♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
अबआगे___________
इधर हम् तीनों भि वाहन मे बैठे पूरी रफ्तार सें माधोपुर कि तरफ बढ़ेचले जारहे थें। हम् तीनो केँ बीच बहुतदेर सें ख़ामोशी छाई हुईँ थि। कदाचित आने वाले वक़्त केँ बारे मे सभीकोई सोचेजा रहा थां। कुछदेर पहले रितू दिदी नें मोबाइल पर्र किसी सें बात कि थि। उनकी बातें ऐसी थि जौ उस टाइम मुझे बिलकुल भि समझ मे नहि आई थि। मैने मोबाइल करके शेखर केँ मौसाजी सें उनकी करेंट लोकेशन केँ बारे मे पूछा थां। उन्होंने बताया कि वोँ हमारे पीछे हि आँ रहे हें लेकिन फाॅसला बनाकर।
अभि हमारे बीच ख़ामोशी हि थि कि तभी रितू दिदी कां फोन मोबाइल बजउठा। रितू दिदी नें फोन कि स्क्रीन पर्र फ्लैश कररहे नंबर कों देखा औऱ फिनकाल रिसीव करफोन कान सें लगा लिया।
"हाॅ प्रकाश कहो। "फिन रितू दिदी नें कहा___"क्याँ ख़बर हैं वहाॅ कि?"
".। " उधर सें कुछकहा गय़ा।
"ओहआई सि। " रितू दिदी केँ होठों पऱ मुस्कान फैल गई___"कितने लोग हें वोँ?"
".। " उधर सें फिनकुछ कहा गय़ा।
"चलो अच्छी बात हैं प्रकाश। " रितू दिदी नें कहा__"औऱ हाॅ बहोत बहोत शुक्रिया इस ख़बर केँ लिए। चलो रखतीहूॅ, तुम् ज़रा होशियार रहना। "
"क्याँ बात हैं दिदी?" कालकट होते हि मैने उनकीतरफ देखते हुए पूछा___"किसका मोबाइल थां?"
"तेरी बताया थां न् मैने। " रितू दिदी नें कहा___"कि हवेली मे प्रकाश नाम कां एक् व्यक्ति सुरक्षा गार्ड केँ रूप मे काम करता हैं। यहउसी कां मोबाइल थां। उसने बताया कि माॅम नें नीलमव सोनम केँ हवेली सें निकलने केँ कुछदेर बाद हि दो जीपों मे करीब-करीब दस व्यक्ति उन दोनो केँ पीछे लगाया हैं। इसका मतलब मेरा अंदाज़ा सही थां। माॅम नें तुम्हारी सोच कों ताड़ते हुए बैकअप केँ रूप मे नीलमव सोनम केँ पीछेकुछ औऱ आदमियों कों लगा दिया हैं। "
"हाॅइस बात कां अंदेशा तौ मुझे भि थां दिदी। " मैने सामने रास्ते कि तरफ देखते हुए कहा___"मुझे अंदेशा थां कि बड़ीमाॅ ऐसाकर सकती हें। मगर फिक्र कि कोईबात नहि हैं दिदी। हमारे पास भि बैकअप केँ रूप मे आदमियों कि कोईकमी नहि हैं। "
"तुम् मेरेडैड कों भूलगए राज। " रितू दिदी नें कहा___"माॅम नें इस बारे मे अवश्य बताया होगा औऱ अब वोँ भि आँ हि रहे होंगे गुनगुन सें। संभव हैं कि उनकेसंग भि कुछ व्यक्ति हों। "
"बिलकुल हौ सकते हें दिदी। " मैने कहा___"इसी लिए तौ मे सीधे रास्ते सें नहि बल्कि माधोपुर वाले रास्ते कि तरफजा रहाहूॅ ताकिइस रास्ते मे उनसे हमारा सामना हि न् हौ। "
"इसके पहले मैने जिससे मोबाइल पऱ बात कि थि। " रितू दिदी नें कहा___"वोँ एक् मुखबिर थां। जिसे मैने शुरुआत सें हि डैड केँ पीछे लगाया हुआ थां। ताकि वोँ डैड कि हर गतिविधी केँ बारे मे मुझे सूचित करतारहे। ख़ैर उसने बताया कि डैड मुख्य रास्ते सें हि आँ रहे हें लेकिन उनकेसंग बहुत सारेलोग भि हें जोँ आधुनिक हथियारों सें लैश हें। मतलबसाफ हैं कि वोँ स्वयं भि पूरी तैयारी केँ संग आँ रहे हें। अब तुम् समझ सकते होँ कि इस सबसे उनकी स्थित हमारी स्थित सें ज़्यादा मजबूत व भारी हैं। "
"अगरऐसा हैं। " सहसा पिछली कि शीट पर्र बैठा आदित्य बोल पड़ा___"तोँ यकीनन हम् उनकेबीच फॅस जाएॅगे। इसलिए हमेंकुछ ऐसा इंतजाम करना पड़ेगा जिससे हमारी स्थित उनकी स्थित सें बेहतर हौ जाएतथा हम् उन्हें हराकर नीलमव सोनम कों सुरक्षित वहाॅ सें ला सकें। "
"फिक्र मतकरो आदित्य। " रितू दिदी नें कहा___"उसका भि इंतजाम मैनेकर दिया हैं औऱ वोँ इंतजाम ऐसा होगा कि डैड हि क्याँ कोई भि कुछ नहि कर पाएॅगा औऱ हम् नीलमव सोनम कों सहज हि उनके चंगुल सें छुड़ा लाएॅगे। "
"यह तोँ कमाल हि होँ गय़ा दिदी। " मैने मुस्कुराते कहा___"अगर ऐसा हैं तोँ फिन यकीनन फिक्र कि कोईबात नहि हैं। मगर प्रश्न यह हैं कि आपनेऐसा क्याँ हैरतअंगेज इंतजाम किया हैं जिसके तहत हम् बड़ी सहजता सें नीलमव सोनम दिदी कों लें आएॅगे?"
