♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
हैलो दोस्तो, केसे हें आप् सभी?
आशा करताहूॅ कि आप् सभी बहोत अच्छे सें हि होंगे।
आज भारतमैच हार गय़ा इससे बड़ादुख हुआ, किसी भि चीज़ मे आजमन नहि लगरहा हैं। हलाॅकि मे मैच कां शौकीन तौ नहि हूॅमगर विश्वकप कि बात हि कुछअलग थि, ऊपर सें हर देशवासी कि तरह मे भि यही चाहता थां कि हमारे देश कि क्रिकेट टीम एक् बारफिन सें विश्वकप चैंपियन बने औऱ ट्राफी हमारे देश कों हि मिलेमगर सारी उम्मीदों पर्र पानीफिन गय़ा। कोईसोच भि नहि सकता थां कि भारतीय टीम केँ धुरंधर बल्लेबाज इसतरह कां प्रदर्शन करेंगे। मगर कहते हें नं कि होनी कों कौनटाल सकता हैं। वहीहुआ जौ नियति मे होनातय थां।
दोस्तो, कथा कां भाग करीब 80% रेडी होँ चुका हैं। बाॅकी कां 20% भि सजधजकर हौ जाताआज, मगर जैसा कि मैनेकहा आज किसी चीज़ मे मन नहि लगरहा हैं। अतः संभव हैं कि आज एपसोड नं दे पाऊॅ। मगर कोशिश करूॅगा कि कल तक आप् सबके सामने भाग हाज़िर हौ जाए।
मेरे जौ साथी भइया भारतदेश केँ हें उनका भि शायदयही हाल होगा औऱ वोँ समझ सकते हें मेरे अंदर कां हाल कि आज हमारे देश कि हार सें कैसा महसूस होँ रहा हैं???
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 54 》
अब तक,,,,,,
"सभीसमय औऱ हालात कि बातें हें ठाकुर। " दिवाकर चौधरी नें कहा___"उसके पास हमारे खिलाफ़ सबूत भि हें औऱ हमारे बच्चे भि हें जिनके तहत उसका पलड़ा बहोत भारी हैं। अगरकम सें कम हमारे बच्चे उसकेपास नहि होते तौ हम् उसे बताते कि हमारे संगऐसी ज़ुर्रत करने कि क्याँ सज़ामिल सकती थि उसे? ख़ैर छोंड़ो, तुम् बताओ कि क्याँ तुम् इस मामले मे हमारी कोई सहायता कर सकते होँ याँ नहि?"
"मे पूरी कोशिश करूॅगा चौधरी साहब। "अजय सिंह नें कहा___"कि मे इस मामले मे आपकेलिए कुछखास कर सकूॅ औऱ जैसा कि आपको मे बता हि चुकाहूॅ कि वोँ नामुराद मुझे भि अपना दुश्मन समझता हैं औऱ मुझसे बदला लें रहा हैं तोँ उस हिसाब सें यह भि सच हैं कि मे भि यही चाहता हूॅ कि जल्द सें जल्द वोँ मेरी पकड़ मे आँ जाए। एक् बारपता चलजाए कि वोँ कमीना किस कोने मे छुपा बैठा हैं उसकेबाद तोँ मे उसका खात्मा बहोत हि हसीनढंग सें करूॅगा। "
"ठीक हैं ठाकुर। " चौधरी नें कहा___"हम् भि यही चाहते हें कि उसके ठिकाने कां पता किसीतरह सें चलजाए। उसकेबाद हमारे लिएकोई क़दम उठाना भि आसान हौ जाएगा। "
ऐसी हि कुछदेर औऱ कुछ बातें होती रहीं। साम घिर चुकी थि औऱ अबरात होने वाली थि। इसलिए अजय सिंह चौधरी सें इजाज़त लेकर वापस हल्दीपुर केँ लिए निकल चुका थां। सारे रास्ते वो चौधरी केँ बारे मे सोचता रहा थां। उसे यकीन नहि हौ रहा थां कि उसका भतीजा इतना बड़ा सूरमा हौ सकता हैं कि वोँ प्रदेश केँ मंत्री तक कों अपनी मुट्ठी मे कैदकर लें। उसने मंत्री सें कह तोँ दिया थां कि वोँ इस मामले मे उसकी सहायता करेगा मगरयह तौ वही जानता थां कि वोँ उसकी कितनी सहायता कर सकता थां? ख़ैरथका हाराव परेशान हालत मे अजय सिंह अपनी हवेली पहुॅच गय़ा थां। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वोँ स्वयं अपनेतथा चौधरी केँ लिएअब क्याँ करे?
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अबआगे,,,,,,,,
मैंने दरवाजा खोला तौ देखा बाहर् रितू दिदी थि। मेरे द्वारा दरवाजा खुलते हि वोँ मुझेदेख कर पहले तौ मुस्कुराई फिन जैसे हि उन्हें देखकर मे एक् तरफहुआ तौ वोँ दरवाजे सें अंदर कि तरफ कमरे मे आँ गईं। उन्हें कमरे मे आतेदेख मुझेसमझ न् आया कि रितू दिदी रात मे सोने कि बजायइस वक़्त यहाॅ मेरेपास किसवजह सें आई हें?
दरवाजा बंद करके मे पलटा औऱ बेड कि तरफ आँ गय़ा। रितू दिदी बेड पर्र हि एक् किनारे पर्र बैठी हुई थि। इससमय उनके सुंदर शरीर पर्र नाइट ड्रेस थां। मे स्वयं भि एक् हाफ बनियान औऱ शार्ट्स मे थां। हलाॅकि मुझे उनके यहाॅइस समयआने पर्र कोई ऐतराज़ नहि थां बल्कि मे तोँ खुश हि हुआ थां मगर सोचने वालीबात तौ थि हि कि इस वक़्त उनके यहाॅआने कि क्याँ वजह होँ सकती हैं?
"कहीं मैने तुम को डिस्टर्ब तौ नहि किया न् राज?" मुझेबेड कि तरफआते देख सहसा रितू दिदी नें बड़ी मासूमियत सें कहा___"कहीं ऐसा तोँ नहि कि मैने यहाॅ आँ कर तेरी नींद मे खललडाल दिया हौ?"
"यह आप् कैसी बातें कररही हें दिदी?" मे उनकेपास हि बेड पर्र बैठते हुए बोला___"भला आपकीवजह सें मे केसे डिस्टर्ब हौ जाऊॅगा? बिलकुल भि नहि दिदी, मुझे भि अभि नींद नहि आँ रही थि। "
"अच्छा भला वोँ क्यूं?" रितू दिदी नें सहसा मेरे चेहरे कि तरफ ग़ौर सें देखते हुए कहा___"क्याँ विधी कि याद आँ रही थि?"
"उसकीयाद आने कां तौ प्रश्न हि नहि हैं। " मैने अजीबभाव सें कहा___"क्योंकि मे उसे एक् लम्हा केँ लिए भि भूलता हि नहि हूॅ। दूसरी बातयाद तोँ उन्हें करते हें न् जिन्हें हम् भूलेहुए होते हें?"
"ओहराज। " रितू दिदी नें एकदम सें मेरा चेहरा अपनी हॅथेलियों केँ बीच लेँ लिया, औऱ फिन भारी स्वर मे मुझसे बोलीं___"मे जानती हूॅ कि तूँ विधी कों इतनी आसानी सें भूल नहि सकता हैं। आख़िर तुम् दोनो नें एक् दूसरे सें टूटकर मुहब्बत जौ कि थि, ऊपर सें वोँ सभी होँ गय़ा। मगर भइया, उस सबकोयाद करने सें भि भला क्याँ होगा? बल्कि होगायह कि तूँ हर लम्हा उसेयाद करके दुखी होता रहेगा। इसलिए तूँ स्वयं कों सम्हाल मेरे भइया औऱ उस सबसे बाहर् निकल। तुम्हें पता हैं न् कि मे तेरीअब किसी भि सूरत मे दुखी होतेहुए नहि देख सकतीहूॅ। अगर तूँ खुश नहि रहेगा तौ मे भि खुश नहि रहूॅगी। अब तोँ तेरे हि खुशी मे मेरी खुशी हैं राज औऱ तेरेदुख मे मेरादुख हैं। "
"मे जानता हूॅ दिदी। " मैंने दुःखी भाव सें कहा___"मगर क्याँ करूॅ? यादों पऱ मेराकोई अख़्तियार हि नहि हैं। दिन तोँ गुज़र जाता हैं किसीतरह मगरयह रात.यह रात औऱ रात कि यह तन्हाई जाने कहाॅ सें मेरेदिल कों दुखी करने केँ लिए उसकी यादें लेँ आती हें? बस उसकेबाद सभीकुछ ऐसा लगने लगता हैं जैसेइस संसार मे अबकुछ भि नहि रह गय़ा ऐसा जिसकी वजह सें मे खुश होँ सकूॅ। "
"ऐसा मतकह मेरे भइया। " रितू दिदी नें मुझे एकदम सें स्वयं सें छुपका लिया औऱ फिन दुखीभाव सें बोलि___"हम् सभी भि तौ हें नं जिनकी वजह सें तूँ खुश होँ सकता हैं। क्याँ मात्र विधी हि ऐसी थि जिसकी वजह सें तुँ खुश होँ सकता थां? क्याँ गौरी चाची औऱ गुड़िया कुछ भि नहि जिनके लिए तूँ खुशरह सके?"
"हर रिश्ते कि अपनी एक् अलग अहमियत होती हैं दिदी। " मैने कहा___"मगर जोँ दिल कां नाता होता हैं औऱ प्यार केँ रिश्ते सें जुड़ा होता हैं उसकीबात हि अलग होती हैं। हलाॅकि नाताकोई भि होँ उसकेटूट जाने पर्र अथवा उसके न् रह जाने पऱ तक़लीफ़ तौ होती हि हैं। हम् जिन्हें चाहते हें तथा जिनसे प्यार करते हें वोँ अगर दुनियाॅ जहाॅन मे हें तोँ उनसे ताल्लुक नं रहने केँ बाद भि इतनी तक़लीफ़ नहि होतीमगर अगर वोँ इस दुनियाॅ मे हि नहों तौ यहसोच सोचकर औऱ भि ज़्यादा तक़लीफ़ होती हैं कि अब वोँ इंसान उसेकभी भि नहि मिल सकता। इंसान केँ दुनियाॅ मे बने रहने सें यह उम्मीद तौ बनी हि रहती हैं कि कभी न् कभीउसे वोँ ब्यक्ति मिलेगा हि। मगर.। "
"बस करराज। " रितू दिदी फफककर रो पड़ी___"मे औऱ कुछ नहि सुन सकती। मुझे तौ इतने सें हि इतनी तक़लीफ़ हौ रही हैं जबकि वोँ सभी तोँ तेरेसंग घटा हैं तौ तेरी कितनी ज़्यादा तक़लीफ़ होती होगी। मुझेउस सबका एहसास हैं मेरे भइयामगर प्लीज.ईश्वर केँ लिए स्वयं कों अपनीइस तक़लीफ़ सें निकालने कि कोशिश कर। "
"फिक्र मत कीजिए दिदी। " मैने दिदी कों स्वयं सें अलगकर उनके चेहरे कों अपनी हॅथेलियों मे लेतेहुए कहा___"यह दुख तक़लीफ़ें लाख असहनीय सहीमगर यह मुझे नेस्तनाबूत नहि कर सकती हें। इतनी हिम्मत तौ औऱ इतनी कूबत तौ हैं मुझमें कि मे इन सबको जज़्ब कर सकूॅ। ख़ैर छोंड़िये यहसभी औऱ यह बताइये कि आप् इस टाइम यहाॅकिस वजह सें आई थि? क्याँ कोईकाम थां मुझसे?"
"क्याँ मे तेरेपास बेवजह नहि आँ सकतीराज?" रितू दिदी नें पुनः बड़ी मासूमियत सें मुझे देखा थां__"क्याँ मुझे अपने भइया केँ पासआने केँ लिए किसीवजह कि ज़रूरत हैं?"
"नहि दिदी ऐसी तौ कोईबात नहि हैं। " मैने झेंपते हुए कहा___"बल्कि आप् जब चाहें तब मेरेपास आँ सकती हें। मैने तौ हालातों केँ बारे मे सोचकर आपसेऐसा कहा थां। "
"हालातों केँ बारे मे बात करने केँ लिएदिन बहुत हैं मेरे भइया। " रितू दिदी नें कहा___"कम सें कमरात मे तोँ उस सबसेदूर होकर हमेंचैन मिले। हर समयउसी केँ बारे मे सोचसोच कर परेशान होना क्याँ अच्छी बात हैं?"
"आपनेसही कहा दिदी। " मैने कहा___"हर टाइम एक् हि चीज़ केँ बारे मे सोचसोच कर परेशान होना बिलकुल भि उचित नहि हैं। लेकिन यह भि सच हैं कि हालात ऐसे हें कि हम् भले हि यहसभी सोचकर ऐसा कहेंमगर ज़हन सें वोँ सभी बातें जाती भि तौ नहि हें। "
"कोशिश करोगे तौ अवश्य जाएॅगी राज। " रितू दिदी नें कहा___"मगर तुम् तौ कोशिश हि नहि करते होँ। बस सोचते रहते हौ जाने क्याँ क्याँ? अच्छा यहबता कि नीलम सें क्याँ बात हुईँ थि तेरी?"
"बताया तौ थां आपको। " मैनेकहा।
"हाॅ बताया तौ थां तूने। " रितू दिदी नें सहसा मुस्कुराते हुए कहा___"औऱ यह भि बताया थां कि केसे तुम् दोनो ट्रेन मे धमालमचा रखे थें। "
"क्याँ करता दिदी। " मैने सहसा गंभीर होकर कहा__"उसी सबकेलिए तौ तरसा थां मे। मे हमेशा यह चाहता थां कि नीलम मुझसे लड़ाई करे, हम् दोनो केँ बीच मे खूब शैतनी भरा माहौल बनारहा करे। मगर वोँ सभी ख्वाहिशें हि रहीं। आज सुभहजब ट्रेन मे नीलम मेरेऊपर झुकी हुईँ मुझेदेख रही थि तोँ अचानक हि मेरेमन मे वोँ सभी बातें आँ गई थि औऱ फिन मैनेउसे छेंड़ा। उसकेबाद सचमुच वैसा हि हुआ दिदी जैसे कि मे हमेशा आरज़ू किया करता थां। उस वक़्त मे बहोत खुश थां औरुझे पता थां नीलम भि उस सबसे बेहदखुश थि। उसकेहाव भाव सें ज़ाहिर होँ रहा थां कि वोँ भि मेरेसंग वोँ सभी करकेउन पलों कों एंज्वाय कररही थि। "
"काशउस टाइम मे भि वहाॅ होतीराज। " रितू दिदी नें सहसाअहह सि भरतेहुए कहा___"मे भि नीलम कि तरह तेरेसंग वैसी हि मस्ती करती। "
"अरे पर्र आप् केसे करती दिदी?" मे दिदी कि यहबात सुनकर चौंक पड़ा थां___"आप् तोँ मुझसे बड़ी हें न्, जबकि नीलम औऱ मे एक् हि ऊम्र केँ हें इसलिए हमारे बीच वैसी मस्ती होँ सकती थि। "
"तौ क्याँ हुआ भइया?" रितू दिदी नें कहा___"मे तुझसे बड़ीहूॅ तोँ क्याँ हुआ? क्याँ मे बड़ी होने कि वजह सें अपने भइया केँ संग मस्ती नहि कर सकती?यह किस कानून कि पुस्तक मे लिखा हैं मुझेबता तौ ज़रा?"
