♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड। 《 11 》
अब तक,,,,,,,
अजय सिंह बुरीतरह प्रतिमा केँ होठों कों चूसरहा थां। उसका बाॅया हाॅथ सरकते हुए सीथा प्रतिमा केँ दाॅएं बोबे पर्र आकर बड़े आकार केँ बोबे कों सख्ती सें अपनी मुट्ठी मे भरकर मसलना शुरुआत कर दिया। अपनी चूॅची कों इसतरह मसले जाने सें प्रतिमा केँ मुॅह सें एक् दर्दयुक्त लेकिन खुशी सें भरी हुईँ अहह निकल गई जौ अजय सिंह केँ होठों केँ बीच हि दबकररह गई। यह दोनों जैसेसभी कुछभूल चुके थें, यह भि कि अपने कमरे सें ड्राइंगरूम कि तरफआता हुआ उनका बेटा शिवा अपने माॅमडैड कों इस हालत मे देखकर भि वापस नहि पलटा थां बल्कि वहीं छुपकर इस नज़ारे कां मजा लेनेलगा थां। उसके होठों पऱ बेशर्मी सें भरी मुस्कान तैरने लगी थि तथासंग हि अपने दाएॅहाथ सें पैन्ट केँ ऊपर सें हि सहीमगर अपने लौड़े कों मसले भि जारहा थां।
अबआगे,,,,,,,
"तुम् दोनों नें बहोत हि बेहतर तरीके सें इसकाम कों अंजाम दिया हैं मेरे बच्चो। " ड्राइंगरूम मे सोफे पऱ बैठे जगदीश ओबराय नें मुस्कुराते हुए कहा__"अजय सिंहसोच भि नहि सकता हैं कि उसकेसंग यहखेल खेलने वाले वोँ दो फाॅरेनर कौन थें?"
"खेलऐसा हि होगा अंकल जोँ किसी कों समझ मे हि नं आए। " विराज नें प्रभावशाली स्वर मे कहा__"औऱ अजय सिंह केँ संगअब वोँ होगा जौ उसने सोचा भि नं होगा। "
"मे तौ बेवजह हि तुम्हें इसकेलिए किसी ऐक्टर याँ माॅडल कां सजेशन देरहा थां बेटे। " जगदीश नें कहा__"मुझे लगता थां कि इसकाम केँ लिए एक् ऐक्टर हि बेहतर होँ सकता हैं क्योकि उन्हें हरतरह केँ किरदार निभाने कां तरीका औऱ अनुभव होता हैं। जबकि तुमने स्वयं हि इसकाम कों करने कां ज़ोर दिया। "
"मेरे ज़ोर देने कि वजह आप् अच्छी तरह जानते हें अंकल। " विराज नें कहा__"आप् जानते हें कि यहजंग मेरी हैं औऱ इसजंग मे मुझे हि हिस्सा लेकरइसे इसके अंजाम तक पहुचाना हैं। रहीबात फाॅरेनर बनकरअजय सिंह सें खेल खेलने कि तौ इसमें फाॅरेनर केँ रोल केँ लिए किसी ऐक्टर कि ज़रूरत हि नहि थि, हाॅ फाॅरेनर लुक कि आवश्यकता अवश्य थि तोँ उसकेलिए आपने मेकअप आर्टिस्ट कों बुलवाया हि थां। उसने मुझे स्टीव जाॅनसन औऱ गुड़िया(निधि) कों एॅजिला जाॅनसन कां मेकअप करकेलुक दे दिया। उसकेबाद आपने देखा हि कि केसे हम् दोनों भइया बेहन नें अजय सिंह केँ संगयह खेल खेला। मुझे गुड़िया(निधि) कि फिक्र अवश्य थि मगर उसने भि अपना एॅजिला जाॅनसन कां रोल बेहतरीन तरीके सें अदा किया। हलाकि मे यह नहि चाहता थां कि एॅजिला जाॅनसन केँ रूप मे मेरी पत्नि कां किरदार गुड़िया निभाए क्योंकि वोँ मेरी बेहन हैं, मगर गुड़िया कि हि ज़िद थि कि यह किरदार वही निभाएगी। ख़ैर जौ हुआ अच्छे तरीके सें हौ गय़ा। "
"अजय सिंहउन दोनो फाॅरेनर कों ढूॅढ़ने कि जी तोड़ कोशिश कररहा होगा। " जगदीश नें कहा__"मगर ढूॅढ़ नहि पाएगा। ढूॅढ़ भि केसे पाएगा, जबकि स्टीव जाॅनसन औऱ एॅजिला जाॅनसन नाम केँ इन लोगों कां कहींकोई वजूद हि नहि हैं। यहबात तोँ वोँ सोच हि नहि सकता कि जिनदो फाॅरेनर सें वो मिला थां वोँ कोई औऱ नहि बल्कि उसके हि अपने हें जिनके संग उसने बुरा करने मे कोईकसर नहि छोंड़ी। "
"हर चीज़ कां हिसाब लूॅगा अंकलहर चीज़ कां। " विराज नें कहा__"यह तोँ अभि ट्रेलर हैं, अभि आगे खुलकर खेल होगा। "
"अरविन्द सक्सेना कों इसखेल मे केसे शामिल किया तुमने?" जगदीश केँ मन मे यह प्रश्न पहले सें थां__"वोँ तोँ अजय सिंह कां हि बिजनेस पार्टनर हैं न्?"
