♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
भाग। 《 12 》
अब तक,,,,,,
"ठीक हैं। " प्रतिमा नें मन हि मन हज़ारों गालियाॅ दि उसे लेकिन प्रत्यक्ष मे कहा__"तुम्हें तोँ मेरा यानी अपनी बड़ी बेहन कां प्रेम भि कुछ औऱ लगता हैं। "
"ऐसा नहि हैं दिदी। " आप् तौ बेवजह हि नाराज़ हौ रहीं हें। "
"रहनेदो। " प्रतिमा नें छोटे बच्चे कि तरह तुनककर कहा__"सभी जानती हूॅ मे। "
तब तक गरमचाय बन चुकी थि। करुणा नें गरमचाय कों दोकप मे डालातथा एक् कप करुणा कों थमाया औऱ एक् कप स्वयं लेकरउसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे पीनेलगी। जबकि प्रतिमा केँ मन मे यहीचल रहा थां कि 'आजफिन एक् बार मेरी कोशिश बेकार रही। '
अब आगे,,,,,,,,
उधर मुम्बई मे इस टाइम ड्राइंग रूम मे रखे सोफों पर्र क्रमशः जगदीश ओबराय, विराज, गौरीतथा निधीआदि बैठेहुए थें।
"इससभी कि क्याँ ज़रूरत हैं अंकल?" विराज नें कहा__"आप् जानते हें कि जिंदगी मे मेरा मात्र एक् हि मकसद हैं औऱ वोँ हैं अजय सिंह कां खात्मा। मे अपनेइस मकसद कों पूरा करने केँ लिएअब किसी भि प्रकार कां ब्यवधान नहि चाहता। "
"जगदीश भैया ठीक हि कहरहे हें बेटे। " गौरी नें समझाने वाले लहजे सें कहा__"उच्च शिक्षा कां होना भि ज़रूरी हैं। इसलिए तुम् अपनी पढ़ाई कों भि पूराकरो। हम् मे सें कोई तुम्हें यह नहि कहरहा कि तुम् अपने मकसद सें पीछेहटो, बल्कि वोँ तौ तुम्हारा अब प्रणबन गय़ा हैं उसे तुम् अवश्य पूराकरो। मगरसंग संग अपनी पढ़ाई भि करते रहोगे तोँ कुछ ग़लत नहि होँ जाएगा। "
"हाॅ भाई। " निधि नें विराज केँ दाहिने बाजू कों मजबूती सें पकड़ते हुए कहा__"माॅ औऱ अंकलसही कह रहें हें आपको अपनी पढ़ाई कान्टीन्यू रखनी चाहिए। औऱ फिन हम् दोनों संग मे हि काॅलेज जाया करेंगे। कालेज मे अगर मुझेकोई छेड़े तोँ आप् उसकीजम कर धुनाई भि किया करना बिलकुल फिल्म केँ हीरो कि तरह, हाॅ नहि तोँ। "
"गुड़िया नें भि कह दिया तोँ ठीक हैं अंकल मे अपनी पढ़ाई जारी करताहूॅ। " विराज नें निधि केँ सिर पऱ प्रेम सें हाॅथफेर कर कहा__"मे कल हि किसी मेडिकल काॅलेज मे एडमीशन करवा लेताहूॅ। "
"उसकी ज़रूरत नहि हैं बेटे। " जगदीश नें हॅसकर कहा__"मैंने आलरेडी तुम्हारा एडमीशन एक् बढ़िया सें मेडिकल काॅलेज मे करवा दिया हैं। "
"क् क्याँ???" विराज नें चौंकते हुएकहा।
"हाॅ बेटे। " जगदीश नें हॅसकर कहा__"मुझे पता थां कि तुम्हें इसकेलिए मानना हि पड़ेगा, इसलिए मैंने पहले हि तुम्हारा एडमीशन करवा दिया हैं। कल कालेज जाकर सबसे पहले प्रिंसिपल सें मिल लेना। दरअसल एडमीशन तौ मैंने करवा दिया हैं लेकिन फार्म वगैरा मे साइन तोँ तुम्हारे हि लगेंगे नं। इसलिए जाकर पहलेयह सभी क्लियर कर लेना। बाॅकी किसी चीज़ कि फिक्र मत करना। यूॅ समझना कि अपना हि काॅलेज हैं। "
"धन्यवाद अंकल। " विराज एकाएक सहसा गंभीर हौ गय़ा__"आपने इतनाकुछ हमारे लिएकर दिया हैं जिसकी कोई कल्पना नहि कर सकता। आप् हमारे जिंदगी मे ईश्वर बनकरआए हें वर्ना हर चीज़ सें बेबसव लाचार हम् आखिर क्याँ कर पाते??यह मेरेऊपर आपका कर्ज़ हैं जिसे मे किसी भि जनम मे उतार नहि सकता। "
"यह सभीकह कर तुमने मुझे पराया कर दिया बेटे। " जगदीश भावुक होकर बोला थां__"जबकि मे तुम् सबको अपना परिवार हि मानने लगाहूॅ। "
"नहि अंकल। " विराज सोफे सें उठकर जल्दी हि जगदीश केँ पांव पकड़ लिया, बोला__"मेरे कहने कां मतलब वोँ नहि थां। आप् पराए केसे हौ जाएंगे भला? आप् हमारे लिए पराए हौ भि नहि सकते हें। आप् तौ अपनेव पराए सें परे हें अंकल। आप् इस कलियुग केँ अद्वतीय इंसान हें जिनके अंदर मात्र औऱ मात्र नेकदिली औऱ सच्चाई हैं। "
"यहसच हैं भैया। " गौरी कि आॅखों मे आॅसू थें, बोलि__"आप् हमारे लिए अपनों सें भि बढ़कर हें, अपने केसे होते हें यह भि हमने देखा हैं मगर आप् ग़ैर होकर भि अपने सें बढ़कर हें। राज तौ नासमझ हैं आप् उसकीबात पर्र यह बिलकुल नं समझें कि हम् आपको पराया समझते हें। बल्कि अगरदिल कि सच्चाई बताऊॅ तोँ वोँ यह हैं कि अब आपकेलिए अपनीजान तक कुर्बान करने कां मन करनेलगा हैं। हमारे ह्रदय मे आपकाजगह बहोत ऊॅचा हैं भैया.बहोत ऊॅचा। "
"तुमने यहसभी कहकर मुझे वोँ खुशी दि हैं बेहन जोँ संसार भर कि दौलतमिल जाने पर्र भि न् होती। " जगदीश नें अपनी आॅखों मे छलकआए आॅसुओं कों पोंछते हुए कहा__"इसके पहलेऐसा लगता थां जैसेयह संसार महज एक् कब्रिस्तान हैं जहाॅकोई इंसान तोँ क्याँ परिंदा तक नहि हैं। कदाचित् सभीकुछ खोकर औऱ अकेलेपन मे ऐसा हि महसूस होता हैं। मगर तुम् सबके आँ जाने सें यह वीरान सां जिंदगी जैसेफिन सें हराभरा औऱ खुशहाल होँ गय़ा हैं। "
