♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
"मे उस हरामजादे कों छोंड़ूॅगा नहि सक्सेना। " अजय सिंह नें एकाएक गुस्से मे बोला__"उसको ढूॅढ़ करउसे ऐसीमौत दूॅगा कि उसकीरूह फिन दुबारा ऐसे किसीबदन कों धारण नहि करेगी। मुझे अपने नुकसान कां कोईग़म नहि हैं सक्सेना, यह करोड़ों कां नुकसान मेरेलिए कोई मायने नहि रखता। मगर मेरी इज्ज़त कों शहरभर मे यूॅ दाग़दार करके उसनेयह अच्छा नहि किया। उसे इसकी कीमत अपनीजान देकर चुकानी पड़ेगी। "
"उसकेसंग ऐसा होना भि चाहिए अजय सिंह। " सक्सेना नें एक् सिगरेट सुलगाई औऱ फिन एक् गहराकस लेकर उसका धुआॅऊपर कि तरफ उछालने केँ बाद कहा__"वैसे क्याँ लगता हैं तुम्हें, यह किसका काम हौ सकता हैं?"
"यह तौ पक्की बात हैं सक्सेना कि वोँ दोनों विदेशी नहि थें। " अजय सिंह बोला__"बल्कि वोँ दोनों हमारे हि देश केँ औऱ हमारे हि शहर केँ कोई पहचान वाले हि थें। "
"यहबात तुम् इतने विश्वास औऱ दावे केँ संग केसेकह सकते हौ अजय सिंह?" सक्सेना हल्के सें चौंका थां फिन बोला__"जबकि तुम्हारे पासइस बात कां कोई छोटा सां सबूत तक नहि हैं। "
"ग़लती मेरी भि हैं सक्सेना। " अजय सिंह नें कहा__"एक् महीने पहलेजब उनसे हमेंयह टेंडर मिला थां तब हमेंयह अंदाज़ा नहि थां, बल्कि हम् सोच भि नहि सकते थें कि हम् इन लोगों द्वारा किसी साजिश कां शिकार होनेजा रहे हें। हम् तौ खुश थें कि हमारे कपड़ों कि खासियत सें प्रभावित होकरकोई विदेशी हमसेडील कररहा हैं औऱ इतनी ज़्यादा मात्रा मे हमसे कपड़े कि माॅगकर रहा हैं। उस टाइम दिलो दिमाग़ मे यही थां कि अब हमारा संबंध विदेशी लोगों सें हौ रहा हैं जिससे निकट भविश्य मे हमारे कारोबार कों औऱ भि फायदा होगा। किसी साजिश कां हम् सोच हि नहि सके थें क्योकि उन लोगों कां सभीकुछ परफेक्ट थां। औऱ वैसे भि हमें इससे क्याँ लेना देना थां कि वोँ कितनी बड़ी कंपनी केँ मालिक थें, हमें तोँ उनकीडील सें मतलब थां जिसके लिएहमे करोड़ों कां मुनाफ़ा होने वाला थां। "
"वोँ सभी तौ ठीक हैं अजय। " सक्सेना बीच मे हि अजय कि बातकाट करकह उठा__"मगर तुम् कहरहे होँ कि वोँ विदेशी नहि थें यहबात तुम् दावे केँ संग केसेकह सकते होँ?"
"मे बताते हुए वहीं आँ रहा थां सक्सेना। " अजय सिंह बोला__"ख़ैर अब जबकि यहसभी होँ गय़ा उससेयही समझआता हैं कि यहकाम किसी फाॅरेनर कां नहि हैं। क्योंकि आज तक हमारा किसी भि तरह कां लेनदेन किसी विदेशी सें नहि हुआ औऱ जबकोई लेनदेन हि नहि हुआ किसी विदेशी सें तोँ किसीतरह कि रंजिश केँ तहत किसी फाॅरेनर कां यहसभी करने कां प्रश्न हि पैदा नहि होता। अब सोचने वालीबात हैं कि जब हमारा किसी विदेशी सें कोई ब्यौसायिक संबंध हि नहि थां तौ कोई विदेशी किसवजह सें हमारे संग इतनी बड़ी साजिश करके हमें धोखा देगा अथवा हमारा इतना बड़ा नुकसान करेगा?"
"तुम्हारा तर्क बिलकुल दुरुस्त हैं अजय। " सक्सेना सोचपूर्ण भाव केँ संग बोला__"फिन तौ यकीनन यहकाम किसीऐसे ब्यक्ति कां हैं जोँ तुम्हें अच्छी तरह जानता भि हैं औऱ तुम्हारा बुरा भि चाहता हैं। कौन होँ सकता हैं ऐसा ब्यक्ति?"