"सक्सेना कों इसखेल मे शामिल नहि किया अंकल। " विराज जाने क्याँ सोचकर मुस्कुराया थां बोला__"बल्कि उसेअजय सिंह सें अलग होँ जाने केँ लिए मजबूर किया थां मैंने। "
"क्याँ मतलब?" जगदीश नें चौंकते हुए कहा__"औऱ वो तुम्हारे द्वारा भला केसेइस सबकेलिए मजबूर हौ गय़ा??"
"किसी कि कमज़ोर नसअगर आपकेपास आँ जाए तौ आप् उससेकुछ भि करा सकते हें अंकल। " विराज नें कहा__"सक्सेना केँ संगवही मामला हुआ हैं। "
"बातकुछ समझ मे नहि आई बेटे। " जगदीश नें उलझनभरे भाव सें कहा__"ज़रा बात कों स्पष्ट करके बताओ। "
"दरअसल बातयह हैं अंकल कि अजय सिंह औऱ सक्सेना बिजनेस पार्टनर केँ अलावा भि बहोत कुछ हें। " विराज नें कहा__"आप् यूॅ समझिए कि यह दोनोहर चीज़मिल बाॅटकर खाते पीते हें। फिन वोँ चीज़ चाहे कितनी हि पर्शनल क्यूं नं होँ। अगर स्पष्ट रूप सें कहाजाए तौ यह कि उन दोनों मे उसतरह कां संबंध हैं जिसेयह समाज अनैतिक करार देता हैं। यह दोनों अपनी खुशी औऱ मजा कों पाने केँ लिए एक् दूसरे कि बीवियों केँ संग जिस्मानी संबंध बनाते हें। "
"क् क्याँ?????" जगदीश ओबराय यहबात सुनकर इसतरह उछला थां जैसे कि जिस सोफे पऱ वो बैठा थां वोँ अचानक हि गरम शोलों मे तब्दील होँ गय़ा होँ, बोला__"यह तुम् क्याँ कहरहे हौ बेटे?"
"यही सच हैं अंकल। " विराज नें ज़ोरदे कर कहा__"अब आप् समझ सकते हें कि अजय सिंहकिस हद तक कमीना इंसान हैं। "
जगदीश ओबराय मुह औऱ आखें फाड़े देखता रह गय़ा थां विराज कों। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि अजय सिंहइस हद तक गिर सकता हैं। जबकि,,,,
"मेरेपास सक्सेना कि यही कमज़ोरी थि अंकल। " विराज कहरहा थां__"मैंने बड़ी मुश्किल सें किसी केँ द्वारा सक्सेना केँ कुछऐसे फोटोग्राफ्स हाॅसिल करलिए थें जिनमें सक्सेना कि अपनी पत्नि किसीगैर केँ संग सेक्स कररही थि औऱ सक्सेना एक् दूसरे व्यक्ति द्वारा सेक्स(गाॅड मरवारहा थां) कररहा थां। इन फोटोग्राफ्स केँ आथार पऱ हि मैंने सक्सेना कों मजबूर किया कि वोँ अजय सिंह सें अलग हौ जाए वर्ना उसकेइन फोटोग्राफ्स कों सार्वजनिक कर दिया जाएगा। फिन क्याँ थां, सक्सेना कों अजय सिंह सें अलग होना पड़ा। अजय सिंह तोँ यह भि नहि जानता कि सक्सेना केँ हि द्वारा अभि औऱ क्याँ होने वाला हैं?"
"क्याँ मतलब?" जगदीश चौंका__"अभि औऱ क्याँ करवारहे होँ तुम् सक्सेना सें?"
"आपको भि पताचल जाएगा अंकल। " विराज नें मुस्कुराते हुए कहा__"बस इंतजार कीजिए थोडा। "
"कम सें कम मुझे बताने मे तोँ तुम्हें कोई हर्ज़ नहि होना चाहिए। " जगदीश नें हॅसकर कहा।
"इन बातों मे मजातभी आता हैं अंकलजब वोँ चीज़ हौ जाए जौ हम् चाहते हें। " विराज नें कहा__"औऱ वैसे भि सस्पेन्स नाम कि चीज़कुछ वक्त तक तोँ रहना हि चाहिए। "
"तुम् औऱ तुम्हारी बातें। " जगदीश नें मुस्कुरा कर कहा__"इतना जल्दसमझ मे कहाॅआती हें? ख़ैर तुम्हारे लिए एक् ख़बर हैं हमारे पास। "
"कैसी ख़बर अंकल?" विराज नें पूॅछा।
"अजय सिंह कि बड़ी बेटी रितूअब पुलिस आफिसर बन गई हैं। "
"यह तौ अच्छी बात हैं न् उनकेलिए। " विराज नें कहा__"वैसे भि बहोत जल्द उन्हें नए पुलिस वालों सें संबंध बनाना पड़ेगा जिससे उसके किसीकाम मे किसीतरह कि रुकावट न् हौ सके। "
"जौ भि हौ। " जगदीश नें कहा__"मुझे पताचला हैं कि तुम्हारे दादाजी दादीमा कां केस बहोत जल्द रितू अपने हाॅथ मे लेने वाली हैं। "
"उससेकुछ नहि होगा अंकल। " विराज केँ चेहरे पऱ गंभीरत थि__"अजय सिंह अपनी पहुॅच औऱ पावर सें इसकेस कों इसके अंजाम तक पहुॅचने हि नहि देगा। रितू दिदी अपने सीनियर केँ आदेश केँ खिलाफ कुछ नहि कर सकती। "
"देखते हें क्याँ होता हैं?" जगदीश नें कहा__"ख़ैर छोंड़ो यह सभी.अभि आफिसजा रहे होँ क्याँ?"