"मे तोँ आपको अपने भइया केँ रूप मे पाकर धन्य हि हौ गई हूॅ भैया। " गौरी नें कहा__"मेरा अपनाकोई भइया न् थां, एक् भइया केँ लिएतथा उसकीकमी सें हमेशा दिल मे दर्दरहा थां। आपके मिलने सें अबमन कों त्रप्ति मिल गई हैं। "
"यहसभी भगवान कि हि कृपा हैं बेहन। " जगदीश नें कहा__"वोँ जौ भि करता हैं बहोत कुछसोच कर हि करता हैं। इसके पहलेकौन किसे जानता थां लेकिन आजऐसा हैं जैसे हम् सभीकभी गैर थें हि नहि। सच कहताहूॅ बेहन परमेश्वर कि इस इनायत सें बहोत खुशहूॅ मे। "
"अच्छा अब बहोत होँ गय़ा यह इमोशनल ड्रामा। " निधि नें भोलेपन सें कहा__"कुछ खाने पीने कि बात कीजिए न्। मेरेपेट मे पता नहि कितने चूहे हें जौ बहुतदेर सें उछलकूद कररहे हें। आप् मे सें किसी कों इसका खयाल हि नहि हैं.जाओ नहि बात करना किसी सें अब, हाॅ नहि तौ। "
"चूहे तौ मेरेपेट मे भि कूदरहे हें गुड़िया। " विराज नें अजीब सां मुहबना कर कहा__"मुझे भि किसी सें बात नहि करनाअब, हाॅ नहि तौ। "
"क्याँ??????" निधिउछल पड़ी__"आपने मेरीनकल कि? मतलब आपने मुझे चिढ़ाया? जाओ आपसे तौ बिलकुल बात नहि करनी, हाॅ नहीं तोँ। "
"ठीक हैं फिन। " विराज नें सोफे पऱ सें उठतेहुए कहा__"मे अकेले हि चला जाताहूॅ आइसक्रीम खाने। "
"नननहीहीं। " निधि चीखी औऱ उछलकर जल्दी हि खड़ी हौ गई__"आप् अकेले आइसक्रीम खाने नहि जा सकते मे भि चलूॅगी आपकेसंग औऱ अगर आप् अपनेसंग मुझे नं लें गए तौ सोच लीजिएगा, हाॅ नहि तौ। "
"जोँ मुझसे बात नहि करता मे उसे अपनेसंग कहीं नहि लेकर जाता। " विराज नें अकड़ते हुए कहा__"तुम् मुझसे बात नहि कररही तौ तुम्हें अपनेसंग लेकर क्यूं जाऊॅ??"
"अरे मे तोँ ऐसे हि कहरही थि। " निधि नें चापलूसी वाले अंदाज़ मे कहा__"औऱ वैसे भि मे आपकीजान हूॅ न्? आप् अपनीजान केँ बिना केसेचले जाएॅगे, हाॅ नहि तौ। "
"कोई कहीं नहि जाएगा। " गौरी नें कहा__"चुप चाप बैठो दोनो, मे खानां लेकरआती हूॅ। "
"नहि नहि। " निधि नें बच्चों कि तरह कूदते हुए इंकार किया__"मुझे आइसक्रीम हि खानां हैं, हाॅ नहि तोँ। "
"हाहाहा इन्हें जानेदो बेहन। " जगदीश नें हॅसते हुए कहा__"जाओ बेटे, तुम् गुड़िया कों आइसक्रीम खिलाकर आओ। "
"भैया आप् नहि जानते हें। " गौरी नें जगदीश सें कहा__"इसे आइसक्रीम कि लतफिन सें पड़ जाएगी। पहलेयह बिना आइसक्रीम केँ एक् दिन नहि रहती थि। बड़ी मुश्किल सें तौ इसकी आइसक्रीम छूटी हैं। "
"एक् दिन मे कुछ नहि होता। " जगदीश नें गौरी सें कहने केँ बाद निधि कि तरफ मुखातिब हौ कर कहा__"औऱ हाॅ बेटी, ज़्यादा आइसक्रीम मत खानां। सेहत केँ लिए अच्छी नहि होती। "
"जी अंकल। " कहने केँ संग हि निधि नें विराज कां बाजू पकड़ा औऱ बाहर् कि तरफ खींचते हुए लें जानेलगी।
.
दूसरे दिन विराज काॅलेज पहुॅचा। निधि उसकेसंग हि थि। हलाॅकि यह उसका काॅलेज नहि थां लेकिन फिन भि उत्सुकतावश वो विराज केँ संग ज़िद करकेआई थि।
काॅलेज कों देखकर दोनो भइया बेहन चकितरह गए। विराज कि आॅखों मे जाने क्याँ सोचकर आॅसू आँ गए जिसे उसने बड़ी हि सफाई सें पोंछ लिया थां। निधि तोँ कालेज कि हुस्न मे हि खोई हुईँ थि।
कुछदेर काॅलेज कों देखने केँ बाद विराज निधि केँ संग कालेज केँ अंदर गय़ा। कालेज मे थोड़ी देरइधर उधर घूमने केँ बाद निधि कों विराज नें कालेज कि कन्टीन मे बैठाकर स्वयं प्रिंसिपल सें मिलने उसके आफिस कि तरफबढ़ गय़ा।
रास्ते मे एक् व्यक्ति सें उसने प्रिंसिपल कां आफिस पूॅछा औऱ आगेबढ़ गय़ा। कुछदेर बाद हि वो प्रिंसिपल केँ आफिस मे प्रिंसिपल केँ सामने खड़ा थां। उसने अपनानाम बताया, हलाॅकि जगदीश ओबराय नें सबकुछ पहले हि सेटकर दिया थां। इसलिए विराज कों अधिक तकलीफ़ नहि हुईँ।
सारी फारमेलिटी पूरी करने केँ बादतथा अपने कोर्स सें संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेने केँ बाद वो प्रिंसिपल केँ आफिस सें बाहर् आकर कालेज कि कन्टीन कि तरफबढ़ गय़ा। कन्टीन सें निधि कों संग लेकर वो कालेज सें बाहर् आँ गय़ा।
"तोँ आख़िर आपको आपके पसन्द कां काॅलेज मिल हि गय़ा नं भाई?" रास्ते मे बाइक पऱ पीछे बैठी निधि नें विराज सें सटकरतथा विराज केँ कान केँ पासमुह लें जाकर बोलि__"एक् ऐसा काॅलेज जिसमें पढ़ने कि कभी आपने तमन्ना कि थि, औऱ आजजब आपकी तमन्ना पूरी हुइ तोँ आपकी आॅखों सें आॅसूछलक पड़े। हैं नं ?"