"सब्रकर मेरे प्यारे भइया। " रितू दिदी नें मुस्कुरा कर कहा__"औऱ बस देखता जा कि क्याँ होता हैं। "
"इसका मतलब कि आप्। " मैनेहॅस कर कहा___"इस बारे मे हमें नं बताकर हम् दोनो केँ लिए सस्पेन्स क्रियेट कररही हें?"
"तूँ अपने आपको बड़ा तीसमारखां समझता हैं न्। " रितू दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"तोँ फिन स्वयं हि सोच लेँ कि मैनेऐसा क्याँ इंतजाम किया हौ सकता हैं कि उसकीवजह सें सभीकुछ सहज हि होँ जाएगा। इतना हि नहि बल्कि उसवजह सें कोईकुछ कर भि नहि पाएगा। "
"ओहोयह तोँ चैलेन्ज देने वालीबात होँ गई दिदी। " मैंने ऑखें फैलाते हुए उन्हें देखा।
"हाॅ तौ क्याँ हुआ?" रितू दिदी भि मुस्कुराई___"अगर तूँ इसे चैलेन्ज समझता हैं तौ यहीसही। अबसोच करबता कि ऐसा क्याँ हौ सकता हैं इंतजाम?"
"जाने दीजिए दिदी। " मैने नाटकीय अंदाज़ सें कहा___"खामखां आपके दिमाग़ कां कचरा होँ जाएगा। इसलिए बेहतर हैं कि आप् मुझसे नाँ हि पूछो। "
"ओये चलचलहवा आनेदे। " रितू दिदी नें मानो घुड़की सि दि मुझे___"बड़ा आया मेरे दिमाग़ कां कचरा करने वाला। भूल मत कि मे उसकी बेटी हूॅ जिसके दिमाग़ कों तुँ स्वयं भि सलाम करता हैं। "
रितू दिदी कि इसबात सें मे एकदम सें चुप होँ गय़ा। सच हि तौ कहा थां उन्होंने। बड़ीमाॅ केँ दिमाग़ कों यकीनन सलाम करने कां दिल करता थां मेरा। मे हमेशा सोचता थां कि अगर उनकायही शातिर दिमाग़ अच्छाई केँ लिए उपयोग होता तौ कितनी ऊॅची पर्सनैलिटी बन सकतीथीं वोँ। यह उनका दुर्भाग्य थां याँ फिन वोँ ऐसी हि थि। लेकिन एक् बातसच थि कि अपने पति सें बेहद प्रेम करतीथीं वोँ। कदाचित यहीवजह हैं कि उन्होंने पति केँ कहने पर्र हर वोँ काम किया थां जोँ कि हरतरह सें अनैतिक व ग़लत थां।
"क्याँ हुआ बच्चे?" मुझे सोचों मे गुमदेख सहसा रितू दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"मेरी माॅम कां सुनकर हवा निकल गई क्याँ तेरी? होता हैं बेटा, ऐसा होता हैं कि ऐसी हस्तियों कां ज़िक्र होते हि अच्छे अच्छों कि हवा निकल जाती हैं। तुँ तोँ फिन भि अभि बच्चा हैं। "
"यहकुछ ज़्यादा हि नहि हौ गय़ा दिदी?" मैने मासूम सि शक्लबना करकहा।
"अब होँ गय़ा तौ होँ गय़ा नं। " रितू दिदी मेरे द्वारा अपनी मासूम सि शक्लबना लेने पर्र मुस्कुराईं____"कम सें कम तुँ मेरे माॅम कां सुनकर अब ज़्यादा उड़ेगा तौ नहि। "
"यहसच हैं दिदी। " मैने सहसा गंभीर होकर कहा___"कि वोँ भले हि बुराई कां संगदे रही हें मगर जाने क्यूं उनकेलिए मेरेदिल मे इज्ज़त आज भि हैं। हलाॅकि उन्होंने मेरीमाॅ केँ संग बुरा करने मे कोईकसर नहि छोंड़ी थि। फिन भि यह मेरीमाॅ केँ दियेहुए अच्छे संस्कार हि हें कि मे आज भि अपने सें बड़ों कों सम्मान देताहूॅ, भले हि उन लोगों नें हमारे संग कितना हि बुरा किया हैं। "
"मे जानती हूॅराज। " रितू दिदी भि गंभीर हौ गई___"औऱ मुझेइस बात कि बेहद खुशी भि हैं कि तेरे औऱ तेरीमाॅ बेहन केँ संगभले हि बद सें बदतर सुलूक किया थां मेरे माॅमडैड नें मगर इसकेबाद भि तुँ उनकी इज्ज़त करता हैं। तेरीयही खूबी तुम को सबसे अच्छा औऱ सबसे महान बनाती हैं। मुझे परमेश्वर सें इसबात कि शिकायत अवश्य हैं कि क्यूं उसने मुझेऐसे इंसान कि बेटी बनाया जोँ केवल औऱ केवलपाप करना जानते हें, मगरइस बात कां उसी भगवान सें शुक्रिया भि करतीहूॅ कि उसने मुझे तेरे जैसानेक दिल भइया दिया। आज तुम कोपाकर मे बेहदखुश हूॅराज। मुझेपता हैं कि इसजंग कां अंत मे अंजाम क्याँ होगा? यानी कि अधर्म वपाप करने