"हाॅकुछ ज़रूरी काम भि हैं। " विराज कुछ सोचते हुए बोला।
जगदीश नें बड़ेगौर सें विराज केँ चेहरे कि तरफ देखा, जिसमें कभीकभी पीड़ा केँ भावआते औऱ लुप्त होते नज़र आँ रहे थें। विराज नें जगदीश कों जबइसतरह अपनीतरफ देखते पाया तोँ कह उठा__"ऐसे क्यूं देखरहे हें अंकल?"
"देख रहाहूॅ कि कितनी सफाई सें तुम् अपनेउस दर्द कों छुपा लेते होँ जोँ तुम्हारे दिल मे हैं। " जगदीश नें कहा__"वोँ दर्द पारिवार सें संबंधित नहि हैं वोँ तौ किसी सें बेपनाह इश्क करने वाला हैं। "
"ऐसाकुछ नहि हैं अंकल। " विराज नें नजरें चुराकर कहा औऱ एक् झटके सें सोफे सें उठकर खड़ा होँ गय़ा।
"आखेंसभी बयांकर देती हें बेटे। " जगदीश नें कहा__"हमने बहोत दुनियाॅ देखी हैं, इतना तौ हम् महसूस कर सकते हें कि सामने वाले केँ दिल मे क्याँ हैं? औऱ वैसे भि इश्क एक् ऐसी चीज़ होती हैं जोँ हरहाल मे अपने होने कां सबूत देती हैं। "
"पता नहि आप् क्याँ कहरहे हें अंकल?" विराज नें कहा__"चलता हूॅ मे। "
विराज वहाॅ सें बाहर् निकल गय़ा, जबकि जगदीश वहीं बैठारहा आॅखों मे आॅसुओं केँ कतरेलिए।
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"आइये दिदी। " करुणा नें दरवाज़े सें हटकर प्रतिमा कों अंदर कि तरफआने कां मार्ग देतेहुए कहा__"मे कल आपका इंतजार कररही थि मगर आप् आई हि नहि। "
"हाॅ वोँ कमर मे दर्द थां तोँ नहि आँ पाई। " प्रतिमा नें कहा औऱ अंदर कि तरफ आँ कर ड्राइंगरूम मे रखे सोफे पर्र बैठ गई, फिन करुणा कि तरफदेख कर कहा__"अगर कोई ज़रूरी काम थां तोँ तुम् हि आँ जाती मेरेपास। अब इतनादूर भि तौ नहि हैं कि तुम् आँ नं सको। "
(आप् सभी दोस्तों कों तोँ पता हि होगा कि इन लोगों कां घऱ कैसा हैं? यहघऱ नहि बल्कि हवेली थि जौ विराज केँ पिता विजय सिंह नें बनवाई थि। आपने पढ़ा होगा कि हवेली तीनो भाइयों केँ हिस्से कों ध्यान मे रखकर बनवाई गई थि। जैसेतीन दो मंजिला विशाल घऱ कों आपस मे जोड़ दिया गय़ा हौ। )
"आप् तौ जानती हें दिदी कि इन्हें(अभय सिंह बघेल) मेरे कहींआने जाने सें तक़लीफ होती हैं। " करुणा नें कहा__"औऱ वैसे भि घऱ कां इतना साराकाम हौ जाता हैं कि उसी मे सारा वक्त निकल जाता हैं। "
"मैंने तोँ अभय सें जाने कितनी बारकहा हैं कि घऱ केँ काम केँ लिए एक् दो नौकरानी रखवादो। " प्रतिमा नें कहा__"मगर नं वोँ मेरी सुनते हें औऱ न् हि अपने बड़े भइयाअजय कि सुनते हें। आख़िर हम् कोई ग़ैर नहि अपने हि तौ हें। भला क्याँ ज़रूरत हैं अभय कों विद्यालय मे पढ़ाने कि? माना कि सरकारी जॉब हैं मगरइस जॉब मिलता क्याँ हैं? अपना परिवार भि ढंग सें नहि चला सकतेइस जॉब केँ रुपये पैसे सें। अजय नें कितनी बारकहा हैं कि अभय बिजनेस मे उनका हाॅथ बॅटाए जिससे रुपये पैसे कि कोईकमी न् आए। मगर,,,,,
"जाने दीजिए दिदी। " करुणा नें बेचैनी सें पहलू बदला__"आप् तोँ जानती हें कि वोँ इसजॉब औऱ इसजॉब सें मिलने वाली तनख्वाह सें खुश हें। मैंने भि तोँ उन्हें बहोत समझाया हैं मगर वोँ हमेशा कि तरह मेरीबात पऱ मुझे नसीहतें देने लगते हें कि 'मे एक् शिक्षक हूॅ, गुरू हूॅ.विद्यालय मे बच्चों कों अच्छी शिक्षा देकर उनका उज्वल भविश्य बनाना मेरा फर्ज़ हैं। विद्यालय केँ बच्चे हमारे देश कां भविश्य हें। औऱ भि न् जाने क्याँ क्याँ भाषण देने लगते हें। "
"हाॅ जानती हूॅ मुझे भि कभीकभी जब मे उससेबात करूॅगी तोँ इसीतरह भाषण देने लगते हें। " प्रतिमा नें कहा__"दिव्या तौ अभि अभय केँ संग हि विद्यालय मे होगी नं?"