"नं नहि तौ। " बाइकचला रहा विराज निधि कि बात पर्र बुरीतरह चौंका थां, बोला__"ऐसा कुछ नहि हैं। "
"आप् समझते हें कि। " निधि नें कहा__"मुझे कुछपता हि नहि चला जबकि मैंने अपनी आॅखों सें देखा भि औऱ दिल सें महसूस भि किया। "
"बहोत बड़ी बड़ी बातें करनेलगी हैं गुड़िया। " विराज नें हॅसकर कहा__"ऐसी जैसे कि कोई सयाना हौ जाने पऱ करता हैं। "
"हाॅ तौ मे बड़ी होँ गई नं। " निधि नें भोलेपन सें कहा__"आपने देखा थां न् उसदिन? मे आपके कंधे सें थि, औऱ अबकुछ दिनबाद आपके काॅन सें भि होँ जाऊॅगी.देख लीजिएगा, हाॅ नहि तोँ। "
"हाॅ तुँ तोँ कुछदिन मे मेरेसिर केँ ऊपर सें भि निकल जाएगी गुड़िया। " विराज नें हॅसते हुएकहा।
"मुझेऐसा क्यूं लगता हैं जैसेयह कहकर आपने मेरा मज़ाक उड़ा दिया हैं?" निधि नें सोचने वालेभाव सें कहा__"औऱ अगरऐसा हि हैं तोँ बहोत गंदे हें आप्। जाइए नहि बात करनाअब आपसे, हाॅ नहि तौ। "
"अरेयह क्याँ बात हुई गुड़िया??" विराज बुरीतरह हड़बड़ा गय़ा।
"बातमत कीजिए अब। " निधि जौ अब तक विराज सें चिपकी हुईँ थि अब पीछेहट गई, फिन बोलीं__"वैसे तौ बड़ा कहते हें कि मे आपकीजान हूॅ, औऱ अब अपनी हि जान कां मज़ाक उड़ारहे हें, हाॅ नहि तौ। "
"अच्छा बाबा ग़लती हौ गई। " विराज नें खेदभरे स्वर मे कहा__"क्याँ अपने भाई कों क्षमा नहि करेगी गुड़िया??"
"अब आप् माफ़ी मत माॅगिए। " निधि जल्दी हि खिसककर विराज सें फिन चिपक गई__"मुझे बिलकुल अच्छा नहि लगता। "
"तुँ सचमुच मेरीजान हैं गुड़िया। " विराज नें भावुक होकर कहा__"तेरी एक् समय कि भि बेरुखी मे सह नहि सकता। मुझसे अगरकोई ग़लती हौ जाए तोँ तुँ मुझे उसकी सज़ादे देनामगर न् हि कभी मुझसे नाराज़ होना औऱ नं हि यह कहना कि मुझसे बात नहि करना। "
"भाई.। " निधि कि रुलाई फूट गई, उसने अपने दोनो हाॅथ विराज केँ दोनो साइड सें निकाल कर विराज केँ पेट पर्र कस लिया। फिन बोलीं__"आपसे नाराज़ होकर याँ आपसेबात न् करके क्याँ मे भि एक् समयरह पाउॅगी? अगर मे आपकीजान हूॅ तौ आप् भि तोँ मेरीजान हें भाई। "
"चलअब तुँ रोमत गुड़िया। " विराज नें माहौल कों बदलने कि गरज सें कहा__"हम् दुकान केँ पास आँ गए हें। यहां पऱ मुझेकुछ किताबें वगैरा लेनी हें। तूँ बता तेरी क्याँ चाहिए?"
"मुझे न्। " निधि नें खुशी सें कहा__"मुझे न् एक् टच स्क्रीन वालाफोन लेना हैं औऱ हाॅ आप् भि टच स्क्रीन वालाफोन लें लीजिए। यह कि-पैड कों अब रिटायर कर दीजिए, हाॅ नहि तौ। "
"क्यूं अच्छा तौ हैं यहफोन। " विराज नें कहा__"इसमें क्याँ खराबी हैं भला? तुम कोपता हैं इसकी बैटरी हप्तों तक चलती हैं। "
"मे कुछ नहि जानती। " निधि नें कहा__"मैंने कह दिया हैं कि लेना हैं तोँ लेना हैं बस, हाॅ नहि तौ। "
"अब तौ लेना हि पड़ेगा। " विराज नें मुस्कुरा कर कहा__"मेरी गुड़िया, मेरीजान नें कह दिया हैं तौ। "
"हाॅ नहि तोँ। " निधिखुश हौ गई।
"चलो पहलेफोन हि लें लेते हें। " विराज नें कहा__"उसके बाद किताबें खरीद लूॅगा। "
यहकह विराज नें बाइक कों फोन स्टोर कि तरफ मोड़ लिया। करीब पाॅच मिनटबाद हि वोँ दोनोफोन स्टोर मे थें।
"गुड़िया। " विराज नें धीरे-धीरे सें कहा__"किस कंपनी कां लेना हैं फोन औऱ कितने रुपये वाला??"
"मे क्याँ बताऊॅ?" निधि नें भि विराज कि तरह धीरे-धीरे सें हि कहा__"मुझे इस बारे मे तौ वैसे भि कुछ नहि पता। "
"फिन अब क्याँ करें??" विराज नें कहा__"यह तौ कमाल हि होँ गय़ा गुड़िया। फोन खरीदने आँ गए हें मगर हमेंयही पता नहि हैं कि कौन सि कंपनी कां तथा कितने रुपये तक कां फोन लेना हैं?"
"दुकान वाले सें पूॅछ लेते हें नं। " निधि नें बुद्धि दि__"उसे तोँ सभीकुछ पता हि होगा। "
"अरे हाॅ गुड़िया। " विराज नें अपनेसिर मे हाॅथ कि थपकीलगा कर कहा__"यह तौ मैने सोचा हि नहि थां। अच्छा हुआ तुमने बता दिया वर्ना यहाॅ सें वापस जानां पड़ता। हैं न्???"