"यही तौ सोचरहा हूॅ सक्सेना। " अजय सिंह बोला__"मगर जेहन मे ऐसे किसी ब्यक्ति कां चेहरा नहि आँ रहा। "
"यह काम तुम्हारे किसी कम्पटीटर कां हि हौ सकता हैं। " सक्सेना नें कहा__"यह एक् ब्यौसायिक मामला हैं अजय। ब्यौसाय सें जुड़े तुम्हारे किसी कम्पटीटर नें हि इसकाम कों अंजाम दिया होँ सकता हैं, जिनके बारे मे फिलहाल तुम् ठीक सें सोच नहि पारहे होँ। इसलिए अच्छी तरह सोचो कि यह किसने किया होँ सकता हैं?"
"मुझे तोँ कुछ औऱ हि लगता हैं सक्सेना। " अजय सिंह नें सोचपूर्ण भाव सें कहा__"यह काम मेरे किसी कम्पटीटर कां भि नहि हैं क्योकि इन सबसे मेरे बहोत अच्छे संबंध हें। "
"यह क्याँ कहरहे हौ तुम्?" सक्सेना चौंका__"अगर यहसभी तुम्हारे किसी कम्पटीटर कां नहि हैं तोँ फिन किसका हैं? कहीं तुम् इन सबकेलिए मुझे तौ नहि जिम्मेदार ठहरारहे होँ?"
"हाॅयह भि हौ सकता हैं सक्सेना। " अजय सिंह नें सपाट लहजे मे कहा__"इस सभी मे सबसे पहले उॅगली तौ तुम् पऱ हि उठेगी। आख़िरकार तुम् मेरे बिजनेस पाटनर होँ"
"क्याँ मेरे बारे मे तुम् ऐसा सोचते होँ कि मे अपने घनिष्ठ साथी केँ संगऐसा नीचकाम करूॅगा?" सक्सेना नें कहा__"तुम् मेरे बारे मे अच्छी तरह जानते होँ अजय कि मे ऐसा किसी केँ भि संग नहि कर सकता। मेरी फितरत इसतरह किसी कों धोखा देने कि नहि हैं। "
"रुपये पैसे केँ लिएकोई भि ब्यक्ति किसी केँ भि संगकुछ भि कर सकता हैं सक्सेना। " अजय सिंह नें अजीबभाव सें कहा__"मे तुम् पऱ कोई इल्ज़ाम नहि लगारहा मगरइस तरह कां प्रश्न तौ खड़ा होगा हि। कानून कां कोई भि नुमाइंदा तुमसे यह प्रश्न कर सकता हैं कि तुम् अचानक हि अजय सिंह सें पार्टनशिप तोड़कर तथा अपना हिसाब पुस्तक करके हमेशा केँ लिए विदेश क्यूं जारहे हौ जबकि हाल हि मे अजय सिंह केँ संगऐसा संगीन वाक्या हौ गय़ा?"
"तुम् तोँ मुझ पऱ साफसाफ इल्जाम लगाते हुए कानून केँ लपेटे मे डालने कि बातकर रहे होँ अजय सिंह। " सक्सेना दुखीभाव सें बोला__"जबकि ईश्वर जानता हैं कि मैंने ऐसाकुछ भि नहि किया। "
"ईश्वर तोँ सबके विषय मे सभी जानता हैं सक्सेना। " अजय सिंह नें कहा__"मगर इंसान नहि जानता। इंसान तौ वही जानता हैं जोँ उसे याँ तोँ नज़रआता हैं याँ फिन जोँ समझआता हैं। आज जौ हालात बने हें उससेसाफ तौर पर्र यहीसमझ आता हैं कि यहसभी तुम्हारे अलावा दूसरा कौन औऱ क्यूं कर सकता हैं भला?"
अरविन्द सक्सेना मूर्खों कि तरह देखता रह गय़ा अजय सिंह कों। उसके चेहरे पर्र ऐसेभाव थें जैसे कि वो अभि अपनेसिर केँ बाल नोंचने लगेगा।
"मुझेसमझ नहि आँ रहाअजय सिंह कि मे तुम्हें केसेइस बात कां यकीन दिलाऊॅ?" सक्सेना असहाय भाव सें बोला__"कि यहसभी मे करने केँ बारे मे सोच तक नहि सकता। तुम् जानते हौ हम् दोनोऐसे हें कि एक् दूसरे कां सभीकुछ जानते हें। हम् दोनों केँ संबंध तौ ऐसे हें कि हम् अपनी अपनी बीवियों कों भि आपस मे बाॅट लेते हें। क्याँ कोई इतना भि घनिष्ठ यार हौ सकता हैं किसी कां? जिसके संगऐसे संबंध हों वोँ भला अपनेयार कां इतना बड़ा अहित केसेकर देगा दोस्त?"