"जी वोँ तोँ साम कों उनकेसंग हि आएगी। " करुणा नें कहा__"औऱ सुनाइए क्याँ होँ गय़ा थां आपकीकमर कों??"
"मत पूॅछो करुणा। " प्रतिमा नें अर्थपूर्ण ढंग सें मुस्कुराते हुए कहा__"कल तौ सारा शरीरटूट रहा थां मगर.हाय राममजा भि बहोत आया थां। "
"मतलब भइया साहब नें कल आपकी हालत बिगाड़ दि। " करुणा मुस्कुराई।
"औऱ नहि तोँ क्याँ। " प्रतिमा नें कहा__"पूरे चार राउण्ड मे बुरीतरह रगड़े हें मुझे। "
"अच्छा तौ हैं न्। " करुणा नें एकाएक कुछ दुःखी भाव सें कहा__"आपको शान्ति तोँ मिल जाती हैं। "
"अभय सें उसके इलाज केँ संबंध मे बात किया कि नहि तुमने?" प्रतिमा नें पूॅछा।
"वोँ नहि मानते हें दिदी। " करुणा नें अजीबभाव सें कहा__"कहते हें कि अब ज़रूरत हि क्याँ हैं? दो बच्चे तौ हौ हि गए हें हमारे। अब इलाज़ कि कोई ज़रूरत नहि हैं। "
दोस्तो बात दरअसल यह हैं कि दोसाल पहलेअभय सिंह अपनी मोटर साइकिल (बुलेट जौ विराज केँ पिता नें खरीदकर दि थि) सें विद्यालय जारहा थां, पता नहि उसका ध्यान कहाॅ थां, उसेपता हि नहि चला औऱ मोटर साइकिल मार्ग सें नीचेउतर गई। अभय सिंहकुछ कर नं सका क्योंकि तब तक देर होँ चुकी थि। भारी भरकम बुलेट केँ संग लुढ़कते हुएअभय सिंह नीचे पहुॅच गय़ा। ज़मीन सें बहुत ऊॅची मार्ग थि। इस छोटे सें एक्सीडेन्ट मे अभय सिंह कों बहुत चोंटें लगीतथा दाहिना हाॅथ भि टूट गय़ा। ख़ैरयह सभी तौ इलाज़ मे ठीक होँ जानां थां लेकिन दोदिन बादजब अभय सिंह अपनी पत्नि करुणा केँ संग संभोग करना चाहा तौ उसका लिंग हि नं खड़ाहुआ। करुणा नें कईतरह सें लिंग कों खड़ा करने कि कोशिश कि लेकिन कोई फायदा नं हुआ। तब यहबात सामने आई कि एक्सीडेन्ट मे अभय सिंह केँ प्राइवेट पार्ट मे भि अंदरूनी चोंटलगी थि, अभय सिंह चूॅकि बेहोश हौ गय़ा थां इसलिए उसेपता हि नहि चला। ख़ैरअब समस्या होँ गई कि अभय सिंह कां लिंग हि नहि खड़ा होँ रहा, इस बात सें अभय सिंह सें ज़्यादा करुणा परेशान हौ गई। करुणा नें इसकेलिए अभय सिंह कों इलाज़ करवाने कां कहामगर लाज औऱ शरम केँ कारणअभय सिंह इसकेलिए रेडी हि न् हुआ। करुणा नें उसे बहोत समझाया, यह तक कहा कि वोँ सेक्स केँ बिना केसेरह पाएगी? इस पऱ अभय सिंह नाराज़ भि हुआ, औऱ कहा कि दो बच्चे हौ गए हें। रहीबात सेक्स कि तोँ स्वयं पऱ काबू रखना सीखो, जिंदगी मे सेक्स हि सभीकुछ नहि होता। अभय सिंह वैसे भि गुस्सैल स्वभाव कां थां इसलिए करुणा बेचारी मनमार रह गई। यहबात अभय केँ अलावा मात्र करुणा हि जानती थि, बाॅकी किसी कों कुछपता नहि थां। फिनऐसे हि करीब एक् सालबाद बेध्यानी मे यह राज़ कि बात करुणा केँ मुख सें प्रतिमा केँ सामने निकल गई। बाद मे करुणा नें विनती करतेहुए प्रतिमा सें कहा भि कि यहबात वोँ किसी सें न् बताएं। औरतज़ात केँ पेट मे कहाॅदेर तक कोईबात रह पाती हैं, नतीजतन उसनेउसी दिनअजय सिंह सें यहसभी बता दिया। अजय सिंहयह जानकर हैरान हुआ कि उसका छोटा भइयाअभय सिंहअब अपनी पत्नि केँ संग संभोग करने केँ काबिल नहि रहा। लेकिन अगले हि लम्हा उसे खुशी भि हुईँ इसबात सें। वोँ जानता थां कि करुणा अभि भरपूर जवानी मे हैं औऱ वोँ सेक्स केँ बिनारह नहि पाएगी। हलाॅकि यह उसकीसोच हि थि, औऱ इसीसोच केँ आधार पर्र वो जाने क्याँ क्याँ सपनेसजा बैठा। उसने प्रतिमा सें इस बारे मे बात कि कि वो करुणा कों उसकेसंग संभोग केँ लिए सजधजकर करे। प्रतिमा अपने पति कों अच्छी तरह जानती थि कि अजय सिंह महिला कि बुर कां कितना दिवाना हैं, अगर नहि होता तौ अपनी हि बेटी पऱ नीयत ख़राब नहि करता। ख़ैर प्रतिमा तोँ स्वयं हि चाहती थि कि अभयव करुणा उनकेसंग हरकाम मे शामिल हौ जाएं। इस लिए उसने दूसरे दिन सें हि करुणा सें नज़दीकियाॅ बढ़ाना चालूकर दिया। करुणा किसी भि मामले मे प्रतिमा सें कम नं थि। बल्कि ऊपर हि थि, प्रतिमा केँ मुकाबले वो अभि जवान हि थि। लेकिन स्वभाव सें सरलव बहोत कम बोलने वाली महिला थि। अभय सिंह सें उसने प्यार शादी किया थां। अभय केँ अलावा किसी दूसरे मर्द केँ बारे मे वो सोचना भि गुनाह मानती थि।