"अब अधिक ड्रामा मत कीजिए। " निधि नें हॅसकर कहा__"मुझे पता हैं आप् बुद्धू बनने कां नाटककर रहे हें। "
"मतलब तूने पकड़ लिया??" विराज मुस्कुराया।
"औऱ नहि तौ क्याँ। " निधि हॅसी__"सरलाॅक होम्स एक् ज़माने मे हमसे जासूसी कि ट्रेनिंग लेनेआता थां, हाॅ नहि तोँ। "
"एक्सक्यूज़मी सर। "तभी सहसाउन लोगों केँ पास शोरूम कां एक् ब्यक्ति आकर बोला__"व्हाट कैनआई हेल्प यू??"
"हमें किसी अच्छी कंपनी कां सबसे अच्छा फोन याँ आईफोन दिखाइए। " विराज नें उस ब्यक्ति सें कहा।
उस ब्यक्ति नें आज केँ चलन केँ हिसाब सें कईतरह केँ फोन लाकर टेबल पर्र रख दियातथा उन डिब्बों पऱ लिखी बातों कों बताबता करफोन मोबाइल कि खासियत बताने लगा। फिन उसने आईफोन केँ कुछसेट दिखाने लगा।
करीबआधे घंटेबाद दोनो हि शोरूम सें बाहर् निकले। उन दोनों केँ हाॅथ मे एक् एक् फोन थां।
"भाई आप् मुझे सिखा दीजियेगा कि केसे चलाते हें??" निधि नें रास्ते मे कहा।
"ठीक हैं गुड़िया। " विराज नें कहा__"चल अभि किताबें भि लेना हैं। "
"वैसे आपका काॅलेग कब सें शुरुआत होगा?" निधि नें पूॅछा।
"एक् हप्ते बाद। " विराज नें कहा।
"भाई मुझे भि आपकेसंग इसी काॅलेज मे पढ़ना हैं। " निधि नें कहा।
"अगलेसाल सें तूँ भि इसी कालेज मे आँ जानां। " विराज नें कहा।
ऐसी हि बातें करतेहुए दोनो बेहन भइया बाइक सें घऱ पहुॅच गए। विराज अपनेमन पसन्द कालेज मे पढ़ने सें बेहदखुश थां। मगर वो नहि जानता थां कि अबआगे क्याँ होने वाला थां??????
दोस्तो, भाग हाज़िर हैं,,,
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,
Behad hi shandaar aur jabardast update bhay. bhut khoob superb. Bade hi behtareen dhang say dikhaya hain aapne sari baton ko. Mzaaaa aa gya bhay waah. khaas krr k Viraj aur Nidhi k bich k ishq ko. aur ab , Aage kaa intjar
Nice Update bhaii Emotional Update viraj aur uski mummy n Shii kha itna kon krta hain koy SGA bhii nhii . Uncle vakaii m mahan hain Viraj aur nidhi sath hii kaalej m admission le liya dekhte hain kaalej m kys hotha hain
यह एक् ऐसी स्टोरी हैं जिसके भाग कि इंतजार बहोत मुश्किल सें होती हैं। प्लीज जरा जल्द जल्दभाग दो दोस्त।
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Awesome.fantastic.mind blowing update bro
too अब से viraj bi collage jayega और apni study continue karega???
Mere khayaal से aage yeh hone wala h की viraj ko iss collage mai उसके dushmani की ldki neelam milegi.
Ab देखना hoga की in dono के milne से क्या seen create hotha h?????
Jagdish wakai mai बहुत अच्छा insaan h yeh उसके karm से ptaa chl hi गया h.
Nidhi और viraj के beech की conversation बहुत khubsurat h bro.एक khubsurat ishq bhay bahen के beech dikh raha h
Now waiting for the next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 13 》
अब तक,,,,,,
"भाई आप् मुझे सिखा दीजियेगा कि केसे चलाते हें??" निधि नें रास्ते मे कहा।
"ठीक हैं गुड़िया। " विराज नें कहा__"चल अभि किताबें भि लेना हैं। "
"वैसे आपका काॅलेग कब सें शुरुआत होगा?" निधि नें पूॅछा।
"एक् हप्ते बाद। " विराज नें कहा।
"भाई मुझे भि आपकेसंग इसी काॅलेज मे पढ़ना हैं। " निधि नें कहा।
"अगलेसाल सें तूँ भि इसी कालेज मे आँ जानां। " विराज नें कहा।
ऐसी हि बातें करतेहुए दोनो बेहन भइया बाइक सें घऱ पहुॅच गए। विराज अपनेमन पसन्द कालेज मे पढ़ने सें बेहदखुश थां। मगर वो नहि जानता थां कि अबआगे क्याँ होने वाला थां??????
अबआगे,,,,,,,
उससमय रात केँ एक् बजरहे थें। अजय सिंह अपने कमरे मे अपनी पत्नि प्रतिमा केँ संग घमासान सेक्स करने मे ब्यस्त थां। दोनो हि मादरजात नंगे थें। इस टाइमअजय सिंह प्रतिमा कों पिछवाड़े सें ठोंके जारहा थां।
"लें मेरीजान औऱ लें। " अजय सिंह प्रतिमा कों घोड़ी बनाकर तथा एक् हाॅथ सें उसकेसिर केँ बाल पकड़े उसके पिछवाड़े मे दनादन पेलते हुए बोला__"अपने पिछवाड़े कों औऱ टाइटकर मेरी रंडी साली। "
"आहहहहह ऐसे हि आआआहहहह औऱ जोर सें अंदर तक घुसा नं भड़वे साले। " प्रतिमा मजे मे बोलती जारही थि__"आआहहह हाॅऐसे हि.हुमच हुमच केँ बजा मेरी गाॅड कों वर्ना तेरे लन्ड कों काटकर फेंक दूॅगी आआआहहहहह। "
"साली मेरा लन्ड काटकर फेंक देगी तोँ फिन किससे अपनी चूॅत औऱ गाॅड मरवाएगी बोल मादरचोद साली रंडी?"अजय सिंह नें प्रतिमा केँ गोरे गोरे लेकिन गद्देदार गाॅड पर्र जोर सें थप्पड़ मारते हुएकहा।
"आआआहहहह उसकी चिंता तूँ मतकरअजय सिंह। " प्रतिमा नें कहा__"दुनियाॅ बहोत बड़ी हैं, जिसको भि अपनी बुर औऱ गाॅड दिखाऊॅगी वोँ साला कुत्ते कि तरह अपनीलार टपकाते हुए दौड़ा चला आएगा। "
"अच्छा.मतलब तुँ सारी दुनिया सें अपनी बुर औऱ गाॅड मरवा लेगी?"अजय सिंह नें फिन सें उसके पिछवाड़े पर्र जोर सें थप्पड़ मारते हुए कहा__"औऱ किसकिस सें मरवाएगी साली?"