वाले मेरे माॅमडैड तथा मेरा वोँ कमीना भइयाअंत मे अपने अधर्म वपाप कर्म करने केँ चलते याँ तौ मारे जाएॅगे याँ फिन हमेशा केँ लिएजेल कि सलाखों केँ पीछेकैद होकररह जाएॅगे। मुझेइस सबकादुख तोँ यकीनन होगा भइया क्योंकि आख़िर वोँ सभी हें तोँ मेरे अपने हि मगरयह सोचकर स्वयं कों तसल्ली भि दूॅगी कि बुरा करने वालों कि नियति तौ यही होती हैं न्। उनके बदले मुझे तुँ मिला हैं औऱ तेरेसंग संग गौरी चाची, करुणा चाची तथा गुड़िया जैसी बेहनमिल जाएॅगी। यहसभी भि तौ मेरे अपने हि हें। "
"छोंड़िये इनसभी बातों कों दिदी। " मैने माहौल कों सामान्य बनाने कि गरज़ सें कहा____"मुझे भि तौ इस सबकादुख होगामगर आप् भि जानती हें कि इस सबके अलावा दूसरा कोई चारा नहि हैं। इसलिए इनसभी बातों पऱ अधिकसोच विचार मत कीजिए। "
अभि मैंने यहकहा हि थां कि सहसा मेरेफोन मोबाइल पऱ मैसेज टोनबजी। जिससे मेरा ध्यान सामने हि डैसबोर्ड केँ पासरखे अपनेफोन पर्र गय़ा। मैने रितू दिदी कों फोनउठा कर देखने कों कहा। उन्होंने मेरा मोबाइल उठाया औऱ उसमेआए हुए मैसेज कों देखने लगीं।
"नीलम कां मैसेज हैं राज। "फिन रितू दिदी नें मुझसे कहा___"उसने मैसेज मे बताया हैं कि वोँ सोनम केँ संग हि माधोपुर वाले मंदिर कि तरफजा रही हैं। "
"ओहयह तोँ अच्छी बात हैं। " मैने कहा___"इसका मतलबउस तरफ जाने कां उसनेकोई नं कोई एक्सक्यूज़ बनाया होगा। लेकिन यह भि सच हैं कि उसके पीछे पीछे हि कोई उनके पीछे भि लगा होगा। ख़ैरयह तोँ होगा हि, हमेंअब उन सबसे निपटने केँ लिए सजधजकर होँ जानां चाहिए। हम् बस पहुॅचने हि वाले हें उस स्थान। "
"क्याँ हम् उसीतरफ जारहे हें राज?" पीछे सें आदित्य नें सामने कि तरफ इशारा करतेहुए कहा___"जहाॅ पर्र वोँ ऊॅचा सां मंदिर कां गुंबद दिखाई देरहा हैं?"
"हाॅ साथी। " मैने कहा___"हम् माधोपुर केँ उसी मंदिर केँ पासजा रहे हें। मगर वहाॅ पर्र एक् समस्या भि होँ सकती हैं। "
"समस्या???" आदित्य केँ संगसंग रितू दिदी भि बोल पड़ी थीं___"कैसी समस्या हौ सकती हैं?"
"समस्या यही होगी कि हम् सभी मंदिर केँ पास हि इकट्ठा होंगे। " मैने कहा___"औऱ मंदिर केँ पास हि हम् सबका आमना सामना होगा। यह भि सच हैं कि हम् सबकेबीच इस लड़ाई मे खून ख़राबा भि होगा जौ कि मंदिर केँ पास नहि होना चाहिए। "
"अरेयह तौ अच्छी बात हैं राज। " रितू दिदी नें कहा___"देवी माॅ केँ सामने हि हर चीज़ कां फैंसला होगा औऱ यकीनन हमारी हि जीत होगी। यानी कि अंततः हम् नीलमव सोनम कों लेकर हि आएॅगे। भला देवीमाॅ केँ सामने अधर्म वपाप कि जीत केसे हौ सकेगी?"
"मे रितू कि इसबात सें सहमतहूॅ भइया। " पीछे सें आदित्य नें कहा___"दूसरी बातयह संयोग भि देवीमाॅ नें बनाया हैं कि हम् सभी उनके सामने हि एकत्रित होंगे औऱ हर चीज़ कां फैंसला वोँ स्वयं करेंगी। "
"हाॅ दोस्त। " मैने सहसा खुशी सें कहा___"इस तरफ तोँ मेरा ध्यान हि नहि थां। सचकहा हैं बड़े बड़े संतों नें कि इस संसार मे सभीकुछ परमेश्वर कि हि मर्ज़ी सें होता हैं। वोँ हमें वहीं लें जाता हैं जहाॅ केँ बारे मे हमने सोचा भि नहि होता हैं। सोचने वालीबात हैं न् दिदी, मैने तौ नीलम सें केवलयही सोचकर वहाॅ पऱ आने कों कहा थां कि सबसे निपटने केँ बाद हम् उसी रास्ते सें वापस भि होँ जाएॅगे ताकि बड़े पिताजी सें हमारा सामना हि नं होनेपाए। इस बारे मे तौ हमने सोचा हि नहि थां हर चीज़ कां फैंसला करने केँ लिए वहाॅ पर्र देवीमाॅ भि मौजूद होंगी। भला उनकी ख़्वाहिश केँ बग़ैर कोईकाम केसे होँ सकता थां?"