"हाॅ लिखा तौ नहि हैं मगर। " मे दिदी कि बातसुन कर सकपका गय़ा थां___"फिन भि आप् मुझसे बड़ी तोँ हें हि औऱ मे आपसेखुल कर वैसी मस्ती नहि कर सकता थां। "
"सीधे सीधेकह दे नं कि तेरी मेरेसंग मस्ती करना मनपसंद हि नहि आता। " रितू दिदी नें सहसा बुरा सां मुह बनाते हुए कहा___"एक् नीलम हि बस तौ हैं जिसके संग तुम को वोँ सभी करना अच्छा लगता हैं। जाओ मुझे तुमसे कोईबात नहि करनी। "
रितू दिदी यह कहने केँ संग हि मुझसे ज़राहट करबैठ गईं औऱ एक् तरफ कों मुह फुलाकर बैठगईं। मे यहसभी देखकर भौचक्का सां रह गय़ा। मुझे उनसेइस सबकी उम्मीद बिलकुल भि नहि थि। कदाचित इसलिए क्योंकि उनका कैरेक्टर हि ऐसा थां। वोँ शुरुआत सें हि हिटलर स्वभाव कि रही थि। उन्हें यहसभी बिलकुल भि मनपसंद नहि थां। मगरइस वक़्त वोँ हिटलर दिदी नहि बल्कि किसी छोटी सि बच्ची कि तरहमुह फुलाकर एक् तरफबैठ गई थि। उनके चेहरे पर्र इस टाइम इतनी क्यूट सि नाराज़गी देखकर मे हैरान भि थां औऱ अंदर हि अंदरयह सोचकर खुश भि कि इस टाइम रितू दिदी सच मे किसी मासूम सि बच्ची कि तरहलग रही थि। मुझे उनकेइस तरहरूठ करमुह फुला लेने सें उन पऱ बेहद प्रेम आया। मुझेऐसा लगा जैसेइस क्यूट सि बच्ची पऱ मे सारी दुनियाॅ हार जाऊॅ।
"अरे यह क्याँ बात हुईँ दिदी?" फिन सहसा मुझे वस्तुस्थित कां बोधहुआ तोँ मे उनके क़रीब जाते हि उनके कंधे पऱ हाॅथरख कर बोला थां मगर.।
"दूर रहो मुझसे। " रितू दिदी नें अपने कंधे सें मेरे हाॅथ कों झटकते हुएउसी रूठेहुए भाव सें कहा___"औऱ हाॅ मुझसे बातमत करोअब। मे तुम्हारी कोई दिदी वीदी नहि हूॅ। जाओ उस नीलम केँ पास। "
"यह आप् कैसी बातें कररही हें दिदी?" मे हैरान परेशान सां हौ करकह उठा___"आप् तोँ मेरी सबसे अच्छी व सबसे प्यारी दिदी हें। भला मे आपसे केसेदूर होँ सकताहूॅ औऱ आपसेबात न् करूॅऐसा तोँ हौ हि नहि सकता। "
"बस बसखूब समझती हूॅ मे। " रितू दिदी नें उसी अंदाज़ सें मगरइस बार ज़रा तीखेभाव सें कहा___"मस्का लगाना कोई तुमसे सीखे। "
"मे मस्का नहि लगारहा दिदी। " मे एक् बार सें उनकेपास खिसककर गय़ा औऱ फिन बोला___"मे किसी कि भि शपथखा करकह सकताहूॅ कि आप् मेरी सबसे अच्छी दिदी हें औऱ मेरेदिल मे जौ जगह आपका हैं वोँ किसी औऱ कां नहि होँ सकता। "
मेरीइस बात कां मानो जल्दी असरहुआ। रितू दिदी एकदम सें मेरीतरफ इसतरह देखने लगीं थि जैसे उन्हें मेरीइस बात सें कितनी अधिक खुशी हुई हौ। फिन सहसा जैसे उन्हें यादआया कि वोँ तौ मुझसे रूठी हुईँ थीं। इस लिए उनके चेहरे केँ भावपलक झपकते हि पहले जैसे होँ गए औऱ वोँ फिन सें मुह फुलाकर एक् तरफ कों अपना चेहरा कर लिया। मुझे उनकेइस तरहरंग बदल लेने सें मन हि मन हॅसी तोँ आईमगर मे हॅसा नहि। वरना मुझेपता थां कि उसकेबाद केसे हालात हौ जाने थें।
"ठीक हैं दिदी आप् मुझसे मतबात कीजिए। " मैने इमोशनल ब्लैकमेल कां नाटक किया___"शायद मेरा नसीब हि ऐसा हैं कि जिसे भि अपना समझता हूॅ वोँ मेरा अपना नहि रहता। एक् आप् हि तौ थि जिन्हें सबसे अधिक अपना समझता थां औऱ अपनीदुख तक़लीफ़ें दिखाता थां मगर.। "
मेरा वाक्य पूरा भि नं होँ पाया थां कि अचानक हि रितू दिदी कि एक् हॅथेली कुकर केँ ढक्कन कि तरह मेरेमुह पर्र आकर स्लिम होँ गई। उनकी ऑखों मे ऑसू थें। वोँ मुझेइस तरह देखेजा रही थि जैसेकह रहीहों कि आइंदा ऐसी बातें कभीमत करना।
"क्यूं ऐसी बातें करता हैं राज?"फिन दिदी नें सहसा दुखीभाव सें कहा___"क्याँ मे तुझसे रूठ भि नहि सकती? मुझे भि नीलम कि तरह तुझसे लड़ना झगड़ना हैं भइया। मुझे भि अपनेइस प्यारे भइया केँ संगजी भर केँ मस्ती करनी हैं। तुम्हें तोँ पता हैं कि मुझे इसके पहलेयह सभी पसन्द हि नहि थां मगरअब मुझे भि लगता हैं कि मे तुझसे तेरी बड़ी बेहनबन कर नहि बल्कि तेरी छोटी बेहनबन कर रूठूॅ लड़ूॅ औऱ तेरी परेशान करूॅ। मगर तुँ हि नहि चाहता कि मुझे भि वैसी खुशी मिले जैसे तुम को औऱ नीलम कों वोँ सभी करके मिली थि। "
"ऐसा नहि हैं दिदी। " मैने उनको उनके कंधों सें पकड़ते हुए कहा___"हमारे पारिवारिक रिश्तों मे मेरी औऱ भि कई दिदी होंगी मगर मेरी जौ सबसे अधिक फेवरेट दिदी हैं वोँ केवल आप् होँ। आपकेलिए हॅसते हॅसते अपनीजान भि दे सकताहूॅ मे। ख़ैरअगर आपकी भि यही ख़्वाहिश हैं तौ ठीक हैं दिदी अब सें आप् भि मुझसे नीलम कि तरहरूठ सकती हें औऱ लड़ाई झगड़ा कर सकती हें। मुझे खुशी होगी कि आप् भि स्वयं कों इसरूप मे खुशी देना चाहती हें। "
"हाॅमगर यहतभी होगा नं भइयाजब तुँ मुझे भि तुम् याँ तुँ कहकर संबोधित करे। " रितू दिदी नें कहा___"जैसे तूँ नीलम सें करता हैं। तभी तौ वोँ सभी करने मे मजा आएगा। "
"ऐसा केसे होँ सकता हैं दिदी?" मे दिदी कि बातसुन कर बुरीतरह हैरान रह गय़ा थां, बोला___"आप् मुझसे बड़ी हें इसलिए मे उस सबकेलिए आपकेमान सम्मान कों ताक पऱ नहि रख सकता। "
"ठीक हैं मगरउस वक़्त तौ बोल सकता हैं नं जब हम् आपस मे वैसी मस्ती करेंगे। " दिदी नें कहा___"बाॅकी आम सिचुएशन मे तुँ वही केहना जौ अब तक बोलता आया हैं। औऱ हाॅअब यही फाइनल हैं। इससेआगे मुझेकुछ नहि सुनना हैं, समझ गय़ा नं?"
मेरी हालत मरता क्याँ नं करता वाली हौ गई थि। मे अबकुछ नहि कह सकता थां। अगर कहता याँ कोई ऑब्जेक्शन करता तोँ निश्चिय हि दिदी नाराज़ होँ जाती जौ कि मे कभी नहि चाह सकता थां।
"ठीक हैं दिदी। " फिन मैने गहरी साॅस ली___"जैसा आपको अच्छा लगे। "
"गुड। " दिदी केँ चेहरे पर्र रौनक आँ गई___"तौ शुरुआत करें?"
"क्याँ मतलब??" मे उनकीइस बात सें एकदम सें चकरा गय़ा।
"अरेवही भइया। " दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"जौ तुँ नीलम केँ संगकर रहा थां। मे चाहती हूॅ कि श्रीगणेश होँ हि जाए मस्ती कां। "
"पऱ दिदी इस वक़्त यहसभी??" मे बुरीतरह घबरा सां गय़ा थां। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि अब क्याँ करूॅ?
"इस वक़्त क्याँ??" रितू दिदी नें ऑखें दिखाई।
"आप् भि कमाल करती हें। " मैने कहा___"भला यह भि कोईसमय हैं इनसभी चीज़ों कां? हमारी वजह सें बेकार मे हि सभी लोगों कि नींद कां कबाड़ा होँ जाएगा। वैसे भि आजसभी बहोत थकेहुए हें। इसलिए इस वक़्त नहि दिदी हम् दिन मे किसी टाइम धमालकर लेंगे। "
"हाॅयह तोँ सचकहा तूने। " रितू दिदी नें कहा___"सचमुच सबकी नींद कां सत्यानाश हौ जाएगा। चलकोई बात नहि। इस वक़्त तोँ तुम्हे बक्श दियामगर यादरख कल छोंड़ूॅगी नहि तेरी। "
"क्याँ???" मे दिदी कि इसबात सें चौंका। फिन सहसाऊपर कि तरफ देखते हुए बोला___"हे ईश्वर मुझे शैतान कि इस बच्ची सें बचा लेना। "
"क्याँ कहा तूने?" रितू दिदी कि ऑखेंफैल गईं। वोँ एकदम सें मेरीतरफ पलटीं फिन बोलि___"मे शैतान कि बच्ची? रुक बताती हूॅ तुम्हे। "
इससे पहले कि मे अपने बचाव केँ लिएकुछ कर पाता रितू दिदी मुझ पऱ झपट पड़ीं। उन्होंने मुझे धक्का देकरबेड पऱ गिरा दिया औऱ स्वयं भि बेड केँ बीचोबीच आकर मेरेबदन केँ हर हिस्सों पऱ गुदगुदी करने लगीं। मुझे उनकी गुदगुदी सें हॅसी तोँ नहि आँ रही थि मगर मे जानबूझ कर हॅसने लगा थां औऱ उनसे अपनेकहे कि माफ़ियाॅ माॅगने लगा थां। मगर रितू दिदी मेरे माफ़ी माॅगने पऱ भि मुझे गुदगुदी करनाबंद नहि कररही थीं।
"प्लीज बस कीजिए नं दिदी। " मैने हॅसते हुए कहा__"सभी लोगों कि नींदटूट जाएगी। "
"टूट जानेदे अब। " रितू दिदी नें कहा___"मुझे किसी कि कोई परवाह नहि हैं समझे? तूने मुझे शैतान कि बच्ची बोला हैं नं तोँ तुम्हे अब शैतान कि यह बच्ची छोंड़ेगी नहि। "
"अच्छा जी। " मैने कहा___"ऐसी बात हैं क्याँ? लगता हैं इस बच्ची कां इलाज करना हि पड़ेगा। "
"तुँ कुछ नहि कर पाएगा भोंदूराम। " रितू दिदी नें कहा___"जबकि मे तेरी हालत ख़राब कर दूॅगी आज। "
"ओ हैलो। " मैने सहसा दिदी केँ दोनों हाथ पकड़लिए फिन बोला___"कहीं ऐसा नं होँ कि मेरी हालत ख़राब करने केँ चक्कर मे स्वयं तुम्हारी हि हालत ख़राब हौ जाए। "
"अच्छा बच्चू। " दिदी अपने हाॅथों कों मेरी पकड़ सें छुड़ाने कि कोशिश करतेहुए कहा___"इतनी बड़ी ग़लतफहमी भि हैं तुझको। शायद तुम्हारी तरफपता नहि हैं कि मे जूड़ो कराटे मे ब्लैक बेल्ट होल्डर हूॅ। "
"फाॅर काइण्ड योर इन्फाॅरमेशन। " मैने कहा___"मे भि मार्शल आर्ट्स मे ब्लैक बेल्ट हूॅ। इतना हि नहि कुंगफूॅ कां भि एक्सपर्ट हूॅ मे। इसलिए तुम् मुझेकम समझने कि ग़लती मत करना। "
"चल चलहवा आनेदे तूँ। " रितू दिदी नें बुरा सां मुह बनाते हुए कहा___"बड़ा आया कुंगफू एक्सपर्ट। मेरे सामने तेराकोई भि आर्ट्स नहि चलने वाला। "
"औऱ अगरचल गय़ा तोँ??" मैने मुस्कुराते हुएकहा।
"चल हि नहि सकता। " रितू दिदी कहने केँ संग हि मेरेऊपर आँ गई___"अबबोल बच्चू। बड़ा कुंगफू एक्सपर्ट बनता हैं न्। "
मैने एकदम सें पलटी मारी, रितू दिदी कों मुझसे इतनी जल्द इसकी उम्मीद नहि थि। परिणाम यहहुआ कि जहाॅ पहले मे पड़ाहुआ थां वहाॅ रितू दिदी पड़ी थि औऱ मे उनकेऊपर। मेरीइस हरकत सें पहले तौ रितू दिदी घबरा हि गईंफिन मुझे देखते हि बोलि___"ओये यह क्याँ हैं? तूनेयह केसे किया?"
"हाहाहाहा क्याँ हुआ बहना?" मैने उनके दोनो हाॅथ दोनो साइड सें बेड पर्र रख दिया___"हवा निकल गई क्याँ तुम्हारी? बड़ा जूड़ो कराटे बतारही थि नं। अबकहो क्याँ करूॅ तुम्हारे संग?"
"तूने चीटिंग कि हैं। " रितू दिदी मेरी पकड़ सें अपने हाॅथ छुड़ाने कि नाकाम कोशिश करतेहुए कहा___"तूने धोखे सें मुझे नीचेकर दिया हैं। "
"अच्छा जब हारने लगी तौ चीटिंग कां नामदे दिया। " मैने कहा___"चलो यहीसही, मगर तुम् तोँ जानती होँ न् प्रेम औऱ जंग मे सभी जायज हैं। अब बताओ शैतान कि बच्ची कि क्याँ करूॅ तुम्हारे संग?"