प्रतिमा पढ़ी लिखीतथा खेलीखाई स्त्री थि, किसी कों केसे फॅसाना हैं यहउसे अच्छी तरहआता थां। काम मुश्किल तोँ थां मगर असंभव नहि। मगर प्रतिमा कि सारी कोशिशें बेकार गईं अर्थात् वो करुणा कों इस सबके केँ लिए रेडी नं सकी। दरअसल वो खुलकर यह तोँ कह नहि सकती थि कि 'आओ औऱ मेरे पति सें संभोग करलो। 'इस लिए उसने उससे सेक्स सें संबंधित अपनी लाइफ केँ बारे मे बताबता कर हि करुणा केँ मन मे सेक्स कि फीलिंग्स भरने कां प्रयास करतीरही। वो अजय केँ संग अपनी सेक्स लाइफ केँ बारे मे खुलकर उससेबात करती थि। शुरुआत शुरुआत मे तोँ करुणा ऐसी बातें सुनती हि नहि थि कदाचित उसे प्रतिमा केँ मुख सें ऐसी अश्लीलतापूर्ण बातों सें बेहदशरम आती थि। इसलिए हरबार वो प्रतिमा केँ सामने हाॅथ जोड़कर उससेऐसी बातें नं करने कों कहने लगती थि, मगर प्रतिमा भला कहाॅ मानने वाली थि? वो तौ उसकेपास आती हि एक् मकसद केँ संग थि। ख़ैर धीरे-धीरे धीरे-धीरे करुणा कों भि इनसभी बातों कों सुनने कि आदत होँ गई।
"यह तोँ कोईबात नं हुईँ करुणा। " प्रतिमा कहरही थि__"आखिर कब तक ऐसा चलेगा? अभय कों तुम्हारे बारे मे कुछ तौ सोचना चाहिए। उसे सोचना चाहिए कि अभि तुम्हारी उमर हि क्याँ हुई हैं? अभि तोँ तुम् जवान होँ, औऱ शादीशुदा जवान स्त्री बिना सेक्स केँ केसे रहेगी?"
"जाने दीजिए दिदी। " करुणा नें एक् गहरी साॅस ली__"अब तौ आदत होँ गई हैं। अबइन बातों कि तरफ ध्यान हि नहि जाता मेरा। घऱ केँ काम औऱ बच्चों मे हि सभी वक़्त निकल जाता हैं। "
"औऱ जबरात होती हैं तथाअभय केँ संग एक् हि पलंग पऱ लेटती हौ तब क्याँ इसतरफ ध्यान नहि जाता होगा?" प्रतिमा नें कहा__"जरूर जाता होगा छोटी, औऱ यहसोच करदुख भि होता होगा कि कुछ हौ हि नहि सकता। "
"ऐसा नहि हैं दिदी। " करुणा नें भावहीन स्वर मे कहा__"मे तोँ इनके(अभय) संग सोती हि नहि। बल्कि मे तोँ हमेशा अपने बेटे शगुन केँ संग हि सोतीहूॅ। आप् तौ जानती हें वोँ मन सें डिस्टर्ब हैं, रात मे उसे देख्ना पड़ता हैं वर्ना जागने केँ बाद वो कब किधरचला जाएपता हि नहि चलता। "
"फिन भि करुणा। " प्रतिमा नें कहा__"मन कों कितना भि बहलालो मगर जौ तक़लीफ औऱ दुख कां कारण हैं उसका ख्याल तोँ आँ हि जाता हैं। जवान महिला कों अपनी सेक्स कि गर्मी कों बर्दास्त कर पाना ज़रा मुश्किल होता हैं। "
"किया भि क्याँ जा सकता हैं? करुणा नें सिर झुकाते हुए कहा__"इन्होंने तौ जैसेशपथ खाली हैं कि इलाज़ नहि करवाएंगे। क्याँ उनकी ख़्वाहिश नहि होती होगी इसकी?मगर जैसे उन्होंने स्वयं कि इच्छाओं कों दबा लिया हैं वैसे हि मैने भि दबा लिया हैं। "
"अरे केसेरह लेती हौ तुम्?" प्रतिमा नें कहने केँ संग हि साड़ी केँ ऊपर सें करुणा कि नज़र मे अपनी बुर कों मसला__"मुझसे तौ एक् दिन भि बगैर लन्ड केँ नहि रहा जाता। हर रात रगड़ रगड़कर चुदवाना पड़ता हैं शिवा केँ डैड सें। मौका मिलता हैं तोँ दिन मे भि चुदवा लेतीहूॅ। शपथ सें करुणा शिवा केँ डैड कां लन्ड घोड़े जैसा हैं औऱ जब तक उस घोड़े जैसे लन्ड सें अपनेआगे पीछे पेलवा नहि लेती नं तब तक सुकून नहि आता। "
"आपके मज़े हें फिन तौ। " करुणा नें हॅसते हुए कहा__"आपका किस्मत अच्छा हैं दिदी, जोँ आपको इतनाकुछ मिलरहा हैं। "
"क़िस्मत बनाना पड़ता हैं छोटी। " प्रतिमा नें कहा__"तुमने अपना किस्मत स्वयं हि बिगाड़ रखा हैं तौ कोई क्याँ कर सकता हैं?"