"तुम् तौ दोस्त एक् दम सें सीरियस हि होँ गए सक्सेना। " अजय सिंह नें मुस्कुराते हुए कहा__"मे तौ बस एक् तर्कसंगत बातकह रहा थां कि इस वाक्ये केँ बाद किसी भि ब्यक्ति केँ मन मे सबसे पहलेयही विचार उठेगा जौ अभि मैने तर्क केँ द्वारा कहा थां। "
"तुम् मुझेजान सें मारदो अजय सिंह मुझे ज़रा भि फर्क नहि पड़ेगा मगरऐसे इल्जाम लगाकर मारोगे तोँ मे मरकर भि कहीं सुकून नहि पाऊॅगा। " सक्सेना नें कहा।
"छोड़ो इसबात कों औऱ यह बताओ कि विदेश कबजारहे होँ?" अजय सिंह नें पूछा।
"दो दिनबाद। " सक्सेना नें कहा__"कल तक यहाॅ केँ सारे करोबार कां पैसा मेरे एकाउंट मे आँ जाएगा औऱ परसों यहाॅ सें निकल जाऊॅगा। मगर.। "
"मगर.??" अजय सिंह नें पूछा।
"मगर उससे पहले मे चाहता हूॅ कि। " सक्सेना नें कहा__"हम् लोगों कां एक् शानदार प्रोग्राम होँ जाए। "
"जाने सें पहले मेरी पत्नि केँ मजे लेना चाहते हौ। " अजय सिंह हॅसा।
"हाॅ तोँ बदले मे तुम्हें भि तोँ मेरी पत्नि सें मजे लेना हैं। " सक्सेना नें भि हॅसते हुए कहा__"औऱ वैसे भि मेरी पत्नि तोँ रातदिन तुम्हारा हि नाम जपती रहती हैं। पता नहि क्याँ चमत्कार कर दिया हैं तुमने? साली मुझे बड़ी मुश्किल सें हाॅथ लगाने देती हैं। "
"अच्छा ऐसा क्याँ?" अजय सिंह जोरों सें हॅसा।
"हाॅ दोस्त। " सक्सेना बोला__"औऱ पता हैं विदेश जाने केँ लिए तोँ मान हि नहि रही थि वोँ। जब मैनेउसे यहकहा कि तुम् हर महीने हमसे मिलने तथा मस्ती करने आओगेतब कहीं जाकर मानी थि वोँ। "
"मतलब कि अब मुझेहर महीने तुम्हारे पासइस सबकेलिए आनां पड़ेगा?"अजय सिंह मुस्कुराया।
"हाॅ बिलकुल। " सक्सेना नें कहा__"औऱ वोँ भि भाभीजी केँ संग। "
"सोचना पड़ेगा सक्सेना। " अजय सिंह बोला__"औऱ वैसे भि अभि मेरेपास मात्र एक् हि अहमकाम हैं, औऱ वोँ हैं उन लोगों कां पता लगाना जिनकी वजह सें आज मुझे करोड़ों कां नुकसान हुआ हैं तथा मेरी इज्ज़त कि धज्जियाॅ उड़ी हें। "
"हाॅयह तोँ हैं। " सक्सेना नें कहा__"अगर कभी मेरी ज़रूरत पड़े तौ बेझिझक याद करनाअजय, तुम्हारे एक् बार केँ कहने पऱ मे तुम्हारे पास आँ जाऊॅगा। "
"ठीक हैं सक्सेना। " अजय सिंह बोला__"कल तक मे तुम्हारा हिसाब पुस्तक करके तुम्हारे एकाउंट मे पैसेडाल दूॅगा। "
ऐसी हि कुछ औऱ औपचारिक बातों केँ बाद सक्सेना वहाॅ सें चला गय़ा। जबकि अजय सिंहयह न् देखसका कि जाते टाइम सक्सेना केँ होठों पर्र कितनी जानदार मुस्कान थि?
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,
आपकेइस हसीन कमेंट केँ लिए धन्यवाद भइया,,,, आपको मेरी किस्सा मनपसंद आईयह मेरेलिए ख़ुशी कि बात हैं। अपनीराय औऱ सुझाव भि देते रहें,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 10 》
अब तक.
"सोचना पड़ेगा सक्सेना। " अजय सिंह बोला__"औऱ वैसे भि अभि मेरेपास केवल एक् हि अहमकाम हैं, औऱ वोँ हैं उन लोगों कां पता लगाना जिनकी वजह सें आज मुझे करोड़ों कां नुकसान हुआ हैं तथा मेरी इज्ज़त कि धज्जियाॅ उड़ी हें। "
"हाॅयह तौ हैं। " सक्सेना नें कहा__"अगर कभी मेरी ज़रूरत पड़े तौ बेझिझक याद करनाअजय, तुम्हारे एक् बार केँ कहने पर्र मे तुम्हारे पास आँ जाऊॅगा। "
"ठीक हैं सक्सेना। " अजय सिंह बोला__"कल तक मे तुम्हारा हिसाब पुस्तक करके तुम्हारे एकाउंट मे पैसेडाल दूॅगा। "
ऐसी हि कुछ औऱ औपचारिक बातों केँ बाद सक्सेना वहाॅ सें चला गय़ा। जबकि अजय सिंहयह न् देखसका कि जाते टाइम सक्सेना केँ होठों पर्र कितनी जानदार मुस्कान थि?