"ओये ज़्यादा दिमाग़ नं चला समझे। " रितू दिदी नें एकाएक हि मेरे पीछे सें अपनी दोनो टाॅगों कों दोनो साइड सें ऊपरकर मेरी गर्दन मे फॅसा लिया औऱ फिन हल्का झटका दिया। परिणाम यहहुआ कि मे उनके पैरों कि तरफ उलटता चला गय़ा। इधर दिदी पलक झपकते हि बेड सें उठकरफिन सें मेरेऊपर आँ गईं।
"क्यूं कुंगफू एक्सपर्ट अब क्याँ हाल हें तेरे?" रितू दिदी मेरेपेट पर्र बैठी उछलने लगी थि, उन्होंने अपने दोनो हाथों सें मेरेहाथ भि पकड़रखे थें।
"हाल तौ बहोत अच्छा हैं। " मैने कहा___"आपकी जीत मे भि मेरी हि जीत हैं दिदी। "
मेरेऐसा कहने पऱ रितू दिदी एकदम सें शान्त पड़गईं। मेरी ऑखों मे एकटक देखने लगी थि वोँ। फिन जाने क्याँ उनकेमन मे आया वोँ उसी हालत मे मेरेऊपर हि मेरे सीने सें लगकर छुपकगईं।
"तूनेखेल क्यूं बंदकर दियाराज। " फिन दिदी उसी हालत मे दुःखी होकर कहा___"मुझे तोँ बहोत अच्छा लगरहा थां। "
"मुझेपता हैं दिदी। " मैने उनकेसिर पऱ हाथ फेरते हुए कहा___"मगर ऐसी चीज़ों कि शुरूआत थोड़ी थोड़ी सें हि होती हैं नं। वैसे भि रात बहुत हौ गई हैं। इस सबसेकोई भि यहाॅ आँ सकता हैं औऱ हमेंयह सभी करतेदेख कर क्याँ सोचेगा। इसलिए मुझे लगता हैं इतना बहोत हैं आज केँ लिए। अब आपको भि अपने कमरे मे जाकरसो जानां चाहिए। "
"क्यूं, क्याँ मे तेरे कमरे मे तेरेसंग नहि सो सकती?" रितू दिदी नें सहसा मेरे सीने सें अपनासिर उठाकर मेरीतरफ देखते हुएकहा।
"बिलकुल सो सकती हें दिदी। " मैंने मुस्कुरा कर कहा___"पर्र मैनेऐसा इसलिए कहा कि आपको शायद अपने कमरे मे हि बेहतर तरीके सें नींदआए औऱ आप् कंफर्टेबल महसूस करें। "
"ऐसा कुछ नहि हैं मेरे भइया। " रितू दिदी नें मेरेगाल खींचते हुए लेकिन मुस्कुरा कर कहा___"मुझे तोँ तेरेसंग सोने मे औऱ भि अच्छी नींद आएगी औऱ मुझे कंफर्टेबल भि महसूस होगा। ऐसा लगेगा जैसे मे दुनियाॅ कि सबसे सुरक्षित स्थान पऱ हूॅ। "
"अगर ऐसीबात हैं तौ ठीक हैं दिदी। " मैने भि मुस्कुराते हुए कहा___"जैसा आपको अच्छा लगे वैसा कीजिए। अब चलिएसो जाते हें। "
"ओये क्याँ तुम्हें नींद आँ रही हैं?" दिदी नें ऑखें फैलाते हुएकहा थां।
"हाॅलग तोँ रहा हैं ऐसा। " मैनेकहा।
"ठीक हैं तूँ सोजाफिन। " दिदी नें कहने केँ संग हि अपनासिर वापस मेरे सीने मे रख लिया।
"पऱ आप् तोँ मेरेऊपर लेटी हुइ हें नं दिदी। " मैने असहजभाव सें कहा___"ऐसे मे केसे मे सो सकूॅगा भला?"
"जिसको सोना होता हैं नं वोँ केसे भि सो जाता हैं। " रितू दिदी नें अजीबभाव सें कहा___"मे तोँ तेरेऊपर हि सोऊॅगी। तुम्हे भि ऐसे हि सोना पड़ेगा आज। "
रितू दिदी कि इसबात सें मे हैरान रह गय़ा मगर करता भि क्याँ? कोई ज़ोर ज़बरदस्ती भि उनसे नहि कर सकता थां। इसलिए चुपचाप अपनी ऑखेंबंद करली मैने औऱ सोने कि कोशिश करनेलगा। जबकि मेरेचुप हौ जाने पर्र रितू दिदी जौ मेरे सीने पर्र अपनासिर रखेहुए थि वोँ मुस्कुराए जारही थि। उनका पूरा शरीर हि मेरेऊपर थां। मुझे बड़ा अजीब भि लगरहा थां औऱ असहज भि। असहजइस लिए क्योंकि दिदी केँ सीने केँ उभार मेरे सीने केँ बस थोडा हि नीचे धॅसेहुए महसूस होँ रहे थें। हलाॅकि मेरे ज़हन मे उनके प्रति कोई भि ग़लत भावना नहि थि मगर सोचने वालीबात तौ थि हि। ख़ैर, कुछ हि देर मे मुझे नींद आँ गई औऱ मे सो गय़ा। मुझे नहि पता दिदी कों कब नींदआई थि।
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उधर मंत्री दिवाकर चौधरी केँ यहाॅ सें आने केँ बादअजय सिंह सारे रास्ते सोचों मे गुमरहा थां। हवेली सें जब वो चला थां तोँ सबसे पहले गुनगुन मे वोँ एयरटेल केँ सर्विस सेन्टर गय़ा थां। जहाॅ सें उसने अपने पहले वाले नंबर केँ हि दोसिम कार्ड लिया थां औऱ उन्हें अपनेफोन मोबाइल पर्र डाल लिया थां। उसेपता थां कि मोबाइल बंद होने कि वजह सें उससे संबंध रखने वालेसब उसके चाहने वाले परेशान होंगे। रास्ते मे हि कई सारे लोगों केँ मोबाइल आए थें उसे जिनसे उसनेबात कि औऱ उन्हें बताया कि किसवजह हे उसका मोबाइल बंद थां।
अजय सिंह नें अपनेउन बिजनेस दोस्तों सें भि बात कि जिन्होंने उसकी सहायता केँ लिए अपने अपने व्यक्ति भेजे थें। सबसे फारिग़ होकर हि वो अपनेघऱ पहुॅचा थां। हवेली पहुॅचते पहुॅचते उसेरात केँ साढ़े आठ सें ऊपर होँ गए थें। अंदरउसे ड्राइंगरूम मे सभीमिल गए। सभी आपस मे बातचीत कर हॅसेजा रहे थें। नीलम, सोनम, शिवा, तथा प्रतिमा आदिसभी जगमोहन सिंह केँ पास हि बैठ थें।
अजय सिंह कों आयादेख कर नीलमव सोनम उससे मिली। अजय सिंह नें उन दोनो कों प्रेम दिया औऱ फिन कपड़े चेन्ज करने कां कहकर अपने कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। प्रतिमा केँ कहने पर्र बाॅकी सभी भि फ्रेश होनेचले गए। रात कां डिनर सविता नें रेडीकर दिया थां अतः फ्रेश होने केँ बादसभी एक् संग डायनिंग हाल मे आँ करबैठ गए। डिनर केँ दौरान सबकेबीच नार्मल हि बातें हुइ। इसबीच जगमोहन सिंह नें कहा कि उसेकल वापस जानां होगा क्योंकि वोँ इस टाइम एक् ज़रूरी केस केँ सिलसिले मे लखहगा हुआ हैं। प्रतिमा कि हार्दिक ख़्वाहिश थि कि उसके पिताजी अभि कुछदिन यहाॅ रुकें मगरउसे भि पता थां कि उसके पिता एक् बहोत बड़े वकील हें जिनके पास वक़्त कां बहोत हि ज़्यादा अभाव हैं।
जगमोहन सिंह नें यह अवश्य कहा कि अब वोँ आते रहेंगे यहाॅ। उनकीइस बात सें सभीखुश होँ गए। ख़ैर डिनर केँ बादसभी सोने केँ लिए अपने अपनेरूम मे चलेगए।
"तौ मिलआए तुम् मंत्री जी सें?" अपने कमरे मे आते हि प्रतिमा नें बेड पर्र लेटेअजय सिंह कि तरफ देखते हुए कहा___"वैसे किस सिलसिले मे बुलाया थां उसने तुम्हें? क्याँ कोईखास वजह थि?"
"इस बारे मे कुछ नं हि पूछो तोँ अच्छा हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें गहरी साॅसली थि।
"अरेयह क्याँ बात हुईँ भला?" प्रतिमा बेड पऱ आतेहुए बोलि___"क्याँ कोईऐसी बात हैं जिसे तुम् मुझसे बताना नहि चाहते हौ?"
"नहि दोस्त ऐसीकोई बात नहि हैं। " अजय सिंह नें बेचैनी सें पहलू बदला___"भला ऐसीकोई बात हुईँ हैं अब तक जिसे मैने तुमसे शेयर नं किया होँ?"
"वही तोँ। " प्रतिमा नें अजय सिंह सें सटकर लेटते हुए कहा___"वही तौ डियर, मुझे भि तोँ पताचले कि मंत्री नें किसवजह सें मेरेअजय कों बुलाया थां?"
"दरअसल बातऐसी हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा___"कि तुम् सुनोगी तौ हजम नहि कर पाओगी। "
"अरे जाने भि दो। " प्रतिमा मुस्कुराई___"बड़ी सें बड़ीबात तुम्हारी यह प्रतिमा हजमकर चुकी हैं फिनभला यह क्याँ चीज़ होगी। "
"मंत्री कां जब मोबाइल आया। "अजय सिंह नें कहा___"औऱ जब उसने मुझे साथीकहा तौ यहसच हैं कि मुझेउस वक़्त बेहद खुशी हुईँ थि। लेकिन उससेमिल करतथा उसकी बातें सुनकर मेरी सारी खुशी कपूर कि तरह काफूर होँ गई। "
"यह तुम् क्याँ कहरहे होँ अजय?" प्रतिमा केँ चेहरे पर्र हैरत केँ भाव उभरे___"ऐसी भला क्याँ बातें कही उसने जिसकी वजह सें तुम्हारी उम्मीदों औऱ खुशियों पर्र पानीफिन गय़ा?"
प्रतिमा केँ पूछने पऱ अजय सिंह नें मंत्री कां सारा किस्सा उसे सुना दिया। यह भि बताया कि मंत्री उससे स्वयं सहायता कि उम्मीद किये बैठा हैं। सारी बातें सुनने केँ बाद प्रतिमा कां मारे आश्चर्य केँ बुराहाल हौ गय़ा। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि अजय सिंह जोँ किस्सा सुनारहा हैं उसमें कहींकोई सच्चाई हैं। मगरउसे पता थां कि अजय सिंहझूठ मूठ कां कोई किस्सा उसे हर्गिज़ भि नहि सुनाएगा। यानी उसके द्वारा कहाहर लफ्ज़ सही थां।
"यह तोँ बड़ी हि हैरतअंगेज बात हैं अजय। " प्रतिमा केँ चेहरे पर्र मौजूद हैरतकम नहि होँ रही थि, बोलि___"उस गौरी कां वोँ पिल्ला इस प्रदेश केँ मंत्री कों भि अपने शिकंजे मे लियाहुआ हैं। यकीन नहि होता कि कल कां छोकरा इतने बड़े बड़े काण्ड कररहा हैं। "
"गए थें मंत्री केँ पास उससे सहायता कि उम्मीद लेकर। "अजय सिंह नें अजीबभाव सें कहा___"मगर स्वयं उसकी उम्मीद बनकर आँ गए। "
"तुम्हें मंत्री सें साफसाफ कह देना चाहिए थां अजय कि तुम् इस मामले मे उसकीकोई सहायता नहि कर सकते। " प्रतिमा नें कहा___"क्योंकि तुम् स्वयं भि कुछकर सकने कि स्थित मे नहि होँ। "
"उसे अपने बारे मे सारी सच्चाई नहि बता सकता थां डियर। "अजय सिंह नें कहा___"तुम् स्वयं सोचो कि मे वोँ सभी उससे केसेबता देता? इससे तौ उसके सामने मेरी इज्ज़त कां कचरा हौ जाता न्। वोँ क्याँ सोचता मेरे बारे मे कि मैंने अपनी वासना औऱ हवश केँ चलते अपने हि घऱ कि बहू बेटियों कि इज्ज़त पऱ अपनी नीयत ख़राब हि नहि कि बल्कि उनकेसंग वोँ सभी करने केँ लिए क़दम भि बढ़ाया। नहि प्रतिमा नहि, इससे तौ उसकी नज़र मे कोई वैल्यू हि नं रह जाती। वोँ साला मुझे गंदी नाली कां कीड़ा समझने लगता। "
"बात तोँ तुम्हारी ठीक हि हैं अजय। " प्रतिमा नें सोचने वाले अंदाज़ सें कहा___"मगर अब क्याँ करोगे तुम्? तुमने तोँ उससे वादाकर लिया हैं कि तुम् इस मामले मे उसकी सहायता करोगे। जबकि तुम् स्वयं अच्छी तरह जानते होँ कि तुम् स्वयं अपनी हि सहायता नहि करपारहे हौ, फिन उसकी सहायता केसेकर सकोगे? मंत्री सें सहायता कां वादा करके तुमने एक् नई मुसीबत कों दावतदे दि हैं अजय। वोँ मंत्री अबहर टाइम तुम्हें मोबाइल करेगा अथवा बुलाएगा यह जानने केँ लिए कि तुमने उसकी सहायता केँ रूप मे अब तक क्याँ किया हैं? उस सूरत मे तुम् उसे क्याँ जवाब दोगे?"
"मैने उससे सहायता कां वादा नहि किया हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा___"मात्र यहकहा हैं कि मे इस मामले मे उसकी सहायता केँ लिए अपनीतरफ सें पूरी कोशिश करूॅगा बस। इसमे मुसीबत कि बातभला कहाॅ सें आँ गई? मैनेकोई एग्रीमेंट तौ किया नहि हैं जिसके चलते वोँ मुझ पऱ कोई ऐक्शन लेगा। सीधी सि बात हैं मैने उसकी सहायता केँ लिए अपनीतरफ सें कोशिश कि मगर उसकाकाम नहि होँ सका इसमें मे औऱ ज़्यादा क्याँ कर सकता थां?"
