♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
HELLO BROTHER NEW READER OF YOUR sundar kahani
chlo hindi font me hi बात hu jaye
तोँ भइया एक् शुभम कों एक् दूसरे शुभम कां
शुभ प्रणाम।
मैंने हाल हि मे आपकी किस्सा पड़नी शुरुआत कि हैं।
औऱ मुझे बहुत अच्छा लगरहा हैं कि मेरानाम भि कहीं नाँ कहीं रोशन हौ रहा हैं (मजाक हैं भइया)
मुझे आपकी किस्सा बहुत मनपसंद आयी हैं इसकाहर दृश्य हरबात हरकथन बहुत ज़्यादा वास्तविक औऱ स्वभिक लगता हैं।
विराज प्रतिमा दोनों हि काबिले तारीफ हैं।
उनकामन बहोत हि तेज हैं। आपनेहर पात्र कों अच्छे सें दर्शाया हैं। मंत्री औऱ अजय केँ एक् संग हौ जाने पर्र विराज केँ लिए जहां तकलीफ़
बढ़ जाएगी वहीं एक् बात सें राहत होगी कि अब वोँ दोनों कां एक् संग सामना करेगा पऱ तकलीफ़ यानयूं कहूं कि अबइस लड़ाई कां स्तरबढ़ जाएगा औऱ किस्सा मे औऱ भि मजा आएगा नीलम औऱ सोनम कों तोँ विराज निकाल हि लेगा औऱ सभीसही तरीके सें भि हौ जाएगा
शिवा कां सोनम कों पसन्द करना शायद सोनम कों पता हौ।
यान नीलम नें सोनम कों सभीकुछ बता दिया हौ कि सच क्याँ हैं।
अबये तोँ आगे हि पता चलेगा कि क्याँ होगामै बस संभावना हि बता सकता हूं।
आपने स्टोरी मैहर एक् पात्र कों उतनी हि एहमियत दि हैं जितनी उन्हें मिलनी चाहिए थि। औऱ वही प्रतिक्रिया दि हैं जोँ कोई भि उस पात्र सें संबधित बात सोचता यानउन हालातों मै करता जिसकी वजहमै आपके लिखने केँ तरीके कां कायल होँ गय़ा हूं।
अब सें मै आपकीकथा एक् नियमित पाठक हूं।
YOUR REGULAR READER
Absolutely right shubham bro. Kisi na kisi k comment say bi hame kuch achaa point mil jata h joo bhut important hotha h apni kahani k liye.:biggboss: Next update kaa intjaar h bro
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 441 पर्र,
bhay kya updet diyahe hilake rakhdiya updet padhkar etna ptaa chaltahe he k mukabla takkarka he chahe dimag hoya saririk bal aur mukabla kante kaa hu too aur jyada majha aatahe hetsof bhay agle updet kaa besabri say intejar rahega
bahut he lazbab update diya bhay our aapne sai kaha update ayese jagha pe roka kee intzar krna muskil hoga sochna sochna krr dimak fatne lagega kee aakhir hoga kya. hahahahahaha
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Jabardast & Gajab update bro
Aapne har tarh से pure update mai sbi filling aur sbi situation ko kamaal kaa dikhaya hain
too mantri ne apne ap ko us jaal से chhudane aur apne bachcho ko bachne ke liye jasus kr hi लिया par y nahii janta की iski y galti isko poora nanga kr sadak par b doda sakti hain
Ritu ke samjhane से gudiya kaa अच्छा lga par vo kaise apni us filling ko btaye joo अब aasha ko maloom hu gyi sirf उसकी एक choti si galti से jiska use abhi tk pta b nahii hain
Sbi viraj ko lekr tension m hain aur एक doosre ko y dikha nahii rhi kyoki vo sbi joo एक sath hain उसकी khusi ko vo km nahii karna chahte hain
Kya mast plan किया hain viraj ne kamaal kaa hain har chij ko achhi tarh sochkr karta hain yahi too usk dimag की shakti एक kamaal hain
Waiting for next :biggboss:
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 56 》
अब तक,,,,,,,,
"हाॅयह तौ सहीकहा तुमने। " सहसा दिदी नें मेरीतरफ प्रसंसा भरी नज़रों सें देखते हुए कहा___"हमने तोँ उनसे पूछा हि नहि थां। मगर प्रश्न तौ हैं हि कि वोँ किस ज़रूरी काम सें गुज़र रहे थें?"
"ओफ्फो दिदी। " मैने कहा___"आपसे ऐसे प्रश्न कि उम्मीद नहि थि मुझे। बड़ी सीधी सि बात हैं वोँ अपने आदमियों कों इकट्ठा करने केँ लिएजा रहे थें। "
"ओहआई सि। " रितू दिदी नें कहा___"चल यह तौ बहोत अच्छा किया तुमने जौ स्वयं केँ लिए भि बैकअप कां इंतजाम कर लिया हैं। वरना मे तौ सोचरही थि कि कहीं हम् फॅस हि नं जाएॅ किसीजाल मे। "
"ऐसे केसेफॅस जाएॅगे दिदी?" मैने कहा___"औऱ फिन रिस्क तौ लेना हि पड़ेगा। यह तोँ कुछ भि नहि हैं, आने वाले वक्त मे इससेकई गुना ज़्यादा ख़तरा भि होगा जिसका हमें सामना करना पड़ेगा। "
"हाॅयह तौ हैं। " दिदी नें कहा____"ख़ैर अभि तोँ सबसे ज़रूरी यही हैं कि किसीतरह नीलमव सोनम सुरक्षित हमें हाॅसिल हौ जाएॅ। उसकेबाद कि इतनी चिंता नहि हैं क्योंकि तबइसबात कां भय नहि रहेगा कि हमारा कोई अपना उनके चंगुल मे हैं। "
मे रितू दिदी कि इसबात पर्र बस मुस्कुरा कररह गय़ा। ऐसे हि बातें करतेहुए हम् बढ़ेचले जारहे थें माधोपुर कि तरफ। हम् तीनों हि पूरीतरह सतर्क थें। हम् इसबात कों भि बखूबी समझते थें कि ख़तरा केवलअजय सिंह कि तरफबस कां हि नहि थां बल्कि मंत्री दिवाकर चौधरी कि तरफ सें भि थां। दूसरी बातअब हम् पहचाने जा चुके थें दोनोतरफ इसलिए ख़तरा औऱ भि बढ़ गय़ा थां हमारे लिए। मगर सच्चाई कि राह पर्र चलने केँ लिए हम् अपने अपने हौंसलों कों आसमां कि बुलंदियों मे परवाज़ करवारहे थें। आने वाला टाइम बताएगा कि इसखेल मे किसको जीत मिलती हैं औऱ किसेहार कां कड़वा स्वाद चखना होगा??
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अबआगे,,,,,,,
नीलमव सोनम केँ जाने केँ बाद शिवा वापस पलटा औऱ हवेली केँ अंदर कि तरफबढ़ चला। उसके होठों पर्र बड़ी हि दिलकस मुस्कान थि। ज़ाहिर थां कि उसकीयह मुस्कान सोनम कि वजह सें थि। जिसके बारे मे वोँ जाने क्याँ क्याँ सोचने लगा थां। ख़ैर सोनम केँ बारे मे सोचते हुए हि वो चलतेहुए अंदर ड्राइंग रूम मे पहुॅचा।
उधर ड्राइंग रूम मे प्रतिमा अभि भि बैठी हुईँ थि। उसके चेहरे पर्र सोचों केँ भाव गर्दिश कररहे थें। शिवा केँ अंदरआते हि वो सोचो सें बाहर् आई औऱ उसने शिवा कों मुस्कुराते हुए देखा तोँ सहसा वो चौंकी। फिन अगले हि समय सामान्य भि हौ गई, कदाचित उसे शिवा कि मुस्कान कां राज़पता चल गय़ा थां।
"क्याँ बात हैं बेटा। " फिन उसने बेटे कि तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर कहा___"लगता हैं मन मे बहोत हि मीठी मीठी गुदगुदी होँ रही हैं, हैं नाँ?"
"ग.गुदगुदी???" प्रतिमा कि इसबात सें शिवा एकदम सें चकरा सां गय़ा___"कैसी गुदगुदी माॅम?"
"वैसी हि बेटा। " प्रतिमा नें कहा___"जैसी तबहुआ करती हैं जब किसी सें नयानया इश्क़ होता हैं। तुम्हारे होठों पऱ थिरकरही यह मुस्कान इसबात कां सबूतदे रही हैं कि तुम् सोनम केँ बारे मे सोचसोच अंदर हि अंदर बेहद रोमांच सां महसूस कररहे होँ। "
"हाॅ माॅम। " शिवा कि मुस्कान गहरी होँ गई___"यह तोँ आपने बिलकुल सहीकहा। मे सचमुच सोनम केँ बारे मे हि सोचसोच करमजा महसूस कररहा हूॅ। उफ्फ माॅम मे बता नहि सकता कि मे सोनम केँ बारे मे सोचसोच कर कितना खुश हौ रहाहूॅ। क्याँ ऐसा नहि होँ सकता माॅम कि मेरेइस दिल कां यहहाल मेरे बिना बताए सोनमसमझ जाए औऱ फिन वोँ मेरेइस दिल कि चाहत कों कुबूल कर लेँ?"