अबआगे.
"यहसभी क्याँ हैं डैड?" शिवा ड्राइंग रूम मे दाखिल होतेहुए तथा उत्तेजित सें स्वर मे बोला__"देखिए आज केँ अख़बार मे क्याँ ख़बरछपी हैं?"
"क्याँ हुआ बेटे?" सोफे पऱ बैठेअजय सिंह नें सहसा चौंकते हुए पूॅछा__"कैसी ख़बर कि बातकर रहे होँ तुम्?"
"आप् स्वयं हि देख लीजिए डैड। " शिवा नें अपने हाॅथ मे लिए अख़बार कों अपने पिता कि तरफ एक् झटके सें बढ़ाते हुए कहा__"देख लीजिए कि किसतरह अख़बार वालों नें आपकी इज्ज़त कि धज्जियाॅ उड़ाई हें?"
अजय सिंह शिवा केँ हाॅथ सें अख़बार लेने केँ बादउस पर्र नज़रें दौड़ाई। अख़बार केँ फ्रंट पेज पर्र हि बड़े अच्छरों मे छपी हेडलाइन कों पढ़कर उसकेहोश उड़गए। अख़बार मे छपी हेडलाइन कुछइस प्रकार कि थि।
"मशहूर बिज़नेसमैन अजय सिंह किसी अग्यात व्यक्ति द्वारा धोखे कां शिकार"
हल्दीपुर(गुनगुन): शहर केँ मशहूर बिज़नेसमैन अजय सिंह कों किसी अग्यात ब्यक्ति द्वारा करोड़ों रुपये कां चूना लगाने कां संगीन मामला सामने आया हैं। प्राप्त सूत्रों केँ अनुसार यह जानकारी मिली हैं कि मशहूर बिज़नेसमैन अजय सिंह किसी विदेशी ब्यक्ति केँ संग पिछले महीने करोड़ों रुपये कि डील कि थि। उसडील केँ तहतअजय सिंह द्वारा विदेशी ब्यक्ति कों करोड़ों रुपये केँ बेहतरीन कपड़ों केँ थान सौंपे जाने थें। लेकिन पिछले दिन हि साम कों अजय सिंह केँ पीए कों यहपता चला कि उनकाजिस विदेशी ब्यक्ति केँ संग करोड़ों कां सौदाहुआ थां वोँ दरअसल सिरे सें हि फर्ज़ी थां। कहने कां मतलबयह कि विदेशी ब्यक्ति नें करोड़ों केँ कपड़े सजधजकर करवाए औऱ उन कपड़ों केँ थान कों लेने कि बजाय बिनाकुछ बताए लापता होँ गय़ा। मिली जानकारी केँ अनुसार विदेशी ब्यक्ति नें स्वयं कों दूसरे देश कां मशहूर बिज़नेसमैन बताया जिसके सबूत केँ तौर पर्र स्वयं अजय सिंह द्वारा उस विदेशी ब्यक्ति कि कंपनी प्रोफाइल भि देखी गई थि। विश्वस्त सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी केँ अनुसार अजय सिंह कों करोड़ों रूपये केँ धोखे कां पतातब चलाजब उनकी फैक्ट्री मे रेडी कपड़ों कां करोड़ों रुपये केँ थान जिनमें औऱ भि बहोत सि चीज़ें शामिल थि डील केँ लिए रेडी थां। लेकिन उससभी कों लेने वाला विदेशी नदारद थां। उसकेसंग कंटैक्ट करने कि सारी कोशिशें जब नाकाम होँ गईं औऱ जबदोदिन तक भि विदेशी डीलर कां पता नं चला तौ तबअजय सिंह कों समझआया कि उनकेसंग कोईगेम खेल गय़ा। मगरअब होँ भि क्याँ सकता थां? मिली जानकारी केँ अनुसार अजय सिंह कि फैक्ट्री सें सजधजकर करोड़ों कि थान कां अबकोई लेनदार न् होने कि वजह सें भारी नुकसान हुआ हैं। यह विचार करने योग्य बात हैं कि विदेशी व्यवसायी केँ संग ब्यौसायिक संबंध बनाने केँ चक्कर मे अजय सिंह जैसे पढ़े लिखेव सुलझे हुए बिज़नेसमैन बिना सोचे समझे करोड़ों कि डील करके स्वयं कां नुकसान कर बैठे। कदाचित् बाहरी मुल्कों सें ब्यौसायिक संबंध बनाने केँ लालच मे हि इतने बड़े धोखे औऱ नुकसान केँ भागीदार बन बैठे।
अख़बार मे छपीइस ख़बर कों पढ़कर अजय सिंह कां दिमाग़ सुन्न सां पड़ गय़ा थां। उसेसमझ नहि आया कि यहबात अख़बार वालों कों किसने बताया होँ सकता हैं? बहुतदेर तक अजय सिंह केँ मन केँ घोड़े इसबात कि खोज मे भटकते रहे।
"किस सोच मे पड़गए डैड?" सहसा शिवा नें पिता कि तरफगौर सें देखते हुए कहा__"औऱ यहसभी आख़िर हैं क्याँ ? अख़बार मे छपीइस ख़बर कां क्याँ मतलब हैं डैड??