"मैंने केसे अपना क़िस्मत बिगाड़ लियाभला?" करुणा केँ माॅथे पऱ अनायास हि बल पड़ता चला गय़ा__"आप् तोँ जानती हें कि.यह,
"एक् हि बात हैं। " प्रतिमा नें करुणा कि बात कों काटकर कहा__"वर्ना चारदिन कि ज़िन्दगी मे हर चीज़ कां मजा लियाजा सकता हैं। "
"मतलब???" करुणा नें नासमझने वालेभाव सें पूॅछा।
"अबअगर मे कुछ कहूॅगी तौ तुम्हें लगेगा कि यह मे क्याँ ऊल जलूलबक रहीहूॅ?" प्रतिमा नें अजीबभाव सें कहा थां।
"मे ऐसा क्यूं कहूॅगी दिदी?" करुणा नें हॅसकर कहा।
"तुम् भि जानती होगी कि बड़े बड़े शहरों मे केसेलोग हर लम्हा कां खुशी लेते हें?" प्रतिमा नें धड़कते दिल केँ संग कहा__"वहाॅ शहरों मे कोई महिला तुम्हारी तरहइस तरह नहि बैठी नहि रह जाती हें बल्कि ऐसे हालात मे भि अपने शरीर कि भूॅख कों मिटाने केँ लिए मार्ग खोज लेती हें। "
"क्याँ मतलब??" करुणा नें हैरानी सें पूॅछा थां__"किस तरह कां मार्ग दिदी??"
"अधिक भोली नं बनो तुम्। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि अजीब सां मुॅह बनाया फिन मुस्कुरा कर बोलीं__"तुम् भि अच्छी तरह जानती हौ कि मेरे कहने कां क्याँ मतलब थां?"
"शपथ सें दिदी मेरीकुछ समझ मे नहि आया कि आप् क्याँ कहरही हें?" करुणा नें कहा।
"जैसे लड़के लड़कियाॅ गर्लफ्रैण्ड ब्वायफ्रैण्ड बनाकर विवाह केँ पहले हि सभीकुछ कर लेते हें नं। " प्रतिमा नें कहा__"उसी तरह शादीशुदा महिला मर्द भि करते हें। फर्कयह हैं कि कोई खुशी खुशी करता हैं औऱ कोईयही सभी मजबूरी मे करता हैं। "
"ओह! तौ आप् यह कहना चाहती हें कि जैसेशहर केँ स्त्री मर्द विवाह केँ बाद भि किसी कों गर्लफ्रैण्ड व ब्वायफैण्ड बनाकर सभीकुछ करते हें। " करुणा कहरहक थि__"वैसे हि उनकीतरह मुझे भि करना चाहिए?"
"तौ इसमें ग़लत क्याँ हैं?" प्रतिमा नें कह दियायह अलगबात हैं कि इसकेसंग हि उसकेदिल कि धड़कन भयवशबढ़ गई थि।
"क्याँ???" करुणा नें बुरीतरह उछलते हुए कहा__"मतलब आप् इस चीज़ कों ग़लत नहि मानती हें??"
"बिलकुल। " प्रतिमा नें स्पष्ट लहजे मे कहा__"हर इंसान कि अपनी ज़रूरतें औऱ चाहतें हें, औऱ ज़रूरतों तथा अपनी चाहतों कों पूरा करना ग़लत नहि होँ सकता। "
"मतलब आप् अगर मेरी स्थान होतीं तोँ वोँ सभी अवश्य करतीं?" करुणा नें चकितभाव सें कहा__"जौ आज केँ वक्त मे शहर वाले करते हें?"
"बेशक। " प्रतिमा नें कहा__"जैसा कि मैने पहले हि बताया कि अपनी ज़रूरतों औऱ चाहतों कों पूरा करनाकोई ग़लत नहि हैं। जैसे मर्द अपनी खुशी केँ लिए हम् पत्नियों केँ रहतेहुए भि बाहरी स्त्री सें जिस्मानी संबंध बना लेते हें वैसे हि हम् औरते किसीगैर मर्द सें संबंध क्यूं नहि बना सकतीं? आख़िर इन सबकेलिए हम् औरतों पर्र हि पाबंदी क्यूं? क्याँ हमारी इच्छाओं तथा ख्वाहिशों कां कोईमोल नहि?"