"चलोयह तोँ आने वाला वक्त हि बताएगा कि इस मामले मे क्याँ होता हैं?" प्रतिमा नें गहरी साॅस ली___"लेकिन हाॅयह अवश्य सोचने वालीबात हैं कि विराज नें मंत्री कों इसढंग सें पंगु बनाया हुआ हैं। हम् तोँ यहसोच सोचकर परेशान थें कि वोँ यहाॅआया किसलिए थां, पर्र अबपता चला कि वोँ अपनीउस प्रेमिका कि वजह सें यहाॅआया थां। "
"हाॅ प्रतिमा। " अजय सिंह केँ चेहरे पऱ सोचने वालेभाव उभरे___"मंत्री सें मिलकर तथा उसकी बातों सें हि इस सच्चाई कां पताचला वरना तौ हमेंपता भि न् चलता कि वोँ साला यहाॅआया किसवजह सें थां? इतना हि नहि उसने मेरे अलावा औऱ किसे अपने मक्कड़ जाल मे फॅसारखा थां? मंत्री केँ जिन लड़कों नें उस विधीनाम कि लड़की कां रेप किया थां वोँ विराज कि प्रेमिका थि औऱ वोँ गंभीर हालत मे हल्दीपुर थाना क्षेत्र मे हमारी बेटी रितू केँ द्वारा पाई गई थि। "
"एक् मिनटअजय। " प्रतिमा केँ चेहरे पर्र एकाएक हि चौंकने केँ भाव उभरे थें, फिन उसने कहा___"मुझे अब सारा मामला समझ आँ गय़ा हैं। यह भि समझ आँ गय़ा हैं कि हमारी बेटी हमारे खिलाफ़ होँ कर क्यूं उस विराज कां संग देनेलगी हैं जिस विराज कि वोँ अब तक शक्ल भि नहि देख्ना चाहती थि। "
"क्याँ समझ आँ गय़ा हैं तुम्हें?" अजय सिंह केँ माथे पऱ सहसा शिकन उभरी।
"यह मामला विधी केँ रेप सें हि शुरुआत हुआ हैं। " प्रतिमा नें कहना शुरुआत किया___"हाॅ अजययह सारीकथा विधी केँ रेपकेस सें हि शुरुआत हुइ हैं। मंत्री केँ द्वारा बताई गई सारी बातों पऱ ग़ौर करने केँ बाद इसकी कड़ियाॅ कुछइस प्रकार सें मेरे दिमाग़ मे जुड़ी हें, ग़ौर सें सुनो। विधीनाम कि जिस लड़की कां रेपहुआ वोँ गंभीर हालत मे हमारी बेटी कों मिली। रितू चूॅकि पुलिस वाली थि इसलिए यह उसकी ड्यूटी थि कि वोँ इस मामले मे रेप कि गई लड़की केँ रेपिस्टों कि तलाशकरे औऱ उन्हें कानूनन सज़ा दिलवाए। लेकिन उससे पहले उसनेयह किया होगा कि गंभीर हालत मे पाई गई उस लड़की कों उसने हास्पिटल मे भर्ती कराया तथा लड़की केँ विषय मे जानकारी भि हासिल कि होगी। रितू नें विधी सें तहकीक़ात केँ रूप मे उस लड़की सें उसकेसंग हुएउस हादसे कि सच्चाई प्राप्त कि होगी। इसी सच्चाई केँ दौरान उसेपता चला होगा कि विधी वोँ लड़की हैं जोँ उसके चचेरे भइया विराज सें प्रेम भि करती थि औऱ विराज भि उससे प्रेम करता थां। लेकिन उसेयह समझ मे नं आया होगा कि दो प्रेम करने वाले एक् दूसरे सें दूर केसे हें? क्योंकि अगरदूर नं होते तोँ विधी केँ संग वोँ हादसा होता हि नहि। इसलिए रितू नें विधी सें उसके औऱ विराज केँ बीच कि दूरियों केँ बारे मे पूछा होगातब विधी नें उसे बताया होगा कि सच्चाई क्याँ हैं। वोँ सच्चाई अवश्य ऐसीरही होगी जिसने रितू केँ दिल मे चोंट कि होगी। विधी केँ द्वारा हि उसेपता चला होगा कि विराज असल मे कितना अच्छा लड़का हैं तथायह भि कि उसकेसंग उसके बड़े पिताजी नें कितना अत्याचार किया हैं। विधी कि बातों नें रितू कों सोचने पर्र मजबूर कर दिया होगा। लेकिन उसे इतना जल्दइस बात पऱ यकीन नहि आया होगा कि हमने विराज व विराज कि माॅ बेहन केँ संग ग़लत किया होँ सकता हैं। अतः उसने अपने तरीके सें इस सबकापता लगाने कां सोचा होगा। याद करोअजय यहउसी टाइम कि बात हैं जब नैना यहीं थि औऱ एक् रात मे तुम् औऱ शिवासंग मे हि वोँ मौज मस्ती कररहे थें। मुझे पूरा यकीन हैं कि सच्चाई कां पता लगाने कि राह पऱ चलतेहुए रितूउस रात हमारी वोँ रास लीलादेख ली होगी। मे ऐसाइस लिएकह रहीहूॅ क्योंकि उसरात केँ बाद सें हि रितू कां बिहैवियर हमारे प्रति बदला थां। यादकरो दूसरे दिन केसे उसने शिवा कों खरी खोटी सुना दि थि। उस टाइम हमेंपता नहि थां लेकिन अबसमझ आँ रहा हैं कि उसने शिवा कों इतने गुस्से सें क्यूं झिड़का थां? ख़ैर, उसकेबाद वोँ बड़ी सफाई सें नैना कों भि यहाॅ सें निकाल लें गई। उसकोपता चल गय़ा होगा कि तुम् अपनी हि बेहन कों अपने नीचे लेटाने कां मंसूबा बनाए बैठे हौ। इसलिए वोँ नैना कों बड़ी सफाई सें यहाॅ लें गई। इस सबसेउसे औऱ कुछ जानने कि ज़रूरत हि नहि रह गई थि। उसनेउस रात हम् तीनों कि सारी बातें सुनली होगी औऱ जान गई होगी कि विराज कि माॅ केँ संगअसल मे हुआ क्याँ थां? अथवा हमने उसकेसंग किया क्याँ थां? इतनासभी कुछ बहुत थां उसका हमारे खिलाफ होने केँ लिए औऱ विराज केँ संगमिल जाने केँ लिए। इन्हीं सभी केँ दौरान उसने विराज कों मुम्बई सें बुलाया होगा। लेकिन उसकेपास विराज कां कोई काॅटेक्ट नहि थां इसलिए उसने विराज केँ क़रीबी दोस्तों केँ बारे मे पता लगाया होगा। विराज केँ यार केँ रूप मे उसेपवन मिला, पवन कों उसने विधी कां वास्ता देकरकहा होगा कि वोँ विराज कों यहाॅ बुला लेँ। बस उसकेबाद क्याँ क्याँ हुआ इसका तोँ पता हि हैं तुम्हें। "
प्रतिमा कि इतनी लम्बी चौड़ी थ्यौरी सुनकर अजय सिंह आश्चर्यचकित रह गय़ा थां। बहुतदेर तक उसकेमुख सें कोईबोल न् फूटा। फिन सहसा उसके चेहरे पऱ प्रतिमा केँ प्रति प्रसंसा केँ भाव उभरे। उसे प्रतिमा कि सूझबूझ औऱ दूरदर्शिता कि दाद देनी पड़ी। जबकि.।
"अबरहा प्रश्न इसबात कां कि रितू नें इसके पहले विधी केँ संगहुए उसरेप हादसे पर्र उन रेपिष्टों कों कानूनन सज़ा क्यूं नहि दिलवाई?" प्रतिमा नें मानो पुनः कहना शुरुआत किया___"तौ इसका जवाब तुम् मंत्री केँ द्वारा पा हि चुके होँ। मंत्री केँ अनुसार इंस्पेक्टर रितू नें विधीरेप केस केँ रेपिस्टों कों पकड़कर उन्हें कानूनन सज़ा दिलवाने कि अवश्य कोशिश कि होँ सकती हैं लेकिन मामला क्योंकि मंत्री केँ बच्चों कां थां इसलिए मंत्री कि ताकतव पहुॅच केँ चलते कानूनन भि कुछ नहि होँ सकता थां इसलिए रितू केँ आला अफसर नें भि रितू कों इस मामले मे हस्ताक्षेप नं करने कि सलाह दि होगी। विधी केँ माॅ बाप कों भि यहीसमझ आया होगा, इसी लिए उन्होंने भि कोईकेस करने कां ख़याल अपने ज़हन सें निकाल दिया होगा। दैट्स इट। "
"तुमने तौ इसतरह इनसभी बातों कों खोल दिया हैं जैसे कि तुम् इनसभी चीज़ों कां लाइव टेलीकास्ट देखरही थि औऱ उसकी कमेंट्री भि कररही थि। " अजय सिंह प्रभावित लहजे मे बोला___"यकीनन तुम्हारा दिमाग़ बहुत शार्प हैं। ख़ैर यहाॅ पर्र इसकेआगे कि कड़ीकुछ इसतरह हैं। विराज जब मुम्बई सें आया औऱ उसने अपनीलवर कि वोँ हालत देखी तौ उससेसहन नहि हुआ। बल्कि उसकाखून खौल गय़ा होगा। लेकिन उसे भि समझ आँ हि गय़ा होगा कि वोँ विधी कों कानूनन कोई न्याय नहि दिला सकता। क्योंकि रेप करने वालों केँ आका बहोत बड़ी हस्ती थें। मगर जवानखून इसकेबाद भि शान्त न् हुआ होगा। तब उसने स्वयं उन लड़कों कों सज़ा देने कां सोचा होगाजिन लड़कों नें उसकी प्रेमिका केँ संग वोँ घिनौना कुकर्म किया थां। विराज केँ फैसले पर्र रितू नें भि अपनी सहमति दि होगी औऱ उसकी सहायता करने कां वादा भि किया होगा। मंत्री केँ हि अनुसार, विराज औऱ रितू मंत्री केँ फार्महाउस पहुॅचे औऱ वहाॅ सें मंत्री केँ उन बच्चों कों धर लिया औऱ वहीं सें हि उनकेहाथ कुछऐसे सबूत भि लगे जौ मंत्री कों विराज कि मुट्ठी मे कैद करने केँ लिए बहुत थें दैट्स आल। "
"बिलकुल। " प्रतिमा नें कहा___"मंत्री कों जबपता चला कि उसके बच्चों कां किडनैपर हल्दीपुर केँ ठाकुर अजय सिंह कां भतीजा हैं तोँ उसनेआज तुम्हें यहसोच कर मोबाइल किया कि तुम् इस मामले मे उसकी यकीनन सहायता कर सकते हौ। यहअलग बात हैं कि तुम् स्वयं भि मंत्री कि तरह हि विराज कि मुट्ठी मे कैद हौ। "
"यह क्याँ कहरही हौ तुम्?" अजय सिंह चौका___"मे भला केसेउस हरामज़ादे कि मुट्ठी मे कैदहूॅ?"
"कमाल हैं डियर। " प्रतिमा मुस्कुराई___"यह बात केसेभूल सकते होँ तुम् कि विराज केँ पास तुम्हारी वोँ सभी चीज़ें हें जोँ तुम्हें किसी भि समय कानून कि भयानक चपेट मे लेँ लेने केँ लिए बहुत हें। "
"ओहहाॅ वोँ नं। " अजय सिंह कों अचानक हि जैसेसभी कुछयाद आँ गय़ा औऱ यह भि सच हैं कि वोँ सभीयाद आते हि उसके समूचे बदन मे झुरझुरी सि दौड़ गई थि। उससेआगे कुछ कहते नं बनसका थां।
"बड़ी गंभीर सिचुएशन हैं अजय। " प्रतिमा नें उसके चेहरे केँ भावों कों पढ़ते हुए गंभीरता सें कहा___"सबकुछ कर सकने कि कूबत होतेहुए भि कुछ नहि कर सकते, न् तुम् औऱ नां हि वोँ मंत्री। मगर मुझे एक् बातयह समझ नहि आती कि जब इतना मसाला विराज केँ पास तुम् दोनो केँ खिलाफ़ मौजूद हैं तौ वोँ उस मसाले कां उपयोग क्यूं नहि करता?"
"किया तोँ थां उपयोग उसने। "अजय सिंह नें कहा___"उस मसाले केँ आधार पऱ हि तौ उसने नकली सीबीआई वालों कों भेजा थां मुझे यहाॅ सें लेँ जाने केँ लिए। "
"अरे हाॅ डियर। " प्रतिमा केँ मस्तिष्क मे जैसे एकाएक हि बल्ब रौशनहुआ, बोलि___"इस नये चक्कर कों तोँ मे भूल हि गई थि। यह भि तौ सोचने कां एक् जटिल मुद्दा हैं। आख़िर विराज नें ऐसाकिस वजह सें किया होगा? नकली सीबीआई वालों कों भेजकर उसने तुम्हें ग़ैर कानूनी धंधा करनेतथा ग़ैर कानूनी पदार्थ रखने केँ जुर्म मे गिरफ्तार करवाया औऱ फिनदो दिनबाद बिना तुमसे कुछ पूछताॅछ किये छोंड़ भि दिया। सोचने वालीबात हैं कि इस सबसेउसे क्याँ मिला होगा? याँ फिन इससे उसकाकौन सां फायदा हुआ होगा?"
"सालाऐसे ऐसेकाम करता हैं कि कुछसमझ मे हि नहि आता। "अजय सिंह नें कठोरभाव सें कहा___"सोचते सोचते दिमाग़ कि नशें तक दर्द करने लगती हें। मगर मजाल हैं जौ कुछसमझ आए। हद हौ गई यह तोँ। सालाकल कां छोकरा इतना शातिर होगायह तौ सपने मे भि नहि सोचा थां मैने। "
"मुझेकुछ कुछसमझ आँ रहा हैं उसकेऐसा करने कां चक्कर। " प्रतिमा नें यहकहकर मानोअजय सिंह केँ ऊपर बम्ब फोड़ दिया थां।
"क.क.क्याँ समझ आँ रहा हैं तुम्हें?" अजय सिंह बुरीतरह हैरानी सें पूछ बैठा थां।
"यह तोँ तुम् भि समझते हौ नं। " प्रतिमा नें समझाने वाले अंदाज़ सें कहा___"कि विराज कि नज़र मे यह एक् जंग हैं जौ उसने हमारे संग शुरुआत कि हुई हैं। जबकोई इंसान किसी सें जंग शुरुआत करता हैं तब वोँ सबसे पहले अपनी कमज़ोरियों कों अपने प्रतिद्वंदी सें याँ तौ छुपाता हैं याँ फिन उसकी पहुॅच सें बहोत दूरकर देता हैं। "
"तुम् क्याँ कहरही होँ?" अजय सिंहउलझ कररह गय़ा, बोला___"मेरी कुछसमझ मे नहि आँ रहा?"
"याद करोअजय। " प्रतिमा नें कहा___"हमारे व्यक्ति नें हमें क्याँ ख़बर दि थि? यही न् कि विराज मुम्बई सें आए अपने साथी केँ संगपवन कि फैमिली कों एम्बूलेन्स मे बैठाकर चला गय़ा थां औऱ एम्बूलेन्स केँ आगेआगे एक् जीप भि थि। जिसमें कि यकीनन रितू हि थि। यहाॅ पऱ मेरे कहने कां मतलबयह हैं कि विराज नें ऐसा क्यूं किया? आख़िर उसे क्याँ ज़रूरत थि पवन औऱ उसकी फैमिली कों अपनेसंग कहीं लेँ जाने कि? इस प्रश्न केँ बारे मे अगर ग़ौर सें सोचोगे तोँ जवाब अवश्य मिल जाएगा। मतलबयह कि पवन औऱ पवन कि फैमिली विराज कि कमज़ोरी थें। उसने सोचा होगा कि देर सवेरहमे इसबात कां पताचल हि जाएगा कि उसकेयार पवन नें उसकीमदद कि थि औऱ वोँ यहाॅ उसके हि घऱ मे रुका थां। अतः हम् इसकेलिए उसके साथी औऱ उसकी फैमिली कों कोई नुकसान भि पहुॅचा सकते हें। यहसोच कर उसनेपवन आदि कों सुरक्षित रखना अपना कर्तब्य समझा। लेकिन उसके सामने समस्या रही होगी कि वोँ पवनआदि कों सुरक्षित केसेकरे? उसकी समस्या कां समाधान रितू नें किया होगा। उसनेउन सभी कों किसीऐसी स्थान चलने कों कहा होगा जहाॅ पर्र वोँ सभीलोग पूर्णरूप सें सुरक्षित रह सकते थें। यहाॅ पऱ यह भि समझ आँ रहा हैं कि वोँ लोग एम्बूलेन्स सें हि क्यूं गए थें? दरअसल एम्बूलेंस हि एक् ऐसा किफायती कार होँ सकता थां जिसमें सभीलोग बड़े धीरे-धीरे तथा बिना किसी बाधा केँ कहीं भि जा सकते थें। हम् याँ हमारे व्यक्ति सोच हि नहि सकते थें कि वोँ लोग किसी एम्बूलेंस जैसे गाड़ी मे यहाॅ सें जा सकते हें। एम्बूलेन्स केँ आगेआगे कुछ फाॅसले पऱ रितू अपनी जिप्सी मे जारही थि। फाॅसले पऱ इसलिए ताकिअगर हम् याँ हमारे व्यक्ति रास्ते मे कहीं मिलें भि तौ वोँ उस पऱ शक नं कर सकें किसीबात कां। कहने कां मतलबयह कि रितू कि सहायता सें विराज नें अपनी एक् कमज़ोरी कों हमारी पहुॅच सें दूरकर दिया। "
"मगर इसमें यह कहाॅ स्लिम बैठता हैं कि वोँ इस सबकेलिए मुझेऐसे चक्कर मे फॅसाकर बाद मे छोंड़ भि दे?"अजय सिंह सहसाबीच मे हि बोल पड़ा थां___"औऱ वैसे भि यह वाला चक्कर तौ उस सबके बहोत बाद अभि हुआ हैं। "
"मेरीबात तोँ पूरी होनेदो डियर। " प्रतिमा नें कहा___"मे सभीकुछ विस्तार सें हि बतारही हूॅ औऱ तुम्हारे प्रश्न कि तरफ हि आँ रहीहूॅ। विराज केँ यहाॅआने पर्र हमनेयह अनुमान लगाया थां कि संभव हैं कि वोँ यहाॅ पऱ अभय केँ पत्नि बच्चों कों लेनेआया होँ। हलाॅकि यह भि एक् अहमबात हैं अजय, क्योंकि आज केँ हालात मे विराज कि दूसरी कमज़ोरी अभय केँ पत्नि बच्चे भि हें। इसलिए संभव हैं कि वोँ उन्हें भि अपनेसंग हि लें गय़ा हौ। अभय नें उससेकहा होगा कि अगर संभव होँ सके तोँ वोँ अपनेसंग अपनी चाची व अपने भइया बेहन कों भि लें आए। विराज मुम्बई सें यहीसोच करआया रहा होगा कि वोँ विधी कों देखेगा औऱ फिन अपनी छोटी चाची व उसके बच्चों कों संग लें कर पुनः मुम्बई लौट जाएगा। मगर यहाॅआने केँ बाद विधी केँ मामले मे वोँ एक् अलग हि चक्कर मे पड़ गय़ा। ऐसे माहौल मे वोँ भला वोँ केसे यहाॅ सें चला जाता? दूसरी बात यहाॅ पर्र तौ वैसे भि उसकेलिए खतरा हि थां। अतः अपनेसंग संग अपनी कमज़ोरियों कों भि दूर करना उसकी पहली प्राथमिकता थि। रितू केँ द्वारा उसेकोई सुरक्षित स्थान तौ अवश्य मिल गई रही होगीमगर उससे कदाचित वोँ संतुष्ट न् रहा होगा। वोँ चाहता रहा होगा कि उसकीसब कमज़ोरियाॅ हमारी पहुॅच सें बहुतदूर होनी चाहिए औऱ बहुतदूर तौ मुम्बई हि थि। अतः उसने फैसला किया होगा कि सबको मुम्बई भेज दियाजाए। उधरउसे इसबात कां भि एहसास रहा होगा कि रितूअब चूॅकि हमारे खिलाफ होकर उसकी सहायता कररही हैं इसलिए अबउस पऱ भि खतरा हि हैं औऱ वोँ उसे खतरा केँ बीच मे अकेला छोंड़ भि नहि सकता थां। तब उसने एक् प्लान बनाया औऱ वोँ प्लान यही थां कि वोँ तुम्हें कम सें कमदोदिन केँ लिए सीबीआई कि गिरफ्त मे डलवादे। इसका फायदा यह थां कि जब तुम् हि मैदान पर्र न् होते तौ रितू पर्र खतरे कि सीमा न् केँ बराबर हि रह जाती। उधर प्लान केँ मुताबिक विराज अपनी कमज़ोरियों कों लेकर वापस मुम्बई चला गय़ा। मुम्बई मे सबको छोंड़ कर वोँ उसीदिन वापस यहाॅ केँ लिएचल दिया। "
"तोँ तुम्हारे हिसाब सें विराज नें इसी सबकेलिए मुझेऐसे चक्करें फाॅसा थां?" अजय सिंह नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"मगर तुमने यह केसेकह दिया कि विराज उन सबको लेकर मुम्बई हि गय़ा थां?"