"आआआहहहह औऱ जोर सें पेल नं भड़वे कि औलाद सालेदम नहि हैं क्याँ?" प्रतिमा नें अपनेसिर कों उठा पीछेअजय सिंह कि तरफदेख कर कहा__"मे तौ विजय सें भि अपनी बुर औऱ गाॅड मरवाना चाहती थि औऱ इसकेलिए मैंने कितनी कोशिश कि, मगर वोँ हरामी साला हरिश्चंद्र थां न्। उसनेहर बार मुझे इज्जत मर्यादा कां पाठ पढ़ाकर दुत्कार दिया। मेरे जैसी सुंदर सेक्सी महिला कों दुत्कार दिया थां उस हिंजड़े नें। आआहहहह तभी तोँ मर गय़ा हरामी। "
"अरेसही सहीबोल कुतिया। " अजय सिंह नें प्रतिमा कि गाॅड सें अपने हथियार कों निकाल करउसे पलटाकर बैड पर्र सीधा लेटाया औऱ फिन उसकी दोनो टाॅगों कों उठाकर प्रतिमा केँ सिर केँ दोनोतरफ झुका दिया जिससे उसका पिछवाड़ा अच्छे सें उठकर पोजीशन मे आँ गय़ा। अजय सिंह नें फिन सें उसकी गाॅड मे लन्ड डालकर पेलना शुरुआत कर दिया।
"आआहहहह हाॅसही सें हि तौ बोलरही हूॅ आआआहहह। " प्रतिमा नें मजे मे आहें भरकरकहा।
"सहीसही कहाॅबोल रही हैं साली?"अजय सिंह अपने एक् हाॅथ सें प्रतिमा कि एक् चूॅची कों जोर सें मसलकर कहा__"मेरा भइया क्याँ ऐसे हि मर गय़ा थां??"
"आआआहहहह औऱ जोरजोर सें मसल न् साले भड़वे। " प्रतिमा नें अपने एक् हाॅथ कों नीचे सें बढ़ाकर अपनी चूॅत केँ दाने कों मसलते हुएमजे मे कहा__"आआआहहहह हाॅऐसे हि.क्या बात है इस मज़े केँ लिए तौ मे सबकी रंडी बनने कों रेडीहूॅ अजय। मेरी वोँ ख्वाहिश कब पूरी करोगे तुम्??"
"कर दूॅगा मेरीजान। " अजय सिंहझुक कर प्रतिमा केँ होठों पर्र एक् जोरदार चुंबन लियाफिन बोला__"मुझे याद हैं.तेरी ख्वाहिश.कि तूँ तीनतीन लन्ड सें एक् संग मज़े करना चाहती हैं.अपने सब छेंद पऱ एक् संग लन्ड डलवाना चाहती हैं। रुकजा कुछदिन करताहूॅ कुछ। मगर पहलेयह तौ बता कि केसे मेरा भइयामर गय़ा थां?"
"आआआहहहहहह मरना हि थां उस कमीने कों.आआहहह मेरीबात मान लेता तोँ आज ज़िंदा होता औऱ ऐस भि करता। मगर सत्यवादी बनेरह करमर जानां हि नियति मे लिखा लिया थां उसने.आआआहहह मगर एक् बात हैं उसका लन्ड तुमसे भि बड़ा थां.पूरा कां पूरा साॅड थां वोँ। "
"तुमने कब देखा उसके लन्ड कों?" अजय सिंह नें एक् लम्हा रुककर पूछा औऱ फिन सें धक्के लगाने लगा।
"आआआहहह एक् दिन दोपहर मे खेत पर्र गई थि अपनी गरमा गर्म बुर लेकर। " प्रतिमा नें कहा__"सोच लिया थां कि आजइस कमीने सें अपनी बुर औऱ गाॅड दोनो मरवाकर हि जाऊॅगी। उस वक़्त खेत मे कोई नहि थां। खेत केँ घर-मकान केँ एक् कमरे मे वोँ विजय कमीना दोपहर कों आराम फरमारहा थां। मे चुपके सें अंदर कमरे मे पहुॅची.आआआहहहह.देखा तौ वोँ गहरी नींद मे सोयाहुआ नज़रआया। जिस्म मे ऊपर एक् बनियान तथा नीचे लुंगी लगारखी थि उसने। मुझेलगा इससे बढ़िया सुनहरा मौका इससे चुदने कां फिन नहि मिलेगा। यह सोचकर मैंने जल्द सें अपने शरीर सें सारे कपड़े उतारकर नंगी हौ गई औऱ चुपके सें विजय कि तरफ बढ़ी जोँ पास हि चारपाई पऱ सोयाहुआ थां। "
"क्याँ हुआरुक क्यूं गई?" अजय सिंह प्रतिमा केँ एकाएक चुप होँ जाने पऱ कहा__"आगे क्याँ हुआ थां फिन??"