अजय सिंह कों समझ नं आया कि अपने बेटे कों क्याँ जवाबदे। फिनपता नहि जाने क्याँ सोचकर उसने अपनाफोन निकाला औऱ किसी कों मोबाइल लगाकर फोनकान सें लगा लिया।
कुछ देर कानों मे रिंग जाने कि आवाज़ सुनाई देतीरही फिनउधर सें काल रिसीव कि गई।
"यहसभी क्याँ हैं दीनदयाल?" काल रिसीव होते हि अजय सिंह करीब आवेश मे बोला__"आज केँ अख़बार मे हमारे संबंध मे यह क्याँ बकवास छापा हैं अख़बार वालों नें??"
"--------------"उधर सें जाने क्याँ कहा गय़ा।
"हम् कुछ नहि सुनना चाहते। " अजय सिंह पूर्वत आवेश मे हि बोला__"आख़िर इसबात कि ख़बर अख़बार वालों कों किसने दि?"
"_________________"
"अरे तोँ पता लगाओ दीनदयाल। " अजय सिंह नें कहा__"अख़बार वालों कों क्याँ कोई ख़्वाब चमका हैं जोँ उन्हें इस बारे मे यहसभी पताचला?"
"_______________"
"वही तोँ कहरहे हें हम् दीन केँ दयाल। "अजय सिंह बोला__"अख़बार वालों कों यह ख़बर देने वालावही हैं जिसने इस साजिश कों रचकरइसे अंजाम दिया हैं। तुम् जल्द सें जल्दपता लगाओ कि कौन हैं यह नामुराद जोँ हमारी इज्ज़त कि धज्जियाॅ उड़ाने पऱ तुलाहुआ हैं?"
"_______________"
"हम् कुछ नहि जानते दीनदयाल। " अजय सिंहइस बार गुर्राया__"24 घंटे केँ अंदरउस आदमी कों ढूॅढ़ कर हमारे सामने हाज़िर करो। वर्ना तुम्हारे लिए अच्छा नहि होगा। "
इतना कहने केँ बादअजय सिंह नें मोबाइल काटकर फोन कों सोफे पर्र करीब-करीब फेंक दिया थां। इससमय अजय सिंह केँ चेहरे पऱ गुस्स औऱ अपमान कां मिला जुलाभाव गर्दिश करता नज़र आँ रहा थां।
"क्याँ बात हैं डैड?" शिवा अपने पिता केँ चेहरे केँ भावों कों गौर सें देखते हुए बोला__"आप् कुछ परेशान सें लगरहे हैं?"