"अब हमारी जीत यकीनन होगीराज। " आदित्य नें कहा___"देवी माॅ कों भि पता हैं कि हम् धर्म कि राह पऱ हें। अतः उनके आशीर्वाद सें सभीकुछ हमारे हि हक़ मे होगा औऱ इसका मुझे पूरा विश्वास हैं। "
"हम् सबको विश्वास हैं आदित्य। " रितू दिदी नें कहा__"इस लिएअब हम् सभी देवीमाॅ कों मन हि मन प्रणाम करकेकाम कां श्रीगणेश करेंगे। कहोजय माता दि। "
"जय माता दि। " दिदी केँ कहने पर्र हम् सबने एक् संगजय माता दि कहा औऱ फिन मे एक्सीलेटर पऱ अपनेपेर कों औऱ ज़ोर सें दबा दिया। परिणामस्वरूप गाड़ी कि रफ्तार औऱ भि तेज़ होँ गई।
कुछ हि देर मे हमारी गाड़ी माधोपुर गाॅव केँ बाहर् बनेउस देवीमाॅ केँ मंदिर केँ पास पहुॅच गई। उसके पहले हि मैने रितू दिदी तथा आदित्य कों गाड़ी सें उतार दिया थां। ऐसाइस लिए कि हम् तीनों कां एक् संग रहनाठीक नहि थां। उससे हम् एक् संग एक् हि स्थान पऱ फॅस सकते थें। इसलिए मैने रितू दिदी व आदित्य कों मंदिर सें करीब पचास मीटर पहले हि उतार दिया थां औऱ स्वयं वाहन लेकर मंदिर कि तरफबढ़ चला थां। मुम्बई सें जब मे चला थां तौ जगदीश अंकल नें मुझेतीन कवच दिये थें जौ कि बुलेट प्रूफ थें। इस वक़्त हम् तीनो नें हि अपने कपड़ों केँ अंदरउस बुलेटप्रूफ कवच कों पहनाहुआ थां। यह जगदीश अंकल कि दूरदर्शिता कां हि कमाल थां कि उन्होंने हम् लोगों कि सुरक्षा कां ऐसा इंतजाम किया थां।
माधोपुर गाॅव मे करीब-करीब पचास याँ साठ केँ आसपास घर-मकान बनेहुए थें। देवीमाॅ कां यह पुराना मंदिर गाॅव केँ बाहर् बनाहुआ थां। मंदिर सें करीब-करीब पचास याँ साठ मीटर केँ फासले सें हि गाॅव कि आबादी शुरुआत होती थि। कहने कां मतलबयह कि हमारी इस मुठभेड़ मे गाॅव केँ लोगों पर्र कोईआॅच नहि आँ सकती थि। यह हमारे लिए सबसे अच्छी बात थि। आसपास कां इलाका दूरदूर हरेभरे तथा ऊॅचे ऊॅचे पेड़ पौधों सें सुशोभित थां। यहसब गाॅव चारोतरफ केँ पहाड़ों सें घिरेहुए थें। एक् नहर थि जौ कि माधोपुर औऱ हल्दीपुर केँ बीच सें निकलती थि। चिमनी कि तरफ जाते जातेयह नहरदो भागों मे बॅट जाती थि। जिसका एक् भाग चिमनी कि तरफतथा दूसरा भाग एक् अन्य गाॅव गुमटी कि तरफ जाती थि लेकिन गुमटी केँ बाहरी इलाके कि तरफ सें। नहर केँ होने कां सबसे बड़ा फायदा यह थां कि यहाॅ केँ सब गाॅवों मे पानी कां अभाव नहि थां। सब गाॅवों मे खेतों कि सिंचाई केँ लिएइसी नहर केँ पानी कां उपयोग होता थां। जिसका नतीजा यह होता थां कि आसपास केँ सब गाॅवों मे फसल कि पैदावार अच्छी खासी होती थि।
मंदिर केँ नज़दीक हि मंदिर केँ पिछले हिस्से कि तरफ मैने गाड़ी कों रोंक दिया थां। मैनेदेख लिया थां कि मंदिर केँ सामने कि तरफ एक् ऐसीजीप खड़ी थि जिसके ऊपरछत नहि थि। वोँ जीप यकीनन वही थि जिसमें नीलमव सोनमआई हुईँ थीं। चारोतरफ इस टाइम ख़ामोशी तोँ थि लेकिन मे जानता थां कि यह ख़ामोशी कुछ हि वक्त कि मेहमान थि यहाॅ पऱ। ख़ैर, मैने देवीमाॅ कों प्रणाम किया औऱ फिन धड़कते हुएदिल केँ संग मंदिर केँ सामने कि तरफ आहिस्ता आहिस्ता बढ़ने लगा। हलाॅकि मे पूरीतरह सतर्क थां तथा किसी भि खतरे सें निपटने केँ लिए पूरीतरह सें रेडी थां।
आसपास कां बहोत हि बारीकी सें जायजा लेतेहुए मे मंदिर कि दीवार सें सटकर चलतेहुए मंदिर केँ सामने वालेभाग कि तरफबढ़ रहा थां। यह मेरे जिंदगी कां पहला अवसर थां जबकि मे इसतरह कि सिचुएशन कों फेस करने वाला थां औऱ आने वाले वक़्त कि सिचुएशन कों भि। थोड़ी हि देरबाद मुझे अपनी स्थान पऱ रुक जानां पड़ा। क्योंकि मैने देखा कि मंदिर केँ सामने लेकिन कुछ हि दूरी पऱ वोँ जीप खड़ी थि तथाउस जीप केँ पास हि वोँ दो हट्टे कट्टे व्यक्ति भि खड़े थें जिन्हें बड़ीमाॅ नें नीलमव सोनम कि सुरक्षा केँ रूप मे भेजा थां। वोँ दोनोआपस मे बातें तोँ कररहे थें लेकिन उनकेहाव भाव सें नज़र आँ रहा थां कि वोँ किसी भि खतरे सें निपटने केँ लिए भि सजधजकर थें। यानी कि उन्हें बताया गय़ा थां कि ऐसाकुछ होगा।
मे जानता थां कि मेरेपास ज़्यादा वक़्त नहि हैं क्योंकि अभि कुछ हि वक़्त मे यहाॅ पऱ आदमियों कि फौज भि नज़रआने लगेगी। यह भि संभव थां कि आँ हि गई होँ। हलाॅकि मैनेआस पास बहोत बारीकी सें देख चुका थां लेकिन मुझेऐसा कुछ नज़र नहि आया थां जिससे पताचले कि यहाॅ पऱ कोई औऱ भि हैं।
मैने अपने पैन्ट केँ पीछे बेल्ट पर्र फॅसे रिवाल्वर कों निकाला। उसकेबाद मैने अपनी जैकेट सें एक् ऐसी चीज़ निकाली जिसे साइलेंसर कहा जाता हैं। मैनेउस साइलेंसर कों रिवाल्वर कि नाल पर्र स्लिम किया। मे चाहता थां कि जोँ कामछुप कर हौ जाएउसे अंजाम दे देना चाहिए। हलाॅकि यह तौ तय थां कि खुलकर मुकाबला करना हि पड़ेगा। मगर मेरीसोच थि कि दुश्मन कों मौका हि क्यूं दियाजाए?