"इस आधार पऱ कि उसने तुम्हें दोदिन केँ लिए हि उस चक्कर मे फाॅसा थां। " प्रतिमा नें कहा___"इन दो दिनों मे वोँ आहिस्ता मुम्बई जाकरलौट भि सकता हैं। उसने तुम्हें नकली सीबीआई केँ जाल मे फाॅसा जबकि वोँ चाहता तौ तुम्हें सचमुच मे हि रियल सीबीआई कि गिरफ्त मे पहुॅचा देता। मगर उसनेऐसा नहि किया। उसका मकसद केवल इतना हि थां कि तुम् दोदिन केँ लिए अंडरग्राउण्ड रहो"
"यकीनन ऐसा हि हुआ लगता हैं। " अजय सिंह नें कहा___"ख़ैर, सोचने वालीबात हैं कि रितू उसकी सहायता कररही हैं औऱ वोँ उसेतथा उसकेसंग संगपवन आदि कों भि सुरक्षित लें गई थि। मगर प्रश्न हैं कि ऐसीकौन सि स्थान वोँ लें गई होगी?"
"किसीऐसी स्थान। " प्रतिमा नें सोचने वालेभाव सें कहा___"जहाॅ पऱ किसी ग़ैर कां आनां जानां नं होँ औऱ जहाॅ पर्र उन्हें किसी केँ खतरे कां भि आभास तक न् होँ। "
"ऐसीकौन सि जग.। "अजय सिंह कहते कहते एकदम सें रुक गय़ा थां। उसके चेहरे पर्र चौंकने केँ भावउभर आए औऱ फिन वोँ सहसा अजीबभाव सें बोल पड़ा___"अरे.ओह माँ गाड मे भि न् बहोत बड़ा बेवकूफ हूॅ प्रतिमा। "
"क्यूं, क्याँ हुआ?" प्रतिमा उसकेमुख सें यहसुन कर चौंक पड़ी थि, बोलि___"ऐसा क्यूं कहरहे हौ तुम्?"
"क्यूं नं कहूॅ दोस्त?" अजय सिंह एकाएक हि आहतभाव सें बोला___"मे बेवकूफ हि तौ हूॅ। इस बारे मे तोँ मुझे पहले हि सोच लेना चाहिए थां कि रितू नैना कों लिये कहाॅरह सकती हैं?"
"क्याँ मतलब??" प्रतिमा केँ चेहरे पऱ हैरानी केँ भाव उभरे।
"तुम्हें याद हैं न् कि हमने अपने तीनों बच्चों केँ नाम एक् एक् फार्महाउस किया थां?" अजय सिंह नें आवेशयुक्त भाव सें कहा थां।
"ओहहाॅ। " प्रतिमा एकदम सें उछल पड़ी थि। एकदम सें जैसेउसे अजय सिंह कि बातसमझ मे आँ गई थि, अतः बोलीं___"तोँ क्याँ तुम् यहकहरहे कि रितू.?"
"हाॅ प्रतिमा। " अजय सिंह प्रतिमा कि बात पूरी होने सें पहले हि बोल पड़ा___"मे यहीकह रहाहूॅ कि रितूउस वक्त नैना कों लिए अपनेउसी फार्महाउस पर्र गई होगीजिस फार्महाउस कों मैने उसकेनाम किया थां। सोचो प्रतिमा वोँ स्थान उन सबकेलिए कितनी आसानतथा महफूज हौ सकती हैं। ओहयहबात मेरे ज़हन मे पहले क्यूं नहि आई वरना हम् पहले हि रितू नैनाआदि सबको पकड़ सकते थें। बहोत बड़ी ग़लती होँ गई प्रतिमा, मे स्वयं अपनी हि ग़लती कि वजह सें जीती हुईँ बाज़ी कों हार गय़ा। "
"अरे तौ अभि भि क्याँ बिगड़ा हैं अजय?" प्रतिमा नें कहा___"होँ सकता हैं कि वोँ सभी अभि भि वहीं पऱ मौजूद हों। तुम्हें जल्दी हि वहाॅ जानां चाहिए। "
"नहि प्रतिमा। " अजय सिंह नें पूरी मजबूती सें गर्दन कों न् मे हिलाकर कहा___"अब कुछ नहि होँ सकता। वोँ लोगअब हमें फार्महाउस पऱ नहि मिलेंगे। क्योंकि यहबात तौ वोँ भि समझते रहे होंगे कि फार्महाउस उनकेलिए कुछ वक्त केँ लिए अवश्य सुरक्षित स्थान होँ सकती हैं मगर हमेशा केँ लिए नहि। यहमत भूलो कि रितू केँ संग मे विराज भि हैं। वोँ कमीना बहोत शातिर हैं। अब तक कि उसकी सारी गतिविधियाॅ यह बताती हें कि वोँ हमसेदो क़दमआगे हि रहता हैं। हम् जिस चीज़ केँ बारे मे सोचते हें वोँ शातिर लड़काउस चीज़ कों पहले हि अंजाम दे चुका होता हैं। "
"फिन भि एक् बारपता करने मे क्याँ जाता हैं?" प्रतिमा नें कहा___"होँ सकता हैं वोँ अभि भि वहीं पऱ हों। उनके दिमाग़ मे यहसोच होगी कि उनके वहाॅ होने कां पता तुम्हें अवश्य चलेगा इसलिए तुम् फिनयह सोचकर वहाॅ उनकापता करने नहि जाओगे कि अब वोँ वहाॅ हौ हि नहि सकते हें। यह एक् मनोवैज्ञानिक सोच हैं अजय, इसी केँ आधार पऱ वोँ तुम्हारे दिमाग़ कों पढ़ता हैं औऱ वही करता हैं जिसकी तुम् उम्मीद हि नहि करते। कहने कां मतलबयह कि तुम् इससमय यहसोच रहे हौ कि वोँ लोग वहाॅ होंगे हि नहि अतः तुम् उनकापता करने नहि जाओगे जबकि वोँ तुम्हारी इसीसोच केँ चलते वहाॅ मौजूद रहेंगे। "
"मनोविज्ञान केँ रूप मे तुम्हारा तर्क अच्छा हैं औऱ अपनी स्थान सही भि हैं। " अजय सिंह नें कहा___"मगर मुझे नहि लगता हैं कि विराज जैसा शातिर दिमाग़ लड़का इतना बड़ा जोखिम उठाएगा। बल्कि संभव हैं कि उसनेकोई दूसरा सुरक्षित ठिकाना ढूॅढ़ लिया होगा। फिन भि अगर तुम्हारा मन नहि मानता तौ ठीक हैं मे अभि पता करवा लेताहूॅ। "
यहकहकर अजय सिंह नें सिरहाने कि तरफ हि रखे अपने लैण्डलाइन मोबाइल कां रिसीवर उठाकर कान सें लगाया औऱ उस पर्र कोई नंबरपंच करनेलगा। थोड़ी देरबाद हि उसने अपने किसी व्यक्ति सें कहा कि वोँ फला स्थान पर्र बने उसके फार्महाउस मे जाए औऱ पताकरे कि वहाॅइस समयकौन कौन मौजूद हैं? अपने व्यक्ति कों हुकुम देने केँ बादअजय सिंह नें रिसीवर वापस केड्रिल पर्र रख दिया।
"थोड़ी हि देर मे दूध कां दूध औऱ पानी कां पानी हौ जाएगा डियर। "अजय सिंह नें कहा___"मेरा व्यक्ति कुछ हि देर मे पता करके मुझेउस सबकी सूचना मोबाइल पर्र दे देगा। "
"इस बात कां यकीन तौ मुझे भि हैं अजय। " प्रतिमा नें कहा___"वोँ लोग फार्महाउस मे नहि होंगे मगर इसके बावजूद एक् बारपता करना भि कोई हर्ज़ कि बात नहि हैं। ख़ैर, चलो यहमान केँ चलते हें कि वोँ लोग फार्महाउस पऱ नहि होंगे तोँ प्रश्न यह हैं कि उन लोगों नें आख़िर किस स्थान पर्र अपना दूसरा सुरक्षित ठिकाना बनाया होगा?"
"इस बारे मे भला क्याँ कहाजा सकता हैं?" अजय सिंह नें गहरी साॅस ली___"सच कहूॅ तोँ मेराअब दिमाग़ हि काम नहि कररहा हैं। समझ मे नहि आता कि आख़िर ऐसा क्याँ करूॅ जिससे कि सभीकुछ मेरी मुट्ठी मे आँ जाए?"
"सबसे पहले तोँ तुम्हें अपनीसोच कां दायरा बड़ा करना होगाअजय। " प्रतिमा नें उसे ज्ञान देने वाले अंदाज़ सें कहा___"तुम्हें विराज कि सोच सें दो नहि बल्कि चार क़दमआगे कि सोच रखनी होगी। तभी वोँ सभी संभव होँ सकता हैं जोँ तुम् चाहते हौ। "
"सबसे बड़ी समस्या यह हैं डियर कि उसकेपास मेरे खिलाफ वोँ ग़ैर कानूनी सबूत हें। " अजय सिंह बेचैनी सें बोला___"वोँ साला उनके आधार पऱ कभी भि कानून कि चपेट मे ला सकता हैं। "
"वोँ उन सबूतों इस्तेमाल नहि करेगा अजय। " प्रतिमा नें कहा___"अगर करना हि होता तौ वोँ कब कां कर चुका होता। वोँ सबूत तोँ उसकेपास महज तुरुप केँ इक्के कि तरह मौजूद हें। यानीजब वोँ दूसरे किसी तरीके सें तुमसे अपना बदला नहि लेँ पाएगा तब वोँ उनका इस्तेमाल करेगा। कदाचित उसकेमन मे यहसोच हैं कि वोँ तुम्हें कानून कि सलाखों केँ पीछे पहुॅचा कर आसान सज़ा नहि देना चाहता। बल्कि स्वयं अपने हाॅथों सें तुम्हें कोईऐसी सज़ा देना चाहता हैं छिसके बारे मे तुमने सपने मे भि नं सोचा हौ। "
"यकीनन तुम् सहीकह रही होँ प्रतिमा। " अजय सिंह केँ शरीर मे झुरझरी सि हुईँ थि, बोला___"उसके मन मे यकीनन यही होगा। वोँ मुझे स्वयं अपने हाॅथों सें सज़ा देना चाहता हैं। दूसरी बात, जिस तरह सें उसने मुझे फॅसारखा हैं उससे वोँ निश्चय हि अपने मंसूबों मे कामयाब होँ जाएगा। मगर मुझेयह समझ मे नहि आता कि जब उसकी मुट्ठी मे सभीकुछ हैं तौ वोँ देरकिस बात पऱ कररहा हैं?"
"यही तोँ सोचने वालीबात हैं अजय। " प्रतिमा केँ चेहरे पऱ सोचों केँ भाव उभरे___"वोँ इतना शातिर हैं कि हम् उसकीसोच कों समझहीं नहि पाते। जबकि वोँ हमारी उम्मीदों सें परे वालाकाम कर जाता हैं। वोँ चाहे तोँ यकीनन एक् झटके मे ऐसाकुछ कर सकता हैं जिसके तहत हम् सभी उसके सामने दीनहीन दसा मे हाज़िर होँ जाएॅमगर वोँ ऐसाइस लिए नहि कररहा क्योंकि उसे लगता होगा कि यहकाम तोँ वोँ कभी भि कर सकता हैं। वोँ कुछऐसा करने कि फिराक़ मे होगा जोँ हमारे लिएहद सें भि अधिक असहनीय होँ। यकीनन ऐसा हि हौ सकता हैं अजय औऱ कदाचित वोँ ऐसाकर भि रहा हैं। "
"क क्याँ कररहा हैं वोँ?" अजय सिंह मानो अंदर हि अंदर काॅपकर रह गय़ा थां।
"सबसे पहले तोँ उसनेयही किया। " प्रतिमा नें कहा___"कि उसने हमारी बेटी कों हमसेअलग कर अपनेसंग मिला लिया। क्याँ यह बड़ीबात नहि हैं अजय कि हमारी जोँ बेटी उसकी शक्ल तक देख्ना मनपसंद नहि करती थि वोँ आज शायद विराज कों हि सच्चे दिल सें अपना भइया मानने लगी हैं औऱ इतना हि नहि उसकेलिए अपने हि माॅ बाप केँ खिलाफ़ होँ गई। अगरउसे हमारी हर असलियत कां पताचल चुका हैं तौ यह भि संभव हैं कि उसने हमसे नाता भि तोड़ लिया हौ। सारी बातों कों ग़ौर सें सोचो तौ समझ मे आता हैं कि वास्तव मे विराज नें कितना बड़ातीर मार लिया हैं। "
"इसमेकोई संदेह नहि हैं दोस्त। " अजय सिंह नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"रितू कों अपनेसंग इसतरह सें मिला लेना बहोत बड़ीबात हैं। "
"औऱ मुझे तोँ यह भि लगता हैं अजय। " प्रतिमा नें सोचने वाले अंदाज़ सें कहा___"कि विराज कां अगला क़दम हमारी दूसरी बेटी नीलम कों भि अपनीतरफ मिला लेना होगा। नीलम कों ज़्यादा दुनियादारी कां पता नहि हैं। लेकिन हाॅयह सच हैं कि वोँ भि अपनी बड़ी बेहन कि हि तरह सच्चाई कि राह पऱ चलने कि सोच रखती हैं। इसलिए अगरउसे हमारी असलियत केँ बारे मे पताचल गय़ा तौ यह निश्चित बात हैं कि वोँ भि हमारे खिलाफ़ हौ जाएगी। वैसे क्याँ पता हौ हि गई हौ। "
"ऐसा तुम् केसेकह सकती होँ भला?"अजय सिंह कों अपने पैरों तले सें मानो ज़मीन खिसकती हुई महसूस हुइ, बोला___"नहि नहि ऐसा नहि हौ सकता। पता नहि क्याँ अनाप शनाप बोलेजा रही हौ तुम्?"