"तुम् दीवाने सें होतेजा रहे हौ बेटे। " प्रतिमा एकाएक हि गंभीर होँ गई, बोलि___"जोँ कि बिलकुल भि ठीक नहि हैं। तुम् स्वयं यहबात अच्छी तरह जानते होँ कि जौ तुम् चाहते हौ वोँ इस जन्म मे तोँ हर्गिज़ भि नहि होँ सकता। फिन इसतरह बेकार कि बातें करने कां तथाऐसा सोचने कां क्याँ मतलब हैं बेटा? अभि भि टाइम हैं तुम् अपने अंदर केँ इस एहसास कों जितना जल्द हौ सके निकाल दो। वरनादेख लेनाइस सबकेलिए बाद मे तुम् बहोत दुखी होगे। "
"जिन्हें इश्क़ हौ जाता हैं न् माॅम। " शिवा नें अजीबभाव सें कहा___"फिन उन्हें कोई समझा नहि सकता औऱ नाँ हि इश्क़ मे पागल होँ चुका ब्यक्ति किसी कि बातों कों समझना चाहता हैं। उसे तौ बसहर घड़ीहर लम्हा अपने प्रेम कि आरज़ू रहती हैं। ऐसा नहि हैं माॅम कि इसमें दिमाग़ काम नहि करता हैं बल्कि वोँ तौ वैसे हि काम करता रहता हैं जैसेआम इंसानों कां करता हैं मगरदिल केँ जज़्बातों कि जबऑधी चलती हैं न् तोँ उस दिमाग़ कां सारा दिमाग़ उसके हि पिछवाड़े मे घुस जाता हैं। "
प्रतिमा केँ चेहरे पऱ एक् बार पुनः हैरत केँ भावउभर आए। उसे इस टाइमलग हि नहि रहा थां कि यहवही शिवा हैं जोँ इसके पहलेहर लड़की याँ स्त्री कों केवल औऱ केवलहवश कि नज़र सें देखता थां। बल्कि इस वक़्त तोँ वो दुनिया कां सबसे शरीफव संस्कारी दिखाई देरहा थां।
"कहते हें कि दुनियाॅ मे कुछ भि असंभव नहि हैं। " उधर शिवाकह रहा थां___"अगर किसी चीज़ कों पाने कि शिद्दत सें चाहतकरो तौ वोँ यकीनन हाॅसिल हौ जाती हैं। आप् जिस चीज़ कों असंभव कहरही हें वोँ चीज़ भि संभव हौ सकती हैं माॅम, अगर आप् चाहो तोँ। "
"क्.क्याँ मतलब???" प्रतिमा केँ माथे पर्र सलवटें उभरीं।
"मतलबसाफ हैं माॅम। " शिवा नें कहा___"अगर आप् औऱ डैड चाहें तोँ सोनम मेरी जाने हयात अवश्य बन सकती हैं औऱ मे उसेपा करखुश होँ सकताहूॅ। "
"तुम् पागल हौ गए हौ बेटा। " प्रतिमा केँ चेहरे पर्र गहन बेचैनी केँ भाव उभरे, बोलि___"सभी कुछ जानते व समझते हुए भि तुम् बेमतलब कि बातें कियेजा रहे हौ। तुम् इसबात कों समझ हि नहि रहे कि यह कितना ग़लत हैं औऱ कितना मुश्किल हैं। सोनम तुम्हारी बड़ी बेहन हैं। वोँ तुम्हें अपना छोटा भइया हि मानती हैं। उसे नहि पता हैं कि उसका छोटा भइया उसके प्रति कैसीसोच रखता हैं औऱ क्याँ चाहता हैं?"
"आप् सोनम केँ माॅमडैड सें बात कीजिए माॅम। " शिवा नें कहा___"मे सोनम कों मना लूॅगा औऱ अगर वोँ नहि मानेगी तौ उससे कहूॅगा कि वोँ मुझे अपने प्रेम कि भीखदे दे। मे उसे बताऊॅगा कि मे उसके बिनाअब नहि रह सकता। दूसरी बातजब उसके माॅमडैड इस रिश्ते केँ लिएमान जाएॅगे तोँ फिनउसे भि भला क्याँ तकलीफ़ होगी?"
"हे ईश्वर। " प्रतिमा नें जैसे अपना माथा पकड़ लिया, फिन बोलीं___"केसे समझाऊॅ इस लड़के कों? तुमने यहसोच भि केसे लिया कि सोनम केँ माॅ बाप इस रिश्ते केँ लिएमान जाएॅगे? बल्कि सच्चाई तोँ यह हैं कि वोँ यहसभी पता चलते हि तुम्हारे संगसंग हम् सभी पर्र भि लानत भेजेंगे औऱ फिनकभी हमारी शक्ल तक देख्ना न् चाहेंगे। "
प्रतिमा कि इसबात पऱ शिवामन मसोसकर रह गय़ा। एकाएक हि उसके चेहरे पर्र ऐसेभाव आए जैसेउसे इनसभी बातों सें बेहद तक़लीफ हुइ होँ। जबकि उसके चेहरे पऱ उभरआए इन भावों कों बड़े ध्यान सें देखते हुएतथा समझाते हुए प्रतिमा नें नम्रभाव सें कहा____"देख बेटा इसमें इतना दुखी होने कि ज़रूरत नहि हैं। मे अच्छी तरह तेरे अंदर कां हालसमझ सकतीहूॅ। मुझेइस बात कां एहसास हैं कि सोनम केँ प्रति तूँ किसहद तक गंभीर हौ चुका हैं। मगर बेटा सभीकुछ वैसा हि नहि हौ जाया करता जैसा हम् चाह लिया करते हें। यथार्थ सच्चाई नाम कि भि कोई चीज़ होती हैं जिसका हमें बेबस होकर हि सहीमगर सामना करना पड़ता हैं औऱ उसे मानना भि पड़ता हैं। यह तोँ तुँ भि अच्छी तरह जानता हैं कि सोनम तेरी बड़ी मौसी कि लड़की हैं औऱ रिश्ते मे वोँ तेरी बड़ी बेहन लगती हैं। सोनम कि माॅ मेरीसगी बेहन हैं इस हिसाब सें यह नातासगा हि होँ जाता हैं। अतःसगे रिश्ते केँ बीच तुम्हारी औऱ सोनम कि विवाह हर्गिज़ भि नहि हौ सकती। अगर ऐसा होता कि सोनम कि माॅ मेरीसगी बेहन नं होकरदूर केँ किसी रिश्ते सें बेहन लगती तोँ ऐसा होँ भि सकता थां। इसलिए तुम्हें इनसभी बातों कों सोचसमझ कर अपने आपको समझाना होगा। मुझेपता हैं कि अभि यहसभी तेरेलिए बहोत मुश्किल होगामगर यह करना हि होगा बेटा। वरना अभि जिसबात सें तुम्हें इतनी तक़लीफ होँ रही हैं उसीबात सें आगेचल कर औऱ भि ज़्यादा तक़लीफ होगी। दुनियाॅ मे एक् सें बढ़कर एक् हसीन लड़कियाॅ हें, तूँ जिस लड़की सें कहेगा हम् उस लड़की सें तेरी विवाह करेंगे। मगर प्लीज सोनम कां ख़याल अपने दिलो दिमाग़ सें निकाल दे। इसी मे सबकी भलाई हैं। "
"ठीक हैं माॅम। " शिवा नें गहरी साॅसली औऱ फिन एकाएक हि उसके चेहरे पऱ दृढ़ता केँ भावआए, बोला____"अगर ऐसीबात हैं तोँ ठीक हैं। अब मे कभी आपसे नहि कहूॅगा कि आप् सोनम सें मेरी विवाह करवा दीजिए। ख़ैर एक् बात कहूॅ माॅम, पता नहि क्यूं मुझेऐसा लगरहा हैं कि जैसे परमेश्वर नें मुझे मेरे पापों कि सज़ा देना शुरुआत कर दिया हैं। हाॅ माॅम, यह सज़ा हि तौ हैं कि मुझे एक् ऐसी लड़की सें बेपनाह इश्क हौ गई जौ मेरी बेहन लगती हैं औऱ जौ मुझे नसीब हि नहि होँ सकतीकभी। वरना परमेश्वर अगर चाहता तौ मुझे दूसरी किसीऐसी लड़की सें प्रेम करवाता जोँ मुझे सहजता सें मिल जाती। मगर नहि उसे तोँ मेरे पापों कि सज़ा देना थां न् मुझे। इस लिएऐसा कर दिया उसने। कोई दूसरा इनसभी बातों कों समझे याँ नं समझे माॅममगर मे अच्छी तरहसमझ गय़ा हूॅ औऱ अगर अपनेदिल कि सच्चाई बयां करूॅ तौ वोँ यह हैं कि मुझे भगवान केँ इस फैंसले पर्र कोई शिकायत नहि हैं। अगरयह सभी करके वोँ मुझे मेरे पापों कि सज़ा हि देना चाहता हैं तोँ ठीक हैं माॅम मुझे स्वीकार हैं यह। हर ब्यक्ति कों अपने कर्मों कां फल मिलता हैं, फिन चाहे उसके अच्छे कर्मों कां होँ याँ बुरे कर्मों कां। कितनी अजीबबात हैं नं माॅम कि कुछलोग सारी ज़िंदगी पाप करते हें मगर उनको उनकेपाप कर्म कि सज़ाअंत मे मिलती हैं मगर मुझे तोँ अभि सें मिलना शुरुआत होँ गई। "
शिवा कि बातें सुनकर प्रतिमा हैरत सें ऑखें फाड़े देखती रह गई उसे। उससेकुछ कहते तौ नं बन पड़ा थां लेकिन यह समझने मे उसे ज़रा भि देरी न् हुइ कि उसके बेटे कां मानसिक संतुलन आजइसहद तक बिगड़ गय़ा हैं अथवा उसकीसोच इसहद तक बदल गई हैं कि वोँ इस सबको अपनेपाप कर्मों कि सज़ा समझने लगा हैं। कहते हें कि किसी ब्यक्ति कों आप् सारी ज़िदगी अच्छी चीज़ों कां बोध कराते रहोमगर उसेअगर नहि समझना होता हैं तौ वोँ सारी ज़िंदगी नहि समझता मगर टाइम औऱ हालात केँ पासऐसी खूबियाॅ होती हें जिनके आधार पर्र वो पलक झपकते हि इंसान कों आईना दिखाकर सभीकुछ समझा देता हैं औऱ मज़े कि बातयह कि इंसान कों समझ मे भि आँ जाता हैं। यहीहाल शिवा कां थां। उसेसभी कुछसमझ आँ चुका थां, मगर कहते हें नं कि "कां बरसाजब कृषि सुखाने"। बसवही दसा थि उसकी।
"ख़ैर छोंड़िये इनसभी बातों कों माॅम। "उधर शिवा नें जैसे प्रतिमा कों होशो हवाश मे लातेहुए कहा___"अब सें मे कभी आपसेऐसी बातें नहि करूॅगा। आप् यहसभी डैड सें भि मत बताना। वरना उन्हें लगेगा कि मे भरपूर जवां मर्द होतेहुए भि इस सबके चलते बेहद कमज़ोर होँ गय़ा हूॅ। वोँ इसबात कों नहि समझेंगे कि इस सबसे तौ मे औऱ भि मजबूत होँ गय़ा हूॅ। इश्क कि चोंट कों जौ इंसान सहजाए उससे मजबूत इंसान भला दूसरा कौन हौ सकता हैं?"
प्रतिमा कों समझ नं आया कि वो अपने बेटे कि इनसभी बातों कां क्याँ जवाबदे। लेकिन उसकी बातें उसे आश्चर्यचकित अवश्य कियेहुए थीं। बहुतदेर तक वो गंभीर मुद्रा मे ठगी सि बैठीरही। होशतब आयाजब एकाएक हि ड्राइंग रूम मे एक् तरफ टेबल पऱ रखे लैण्ड लाइन मोबाइल कि घंटी घनघना उठी थि।
"हैलो। " शिवा अपनी स्थान सें उठकरतथा मोबाइल केँ रिसीवर कों कान सें लगाते हि कहा।
"ओह शिव बेटा। " उधर सें अजय सिंह कि जानी पहचानी सि आवाज़ उभरी____"मैंने तुम्हारे नानाजी जी कों ट्रेन मे बैठा दिया हैं औऱ अब मे यहीं सें फैक्ट्री केँ लिए निकलरहा हूॅ। अतः अबसाम कों हि आऊॅगा। "
"ठीक हैं डैड। " शिवा नें सामान्य भाव सें कहा।
"ज़रा अपनी माॅम सें बात करवाओ। " उधर सें अजय सिंह नें कहा।
"एक् मिनटडैड। " शिवा नें कहने केँ संग हि पलटकर प्रतिमा कि तरफ देखा औऱ उसे बताया कि डैड उससेबात करना चाहते हें।
"हाॅकहो अजय। " प्रतिमा नें शिवा सें रिसीवर लेकरउसे अपने बाएंकान सें लगाते हुए कहा___"क्याँ बता हैं? बापू कों ट्रेन मे सकुशल बैठा दिया हैं न् तुमने?"