रिवाल्वर कि नाल पऱ साइलेंसर स्लिम करने केँ बाद मैनेउन दोनो कि तरफ देखते हुए अपने रिवाल्वर वाले हाॅथ कों हवा मे उठाया औऱ फिन एक् व्यक्ति कि गर्दन पर्र निशाना साधकर ट्रिगर दबा दिया। परिणाम स्वरूप हल्की सि पिट् कि आवाज़ हुईँ औऱ एक् अजीब सि चीज़पलक झपकते हि उनमें सें एक् व्यक्ति कि गर्दन पऱ जालगी। मैने इतने पर्र हि बस नहि किया बल्कि उसी लम्हा रिवाल्वर कां रुख मोड़कर फिन सें ट्रिगर दबा दिया थां। दोसमय केँ अंदर हि वोँ दोनो व्यक्ति झूलते हुएजीप केँ पास हि कच्ची ज़मीन पऱ भरभरा कर गिरे औऱ शान्त पड़गए। उन दोनो कि गर्दन सें कोईखून नहि बहरहा थां बल्कि एक् एक् सुई चुभी हुई थि। आप् समझ सकते हें कि वोँ सुई क्याँ होँ सकती थि। मेरा इरादा उन्हें जान सें मारने कां हर्गिज़ भि नहि थां बल्कि मात्र बेहोश करना थां। इसलिए वोँ दोनोअब सुई केँ प्रभाव सें कम सें कमदो सें तीन घंटे केँ लिए बेहोश हौ चुके थें।
मुझे यकीन नहि हौ रहा थां कि आते हि मुझेइस तरह सहजता सें पहले पड़ाव पऱ हि कामयाबी मिल जाएगी। मगर सबूत चूॅकि सामने हि ज़मीन पर्र बेहोश पड़े थें इसलिए यकीन करना हि थां। उन दोनो केँ बेहोश ओ जाने केँ बाद मैने एक् बार पुनःआस पास कां बारीकी सें जायजा लिया औऱ फिन मंदिर केँ सामने कि तरफबढ़ चला किन्तौ सावधानी सें हि। अभि मे बढ़ हि रहा थां कि तभी मंदिर केँ अंदर सें घंटे केँ बजने कि दोबार आवाज़ आई। मे समझ गय़ा कि नीलमव सोनम दिदी मंदिर केँ अंदर हें।
मे आसपास देखते हुए तेज़ी सें आगे बढ़ा औऱ मंदिर केँ जस्टबगल पर्र हि सीढ़ियों केँ पास आँ गय़ा। एक् बार पुनःआस पास कां जायजा लिया औऱ फिन मैने पैन्ट कि जेब मे हाॅथ डाला तोँ चौंक पड़ा। मे फोन गाड़ी मे हि भूलआया थां। इस टाइम मे नीलम कों मैसेज कर बोल्ना चाहता थां कि वोँ दोनो मंदिर केँ बाहर् आँ जाएॅ औऱ जल्द सें मेरेसंग चलें यहाॅ सें। मगर मेराफोन गाड़ी मे हि रह गय़ा थां। ख़ैर, मैने सोचाचलो कोईबात नहि मंदिर केँ अंदर जाकर देवीमाॅ केँ दर्शन भि तौ करना चाहिए।
मे तेज़ी सें सीढ़ियाॅ चढ़ते हुए मंदिर केँ मुख्य दरवाजे पऱ पहुॅचा तौ देखा कि मंदिर केँ अंदर नीलमव सोनम दोनो हि देवीमाॅ कि प्रतिमा केँ सामने अपने दोनो हाॅथ जोड़े खड़ी थि। यहदेख कर मे मुस्कुराया औऱ फिन जल्दी हि मंदिर केँ दरवाजे कि चौखट कों छूकर पहले प्रणाम किया औऱ फिन चौखट कों पार गय़ा।
अंदरआते हि मैने नीलमव सोनम दिदी केँ पीछे हि खड़े होकरतथा अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए देवीमाॅ कों असीम श्रद्धा सें प्रणाम किया। मगर अगले हि लम्हा मेरेमुख सें घुटी घुटी सि चीख़ निकल गई संग हि मे पीछे कि तरफ झूलते हुए चौखट केँ बाहर् आकरपीठ केँ बल ज़मीन पर्र गिरा। मेरी ऑखों केँ सामने कुछ लम्हा केँ लिए अॅधेरा सां छा गय़ा। मेरी नाॅक सें खून बहनेलगा थां तथा मेरेमुख केँ बाएॅ साइड कि तरफ होंठों सें भि खून बहनेलगा थां। किसी नें बड़ी ज़ोर सें मुझ पऱ वार किया थां।
अभि मे अपने होशो हवाश मे आतेहुए ज़मीन सें उठ हि रहा थां कि तभी मेरेपेट मे फिन सें बड़े ज़ोर कां प्रहार हुआ। जिसके प्रभाव सें मे किसी फुटबाल कि तरहहवा मे उड़ता हुआ सीधा सीढ़ियों केँ नीचे आँ कर गिरा। इन कुछ हि पलोंयह सभी इतना तेज़ी सें हुआ थां कि मुझेकुछ समझने कां मौका हि नहि मिल पाया थां। सीढ़ियों केँ ऊपरीभाग सें सीधा नीचे कच्ची ज़मीन पऱ गिरने सें एक् बारफिन सें मे बुरीतरह दर्द सें बिलबिला उठा थां। लेकिन अब तक मे समझ गय़ा थां कि यह एक् जाल थां जिसमें मे फॅसाया गय़ा थां।
कच्ची ज़मीन सें मे उछलकर खड़ा होँ गय़ा औऱ सीढ़ियों केँ ऊपर कि तरफ देखा हि थां कि पीछे सें किसी नें मेरीपीठ पर्र ज़बरदस्त वार किया। मे इसकेलिए बिलकुल भि रेडी नहि थां औऱ नां हि मुझे इसकी उम्मीद थि। अतःइस बारमुह केँ बलउसी कच्ची ज़मीन पर्र गिरा। मुझे एकाएक हि भारी खतरे कां आभासहुआ औऱ मैने अपनी संपूर्ण ताकत लगाते हुएफिन सें उछलकर खड़ाहुआ। अभि मे खड़ा हि हुआ थां कि पलक झपकते हि मुझे नीचे भि झुक जानां पड़ा वरना पीछे कि तरफ सें जिसने वार किया थां उसकी फ्लाइंग किक सीधा मेरी गर्दन पर्र पड़ती औऱ यकीनन मेरी गर्दन कि हड्डी टूट जाती।