"विराज कि सोच सें अगरचार क़दमआगे चलना हैं तौ ऐसा सोचना हि पड़ेगा डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा___"मे ऐसा बेवजह हि नहि कहरही हूॅ बल्कि ऐसा कहने कि मेरेपास कुछ पुख्ता वजहें भि हें। "
"क कैसी वजहें?" अजय सिंह केँ चेहरे पऱ हैरत केँ भाव उभरे।
"पिछली दोतीन दिन कि घटनाओं पऱ ज़रा बारीकी सें ग़ौरकरो डियर। " प्रतिमा नें कहा___"विराज नें तुम्हें नकली सीबीआई केँ जाल मे फॅसाकर क्यूं अंडरग्राउण्ड किया? इसका जवाबयह हैं कि उसे अपनी कमज़ोरियों कों सुरक्षित याँ तुम्हारी पहुॅच सें दूर करना थां। लेकिन उसेलगा होगा कि उसके मुम्बई चले सें यहाॅ रितू औऱ नैना अकेली पड़ जाएॅगी। हालात ऐसे थें कि उन दोनो पर्र किसी भि टाइम तुम्हारे रूप मे कोई संकट आँ सकता थां। अतः विराज नें एक् तीर सें दो शिकार किया, पहलायह कि तुम्हें नकली सीबीआई कि कैद मे रखकर सुरक्षित सबको यहाॅ सें मुम्बई लें जाएगा औऱ दूसरा यह कि उसके यहाॅ नं रहने पऱ रितूव नैना केँ ऊपर तुम्हारा कोई संकट भि नं रहता। दो दिनबाद उसने तुम्हें इसीलिए छोंड़ दिया क्योंकि वोँ मुम्बई सें वापस यहाॅ आँ गय़ा औऱ फिनआते हि उसने सबसे महत्वपूर्ण कामयह किया कि फार्महाउस सें रितूव नैना कों अपनेसंग किसी दूसरी ऐसी स्थान शिफ्ट किया जहाॅ पऱ तुम्हारा खतरा नं केँ बराबर हि होँ। यहउसी दिन कि बात हैं अजयजब तुम्हें सीबीआई वाले लें गए थें, तब मैने रितू कों मोबाइल लगाया थां तुम्हारे बारे मे बताने केँ लिएमगर उसने मेरा मोबाइल नहि उठाया बल्कि काट दिया थां। तब मैने नीलम कों मोबाइल लगाया औऱ उसे बताया कि यहाॅ क्याँ हुआ हैं। उसे मैनेयह भि बताया कि उसकी बड़ी बेहन हमारे खिलाफ हौ गई हैं। मेरीबात सुनकर वोँ घबरा गई औऱ उसने यहाॅआने केँ लिएकहा थां। यहाॅ पर्र ग़ौर करने कि बातयह हैं कि संभव हैं कि नीलम नें मुझसे बात करने केँ बाद रितू सें बात कि होँ औऱ उससे पूछा होँ कि वोँ क्यूं माॅमडैड केँ खिलाफ हौ गई हें। उसके पूछने पऱ संभव हैं कि रितू नें उसे हमारी सारी सच्चाई बता दि होँ। हलाॅकि ऐसाहुआ नहि हैं, क्योंकि अगरऐसा हुआ होता तोँ यहाॅआने केँ बाद नीलम कां बिहैवियर कुछ तौ अलग हमेंसमझ हि आता। लेकिन वोँ यहाॅआने पर्र नार्मल हि थि। इसका मतलब कि रितू नें उसेकुछ नहि बताया थां उसदिन। लेकिन हाॅऐसा हौ सकता हैं कि नीलम केँ द्वारा माॅमडैड केँ खिलाफ़ हौ जाने कां कारण पूछने पऱ रितू नें उससेबस यहीकहा हौ कि वोँ स्वयं सच्चाई कां पता लगाए। अतः संभव हैं कि नीलमअब बड़ी हि सफाई सें सच्चाई कां पता भि लगारही होँ। दूसरी बात विराज केँ यहाॅ सें जाने केँ दिन कि काॅउटिंग करें तौ पता चलता हैं कि विराज उसीदिन वापस यहाॅ केँ लिए मुम्बई सें चल दिया थां जिसदिन हमारी बेटी नीलम वहाॅ सें चली थि औऱ फिनआज यहाॅ पहुॅची हैं। मेरे कहने कां मतलबयह हैं कि ऐसा यकीनन होँ सकता हैं कि विराज औऱ नीलम एक् हि ट्रेन सें यहाॅआए हों अथवाऐसा भि होँ सकता हैं कि ट्रेन मे यह दोनो मिले भि हों औऱ उनकेबीच कोई बातचीत भि हुइ हौ। "
"अबबस भि करो दोस्त। " अजय सिंह सहसा खीझते हुएबोल पड़ा थां___"तुम् तौ ऐसीऐसी बातें नाॅन स्टाप करतीचली जारही होँ जौ कि अब मेरेसिर केँ ऊपर सें जानेलगी हें। मुझेसमझ मे नहि आता कि यहसभी बातें तुम्हारे दिमाग़ मे आती केसे हें? कभीऐसा तोँ कभी वैसा, कभी यह होँ सकता हैं तोँ कभी वोँ हौ सकता हैं। व्हाट दाहेल इजदिस दोस्त? तुम् तौ मेरे दिमाग़ कां अपनी बातों सें हि दही कियेदे रही होँ। "
"कमाल करते हौ डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा नें सहसा खिलखिला कर हॅसते हुए कहा___"अगर ऐसा नहि सोचोगे तोँ केसे विराज कि सोच सें आगेजा पाओगे? केसेउसे अपनी मुट्ठी मे कैदकर पाओगे तुम्?"
"भाड़ मे जाए विराज। " अजय सिंह सहसा गुस्से मे बोल पड़ा___"साले नें जीना हरामकर दिया हैं मेरा। ऊपर सें मेरी बेटी कों भि अपनेसंग मिला लिया उसने। बस एक् बार.एक् बार मेरे सामने आँ जाए वोँ। उसकेबाद मे बताऊॅगा कि मेरेसंग ऐसी चुहलबाज़ी करने कां अंजाम क्याँ होता हैं?"
"सोचने वालीबात हैं डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा नें अजय सिंह केँ चेहरे कि तरफ देखते हुए कहा___"जोँ लड़का बग़ैर सामने आए तुम्हारी यह हालतकर रखा हैं वोँ अगरखुल कर सामने आँ जाए तौ सोचो क्याँ हौ?"
"क्याँ होगा?"अजय सिंहताव मे बोला___"साले माॅ बेहनबीच चौराहे पर्र चोदूॅगा मे। एक् बार सामने बस आँ जाए वोँ हरामज़ादा। "
"इसका उल्टा भि तौ हौ सकता हैं डियर। " प्रतिमा नें सहसा मुस्कुरा कर कहा___"हाॅ डियर इसका उल्टा भि तौ हौ सकता हैं। यानी कि तुम् तौ बीच चौराहे पर्र उसकीमाॅ बेहन कों न् चोदपाओ मगर वोँ सच मे हि तुम्हारे पत्नि बच्चों कों बीच चौराहे पर्र रौंद डाले। "
"यह क्याँ बकवास कररही हौ तुम्?" अजय सिंह नें कठोरभाव सें कहा___"होश मे तोँ होँ न् तुम्? यह तुम् कैसी वाहियात बातें कररही हौ?"
"सच हमेशा कड़वा हि लगता हैं मेरेबलम। " प्रतिमा नें अजय सिंह केँ चेहरे कों अपनी एक् हॅथेली सें सहलाकर कहा___"मगर सोचो तोँ सही। हालात जिसतरह सें उसकी मुट्ठी मे हें उससे क्याँ वोँ यहसभी नहि कर सकता?"
प्रतिमा कि इसबात पर्र अजय सिंहकुछ बोन नं सका। कदाचित उसे एहसास हौ गय़ा थां कि प्रतिमा सचकहरही थि। सच हि तोँ थां, वोँ भला क्याँ कर सकता थां विराज कां? जबकि विराज अगर चाहे तौ यकीनन वोँ सभीकर सकता हैं जिस चीज़ कि बात प्रतिमा कररही थि। ख़ैर अभि अजय सिंहयह सभीसोच हि रहा थां कि तभी सिरहाने कि तरफरखा लैण्डलाइन मोबाइल बजउठा। अजर सिंह नें हाथ बढ़ाकर रिसीवर उठाया औऱ कान सें लगा लिया। दूसरी तरफ सें कुछदेर तक जाने क्याँ कहा। जवाब मे यहकहकर अजय सिंह नें रिसीवर वापसरख दिया कि "चलोकोई बात नहि"।
"क्याँ कहा तुम्हारे व्यक्ति नें?" अजय सिंह केँ रिसीवर रखते हि प्रतिमा नें उससे पूछा थां।
"यही कि इससमय फार्महाउस पऱ कोई इंसान तोँ क्याँ एक् परिंदा तक मौजूद नहि हैं। " अजय सिंह नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"लेकिन हाॅ वहाॅ पऱ हमारी वोँ जीप अवश्य उसे मिली हैं जौ जीप हमारे हि एक् व्यक्ति केँ संग लापता होँ गई थि। "
"इसका मतलब। " प्रतिमा नें सोचने वालेभाव केँ संग कहा___"विराज नें मुम्बई सें आते हि फार्महाउस सें सबको दूसरी किसी सुरक्षित स्थान पर्र शिफ्ट कर दिया हैं। कदाचित उसेअब यह आभास होँ चुका थां कि फार्महाउस पऱ अब एक् भि समय रुकना उनकेलिए ठीक नहि हैं। इसलिए इससे पहले कि तुम्हें उसके वहाॅ होने कां पताचले औऱ तुम् वहाॅ पहुॅचो उससे पहले हि वोँ उन सबको लेकरकही दूसरी स्थान कूचकर गय़ा। वाकईअजय, बड़ा हि शातिर दिमाग़ हैं उसका। वरना सोचने वालीबात हैं कि इतनेदिन तक तौ वोँ वहीं पऱ रहा थां। भला एक् दिन औऱ वहाॅरुक जाने मे उसे क्याँ प्राब्लेम हौ सकती थि। मगर नहि, उसे तोँ आभास हौ गय़ा थां कि अब वहाॅ पर्र खतराबढ़ गय़ा थां उन सबकेलिए। अतः जल्दी हि सबको लेकर चलताबना वोँ। अब बताओ डियर हस्बैण्ड, उसकीसोच तुम्हारी सोच सें दो क़दमआगे हैं कि नहि?"
अजय सिंह निरुत्तर सां हौ गय़ा थां। उसेसमझ मे हि नहि आया कि अब वोँ प्रतिमा कि इसबात कां क्याँ जवाबदे? प्रतिमा बड़े ग़ौर सें उसके चेहरे कि तरफकुछ देर तक देखती रही। फिन यहकहकर उसकेबगल सें हि लेट गई कि___"अबसो जाओ माँ डियर। अधिक सोचने सें कुछ नहि होगाअब। नई सुभह केँ संगतथा नईसोच केँ संगकुछ नया करने कि कोशिश करना। "अजय सिंह कों भि लगा कि प्रतिमा ठीककह रही हैं। अतः उसने भि अपने ज़हन सें इन सारी बातों कों झटका औऱ दूसरी तरफ करवॅट लेकरलेट गय़ा। लेकिन दोनो हि इसबात सें बेख़बर थें कि सिरहाने केँ ऊपर हि एक् बड़ी सि खिड़की थि जिसका एक् पल्ला हल्का सां खुलाहुआ थां औऱ उस हल्के खुलेहुए पल्ले पऱ दोकान खरगोश कि तरह खड़ेउन दोनो कि अब तक कि सारी बातें सुन चुके थें।
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सुभह मेरी नींद खुली तोँ देखा कि रितू दिदी अभि भि उसी हालत मे मेरेऊपर लेटी हुईँ हें। उनकावजन याँ यह कहिए कि उनकाबोझ ज़्यादा तौ नहि थां मगर क्योंकि वोँ रातभर मेरेऊपर हि लेटीरही थीं तौ मुझेअब ऐसालग रहा थां जैसे मेरेऊपर कितना भारीबोझ रखाहुआ हौ। मेरी नींद खुलने कां कारणबोझ कां एहसास तौ थां हि लेकिन दूसरा एक् कारणयह भि थां कि मुझे शूशूआई हुई थि। आप् तोँ जानते हि हें कि सुभह सुभह शूशू केँ चलते हमारे महाराज स्टैण्डप पोजीशन मे होते हें।
मुझे महाराज केँ स्टैण्डप होने कां जैसे हि एहसास हुआ मे एकदम सें घबरा सां गय़ा। मुझेलगा कि कहींअगर रितू दिदी जगगईं औऱ उन्हें भि मेरे महाराज केँ स्टैण्डप होने कां एहसास होँ गय़ा तौ भारी गड़बड़ होँ सकती हैं। वोँ मेरे बारेकुछ भि उल्टा सीधासोच सकती हें। अतः मुझे उनके जगने सें पहले हि अपनीइस हालत कों ठीककर लेना थां। मैने हल्का सां सिरउठा कर देखा तोँ रितू दिदी किसी छोटी सि बच्ची कि तरह मेरे सीने पऱ वैसे हि छुपकी हुईँ सोरही थि जैसेरात कों वोँ सोई थि।
मैने बहोत हि आहिस्ता सें दाहिने तरफ करवॅट लेकर रितू दिदी कों बेड पर्र इसतरह बड़ी सफाई सें लेटाया कि उनकी नींद मे ज़रा भि खलल न् पड़सके। राइट साइडबेड पर्र लेटाकर मैने उन्हें ठीक सें सीधाकर दिया। हलाॅकि वोँ सीधी हि थि मगर उनके दोनो हाॅथ मुड़े हुए थें जिन्हें मैने सीधाकर दिया थां। मैने देखा रितू दिदी केँ हसीन चेहरे पर्र इससमय संसार भर कि मासूमियत विद्यमान थि। उन्हें मेक-अप कां ज़रा भि शौक नहि थां। वोँ बिना मेक-अप केँ हि बहोत सुंदर थि। बड़ी माॅ(प्रतिमा) कि तरह हि वोँ बेहद सुंदर थि। लेकिन एक् अच्छे नेचर कि वजह सें उनकी हुस्न बड़ीमाॅ सें लाख गुना अधिक थि। मुझे रितू दिदी कों देखकर उन पर्र बेपनाह प्रेम आँ रहा थां। मैनेझुक कर उनके माॅथे पर्र हौले सें एक् किस किया औऱ फिन मुस्कुराते हुए मे पलटकर आहिस्ता सें हि बेड सें उतरकर कमरे सें अटैच बाथरूथ कि तरफबढ़ गय़ा।
कुछदेर बादजब मे बाथरूम सें सुभह केँ कामों सें फारिग़ हौ कर वापस कमरे मे बेड केँ पासआया तौ देखा रितू दिदी अभि भि वैसी हि लेटी हुईं थि लेकिन इस वक़्त उनके गुलाब कि पंखुड़ियों जैसे होठों पऱ बहोत हि दिलकस मुस्कान फैली हुईँ थि। यहदेख कर मे चौंका फिन मे मुस्कुराते हुए आहिस्ता सें बेड पर्र आँ कर रितू दिदी केँ पास हि बैठ गय़ा औऱ उन्हें देखने लगा।
"गुड मार्निंग माईदा मोस्ट ब्यूटीपुल दिदी। " फिन मैने हौले सें मुस्कुराते हुए लेकिन उन्हें देखते हुए हि कहा___"मुझे पता हैं आप् जग चुकी हें। लेकिन यहसमझ नहि आया कि आपके होठों पर्र यह हसीन मुस्कान किसबात पऱ फैली हुई हैं? हलाॅकि आपको सुभह सुभहइस तरह मुस्कुराते हुएदेख कर मे बहोत खुश हौ गय़ा हूॅ। "
मेरीइस बात पऱ रितू दिदी केँ होठों कि उस मुस्कान मे औऱ भि इज़ाफा हुआ औऱ उन्होंने पट सें अपनी ऑखेंखोल दि। कुछदेर तक मुझे वोँ उसी मुस्कान केँ संग देखती रहींफिन बोलीं____"मेरे होठों पऱ यह मुस्कान तेरी हि वजह सें हैं राज। मुझे नहि पता थां कि सुभह सुभह मेरा सबसे हसीन औऱ सबसे अच्छा भइया मुझे इतना प्रेम सें लेटाकर तथा मेरे माॅथे पऱ चूमकर मुझसे इतना ज़्यादा प्रेम करने कां सबूत देगा। सच कहतीहूॅ मेरे भइया, आज कि यह सुभह मेरेलिए अब तक कि सबसे बेस्ट सुभह थि। "
"ओह तोँ आप् उससमय जगी हुई थीं?" मैने चौंकते हुए कहा___"अगर ऐसा थां तोँ फिन आप् चुपचाप ऑखेंबंद कर सोये होने कां नाटक क्यूं कररही थि?"