"अभि हम् किसी सें बात करने केँ मूड मे नहि हें बेटे। "अजय सिंह नें अजीब लहजे मे कहा__"इस लिए तुम् जाओ यहाॅ सें, हमेंकुछ देर अकेले मे रहना हैं। "
शिवा पूछना तौ बहोत कुछ चाहता थां लेकिन अपने पिता कां खराबमूड देखकर चुपचाप वहाॅ सें अपने कमरे कि तरफबढ़ गय़ा।
"बेटे कों तौ टाल दिया आपने। " सहसा प्रतिमा नें ड्राइंगरूम मे आतेहुए कहा__"मगर मुझेइस तरहटाल नहि सकते आप्। "
"प्रतिमा प्लीज़। " अजय सिंह नें झ़ुझलाते हुए कहा__"मे इस टाइम किसी सें कोईबात नहि करना चाहता। "
"यह तोँ कोईबात न् हुई। " प्रतिमा नें कहा__"किसी बात कों लेकरअगर आप् परेशान हें तौ आपको देखकर हम् सभी भि परेशान हौ जाएंगे। इसलिए जोँ भि बात हैं बता दीजिए कम सें कममन कों शान्ति तौ मिलेगी। "
अजय सिंह जानता थां कि प्रतिमा बात कों बिना जाने नहि मानेगी, इसलिए उसनेउसे सबकुछ बता देना हि बेहतर समझा। एक् गहरी साॅस लेकर उसने प्रतिमा कों सारी बातें बता दि जौ पिछले महीने सें अब तक उसकेसंग हुआ थां। सभीकुछ जानने केँ बाद प्रतिमा भि गंभीर हौ गई।
"मगर आप् यह केसेपता लगाएंगे कि किसने आपकेसंग यहसभी किया हैं?" प्रतिमा नें कहा__"जबकि आपकेपास उसके बारे मे कोई सबूत नहि हैं। अगर आप् यह समझते हें कि उनके चेहरे कि बिना पऱ उन्हें खोजेंगे तोँ तब भि आप् उन्हें नहि खोज पाएंगे। "
"तुम् ऐसा केसेकह सकती होँ भला?"अजय सिंह चौंकते हुए बोला थां।
"सीधी सि बात हैं। " प्रतिमा नें कहा__"वोँ जोँ भि थें आपसे याँ आपकेपीए सें हमेशा फाॅरेनर कि वेशभूसा याँ शक्ल मे हि मिले थें। मतलबसाफ हैं कि वोँ लोग शुरुआत सें हि आपसे याँ आपकेपीए सें अपनी असलियत छुपाना चाहरहे थें, यह भि कि आपकोतथा आपकेपीए कों उनके बारे मे ज़रा सां भि किसी प्रकार कां शक नं होँ। आजयहआलम हैं कि वोँ अपने मकसद मे उसीतरह कामयाब होँ कर गायब हौ गए जैसा उन्होंने कर गुज़रने कां प्लान बनाया रहा होगा। "
अजय सिंह अपनी पत्नि कि इसबात कों सुनकर अवाक् सां रह गय़ा। प्रतिमा कों इसतरह देखने लगा थां वो जैसे प्रतिमा कि गर्दन अपनेधड़ सें अलग होँ करहवा मे कत्थक करनेलगी होँ।
"क्याँ मैंने कुछ ग़लतकहा डियर?" प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए पूछा।
"कभी कभी तुम्हारा दिमाग़ भि किसीसफल जासूस कि तरह चलता हैं। " अजय सिंह बोला__"यकीनन तुम्हारा यह तर्क अपनी स्थान एक् दम दुरुस्त हैं। तुम्हारी बातों मे वजन हैं, औऱ अगर तुम्हारी इसबात केँ अनुसार सोचाजाए तौ अब हमारे लिएयह बेहद मुश्किल काम हैं उन लोगों कों ढूॅढ़ पाना। "
"वकालत कि पढ़ाई आपने हि नहि बल्कि मैंने भि कि हैं जनाब। " प्रतिमा नें हॅसकर कहा__"यह अलगबात हैं कि मैंने इस पढ़ाई केँ बाद वकीलबन कर किसी कोर्ट मे किसी केँ पक्ष मे वकालत नहि कि। "
"अच्छा हि किया न्। " अजय सिंह नें भि हॅसकर कहा__"वर्ना बड़े बड़े वकीलों कि छुट्टी हौ जाती। "
"ऐसा आप् कह सकते हें। " प्रतिमा नें अर्थपूर्ण लहजे मे कहा__"क्योंकि आपको हि अपनी छुट्टी होँ जाने कां अंदेशा हुआ नज़रआया हैं। "
"तुम् ऐसा सोचती हौ तौ चलोऐसा हि सही। "अजय सिंह बोला__"मगर इस बारे मे अब तुम्हारा क्याँ खयाल हैं, मेरा मतलब कि अब हम् केसेउन लोगों कां पता लगाएंगे?"
"सभीकुछ बहोत सोचसमझ कर पहले सें हि प्लान बना लिया थां उन लोगों नें। " प्रतिमा नें सोचने वालेभाव सें कहा__"इस लिएइस बारे मे पक्के तौर पऱ कुछकहा नहि जा सकता कि वोँ हमारे द्वारा पताकर हि लिए जाएंगे। "
अजय सिंह कां खयाल भि यही थां इसलिए कुछ बोला नहि वो। जबकि,,,,
"वैसे आपका अपनेउस भतीजे केँ बारे मे क्याँ खयाल हैं?" प्रतिमा नें कहा__"हौ सकता हैं यहसभी उसी कां कियाधरा हौ?"