करुणा चकित थि प्रतिमा कि बातें सुनकर। उसका मुॅह भाड़ कि तरह खुलारह गय़ा थां।
"इतना हैरान न् होँ छोटी। " प्रतिमा कहरही थि__"आज केँ वक्त कि यही सच्चाई हैं औऱ यही माॅग भि हैं। यहसभी बातें ऐसी नहि हें जिनके बारे मे तुम्हें पता नहि होगा। "
"हाॅ सुना तोँ मैंने भि हैं दिदी। " करुणा नें कहा__"मगर यह भि जानती हूॅ कि हर इंसान कि अपनी अपनीसोच होती हैं, जिसे जौ अच्छा लगता हैं वोँ वही करता हैं। "
"अपनी इच्छाओं कां गला घोंटकर जीनाकोई बुद्धिमानी नहि हैं। " प्रतिमा नें एक् लम्बी साॅस खींचते हुए कहा__"मर्द अगर हमारी ज़रूरत पूरी नहि कर सकता तौ यह उसकी ग़लती हैं। किसी चीज़ कि कुर्बानी देना अच्छी बात हैं मगरइस तरह नहि.अगर इलाज़ संभव हैं तोँ उसका इलाज़ करवाना हि चाहिए। "
करुणा भला क्याँ कहती? उसका दिमाग़ तौ जैसेजाम होँ गय़ा थां। प्रतिमा बड़े ग़ौर सें करुणा कों देखने लगी थि। उसनेमन हि मन सोचा कि ऐसा क्याँ करूॅ कि यह शीशे मे उतरजाए? कुछ वक़्त तक जबकोई कुछ नं बोला तोँ सहसा करुणा चौंकी, जानेकिन खयालों मे खो गई थि वो?
"आप् बैठिए दिदी। " करुणा नें सहसा उठतेहुए कहा__"मे आपकेलिए गरमचाय बनाकर लातीहूॅ। "
"अरे रहनेदो छोटी। " प्रतिमा नें कहा__"मे गरमचाय पीकरआई थि। "
"तौ क्याँ हुआ दिदी। " करुणा नें हॅसकर कहा__"मेरे हाॅथ कि भि पी लीजिए गरमचाय। "
"अच्छा ठीक हैं मगर एक् शर्त पर्र। " प्रतिमा नें मुस्कुराकर कहा।
"शर्त???" करुणा चकराई__"कैसी शर्त दिदी?"
"यही कि गरमचाय स्पेशल दूध कि होनी चाहिए। " प्रतिमा नें कहा।
"दूध तोँ अच्छा हि हैं दिदी। " करुणा नें हॅसकर कहा__"यह(अभय) सुभहसाम भैंस कां ताज़ा दूध हि लेकरआते हें, उसमें पानी नहि डालते। "
"ओफ्फो। " प्रतिमा नें बुरा सां मुहबना कर कहा__"भैंस कां दूध स्पेशल कहाॅहुआ?"
"हाॅ तौ मेरेपास भैंस कां हि दूध हैं। " करुणा नें कहा__"आप् कहें तौ दुकान सें कोई दूसरा दूध मॅगवा दूॅगरम चाय केँ लिए। "
"अरे जबघऱ मे हि स्पेशल दूध हैं तौ दुकान सें मॅगवाने कि क्याँ ज़रूरत हैं?" प्रतिमा नें द्विअर्थी भाव सें कहा।
"घऱ मे तौ भैंस कां हि हैं। " करुणा नें भोलेपन सें कहा__"आपको बताया तौ थां अभि। "
"अरे मे तुम्हारे दूध कि बातकर रहीहूॅ छोटी। " प्रतिमा हॅसी__"तुम्हारे अपनेदूध कि। "
"मेरे अपनेदू.?" करुणा कों जबसमझ आया तौ बुरीतरह झेंप गई वो। लाज औऱ शरम कि लाली चेहरे पर्र फैलती चली गई। फिन स्वयं कों सम्हाल कर बोलीं__"क्याँ दिदी आप् भि। "
"अरेठीक हि तोँ कहरही हूॅ मे। " प्रतिमा नें हॅसते हुए कहा__"तुम्हारे अपनेदूध सें स्पेशल कोई औऱ दूधभला कहाॅ होगा?"
"इस तरह तौ आपका भि दू.ध। " करुणा नें मुस्कुरा कर कहा__"स्पेशल हुआ न्?"
"अरे मेरादूध अब स्पेशल कहाॅरहा मेरी प्यारी बेहन। " प्रतिमा नें अहह सि भरी।
"क्यूं क्याँ हुआ आपकेदू.ध कों?" दूध शब्द पर्र करुणा कि ज़ुबान लड़खड़ा जाती थि कदाचित यहसोच कर कि यहदूध वालीबात स्वयं केँ हि दूध कि थि।
"क्याँ बताऊॅ छोटी?" प्रतिमा नें कहा__"मेरे दूध कि तोँ हालत हि ख़राब रहती हैं। "
"ऐसा क्यूं दिदी?" करुणा चकरा गई।
"क्योंकि रातभर शिवा केँ डैड मेरेदूध कों बुरीतरह मसलते जौ हें। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि अपने दोनों हाॅथों सें अपने बड़े बड़े खरबूजों कों पहले ज़ोर सें मुट्ठियों मे मसलाफिन हल्के हल्के सहलाने लगी। यह देखकर करुणा बुरीतरह शरमा गई।
"देख नं करुणा। " प्रतिमा नें अपने खरबूजों कों दोनों हाॅथों सें तौलते हुए कहा__"केसे मसलमसल कर इतने बड़े बड़ेकर दिये हें वोँ। "
"आपकेमन मे तौ जब देखोतब यहीसभी बातें होती हें। " कहने केँ संग हि करुणा किचेन कि तरफबढ़ गई। उसके पीछे पीछे प्रतिमा भि चल दि।
"तुम्हारे भि दूध खरबूजे जैसे हि हें करुणा। " प्रतिमा नें किचेन मे पहुॅच करतथा करुणा केँ सीने कि तरफगौर सें देखते हुए कहा__"बस मसलेकम गए हें यह। जानेकब सें अभय नें इन्हें देखा तक न् होगा, हैं नं छोटी??"