मैने झुकने केँ संग हि अपनी एक् टाॅग कों बिजली कि सि तेज़ी सें चलाया थां, नतीजा यहहुआ कि फ्लाइंग किक मारने वाले कां जौ अकेला पांव ज़मीन पऱ टिका थां वोँ ज़मीन सें उखड़ गय़ा औऱ वोँ भरभरा कर ज़मीन पऱ गिरा। मे यहदेख कर आश्चर्य चकितरह गय़ा कि यह तोँ वही व्यक्ति थां जिसे अभि थोड़ी हि देर पहले मैंने सुई केँ द्वारा बेहोश किया थां। मुझेसमझ नं आया कि यह बेहोशी सें होशो हवाश मे केसे आँ गय़ा। मैनेपलट कर दूसरे व्यक्ति कि तरफ देखा तौ वोँ भि एक् तरफ पोजीशन लिए खड़ा मुस्कुरा रहा थां। यहदेख कर मेरे आश्चर्य कि कोई सीमा न् रही। सालायह दोनो चीज़ क्याँ थें कि इन पर्र उस बेहोश करने वालीसुई कां भि असर नहि हुआ?
सच तोँ यह थां कि मे कुछ भि नहि समझपा रहा थां। एक् तौ इन दोनो पर्र सुई कां असर नं हुआ दूसरे मंदिर केँ अंदर सें मुझेइस तरह बाहर् करीब फैंक दिया गय़ा। सबसकुछ इतनी तेज़ी सें हुआ कि मुझेकुछ समझ हि नहि आया थां। लेकिन अब मे समझ चुका थां कि यहसभी क्याँ थां। मतलबसाफ थां कि बड़ीमाॅ केँ द्वारा भेजा गय़ा बैकअप यहाॅ पहुॅच चुका थां औऱ उसकेकुछ व्यक्ति मंदिर केँ अंदर छुपे मेरेआने कि इंतजार कररहे थें। मे जैसे हि मंदिर केँ अंदर गय़ा औऱ देवीमाॅ कों प्रणाम करनेलगा वैसे हि उन लोगों नें मुझ पऱ वारकर दिया थां। इधर जिन्हें मे बेहोश समझरहा थां वोँ होश मे होतेहुए मेरेइस तरह नीचे आँ जाने कां इंतजार कररहे थें। उसकेबाद जैसे हि मे नीचे गिरा वैसे हि इन दोनो नें भि मुझ पर्र हमलाकर दिया। कहने कां मतलबयह कि कहीं सें भि मुझे सम्हलने कां याँ सोचने कां मौका हि नहि मिल पाया थां।
अभि मे यहसभी सोच हि रहा थां कि सहसा मुझे रितू दिदी व आदित्य कां ख़याल आया। मुझेउन दोनो कि बेहद चिंता होनेलगी। कहीं वोँ दोनो भि न् फॅसगए हों। मैनेमन हि मन देवीमाॅ सें कहा____"यह सभी क्याँ हैं माॅ?इन लोगों नें मुझे आपकोठीक सें प्रणाम भि नहि करने दिया औऱ आपने भि इन्हें रोंका नहि? ऐसी तोँ उम्मींद नहि मुझे? ख़ैरकोई बात नहि, मुझे अपना आशीर्वाद दीजिए कि मे इन सबका मुकाबला कर सकूॅ औऱ अपनेसब चाहने वालों कों यहाॅ सें सुरक्षित लेँ जा सकूॅ। "
"कैसीलगी बच्चे?" तभी मेरे कानों मे ऊपर सीढ़ियों सें नीचे उतरते हुए एक् हट्टे कट्टे व्यक्ति कि आवाज़ पड़ी, वोँ मुस्कुराते हुएकह रहा थां___"ज़्यादा चोंट तौ नहि आई न् तुम्हें? वैसे मे हैरान हूॅ कि तुम् जैसे मामूली सें लड़के केँ लिए हमारे बाॅस इतना अधिक परेशान थें। सचमुच यकीन नहि होता कि तुम् जैसा पिद्दी सां लड़का हमारे बाॅस कि नींदें हराम कियेहुए थां। जबकि तुम्हें तौ जब चाहे चीटियों कि तरह मसलाजा सकता थां। बट डोन्ट वरी, जौ पहले नहि हुआ वोँ अब होँ जाएगा। "
"कहते हें ऊॅटजब तक पहाड़ केँ नीचे नहि आता। " मैने मुस्कुराते हुए कहा___"तब तक उसेयही लगता हैं कि वोँ इस संसार मे सबसे ऊॅचा हैं औऱ उसकी बराबरी कोईकर हि नहि सकता। वही हाल तुम्हारा हैं भाड़े केँ कुत्ते। अपने बाॅस लोगों केँ सामने कुत्तों कि तरहदुम हिलाने वाले कुत्तो इसभरम मे न् रहो कि तुम् लोगों नें मुझेइस तरह फॅसाकर कोईतीर मार लिया हैं। बल्कि खेल तोँ अब शुरुआत होगा। "
"बहुत कड़वी ज़बान हैं तेरी लड़के। " सीढ़ियों सें नीचेउतर आएउस व्यक्ति नें सहसा दाॅत पीसते हुए गुस्से सें कहा____"अगर बाॅस नें मना न् किया होता तोँ यहीं पऱ तुझेही चीटी कि तरहमसल कर तेरी जिंदगी लीला खत्मकर देता। "
"अगर एक् हि मर्द कि औलाद हैं। " मैने भि तैश मे आकर कहा___"तोँ अकेले मुझसे मुकाबला कर, फिन देख्ना कि चींटी कि तरहकौन मसला जाता हैं?"