"नहि दोस्त। " अजय सिंहकह उठा__"उससे इससभी कि उम्मीद मे नहि करता। क्योंकि जिसतरह सें सोचसमझ करतथा प्लान बनाकर हमसे धोखा किया गय़ा हैं वैसा करना विराज केँ बस कां रोग़ नहि हैं। वोँ साला तौ किसी होटल याँ ढाबे मे अपनेसंग संग अपनीमाॅ बेहन कों भि कप प्लेट धोने केँ काम मे लगा दिया होगा। इतनाकुछ करने केँ लिए दिमाग़ चाहिए औऱ फाॅरेनर लुक पाने केँ लिएढेर सारा रुपया जोँ उसकेपास होने कां कोई चान्स हि नहि हैं। तुम् बेवजह हि इस सबके पीछे उसको हि जिम्मेदार ठहरारही हौ प्रतिमा। "
"हमेंहर पहलू पऱ गौर करना चाहिए डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा नें कहा__"एक् अच्छा इन्वेस्टिगेटर वही होता हैं जोँ हर पहलू केँ बारे मे सोच विचार करे। ज़रा सोचिए.इस तरह कि घटनाएं तभी सें शुरुआत हुईं हें जबसे विराज अपनेसंग अपनीमाॅ बेहन कों लेकर यहाॅ सें मुम्बई गय़ा हैं। इसके पहलेआज तक कभी भि ऐसीकोई बात नहि हुईँ। उसका हमारे बेटे कों बुरीतरह मार पीटकर यहाॅ सें जानां, ट्रेन सें अपनीमाॅ बेहन सहित रहस्यमय तरीके सें गायब हौ जानां, औऱ अब यह.आपका किसी केँ द्वारा इसतरह धोखाखा कर नुकसान होँ जानां। यह तोँ आपको भि पता हैं कि कोई दूसरा आपकेसंग ऐसा नहि कर सकताफिन बचताकौन हैं??"
अजय सिंह केँ दिलो दिमाग़ मे अचानक हि मानो धमाके सें होनेलगे। प्रतिमा द्वारा कहा गय़ा एक् एक् शब्द उसके मनमस्तिष्क पऱ गहरी चोंटकर रहा थां। जबकि.
"वर्तमान टाइम मे अगरकोई आपके खिलाफ खड़ा होँ सकता हैं तोँ वोँ हैं विराज। " प्रतिमा गंभीरता सें कहरही थि__"आपसे जिसे सबसे ज़्यादा तक़लीफ हैं तोँ वोँ हैं विराज। बात भि सही हैं डियर हस्बैण्ड.हमने उनकेसंग क्याँ क्याँ बुरा नहि किया। हर दुख दिये उन्हें, यहां तक कि हमारी वजह सें आज वोँ अपने हि घऱ सें बेघर हें। ख़ैर.इन सभी बातों केँ कहने कां मतलबयही हैं कि मौजूदा हालात मे इस सबके पीछेअगर किसी पर्र सबसे अधिक उॅगली उठती हैं तौ केवल विराज पर्र। "
अजय सिंह केँ पास कहने केँ लिए जैसेकुछ थां हि नहि, जबकि उसकी खामोशी औऱ उसके चेहरे पऱ तैरते हज़ारों भावों कों बारीकी सें परखते हुए प्रतिमा नें पुन: कहा__"आप् हमेशा इसबात पर्र ज़ोर देते हें कि विराज मुम्बई मे किसी होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट धोता होगा औऱ अब अपनीमाॅ बेहन कों भि इसीकाम मे लगा दिया होगा। मगर क्याँ आपकेपास अपकीइस बात कां ठोस सबूत हैं? क्याँ आपनेकभी अपनी आॅखों सें देखा हैं कि विराज मुम्बई मे किसी होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट धोने कां काम करता हैं.नहि न्?? बल्कि यह मात्र आपकी अपनीसोच हैं जोँ ग़लत भि होँ सकती हैं। "
"तुमने तोँ दोस्त मेरा ब्रेन वाश हि कर दिया। "अजय सिंह गहरी साॅसली, उसकी आॅखों मे अपनी पत्नि केँ प्रति प्रसंसा केँ भाव थें__"यकीनन तुममें एक् अच्छे इन्वेस्टिगेटर होने केँ गुण हें। तौ तुम्हारे मतानुसार यहसभी जोँ कुछहुआ हैं उसका जिम्मेदार केवल विराज हैं?"
"मैयह नहि कहती डियर हस्बैण्ड कि यहसभी विराज नें हि किया हैं। " प्रतिमा नें अजीबभाव सें कहा__"बल्कि मे तौ केवल संभावना ब्यक्त कररही हूॅ कि किसने क्याँ किया होँ सकता हैं। पक्के तौर पऱ तौ तभीकहा जाता हैं न् जब हमारे पास किसीबात कां ठोसव पुख्ता सबूत होँ??"
"आई एग्री विदयू माँ डियर। "अजय नें मुस्कुराते हुए कहा__"तौ हम् अबइस थ्योरी केँ संग चलेंगे कि यहसभी विराज नें किया हौ सकता हैं। मगरअब प्रश्न यह हैं कि.केसे?? इतनाकुछ वोँ केसेकर सकता हैं भला जबकि इतनाकुछ कर गुजरने कि काबिलियत उसमे हैं हि नहि इतना तौ मुझे यकीन हैं?"