"अब बस भि कीजिए दिदी। " करुणा लाजवशरम सें गड़ीजा रही थि।
"ओये होये। " प्रतिमा नें उसे पीछे सें पकड़कर अपनी बाहों मे लेँ लियातथा पीछे सें हि अपने गालों कों करुणा केँ गालों सें रगड़ते हुए कहा__"देखो तोँ केसेनई नवेली दुल्हन कि तरह शरमारही हैं। सच कहतीहूॅ छोटी तुम्हें देखकर कोई नहि कह सकता कि तुम् दो बच्चों कि माॅ हौ। "
"अच्छा तौ फिनचार बच्चों कि माॅ कहेंगे। " करुणा नें शरारत सें कहा।
"चार क्यूं?" प्रतिमा नें कहने केँ संग हि करुणा केँ पेट मे चिहुॅटी काटी__"बल्कि दस कहेंगे। अबठीक हैं नं?"
"आआआआहहह दिदी। " चिहुॅटी काटने सें करुणा एक् दम सें चीखते हुएउछल पड़ी थि बोलीं__"प्लीज दिदी चिहुॅटी मत काटिये नं। "
"अच्छा तोँ फिन क्याँ काटूॅ?" प्रतिमा नें कहने केँ संग हि अपने दाहिने हाॅथ कि अॅगुली कों करुणा केँ सपाट नंगेपेट मे हौले हौलेतथा गोलगोल घुमाना शुरुआत कर दिया।
"उउउउफफफफफ दिदी। " करुणा नें कसमसाते हुए कहा__"यह क्याँ कररही हें आप्?"
"तुम् गरमचाय बनाने पर्र ध्यान दो छोटी। " प्रतिमा नें उसी हालत मे कहा__"मे तौ अपनी प्यारी बेहन कों लाडकर रहीहूॅ। "
"यहलाड नहि हैं दिदी। " करुणा नें बड़ी हि चतुराई सें स्वयं कों प्रतिमा केँ बाहुपाश सें आज़ाद करतेहुए कहा__"यह तौ कुछ औऱ हि लगता हैं। औऱ अब आप् मुझे तसल्ली सें गरमचाय बनाने दीजिए, कोई छेड़खानी नहि करेंगी आप्। "
"ठीक हैं। " प्रतिमा नें मन हि मन हज़ारों गालियाॅ दि उसे लेकिन प्रत्यक्ष मे कहा__"तुम्हें तौ मेरा यानी अपनी बड़ी बेहन कां प्रेम भि कुछ औऱ लगता हैं। "
"ऐसा नहि हैं दिदी। " आप् तौ बेवजह हि नाराज़ हौ रहीं हें। "
"रहनेदो। " प्रतिमा नें छोटे बच्चे कि तरह तुनककर कहा__"सभी जानती हूॅ मे। "
तब तक गरमचाय बन चुकी थि। करुणा नें गरमचाय कों दोकप मे डालातथा एक् कप करुणा कों थमाया औऱ एक् कप स्वयं लेकरउसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे पीनेलगी। जबकि प्रतिमा केँ मन मे यहीचल रहा थां कि 'आजफिन एक् बार मेरी कोशिश बेकार रही। '
दोस्तों भाग हाज़िर हैं,,,,,,
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा.
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Behad hi shandaar aur jabardast update bhay.
bhut khoob superb.
too yeh दो foreigner Viraj aur gudiya hi bane the.
Oberay uncle too chakit rha Gye sari sachhai jankar joo Ajay aur Saksena के bich mai thaa.
aur क्या हुआ hain Viraj के saath joo mmunh chura Raha hain oberay uncle के sawal से ??
aur एक dum sali Kamini hain moorti ??
halanki aapne scene skip krr दिया n??
aur अब,
Aage kaa intjar
vah kya mast sur erotic update diya he.majaa aagya padkar moorti karuna ko apne shauhar say chudwana chahti he halanki kahin karuna in sab k chalte apne mand budhi bete say hi na chud jaye garam hokar. Waiting 4 next update
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Superbb.Mind blowing update bro
too foreigner khud viraj और nidhi hi the.waah dono bahen bhay ne milkar hi ajay singh के sath game khela,
Viraj khisse pyaar krta h???? yeh एक janne wali बात h.
moorti की apne shauhar के liye karuna ko tayyar karne की एक faar phir से kosis bekar gai.yeh अच्छा hi हुआ vaise karuna के nature से yahi lagta h की woh moorti के jhaase mai aane wali नहीं h,
Writing skill speechless bro.now waiting for next
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Aage kya hua? Next part padhiye
Nice update bro Viraj ab collage bi jayega aur sayed ajay kee beti bi edar hi ayegi, dekhtey hey kya hotha hey agey, aur Viraj kya kya krta hey Keep it up and as always waiting for
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