"हाॅ उन्हें ट्रेन मे बैठाकर अभि अभि स्टेशन सें बाहर् आयाहूॅ। " उधर सें अजय सिंह नें कहा____"औऱ अब मे यहीं सें फैक्ट्री जारहा हूॅ। बहुतदिन सें नहि गय़ा हूॅ तोँ वहाॅ जानां भि ज़रूरी हैं। बाॅकी सभीठीक हैं नं?"
"हाॅ बाॅकी सभी तोँ ठीक हि हैं। " प्रतिमा नें कहा___"नीलम, सोनम कों अपनायह गाॅवतथा अपनेखेत दिखाने लेँ गई हैं। सोनम नें उससेकहा होगा कि उसेयह गाॅव औऱ उसकेखेत देख्ना हैं। अतः नीलम केँ संग गई हैं वोँ। "
"यह क्याँ कहरही हौ तुम्?" उधर सें अजय सिंह नें बुरीतरह चौंकते हुए कहा___"उन दोनो कों तुमने जाने केसे दिया प्रतिमा? क्याँ तुम्हें पता नहि हैं कि वोँ वहाॅ सें भागने केँ उद्देश्य सें भि यहकहा होगा कि उन्हे गाॅवतथा खेत देख्ना हैं? हाय प्रतिमा तुमने यह क्याँ बेवकूफी कि?"
"फिक्र मतकरो अजय। " प्रतिमा नें कहा___"उन दोनो केँ संग मैनेदो ऐसे आदमियों कों भि भेजा हैं जिन आदमियों कों तुम्हारे साथी तुम्हारी सहायता केँ लिए यहाॅभेज करगए थें। उन आदमियों केँ रहते वोँ कहीं भि नहि जा सकती। "
"अरे वोँ व्यक्ति साले क्याँ कर लेंगे?" उधर सें अजय सिंह नें खीझते हुए कहा___"तुम्हें तोँ पता हैं कि उस साले विराज नें एक् संग हमारे उतने सारे आदमियों कां काम तमामकर दिया थां तोँ फिनयह क्याँ कर लेंगे उसका? ओफ्फो प्रतिमा तुम्हें उन दोनों कों जाने हि नहि देना चाहिए थां। मुझे तुमसे ऐसी बेवकूफी कि उम्मीद हर्गिज़ भि नहि थि। "
"तुम् बेवजह हि इतना परेशान होँ रहे होँ डियर। " प्रतिमा नें कहा___"मुझे भि पता हैं कि हालात केसे हें औऱ इन हालातों मे क्याँ होँ सकता हैं? मे उन दोनो कों गाॅवतथा खेत देखने जाने सें भला केसे रोंक सकती थि? इसीलिए मैंने उनकेसंग उनदो आदमियों कों भेजा हैं। बात इतनी सि हि बस नहि हैं बल्कि दूर कां सोचते हुए मैने उनके जाने केँ बाद उनके पीछेलगे रहने केँ लिए औऱ भि आदमियों कों एक् टीमबना कर भेजा हैं। ऐसाइस लिए कि अगर वोँ दोनो सचमुच यहाॅ सें भागने कां हि यह गाॅवतथा खेत देखने कां एक्सक्यूज़ बनाया होगा तौ वोँ किसी भि तरह सें भागने मे कामयाब न् होँ सकेंगी। दिखावे केँ लिएतथा सिचुएशन कों सामान्य दिखाने केँ लिए मैनेउन दोनो केँ संग केवलदो हि व्यक्ति उनकी सुरक्षा केँ तहत भेजे लेकिन उनकी जानकारी केँ बिनाकुछ औऱ आदमियों कि टीम कों यहसोच कर उनके पीछे भेजा कि अगरयह उनका यहाॅ सें भागने कां हि प्लान थां तौ यह भि ज़ाहिर हैं कि यह प्लान उन्होंने स्वयं नहि बनाया होगा बल्कि यहाॅ सें इसतरह निकलने कां प्लान विराज नें हि उन्हें बताया होगा औऱ कहा होगा कि वोँ दोनो हवेली सें बाहर् निकलकर किसीऐसे जगह पऱ पहुॅचेंगी जहाॅ सें उन दोनो कों वोँ बड़ी आसानी सें लेकिन बड़ी सावधानी सें हमारे उन दोनो आदमियों केँ संग रहने केँ बावजूद अपनेसंग लें जा सकें। विराज कि इसीचाल कों मद्दे नज़र रखतेहुए मैनेउन दोनो केँ पीछेकुछ औऱ आदमियों कों एक् मजबूत टीमबना कर भेजा हैं तथासंग हि यह भि उन्हें कह दिया हैं कि अगर सचमुच वहाॅऐसा कुछ होता दिखे तौ वोँ बेझिझक दूसरी बर्थडे पार्टी यानी विराज व रितू पर्र गोलियाॅ चला सकते हें। लेकिन इतना अवश्य ध्यान देंगे कि उनकी गोलियों सें उन दोनो मे सें किसी कि भि मौत न् हौ जाए। बल्कि उन्हें इस स्थित मे लाना हैं कि वोँ कुछ करने केँ लायक नं रह जाएॅ। उसकेबाद वोँ उन्हें पकड़कर हमारे फार्महाउस पऱ लें आएॅगे। "
"अगरऐसा हैं तौ फिनठीक हैं। " उधरअजय सिंह नें मानो राहत कि साॅसली थि, बोला___"मगर मुझेइस सबसे भि संतुष्टि नहि हौ रही प्रतिमा। पता नहि क्यूं मुझेऐसा लगता हैं कि हमारे इतने आदमियों केँ रहतेहुए भि वोँ कमीना उन दोनो कों अपनेसंग लें जाने मे कामयाब होँ जाएगा। "
"ऐसा तुम् इसलिए कहरहे होँ डियर। " प्रतिमा नें सहसा मुस्कुरा कर कहा___"क्योंकि तुमने अभि तक इस मामले मे कोई सफलता हाॅसिल नहि कि हैं। हरबार तुमने अपने आदमियों कि वजह सें नाकामी कां स्वाद चखा हैं। इसलिए तुम्हें इस सबके बावजूद विश्वास याँ संतुष्टि नहि होँ रही कि हमारे व्यक्ति विराज केँ मंसूबों कों नाकाम कर पाएॅगे। "
"यह तौ सचकहा तुमने प्रतिमा। " अजय सिंह बोला___"पर्र क्याँ करूॅ दोस्त हालात हरदिन पहले सें कहीं अधिक गंभीर व बदतर होतेजा रहे हें। मे यह किसी भि कीमत पऱ नहि चाहता हूॅ कि एक् औऱ नाकामी कि मुहर मेरे माथे कि शोभा बढ़ाने लगे। इस लिए मे स्वयं हि आँ रहाहूॅ वहाॅ। फैक्ट्री जानां इतना भि ज़रूरी नहि हैं। मे आँ रहाहूॅ डियर। इस बार मे उस हरामज़ादे कों कामयाब नहि होने दूॅगा। "
"ठीक हैं माई डियर। " प्रतिमा नें कहा___"तुम्हें जैसा अच्छा लगेकरो। वैसेकब तक पहुॅच जाओगे यहाॅ?"
"जितना जल्द पहुॅच सकूॅ। "अजय सिंह नें कहा___"ख़ैर चलो रखताहूॅ मोबाइल। "
इसकेसंग हि कालकट हौ गई। अजय सिंह सें बात करने केँ बाद प्रतिमा पलटकर वापस सोफे कि तरफआई औऱ बैठ गई। चेहरे पऱ अनायास हि गंभीरता छा गई थि उसके। फिन उसने शिवा कि तरफ देखते हुए कहा___"बेटा सविता सें बोलो कि अच्छी सि गरमचाय बनाकर लाए मेरेलिए। "
"ओके माॅम। " शिवा नें कहा औऱ सोफे सें उठकर अंदर कि तरफचला गय़ा।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
उधर मुम्बई मे।
ब्रेक फास्ट करने केँ लिएसभी एक् संग हि बैठेहुए थें। जिनमें जगदीश ओबराय, अभय सिंह, पवन, दिव्या, आशातथा निधी बैठेहुए थें। गौरी, रुक्मिणी तथा करुणा सबकेलिए नास्ता परोसरही थीं। नाश्ता करतेहुए सबकेबीच थोड़ी बहोत बातचीत भि होँ रही थि। लेकिन इसबीच आशा कि निगाहें थोड़े थोड़े टाइम केँ अंतराल सें निधी पऱ पड़ हि जाती थि।
निधी जौ कि अब अधिकतर ख़ामोश हि रहती थि। वोँ किसी सें भि स्वयं सें कोईबात नहि करती थि। हलाॅकि सभीयही चाहते थें कि वोँ सबसे बातें करेतथा अपनी शरारत भरी बातों सें माहौल कों सामान्य बनाएरखे मगरऐसा होँ नहि रहा थां। सबने उससे पूछा भि थां कि वोँ अचानक इसतरह चुपचुप तथा गुमसुम सि क्यूं रहनेलगी हैं मगर उसनेबस यहीकहा थां कि वोँ बस अपने भाई केँ चले जाने सें ऐसी होँ गई हैं। उसकी बातों कों सभीयही समझरहे थें विराज जिसकाम सें गय़ा हैं वोँ यकीनन बहोत ख़तरे वाला हैं जिसके बारे मे सोचकर निधीइस तरहचुप हौ गई हैं। आख़िर यहबात तोँ सभी जानते हि थें कि निधी विराज कि जान हैं तथा निधी भि अपने भइया पर्र जान छिड़कती हैं। मगर असलियत सें आशा केँ अलावा हरकोई अंजान थां।
चुपचाप नास्ता कररही निधी कि नज़र सहसा सामने हि कुर्सी पर्र बैठीतथा नास्ता कररही आशा पर्र पड़ी तोँ वोँ यहदेख कर एकाएक हि सकपका गई कि आशाउसे हि एकटक देखेजा रही हैं। उसके ज़हन मे पलक झपकते हि सुभह कां डायरी वालासीन याद आँ गय़ा। उसके दिमाग़ नें काम किया औऱ उसेयह सोचने पऱ मजबूर किया कि आशा दिदी उसेइस तरह एकटक क्यूं देखेजा रही हें। उनकी ऑखों मे कुछऐसा थां जिसने निधी कों अंदर तक हिला सां दिया थां औऱ फिन एकाएक हि जैसे उसके दिमाग़ कि बत्ती रौशन हुइ। उसकेमन मे ख़याल उभरा कि कहींऐसा तौ नहि कि आशा दिदी नें उसके सोते टाइम डायरी कों हाॅथ हि नहि लगाया होँ बल्कि उसेपढ़ भि लिया होँ। इस ख़याल केँ आते हि निधी कि हालत लम्हा भर मे ख़राब हौ गई। मन केँ अंदर बैठाचोर इतना घबरा गय़ा कि फिन उसमें नज़रउठा कर दुबारा आशा कि तरफ देखने कि हिम्मत नं हुई।