"आपकायह यकीन बेमतलब भि तौ हौ सकता हैं डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा नें तर्क किया__"क्योकि आपकेपास अपनेइस यकीन कि भि ठोसवजह नहि हैं यह मुझेपता हैं। "
"अबबस भि करो दोस्त। " अजय सिंह नें बुरा सां मुॅह बनाया__"आज क्याँ मूॅग कि दाल मे भीमसेनी काजल मिलाकर खाया हैं तुमने? मेरीहर बात कि हर विचार कि धज्जियाॅ उड़ाए जारही होँ तुम्। "
"मेराऐसा करने कां कोई इरादा नहि थां डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा मुस्कुराई__"मैने तौ बस अपने विचार औऱ तर्कपेश किये हें, औऱ अपने डियर हस्बैण्ड कों सहीराह कि तरफ जाने कां रास्ता बताने कि कोशिश कि हैं। "
अजय सिंह कों प्रतिमा पर्र बेहद प्रेम आया, औऱ उसनेआगे बढ़कर अपनी पत्नि कों अपनी बाॅहों मे भर लिया। कुछ समय उसकी आॅखों मे झाॅकने केँ बाद उसनेझुक कर प्रतिमा केँ रसभरे अधरों कों अपने होठों केँ बीचभर कर उन्हें चूमने चूसने लगा।
प्रतिमा केँ शरीर मे मजा कि मीठी मीठी लहरें तैरने लगी। उसने भि अपने दोनो हाॅथअजय सिंह केँ गले मे डालकर इन होठों केँ चुंबन तथा चुसाई कां भरपूर मजा लेनेलगी। वे दोनोभूल गये कि इस टाइमवे अपने बेडरूम मे नहि बल्कि ड्राइंगरूम मे हें जहाॅ पर्र किसी केँ भि द्वारा देखलिए जाने कां खतरा थां।
अजय सिंह बुरीतरह प्रतिमा केँ होठों कों चूसरहा थां। उसका बाॅया हाॅथ सरकते हुए सीथा प्रतिमा केँ दाॅएं बोबे पर्र आकर बड़े आकार केँ बोबे कों सख्ती सें अपनी मुट्ठी मे भरकर मसलना शुरुआत कर दिया। अपनी चूॅची कों इसतरह मसले जाने सें प्रतिमा केँ मुॅह सें एक् दर्दयुक्त लेकिन खुशी सें भरी हुइ अहह निकल गई जोँ अजय सिंह केँ होठों केँ बीच हि दबकररह गई। यह दोनों जैसेसभी कुछभूल चुके थें, यह भि कि अपने कमरे सें ड्राइंगरूम कि तरफआता हुआ उनका बेटा शिवा अपने माॅमडैड कों इस हालत मे देखकर भि वापस नहि पलटा थां बल्कि वहीं छुपकर इस नज़ारे कां मजा लेनेलगा थां। उसके होठों पर्र बेशर्मी सें भरी मुस्कान तैरने लगी थि तथासंग हि अपने दाएॅहाथ सें पैन्ट केँ ऊपर सें हि सहीमगर अपने लौड़े कों मसले भि जारहा थां।
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दोस्तो आपके सामने एपसोड हाज़िर हैं,,,,,
आप् सबकी बेक़रारी कों देखकर मैंने आजभाग लिखने कि कोशिश कि, यहअलग बात हैं कि बारबार नींद कि वजह सें परेशान भि होना पड़ा। मगर आपके प्रेम केँ लिएकुछ तौ करना हि थां आज।
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इंतजार रहेगा,,,,,
Superbb Awesome. Mind blowing update. Ajay singh kee biwi too badi intelligent h bro mgr i know koy fayda nahee hone wala. Viraj kaa revenge shuru hu gyaa h dekhte haen aage kya hotha h?? Waiting for next update bro
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhay jabardast update he yeh too। Jaha ajay pareshan dikh raha he vahi moorti sant he और har us pehlu से iss waqia ko dekh rahi he joo की possible he। moorti की bato से lagta he की woh bi dill ❤️ dill ❤️ mai manti he की unhone viraj और usaki family के sath बहुत hi galt किया he लेकिन apne shauhar की wajah से khamosh he। or yeh bi lagta he moorti की बात sunane की अगर woh ajay के pyaar mai na padti too shayad एक बहुत hi badi vakeel hoty। or क्या ptaa iss बात kaa ajay ko pahle से hi guman hu gya hu और तभी usane moorti ko apne pyaar mai fasaya hu। or siva kaa apne ma baap की romance karte देखना और apne loda ko sehlane से hi ptaa chl jata he की woh kitna बड़ा kamina he.
Waiting 4 next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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