"तुम् रुकगए तोँ मे भि रुक गई। " प्रतिमा नें कहा__"तुम् मेरी कुटाई करते रहो.तभी तौ मजे मे बताऊगी नं। "
"ओहहाॅ। " अजय सिंह चौंका औऱ फिन सें धक्के लगाते हुए बोला__"अब बताओ। "
"आआहहहहह हाॅऐसे हि आआआहहह जोरजोर सें चोदो मुझे। " प्रतिमा नें मजे सें आंखें बंद करतेहुए कहा__"विजय चारपाई पर्र चूॅकि गहरी नींद मे सोयाहुआ थां इसलिए उसेयह पता नहि चला कि उसके कमरे मे कौन क्याँ करनेआया हैं? मे उसके हट्टे कट्टे बदन कों देखकर आहें भरनेलगी थि। चारपाई केँ पास पहुॅच कर मैंने दोनों हाॅथों सें विजय कि लुंगी कों उसके छोरों सें पकड़कर आहिस्ता सें इधर औऱ उधर किया। जिससे विजय केँ नीचे वाला हिस्सा नग्न हौ गय़ा। लुंगी केँ अंदर उसनेकुछ नहि पहनरखा थां। मैंने देखा गहरी नींद मे उसका घोंड़े जैसा लन्ड भि गहरी नींद मे सोया पड़ा थां। मगरउस हालत मे भि वो लम्बा चौड़ा नज़र आँ रहा थां। उसका लन्ड काला याँ साॅवला बिलकुल नहि थां बल्कि सफ़ेद थां बिलकुल अंग्रेजों केँ लन्ड जैसा गोरा। शपथ सें अजयउसे देखकर मेरे मुॅह मे पानी आँ गय़ा थां। मैंने बड़ी सावधानी सें उसे अपने दाहिने हाॅथ सें पकड़ा। उसकोइधर उधर सें अच्छी तरह देखा। वोँ बिलकुल किसी मासूम सें छोटे बच्चे जैसा हसीन औऱ प्यारा लगा मुझे। मैंने उसे मुट्ठी मे पकड़कर ऊपर नीचे किया तौ उसका बड़ा सां सुपाड़ा जौ हल्का सिंदूरी रंग कां थां चमकने लगा औऱ संग हि उसमें कुछ हलचल सि महसूस हुई मुझे। मैंने यह महसूस करते हि नज़रऊपर कि तरफ करके गहरी नींद मे सोये पड़े विजय कि तरफ देखा। वोँ पहले कि तरह हि गहरी नींद मे सोयाहुआ लगा। मैंने सुकून कि साॅसली औऱ फिन सें अपनी नज़रें उसके लन्ड पऱ केंद्रित कर दि। मेरे हाॅथ केँ स्पर्श सें तथा लन्ड कों मुट्ठी मे लिएऊपर नीचे करने सें लन्ड कां आकार धीरे-धीरे धीरे-धीरे बढ़ने लगा थां। यहदेख कर मुझमें अजीब सां नशा भि चढ़ता जारहा थां, मेरी साॅसें तेज़ होनेलगी थि। मैंने देखा कि कुछ हि पलों मे विजय कां लन्ड किसी घोड़े केँ लन्ड जैसा बड़ा होकर हिनहिनाने लगा थां। मुझेलगा कहींऐसा तोँ नहि कि विजयजाग रहा होँ औऱ यह देखने कि कोशिश कररहा होँ कि उसकेसंग आगे क्याँ क्याँ होता हैं? मगर मुझेयह भि पता थां कि अगर विजयजाग रहा होता तौ इतनाकुछ होने हि नं पाता क्योंकि वो उच्च विचारों तथामान मर्यादा कां पालन करने वाला इंसान थां। वोँ कभी किसी कों ग़लत नज़र सें नहि देखता थां, ऐसा सोचना भि वोँ पाप समझता थां। मेरे बारे मे वोँ जान चुका थां कि मे क्याँ चाहती हूॅ उससेइस लिए वोँ हवेली मे अबकम हि रहता थां। दिनभर खेत मे हि मजदूरों केँ संगसमय गुज़ार देता थां औऱ देररात हवेली मे आतातथा खानां पीनाखा कर अपने कमरे मे गौरी केँ संगसो जाता थां। वो मुझसे दूर हि रहता थां। इसलिए यह सोचना हि ग़लत थां कि इस टाइम वो जागरहा होगा। मैंने देखा कि उसका लन्ड मेरी मुट्ठी मे नहि आँ रहा थां तथा गर्म लोहे जैसा प्रतीत होँ रहा थां। अब तक मेरी हालतउसे देखकर खराब हौ चुकी थि। मुझेलग रहा थां कि जल्द सें उछलकर इसको अपनी बुर केँ अंदर पूरा कां पूरा घुसेड़ लूॅ। लेकिन जल्दबाजी मे साराखेल बिगड़ जाताइस लिए अपने पर्र नियंत्रण रखा औऱ उसके खूबसूरत मगर बिकराल लन्ड कों मुट्ठी मे लिए आहिस्ता आहिस्ता सहलाती रही। उसको अपनेमुह मे भरकर चूसने केँ लिए मे पागल हुई जारही थि, जिसका सबूतयह थां कि मे अपने एक् हाथ सें कभी अपनी बड़ी बड़ी चूचियों कों मसलने लगती तौ कभी अपनी चूॅत कों। मेरे अंदर वासना अपनेचरम पऱ पहुॅच चुकी थि। मुझसे बरदास्त नं हुआ औऱ मैंने एक् झटके सें नीचेझुक कर विजय केँ लन्ड कों अपनेमुह मे भर लिया.औऱ यही मुझसे ग़लती होँ गई। मैंने यहसभी अपनेआपे सें बाहर् हौ कर किया थां। विजय कां लन्ड जितना बड़ा थां उतना हि मोटा भि थां। मैंने जैसे हि उसे झटके सें अपनेमुह मे लिया तोँ मेरेऊपर केँ दाॅत तेज़ी सें लन्ड मे गड़ते चलेगए औऱ विजय केँ मुख सें चीख निकल गई संग हि वो हड़बड़ा कर तेज़ी सें चारपाई पर्र उठकरबैठ गय़ा। अपने लन्ड कों मेरेमुख मे देख वो भौचक्का सां रह गय़ा लेकिन जल्दी हि वो मेरेमुह सें अपना लन्ड निकाल करतथा चारपाई सें उतरकर दूर खड़ा हौ गय़ा। उसका चेहरा एक् दम गुस्से औऱ घ्रणा सें भर गय़ा। यहसभी इतना जल्दहुआ कि कुछदेर तोँ मुझेकुछ समझ हि नं आया कि यह क्याँ औऱ केसे होँ गय़ा। होश तौ तबआया जब विजय कि गुस्से सें भरी आवाज़ मेरे कानों सें टकराई।
"यह क्याँ बेहूदगी हैं?" विजय लुंगी कों सही करकेतथा गुस्से सें दहाड़ते हुएकह रहा थां__"अपनी हवस मे तुम् इतनी अंधी हौ चुकी हौ कि तुम्हें यह भि ख़याल नहि रहा कि तुम् किसके संगयह नीचकाम कररही हौ? अपने हि देवर जी सें मुह कालाकर रही हौ तुम्। अरे देवर जी तौ बेटे केँ समान होता हैं यह ख़याल नहि आया तुम्हें?"
मे चूॅकि रॅगे हाॅथों ऐसा करतेहुए पकड़ी गई थि उसदिन इसलिए मेरी ज़ुबान मे जैसे ताला सां लग गय़ा थां। उसदिन विजय कां गुस्से सें भरा वो खतरनाक रूप मैंने पहलीबार देखा थां। वो गुस्से मे जाने क्याँ क्याँ कहेजा रहा थां मगर मे सिर झुकाए वहीं चारपाई केँ नीचे बैठीरही उसीतरह मादरजात नंगी हालत मे। मुझे ख़याल हि नहि रह गय़ा थां कि मे नंगी हि बैठीहूॅ। जबकि,,,
"आज तुमने यहसभी करके बहोत बड़ापाप किया हैं। " विजयकहे जारहा थां__"औऱ मुझे भि पाप कां भागीदार बना दिया। क्याँ समझता थां मे तुम्हें औऱ तुम् क्याँ निकली? एक् ऐसीनीच औऱ कुलटा महिला जोँ अपनीहवस मे अंधी होकर अपने हि देवर जी सें मुह काला करनेलगी। तुम्हारी नीयत कां तौ पहले सें हि आभास हौ गय़ा थां मुझेइसी लिए तुमसे दूररहा। मगरयह नहि सोचा थां कि तुम् अपनी नीचता औऱ हवस मे इसहद तक भि गिर जाओगी। तुममें औऱ बाज़ार कि रंडियों मे कोई फर्क नहि रह गय़ा अब। चली जाओ यहाॅ सें.औऱ दुबारा मुझे अपनीयह गंदीशकल मत दिखाना वर्ना मे भूल जाऊॅगा कि तुम् मेरे बड़े भइया कि पत्नि होँ। आज सें मेरा औऱ तुम्हारा कोई नाता नहि.अब जा यहाॅ सें कुलटा स्त्री.देखो तोँ केसे बेशर्मों कि तरह नंगी बैठी हैं?"