निधी नें नोटिस किया कि जिस अंदाज़ सें आशाउसे देखरही थि उससे तौ यही लगता हैं कि उसने डायरी मे लिखी बातें पढ़ली हें औऱ जान गई हैं कि उसमें लिखेगए हर लफ्ज़ कां मतलब क्याँ हैं? निधी कि हालतऐसी हौ गई कि अब उससे वहाॅ पऱ बैठे न् रहा गय़ा। उसने जोँ खानां थां खा लिया औऱ फिन वो एक् झटके सें उठी औऱ ऊपर अपने कमरे कि तरफ तेज़ तेज़ क़दम बढ़ाते हुएचली गई। कमरे मे जाकर उसने विद्यालय कि यूनीफार्म पहनीतथा अपना स्कूली बैग उठाया औऱ फिन जल्दी हि कमरे सें बाहर् आँ गई।
उसे इतना जल्द बाहर् आतेदेख हरकोई चौंका मगर चूॅकि उसके विद्यालय जाने कां वक़्त होने हि वाला थां अतःइस पऱ ज़्यादा किसी नें ग़ौर न् किया। उसनेदूर सें हि हाॅथ हिलाकर सबकोबाय किया औऱ बॅगले सें बाहर् कि तरफबढ़ गई। बाहर् आते हि उसने एक् ऐसे व्यक्ति कों आवाज़ दि जोँ हरदिन वाहन सें उसे विद्यालय छोंड़ने औऱ विद्यालय सें लाने कां काम करता थां। ख़ैर, कुछ हि देर मे निधी गाड़ी मे बैठकर विद्यालय कि तरफ रवाना होँ गई। लेकिन अब उसकामन बेहद अशान्त होँ चुका थां। उसेयह डर सताने लगा थां कि अगर सचमुच आशा नें उसकी डायरी पढ़ली होगी तोँ उसे यकीनन पताचल गय़ा होगा कि वोँ अपने हि सगे भइया सें प्रेम करती हैं औऱ आजकलउसी केँ ग़म मे गुमसुम रहनेलगी हैं।
निधी कों प्रतिपल यहसभी बातें औऱ भि अधिक चिंतित व परेशान कियेजा रही थि। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अब वो क्याँ करे? केसेअब वोँ अपनीआशा दिदी केँ सामने जाएगी तथा उन्हें अपना चेहरा दिखाएगी? अगरआशा नें उससेइस बारे मे कुछ पूछा तोँ वोँ क्याँ जवाब देगी?उसे पहलीबार एहसास हुआ कि डायरी लिखकर उसने कितनी बड़ी ग़लती कि हैं। वरना किसी कों इसबात कां पता हि न् चलता कि उसकेदिल मे क्याँ हैं। मगरअब क्याँ हौ सकता थां? तीर तोँ कमान सें निकल चुका थां। अतःअब तौ बस इंतजार हि कियाजा सकता थां इस सबके परिणाम कां। निधी केँ मन हि मनयह निर्णय लिया कि अब वोँ आशा दिदी केँ सामने नहि जाएगी औऱ नाँ हि उनसेकोई बात करेगी। मगरउसे स्वयं लगा कि ऐसा संभव नहि हौ सकता। उसे उनका सामना तोँ करना हि पड़ेगा क्योंकि वोँ अधिकतर उसकेपास हि रहती हें तथारात मे उसके हि कमरे मे उसकेसंग एक् हि बेड पर्र सोती भि हें।
यह मामला हि ऐसा थां कि इसने निधी कि हालत कों इसतरह कर दिया थां जैसेअब उसके अंदर प्राण हि न् बचेहों। वो एकदम सें जैसे ज़िदा लाश मे तब्दील हौ गई होँ। उसकेमन मे यह भि ख़याल उभरा कि अगरआशा दिदी नें वोँ सभी किसी सें बता दिया तोँ क्याँ होगा? उसकीमाॅ गौरी तोँ उसे जीतेजी जान सें मार देगी। कोई उसके अंदर कि भावनाओं कों नहि समझेगा बल्कि सभीउसे ग़लत हि समझेंगे। अगरयह भि कहें तौ ग़लत न् होगा कि उसनेयह सभी अपनीनई नई जवानी कों बर्दाश्त न् कर पाने कि गरज़ सें अपने हि भइया कों फॅसाने कां सोचकर किया होगा। इस ख़याल केँ आते हि निधी कों आत्मग्लानि केँ चलते बेहददुख हुआ। उसकीझील सि नीली ऑखों सें पलक झपकते हि ऑसूॅछलक करगिर पड़े। लेकिन उसने जल्द सें उन्हें यहसोच कर पोंछ भि लिया कि कहीं ड्राइवर उसे बैकमिरर केँ माध्यम सें ऑसू बहाते देख न् लेँ।
सारे रास्ते इनसभी बातों कों सोचते हुए निधी कों पता हि नहि चला कि वोँ कब विद्यालय पहुॅच गई? होशतब आयाजब ड्राइवर नें उससेकहा कि उसका विद्यालय आँ गय़ा हैं। ड्राइवर पचास कि उमर कां ब्यक्ति थां। उसकायह रोज़ कां हि काम थां। उसे निधी सें बहुत लगाव भि होँ गय़ा थां। उसे वोँ अपनी बेटी कि तरह मानता थां। पिछले कुछ वक़्त सें वोँ स्वयं भि देखरहा थां कि निधी एकाएक हि गुमसुम सि होँ गई हैं। उसने भि कईबार इस बारे मे उससे पूछा थां मगर निधी नें उससे भि यहीकहा थां कि वोँ अपने भाई केँ लिए दुखी रहती हैं। भला वोँ किसी सें अपने गुमसुम रहने कि वजह केसेबता सकती थि?
वाहन सें उतरकर निधी बहोत हि बोझिल मन सें अपने विद्यालय केँ मुख्य दरवाजे कि तरफ बढ़ती चली गई। विद्यालय मे उसकी अच्छी अच्छी कई सहेलियाॅ बन गई थि। वोँ सभी भि निधी कि इस ख़ामोशी सें परेशान व चिंतित थि। मगर वोँ कर भि क्याँ सकती थि?
इधर निधी केँ जाने केँ थोड़ी देरबाद हि आशा निधी केँ कमरे मे पहुॅची। कमरे कों उसने अंदर सें कुंडी लगाकर बंद किया औऱ फिनपलट कर निधी कि डायरी कि तलाश करनेलगी। मगर बहोत ढूॅढ़ने पऱ भि उसे निधी कि वोँ डायरी कहीं न् मिली। उसनेहर स्थान बड़ी बारीकी सें चेक कियामगर डायरी तोँ जैसेगधे केँ सिर कां सींग होँ गई थि। सहसाआशा कों ख़याल आया कि निधी अपनी डायरी कों ऐसी वैसी स्थान नहि रख सकती जिससे वोँ किसी केँ हाॅथलग जाए। ज़ाहिर सि बात हैं कि ऐसी डायरी वोँ किसी केँ हाॅथ लगने भि केसेदे सकती थि जिसे किसी केँ द्वारा पढ़लिए जाने केँ बादउस पऱ क़यामत टूट पड़ती। मतलबसाफ हैं कि उसनेउस डायरी कों ऐसी स्थान छुपाकर रखा होगा जहाॅ सें मिलना किसी दीगर ब्यक्ति केँ लिए करीब असंभव हि हौ।
इस ख़याल केँ तहतआशा नें सोचा कि ऐसी स्थान तौ इस कमरे मे कदाचित आलमारी औऱ आलमारी केँ अंदर वाला लाॅकर हि हौ सकता हैं जहाॅ पऱ निधी नें अपनी डायरी छुपाई हौ सकती हैं। अतःआशा नें आगेबढ़ कर आलमारी खोला औऱ आलमारी केँ अंदर मौजूद लाॅकर कों चेक किया तौ उसे लाॅक पाया। अंदर केँ उस लाॅकर कि चाभी कों उसने ढूॅढ़ना शुरुआत कर कियामगर चाभी कहीं नहि मिलीउसे। आलमारी मे रखी एक् एक् चीज़तथा एक् एक् कपड़े कों उलटपलट कर देखा उसनेमगर चाभी कहीं नं मिली। थक हारकर फिन उसनेहर चीज़ कों उसीतरह जमाकर रखना शुरुआत किया जैसे वोँ पहलेरखी हुईँ थीं उसकेबाद वो बेड पर्र आकर धम्म सें बैठ गई औऱ गहरी गहरी साॅसें लेनेलगी।
बहुतदेर तक बेड पऱ बैठी वोँ चाभी केँ बारे मे सोचती रहीफिन उसेलगा कि संभव हैं कि लाॅकर कि चाभी निधी अपनेपास हि रखती हौ। यानीइस वक़्त वोँ चाभी उसकेपास उसके स्कूली बैग मे हि होगी। बात भि सच थि आख़िर वोँ चाभी अपनेपास हि तौ रखेगी वरनाऐसे मे तौ कोई भि उसकी चाभी ढूॅढ़ कर लाॅकर खोल सकता थां तथा उसकी डायरी निकाल सकता थां औऱ फिनउसे पढ़ भि सकता थां। आशा कों यहबात सौ परसेन्ट जॅची।
आशा कि ऑखों केँ सामने सुभह नाश्ता करते टाइम कां सीन फ्लैश करनेलगा। जब वोँ बारबार निधी कि तरफदेख रही थि औऱ फिन निधी नें भि उसको अपनीतरफ एकटक देखते हुए देखा थां। उस टाइम उसकी हालत बहोत हि दयनीय सि हौ गई थि। आशा कों समझते देर न् लगी कि निधी कों उसकेइस तरह देखने सें यहसमझ मे आँ गय़ा होगा कि उसने सुभह उसकी डायरी कों शायदपढ़ लिया होगा औऱ उसका राज़जान चुकी होगी। यह सोच हि उसकी हालत ख़राब होँ गई थि। आशा जानती थि कि प्रेम करनाकोई जुर्म नहि हैं, लेकिन यही प्रेम अगर बेहन अपने हि भइया सें कर बैठे तौ यकीनन यह अनुचित तथा ग़लत होँ जाता हैं। कदाचित यहीवजह थि कि निधी कि वैसी हालत हौ गई थि। उसेडर सताने लगा थां कि आशा दिदी उसके बारे मे क्याँ क्याँ सोचेंगी औऱ अगरयह बात किसी कों बता दिया तौ इसका क्याँ अंजाम हौ सकता हैं।
