्कि दुखीइस बात पऱ हुआहूॅ कि ऐसे हालात मे उनका आगमन होँ रहा हैं। तुमें तोँ सभीपता हि हैं डियर हमारे हालातों केँ बारे मे। तुम्हारे पिता एक् तेज़ तर्रार व क़ाबिल वकील हें तथा उनका दिमाग़ तेज़गति सें काम करता हैं। इसलिए अगरइस हालातों केँ संबंध मे कोई एक् बात शुरुआत हुई तौ समझलो कि फिनउस बात सें औऱ भि बहोत सि बातें शुरुआत होँ जाएॅगी। उस सूरत मे हमारी हालत औऱ भि ख़राब होँ सकती हैं। हम् भलायह केसेचाह सकते हें कि हमारी असलियत उनके सामने फ़ाश हौ जाए?"
"तुम् सचकहरहे हौ अजय। " प्रतिमा कों भि जैसे वस्तु- स्थिति कां एहसास हुआ___"इस बारे मे तौ मैने सोचा हि नहि थां। सोचने कां ख़याल हि नहि आयाअजय। हालात हि ऐसे थें कि मुझे मजबूर होँ कर अपने पिता डी सें बात करनी पड़ी औऱ उन्होंने यहाॅआने कां भि कह दिया। दूसरी बात मुझे तोँ यह सपने मे भि उम्मीद नहि थि कि तुम् आज वापसइस तरह आँ जाओगे। वरना मे अपने पिता कों मोबाइल हि नहि करती। "
"इसमें तुम्हारी कोई ग़लती नहि हैं डियर। "अजय सिंह नें गहरी साॅस ली___"तुमने जोँ कुछ भि किया उसमें केवल तुमहारी अपने पति केँ प्रति चिंता व फिक्र थि। ख़ैरअब जोँ हौ गय़ा सो होँ गय़ा मगरअब हमें बड़ी हि होशियारी औऱ सतर्कता सें काम लेना होगा। तुम् उन्हें यह नहि बताओगी कि कल तुमने उन्हें किसवजह हे मोबाइल किया थां बल्कि यही कहोगी कि तुम्हें उनकी बहोत याद आँ रही थि। दूसरी बात शिवा कों भि समझादो कि वोँ उनके सामने ऐसीकोई भि बात न् करे जिससे किसी भि तरह कि बात खुलने कां चाॅसबन जाए। "
"हमारी दूसरी बेटी नीलम भि तौ आज आँ गई हैं मुम्बई सें। " प्रतिमा नें कहा___"इतना हि नहि उसकेसंग मे मेरी बेहन कि बेटी सोनम भि हैं। "
"क्याँ????" अजय सिंह चौंका।
"हाॅअजय। " प्रतिमा नें बेचैनी सें कहा___"वोँ दोनोऊपर कमरे मे इससमय सोरही हें। "
"अरे तोँ तुम् उनकेपास जाओ। "अजय सिंह एकदम सें फिक्रमंद होँ उठा थां, बोला___"औऱ उन दोनो कों अच्छी तरह समझादो कि वोँ दोनो अपने नानाजी जी केँ सामने हालातों केँ संबंध मे किसी भि तरह कि कोईबात नहि करेंगी। "
"ठीक हैं। " प्रतिमा नें सोफे सें उठतेहुए कहा___"मे अभि जातीहूॅ उनकेपास औऱ सभीकुछ समझाती हूॅ उन्हें। "
यहकहकर प्रतिमा तेज़ तेज़ क़दमों केँ संगऊपर केँ कमरे मे जाने केँ लिए सीढ़ियों कि तरफबढ़ गई। जबकि उसके जाने केँ बादअजय सिंह एक् बाथ पुनः असहाय सां सोफे कि पिछली पुश्त सें पीठ टिकाकर पसर गय़ा थां। चेहरे पर्र चिंता व तकलीफ़ केँ भाव गर्दिश करतेहुए नज़र आँ रहे थें।
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दोस्तो, आप् सबके सामने भाग हाज़िर हैं। आप् सबकी प्रतिक्रिया औऱ आपके शानदार रिव्यू कां इन्तज़ार रहेगा।
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