विजय कि बातों सें हि मुझे ख़याल आया कि मे तोँ अभि नंगी हि बैठी हुई हूॅतब सें। मैंने सीघ्रता सें अपनी नग्नता कों ढॅकने केँ लिए अपने कपड़ों कि तरफ नज़रें घुमाई। पास मे हि मेरे कपड़े पड़े थें। मैंने जल्द सें अपनी साड़ी ब्लाउज पेटीकोट तथा ब्रा पैन्टी कों समेटा लेकिन फिन मेरेमन मे जाने क्याँ आया कि मे वहीं पऱ रुक गई।
विजय कि बातों नें मेरे अंदर ज़हर सां घोल दिया थां। जोँ हमेशा मुझे इज्ज़त औऱ सम्मान देता थां आजवही मुझे आप् कि स्थान तुम् औऱ तुम् केँ बाद तूँ कहतेहुए मेरी इज्ज़त कि धज्जियाॅ उड़ाए जारहा थां। मुझे बाजार कि रंडी तक कहरहा थां। मेरेदिल मे आग सि धधकने लगी थि। मुझेयह डर नहि थां कि विजययह सभी किसी सें बता देगा तौ मेरा क्याँ होगा। बल्कि अब तोँ सभीकुछ खुल हि गय़ा थां इसलिए मैंने भि अब पीछे हटने कां ख़याल छोंड़ दिया थां।
मैनेउसी हालत मे खिसककर विजय केँ पांव पकड़लिए औऱ फिन बोलि__"तुम्हारे लिए मे कुछ भि बनने कों रेडीहूॅ विजय। मुझेइस तरहअब मत दुत्कारो। मे तुम्हारी शरण मे हूॅ, मुझे अपनालो विजय। मुझे अपनी दासीबना लो, मे वही करूॅगी जोँ तुम् कहोगे। मगरइस तरह मुझेमत दुत्कारो.देख लो मैंने यहसभी तुम्हारा प्यार पाने केँ लिए किया हैं। माना कि मैंने ग़लत तरीके सें तुम्हारे प्यार कों पाने कि कोशिश कि मगर मे क्याँ करती विजय? मुझे औऱ कुछसूझ हि नहि रहा थां। पहले भि मैंने तुम्हें यहसभी जताने कि कोशिश कि थि मगर तुमने समझा हि नहि इसलिए मैंने वही किया जौ मुझेसमझ मे आया। अब तौ सभीकुछ जाहिर हि हौ गय़ा हैं, अब तोँ मुझे अपनालो विजय.मुझे तुम्हारा प्रेम चाहिए। "
"बंदकरो अपनीयह बकवास। " विजय नें अपने पैरों कों मेरे चंगुल सें एक् झटके मे छुड़ा करतथा दहाड़ते हुए कहा__"तुझ जैसी गिरी हुईँ स्त्री केँ मे मुह नहि लगना चाहता। मुझे हैरत हैं कि बड़े भाई नें तुझ जैसीनीच औऱ हवस कि अंधी महिला सें विवाह केसे कि? अवश्य तूने हि मेरे भइया कों अपनेजाल मे फसाया होगा। "
"जौ मर्ज़ी कहलो विजय। " मैंने सहसा आखों मे आॅसू लातेहुए कहा__"मगर मुझे अपने सें दूर न् करो। दिन रात तुम्हारी सेवा करूॅगी। मे तुम्हें उस गौरी सें भि अधिक प्रेम करूॅगी विजय। "
"ख़ामोशशशश। " विजयइस तरह दहाड़ा थां कि कमरे कि दीवारें तक हिल गईं__"अपनी गंदी ज़ुबान सें मेरी गौरी कां नाम भि मत लेना वर्ना हलक सें ज़ुबान घसीटकर हाॅथ मे दे दूॅगा। तूँ हैं क्याँ बदजात स्त्री.तेरी औकातआज पताचल गई हैं मुझे। तेरे जैसी रंडियाॅ कौड़ी केँ भाव मे ऐरों गैरों कों अपनाबदन बेंचती हें गली चौराहे मे। औऱ तूँ गौरी कि बात करती हैं.अरे वोँ देवी हैं देवी.जिसकी मे इबादत करताहूॅ। तूँ उसके पैरों कि धूल भि नहि हैं समझी??अब जा यहाॅ सें वर्ना धक्के मारकर इसी हालत मे तेरी यहाॅ सें बाहर् फेंक दूॅगा। "
मे समझ चुकी थि कि मेरी किसी भि बात कां विजय पऱ अबकोई प्रभाव पड़ने वाला नहि थां। उल्टा उसकी बातों नें मुझे औऱ मेरे अंतर्मन कों बुरीतरह शोलों केँ हवाले कर दिया थां। उसनेजिस तरीके सें मुझे दुत्कार कर मेरा अपमान किया थां उससे मेरे अंदर भीषणआग लग चुकी थि औऱ मैंने मन हि मन एक् फैंसला कर लिया थां उसके औऱ उसके परिवार केँ लिए।
"ठीक हैं विजय सिंह। "फिन मैंने अपने कपड़े समेटते हुए ठण्डे स्वर मे कहा थां__"मे तौ जारही हूं यहाॅ सें मगरजिस तरह सें तुमने मुझे दुत्कार कर मेरा अपमान किया हैं उसका परिणाम तुम्हारे लिएकतई अच्छा नहि होगा। परमेश्वर देखेगा कि एक् महिला जबइसतरह अपमानित होकर रुष्ट होती हैं तौ भविष्य मे उसका क्याँ परिणाम निकलता हैं??"