आशा कों यह भि एहसास थां कि विराज हैं हि ऐसा कि उससेकोई भि लड़की प्रेम कर बैठेगी। फिन चाहे वोँ बाहरी लड़की हौ याँ फिन स्वयं उसकी हि बेहन। वोँ स्वयं भि तोँ विराज कों शुरुआत सें हि अपनासभी कुछ मानती आँ रही थि। उसे स्वयं नहि पता थां कि वोँ कब विराज कों अपनादिल दे बैठी थि औऱ फिनजब उसे एहसास हुआ कि वोँ विराज कों बेपनाह प्रेम करनेलगी हैं तोँ एकाएक हि हॅसती खेलती आशा कां समूचा अस्तित्व हि बदल गय़ा थां। आजजिस ख़ामोशी कों निधी नें अख़्तियार कर लिया थां उसी ख़ामोशी कों एक् दिन उसने भि तौ ऐसे हि अख़्तियार कर लिया थां। अपने प्यार कों उसने विराज केँ सामने कभी उजागर नहि किया क्योंकि उसेपता थां कि विराज उसे अपनी बेहन हि मानता हैं। दूसरी बातअगर वोँ उससे अपने प्यार कां इज़हार करती भि तोँ बहोत हद तक संभव थां कि विराज उसे ग़लतसमझ बैठता याँ उसकेइस प्यार कों यहकहकर ठुकरा देता वोँ ऐसासोच भि केसे सकती हें? दूसरी बात, एक् तोँ उमर मे वोँ विराज सें बड़ी थि दूसरे आर्थिक तंगी केँ चलते उसकी विवाह भि नहि हौ रही थि। इस सबसे विराज कों हि नहि बल्कि सबको भि यही लगता कि आशा सें अपनी जवानी कि गर्मी बर्दास्त नहि हुईँ इसलिए उसने विराज केँ संग संबंध बनाने केँ लिए प्रेम कां नाटक शुरुआत कर दिया हैं। तीसरी महत्वपूर्ण बात वोँ भले हि चुलबुल व नटखट स्वभाव कि थि लेकिन केवल अपने भाइयों केँ लिए बाॅकी बाहरी लोगों केँ सामने उसनेकभी अपनासिर तक न् उठाया थां। लोकलाज तथाघऱ कि मान मर्यादा कां ख़याल हि थां जिसने उसकेलब हमेशा केँ लिएसिल दिये थें।
जबउसे डायरी केँ द्वारा यहपता चला कि निधी अपने हि भइया सें प्रेम करती हैं तौ सहसाउसे झटका सां लगा थां औऱ उसकेदिल मे भावनाओं औऱ जज़्बातों कां यहसोच कर भयंकर तूफान उठा थां कि जिस विराज कों वोँ अपनासभी कुछ मानती आँ रही हैं उस पऱ तौ उसकाकोई हक़ हि नहि हैं। बल्कि सबसे पहलाहक़ तौ उसकी स्वयं कि बेहन कां हि हौ गय़ा हैं। उसने भि सोच लिया कि चलोयही सही। प्रेम इश्क तोँ कम्बख़्त नाम हि उसबला कां हैं जौ केवल दर्द देना जानती हैं इश्क़ करने वालों कों। उसे निधी पऱ बेहदतरस भि आया कि इस मासूम नें उस आदमी सें दिल कां रोगलगा लिया जौ इसका होँ हि नहि सकता। यह समाजयह दुनिया कभी भइया बेहन केँ इस रिश्ते कों स्वीकार नहि करेगी। दुनियाॅ कि छोंड़ो स्वयं उसके हि माॅ बाप याँ संबंधी इसके खिलाफ होँ जाएॅगे। कहने कां मतलबयह कि इश्क नें एक् औऱ शिकार फाॅस लिया बेइंतहां दर्द औऱ तक़लीफ देने केँ लिए।
आशा जानना चाहती थि कि निधी कों अपने हि भइया सें इसहद तक प्रेम केसे होँ गय़ा हैं? आख़िर ऐसे क्याँ हालात बनगए थें जिसके तहत निधी नें यहरोग लगा लिया थां? दूसरी बात क्याँ यहबात विराज कों भि पता हैं कि उसकी लाडली बेहन उससेइस हद तक प्रेम करती हैं? उसेपता थां कि डायरी एक् ऐसी चीज़ होती हैं जिसमें हर इंसान अपने अंदर कि हर सच्चाई कों पूर्णरूप सें सच हि लिखता हैं। अतः संभव हैं कि निधी नें भि उस डायरी मे वोँ सभी लिखा होँ जिसके तहतउसे पता चलता कि किन हालातों मे ऐसाहुआ थां? हलाॅकि उसेयह भि पता थां कि किसी भि इंसान कि पर्शनल डायरी उसकी इजाज़त केँ बिना पढ़ना निहायत हि ग़लत होता हैं मगरफिन भि वोँ पढ़ना चाहती थि।
आशासोच रही थि कि नाश्ता करते वक़्त निधी कि जौ हालत हुईँ थि उससे कहीं वोँ कुछ उल्टा सीधा करने कां नं सोच बैठे। यह मामला हि ऐसा हैं कि वोँ इस सबसे बहोत डर जाएगी औऱ किसी केँ पताचल जाने केँ डर सें वोँ कुछ उल्टा सीधा करने कां सोच बैठे। बेड पर्र बैठीआशा कों एकाएक हि हालात कि गंभीरता कां एहसास हुआ। उसकादिल बुरीतरह धड़कने लगा। उसे निधी कि चिंता सताने लगी। उसने जल्दी हि निधी सें बात करने कां सोचा। लेकिन उसकेपास स्वयं कां कोईफोन नहि थां।
आशा अतिसीघ्र बेड सें नीचे उतरी औऱ भागते हुए कमरे सें बाहर् आई औऱ फिन नीचे कि तरफ दौड़ पड़ी। थोड़ी हि देर मे वोँ गौरीआदि लोगों केँ पास पहुॅच गई। उसने स्वयं केँ चेहरे पऱ उभरआए घबराहट केँ भावों कों जल्द सें छुपाया औऱ करीब सामान्य लहजे मे हि गौरी सें फोन मोबाइल माॅगा। लेकिन गौरी नें बताया कि फोन तौ उसकेपास हैं हि नहि, उसे तौ फोन चलाना हि नहि आता। दूसरी बातयह कि उसेफोन कि कभी ज़रूरत हि नहि पड़ी। गौरी कि यहबात सुनकर आशा बुरीतरह परेशान हौ गई। लाख कोशिशों केँ बावजूद उसके चेहरे पर्र सें तकलीफ़ केँ वोँ भाव न् मिटसके जौ उसके चेहरे पऱ ढेर सारे पसीने मे भींगे दिखने लगे थें। जिसका नतीजा यहहुआ कि गौरीपूछ हि बैठी उससे कि क्याँ बात हैं वोँ इतना परेशान क्यूं हौ गई हैं। गौरी कि बात कां उसनेआनन फानन मे हि जवाब दिया। तभी वहाॅ पर्र करुणा भि आँ गई। गौरी नें कुछ सोचते हुए करुणा सें कहा कि वोँ अपनाफोन मोबाइल आशा कों देदे।
करुणा नें अपनाफोन मोबाइल आशा कों यह पूछते हुएदे दिया कि क्याँ बात हैं तुम् इतना परेशान क्यूं नज़र आँ रही हौ। कुछबात हैं क्याँ? आशा नें कहा नहि चाची ऐसीकोई बात नहि हैं वोँ क्याँ हैं कि उसे गुड़िया कों मोबाइल करना हैं तथा उससे पूछना हैं कि आज वोँ इतना जल्द विद्यालय क्यूं चली गई थि? आपने देखा नहि थां क्याँ उसनेठीक सें नास्ता भि नहि किया हैं आज?आशा कि इन बातों सें गौरी, करुणा तथा रुक्मिणी सहज होँ गईं। उन्हें भि बातसही लगी। क्योंकि उन्होंने भि देखा थां कि निधी नें बस थोडा बहोत हि खाया थां औऱ फिन विद्यालय चली गई थि। ख़ैरआशा कां निधी केँ लिएइस तरह चिंता करनाउन सबको बहोत अच्छा लगा।
करुणा सें फोन लेकरआशा जल्दी हि वापस कमरे मे आई औऱ उसनेफिन सें दरवाजा उसीतरह अंदर सें कुंडी लगाकर बंदकर दिया। उसकेबाद वोँ बेड पऱ आँ करबैठ गई। फिन जानेउसे क्याँ सूझा कि वो बेड सें उठी औऱ कमरे सें हि अटैच बाथरूम कि तरफबढ़ गई। बाथरूम कां दरवाजा अंदर सें बंदकर उसनेफोन पर्र निधी कां नंबर निकाला औऱ फिनउसे काललगा करफोन अपनेकान सें लगा लिया। इस टाइम उसके चेहरे पर्र गहन चिंता व तकलीफ़ स्पष्ट रूप सें उभरआई थि। रिंग कि आवाज़ जाती सुनाई दि उसे औऱ इसकेसंग हि उसकी धड़कनें भि बढ़गईं। मन हि मन भगवान सें प्रार्थना भि करनेलगी कि सभीकुछ ठीक हि हौ।
"ह.हैलो। " तभीउधर सें निधी कां करीब-करीब घबराया हुआ सां स्वर उभरा___"च.चाची वोँ मे.। "
"गुड़िया। " निधी कि बात कों काटते हुएआशा नें जल्दी हि कहा___"मे तेरीआशा दिदी बोलरही हूॅ औऱ हाॅ मोबाइल मत काटना तुम्हें राज कि क़सम हैं। "
"द.दिदी आप्??" उधर सें निधी कां बुरीतरह उछलाहुआ लेकिन घबराया हुआ स्वर फूटा थां।
"गुड़िया। " आशा नें असहजभाव सें लेकिन समझाते हुए कहा___"देख तूँ कोई भि उल्टा सीधा करने कां ख़याल अपनेमन मे मत लाना। अगर तुँ यहसोच करडर गई हैं कि मुझे डायरी केँ माध्यम सें तेरा राज़पता चल गय़ा हैं औऱ मे उसकीवजह सें तुम्हे कुछ कहूॅगी याँ फिन वोँ सभी किसी सें कह दूॅगी तोँ तुँ उस सबकीवजह सें डरमत औऱ नां हि उससे घबराकर कुछ ग़लत क़दम उठाने कां सोचना। मे तुझेही उसकेलिए कुछ नहि कहूॅगी गुड़िया औऱ नाँ हि किसी कों बताऊॅगी। मुझेपता हैं कि यह प्रेम व्यार ऐसे हि होता हैं जौ रिश्ते नाते नहि देखता। अतः तूँ इस सबकेलिए बिलकुल भि मत घबराना औऱ नाँ हि फालतू कां टेंशन लेना। तूँ सुनरही हैं न् गुड़िया???"