"अरे बुद्धूराम। " रितू दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"अगर मे दिखा देती कि मे जाग चुकीहूॅ तौ फिन मुझे तेरा वोँ प्रेम केसेमिल पाताभला जोँ तूने मेरे माॅथे पर्र चूमकर जताया थां?"
"अच्छा जी। " मे कह तौ गय़ा मगरअब यहसोच सोचकर घबराने भि लगा थां कि रितू दिदी अगरजग गई थि तोँ कहीं उन्हें मेरे महाराज केँ स्टैण्डप होने कां बोध तोँ नहि हौ गय़ा? औऱ अगरऐसा हौ गय़ा होगा तोँ यकीनन वोँ मेरे मे ग़लत सोचने लगी होंगी। मे ईश्वर सें विनती करनेलगा कि प्लीज ऐसाकुछ नं होने देना। फिन मैने स्वयं कों सम्हालते हुए बोला___"पऱ आप् जगीकब थीं दिदी?"
"मे तौ तेरे जगने सें पहले हि जाग गई थि। " यहकहकर रितू दिदी नें जैसे मेरेसिर पऱ बम्ब फोड़ा___"पऱ उठीइस लिए नहि कि मुझेउस तरह लेटे रहने मे बड़ामजा आँ रहा थां। "
"क्याँ????" मेरेमुख सें मानोचीख सि निकल गई थि, फिन बुरीतरह सकपकाते हुए बोला___"मेरा मतलब आप् मेरे जगने सें पहले केसेजग गई थि?"
"अरेयह कैसा प्रश्न हैं राज?" रितू दिदी केँ चेहरे पऱ हैरानी केँ भाव उभरे। यह अलगबात थि कि उनके होठों पर्र मुस्कान वैसी हि बरकरार थि, बोलीं___"क्याँ मे तेरे जागने सें पहले स्वयं नहि जाग सकती औऱ तुँ इसतरह चौंक क्यूं रहा हैं मेरे जगने कि बातसुन कर? क्याँ तुम को मेरेजाग जाने पऱ कोई प्राब्लेम हुई हैं?"
"नं.न्.नहि तौ। " मे एक् बारफिन बुरीतरह सकपका गय़ा। मुझेसमझ न् आया कि क्याँ कहूॅ___"ऐसी तोँ कोईबात नहि हैं दिदी। "
"फिन तुँ इसतरह चौंका क्यूं?" रितू दिदी कि मुस्कान औऱ भि गहरी होँ गई___"अरे यह क्याँ???"
"क.क.क्याँ हुआ दिदी?" मे उनकेइस प्रकार कहने पऱ बुरीतरह डर गय़ा। मेरे चेहरे पर्र उभरे पसीने मे लम्हा भर मे इज़ाफा हौ गय़ा।
"यह तेरे माॅथे पऱ सुभह सुभह इतना पसीना केसेउभर आयाराज?" रितू दिदी नें मानो एक् औऱ बम्ब मेरेसिर पर्र फोड़ दिया___"क्याँ बात हैं मेरे भइया तेरी तबीयत तोँ ठीक हैं न्?"
"त.त.तबीयत???" उनकीइस बात सें मेरी हालत लम्हा भर मे ख़राब हौ गई___"क्याँ मतलब हैं आपका? मे तौ एकदमठीक हूॅ दिदी। "
"तुँ सचकहा रहा हैं न्?" रितू दिदी नें अजीबभाव सें मेरीतरफ ध्यान सें देखते हुए पूछा___"औऱ तुँ सच मे ठीकठाक हैं नं?"
"ओफ्फो दिदी। " मैंने बेचैनी औऱ तकलीफ़ कि हालत मे कहा___"यह सुभह सुभह क्याँ अपनी पुलिसगीरी दिखाने लगी हें आप्?"
"पुलिसगीरी??" रितू दिदी चौंकी___"मे कहाॅ पुलिसगीरी दिखारही हूॅ तुम्हे? मे तोँ तेरी तबीयत केँ बारे मे हि पूछरही हूॅ। "
"तोँ फिनयह पुलिस वालों कि तरह तहकीक़ात करने कां क्याँ मतलब हैं आपका?" मे अब तक अपनी हालत सें बहुतहद तक उबर चुका थां, बोला___"इतनी देर सें देखरहा हूॅ कि आप् बाल कि खाल निकालने पऱ तुली हुईँ हें। इतना भि नहि सोचा कि मुझ मासूम पर्र इस सबसे क्याँ गुज़रने लगी हैं, हाॅ नहि तौ। "
मैनेयह बात इतने भोलेपन औऱ इतनी मासूमियत सें कही थि कि रितू दिदी कि हॅसीछूट गई। वोँ एकदम सें बेड पऱ उठकरबैठ गई औऱ फिनझपट कर मुझे अपनेगले सें लगा लिया।
"तूँ सचमुच बहोत स्वीट हैं राज। " रितू दिदी नें मेरीपीठ पऱ अपने दोनोहाथ फेरते हुए कहा___"ऊपर सें तेराआज अपनीइस बात मे गुड़िया(निधी) कां वोँ तकिया कलामयूज करना। हाय जान हि लेँ गय़ा रे। "
गुड़िया कां ख़याल आते हि मेरे अंदर भि एक् अजीब सि झुरझुरी दौड़ गई। पलक झपकते हि उसका चेहरा मेरी ऑखों केँ सामने उभरआया। उस चेहरे मे ज़माने भर कि उदासी थि, तड़प थि। मेरादिल एकदम सें निधी केँ लिए बेचैन हौ उठा। सुभह सुभह रितू दिदी कि जोँ मुस्कान देखकर मुझे खुशी हुईँ थि वोँ गुड़िया कां दुःखी चेहरा मेरी ऑखों केँ सामने उभरआने सें जाने कहाॅ गायब होँ गई थि। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि निधी नें अचानक मुझसे बात करना क्यूं बंदकर दिया थां? बात करना तौ दूर बल्कि वोँ तोँ मेरे सामने हि नहि आती थि।
"क्याँ हुआराज?" रितू दिदी नें मुझेचुप जानकर मुझसे अलग होतेहुए पूछा___"तुँ एकदम सें गुमसुम सां क्यूं हौ गय़ा? क्याँ मेरी बातों सें तेरादिल दुख गय़ा हैं? देखअगर ऐसीबात हैं तौ प्लीज मुझे क्षमा करदे। "
"नहि दिदी। " मैने उनकेमुख पर्र अपना हाॅथरख दिया, फिन बोला___"आपने कुछ नहि किया हैं। आप् भला केसे मेरादिल दुखा सकती हें? मुझेपता हैं आप् मुझे बहोत प्रेम करती हें। "
"तोँ फिन क्याँ बात हैं?" रितू दिदी नें सहसा गंभीर होकर पूछा___"तूँ एकदम सें हि गुमसुम सां क्यूं नज़रआने लगा हैं? आख़िर किसबात नें तुम्हारी तरफ इतना सीरियस कर दिया हैं? क्याँ मुझे नहि बताएगा?"
"मे दरअसल गुड़िया कि वजह सें सीरियस होँ गय़ा हूॅ दिदी। " मैने गंभीरता सें कहा___"पता नहि क्याँ बात हैं जौ वोँ मुझसे बात करने कि तोँ बातदूर बल्कि वोँ मेरे सामने भि नहि आती। जबकि उसेपता हैं कि मे उसकी शरारत भरी बातों केँ बिना लम्हा भर भि नहि रह सकता। "
"ऐसा कब सें हैं?" रितू दिदी नें पूछा___"तूने उसेकुछ कहा थां क्याँ? याँ फिन तूनेउसे किसीबात पऱ डाॅटा होगा। वोँ तेरी लाडली हैं इसलिए वोँ तेरे ज़ारा सें भि डाॅट देने पर्र सीरियस होँ सकती हैं। संभव हैं ऐसा हि कुछ हौ। "
"मे उसे सपने मे भि नहि डाॅट सकता दिदी। " मैने पुरज़ोर लहजे मे कहा___"औऱ नाँ हि मैनेउसे कुछऐसा वैसाकहा हैं जिससे उसे बुरालग जाए। "
"तोँ फिनकोई दूसरी वजह होगी। " रितू दिदी नें सोचने वालेभाव सें कहा___"कोई ऐसीवजह जिसके बारे मे तुम्हें पता हि नं होँ। "
"ऐसी क्याँ वजह हौ सकती हैं भला?" मैने कहा___"अगर कोईबात होती तौ गुड़िया मुझे अवश्य बताती। "
"कुछ बातें ऐसी भि होती हें राज। " रितू दिदी नें समझाने वाले अंदाज़ सें कहा___"जिन्हें एक् बेहन अपने भइया सें नहि कह सकती। वैसे इसकापता करने कां सबसे अच्छा तरीका यह हैं कि तुँ उसे मोबाइल लगा औऱ उससेबात कर। "
"वोँ मेरा मोबाइल नहि उठाएगी दिदी। " मैने कहा___"औऱ नां हि मुझसे बात करेगी। अगर करना होता तोँ अभि जब मे मुम्बई गय़ा थां तोँ वोँ मुझसे कुछ तौ बात करती। मगर वोँ तोँ मेरे सामने आई तक नहि। आते टाइम मे हि उससे मिलने उसके कमरे मे गय़ा थां। मैने देखा कि कमरे मे बेड पऱ वोँ ऑखेंबंद कर सोने कां दिखावा कररही थि। मतलबसाफ थां कि वोँ मुझसे नां तौ मिलना चाहती हैं औऱ नां हि बात करना चाहती हैं। "
"बड़ी हैरत कि बात हैं यह तोँ। " रितू दिदी केँ चेहरे पर्र हैरत केँ भाव उभरे___"चल ठीक हैं मे अपने मोबाइल सें उसेकाल करतीहूॅ औऱ मे उससेबात करतीहूॅ। "
"हाॅयह ठीक रहेगा दिदी। " मैनेखुश होतेहुए कहा___"पर्र आप् उससेयह मत कहना कि आपनेउसे मेरे बातों केँ चलते मोबाइल किया हैं औऱ नाँ हि यह बताना कि मे आपके हि पास बैठाहुआ हूॅ। "
रितू दिदी नें मेरीबात पऱ हाॅ मे अपनासिर हिलाया औऱ यहकहकर बेड सें नीचे उतरने लगी कि वोँ अपने कमरे सें अपना मोबाइल लेकर अभि आती हें। उनके जाने केँ बाद मे बेड पऱ हि उनकेआने कां इन्तज़ार करनेलगा। बेड केँ पास हि एक् छोटी सि टेबल थि जिसमें मेराफोन मोबाइल रखाहुआ थां। मुझे ख़याल आया कि रितू दिदी केँ पास तोँ गुड़िया(निधी) कां नंबर हैं हि नहि। अतः मैने टेबल सें अपना मोबाइल उठाकर उसमे सें गुड़िया कां नंबर दिदी कों देने कां सोचा।
मैने अपने मोबाइल कों उठाकर फोन केँ बगल सें लगीबटन पऱ अॅगूठे सें पुश किया तोँ स्क्रीन जलउठी। स्क्रीन जलते हि उसमें मुझे एक् मैसेज नज़रआया जौ व्हाट्सएप मे थां औऱ जिसे नीलम नें भेजा थां। मैने मोबाइल कों अनलाॅक करकेउस मैसेज कों खोला। नीलम केँ भेजेगए मैसेज कों पढ़ता चला गय़ा मे। मे यहजान कर हैरान हुआ कि नीलम नें मैसेज मे सच्चाई कां पतालग जाने वालीबात कही थि औऱ वोँ मुझसे मिलना चाहती थि। मे चकित थां कि नीलम नें इतना जल्द सच्चाई कां पता केसेलगा लिया? उसने मैसेज मे मात्र इतना हि लिखा थां कि___"राज मुझेपता चल गय़ा हैं कि सच्चाई क्याँ हैं औऱ किसवजह सें रितू दिदी माॅमडैड केँ खिलाफ होकर तुम्हारे संग होँ गई हें। सारी बातें तुमसे मिलने केँ बाद हि बताऊॅगी इसलिए मुझे तुमसे जल्दी हि मिलना हैं। अबयह तुम् बताओ कि मे तुमसे कब केसे औऱ कहाॅमिल सकतीहूॅ। मेरेइस मैसेज कां जवाब जितना जल्द होँ सके देना। तुम्हारी बेहन नीलमपरी। "
मे नीलम केँ इस मैसेज सें हैरान भि थां औऱ खुश भि। हैरान इसलिए कि उसने इतनी जल्द सच्चाई कां पताकर लिया थां औऱ खुशइस लिए कि अब वोँ भि कदाचित रितू दिदी कि तरह मेरेपास हि रहेगी। अभि मे यहसभी सोचकर खुश हि होँ रहा थां कि तभी रितू दिदी मेरे कमरे मे अपना मोबाइल लिए आँ गईं। उनकी नज़र मेरे चेहरे पऱ मौजूद खुशी केँ भावों पऱ पड़ी तोँ उनके चेहरे पर्र चौंकने केँ भाव उभरे।
"ओये होये बड़ाखुश लगरहा हैं भइया। "फिन वोँ मुस्कुराते हुए मुझसे बोलि___"कोई दूसरी गर्लफ्रैण्ड मिल गई क्याँ तेरी?"