"ओहोऐसा क्याँ?" वोँ व्यक्ति ब्यंगात्मक भाव सें ऑखों कों फैलाते हुए बोला___"चल ठीक हैं, तेरीयह ख़्वाहिश तोँ पूरी करनी हि चाहिए। " यह कहने केँ संग हि उसने अपने बाॅकी साथियों कि तरफ देखते हुए कहा___"तुम् मे सें कोई भि इस लड़के कों हाॅथ नहि लगाएगा। यह मुझे दिखाना चाहता हैं कि चींटी कि तरह हम् दोनो मे सें कौन मसला जाता हैं। अतःअब मुकाबला मात्र हम् दोनों केँ बीच हि होगा। "
उसकेसब साथियों सहमति मे सिर हिला दिया। सबके होठों पर्र जानदार मुस्कान थि। जैसे उन्हें मेरी मूर्खता पर्र हॅसी आँ रही होँ। हलाॅकि मुझे भि पता थां यह वक्तइस तरह केँ मुकाबले कां बिलकुल भि नहि हैं, मगरतैश मे आकर मेरी ज़बान सें निकल हि गय़ा थां। अतःअब बात ज़बान कि थि तथा अपने स्वाभिमान कि। टाइमऐसा थां कि अपनी स्थान रुकने वाला नहि थां। हर लम्हा केँ बीतने केँ संगइस बात कि भि संभावना बढ़ती जारही थि कि जोँ यहाॅ नहि पहुॅचे हें वोँ किसी भि वक़्त पहुॅच सकते हें औऱ फिन हालात औऱ भि विकट होँ जाएॅगे।
इधर बाॅकी सभी आदमियों कि सहमति मिलते हि मैने पोजीशन लेँ ली। जबकि छिसके संग मेरा मुकाबला होनेजा रहा थां उसने झटके सें अपने शरीर केँ ऊपरी हिस्से केँ कपड़े निकाल कर अपने एक् व्यक्ति कि तरफ उछाल दिया। सहसा मेरी नज़रऊपर मंदिर केँ दरवाजे केँ बाहर् खड़ी नीलमव सोनम पऱ पड़ी। वोँ दोनो हि दोनोतरफ सें एक् एक् व्यक्ति सें घिरी हुईँ खड़ीथीं। उनके चेहरों पर्र इससमय डरे सहमे सें भाव कायम थें। मे उन दोनो कि तरफदेख कर अजीबतरह सें मुस्कुराया औऱ फिन अपने प्रितद्वंदी कि तरफ देखने लगा।
मैने देखा कि उसके शरीर सें कपड़ा हटते हि उसका हट्टा कट्टा बदन नुमायाॅ होँ उठा। कोई आम इंसान उसकी इतनी खतरनाक बाॅडी देखकर हि डरजाए। उससे लड़ने कां ख़याल तोँ वोँ आने वालेसात जन्मों मे भि न् करे। ख़ैर उसने अपने दोनो हाॅथो कों अगलबगल उसेऊपर उठाकर मुझे अपने डोले दिखाए। जैसेकह रहा होँ कि देख बच्चे जितने मेरेयह डोले हें उतने मे तोँ तेरेबदन कां कोई हिस्सा भि स्लिम नहि बैठता। यहदेख कर मे मुस्कुराया औऱ फिन अपने दोनो हाॅथों केँ इशारे सें उसे अपनीतरफ मुकाबले केँ लिए बुलाया।
मेरेऐसा करने पऱ उसके चेहरे केँ भाव एकदम सें बदले औऱ वोँ पलक झपकते हि गुस्से मे डूबा दिखाई देनेलगा। कदाचित अपने डोले दिखाकर वोँ मुझे डराना चाहता थां मगरजब मे उसेडरा हुआ नज़र नहि आया तोँ उसे क्रोध आँ गय़ा थां।
"अपने ईश्वर कों यादकर लेँ बच्चे। " फिन उसने मेरीतरफ खतरनाक भाव सें बढ़ते हुए कहा___"उनसे दुवाकर कि तेरेबदन कि हड्डियाॅ सलामत रहें। "
"यह डाॅयालग मे भि बोल सकताहूॅ तुम्हारे लिए। " मैने मुस्कुरा कर कहा___"पऱ यहसोच कर नहि बोला कि फालतू कि डींगें मारना मेरी फितरत नहि हैं। "
मेरीयह बातसुन कर वोँ जैसे बुरीतरह तिलमिला गय़ा थां। मुझेपता थां कि उसके सामने मे कुछ भि नहि हूॅ। अगर मे एक् बार भि उसके फौलादी शिकंजे मे फॅस गय़ा तौ फिन शायद ईश्वर हि मालिक होगा मेरा। मगर मुझे स्वयं पऱ औऱ अपने गुरू कि सिखाई हुइ कला पऱ पूर्ण विश्वास थां।
वोँ पूरेवेग सें मेरीतरफ बढ़ा औऱ अपने दाहिने हाॅथ कों भि उसीवेग सें मुझ पर्र चलाया थां। मे फुर्ती सें नीचे झुकामगर झुकते हि मेरेहलक सें चीख निकल गई। कारण उसने हाॅथ चलाने केँ बाद हि अपने दाहिने पांव कों उठाकर उसका घुटना भि चला दिया थां जौ सीधा मेरे झुकेहुए चेहरे सें टकराया थां। मे उछलते हुए सीधाहुआ हि थां कि उसने बिजली कि सि फुर्ती सें घूमकर मेरे सीने पर्र फ्लाइंग किकजमा दि। नतीजा यहहुआ कि मेरेहलक सें ज़ोर कि हिचकी निकली औऱ मे पीछे कि तरफहवा मे लहराते हुएहुए हि नीचे कच्ची ज़मीन पऱ चारो खाने चित्त जा गिरा। गिरते हि मेरी ऑखों केँ सामने अनगिनत तारे नाॅचगए। कुछसमय केँ लिए तौ ऑखों केँ सामने अॅधेरा भि छा गय़ा। प्रहार इतना ज़बरदस्त थां कि मुझसे जल्दी उठा नं गय़ा। सीने मे बड़ी असहनीय पीड़ा महसूस हुईँ मुझे। मेरे कानो मे नीलमव सोनम कि चीखें भि टकराई। कदाचित मुझेइस तरह गिरते देख वोँ बेहरडर गई थि औऱ मुझेकुछ होँ जाने कि आशंका सें वोँ बुरीतरह चीखीथीं।