"हम्म। "उधर सें निधी कां बहोत हि धीमा स्वर उभरा।
"मुझेइस बात केँ लिए क्षमा करदे गुड़िया। " आशा नें सहसा दुखीभाव सें कहा___"कि मैने तेरी डायरी कों छुआ औऱ उसेखोल कर पढ़ा भि। लेकिन यहसभी मैनेजान बूझकर नहि किया थां। बल्कि वोँ सभी अंजाने मे हौ गय़ा थां। दरअसल जब मे तेरेपास सुभह तेरेलिए गरमचाय लेकरआई तौ देखा कि तुँ उस डायरी कों अपने दोनो हाॅथों सें पकड़े सोरही थि। मुझेलगा ऐसी डायरी तेरी पढ़ाई मे तौ उपयोग होती नहि होगी तौ फिनयह कैसी डायरी हैं तथा क्याँ हैं इसमें जिसेइस तरह लिये तुँ सोरही हैं? बसयही जानने केँ लिए मैनेउस डायरी कों तेरे हाॅथों सें लेकरउसे खोला। लेकिन मुझे उसमें वोँ सभी पढ़ने कों मिल गय़ा। मगर गुड़िया मैने औऱ कुछ नहि पढ़ा उसमें। शुरुआत कां हि पेज पढ़ा थां औऱ वोँ ग़ज़ल पढ़ी थि जिसमें तूने लिखा थां___"बताना भि नहि मुमकिन, हाॅऐसे हि कुछ लिखा थां उसमे। "
"क.क्याँ आप् सचमुच इस सबकेलिए मुझसे नाराज़ याँ क्रोध नहि हें दिदी?" उधर सें निधी कां अभि भि धीमा हि स्वर उभरा थां।
"हाॅ गुड़िया। " आशा नें सहसा मुस्कुरा कर कहा___"मे तुझसे बिलकुल भि नाराज़ नहि हूॅ। भला मे तुझसे नाराज़ होँ भि केसे सकतीहूॅ पागल? लेकिन हाॅइस बात सें दुखी अवश्य हूॅ कि सबको अपनी शरारतों सें परेशान करने वाली मेरीयह लाडली बेहन नें एकाएक हि स्वयं कों उदासी कि चादर मे ढाॅफ लिया हैं। "
"वक़्त औऱ हालात हमेशा एक् जैसे तौ नहि होँ सकते न् दिदी। " उधर सें निधी नें अजीबभाव सें कहा___"इंसान केँ जिंदगी मे कभी खुशी तोँ कभीग़म वाला वक़्त तोँ आता जाता हि रहता हैं। मेरेपास इसके पहले वैसे हि वक़्त औऱ हालात थें जबकि मे खुशरहा करती थि औऱ शरारतें करने केँ सिवाकुछ नहि आता थां मुझे। मगर अब हालात बदलगए हें। भगवान कों मेराखुश रहना औऱ मेरा वोँ शरारतें करना शायद अच्छा नहि लगातभी तौ उसने मुझेदिल कां रोगीबना दिया। एक् ऐसे इंसान केँ लिए उसने मेरेदिल मे प्यार कां बीजबो दिया जौ इंसान मेरा हौ हि नहि सकता। ख़ैर जाने दीजिए दिदी, मैने बहोत हद तक स्वयं कों समझा लिया हैं। हलाॅकि यह मुश्किल तोँ थां मगरकोई बात नहि। इतना तौ अब सहना हि पड़ेगा नं मुझे। मैने भि सोचा कि ऐसे इंसान कों पाने कि ज़िद भि क्याँ करना जोँ मुझेमिल हि न् सके औऱ जिसकी वजह सें सभीकुछ नेस्तनाबूत भि हौ जाए। "
निधी कि इन बातों नें आशा कों जैसे एकदम सें ख़ामोश सां कर दिया। उसे समझ नं आया कि वोँ उसकी बातों कां क्याँ जवाबदे? लेकिन इतना एहसास अवश्य होँ गय़ा उसे कि जिस लड़की कों सभीलोग बच्ची समझते हें तथा जिसके बारे मे यह सोचते हें कि उसे दुनियादारी कि अभि कोईसमझ नहि हैं वोँ लड़की दरअसल अब बहोत बड़ी हौ गई हैं। कदाचित इतनी बड़ी कि अपनीइस छोटी सि ऊम्र मे भि वोँ बड़े बड़े बुजुर्गों तथा बड़े बड़े ज्ञानियों कों नसीहतें दे सकती हैं। क्याँ प्यार ऐसा भि होता हैं जोँ अचानक हि इंसान कों इतना बड़ा औऱ इतना बड़ा ज्ञानी बना देता हैं जिसके चलते वोँ यथार्थ औऱ ज्ञान कि बातें करनेलगे?
"आपनेऐसा कहकर यकीनन मेरेदिल कों राहत पहुॅचाई हैं दिदी। " उधर सें निधीकह रही थि___"वरना यहसच हैं कि मे इस सबसे बहोत हि ज़्यादा घबरा गई थि औऱ चिंतित भि हौ गई थि। मे नहि चाहती दिदी कि मेरीवजह सें सभीकुछ समाप्त होँ जाए औऱ अगरसच मे आपने किसी सें वोँ सभीकुछ बता दिया होता तौ यह भि सच हैं कि फिन मेरेपास आत्म हत्या कर लेने केँ सिवाकोई दूसरा चारा नं रह जाता। मे किसी कों अपनामुह न् दिखा पाती औऱ नां हि एक् लम्हा केँ लिए भि वैसी जलालत भरी ज़िंदगी जी पाती। "
"चुप कर तूँ। " आशा कि ऑखों सें ऑसुओं कां जैसे बाॅध सां फूट पड़ा, बुरीतरह तड़पकर बोलीं___"ख़बरदार जोँ दुबारा फिनकभी आत्महत्या वालीबात कि। तूँ सोच भि केसे सकती हैं पागल कि मे किसी सें उस बारे मे कुछकह देती? इतनी पत्थर दिल नहि हूॅ गुड़िया। मेरे सीने मे भि तेरीतरह एक् ऐसादिल धड़कता हैं जिसमें किसी केँ लिए बेपनाह मुहब्बत जानेकब सें अपना आशियां बनाकर रहती हैं। "
"य.यह आप् क्याँ कहरही हें दिदी??" उधर सें निधी कां बुरीतरह चौंका हुआ स्वर उभरा___"आप् भि किसी सें इश्क करती हें?"
"क्यूं गुड़िया?" आशा नें सहसा फीकी मुस्कान केँ संग कहा___"क्याँ मुझे किसी सें मुहब्बत नहि हौ सकती? क्याँ मेरे अंदर एहसास नहि हें? अरे मेरे सीने मे भि तोँ ऐसादिल हैं जोँ धड़कना जानता हैं रे। "
"मेरा वोँ मतलब नहि थां दिदी। " उधर सें निधी नें मानो सकपकाते हुए कहा___"मे तौ बस आपकीइस बात सें हैरान हुइ थि कि आप् भि किसी सें मुहब्बत करती हें। वैसेकौन हैं वोँ व्यक्ति जिसे मेरी प्यारी सि दिदी इश्क करती हैं? मुझे भि तौ बताइये न् दिदी। "
"बहोत मुश्किल हैं गुड़िया। " आशा केँ चेहरे पर्र एकाएक हि कई सारेभाव आँ करठहर गए, बोलीं___"बस यूॅसमझ लें कि एकतरफा मुहब्बत हैं यह। "
"मुहब्बत तोँ हैं नं दिदी। " उधर सें निधी नें कहा__"इससे कोई फर्क़ नहि पड़ता कि वोँ एकतरफ सें हैं याँ फिन दोनोतरफ सें। इश्क तोँ इश्क हि होती हैं चाहे वोँ किसी कि भि तरफ सें होँ। आप् बताइये न् किससे इश्क करती हें आप्? मुझेयह जानने कि बड़ी तीब्र उत्सुकता हौ रही हैं प्लीज़ बताइये नं। "
"मुझे मजबूर मतकर गुड़िया। " आशा कि आवाज़ जैसे काॅप सि गई, बोलि___"वर्षों सें दबेउस इश्क केँ एहसास कों दबा हि रहनेदे। क्योंकि मुझे इतने कि हि आदतपड़ चुकी हैं औऱ इतने सें दर्द कों हि सहने कि हिम्मत हैं मुझमे। वोँ अगर बाहर् आँ गई तोँ फिन मे उसे औऱ उसके असहनीय दर्द कों सम्हाल नहि पाऊॅगी। इसलिए मुझसे मतपूछ मेरी गुड़िया। मे तुम को हि क्याँ उस आदमी कों भि नहि बता सकती जिसेटूट टूटकर वर्षों सें चाहा हैं मैने। "
"हाय राम दिदी। " उधर सें निधी कि मानो सिसकी सि निकल गई। कदाचित ऐसाइस लिए क्योंकि दोनो एक् हि रोग केँ रोगी थें। ख़ैर निधी नें कहा___"यह कैसारोग हैं दिदी? यह कैसा दर्द हैं, यह कैसा एहसास हैं? न् जी पाते हें औऱ नां हि मर पाते हें। नाँ चाहते हुए भि उससे फाॅसला कर लेते हें जिसके बिनासमय भि रह नहि पाते हें। "
"जानेदे गुड़िया। " आशा केँ अंदर सें एक् हूक सि उठी थि जिसने उसे हिलाकर रख दिया थां, बोलीं___"ऐसी बातें मतकर वरना इनकाअसर ऐसा होता हैं कि फिन एक् समय भि चैन नहि मिलता। इसलिए ज़रूरी हैं कि हम् अपनेमन कों अथवादिल कों बहला लें किसीतरह। "
"हाॅयह तोँ सचकहा आपने। " निधी नें कहा___"हमें तौ हरहाल मे स्वयं कों तथा अपनेदिल कों बहलाना हि होता हैं। लेकिन अगर आप् बताना नहि चाहती हें तोँ कोईबात नहि। अगरकभी दिलकरे कि आपको अपनेदिल केँ बोझ कों हल्का करना हैं तोँ मुझसे वोँ सभीबता कर अवश्य स्वयं कों हल्का कर लीजिएगा। "
"चलबाय। " आशा नें गहरी साॅस ली___"अपना ख़याल रखना औऱ हाॅ अपने चेहरे कि यह उदासी कों कम करने कि कोशिश भि करना। "