"अरे नहि दिदी। " मे उनकीइस बात सें मुस्कुराते हुए बोला___"ऐसी कोईबात नहि हैं। दरअसल मेरे मोबाइल पर्र नीलम कां मैसेज आया थां रात मे। उसके मैसेज कों पढ़कर हि खुश हौ रहा थां। "
"ओह तोँ यहबात हैं। " रितू दिदी बेड पऱ मेरेपास हि बैठते हुए कहा___"ऐसा क्याँ लिखकर भेजा हैं उसने मैसेज मे जिसके चलते तूँ इतनाखुश हौ रहा हैं? ज़रा मुझे भि तोँ सुना उसका मैसेज। "
लीजिए, आप् स्वयं हि पढ़ लीजिए। " मैनेफोन उनकेहाथ मे पकड़ाते हुए कहा___"होँ सकता हैं कि आप् भि मेरीतरह उसका मैसेज पढ़कर खुश होँ जाएॅ। "
"उसकेलिए मुझे मैसेज पढ़ने कि ज़रूरत नहि हैं मेरे प्यारे भइया। " रितू दिदी नें मुझे देखते हुए कहा___"क्योंकि अगर तुँ खुश हैं तोँ मे तुम्हें खुशदेख कर हि खुश होँ जाऊॅगी। "
मे उनकीइस बात सें बस मुस्कुरा कररह गय़ा। जबकि ऐसा कहने केँ बाद दिदी नें नीलम केँ मैसेज कि तरफ देखा औऱ मैसेज कों पढ़ने लगीं। मैसेज पढ़ते हि उनके चेहरे पर्र हैरत औऱ खुशी केँ मिले जुलेभाव उभरे औऱ फिन एकाएक हि उनके चेहरे पर्र गंभीरता छा गई।
"क्याँ हुआ दिदी?" मे उनके चेहरे पर्र अचानक हि उभरआई उस गंभीरता कों देख चौंकते हुए पूछा___"आपको नीलम केँ इस मैसेज कों पढ़कर खुशी नहि हुईँ?"
"खुशी तौ हुईँ राज। " रितू दिदी नें पूर्वत गंभीर भाव सें हि कहा___"यह जानकर अच्छा भि लगा कि नीलम कों भि सच्चाई कां पताचल गय़ा हैं मगर गंभीरता वालीबात यह हैं कि कहींडैड कों भि न् इसबात कां आभास होँ जाए कि नीलम कों भि सच्चाई पताचल गई होगी। उस सूरत मे नीलम पर्र खतरा भि पैदा हौ सकता हैं। "
"यह आप् क्याँ कहरही हें दिदी?" मैने हैरानी सें कहा__"भला बड़े पिताजी कों इसबात कां आभास केसे हौ जाएगा कि नीलम उनकी सच्चाई जान चुकी होगी?"
"तुम् मेरी माॅम कों नहि जानते राज। " रितू दिदी नें उसी गंभीरता सें कहा___"उन्होंने डैड केँ संग हि वकालत कि पढ़ाई कि थि। उनका दिमाग़ बहोत हि शार्प हैं। डैड सें कई गुना ज़्यादा उनका दिमाग़ चलता हैं। वोँ पिछले कुछ दिनों कि घटनाओं कों मद्दे नज़र रखतेहुए डैड कों यहबात समझा सकती हें कि नीलम कों सच्चाई कां पता अवश्य चल गय़ा होगा अथवा वोँ सच्चाई कां पता लगाने कि राह पऱ चलरह होगी। "
"बात कुछसमझ मे नहि आई दिदी। " मैंने उलझनपूर्ण भाव सें कहा___"भला बड़ीमाॅ ऐसा क्याँ सोचकर बड़े पिताजी कों समझाएॅगी?"
"सीधी सि बात हैं राज। " दिदी नें कहा___"यह तोँ उन्हें अब तक समझ आँ हि गय़ा होगा कि हमने क्याँ क्याँ औऱ किस तरीके सें किया हैं? इसलिए उन्हें इस सबकी कड़ियाॅ जोड़ने मे कोई मुश्किल नहि होगी। कहने कां मतलबयह कि सारी घटनाओं केँ बाद वोँ अबउसदिन कि घटनाओं कों आपस मे मिलाएॅगी जिसदिन डैड कों हमारे नकली सीबीआई वाले गिरफ्तार करके लेँ गए थें औऱ फिन बिनाकुछ पूछताॅछ किये उन्हें दोदिन बाद छोंड़ भि दिया थां। डैड कों यहयोपता चल हि गय़ा थां कि वोँ सभी तुम्हारा हि कियाधरा थां, क्योंकि तुम्हारे उन नकली सीबीआई वाले आदमियों नें अपनी बातों केँ बीच तुम्हारा हि नाम लिया थां। अतः सारी बातें जानने केँ बाद माॅम कों यह सोचने मे ज़रा भि वक़्त नहि लगेगा कि तुमने डैड कों दोदिन केँ लिए अंडरग्राउण्ड करके अपनाकौन सां अहम किया होँ सकता हैं। यानी उन्हें यह तौ अंदाज़ा थां हि कि तुम् अभि यहीं होँ औऱ यहीं सें हि सारी घटनाओं कों अंजाम देरहे होँ। मगरयह भि भूलने वालीबात नहि हैं कि तुम्हारे पासपवन औऱ उसकी फैमिली भि हैं जोँ कि तुम्हारी कमज़ोरी केँ रूप मे हें। तुम् यह हर्गिज भि नहि चाहोगे कि तुम्हारी कमज़ोरी डैड केँ हाॅथलग जाए। क्योंकि उस सूरत मे तुम् बहोत हि ज़्यादा कमज़ोर पड़ जाओगे औऱ यह भि संभव हैं कि उस सूरत मे तुम् मजबूरन डैड केँ हाॅथ भि लगजाओ। उसकेबाद किस्सा समाप्त। इसलिए तुम् यही चाहोगे कि सबसे पहले तुम् अपनी कमज़ोरियों कों याँ तोँ पूर्णरूप सें सुरक्षित करदो याँ फिन उन्हें डैड कि पहुॅच सें बहोत दूरकर दो। माॅम केँ दिमाग़ मे यही बातें होगी औऱ वोँ सोचेंगी कि तुम् ऐसा हि करना चाहोगे। यानीपवन तथा उसकीमाॅ बेहन कों डैड कि पहुॅच सें दूर मुम्बई भेज देना चाहोगे। लेकिन तुम्हारे पास समस्या यह होगी कि पवनआदि कों लेकर जाने केँ बाद मे औऱ नैना फूफी यहाॅ अकेली रह जाएॅगी, औऱ हम् दोनो पऱ डैड कां खतरा रहेगा। अतः तुम् कोईऐसा जुगाड़ लगाओगे जिससे तुम्हारे दोनोकाम आसानी सें औऱ सुरक्षित तरीके सें हौ जाएॅ। तब तुमने सोचा कि डैड केँ रूप मे राजा कों हि सह औऱ मातदे दि जाए जिससे नाँ रहेगा बाॅस औऱ नाँ हि बजेगी बाॅसुरी वालीबात हौ जाएगी। यही तुमने किया भि औऱ जब तुम् वापस मुम्बई सें लौटआए तौ डैड कों भि छोंड़ दिया अपने नकली सीबीआई केँ आदमियों केँ हवाले सें। "
"यहसभी तोँ ठीक हैं दिदी। " मैने शख्त हैरानी सें दिदी कि तरफ देखते हुए कहा___"लेकिन इसमें यहबात कहाॅ सें आती हैं कि उन्हें यहपता चल सकता हैं कि नीलम भि उनकी सच्चाई कों जान चुकी हैं याँ फिन सच्चाई जानने कि राह पर्र चलरही होगी?"
"वहीं पऱ आँ रहीहूॅ माई डियर ब्रदर। " रितू दिदी नें सहसा मुस्कुराते हुए कहा___"माॅम यह सोचेंगी कि उसीदिन तीनतीन लोग हल्दीपुर केसे आँ गए? मतलब कि डैड तौ हवेली आए हि उनकेसंग संगउसी दिन नीलम भि हवेली आँ पहुॅची औऱ यह भि उनके ज़हन मे होगा कि तुम् भि वापस मुम्बई सें आँ गए होगे औऱ इसीलिए डैड कों छोंड़ भि दिया थां। तोँ सोचने वालीबात थि यहतीन लोग संयोगवश तोँ नहि आँ गए थें यहाॅ। यानी कहीं न् कहीं इसमें कोई पेंच याँ भेद अवश्य थां। माॅम कों सोचने औऱ समझने मे देर नहि लगेगी कि जिस ट्रेन सें तुम् आएउसी ट्रेन सें नीलम भि आई होगी औऱ बहोत हद तक यह भि संभव हैं कि तुम् दोनो कि मुलाक़ात भि ट्रेन मे हुईँ हौ। मुलाक़ात जब होती हैं तोँ कुछ न् कुछबात चीत भि होती हैं। अब चूॅकि हालात ऐसे थें कि तुम् दोनो केँ बीच मे नार्मल बातें तौ होंगी नहि यानी कि तक़रार भरी अथवा गिले शिकवे संबंधी बातें हुईँ होंगी। दूसरी बात माॅम नें मुझे मोबाइल किया थां पऱ मैने उनका मोबाइल उठाया नहि तब उन्होंने नीलम कों मोबाइल किया। नीलम नें मुझे मोबाइल कर मुझसे बात कि थि औऱ पूछा थां कि मे अपने हि माॅमडैड केँ खिलाफ होकर तुम्हारे संग क्यूं हूॅतब मैने उससेकहा थां कि वोँ सच्चाई कां पता स्वयं लगाए। यही बात माॅम नें भि सोचा होगा। यानी उन्हें यहलगा होगा कि मैने नीलम कों सारी बातें बता दि होंगी औऱ अब नीलम सच्चाई जान चुकी हैं। याँ फिनअगर मैने नहि बताया होगा तोँ इतना तौ अवश्य हि कहा होगा कि मेरे माॅमडैड केँ खिलाफ़ होने कि वजह कां पता वोँ स्वयं लगाए। इस लिए नीलमवजह याँ सच्चाई कां पता लगाने आई होगी। " रितू दिदी नें इतना कहने केँ बाद गहरी साॅसली औऱ फिन बोलीं___"इन सभी बातों कि वजह सें हि मे कहरही हूॅराज कि नीलम पर्र अब ख़तरा हैं औऱ उस नादान व नासमझ कों इसबात कां एहसास भि नहि होगा कि वोँ कितनी बड़ी मुसीबत मे फॅस सकती हैं। उसेउस स्थान सें निकालना होगाराज वरनासच मे अनर्थ होँ सकता हैं। वोँ हवश केँ पुजारी मेरी मासूम बेहन कों बरबाद कर सकते हें। "
"नहींऽऽ। " मैंने सहसा आवेश मे आकर कहा___"ऐसा हर्गिज़ नहि होगा दिदी औऱ मे होने भि नहि दूॅगा। अगर मेरी मासूम बेहन कों उन लोगों नें छुआ भि तोँ उन्हें इसका अंजाम बहोत हि भयानक रूप सें भुगतना पड़ेगा। "
"नीलम केँ संग मे सोनम भि हैं। " रितू दिदी नें गंभीरता सें कहा___"उसे भि उन लोगों सें दूर करना होगा। मे उस कमीने शिवा कों बहोत अच्छे तरीके सें जानती हूॅ। उसे वासना औऱ हवश केँ चलते रिश्तों कां कोईभान नहि रहेगा औऱ वोँ सोनम कों भि हवशभरी नज़रों सें देखरहा होगा। हे ईश्वर यह नीलमउसे अपनेसंग लेकर यहाॅआई हि क्यूं थि?"
"फिक्र मत कीजिए दिदी। " मैने कठोरता सें कहा___"उन दोनो कों कुछ नहि होगा। अब मैदान मे खुलकर आने कां वक्त आँ गय़ा हैं। आपकेडैड कों यह बताने कां वक़्त आँ गय़ा हैं कि अगर मे उनके सामने भि आँ जाऊॅ तोँ मेराकुछ नहि बिगाड़ सकते हें। "
"कुछ भि करने सें पहले तुम्हें नीलम औऱ सोनम कों सुरक्षित वहाॅ सें निकालना होगा। " रितू दिदी नें समझाने वाले अंदाज़ सें कहा___"उसके बाद हि हम् कोईठोस क़दम उठाने मे सक्षम होँ सकते हें। "
"ठीक हैं दिदी। " मैने कहा___"मे नीलम सें बात करकेउसे सभीकुछ समझाता हूॅ कि उसे क्याँ औऱ केसे करना हैं। आप् भि गुड़िया सें बातकर लीजिए। औऱ हाॅइस बात कि बिलकुल भि फिक्र मत कीजिए कि नीलमव सोनम दिदी मे सें किसी कों भि मेरे रहतेकुछ होगा। मे अपनीजान देकर भि उनकी इज्ज़त औऱ जान कि हिफाज़त करूॅगा। "
"ऐसामत कहराज। " रितू दिदी कि ऑखेंछलक पड़ी, बोलीं___"तेरी कुछ होने सें पहले हि मे अपनीजान दे दूॅगी। मेरा सबसे प्यारा भइया हि नहि रहेगा तौ मे इस पापी दुनियाॅ मे अकेली जीकर क्याँ करूॅगी। "
"सभीठीक हि होगा दिदी। " मैने दिदी कों अपने सें छुपका लिया___"औऱ मे सभीकुछ ठीक करने कि पूरी कोशिश भि करूॅगा। चलिएअब आप् भि फ्रेश हौ लीजिए, सुभह हौ गई हैं। नैना फूफी आपको आपके कमरे मे न् देखेंगी तोँ कहीं आपको ढूॅढ़ने न् लग जाएॅ। अतः अब आप् जाइये औऱ हाॅ गुड़िया सें अवश्य बातकर लीजिएगा। "
मेरे कहने पऱ रितू दिदी नें मुझसे अलग होकरहाॅ मे सिर हिलाया। मैने उन्हें अपने मोबाइल सें गुड़िया कां नंबर मैसेज किया। उसकेबाद दिदी कमरे सें चलीगईं। उनके जाने केँ बाद मैंने गहरी साॅसली तथाफिन मैने नीलम कों मैसेज किया। अपनेफोन कों हाॅथ मे लिए मे नीलम कि तरफ सें उसके रिप्लाई कां इन्तज़ार करनेलगा।
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दोस्तो, आप् सबके सामने भाग हाज़िर हैं,,,,,,,,
आप् सबकी हसीन प्रतिक्रिया औऱ आपके शानदार रिव्यू कां बेसब्री सें इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
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दोस्तो, आप् सबकी प्रतिक्रिया सराहनीय हैं। आप् अपनीसोच व क्षमतानुसार अपनी प्रतिक्रिया देते हें लेकिन मे उन रीडर्स सें कहना चाहता हूॅ जोँ मूकबने बैठे हें कि आपका क्याँ चला जाएगा अगर आप् भि अपनी प्रतिक्रिया यहाॅ पऱ कमेंट केँ रूप मे दे देंगे तोँ?????
यह एक् सच्चाई हैं कि यहाॅ पऱ हर स्टोरी कों पढ़ने वालों कि संख्या बहोत अधिक होगीमगर किसी भि राइटर कि किस्सा पर्र प्रतिक्रिया देने वालों कि संख्या बस गिनती कि हि होती हैं। सोचने वालीबात हैं कि ऐसे भि खुदगर्ज़ लोग होते हें जौ राइटर्स कि स्टोरी पढ़ तोँ लेते हें मगरउस पऱ अपनी प्रतिक्रिया इसलिए नहि देते कि ऐसा करने सें उनकीशान मे गुस्ताखी होँ जाएगी। एक् यह भि सच्चाई हि हैं कि जितनी शिद्दत सें अपटेड केँ आने कां इन्तज़ार उन्हें होता हैं उतनी शिद्दत सें इन्तज़ार उन रीडर्स कों भि नहि होता जौ वास्तव मे अपनी प्रतिक्रिया देते हें।
यहदेख कर यकीनन हर राइटर कों वैसी हि बेहद खुशी मिलती होगी जैसे मुझे मिलती हैं। बहोत बहोत धन्यवाद ऐसे रीडर्स कां जोँ अप्रत्यक्ष रूप सें अपनायह शानदार काम करते हें।
!! शुक्रिया !!
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बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 412 पर्र,
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