सहसा मेरी नज़र मेरे नज़दीक हि पहुॅच चुकेउस व्यक्ति पऱ पड़ी। मेरे क़रीब पहुॅचते हि उसने अपनेपेर कों उठाया औऱ ज़मीन पऱ चित्त गिरे मेरेपेट कि तरफ तीब्र वेग सें चलाया। मे बिजली कि सि फुर्ती सें कई पलटा खातेहुए दूसरी तरफ हौ गय़ा तथासंग हि उछलकर खड़ा भि हौ गय़ा। यहअलग बात हैं इसतरह उछलकर खड़े होने सें अचानक हि मुझे अपने सीने पर्र पीड़ा कां एहसास हुआ। मे समझ चुका थां कि अगरयह व्यक्ति इसीतरह मुझ पर्र औऱ दोचार प्रहार करने मे सफल हौ गय़ा तौ यकीनन मेराकाम तमाम हौ जानां हैं। अतःअब मे उससे पूरीतरह सतर्कता सें मुकाबला करने केँ लिए रेडी हौ गय़ा।
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दोस्तो, आप् सबके सामने भाग हाज़िर हैं।
हलाॅकि मैंने एपसोड कों ऐसी स्थान पऱ रोंक दिया हैं जहाॅ पऱ रोंक दिये जाने सें यकीनन आप् सबकामूड ख़राब हौ गय़ा होगा। मगर क्याँ करता दोस्तो??
एक् तोँ मेगा एपसोड जितना लम्बा होना चाहिए थां उतना होँ चुका थां दूसरे इसकेआगे कां कुछ सस्पेन्स भि रखना थां। आख़िर आप् सबकेमन मे इसबात कों जानने कि उत्सुकता तौ बनी हि रहनी चाहिए कि इसकेआगे विराज याँ उसकेसंग संग बाॅकी सबका क्याँ हुआ???
अतः आशा करताहूॅ कि आप् सभी मेरी बातों कों समझते हुए नाराज़ नहि होंगे बल्कि एपसोड कां खुशी लेंगे औऱ फिन हमेशा कि तरह अपनी प्रतिक्रिया देकर बताएॅगे कि यह एपसोड कैसालगा अथवा इसमें कहाॅ पऱ क्याँ कमी नज़रआई आपको??
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First of all sorry for late comment bro,
bhay kaafi updates पर mene कोई comment नहीं नहीं दिया thaa uss के sorry lekin last update ko padane ( read) के बाद aesa lag raha h की hero ko chutiya bnaa दिया hu, I think hero की uss gadhe के samne कोई aukat hi na hu ayese mai कभी कभी readers kahani ko read karte समय skip krr dete h aur phir bolte h majaa नहीं आया aesa नहीं h की kahani apni line से bhatak rahi hu lekin I suggest you की hero ko थोड़ा strong hnaa चाहिए, vaise bi ap mujhse behtar इस बात jante honge की जब क्या hnaa hain you our big brother so I told you anything wrong I extremely sorry।
स्टोरी बहोत हि रोमांचक मुकाबले तक पहुच चुकी हैं l देखते हें आगे क्याँ होता हैं
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Mind blowing superb fantastic aati shreshth update bhay, yaar yeh shiva की too kaya hi palat geya, dekhtey hey iss badlab की bajah sey क्या woh shidha raah pey ata hey की नहीं
pehley hi Nidhi कम bughat rahi hey क्या joo एक और ishq diwani aageyi, yeh देखना अब mazedar hoga की kiski nasib mey उसकी pyear milta hey ya dono hi yesey tarafti rehengi
yeh mukabla too bahut khatarnak hoga lagta hey, dekhtey hey iss action reaction क्या natija nikalta hey, luksan too dono tarf sey hi uthana pareyga,
एक और bar sukriya itna achcha update ke liye
KEEP IT UP AND AS ALWAYS WAITING FOR
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