आशा कि इसबात पऱ उधर सें निधी नें हाॅकहा औऱ फिनकाल कट गई। बाथरूम केँ अंदर एक् तरफ कि दीवार पर्र लगे आईने केँ सामने खड़ीआशा कालकट होने केँ बादकुछ देर तक आईने मे स्वयं कों देखती रही औऱ फिन सहसा उसकेलब थरथराते हुए हिले___"तेरी केसेबता दूॅ गुड़िया कि मेरेदिल मे किस व्यक्ति केँ प्रति बेपनाह मुहब्बत हैं? अगर तुम्हें पताचल जाए कि मुझे भि उसी सें इश्क हैं जिससे तुम्हारी तरफ हैं तौ बहोत हद तक संभव हैं कि तेरादिल टूट जाएगा औऱ फिन तूँ सभीकुछ जानते समझते हुए भि स्वयं कों बिखर जाने सें रोंक नहि पाएगी। "
आईने मे दिखरहे अपने अक्श कों एकटक देखती हुईँ आशा कि ऑखों सें एकाएक हि ऑसुओं केँ दो मोती छलकते हुए नीचे बाथरूम केँ फर्स पर्र गिरकर मानोफना हौ गए। फिन उसने जैसे स्वयं कों सम्हाला औऱ फोन कों एक् तरफरख कर उसनेवाश बेसिन पर्र लगे नलके कों चलाकर उसके पानी सें अपने चेहरे कों धोना शुरुआत कर दिया। उसकेबाद उसने एक् तरफ हैंगर पऱ टॅगे टाॅवेल सें अपने धुलेहुए चेहरे कों पोंछा औऱ फिनफोन लेकर बाथरूम सें बाहर् आँ गई।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
उधर नीलमव सोनम कि तरफ।
नीलमव सोनमजीप कि पिछली सीट पर्र बैठी हुईँ थि। जीप कां ऊपरी हिस्सा यानी कि छत नहि थि। इसलिए चलतेहुए खुलीहवा लगरही थि दोनो कों तथाइधर उधर कां नज़ारा भि स्पष्ट दिखरहा थां। जैसा कि पहले भि बताया जा चुका हैं कि हल्दीपुर गाॅवआस पास केँ सब गाॅव सें बड़ा थां तथाआस पास केँ कई गाॅवों कि पंचायत भि हल्दीपुर हि थि। अजय सिंह कां परिवार हल्दीपुर गाॅव कां सबसे अधिक संपन्न परिवार थां।
नीलम कि विराज सें पहले हि सारी बातें मैसेज केँ द्वारा हौ चुकी थि। विराज नें उसे प्लान भि समझा दिया थां तथायह भि कहा थां कि गाॅवतथा खेत घूमने कां एक्सक्यूज़ करके निकलना हवेली सें लेकिन गाॅव मे घूमना हि बस नहि हैं बल्कि ऐसी स्थान आनां हैं जिसतरफ गाॅव कि सीमा कां आख़िरी छोर होँ तथाजिस तरफ सें दूसरे गाॅव यानी कि चिमनी केँ पहले वाले गाॅव माधोपुर कि तरफ जाने वाले रास्ते कि तरफ आनां हैं। ऐसाइस लिए कि नीलमव सोनम कों गाॅवतथा खेत देखने जाने कि जानकारी अगर प्रतिमा द्वारा अजय सिंह कों होती हैं तौ वोँ अवश्य अपने ससुरजी जगमोहन सिंह कों गुनगुन छोंड़ कर वापस सीघ्रता सें मुख्य रास्ते सें आएगा। यह भि संभव हैं कि वोँ अपनेसंग मंत्री केँ आदमियों कों अथवाकुछ ऐसे किराए केँ टट्टुओं कों लेँ आए जोँ उन्हें रास्ते मे हि मिल जाएॅ तोँ मुसीबत होँ जाए।
इन्हीं सभी बातों कों सोचकर हि विराज नें नीलम सें माधोपुर कि तरफ हि आने कों कहा थां। हल्दीपुर केँ बगल सें हि माधोपुर थां उसकेबाद चिमनी गाॅव। उधर विराज स्वयं भि गुनगुन केँ दस किलो मीटर पहले हि बसे गाॅव रेवती सें मुख्य रास्ता सें न् आँ कर घूमते हुएइस तरफआने वाला थां।
नीलमव सोनम दोनो हि ऐसा ज़ाहिर कररही थीं जैसे सचमुच हि वोँ दोनो गाॅव देखने निकली हें हवेली सें। विराज नें यह भि कहा थां कि संभव हैं उनके पीछे उसकी माॅम नें औऱ भि ऐसे व्यक्ति लगा दियेहों जौ उसकी गतिविधी कों नोट करतेहुए छुपकर उनका पीछाकर रहेहों। अतःइस बात कां ख़याल रखें औऱ अगर वोँ दिखें तौ उनकी वस्तुस्थित सें उसे अवश्य अवगत कराए लेकिन सावधानी सें।
नीलम सोनम कों बताती जारही थि कि जब वोँ छोटी थि तोँ वोँ इन जगहों पर्र कभीकभी घूमने आया करती थि। दोनो हि बातें कर रहीं थि। अब तक दोनो हि गाॅव कि सीमा केँ बाहर् कि तरफ आँ गईं थि। तभी एक् स्थान ड्राइवर नें जीप कों रोंक दिया। यह देखकर दोनो हि चौंकी।
"मैडमअब किधर जानां हैं?" ड्राइवर नें पीछेपलट करउन दोनो सें पूछा थां___"आप् तोँ जानती हें कि हम् दोनो स्वयं हि यहाॅ पऱ नये हें इसलिए हमें रास्तों कां कुछपता नहि हैं। अतः आपको जहाॅ जहाॅ घूमना हौ हमेंबता दीजिए। वैसे आपके भइया शिवाजी नें कहा थां कि आपकोयह सारा गाॅव देख्ना हैं औऱ फिन खेतों कि तरफ भि जानां हैं। इसलिए अब आप् बताइये कि यहाॅ सें किधर चलना हैं?"
ड्राइवर कि बातसुन कर नीलम केँ दिमाग़ कि बत्ती एकाएक हि रौशन होँ उठी औऱ वो मन हि मनयहसोच कर खुशी सें झूमउठी कि ड्राइवर कों तोँ यहाॅ केँ बारे मे कुछपता हि नहि हैं। यानी वोँ अगर चाहे तोँ कहीं भि चलने कों कह सकती हैं उसे। मगर एकाएक हि उसकामन मयूरयह सोचकर मुरझा भि गय़ा कि कहींऐसा तोँ नहि कि इन दोनो कों शिवा नें ऐसा हि कुछ पूछने केँ लिएकहा हौ। ताकि मे अपने तरीके सें उसेउस तरफ चलने कों कहूॅजिस तरफ जाने सें उसे किसी प्रकार कि कोई शंका होँ औऱ फिनयह शिवा कों मैसेज द्वारा इस सबके बारे मे सूचित भि करदे।
नीलम कों अपनायह ख़याल जॅचा। इस लिए उसनेऐसा वैसाकुछ भि करने कां ख़याल दिमाग़ सें निकाल दिया। लेकिन यह भि उसेपता थां कि माधोपुर कि तरफ हि उसे जानां हैं। अतः वोँ उसतरफ जाने केँ लिएकोई बहाने मन हि मन मे सोचने लगी।
"अरे नीलम। " सहसा सोनम एक् तरफ हाॅथ कां इशारा करतेहुए बोल पड़ी___"वोँ उसतरफ क्याँ हैं?"
"क.कहाॅ दिदी?" नीलम नें भि जल्द सें उसतरफ देखते हुए पूछाजिस तरफ सोनमहाथ सें इशारा कररही थि।
"अरे वहाॅ पऱ। " सोनम नें अपनेउठे हुए हाॅथ कों हल्का सां मूवमेंट देतेहुए कहा___"उस तरफदेख न्। ऐसा लगता हैं जैसे वहाॅ पऱ कोई बड़ा सां मंदिर हैं। "
"अच्छा वोँ। " नीलम कों जैसेदिख गय़ा___"हाॅ वोँ मंदिर हि हैं। यहाॅ पर्र वही एक् मंदिर हैं जौ कि बहुत पुराना मंदिर हैं। हरसाल वहाॅ पर्र मेला भि लगता हैं। "
"मुझेउस मंदिर कों देख्ना हैं नीलम। " सोनम नें सहसा जैसे रिक्वेस्ट कि___"मुझे मंदिर मे देवी देवताओं केँ दर्शन करना बहोत अच्छा लगता हैं। प्लीज इनसे बोलो नं कि यह मंदिर कि तरफ चलें। "
"ठीक हैं दिदी। " नीलम कां मन मयूर एकाएक हि खुशी सें फिनझूम उठा थां। दरअसल वोँ मंदिर बगल केँ हि गाॅव माधोपुर मे हि स्थित थां। मंदिर कों देखकर सोनम नें उसे देखने कि ख़्वाहिश ज़ाहिर कि तोँ नीलमयह सोचकर खुश होँ गई कि अबउसतरफ जाने कां शानदार एक्सक्यूज़ भि मिल गय़ा हैं। अतः उसने जल्दी हि ड्राइवर सें कहा कि जीप कों मंदिर कि तरफ मोड़ लेँ।
ड्राइवर नें ऐसा हि किया। उसे इस सबमें कुछ भि अटपटा नहि लगाइस लिए वोँ भि बिनाकोई भाव चेहरे पर्र लाएजीप कों मोड़ दियाउस तरफ। इधर जैसे हि जीप माधोपुर मे स्थित उस मंदिर कि तरफ मुड़कर चली तोँ सहसा सोनम नें बड़े हि रहस्यमय ढंग सें नीलम कि तरफ देखा।
नीलम उसकेइस तरह देखने सें अभि बुरीतरह चौंकने हि वाली थि कि सहसाउसे ख़याल आया कि ड्राइवर केँ पास हि लगे बैकमिरर सें ड्राइवर उसे चौंकते हुएदेख भि सकता हैं। अतः उसने जल्द सें अपने चेहरे केँ भावों कों छुपाया औऱ फिन सोनम कों सामान्य लहजे मे हि बताने लगी कि एक् बार वोँ भि उस मंदिर मे मेले केँ टाइम गई थि।
नीलमआस पास कां नज़ारा देखते हुए हि थोड़ी थोड़ी देर केँ अंतराल मे पीछे भि देखरही थि। विराज नें उससेकहा थां कि संभव हैं कि उसके पीछे औऱ भि कुछ व्यक्ति छुपकर आएॅ। अतः उन्हीं कों देखरही थि नीलम, मगर अभि तक उसेऐसा कुछ नज़र न् आया थां। यहदेख करउसे लगने लगता कि विराज बेवजह हि इतनीदूर कि सोचरहा हैं। जबकि यहाॅ तौ ऐसाकुछ भि नहि हैं औऱ अगर होता तोँ क्याँ ऐसाकुछ नज़र नं आता?