इतनाकह कर मे वहाॅ सें कपड़े वगैरा पहनकर चलीआई थि। फिन उसकेबाद क्याँ हुआयह तोँ तुम्हें पता हि हैं अजय।
"हाॅ मेरीजान। " अजय सिंह जोँ जानेकब सें रुकाहुआ थां अबफिन सें प्रतिमा कि गाॅड मे लन्ड डालकर धक्के लगाने लगा थां, बोला__"मेरे कहने पऱ तुमने इस सबकी कोशिश तौ बहोत कि मगर वोँ बेवकूफ कां बेवकूफ हि रहा। सोचा थां कि मिल बाॅटकर सभी खाएंगे पियेंगे मगर उसकी भाग्य मे मरना हि लिखा थां तौ मर गय़ा। "
"आआआआहहहह अबजरा मेरी चूॅत कां भि कुछ ख़याल करो। " प्रतिमा नें सहसा सिसकते हुए कहा__"इसके संग भि इंसाफ करो नं आआआहहहह। "
अजय नें प्रतिमा केँ पिछवाड़े सें लन्ड निकाल कर उसकी चूॅत मे एक् हि झटके सें पेल दिया औऱ दनादन धक्के लगाने लगा।
"आआआहहहहह अअअअजजजयययय ऐसे हि जोर सें करतेरहो। " प्रतिमा नें खुशी मे सिसकते हुए कहा__"आआहह बहोत मजा आँ रहा हैं। "
"लें मेरी रंडी औऱ लेँ। " अजय केँ धक्कों कि रफ्तार बढ़ती जारही थि__"करुणा कि चूॅत औऱ गाॅडकब दिलाओगी दोस्त। अब इंतजार नहि होता मुझसे। "
"आआआआहहह कोशिश तौ कर हि रहीहूॅ मे। " प्रतिमा नें कहा__"कल भि गई थि उसकेपास। पहले तोँ कुछ टाइम केँ लिए मुझेलगा कि वो शीशे मे उतर गई हैं मगर जल्द हि मेरी सारी कोशिशों पर्र पानी भि फिन गय़ा। "
"मुझे लगता हैं तुम्हारी सारी कोशिशें यू हि बेकार जाती रहेंगी। " अजय नें जोर कां शाॅट मारते हुए कहा__"जबकि मे अब औऱ इंतजार नहि कर सकता। शपथ सें जब भि उसे देखता हूॅ तोँ लगता हैं कि अभि उसे जबरजस्ती अपने नीचे लेटाकर उसकी चूॅत औऱ गाॅठ कि ठोंकाई शुरुआत करदूॅ। "
"आआआआहहहहह थोडा औऱ जोर सें धक्के मारो। " प्रतिमा नें कहा__"ऐसा सोचना भि मतअजय। वोँ ऐसी वैसी स्त्री नहि हैं। जबरजस्ती करने सें मुसीबत भि हौ सकती हैं। अभय कों ज़रा भि पताचला तोँ अंजाम अच्छा नहि होगा। "
"तौ फिन क्याँ करूॅ मे?" अजय नें आवेश मे कहने केँ संग हि पूरी रफ्तार सें धक्के लगाने लगा थां__"तुमसे तोँ कुछ हौ हि नहि रहा। "
"आआआआहहहहहह मेरे पपपपास एएएक प्लललान हैं अजय। " प्रतिमा धक्कों कि वजह सें बुरीतरह पड़ी पड़ीहिल रही थि__"उससे शायद तुम्हाहाहारा काम होहोहो सकता हैं। "
"अरे तौ जल्द बताओ न् डियर। "अजय सिंह अपनेचरम पर्र पहुॅचते हुए बोला__"क्याँ प्लान हैं तुम्हारे पास?"
"आआआआआहहहहह अजय औऱ जोर सें करो मे छूटने वालीहूॅ आआआहह। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि जबरदस्त झटका खाया। उसकीकमर कमान कि तरह झटके खातेहुए तनी हुई थि औऱ कुछ हि लम्हा मे वो शान्त पड़ गई।
"आआआहहह प्रतिमा मे भि आया। "अजय सिंह भि झड़ते हुए प्रतिमा केँ ऊपरपसर गय़ा।
अभि यह दोनो अपनी अपनी साॅसें बहाल हि कर रहें थें कि बेड केँ एक् तरफ टेबल पऱ रखे लैण्डलाइन मोबाइल कि घण्टी घनघना उठी। मोबाइल कि घण्टी सें दोनों हि चौंके।
"इतनीरात कों भला किसका मोबाइल हौ सकता हैं?" दोनो केँ मन मे एक् हि प्रश्न उभरा।
"उठ कर देखो न् किसका मोबाइल हैं?" अजय केँ नीचेदबी प्रतिमा नें कसमसाते हुएकहा।
अजय सिंह किसीतरह उठकर केड्रिल सें रिसीवर कों उठाकर काॅन सें लगाने केँ संग हि कहा__"ह हैलो। "
"."
"क क्याँ???" उधर सें कुछकहा गय़ा जिसेसुन करअजय बुरीतरह उछल पड़ा थां।
"."
"यह तुम् क्याँ कहरहे होँ?" अजय कां चेहरा सफेद फक्क पड़ता चला गय़ा__"औऱ औऱ केसेहुआ यहसभी?"
"."
"ओकेओके हम् आँ रहे हें। " कहने केँ संग हि अजय नें रिसीवर कों वापस केड्रिल पऱ पटका औऱ जल्दी हि उठकर बाथरूम कि तरफबढ़ गय़ा।
कुछदेर बादअजय सिंह बाथरूम सें हाॅथ मुॅह धोकर निकला औऱ आनन फानन मे अपने कपड़े पहने उसने।
"अरे क्याँ बात हैं अजय?" प्रतिमा बुरीतरह चौंकते हुएबेड पऱ उठकर बैठते हुए बोलि__"इतनी रात कों कहाॅजा रहे होँ तुम्? औऱ औऱ अभि किसका मोबाइल आया थां?"
"अभि कुछ बताने कां टाइम नहि हैं। " अजय सिंह वाहन कि चाभी अपने एक् हाॅथ मे थामते हुए बोला__"अभि मुझे यहाॅ सें जल्दी हि निकलना होगा, मेरा इंतजार मत करना। "
कहने केँ संग हि अजय सिंह कमरे सें बाहर् निकल गय़ा जबकि प्रतिमा नंगी हालत मे हि भाड़ कि तरह अपनी आॅखें औऱ मुॅह फाड़े दरवाजे कि तरफ देखती रह गई इसबात सें बेख़बर कि दो आॅखें निरंतर उसके नंगे शरीर कों देखेजा रही हें।
दोस्तो एपसोड हाज़िर हैं.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,, अपनीराय औऱ सुझाव देते रहें,,,, एपसोड जल्द हि देने कि कोशिश करूॅगा,,,
Relavant source : click here