नीलम केँ एक् हाॅथ मे पहले सें हि फोन थां। अतः उसने सामान्य तरीके सें हि लेकिन सामने कि सीट पऱ बैठे दोनो हि आदमियों कि नज़रों कों बचाकर फोन कि तरफ देखा। (यहाॅ पर्र मेरे पाठकपूछ सकते हें कि सामने कि सीट पऱ बैठे वोँ दोनो आदमियों कि पीठ नीलमव सोनम कि तरफ थि तौ भला नीलम कां उनकी नज़रों सें बचाने कि बात कहाॅ सें आँ गई तौ दोस्तो इसका जवाबयह हैं कि ड्राइवर केँ पास हि बैकमिरर लगा होता हैं जिसमें वोँ पीछे कि चीज़ें देखता हैं। यहाॅ पर्र मे उसी कि बातकर रहाहूॅ)। ख़ैर, नीलम नें बड़ी सावधानी सें फोन मे व्हाट्सएप खोला औऱ फिन विराज कों मैसेज करके बताया कि वोँ अब कहाॅ पहुॅचने वाली हैं।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
विराज कां ख़याल एकदमसही थां। अजय सिंह कों जब प्रतिमा केँ द्वारा यहपता चला कि नीलमव सोनम गाॅवतथा खेत देखने गईं हें तोँ वोँ सचमुच गुनगुन सें चल दिया थां। लेकिन चलने सें पहले उसने अपने एक् ऐसे व्यक्ति कों भि मोबाइल किया जौ गुनगुन मे हि रहता थां तथाकई तरह केँ ग़ैर कानूनी धंधे करता थां। उस व्यक्ति कां नाम फिरोज़ खान थां। अजय सिंह नें फिरोज़ कों मोबाइल करकेउसे सारी सिचुएशन सें अवगत कराया औऱ फिन जल्दी हि अपने गुर्गों कों लेकर चलने कों कहा थां।
इस टाइमअजय सिंह औऱ फिरोज़ खान दोनो एक् हि गाड़ी मे थें जबकि फिरोज़ खान केँ बाॅकी सब गुर्गे पीछेअलग अलगतीन जीपों मे थें। सब केँ हाॅथों मे हथियार केँ रूप मे मौत कां सामान थां। अजय सिंह केँ पास भि एक् रिवाल्वर थां जोँ कि उसने फिरोज़ खान सें लिया थां।
"तौ यहवही लड़का हैं ठाकुर साहब। "अजय सिंह कि गाड़ी मे पैसेंजर सीट पऱ बैठा फिरोज़ खान बोला___"जौ आपका भतीजा हैं तथा जिसने आपका जीना हरामकर रखा हैं। आपने बताया थां कि केसे इसने आपकी फैक्ट्री मे आगलगा दि थि जिसमें आपका बहोत तगड़ा नुकसान हुआ थां?"
"हाॅखान। " अजय सिंह सहसा दाॅत पीसते हुएकह उठा___"यह वही हरामज़ादा हैं औऱ अब तोँ उसकी इतनी हिम्मत बढ़ गई हैं कि इसने पिछले दिन हमें अपने नकली सीबीआई केँ आदमियों केँ जाल मे फाॅसकर कैद भि कर लिया थां। मेरी बड़ी बेटी जौ पुलिस मे इंस्पेक्टर हैं उसे भि इस कम्बख्त नें अपनीतरफ मिला लिया हैं। ख़ैर, मुझे अपनी औलाद सें यह उम्मीद नहि थि खान कि वोँ अपने हि माॅ बाप केँ खिलाफ़ हौ जाएगी। जैसे औलादअगर बिगड़ी हुईँ हौ औऱ वोँ हज़ार पापकर डालेतब भि माॅ बाप केँ लिए वोँ प्रिय हि होती हैं औऱ वोँ उसके अपराधों कों माफ़कर देते हें उसीतरह क्याँ औलाद नहि कर सकती? मैंने जोँ कुछ भि किया थां केवल अपने पत्नि बच्चों केँ उज्वल भविष्य केँ लिए हि किया थां। सालाअब तक तौ उसीपाप केँ पैसों कों खुश होकर उड़ाती रही थि वोँ। मगरआज उसे हमसेतथा हमारे उसी पैसों सें नफ़रत हौ गई? खान, यह मे जानता हूॅ कि बेटी कि इस बगावत सें मुझे कितनी तक़लीफ हुइ हैं। उसेइस बात कां ज़रा भि ख़याल नहि आया कि उसके द्वारा यहसभी करने सें उसकेमाॅ बाप पऱ क्याँ गुज़रेगी?"
"यहसभी उस लड़के कि वजह सें हि हुआ हैं ठाकुर साहब। " फिरोज़ खान नें कठोरता सें कहा___"उसी नें रितू बिटिया कों बरगलाया होगा। वरना वोँ ऐसाकभी नं करती। "
"नहि खान। "अजय सिंह नें मजबूती सें अपनेसिर कों इंकार मे हिलाते हुए कहा___"यह सभीउस लड़के केँ बरगलाने सें नहि हुआ हैं। क्योंकि इसके पहले मेरेसंग संग मेरे बच्चे भि उस विराज सें नफ़रत करते थें औऱ उसकीतथा उसके परिवार मे किसी कि शक्ल तक देख्ना पसन्द नहि करते थें। यहसभी तौ किसी औऱ हि वजह सें हुआ हैं खान। दरअसल मेरी दोनों हि बेटियों कों सच्चाई कि राह पर्र चलना शुरुआत सें हि मनपसंद थां। उन्हें यहपता नहि थां कि उनका बाप वास्तव मे कैसा हैं? ख़ैर, इस मामले मे मेरा बेटा मुझ पर्र गय़ा हैं। मुझे खुशी हैं कि वोँ मेरे जैसा हैं औऱ सच कहूॅ तौ मुझेउस पर्र नाज़ भि हैं। मगरअब मैने भि फैंसला कर लिया हैं कि मेरेइस दिल कि आगतभी शान्त होगीजब उस विराज केँ संगसंग मे अपनीउन दोनो बेटियों कों भि अपने हाथों सें बद सें बदतरमौत दूॅगा। "
फिरोज़ खान देखता रह गय़ा अजय सिंह कों। वोँ देखरहा थां कि इस टाइमअजय सिंह केँ चेहरे पऱ ज़लज़ले केँ सें भाव थें। यकीनन उसके अंदर क्रोध, गुस्सा व अपमान यह तीनो हि अपने पूरे जलाल पर्र थें।
"ख़ैर छोंड़िये इसबात कों। " फिरोज़ खान नें जैसे पहलू बदला___"यह बताइये कि उन सबको पकड़ने केँ लिए क्याँ प्लानिंग कि हैं आपने?"
"प्लानिंग मे कोईकमी नहि हैं खान। "अजय सिंह नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"मेरी पत्नि केँ पास भेजा फ्राई कर देने वाला दिमाग़ हैं। उसने मुझे बताया थां कि उसनेउन दोनो केँ संग पहले तौ सामान्य सिचुएशन बनाए रखने केँ लिएदो ऐसे आदमियों कों जीप मे भेजा हैं जोँ तगड़े फाइटर कहे जाते हें। उनके जाने केँ बाद उसनेअलग सें उन जैसे हि आदमियों कि एक् टीमबना कर उनके पीछेइस तरहलगा दिया हैं कि नीलमव सोनम कों वोँ टीम नज़र हि न् आए। उसटीम कां कामयह हैं कि अगरसच मे विराज नीलमव सोनम कों लेने आँ रहा हैं तोँ वोँ यकीनन पहले नीलमव सोनम केँ संगगए उनदो आदमियों सें भिड़ेगा। अतः हमारी टीम केँ वोँ लोग बैकअप केँ रूप मे अपने आदमियों कि सहायता करेंगे। यानीइस सिचुएशन कों देखते हुए हि हमारी दूसरी टीम केँ व्यक्ति जल्द हि वहाॅ पहुॅच जाएॅगे। मेरी पत्नि प्रतिमा केँ अनुसार अगर बैकअप केँ रूप मे विराज नें भि कोईऐसा इंतजाम किया होगा तौ यकीनन वोँ भि विराज कां पलड़ा कमज़ोर पड़ते देखकर उन सबकेबीच टूट पड़ेंगे। उस सूरत मे यहाॅ सें हम् सभी भि पहुॅच जाएॅगे औऱ विराज तथा उसके आदमियों कां काम तमाम करेंगे। हम् लोग एक् तरह सें डबल बैकअप केँ रूप मे होंगे अपने आदमियों केँ पीछे। मुझे यकीन हैं कि इतनाकुछ होने केँ बाद विराज एण्ड जश्न ज़्यादा देर तक हमारा सामना नहि कर पाएगी औऱ अंततः उन्हें हमारे सामने स्वयं कों सरेण्डर करना हि पड़ेगा। "
"ओह। " फिरोज़ खान प्रभावित लहजे मे बोला___"प्लान तौ यकीनन आपका शानदार हैं। सचमुच इस सूरत मे आपका वोँ भतीजा औऱ उसकेसब व्यक्ति घुटने टेक देंगे। "
"बिलकुल। " अजय सिंह नें कहा___"इस सबकेबाद विराज औऱ उसकेसंग संग मेरी दोनो बेटियाॅ मेरे कब्जे मे होंगी। तब मे उस हरामी केँ पिल्ले सें अपनेसंग हुए इतने भारी नुकसान कां गिनगिन केँ बदला लूॅगा। मुम्बई मे सुरक्षित बैठी उसकीमाॅ बेहन कों यहाॅ मेरेपास मेरे पैरों तले आनां हि पड़ेगा। उसकेबाद तोँ दुनियाॅ देखेगी कि ठाकुर अजय सिंह केँ संगऐसा दुस्साहस करने वालों कां क्याँ अंजाम होता हैं?"
"ऐसा हि होगा ठाकुर साहब। " फिरोज़ खान नें दृढ़ता सें कहा___"आपने जिसतरह सें प्लान बनाया हैं उस हिसाब सें यकीनन आपका वोँ भतीजा तथा आपकी दोनो बेटियाॅ आपके चंगुल मे आँ जाएॅगी। मे अपनेसंग अपने करीब-करीब बीस केँ आसपास व्यक्ति लायाहूॅ। सबकेसभी आधुनिक हथियारों सें लैश हें। अगरयह सच हैं कि आपका वोँ भतीजा उन दोनो कों लेने आँ रहा हैं तोँ यकीनन तगड़ी मुठभेड़ होगी औऱ उस मुठभेड़ मे वोँ लोग बुरीतरह आपसेमात खाएॅगे। "
"इसबार वोँ हरामी कि औलाद नहि बचेगा खान। "अजय सिंह नें पूरे आत्मविश्वास केँ संग कहा___"इस बार वोँ मेरी मुट्ठी मे अवश्य कैद होगा औऱ पिंजरे मे कैद परिंदे कि तरह फड़फड़ाएगा भि। साले कि ऐसी दुर्गति करूॅगा कि मौत औऱ रहम दोनो कि हि भीख मागेगा मुझसे। "
अजय सिंह कि इसबात पर्र फिरोज़ खान बोला तौ कुछ नहि लेकिन उसके जबड़े भिंचगए थें, जैसेजंग केँ लिए पूरीतरह सें सजधजकर हौ गय़ा होँ। इसकेसंग हि वाहन केँ अंदर ख़ामोशी छा गई। गाड़ी हल्दीपुर कि तरफ तेज़ी सें बढ़ीजा रही थि। उनके पीछे पीछेतीन तीन जीपों मे सवार फिरोज़ खान केँ गुर्गे भि चले आँ रहे थें।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कथा अभि जारी हैं दोस्तो,,,,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Aage kya hua? Next part padhiye
Relavant source : click here